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स्पिरिचुअल एण्ड वेलनेस समिट 2025 उज्जैन में विषय विशेषज्ञों ने की पर्यटन,आध्यात्म एवं वेलनेस के क्षेत्र में निवेश संभावनाओं पर सार्थक चर्चा

मध्यप्रदेश की टूरिज्म पॉलिसी निवेशकों के अनुकुल है:- प्रमुख सचिवशुक्ला — दुनिया में हेल्थ एण्ड वेलनेस बहुत बड़ा सेक्टर है:- राघवेन्द्र कुमार सिंह — स्पिरिचुअल एण्ड वेलनेस समिट 2025 उज्जैन में विषय विशेषज्ञों ने की पर्यटन,आध्यात्म एवं वेलनेस के क्षेत्र में निवेश संभावनाओं पर सार्थक चर्चा उज्जैन  मध्यप्रदेश की टूरिज्म पॉलिसी एवं वातावरण निवेशकों के अनुकूल है। उज्जैन नगरी हार्ट ऑफ स्पिरिचुअल इंडिया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव व प्रदेश सरकार द्वारा टूरिज्म पॉलिसी 2025 लागू की गई है। इसके तहत 10 से 30  प्रकार की अनुमतियां ऑनलाईन समय सीमा में उपलब्ध कराई जा रही है। पर्यटन के क्षेत्र में हॉटल, रिर्जाट, और अन्य प्रकार की पर्यटन सुविधाऐं उपलब्ध कराने के लिए पूंजी निवेश पर 15 से 30 प्रतिशत का अनुदान शासन द्वारा प्रदान किया जा रहा है। निवेशक स्पिरिचुअल एवं वेलनेस के क्षेत्र में निवेश के लिए आगे आए, उन्हें शासन द्वारा हर संभव सुविधाऐं उपलब्ध कराई जाऐगी। यह बात प्रमुख सचिव पर्यटन शिव शेखर शुक्ला ने गुरूवार को उज्जैन में आयोजित स्पिरिचुअल एण्ड वेलनेस समिट 2025 में पैनल डिस्कशन सत्र को संबोधित करते हुए कही।     मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम, मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम एवं आनंद विभाग के संयुक्त तत्वावधान में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस स्पिरिचुअल एण्ड वेलनेस समिट 2025 के दौरान दो सत्रों में पैनल डिस्कशन आयोजित किए गए, जिसमें विषय विशेषज्ञों ने सार्थक चर्चा की। प्रथम सत्र के पैनल डिस्कशन में योगा निसर्ग एण्ड वैदिक योगा स्कुल के संस्थापक स्वामी चैतन्य हरी जी, एवीएन ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ रमेश वारियर, अपोलो आयुर्वेद पोजेक्ट लीडर डॉ मेघा केएल, लाईसॉर होटल्स के डायरेक्टर मुकुन्द प्रसाद, इकोनोमिक्स टाईम्स की एडिटर सुदीपशिखा, प्रमुख सचिव पर्यटन शिव शेखर शुक्ला, प्रमुख सचिव औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन तथा आनंद विभाग राघवेन्द्र कुमार सिंह ने भाग लिया।     प्रथम सत्र के पैनल डिस्कशन में प्रमुख सचिव राघवेन्द्र कुमार सिंह ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि दुनिया में हेल्थ एवं वेलनेस सेक्टर बहुत बड़ा सेक्टर है। देश में मध्यप्रदेश ही एकमात्र राज्य है जहां आनंद विभाग है। उज्जैन आध्‍यात्मिक कला, संस्कृति एवं विज्ञान के क्षेत्र में प्राचीन काल से ही पहचाना जाता रहा है। प्रशासनिक क्षेत्र में भी सम्राट विक्रमादित्य ने इस नगरी को विशेष पहचान दिलाई है। यह आध्यात्मिकता एवं वेलनेस का केन्द्र है। प्रमुख सचिव राघवेन्द्र कुमार सिंह ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मध्यप्रदेश हमेशा नवाचारों के लिए जाना जाता है। उन्होंने निवेशकों से कहा कि आपके सुझावों पर अमल किया जाएगा।     कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने अपने उद्बोधन में सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए आध्यात्मिक नगरी उज्जैन में किए जा रहे व्यापक विकास एवं निर्माण कार्यों और तैयारियों के बारें में प्रजेंटेशन के माध्यम से विस्तार से अवगत कराया। और उज्जैन के समग्र विकास के लिए कार्ययोजना पर प्रकाश डाला। उन्होनें कहा कि उज्जैन में सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए सुगम आवागमन की सुविधाऐं उपलब्ध कराई जा रही है। सदावल में 4 हेलिपेड का निर्माण कार्य जारी है, क्षिप्रा नदी को अविरल प्रवाहमान बनाने के लिए कान्ह डायवर्सन क्लॉज डक्ट परियोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है, सेवरखेडी सिलारखेडी बैराज परियोजना का कार्य भी तेज गति से जारी है। क्षिप्रा नदी पर दोनो ओर 29 कि.मी नए घाट बनाए जा रहे है। सिंहस्थ मेला क्षेत्र में 2,376 हेक्टेयर में नगर विकास योजना पर कार्य किया जा रहा है। सड़क ,सीवरेज, पेयजल, बिजली आदि स्थाई स्वरूप की बुनियादी सुविधाओं के विकास एवं विस्तार पर विशेष तौर पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने निवेशको से आवाह्न किया कि वे उज्जैन को स्पिरिचुअल सेंटर एवं वेलनेस सेंटर का हब बनाने के लिए निवेश के लिए आगे आए।           बिल्डींग वेलनेस इकोसिस्टम एण्ड वर्क फोर्स विषय पर दूसरे सत्र के पैनल डिस्कशन में प्रमुख सचिव संदीप यादव, वीपी कैरली आयुर्वेदिक ग्रुप की सुमोना वालिया, तिरुपत‍ि एस्टेट्स के डायरेक्टर महेश पारयानी ,आईआईएम इंदौर के डायरेक्टर हिमांशु राय , ताईवान इंडिया आर्युवेद ऐसोसिएशन के सहसंस्थापक शुभम अग्निहोत्री , स्पोर्टस फिटनेस कोच विजय ठक्कर, आयुष मंत्रालय भारत सरकार की संयुक्त सचिव सुकविता गर्ग , इकोनॉमिक्स टाईम्स के आशुतोष सिन्हा ने भाग लिया और विस्तार से चर्चा की। प्रमुख सचिव संदीप यादव ने कहा कि देश में मध्यप्रदेश में सबसे अच्छी वेलनेस पॉलिसी है। उज्जैन में रोजाना एक लाख से अधिक दर्शनार्थी आते है ।     कार्यक्रम का संचालन सुशिखा सिंह ने किया तथा सत्र के अंत में सुत्रधार सुदिपशिखा एवं आशुतोष सिन्हा ने मंचासीन विषय विशेषज्ञों एवं पेनलिस्टों को स्मृति चिन्ह भेंट किए। इस अवसर पर जनप्रतिनिधीगण ,वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में स्पिरिचुअल वेलनेस समिट में भाग लेने देश व प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए , निवेशक एवं प्रतिभागी उपस्थित थे।

