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कार्य़शाला का उद्देश्य भू-प्रबंधन औऱ प्रशासनिक प्रणाली को पारदर्शी और तकनीक सक्षम बनाना

भोपाल केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय का भूमि संसाधन विभाग और मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एमपीएसईडीसी) द्वारा संयुक्त रूप से दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन 5 और 6 जून 2025 को भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), भौरी भोपाल में किया जाएगा। कार्यशाला में देशभर के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और भू-प्रबंधन से जुड़े पेशेवर भाग लेंगे। ‘नक्शा’ वेब-जीआईएस सॉल्यूशन पर आधारित इस कार्यशाला में इस प्लेटफॉर्म की क्षमताओं का शहरी संपत्ति सर्वेक्षण और भू-स्थानिक डाटा प्रबंधन में उपयोग पर प्रकाश डाला जायेगा। कार्य़शाला का उद्देश्य भू-प्रबंधन औऱ प्रशासनिक प्रणाली को पारदर्शी और तकनीक सक्षम बनाना है। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में केन्द्रीय भूमि संसाधन विभाग के निदेशक श्याम कुमार, केन्द्रीय भूमि संसाधन संयुक्त सचिव कुणाल सत्यार्थी, एसीएस विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी विभाग संजय दुबे, प्रमुख सचिव राजस्व विभाग विवेक पोरवाल, एसीएस नगरीय विकास एवं आवास विभाग संजय शुक्ला और राजस्व सचिव एवं भू-अभिलेख आयुक्त सुअनुभा श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहेंगे। कार्यशाला के पहले दिन ‘नक्शा’ प्लेटफॉर्म की विशेषताओं और इसके शहरी संपत्ति सर्वेक्षण में वास्तविक उपयोग के संदर्भ में टेक्नीकल प्रेजेंटेशन और लाइव डेमो प्रस्तुत किये जायेंगे। सर्वे ऑफ इंडिया और एमपीएसईडीसी के विशेषज्ञ ड्रोन आधारित इमेज ऐनालिसिस, फीचर एक्सट्रैक्शन और ग्राउंड लेवल सर्वे की विधियों पर प्रशिक्षण देंगे। प्रतिभागियों को सांची के फील्ड विज़िट के दौरान मोबाइल-आधारित ‘नक्शा’ ऐप के माध्यम से रियल-टाइम सर्वेक्षण जैसे भूखंड मूल्यांकन, बहु-स्वामित्व संरचना और अभिलेख अपडेट बनाए रखनी की प्रायोगिक जानकारी दी जाएगी। कार्यशाला में दूसरे दिन पूर्व में कराए गए फील्ड सर्वे के परिणाम प्रस्तुत किए जाएंगे। टीमों द्वारा जुटाए गए डाटा का ‘नक्शा’ प्लेटफॉर्म पर एकीकरण, विभाजन-विलयन (स्प्लिट-मर्ज) की प्रक्रिया, तथा अभिलेखों को अपडेट बनाए रखने की तकनीक पर चर्चा की जाएगी। कार्यशाला के अंतिम सत्र में केरल, कर्नाटक, असम और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में शहरी सर्वेक्षण की श्रेष्ठ कार्य-प्रणालियों को भी प्रस्तुत किया जाएगा। कार्य़शाला के समापन सत्र में केन्द्रीय भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव कुणाल सत्यार्थी की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय पैनल चर्चा होगी। इसमें विभिन्न राज्यों की आवश्यकताओं एवं ‘नक्शा’ के देश भर में क्रियान्वयन की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि यह कार्यशाला देश में स्वदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आधुनिक, पारदर्शी और कुशल शहरी भू-अधिकार प्रबंधन एवं प्रशासन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध होगी।  

छत्तीसगढ़ की सियासत, खासकर कांग्रेस में खलबली मची, दिग्गज कांग्रेसी अरविंद नेताम बनेंगे संघ के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि

रायपुर  छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ आदिवासी नेता अरविंद नेताम को आरएसएस के नागपुर मुख्यालय में चीफ गेस्ट के तौर पर बुलाया गया है। इंदिरा गांधी सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके और बस्तर क्षेत्र से आने वाले नेताम आज 5 जून को संघ के ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग-द्वितीय समापन समारोह’ में मुख्य अतिथि होंगे। यह स्वयंसेवकों या संघ कैडर के लिए तीन साल के प्रशिक्षण अवधि का समापन है। छत्तीसगढ़ की राजनीति में आदिवासी वोटों के महत्व को देखते हुए प्रदेश की राजनीति गरमाई हुई है। 2018 में प्रणव मुखर्जी भी हो चुके शामिल यह वही कार्यक्रम है, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 2018 में शामिल हुए थे, जिसकी कांग्रेस के कुछ वर्गों ने आलोचना की थी। राजनीतिक उद्देश्यों के बारे में सवालों के बीच, 83 वर्षीय आदिवासी नेता ने कहा कि वह संघ के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने और बस्तर में आदिवासी अधिकारों के लिए काम करने के लिए भाग लेने की योजना बना रहे हैं। फिलहाल आरएसएस के निमंत्रण पर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। आमंत्रण मिलने पर क्या बोले नेताम? अरविंद नेताम कहते हैं कि मैं आरएसएस कार्यक्रम में इसलिए जा रहा हूं क्योंकि मैं आदिवासी मुद्दों को समझाने के लिए आरएसएस के साथ मजबूत संचार चाहता हूं। बस्तर में अभी सबसे बड़ा मुद्दा धर्मांतरण है। मेरा मानना है कि अगर आरएसएस हमारा समर्थन करता है, तो भाजपा सरकार हमारी मांगों पर ध्यान देगी। हमने ही पिछले साल दिसंबर में अपने आदिवासी कार्यक्रम में आरएसएस नेताओं को आमंत्रित किया था। साथ ही, महीनों पहले, मैं रायपुर में मोहन भागवत से मिला और आदिवासी मुद्दों पर चर्चा की थी। आदिवासी समाज के लिए उठाई थी मांग नेताम ने जनगणना में आदिवासियों के लिए एक अलग कोड की आवश्यकता पर भी बात करने की बात कही। उन्होंने कहा ‘हमारी अपनी संस्कृति और धार्मिक प्रथाएं हैं। हम किसी भी धर्म के तहत परिभाषित नहीं होना चाहते हैं; हमें अपना कोड चाहिए। बातचीत के कारण धीरे-धीरे बदलाव हो रहे हैं। वे (आरएसएस) धीरे-धीरे हमें आदिवासी कह रहे हैं, वनवासी नहीं।’ अरविंद नेताम की आदिवासी इलाकों में अभी भी पैठ बस्तर में एक प्रभावशाली आदिवासी नेता के रूप में नेताम अभी भी राजनीतिक रूप से मजबूत पकड़ रखते हैं। 2023 में विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले, उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी। इससे पहले उन्होंने सर्व आदिवासी समाज (एसएएस) से अलग होकर अपनी राजनीतिक पार्टी हमर राज बनाई थी। उस समय, नेताम ने कहा था कि हमर राज का गठन संघ के समान है, जिसके तहत ‘बीजेपी सहित 50 से अधिक स्वतंत्र समूह हैं।’ संघ की नेताम से करीबी से कांग्रेस को क्या हैं नुकसान चुनावों में, हमर राज ने कम से कम दो विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया और लोकसभा चुनावों में कांकेर संसदीय सीट पर भी कांग्रेस की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया। कांग्रेस पहले से ही आदिवासी वोटों को वापस पाने के लिए संघर्ष कर रही है, ऐसे में नेताम का संघ की ओर झुकाव कांग्रेस के लिए चिंता का विषय हो सकता है। 2018 के बाद से कांग्रेस को नुकसान 2018 में जब कांग्रेस सत्ता में आई थी, तो उसने अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में 29 में से 25 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा को तीन सीटें मिली थीं। हालांकि, आदिवासी मुद्दों को प्रभावी ढंग से संबोधित करने में विफलता के कारण आदिवासियों के बीच कांग्रेस की पकड़ कमजोर हो गई और 2023 में कांग्रेस की एसटी सीटों की संख्या घटकर 11 हो गई, जबकि भाजपा ने 17 सीटें जीतीं। ‘बीजेपी में चले भी जाएं तो कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं’ कांग्रेस का तर्क है कि अगर नेताम भाजपा में जाते भी हैं, तो भी इसका उसकी राजनीतिक संभावनाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। कांग्रेस के प्रदेश संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा, ‘उन्होंने (नेताम) एक अलग राजनीतिक रास्ता अपनाया और पार्टी छोड़ दी। वह एक बड़े आदिवासी नेता हैं, लेकिन हम आदिवासियों के बारे में आरएसएस के विचार जानते हैं। आरएसएस आदिवासियों को वनवासी कहता है, आदिवासी नहीं। तो, क्या नेताम इससे सहमत हैं? राजनीतिक रूप से, इससे चुनावों में कोई फर्क नहीं पड़ेगा… बस्तर की जनता उनका समर्थन नहीं करती है।’ आलोचकों को भी आमंत्रित करता है संघ बस्तर में काम करने वाले आरएसएस के पदाधिकारी मानते हैं कि नेताम आदिवासियों के लिए ‘अच्छा काम’ कर रहे हैं। वह धर्मांतरण का विरोध करते हैं। आरएसएस के एक पदाधिकारी ने कहा कि ‘हम उन लोगों को भी आमंत्रित करते हैं जो हमारे आलोचक हैं। हजारों लोग कार्यक्रम में भाग लेंगे। कई लोग जो संघ को समझना चाहते हैं, वे भी वहां होंगे।’ बीजेपी का इस मामले पर क्या है रुख? हालांकि बीजेपी का इस मामले पर अलग रूख है। बीजेपी के एक नेता कहते हैं कि आरएसएस के निमंत्रण को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरएसएस में कोई राजनीतिक भेदभाव नहीं है। इससे पहले, प्रणब मुखर्जी को आमंत्रित किया गया था और उन्होंने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। यह एक राष्ट्रवादी संगठन है जो समाज के हर वर्ग के साथ मिलकर काम करने में विश्वास करता है।’

