LATEST NEWS

अंतर्राष्ट्रीय बाघ शिकारी आदिन सिंह उर्फ कल्ला बावरिया को 4 वर्ष की सजा

भोपाल. अंतर्राष्ट्रीय बाघ शिकारी आदिन सिंह उर्फ कल्ला बावरिया को 4 वर्ष की सजा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर वन एवं वन्य-जीव संरक्षण के लिये लगातार समग्र प्रयास किये जा रहे हैं। इसी दिशा में कार्रवाई करते हुए स्टेट टाइगर फोर्स मध्यप्रदेश को वन्य-जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो भारत सरकार, नई दिल्ली से प्राप्त इन्टेलिजेंस इनपुट के आधार पर 18 अगस्त, 2023 को ग्यारसपुर विदिशा से कुख्यात अंतर्राष्ट्रीय बाघ शिकारी एवं तस्कर आदिम सिंह उर्फ कल्ला बावरिया को गिरफ्तार किया था। एसटीएफ द्वारा की गयी सटीक विवेचना एवं वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर एकत्रित किये गये सबूतों तथा सहायक जिला अभियोजन अधिकारी नर्मदापुरम द्वारा ठोस पक्षों के आधार पर न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नर्मदापुरम द्वारा 11 फरवरी को सभी 3 आरोपियों को दोषी मानते हुए 4-4 वर्ष का सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपये के जुर्माने से दण्डित किया गया। वन विभाग द्वारा केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर तस्कर कल्ला बावरिया को नेपाल को सौंपने की कार्यवाही की जायेगी। इससे दक्षिण एशिया महाद्वीप में फैले इस अंतर्राष्ट्रीय गिरोह द्वारा बाघों के शिकार एवं उनके अवयवों की तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश द्वारा भारत सरकार के माध्यम से एसएडब्ल्यूईएन (साउथ एशिया वाइल्ड लाइफ इन्फोर्समेंट नेटवर्क) मुख्यालय काठमांडू नेपाल से संपर्क कर कल्ला व उसके गिरोह के अन्य सदस्यों तथा अपराधों के संबंध में पड़ोसी देश नेपाल से जानकारी एकत्रित की, जिसमें नेपाल में भी वर्ष 2012 में कल्ला के विरुद्ध बाघ के शिकार व उसके अवयवों की तस्करी का प्रकरण दर्ज होना पाया गया। साथ ही पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में भी बाघ के शिकार एवं उसके अवयवों के अवैध व्यापार का एक प्रकरण वर्ष 2013 का पाया गया। कल्ला बावरिया को विगत कई वर्षों से कई राज्यों की पुलिस, वन विभाग एवं नेपाल सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (सीआईबी) तलाश रही थी। एसटीएसाएफ द्वारा उक्त आरोपी को प्रोडक्शन वारंट पर वन विभाग जिला अकोला महाराष्ट्र को सौंपा गया था। प्रकरण की अग्रिम विवेचना के दौरान पुजारी सिंह वल्द रामकुमार सिंह बावरिया निवासी होशियारपुर पंजाब एवं गिरोह की मुख्य कड़ी बाघ तस्कर एक महिला रिंडिक टेरोंपी निवासी असम को एसटीएसएफ द्वारा वर्ष 2025 में गिरफ्तार किया गया था।  

महाशिवरात्रि विवाद सुप्रीम कोर्ट में: दरगाह प्रबंधन की गुहार पर SC की अहम टिप्पणी

कर्नाटक सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (12 फरवरी) को कर्नाटक स्थित अलंद लाडले मशाइक दरगाह प्रबंधन की उस अर्जी पर सुनवाई करने से मना कर दिया जिसमें जिसमें दरगाह परिसर में हिंदू महाशिवरात्रि पूजा और दूसरे हिंदू रीति-रिवाजों पर रोक लगाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी। दरगाह मैनेजमेंट ने भारत के संविधान के आर्टिकल 32 के तहत अर्जी दी थी, जो उन पार्टियों को राहत के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने की इजाज़त देता है जिनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। दरगाह प्रबंधन याचिका में दावा किया था कि दरगाह के धार्मिक स्वरूप को बदलने के लिए हर साल रणनीतिक तरीके से पूजा की अनुमति लेने की कोशिश की जा रही है। प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप कर दरगाह के मूल धार्मिक चरित्र को बनाए रखने की भी मांग की थी। हालांकि, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एससी शर्मा की पीठ ने कहा कि इस तरह के मामलों में पहले हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए। इससे पहले मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने भी टिप्पणी की थी कि हर मामला सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट लाना उचित नहीं है, क्योंकि इससे यह संदेश जाता है कि हाई कोर्ट प्रभावी नहीं हैं। जब कल चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची के सामने यह मामला आया, तो इस बेंच ने यह भी सवाल उठाया था कि पहले हाई कोर्ट जाने के बजाय आर्टिकल 32 की पिटीशन क्यों फाइल की गई। यह विवाद उस दरगाह से जुड़ा है जो 14वीं सदी के सूफी संत हजरत शेख अलाउद्दीन अंसारी (लाडले मशाइक) और 15वीं सदी के हिंदू संत राघव चैतन्य से संबंधित मानी जाती है। दरगाह परिसर में राघव चैतन्य शिवलिंग नाम से पहचानी जाने वाली एक संरचना भी मौजूद बताई जाती है। ऐतिहासिक रूप से इस स्थल पर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय पूजा-अर्चना करते रहे हैं, हालांकि 2022 में यहां पूजा अधिकार को लेकर तनाव की स्थिति बनी थी। गौरतलब है कि कर्नाटक हाई कोर्ट ने 2025 में 15 हिंदू श्रद्धालुओं को महाशिवरात्रि पर पूजा की अनुमति दी थी, जो भारी सुरक्षा के बीच सम्पन्न हुई थी। इससे पहले भी कोर्ट के आदेश पर सीमित संख्या में पूजा कराई गई थी। दरगाह प्रबंधन का कहना था कि बार-बार अंतरिम आदेश लेकर धार्मिक स्थल के स्वरूप को बदलने की कोशिश की जा रही है, जो Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991 के खिलाफ हो सकता है। इस कानून के तहत 15 अगस्त 1947 को किसी धार्मिक स्थल की जो स्थिति थी, उसे बनाए रखना जरूरी माना गया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद इस मामले में आगे की कानूनी लड़ाई हाई कोर्ट में होने की संभावना जताई जा रही है। यह मामला धार्मिक अधिकार, ऐतिहासिक दावों और कानून के संतुलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति की बैठक सम्पन्न

