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पुस्तक केवल पठन नहीं, सोच की नींव होती है : मंत्री टेटवाल

भोपाल  कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)श्री गौतम टेटवाल ने राजगढ़ जिले के सारंगपुर जनपद मुख्यालय में विकासखंड स्तरीय पुस्तक मेले का शुभारंभ किया। पुस्तक को बच्चों के हाथों तक पहुंचाने की इस पहल को उन्होंने शिक्षा की दिशा में एक व्यावहारिक, प्रभावी और दूरगामी प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा की यात्रा तब सार्थक होती है, जब हर विद्यार्थी को समय पर समुचित संसाधन और सही मार्गदर्शन मिले। “पुस्तक केवल पढ़ने की वस्तु नहीं होती, यह सोचने की आदत, जीवन की दृष्टि और आत्मविश्वास का आधार बनाती है। हम बच्चों को शुरुआती दौर में यह सुविधा दे पाएं, तो उनका भविष्य सशक्त होगा और समाज भी अधिक सजग बनेगा। मंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि शिक्षा को सुलभ और गरिमामयी बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है, और इस प्रकार के आयोजन इसी दिशा में सार्थक कदम हैं। जनपद शिक्षा केंद्र एवं समग्र शिक्षा अभियान सारंगपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस पुस्तक मेले का मुख्य उद्देश्य अशासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों, गणवेश, स्टेशनरी एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री को किफायती दरों पर उपलब्ध कराना है। पुस्तक मेले में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक एवं स्कूल प्रतिनिधि शामिल हुए। बच्चों में किताबें स्वयं चुनने का उत्साह देखा गया, तो वहीं शिक्षकों ने इस पहल को शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने वाला बताया। कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी पसंद की किताबें खरीदीं और पहली बार शिक्षा को अपनी पसंद के रूप में अपनाने का अनुभव किया।  

पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता को घर-घर तक पहुंचाने की संकल्पना हो रही है पूरी : मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित के नवनियुक्त प्राधिकृत अधिकारी श्री केदारनाथ गुप्ता के पदभार ग्रहण एवं अभिनंदन समारोह में शामिल हुए और उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जशपुर जिले के फरसाबहार में अपेक्स बैंक की नई शाखा का वर्चुअल शुभारंभ किया और क्षेत्रवासियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकार से समृद्धि की संकल्पना को साकार किया जा रहा है। उनकी प्रेरणा से प्रदेश के घर-घर को सहकारिता से जोड़ने का कार्य हमारी सरकार कर रही है। श्री साय ने कहा कि नवनियुक्त प्राधिकृत अधिकारी के नेतृत्व में प्रदेश में सहकारिता को और अधिक मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि सहकारी गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के साथ मिलकर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। हाल ही में हमने दुधारू पशु वितरण का शुभारंभ किया है, जिसके अंतर्गत पायलट प्रोजेक्ट के लिए प्रदेश के 6 जिलों का चयन कर हितग्राहियों को दो-दो दुधारू गाय वितरित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश के किसानों और ग्रामीण जनों को बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराने की एक बड़ी पहल हमने इस वर्ष पंचायती राज दिवस से प्रारंभ की है। प्रदेश के 1460 ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सुविधा केंद्र खोले गए हैं, जिसके माध्यम से ग्राम पंचायत भवन में ही बैंकिंग सुविधा मिल रही है। उन्होंने बताया कि अगले पंचायती राज दिवस तक यह सुविधा प्रदेश के सभी ग्राम पंचायतों में उपलब्ध हो जाएगी, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान सहकारिता के क्षेत्र में हुए बड़े बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री श्री सिंह ने किसानों को अल्पकालिक ऋण के लिए भारी-भरकम ब्याज दर से मुक्ति दिलाई और ब्याज दरों को लगातार कम कर किसानों को राहत दी। अब किसानों को कृषि कार्यों के लिए बिना किसी ब्याज के अल्पकालिक ऋण उपलब्ध हो रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने फरसाबहार में अपेक्स बैंक की नई शाखा खुलने पर क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि अब किसानों को बैंकिंग सुविधा के लिए 50-60 किलोमीटर दूर पत्थलगांव नहीं जाना पड़ेगा। इस पुनीत पहल के लिए उन्होंने सहकारिता विभाग को साधुवाद दिया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ में सहकारिता का बीजारोपण करने वाले महान विभूतियों को पुण्य स्मरण करते हुए अपने संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में श्री वामनराव लाखे और ठाकुर प्यारेलाल जैसे पुरोधाओं ने सहकारिता की नींव रखी, जिसका विकसित स्वरूप आज हम सभी देख रहे हैं। यह वर्ष सहकारिता का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष है, और केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के प्रयासों से निश्चित रूप से इस क्षेत्र में चमत्कारिक परिवर्तन हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के अथक प्रयासों से प्रदेश के किसानों के जीवन में खुशहाली आई है। पूरे देश में वे पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने प्रति एकड़ 21 क्विंटल और 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय ने सहकारिता को राज्य के अंतिम गांव तक पहुंचाने का कार्य किया है। अपेक्स बैंक प्रदेश में 40 हजार करोड़ रुपए के टर्नओवर के साथ सबसे शक्तिशाली संगठन है और इसके माध्यम से अब तक 7 हजार 5 सौ करोड़ रुपए का ऋण किसानों को उपलब्ध कराया गया है। डॉ. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से देश के हर एक नागरिक को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया और इसी का परिणाम है कि आज बिना किसी बिचौलिए के शत-प्रतिशत राशि सीधे हितग्राहियों के खाते में प्राप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि सहकारिता के क्षेत्र में अभी भी अपार संभावनाएं हैं और शत-प्रतिशत किसानों को सहकारिता और अपेक्स बैंक से जोड़ने का काम शीघ्र पूरा करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री की उपस्थिति में मजगांव डॉक शिप बिल्डर्स लिमिटेड ने सत्य साईं हॉस्पिटल को 2.25 करोड़ रुपए की सहायता राशि सौंपी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में कार्यक्रम में मजगांव डॉक शिप बिल्डर्स लिमिटेड ने सीएसआर गतिविधियों के तहत राजधानी रायपुर के सत्य साईं हृदय चिकित्सालय को 2.25 करोड़ रुपए की सहायता राशि का चेक सौंपा। मुख्यमंत्री ने इस पुनीत कार्य के लिए मजगांव डॉक शिप बिल्डर्स लिमिटेड के प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। पदभार ग्रहण समारोह में सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल, विधायक श्री राजेश मूणत, विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक श्री मोतीलाल साहू, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, विधायक गुरु खुशवंत साहेब, विधायक श्री सुनील सोनी, विभिन्न निगम-मंडलों के अध्यक्ष, अपर मुख्य सचिव सहकारिता श्री सुब्रत साहू और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में इतिहास और सौंदर्य का संगम बन रहा है मध्यप्रदेश

