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सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची ममता की पीड़ा: SIR केस में CJI से कहा— ‘हमें कहीं इंसाफ नहीं’

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के मुद्दे पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में तब अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला, जब खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दलीलें रखने के लिए पेश हुईं। उन्होंने एसआईआर का विरोध करते हुए सीजेआई सूर्यकांत की बेंच के सामने कहा कि हमें कहीं भी न्याय नहीं मिल रहा, हमने चुनाव आयोग को छह चिट्ठियां लिखी हैं। मैं एक बंधुआ मजदूर हूं। उन्होंने चुनाव आयोग पर पश्चिम बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया। ‘बार एंड बेंच’ वेबसाइट के अनुसार, ममता की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान भी पेश हुए और कहा कि अपमैप्ड वोटर 32 लाख हैं। लॉजिकल गड़बड़ी वाली लिस्ट में 1.36 करोड़ हैं। 63 लाख सुनवाई पेंडिंग है अभी। उन्होंने बड़ी संख्या में अनमैप्ड वोटर्स का जिक्र करते हुए कहा कि सुधार के उपायों के लिए बहुत कम समय बचा है। ममता के वकील की तरफ से कुछ उदाहरण भी पेश किए गए, जिसमें बताया गया कि कैसे नामों में गड़बड़ी आई। वकील ने कहा कि हमने आपको असली वोटर्स के उदाहरण दिए हैं। कृपया अपेंडिक्स एक देखें.. चिराग टिबरेवाल। उनकी गड़बड़ी पिता के नाम में मिसमैच थी क्योंकि पिता के नाम में बीच में कुमार आता है। मुझे नोटिस देकर बुलाया गया था। फिर आते हैं अजीमुद्दीन खान…पिता का नाम बंगाली में अलाउद्दीन खान दिखाता है… तो बंगाली से इंग्लिश में… इसमें गलती हो सकती है। ‘मैं एक बंधुआ मजदूर हूं, हमें कहीं न्याय नहीं मिल रहा’ सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने भी दलीलें रखीं। उन्होंने कहा, ”मैं आपकी दया के लिए आभारी हूं। जब न्याय दरवाजे के पीछे रो रहा था, तब हमें लगा कि हमें कहीं से भी न्याय नहीं मिल रहा। हमने चुनाव आयोग को छह चिट्ठियां लिखीं। मैं एक बंधुआ मजदूर हूं। मैं यही पसंद करती हूं। मैं अपनी पार्टी के लिए लड़ रही हूं।” पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि मैं आपको फोटो दिखाती हूं और यह तस्वीर मेरी नहीं है। यह बड़े अखबारों ने छापी है। एसआईआर प्रक्रिया सिर्फ डिलीट करने के लिए है। मान लीजिए शादी के बाद एक बेटी ससुराल जाती है। सवाल किए जाते हैं कि वह पति का सरनेम क्यों इस्तेमाल कर रही है। ये लोग यही कर रहे हैं। कुछ बेटियां जो ससुराल चली गई, उनके नाम डिलीट कर दिए गए। गरीब लोग कभी कभी फ्लैट खरीदते हैं, कभी-कभी वे शिफ्ट हो जाते हैं। ऐसे के भी नाम डिलीट कर दिए गए। चुनाव से पहले बंगाल को निशाना बनाया जा रहा उन्होंने आरोप लगाया कि यह गलत मैपिंग हो रही है। चुनाव से ठीक पहले सिर्फ पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। वे दो महीने में ही वह काम करना चाहते हैं, जिसमें दो साल लग जाते हैं। बीएलओ ने आत्महत्या कर ली और उन्होंने चुनाव अधिकारियों पर यह आरोप लगाया। पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया गया, असम को क्यों नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए जवाब देने को कहा है। सोमवार को इस मामले की फिर से सुनवाई होगी। बता दें कि बनर्जी अपने वकीलों के साथ कोर्ट रूम नंबर एक में मौजूद रहीं। मंगलवार को मुख्यमंत्री के नाम पर एक गेट पास जारी किया गया था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच ने बनर्जी और तीन अन्य लोगों की याचिकाओं पर सुनवाई की। इन याचिकाओं को मोस्तारी बानू और टीएमसी सांसदों डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन ने दायर किया है।  

