LATEST NEWS

मुकेश अंबानी ने अपने शिक्षण संस्थान रहे आईसीटी को 151 करोड़ रुपये का दान किया

मुंबई रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani, Chairman and Managing Director, Reliance Industries) ने आज मुंबई के इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (Institute of Chemical Technology (ICT) को 151 करोड़ रुपए बिना शर्त देने की घोषणा की। यहां से उन्होंने 1970 के दशक में स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी। अंबानी ने आज आईसीटी में तीन घंटे से अधिक समय बिताया। आईसीटी को उस समय यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (University Department of Chemical Technology (UDCT) कहा जाता था। मुकेश अंबानी प्रोफेसर एमएम शर्मा की जीवनी ‘डिवाइन साइंटिस्ट’ के प्रकाशन के लिए आयोजित समारोह में यहां आये थे। प्रोफेसर शर्मा को बताया आर्थिक सुधारों के शांत वास्तुकार मुकेश अंबानी ने इस समारोह में याद दिलाया कि कैसे प्रोफेसर शर्मा द्वारा UDCT में दिए गए पहले व्याख्यान ने उन्हें प्रेरित किया और कैसे प्रोफेसर शर्मा ने बाद में भारत के आर्थिक सुधारों के शांत वास्तुकार (quiet architect of India’s economic reforms) की भूमिका निभाई। प्रोफेसर शर्मा ने नीति निर्माताओं को प्रभावित किया कि भारत के विकास का एकमात्र तरीका भारतीय उद्योग को लाइसेंस-परमिट-राज से मुक्त करना है। इससे भारतीय कंपनियां नये आयाम बना सकेंगी, आयात पर निर्भरता कम कर सकेंगी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगी। अंबानी ने आगे कहा, “मेरे पिता धीरूभाई अंबानी (Dhirubhai Ambani) की तरह, उनमें भी भारतीय उद्योग को अभाव से ग्लोबल लीडरशिप में बदलने की तीव्र इच्छा थी।” उन्होंने आगे कहा, “इन दो साहसी दूरदर्शी लोगों का मानना ​​था कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी, निजी उद्यमिता (private entrepreneurship) के साथ मिल कर समृद्धि के द्वार खोलेंगी।” अंबानी का भावुक अंदाज मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में मुकेश अंबानी ने अपने शिक्षक और आईसीटी के पूर्व निदेशक प्रोफेसर एम.एम. शर्मा को ‘राष्ट्र गुरु’ की डिग्री दी गई। उन्होंने कहा, “प्रोफेसर शर्मा के गाइडेंस में रिलाएंस ने मूल्य श्रृंखला में ज्यादातर बैकवर्ड और फॉरवर्ड एकीकरण हासिल किया, जिसने हमें वैश्विक स्तर पर रासायनिक उद्योग में अग्रणी बनाया।” अंबानी ने बताया कि यह अनुदान प्रोफेसर शर्मा से आग्रह किया गया है। “जब प्रोफेसर शर्मा कुछ कहते हैं, हम सिर्फ पढ़ते हैं, स्थिर नहीं। उन्होंने मुझसे कहा कि मुकेश, सुरक्षा आईसीटी के लिए कुछ बड़ा करना होगा,” अंबानी ने भावुक अंदाज में कहा। 1933 में हुई स्थापना आईसीटी, जिसे पहले यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (UDCT) के नाम से जाना जाता था, 1933 में स्थापित किया गया था। यह भारत के सबसे प्रतिष्ठित रासायनिक प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग कॉलेज में से एक है। इसकी स्थापना से लेकर अब तक, ICT ने रसायन उद्योग, अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। युनिवर्सिटी के इस अनुदान संस्थान को और अधिक मजबूत करने, आधुनिक अनुसंधान सुविधाओं को विकसित करने और छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा प्रदान करने में मदद करने की इच्छा है। अनुदान का उद्देश्य 151 करोड़ रुपये का यह अनुदान बिना किसी शर्त के दिया गया है, इसका मतलब यह है कि आईसीटी इसे अपने अनुसार उपयोग कर सकता है। विशेषज्ञ का मानना ​​है कि यह संस्थान के सुपरमार्केट, नए शोध संस्थान, और प्रोग्राम प्रोग्राम को बढ़ावा देने के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। इसके अलावा, यह आईसीटी को वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान और मजबूत करने में सहायता प्रदान करना प्रदान करता है। आईसीटी के फादर ने इस अवसर पर कहा, “मुकेश अंबानी का यह योगदान केवल हमारी वित्तीय क्षमता को बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि यह हमारे छात्रों और उपकरणों को नई ऊंचाई तक पहुंचने के लिए भी प्रेरित करता है। हम इस उद्यम के लिए उनके प्रति सहभागिता करते हैं।” मुकेश अंबानी और ICT का संबंध मुकेश अंबानी का ICT के साथ गहरा रिश्ता है। 1970 के दशक में यहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पिता धीरूभाई अंबानी के साथ मिलकर रिलायंस इंडस्ट्रीज को नई ऊंचाई तक पहुंचाया। रिलायंस आज भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी में से एक है, और इसके केमिकल और पेट्रोकेमिकल व्यवसाय के वैश्विक स्तर पर सहमति प्राप्त है। अंबानी ने अपने भाषण में इस बात पर जोर दिया कि आईसीटी में शिक्षा और प्रोफेसर शर्मा का मार्गदर्शन उनके साहस और रिश्तों की सफलता का आधार बन रहा है। प्रोफेसर शर्मा को कहा – ‘राष्ट्र गुरु – भारत का गुरु’ भारतीय रासायनिक उद्योग (Indian chemical industry) के उत्थान का श्रेय प्रोफेसर शर्मा के प्रयासों को देते हुए, अंबानी ने अपने भाषण में उन्हें ‘राष्ट्र गुरु – भारत का गुरु’ कहा। अपनी तरफ से गुरु दक्षिणा देने की बात करते हुए मुकेश अंबानी ने प्रोफेसर शर्मा के निर्देशानुसार आईसीटी को 151 करोड़ रुपए की बिना शर्त सहायता देने की घोषणा की। अनुदान का जिक्र करते हुए अंबानी ने कहा, “जब वे हमें कुछ बताते हैं, तो हम बस सुनते हैं। हम सोचते नहीं हैं। उन्होंने मुझसे कहा, ‘मुकेश, तुम्हें आईसीटी के लिए कुछ बड़ा करना है और मुझे प्रोफेसर शर्मा के लिए यह घोषणा करते हुए बहुत खुशी हो रही है।”