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी और प्रेरक नेतृत्व में मध्यप्रदेश अपनी समृद्ध विरासत को सँजोते हुए देश और दुनिया के एक अनुपम पर्यटन राज्य के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री की परिकल्पना एक ऐसे मध्य प्रदेश की है जहाँ आधुनिकता और प्राचीनता का सामंजस्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर दे। मध्यप्रदेश देश का एकमात्र हीरा उत्पादक राज्य है, जहाँ धरती से निकलने वाले चमकदार और बेशकीमती रत्नों की तरह ही, यहाँ के रमणीय स्थल भी अपनी आभा बिखेरते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रेरणा से प्रदेश का हर कोना इतिहास के अलग-अलग कालखंडों को दर्शाता एक विशाल संग्रहालय प्रतीत होता है। मध्यप्रदेश यानि भव्य किले, उत्कृष्ट नक्काशीदार मंदिर, प्राचीन शैल चित्र और अद्भुत स्मारक एक गौरवपूर्ण अतीत की जीवंत कहानी कहते हैं। मुख्यमंत्री का प्रयास है कि मध्यप्रदेश न केवल अपनी अमूल्य धरोहरों को संरक्षित करे, बल्कि उन्हें विश्व पटल पर एक अद्वितीय पहचान दिलाए, जिससे हर पर्यटक यहाँ आकर अपनी आत्मा को सुकून और ज्ञान से परिपूर्ण कर पाए। मध्यप्रदेश जहाँ हर 100 किलोमीटर से भी कम की यात्रा में पुरातात्विक चमत्कारों और प्राचीन इमारतों के बीच आप अपने आपको पाते हैं। यहाँ का हर स्थान इतिहास के अलग-अलग काल को दर्शाने वाला एक विशाल संग्रहालय जैसा है। यहाँ मौजूद भव्य किले, नक्काशीदार मंदिर, ऐतिहासिक शैल चित्र और अद्भुत स्मारक एक गौरवपूर्ण इतिहास की कथा कहते हैं। “यूनेस्को की विश्व धरोहर” मध्यप्रदेश के खजुराहो की अलौकिक मूर्तियाँ, सांची का शांति स्तूप और भीमबेटका की ऐतिहासिक कलाकृतियाँ यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थायी सूची में सम्मिलित हैं। इन धरोहरों के अतिरिक्त 18 अन्य पर्यटन स्थल भी यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची में शामिल होने के साथ अब यात्रियों को आकर्षित करने के लिए तैयार हैं। मध्यप्रदेश अपने मूल मंत्र “अतिथि देवो भव” को गर्व से अपनाते हुए स्वच्छ, हरित और सुरक्षित स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। मध्यप्रदेश महिलाओं के अनुकूल यात्रा गंतव्य के रूप में भी विशेष स्थान हासिल कर चुका है, जो एकल और समूह यात्रियों के लिए समान रूप से आरामदायक और सुरक्षित अनुभव प्रदान करता है। यहाँ आने वाले यात्री प्रदेश के ऐतिहासिक स्थलों की उन कहानियों के साक्षी बनेंगे, जो हजारों वर्षों पुराने इतिहास को बयां करती हैं और जो उनको दुनिया की हलचल से दूर सुकून के पलों का आनंद देने के लिए पर्याप्त हैं। अतीत की कहानियों से रूबरू कराता ग्वालियर कल्पना कीजिए एक ऐसे भव्य शहर की, जो देश के बाकी हिस्सों से आवागमन के लिए अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है, जिसका राजसी किला सुनहरी धूप में किसी मोती की तरह चमकता है। यहाँ का हर पत्थर एक कहानी सुनाता है, हर गली सदियों पहले के राजाओं, कवियों और यात्रियों के पदचिह्नों की गूँज से भरी हुई है। यह वही शहर है, जो गणित में शून्य के पहले लिखित प्रमाण का संरक्षक भी है। यह शहर है ग्वालियर, जो अपने शाही गलियारों में आपका स्वागत करने के लिए आतुर है। मांडू – एक बीते युग के किस्से प्रदेश में मौजूद एक अन्य ऐतिहासिक शहर, जहाँ छठी शताब्दी ईसा पूर्व के भव्य स्मारक और नाजुक महल, शाही प्रेम कहानियों, चाँदनी रातों के गीतों और प्रेम-स्नेह के उन प्रेरणाओं को संजोए हुए हैं, जिन्होंने कवियों और सपने देखने वालों को प्रेरित किया। यही वह स्थान है, जहाँ ताजमहल निर्माण की कल्पना ने जन्म लिया। मनमोहक मांडू भी पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। चंदेरी – छिपे रहस्यों को उजागर करते स्थल चंदेरी एक ऐसा ऐतिहासिक शहर है, जहाँ ज़मीन के नीचे भी चमत्कार छिपे हुए हैं। यहाँ की प्राचीन बावड़ियाँ, जिनकी अद्भुत समरूपता और भूलभुलैया जैसी सीढ़ियाँ पर्यटकों को एक रहस्यमयी दुनिया में ले जाती हैं। यहां की बावड़ियां केवल कहानी ही नहीं सुनाती लोककथा भी कहती है जिनके अनुसार जब तक महासागरों में पानी रहेगा, तब तक ये बावड़ियाँ नहीं सूखेंगी। चंदेरी के किले और बावड़ियाँ पर्यटकों के इंतज़ार में हैं। ठंडी फुहारों का आनंद – जबलपुर एक रोमांचक अनुभव के लिए प्रसिद्ध शहर, जहाँ सफेद संगमरमर की ऊँची चट्टानों के बीच नाव की सवारी करते हुए पर्यटक सूरज की रोशनी में चमकते पानी और झरनों की गूँजती ध्वनि का अनुभव कर सकते हैं। यहाँ नर्मदा नदी में चप्पुओं की लयबद्ध आवाज़ और ठंडी फुहारों का आनंद लेने के लिए पर्यटकों के स्वागत के लिए जबलपुर तैयार है।  धामनार – अखंड गुफाओं की कहानियां एक ऐसा स्थान, जहाँ पत्थर की उत्कृष्ट कारीगरी और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यहाँ 5वीं-7वीं शताब्दी की कलात्मक और आध्यात्मिक उत्कृष्टता का प्रमाण स्वरूप पहाड़ी में उकेरी गई 51 से अधिक अखंड गुफाएँ मौजूद हैं। गुफाओं के भव्य दरवाजे, ऊँचे पत्थर के स्तंभ और जटिल मूर्तिकला शांति की अनुभूति कराते हैं। धामनार पर्यटकों को बीते युग की यात्रा पर ले जाने के लिए रोज ब रोज तैयार है। बुरहानपुर – एक अद्भुत परंपरा का स्वाद मध्य प्रदेश की यात्रा यहाँ के अद्वितीय स्वादों के अनुभव के बिना अधूरी है! यहाँ की गलियाँ मलाईदार मावा-जलेबी की सुगंध से महकती हैं। यहाँ दाल-चावल की एक साधारण थाली को भी पीली मिर्च के साथ परोसा जाता है और इसके साथ मिलने वाली जंगल के फूलों से बनी तीखी, सुगंधित महुआ चटनी इसका स्वाद और भी अनूठा बना देती है। बुरहानपुर पर्यटकों को ऐसे ही लज़ीज़ व्यंजनों से भरपूर दावत का हर समय अनुभव कराने के लिए तैयार है। मंडला – राजाओं और रानियों की विरासत की दास्तान एक ऐसा शहर, जो चार शताब्दियों तक राजसी रानियों, वीर राजाओं और शक्तिशाली साम्राज्यों का साक्षी रहा है। यहाँ तलवारों की टकराहट और दरबारी फुसफुसाहटें आज भी गलियों में गूँजती सी लगती हैं। 