वन अपराध पर शिकंजा: अवैध खैर लकड़ी तस्करी में वन–पुलिस की बड़ी कार्रवाई

भोपाल. अवैध खैर की लकड़ी की तस्करी के विरुद्ध वन और पुलिस विभाग की बड़ी कार्रवाई मंदसौर जिले के गरोठ थाना अंतर्गत मुखबिर की सूचना पर 3 फरवरी को अवैध खैर की लकड़ी की तस्करी के विरूद्ध वन और पुलिस विभाग द्वारा संयुक्त कार्रवाई की गई। अवैध खैर की लकड़ी ट्रक में भरकर दिल्ली की ओर ले जायी जा रही थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए वन संरक्षक उज्जैन श्री आलोक पाठक, वन मंडलाधिकारी श्री संजय रायखेरे के मार्गदर्शन में उप वनमंडलाधिकारी गरोठ और वन परिक्षेत्र अधिकारी भानपुरा के नेतृत्व में वन विभाग की टीम और गरोठ पुलिस की टीम ने तत्काल संयुक्त मोर्चा संभाला। शामगढ़ नाका और फोरलेन-एटलेन चौकड़ी पर सघन घेराबंदी की गई। घेराबंदी देख ट्रक चालक ने वाहन को बर्डीया अमरा के रास्ते भगाने का प्रयास किया, लेकिन संयुक्त टीम ने सूझबूझ का परिचय देते हुए घेराबंदी कर ट्रक को रोक लिया। ट्रक की तलाशी लेने पर भारी मात्रा में बेशकीमती खैर (Acacia catechu) की अवैध लकड़ी बरामद हुई। वाहन चालक के पास लकड़ी के परिवहन से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज नहीं पाए गए। टीम ने मौके से आरोपी चालक खालिद पिता अजीम पठान (निवासी नोह, हरियाणा) को हिरासत में ले लिया। अग्रिम वैधानिक कार्रवाई लकड़ी अवैध होने के कारण वन विभाग द्वारा वन अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। वर्तमान में जब्त ट्रक वन विभाग की सुपुर्दगी में है। 

जाति जनगणना पर उहापोह के बीच केंद्र का खुलासा—मंत्री बोले, तय प्रक्रिया से आएंगे प्रश्न

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के तहत जाति गणना पर उपजे गतिरोध को दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि जनगणना के दूसरे चरण में जाति से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। जनगणना के साथ-साथ जाति गणना कराने के अपने इरादे को जताते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी देते हुए बताया कि भारत में जनगणना की प्रक्रिया परंपरागत रूप से दो चरणों में पूरी की जाएगी। उन्होंने बताया कि जनगणना के पहले चरण में हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (HLO)का काम संपन्न होगा। इसके तहत इस चरण में हर घर की आवासीय स्थिति, संपत्ति, सुविधाएं और बुनियादी ढांचा जैसी जानकारियां जुटाई जाएंगी।। राय ने बताया कि सरकार ने मतगणना के इस चरण से जुड़े प्रश्नों को 22 जनवरी 2026 को अधिसूचित कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस चरण के बाद दूसरा चरण- जनसंख्या गणना (Population Enumeration – PE) का होगा। इसमें प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां ली जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसी चरण में जाति की गणना भी की जाएगी। जाति गणना पर राज्यों की मांग गृह राज्य मंत्री ने बताया कि जाति गणना को लेकर कई राज्यों और संगठनों से सुझाव और मांगें मिली हैं, जिनमें तमिलनाडु राज्य की ओर से भेजे गए अभ्यावेदन भी शामिल हैं। उन्होंने उन मांगों और जाति गणना पर उपजे गतिरोध को दूर करते हुए कहा कि दूसरे चरण के लिए प्रश्नावली, जिसमें जाति से जुड़े प्रश्न भी शामिल होंगे, जनगणना शुरू होने से पहले तय कर अधिसूचित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और स्थापित प्रक्रिया के तहत होगी। क्या है खास बात? दरअसल, लंबे समय से जाति आधारित जनगणना को लेकर देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस चल रही है क्योंकि जाति जनगणना को लेकर नीति और तकनीकी मैकेनिज़्म अभी तक अंतिम रूप में सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों और न्यायालय ने भी कहा है कि डेटा की सत्यता और भरोसेमंद रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त जांच-प्रक्रियाएँ बनानी होंगी। बहरहाल, जनगणना 2027 में जाति को शामिल करने की पुष्टि को एक अहम नीतिगत कदम माना जा रहा है। इससे भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक नीतियों को दिशा मिल सकती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि दूसरे चरण की प्रश्नावली में जाति से जुड़े सवाल किस स्वरूप में रखे जाते हैं। 2027 की जनगणना 16वें राष्ट्रीय सर्वेक्षण के रूप में होगी। हिमालयी और बर्फ़ीले इलाकों में पहले चरण की गिनती 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी, जबकि बाकी देश में मुख्य गणना 1 मार्च 2027 से रेफरेंस डाटा के साथ शुरू होगी। यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से की जाएगी, जिसमें मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए लोगों को अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प मिलेगा।  

