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अंबिकापुर रहा सबसे ठंडा, छत्तीसगढ़ में अगले 2 दिन में गिरेगा तापमान

रायपुर. छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज बदलने वाला है. मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अगले 48 घंटों के दौरान न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे रात की ठंड में इजाफा होने की संभावना है. न्यूनतम तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होने की संभावना है. इसके बाद आने वाले दिनों में किसी विशेष परिवर्तन के आसार नहीं हैं. बीते 24 घंटों में प्रदेश में मौसम पूरी तरह शुष्क रहा. अगले दो दिनों में तापमान में गिरावट के बाद अगले 7 दिनों तक प्रदेश के अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है. कहां रही सबसे ज्यादा गर्मी और कहां सबसे ज्यादा ठंड? मौसम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, राजनांदगांव में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 31.5°C दर्ज किया गया और अंबिकापुर में सबसे कम न्यूनतम तापमान 11.5°C दर्ज किया गया.                     प्रमुख शहरों के तापमान का हाल  स्टेशन    अधिकतम तापमान (°C)    न्यूनतम तापमान (°C)    सापेक्ष आर्द्रता (08:30 am) रायपुर    30.7°C    18.4°C    71% बिलासपुर    29.5°C    18.4°C    73% दुर्ग    30.8°C    13.6°C    87% जगदलपुर    31.3°C    13.3°C    70% पेण्ड्रारोड    26.6°C    14.8°C    92% रायपुर शहर के लिए पूर्वानुमान  राजधानी रायपुर में 5 फरवरी को सुबह के समय धुंध छाए रहने की संभावना है. शहर का अधिकतम तापमान 31°C और न्यूनतम तापमान 18°C के आसपास रहने का अनुमान है.

नक्सली मुठभेड़ में छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र बॉर्डर पर 3 नक्सली ढेर, एक जवान हुआ शहीद

बीजापुर  बीजापुर (Bijapur) और महाराष्ट्र की सीमा से लगे अबूझमाड़ (Abujhmad) क्षेत्र में पुलिस (Police) और नक्सलियों (Naxalite) के बीच पिछले दो दिनों से भीषण मुठभेड़ जारी है. यह मुठभेड़ एक बड़े एंटी नक्सली ऑपरेशन के दौरान शुरू हुई, जिसे सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों के निर्णायक सफाए के रूप में देखा है. मुठभेड़ के दौरान अब तक तीन नक्सली ढेर किए जा चुके हैं, जिनमें दो पुरुष और एक महिला शामिल है. घटना स्थल से एक AK-47 राइफल और एक SLR बरामद की गई है. मारे गए नक्सलियों की पहचान अभी तक जारी नहीं की गई है और उनकी विस्तृत जानकारी एकत्र की जा रही है. अबुझमाड़ जंगल इलाके में चल रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई है, जिसमें तीन नक्सली मारे गए हैं।पुलिस के मुताबिक मारे गए नक्सलियों में दो पुरुष और एक महिला शामिल हैं। मुठभेड़ स्थल से एक AK-47 राइफल और एक SLR राइफल बरामद की गई है। फिलहाल मारे गए नक्सलियों की पहचान नहीं हो पाई है।इस अभियान के दौरान C-60 यूनिट के कांस्टेबल दीपक चिन्ना मडावी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें हेलीकॉप्टर से भामरागढ़ के उप-जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने वीरगति प्राप्त की। वहीं एक अन्य जवान कांस्टेबल जोगा मडावी गोली लगने से घायल हुए हैं, जिनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।सुरक्षा बलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है और पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। एक जवान शहीद, एक घायल इस ऑपरेशन में सुरक्षा बलों को भी नुकसान झेलना पड़ा है. C-60 कमांडो के कॉन्स्टेबल दीपक चिन्‍ना मडावी (38 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हुए थे. उन्हें हेलिकॉप्टर से भामरागढ़ उप-जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने शहादत प्राप्त की. पूरे क्षेत्र में व्यापक तलाशी अभियान जारी है. सुरक्षा बलों को आशंका है कि जंगलों में अभी भी नक्सलियों का समूह सक्रिय हो सकता है, इसलिए आसपास के इलाकों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. मुठभेड़ जिस इलाके में चल रही है, वह घने जंगलों और दुर्गम भौगोलिक स्थितियों के कारण नक्सलियों का पुराना ठिकाना माना जाता रहा है. महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले से सटे इस सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा बल लंबे समय से नक्सल विरोधी अभियानों को गति दे रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई नक्सलियों के खिलाफ चल रहे बड़े अभियान का हिस्सा है और आगे भी इसी प्रकार के ऑपरेशन जारी रहेंगे.

PM मोदी का मजेदार जवाब: “आप 75 के हो गए, अभी तो 25 बाकी हैं” और चाय वाले को चाय पर दिया ये संदेश

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी ने परीक्षा पर चर्चा के दौरान छात्रों से संवाद में अहम बात कही। उन्होंने कहा कि किसी को भी बीते वक्त का हिसाब लगाने की बजाय भविष्य के बारे में विचार करना चाहिए। पीएम मोदी ने अपने जन्मदिन के एक वाकये का जिक्र किया और कहा, ‘एक नेता ने मुझे मेरे जन्मदिन पर फोन किया था। 17 सितंबर को फोन करके मुझसे कहा कि आपके 75 हो गए हैं। इस पर मैंने कहा कि अभी 25 बाकी हैं। मैं बीते हुए को गिनता नहीं हूं, जो बचा है, उसकी गिनती करता हूं।’ इसी को लेकर उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि इसलिए मैं आप लोगों से भी कहता हूं कि बीता है, उसकी गिनती में समय बर्बाद मत कीजिए। जो बचा है, उसे जीने के बारे में सोचिए। यह बात प्रधानमंत्री ने तब कही, जब पूर्वोत्तर की एक छात्रा ने उनसे कहा कि मेरा जन्मदिन भी 17 सितंबर को ही होता है। पीएम मोदी ने इस दौरान परीक्षा को लेकर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि कई बार अखबारों में छपता है कि इस बार परीक्षा काफी कठिन रही। आखिर इसका क्या कारण होता है? पेपर तो सिलेबस से बाहर का नहीं होता है। फिर ऐसा क्यों कहा जाता है कि परीक्षा कठिन थी। ऐसा इसलिए क्योंकि लोगों को शॉर्ट में पढ़ने की आदत होती जा रही है। पहले स्योर सजेशन दिए जाते थे। फिर मॉडल पेपर बढ़े जाने लगे और अंत में यह हुआ कि बीते 10 सालों के प्रश्न पत्र आने लगे। परीक्षा में चर्चा में स्टूडेंट को पीएम मोदी ने ऐसा क्यों कहा? परीक्षा पे चर्चा का 9वां संस्करण आज यानी 6 फरवरी को सुबह 10 बजे आयोजित किया गया था. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल एग्जाम के मुद्दे पर बात की बल्कि छात्रों के साथ हंसी-मजाक भी की. उन्होंने स्टूडेंट्स को एग्जाम स्ट्रेस से निपटने के साथ ही कई विषयों पर टिप्स दिए हैं. लेकिन इस दौरान एक वाक्या को लोग बार-बार देख रहे हैं और खूब हंस रहे हैं.  वहां पर मौजूद बच्चों ने पीएम मोदी को अपने-अपने देश की यूनिक चीजें गिफ्ट की. इस दौरान वहां पर मौजूद एक छात्रा ने उन्हें चाय की पत्ति गिफ्ट किया.  इसे देखकर पीएम ने कहा कि चाय वाले को चाय… यह सुनते वहां का माहौल पूरा बदल गया और सारे छात्र हंसने लगे. फिर छात्रा उन्हें बताती है कि ये आर्गेनिक चाय है. पीएम ने उस छात्रा को ये भी कहा कि तुम कविता अच्छा लिखती हो, लिखना जारी रखना. अब जो छात्र बीते 10 साल के पेपर ही पढ़कर पहुंचे हैं और यदि उनसे अलग सिलेबस की कोई और चीज पूछ ली गई तो उन्हें परीक्षा कठिन लगती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बीमारी तब भी थी, जब मैं पढ़ता था। इस बीमारी को फैलाने का कम कुछ टीचर भी फैलाते हैं। उन्हें लगता है कि मेरी क्लास का रिपोर्ट कार्ड अच्छा रहे। इसलिए वही चीज पढ़ाते हैं, जिससे नंबर मिलें। लेकिन अच्छे अध्यापक सर्वांगीण विकास की बात करते हैं और पूरा सिलेबस पढ़ाते हैं। इस दौरान उन्होंने एक गेंदबाज का उदाहरण दिया और कहा कि यदि वह अपने कंधे को ही मजबूत करता रहे तो क्या अच्छा खिलाड़ी बन पाएगा। पीएम ने लाइट किया छात्रों का मूड  प्रधानमंत्री का यह भाव हल्के‑फुल्के अंदाज में छात्रों को जोड़ने और माहौल को सहज बनाने का तरीका था. पीएम मोदी अक्सर अपनी निजी यात्रा और जीवन की शुरुआत का जिक्र करते हैं, जब वे रोज रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले “चाय वाले” की भूमिका भी निभा रहे थे. यह उदाहरण उन्होंने साधारण जीवन के अनुभव और मेहनत का संदेश देने के लिए कई बार इस्तेमाल किया है.  इस दौरान पीएम मोदी ने छात्रों से उनके पढ़ाई, मार्क्स, AI, टीचर्स समेत कई विषयों पर संवाद किया है.  जो पढ़ते हैं, वो भूल जाते हैं… कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने पीएम मोदी से पूछा गया कि अक्सर ही ऐसा होता है कि हम जो भी पढ़ते हैं, वह बहुत जल्दी भूल जाते हैं. इसके जवाब में पीएम ने छात्रों से कहा कि आपको हमेशा आज का दिन याद रहेगा क्योंकि आप इसमें पूरी तरह से इनवॉल्व हैं. ऐसे में आप खुद को कम होशियार बताएं और ज्यादा होशियारी से बात करें या राय लें.   मार्क्स बन गई है बीमारी  इस दौरान पीएम मोदी ने उन्हें ये भी बताया कि उन्हें केवल मार्क्स के पीछे नहीं भागना चाहिए. उन्होंने मार्क्स को बीमारी बताया है. ऐसे में अपने मन को नंबर से जोड़ने के बजाय जीवन में कहां जाएं, इसपर ध्यान देने की जरूरत है.  PM मोदी बोले- पढ़ाई एक माध्यम है, उसके लिए जिंदगी नहीं प्रधानमंत्री ने कहा कि उसके लिए यह जरूरी है कि पूरा शरीर मजबूत हो। मानसिक रूप से सक्षम हो। इसी तरह परीक्षा के लिए पूरी जिंदगी नहीं है। यह जिंदगी को संवारने का एक माध्यम है, लेकिन यही अंतिम लक्ष्य नहीं है। अंतिम लक्ष्य यह है कि संपूर्ण जिंदगी बेहतर बने। हमें 10 सालों के पेपर पढ़ने जैसी सोच के साथ खुद को सीमित नहीं करना चाहिए। जिंदगी सबसे उत्तम बने, इसके लिए हमें प्रयास करना चाहिए।

हाईकोर्ट में आर्मी जवान का तलाक केस, पत्नी की प्रेगनेंसी पर सवाल, 4 दिन में कैसे हो गई गर्भवती?