इंदौर-धार रेल लाइन का काम तेज, इस साल के अंत तक इंदौर से धार तक ट्रेन चलाई जाएगी

इंदौर इंदौर शहर का डेड एंड खत्म करने के लिए इंदौर-दाहोद रेल लाइन का काम तेजी से चल रहा है। रेलवे ने इस प्रोजेक्ट के इंदौर-धार रेल लाइन का काम तेज कर दिया है। पहले इस साल के अंत तक इंदौर से धार तक ट्रेन चलाई जाएगी। इस क्षेत्र में आज तक ट्रेन नहीं पहुंची है। पीथमपुर, सागौर, गुणावद, टीही में पटरियां बिछाने, स्टेशनों और ब्रिजों का काम तेजी से चल रहा है। सालों से अटका है प्रोजेक्ट 204.76 किमी में इंदौर-दाहोद रेल लाइन प्रोजेक्ट वर्षों से अटका है। प्रोजेक्ट के लिए 1873.10 करोड़ रुपए मिले हैं। सीपीआरओ विनीत अभिषेक ने बताया कि इंदौर-धार तक करीब 75 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। धार लाइन से इंदौर का दाहोद, छोटा उदयपुर के जरिये मुंबई-गुजरात से सीधा जुड़ाव होगा। रतलाम रेल मंडल के पीआरओ खेमराज मीना ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की सबसे महत्वपूर्ण टीही टनल का काम अंतिम दौर में है। धार तक 21 ब्रिज बनने हैं, जिनमें से 19 का काम पूरा हो गया है। धार का स्टेशन मांडू के जहाज महल की प्रतिकृति में बनाया जा रहा है। इन रूटों पर चल रहा काम     इंदौर से टीही : 21 किमी-राऊ से धार के लिए रेल लाइन जानी है। राऊ से टीही तक 21 किमी ट्रैक बना है। टीही तक मालगाड़ियों का संचालन जारी है।     टीही से पीथमपुर : 8.29 किमी-इस हिस्से की लाइन टीही से शुरु होती है। टीही से पीथमपुर तक पटरियां बिछ चुकी हैं। राऊ से ट्रैक और पटरियों के बीच टनल का काम अंतिम दौर में है।     पीथमपुर से सागौर : 9.12 किमी-पीथमपुर से सागौर के बीच पटरियां बिछ गई हैं। पीथमपुर में स्टेशन की फिनिशिंग बाकी है। भूमि अधिग्रहण के कारण कुछ काम बाद में होगा।     सागौर से गुणावद : 15.14 किमी-4 किमी के हिस्से में ट्रैक डल गया है। बाकी में अर्थ वर्क का काम हो चुका है। पटरियां बिछाई जानी हैं। दो ब्रिज का काम शेष है, बाकी काम हो गए हैं। स्टेशन का काम अंतिम दौर में है।     गुणावद से धार: 14.02 किमी-9.8 किमी तक पटरियां डाली जा चुकी हैं। 2 ब्रिज का काम चल रहा है। धार में स्टेशन का स्ट्रक्चर खड़ा हो गया है। अर्थ वर्क के बाद पटरियां डाली जाएंगी। यहां स्टेशन मांडू के जहाज महल की तर्ज पर बनाया जा रहा है। धार से आगे तिरला तक अर्थ वर्क चल रहा है।

अगर दोनों भाई साथ आ रहे हैं तो… हमें राज ठाकरे के आने से कोई दिक्कत नहीं है: सुप्रिया सुले

मुंबई महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारे में एक बार फिर उद्धव और राज ठाकरे की पार्टियों के बीच अलायंस की खबरें हैं. इस बीच, शरद पवार की बेटी और NCP (SP) सांसद सुप्रिया सुले की प्रतिक्रिया आई है. सुले ने कहा, लोकतंत्र में सभी को अधिकार है कि किसे-किसके साथ जाना है… जितने पार्टनर आएंगे तो अच्छा है महाविकास अघाड़ी के लिए. एक साथ मिलकर महाराष्ट्र के लिए काम करेंगे. ताकत बढ़ेगी. अच्छी बात है कि अगर दोनों भाई साथ आ रहे हैं तो… हमें राज ठाकरे के आने से कोई दिक्कत नहीं है. इससे पहले शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा था, महाराष्ट्र के लोगों के दिल में जो है, वही होगा. हमारे और हमारे शिवसैनिकों के दिल में कोई भ्रम नहीं है. उनके (मनसे) कार्यकर्ताओं में भी कोई भ्रम नहीं है. दरअसल, उद्धव से चचेरे भाई राज ठाकरे की पार्टी के बीच अलायंस की संभावना के बारे में सवाल किया गया था. ठाकरे भाइयों द्वारा हाल में दिए गए बयानों के बाद नगर निगम चुनाव से पहले दोनों के बीच संभावित गठबंधन की अटकलें तेज हो गई हैं. उद्धव ने क्या कहा… उद्धव ने कहा, वे एक-दूसरे के संपर्क में हैं. हम संदेश नहीं भेजेंगे. हम सीधे समाचार पहुंचाएंगे. उद्धव ने यह बात तब कही, जब शिंदे सेना के स्थानीय नेता ने यूबीटी सेना जॉइन की. हालांकि, उद्धव ने इस सवाल को टाल दिया कि क्या उनकी पार्टी और मनसे के बीच किसी तरह की गठबंधन वार्ता चल रही है. राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़ने के बाद साल 2006 में नई पार्टी मनसे का गठन किया था. अमित ठाकरे बोले- एक-दूसरे से बात करें… वहीं, राज ठाकरे के बेटे और MNS नेता अमित ठाकरे ने गठबंधन पर कहा था, ठाकरे भाइयों को एक-दूसरे से बात करनी चाहिए. मीडिया में बात करने से गठबंधन नहीं होता. हमारे इस मुद्दे पर बात करने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. मुझे दोनों भाइयों के एक साथ आने से कोई दिक्कत नहीं है. अगर वो (उद्धव) चाहें तो फोन कर सकते हैं. मीडिया में बात करने से गठबंधन नहीं होता. उनके पास एक-दूसरे के मोबाइल नंबर हैं. वे एक-दूसरे से बात कर सकते हैं. MNS नेता क्या कह रहे? महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता प्रकाश महाजन ने कहा था कि अगर शिवसेना (यूबीटी) दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर वाकई गंभीर है तो आदित्य ठाकरे को आगे आकर राज ठाकरे से मिलना चाहिए. महाजन का कहना था कि शिवसेना (यूबीटी) में उचित कद के नेता को संभावित गठबंधन पर चर्चा के लिए मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे के पास जाना चाहिए. अगर किसी जूनियर नेता को बातचीत के लिए भेजा जाता है तो राज ठाकरे भी किसी जूनियर पदाधिकारी को भेजेंगे. उन्होंने कहा, अगर वाकई गठबंधन होना है तो आदित्य ठाकरे को आगे आकर राज साहब के विचारों को समझना चाहिए. अगर आदित्य ठाकरे बातचीत के लिए जाते हैं तो दोनों पक्ष गंभीरता को समझेंगे. मराठी लोगों में एक साथ आने की भावना है. अलायंस की चर्चाएं कब शुरू हुईं? ठाकरे भाइयों के बीच सुलह की खबरें उस समय तेज हुईं, जब राज ठाकरे ने कहा कि मराठी मानुष (मराठी भाषी लोगों) के हित में एकजुट होना कठिन नहीं है. राज के बयान पर उद्धव ठाकरे ने इस बात पर जोर दिया है कि वो भी छोटी-मोटी लड़ाइयां किनारे रखने के लिए तैयार हैं. बशर्ते, महाराष्ट्र के हितों के खिलाफ काम करने वालों को जगह ना दी जाए. क्या बोले सीएम फडणवीस? अलायंस की खबरों पर बीजेपी नेता और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने शुक्रवार को प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, यह राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे को तय करना है कि उनकी पार्टियों को गठबंधन करना चाहिए या नहीं. हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं है. उद्धव ठाकरे की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देना राज ठाकरे का काम है. वे तय करेंगे कि गठबंधन करना है या नहीं. अजित पवार ने भी दिया बयान… एनसीपी नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने भी कहा कि गठबंधन पर निर्णय संबंधित पार्टी प्रमुखों का विशेषाधिकार है. राज ठाकरे मनसे के प्रमुख हैं और उद्धव ठाकरे शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख हैं. वे तय करेंगे कि रेल इंजन (मनसे का चुनाव चिह्न) और जलती मशाल (सेना यूबीटी का चुनाव चिह्न) के बीच गठबंधन होगा या नहीं. यह दोनों दलों के नेताओं पर निर्भर है कि वे इस पर फैसला लें. इस मुद्दे पर आप और मेरे बीच चर्चा का क्या मतलब है.  