6 करोड़ 50 लाख रूपये से अधिक के 54 चार पहिया वाहन जब्त

भोपाल. मध्यप्रदेश पुलिस ने प्रदेश के ग्वालियर एवं इंदौर जिलों में वाहन किराये पर लेकर उन्हें गिरवी रखकर धोखाधड़ी करने वाले संगठित गिरोहों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की है। इस में पुलिस ने विगत 10 दिनों में 06 करोड़ 50 लाख रूपए से अधिक के 54 वाहन जब्‍त किए हैं। ग्वालियर में 15 वाहन जब्‍त क्राईम ब्रांच पुलिस ने किराए पर ली गई 4 पहिया गाड़ियों को फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से अन्य व्यक्तियों के पास गिरवी रखकर धोखाधड़ी करने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी द्वारा स्वयं को एक निजी कंपनी का मैनेजर बताकर ट्रेवल्स संचालकों से बड़ी संख्या में वाहन किराए पर लेता था तथा वाहनों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अन्य व्यक्तियों के पास गिरवी रखकर अवैध रूप से आर्थिक लाभ प्राप्त करता था। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने कुल 15 चार पहिया वाहन कीमती लगभग 01 करोड़ 50 लाख रुपये को विधिवत जब्त किया। इंदौर- 39 चार पहिया वाहन जब्‍त इंदौर जिले में भी थाना अन्नपूर्णा पुलिस ने किराए पर ली गई कारों को अन्य व्यक्तियों के पास गिरवी रखकर धोखाधड़ी करने वाले शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी वाहन मालिकों से 11 माह का लिखित एग्रीमेंट कर कारें किराए पर लेता था। प्रारंभ में 2–3 माह किराया देने के बाद वाहनों को अन्य व्यक्तियों के पास गिरवी रख देता था। आरोपी वाहनों में लगे जीपीएस सिस्टम हटाकर वाहन मालिकों को किराया देना बंद कर देता था। फरियादी की रिपोर्ट पर थाना अन्नपूर्णा में प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई। विवेचना के दौरान थाना अन्नपूर्णा पर करीब 40 से अधिक वाहन मालिकों द्वारा आरोपी के विरुद्ध आवेदन प्रस्तुत किए गए, जिससे आरोपी द्वारा संगठित एवं बड़े स्तर पर वाहन धोखाधड़ी करना उजागर हुआ।विवेचना के दौरान आरोपी को गिरफ्तार किया गया। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने 39 चार पहिया वाहन जप्त किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 5 करोड़ से अधिक है। मध्‍यप्रदेश पुलिस द्वारा ग्वालियर एवं इंदौर जिलों में की गई इन संयुक्त कार्रवाइयों के परिणामस्वरूप कुल 54 चार पहिया वाहन जब्त किए गए हैं, जिनकी कुल अनुमानित कीमत 6 करोड़ 50 लाख रुपये से अधिक है। मध्यप्रदेश पुलिस की समयबद्ध एवं प्रभावी कार्यवाही से न केवल संगठित धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है, बल्कि बड़ी संख्या में वाहन मालिकों को भी आर्थिक क्षति से राहत प्राप्त हुई है।  

शारदा घाट अखड़ार के पास हुआ सड़क हादसा

बिलासपुर उमरिया जिले के बिलासपुर तहसील अंतर्गत शारदा घाट अखड़ार के पास सड़क हादसा हो गया है। रिश्तेदारों के घर से लौट रहा परिवार ऑटो में सवार था।तभी पीछे से आकर एक अज्ञात ऑटो ने टक्कर मार दी। जिससे अनियंत्रित होकर के ऑटो पलट गया।हादसे में करौंदी निवासी यशोदा बाई 64 वर्षीय,रश्मि 16 वर्षीय,रजनी 35 वर्षीय,मायाराम 37 वर्षीय,पुष्पा 19 वर्षीय घायल हो गए हैं। सूचना मिलते ही चंदिया पुलिस मौके पर पहुंची और 108 भी मौके पर पहुंच कर सभी घायलों को चंदिया अस्पताल ले जाया गया है। जहां उनका इलाज जारी है।

योगी सरकार सख्त मूड में: समीक्षा बैठक में मंत्री बोले – गड़बड़ी मिली तो सीधे कार्रवाई

लखनऊ योगी सरकार में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि अगर विभागीय कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, शिथिलता अथवा अनियमितता मिली तो सख्त ऐक्शन लेंगे। चेतावनी देते हुए कहा कि लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएगा, जिससे विभाग में सकारात्मक, उत्तरदायी एवं परिणामोन्मुखी कार्य संस्कृति को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कार्यों में कोताही पाई गई तो संबंधित अधिकारी एवं कार्मिकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने ये निर्देश मंगलवार को यहां उदयगंज स्थित सिंचाई विभाग मुख्यालय में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दिए। शारदा संगठन की समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने विभागीय कार्यों की प्रगति की गहन समीक्षा करते हुए स्पष्ट एवं कड़े निर्देश दिए। इसके साथ ही मंत्री ने विभिन्न निर्माण कार्यों की निर्माण कार्य के पूर्व की स्थिति एवं निर्माण पूर्ण होने के पश्चात की स्थिति का तुलनात्मक मूल्यांकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित मानकों, गुणवत्ता एवं समयसीमा के अनुरूप पूर्ण किए जाएं, जिससे योजनाओं का वास्तविक लाभ किसानों एवं आम जनता तक पहुंच सके। मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि वे स्वयं शीघ्र ही विभिन्न निर्माण कार्यों का भौतिक निरीक्षण करेंगे, ताकि जमीनी स्तर पर कार्यों की वास्तविक स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी अथवा अनियमितता की शिकायत नहीं मिलनी चाहिए। पूरी प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी, निष्पक्ष एवं नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। अंत में उन्होंने अधिकारियों से पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी एवं जवाबदेही के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता सिंचाई परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण कर प्रदेश के किसानों को अधिकतम लाभ पहुंचाना है। समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग अनिल गर्ग, प्रमुख अभियंता एवं विभागध्यक्ष सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग संदीप कुमार, प्रमुख अभियंता परिकल्प एवं नियोजन अशोक कुमार सिंह, मुख्य अभियंता शारदा संगठन, मुख्य अभियंता शारदा सहायक, सिंचाई विभाग (यांत्रिक संगठन) के मुख्य अभियंता तथा संबंधित संगठनों के अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता सहित सिंचाई विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।  