रायपुर. आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में आज उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति की बैठक हुई। बैठक नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के सभाकक्ष में संपन्न हुई। आज की बैठक में कुल 17 प्रकरणों की समीक्षा एवं सुनवाई की गई। इनमें जाति जांच प्रकरण से संबंधित 12 प्रकरणों में पक्षकार समिति के समक्ष उपस्थित हुए। 06 प्रकरणों की सुनवाई पूर्ण कर आदेश जारी करने के निर्देश दिए गए। 05 प्रकरणों में जाति प्रमाण पत्र धारकों को सुनवाई का एक और अंतिम अवसर प्रदान करते हुए आगामी बैठक में उपस्थित होकर अपनी जाति के संबंध में प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। 01 प्रकरण में विजिलेंस टीम को दुबारा मौके पर जाकर जाचं कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। वहीं 05 प्रकरणों में पक्षकार अनुपस्थित रहे।  बैठक में आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के आयुक्त डॉ. सारांश मित्तर (सदस्य), आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान की संचालक मती हिना अनिमेष नेताम (सदस्य सचिव), लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक  ऋतुराज रघुवंशी (सदस्य), संचालक, भू अभिलेख,  विनीत नंदंनवार, संयुक्त संचालक, टीआरटीआई मती गायत्री नेताम (प्रभारी अधिकारी, जाति जांच प्रकोष्ठ), मती रमा उइके (सदस्य), डॉ. अनिल विरूलकर (सदस्य) सहित जाति जाँच प्रकोष्ठ के  जितेन्द्र गुप्ता, मती अंजनी भगत,  ईश्वर साहू उपस्थित थे।   उल्लेखनीय है कि उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति द्वारा नियमित अंतराल में बैठक आयोजित कर जाति प्रमाण पत्र एवं सामाजिक प्रस्थिति से संबंधी प्रकरणों का निपटारा किया जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय से संबद्ध प्रकरणों पर भी नियमानुसार पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से सुनवाई कर प्रकरणों का शीघ्र निपटारा किया जा रहा है। आज की बैठक में बड़ी संख्या में पक्षकार एवं अधिवक्ता अपना पक्ष प्रस्तुत करने हेतु उपस्थित हुए।     विदित हो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में दिये गये मार्गदर्शी निर्देश एवं छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक प्रास्थिति के प्रमाणीकरण का विनियमन) अधिनियम 2013 में दिए गए प्रावधानों के अंतर्गत कुल 07 सदस्यीय उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति का गठन किया गया है। समिति अर्द्ध न्यायिक स्वरूप में कार्य करते हुए निष्पक्ष एंव समयबद्ध निर्णय सुनिश्चित कर रही है। 

कानपुर हिट-एंड-रन पर कानूनी ट्विस्ट: 7 घंटे में छूटा आरोपी शिवम, रिमांड पर कोर्ट सख्त

कानपुर कानपुर लैंबॉर्गिनी कांड में तंबाकू व्यापारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा को एसीएमएम कोर्ट ने जमानत दे दी है। कोर्ट ने शिवम को 20-20 हजार के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश किया। साथ की पुलिस की 14 दिन की रिमांड अर्जी को खारिज कर दिया है। आज सुबह ही करीब 9 बजे शिवम की गिरफ्तारी हुई थी। और महज 7 घंटे में छूट गया है। हालांकि पुलिस जांच में सामने आया था कि हादसे के वक्त शिवम मिश्रा ही ड्राइविंग सीट पर था, और कार चला रहा था। आपको बता दें कानपुर के वीआईपी रोड पर करीब 12 करोड़ रुपये की लग्जरी लैंबॉर्गिनी कार से हुए हादसे के मामले में पुलिस ने बंशीधर टोबैको ग्रुप के मालिक केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा को आज ही गिरफ्तार किया था। हादसे में कई लोग घायल हुए थे, जिसके बाद मामला सुर्खियों में आ गया। पुलिस का दावा है कि दुर्घटना के समय शिवम मिश्रा खुद कार चला रहा था, जबकि बचाव पक्ष का कहना है कि वाहन ड्राइवर मोहन लाल चला रहा था। हालांकि वायरल वीडियो में शिवम ड्राइविंग सीट से बाहर निकलते हुए दिखाई दिया, जिससे पुलिस की जांच को मजबूती मिली। हादसे के बाद मौके पर मौजूद बाउंसरों की भूमिका भी सवालों में रही। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ लोग कार की नंबर प्लेट हटाने या ढकने की कोशिश करते नजर आए और उनके पास वॉकी-टॉकी भी थे। शुरुआती कार्रवाई में पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगे, जिसके बाद ग्वालटोली थाना प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया गया और सीसीटीवी फुटेज व वायरल वीडियो की जांच की गई। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस जब शिवम के घर पहुंची तो दरवाजा नहीं खोला गया, लेकिन गुरुवार को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया। मामले की आगे जांच जारी है।  

समन विवाद पर नया मोड़, केजरीवाल को मिली राहत से असंतुष्ट ED पहुंची ऊपरी अदालत

नई दिल्ली ईडी ने समन की अनदेखी करने के मामले में अरविंद केजरीवाल की दोबारा कानूनी घेरेबंदी करने की तैयारी कर ली है। ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट को सूचित किया गया कि वह दिल्ली आबकारी मामले में समन का पालन नहीं करने के आरोप में अरविंद केजरीवाल को दो मामलों में बरी करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देगी। केजरीवाल को मिली राहत को देंगे चुनौती ईडी की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि एजेंसी ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करेगी। इसी साल 22 जनवरी को ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को उनके खिलाफ दर्ज दो अलग-अलग मामलों में बरी कर दिया था। ये मामले कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले की जांच में शामिल होने के लिए भेजे गए समन के बाद ईडी के सामने पेश नहीं होने को लेकर दर्ज किए गए थे। याचिका वापस लेने की परमिशन दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को अरविंद केजरीवाल को दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच के सिलसिले में ईडी की ओर से उन्हें जारी समन को चुनौती देने वाली अपनी याचिका वापस लेने की परमिशन दे दी। केजरीवाल के वकील ने कहा कि वह इस मामले को नहीं बढ़ाना चाहते हैं क्योंकि समन के बाद एजेंसी के सामने पेश नहीं होने के कारण दर्ज मामले में उनको पहले ही बरी कर दिया गया है। निचली अदालत ने फैसले में क्या कहा? समन की अनदेखी मामले में यह देखते हुए कि आरोपी एक मौजूदा मुख्यमंत्री थे। उन्हें भी आने-जाने का अपना मौलिक अधिकार था… ट्रायल कोर्ट ने कहा कि समन की सही सेवा को कानूनी चुनौती दी जा सकती है। जांच एजेंसी ईडी यह साबित करने में नाकाम रही है कि केजरीवाल ने जानबूझकर समन की अवहेलना की। नौवें समन के बाद पहुंचे थे हाईकोर्ट बता दें कि केजरीवाल ने ईडी नौवें समन के बाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने 20 मार्च, 2024 को ईडी से जवाब मांगा था। हालांकि अदालत का कहना था कि वह इस स्टेज पर केजरीवाल को कोई अंतरिम राहत नहीं देगी। केजरीवाल को उसी शाम ईडी की ओर से गिरफ्तार कर लिया गया था। फिलहाल केजरीवाल मनी लॉन्ड्रिंग केस में अंतरिम बेल पर हैं। ईडी के क्या हैं आरोप? ईडी का आरोप है कि केस के दूसरे आरोपी पूर्व की एक्साइज पॉलिसी बनाने के लिए केजरीवाल के संपर्क में थे। इससे उन्हें गलत फायदा हुआ। वहीं अपनी अर्जी में केजरीवाल ने गिरफ्तारी, पूछताछ और बेल देने के संबंध में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी पीएमएलए के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी है। उन्होंने कई मुद्दे उठाए हैं जिसमें शामिल है कि क्या कोई पॉलिटिकल पार्टी एंटी मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत आती है।