पश्चिमी रिंग रोड इंदौर और धार जिले के गांवों से गुजरेगा, NHAI ने मुआवजा राशि बढ़ाई, सड़क निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होगा

इंदौर  पश्चिमी रिंग रोड की मुआवजा राशि 600 करोड़ रुपये से बढ़कर एक हजार करोड़ रुपये के करीब पहुंच गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआइ) ने इंदौर और धार जिले में पश्चिमी रिंग रोड के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीनों का मुआवजा बढ़ाने का निर्णय लिया है। इंदौर जिले की तीन तहसीलों में 795 करोड़ रुपये और धार जिले की पीथमपुर तहसील में लगभग 200 करोड़ रुपये का मुआवजा पारित किया गया है। इस मुआवजा राशि के अवार्ड पारित हो चुके हैं, जिससे किसानों के खातों में राशि जल्द ही जमा होगी। पहले किसान कर रहे थे विरोध पश्चिमी रिंग रोड को लेकर किसानों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा था। शासन स्तर से निर्देश मिलने के बाद कलेक्टर आशीष सिंह ने मुआवजा देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया, जिससे किसानों का विरोध समाप्त हो गया। इसके बाद जिला प्रशासन और एनएचआई ने निजी जमीनों का सर्वे और मैपिंग का कार्य किया। 64 किमी लंबे पश्चिमी रिंग रोड में इंदौर और धार जिले की 570.5678 हेक्टेयर भूमि शामिल है, जिसमें 98.5133 हेक्टेयर शासकीय जमीन है। एनएचआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुमेश बांझल ने बताया कि पहले मुआवजे का आकलन कलेक्टर की गाइडलाइन के आधार पर किया गया था। किसानों की मांग के बाद तहसीलों में जमीनों की औसत बिक्री और खरीदी की जांच कर मुआवजे का पुनः आकलन किया गया। पहले 600 करोड़ रुपये का मुआवजा निर्धारित था, जो अब बढ़कर 1000 करोड़ रुपये हो गया है। सांवेर में सबसे अधिक 473 करोड़ मुआवजा सांवेर तहसील में सबसे अधिक 473 करोड़ रुपये का मुआवजा पारित किया गया है। जिले की तीन तहसीलों के 26 गांवों के 998 किसानों को 795 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलेगा। सांवेर तहसील के नौ गांवों के 512 किसानों को 473 करोड़ रुपये, देपालपुर के पांच गांवों के 153 किसानों को 140 करोड़ रुपये और हातोद के 12 गांवों के 333 किसानों को 182 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलेगा। धार जिले की पीथमपुर तहसील में भी लगभग 200 करोड़ रुपये का मुआवजा किसानों को मिलेगा। इस मुआवजे से किसानों को आर्थिक सहायता मिलेगी और सड़क निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ होगा।

स्टारलिंक भारत में हाई स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट देगी, ₹840 में महीनेभर अनलिमिटेड डेटा