स्टेट फॉरेस्ट कॉल सेंटर स्थापित – शिकायतों पर होगी त्वरित कार्यवाही

भोपाल . प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन एवं वन बल प्रमुख श्री बी.एन. अम्बाडे द्वारा 26 जनवरी 2026 को वन विभाग से संबंधित शिकायतों पर क्विक एक्शन और उनके त्वरित निराकरण के लिये स्टेट फॉरेस्ट कॉल सेंटर वन मुख्यालय, वन भवन तुलसीनगर भोपाल में स्थापित किया गया। कॉल सेंटर के दूरभाष नंबर 0755-2524000, 2524200 पर नागरिक वन विभाग से संबंधित शिकायतें दर्ज करा सकेंगे।  

‘हाथ मिलाना तो दूर…’ राहुल के तंज पर भड़के बिट्टू, कांग्रेस पर साधा सीधा निशाना

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने ‘गद्दार’ टिप्पणी पर चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी खुद को ही सबसे देशभक्त समझते हैं। उन्होंने कांग्रेस पर पंजाब में हिंसा कराने और कत्ल कराने के आरोप लगाए हैं। बिट्टू ने कहा कि वह कभी भी गांधी परिवार के वारिस से हाथ नहीं मिलाएंगे। बुधवार को संसद परिसर में प्रदर्शन के दौरान राहुल ने कई सांसदों के बीच बिट्टू को गद्दार दोस्त कह दिया था। ‘गांधी परिवार ने पंजाब में आग लगाई’ बिट्टू ने कहा, ‘वह समझते हैं कि सबसे बड़े देशभक्त हम ही हैं। पिताजी ने शहादत दी। तो मेरी पार्टी में यही लड़ाई थी कि मेरे दादाजी सरदार बेअंत सिंह। जो आपने आग लगाई थी पंजाब में, ये कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार ने ही आग लगाई। हमारे सबसे बड़े गुरुद्वारा, स्वर्ण मंदिर में गोली लगी। हजारों सिखों को पंजाबियों को इन्होंने निशाना बना बना के कत्ल करवाया। मर्डर कराया।’ उन्होंने कहा, ‘अगर राजीव गांधी जी का नाम शहीद लेना पड़ता है, तो शहीद-ए-आजम सरदार बेअंत सिंह भी कहना चाहिए। मैं भी उस परिवार से आता हूं, ये तकलीफ है।’ केंद्रीय रेल राज्य मंत्री ने कहा, ‘जितनी देर मैं आपके साथ था तो ठीक था। अब अगर मैं बीजेपी में हूं तो आप मेरे लिए इन शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। और उसके बाद देखो ये अपने आप को समझते क्या हैं। ये चीज कहकर मुझे हाथ आगे कर रहे हैं। जैसे कोई शहंशाह हों। वह समझते हैं कि मैं मालिक ही हूं इस दुनिया देश का।’ हाथ नहीं मिलाऊंगा, बिट्टू बोले उन्होंने कहा, ‘ मैं गांधी परिवार का न हूं, लेकिन मेरे सिर पर पगड़ी है सरदार की। तो हाथ मिलाने जब बढ़ाया, तो मैंने कहा कि आप देश के गद्दार हो, देश के दुश्मन हो। जो रोज देश और सेना के खिलाफ बात करते हो। पंजाब का हाथ, गांधी परिवार जो सिखों को कातिल है। उस गांधी परिवार के वारिस के साथ मेरा हाथ नहीं मिलेगा।’ भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी पर पूरे सिख समुदाय का अपमान करने के आरोप लगाए हैं। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लिखा कि जिस तरह राहुल गांधी ने सम्मानित सिख नेता रवनीत सिंह बिट्टू को संबोधित किया, वो शालीनता और सभ्यता की सारी हदें पार करता है।  

असम से जंगली भैंसा लाकर मध्यप्रदेश के वनों में बसाने पर हुई गहन च

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में पर्यटन क्षेत्र के विकास, रिजर्व फॉरेस्ट के विस्तार और वन्य जीव संरक्षण की असीम संभावनाएं हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य सरकार वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में अभूतपूर्व कदम उठा रही है। श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की बसाहट के बाद अब असम का जंगली भैंसा भी मध्यप्रदेश के जंगलों में स्वछंद विचरण करता दिखाई देगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने असम से जंगली भैंसा मध्यप्रदेश लाने की सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने के लिए बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  भूपेंद्र यादव से विभिन्न विषयों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 28 फरवरी को बोत्सवाना से 8 चीते मध्यप्रदेश लाए जाएंगे। चीतों के पुनर्स्थापन के लिए केंद्रीय मंत्री  यादव से आवश्यक सहयोग और व्यवस्थाओं पर भी विस्तृत रूप से बात की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन्य जीव संरक्षण और जैव-विविधता संवर्धन के लिए केंद्र सरकार के सहयोग के लिये आभार माना केंद्रीय मंत्री  यादव ने प्रदेश के प्रयासों की सराहना करते हुए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय खाद्य मंत्री  प्रह्लाद जोशी से की मुलाकात किसान कल्याण वर्ष और गेहूँ उपार्जन भंडारण की दी जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों के हित में मध्यप्रदेश सरकार किसान कल्याण वर्ष मना रही है। इस वर्ष में हमारी सरकार किसानों को उनकी उपज का समुचित मूल्य दिलाने के लिए संकल्पित है। मध्यप्रदेश में गेहूं का उपार्जन एवं भंडारण की प्रक्रिया प्रारंभ होने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को नई दिल्‍ली में केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री  प्रह्लाद जोशी से भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय मंत्री  जोशी से मध्यप्रदेश में मनाए जा रहे किसान कल्याण वर्ष और गेहूं उपार्जन एवं भंडारण व्यवस्था को लेकर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में गेहूं का उपार्जन सरलता से पर्याप्त भंडारण व्यवस्था के साथ होता है। केंद्रीय मंत्री  जोशी ने मध्यप्रदेश को गेहूं उपार्जन में हरसंभव आवश्यक सहयोग देने का आश्वासन दिया है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली में केंद्रीय रेल मंत्री श्री वैष्णव से की सौजन्य भेंट