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा- आरक्षण को लेकर जम्मू कश्मीर में विभिन्न वर्गों में विभिन्न प्रकार की आशंकाएं हैं

श्रीनगर जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को यकीन दिलाया कि प्रदेश कैबिनेट जल्द ही आरक्षण के मुद्दे पर कैबिनेट उप-समिति की रिपोर्ट पर अपना निर्णय लेगी। समिति की सिफारिशों का आकलन किया जाएगा और उसके आधार पर यथोचित कार्रवाई की जाएगी। वह आज अलीगढ़ में अपने एक मित्र के देहांत के बाद उसके परिजनों के साथ सांत्वना व्यक्त करने गए थे। वहां स्थानीय पत्रकारों के साथ बातचीत में उन्होंने कश्मीर में पाकिस्तान को षडयंत्र का जवाब देने और उसे विफल बनाने के लिए कश्मीर में अधिक से अधिक विकास पर जोर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासनकाल के 11 वर्ष पूरा होने पर कहा नरेन्द्र मेादी का दो बार चुना जाना,अपने आप में बहुत कुछ कहता है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अलीगढ़ विश्वविद्यालय भी गए। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि आरक्षण को लेकर जम्मू कश्मीर में विभिन्न वर्गों में विभिन्न प्रकार की आशंकाएं हैं। इन सभी को दूर करने के लिए और आरक्षण को युक्तिसंगत बनाने के लिए ही हमने केबिनेट उपसमिति का गठन किया था। समिति की रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। इसे प्रदेश कैबिनेट की अगली बैठक में पेश किया जाएगा और इस पर चर्चा होगी, जो भी उचित होगा निर्णय लिया जाएगा।उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में जम्मू कश्मीर विधानसभा का कोई सत्र नहीं चल रहा है। इसलिए इस संदर्भ में कोई विधेयक नहीं लाया जा सकता। कैबिनेट की बैठक अगले चंद दिनों में होगी, उसमें रिपोर्ट पर चर्चा होगी। कश्मीर के हालात और पहलगाम में आतंकी हमले से संबधित सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इससे बहुत नुकसान हुआ है और स्थिति सामान्य बनाने, लोगों में कश्मीर में यात्रा के लिए सुरक्षा एवं विश्वास की भावना पैदा करने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं। उन्होंने कश्मीर में पाकिस्तान के एजेंडे को विफल बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास करने पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिए जम्मू-कश्मीर में निरंतर प्रगति सुनिश्चित करने के लिए प्रयास और सफलता दोनों जरुरी हैं। उन्होने कहा कि घाटी में जितना विकास हो, वो कम है। हमें अधिक से अधिक विकास कार्य कराने होंगे। पाकिस्तान जिस तरह की हरकत करता है, उसके जवाब के लिए विकास कार्य बहुत जरूरी हैं। उन्होंने चिनाब रेल पुल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल है।यह कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है और इसे हमारी इंजीनियरिंग ताकत का प्रतीक बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि कश्मीर तक रेल संपर्क से जम्मू कश्मीर में विकास को गति मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी के 11 साल पूरे होने पर अब्दुल्ला ने कहा कि लोगों ने उन्हें वोट दिया। वह दो बार फिर से चुने गए हैं, और यह अपने आप में बहुत कुछ कहता है। उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने पर फिर जोर दिया और उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मोदी अंततः इस मांग को पूरा करेंगे।