जबलपुर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से एक ऐसा फैसला आया है, जिसने शादी, तलाक और पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों में नई बहस छेड़ दी है. मामला एक आर्मी जवान और उसकी पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे तलाक विवाद का है, जिसमें पत्नी ने बच्चे के DNA टेस्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. लेकिन कोर्ट ने साफ कर दिया कि यह मामला बच्चे की वैधता पर सवाल उठाने का नहीं, बल्कि पत्नी पर लगाए गए आरोपों की जांच से जुड़ा है. हाईकोर्ट ने क्या कहा, क्यों खारिज की पत्नी की याचिका? मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की एकलपीठ में जस्टिस विवेक जैन ने पत्नी की याचिका खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के DNA टेस्ट के आदेश को सही ठहराया. कोर्ट ने साफ कहा कि यह जांच किसी भी तरह से बच्ची को अवैध या नाजायज ठहराने के लिए नहीं है और न ही उसकी कानूनी पहचान पर इसका कोई असर पड़ेगा. कोर्ट का मकसद सिर्फ यह देखना है कि पत्नी पर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है. DNA सैंपल से इनकार किया तो क्या होगा?  खबर के मुताबिक, हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि अगर पत्नी DNA सैंपल देने से इनकार करती है, तो फैमिली कोर्ट को पूरा अधिकार होगा कि वह भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114(h) या नए BSA 2023 के तहत उसके खिलाफ प्रतिकूल अनुमान लगाए. यानी सैंपल न देने का फायदा पत्नी को नहीं मिलेगा. पत्नी ने डीएनए नहीं दिया तो? कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी डीएनए नमूने देने से इनकार करती है, तो फैमिली कोर्ट भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114(h) या बीएसए 2023 के संबंधित प्रावधानों के तहत पत्नी के खिलाफ अनुमान लगा सकती है। यानी कि अगर पत्नी नमूने देने से इनकार करती है, तो कोर्ट यह मान लेगा कि पति जो कह रहा है, वही सच है। क्योंकि इस टेस्ट का मकसद पत्नी के ‘अफेयर’ की जांच करना है, बच्ची को ‘नाजायज’ साबित करना या उसे नीचा दिखाना नहीं। चार दिन बाद ही पत्नी हुई गर्भवती यह मामला व्यभिचार के आरोप पर दायर तलाक याचिका से संबंधित है। पति बच्चे की पितृत्व जानने या भरण-पोषण की देनदारी से इनकार करने के उद्देश्य से डीएनए टेस्ट नहीं चाहता है। पति का कहना है कि वह भारतीय सेना में है और पत्नी ने उसे अक्टूबर 2015 में बुलाया था। पति ने कोर्ट से कहा कि वह छुट्टी पर घर आए और सिर्फ 4 दिन में पत्नी ने कह दिया कि वह प्रेग्नेंट है।। पति के अनुसार, डॉक्टर 4 दिन में प्रेग्नेंसी की स्थिति नहीं बता सकते, यह नामुमकिन होता है। इसके लिए इंतजार करना होता है। दूसरी तरफ बच्चा भी तय समय से पहले और उस समय पैदा हुआ, जब वह घर पर नहीं थे। इसलिए पति ने बच्चे का डीएनए कराने की मांग की है।  पत्नी के वकील की दलील पत्नी के वकील अनुज पाठक ने तर्क दिया कि बच्चे का डीएनए टेस्ट उसकी निजता, स्वायत्तता और पहचान के अधिकार का उल्लंघन करेगा और उसकी वैधता पर अनुचित रूप से संदेह पैदा करेगा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 112 एक वैध विवाह के दौरान पैदा हुए बच्चे की वैधता का एक मजबूत अनुमान स्थापित करती है, और डीएनए टेस्ट नियमित रूप से नहीं दिए जाने चाहिए। वकील ने कहा कि अदालतों को बच्चे के सर्वोत्तम हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी बच्चे को इस तरह से पारिवारिक विवादों में नहीं घसीटा जाना चाहिए जिससे उसके भविष्य पर कलंक लगे। पति के वकील ने भी दिए तर्क पति के वकील शीतल तिवारी ने प्रतिवाद किया कि यह चुनौती कार्यवाही को रोकने और महत्वपूर्ण तथ्यों को दबाने का प्रयास है। उन्होंने बताया कि पति भारतीय सेना में तैनात है और कुछ महीनों में एक बार घर आ पाता है, जबकि पत्नी मध्य प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल है। पति के वकील ने दावा किया कि मेडिकल सलाह के अनुसार, गर्भधारण के चार दिनों के भीतर गर्भावस्था का पता नहीं लगाया जा सकता है। इस पर कोर्ट का भी मानना है कि जब पति पुख्ता सबूत दे रहा है कि वह उस वक्त पत्नी के साथ नहीं था, तो सच का पता लगाने के लिए DNA टेस्ट कराना गलत नहीं है। ‘4 दिन में प्रेग्नेंसी’ का दावा क्यों बना सबसे बड़ा सवाल मामले की सबसे चौंकाने वाली बात वही है, जिसने पूरे केस की दिशा बदल दी. पति ने कोर्ट को बताया कि वह भारतीय सेना में पदस्थ है और अक्टूबर 2015 में पत्नी के बुलाने पर घर आया था. लौटने के सिर्फ चार दिन बाद पत्नी ने उसे बताया कि वह गर्भवती है. कोर्ट ने माना कि मेडिकल साइंस के हिसाब से चार दिन में प्रेग्नेंसी का पता चलना बेहद संदिग्ध है. इसके अलावा बच्ची का जन्म भी अक्टूबर 2015 के करीब आठ महीने बाद हुआ, जिससे पति-पत्नी के साथ न होने की दलील और मजबूत हो जाती है. तीन तलाक याचिकाएं और 10 साल का विवाद यह कोई नया विवाद नहीं है. पहली तलाक याचिका 2019 में दायर हुई थी, जिसे आपसी सहमति से तलाक के आश्वासन पर वापस ले लिया गया. दूसरी याचिका भी 2019 में दाखिल हुई, लेकिन पत्नी दूसरी मोशन में पेश नहीं हुई और मामला 2 मार्च 2021 को बंद हो गया. इसके बाद 2021 में तीसरी तलाक याचिका दायर की गई, जो अब तक लंबित है और इसी में DNA टेस्ट की मांग की गई. कोर्ट का साफ संदेश हाईकोर्ट ने साफ कहा कि जब तलाक का आधार व्यभिचार हो, पति ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बच्चे की वैधता या भरण-पोषण का मुद्दा न हो, तो DNA टेस्ट का आदेश देना कानूनन गलत नहीं है. यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक अहम नजीर माना जा रहा है.

लोकसभा में भारी हंगामा, कार्यवाही नहीं हो पाई, 9 फरवरी तक स्थगन

नई दिल्ली लोकसभा में आज भी कार्यवाही की हंगामेदार शुरुआत हुई. लोकसभा में प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सदस्य पोस्टर लहराते हुए वेल में आ गए. स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि आप नियोजित तरीके से गतिरोध उत्पन्न करना चाहते हैं, गरिमा नहीं रखना चाहते. तो ऐसा सदन मैं नहीं चला सकता.लोकसभा में जोरदार हंगामा, नहीं चल सकी कार्यवाही, 9 फरवरी तक स्थगित. स्पीकर ने सदस्यों को दूसरी तरफ जाकर किसी भी तरह की बातचीत करने से भी सख्ती से मना किया और इसके बाद कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी. वहीं, राज्यसभा में कार्यवाही की आज शांतिपूर्ण शुरुआत हुई है. राज्यसभा में शून्यकाल की कार्यवाही चल रही है. शून्यकाल के दौरान सदस्य जनहित से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं. विपक्षी सांसदों ने लगाए जय संविधान के नारे, कार्यवाही 9 फरवरी तक स्थगित विपक्षी सांसदों ने लोकसभा में जय संविधान के नारे लगाए. 12 बजे कार्यवाही जब दूसरी बार शुरू हुई, विपक्षी सांसद हाथों में प्लेकार्ड लेकर नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए. विपक्षी सदस्यों से पीठासीन ने अपनी चेयर पर जाने की अपील की, लेकिन इसका असर नहीं हुआ. इसके बाद पीठासीन ने सदन की कार्यवाही 9 फरवरी को दिन में 11 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी.  ‘प्ले कार्ड लेकर नहीं दिखा सकते, ये नियमों के विपरीत’, पीठासीन की विपक्ष को नसीहत पीठासीन कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों से सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की. उन्होंने कहा कि हम सदन चलाना चाहते हैं. पीठासीन ने कहा कि हम बजट पर चर्चा शुरू कराना चाहते हैं. लेकिन हम ऐसे सदन नहीं चला सकते. आप प्ले कार्ड लेकर आएंगे, लहराएंगे, ये नियमों के अनुरूप नहीं है. पीठासीन की बार-बार अपील के बावजूद हंगामा जारी रहा. इसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही 9 फरवरी, 11 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी. लोकसभा की कार्यवाही फिर शुरू, हंगामे के बीच लिए जा रहे लिस्टेड बिजनेस लोकसभा की कार्यवाही फिर शुरू हो गई है. सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया है. हंगामे के बीच ही सदन में आज के लिए लिस्टेड बिजनेस लिए जा रहे हैं.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कल आएंगे, सीएम साय का दुर्ग और जगदलपुर का दौरा आज