अब तक 14,518 किसानों को मिला 51.51 करोड़ का भुगतान

रायपुर. उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा के प्रयासों से 4.73 करोड़ रुपये जारी होली पर्व से पूर्व कवर्धा के गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत और खुशखबरी सामने आई है। उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से भोरमदेव सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना मर्यादित, राम्हेपुर (कवर्धा) द्वारा गन्ना किसानों के लिए 4.73 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। अब तक कुल 14,518 गन्ना किसानों को 51.51 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। नियमित एवं समयबद्ध भुगतान की इस प्रक्रिया से किसानों को आर्थिक संबल मिला है, जिससे वे आगामी कृषि कार्यों की तैयारी सुचारु रूप से कर पा रहे हैं। कलेक्टर एवं कारखाने के प्राधिकृत अधिकारी  गोपाल वर्मा के मार्गदर्शन में भुगतान प्रक्रिया निरंतर जारी है। उनके निर्देशन में कारखाना प्रबंधन द्वारा किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए पारदर्शी एवं त्वरित भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। इससे सहकारी व्यवस्था में किसानों का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है।      कारखाना प्रबंधन ने बताया कि चालू पेराई सत्र में अब तक 2,42,990 मीट्रिक टन गन्ने की पेराई की जा चुकी है तथा 2,86,743 क्विंटल शक्कर का उत्पादन किया गया है। यह उपलब्धि किसानों के सतत सहयोग, जिला प्रशासन के मार्गदर्शन और कारखाने की बेहतर कार्यक्षमता का संयुक्त परिणाम है। गौरतलब है कि होली जैसे प्रमुख त्योहार से पूर्व भुगतान की पहल से किसानों को बड़ी राहत मिली है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। जिला प्रशासन एवं कारखाना प्रबंधन ने किसानों के हित में इसी प्रकार निरंतर कार्य करते रहने का विश्वास दिलाया है।    भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना प्रबंधन ने शेयरधारक सदस्य किसानों एवं गैर-सदस्य गन्ना उत्पादकों से सर्वे के अनुरूप अधिकतम गन्ना आपूर्ति सुनिश्चित करने की अपील की है। प्रबंधन ने इसे सहकारिता को मजबूत करने और किसानों के भविष्य को सुरक्षित करने का साझा अवसर बताया है। विगत पेराई सत्र 2024-25 एवं वर्तमान पेराई सत्र 2025-26 में सर्वे अनुमान के अनुरूप गन्ना आपूर्ति नहीं हो पाने के कारण कारखाने की पेराई क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं हो सका, जिससे पेराई अवधि प्रभावित हुई। उन्होंने बताया कि पर्याप्त गन्ना आपूर्ति होने से पेराई अवधि बढ़ेगी, उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों को आगे भी समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा।  कारखाना प्रबंधन ने कारखाने की पंजीकृत उपविधियों के अंतर्गत जानकारी देते हुए बताया कि उपविधि धारा 07(02)(घ) के अंतर्गत सदस्य किसानों के लिए अपने उत्पादित गन्ने की आपूर्ति कारखाने में करना अनिवार्य है। वहीं उपविधि धारा 09(क)(05) में यह प्रावधान है कि यदि कोई सदस्य लगातार सर्वे के अनुसार गन्ना आपूर्ति नहीं करता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है। प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि सहकारी संस्था की निरंतरता और किसानों के दीर्घकालिक हितों की रक्षा करना है। किसानों के हित में सतत प्रयास कारखाना प्रबंधन ने कहा कि भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना अपनी स्थापना से ही क्षेत्र के गन्ना किसानों की आर्थिक एवं सामाजिक उन्नति का सशक्त माध्यम रहा है। उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा के प्रयासों, जिला प्रशासन के मार्गदर्शन और किसानों के सहयोग से कारखाना निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है। कारखाना द्वारा एफआरपी के अतिरिक्त रिकवरी की राशि, शासन द्वारा जारी बोनस राशि का भी भुगतान किया जाता है। शक्कर कारखाना द्वारा किसानों को शासन के सहयोग से रियायती दर पर शक्कर वितरण भी किया जाता है। गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों के लिए उन्नत बीज उपलब्ध कराया जाता है,गन्ना किसानों को गन्ना संस्थानों में प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता है। किसानों के लिए कारखाना परिसर में सर्व सुविधा युक्त बलराम सदन का निर्माण किया गया है। कारखाना परिसर में श्रमिकों एवं किसान भाइयों के लिए केवल 5 रुपए में गरम भोजन के लिए कैंटीन शुरू की गई है। इस प्रकार भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना द्वारा अपने सामाजिक उत्तरदायित्वों का भी निर्वहन किया जाता है। अस्तित्व की रक्षा के लिए सामूहिक सहभागिता जरूरी  कारखाना प्रबंधन ने सभी शेयरधारक किसानों और अन्य गन्ना उत्पादकों से अपील की है कि वे सर्वे के अनुसार अधिक से अधिक गन्ना कारखाने में दें। प्रबंधन का कहना है कि अगर सभी किसान मिलकर सहयोग करेंगे तो पेराई का लक्ष्य आसानी से पूरा हो सकेगा और कारखाना मजबूत बना रहेगा। इससे सहकारी व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और क्षेत्र के गन्ना किसानों का भविष्य भी सुरक्षित और बेहतर होगा।  

