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हत्यारे चूक जाते तो इस तरीके से देती पति को दर्दनाक मौत, राजा रघुवंशी के लिए तैयार था सोनम का प्लान-B

इंदौर  इंदौर की सोनम रघुवंशी की साजिश के तार अब धीरे-धीरे खुल रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सोनम ने अपनी शादी के पांच दिन बाद ही राजा की हत्या का प्लान तैयार कर लिया था। हत्यारों को उसने 15 हजार रुपये कैश दिए और 20 लाख रुपये बाद में देने का वादा किया। इतना ही नहीं, राजा की हत्या होते हुए उसने अपनी आंखों से देखा। अब एक और अहम जानकारी निकलकर सामने आई है। दरअसल, अपने पति राजा रघुवंशी को मौत की नींद सुलाने के लिए सोनम ने एक प्लान बी भी तैयार कर रखा था। पुलिस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सोनम ने राजा रघुवंशी की हत्या के लिए दो प्लान तैयार किए थे। इनमें पहला प्लान हत्यारों के जरिए उसे मरवाने का था। वहीं, प्लान बी के तहत अगर हत्यारे उसे मारने से चूक जाते तो सोनम खुद इस हत्या को अंजाम देती। वह राजा को सेल्फी लेने के बहाने पहाड़ के किनारे पर लेकर जाती और मौका देखकर उसे धक्का दे देती। सोनम के दोनों प्लान ऐसे थे, जिनमें राजा रघुवंशी के बचने की कोई गुंजाइश नहीं थी। राजा की लाश 2 जून को खाई में मिली थी। माना जा रहा है कि 23 मई को उनकी हत्या की गई थी। तीनों हत्यारे राज के दोस्त पुलिस की तफ्तीश में पता चला है कि राजा की जान लेने वाले तीनों हत्यारे, सोनम के प्रेमी राज कुशवाहा के दोस्त हैं। सोनम ने जब राजा की हत्या की योजना के बारे में राज को बताया तो उसने ही इन तीन लोगों को हायर किया था। हत्याकांड को अंजाम देने के लिए तीनों हत्यारे शिलॉन्ग गए, लेकिन राज इंदौर में ही रुका रहा। इतना ही नहीं, वह राजा के अंतिम संस्कार में भी शामिल हुआ। दरअसल, सोनम का प्लान था कि राज पर किसी भी तरह से कोई शक ना कर पाए। राजा की हत्या के इस प्लान में अगर कोई चूक हो जाती है तो इसके लिए उसकी पत्नी सोनम ने एक और ‘प्लान बी’ भी तैयार कर रखा था। इस प्लान के मुताबिक अगर प्लान ए कहीं से भी फेल होता नजर आए तो सोनम अपने पति को खुद ही खाई में धकेल कर हत्या कर देती। राजा रघुवंशी की निर्मम हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, और अब इस केस में हर दिन एक नया और चौंकाने वाला एंगल सामने आ रहा है। अब हत्या में शामिल मुख्य आरोपियों के कबूलनामे के साथ-साथ हवाला कारोबार से जुड़ा एक संदिग्ध सुराग सामने आया है, जो इस साजिश को और बड़ा व गहरा बना रहा है। पुलिस को पूछताछ के दौरान राज कुशवाहा के मोबाइल से कुछ ऐसे नंबर मिले हैं, जो सामान्य नहीं थे। ये नंबर ₹10 के नोटों के सीरियल नंबर थे। सूत्रों के मुताबिक, इस तरह की नंबरिंग का इस्तेमाल अक्सर हवाला लेन-देन की ट्रैकिंग में किया जाता है। आरोपियों ने कबूला जुर्म, बताई हत्या की पूरी कहानी खुली राजा हत्याकांड में गिरफ्तार आरोपियों से जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो चारों आरोपियों- राज कुशवाहा, विशाल उर्फ विक्की, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। उन्होंने पुलिस को बताया कि राजा रघुवंशी की हत्या उन्होंने पहले से तय किए गए प्लान के मुताबिक की गई। राजा की हत्या के बाद शव को मेघालय के शिलांग क्षेत्र में खाई में फेंक दिया गया। आरोपियों ने इस बात का भी खुलासा किया कि यह साजिश सोनम रघुवंशी और राज कुशवाहा ने मिलकर रची थी। इंदौर क्राइम ब्रांच ने भी आरोपियों के कबूलनामे की विधिवत पुष्टि की है। अब पुलिस उनके बयानों के आधार पर सबूतों को क्रॉस-चेक कर रही है, जिससे कोर्ट में मुकदमा मजबूत हो सके। राजा रघुवंशी हत्याकांड में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे साजिश की परतें खुलती जा रही हैं। अब यह लगभग साफ होता जा रहा है कि इस खौफनाक हत्या की मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि राजा की पत्नी सोनम रघुवंशी ही थी। पिछले दो दिनों से लगातार पूछताछ में आरोपियों के कबूलनामों और डिजिटल साक्ष्यों ने सोनम की भूमिका को केंद्र में ला खड़ा किया है। एसीपी पूनम यादव ने बताया हत्या का मास्टरमाइंड कौन इंदौर की ACP पूनम चंद यादव ने इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड को लेकर एक बड़ा बयान दिया है, जिससे साफ होता है कि यह कोई अचानक हुई क्राइम नहीं थी, बल्कि शादी से भी पहले से सोच-समझकर रचा गया प्लान था। ACP पूनम चंद यादव ने बताया, ‘चारों आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। इस पूरे हत्याकांड का मास्टरमाइंड राज कुशवाहा है।’ सोनम रघुवंशी और उसका कथित प्रेमी राज कुशवाहा, पहले से राजा की हत्या की तैयारी में जुटे थे। दोनों ने तय किया कि राजा को शादी के बाद हनीमून ट्रिप पर मार डालना सबसे आसान और ‘साफ-सुथरा’ तरीका होगा। जैसे ही राजा और सोनम हनीमून के लिए शिलांग रवाना हुए, उससे पहले ही तीनों सुपारी किलर्स विशाल (विक्की), आकाश और आनंद शिलांग पहुंच चुके थे। इस दौरान इनका काम था, सोनम और राजा की लोकेशन ट्रैक करना, राजा की हत्या का मौका देखना और हत्या करने के बाद उसकी डेडबॉडी को ठिकाने को लगाना। यह सब इतनी चुपचाप और बारीकी से किया गया कि किसी को शक न हो। इंदौर आई थी सोनम पुलिस की जांच में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। राजा की हत्या के बाद, सरेंडर करने से पहले सोनम छिपकर इंदौर भी आई थी। यहां उसके प्रेमी राज ने एक किराए के कमरे का इंतजाम किया, जिसमें सोनम रही। हालांकि, मेघालय पुलिस से जब तीनों कॉन्ट्रैक्ट किलर को मध्य प्रदेश और यूपी से गिरफ्तार कर लिया तो सोनम गाजीपुर पहुंची और सरेंडर कर दिया। इसके बाद मेघालय पुलिस सोनम को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई। आखिरी वक्त पर प्लान से हटा राज वहीं, मेघालय पुलिस के साथ मिलकर इस मामले की तफ्तीश में जुटे इंदौर के एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि आखिरी वक्त पर राज प्लान से हटना चाहता था। पूछताछ में राज ने दावा किया कि वह इस साजिश में सोनम का साथ नहीं देना चाहता था और आखिरी वक्त पर उसने मेघालय जाने का अपना प्लान कैंसल … Read more