दुर्ग. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज दुर्ग, रायपुर और जगदलपुर के विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे. मुख्यमंत्री सुबह 11 बजे दुर्ग के PWD रेस्ट हाउस मीटिंग हॉल पहुंचेंगे. दोपहर 2 बजे रायपुर के लिए रवाना होंगे और शाम 4 बजे रायपुर से जगदलपुर जाएंगे. जगदलपुर जिले के कुम्हडाकोट में शाम 5.25 बजे “जनजातीय गौरव वाटिका” के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल होंगे. इसके बाद 5.50 बजे पुनर्वासितों के प्रशिक्षण समापन पर संवाद और टूलकिट वितरण करेंगे. शाम 6.25 बजे सर्किट हाउस जगदलपुर में शासन की विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों से संवाद कर सामग्री वितरण करेंगे. मुख्यमंत्री का रात्रि विश्राम सर्किट हाउस जगदलपुर में रहेगा. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 3 दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 7 फरवरी से तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास पर रहेंगे. वे 7 फरवरी को शाम 4.40 बजे रायपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे और निजी होटल जाएंगे. 8 फरवरी को सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक नक्सलवाद पर हाई लेवल बैठक लेंगे, इसके बाद ‘शिफ्टिंग द लेंस’ थीम पर आयोजित राष्ट्रीय कॉनक्लेव में शामिल होंगे. 9 फरवरी को बस्तर पंडूम के समापन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सुबह 11 बजे विशेष विमान से दंतेश्वरी एयरपोर्ट पहुंचेंगे और दोपहर 12.05 से शाम 4 बजे तक कार्यक्रम में रहेंगे. शाम 4.20 बजे जगदलपुर से दिल्ली के लिए रवाना होंगे. 

मुंबई मेयर चुनाव: बीजेपी में तीन नाम रेस में, शिंदे के लिए कौन बनेगा दावेदार?

मुंबई  महाराष्ट्र के नगर महापालिका चुनाव नतीजे आने के तीन हफ्ते के बाद अब मुंबई में बीएमसी के मेयर चुनाव काउंटडाउन शुरू हो गया है. मुंबई से सटे सभी शहरों में मेयर चुने जाने के बाद अब कहीं जाकर बीएमसी की बारी है. बीएमसी मेयर पद के लिए 11 फरवरी को चुनाव है, जिसके लिए नामांकन प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू हो रही है. ऐसे में सभी की निगाहे लगी है कि मुंबई का नया मेयर कौन होगा?  मुंबई का मेयर पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित है. ऐसे में मेयर के लिए 6 फरवरी से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो रही है और 7 फरवरी तक चलेगी.  इसके बाद 11 फरवरी को नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि है और उसी दिन मेयर और डिप्टीमेयर के लिए चुनाव होंगे.  बीएमसी चुनावों में बीजेपी 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है लेकिन उसे अकेले दम पर बहुमत नहीं मिला है.  ऐसे में बीजेपी की सहयोगी शिवसेना (शिंदे) को 29 सीटें मिली हैं, जिसका समर्थन हासिल कर अपने मेयर बना सकती है. ऐसे में देखना है कि बीजेपी कैसे शिंदे के साथ बैलेंस बनाकर अपना मेयर बनाती है?  बीएमसी का मेयर चुनाव बना रोचक मुंबई के 227 सीटों वाली बीएमसी में मेयर के लिए 114 नगर सेवकों की जरूरत होती है. बीएमसी में बीजेपी के पास सबसे अधिक 89 नगर सेवक हैं जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पास 29 पार्षद हैं. वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के पास 65 नगर सेवक हैं तो कांग्रेस के पास 24 सीटें है.  शरद पवार की पार्टी एनसीपी के पास महज एक पार्षद है तो अजित पवार की एनसीपी के 3 पार्षद हैं. राज ठाकरे की पार्टी मनसे के 6 पार्षद हैं तो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) के 8  और समाजवादी पार्टी के 2 पार्षद हैं.  मुंबई में बीजेपी-शिवसेना (शिंदे) गठबंधन को कुल मिलाकर 118 नगर सेवक हो रहे हैं. इस तरह से महायुति को स्पष्ट बहुमत का नंबर होने के बावजूद मेयर पद के लिए दोनों की सहमति  नहीं बन पा रही है. वहीं, उद्धव ठाकरे ने भी मेयर के लिए अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारने का ऐलान करके मुकाबले को रोचक बना दिया है. शिंदे-बीजेपी में कैसा बनेगा फॉर्मूला बीएमसी चुनाव के नतीजे ऐसे आए हैं कि कोई भी पार्टी अपने दम पर अपना मेयर बनाने की स्थिति में नहीं है. मुंबई चुनाव में बीजेपी भले ही सबसे ज्यादा सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी हो, लेकिन मेयर की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए एकनाथ शिंदे की बैसाखी की जरूरत होगी. शिदे बीएमसी में 29 पार्षद लेकर किंगमेकर के रोल में है, जिनके समर्थन के बिना बीजेपी के सियासी मंसूबे के कामयाब नहीं होंगे.  बीजेपी अजित पवार की एनसीपी के पार्षद को मिलाकर भी अपना मेयर नहीं बना सकती है. ऐसे में शिंदे के साथ ही सहमति का फॉर्मूला बनाना होगा. शिंदे भी मुंबई में अपना मेयर चाहते हैं, जिसके लिए सार्वजनिक रूप से मांग भी उठा चुके हैं. ऐसे में बीजेपी बीएमसी में कब्जा जमाने के लिए डिप्टीमेयर का पद शिंदे की शिवसेना को देने का ऑफर दे सकती है. इसके बाद ही बीजेपी अपना मेयर बना पाएगी, लेकिन उसके लिए शिंदे की रजामंदी जरूरी है.  उद्धव ठाकरे का क्या है सियासी गेम  मुंबई के मेयर पद लेकर उद्धव ठाकरे खेमा एक्टिव है.  शिवसेना (यूबीटी) मुंबई मेयर और उपमेयर पद के लिए अपने उम्मीदवार उतारने का दांव चल सकती है. मेयर चुनाव को लेकर शुक्रवार दोपहर मातोश्री में पार्टी नेताओं की एक अहम बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, शिवसेना (UBT) के मुंबई के विधायक और कुछ प्रमुख पार्षद मौजूद रहेंगे.  मेयर चुनाव को लेकर इसी बैठक में यह अंतिम फैसला लिया जाएगा कि पार्टी बीएमसी में अपना उम्मीदवार उतारेगी या नहीं. बीएमसी में शिवसेना(यूबीटी) के नेता किशोरी पेडणेकर ने व्हीप जारी कर सभी पार्षदों को 11 फरवरी तक मुंबई से बाहर नहीं जाने के आदेश दिए हैं. संजय राउत ने दावा किया है कि शिवसेना खेमे के कई पार्षद और एकनाथ शिंदे खुद भी नहीं चाहते हैं कि मुंबई में बीजेपी का मेयर बने?  BMC मेयर के लिए BJP से रेस में 3 नाम  बैठक होगी और नामों को अंतिम रूप दिया जाएगा. बीजेपी की ओर से मेयर पद के लिए तीन नामों पर चर्चा हो रही है. इनमें राजश्री शिरवलकर, ऋतु तावड़े और शीतल गंभीर का नाम शामिल है.  वहीं, डिप्टी मेयर का पद शिंदे गुट की शिवसेना के खाते में जाएगा. शिवसेना को दिए जाने वाले डिप्टी मेयर के पद के लिए दो नामों पर चर्चा हो रही है. इसमें तृष्णा विश्वासराव और यामिनी जाधव का नाम शामिल है. वहीं स्थायी समिति के अध्यक्ष का पद बीजेपी के पास रहेगा. मुंबई महानगरपालिका में सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षण की घोषणा की गई है. इसलिए, मुंबई की बागडोर एक महिला के हाथों में होगी. क्या मुंबई में मेयर चुनाव निर्विरोध होंगे?  एबीपी माझा के मुताबिक, मुंबई मेयर को लेकर चर्चा के बीच यह भी खबर है कि ठाकरे की शिवसेना मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए उम्मीदवार उतारेगी. इस संबंध में ठाकरे की शिवसेना के नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने भी संकेत दिए हैं. उन्होंने कहा कि हमारे लोग काम कर रहे हैं. इसलिए, ठाकरे की शिवसेना की ओर से 7 फरवरी को महापौर पद के लिए आवेदन दाखिल करने की संभावना है.  बीएमसी चुनाव में बहुमत न मिलने के बावजूद, ठाकरे की शिवसेना (UBT) अपना उम्मीदवार उतारेगी. बीजेपी-शिंदे गठबंधन के 138 सदस्य हैं, जिनमें बीजेपी के 89 और शिंदे शिवसेना के 29 पार्षद शामिल हैं. इसलिए, बीजेपी के मेयर के चुनाव में कोई समस्या नहीं होगी. कैसे की जाती है स्थायी समिति की गणना? स्थायी समिति के नतीजों के बाद आए आंकड़ों के अनुसार, विपक्ष और सत्ताधारी दल दोनों को 13-13 सदस्य मिले. इसलिए, स्थायी समिति में अपनी ताकत बढ़ाने के उद्देश्य से शिंदे शिवसेना और बीजेपी ने एनसीपी के अजित पवार गुट की मदद लेने का फैसला किया है. शिंदे शिवसेना ने अपना गुट रजिस्टर्ड करा लिया है और अजित पवार गुट एनसीपी के साथ सहयोगी गुट के रूप में पंजीकरण कराने के लिए बातचीत चल रही है. हालांकि, … Read more

