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प्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन शहरी के अंतर्गत नगरीय निकायों ने शहरी क्षेत्र में साफ-सफाई का विशेष अभियान शुरू

भोपाल प्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन शहरी के अंतर्गत नगरीय निकायों ने शहरी क्षेत्र में साफ-सफाई का विशेष अभियान शुरू कर दिया है। विशेषकर बारिश के दौरान जल-भराव की स्थिति निर्मित न हो, इसके लिये नाले-नालियों की सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास कार्यालय ने दिशा-निर्देश जारी किये है। साफ-सफाई अभियान 413 नगरीय निकायों में एक साथ शुरू किया गया है। शहरी क्षेत्र के सभी वार्डों में आवासीय एवं सार्वजनिक क्षेत्र की नालियों से जमी हुई गाद निकालकर गहरी सफाई की जा रही है। वर्षा काल के दौरान जल का प्रवाह सतत रूप से हो सके, इसके लिये नालों के सभी छोर पर जाली लगाई जाना सुनिश्चित किया जा रहा है। अतिक्रमण हटाने के संबंध में निर्देश नगरीय निकायों को निर्देश दिये गये है कि नाले-नालियों के ऊपर से अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही तत्काल की जाये। शहरी क्षेत्रों में बीमारियों की रोकथाम के लिये ब्लीचिंग पॉउडर का छिड़काव भी किया जा रहा है। नगरीय निकायों में कार्यरत सफाई कर्मियों के कार्यों की सतत निगरानी रखने के लिये भी कहा गया है। प्रदेश में 413 स्थानीय नगरीय निकाय है। इनमें नगरपालिक निगम 16, नगरपालिका परिषद 99 और नगर परिषद 298 है। मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी इकाइयाँ प्रदेश में सूखे कचरे के प्रसंस्करण के लिये 405 नगरीय निकायों में 360 मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी इकाइयों का निर्माण किया गया है, जिनके माध्यम से सूखे एवं गीले कचरे को अलग अलग घटकों में बाँटकर प्रसंस्करण के लिये भेजा जाता है। इन इकाइयों से सूखे कचरे की छटाई करके बेचे जाने की व्यवस्था की गई है। प्रदेश के 100 प्रतिशत नगरीय क्षेत्रों में आवासों और व्यावसायिक क्षेत्रों से कचरा संग्रहण व्यवस्था का संचालन किया जा रहा है। इसके लिये नगरीय निकायों को 7082 मोटराइज्ड वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें सूखे, गीले के साथ कचरे के अन्य अवयवों को अलग-अलग रखने के लिये कंपार्टमेंट और जीपीएस सिस्टम लगाए गए हैं।  

बीजापुर में नेशनल पार्क मुठभेड़ में 2 नक्सली ढेर, अब तक 4 नक्सली ढेर, टॉप कमांडर भास्कर भी मारा गया, हथियार बरामद

 बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के नेशनल पार्क क्षेत्र में दो दिन से जारी अभियान में सुरक्षा बलों ने 45 लाख रुपये के इनामी तेलंगाना स्टेट कमेटी सदस्य व मंचेरियल कोमाराम भीम (एमकेबी) सचिव भास्कर उर्फ माइलारापु अडेल्लु (45) को मार गिराया है। छत्तीसगढ़ में उस पर 25 लाख व तेलंगाना में 20 लाख का इनाम घोषित था। वह तेलंगाना के आदिलाबाद जिले के उरुमादला का रहने वाला था। मुठभेड़ स्थल से जवानों ने एके-47 असाल्ट राइफल व विस्फोटक भी बरामद किए हैं। शुक्रवार देर रात तक चली मुठभेड़ में 2 और नक्सली मारे जाने की खबर है. मौके से ऑटोमैटिक हथियार बरामद हुए हैं. इससे पहले शुक्रवार को 25 लाख के इनामी नक्सली भास्कर और एक करोड़ के इनामी सुधाकर मारे जा चुके हैं. यानी अब तक इस ऑपरेशन में चार नक्सली, जिनमें दो टॉप कमांडर भी शामिल हैं, मारे जा चुके हैं. इस ऑपरेशन को DRG, STF और कोबरा बटालियन मिलकर अंजाम दे रही हैं. यह वही इलाका है जिसे कभी नक्सलियों का अभेद्य किला माना जाता था, लेकिन अब वही इलाका उनके लिए मौत का मैदान बनता जा रहा है. इंद्रावती नेशनल पार्क, जो करीब 2799 वर्ग किमी में फैला है, उसमें अब छिपने की जगह भी नहीं बची. पार्क का कोर जोन 1258 वर्ग किमी और बफर जोन 1540 वर्ग किमी में फैला है, लेकिन ड्रोन, सेटेलाइट और पैदल गश्त के दम पर जवानों ने हर कोने को कवर कर रखा है. जानकारी के अनुसार, जंगल में अभी भी 25 से 30 हार्डकोर नक्सली फंसे हुए हैं. वे इधर-उधर छिपने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फोर्स लगातार उन्हें ट्रैक कर रही है. ऐसा माना जा रहा है कि अगले 2-3 दिनों में और मुठभेड़ हो सकती है और यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है. बस्तर के माड़ क्षेत्र के बाद अब नेशनल पार्क में नक्सलियों की ताकत लगातार कमजोर हो रही है. एक समय जो जगह रेड कॉरिडोर का दिल मानी जाती थी, वहां अब भारत के जवानों का कंट्रोल बनता जा रहा है. कल भी मारा गया एक ईनामी नक्सली एक दिन पहले गुरुवार को इसी क्षेत्र में 40 लाख रुपये के इनामी केंद्रीय समिति सदस्य (सीसीएम) माओवादी सुधाकर को भी मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया था। दो दिन के अंदर दो बड़े माओवादी आतंकियों के मारे जाने से माओवादियों को बड़ा झटका लगा है। डीआरजी और एसटीएफ ने चलाया संयुक्त ऑपरेशन सुधाकर की मौजूदगी की पक्की सूचना मिलने के बाद जिला रिजर्व गार्ड (DRG) और विशेष कार्य बल (STF) की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को नेशनल पार्क इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सघन जंगल और कठिन इलाके में हुई इस मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बलों ने बेहद सूझबूझ और रणनीतिक तरीके से कार्रवाई करते हुए सुधाकर को मार गिराया। इस अभियान में कई आधुनिक हथियार और दस्तावेज भी बरामद हुए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। बसव राजू के मारे जाने के बाद भगदड़ की स्थिति पिछले महीने 21 तारीख को नक्सल इतिहास की सबसे बड़ी सफलता फोर्स को मिली। अबूझमाड़ के जंगल में नक्सलियों का चीफ और सेंट्रल कमेटी का महासचिव बसव राजू ढेर कर दिया गया। उसके साथ 27 अन्य नक्सली भी मारे गए थे। बसव राजू के मारे जाने के बाद से नक्सल संगठन में भगदड़ की स्थिति है। नक्सली जिस भी इलाके में मूवमेंट कर रहे हैं वे फोर्स के निशाने पर आ जा रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने की खोजबीन पुलिस के अनुसार अबूझमाड़ व इंद्रावती टाइगर रिजर्व (आईटीआर) क्षेत्र में शीर्ष माओवादी तेलंगाना राज्य समिति बांदी प्रकाश व दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य (डीकेएसजेडसी) पप्पा राव समेत अन्य माओवादियों के छिपे होने की सूचना पर डिस्टि्रक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी), स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) व कोबरा बटालियन के जवानों को अभियान पर भेजा गया था। इस दौरान गुरुवार को सुरक्षा बलों का सामना माओवादियों की एक टुकड़ी से हुआ था। जवाबी फायरिंग में शीर्ष माओवादी सुधाकर मारा गया था। इसके दूसरे दिन शुक्रवार को भाग रहे माओवादियों का पीछा करते हुए जवानों ने एक अन्य शीर्ष माओवादी को मार गिराया है। मुठभेड़ में कई अन्य माओवादियों के मारे जाने की बात कही जा रही है। सात माओवादियों ने किया समर्पण सुरक्षा बलों की ओर से जारी आक्रामक अभियान व सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित सात माओवादियों ने शुक्रवार को दंतेवाड़ा में समर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है। इनमें जुगलू, दशा, भोजाराम माड़वी, लखमा उर्फ सुती, रातू उर्फ ओठे कोवासी, सुखराम पोडि़याम, पंडरुराम पोडि़याम शामिल हैं।  