शराब की जायज कीमत की जानकारी के लिए ठेकों पर लगाए गए क्यूआर कोड, MSP और MRP की जानकारी इसी पर मिलेगी

इंदौर मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में अनोखे प्रयोग के तहत आबकारी विभाग ने ग्राहकों तक शराब की सही कीमत की जानकारी पहुंचाने के लिए ठेकों पर क्यूआर कोड लगा दिए हैं। अधिकारियों ने  यह जानकारी दी।  देशी और विदेशी शराब को अधिक मूल्य पर बेचने की शिकायत के बाद अब आबकारी विभाग ने जिले की सभी 173 शराब दुकानों पर क्यूआर कोड लगाए है। प्रत्येक दुकान पर तीन स्थानों पर स्पष्ट क्यूआर कोड चस्पा किए है। उपभोक्ता अब इन को स्कैन कर किसी भी शराब ब्रांड के न्यूनतम विक्रय मूल्य (एमएसपी) और अधिकतम विक्रय मूल्य (एमआरपी) की जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकेंगे। अनुचित मूल्य वसूली पर लगेगी रोक जिले की शराब दुकानों से अधिक मूल्य पर शराब बेचने की ढेरों शिकायते जिला प्रशासन और सीएम हेल्पलाइन पर पहुंच रही थी। मामले में कलेक्टर आशीष सिंह ने इस पर अंकुश लगाने के निर्देश आबकारी विभाग को दिए। अब आबकारी विभाग ने जिले की सभी दुकानों पर क्यूआर कोड लगाए है। इससे अनुचित मूल्य वसूली पर रोक लगेगी और सभी ब्रांड की शराब के मूल्य की जानकारी उपभोक्त को मिल सकेगी। क्या होगा इन कोड में     सहायक आबकारी आयुक्त अभिषेक तिवारी इंदौर ने बताया कि राज्य शासन को प्रदेश के विभिन्न जिलों से यह शिकायतें प्राप्त हो रही थीं कि कुछ मदिरा दुकानों पर निर्धारित न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) से कम और अधिकतम विक्रय मूल्य (MRP) से अधिक दरों पर शराब बेची जा रही है। ऐसी अनियमितताओं पर अंकुश लगाने एवं उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर शराब उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासन द्वारा सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। इन क्यूआर कोड को स्कैन करने पर आबकारी विभाग की साइट आएगी। इसमें आप शराब के ब्रांड का नाम डालकर उसकी सही कीमत देख सकते हैं। शराब का सही मूल्य जान सकेंगे उपभोक्ता वहीं विक्रेताओं की जवाबदेही सुनिश्चित होगी। तय मूल्य से अधिक या कम पर शराब बेची जाती है, तो आबकारी विभाग में शिकायत दर्ज की जा सकती है। सहायक आयुक्त आबकारी अभिषेक तिवारी का कहना है कि उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए क्यूआर कोड लगवाए है, ताकि वह शराब का सही मूल्य जान सके। 18 दुकानों पर की जा चुकी है कार्यवाही सीएम हेल्पलाइन पर शराब दुकानों से अधिक मूल्य वसूलने की शिकायतों की विगत दिनों जांच कराई गई थी। शिकायत सही पाए जाने पर आबकारी विभाग ने जिले की 18 शराब दुकानों पर कार्रवाई कर 19 प्रकरण बनाए। सभी को नोटिस जारी किए गए है और इन दुकानों पर 51 लाख जुर्माना लगाया जाएगा।