मुंबई Elon Musk की Starlink को भारत में सर्विस शुरू करने की दिशा में एक और कामयाबी मिल गई है. SpaceX की सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस Starlink को भारत में जरूरी लाइसेंस मिल गया है. इस लाइसेंस के बाद कंपनी अपनी सर्विस को भारत में शुरू कर पाएगी. Starlink कब लॉन्च होगी, इसके बारे में फिलहाल ज्यादा जानकारी नहीं है. मगर इसकी लॉन्चिंग में अब ज्यादा वक्त नहीं है. इसके बाद सवाल आता है कि भारत में Starlink के आने से क्या बदल जाएगा, जो अब तक नहीं हुआ है. इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स को स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस भारत में ऑपरेट करने के लिए टेलीकॉम डिपार्टमेंट का लाइसेंस मिल गया है।अब उसे सिर्फ इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर यानी, IN-SPACe के अप्रूवल का इंतजार है। रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है।स्टारलिंक तीसरी कंपनी है जिसे भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस ऑपरेट करने का लाइसेंस मिला है। इससे पहले वनवेब और रिलायंस जियो को मंजूरी मिली थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्टारलिंक भारत में 840 रुपए में महीनेभर अनलिमिटेड डेटा देगा। आधिकारिक तौर पर मस्क की कंपनी ने इसकी जानकारी नहीं दी है। क्या बदल देगा Starlink? बात सिर्फ स्टारलिंक की नहीं है, बल्कि भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की है. भारत में अभी सैटेलाइट इंटरनेट शुरू नहीं हुआ है. जियो और एयरटेल भी इस रेस में शामिल होंगे और स्टारलिंक की एंट्री से इस कंपटीशन में एक इंटरनेशनल प्लेयर आएगा. इससे कंज्यूमर्स को बेहतर सर्विस मिलेगी. हालांकि, स्टारलिंग या फिर दूसरे सैटेलाइट इंटरनेट के लिए आपको ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे. सवाल है कि Starlink का क्या फायदा होगा. ये एक सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस है, जिसकी मदद से दूर-दराज के इलाकों में इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है. ऐसी जगहे जहां टावर लगाना या ऑप्टिकल फाइबर बिछाना संभव नहीं है, वहां सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है. हाल में Starlink पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था, ‘Starlink सैटेलाइट सर्विस टेलीकम्युनिकेशन के बुके में नए फूल की तरह है. पहले सिर्फ फिक्स्ड लाइन्स हुआ करती थी और उन्हें मैन्युअली लोगों तक पहुंचाना पड़ता था. आज हमारे पास ब्रॉडबैंड के साथ मोबाइल कनेक्टिविटी भी है.’ उन्होंने बताया, ‘ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी भी एस्टेब्लिश हो गई है. सैटेलाइट कनेक्टिविटी भी बहुत जरूरी है. रिमोट एरिया में तार नहीं बिछाए जा सकते हैं या टावर नहीं लग सकते हैं. ऐसी जगहों पर कनेक्टिविटी को सैटेलाइट की मदद से बेहतर किया जा सकता है.’ कितने रुपये करने होंगे खर्च? रिपोर्ट्स की मानें, तो Starlink की शुरुआत अर्बन एरिया से होगी. यहां पर इंफ्रास्ट्रक्चर को आसानी से एस्टेब्लिश किया जा सकता है और टेस्टिंग भी आसानी से हो सकती है. कंपनी भारत में अपनी सर्विस को फेज मैनर में लॉन्च कर सकती है. शुरुआत में Starlink की सर्विस चुनिंदा यूजर्स के लिए उपलब्ध होगी. वैसे Starlink की सर्विस कॉस्ट को लेकर कोई जानकारी नहीं है. हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स जरूर आई हैं, जिसमें दावा किया रहा है कि कंपनी प्रमोशनल