महू से मुख्तियारा के बीच रेल लाइन बिछाने में कटने वाले पेड़ों के बदले रेलवे दस गुना पौधे लगाएगा

इंदौर  महू-सनावद ब्रॉड गेज के तहत महू से मुख्तियारा बलवाड़ा के बीच पटरी बिछाई जाएगी। इसके लिए इंदौर-खरगोन वन मंडलों की 454 हेक्टेयर वनभूमि का अधिग्रहण होना है। वनमंडल स्तर पर इसका सर्वे पूरा हो गया है। पटरी बिछाने के लिए पूरे प्रोजेक्ट में करीब एक लाख 55 हजार पेड़ काटे जाएंगे। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान इंदौर वनमंडल को होगा। प्रक्रिया में चार-पांच महीने लग सकते हैं वनमंडल स्तर पर रिपोर्ट मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) कार्यालय को भेजी गई है। प्रोजेक्ट का आकलन करने के बाद वन विभाग मुख्यालय को देंगे। फिर पर्यावरण समिति की समीक्षा के बाद अनुमति के लिए वन व पर्यावरण मंत्रालय को भेजी जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक पूरी प्रक्रिया में चार-पांच महीने लग सकते हैं। सिंगल लाइन के हिसाब से पटरियां बिछेगी महू-मुख्तियारा बलवाड़ा के बीच 56 किमी की पटरियां बिछाई जाएंगी। यहां ब्रॉड गेज का काम अलग-अलग कारणों के चलते तीन वर्षों से अटका है। ट्रेन की स्पीड बढ़ाने के लिए पश्चिम रेलवे ने पहले अलाइनमेंट बदला। इसके बाद डबल लाइन को लेकर सर्वे किया। इंदौर वनमंडल की 407 और खरगोन वनमंडल की 46 हेक्टेयर वनभूमि अधिग्रहित होगी। महू वनक्षेत्र से एक लाख 40 हजार और बड़वाह वनक्षेत्र से 15 हजार पेड़ कटेंगे। अधिकारियों के मुताबिक भले ही पश्चिम रेलवे डबल लाइन के लिए सर्वे करवा रही है, लेकिन अभी सिंगल लाइन के हिसाब से पटरियां बिछाई जाएंगी। प्रोजेक्ट में 20 करोड़ रुपये दिए जाएंगे इंदौर-खरगोन वनमंडल के पेड़ों को काटकर लकड़ी डिपो भिजवाने का काम वन विभाग करेगा। इसका खर्च भी रेलवे ही उठाएगा। प्रोजेक्ट में 20 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। विभाग के मुताबिक प्रोजेक्ट को अनुमति मिलने के बाद रेलवे को राशि जमा करना होगी। जमीन नहीं, लेंगे पैसा ब्रॉड गेज के लिए भले ही पश्चिम रेलवे से जमीन नहीं लेंगे। मगर इन्हें जमीन का मूल्य जरूर देना होगा। प्रोजेक्ट में 454 हेक्टेयर वनक्षेत्र आएगा। इतनी ही जमीन का मूल्य पश्चिम रेलवे को जमा करना होगा। 13 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर से रेलवे को 59 करोड़ 20 लाख रुपये वन विभाग को देना है। धार-झाबुआ में लगेंगे पौधे केंद्र की परियोजना को लेकर जमीन अधिग्रहण से जुड़े नियमों में बदलाव कर दिया है। वनक्षेत्र के बदले रेलवे को जमीन नहीं देना है। बल्कि इंदौर-खरगोन वनमंडल से कटने वाले पेड़ों के बदले रेलवे दस गुना पौधे लगाएगा। यह काम भले ही वन विभाग करेगा, मगर पौधारोपण का खर्च रेलवे उठाएगा। पौधे लगाने के लिए धार-झाबुआ वनमंडल में वनक्षेत्र को चुना गया है। इसके लिए 50 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। सर्वे रिपोर्ट भेज दी इंदौर वनमंडल के डीएफओ प्रदीप मिश्रा ने बताया कि महू-सनावद ब्राडगेज प्रोजेक्ट को लेकर इंदौर वनमंडल से सर्वे का काम पूरा हो चुका है। रिपोर्ट सीसीएफ कार्यालय को भेज दी। रेलवे लाइन बिछाने के लिए पेड़ों को काटा जाएगा। इन्हें चिह्नित कर लिया गया है।