CJI बीआर गवई ने अदालत की सुनवाई को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से साझा किए जाने पर जताई चिंता

नई दिल्ली भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने अदालत की सुनवाई को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से साझा किए जाने पर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने बताया कि भारतीय मीडिया अदालत के निर्णयों की रिपोर्टिंग में काफी सक्रिय है, लेकिन कई बार सुनवाई के दौरान कही गई बातें गलत तरीके से प्रस्तुत की जाती हैं. मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि जब से अदालत की सुनवाई वर्चुअल प्लेटफार्मों पर होने लगी है, तब से इस तरह की घटनाओं में वृद्धि हुई है. यह एक गंभीर मुद्दा है, क्योंकि वर्चुअल सुनवाई के कुछ हिस्सों को साझा करने के साथ-साथ गलत दावे भी किए जाते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नियमों की आवश्यकता है. चीफ जस्टिस गवई ने यह भी बताया कि भारत में इस प्रकार की समस्याओं का समाधान करने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. उनका मानना है कि इस समय नियम बनाने का यह सबसे उपयुक्त अवसर है. उन्होंने सोशल मीडिया पर इस तरह की सामग्री के प्रसार पर रोक लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया. यह टिप्पणी उन्होंने ब्रिटेन में ‘मेंटेनिंग ज्युडिशियल लेगिटिमेसी ऐंड पब्लिक कॉन्फिडेंस’ विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की, जिसमें इंग्लैंड और वेल्स की चीफ जस्टिस लेडी सुइ कार भी उपस्थित थीं. भारत की सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस विक्रम नाथ इस कार्यक्रम में उपस्थित थे, जहां सीनियर एडवोकेट गौरव बनर्जी ने मंच का संचालन किया. जस्टिस विक्रम नाथ ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हालांकि इसमें कुछ कमियां हो सकती हैं, फिर भी वे अदालती कार्यवाही के लाइव प्रसारण के समर्थन में हैं. उन्होंने यह भी बताया कि अदालती सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग को रोकने के लिए उठाए गए तर्क, जैसे कि इसके बेजा इस्तेमाल का डर, बहुत ही कमजोर हैं. उनका मानना है कि इसका लाभ केवल न्यायाधीशों, वकीलों और वादियों या प्रतिवादियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम जनता के लिए भी फायदेमंद है, जो कानूनी प्रणाली से सीधे जुड़े नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय लिया था कि संवैधानिक महत्व के मामलों की सुनवाई का लाइव स्ट्रीमिंग किया जाएगा, जिससे इसका व्यापक लाभ हुआ है. हजारों लोग इन वीडियोज को देख रहे हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर मामले में ऐसा करना संभव नहीं है, क्योंकि यदि कानूनी प्रणाली को इस तरह से पूरी तरह से सार्वजनिक कर दिया गया, तो इससे गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. सीजेआइ ने सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद न्यायाधीशों द्वारा सरकारी पद स्वीकार करने या चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा देने पर गंभीर चिंता व्यक्त की. जस्टिस गवई ने कहा कि ऐसे कदम महत्वपूर्ण नैतिक प्रश्न उठाते हैं और सार्वजनिक निगरानी को आमंत्रित करते हैं. उन्होंने बताया कि किसी न्यायाधीश का राजनीतिक पद के लिए चुनाव लड़ना न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठा सकता है. यह स्थिति हितों के टकराव या सरकार के पक्ष में खड़े होने के प्रयास के रूप में देखी जा सकती है. सेवानिवृत्ति के बाद की गतिविधियों का समय और स्वरूप न्यायपालिका की ईमानदारी पर जनता के विश्वास को कमजोर कर सकता है, जिससे यह धारणा बन सकती है कि न्यायिक निर्णय भविष्य की सरकारी नियुक्तियों या राजनीतिक भागीदारी से प्रभावित हो सकते हैं. CJI ने कोलेजियम प्रणाली को भी उचित ठहराया सीजेआइ बीआर गवई ने यूके में एक सम्मेलन के दौरान न्यायपालिका की स्वतंत्रता और स्वायत्तता पर जोर दिया. उन्होंने न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कोलेजियम प्रणाली का समर्थन करते हुए बताया कि 1993 से पहले सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति का अंतिम निर्णय कार्यपालिका के हाथ में था. इस दौरान कार्यपालिका ने दो बार सीजेआइ की नियुक्ति में वरिष्ठ न्यायाधीशों को नजरअंदाज किया, जो कि स्थापित परंपरा के खिलाफ था. 1993 और 1998 के निर्णयों में, सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए संवैधानिक प्रक्रियाओं की व्याख्या की और कोलेजियम प्रणाली की स्थापना की. इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य कार्यपालिका के हस्तक्षेप को कम करना और न्यायपालिका की स्वायत्तता को बनाए रखना है. उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि कोलेजियम प्रणाली की आलोचना की जा सकती है, लेकिन किसी भी समाधान को न्यायिक स्वतंत्रता की कीमत पर नहीं लाया जाना चाहिए. न्यायाधीशों को बाहरी दबाव से स्वतंत्र रहना चाहिए. भारत के मुख्य न्यायाधीश ने न्यायपालिका में पारदर्शिता और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए अपनाए गए उपायों का उल्लेख किया. इनमें न्यायाधीशों द्वारा स्वेच्छा से संपत्ति की जानकारी देना और यदि कोई न्यायाधीश किसी मामले में वकील के रूप में पहले से शामिल रहा है, तो उसे उस मामले की सुनवाई से अलग होने की परंपरा शामिल है.