15 जून को होगा सूर्य का राशि परिवर्तन, इन राशि वालों को रहना होगा बेहद सतर्क

15 जून 2025 को सूर्य का मिथुन राशि में गोचर एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय परिवर्तन है, जो सभी 12 राशियों के जीवन में विभिन्न स्तरों पर असर डालेगा। मिथुन एक वायु तत्व की राशि है और इसके स्वामी बुध ग्रह होते हैं, जो संचार, बुद्धिमत्ता और तर्क के कारक माने जाते हैं। इस गोचर के प्रभाव से लोगों के सोचने, बोलने और निर्णय लेने की शैली में बदलाव आ सकता है। यह समय मानसिक सक्रियता, विचारों की स्पष्टता और सामाजिक संपर्कों में वृद्धि का संकेत देता है। सूर्य के इस परिवर्तन से कुछ राशियों को करियर, सम्मान और नेतृत्व में अवसर मिल सकते हैं, जबकि कुछ को अहंकार, वाणी में कठोरता या पारिवारिक असहमति जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। यह समय है जब संतुलित सोच, विनम्र व्यवहार और समझदारी से लिए गए निर्णय जीवन में सकारात्मक परिणाम ला सकते हैं। सभी राशियों को अपने स्वभाव और स्थिति के अनुसार इस गोचर के प्रभावों को समझकर आगे बढ़ना चाहिए। मंगल का गोचर इन राशियों पर रहेगा भारी, जरूर करें राशि अनुसार उपाय मेष राशि मेष राशि वालों के लिए यह समय करियर और पेशेवर जीवन में बहुत महत्वपूर्ण रहेगा। मिथुन में सूर्य के गोचर से आपका ध्यान कार्यों पर केंद्रित होगा और आपकी नेतृत्व क्षमता बढ़ेगी। आप अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी मेहनत और लगन से काम करेंगे। हालांकि, इस दौरान आपको अपने क्रोध और अधीरता पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता है, क्योंकि जल्दबाजी में निर्णय गलत हो सकते हैं। लगातार प्रयास से आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे, इसलिए धैर्य और अनुशासन बनाए रखें। साथ ही, नए प्रोजेक्ट या जिम्मेदारियां मिलने की संभावना है, जिससे आपकी पहचान भी बनेगी। वृषभ राशि इस गोचर के दौरान वृषभ राशि के जातकों के लिए शिक्षा, अध्ययन और यात्रा के क्षेत्र में खास अवसर आएंगे। यह समय आपके दृष्टिकोण को व्यापक बनाने का है। आप नई चीजें सीखने, ज्ञान प्राप्त करने और नए अनुभवों से अपने विचारों को विकसित करने में सफल रहेंगे। यात्राएं आपके मन को ताज़गी देंगी और आपके जीवन में नए रास्ते खोलेंगी। सामाजिक और शैक्षिक क्षेत्र में भी उन्नति की संभावना है। ध्यान रखें कि मानसिक रूप से खुला रहें और नये विचारों को अपनाने के लिए तैयार रहें। मिथुन राशि मिथुन राशि वालों के लिए सूर्य का इस राशि में गोचर बेहद शुभ है। यह समय आपकी व्यक्तिगत पहचान, आत्मविश्वास और करियर के लिए बहुत लाभकारी रहेगा। आप खुद को एक नई दिशा में स्थापित करने का प्रयास करेंगे और अपनी क्षमताओं को बेहतर तरीके से प्रदर्शित कर पाएंगे। आपकी ऊर्जा और आकर्षण में वृद्धि होगी, जिससे लोग आपकी ओर आकर्षित होंगे। यह समय खुद की खूबियों को निखारने और आत्म-संस्कार करने का भी है। नए अवसर मिलेंगे, जिससे आप अपनी लोकप्रियता बढ़ा सकते हैं। कर्क राशि कर्क राशि के लिए यह गोचर मानसिक शांति और आंतरिक विकास का संकेत लेकर आता है। यह समय आत्मनिरीक्षण और आत्म-सुधार के लिए उपयुक्त है। आप अपने व्यक्तिगत संबंधों पर अधिक ध्यान देंगे और उनमें सुधार लाने की कोशिश करेंगे। पारिवारिक वातावरण में सामंजस्य बढ़ेगा और भावनात्मक स्थिरता आएगी। ध्यान, योग और मानसिक ध्यान जैसी गतिविधियां आपको शांति प्रदान करेंगी। मानसिक तनाव कम होगा और आप अपने जीवन को बेहतर दिशा देने में सफल रहेंगे।  

विराट और रोहित की ऑस्ट्रेलिया में आखिरी सीरीज होगी और आखिरी दौरा भी

नई दिल्ली रोहित शर्मा और विराट कोहली अब टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट के बाद टेस्ट क्रिकेट में भी नजर नहीं आएंगे। वे सिर्फ वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट खेलेंगे। संभावना है कि वे 2027 तक ही वनडे क्रिकेट खेलेंगे। ऐसे में इस साल के आखिर में अक्टूबर-नवंबर में ऑस्ट्रेलिया में उनका आखिरी दौरा होगा, जहां वे वनडे सीरीज खेलेंगे। 2026 में कोई वनडे सीरीज ऑस्ट्रेलिया में नहीं है। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि यह विराट और रोहित की ऑस्ट्रेलिया में आखिरी सीरीज होगी और आखिरी दौरा भी होगा। यही वजह है कि ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड उनको यादगार विदाई देने का प्लान कर रहा है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के सीईओ टॉड ग्रीनबर्ग ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया का अगले समर में पैक्ड शेड्यूल है। इस दौरान विराट कोहली और रोहित शर्मा आखिरी बार ऑस्ट्रेलिया में खेलते नजर आएंगे। वे वनडे सीरीज का हिस्सा होंगे। ग्रीनबर्ग ने रिपोर्टर्स से बात करते हुए कहा, “यह क्रिकेट का एक बहुत बड़ा समर सीजन है, जिसमें भारतीय महिला और पुरुष दोनों टीमें शामिल हैं। साथ ही, एशेज भी होनी है। लगभग दो दशकों में पहली बार ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट पूरे देश के हर एक कैपिटल सिटी और टेरेटरी में इंटरनेशनल मैच खेले जाएंगे।” उन्होंने आगे कहा, “आप जानते हैं कि कुछ रिकॉर्ड तोड़ टिकट सेल बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान हुई थी और मुझे उम्मीद है कि हम समर सीजन में ऐसी ही सेल देखेंगे। अगर आप आने वाले खिलाड़ियों की गुणवत्ता के बारे में सोचते हैं, खासकर भारत से – तो यह आखिरी बार हो सकता है जब हम विराट कोहली और रोहित शर्मा को अपने देश में खेलते हुए देखें। अगर ऐसा होता है, तो हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हम उन्हें शानदार विदाई दें और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके अविश्वसनीय योगदान को स्वीकार करें।” विराट कोहली और रोहित शर्मा ने इंग्लैंड दौरे से पहले टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा है। दोनों ने आखिरी टेस्ट ऑस्ट्रेलिया में बीजीटी के दौरान खेला था।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व हर हाथी की तस्वीर खींचकर उसे एक विशेष कोड और पहचान क्रमांक दिया जा रहा