बायर्न का सेमीफाइनल टिकट कन्फर्म, जर्मन कप में लीपजिग को चटाई धूल

बर्लिन बायर्न म्यूनिख ने 2020 के बाद पहली बार जर्मन कप के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। क्वार्टरफाइनल में आरबी लीपजिग को 2-0 से हराकर बायर्न ने सेमीफाइनल में जगह बना ली। दोनों गोल दूसरे हाफ में आए। लीपजिग ने मैच की शुरुआत आक्रामक अंदाज में की। क्रिस्टोफ बॉमगार्टनर ने चौथे मिनट में गोल भी कर दिया था, लेकिन वीएआर समीक्षा के बाद इसे ऑफसाइड करार दिया गया। इसके बाद बायर्न ने धीरे-धीरे खेल पर पकड़ बनानी शुरू की। हैरी केन ने शुरुआती मिनटों में गोलकीपर मार्टेन वेंडेवोर्ड्ट को कठिन बचाव करने पर मजबूर किया, जबकि 11वें मिनट में कैस्टेलो लुकेबा ने रिबाउंड पर संभावित गोल को लाइन से हटाकर टीम को राहत दी। पहले हाफ के मध्य में बायर्न ने दबाव बढ़ाया। लुइस डियाज और केन ने करीब से गोल करने की कोशिश की, लेकिन लीपजिग का डिफेंस मजबूती से डटा रहा। एक विवादित क्षण तब आया जब जोसिप स्टैनिसिक ने एंटोनियो नुसा को पेनल्टी बॉक्स के बाहर गिराया, पर रेफरी ने पेनल्टी नहीं दी। हाफ टाइम तक दोनों टीमें गोलरहित रहीं। दूसरे हाफ में मुकाबला संतुलित रहा, लेकिन 64वें मिनट में निर्णायक मोड़ आया। लीपजिग के गोलकीपर वेंडेवोर्ड्ट स्टैनिसिक को चैलेंज करते हुए फिसल गए और बायर्न को पेनल्टी मिल गई। हैरी केन ने शांतचित्त होकर पेनल्टी को गोल में बदला और टीम को बढ़त दिलाई। इसके तीन मिनट बाद ही लुइस डियाज ने 67वें मिनट में दूसरा गोल दागकर बढ़त दोगुनी कर दी। इसके बाद बायर्न ने खेल पर पूरा नियंत्रण बनाए रखा और लीपजिग को वापसी का मौका नहीं दिया। इस जीत के साथ बायर्न सेमीफाइनल में बायर लेवरकुसेन, स्टटगार्ट और फ्रीबर्ग के साथ शामिल हो गया है। अंतिम चार के लिए ड्रॉ 22 फरवरी को होगा। मैच के बाद लीपजिग के चेयरमैन ओलिवर मिंट्जलाफ ने बायर्न को बधाई देते हुए कहा कि उनकी टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन भविष्य में बायर्न को हराने के लिए और मेहनत की जरूरत होगी।  

साइबर ठगी पर करारा प्रहार: फर्जी RTO ई-चालान लिंक भेजकर लाखों की ठगी, दो ठग गिरफ्तार

रायपुर रायपुर रेंज पुलिस ने ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी लिंक के माध्यम से ऑनलाइन ठगी करने वाले दो साइबर आरोपियों को राजस्थान से गिरफ्तार किया है। आरोपी Winmate और Wingo जैसे संदिग्ध ऐप के जरिए एंड्रॉइड यूजर्स को निशाना बनाते थे और उनके मोबाइल से फर्जी एसएमएस भेजकर बैंक खातों से रकम पार कर देते थे। पुलिस महानिरीक्षक रायपुर रेंज अमरेश मिश्रा के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई में पृथ्वी कुमार बिश्नोई उर्फ राहुल (20) निवासी ग्राम डोलीकला, थाना कल्याणपुर, बाड़मेर (राजस्थान) और नरसिंह सिंह (24) निवासी भोपालगढ़, जोधपुर (राजस्थान) को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के पास से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन, सिम कार्ड और बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए हैं। ऐसे हुआ पर्दाफाश प्रार्थी धर्मेंद्र सिंह ने थाना विधानसभा में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके मोबाइल पर RTOechallan नाम से एक एसएमएस आया। उसमें दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही उनके बैंक खाते से 4.52 लाख रुपये कट गए। इस पर अपराध क्रमांक 8/26 के तहत धारा 318(4), 3(5) भारतीय न्याय संहिता और 66(D) आईटी एक्ट में मामला दर्ज कर रेंज साइबर थाना ने जांच शुरू की। जांच के दौरान गूगल, बैंकिंग ट्रांजेक्शन, मोबाइल सेवा प्रदाता, यूट्यूब और टेलीग्राम से मिले तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया, जिससे आरोपियों की पहचान कर राजस्थान में दबिश देकर गिरफ्तारी की गई। सोशल मीडिया पर लालच देकर फंसाते थे पुलिस के अनुसार आरोपी यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर “Task Complete”, “Instant Bonus”, “Referral Bonus” और गेम खेलकर कमाई जैसे प्रलोभन देकर Winmate और Wingo जैसे ऐप डाउनलोड करवाते थे। ये ऐप प्ले स्टोर या ऐप स्टोर पर उपलब्ध नहीं होते थे। ऐप इंस्टॉल करते ही यूजर को बोनस राशि दिखती थी और “SMS Task” के नाम पर उसके मोबाइल से बड़ी संख्या में फर्जी ई-चालान और संदिग्ध लिंक भेजे जाते थे। लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल हैक हो जाता था और बैंक खाते या ई-वॉलेट से रकम निकाल ली जाती थी। Swiggy-Instamart से खपाते थे ठगी की रकम जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ठगी की रकम को छिपाने के लिए Swiggy और Instamart जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म से महंगे सामान की ऑनलाइन खरीदारी कर उसे अलग-अलग राज्यों में डिलीवर कराते थे, जिससे पैसों का ट्रैक करना मुश्किल हो जाए। इससे पहले भी इसी तरह के मामले में WinGo ऐप के जरिए ठगी करने वाले तीन आरोपियों को महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि—     केवल Play Store या App Store से ही ऐप डाउनलोड करें।     “गारंटीड मुनाफा” या “आसान कमाई” के झांसे में न आएं।     अनावश्यक रूप से SMS, कॉन्टैक्ट या बैंक संबंधी अनुमति मांगने वाले ऐप इंस्टॉल न करें।     किसी भी अज्ञात लिंक या APK फाइल पर क्लिक न करें।     साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंजीनियर्स की एक दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का किया शुभारंभ