प्रदेश में खनिजों के अवैध उत्खनन पर अब सैटेलाइट से नजर रखने सरकार ने सैटेलाइट आधारित खनन निगरानी प्रणाली की विकसित

भोपाल प्रदेश में खनिजों के अवैध उत्खनन पर अब सैटेलाइट से नजर रखी जाएगी। सरकार ने सैटेलाइट आधारित खनन निगरानी प्रणाली विकसित की है। इस व्यवस्था के अंतर्गत प्रदेश की समस्त खदानों को जियो टैग किया गया है। सैटेलाइट से नजर रखने के लिए एक पोर्टल भी विकसित किया गया है। इस संबंध में प्रमुख सचिव, खनिज उमाकांत उमराव की ओर से सभी जिला कलेक्टरों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टरों को सैटेलाइट आधारित खनन निगरानी प्रणाली का जिले में तत्परता से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। साथ ही अवैध उत्खनन पाए जाने पर परिवहन एवं भंडारण नियम के अंतर्गत कार्रवाई करने के निर्देश भी जारी किए हैं। अलर्ट मैप पर चिह्नित किए जाएगें स्थान बता दें कि इस पोर्टल से सैटेलाइट के माध्यम से अवैध उत्खनन की पहचान कर अलर्ट जारी किया जाएगा। जिसे पोर्टल पर जिला कलेक्टर एवं जिला खनिज अधिकारी द्वारा लॉग-इन कर देखा जा सकेगा। जिला कलेक्टर एवं खनिज अधिकारी को अलर्ट की जानकारी एसएमएस द्वारा प्रत्येक माह पोर्टल के माध्यम से दी जाएगी। जिले के अंतर्गत जारी किए गए अलर्ट मैप पर चिह्नित रहेंगे, जिनका अन्य स्थापित खदानों, जियोलॉजिकल लेयर एवं खसरेकी जानकारी के आधार पर परीक्षण किया जा सकेगा। मोबाइल एप के माध्यम से किया जाएगा वेरीफाई बता दें कि जारी किए गए अलर्ट को खनिज अधिकारी द्वारा फील्ड वेरिफिकेशन कर मोबाइल एप के माध्यम से वेरीफाई किया जाएगा। फील्ड वेरिफिकेशन के बाद अवैध उत्खनन पाए जाने पर अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण नियम-2022 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। पोर्टल के संबंध में वीसी के माध्यम से समस्त जिला कार्यालयों में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है।