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली में केंद्रीय रेल एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव से संसद भवन में बुधवार को सौजन्य मुलाकात की। उन्होंने मध्यप्रदेश में रेल से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में संचालित एवं प्रगतिरत रेलवे परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से मध्यप्रदेश के विकास, कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।  

WhatsApp Premium की एंट्री: पैसे खर्च करने पर मिलेंगे 5 खास फीचर्स, क्या सच में लेना चाहिए सब्सक्रिप्शन?

नई दिल्ली WhatsApp बहुत जल्द सबस्क्रिप्शन फीचर लेकर आने वाला है और इस बात की पुष्टि खुद Meta कर चुका है। इसका मतलब है कि आज नहीं, तो कल WhatsApp चलाने के लिए लोगों को पैसे खर्च करने पड़ेंगे। हालांकि अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक WhatsApp का सब्सक्रिप्शन मॉडल काफी हद तक यूट्यूब जैसा रहेगा। कहने का मतलब है कि लोगों को बिना सब्सक्रिप्शन के भी ऐप इस्तेमाल करने दिया जाएगा और लोग बेसिक फीचर्स भी इस्तेमाल कर पाएंगे। हालांकि Tech Crunch की रिपोर्ट के मुताबिक WhatsApp अपने प्रीमियम यूजर्स को अगग से खास फीचर्स उपलब्ध करवाएगा। ऐसा ही कुछ यूट्यूब भी करता है। लोग फ्री में यूट्यूब को एक्सेस कर सकते हैं लेकिन ज्यादा फीचर्स और विज्ञापनों से बचने के लिए सब्सक्रिप्शन लेना पड़ता है। चलिए डिटेल में जानते हैं कि WhatsApp के सब्सक्रिप्शन फीचर में क्या कुछ मिलेगा और क्या आपको इसके लिए पैसे खर्च करने चाहिए? सब्सक्रिप्शन में क्या देगा WhatsApp? रिपोर्ट के मुताबिक, WhatsApp अपना सब्सक्रिप्शन लेने वाले यूजर्स को कुछ खास फीचर्स उपलब्ध कराएगा। इसमें से एक स्टेटस टैब में विज्ञापन न दिखाना होगा। इसके अलावा खास स्टीकर्स, ऐप थीम, 3 से ज्यादा चैट्स पिन करने की सुविधा, ऐप का आइकन बदलने की सुविधा और खास रिंगटोन आदि। बता दें कि सब्सक्रिप्शन प्लान में सिर्फ यही फीचर्स नहीं होंगे। बाकी के फीचर्स और सब्सक्रिप्शन प्लान की कीमत का खुलासा होना अभी बाकी है। क्या Chat करने के भी लगेंगे पैसे? WhatsApp के सब्सक्रिप्शन मॉडल के बारे में सुनकर यूजर्स को लग सकता है कि उन्हें ऐप पर चैट करने के लिए भी पैसे देने होंगे। हालांकि ऐसा नहीं है। WhatsApp मुख्य रूप से सब्सक्रिप्शन विज्ञापन मुक्त अनुभव देने के लिए बेचेगा। कहने का मतलब है कि स्टेटस फीचर का इस्तेमाल करते हुए विज्ञापन न देखने के लिए लोगों को पैसे चुकाने होंगे। WhatsApp सब्सक्रिप्शन खरीदना सही होगा? लोगों के मन में अभी से सवाल आने लगे हैं कि क्या WhatsApp का सब्सक्रिप्शन खरीदना ठीक होगा। हालांकि इस बात का फैसला तब करना ज्यादा बेहतर होगा, जब कंपनी सब्सक्रिप्शन प्लान की कीमत और फीचर्स का खुलासा करेगी। हालांकि लीक्स पर मिल रही जानकारी के आधार पर देखें, तो ज्यादातर लोगों के लिए फ्री WhatsApp चलाते रहना ठीक रहेगा। हर कोई खास फीचर्स या 3 से ज्यादा चैट्स को पिन करना नहीं चाहता। इसके अलावा स्टेटस टैब में दिखने वाले विज्ञापन से भी लोगों को ज्यादा परेशानी नहीं होनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि स्टेटस काफी छोटे होते हैं और यूट्यूब की तरह वहां लोग लंबे वीडियो नहीं देखते। बता दें कि फिलहाल इंस्टाग्राम स्टोरीज में विज्ञापन दिखते हैं और लोगों को उससे परेशानी नहीं है। कब शुरू होगा WhatsApp का सब्सक्रिप्शन मॉडल? रिपोर्ट्स के मुताबित, WhatsApp के आने वाले सब्सक्रिप्शन मॉडल पर अभी Meta की ओर से ऑफिशियली सिर्फ यह जानकारी मिली है कंपनी इस पर काम कर रही है। इसके अलावा WhatsApp के सब्सक्रिप्शन मॉडल के बारे में ऐप के एक बीटा वर्जन 2.26.3.9 के कोड से भी पता चला है। ऐसे में हो सकता है कि WhatsApp तुरंत अपना सब्सक्रिप्शन मॉडल पेश न करे लेकिन ऐसा जल्द हो सकता है।