भगवान विश्वकर्मा का साक्षात् अवतार हैं इंजीनियर्स सड़क एवं भवन विकास कार्यों के लिए म.प्र. शासन के साथ हुए 4 एमओयू पीडब्ल्यूडी की प्रशिक्षण कार्ययोजना 2026-27, न्यूज लेटर सहित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान एवं बजट मॉड्यूल का भी हुआ विमोचन पिछले 2 वर्ष में लोक निर्माण विभाग ने अपने कार्यों के आधार पर बनाई विशिष्ठ पहचान   भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि निर्माण सिर्फ ईंट–पत्थर का संयोजन नहीं, एक अभिनव कला है। इसमें उत्कृष्ट दृष्टिकोण के साथ दीर्घकालिक कार्य योजना को अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप अब हर निर्माण कार्य में कन्सेप्चुअल और क्वालिटेटिव एप्रोच अनिवार्य रूप से दिखाई देना चाहिए। गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए। प्रदेश के विकास के लिए हम सभी को पूरी क्षमता दक्षता से काम करना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को रवीन्द्र भवन में लोक निर्माण विभाग अन्तर्गत मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा आयोजित एक दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। लोक निर्माण विभाग के तकनीकी अधिकारियों, वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अभियंताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैचारिक प्रतिबद्धता और कार्यशैली में जड़ता से बचने और बदलती तकनीकों के अनुरूप स्वयं को अद्यतन रखने के लिए कौशल संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। ऐसी कार्यशालाएं अभियंताओं की स्किल्स को रिफ्रेश करती हैं और उन्हें नई ऊर्जा प्रदान करती हैं। उन्होंने निर्माण कार्यों में दीर्घकालिक दृष्टि, नवाचार और पारदर्शिता को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में पीएम गतिशक्ति योजना के माध्यम से लोक निर्माण विभाग नवाचारों को धरातल पर उतार रहा है। वर्तमान समय में हमारे इंजीनियर्स साक्षात् भगवान विश्वकर्मा के अवतार हैं। लोक निर्माण विभाग ने पिछले 2 वर्षों के कार्यों के आधार पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। इस अवधि में सराहनीय कार्य हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गीता के अंतिम अध्याय में ज्ञान और विज्ञान की बात कही गई है, जिसमें मन, बुद्धि और अहंकार के साथ पंच तत्वों की व्याख्या की गई है। लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर्स की यह कार्यशाला आधुनिक संरचनाओं के निर्माण को गति प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण पहल है। हमारे इंजीनियर्स ने सांदीपनि विद्यालय सहित बड़े-बड़े अधोसंरचनात्मक विकास के निर्माण कार्य किए हैं। सड़क, पुल, स्टेडियम और भवन जैसे निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग के माध्यम से ही किये जाते हैं। विभागीय इंजीनियर्स की क्षमता संवर्धन के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण की आवश्यकता भी है। उन्होंने कहा कि इंजीनियर्स को अपना काम करने में अनेक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। आज की कार्यशाला में एमपीआईडीसी सहित देश की विभिन्न संस्थाओं के साथ समझौते हुए हैं। प्रदेश में ग्रीन बिल्डिंग के विकास को लेकर सहमति बनी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी कार्यों और नवाचारों के लिए लोक निर्माण मंत्री एवं विभाग को बधाई दीं। तकनीक, पारदर्शिता और गुणवत्ता से बदलेगा निर्माण तंत्र : लोक निर्माण मंत्री श्री सिंह लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने क्षमता संवर्धन कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि यह केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि विभाग की उस निरंतर सुधार यात्रा का प्रतीक है जिसमें नई सोच, नई प्रणाली और उच्च गुणवत्ता के साथ लोक निर्माण विभाग आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब सोच बदलती है तभी व्यवस्था बदलती है, और यह कार्यशाला विभाग के नवाचारों की श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश में अधोसंरचना विकास को केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उसे सुशासन, पारदर्शिता, तकनीक और नागरिक सुविधा से जोड़ा गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, डिजिटल इंडिया, ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस, हरित विकास और आत्मनिर्भर भारत जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब विकास समन्वित सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने अधोसंरचनात्मक विकास को नई गति और दिशा दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्पष्ट संदेश है कि निर्माण केवल संरचना नहीं, बल्कि भविष्य की नींव है। समयबद्धता, गुणवत्ता, पारदर्शिता और पर्यावरणीय संवेदनशीलता अब विभाग की कार्य संस्कृति का अभिन्न अंग बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण विभाग के लिए 293 इंजीनियर्स के पद भरने की स्वीकृति प्रदान की है। इसके लिए विभागीय स्तर पर कार्य जारी है। मंत्री श्री सिंह ने बताया कि प्रोजेक्ट मैनेजमेंट मैन्युअल 2.0 विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो सरकारी भवन निर्माण परियोजनाओं के लिए एक समग्र मार्गदर्शिका का कार्य करेगा। मंत्री श्री सिंह ने पीएम गति शक्ति पोर्टल आधारित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि सड़कों, पुलों और भवनों का वास्तविक आधार प्रशिक्षित एवं सक्षम मानव संसाधन होता है। इसी उद्देश्य से विभाग ने राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ मिलकर एक वर्ष का प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार किया है, जिसमें प्रत्येक त्रैमास के लिए सड़क, पुल, भवन, पर्यावरण और नवीन तकनीकों जैसी थीम निर्धारित की गई हैं। उन्होंने बताया कि विभाग ने 10 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले भवनों को ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप निर्मित करने के निर्देशों के पालन में त्वरित कार्रवाई करते हुए अभियंताओं को इस विषय पर प्रशिक्षण देना प्रारंभ कर दिया है, जो विभाग की सकारात्मक कार्य संस्कृति का उदाहरण है। मंत्री श्री सिंह ने बताया कि लोक निर्माण विभाग के कार्यों के लिए ट्री शिफ्टिंग की एक कार्यशाला भी बहुत जल्द आयोजित की जाएगी। भास्कराचार्य संस्थान ने लोक निर्माण विभाग के 500 से अधिक लोक कल्याण सरोवरों की कार्य योजना तैयार कर ली है। लोक निर्माण विभाग ने कार्यों का औचक निरीक्षण की शुरुआत की है, जिसे ओडिशा और राजस्थान जैसे राज्यों ने अपनाया है। लोक निर्माण तकनीक, पारदर्शिता और मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। कार्यशाला में प्रशिक्षण कैलेंडर एवं प्रोजेक्ट मैनेजमेंट मैन्युअल का विमोचन किया गया तथा पी.एम.एस. पोर्टल-2.0 डिजिटल प्रबंधन प्रणाली को प्रेजेंटेशन के साथ लाँच किया गया। साथ ही, … Read more