हारून मेमन को सांसद प्रतिनिधि के रूप में मिली महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी, कांग्रेस संगठन में उत्साह की लहर

एमसीबी/मनेंद्रगढ़ कोरबा लोकसभा क्षेत्र की सांसद श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए हारून मेमन को खनिज संसाधन विभाग के लिए अपना सांसद प्रतिनिधि नियुक्त किया है। यह नियुक्ति न केवल संगठनात्मक दृष्टिकोण से अहम मानी जा रही है, बल्कि इससे क्षेत्र में विकास कार्यों और जनसमस्याओं के निराकरण को भी गति मिलने की उम्मीद की जा रही है। हारून मेमन: निष्ठा, सेवा और संगठन के प्रतीक हारून मेमन जी लंबे समय से कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। वे क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में निरंतर भागीदारी निभाते आए हैं। चाहे वह स्थानीय समस्याओं का समाधान हो या संगठन को मजबूती देना, हर मोर्चे पर उनकी भूमिका सराहनीय रही है। उनकी सादगी, व्यवहार-कुशलता और क्षेत्रीय मुद्दों की गहरी समझ उन्हें जनसंपर्क में एक विश्वसनीय चेहरा बनाती है। खनिज संसाधन जैसे संवेदनशील और रणनीतिक विभाग में उनकी नियुक्ति को क्षेत्र के लिए लाभकारी माना जा रहा है। क्षेत्र में खुशी की लहर, बधाइयों का तांता सांसद महंत के इस फैसले का स्वागत करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने हारून मेमन जी को बधाइयाँ और शुभकामनाएं दी हैं। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक, यह नियुक्ति चर्चा का विषय बनी हुई है। संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने उम्मीद जताई है कि मेमन जी की यह नई भूमिका एमसीबी क्षेत्र में कांग्रेस के जनसंपर्क और विकास कार्यों को नई दिशा देगी। सांसद का भरोसा, जनता की उम्मीद श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत द्वारा लिया गया यह निर्णय यह दर्शाता है कि वे क्षेत्र के सशक्त, समर्पित और जनसेवाभावी कार्यकर्ताओं को आगे लाकर संगठन को मजबूत करने की दिशा में गंभीर हैं। हारून मेमन को मिली यह जिम्मेदारी न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान का सम्मान है, बल्कि यह उन तमाम जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए भी प्रेरणा है जो निष्ठा से पार्टी की सेवा में लगे हैं।

स्कूलों में ज्वाइन करने लगे युक्तियुक्त शिक्षक, ग्रामीणों व बच्चों में खुशी का माहौल

सफलता की कहानी स्कूलों में ज्वाइन करने लगे युक्तियुक्त शिक्षक, ग्रामीणों व बच्चों में खुशी का माहौल शिक्षकों की व्यवस्था से सुचारू होगी बच्चों की पढ़ाई, ग्रामीणों ने जताई खुशी बिलासपुर जिले में युक्तियुक्त शिक्षकों ने अपने नई पदस्थापना स्कूलों में ज्वाइनिंग देना शुरू कर दिया है। शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक आधे से अधिक युक्तियुक्त शिक्षकों ने स्कूलों में ज्वाइनिंग दे दी है। 824 में से 400 से अधिक शिक्षकों ने आदेश के दूसरे दिन तक कार्यभार ग्रहण कर लिया है। कार्यभार ग्रहण करने का 09 जून 2025 दिन सोमवार को अंतिम दिन है। इसके साथ ही वे आगामी शैक्षणिक सत्र की तैयारी में जुट गए हैं। नए शिक्षकों के आने से गांव के पालकों और बच्चों में खुशी का माहौल है। बेहतर शिक्षा और अपने भविष्य को लेकर वे आशावान है।       शासन की मंशानुरूप स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बच्चों की पढ़ाई को व्यवस्थित करने के प्रयास शिक्षकों ने शुरू कर दिए हैं। युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत शिक्षकविहीन स्कूलों में शिक्षकों की प्रभावी नियुक्ति की गई है। इस पहल से अब तक शिक्षकविहीन या एकल शिक्षकीय स्थिति में संचालित स्कूलों में बच्चों को नियमित रूप से पढ़ाई का लाभ मिल सकेगा, शिक्षकविहीन गांवों में शिक्षकों की नियुक्ति से ग्रामीणों में हर्ष व्याप्त है उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार जताते हुए कहा कि युक्त युक्तिकरण की प्रक्रिया से अब उनके गांव के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सकेगी।       जिले के कोटा विकासखंड के दूरस्थ गांव खपराखेल एवं कुसुमखेड़ा, मस्तूरी ब्लॉक के सबरियाडेरा एवं लोहर्सी और तखतपुर ब्लॉक के डिलवापारा जैसे आदिवासी बैगा बाहुल्य ग्रामों में पूर्व में शिक्षक नहीं थे। इन सभी गांवों के प्राथमिक विद्यालयों में अब दो-दो शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा, एकल शिक्षकीय स्थिति में संचालित पूर्व माध्यमिक शाला चितवार (तखतपुर), जैतपुर (मस्तूरी), तरवा एवं नगोई (कोटा) में तीन-तीन शिक्षकों की व्यवस्था की गई है। वहीं, शासकीय हाईस्कूल कुकुदा (मस्तूरी) में पाँच शिक्षक, सैदा (तखतपुर) में चार, और कुकुर्दीकला (मस्तूरी) में तीन शिक्षकों की पदस्थापना की गई है। इन विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति से ग्रामीणों में खुशी की लहर है। ग्रामीणों ने बताया कि लंबे समय से स्कूलों में शिक्षक नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही थी। अब शिक्षक आने से बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से हो पाएगी और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।       कोटा विकासखंड के खपराखेल व कुसुमखेड़ा के निवासियों ने बताया कि दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण ये स्कूल लंबे समय से शिक्षकविहीन थे। बच्चों को पढ़ाई के लिए अपने गांव से दूर दूसरे स्कूलों में जाना पड़ता था जिससे बच्चों को आने-जाने में अधिक समय लगता था वहीं छोटे बच्चों को थकान भी होती थी साथ ही स्कूल दूर होने से परिवार को उनकी सुरक्षा की भी चिंता बनी रहती थी। अब गांव के ही स्कूल में पर्याप्त शिक्षक होने से गांव के बच्चों को अपने ही गांव में अच्छी शिक्षा मिल सकेगी साथ ही परिवार की चिंता भी दूर होगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए किए गए युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया से शिक्षक मिलने से ग्रामीणों में हर्ष व्याप्त है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से ही दूरस्थ और पिछड़े गांवों में शिक्षा की स्थिति में सुधार आ सकता है।  