राहुल के आरोपों पर रिजिजू ने ली चुटकी, बोले— हम थक गए, उनकी चुप्पी नहीं टूटी

नई दिल्ली लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा बोलने की अनुमति न मिलने को लेकर लिखे गए पत्र के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। इस मामले पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि संसद नियमों से चलती है, किसी की मनमर्जी से नहीं।   संसद के मौजूदा बजट सत्र के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि सदन में महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलते समय उन्हें रोका जा रहा है या पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा है। राहुल गांधी का तर्क है कि विपक्ष के नेता के नाते उन्हें अपनी बात रखने का लोकतांत्रिक अधिकार है, जिसे दबाया जा रहा है। किरेन रिजिजू का पलटवार राहुल गांधी के आरोपों पर जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार ने उनके पत्र का उत्तर दे दिया है। रिजिजू ने राहुल गांधी के रवैये पर सवाल उठाते हुए करारा तंज कसा। संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा- ‘हम लोग भी रुक-रुक के थक गए हैं। वो बोलते ही नहीं हैं। वे नियम से बाहर बोलते हैं। हम लोगों ने दो दिन इंतजार किया। बाकी लोगों को भी तो बोलने का मौका मिलना चाहिए न। वे (राहुल गांधी) अपनी मर्जी से थोड़ी न बोलेंगे…ये भारत की संसद है। यहां नियम से बोलना पड़ता है।’ केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा- कांग्रेस पार्टी ‘थेथरोलॉजी’ का जमात हो गया है। राहुल गांधी और उनके लोग झूठ और गलत जानकारी फैलाते हैं। वे लोकतंत्र को शर्मसार करते हैं। वे संसद को कांग्रेस पार्टी का ऑफिस समझते हैं। वे संसद के खिलाफ बोलते हैं और कभी भी सकारात्मक नहीं सोचते। राहुल गांधी के नेतृत्व में, वे एक साज़िश के तहत देश के खिलाफ काम करते हैं… राहुल गांधी झूठ बोलते हैं।   प्रियंका का रिएक्शन, सांसदों का प्रदर्शन इससे पहले जब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा से पूछा गया कि क्या विपक्ष आज संसद में PM को बोलने देगा तो उन्होंने कहा- देखते हैं क्या होता है।’ इस बीच कांग्रेस सांसदों ने ‘PM समझौता कर चुके हैं’ वाला पोस्टर लेकर संसद की सीढ़ियों पर विरोध प्रदर्शन किया। कल, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर मीडिया से बात करते हुए यही आरोप लगाया था। लोकसभा सांसद गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, बी. मणिक्कम टैगोर, डॉ. प्रशांत यादवराव पाडोले, चमाला किरण कुमार रेड्डी और एस. वेंकटेशन को कल सदन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा चीन का मुद्दा उठाने के दौरान सदन के नियमों का उल्लंघन करने के लिए संसद के बाकी सत्र के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। सस्पेंड किए गए लोकसभा सांसद गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, बी. मणिक्कम टैगोर, डॉ. प्रशांत यादवराव पाडोले, चमाला किरण कुमार रेड्डी और एस. वेंकटेशन ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। राहुल गांधी का बड़ा आरोप इससे पहले राहुल गांधी ने अपने पत्र में सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सोमवार को जिस तथ्य को प्रमाणित करने के बहाने उन्हें बोलने से रोका गया है उसकी प्रमाणिकता के संदर्भ में उन्होंने सदन के पटल पर दस्तावेज पेश कर दिया है। उन्होंने लिखा- आपने जिस दस्तावेज को प्रमाणित करने का निर्देश दिया था आज मैंने अपनी बातचीत को पुनः शुरू करते हुए उस को प्रमाणित कर दिया। सदन की लंबी परंपरा में पूर्ववर्ती अध्यक्षों के ऐसे मामलों में समय समय पर दिए गए निर्णय भी शामिल हैं। सदन में किसी दस्तावेज का उल्लेख करने वाला सदस्य प्रस्तुत तथ्यों को प्रमाणित करने के लिए बाध्य होता है और इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद अध्यक्ष उस सदस्य को दस्तावेज का उद्धरण देने या उसका उल्लेख करने की अनुमति देते हैं। इसके बाद उस दस्तावेज पर प्रतिक्रिया देने का काम सरकार का हो जाता है और अध्यक्ष की भूमिका समाप्त हो जाती है। राहुल गांधी ने आगे लिखा- आज मुझे लोकसभा में बोलने से रोका जाना न केवल इस परंपरा का उल्लंघन है, बल्कि यह एक गंभीर चिंता भी पैदा करता है कि विपक्ष के नेता के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मामलों पर मुझे जानबूझकर बोलने से रोका जा रहा है। यह दोहराना उचित होगा कि राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति के अभिभाषण का एक प्रमुख हिस्सा थी, जिस पर संसद में चर्चा आवश्यक है।  