छत्तीसगढ़ ने किया अनोखा रिकॉर्ड, 10 महीने में 5 लाख प्रधानमंत्री आवास, देश में सबसे अधिक

रायपुर: प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर सुशासन, दृढ़ इच्छाशक्ति और परिणामोन्मुख प्रशासन का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की पहली ही बैठक  में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया था।  निर्णय के परिपालन में राज्य के सभी जिलों के सतत, संगठित एवं अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया है।चालू वित्तीय वर्ष 2025–26 में मात्र 10 माह 4 दिवस की अवधि में छत्तीसगढ़ में देश में सर्वाधिक 5 लाख प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि योजना के प्रारंभ से अब तक पहली बार छत्तीसगढ़ ने किसी एक वित्तीय वर्ष में 5 लाख आवासों के निर्माण का रिकॉर्ड कायम किया है। मानसून अवधि सहित औसतन प्रतिदिन 1,600 से अधिक आवासों का निर्माण कर राज्य ने समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और लक्ष्यबद्ध कार्य निष्पादन की नई मिसाल कायम की है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जिलों की सक्रिय भागीदारी और स्वस्थ प्रतिस्पर्धात्मक कार्य संस्कृति इस उपलब्धि का मजबूत आधार बनी है। इस क्रम में बिलासपुर जिले में 29 हजार 235, महासमुंद में 27 हजार 224, बलरामपुर में 27 हजार 12, कोरबा में 26 हजार 839 तथा रायगढ़ जिले में 26 हजार 707 आवासों का निर्माण पूर्ण कर इन जिलों ने राज्य की समग्र उपलब्धि में अग्रणी भूमिका निभाई है।इसके अतिरिक्त मस्तूरी, आरंग, डभरा, बिल्हा, पाली एवं जैजैपुर जनपद पंचायतों द्वारा भी 7,500 से अधिक प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण कर उल्लेखनीय योगदान दिया गया है।   उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आवास निर्माण के साथ-साथ आजीविका सृजन को भी समान प्राथमिकता दी गई है। महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हजारों महिलाओं ने सीएलएफ बैंक से ऋण लेकर निर्माण सामग्री आपूर्ति का कार्य प्रारंभ किया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। इस पहल के परिणामस्वरूप 8,000 से अधिक महिलाएँ ‘लखपति दीदी’ के रूप में आत्मनिर्भर बनकर उभरी हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को कौशल से जोड़ने के उद्देश्य से राजमिस्त्री प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक जिलों में स्थित आरसेटी के माध्यम से 6,000 से अधिक हितग्राहियों को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें 960 से अधिक महिलाएँ तथा 292 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सली शामिल हैं। यह पहल कौशल विकास के साथ-साथ सामाजिक पुनर्वास और मुख्यधारा से जुड़ाव का प्रभावी माध्यम बन रही है। आवास हितग्राहियों की निजी भूमि पर महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत आजीविका संवर्धन हेतु विभिन्न कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनके तहत वर्तमान में प्रदेश में 10,000 से अधिक आजीविका डबरियों का निर्माण प्रगतिरत है।  इस प्रकार छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से न केवल आवासों का तीव्र गति से निर्माण सुनिश्चित किया जा रहा है, बल्कि इनके साथ-साथ स्थायी आजीविका के अवसर भी सृजित किए जा रहे हैं, जो राज्य के समावेशी, संतुलित एवं सतत विकास को सुदृढ़ आधार प्रदान कर रहे हैं। “प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत चालू  वित्तीय वर्ष 2025 -26 में मात्र 10 माह की अवधि में छत्तीसगढ़ में 5 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण होना, जो देश में सर्वाधिक है, छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। मैंने प्रथम कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति का निर्णय इसलिए लिया, ताकि राज्य का कोई भी गरीब और जरूरतमंद परिवार पक्के घर से वंचित न रहे। यह उपलब्धि राज्य सरकार की स्पष्ट नीति, प्रशासनिक समन्वय और जमीनी स्तर पर कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है। मेरे लिए प्रधानमंत्री आवास केवल एक मकान नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का आधार हैं, और इनके माध्यम से आजीविका के अवसर सृजित कर हम छत्तीसगढ़ को समावेशी और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।”- मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय “प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ द्वारा 5 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण करना राज्य की प्रशासनिक क्षमता, मजबूत निगरानी व्यवस्था और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन का स्पष्ट प्रमाण है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का घर देने के लक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। आवास निर्माण के साथ-साथ आजीविका, कौशल प्रशिक्षण और महिला सशक्तिकरण को जोड़कर योजना को समग्र विकास का माध्यम बनाया गया है। यह राष्ट्रीय कीर्तिमान छत्तीसगढ़ की सुशासन पर आधारित विकास नीति की सफलता को दर्शाता है। – उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