उमरिया मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व एक अनोखी और पहली बार की जा रही पहल के चलते एक बार फिर सुर्खियों में है। जहां अब तक यह टाइगर रिजर्व बाघों के संरक्षण और गणना के लिए प्रसिद्ध रहा है, वहीं अब यहां जंगली हाथियों की पहचान भी डिजिटल तरीके से की जा रही है। प्रबंधन द्वारा एलीफेंट आईडी परियोजना शुरू की गई है, जिसके तहत हर हाथी की तस्वीर खींचकर उसे एक विशेष कोड और पहचान क्रमांक दिया जा रहा है। यह प्रक्रिया प्रदेश में पहली बार किसी टाइगर रिजर्व में अपनाई जा रही है। इसका प्रमुख उद्देश्य यह है कि अब तक जिन जंगली हाथियों की संख्या का सिर्फ अनुमान ही लगाया जाता था, उनकी सटीक गिनती और गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। इसके साथ ही यह भी पता चल सकेगा कि कौन-कौन से हाथी किस-किस झुंड का हिस्सा हैं और वे किन क्षेत्रों में ज्यादा सक्रिय हैं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के नौ परिक्षेत्रों की 139 बीटों में समय-समय पर हाथियों की गतिविधियां देखी जाती हैं। जब भी किसी क्षेत्र में हाथियों का मूवमेंट दिखाई देता है, तो रिजर्व प्रबंधन द्वारा हाथी विशेषज्ञों की टीम मौके पर भेजी जाती है। यह टीम हाथियों के सिर, कान, पूंछ और पीठ की तस्वीरें लेती है। इन अंगों की तस्वीरों को आधार बनाकर कंप्यूटर पर उनकी विशिष्ट पहचान यानी आईडी तैयार की जाती है। इसके बाद हर हाथी को एक कोड नंबर दिया जाता है, जो E-1 , E-2 जैसे प्रारूप में होता है। इस परियोजना की अनुमति प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) से ली गई है, जिसके तहत टाइगर रिजर्व की टीम और विशेषज्ञ मिलकर यह कार्य कर रहे हैं। इस दौरान पूरी सावधानी बरती जाती है ताकि जंगली हाथियों से टीम की सुरक्षा बनी रहे और उन्हें कोई नुकसान न पहुंचे। हाथियों की पहचान की इस प्रक्रिया से न केवल उनकी सटीक संख्या सामने आएगी, बल्कि उनकी लोकेशन, गतिविधियों और समूहों की निगरानी भी संभव हो सकेगी। इसके चलते हाथी मानव संघर्ष जैसी घटनाओं को कम करने में भी मदद मिल सकती है, क्योंकि समय रहते हाथियों की लोकेशन का पता लगाकर एहतियाती कदम उठाए जा सकेंगे।  

तत्काल टिकटों की होगी बुकिंग से पहले आधार से आएगा वेरिफिकेशन ओटीपी, जानिए पूरी बात

नई दिल्ली अगर आप तत्काल रेल टिकट बुकिंग करने की सोच रहे हैं तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल, जुलाई महीने से तत्काल टिकट बुकिंग के नियम बदल जाएंगे। रेलवे की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक 15 जुलाई से आधार से प्रमाणीकरण के पश्चात ही तत्काल टिकट की बुकिंग होगी। रेलवे के एजेंट आधे घंटे बाद टिकट बुक कर सकेंगे। बता दें कि अब तक तत्काल टिकट की बुकिंग पर एजेंट्स का कब्जा होता था। तत्काल विंडो ओपन होने के साथ ही एजेंट लगभगर सभी टिकट बुक कर लेते थे लेकिन नए नियम से आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी। रेलवे का सर्कुलर रेलवे मंत्रालय ने 10 जून 2025 को एक सर्कुलर जारी किया। इस सर्कुलर में कहा गया है-1 जुलाई 2025 से तत्काल टिकट, भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) की वेबसाइट/इसके ऐप के माध्यम से केवल वह यूजर्स ही बुक कर सकेंगे, जिन्होंने आधार के जरिये सत्यापन कराया हो। इसके बाद, 15 जुलाई 2025 से तत्काल बुकिंग के लिए आधार-आधारित ओटीपी प्रमाणीकरण भी अनिवार्य कर दिया जाएगा। सर्कुलर में कहा गया है- तत्काल टिकट भारतीय रेलवे के कम्प्यूटरीकृत पीआरएस (यात्री आरक्षण प्रणाली) काउंटरों/अधिकृत एजेंटों के माध्यम से बुकिंग के लिए तभी उपलब्ध होंगे, जब सिस्टम द्वारा जनरेट ओटीपी का सत्यापन होगा। यह ओटीपी बुकिंग के समय यूजर्स द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा। तत्काल विंडो कब से ओपन होता है? तत्काल रेलवे टिकट बुकिंग के लिए विंडो सुबह 10 बजे से ओपन होता है। हालांकि, इस दौरान सिर्फ एसी कोच के टिकटों की बुकिंग होती है। वहीं, तत्काल विंडो पर सुबह 11 बजे से स्लीपर कोच के लिए टिकट की बुकिंग होती है। इस दौरान आम जनता को बेहद मुश्किल से तत्काल टिकट मिल पाता है। रेल मंत्री ने दिए थे बदलाव के संकेत बता दें बीते 4 जून को रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा था कि भारतीय रेलवे (Indian Railway) जल्द ही तत्काल टिकट बुक करने के लिए ई-आधार प्रमाणीकरण का उपयोग करना शुरू कर देगा. उन्होंने अपनी पोस्ट में इसके फायदे बताते हुए लिखा था कि इस प्रणाली के जरिए रेलवे के वास्तविक उपयोगकर्ताओं को जरूरत के समय कन्फर्म टिकट (Confirmed Tickets) पाने में मदद मिलेगी. ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि इस महीने के अंत तक ये सिस्टम शुरू किया जा सकता है. अब रेलवे मंत्रालय ने इसका ऐलान कर दिया है और 1 जुलाई से ये प्रोसेस लागू कर दिया जाएगा.  सिर्फ 10% यूजर्स आधार सत्यापित! IRCTC के मुताबिक, देश में इसके यूजर्स की तादाद 13 करोड़ से ज्यादा है, लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि इनमें से महज 10 फीसदी यूजर ही आधार वेरिफाइड हैं. ऐसे में तत्काल टिकट बुकिंग प्रक्रिया को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे (Indian Railway) ने नियमों को सख्त बनाते हुए सिर्फ आधार सत्यापित आईआरसीटीसी अकाउंट को ही Online Tatkal Ticket Booking करने की अनुमति दी है. फर्जी आईडी पर सरकार सख्त  बीते दिनों आई एक रिपोर्ट्स में बताया गया था कि Tatkal Ticket बुकिंग में लगातार गड़बड़ियां सामने आने के बाद सरकार ने फर्जी आईडी वाले यूजर्स पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया था. इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि IRCTC ने पिछले एक साल में 3.5 करोड़ फर्जी यूजर आईडी ब्लॉक की हैं, जिससे इसके प्लेटफॉर्म पर सिस्टम की भीड़भाड़ काफी कम हद तक हो गई है. अब रेल मंत्रालय की ओर से इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए Aadhaar प्रमाणीकरण का नियम लागू किया जा रहा है.  एजेंट का होता है कब्जा तत्काल बुकिंग के लिए आम लोगों को बिहार और उत्तर प्रदेश के रूट पर सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। वहीं, एजेंट आसानी से तत्काल टिकट बुकिंग कर पाते हैं। इसके बाद ग्राहकों से एजेंट टिकट के बदले मनमाने चार्ज वसूलते हैं। अब रेलवे के नए सर्कुलर के मुताबिक एजेंट्स को सुबह 10 बजे से 10.30 बजे तक एसी कैटेगरी के लिए और सुबह 11 बजे से 11.30 बजे तक स्लीपर कैटेगरी के लिए ‘तत्काल’ टिकट बुक करने से प्रतिबंधित किया जाएगा। इससे आम लोगों को आसानी से तत्काल टिकट बुक कराने का मौका मिलेगा।