यात्रियों की सुविधा में नया आयाम : पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के प्रयास से अंबिकापुर-दुर्ग एक्सप्रेस अब रायपुर स्टेशन के प्लेटफॉर्म-1 से चलेगी

रायपुर. पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने यात्रियों की सुविधा संवर्धन की दिशा में एक सराहनीय पहल की है। उनके प्रयासों के फलस्वरूप गाड़ी संख्या 18242 (अंबिकापुर-दुर्ग एक्सप्रेस) अब रायपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 01 से प्रस्थान करेगी। यह व्यवस्था दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे प्रशासन के सहयोग से लागू कर दी गई है। राजधानी रायपुर की आम जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल के कार्यालय ने मंडल रेल प्रबंधक, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, रायपुर को पत्र लिखकर इस सुविधा की मांग की थी। पत्र में यात्रियों को होने वाली असुविधाओं का विस्तृत उल्लेख करते हुए त्वरित कार्रवाई की अपील की गई थी। मंडल रेल प्रबंधक द्वारा इस पत्र का शीघ्र संज्ञान लेते हुए गाड़ी को प्लेटफॉर्म-01 पर लेने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इस जनहितैषी निर्णय से अंबिकापुर, दुर्ग सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आने वाले हजारों यात्रियों को अब प्लेटफॉर्म बदलने की झंझट से मुक्ति मिलेगी। विशेष रूप से बुजुर्ग, महिलाओं और बच्चों के लिए यह व्यवस्था वरदान साबित होगी।  मंडल रेल प्रबंधक एवं संबंधित रेल अधिकारियों के सहयोग के लिए पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल ने उन्हें धन्यवाद ज्ञापित करते हुए समस्त यात्रियों को इस सुविधा के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दी है।

वनधन विकास केंद्र केड़ना की प्रेरक पहल

रायपुर. वनधन विकास केंद्र केड़ना की प्रेरक पहल ग्रामीण अंचलों में आजीविका के सीमित साधनों के बीच जब स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक दृष्टिकोण से जोड़ा जाता है, तब सफलता की नई इबारत लिखी जाती है। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है धर्मजयगढ़ वनमंडल अंतर्गत वनधन विकास केंद्र केड़ना की, जहाँ सबई घास से रस्सी निर्माण ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आर्थिक और सामाजिक बदलाव लाया है। वन विभाग की अधिकारियों ने आज यहाँ बताया कि सबई घास रायगढ़ जिले के वन क्षेत्रोंकृजमझोर, केड़ना, सोलमुड़ा, सोरझुड़ा, अन्नोला एवं पेलमाकृमें प्राकृतिक रूप से प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। पारंपरिक रूप से ग्रामीण महिलाएं इससे हाथ से रस्सी बनाकर घरेलू उपयोग या स्थानीय बाजारों में सीमित स्तर पर बिक्री करती थीं। हालांकि, बाजार तक सीधी पहुंच और उचित मूल्य न मिलने के कारण यह कार्य बड़े पैमाने पर आय का साधन नहीं बन पा रहा था। इसी कड़ी में राज्य सरकार की वनधन योजना के अंतर्गत वनधन विकास केंद्र केड़ना की स्थापना कर महिलाओं को स्व-सहायता समूहों के माध्यम से संगठित किया गया। उन्हें सबई घास से रस्सी निर्माण के लिए हाथों एवं विद्युत चालित मशीनें उपलब्ध कराई गईं। स्तर ही व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया गया। इससे महिलाओं की उत्पादन क्षमता बढ़ी और गुणवत्ता में भी सुधार हुआ। दरअसल सबई घास से निर्मित रस्सी का उपयोग बांस के बंडलों को बांधने में किया जाता है, जिसकी मांग वन विभाग एवं पेपर उद्योग में लगातार बनी रहती है। वन विभाग द्वारा सबई रस्सी को 45 रुपये प्रति किलो की दर से क्रय किया जाता है, जिससे महिलाओं को मजदूरी के रूप में नियमित आय प्राप्त हो रही है। वहीं तैयार रस्सी को विभिन्न वनमंडलों में 75 रुपये प्रति किलो की दर से विक्रय कर वनधन केंद्र को भी लाभ मिल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्षों में वनधन केंद्र केड़ना से जुड़ी महिलाओं ने 30 से 40 क्विंटल रस्सी का निर्माण कर 1.5 से 2 लाख रुपये तक की आय अर्जित की। वर्ष 2025-26 में 150 क्विंटल रस्सी निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिससे लगभग 7 से 8 लाख रुपये की आय ग्रामीण महिलाओं को होने की संभावना है। मार्च 2026 तक कुल 11.25 लाख रुपये मूल्य की रस्सी निर्माण कर 7.50 लाख रुपये मजदूरी के रूप में ग्रामीणों को प्राप्त होने का अनुमान है। यह परियोजना पूरी तरह ईको-फ्रेंडली है। सबई घास का विनाश रहित दोहन किया जाता है, जिससे वन संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बना रहता है। भविष्य में भू-क्षरण प्रभावित क्षेत्रों में सबई घास रोपण की योजना भी प्रस्तावित है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार के अवसर और बढ़ेंगे। वनधन विकास केंद्र केड़ना की यह पहल इस बात का सशक्त उदाहरण है कि यदि स्थानीय संसाधनों का वैज्ञानिक और संगठित उपयोग किया जाए, तो ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं। सबई घास से रस्सी निर्माण ने न केवल रोजगार सृजन किया है, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास, आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की नई उम्मीद भी जगाई है।