ग्वालियर में स्प्रिंग फैक्ट्री में गैस रिसाव के बाद हुआ भयंकर ब्लास्ट, 5 लोग गंभीर रूप से घायल

 ग्वालियर ग्वालियर में भारतीय रेलवे की स्प्रिंग फैक्ट्री में गैस रिसाव के कारण आग लग गई। इस हादसे में पांच कर्मचारी झुलस गए, जिनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। बीती रात 10 बजे यह घटना मेंटेनेंस कार्य के दौरान हुई। झांसी रोड थाना क्षेत्र की सिथौली रेलवे स्प्रिंग फैक्ट्री में मेंटेनेंस के दौरान गैस लीक होने से अचानक आग भड़क उठी। मौके पर मौजूद कौशल श्रीवास्तव, योगेश कॉन्ट्रैक्ट एम्प्लॉई, शब्बीर, बुरी तरह झुलस गए। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। इस फैक्ट्री में ट्रेनों के लिए स्प्रिंग और अन्य पुर्जे बनाए जाते हैं। अस्पताल में घायलों का इलाज कर रहे डॉ. सोफी शकील ने बताया कि पांच लोग गंभीर जलन के साथ लाए गए थे। इनमें से तीन की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।झांसी रोड थाना के टीआई शक्ति यादव ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि पुलिस टीम मौके पर पहुंच चुकी है। विवेचक सभी सबूत जुटा रहे हैं और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। घायलों का इलाज प्राथमिकता पर जारी है। आग से झुलसे योगेश जनगांम ने बताया कि मशीन के पास वायरिंग कर रहा था तभी अचानक आग की लपटे उठी और खुद को बचाने तक का समय नहीं मिला। वहीं 60 फीसदी झुलसे मोहम्मद साबिर की हालत गंभीर है। वही इस मामले को लेकर उत्तर मध्य रेलवे सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने कहा कि बंद मशीन की मेंटेनेंस के दौरान एलपीजी के रिसाव से ये हादसा हुआ है। पास में चल रहे स्प्रिंग निर्माण की वजह से गैस में आग पकड़ ली। हादसे में एक रेलवे कर्मी और चार कांटेक्ट कर्मचारी झुलसे हैं। घटना की जांच के आदेश दिए हैं। ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

एमपी के इस शहर में पहली बार रेल का आगमन, खिलचीपुर से राजगढ़ तक आई उम्मीदों की रेल

 रामगंज मंडी जिला मुख्यालय पर गुरुवार शाम को पहली बार जिला मुख्यालय तक रेल पहुंची है। रामगंज मंडी से चलकर पहली मालगाड़ी शाम को राजगढ़ रेलवे स्टेशन पहुंची। बहुप्रतीक्षित भोपाल-रामगंज मंडी रेल लाइन पर पहली बार ट्रेन के पहुंचते ही लोगों में उत्साह का माहौल बन गया। वर्षों से रेल सेवा का इंतजार कर रहे नगरवासी बड़ी संख्या में रेलवे पटरी के किनारे जमा हो गए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने इस ऐतिहासिक पल को देखा और मोबाइल से फोटो-वीडियो बनाकर खुशी जाहिर की। मालगाड़ी में लाया गया रेल निर्माण का सामान राजगढ़रेलवे स्टेशन पहुंची इस मालवाहक ट्रेन में रेलवे पटरी सहित रेल निर्माण से जुड़ी आवश्यक सामग्री लाई गई है। हालांकि फिलहाल ट्रैक अधूरा है और कई स्थानों पर काम जारी है, लेकिन पहली बार जिले में ट्रेन आने से लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। लोगों ने कहा कि यह राजगढ़ के विकास की दिशा में बड़ा कदम है। खिलचीपुर से राजगढ़ के बीच ट्रैक को प्राथमिकता से पूरा किया जा रहा है। इसी खंड में पहले चरण में रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) का निरीक्षण प्रस्तावित है। मार्च तक सवारी रेल का ट्रायल कराने की तैयारी रेलवे के अधिकारियों के अनुसार मार्च माह तक सवारी रेल का ट्रायल कराने की तैयारी है। पहले चरण में राजगढ़-खिलचीपुर और आगे ब्यावरा तक यात्री ट्रेन चलाने की योजना है। रेल सेवा शुरू होने से राजगढ़ को भोपाल और राजस्थान से सीधा रेल संपर्क मिलेगा, जिससे व्यापार, खेती और आम लोगों की आवाजाही को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। 2026 के अंत तक पूरा होगा काम बता दें कि करीब 3050 करोड़ के रामगंज मंडी-भोपाल रेल लाइन प्रोजेक्ट का काम दिसंबर-2026 तक पूरा करना है। कोटा और भोपाल रेल मंडल में आने वाले उक्त प्रोजेक्ट में कोटा मंडल ने करीब 90 फीसदी काम पूरा करा लिया है। भोपाल मंडल में भी अब तेजी से काम जारी है। पूरे प्रोजेक्ट को दिसंबर तक पूरा करने का दांवा किया जा रहा है।

एक की मौके पर मौत, ट्रैफिक पुलिस की गाड़ी की चपेट में आए दो मासूम बच्चे

रायपुर. राजधानी रायपुर से एक हृदयविदारक खबर सामने आ रही है, जहां स्कूल जा रहे दो मासूम बच्चे एक दर्दनाक सड़क हादसे का शिकार हो गए. यह दुर्घटना शहर के पॉश इलाके में स्थित छत्तीसगढ़ क्लब के ठीक सामने हुई. इस भीषण टक्कर में स्कूल जा रहे एक बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि साथ मौजूद एक बच्ची गंभीर रूप से घायल है. घायल बच्ची को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है. हैरान करने वाली बात यह है कि मासूमों को कुचलने वाला वाहन ट्रैफिक पुलिस की ‘टोइंग गाड़ी’ (क्रिन) थी. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रैफिक पुलिस की इस गाड़ी ने बच्चों को अपनी चपेट में ले लिया. हादसे के तुरंत बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और अफरा-तफरी का माहौल बन गया. वहीं ड्राइवर मौके से फरार हो गया. फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर मृत मासूम के शव को पीएम के लिए भेज दिया है और आगे की कार्रवाई में जुट गई है. फरार ड्राइवर की तलाश की जा रही है.

Silver Price Crash: चांदी की कीमतों में जबरदस्त गिरावट, 40% की गिरावट, भारत में मचा तूफान

  नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतें जिस तेजी से बीते कुछ समय में भागी थीं, अब उससे तेज रफ्तार से क्रैश (Gold-Silver Price Crash) हो रही हैं. खासतौर पर चांदी की कीमतों में तो ग्लोबल कोहराम मचा हुआ है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में Silver Price हाई से 40 फीसदी तक टूट चुका है, तो भारत में भी ये लगातार क्रैश होती जा रही है. सिर्फ गुरुवार को ही कॉमेक्स में सिल्वर प्राइस में 20% की बड़ी गिरावट आ गई और ये सस्ती होकर 64 डॉलर प्रति औंस पर आ गई.  चांदी में निवेश करने वालों का बुरा हाल चांदी जिस तेज रफ्तार से भाग रही थी, उसे देखकर इसे खरीदने में पीछे रह गए लोग चिंता में थे, लेकिन अब इसमें निवेश करने वाले दाम और बढ़ने की आस में बेहाल है, क्योंकि ये हाई पर पहुंचने के बाद हर रोज क्रैश (Silver Price Crash) हो रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में बीते कारोबारी दिन गुरुवार को स्पॉट सिल्वर एक झटके में करीब 20 फीसदी के आसपास डाउन हो गई और इस तरह से ये अपने लाइफ टाइम हाई लेवल से करीब 40 फीसदी की गिरावट के साथ 64 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) पर आ गई. इसका भाव बीते महीने 120 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था.  भारत में चांदी का क्या होगा?  Silver Price  में मचे इस ग्लोबल कोहराम का असर भारत में इस कीमती धातु के दाम में और तेज गिरावट के रूप में दिखने की आशंका जताई जा रही है, जबकि पहले से ही ये दनादन क्रैश हो रही है. बता दें कि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर बीते 29 जनवरी को 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी का वायदा भाव 4,30,048 रुपये प्रति किलोग्राम के हाई लेवल पर पहुंच गया था और अब तक इस स्तर से ये 1,76,233 रुपये प्रति किलो तक सस्ती हो चुकी है.  कल इतना टूटी थी भारत में चांदी  एमसीएक्स पर सिल्वर प्राइस में बीते कारोबारी दिन गुरुवार को आई गिरावट पर गौर करें, तो शुरुआती कारोबार में ही 1 Kg Silver Price गिरकर 2,30,499 रुपये पर आ गया था. हालांकि, कारोबार के अंत में इसकी कीमत में कुछ सुधार भी देखने को मिला, लेकिन फिर भी ये अपने हाई से काफी नीचे 2,43,815 रुपये प्रति किलोग्राम पर क्लोज हुई.  इस हिसाब से कैलकुलेशन करें, तो वायदा चांदी एक ही दिन में 25,035 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई.  इसके बीते 4 फरवरी का बंद भाव 2,68,850 रुपये था.  सोना भी संभल नहीं पा रहा चांदी के अलावा अगर Gold Rate Crash पर नजर डालें, तो बीते कुछ दिनों में ही ये भी अपने हाई लेवल से काफी सस्ता हो चुका है. बीते 29 जनवरी को चांदी की तरह ही तूफानी तेजी के साथ भागते हुए 10 Gram 24 Karat Gold का रेट भी 1,93,096 रुपये पर पहुंच गया था और इस हाई लेवल से एमसीएक्स पर सोना अब तक 41,025 रुपये सस्ता है, बीते कारोबारी दिन गुरुवार को ये 1,52,071 रुपये पर क्लोज हुआ था. 

भागीरथपुरा में दूषित पानी से 33वीं मौत, बुजुर्ग ने दम तोड़ा, इलाके में फैला हड़कंप

इंदौर देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी हादसे में देर रात एक और मौत हो गई। मृतक का नाम अलगूराम यादव (70) है। उन्हें 9 जनवरी को अरबिंदो हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। उन्हें सांस संबंधी तकलीफ भी थी। इनके सहित अब तक इस हादसे में 33 लोगों की मौतें हो चुकी हैं। इसके पहले 1 फरवरी को 32वीं मौत हुई थी।  अभी हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों की संख्या तीन है, जबकि 450 से ज्यादा मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं। दरअसल, भागीरथपुरा में एक और मौत का मामला सामने आया है। हलकूप्रसाद यादव ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वे वेंटिलेटर पर थे। इससे पहले उनकी पत्नी की भी मौत हो चुकी है, जिससे शोक का माहौल है।   लोगों में डर का माहौल लगातार हो रही मौतों से क्षेत्र के लोगों में अब भी डर का माहौल है। उल्टी-दस्त से पीड़ित होने के बाद बीमारी बढ़ती है और फिर धीरे-धीरे शरीर के अंगों पर असर होना शुरू हो जाता है। पिछले दिनों हुई मौतों में बुजुर्गों की संख्या ज्यादा सामने आ रही है। इसके पहले अलगूराम यादव की पत्नी की भी दूषित पानी से मौत हो चुकी है। उर्मिला यादव को भी उल्टी-दस्त की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन उर्मिला यादव ने दम तोड़ा था। उनकी मौत को महीनेभर हो गए हैं। अगलूराम यादव के बेटे संजय यादव का कहना है कि पिता को पहले से कोई बीमारी नहीं थी। उल्टी-दस्त के चलते अस्पताल में एडमिट किया था, जहां उनकी जान चली गई। अभी हॉस्पिटल में एडमिट मरीजों की संख्या तीन है, जबकि 450 से ज्यादा मरीज एडमिट होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं। इसके पहले 1 फरवरी को 32वीं मौत हुई थी। अनिता कुशवाह (65) एक माह से अधिक समय से अस्पताल में एडमिट थीं। अनिता का बॉम्बे हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था। वह लंबे समय से वेंटिलेटर पर थीं। बेटे नीलेश ने बताया था कि उन्हें पहले से कोई बीमारी नहीं थी। चैंबर में ही जोड़ दी निजी ड्रेनेज लाइन वार्ड 80 के रहवासी कुछ दिनों से दूषित पानी से परेशान थे। शुरुआती 10-15 मिनट तक नर्मदा के बजाय दूषित बदबूदार पानी आता था। शिकायत की तो जांच शुरू हुई। निगम की टीम जांच करते हुए नर्मदा जल वितरण के वाल्व तक पहुंची। खोदाई की तो चौंक गए। कुछ रहवासियों ने नर्मदा के चैंबर में निजी ड्रेनेज लाइन जोड़ दी थी। पानी के लिए वाल्व खोलते ही ड्रेनेज पीने के पानी के साथ मिलकर रहवासियों के घरों तक पहुंच जाता था। निगम की टीम ने कार्रवाई कर ड्रेनेज की लाइन को अलग किया। लोगों ने की गंदगी की शिकायत निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत रंगवासा सिंदौड़ा स्थित ताप्ती परिसर का निरीक्षण किया। उन्होंने फेस-दो के ब्लाकों में बचे हुए काम और विद्युतीकरण के कार्य को शीघ्रता से पूरा करने का निर्देश एजेंसी को दिए। फेस-एक और तीन आवासीय इकाइयों का काम पूरा हो चुका है। यहां 1500 से ज्यादा परिवार रहते हैं। निरीक्षण के दौरान निगमायुक्त ने रहवासियों से चर्चा भी की। रहवासियों ने सामुदायिक भवन (कम्युनिटी हाल) के निर्माण में देरी, साफ-सफाई और रखरखाव को लेकर असंतोष जताया।  हाईकोर्ट ने स्वतंत्र जांच आयोग के गठन का दिया था आदेश 27 जनवरी को हाईकोर्ट ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हो रही मौतों के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए शासन और नगर निगम की रिपोर्ट को ‘आई-वॉश’ करार दिया था। कोर्ट ने माना कि यह मामला गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने कहा कि स्वच्छ पेयजल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने स्वतंत्र जांच आयोग के गठन का आदेश दिया था। हाईकोर्ट में ढाई घंटे सुनवाई भागीरथपुरा मामले में दायर जनहित याचिकाओं पर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में ढाई घंटे से अधिक समय तक सुनवाई चली। सरकार की ओर से कोर्ट में 23 मौतों की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें 16 मौतें दूषित पानी से होनी बताई गई। वहीं 4 मौतों को लेकर असमंजस और 3 मौतें दूषित पानी से नहीं होना बताई गईं। मौतों के आंकड़ों पर भारी विरोधाभास हाईकोर्ट ने मौतों के आंकड़ों को लेकर गंभीर असहमति दर्ज की। जहां सरकारी रिपोर्ट में 16 मौतें जलजनित बीमारी से मानी गईं। वहीं याचिकाकर्ताओं ने करीब 30 मौतों का दावा किया। कोर्ट ने कहा था कि रिपोर्ट में मौतों के स्पष्ट कारण दर्ज नहीं हैं। पर्याप्त वैज्ञानिक और दस्तावेजी आधार का अभाव है।