मुख्यमंत्री यादव संबल योजना अंतर्गत, अनुग्रह सहायता के 6821 प्रकरणों में 150 करोड़ रूपये सिंगल क्लिक से अंतरित करेंगे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव श्रमिक परिवारों के खातों में संबल योजनाओं की राशि करेंगे अंतरित आज अनुग्रह सहायता के 6821 प्रकरणों में 150 करोड़ रूपये का होगा अंतरण मुख्यमंत्री यादव संबल योजना अंतर्गत, अनुग्रह सहायता के 6821 प्रकरणों में 150 करोड़ रूपये सिंगल क्लिक से अंतरित करेंगे भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव संबल योजना अंतर्गत, अनुग्रह सहायता के 6821 प्रकरणों में 150 करोड़ रूपये सिंगल क्लिक से अंतरित करेंगे। आज शुक्रवार को जबलपुर के बरगी में होने वाले इस कार्यक्रम में श्रम, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, मंत्रीगण, सांसद, विधायक एवं प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। प्रदेश में संबल योजना, असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। योजना अन्तर्गत प्रारंभ से अब तक 1 करोड़ 76 लाख श्रमिकों का पंजीयन किया गया है। पंजीयन प्रक्रिया निरंतर जारी है। योजना में अनुग्रह सहायता अंतर्गत दुर्घटना में मृत्यु होने पर 4 लाख रूपये एवं सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रुपये प्रदान किये जाते हैं। स्थायी अपंगता पर 2 लाख रुपये एवं आंशिक स्थायी अपंगता पर 1 लाख रुपये तथा अंत्येष्टि सहायता के लिए 5 हजार रूपये प्रदान किये जाते हैं। संबल योजना में जहाँ एक ओर महिला श्रमिक को प्रसूति सहायता के लिये 16 हजार रुपये दिये जाते हैं, तो वहीं दूसरी ओर श्रमिकों के बच्चों को महाविद्यालय शिक्षा प्रोत्साहन योजना में उच्च शिक्षा के लिये सम्पूर्ण शिक्षण शुल्क राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। भारत सरकार के नीति आयोग की पहल पर प्रदेश के गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स को भी संबल योजना में सम्मिलित किया जाकर इनका पंजीयन प्रारम्भ किया गया है। इन्हें भी संबल योजना के अंतर्गत समस्त लाभ प्रदान किये जा रहे हैं। संबल हितग्राहियों को खाद्यान्न पात्रता पर्ची भी प्राप्त होती है, जिससे वे केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा रियायती दरों पर राशन प्राप्त कर रहे हैं। संबल योजना प्रदेश में असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है, जिसमें श्रमिक को जन्म से लेकर मृत्यु तक आर्थिक सहायता दी जा रही है। वास्तविक अर्थों में यह श्रमिकों का संबल है, जिसे लागू करने का श्रेय प्रदेश की सरकार को है। मध्यप्रदेश की यह योजना देश के सभी राज्यों के लिए अनुकरणीय है। प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के लाखों निर्माण श्रमिकों के लिये भी निर्माण मंडल के माध्यम से कई योजनायें संचालित की जाती हैं, इनमें निर्माण श्रमिकों की मृत्यु होने पर अनुग्रह सहायता तथा स्थायी एवं आंशिक अपंगता पर सहायता भी सम्मिलित है। सभी संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामय योजना अंतर्गत पात्र श्रेणी में चिन्हित किया गया है, उन्हें 5 लाख रुपये वार्षिक निःशुल्क चिकित्सा का लाभ मिल रहा हैं।  

मध्य प्रदेश की इस तहसील को बनाया जाएगा जिला! सरकार ने राजस्व विभाग से मांगी जानकारी