नगरीय आपदाओं की रोकथाम के लिये नियंत्रण कक्ष

भोपाल आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास श्री संकेत भोंडवे के निर्देश पर वर्षा ऋतु में प्रदेश में नगरीय क्षेत्रों में जल-भराव, बाढ़, जर्जर भवनों के गिरने जैसी संभावित आपदाओं से निपटने के लिये भोपाल में राज्य स्तर पर आपदा नियंत्रण कक्ष की स्थापना की है। नियंत्रण कक्ष के संचालन एवं समन्वय के लिये एक विशेष दल का गठन किया गया है, जिसमें कार्यपालन यंत्री श्री उपदेश शर्मा, सहायक यंत्री श्री सुनील श्रीवास्तव सहित कुल 8 अधिकारी-कर्मचारी पदस्थ किये गये हैं। यह दल प्रदेश के समस्त नगरीय निकायों में जर्जर एवं क्षतिग्रस्त भवनों को चिन्हित करने और संबंधित नगरीय निकायों के बीच कार्यवाही सुनिश्चित करेगा। राज्य स्तरीय आपदा नियंत्रण कक्ष बाढ़ अथवा जल-भराव की स्थिति में प्रभावित व्यक्तियों के विस्थापन, मूलभूत सुविधाओं जैसी उपलब्धता के लिए समन्वय भी सुनिश्चित करेगा। नियंत्रण कक्ष मौसम कार्यालय से समन्वय कर पूर्व सूचना प्राप्त करेगा तथा संभावित रूप से प्रभावित नगरीय निकायों को अलर्ट भी जारी करेगा।  

अमेरिका अब चीन से रेयर अर्थ मिनरल्स और मैग्नेट्स खरीदेगा, ट्रंप और जिनपिंग में बड़ी डील

वाशिंगटन अमेरिका और चीन के बीच एक नया व्यापार समझौता सामने आया है, जिसके तहत अमेरिका अब चीन से रेयर अर्थ मिनरल्स और मैग्नेट्स खरीदेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को इसकी घोषणा करते हुए बताया कि बदले में अमेरिका चीनी छात्रों को अपने विश्वविद्यालयों में दाख़िला देने की इजाज़त देगा, जैसा कि पहले तय हुआ था। इसके साथ ही चीन से आने वाले सामानों पर टैरिफ भी बढ़ाकर 55% कर दिए जाएंगे। यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब चीन के शिनजियांग प्रांत से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन मज़दूरी को लेकर कई वैश्विक ब्रांड्स की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। एक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ‘ग्लोबल राइट्स कंप्लायंस’ की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन के शिनजियांग क्षेत्र में खनिजों की खुदाई और प्रोसेसिंग में उइगर मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यकों से जबरन मज़दूरी कराई जा रही है। चीन में उइगर मुसलमानों से जबरन मजदूरी रिपोर्ट में एवन, वॉलमार्ट, नेस्कैफे, कोका-कोला और शेरविन-विलियम्स जैसी कंपनियों पर चीन की टाइटेनियम और अन्य खनिज सप्लाई चेन से जुड़े होने के आरोप लगे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि शिनजियांग में 77 कंपनियां टाइटेनियम, लिथियम, बेरिलियम और मैग्नीशियम इंडस्ट्रीज़ में सक्रिय हैं, जिन पर “लेबर ट्रांसफर प्रोग्राम” के ज़रिये जबरन मज़दूरों से काम करवाने का जोखिम है। हालांकि, चीन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि “शिनजियांग में जबरन मज़दूरी” के आरोप पश्चिमी देशों की साजिश हैं और उनका देश आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेगा। चीन के विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को “झूठ” करार दिया। बता दें कि अमेरिका पहले ही ‘उइगर फोर्स्ड लेबर प्रिवेंशन ऐक्ट’ के तहत शिनजियांग से आयातित वस्तुओं पर कड़ी पाबंदियां लगा चुका है, और अब एल्यूमिनियम और सीफूड जैसी नई कैटेगरीज को भी इसमें शामिल किया जा रहा है। अमेरिका और चीन में ट्रेड वॉर खत्म! ट्रंप सरकार का यह नया व्यापार समझौता ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव लगातार बढ़ रहा है और मिनरल व टेक्नोलॉजी सेक्टर को लेकर दोनों देशों में बातचीत की कई कोशिशें हाल ही में हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भले ही अमेरिका को रणनीतिक रूप से आवश्यक खनिज उपलब्ध कराए, लेकिन इससे जुड़े मानवाधिकार मसलों की अनदेखी नहीं की जा सकती।  

सीएम यादव संबल योजना अंतर्गत, अनुग्रह सहायता के 6821 प्रकरणों में 150 करोड़ रूपये सिंगल क्लिक से अंतरित करेंगे

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव संबल योजना अंतर्गत, अनुग्रह सहायता के 6821 प्रकरणों में 150 करोड़ रूपये सिंगल क्लिक से अंतरित करेंगे। शुक्रवार को जबलपुर के बरगी में होने वाले इस कार्यक्रम में श्रम, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल, मंत्रीगण, सांसद, विधायक एवं प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। प्रदेश में संबल योजना, असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। योजना अन्तर्गत प्रारंभ से अब तक 1 करोड़ 76 लाख श्रमिकों का पंजीयन किया गया है। पंजीयन प्रक्रिया निरंतर जारी है। योजना में अनुग्रह सहायता अंतर्गत दुर्घटना में मृत्यु होने पर 4 लाख रूपये एवं सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रुपये प्रदान किये जाते हैं। स्थायी अपंगता पर 2 लाख रुपये एवं आंशिक स्थायी अपंगता पर 1 लाख रुपये तथा अंत्येष्टि सहायता के लिए 5 हजार रूपये प्रदान किये जाते हैं। संबल योजना में जहाँ एक ओर महिला श्रमिक को प्रसूति सहायता के लिये 16 हजार रुपये दिये जाते हैं, तो वहीं दूसरी ओर श्रमिकों के बच्चों को महाविद्यालय शिक्षा प्रोत्साहन योजना में उच्च शिक्षा के लिये सम्पूर्ण शिक्षण शुल्क राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। भारत सरकार के नीति आयोग की पहल पर प्रदेश के गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स को भी संबल योजना में सम्मिलित किया जाकर इनका पंजीयन प्रारम्भ किया गया है। इन्हें भी संबल योजना के अंतर्गत समस्त लाभ प्रदान किये जा रहे हैं। संबल हितग्राहियों को खाद्यान्न पात्रता पर्ची भी प्राप्त होती है, जिससे वे केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा रियायती दरों पर राशन प्राप्त कर रहे हैं। संबल योजना प्रदेश में असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है, जिसमें श्रमिक को जन्म से लेकर मृत्यु तक आर्थिक सहायता दी जा रही है। वास्तविक अर्थों में यह श्रमिकों का संबल है, जिसे लागू करने का श्रेय प्रदेश की सरकार को है। मध्यप्रदेश की यह योजना देश के सभी राज्यों के लिए अनुकरणीय है। प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के लाखों निर्माण श्रमिकों के लिये भी निर्माण मंडल के माध्यम से कई योजनायें संचालित की जाती हैं, इनमें निर्माण श्रमिकों की मृत्यु होने पर अनुग्रह सहायता तथा स्थायी एवं आंशिक अपंगता पर सहायता भी सम्मिलित है। सभी संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामय योजना अंतर्गत पात्र श्रेणी में चिन्हित किया गया है, उन्हें 5 लाख रुपये वार्षिक निःशुल्क चिकित्सा का लाभ मिल रहा हैं।  