ऑफर के साथ अपनी सर्विस को इंट्रोड्यूस कर सकती है. Starlink 10 डॉलर (लगभग 850 रुपये) का मंथली प्लान भारत में लॉन्च कर सकती है. संभव है कि Starlink का ये प्लान एक प्रमोशनल ऑफर हो. स्टारलिंक की सर्विस को इस्तेमाल करने के लिए आपको हार्डवेयर किट भी खरीदनी होगी. इस सर्विस का रेजिडेंशियल लाइट प्लान अमेरिका में 80 डॉलर (लगभग 6862 रुपये) से शुरू होता है. भारत में स्टारलिंक का स्टैंडर्ड हार्डवेयर किट लगभग 30 हजार रुपये में लॉन्च हो सकता है. सैटेलाइट्स से आप तक कैसे पहुंचेगा इंटरनेट?     सैटेलाइट धरती के किसी भी हिस्से से बीम इंटरनेट कवरेज को संभव बनाती है। सैटेलाइट के नेटवर्क से यूजर्स को हाई-स्पीड, लो-लेटेंसी इंटरनेट कवरेज मिलता है। लेटेंसी का मतलब उस समय से होता है जो डेटा को एक पॉइंट से दूसरे तक पहुंचाने में लगता है।     स्टारलिंक किट में स्टारलिंक डिश, एक वाई-फाई राउटर, पॉवर सप्लाई केबल्स और माउंटिंग ट्राइपॉड होता है। हाई-स्पीड इंटरनेट के लिए डिश को खुले आसमान के नीचे रखना होगा। iOS और एंड्रॉइड पर स्टारलिंक का ऐप मौजूद है, जो सेटअप से लेकर मॉनिटरिंग करता है। जून 2020 में सरकार ने IN-SPACe स्थापित किया था डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस ने जून 2020 में IN-SPACe को स्थापित किया था। यह स्पेस एक्टिविटीज में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को रेगुलेट करने और उसे सुविधाजनक बनाने के लिए सिंगल-विंडो एजेंसी के रूप में काम करती है। IN-SPACe नॉन-गवर्नमेंटल एंटिटीज के लिए लाइसेंसिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग और स्पेस बेस्ड स‌र्विसेज को बढ़ावा देने का काम भी करती है। कितने देशों में है स्‍टारलिंक कुछ वीडियोज और कुछ रिपोर्ट्स को देखने के बाद हमें कुछ आंकड़ें मिले हैं जिनसे अलग-अलग देशों में अलग-अलग डाटा प्‍लान की दरों का पता लगता है. स्‍टारलिंक की वेबसाइट के अनुसार कंपनी अमेरिका, यूके, जर्मनी, फ्रांस, स्‍पेन, स्विट्जरलैंड समेत यूरोप के तमाम देशों में मौजूद है. मार्च 2025 तक स्टारलिंक ने 18 अफ्रीकी देशों में आधिकारिक तौर पर लोकल सर्विसेज शुरू कर दी है.    कहां पर कितने का प्‍लान   यूएसए टुडे की रिपोर्ट के अनुसार यूके में स्‍टारलिंक रेजीडेंशियल प्‍लान पर अनलिमिटेड डेटा देता है.  वहीं वेबसाइट https://taun-tech.co.uk/ की रिपोर्ट के अनुसार स्टारलिंक यूके में तीन मुख्य टैरिफ प्लान देता है जो इंटरनेट, बिजनेस (प्रीमियम) और आरवी (एंटरटेनमेंट कैरियर्स) हैं. इंटरनेट प्लान की लागत 75 पौंड प्रति माह है जिसमें डिवाइस की कॉस्‍ट 460 पौंड है. जबकि बिजनेस (प्रीमियम) प्लान की लागत 150 पौंड प्रति माह है, जिसमें डिवाइस की कॉस्‍ट 2410 पौंड है. आरवी प्लान  95 पौंड प्रति माह पर मिलता है जिसमें डिवाइस की कॉस्‍ट 460 पौंड है. हार्डवेयर, शिपिंग और हैंडलिंग शुल्क और टैक्‍स के लिए एक्‍स्‍ट्रा 40 पौंड का भुगतान करना होता है. जबकि जो भी डिवाइस इंस्‍टॉल होती है, वह कनेक्‍शन कट करवाते समय यूजर वापस कर सकता है. अब अमेरिका की बात करते हैं तो यहां पर भी स्टारलिंक मुश्किल जोन में लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट के जरिये अनलिमिटेड सैटेलाइट इंटरनेट प्रोवाइड करने का दावा करता है. अपने घर, आरवी, कैंपर यहां तक कि वहां पर लोग नाव के लिए भी वाई-फाई की सुविधा ले सकते हैं. हाइकर्स और यात्रियों के लिए स्टारलिंक मिनी मौजूद है. यूएसए टुडे की रिपोर्ट के अनुसार स्टारलिंक प्राइसिंग … Read more