डिंडोरी  मध्य प्रदेश का आदिवासी जिला डिंडोरी अब टूटने की कगार पर खड़ा हो गया है. इस जिले में दो विधानसभा हैं, डिंडोरी और शहपुरा. जिसमें शहपुरा क्षेत्र के लोग इसे नया जिला बनाने की मांग पर इस बार न सिर्फ अड़े हुए हैं, बल्कि आंदोलन के लिए भी लामबंद हैं. इसके लिए मंगलवार की दोपहर शहपुरा क्षेत्रवासियों और आमजनों ने एक मांग पत्र प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम नायब तहसीलदार शहपुरा को सौंपा है. इस पत्र में शहपुरा को नया जिला बनाने की मांग की है. 47 सालों से हो रही शहपुरा को जिला बनाने की मांग दरअसल, शहपुरा जिला बनाओ संघर्ष समिति ने शहपुरा तहसील कार्यालय पहुंचकर नायब तहसीलदार सुखमन कुलेश को ज्ञापन सौंपा है. जिसमें शहपुरा को जिला बनाने की मांग की गई है. बताया जा रहा है कि शहपुरा को जिला बनाने की मांग पिछले 47 सालों से लगातार की जा रही है. यह मांग बीच-बीच में तब तेज होती है जब विधानसभा या लोकसभा चुनाव आते हैं. लेकिन इस बार एक पत्र ने शहपुरा क्षेत्र वासियों की टेंशन बढ़ा दी. इस पत्र में मंडला जिले की सबसे बड़ी तहसील निवास को जिला बनाने के लिए विस्तृत जानकारी चाही गई है. जिसमें निवास को शहपुरा के साथ जोड़कर जिला बनाने की बात लिखी गई है. जिसके बाद शहपुरा के लोग लामबंद हो गए. राष्ट्रपति से लेकर मंत्रियों को सौंपा ज्ञापन ज्ञापन के माध्यम से शहपुरा जिला बनाओ संघर्ष समिति के सदस्यों ने बताया, ”सन 1977 से लेकर आज तक शहपुरा को डिंडोरी से पृथक कर अलग जिला बनाने की मांग क्षेत्रवासियों द्वारा की जा रही है. लेकिन अब तक प्रदेश सरकार ने कोई विचार नहीं किया है. यह मांग उस दौरान भी की गई जब मंडला जिले से डिंडोरी को अलग जिला बनाया जा रहा था. इसको लेकर क्षेत्रवासियों, जनप्रतिनिधियों ने महामहिम राष्ट्रपति, पूर्व प्रधानमंत्री, राज्यपाल से लेकर कैबिनेट मंत्रियों तक को ज्ञापन एवं मांग पत्र सौंपा है. शहपुरा को जिला बनाने की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन क्षेत्रवासियों ने मांग की है, शहपुरा को जिला बनाने के लिए निवास, मेहदवानी, विक्रमपुर, चौरई, रहटा क्षेत्र एवं तहसील व विधानसभा को जोड़ा जाए. मांग पत्र में शहपुरा क्षेत्रवासियों ने उल्लेख किया है कि हाल में ही शासन प्रशासन के द्वारा एक पत्र जारी किया है. जिसमें उल्लेख है कि निवास को जिला बनाए जाने के लिए स्थानीय प्रशासन से राजस्व विभाग संबंधी जानकारी शहपुरा राजस्व क्षेत्र की चाही गई है. जिसमें शहपुरा और मेहदवानी ब्लॉक को शामिल किया जाना है. इस पत्र के वायरल होने के बाद से शहपुरा क्षेत्र की जनता एक बार फिर सक्रिय हुईं और मांग पत्र सौंपा है कि शहपुरा को ही अलग जिला बनाया जाए. बैठक हुई थी आयोजित शहपुरा जिला बनाओ संघर्ष समिति के सदस्यों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में 6 जून को एक बृहद बैठक आयोजित की गई थी. जिसमें शहपुरा के भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे भी शामिल रहे. विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने क्षेत्रवासियों की मांग को जायज बताते हुए अपना समर्थन भी दिया है. शहपुरा संघर्ष समिति के सदस्यों ने कहा है कि, ”शहपुरा हर दृष्टि से जिला बनने के लिए उपयुक्त है. कोरे आश्वासन का क्षेत्र की जनता विरोध करती है और शहपुरा को जिला घोषित नहीं करने पर क्षेत्र की जनता अब उग्र जन आंदोलन करने को मजबूर होगी. जिसकी सम्पूर्ण जवाबदारी शासन-प्रशासन की होगी.”    भारतीय किसान संघ ने भी जिला बनाने का किया समर्थन शहपुरा जिला बनाओ संघर्ष समिति की मांग को जायज और क्षेत्र हित का बताते हुए भारतीय किसान संघ ने भी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नाम नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा. तहसील अध्यक्ष प्रमोद कुमार मौर्य ने कहा कि, ”शाहपुरा को जिला बनाने की मांग वर्षों पुरानी है. इसके लिए शाहपुरा जिला बनाओ संघर्ष समिति सतत संघर्षरत है. कई बार ज्ञापन आंदोलन हुए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. आज पुनः शहपुरा जिला बनाओ संघर्ष समिति की मांग का भारतीय किसान संघ समर्थन करता है कि, शहपुरा को जल्द से जल्द जिला बनाया जाए.”

प्रदेश सरकार अपने नागरिकों की चिंता करने के साथ-साथ वन्यजीवों को संरक्षण प्रदान करने के लिए भी संवेदनशील :मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश देश का सर्वाधिक वन क्षेत्र और वन्यजीवों की विविधता से संपन्न राज्य है। भारत में सबसे अधिक बाघ (टाइगर) मध्यप्रदेश की धरती पर देखने को मिलते हैं। तेंदुआ (लेपर्ड) और गिद्ध (वल्चर) की संख्या भी मध्यप्रदेश में सबसे अधिक है। प्रदेश के अलग-अलग वन क्षेत्रों में मगरमच्छ और घड़ियालों का बसेरा है। प्रदेश में वन्य जीव संरक्षण, जंगलों की रक्षा और पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में वन्य प्राणी संरक्षण सहित सभी क्षेत्रों में तेज गति के साथ अग्रसर है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नए वन्य प्राणी रेस्क्यू सेंटर स्थापित किये जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  गुजरात रवाना होने के पहले मीडिया में जारी एक संदेश में यह विचार रखे। संभाग स्तर पर आवश्यक हैं रेस्क्यू सेंटर  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब वन्यजीव प्रेमियों के लिए मध्यप्रदेश में किंग कोबरा भी लेकर आए हैं। चीतों को पालपुर कूनो राष्ट्रीय उद्यान से गांधी सागर वन क्षेत्र में छोड़कर एक नया नेशनल पार्क विकसित किया जा रहा है। प्रदेश में अब तक दो नए टाइगर नेशनल पार्क बनने और चीतों के साथ-साथ दूसरे वन्य जीवों की संख्या बढ़ने से संभाग स्तर पर रेस्क्यू सेंटर की आवश्यकता महसूस हो रही है। इन सेंटर्स की स्थापना के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में अब तक केवल एक रेस्क्यू सेंटर राजधानी भोपाल स्थित वन विहार में है। यहां प्रदेशभर से घायल और बीमार वन्यजीवों को इलाज के लिए लाया जाता है, लेकिन उनके अनुकूल वातावरण में बदलाव हो जाने के कारण कई बार परेशानियां आती हैं। वन्यप्राणियों की जीवन रक्षा और उनके जीवन में सुखद बदलाव लाने के लिए संभाग स्तर पर रेस्क्यू सेंटर शुरू करने का प्रयास है। मध्यप्रदेश में जू़ की संख्या बढ़ेगी राज्य सरकार प्रदेश में चिड़ियाघरों अर्थात प्राणी उद्यान (जू़) की संख्या में भी वृद्धि करने जा रही है। बजट में दो प्राणी उद्यान की स्थापना को स्वीकृति दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुजरात में देश का सर्वश्रेष्ठ जू एवं रेस्क्यू सेंटर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वे गुजरात की अध्ययन यात्रा में जामनगर में वन्यजीवों की देखरेख के लिए की गई व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे साथ ही वन्यजीवों का आदान-प्रदान कर उनके जीवन रक्षा की संभावनाएं भी तलाशेंगे। नागरिकों के साथ-साथ वन्यजीवों के प्रति भी संवेदनशील मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के कई विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों में वेटनरी कोर्स और वेटनरी अस्पताल शुरू कर पशु चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। निकट भविष्य में इससे संबंधित कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। वन संपदा और वन्यजीवों के संरक्षण का भी व्यापक अभियान प्रदेश में चल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों का आह्वान किया है कि अगर किसी वन्यजीव के संकट में होने की जानकारी मिले या दिखाई दे तो नज़दीकी फॉरेस्ट ऑफिसर को सूचित करें। प्रदेश सरकार अपने नागरिकों की चिंता करने के साथ-साथ वन्यजीवों को संरक्षण प्रदान करने के लिए भी संवेदनशील है।