रायसेन जिले में सोम डिस्टलरीज के लाइसेंस निलंबित, अवैध शराब परिवहन मामले में बड़ी कार्रवाई

रायसेन   रायसेन जिले के सेहतगंज स्थित सोम डिस्टलरीज को बुधवार रात आबकारी विभाग ने सील कर दिया। जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई सोम डिस्टलरी के खिलाफ लगभग 2 साल पहले देपालपुर के मामले को लेकर की गई है। इसमें अदालत ने फैक्ट्री का लाइसेंस निलंबित करते हुए सील करने के आदेश दिए थे। बुधवार शाम आबकारी कमिश्नर के निर्देश पर जिला आबकारी अधिकारी सहित भोपाल से आए कुछ अधिकारियों ने सेहतगंज स्थित फैक्ट्री पहुंचकर सील करने की कार्रवाई की। उल्लेखनीय है कि नकली शराब परिवहन परमिटों एवं अवैध शराब का परिवहन करने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश देपालपुर ने प्रकरण 21/2021, फाइलिंग 975/2021 में 23/12/2023 को फैसला दिया था, जिसमे मेसर्स सोम डिस्टलरीज प्रायवेट लिमिटेड सेहतगंज जिला रायसेन तथा मेसर्स सोम डिस्टलरीज एंड ब्रेवरीज लिमिटेड रोजराचक जिला रायसेन के प्रतिनिधि उमाशंकर शर्मा, जीडी अरोरा, दिनकर सिंह, मोहन सिंह तोमर एवं दीनानाथ सिंह डायरेक्टर, मेसर्स सोम डिस्टलरीज एण्ड ब्रेवरीज लिमिटेड, रोजराचक जिला रायसेन तथा अन्य को उक्त प्रकरण में पारित आदेश में उल्लेखित विभिन्न धाराओं के अंतर्गत कारावास एवं अर्थदंड से दण्डित किया था। आरोपीगणों ने मिलकर परमिट क्रमांक 10363, ट्रक क्रमांक एमपी 09 एचएफ 5185 की बिल्टी और अनेकोनेक परमिट बुक की कूट रचना की थी। इसमें मदनसिंह द्वारा 5 फर्जी परमिट बुक, विरेन्द्र भारद्वाज द्वारा 272, रामप्रसाद मिश्रा द्वारा 25, प्रीति गायकवाड़ द्वारा 279, संजय गोहे 282, कैलाश बंगाली 29, मोहन सिंह तोमर 676, उमाशंकर 75 और दिनकरसिंह द्वारा 65 फर्जी परमिट की कूटरचना कर स्वयं को अथवा मेसर्स सोम डिस्टलरीज प्रायवेट लिमिटेड को लाभ पहुंचाने का काम किया गया था।

अनूपपुर पुलिस ने छत्तीसगढ़ से अपहृत नाबालिग को आरोपी के कब्जे से मुक्त किया, परिजनों को सौंपा

छत्तीसगढ से अपहृत कर लाई नाबालिग बालिका को कोतवाली अनूपपुर पुलिस द्वारा आरोपी के कब्जे से मुक्त कराकर परिजनों और छत्तीसगढ पुलिस को सौंपा  अनूपपुर पुलिस अधीक्षक अनूपपुर  मोती उर रहमान जी के कुशल निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जगनाथ मरकाम जी एवं एसडीओपी श्री सुमित केरकेट्टा के मार्गदर्शन में कोतवाली अनूपपुर पुलिस द्वारा छत्तीसगढ के जिला सूरजपुर से अपहृत कर लाई गई 17 वर्षीय नाबालिग बालिका को आरोपी के कब्जे से मुक्त कराया जाकर परिजनो को सूचना देकर छत्तीसगढ पुलिस और परिवारजन को सौंपा गया। उक्त नाबालिग बालिका की दिनांक 31.01.2026 को अपने घर से अचानक लापता हो जाने पर पुलिस चौकी लटोरी थाना जयनगर जिला सूरजपुर छत्तीसगढ में धारा 137(2) बी.एन.एस. का अपराध पंजीबद्ध है। दिनांक 04.02.2026 दिन बुधवार को टी.आई. कोतवाली अरविन्द जैन को सूचना प्राप्त हुई कि अनूपपुर नगर में एक नाबालिग बालिका के साथ संदिग्ध व्यक्ति किराये का कमरा लेने का प्रयास कर रहा है। जो उक्त सूचना पर पुलिस द्वारा तत्काल एक्शन लिया गया। टी. आई  कोतवाली अरविंद जैन के नेतृत्व में महिला उपनिरीक्षक सरिता लकड़ा, सहायक उपनिरीक्षक कमलेश तिवारी, आरक्षक अब्दुल कलीम, महिला आरक्षक अंकिता सोनी की टीम के द्वारा उक्त नाबालिग बालिका को आरोपी नवयुवक बबलू देवांगन पिता प्राचन देवांगन उम्र 19 साल निवासी सूरजपुर जिला सूरजपुर छत्तीसगढ़ के कब्जे से पकड़ा जाकर सुरक्षित थाना लाया गया। कोतवाली पुलिस के द्वारा दी गई सूचना पर पुलिस चौकी लटोरी थाना जयनगर जिला सूरजपुर छत्तीसगढ से सहायक उपनिरीक्षक मानिकदास एवं नाबालिग बालिका के परिजन उपस्थित आये जिन्हें उनकी बच्ची सकुशल सौंपी जाकर पकडे गए आरोपी को भी छत्तीसगढ़ पुलिस के सुपुर्द किया गया।          पुलिस अधीक्षक अनूपपुर श्री मोती उर रहमान जी के निर्देशन में कोतवाली पुलिस की सजगता और ततपरतापूर्वक पूर्वक की गई कार्रवाई से उक्त नाबालिक बालिका अपने घर सुरक्षित पहुंच सकी।  जिसके परिवारजन द्वारा कोतवाली अनूपपुर पुलिस का आभार व्यक्त किया गया है

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