इस वर्ष 54 हजार से अधिक प्रतिभागियों के पंजीयन ने रचा नया इतिहास

रायपुर. आदिवासी संस्कृति का महाकुंभ बस्तर पण्डुम 2026 बस्तर पण्डुम छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का एक प्रमुख सांस्कृतिक, सामुदायिक और प्राकृतिक उत्सव है, जो जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं और जीवन शैली को संरक्षित व प्रदर्शित करता है।  जिसमें पारंपरिक नृत्य, संगीत (मांदर-बांसुरी), वेशभूषा, लोक शिल्प (काष्ठ/बांस/धातु) और पारंपरिक खान-पान का प्रदर्शन किया जाएगा। यह उत्सव बस्तर की आत्म-अस्मिता का प्रतीक है, जो स्थानीय कलाकारों को मंच देने के साथ-साथ युवाओं को उनकी जड़ों से जोड़ता है। विभिन्न अंचलों से आए प्रतिभागियों ने बस्तर की 12 पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं का  प्रदर्शन करेंगें। इस वर्ष 54 हजार से अधिक प्रतिभागियों का पंजीयन  इस वर्ष के आयोजन ने लोकप्रियता के पुराने सभी पैमाने ध्वस्त कर दिए हैं और यह केवल एक प्रतियोगिता न रहकर अब लोक संस्कृति के एक विशाल उत्सव का रूप ले चुका है। आँकड़ों पर नजर डालें तो यह आयोजन इस बार एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। वर्ष 2025 में जहाँ विकासखंड स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में 15,596 प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, वहीं इस वर्ष यह आँकड़ा तीन गुना से भी अधिक बढ़कर 54,745 तक पहुँच गया है।  बस्तर के लोग अपनी जड़ों, परंपराओं और लोक कलाओं को सहेजने के लिए कितने जागरूक और उत्साहित हैं। विशेष रूप से दन्तेवाड़ा जिले ने 24,267 पंजीयन के साथ पूरे संभाग में सर्वाधिक भागीदारी का रिकॉर्ड बनाया है, जिसके बाद कांकेर, बीजापुर और सुकमा जैसे जिलों ने भी हजारों की संख्या में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है। समृद्ध जनजातीय संस्कृति विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने तैयार  बस्तर की माटी की खुशबू और यहाँ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति एक बार फिर विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने को तैयार है। संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 07 से 09 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाी है, जिसके लिए अंचल के निवासियों में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। इस भारी उत्साह के बीच, अब सभी की निगाहें 07 से 09 फरवरी के बीच होने वाली संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं पर टिकी हैं। जिला स्तर की कड़ी प्रतिस्पर्धा से जीत कर आए 84 दल और उनके 705 चयनित कलाकार इस दौरान अपनी कला की जादू बिखरेंगे। इन तीन दिनों में मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगा जनजातीय नृत्य की थाप, पारंपरिक गीतों की गूंज और नाटकों का मंचन ।   65 कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन छेड़ेंगे प्रतियोगिता में कुल 12 अलग-अलग विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें सर्वाधिक 192 कलाकार जनजातीय नृत्य में और 134 कलाकार जनजातीय नाटक में अपना हुनर दिखाएंगे। यह मंच केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होगा, बल्कि यह बस्तर के ज्ञान, कला और स्वाद का एक अनुपम संगम होगा। जहाँ एक ओर 65 कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन छेड़ेंगे, वहीं दूसरी ओर 56 प्रतिभागी लजीज जनजातीय व्यंजनों की खुशबू बिखेरेंगेे। इसके अतिरिक्त बस्तर की दुर्लभ वन औषधियों, चित्रकला, शिल्प कला, आभूषण और आंचलिक साहित्य का प्रदर्शन भी किया जाएगा, जो नई पीढ़ी को अपनी विरासत से रूबरू कराएगा। संभाग स्तर पर 340 महिलाएं अपनी कौशल का करेंगी प्रदर्शन   इस आयोजन की एक और सबसे खूबसूरत तस्वीर मातृशक्ति की बढ़ती भागीदारी है। संभाग स्तर पर पहुँचने वाली 705 प्रतिभागियों में महिला और पुरुष कलाकारों की संख्या में गजब का संतुलन देखने को मिल रहा है, जिसमें 340 महिलाएं और 365 पुरुष शामिल हैं। यह भागीदारी बताती है कि बस्तर की संस्कृति को आगे ले जाने और उसे संरक्षित करने में यहाँ की महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। कुल मिलाकर बस्तर पण्डुम 2026 अपनी भव्यता और जन-भागीदारी के साथ एक अविस्मरणीय आयोजन की ओर अग्रसर है।

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