रिपोर्ट : मुस्लिम जनसंख्या एक दशक में सबसे तेजी से बढ़ी, मुसलमान कुल आबादी का 25 % हुए

 नई दिल्ली  मुस्लिमों की आबादी दुनिया में सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। यह खुलासा प्यू रिसर्च सेंटर की स्टडी में हुआ है। इसके अनुसार 2010-2020 के बीच दुनिया में मुस्लिम आबादी 34.7 करोड़ की वृद्धि के साथ बढ़कर 194.6 करोड़ हो गई है। इसकी के साथ मुस्लिम समुदाय की वैश्विक हिस्सेदारी 25.6 प्रतिशत हो चुकी है। हिंदुओं की आबादी में कितना इजाफा? हिंदुओं की बात करें तो पिछले 10 साल में हिंदू आबादी में इजाफा देखने को मिला है। हालांकि हिंदुओं की वैश्विक हिस्सेदारी 15 प्रतिशत की दर पर ही स्थिर बनी हुई है, यह न तो बढ़ी है और न ही घटी है। शोध में पाया गया है कि इस दर के हिसाब से 2010-2020 के बीच हिंदुओं की आबादी 12.6 करोड़ की वृद्धि के साथ बढ़कर 115.8 करोड़ हो गई है।  दुनिया में धार्मिक आबादी को लेकर जारी एक नई रिपोर्ट में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। प्यू रिसर्च सेंटर की इस रिपोर्ट में साल 2010 से 2020 के धार्मिक आबादी के डेटा का विश्लेषण किया गया है, जिससे पता चलता है कि इस दौरान वैश्विक धार्मिक परिदृश्य तेजी से बदला है। एक दशक के दौरान मुस्लिम आबादी किसी भी धर्म के मुकाबले सबसे तेजी से बढ़ी है। अब इस्लाम को मानने वाले दुनिया की कुल आबादी का एक चौथाई हिस्सा हैं। इस रिपोर्ट में हिंदू,ईसाई और बौद्ध आबादी के बारे में भी जानकारी दी गई है। मुस्लिम आबादी सबसे तेजी से बढ़ी प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2010 से 2020 के बीच मुस्लिम आबादी अपेक्षाकृत सबसे तेजी से बढ़ने वाली आबादी थी, जो दुनिया की आबादी का 25.6 प्रतिशत हिस्सा बन गई है। 2010 में यह 23.9 प्रतिशत थी। मुस्लिम आबादी 34.6 करोड़ बढ़ी है। हालांकि, ईसाई अभी भी सबसे बड़ी आबादी है, लेकिन दुनिया की कुल आबादी में इसका हिस्सा घटा है। अब यह दुनिया की कुल जनसंख्या का 25.6 प्रतिशत है, जो कि 1.5 प्रतिशत की गिरावट को दिखाता है। 2010-20 के दौरान ईसाई (सभी मतों) आबादी 12.16 करोड़ बढ़ी है। हिंदुओं की आबादी स्थिर एक अलग प्यू रिपोर्ट बताती है कि इस एक दशक के दौरान ईसाई धर्म को छोड़ने वालों की संख्या शामिल होने के मुकाबले बहुत ज्यादा बढ़ी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि हिंदू धर्म को मानने वालों की जनसंख्या कमोबेश 14.9 प्रतिशत पर स्थिर रही, जबकि बौद्ध धर्म में 0.8 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है, जो ईसाई धर्म के बाद सबसे ज्यादा है। बौद्ध इकलौता धर्म है, जिसके मानने वालों की संख्या 2010 के मुकाबले 2020 में कम हुई है। इसमें 1.8 करोड़ की गिरावट देखी गई है। नास्तिकों की संख्या में जबर्दस्त उछाल रिपोर्ट में सबसे दिलचस्प पहलू उन लोगों की तेजी से बढ़ती संख्या हैं, जो खुद को किसी भी धर्म से नहीं जोड़ते हैं। किसी भी धर्म को न मानने वालों की संख्या 27 करोड़ बढ़ी है। यह अब दुनिया की आबादी का 24.2 प्रतिशत है। इस दौरान यहूदी आबादी की जनसंख्या भी स्थिर रही, जो कुल आबादी का 0.2 प्रतिशत है। यहूदी आबादी में 10 लाख की वृद्धि देखी गई, जो अब 1.48 करोड़ तक पहुंच गई है। धर्म  देश वैश्विक हिस्सेदारी ईसाई-मुस्लिम 53 53.6% बौद्ध 7 4.2% हिंदू 2 15% यहूदी 1 0.2% अन्य धर्म 1 2.2% कोई बहुसंख्यक नहीं 7 – नास्तिकों की आबादी भी बढ़ी रिसर्च रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 2010 में दुनिया में कुल 113 लोग नास्तिक थे, जो किसी भी धर्म को नहीं मानते। 2020 तक इनकी आबादी बढ़कर 140 करोड़ हो गई है, जोकि 27 करोड़ का इजाफा है। वहीं, वैश्विक हिस्सेदारी की बात करें तो नास्तिक 18.2 प्रतिशत हैं।   अन्य धर्मों की हिस्सेदारी   प्यू की रिसर्च में अन्य धर्मों का भी विवरण मौजूद है। मसलन बौद्ध धर्म के लोगों की संख्या 1.9 करोड़ घटकर 32.4 करोड़ ही रह गई है और इनकी वैश्विक हिस्सेदारी 5 प्रतिशत से कम होकर 4.2 प्रतिशत ही बची है। इसके अलावा यदूही समुदाय दुनिया की सबसे छोटी धार्मिक आबादी है, जिनकी आबादी 1.4 से बढ़कर 1.5 करोड़ हो गई है। यहूदी समुदाय की वैश्विक हिस्सेदारी महज 0.2 प्रतिशत है। वहीं, अन्य धर्मों जैसे सिख, जैन और बहाई समुदाय की आबादी 1.8 करोड़ से बढ़कर 17.2 करोड़ हो गई है। इनकी वैश्विक हिस्सेदारी 2.2 प्रतिशत है।  

मुख्यमंत्री ने मजरा-टोला सड़क योजना को दी मंजूरी, मिली बड़ी सौगात, 39,900 किलोमीटर नई पक्की सड़कें और हजारों पुल-पुलिया होंगे तैयार