विधायकों को घर-गाड़ी के लिए मिलेगा दो प्रतिशत ब्याज अनुदान, 15 लाख और आवास के लिए 25 लाख निर्धारित थी

भोपाल पांच साल बाद सरकार एक बार फिर विधायकों को वाहन और आवास के लिए कर्ज लेने पर ब्याज अनुदान की सुविधा देने जा रही है। अब यह राशि अभी तक वाहन के लिए 15 लाख और आवास के लिए 25 लाख निर्धारित थी। इसे दोगुना किया जा रहा है, लेकिन ब्याज अनुदान में दो श्रेणी बना दी है। 15 लाख से अधिक का वाहन और 25 लाख से अधिक का आवास लेने पर सरकार केवल दो प्रतिशत ब्याज अनुदान देगी। शेष ब्याज विधायक को स्वयं चुकाना होगा। यदि इस राशि से कम का वाहन या आवास लिया जाता है तो चार प्रतिशत ब्याज विधायक को देना होगा और शेष का भुगतान सरकार करेगी।   कैबिनेट के सामने प्रस्तुत किया जाएगा प्रस्ताव वित्त विभाग ने संसदीय कार्य विभाग के प्रस्ताव को संशोधन के साथ सहमति दे दी है। अब इसे अंतिम निर्णय के लिए कैबिनेट के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। 16वीं विधानसभा (दिसंबर 2023-2028) के लिए निर्वाचित सदस्य काफी समय से मांग कर रहे थे, कि वाहन और आवास ऋण पर दी जाने वाली ब्याज अनुदान की सुविधा को बहाल किया जाए। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भी इस पर सहमति जताई और मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव से चर्चा की थी। सदस्य सुविधा समिति ने प्रस्ताव संसदीय कार्य विभाग को भेजा, जिसे विभागीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के अनुमोदन से वित्त विभाग भेजा गया। वाहन ऋण की राशि 15 लाख के स्थान पर 25 लाख और आवास ऋण की राशि 25 के स्थान पर 50 लाख रुपये रहेगी लेकिन ब्याज अनुदान दो श्रेणी में मिलेगा।   दो प्रतिशत ब्याज अनुदान मिलेगा विभाग का मानना है कि 15 लाख से अधिक का वाहन और 25 लाख से अधिक का आवास लेने वाले लोग ब्याज भी चुका सकते हैं इसलिए ऐसे विधायकों को केवल दो प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाएगा। शेष ब्याज उन्हें ही चुकाना होगा। यदि कम ऋण लिया जाता है तो पहले की तरह चार प्रतिशत ब्याज विधायक को देना होगा और शेष राशि सरकार चुकाएगी। अब इस प्रस्ताव को अंतिम निर्णय के लिए कैबिनेट की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि 15वीं विधानसभा में कोरोना महामारी के कारण सरकार ने इस योजना पर ब्रेक लगा दिया था। 

जिले में पर्यावरण दिवस पर 6300 पौधे रोपे गए, 15 जून तक 15,000 आवासों में वृक्षारोपण का लक्ष्य

एमसीबी  जिला पंचायत मनेंद्रगढ़-चिरमिरी भरतपुर द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों के घरों पर 6,300 पौधे लगाए गए, साथ ही जिले के अमृत सरोवर में 300 पौधों का रोपण किया गया।   बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान जिला प्रशासन ने 5 से 15 जून तक 15,000 प्रधानमंत्री आवास योजना और पीएम जन मन के लाभार्थियों के घरों पर वृक्षारोपण करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा, मनरेगा योजना के तहत निर्मित 25 अमृत सरोवर’’ के किनारे 2,500 पौधे लगाए जाएंगे।   शिक्षण संस्थानों और सरकारी परिसरों में हरियाली इस अभियान के तहत सभी विद्यालयों, छात्रावासों, आंगनबाड़ी केंद्रों और शासकीय भवनों में फलदार व औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। साथ ही, महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत 11 हेक्टेयर भूमि पर 5,000 पौधे रोपित किए जाएंगे।     सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा जिले के सभी विकासखंडों में CLF (क्लस्टर लेवल फेडरेशन) को एजेंसी बनाकर 5-5 एकड़ भूमि पर 1,000-1,000 फलदार पौधे लगाने की तैयारी की गई है। यह कार्य बारिश के मौसम को ध्यान में रखकर पूरा किया जाएगा। जिला प्रशासन का यह प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका में भी सुधार करेगा। इस अभियान में जनभागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

अग्निवीर परीक्षा का ऐलान- 11 दिन में ग्वालियर में 32 हजार 708 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे, 30 जून से 10 जुलाई तक होगी परीक्षा