MP में 2 हजार से अधिक डॉक्टरों की भर्ती, MPPSC ने शुरू की प्रक्रिया, मेरिट के अनुसार होगी पोस्टिंग

भोपाल डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे प्रदेश के दूरस्थ इलाकों में प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जुलाई से दो हजार डॉक्टरों की सेवाएं मिलेंगी। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस और पीजी करने वाले बंध-पत्र डॉक्टरों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। विभाग ने बंधपत्र डॉक्टरों से नियुक्ति स्थल के लिए पोर्टल के जरिए 30-30 विकल्प मांगे हैं। डॉक्टर 12 जून तक विकल्प पोर्टल पर बता सकेंगे। इसके बाद पोर्टल बंद कर दिया जाएगा। जुलाई माह में इनकी नियुक्ति कर दी जाएगी। अभी ऐसे हालात     प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में अभी डॉक्टरों की कमी     4167 पद चिकित्सा विशेषज्ञों के स्वीकृत, 2563 पद इनमें खाली     5439 पद मेडिकल ऑफिसर के स्वीकृत, 1424 पद हैं खाली     639 डेंटल सर्जन के पद स्वीकृत, 392 पद इनमें खाली इसलिए पासआउट विद्यार्थियों की तैनाती कॉलेजों में एमबीबीएस में प्रवेश लेते समय छात्रों को 10 लाख रुपए का ग्रामीण सेवा बॉण्ड भरना होता है। इसके तहत एमबीबीएस और इंटर्नशिप पूरी होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में १ साल चिकित्सा सेवा देना अनिवार्य है। पीजी छात्रों के लिए अवधि 5 साल तक है। ऐसा न करने पर 10 लाख जमा करने होते हैं। मेरिट के अनुसार होगी पोस्टिंग विभाग ने शुक्रवार से पोर्टल खोला है। इस पर विकल्प और अन्य जानकारी मिलेगी। डॉक्टरों को लॉगिन आइडी और पासवर्ड मोबाइल पर भेजे हैं। पोर्टल पर जिला व संस्थावार रिक्तियों की जानकारी मिलेगी। हर स्वास्थ्य संस्था के सामने रिक्तियों की संख्या दिखेगी। वरीयता के आधार पर संस्था चुननी होगी। एक डॉक्टर अधिकतम 30 विकल्प चुन सकेंगे। फिर के अनुसार पोस्टिंग होगी। ऐसे डॉक्टरों को शासन मानदेय देगी। पिछले साल ऐसे डॉक्टरों का मानदेय 55 हजार रुपए प्रतिमाह था। विशेषज्ञों की नियुक्ति विशेषज्ञों की नियुक्ति विशेषज्ञता के अनुसार चरणबद्ध तरीके से साक्षात्कार के बाद की जाएगी। प्रत्येक विशेषज्ञता के लिए चयन सूची अलग-अलग जारी होगी। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में विशेषज्ञों के कुल तीन हजार 725 पदों से 1800 से अधिक रिक्त हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि विज्ञापित पदों में से लगभग 60 प्रतिशत ही मिल पा रहे हैं। चिकित्सा अधिकारियों के 1200 से अधिक पद रिक्त वर्ष 2023 में सीधी भर्ती से विशेषज्ञों के 888 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था, पर इनमें 506 ही मिले। कारण, एक तो आरक्षित पदों पर निर्धारित योग्यता के अनुसार डॉक्टर नहीं मिल पाते। दूसरा, जिनका चयन होता है, उनमें कुछ ज्वाइन भी नहीं करते। इसी तरह से चिकित्सा अधिकारियों के कुल पांच हजार 329 पदों में से 1200 से अधिक पद रिक्त हैं। 50 प्रतशित पद संविदा से भरने का प्रविधान स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पद विज्ञापित करने के बाद आयोग ने पिछले माह शुद्धि पत्र भी जारी किया था। इसमें 50 प्रतशित पद संविदा से भरने का प्रविधान किया गया है। संविदा के अभ्यर्थी नहीं मिलने से यह पद ओपन श्रेणी से भरे जाएंगे। इसके अतिरिक्त जिला अस्पतालों में सहायक प्रबंधक के 68 और प्रदेश भर के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के 120 पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिस तरह से नए अस्पताल बन रहे हैं उसी के अनुरूप नए पद सृजित करने की भी प्रक्रिया भी चल रही है।  

इंदौर के राजा रघुवंशी और सोनम की हनीमून यात्रा दुखद अंत में बदली, राजा रघुवंशी की वो बातें, जो सोनम की बहन ने अब बताईं