सुशासन की रोशनी से जगमगाया मुदवेंडी गांव, नियद नेल्लानार योजना बनी क्रांतिकारी बदलाव की वाहक

रायपुर वर्षों तक माओवाद की पीड़ा में सिसकते रहे बीजापुर जिले का छोटा सा गांव मुदवेंडी अब बदलाव की मिसाल बन गया है। जिला मुख्यालय से करीब 35-40 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव अब न केवल शुद्ध पेयजल और पक्की सड़क से जुड़ चुका है, बल्कि अब यहां बिजली की रोशनी ने भी दस्तक दे दी है। यह सब संभव हुआ है मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की दूरदृष्टि और नियद नेल्लानार योजना की बदौलत। इस गांव में केवल 45 परिवार रहते हैं, पर इनके जीवन में हाल के दिनों में जो परिवर्तन आया है, वह अभूतपूर्व है। पहले जहां शाम होते ही अंधेरा छा जाता था और रात में एक कदम चलना भी जोखिम भरा होता था, वहीं अब बिजली आने से न केवल घरों में उजाला हुआ है, बल्कि ग्रामीणों के दिलों में भी उम्मीद की लौ जल उठी है। माओवाद से सुशासन तक की यात्रा लंबे समय तक माओवादी हिंसा की वजह से विकास की मुख्यधारा से कटे रहे इस गांव में अब सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचने लगी हैं। यह बदलाव केवल सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर सामाजिक और शैक्षणिक जीवन पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। गांव के निवासी श्री हुंरा कुंजाम बताते हैं, हमारे गांव में वर्षों बाद बिजली पहुंची है। पहले जहां अंधेरे में बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाती थी, अब रात को भी बच्चे आराम से पढ़ाई कर रहे हैं। साथ ही सांप-बिच्छू और जंगली जानवरों के खतरे से भी अब राहत मिली है। हुंरा कुंजाम बताते हैं कि नियद नेल्लानार योजना के तहत वर्षों से बंद पड़ा स्कूल अब पुनः प्रारंभ हो चुका है। एक पीढ़ी के अंतराल के बाद गांव के बच्चों को अब अपने गांव में ही शिक्षा का अवसर मिल रहा है। ग्रामीणों के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा है। खुशी का माहौल, उम्मीदों की नई सुबह गांव के ही श्री लखमा कुंजाम का कहना है, बिजली आने से गांव में उत्सव का माहौल है। अब रात्रि में भी घर के काम आसानी से हो जाते हैं, बच्चे पढ़ते हैं और गांव पहले से कहीं अधिक सुरक्षित महसूस करता है।  नियद नेल्लानार योजना: उम्मीद की किरण मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा माओवाद से प्रभावित क्षेत्रों के लिए शुरू की गई नियद नेल्लानार योजना वास्तव में अब एक क्रांतिकारी बदलाव की वाहक बन चुकी है। इस योजना के तहत न केवल विकास के कार्य हो रहे हैं, बल्कि ग्रामीणों को सुरक्षा, विश्वास और आत्मनिर्भरता की नई राह भी मिल रही है। मुदवेंडी गांव की यह कहानी बताती है कि जब शासन की नीयत साफ हो और योजनाएं ज़मीन पर उतरें, तो दूरस्थ अंचलों में भी बदलाव की किरण पहुंच सकती है। अब अंधेरे की जगह उजाले की पहचान है मुदवेंडी। यह है सुशासन का सच और नई छत्तीसगढ़ की दिशा।

बटुराकछार स्कूल में बहार लौटी, युक्तियुक्तकरण से 97 बच्चों को मिले 4 शिक्षक

रायपुर रायगढ़ जिले के घरघोड़ा विकासखंड के दूरस्थ गांव बटुराकछार के बच्चों को अब बेहतर पढ़ाई का अवसर मिलने जा रहा है। यहां के प्राथमिक स्कूल में पहले सिर्फ एक शिक्षक ही थे, वह भी किसी दूसरे स्कूल से व्यवस्था के तहत पढ़ाने आते थे। लेकिन अब राज्य सरकार की युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत इस स्कूल में 4 शिक्षक पदस्थ कर दिए गए हैं।  इस स्कूल में 97 बच्चे पढ़ते हैं। शिक्षक की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। गांव के पालक इतवार दास महंत ने बताया कि उनका बेटा टिकेश्वर दूसरी कक्षा में पढ़ता है, लेकिन एक शिक्षक के भरोसे पूरा स्कूल चल रहा था। उन्होंने कहा कि बच्चों की शुरुआती पढ़ाई के साल बहुत जरूरी होते हैं और शिक्षक न होने से यह समय बर्बाद हो रहा था। अब शिक्षकों के आने से बच्चों की पढ़ाई सुधरेगी। गांव के ही शाखाराम राठिया ने भी शिक्षक मिलने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि उनका बेटा तुलेश तीसरी कक्षा में है और शिक्षक की अनुपस्थिति से पढ़ाई पर असर पड़ता था। पहले एक शिक्षक के छुट्टी पर जाने से पूरा स्कूल बंद करना पड़ता था, लेकिन अब यह समस्या नहीं रहेगी। जिले के शिक्षा विभाग ने 3 और 4 जून को युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूरी की है, जिससे जिले के 21 ऐसे स्कूलों में शिक्षक भेजे गए हैं, जहां पहले कोई शिक्षक नहीं था। अधिकतर स्कूल दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में हैं। अब यहां नियमित कक्षाएं लग सकेंगी और बच्चों की पढ़ाई फिर से पटरी पर लौटेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में हो रही इस पहल से पालकों को अपने बच्चों के भविष्य को लेकर एक नई उम्मीद मिली है। शिक्षा विभाग की यह कोशिश ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो रही है।