मोदी सरकार CGHS के बदले लाएगी नई हेल्थकेयर योजना, अब निगाहें 8वें वेतन आयोग पर टिकी

नई दिल्ली  8वें वेतन आयोग की घोषणा के बाद एक बार फिर केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं. इस साल जनवरी में सरकार ने आधिकारिक तौर पर 8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की थी. इस आयोग का उद्देश्य मौजूदा आर्थिक हालातों को देखते हुए केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन और पेंशन में जरूरी बदलावों की सिफारिश करना है. 8वें वेतन आयोग की घोषणा के बाद से केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें एक बार फिर से बढ़ गई हैं। इस साल जनवरी में सरकार ने आधिकारिक रूप से 8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की थी। इस आयोग का का मकसद मौजूदा आर्थिक हालातों को देखते हुए केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन और पेंशन में जरूरी बदलावों की सिफारिश करना है। आमतौर पर लोग मानते हैं कि वेतन आयोग केवल वेतन बढ़ोतरी के फार्मूले तय करता है, लेकिन इसकी जिम्मेदारियां इससे कहीं ज्यादा होती हैं। वेतन आयोग भत्तों, सुविधाओं और खासतौर पर हेल्थ इंश्योरेंस योजनाओं की समीक्षा भी करता है। ऐसे ही एक सुधार की सालों से चर्चा हो रही है, जो है – केंद्रीय सरकार हेल्थ योजना (CGHS)। यह योजना केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके आश्रितों को किफायती दरों पर हेल्थ सर्विस उपलब्ध कराती है। क्या है CGHS? CGHS भारत सरकार की एक हेल्थ योजना है, जो कर्मचारियों और उनके परिवारों को डॉक्टर की सलाह, इलाज, जांच और दवाएं जैसी सर्विस कम लागत पर देती है। यह योजना मुख्य रूप से शहरी एरिया में केंद्रित है, जिससे इसकी पहुंच सीमित हो जाती है। CGHS को बदलने की सिफारिश पहले भी हुई है 6वें और 7वें वेतन आयोग ने भी CGHS की लिमिट को देखते हुए एक नई हेल्थ इंश्योरेंस योजना लाने की सिफारिश की थी। 6वें वेतन आयोग ने सुझाव दिया था कि एक वैकल्पिक योजना लाई जाए, जिसमें कर्मचारी अपनी इच्छा से योगदान देकर शामिल हो सकें। यह योजना भविष्य में नियुक्त होने वाले नए कर्मचारियों के लिए अनिवार्य होनी चाहिए। 7वें वेतन आयोग ने तो और आगे बढ़ते हुए कहा था कि हेल्थ इंश्योरेंस सभी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए दीर्घकालिक और बेहतर समाधान हो सकता है। उन्होंने CGHS के बाहर रहने वाले पेंशनरों के लिए यह भी सुझाव दिया था कि CGHS निकटवर्ती अस्पतालों को CS(MA) और ECHS जैसी योजनाओं के तहत सूचीबद्ध करे ताकि उन्हें भी कैशलेस इलाज मिल सके। क्या अब CGHS की जगह नई योजना आएगी? जनवरी 2025 में खबरें सामने आईं कि हेल्थ मंत्रालय CGHS को हटाकर एक इंश्योरेंस आधारित योजना लाने पर विचार कर रहा है। इसका नाम Central Government Employees and Pensioners Health Insurance Scheme (CGEPHIS) हो सकता है। यह योजना IRDAI से रजिस्टर इंश्योरेंस कंपनियों के माध्यम से लागू की जा सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। CGHS स्कीम हो सकता है बदलाव! केंद्र सरकार ने 2025 के शुरुआत में 8वां वेतन आयोग बनाने का ऐलान किया है। वेतन आयोग सिर्फ वेतन और पेंशन बढ़ाने वाली समिति नहीं बल्कि इसका दायरा बहुत बड़ा है। यह भत्तों, सुविधाओं और स्वास्थ्य बीमा जैसी विषयों की समीक्षा भी करता है। सालों से चली आ रही CGHS स्कीम में कुछ बदलाव होने वाला है। क्या होगा नई हेल्थकेयर स्कीम का नया नाम बीते कुछ महीने से मीडिया में खबरे चल रही है कि स्वास्थ्य मंत्रालय CGHS को एक नई इंश्योरेंस आधारित योजना में बदल सकता है। इसका नाम CGEPHIS (Central Government Employees and Pensioners Health Insurance Scheme) हो सकता है। बताया जा रहा है कि इसको IRDAI द्वारा रजिस्टर्ड इंश्योरेंस कंपनियों के माध्यम से लागू किया जाएगा। हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। 8वें वेतन आयोग पर टिकी है सभी की नजरें इस प्रकार से सभी की नजर 8वां वेतन आयोग पर टिकी हुई है। सभी के मन में एक ही सवाल है क्या यह आयोग की सालों पुरानी CGHS बदल जाएगी। क्या CGEPHIS जैसे हेल्थ इंश्योरेंस मॉडल को लागू किया जाएगा। आने वाले समय में इस पर फैसला लिया जा सकता है। माना जा रहा है कि ये बदलाव 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का हिस्सा हो सकते हैं। अब निगाहें 8वें वेतन आयोग पर टिकी हैं अब जबकि 8वें वेतन आयोग का गठन हो चुका है और जल्द ही यह अपना काम शुरू करेगा, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह आयोग CGHS से जुड़ी सालों पुरानी समस्या का समाधान कर पाता है या नहीं।