13 वर्षीय ईसाई लड़की संग कथित जबरन इस्लाम कबूलनामा और निकाह, पाकिस्तान में मानवाधिकारों पर सवाल

इस्लामाबाद पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार रुकने का नाम नहीं ले रहा। बार-बार ऐसे मामले सामने आते हैं जहां अल्पसंख्यक समुदाय की मासूम बच्चियों का अपहरण कर उनके धर्म को जबरन बदल दिया जाता है और छोटी उम्र में ही जबरदस्ती शादी कर दी जाती है। एक बार फिर ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान (HRFP) ने पाकिस्तान के साहिवाल जिले की तहसील चिचावतनी में 13 वर्षीय ईसाई लड़की सतीश मरियम के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन शादी पर गहरी चिंता जताई है। 11 जनवरी को दर्ज हुआ था मामला रिपोर्ट के अनुसार, 11 जनवरी 2026 को पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 365-बी के तहत एफआईआर दर्ज की गई। आरोप है कि सतीश मरियम का अपहरण 10 और 11 जनवरी की रात के बीच हुआ। उसके पिता दिहाड़ी मजदूर बशारत मसीह ने बताया कि स्थानीय लोगों ने अली हैदर गुलजार को कुछ अज्ञात साथियों के साथ नाबालिग लड़की को जबरन गाड़ी में ले जाते देखा था। बशारत मसीह ने एचआरएफपी टीम को बताया कि पुलिस ने शिकायत दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की है, लेकिन अभी तक कोई संतोषजनक प्रगति नहीं हुई है। बताया गया कि यह घटना तब हुई जब सतीश की मां शाहनाज बीबी एड़ी में फ्रैक्चर के कारण चलने-फिरने में असमर्थ थीं। परिवार के अनुसार, सतीश घर के काम के लिए बाहर गई थी, तभी उसे जबरन उठा लिया गया। कानून प्रवर्तन अधिकारियों से बार-बार गुहार लगाने और कराची में लड़की के होने के दावों के बावजूद, परिवार का आरोप है कि उसे ढूंढने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए। 22 जनवरी 2026 को अपहरण के मामले को आगे बढ़ाने के लिए परिवार के घर में कई व्यक्तियों द्वारा कथित तौर पर घुसपैठ की गई, धमकियां दी गईं और उन्हें डराया-धमकाया गया, जिसके बाद दूसरी एफआईआर दर्ज की गई। इसमें पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 452, 506, 148 और 149 के तहत घर में जबरन घुसने, आपराधिक धमकी और गैरकानूनी जमावड़े से जुड़े आरोप लगाए गए। लड़की ने कबूल कर लिया है इस्लाम रिपोर्ट के अनुसार, मामला तब और गंभीर हो गया जब कथित अपहरणकर्ता ने दावा किया कि नाबालिग लड़की ने इस्लाम कबूल कर लिया है और शादी भी कर ली है। पीड़िता के परिवार का कहना है कि सतीश के बयान दर्ज किए गए थे और 28 जनवरी को चिचावतनी के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नूर मोहम्मद दोथर के समक्ष हुई अदालती सुनवाई में अपहरणकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया गया। इसमें माता-पिता को बेटी से मिलने की इजाजत नहीं दी गई और कानूनी जानकारी के बिना कार्यवाही की गई। 3 फरवरी 2026 को एचआरएफपी कार्यालय में बोलते हुए सतीश के माता-पिता ने न्याय की अपनी मांग दोहराई। सतीश की मां शाहनाज बीबी ने कहा कि वह घर पर अकेली है, स्वास्थ्य खराब होने के कारण बेटी की रक्षा नहीं कर पा रही है और लगातार मिल रही धमकियों से परिवार की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं। माता-पिता का कहना है कि सतीश नाबालिग है, इसलिए कानूनी रूप से न तो विवाह की सहमति दे सकती है और न ही धर्म परिवर्तन कर सकती है। सुरक्षा की मांग ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान के अध्यक्ष नवीद वाल्टर ने अल्पसंख्यक नाबालिग लड़कियों के जबरन धर्मांतरण और बाल विवाह से सुरक्षा, पीड़ित परिवारों द्वारा झेली जा रही धमकियों व उत्पीड़न, बिना पूर्ण पारदर्शिता और प्रतिनिधित्व के कानूनी कार्यवाही तथा नाबालिग की सुरक्षा व कल्याण को लेकर गंभीर चिंता जताई है। वहीं, एचआरएफपी अध्यक्ष नवीद वाल्टर ने सतीश मरियम के माता-पिता को उनके दौरे के दौरान आश्वासन दिया कि हम सतीश मरियम और उनके परिवार के साथ पूरी एकजुटता से खड़े हैं। हम संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने, नाबालिग के अधिकारों की रक्षा करने और परिवार को उत्पीड़न व धमकियों से सुरक्षा प्रदान करने की मांग करते हैं।  

ईरान बनाम इजरायल: हाइपरसोनिक मिसाइलों के खिलाफ डेविड्स स्लिंग की रणनीति क्या है?