मथुरा, आगरा, झांसी जैसे 9 जिलों में लू की चेतावनी जारी: मौसम विभाग

लखनऊ  यूपी में भीषण गर्मी और लू से आमजन बेहाल हैं। मौसम विभाग ने मथुरा, आगरा, झांसी जैसे 9 जिलों में लू की चेतावनी जारी की है। हालांकि पूर्वांचल में बृहस्पतिवार से बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है, जिससे थोड़ी राहत मिल सकती है। उत्तर प्रदेश में बीते कुछ दिनों से हो रही प्रचंड गर्मी और लू चलने से जनजीवन बुरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। तपिश के साथ पूर्वा हवाओं के असर से हो रही उमस और चिपचिपी गर्मी से लोग बेहाल हैं। मौसम विभाग का कहना है कि पश्चिमी यूपी में अगले दो-तीन दिन इस भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों से राहत की उम्मीद नहीं है। हालांकि बृहस्पतिवार से पूर्वांचल और तराई में गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। वहीं मौसम विभाग की ओर से बृहस्पतिवार को पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड के कुल 9 जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। पूर्वानुमान है कि बृहस्पतिवार को यूपी के पश्चिमी-तराई के नजीबाबाद, मुजफ्फरनगर जैसे कुछ जिलों में दिन में लू चलने के साथ उष्ण रात्रि की संभावना है। यानी यहां रात सामान्य से ज्यादा गर्म रहेगी साथ ही बृहस्पतिवार से प्रदेश के पूर्वी इलाकों में मौसम में बदलाव की आहट है। 12 जून के बीच यूपी के पूर्वांचल के जिलों में गरज-चमक और हल्की बूंदाबांदी के आसार हैं। बुधवार को बुंदेलखंड, आगरा मंडल और दिल्ली एनसीआर के जिले प्रचंड गर्मी की चपेट में रहे। झांसी में तापमान 45 डिग्री से अधिक रहा। आगरा, बांदा, प्रयागराज, वाराणसी आदि में तपिश और गर्म हवा के थपेड़ों से लोग बेहाल रहे। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि 12 जून के बाद बंगाल की खाड़ी से उठे नमी के असर से प्रदेश के पूर्वांचल व अन्य हिस्सों में गरज चमक के साथ बूंदाबांदी के संकेत हैं। यहां है लू की चेतावनी मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, जालौन, हमीरपुर, झांसी और आसपास के इलाकों में। 

खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए तकनीक को खेतों तक पहुंचाना जरूरी – मंत्री टेटवाल

भोपाल राजगढ़ ज़िले के सारंगपुर विकासखंड के ग्राम बाबड़लया में विकसित कृषि संकल्प अभियान यात्रा में कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल ने कहा है कि यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि एक ऐसा संकल्प है जिसके माध्यम से हम हर खेत तक तकनीक, प्रशिक्षण और समर्थन पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक किसान सशक्त नहीं होगा, तब तक देश की प्रगति अधूरी है। सरकार की यह प्राथमिकता है कि आधुनिक तकनीक और योजनाओं की जानकारी सीधे गांव और खेत तक पहुंचे। मंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और गांवों की आत्मा किसान हैं। खेती को लाभकारी बनाने के लिए नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी हस्तक्षेप समय की मांग है। उन्होंने कहा कि यह अभियान न केवल खेती को आधुनिक बनाएगा, बल्कि इसे व्यवसाय का रूप देने में भी सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं और पारंपरिक अनुभव के साथ नए प्रयोगों को जोड़कर अपनी उपज और आमदनी दोनों बढ़ाएं। कार्यक्रम में ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन किसानों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि ड्रोन से कीटनाशकों का छिड़काव तेज़, सटीक और कम लागत वाला होता है। इससे समय की बचत के साथ-साथ कीटनाशकों की खपत भी घटती है। किसानों ने इस तकनीक को लेकर उत्साह दिखाया और कहा कि वे अपने खेतों में इसे ज़रूर आज़माना चाहेंगे। मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण भी इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। वैज्ञानिकों ने बताया कि मिट्टी की जांच के बिना उर्वरकों का सही उपयोग संभव नहीं है। स्वाइल कार्ड के माध्यम से किसान अपनी भूमि की पोषण क्षमता को समझ कर उपयुक्त फसल और उर्वरक का चयन कर सकते हैं। कार्यक्रम में शामिल कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने फसल चक्र, जल संरक्षण, जैविक खेती, वर्मी कम्पोस्ट और प्राकृतिक कीटनाशकों जैसे विषयों पर भी किसानों को प्रशिक्षण दिया। किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्राकृतिक खेती योजना और कृषि यंत्र अनुदान योजना की भी जानकारी दी गई। किसानों को बताया गया कि इन योजनाओं से न केवल आर्थिक मजबूती मिलती है, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से भी सुरक्षा मिलती है। किसानों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि यह उनके लिए प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक रहा। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीएम मोदी का माना आभार, भारत के सामाजिक सुरक्षा कवरेज को अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने दी मान्यता