अमर नाथ यात्रा में लगेगा इंदौर का लंगर, 100 क्विंटल खाद्य सामग्री रवाना

इंदौर  अपने स्वाद के लिए मशहूर इंदौर अब अमरनाथ यात्रा मार्ग पर अपना जायका परोसने जा रहा है. अमरनाथ यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं को मालवा की फेमस डिशेज भंडारे और लंगर में परोसी जाएंगी. इसमें इंदौरी पोहा, जलेबी से लेकर मुंह में पानी ला देने वाली दाल बाटी भी शामिल होगी. दरअसल, अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने पहली बार मध्य प्रदेश के मनकामेश्वर मंदिर समिति को यात्रा मार्ग में लंगर चलाने की अनुमति दी है. अमरनाथ यात्रा की शुरुआत 3 जुलाई से होने जा रही है और इसका समापन 9 अगस्त तक होगा, लिहाजा 1 महीने तक चलने वाली यात्रा के दौरान अमरनाथ यात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं को तरह-तरह के इंदौरी व्यंजन परोसे जाएंगे. बालटाल क्षेत्र से मिलेगा इंदौरी जायका अमरनाथ श्राइन बोर्ड से मिली अनुमति के मुताबिक इंदौर की मनकामेश्वर मंदिर समिति द्वारा अमरनाथ यात्रा मार्ग पर बालटाल क्षेत्र से लंगर परोसा जा सकेगा. अमरनाथ यात्रियों को इंदौरी जायके से रूबरू कराने के लिए इंदौर में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. शहर के मनकामेश्वर कांटा फोड़ शिव मंदिर से जितने भी व्यवसायी और श्रद्धालु जुड़े हुए हैं, वे अपने-अपने स्तर पर योगदान कर तैयारियों में जुड़ गए हैं. बालटाल में इंदौर का लंगर चलाया जा सके, इसके लिए 20 हलवाई की टीम तैयार की गई है. इसके अलावा मुख्य हलवाई के साथ सहयोगी अलग होंगे. 70 लोगों का जत्था पहुंचेगा बालटाल मनकामेश्वर मंदिर समिति से जुड़े 70 लोगों को लंगर चलाने की जिम्मेदारी मंदिर ट्रस्ट की ओर से दी गई है. इसके तहत 8 जुलाई को 70 सदस्य तमाम व्यवस्थाओं के लिए बालटाल रवाना होंगे. उनके टिकट और यात्रा की तैयारी हो गई है. समिति से जुड़े लोग बारी-बारी से लंगर में अपनी सेवाएं देंगे. 20 साल से इस तरह दे रहे थे सेवा मनकामेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के सदस्य परमानंद वालरेचा के मुताबिक, ” अमरनाथ यात्रा के दौरान यात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं को चाय नाश्ता और अन्य सामग्री परोसने का काम अब तक मंदिर समिति लुधियाना के लंगर के साथ करती थी. 2 दशकों के भरोसे और स्वादिष्ट भोजन प्रसादी उपलब्ध कराने के अनुभव के बाद अमरनाथ यात्रा साइन बोर्ड ने इंदौर के मनकामेश्वर मंदिर समिति को अपना लंगर खुद चलाने की लिखित अनुमति भेज दी है.” यहां लगेंगे लंगर अमरनाथ बर्फानी सेवा दल के सहयोग से बालटाल और पंचतरणी दोनों स्थानों पर लंगर सेवा के साथ ही मालवांचल एवं इंदौर से जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए तीन दिनों तक आवास एवं भोजन की नि:शुल्क व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी. व्यापारी कर रहे सहयोग कांटाफोड़ मंदिर की भक्त मंडली के सदस्यों की ओर से छावनी क्षेत्र में व्यापारियों के सहयोग से अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले भक्तों के लिए राशन सामग्री का संग्रहण किया जा रहा है. इस पुनीत कार्य में क्षेत्र के व्यापारी तन, मन, धन से सहयोग कर रहे हैं, यही कारण है कि इस साल भी बड़ी मात्रा खाद्य सामग्री एकत्रित की गई है. यह सामान किया रवाना मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विष्णु बिंदल ने बताया कि टीकमचंद गर्ग, संयोजक बीके सहित अन्य लोगों को मदद से जो सामग्री पहुंचाई गई है. उसमें शुद्ध घी के 15 डिब्बे, 75 डिब्बे खाद्य तेल, 4 क्विंटल मिल्क पावडर, 25 बोरी आटा, 30 क्विंटल सभी तरह की दाल, 5 क्विंटल मैदा, रवा और सूजी, 15 किलो मसाले, 30 बोरी पोहा, 10 क्विंटल इडली सांभर का आटा, 2 क्विंटल पापड़ की कतरन, 2 क्विंटल टॉफी-बिस्किट, एक मा क्विटंल चायपत्ती एवं 25 क्विंटल मे शकर आदि खाद्य सामग्री शामिल है.