भोपाल  अब मध्यप्रदेश के मजरे-टोले भी विकास से जुड़ेंगे। इसके लिए 20,600 मजरे-टोलों को चिह्नित कर लिया है। सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट ने मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना को स्वीकृति दी। इस योजना में 39,900 किमी सड़कें(New Road) बनेंगी। इन पर हजारों पुल-पुलिया बनेंगे। इस पर 21,630 करोड़ खर्च होगा। बारहमासी सड़कों से इलाके के स्कूली बच्चों, गर्भवतियों को बारिश में नदी-नाले रास्ता नहीं रोक पाएंगे। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 11 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में कैबिनेट ने मंगलवार कोय ह सौगात दी। तबादले की डेडलाइन 17 जून करने समेत कई जनकल्याण निर्णय भी लिए। मध्यप्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत अब गांवों के सुदूर मजरे और टोले भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया, जिसमें 20,600 मजरे-टोले चिन्हित किए गए हैं। योजना के तहत कुल 39,900 किलोमीटर लंबी नई पक्की सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जिन पर हजारों पुल और पुलिया भी बनेंगी। इस परियोजना पर अनुमानित 21,630 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। बारहमासी सड़कों से सुविधाएं बढ़ेंगी इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि इन सड़कों के माध्यम से ग्रामीण अंचलों में स्कूली बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को बारिश में भी निर्बाध आवागमन मिल सकेगा। नदी-नालों और कच्चे रास्तों की दिक्कतें समाप्त होंगी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार के 11 वर्ष पूरे होने के अवसर पर लिया गया, जिससे राज्य के विकास को नई दिशा मिलेगी। योजना दो चरणों में पूरी होगी  मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना को दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहला चरण 2025-26 से 2029-30 तक चलेगा और दूसरा चरण 2030-31 से 2034-35 तक। इस दौरान 30,900 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जिससे राज्य के सभी पात्र ग्रामीण टोलों को बारहमासी सड़कों से जोड़ा जाएगा। छोटे टोले भी होंगे शामिल, न्यूनतम आबादी और मकानों की शर्त पिछले 75 वर्षों में आबादी बढ़ने और परिवारों के बंटवारे के चलते मजरे-टोले स्वतंत्र इकाइयों के रूप में उभरे हैं, लेकिन अब तक अधोसंरचना से वंचित रहे हैं। सरकार ने तय किया है कि ऐसे मजरे और टोले भी इस योजना में शामिल होंगे जिनमें कम से कम 20 मकान, 100 से अधिक की आबादी और 6,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल होगा। ऐसे 20,600 मजरे-टोले पहले ही चिन्हित किए जा चुके हैं। हर जिले का विकास होगा योजनाबद्ध प्रदेश के प्रत्येक जिले का विकास योजनाबद्ध ढंग से सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने जिला विकास सलाहकार समितियों के गठन को मंजूरी दी है। इन समितियों के अध्यक्ष मुख्यमंत्री स्वयं होंगे और उपाध्यक्ष प्रभारी मंत्री। स्थानीय जनप्रतिनिधि सदस्य होंगे और क्षेत्रीय विशेषज्ञों को भी सम्मिलित किया जाएगा। यह समिति जिले के लिए दीर्घकालिक विकास का रोडमैप तैयार कर सरकार को सौंपेगी। चार शहरों में बनेंगे सुरक्षित हॉस्टल कैबिनेट ने नर्मदापुरम, झाबुआ, सिंगरौली और देवास में कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित हॉस्टलों के निर्माण को भी स्वीकृति दी है। 40.59 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ये हॉस्टल उन महिलाओं को सुविधा देंगे जो औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत हैं। ये आवास पूरी तरह सुरक्षित होंगे और महिला श्रमिकों के लिए एक सशक्त सहारा साबित होंगे। ब्याज मुक्त कर्ज और ग्रामीण सेवा की शर्त में होगा बदलाव कैबिनेट ने मेधावी छात्र योजना में भी महत्वपूर्ण बदलाव को मंजूरी दी है। अब मेडिकल (MBBS) छात्रों को अपनी पढ़ाई का शुल्क स्वयं वहन करना होगा, लेकिन सरकार फीस पूर्ति के लिए छात्रवृत्ति और अतिरिक्त खर्चों के लिए ब्याज मुक्त कर्ज की व्यवस्था करेगी। यदि छात्र पांच वर्षों तक ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा करते हैं, तो सरकार कर्ज चुकाने में मदद करेगी। यह प्रावधान 2025 के शैक्षणिक सत्र से लागू होगा। जो छात्र ग्रामीण सेवा नहीं करेंगे, उन्हें यह कर्ज स्वयं चुकाना होगा। तुअर दाल उद्योग को राहत प्रदेश में महाराष्ट्र जैसे राज्यों से आयातित तुअर से संचालित 134 दाल मिलों को भी सरकार ने राहत दी है। अभी तक इन पर मंडी टैक्स लगता था, जिससे उत्पादन लागत बढ़ती थी। अब इस टैक्स को हटा दिया गया है, जिससे इन मिलों को गति मिलेगी और जीएसटी संग्रहण में भी बढ़ोतरी होगी। हालांकि मंडी राजस्व में लगभग 20 करोड़ रुपये की कमी आएगी, लेकिन राज्य सरकार का मानना है कि उद्योगों को राहत देना अधिक आवश्यक है। मेडिकल पढ़ाई में शुल्क से माफी नहीं, 5 साल के बांड से आजादी मेडिकल छात्रों को पढ़ाई के अतिरिक्त खर्च के लिए सरकार ब्याज मुक्त कर्ज दिलाएगी। मुख्यमंत्री मेधावी छात्र योजना में बदलाव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। छात्रों को शुल्क खुद भरना होगा, फीसपूर्ति के लिए छात्रवृत्ती देंगे। अतिरिक्त खर्च के लिए कर्ज ले सकेंगे, जिसमें सरकार मदद करेगी। सरकार की मंशा अनुरूप 5 साल ग्रामीण इलाके में सेवा देंगे तो सरकार कर्ज चुकाने में मदद करेगी। जो ग्रामीण क्षेत्र में सेवा नहीं देंगे, उन्हें कर्ज खुद चुकाना होगा। यह बदलाव चालू वित्त वर्ष में एमबीबीएस में प्रवेश लेने वालों पर लागू होगा।

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