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत के सामाजिक सुरक्षा कवरेज विस्तार को अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा मान्यता देने पर नागरिकों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार माना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर कहा कि सामाजिक सुरक्षा कवरेज में भारत की उल्लेखनीय वृद्धि केवल एक आंकड़ा नहीं है, यह प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की सार्वजनिक सेवा और समावेशी विकास के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का शानदार उदाहरण है। सामाजिक सुरक्षा कवरेज अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुंचने और हर नागरिक को सम्मान के साथ मुख्य धारा में शामिल करने के हमारे संकल्प को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समाज के हर वर्ग के कल्याण और सशक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी दूरदर्शी सोच के साथ कार्य कर रहे हैं। केंद्रीय श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री श्री मोदी सरकार द्वारा शुरू किए गए निर्धन-केंद्रित और श्रमिक कल्याण योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “सबका साथ- सबका विकास” के विजन से प्रेरित होकर भारत ने समाजिक सुरक्षा कवरेज के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। जो वैश्विक स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण विस्तारों में से एक है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के आईएलओ स्टेट डेटाबेस के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार भारत का सामाजिक सुरक्षा करवरेज 2015 में 19 प्रतिशत था, जो 2025 में बढ़कर 64.3 प्रतिशत हो गया है। लाभार्थियों की संख्या के मामले में भारत अब विश्व में दूसरे स्थान पर है, जो 94 करोड़ से अधिक नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा कवरेज प्रदान कर रहा है।

मुख्यमंत्री धामी की अध्यक्षता में हुई प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक, खनन, पर्यावरण सहित छह प्रस्तावों पर लगी मुहर

देहरादून  कैबिनेट बैठक में छह प्रस्तावों पर मुहर लगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई बैठक जैव प्रौद्योगिकी परिषद से जुड़े मामले में बड़ी स्वीकृति दी गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में कुल छह अहम मामलों पर मुहर लगी। इन प्रस्तावों में कृषि, खनन, पर्यावरण, स्वास्थ्य शिक्षा, महिला एवं बाल विकास से जुड़े अहम निर्णय लिए गए। बैठक में जैव प्रौद्योगिकी परिषद से जुड़े मामले में कैबिनेट ने बड़ी स्वीकृति दी। परिषद के दो केंद्रों में पहले से सृजित 46 पदों के संचालन के लिए नियमावली को मंजूरी दे दी गई। वहीं, हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत खनन विभाग में 18 नए पदों को सृजित करने को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। पर्यावरण से जुड़े अहम फैसले में कैबिनेट ने आसन बैराज की दोनों ओर के क्षेत्र को ‘वेटलैंड जोन’ के रूप में घोषित करने को मंजूरी दे दी। आसन नदी के इस हिस्से की कुल लंबाई 53 किमी है। पहले इस पर आपत्तियां मांगी गई थीं, जिन्हें दूर करने के बाद यह निर्णय लिया गया है। इसके अलावा देहरादून की रिस्पना और बिंदाल नदियों के फ्लड जोन क्षेत्र में एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट), मोबाइल टावर, रोपवे टावर और एलीवेटेड रोड निर्माण जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण को स्वीकृति दी गई है।

जाजपुर में विगत दो दिनों से हैजा का प्रकोप के चलते तीन लोगों की मौत, 200 से ज्यादा बीमार

बालेश्वर ओडिशा के जाजपुर जिले में विगत दो दिनों से हैजा का प्रकोप के चलते तीन लोगों की मौत हो गई है। यही नहीं, 200 से ज्यादा लोग बीमार हैं। इन मरीजों को जिले के विभिन्न चिकित्सालय में इलाज के लिए भर्ती किया गया है। प्राप्त खबर के अनुसार, जाजपुर के दानगढ़ी, कोरई, विकास नगर और धर्मशाला नामक इलाके में अचानक लोगों को उल्टी और दस्त की शिकायत होने लगी थी। उल्टी और दस्त न थमने के कारण मरीजों को निकटवर्ती चिकित्सालय में एंबुलेंस के जरिए पहुंचाया गया। इन लोंगों की हुई मौत, जिला अस्पताल में 100 भर्ती इस दौरान दानगढ़ी ब्लॉक में एक व्यक्ति की मौत हुई है। ब्लॉक के रहने वाले सुदर्शन पात्र नामक व्यक्ति की मौत हुई है। इसी तरह विकास नगर पालिका इलाके में शर्मा कॉलोनी के रहने वाले तुलाराम शर्मा की भी मौत हुई है। आज सुबह एक अन्य व्यक्ति की भी मौत हुई है, लेकिन इसका परिचय अभी तक नहीं मिल पाया है। इसी तरह 200 से ज्यादा लोग दूषित पानी और दूषित खाना खाने से हैजा का शिकार हुए हैं। आज सुबह 5 पीड़ितों को कटक के मुख्य चिकित्सालय में इलाज के लिए स्थानांतरण किया गया है। जाजपुर जिला मुख्य चिकित्सालय में 100 से ज्यादा मरीजों को इलाज के लिए भर्ती किया गया है। इसी तरह कोराई के स्वास्थ्य केंद्र में 30 मरीज, दानगढ़ी नामक स्वास्थ्य केंद्र में 30 मरीज तथा विकास नगर के स्वास्थ्य केंद्र में करीब 50 से ज्यादा मरीजों को इलाज के लिए लाया गया है। अचानक मरीजों की इतनी भारी संख्या होने के चलते अधिकांश मरीजों को बिस्तर न मिलने के कारण उनका फर्श पर ही इलाज चलाया जा रहा है। दवाइयों का स्टॉक मंगाया घटना की सूचना पाते ही जिला मुख्य चिकित्सालय में जाजपुर की जिलाधीश पी अन्वेषा रेड्डी समेत अतिरिक्त जिलाधीश, उप जिलाधीश, जिला स्वास्थ्य अधिकारी समेत जिले के प्राय: सभी अधिकारी मौके पर पहुंचकर मरीज की स्वास्थ के बारे में हाल-चाल पूछ रहे हैं, तथा अचानक इतनी बड़ी तादाद में हैजा फैलने के कारण का भी पता लगाया जा रहा है। प्राथमिक जांच में दूषित पानी और दूषित खाद्य के कारण इतनी बड़ी तादाद में लोगों को हैजा होने का अनुमान लगाया जा रहा है। जाजपुर की जिलाधीश अन्वेषा रेड्डी ने बताया कि जिले में मरीजों की भारी संख्या देखते हुए ज्यादा संख्या में डॉक्टर और दवाइयों का स्टॉक मंगा लिया गया है। क्या है हैजा     यह एक संक्रामक रोग है, जो कि दूषित पानी और दूषित भोजन की वजह से होता है।     इसमें उल्टी आना, दस्त लगना, धड़कन तेज होना, प्यास लगना, स्किन का सूखना जैसी परेशानियां होती हैं।     वाइब्रियो कॉलेरे नाम के जीवाणु की वजह से ये फैलता है। हैजा हो जाए तो क्या करें?     पानी, नारियल पानी और ओआरएस घोल पिएं।     डिहाइड्रेशन नहीं होने दें।     समय रहते डॉक्टर को दिखाएं और दवा लें।  

मप्र का पहला रिज़वाँयर फिशरीज़ प्रोडक्शन एंड प्रोसेसिंग क्लस्टर हलाली में : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पीएम मत्स्य संपदा योजना में भोपाल के पास हलाली में बनने वाला मध्यप्रदेश का पहला रिज़वाँयर फिशरीज़ प्रोडक्शन एंड प्रोसेसिंग क्लस्टर का उ‌द्घाटन 13 जून को इंदौर से होगा। केन्द्रीय मछुआ पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह राष्ट्रीय इनलैंड फिशरीज़ एवं एक्वाकल्चर बैठक में इसका उ‌द्घाटन करेंगे। देश में पीएम मत्स्य संपदा योजना में इस तरह के 17 क्लस्टरों की पहचान केन्द्र सरकार ने की है जो उन क्षेत्रों की मत्स्य पालन की विशेषताओं के आधार पर विकसित किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इनलैंड स्टेट में फिशरीज़ से जुड़ी इस तरह की बैठक देश में पहली बार इंदौर में हो रही है। बैठक का उ‌द्देश्य उन इनलैंड राज्यों में मत्स्य उत्पादन बढ़ाना है, जिनकी सीमाएं समुद्र से नहीं जुड़ती हैं। इस बैठक में सिर्फ उन राज्यों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं जो समुद्र से मत्स्य उत्पादन गतिविधियाँ नही करते हैं। देश के 20 राज्यों के मत्स्य पालन मंत्री होंगे शामिल इंदौर में होने वाली इनलैंड फिशरीज़ एण्ड एक्वाकल्चर मीट में देश के 20 राज्यों के मत्स्य पालन मंत्री भाग ले रहे हैं। राष्ट्रीय बैठक में मध्यप्रदेश के मछुआ पालन मंत्री श्री नारायण सिंह पंवार, उत्तर प्रदेश के मछुआ पालन मंत्री श्री संजय कुमार निषाद, बिहार की मछुआ पालन और पशुपालन मंत्री सुश्री रेणु देवी, हरियाणा के पशुपालन, डेरी और मत्स्य पालन मंत्री श्री श्याम सिंह राणा, राजस्थान के पशुपालन और मछुआ पालन राज्य मंत्री श्री जवाहर सिंह बेधम के अलावा अन्य राज्यों के मंत्री भी भाग ले रहे हैं। बैठक में विशेष रूप से केन्द्र सरकार के मत्स्य पालन सचिव डॉ. अभिलाक्ष लिखी और संयुक्त सचिव श्री सागर मेहरा भी उपस्थित रहेंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के निर्देशानुसार देश में मत्स्य उत्पादन में निर्यात को बढ़ावा देने के लिये इंदौर की इस राष्ट्रीय बैठक में भारत के अलग-अलग राज्यों में हो रहे प्रयोगों पर तकनीकी-सत्र भी आयोजित होंगे। इनमें राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं ICAR-CIFRI, (CAR-CIFA, NFDB की तरफ से मत्स्य उत्पादन की दिशा में विश्व में अपनाई जा रही नई तकनीकों पर प्रेजेन्टेशन दिये जायेंगे। तकनीकी-सत्रों में जलाशय पट्टा नीति, नदी और तालाबों में आधुनिक तरीके से मत्स्य पालन और ठंडे पानी में मछली पालन की संभावनाओं जैसे विषय भी शामिल होंगे। केन्द्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह द्वारा लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किये जायेंगे, जिनमें मत्स्य सहकारी समितियों, मछुआरा उत्पादक संगठन, मत्स्य पालन स्टार्ट अप्स एवं परंपरागत मछुआरे भी शामिल हैं। मछुआरों को किसान क्रेडिट कार्ड और जलीय कृषि बीमा भी उपलब्ध कराया जायेगा। इसका उद्देश्य मछुआरों को बीमा और डिजिटल एक्सेस देना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य में मछुआरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिये जल क्षेत्र के कुशल प्रबंधन पर लगातार कार्य किया जा रहा है। इसके चलते इनलैंड फिशरीज़ एण्ड एक्वाकल्चर मीट के अवसर पर इंदौर के ब्रिलियेंट कन्वेंशन सेंटर में एक प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है, जिसमें प्रदेश का खूबसूरत एक्वा पार्क एवं मछली पालन की नई तकनीकी-केज कल्चर और आरएएस को प्रदर्शित करते स्टॉल लगाये जायेंगे। प्रदेश सरकार के प्रयासों से राज्य में मछुआरों की आय में वृ‌द्धि हो रही है। साथ ही विज़न 2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये मध्यप्रदेश में मछुआ पालन से जुड़ी सभी गतिविधियों पर गंभीरता से कार्य किया जा रहा है। विशेष तौर पर इनपुट सप्लाई के क्षेत्र में, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, प्रोसेसिंग एवं उत्पादों के निर्यात के लिये भी प्रयास जारी हैं। प्रदेश का सिवनी ज़िला बेस्ट इनलैंड डिस्ट्रिक्ट का पुरस्कार पहले भी प्राप्त कर चुका है। साथ ही बालाघाट ज़िले की प्राथमिक मछुआ सहकारी समिति को मछुआरों के सशक्तीकरण की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल चुकी है।  

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