शुभ संयोग में गंगा दशहरा पूजन व स्नान किया जाएगा, कैसे करें मां गंगा की पूजा, जानें विधि व उपाय

नई दिल्ली  इस साल गुरुवार के दिन शुभ संयोग में गंगा दशहरा पूजन व स्नान किया जाएगा। जब-जब पुण्य और मोक्ष की बात होती है, मां गंगा का नाम सबसे पहले लिया जाता है। गंगा दशहरा पर भक्त देवी गंगा की पूजा व गंगा स्नान करते हैं। रवि योग और हस्त नक्षत्र के योग में स्नान और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। तैतिल और गर करण जैसे शुभ संयोग भी इस दिन को और पावन बना रहे हैं। गंगा दशहरा के दिन गंगा में स्नान और दान-पुण्य करना अत्यधिक शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन गंगा में पवित्र स्नान करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिल सकती है। इस दिन अगर आप भी घर पर स्नान या पूजन करना चाह रहे हैं तो जानें पूजन की सम्पूर्ण विधि- गंगा दशहरा के दिन घर पर कैसे करें मां गंगा की पूजा, जानें विधि: प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि संभव न हो तो घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। पूजा घर, मंदिर या पूजा स्थल पंडाल को गंगा जल से शुद्ध कर करें। पूजा की चौकी पर पीला या लाल वस्त्र बिछाकर उस पर मां गंगा की तस्वीर स्थापित करें। जलाभिषेक करें। मां गंगा की मूर्ति को चंदन का तिलक लगाकर अक्षत, फल और फूल अर्पित करें। देवी गंगा को मिष्ठान, मिश्री, दही, हलवा, पंचामृत या खीर का भोग लगाएं। मां गंगा का ध्यान करते हुए ॐ नमः शिवाय’, ‘ॐ गंगे नमः’ अथवा ‘गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति’ आदि मंत्रों का जाप करें। भगवान शिव व विष्णु जी की भी पूजा करें। पूरी श्रद्धा के साथ गंगा मैया की आरती करें। अंत में क्षमा प्रार्थना करें। दान: इस दिन तिल, तुलसी, घी, कपड़े, पंखा, जल का घड़ा और अनाज आदि का दान करें। उपाय- सुख, समृद्धि व शांति के लिए गंगा चालीसा व गंगा स्त्रोत का पाठ करें। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।  

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