कलेक्टर ने नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन के लंबित प्रकरणों की तहसीलवार समीक्षा की

राजस्व प्रकरणों के निराकरण में तेजी लाएं और डिस्पोजल प्रतिशत बढ़ाएं : कलेक्टर कलेक्टर ने राजस्व अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कहा 70 प्रतिशत से कम निराकरण स्वीकार नहीं कलेक्टर ने नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन के लंबित प्रकरणों की तहसीलवार समीक्षा की तहसीलदार ग्रामीण छतरपुर, गौरिहार एवं सरबई, जुझारनगर नायब तहसीलदार को शोकॉज कलेक्टर ने अभिलेख दुरूस्ती के प्रकरण ऑनलाइन ही भेजने के निर्देश दिए छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने आरसीएमएस पोर्टल पर दर्ज प्रकरणों की समीक्षा करते हुए नौगांव एवं छतरपुर एसडीएम को 2 वर्ष से अधिक अवधि के लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता से निराकरण करने के निर्देश दिए और तहसीलदार छतरपुर ग्रामीण (ईशानगर) के प्रकरण अधिक लंबित होने पर नाराजगी व्यक्त की। साथ ही सरबई और जुझारनगर नायब तहसीलदार के अधिक केस लंबित होने एवं सरबई का सीमांकन निराकरण प्रतिशत 17.33 होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए एक वेतन वृद्धि रोके जाने के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा 2 से 5 वर्ष वाले एक भी नहीं रहे। उन्होंने लवकुशनगर एसडीएम को प्रकरणों का निराकरण प्रतिशत बढ़ाने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने रिकॉर्ड सुधार, बंटवारा, तरमीम और नामांतरण के लंबित अपीलों को प्रमुखता से निराकृत करने और आबादी सर्वे के केस डिस्पोज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा एसडीएम अपने मुख्यालय पर रहें। कलेक्टर ने दो टूक शब्दों में कहा कि राजस्व अधिकारी प्रकरणों का डिस्पोजल प्रतिशत बढ़ाएं और निराकरण में तेजी लाएं। उन्होंने कहा तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार अंतर्गत 70 प्रतिशत से कम निराकृत प्रतिशत बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होगा। तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार अंतर्गत न्यायालयवार नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन के 6 माह से लंबित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए अगले 10 दिनों में निराकरण के निर्देश कलेक्टर ने बुधवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में सम्पन्न हुई राजस्व प्रकरणों की समीक्षा बैठक में दिए। इस दौरान डिप्टी कलेक्टर श्रीमती विशा माधवानी सहित अनुभागों के एसडीएम, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार उपस्थित रहे। * एसडीएम छतरपुर को कैम्प लगाकर प्रकरणों के निराकरण के निर्देश * लोकसेवा केन्द्रों के माध्यम से ही आवेदन स्वीकार करें, ऑफलाइन नहीं * कलेक्टर ने पटवारियों से सख्ती से कार्य कराने के दिए निर्देश   कलेक्टर जैसवाल ने एसडीएम छतरपुर को कैंप लगाकर सीमांकन के प्रकरणों में गति लाने के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही निर्देशित किया कि पटवारी को सख्ती से इस काम में लगाए जिससे प्रकरणों के निराकरण में गति बढ़ सके। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा सभी तहसीलदारों एवं नायब तहसीलदार सीमांकन के सभी आवेदन लोक सेवा केंद्र के माध्यम से ही आवेदन लें, कोई भी आवेदन ऑफलाइन स्वीकार नहीं करे। कलेक्टर ने बंटवारा के प्रकरणों की समीक्षा में तहसीलदार गौरिहार के 6 माह से लंबित 3 प्रकरणों में कड़ी नाराजगी व्यक्त की और निर्देशित किया कि प्रकरणों का निराकरण कर प्रगति में सुधार लाएं। इसके अलावा छतरपुर नगर, बक्सवाहा, बिजावर तहसीलदार को भी लंबित प्रकरण शीघ्र निराकरण के लिए कहा। * नौगांव एवं ईशानगर रीडर को कारण बताओ नोटिस * भूमि बंधक प्रकरणों को पोर्टल में दर्ज करने के निर्देश * समयसीमा से प्रकरण बाहर होने पर पेनाल्टी लगाने के निर्देश कलेक्टर ने कहा कि अभिलेख दुरुस्ती के सभी केसों को आरसीएमएस पोर्टल पर भी दर्ज करें। उन्होंने कहा एक भी केस ऑफलाइन प्रेषित न किया जाए। कलेक्टर ने नौगांव एवं ईशानगर कोर्ट के रीडर लॉगिन पर केस लंबित होने पर रीडर को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने भूमि बंधक के पटवारी एवं तहसीलदार स्तर पर लंबित प्रकरणों को पोर्टल पर दर्ज कराने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने लोकसेवा गारंटी के तहत प्रकरणों का निराकरण समय सीमा से बाहर होने पर नौगांव, लवकुशनगर तहसीलदार पर तीन-तीन हजार एवं बक्सवाहा पर एक हजार रूपए की पेनाल्टी अधिरोपित करने के निर्देश दिए। * स्वामित्व योजना में ग्रामीण आबादी सर्वे कार्य जून माह में पूरा करने के निर्देश * विशेष कैम्प लगाकर फॉर्मर आईडी, आधार से खसरा लिंकिंग एवं तरमीम में प्रगति प्रतिशत बढ़ाएं कलेक्टर ने साइबर तहसील अंतर्गत प्रकरणों में पटवारियों की लंबित रिपोर्ट को लगवाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने स्वामित्व योजना अंतर्गत ग्रामीण आबादी सर्वे कार्य को जून माह में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने तहसीलदार छतरपुर ग्रामीण को ग्राउंड ट्रूथिंग में कुछ ग्राम लंबित होने होने पर कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही गौरिहार एवं छतरपुर ग्रामीण के संबंधित पटवारियों को तत्काल कलेक्ट्रेट तलब करते हुए एसएलआर की उपस्थिति में यह कार्य कराने के निर्देश दिए। साथ ही प्रथम एवं द्वितीय प्रकाशन के लिए लंबित ग्रामों का कार्य पूर्ण कराने के भी निर्देश दिए। कलेक्टर ने फार्मर आईडी, आधार से खसरा लिंकिंग एवं तर्मीम के कार्य में विशेष कैम्प लगाकर 90 प्रतिशत से अधिक प्रगति लाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने गिरदावरी कार्य को पूर्ण कराने के निर्देश दिए। * राजस्व अधिकारी वसूली प्रतिशत बढ़ाएं, संबंधित को नोटिस जारी करें * केन बेतवा के लंबित पैकेज राशि के भुगतान के कलेक्टर ने दिए निर्देश कलेक्टर ने बकाया राजस्व वसूली की समीक्षा करते हुए कहा कि राजस्व अधिकारी वसूली का प्रतिशत बढ़ाए। उन्होंने कहा कि डायवर्सन की बकाया वसूली में सम्बंधित को नोटिस जारी करें और वसूली कराए। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिले में सागर कबरई हाइवे से जुड़े ठेकेदारों से सर्विस चार्ज भी वसूल करे।  कलेक्टर ने केन बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना से संबंधित भू अर्जन विस्थापन पैकेज की राशि के वितरण की समीक्षा करते हुए एसडीएम बिजावर को बकाया लोगों से बैंक खाता एकत्रित कर राशि का भुगतान कराने के निर्देश दिए है। * एसडीएम एवं तहसीलदार को दस्तावेज स्कैनिंग के लिए भू-अभिलेखों को एक सप्ताह में आंकलन करने के निर्देश कलेक्टर ने दस्तावेज स्कैनिंग (डिजिटाइजेशन) के संबंध में एसडीएम एवं तहसीलदार को निर्देश दिए कि रिकॉर्ड का सही तरीके से आंकलन करलें और रिकॉर्ड लॉकेट कर और बिन्दुवार जानकारी का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा यह कार्य अनुमानित तौर पर नहीं चलेगा। इसमें लापरवाही पर एसडीएम एवं तहसीलदार स्वयं जिम्मेदार होंगे। उन्होंने कहा तहसील में एक कोर टीम बनाएं। जो भू अभिलेख से संबंधित दस्तावेज स्कैन कार्य देखेगी। उन्होंने कहा अधिकारियों को जानकारी रहे की उनका रिकॉर्ड कहा रखा है। कलेक्टर ने एक सप्ताह में रिकॉर्ड की जानकारी का पुनः आंकलन करने के निर्देश दिए … Read more

हम अपने बारे ये कह सकते हैं कि हमने विशेषकर किसी को मध्यस्थता करने के लिए कहा नहीं: शशि थरूर

वाशिंगटन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से पीएम मोदी पर दिये गए ‘सरेंडर’ वाले बयान पर लगातार चर्चा जारी है. अब इस बयान पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर की एंट्री हो गई है. शशि थरूर ऑपरेशन सिंदूर पर भारत के आउटरिच मिशन का नेतृत्व कर रहे हैं. शशि थरूर की टीम अभी अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में है. इस दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में शशि थरूर ने राहुल गांधी के इस बयान पर प्रतिक्रिया दी. कांग्रेस सांसद शशि थरूर से एक पत्रकार ने पूछा कि भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया टकराव के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप की कथित मध्यस्थता की कोशिशों का मुद्दा लगातार उठ रहा है. इस महिला पत्रकार ने कहा कि ये एक ऐसा सवाल है जिस पर आपकी पार्टी लगातार प्रश्न पूछ रही है. कल ही आपकी पार्टी के नेता राहुल गांधी ने कहा कि पीएम मोदी ने ट्रंप के सामने सरेंडर कर दिया? इस सवाल के जवाब में शशि थरूर ने कहा कि हमारे मन में अमेरिका के राष्ट्रपति पद के प्रति अगाध आस्था है, हम अमेरिका के राष्ट्रपति का सम्मान करते हैं, हम अपने बारे ये कह सकते हैं कि हमने विशेषकर किसी को मध्यस्थता करने के लिए कहा नहीं. ‘किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं है’ ऑपरेशन सिंदूर पर अमेरिका के गए भारत के आउटरिच मिशन की अगुआई कर रहे शशि थरूर ने इस मसले पर भारत के रूख को स्पष्ट करते हुए साफ-साफ कहा, “जैसा मैंने कहा जब तक पाकिस्तान आतंकवाद की भाषा का इस्तेमाल करता रहेगा, हमें पाकिस्तानियों के साथ वही भाषा बोलने में कोई परेशानी नहीं है. हम ताकत की भाषा का इस्तेमाल करेंगे, और इसके लिए किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं है…” थरूर ने कहा कि, “वहीं अगर दूसरी ओर अगर वे आतंकवाद के ढांचे को नष्ट करना चाहते हैं, हम उनसे बात कर सकते हैं, अगर वे गंभीर कदम उठाते हैं और ऐसा दिखाते हैं कि पाकिस्तान भारत के साथ सामान्य रिश्ते रखना चाहता है तो हम निश्चित रूप से बात करने को तैयार हैं और इसके लिए हमें किसी मध्यस्थ की जरूरत नहीं होगी.” उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में भारत को रुकने के लिए मनाने की जरूरत नहीं थी. किसी को हमें रुकने के लिए कहने की जरूरत नहीं थी क्योंकि हम उन्हें बता रहे थे कि जैसे ही पाकिस्तान रुकेगा, हम रुकने के लिए तैयार हैं. इसलिए अगर उन्होंने बदले में पाकिस्तानियों से कहा, बेहतर होगा कि आप रुक जाएं क्योंकि भारतीय रुकने के लिए तैयार हैं और उन्होंने ऐसा ही किया. और यह उनकी ओर से एक बढ़िया इशारा है. लेकिन सिर्फ पाकिस्तान और वही बता सकते हैं कि आखिरकार हुआ क्या था. कांग्रेस सांसद ने कहा कि भारत ने जो भी बात की सकारात्मक सोच के साथ की. उन्होंने कहा कि हमारे मन में अमेरिका के लिए बहुत सम्मान है, हमारी अमेरिका के साथ कहीं ज्यादा अहम रणनीतिक साझेदारी है. इसे हम एक मसले को लेकर क्या बात हुई उस पर इस रिश्ते को संकट में डालना नहीं चाहेंगे. क्या था राहुल गांधी का बयान बता दें कि राहुल गांधी 3 जून को मध्य प्रदेश में थे. उन्होंने वहां पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि, ‘मैं बीजेपी और आरएसएस वालों को अच्छे से जान गया हूं. इनको थोड़ा सा दबाओ तो डर कर भाग जाते हैं.’ राहुल ने आगे कहा, “उधर से ट्रंप ने फोन किया और इशारा किया कि मोदी जी क्या कर रहे हो? नरेंदर, सरेंडर. और ‘जी हुजूर’ कर के मोदी जी ने ट्रंप के इशारे का पालन किया.” बीजेपी ने कहा ये सेना का अपमान भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी के इस बयान को देश और सेना का अपमान बताया है. बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा भारतीय सेना के अप्रतिम शौर्य एवं पराक्रम को ‘सरेंडर’ कहकर संबोधित करना, न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि भारतीय सेना और राष्ट्र के साथ-साथ 140 करोड़ भारतवासियों का भी घोर अपमान है. नड्डा ने कहा कि अगर कोई पाकिस्तानी भी ऐसा कहता तो हम उस पर हंसते भी लेकिन जिस तरह से ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान में तबाही मचाई, उसके बाद पाकिस्तान की जनता से लेकर उसकी सेना और उसके प्रधानमंत्री ने भी ऐसा कहने की हिम्मत नहीं की लेकिन राहुल गांधी ऐसा बोल रहे हैं!  यह देशद्रोह से कम नहीं है. बता दें कि 7 मई को भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू हुआ सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर 10 मार्च तक चला. जब पाकिस्तान के अनुरोध को मानते हुए भारत ने युद्धविराम की बात मान ली.  

सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़, एक करोड़ का इनामी नरसिम्हा चलम को सुरक्षाबलों ने मार गिराया

बीजापुर बीजापुर जिले के नेशनल पार्क इलाके में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी सीसी मेम्बर नरसिम्हा चलम उर्फ गौतम उर्फ सुधारक को सुरक्षाबलों ने मार गिराया है। बताया जा रहा है कि नरसिम्हाचलम मूलतः आंधप्रदेश के चिंतापालुदी का रहने वाला है। वह नक्सल संगठन में शिक्षा विभाग के कामों को देखता था। ऑटोमेटिक हथियार बरामद होने की खबर है। मुताबिक इंद्रावती नेशनल पार्क इलाके में नक्सलियों के बड़े कैडर की मौजूदगी की पुख्ता सूचना पर सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम को अभियान पर रवाना किया गया था। अभियान के दौरान आज सुबह से सुरक्षाबलों और नक्सलियों  के बीच भीषण मुठभेड़ शुरू हो गई। दोनों ओर से हो रही मुठभेड़ में जवानों द्वारा एक नक्सली को मार गिराने व ऑटोमेटिक हथियार बरामद किये जाने की खबर मिल रही है। मुठभेड़ अब भी जारी है। बीजापुर में आज सुबह से मुठभेड़ जारी है। मौके से एक ऑटोमेटिक हथियार बरामद किया है। मुठभेड़ में मारे गए माओवादियों की संख्या बढ़ने की भी संभावना जताई जा रही है। डीआरजी, कोबरा और एसटीएफ  के जवान लगातार नक्सलवाद के खिलाफ सर्चिंग ऑपरेशन कर माओवादियों का खात्मा कर रहे हैं।  दोनों ओर से रुक-रुक कर फायरिंग जारी है। 

सिम्स में कोविड संक्रमण से निपटने मॉकड्रिल का आयोजन

बिलासपुर  सिम्स चिकित्सालय में कोविड की आपातकालीन स्थिति से निपटने हेतु मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। यह मॉकड्रिल सिम्स के अधिष्ठाता डॉ रमणेश मूर्ति एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ अर्चना सिंह, नोडल अधिकारी डॉ भूपेन्द्र कश्यप के निर्देशन में संपन्न हुआ। केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार ने कोविड संक्रमण को देखते हुए समस्त चिकित्सालय को अलर्ट मोड में रहने के लिए पत्र लिखकर आदेश दिया गया है।      ऐसे मरीज जिन्हें सांस लेने में दिक्कत लंबे समय से खांसी, सर्दी-जुकाम, लूज मोशन, हॉथ-पैर में जकड़न, बुखार सुगंध एवं दुर्गन्ध का महसूस न कर पाने वाले मरीजों को चिकित्सालय में लाए जाने पर त्वरित कार्यवाही करते हुए स्ट्रेचर पर स्टेबलाइज किया गया। ऑक्सीजन मास्क लगाया गया तथा तत्पश्चात उसे वार्ड में सिफ्ट किया गया। मेडिसीन विभाग के चिकित्सक उपस्थित थे। मरीज को बेड पर लेटाने के पश्चात सबसे पाहले उसे वाइटल साइन (ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन के स्तर आदि) की निगरानी की गई उसकी चेतना की स्थिति का मुल्यांकन किया गया। मरीज के नाक एवं गले से सेंपल लेकर वायरोलॉजी विभाग कोविड जांच के लिए भेजा गया। इसके पश्चात आई.वी. लाइन के माध्यम से जीवन रक्षक दवाईयां दी गई।      इस मॉकड्रिल के माध्यम से आपातकालीन स्थितियों में त्वरित और समन्वित चिकित्सीय सेवायें प्रदान करने की तैयारी का मुल्यांकन किया गया। उक्त मॉकड्रिल में सिम्स चिकित्सालय में कार्यरत डॉ सुनील कुमार पेंड्रो, चिकित्सा अधिकारी, डॉ आद्या सिंगरौल, कैजुअल्टी मेडीकल ऑफीसर, श्रीमती स्वाती कुमार, सहायक नर्सिंग अधीक्षक, श्रीमती सरिता बहादुर, नर्सिंग सिस्टर, श्रीमती पुष्पलता शर्मा, श्रीमती कंचन चौबे, कु. शिरोमणी नायक एवं गोल्डन काशी, लैब टेक्निीशियन, वार्ड ब्वाय संजय श्रीवास, मुकेश भोई, मणी श्रीवास, गोविंद एवं सलीम टीम वर्क के साथ कार्य का संपादन हुआ।

मुरैना : पति की शिकायत लेकर थाने पहुंची महिला से गैंगरेप, मामला दर्ज

 मुरैना पति से विवाद के बाद आधी रात को थाने में पति के खिलाफ एफआईआर करवाने जा रहे 45 साल की महिला का अपहरण कर दो आरोपितों ने गैंगरेप कर डाला। मंगलवार-बुधवार की रात यह वारदात सिविल लाइन थाने से थोड़ी दूर हुई है। छौंदा निवासी 45 साल की विवाहिता ने बताया कि मंगलवार की सुबह साढ़े सात बजे पति से विवाद हो गया इसके बाद पति गुस्से में घर से चले गए। शाम को लौटे तो फिर विवाद हो गया, जिसमें पति ने मारपीट कर दी। रात को डेढ़ बजे वह पति से गुस्सा होकर थाने में शिकायत करने के लिए निकली। गांव से थाने पैदल जा रही थी वह गांव से थाने तक पैदल जा रही थी। जैसे ही वह छौंदा मोड़ पर पहुंची तो दो अलग-अलग बाइकों पर दो युवक आए। सड़क पर अकेला पाकर दोनों युवकों ने उसे घेर लिया, मुंह दबाकर उसे सड़क से दूर झाड़ियों में ले गए, जहां उसके साथ बारी-बारी से दोनों ने दुष्कर्म किया। दूसरा आरोपी मौके से भाग निकला महिला के अनुसार वह चिल्लाई तो सफेद रंग की बाइक से आए आरोपित को ग्रामीणों ने पकड़ लिया, जिसकी पहचान जनकपुर का पुरा, धनेला गांव निवासी महेंद्र पुत्र ख्यालीराम जाटव के तौर पर हुई है। दूसरा आरोपित वहां से भाग निकला। पुलिस ने महेंद्र जाटव व एक अन्य पर दुष्कर्म की धाराओं में केस दर्ज किया है।

भिंड में पत्रकारों की थाने में पिटाई का मामला, सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार को भेजा नोटिस, मांगा जवाब

भिंड भिंड जिले के दो पत्रकारों की कथित पिटाई का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने मामले में भिंड एसपी को भी पक्षकार बनाने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 9 जून को होगी। मामला भिंड के पत्रकार शशिकांत जाटव और अमरकांत सिंह चौहान से जुड़ा है। दोनों ने चंबल नदी में रेत माफिया के अवैध कारोबार की खबरें प्रकाशित की थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी बात से नाराज होकर भिंड पुलिस ने उन्हें एसपी कार्यालय में बुलाकर मारपीट की और धमकाया। हालांकि, एसपी असित यादव ने इन आरोपों का खंडन किया है। इसके बाद खुद को जान का खतरा बताते हुए दोनों पत्रकार अपना घर छोड़कर दिल्ली आए और सुप्रीम कोर्ट व दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 28 मई को दिल्ली हाईकोर्ट ने अमरकांत सिंह चौहान को सुरक्षा प्रदान की थी। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को दो महीने के लिए उन्हें सुरक्षा देने के निर्देश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि जान का खतरा है तो कोर्ट उनकी रक्षा करेगा, लेकिन पहले तीन पहलुओं पर स्पष्टीकरण देना होगा—(1) दोनों को जान का खतरा कैसे साबित होता है, (2) याचिकाकर्ता मध्यप्रदेश हाईकोर्ट क्यों नहीं गए और (3) पहले से लंबित दिल्ली हाईकोर्ट में मामला क्यों नहीं रखा गया? पत्रकारों की ओर से वकील वारिशा फराजत ने कोर्ट को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की ओर से जारी बयान और 27 मई को मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि बिना भिंड एसपी को पक्षकार बनाए उन पर आरोप लगाना अनुचित है। इसके बाद वकील ने माफी मांगते हुए एसपी को पक्षकार बनाने की सहमति दी।  

अधिवक्ताओं ने डीजे कोर्ट के सामने चैंबर्स की मांग को लेकर दिया धरना

धौलपुर धौलपुर अभिभाषक संघ द्वारा नवीन न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं के लिए चैंबर्स उपलब्ध नहीं होने के विरोध में एक दिवसीय सांकेतिक न्यायिक कार्य बहिष्कार किया गया। यह बहिष्कार संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता रघुनाथ प्रसाद शर्मा ने की। रघुनाथ शर्मा ने बताया कि हमारी लंबे समय से मांग रही है कि नए न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं के लिए चैंबर्स की व्यवस्था की जाए। इसी मुद्दे को लेकर आज हम न्यायिक कार्य से एक दिन का बहिष्कार कर विरोध जता रहे हैं। इस अवसर पर अधिवक्ताओं ने डीजे कोर्ट के सामने धरना प्रदर्शन किया और नो चैंबर्स – नो शिफ्टिंग जैसे नारे लगाए। अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर कहा कि जब तक चैंबर्स की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। संघर्ष समिति के सदस्यों में भगवान सिंह नारोलिया, महेन्द्र सिंह गुर्जर, लक्ष्मण सिंह वैसला, रिजवान अहमद, राजवीर सिंह हसेलिया, एवं संघ के सचिव विशाल शर्मा सहित सैकड़ों अधिवक्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

लखनऊ से कानपुर का सफर होगा आसान और आरामदायक, 160 किमी की रफ्तार से दौड़ेगी ट्रेन

लखनऊ  यदि सबकुछ योजना के मुताबिक रहा तो आने वाले वर्षों में लखनऊ से कानपुर का सफर और आसान और आरामदायक होगा। दरअसल, अमौसी से कानपुर के गंगा बैराज तक बहुप्रतीक्षित रैपिड रेल परियोजना को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने बुधवार को एनओसी दे दी है। कानपुर और उन्नाव पहले ही मंजूरी दे चुके हैं। इस रूट पर 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन चलाने की योजना है। इसे नमो कॉरिडोर नाम से विकसित किया जाएगा। लखनऊ-कानपुर रैपिड रेल परियोजना को मेरठ-दिल्ली मॉडल पर विकसित किया जाना है। नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एनसीआरटीसी) की ओर से वर्ष 2015 में यह प्रस्ताव लाया गया था। वर्ष 2021 में तत्कालीन प्रमुख सचिव दीपक कुमार ने ड्राफ्ट तैयार कराया। वर्ष 2022 में शासन स्तर पर बैठकें हुईं, लेकिन कोविड-19 के कारण काम धीमा पड़ गया। अब फिर से प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। परियोजना की खासियत इस रूट को सड़क और रेलवे मार्ग के साथ विकसित किया जाएगा। कोहरा, बारिश या मौसम संबंधी अन्य बाधाओं का असर रफ्तार पर नहीं पड़ेगा। अभी सड़क मार्ग से डेढ़ से दो घंटे का सफर है। रैपिड रेल इसे आधे से भी कम समय में पूरा करेगी। सड़क यातायात का दबाव और वायु प्रदूषण भी कम होगा। क्षेत्रीय व्यापार, नौकरी और शिक्षा क्षेत्र में विकास को बल मिलेगा। दी गई है एनओसी एनसीआरटीसी को एनओसी इस शर्त पर दी गई है कि मास्टर प्लान का उल्लंघन न हो। कानपुर और उन्नाव विकास प्राधिकरण पहले ही एनओसी दे चुके हैं। प्रोजेक्ट को पांच साल के भीतर पूरा करने की बात सामने आ रही है। -प्रथमेश कुमार, वीसी एलडीए

रायपुर : छोटे कदम, बड़ी उड़ान: महतारी वंदन योजना से हिन्देश्वरी बनीं सफल उद्यमी

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी महतारी वंदन योजना ने प्रदेश की महिलाओं के जीवन में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार किया है। इस योजना से लाभान्वित होकर मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की श्रीमती हिन्देश्वरी इंदु राजे ने अपने कठिन हालात को पीछे छोड़ते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं। पूर्व में मितानिन के रूप में सेवा दे चुकीं श्रीमती हिन्देश्वरी को कार्य से विराम लेने के बाद आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लेकिन महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली 1,000 रुपये की मासिक सहायता उनके लिए आशा की किरण बनकर आई। इस राशि को अपनी माता श्रीमती उषा देवी के साथ मिलकर बचाते हुए उन्होंने एक छोटा होटल व्यवसाय शुरू किया। आरंभ में टेबल, कुर्सियाँ और आवश्यक बर्तन खरीदकर होटल की नींव रखी गई। समय के साथ उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया और आज उनका परिवार आर्थिक रूप से मजबूत स्थिति में है। श्रीमती हिन्देश्वरी ने इस परिवर्तन का श्रेय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन को देते हुए राज्य सरकार के प्रति आभार प्रकट किया है। योजना से सशक्त हो रही महिलाएं 10 मार्च 2024 में शुरू की गई महतारी वंदन योजना के माध्यम से अब तक 16 महीनों में 10,433.64 करोड़ रूपए की राशि सीधे प्रदेश की महिलाओं को दी जा चुकी है। 21 से 60 वर्ष की आयु वर्ग की विवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को यह आर्थिक सहायता नियमित रूप से दी जा रही है।यह योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की एक सशक्त आधारशिला बन चुकी है। हिन्देश्वरी जैसी अनगिनत महिलाएं इस योजना के ज़रिए अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर रही हैं और पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन रही हैं।

राज्यपाल पटेल ने रामफल का पौधा रोप कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

राज्यपाल पटेल ने रामफल का पौधा रोप कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश पेड़ लगा कर देखभाल भी करे, राज्यपाल ने प्रदेशवासियों से की अपील भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राजभवन के नवग्रह उद्यान में पौधारोपण किया। उन्होंने रामफल का पौधा लगाया। राज्यपाल पटेल ने प्रदेशवासियों से भी पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हम सभी अपने जीवन के विशेष अवसरों जैसे जन्म दिवस, वर्षगांठ आदि पर एक पेड़ अवश्य लगाएं। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव के. सी. गुप्ता ने लीची का पौधा लगाया। अपर सचिव उमाशंकर भार्गव ने सिंदूर का पौधा लगाया।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंदूर का पौधा रोपा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्व पर्यावरण दिवस पर उज्जैन में दताना एयर स्ट्रिप पर सिंदूर के पौधे का रोपण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पौधा रोपकर प्रदेशवासियों को मानव जीवन के लिए प्रकृति के संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश दिया। इस अवसर पर उज्जैन के प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।  

दिल्लीवासियों को 200 नई इलेक्ट्रिक बसों का मिला तोहफा, पीएम मोदी ने दिखाई हरी झंडी

नई दिल्ली दिल्लीवासियों को 200 नई इलेक्ट्रिक बसों का तोहफा मिला है. गुरुवार को पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन बसों का उद्घाटन किया. ये बसें न केवल दिल्ली के निवासियों को उनकी दैनिक यात्रा में सहायता करेंगी, बल्कि प्रदूषण से प्रभावित राजधानी को भी स्वच्छता प्रदान करेंगी. इस अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और दिल्ली के कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा उपस्थित रहे. बेहद खास हैं ये छोटी बसें ये बसें साधारण परिवहन साधन नहीं हैं, बल्कि DEVI स्कीम (दिल्ली इलेक्ट्रिक वीकल इंटरकनेक्टर) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. ग्रीन रंग की ये 9 मीटर लंबी मिनी इलेक्ट्रिक बसें न केवल आकर्षक हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी अत्यंत अनुकूल हैं. ये जीरो-एमिशन वाली बसें पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त हैं. इनकी एक विशेषता यह है कि इनका आकार छोटा है, जिससे ये लास्ट मील कनेक्टिविटी प्रदान करने में सक्षम हैं. इसका मतलब है कि ये बसें उन क्षेत्रों में भी पहुंच सकती हैं जहां सड़कें संकरी हैं. कहां से कहां तक चलेंगी ? ये बसें दिल्ली के चार मुख्य डिपो, कुशक नाला, द्वारका, ईस्ट विनोद नगर और गाजीपुर से संचालित होंगी. ये बसें साउथ दिल्ली, ईस्ट दिल्ली, वेस्ट दिल्ली, साउथ-वेस्ट दिल्ली और सेंट्रल दिल्ली के कई महत्वपूर्ण मार्गों पर तेज़ी से चलेंगी. ‘एक पेड़ मां के नाम’- PM का खास संदेश पीएम मोदी ने बसों को हरी झंडी दिखाते हुए पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया. उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत एक पेड़ भी लगाया और लोगों से पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की. इस अवसर पर दिल्ली के LG वीके सक्सेना, CM रेखा गुप्ता, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और दिल्ली के कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा भी उपस्थित रहे.

बॉर्डर से BSF जवान को बांग्लादेश में खींच ले गए बांग्लादेशी नागरिक, बाद में किया रिहा

 मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एक जवान को कथित तौर पर अगवा करने का मामला सामने आया है. आरोप है कि कुछ बांग्लादेशी नागरिक बीएसएफ के एक जवान को अगवा कर उसे बांग्लादेश की सीमा ले गए. हालांकि, कुछ ही घंटों बाद जवान को छोड़ दिया गया. लेकिन मामले की गंभीरता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार सुबह लगभग आठ बजे बीएसएफ को पता चला कि बांग्लादेश के कुछ ग्रामीण बीएसएफ के एक जवान को जबरन खींचकर बांग्लादेश की सीमा में ले गए और वहां उसे बांध दिया. इस घटना की जानकारी मिलने पर बीएसएफ के बड़े अधिकारी माल्दा सीमा की ओर रवाना हुए. बीएसएफ सूत्रों का कहना है कि बांग्लादेश के कुछ आपराधिक तत्व जवान को खींचकर बांग्लादेश की सीमा में ले गए. बता दें कि यह घटना सुइटी थाना क्षेत्र के चांदनी चौक बॉर्डर आउटपोस्ट के पास हुई, जहां बीएसएफ की 71वीं बटालियन के जवान श्री गणेश सीमा पर संदिग्ध गतिविधियों की जांच कर रहे थे. शुरुआती रिपोर्ट्स में कहा जा रहा था कि जवान संदिग्ध घुसपैठियों का पीछा करते हुए अनजाने में बांग्लादेशी सीमा में प्रवेश कर गया था. लेकिन बाद में पता चला कि जवान भारतीय सीमा में ही था, बांग्लादेशी उसे जबरन सीमा पार खींच ले गए.

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