इजरायल  इजरायल की उन्नत वायु रक्षा प्रणाली डेविड्स स्लिंग ने एक बार फिर अपनी शक्ति साबित की है। भविष्य में बढ़ते मिसाइल खतरों, खासकर ईरान जैसे दुश्मनों को ध्यान में रखते हुए, इजरायल ने इस मध्यम दूरी की एयर डिफेंस सिस्टम के कई जटिल और चुनौतीपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। इजरायल ने तैयार कर लिया ईरान की हाइपरसोनिक मिसाइलों का तोड़, डेविड्स स्लिंग के साथ क्या प्लान? इजरायल की उन्नत वायु रक्षा प्रणाली डेविड्स स्लिंग ने एक बार फिर अपनी शक्ति साबित की है। भविष्य में बढ़ते मिसाइल खतरों, खासकर ईरान जैसे दुश्मनों को ध्यान में रखते हुए, इजरायल ने इस मध्यम दूरी की एयर डिफेंस सिस्टम के कई जटिल और चुनौतीपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। ये परीक्षण जून 2025 में ईरान के साथ हुए 12 दिनों के युद्ध से सीखे गए महत्वपूर्ण सबकों पर आधारित हैं, जहां डेविड्स स्लिंग ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को भी सफलतापूर्वक रोक लिया था। यह प्रणाली इजरायल की बहु-स्तरीय रक्षा ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें आयरन डोम (छोटी दूरी), डेविड्स स्लिंग (मध्यम दूरी) और एरो (लंबी दूरी) शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि भविष्य के खतरों के लिए तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से इस मध्यम दूरी की एयर डिफेंस प्रणाली के साथ कई उन्नत परीक्षण किए गए। राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स द्वारा विकसित डेविड्स स्लिंग को 40 से 300 किलोमीटर की दूरी तक रॉकेट, बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल, विमान तथा मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी/ड्रोन) को मार गिराने के लिए तैयार किया गया है। इन परीक्षणों के नए चरण की घोषणा ऐसे समय में हुई जब प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ वार्ता कर रहे थे। यह घटनाक्रम क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच सामने आया है, जहां तेहरान की ओर से संभावित हमले की आशंका जताई जा रही है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये अभ्यास जून 2025 में ईरान के साथ हुए 12 दिवसीय युद्ध से प्राप्त ‘परिचालन अनुभवों’ पर आधारित थे। इसमें मौजूदा और उभरते खतरों के अनुरूप कई चुनौतीपूर्ण परिदृश्य शामिल किए गए। मंत्रालय ने कहा कि परीक्षणों की सफलता प्रणाली के तकनीकी और परिचालन उन्नयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। युद्ध के दौरान इस प्रणाली ने उच्च प्रदर्शन दिखाया और सफल अवरोधनों से कई जानें बचाईं तथा बड़े नुकसान को टाला। बता दें कि डेविड्स स्लिंग वर्ष 2017 से इजरायल में सक्रिय है और देश की बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली का मध्य स्तर बनाती है। इस ढांचे में कम दूरी के लिए आयरन डोम और आयरन बीम शामिल हैं, जबकि लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए शीर्ष स्तर पर एरो-3 प्रणाली तैनात है। डेविड्स स्लिंग के उन्नयन से एरो-3 पर दबाव कम होता है। एरो-3 को इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का मुकाबला करने के लिए विकसित किया है। जहां डेविड्स स्लिंग की एक मिसाइल दागने की लागत लगभग 10 लाख डॉलर है, वहीं एरो-3 के इस्तेमाल पर 25 लाख डॉलर से अधिक खर्च आ सकता है। हालांकि डेविड्स स्लिंग को मूल रूप से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया था, लेकिन रक्षा सूत्रों के अनुसार जून 2025 में ईरान के साथ संघर्ष के दौरान इसे तैनात किया गया और इसने लगभग 1500 किलोमीटर दूर से दागी गई कई मिसाइलों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया। इससे पहले इसका उपयोग मुख्य रूप से गाजा पट्टी और लेबनान से हमास तथा हिज़बुल्लाह द्वारा दागे गए मध्यम दूरी के रॉकेटों के खिलाफ किया जाता था। सेना के अनुसार, जून के संघर्ष के दौरान तेहरान की ओर से दागी गई लगभग 550 बैलिस्टिक मिसाइलों और 1000 से अधिक ड्रोनों में से करीब 85 प्रतिशत को सफलतापूर्वक मार गिराया गया।

छत्तीसगढ़ की 4 सेंट्रल जेलों को मिला आईएसओ गुणवत्ता प्रमाणन

रायपुर. छत्तीसगढ़ की जेल व्यवस्थाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। उप मुख्यमंत्री एवं जेल विभाग के प्रभारी मंत्री विजय शर्मा के निर्देशन में राज्य की जेलों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे है। इन्हीं प्रयासों का ही यह परिणाम है कि छत्तीसगढ़ की सेंट्रल जेल रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर एवं अम्बिकापुर को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानक आईएसओ 9001ः2015 का प्रमाणन प्राप्त हुआ है।  उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा द्वारा जेलों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्यप्रणाली स्थापित करने के उद्देश्य से आईएसओ सर्टिफिकेशन कराने की पहल की थी। यह प्रक्रिया पूर्ण कर राज्य की चार प्रमुख केंद्रीय जेलों को प्रमाणन प्राप्त हो गया है। इस प्रमाणन से जेल प्रशासन में कार्य प्रक्रियाओं में एकरूपता एवं पारदर्शिता, बंदी कल्याण और मानवाधिकार संरक्षण को बढ़ावा, जोखिम प्रबंधन और जवाबदेही में सुधार, जनविश्वास एवं संस्थागत विश्वास में वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को मजबूती मिलेगी। यह पहल राज्य की सुधारात्मक न्याय प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार का उद्देश्य जेलों को केवल निरुद्ध स्थान के रूप में नहीं, बल्कि सुधार एवं पुनर्वास केंद्र के रूप में विकसित करना है। 

बांग्लादेश चुनाव में तनाव का माहौल, कई बूथों पर हिंसक घटनाएं; महिला एजेंट्स ने लगाए उत्पीड़न के आरोप

ढाका  बांग्लादेश में गुरुवार को 13वें संसदीय चुनाव के लिए वोटिंग संपन्न हो गई है। कड़ी सुरक्षा और लोगों में भारी उत्साह के बीच 299 सीटों पर वोट डाले गए। हालांकि, वोटिंग के दौरान भारी हिंसा और पोलिंग बूथों पर महिला एजेंट्स के साथ बदतमीजी का भी मामला सामने आया है। देश भर के 42,659 पोलिंग बूथों पर सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक वोटिंग हुई। बांग्लादेशी मीडिया की ओर से जारी साझा जानकारी के अनुसार, शेरपुर-3 सीट पर एक उम्मीदवार की मौत के बाद चुनाव टाल दिया गया है। 299 सीटों पर कुल 127,298,522 वोटर वोट डालने के लिए उपयुक्त थे। इनमें से 64,620,077 पुरुष वोटर, 62,677,232 महिला वोटर और 1,213 थर्ड-जेंडर वोटर शामिल हैं। अगर कुल 300 सीटों की बात करें तो वोटरों की कुल संख्या 127,711,899 है। चुनाव आयोग की ओर से बांग्लादेशी मीडिया को बताया गया कि दोपहर दो बजे तक 48 फीसदी वोटिंग हुई। निर्दलीय उम्मीदवार तस्नीम जारा ने आरोप लगाया कि ढाका-9 चुनाव क्षेत्र में कई जगहों पर महिला पोलिंग एजेंट्स को परेशान किया जा रहा है और पोलिंग सेंटरों में घुसने से रोका जा रहा है। जारा ने खिलगांव मॉडल कॉलेज पोलिंग सेंटर का दौरा करने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनके पोलिंग एजेंट्स, खासकर महिलाओं को, कई सेंटरों में घुसने की कोशिश करते समय रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “हमारे पोलिंग एजेंट्स को अलग-अलग बहानों से पोलिंग सेंटरों में घुसने से रोका जा रहा है। उन्हें अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है, और महिला एजेंट्स को परेशान किया जा रहा है।” जारा ने आरोप लगाया कि पोलिंग बूथों के अधिकारी मनमाने नियम बनाकर रुकावटें पैदा कर रहे हैं। महिला एजेंट्स को अंदर जाने से रोका गया, सेंटर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया, या उन्हें अलग-अलग निर्देश दिए गए। बता दें कि इससे पहले भी बांग्लादेश की निर्दलीय महिला उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि उन्हें परेशानी हो रही है। महिलाओं को चरित्र हनन या धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, दो पोलिंग बूथ, गोपालगंज और मुंशीगंज में धमाके की जानकारी भी सामने आई।