ग्वालियर भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा की तारीख घोषित हो गई है। लिखित परीक्षा 30 जून से शुरू होगी और 10 जुलाई तक चलेगी। 11 दिन में ग्वालियर में 32 हजार 708 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। प्रतिदिन 2973 अभ्यर्थी लिखित परीक्षा में शामिल होंगे। सेना ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती के लिए अब लिखित परीक्षा पहले होगी। लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण अभ्यर्थी शारीरिक परीक्षा में शामिल होंगे।   सबसे ज्यादा भिंड, मुरैना और ग्वालियर के अभ्यर्थी इस साल पिछले तीन साल में सबसे ज्यादा आवेदन अग्निवीर भर्ती के लिए आए हैं। जुलाई के आखिरी सप्ताह तक परीक्षा परिणाम जारी होगा। इसके बाद अगस्त से अक्टूबर के बीच शारीरिक परीक्षा होगी। इस साल दिसंबर तक चयनित अभ्यर्थी ट्रेनिंग पर रवाना हो जाएंगे। लिखित परीक्षा में सबसे ज्यादा भिंड, मुरैना और ग्वालियर के अभ्यर्थी शामिल होंगे, जबकि सबसे कम अभ्यर्थी श्योपुर जिले के हैं।   अभ्यर्थियों को 15 जून के बाद जारी होंगे प्रवेश पत्र लिखित परीक्षा की तारीख की घोषणा हो गई है। अब परीक्षा केंद्र तय होने के बाद प्रवेश पत्र जारी होंगे। सेना के अधिकारियों ने बताया कि 15 जून के बाद ही प्रवेश पत्र जारी होंगे। अभ्यर्थियों को ई-मेल के जरिए प्रवेश पत्र भेजे जाएंगे। साथ ही भारतीय सेना की वेबसाइट पर भी प्रवेश पत्र अपलोड किए जाएंगे। ऑनलाइन मॉक टेस्ट दे सकते हैं अभ्यर्थी अभ्यर्थियों की सहूलियत के लिए ऑनलाइन मॉक टेस्ट की सुविधा भारतीय सेना की वेबसाइट पर है। ज्वॉइन इंडियन आर्मी की वेबसाइट पर मॉक टेस्ट और ऑनलाइन टाइपिंग टेस्ट दिया जा सकता है। इससे अभ्यर्थियों को परीक्षा का अनुभव हो सकेगा। निर्धारित अवधि में प्रश्न पत्र हल करने की प्रैक्टिस की जा सकती है। 

क्या हैं सैटेलाइट इंटरनेट, जाने इसके फायदे और नुकसान

नई दिल्ली भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने एलन मस्क की कंपनी Starlink को भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन (SatComm) सेवाएं देने के लिए आधिकारिक लाइसेंस जारी कर दिया है, हालांकि इसकी जानकारी फिलहाल पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से दी है। सरकार या स्टारलिंक की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। भारत में एलन मस्क का सैटेलाइट इंटरनेट स्टारलिंक लॉन्च तो हो रहा है लेकिन जियो और एयरटेल इसके विरोध में हैं। आइए जरा समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर सैटेलाइट इंटरनेट क्या है और कैसे काम करता है? क्या है सैटेलाइट इंटरनेट? सैटेलाइट इंटरनेट एक प्रकार की इंटरनेट सेवा है, जिसमें इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए सैटेलाइट (उपग्रह) का उपयोग किया जाता है। यह उन क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं प्रदान करने में मदद करता है जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड या मोबाइल नेटवर्क सेवाएं उपलब्ध नहीं होतीं, जैसे दूरस्थ गांव, पहाड़ी इलाके या समुद्री क्षेत्र। सैटेलाइट इंटरनेट कैसे काम करता है सैटेलाइट इंटरनेट में एक सैटेलाइट डिश और मॉडेम की आवश्यकता होती है। जब यूजर्स कोई इंटरनेट रिक्वेस्ट करते हैं, जैसे किसी वेबसाइट को खोलना, तो यह रिक्वेस्ट पहले सैटेलाइट डिश से एक सैटेलाइट तक भेजा जाता है। सैटेलाइट यूजर्स की रिक्वेस्ट को धरती पर स्थित नेटवर्क ऑपरेशन सेंटर (NOC) पर भेजता है। यह सेंटर इंटरनेट से जुड़ा होता है। वहां से आवश्यक डेटा एकत्रित कर सैटेलाइट के माध्यम से वापस यूजर्स की डिवाइस तक भेजा जाता है। सैटेलाइट द्वारा भेजा गया डेटा यूजर्स की डिश पर रिसीव होता है फिर मॉडेम इसे डिकोड करता है और इसे यूजर्स के कंप्यूटर या अन्य डिवाइस तक पहुंचाता है। सैटेलाइट इंटरनेट के प्रमुख हिस्से     ग्राउंड स्टेशन: ये स्टेशन सैटेलाइट को डेटा भेजते और प्राप्त करते हैं और इन्हें NOC कहा जाता है।     सैटेलाइट: सैटेलाइट को धरती की कक्षा में रखा जाता है और यह दूरसंचार के लिए इस्तेमाल होता है।     यूजर डिवाइस: यूजर्स के पास एक सैटेलाइट डिश और मॉडेम होता है जो सैटेलाइट से सिग्नल भेजने और प्राप्त करने के लिए जरूरी होता है। सैटेलाइट इंटरनेट के फायदे     दूरस्थ क्षेत्रों में कनेक्टिविटी: यह उन क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं प्रदान करता है जहां केबल या मोबाइल टावर की पहुंच नहीं होती।     मोबिलिटी: आप इसे कहीं भी सेट कर सकते हैं जहां सैटेलाइट सिग्नल उपलब्ध हो। सैटेलाइट इंटरनेट के नुकसान     लेटेंसी (विलंब): सिग्नल को सैटेलाइट तक और वापस आने में समय लगता है, जिससे विलंब (Latency) बढ़ सकता है।     मौसम पर प्रभाव: खराब मौसम, जैसे बारिश या बर्फबारी, सिग्नल की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।  

8 जून को पीलूपुरा में गुर्जर समाज की महापंचायत का आयोजन

भरतपुर जिले के बयाना उपखंड स्थित पीलूपुरा गांव में 8 जून को गुर्जर समाज की महापंचायत आयोजित की जाने वाली है। इस महापंचायत में समाज की विभिन्न मांगों को लेकर भविष्य की आंदोलनात्मक रणनीति तय की जाएगी। पीलूपुरा वही ऐतिहासिक स्थल है, जहां से गुर्जर आंदोलनों की शुरुआत होती रही है। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय बैसला ने पीलूपुरा शहीद स्थल पर श्रद्धांजलि सभा के दौरान महापंचायत की घोषणा की थी। इसके बाद से समाज के लोग गांव-गांव जाकर पीले चावल बांट रहे हैं और लोगों को महापंचायत में शामिल होने का न्योता दे रहे हैं। रेलवे ट्रैक और स्टेट हाईवे से 100 मीटर की दूरी पर महापंचायत स्थल निर्धारित किया गया है, जहां बड़ी संख्या में समाज के लोग जुटेंगे। भरतपुर के पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने संभावित स्थल का निरीक्षण कर सुरक्षा और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि प्रशासन वार्ता के लिए तैयार है और सामाजिक प्रतिनिधियों से लगातार संवाद किया जा रहा है। इधर संभागीय आयुक्त डॉ. अमित यादव की अध्यक्षता में गुर्जर समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की गई। बैठक में समाज की प्रमुख मांगों को सामने रखा गया, जिनमें पूर्व भर्तियों में बैकलॉग पदों को भरना, स्कूटी योजना का लाभ न मिलना, और देवनारायण बोर्ड की गतिविधियों में समाज की भागीदारी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। डॉ. अमित यादव ने आश्वस्त किया कि समाज की हर उचित मांग को सरकार के समक्ष रखा जाएगा। इस अवसर पर आईजी राहुल प्रकाश ने प्रतिनिधियों को देश की मौजूदा सुरक्षा स्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि वर्तमान में  ऑपरेशन सिंदूर सहित कई मॉक ड्रिल चल रही हैं, ऐसे में कोई भी भड़काऊ संदेश देश की सुरक्षा पर असर डाल सकता है। हालांकि गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति का कहना है कि इस बैठक से उनका कोई संबंध नहीं है। समिति का कहना है कि समाज की मांगों पर सरकार अब तक गंभीर नहीं रही है, जिस कारण फिर से आंदोलन की राह अपनानी पड़ रही है।

Pakistan का हाल बदहाल… बढ़ रही है गरीबी, World Bank ने किया बड़ा खुलासा

कराची लंबे समय से आर्थिक संकट झेल रहे पाकिस्तान (Pakistan Economic Crisis) में आईएमएफ (IMF) से लेकर तमाम वैश्विक निकायों से मिल रही वित्तीय सहायता के बाद भी हाल बदहाल हैं. लोग गरीबी में घुसते जा रहे हैं और महंगाई के कोहराम के चलते लोगों को खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जूझना पड़ रहा है. इन सबके बीच पाकिस्तान गीदड़भभकियां देते हुए भारत से पंगा लेता रहता है और हर बार उसे मुंह की खानी पड़ती है. Paksitan में लगातार गरीबी बढ़ रही है और ये हम नहीं कह रहे, बल्कि खुद विश्व बैंक (World Bank) की रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है और साथ ही गरीबी बढ़ने का बड़ा कारण भी बताया गया है. खास बात ये है कि ये रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब जून में World Bank द्वारा पाकिस्‍तान के लिए 20 अरब डॉलर का अमाउंट अप्रूव करने की बातें कही जा रही हैं.  पाकिस्तान की करीब आधी आबादी गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर कर रही है। वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान की 45 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन गुजार रही है। वर्ल्ड बैंक के डेटा में यह जानकारी दी गई है। विश्व बैंक ने 2018-19 के सर्वे के अनुसार यह बात कही है। बैंक का कहना है कि गरीबी रेखा से जीवन स्तर ऊपर उठाने के मामले में पाकिस्तान की स्थिति लगातार खराब हो रही है। यही नहीं अति-निर्धनता में जीने वाले पाकिस्तानियों की संख्या बीते कुछ सालों में 4.9 फीसदी से बढ़कर 16.5 पर्सेंट हो गई है। विश्व बैंक ने वैश्विक गरीबी इंडेक्स को अपडेट किया है और उसमें पाकिस्तान की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसकी वजह यह है कि बीते कुछ सालों में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में कोई ग्रोथ नहीं है। विश्व बैंक का कहना है कि इंटरनेशनल पॉवर्टी लाइन 3 डॉलर मासिक की कमाई पर आधारित है। पाकिस्तान में ऐसे लोग 45 फीसदी हैं, जिनकी कमाई महीने में तीन डॉलर भी नहीं है। इसके अलावा पाकिस्तान अति निर्धन परिवारों की संख्या में इजाफे की एक और वजह है। वह है इंटरनेशनल पॉवर्टी इंडेक्स में बदलाव होना। पहले इंटरनेशनल पॉवर्टी इंडेक्स का मानक 2.15 डॉलर था, जो अब बढ़कर 3 डॉलर हो गया है। इससे पहले कम आय वाले देशों यानी LIC के लिए प्रति व्यक्ति आय की दर वर्ल्ड बैंक ने 2.15 डॉलर निर्धारित की थी। तब पाकिस्तान के 4.9 फीसदी लोग अति निर्धन माने गए थे। अब यह मानक बढ़कर 3 डॉलर प्रतिदिन हो गया है। इसके साथ ही आंकड़ा भी अब 16.5 पहुंच गया है। बता दें कि पाकिस्तान गरीबी के साथ ही स्वास्थ्य और शिक्षा के मानकों में भी फिसड्डी है। यहां तक कि पाकिस्तान में बीते करीब डेढ़ सालों में पोलियो के ही 81 केस मिल चुके हैं। ऐसा तब है, जब दुनिया के तमाम देश पोलियो मुक्त हो चुके हैं। वहीं अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अब भी पोलियो के केस पाए जाते हैं। मदद के बाद भी नहीं सुधरे PAK के हालात बीते कुछ सालों में सोशल मीडिया पर Pakistan की बदहाली की तमाम तस्वीरें वायरल हुईं और आर्थिक तंगी के बीच लोग आटा-दाल से लेकर गैस-पानी तक के लिए जान की बाजी लगाते हुए नजर आए. ये हाल पाकिस्तान में तब हैं, जब उस पर तरस खाते हुए IMF-World Bank ने बड़ी रकम दी है. लेकिन आतंक का पनाहगार देश आम लोगों के जीवन में बदलाव के बजाय इसे आतंकियों पर लुटाने में लगा है, हाल ही में पहलगाम हमले के बाद भारत से बढ़े तनाव के बीच ये खुलकर सबसे सामने आ गया और आईएमएफ को भी इसका एहसास हुआ. इसके चलते उसने जो 1 अरब डॉलर की अतिरिक्त आर्थिक मदद के साथ पाकिस्तान के लिए बेलआउट को मंजूरी दी थी, उसके तुरंत बाद 11 नई शर्तें लगातार पाकिस्तान को झटका दिया. पाकिस्तान की बदहाल की हाल ये है कि देश पर 131 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज है, जो इसकी जीडीपी (Pakistan GDP) का करीब 42 फीसदी है, तो महंगाई, भुखमरी और बेरोजगारी की मार से जनता कराह रही है.   पाकिस्तान में गरीबी बढ़ने के पीछे GST अब वर्ल्ड बैंक (World Bank) की एक नई रिपोर्ट आई है और इसमें पाकिस्तान में बढ़ती गरीबी के पीछे के कारणों के बारे में बड़ा खुलासा किया गया है. इसमें वैश्विक निकाय ने कहा है कि पाकिस्तान की गरीबी (Pakistan Poverty) बढ़ने के पीछे जनरल सेल्स टैक्स यानी GST अहम रोल निभा रहा है. ‘द इफेक्ट्स ऑफ टैक्सेज एंड ट्रांसफर्स ऑन इनइक्वलिटी एंड पावर्टी इन पाकिस्तान’ शीर्षक वाली अपनी रिपोर्ट में वर्ल्ड बैंक ने दावा किया है कि जीएसटी भुगतान पाकिस्तानी परिवारों के प्री-टैक्स एक्सपेंडिचर का 7 फीसदी से ज्यादा है, जो गरीब और कमजोर परिवारों को और गरीब बनाने का काम कर रहा है. Dawn की एक रिपोर्ट में भी वर्ल्ड बैंक की रिसर्च का हवाला देते हुए कहा गया है कि व्यक्तिगत राजकोषीय साधनों के सीमांत योगदान का अनुमान और व्यक्तिगत राजकोषीय साधनों का गरीबी या असमानता पर अतिरिक्त प्रभाव जब अन्य सभी राजकोषीय साधनों को शामिल किया जाता है, तो यह साफ प्रदर्शित करता है कि जनरल सेल्स टैक्स का पाकिस्तान में राष्ट्रीय गरीबी वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान है. PAK Govt के लिए बड़ी सलाह वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में पाकिस्तान को इस खतरे से आगाह करने के बाद इससे बचाव का की सलाह भी दी है और सुझाव देते हुए कहा है कि पाकिस्तान सरकार को डॉमेस्टिक रेवेन्यू कलेक्शन और पब्लिक एक्सपेंडिचर में सुधार करना होगा. फिस्कल इक्विटी में सुधार के लिए ये करना जरूरी है. इसके अलावा वैश्विक निकाय ने पाकिस्तान में पब्लिक हेल्थ और एजुकेशन तक पहुंच बढ़ाने के लिए सुधार लागू करने पर भी जोर दिया है, जो देश में गरीबी और असमानता को कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. इसके साथ ही World Bank ने पाकिस्तान के टैक्स सिस्टम की कमियों को उजागर करते हुए कहा है कि पाकिस्तान के लिए मुसीबत ये है कि उसने इनडायरेक्ट टैक्सों पर ज्यादा फोकस किया है और सब्सिडी एक्सपेंडिचर से रेवेन्यू अर्जित करने का रास्ता चुना है.  

2025 में हर हालत में दौड़ेगी धार इंदौर ट्रेन !204 किलोमीटर लंबी नई रेललाइन, इन जिलों से गुजरेगी

इंदौर-दाहोद रेल लाइन प्रोजेक्ट के तहत 2.9 किमी लंबी टनल का निर्माण कार्य हुआ पूरा  इंदौर-दाहोद रेल लाइन के लिए टनल में पटरी बिछाने का काम इसी महीने से शुरू होगा 2025 में हर हालत में दौड़ेगी धार इंदौर ट्रेन !204 किलोमीटर लंबी नई रेललाइन, इन जिलों से गुजरेगी  इंदौर इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन प्रोजेक्ट में पिछले तीन वर्षों से युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। 204 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट को अलग-अलग सेक्शन में पूरा किया जा रहा है। इंदौर-टीही सेक्शन पर रेल कनेक्टिविटी होने के बाद अब टीही से धार सेक्शन का काम चल रहा है। इस सेक्शन में 270 करोड़ की लागत से बन रही 2.9 किमी लंबी टनल की फिनिशिंग का काम जारी है। टीही-धार सेक्शन में 46 किमी के हिस्से में रेल लाइन बिछाने, अर्थवर्क, स्टेशन भवन, आरओबी, अंडरपास आदि काम तेजी से किए जा रहे हैं। टनल की फाइनल फिनिशिंग जारी रेलवे ने टनल का काम सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है, ताकि दिसंबर तक इंदौर-धार के बीच ट्रेन संचालन शुरू हो सके। टनल बनने के बाद अब फाइनल फिनिशिंग की जा रही है। अब तक 800 मीटर में लाइनिंग का काम पूरा किया जा चुका है। एक माह से एक साथ पांच मशीनें काम कर रही हैं। पानी का रिसाव रोकने के लिए जेंट्री के माध्यम से वाटरप्रूफ जियो टेक्सटाइल और मेमरीन लगाई जा रही है। इसके बाद भी पानी का रिसाव होने की स्थिति में ड्रेन लाइन भी बनाई गई है। रेलवे अफसरों के अनुसार इसी माह सुरंग के आधे हिस्से में ट्रैक बिछाने काम भी शुरू कर दिया जाएगा। सुरंग एक नजर में     2007-08 में रेलवे ने आठ हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की थी।     इसके बदले करीब चार करोड़ रुपये का मुआवजा दिया।     तीन किमी के दायरे में 15 मीटर चौड़ाई की जमीन का किया उपयोग।     सुरंग से दो लाख 34 हजार क्यूबिक मीटर मलबा निकाला गया।     अब तक 800 मीटर हिस्से में टनल पूरी तरह तैयार हो चुकी है। इसलिए जरूरी प्रोजेक्ट पश्चिम रेलवे के सीपीआरओ विनीत अभिषेक ने बताया कि इंदौर-दाहोद रेल प्रोजेक्ट काफी अहम है। यहां ट्रेन संचालन होने से इंदौर-मुंबई के बीच रेल मार्ग की दूरी कम हो जाएगी। आजादी के बाद अब धार, आलीराजपुर, झाबुआ सहित मप्र और गुजरात के जो क्षेत्र अब तक ट्रेन से अछूते थे, उन्हें ट्रेन सुविधा मिल जाएगी। इसके साथ ही पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र का गुड्स सीधे मुंबई, साउथ व अन्य पोर्ट पर सीधे चला जाएगा। सागौर रेलवे स्टेशन से ही मल्टी लाजिस्टिक पार्क के लिए रेल लाइन की कनेक्टिविटी रहेगी। स्टेशन से पार्क करीब तीन किमी दूर बन रहा है। 6 साल से चल रहा टनल का काम इंदौर-दाहोद रेल लाइन में टिही टनल का काम ही सबसे अहम था। 6 साल से तीन किलोमीटर लंबी टनल बनाने का काम चल रहा था। रेलवे के द्वारा पिछले साल ही इसका सिविल वर्क पूरा कर लिया गया था। टनल के आगे के हिस्से की बात करें तो फिनिशिंग से पीथमपुर, पीथमपुर से गुनावद के बीच रेलवे ने ट्रैक बिछा दिया है। इंदौर से सीधा कनेक्ट होगा धार जल्द ही इंदौर से धार कनेक्ट हो जाएगा। यह प्रोजेक्ट साल 2008 में स्वीकृत हुआ था। जिसमें पहले टनल का प्रस्ताव नहीं था। बाद से प्रोजेक्ट में आधिकारियों द्वारा टनल को जोड़ा गया। साल 2017-18 में टेंडर जारी किए गए थे। इसके बाद काम शुरु हुआ, लेकिन कोरोना शुरु किया गया था। 2017-18 में टेंडर जारी हुए थे। इसके बाद काम शुरू हुआ। हालांकि, कोविड के बाद रेलवे ने इस प्रोजेक्ट को फ्रीज कर टेंडर शॉर्ट टर्मिनेट कर दिया। बता दें कि, टिही – पीथमपुर टनल के बनने से अब इंदौर से दाहोद के लिए सीधी रेलवे लाइन उपलब्ध होगी। जिससे इंदौर से दाहोद, गुजरात और महाराष्ट्र का सफर आसानी से किया जा सकेगा।    

एम्स में न्यूक्लियर मेडिसिन से कैंसर का इलाज, ऐसा करने वाला प्रदेश का एकमात्र अस्पताल

 रायपुर  राजधानी रायपुर स्थित एम्स प्रदेश के सबसे बड़े अस्पतालों में से है। जहां लगभग हर तरह के रोगों का इलाज किया जाता है। रायपुर का एम्स अब कैंसर जैसी बीमारियों का पता लगाने और उनका इलाज करने में और भी आगे बढ़ गया है। बता दें कि एम्स ने अपने न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में एक खास मशीन लगाई है, जिसे आटोमेटेड रेडियो सिंथेसाइजर और गैलियम जनरेटर कहते हैं। इस नई मशीन के आने से एम्स रायपुर छत्तीसगढ़ का एकमात्र ऐसा सरकारी अस्पताल बन गया है, जहां कैंसर का पता लगाने वाले खास इंजेक्शन (जिन्हें रेडियोट्रेसर कहते हैं) खुद ही बनाए जा सकेंगे। पहले ये इंजेक्शन बाहर से मंगवाने पड़ते थे। मरीजों का इलाज होगा आसान डाक्टरों का कहना है कि ये नए इंजेक्शन बीमारियों का पता लगाने में बहुत सटीक हैं, खासकर उन बीमारियों में जो जटिल होती हैं। अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि अपनी दवाएं खुद बनाने से मरीजों को जल्दी इलाज मिल पाएगा और बाहर की कंपनियों पर निर्भरता भी कम होगी। यह नई सुविधा कैंसर के इलाज में एक नई क्रांति लाएगी, खासकर प्रोस्टेट, पेट और स्तन कैंसर में।

जल्द लाखों यात्री वंदे भारत ट्रेन से भोपाल से पटना और लखनऊ की यात्रा कम समय में पूरी कर सकेंगे

भोपाल  देश के तीन राज्यों को जल्द बड़ी सौगात मिलने वाली है। इससे मध्यप्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश का सफर आसान हो जाएगा। वंदे भारत एक्सप्रेस इन तीन राज्यों की राजधानियों को जोड़ेगी। लाखों यात्री वंदे भारत ट्रेन से भोपाल से पटना और लखनऊ की यात्रा कम समय में पूरी कर सकेंगे। दरअसल प्रदेश की राजधानी भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से दो नई वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू होने जा रही हैं। इससे लाखों यात्रियों को फायदा होगा। बता दें कि रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से डायरेक्ट ट्रेन चलती है। इन ट्रेनों को पटना पहुंचने में करीबन 18 घंटे का समय लगता है। भोपाल से बिहार की दूरी लगभग 1 हजार किलोमीटर है। वहीं भोपाल से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की दूरी करीब 584 किलोमीटर है और ट्रेन से यह दूरी तय करने में करीब 10 घंटे का वक्त लगता है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन(Vande Bharat Express) के आने से ये सफर तय करना काफी आसान हो जाएगा। यात्री कम समय में भोपाल से पटना और लखनऊ पहुंच सकेंगे। जल्द होगा ऐलान जानकारी के मुताबिक, वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को लेकर भोपाल रेलवे डिवीजन और पटना डिवीजन मिलकर इसकी तैयारियां कर रही हैं। बताया जा रहा है कि रेलवे बोर्ड जल्द ही नई वंदे भारत के शेड्यूल, स्टॉपेज को लेकर ऐलान कर सकती है। बता दें कि, इस ट्रेन में यात्रियों को कई तरह की सुविधाएं मिलेगी। इसमें एसी चेयरकार और एक्सक्लूसिव क्लास दोनों की व्यवस्था उपलब्ध होगी।

प्रदेश में जल संरक्षण की यात्रा दिन प्रति दिन मजबूती से आगे बढ़ रही

भोपाल प्रदेश में जल संरक्षण की यात्रा दिन प्रति दिन मजबूती से आगे बढ़ रही है। जनभागीदारी से जल संरचनाओं के संरक्षण और सफाई के कार्य हाथ में लिये गये है। ऐतिहासिक, संस्कृतिक और धार्मिक महत्व वाले जल स्त्रोतों के सफाई के कार्य को प्राथमिकता दी जा रही है। नर्मदा पथ पर यात्रा के माध्यम से नदी किनारे ग्रामों में जल चौपाल कर ग्रामीणों को नदी के आसपास साफ सफाई के महत्व के बारे में जानकारी दी जा रही है। जल है जीवन की धारा, कल का यही सहारा शहडोल जिले में स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से जल संवर्धन का कार्य लगातार किया जा रहा है। इसी के साथ जल है जीवन की धारा, कल का यही सहारा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर “जल गंगा सवंर्धन अभियान” 30 मार्च से 30 जून तक चलाया जा रहा है। यह अभियान जन-जन के जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण अभियान है। अभियान के अंतर्गत जहां एक ओर नये तालाब बनाये जा रहे, वहीं दूसरी ओर पुराने तालाबों, बावड़ियों और कुँओं का जीर्णाद्वार का कार्य भी किया जा रहा है।  नदियों को साफ-स्वच्छ एवं जल एकत्रित करने के लिए भी कार्य किए जा रहे हैं। इस अभियान के तहत ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व वाले तालाबों, जल स्रोतों तथा देवालयों में जल संरक्षण के कार्य भी किये जा रहे हैं। अभियान जन प्रतिनिधियों, स्थानीय समुदाय, जनभागीदारी, आमजन और सरकार के संयुक्त प्रयास से संचालित हो रहा है। अभियान में मशीन, सामग्री और श्रम का समुचित नियोजन किया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत शहडोल जिले के जनपद पंचायत सोहागपुर के ग्राम पंचायत मैकी, ग्राम पंचायत दुलादर  सहित अन्य ग्राम पंचायतों में नवीन खेत तालाब के कार्य किये गए है। ग्राम समर्रा में नल कनेक्शनों में टोटियां लगायी गयी टीकमगढ़ कलेक्टर श्री विवेक श्रोत्रिय के निर्देशानुसार जिले में जलगंगा संवर्धन अभियान कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसी क्रम में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जल जीवन मिशन के तहत ग्राम समर्रा में एकल जल प्रदाय योजना के अंतर्गत नल कनेक्शनों में टोंटियां लगायी गईं। ग्रामीणों को पानी के अनावश्यक बहने से राकेने की समझाइश दी गई। ग्राम समर्रा में करीब 20 घरों के नल कनेक्शनों में टोटियों को लगाया गया। यह पहल ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश से की गई है। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि पानी भरते ही नल की टोटी बंद कर देना चाहिए, जिससे जल को बर्बाद होने से रोका जा सके। अभियान पर केन्द्रित प्रदर्शनी का सरपंचों ने किया अवलोकन राज्य सरकार के निर्देश पर 30 मार्च से प्रारंभ हुए प्रदेश स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जनसहभागिता से निरंतर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। आगामी 30 जून तक संचालित होने वाले इस महत्वाकांक्षी अभियान में प्राचीन जल स्त्रोतों एवं कुएं व बावड़ियों के जीर्णाद्धार कार्य सहित जल संरक्षण के लिए विभिन्न योजनाओं अंतर्गत खेत तालाब निर्माण इत्यादि का कार्य ग्रामवासियों के सहयोग से क्रियान्वित हो रहा है। अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की जा रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान में विभिन्न कार्यों को जनसहभागिता से बेहतर रूप में क्रियान्वित करने की कार्ययोजना बनाई गई है। जिले के सभी विकासखण्ड में अभियान के तहत पूर्ण हो चुके एवं प्रगतिरत कार्यों के बारे में जानकारी तथा तकनीकी पहलुओं से अवगत कराने के लिए जिला पंचायत परिसर में प्रदर्शनी लगाई गई। करीब 90 सरपंचो ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर कार्यों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। पंचायत प्रतिनिधियों को जल की स्वच्छता एवं कचरा के उचित निस्तारण की जानकारी दी गई। अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों के प्रश्नों का समाधान भी किया गया। एक्सपोजर विजिट में सरपंचों को जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए अच्छे कार्यों का महत्व बताया गया। प्रदर्शनी में ग्रामीण क्षेत्र और पंचायतों के उत्कृष्ट कार्यों को प्रदर्शित किया गया। तालाब में किया गया श्रमदान दमोह जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में स्वच्छता ही सेवा का 49वें सप्ताह के अंतर्गत पाठक कॉलोनी तालाब में श्रमदान किया गया। कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर, जनप्रतिनिधियों,  विभिन्न सामाजिक संगठन, स्वंयसेवी संस्थाओं ने अपनी सहभागिता निभाई। यह श्रमदान कार्य पिछले 48 सप्ताह से जारी हैं। जिले में जल स्त्रोतों मे सीवेज का गंदा पानी न मिले इसके लिये सोक पिट का निर्माण किया गया है। जिले में सिंचाई की नहर प्रणाली की सफाई व्यवस्था में किसानों की सहभागीता सुनिश्चित की जा रही है। भरहटा में बावडी की सफाई सतना जिले में उचेहरा विकासखंड के कबीर आश्रम ग्राम पंचायत भरहटा में बावड़ी स्वच्छता कार्यक्रम में जनभगीदारी से सफाई कार्य किया जा रहा है। स्थानीय पुजारी के अनुसार सम्राट अशोक के समय इस बावड़ी का निर्माण कराया गया था। बताया गया कि प्राचीन समय में राहगीर और स्थानीय गांव के लोग इसी से पानी पीते थे। श्रमदान के बाद ग्रामीणों को पेयजल स्त्रोतों की उपयोगिता की जानकारी दी गई। उन्हें शपथ दिलाई गई की वे निंरतर श्रमदान कर बावड़ी के आस पार सफाई रखेंगे। जिले में किसानों को खेत तालाब के महत्व के बारे में विभागीय अधिकारियों द्वारा जानकारी देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है।  

डॉक्टरों और तकनीशियनों को 1 जुलाई से एमजीएम मेडिकल कॉलेज में कार्निया प्रत्यारोपण का प्रशिक्षण दिया जाएगा

इंदौर नेत्रदान को बढ़ावा देने और ज्यादा लोगों तक इलाज पहुंचाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने एक नई पहल की है। अब प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में कार्निया (आंख का पारदर्शी हिस्सा) प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू की जाएगी। इसके लिए राज्य अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (SOTTO) ने प्रस्ताव बनाकर भोपाल भेजा था, जिसे मंजूरी मिल गई है। कॉर्निया ट्रांसप्लांट की हुई पहल इस योजना के पहले चरण में इंदौर और उज्जैन संभाग के 15 जिलों के अस्पतालों में प्रत्यारोपण केंद्र शुरू होंगे। इन जिलों में डॉक्टरों और तकनीकी स्टाफ को ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे अपने-अपने जिलों में यह सुविधा शुरू कर सकें। एमजीएम मेडिकल कॉलेज में शुरू होगी ट्रेनिंग ट्रेनिंग का काम 1 जुलाई से इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में शुरू होगा। डॉक्टरों को एक महीने और तकनीशियनों को 15 दिन की ट्रेनिंग दी जाएगी। यह ट्रेनिंग मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग की विशेषज्ञ टीम देगी। इस विभाग में हर साल करीब 100 कार्निया प्रत्यारोपण पहले से ही किए जाते हैं और यहां नेत्र बैंक भी है। राज्य के अधिकांश जिला अस्पतालों में पहले से ही ऑपरेशन थिएटर, माइक्रोस्कोप और जरूरी उपकरण मौजूद हैं क्योंकि वहां मोतियाबिंद जैसी सर्जरी होती है। इसलिए कार्निया ट्रांसप्लांट जैसी प्रक्रिया को भी वहां आसानी से शुरू किया जा सकता है। इन जिलों में पहले शुरू होगी सुविधा     इंदौर संभाग के – आलीराजपुर, बड़वानी, बुरहानपुर, धार, इंदौर, झाबुआ, खंडवा और खरगोन।     उज्जैन संभाग के – देवास, आगर-मालवा, शाजापुर, रतलाम, उज्जैन, मंदसौर और नीमच। एमवाय अस्पताल के नेत्र रोग विभाग की एचओडी डॉ. प्रीति रावत के अनुसार, इस पहल से उन मरीजों को राहत मिलेगी जो पैसों की कमी या दूरी के कारण बड़े शहरों में इलाज नहीं करवा पाते। अब उन्हें अपने जिले में ही आंखों के प्रत्यारोपण की सुविधा मिल सकेगी। इसके साथ ही नेत्रदान को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे ज्यादा मरीजों को रोशनी मिल पाएगी। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि यह योजना स्वास्थ्य विभाग और शासन के सहयोग से लागू की जाएगी। ट्रेनिंग खत्म होने के तीन महीने बाद हर जिले में प्रत्यारोपण केंद्र चालू हो जाएंगे।

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