इंदौर इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी के बाद शुरू हुआ हनीमून अचानक एक खौफनाक मर्डर मिस्ट्री में बदल गया. 22 मई को शिलांग पहुंचे राजा और उनकी पत्नी सोनम की रहस्यमयी गुमशुदगी ने सनसनी फैला दी. राजा की लाश मिलने के बाद सोनम का कोई पता नहीं चल पाया है. होटल में पहुंचे से लेकर लावारिस स्कूटी मिलने तक के सबूत इस मामले की गहराई और भी बढ़ा रहे हैं. शिलांग की वादियों में हुई इस घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सोनम कहां है और राजा की मौत के पीछे क्या राज छुपा है? राजा और सोनम की शादी 11 मई को हुई थी. शादी के महज 9 दिन बाद 20 मई को दोनों हनीमून मनाने के लिए इंदौर से बेंगलुरु होते हुए गुवाहाटी पहुंचे. वहां कामाख्या देवी मंदिर के दर्शन के बाद 22 मई को वे शिलांग रवाना हुए. घरवालों के अनुसार, दोनों का प्लान सिर्फ असम तक जाने का था, लेकिन वे अचानक शिलांग कैसे और क्यों पहुंचे, यह सवाल अब गहरा रहस्य बन गया है. शिलांग में हनीमून मनाने गए इंदौर के राजा और सोनम रघुवंशी का एक CCTV फुटेज सामने आया है, जो 22 मई का बताया जा रहा है. इस फुटेज में दोनों को एक होटल के बाहर स्कूटी से आते और बैग रखते हुए देखा जा सकता है. इसके बाद वे स्कूटी से घूमने निकल जाते हैं. यह वही स्कूटी है, जो बाद में 25 किलोमीटर दूर एक पार्किंग में लावारिस हालत में मिली थी. वीडियो में सोनम ने सफेद शर्ट पहने दिखी, जो बाद में राजा के शव के पास बरामद कपड़ों से मेल खाती है. राजा की मां ने आखिरी बार 23 मई को दोपहर डेढ़ बजे सोनम से मोबाइल पर बात की थी. इस कॉल में सोनम ने बताया था कि वे लोग किसी जंगल में घूमने आए हैं, जहां एक झरना भी है. इसके आधे घंटे बाद, यानी 2 बजे सोनम का फोन बंद हो गया और फिर कभी ऑन नहीं हुआ. इसके बाद 26 मई को राजा और सोनम के भाई शिलांग पहुंचे और ईस्ट सोहना पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई. इसी दौरान उन्हें एक तस्वीर में स्कूटी का नंबर दिखा, जिससे पता चला कि वह स्कूटी एक टूरिस्ट रेंटल एजेंसी से ली गई थी. पूछताछ में पता चला कि स्कूटी 22 मई को राजा ने किराए पर ली थी. 23 मई की सुबह 6 बजे दोनों होटल से चेकआउट कर गए थे. इसके बाद उनका कोई पता नहीं चला. 24 मई की रात मवालखियत से 25 किलोमीटर दूर ओसरा हिल्स की पार्किंग में वही स्कूटी लावारिस हालत में मिली. इसके बाद पुलिस ने आसपास के इलाके में तलाशी शुरू की. 28 मई को जंगल में दो बैग मिले, जिनकी पहचान राजा और सोनम के भाई ने की. फिर 2 जून को विजाडोंग पार्किंग लॉट के नीचे एक खाई में राजा की लाश मिली. शव की पहचान दाहिने हाथ पर बने टैटू से हुई. शव के पास एक सफेद लेडी शर्ट, एक पेंट्रा टैबलेट और एक मोबाइल स्क्रीन बरामद हुई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद शिलांग पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है. अब बड़ा सवाल है कि सोनम कहां है? उसके साथ क्या हुआ? क्या यह हत्या है या कुछ और? क्या दोनों को किसी षड्यंत्र के तहत मारा गया या वे किसी खतरनाक हालात में फंस गए? शिलांग पुलिस की तफ्तीश जारी है, लेकिन इस रहस्य से पर्दा उठना अभी बाकी है. राजा रघुवंशी की वो बातें, जो सोनम की बहन ने अब बताईं सूख चुके आंसुओं से भरी आंखें, पथराए हुए चेहरे और बदहवास हालत… बुधवार की शाम एक शव जब इंदौर के पलासिया इलाके में पहुंचा तो कुछ ऐसा ही मंजर था। परिवार तो जैसे टूट ही चुका था। कुछ देर शव को घर पर रखने के बाद अंतिम यात्रा शुरू हुई और रीजनल पार्क मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार कर दिया गया। ये शव था राजा रघुवंशी का, जो चंद रोज पहले ही अपनी पत्नी सोनम के साथ हनीमून मनाने के लिए मेघालय गए थे। परिवार दोनों के लौटने का इंतजार कर रहा था, लेकिन वापस केवल राजा की लाश लौटी। सोनम अभी भी लापता है। वो कहां है, उसके साथ क्या हुआ, किसी को कुछ नहीं पता। शादी के बंधन में बंधे इस कपल से किसी की क्या दुश्मनी थी, जो इनसे सारी खुशियां छीन ली गईं। आखिर, सिलसिलेवार ये पूरी कहानी समझते हैं। वो 11 मई 2025 का खूबसूरत दिन था, जब मध्य प्रदेश के इंदौर में दो प्यार भरे दिल, अग्नि को साक्षी मानकर एक दूसरे के साथ जीने मरने का वचन लेते हैं। नाम था राजा रघुवंशी और सोनम। नई जिंदगी में कदम रखने की खुशी और आंखों में बहुत सारे सपने लिए, दोनों 20 मई को हनीमून के लिए निकलते हैं। पहले सोचा था कि कश्मीर की वादियों में एक-दूसरे का हाथ पकड़कर घूमेंगे, लेकिन पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद दोनों ने हनीमून के लिए मेघालय को चुना। राजा और सोनम बेंगलुरू होते हुए असम के गुवाहाटी पहुंचते हैं और मां कामाख्या के दर्शन करने के बाद मेघालय के शिलॉन्ग के लिए रवाना हो जाते हैं। दोनों एक होमस्टे में रुकते हैं और अगले दिन किराए की स्कूटी लेकर घूमने निकल जाते हैं। कुछ देर बाद ही दोनों का संपर्क परिवार से टूट जाता है। जब काफी देर तक बात नहीं होती, तो परिवार परेशान हो जाता है और मेघालय पुलिस को मामले की खबर दी जाती है। हर तरफ राजा और सोनम की तलाश शुरू हो जाती है। मोबाइल बंद हो चुका था, दोनों की आखिरी लोकेशन की भी कोई जानकारी नहीं। परिवारों वालों का दिल डर से भरा हुआ था कि ठीक 11 दिन बाद, 2 जून को को राजा रघुवंशी की लाश एक झरने के पास खाई में मिलती है। लाश बुरी तरह सड़ चुकी थी और पास में एक दाओ (बड़े साइज का चाकू) भी मिलता है। मौके पर जो हालात थे, उन्हें देखकर अंदाजा हो जाता है कि किसी ने बेरहमी के साथ राजा की हत्या की है। सोनम अभी भी लापता है। पुलिस उसकी तलाश में चप्पा-चप्पा खंगाल रही है। … Read more

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live