DNA रिपोर्ट के आधार पर बंद किया केस, हाईकोर्ट बोला– लापरवाही बर्दाश्त नहीं

भोपाल मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दुष्कर्म मामले में सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस जीएस अहलूवालिया की एकलपीठ ने डीएनए रिपोर्ट में आरोपी के निर्दोष पाए जाने के बावजूद असली आरोपी की तलाश शुरू न करने पर पुलिस विभाग को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने डीजीपी से पूछा कि क्या उनके अधीनस्थ अधिकारियों को दोबारा प्रशिक्षण की जरूरत है या आम जनता ऐसे ही पुलिस की कानूनी जानकारी की कमी का खामियाजा भुगतती रहे। बार एंड बेंच में छपी खबर के मुताबिक, मामला बैतूल जिले का है। आरोपी को 10 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था और उसके खिलाफ चालान पेश किया जा चुका था। दिसंबर 2025 में आई डीएनए रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि आरोपी नाबालिग पीड़िता से जन्मे बच्चे का जैविक पिता नहीं है। इसके बावजूद पुलिस ने वास्तविक आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अदालत की टिप्पणी- पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षण की जरूरत 10 फरवरी को जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बैतूल के पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन से पूछा कि डीएनए रिपोर्ट के बाद आगे क्या कार्रवाई की गई। कोर्ट ने पाया कि एसपी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। आदेश में कहा गया कि यह स्थिति राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के प्रशिक्षण पर गंभीर सवाल खड़े करती है। डीएनए जांच में आरोपी को क्लीन चिट कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि दो अन्य दुष्कर्म मामलों में भी शुरुआती तौर पर गिरफ्तार किए गए आरोपी बाद में डीएनए जांच में निर्दोष पाए गए, लेकिन पुलिस ने समय रहते वास्तविक आरोपियों की तलाश में सक्रियता नहीं दिखाई। पीठ ने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस विभाग अपनी कार्यप्रणाली में सुधार को लेकर गंभीर नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने एसपी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई का आदेश नहीं दिया, बल्कि डीजीपी से यह विचार करने को कहा कि क्या विभाग को सक्षम और विधिक रूप से प्रशिक्षित अधिकारियों की आवश्यकता है? कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि आगे की जांच ट्रायल कोर्ट से अनुमति लेकर की जाए, क्योंकि चार्जशीट दाखिल होने के बाद आगे की जांच के लिए न्यायालय की अनुमति आवश्यक है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों में निर्धारित है। जमानत अर्जी खारिज कोर्ट ने कहा कि चूंकि बच्चा जीवित है, इसलिए सभी संभावित संदिग्धों के रक्त नमूने लेकर जैविक पिता की पहचान सुनिश्चित की जाए। जहां तक जमानत का सवाल है, कोर्ट ने आरोपी की याचिका खारिज कर दी। पीठ ने कहा कि केवल डीएनए रिपोर्ट के आधार पर पीड़िता के बयान को खारिज नहीं किया जा सकता। चूंकि अभी पीड़िता का साक्ष्य दर्ज नहीं हुआ है, इसलिए इस स्तर पर आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती। बता दें कि आरोपी की ओर से अधिवक्ता प्रदीप सिंह चौहान ने पैरवी की, जबकि राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता स्वाति जॉर्ज उपस्थित रहीं।

2.36 करोड़ रुपए से अधिक के कार्यों का हुआ भूमिपूजन और लोकार्पण

रायपुर. माता मावली मेले में विकास की सौगात       नारायणपुर में आयोजित ऐतिहासिक माता मावली मेले में छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप तथा राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री  टंकराम वर्मा शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने माता मावली की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों, विशेषकर जिलेवासियों को शुभकामनाएं दीं।      कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री  कश्यप ने कहा कि मावली माता के आशीर्वाद से बस्तर की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपराएं सदैव अक्षुण्ण रहें। उन्होंने कहा कि नारायणपुर का यह मेला सामाजिक समरसता, लोककला और परंपरा का जीवंत संगम है, जहां दूर-दूर से लोग पहुंचकर बस्तर की संस्कृति से रूबरू होते हैं। उन्होंने सभी को मेले में शामिल होकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने का आग्रह किया।        मंत्री द्वय ने मेले में लगे विभिन्न दुकानों एवं विभागीय स्टॉलों का अवलोकन किया तथा स्थानीय उत्पादों और पूजा सामग्री की खरीदारी भी की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करते हैं।        इस अवसर पर कुल 1 करोड़ 76 लाख 59 हजार रुपये के कार्यों का भूमिपूजन तथा 59 लाख 51 हजार रुपये के कार्यों का लोकार्पण किया गया। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप 10 प्राथमिक शाला भवनों के निर्माण हेतु भूमिपूजन किया गया, जिनकी स्वीकृत राशि 1 करोड़ 41 लाख 60 हजार रुपये है। इसके अलावा जनपद पंचायत ओरछा के ग्राम कुतुल एवं जाटलूर में दो-दो बाजार शेड निर्माण के लिए 34 लाख 99 हजार रुपये स्वीकृत किए गए।        जनपद पंचायत नारायणपुर अंतर्गत बागडोंगरी, पालकी और महिमागवाड़ी में 59 लाख 51 हजार रुपये की लागत से निर्मित खाद्यान्न भवनों का लोकार्पण किया गया। साथ ही नेलवाड़ और खोड़गांव में 100-100 मैट्रिक टन क्षमता के गोदामों का भी लोकार्पण किया गया।         कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम, नगरपालिका अध्यक्ष इंद्रप्रसाद बघेल, कलेक्टर नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet