LATEST NEWS

ऑनलाइन लेन-देन में धोखाधड़ी पर अब मुआवजा, RBI ने तय की 25,000 रुपये की सीमा

नई दिल्ली केंद्रीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने साइबर फ्रॉड के शिकार ग्राहकों के लिए बड़ी योजना बनाई है। अब ऐसे ग्राहकों को धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन के मामले में 25,000 रुपये तक का हर्जाना मिल सकेगा। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद जारी बयान में इसके बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कम मूल्य के धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन के मामलों में 25,000 रुपये तक का हर्जाना देने के लिए एक फ्रेमवर्क लाने का प्रस्ताव है। 50 हजार रुपये तक के फ्रॉड मामले शामिल इसमें 50 हजार रुपये या उससे कम की धोखाधड़ी के मामलों को शामिल किया जाएगा। आरबीआई गवर्नर ने बताया कि “बिना कोई सवाल पूछे” ग्राहकों को 85 प्रतिशत राशि (अधिकतम 25 हजार रुपये) वापस की जायेगी। धोखाधड़ी की राशि में से 15 प्रतिशत का नुकसान ग्राहक को उठाना होगा और 15 प्रतिशत का नुकसान संबंधित बैंक उठाएगा। शेष 70 प्रतिशत राशि आरबीआई देगा। हालांकि, किसी भी स्थिति में ग्राहक को 25,000 रुपये से अधिक का हर्जाना नहीं मिलेगा। एक बार ही ले सकेंगे लाभ आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट किया कि ग्राहक इस सुविधा का लाभ अपने जीवनकाल में सिर्फ एक बार उठा सकेंगे। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि ग्राहक एक बार की गलती से सीख लें।” एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने साफ किया कि भले ही ग्राहक ने खुद ही ठगों को ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) बताया हो, तब भी वे हर्जाना राशि पाने के हकदार होंगे। मल्होत्रा ने कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी में 50 हजार रुपये तक की राशि वाले मामले 65 प्रतिशत हैं, हालांकि मूल्य के हिसाब से उनका अनुपात काफी कम है। यह पहली बार है जब आरबीआई ने साइबर फ्रॉड मामले में पीड़ित को हर्जाने देने की पहल की है। RBI के डेटा के मुताबिक भारतीय बैंकों ने वित्त वर्ष 2024-25 में कार्ड और इंटरनेट-आधारित ट्रांजैक्शन से जुड़े धोखाधड़ी के 13,469 मामले दर्ज किए, जिससे 520 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। वहीं, 2023-24 में 29,080 धोखाधड़ी और 1,457 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। साइबर फ्रॉड की शिकायत सबसे पहले बैंक/पेमेंट ऐप को सूचित करें। इसके बाद 1930 पर कॉल करें। यह नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन का ऑफिशियल नंबर है। ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। इसके लिए वेबसाइट https://cybercrime.gov.in पर विजिट करें। यहां सभी डिटेल भरने के बाद Acknowledgement नंबर मिलेगा। इसे सेव करके रखना जरूरी है। इस नंबर को लेकर नजदीकी साइबर सेल/पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। आप शिकायत का स्टेटस cybercrime.gov.in पर ट्रैक कर सकते हैं।

बचपन में खरीदा डोमेन, 600 करोड़ में बेचा—10 साल की उम्र में किया कमाल

 नई दिल्ली 1993 में 10 साल के एक लड़के ने AI.com नाम की वेबसाइट खरीदी थी. तब यह सिर्फ एक आम इंटरनेट एड्रेस था. उस समय AI कोई ट्रेंड नहीं था. न सोशल मीडिया था, न चैटबॉट्स, न लोग रोज AI की बातें करते थे. उस वक्त इस डोमेन की कीमत कुछ सौ रुपये से ज्यादा नहीं थी. आज वही AI.com डोमेन करीब 70 मिलियन डॉलर में बिक चुका है. भारतीय रुपये में देखें तो यह रकम 600 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है. यह सिर्फ एक डोमेन की बिक्री नहीं है. यह बताता है कि इंटरनेट पर नाम की कीमत कैसे बदलती है. डोमेन खरीद फरोख्त की पूरी कहानी  जिस शख्स ने AI.com खरीदा था, उसका नाम अरस्यान इस्माइल है. वह मलेशिया का टेक एंटरप्रेन्योर हैं. 1993 में जब इंटरनेट नया-नया आया था, तब उन्होंने यह डोमेन सिर्फ शौक में रजिस्टर करा लिया था. उस वक्त किसी को अंदाजा नहीं था कि AI एक दिन इतना बड़ा ट्रेंड बनेगा. उस समय डोमेन खरीदने की फीस बहुत कम होती थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक अरस्यान इस्माइल ने AI.com बहुत ही मामूली कीमत पर लिया था. आज के पैसों में देखें तो कुछ सौ रुपये से ज्यादा नहीं. तब यह एक आम टेक-टर्म जैसा नाम था. बीच के सालों में AI.com कई बार लीज पर भी दिया गया. अलग-अलग कंपनियों ने इस डोमेन को कुछ समय के लिए इस्तेमाल किया. लेकिन डोमेन की असली मालकिनी अरस्यान के पास ही रही. 80 करोड़ में दुबारा हासिल किया डोमेन 2025 में एक दिलचस्प मोड़ आया. AI.com कुछ समय के लिए उनके कंट्रोल से बाहर चला गया था. रिपोर्ट्स में बताया गया कि डोमेन पर कंट्रोल वापस पाने के लिए अरस्यान को करीब 10 मिलियन डॉलर चुकाने पड़े. यानी करीब 80 करोड़ रुपये से ज्यादा. मतलब जिस डोमेन को उन्होंने कभी मामूली रकम में खरीदा था, उसी को वापस पाने के लिए करोड़ों खर्च करने पड़े. लेकिन तब तक AI पूरी दुनिया में ट्रेंड बन चुका था. उन्हें पता था कि यह नाम आगे चलकर और बड़ा बन सकता है. Crypto.com के सीईओ ने खरीदा डोमेन डोमेन वापस लेने के बाद उन्होंने इसे कुछ समय तक होल्ड किया. फिर 2026 में यह डोमेन Crypto.com के CEO को करीब 70 मिलियन डॉलर में बेच दिया गया. AI.com को अब Crypto.com के CEO ने खरीदा है. Crypto.com पहले से डिजिटल फाइनेंस की दुनिया में बड़ा नाम है. अब कंपनी AI की तरफ भी कदम बढ़ा रही है. माना जा रहा है कि AI.com को एक नए AI प्लेटफॉर्म या सर्विस के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा. पिछले दो साल में AI अचानक हर जगह दिखने लगा है. लोग AI से फोटो बना रहे हैं. वीडियो बना रहे हैं. ऑफिस का काम कर रहे हैं. AI अब सिर्फ टेक का टूल नहीं रहा. AI एक ब्रांड बन चुका है. इसी वजह से AI.com जैसे नाम की कीमत अचानक आसमान पर पहुंच गई. जो कंपनी AI से जुड़ी सर्विस बनाना चाहती है, उसके लिए ऐसा नाम बहुत काम का होता है. यूजर को भी ऐसा नाम देखकर भरोसा जल्दी होता है. यह डील यह भी दिखाती है कि आने वाले समय में इंटरनेट पर ब्रांडिंग कितनी अहम होने वाली है. आज जमीन और फ्लैट की कीमत बढ़ती है. वैसे ही अब डिजिटल नामों की कीमत बढ़ रही है. आज जो डोमेन आम लगते हैं, कल वही करोड़ों में बिक सकते हैं. AI.com की कहानी सिर्फ किस्मत की कहानी नहीं है. यह आने वाले डिजिटल ट्रेंड की झलक भी है.  

ऑस्ट्रेलिया सावधान! जिम्बाब्वे कर सकता है बड़ा उलटफेर

कोलंबो ग्रुप बी में सबकी नजरें अब क्लासिक डेविड बनाम गोलियथ मुकाबले पर टिकी हैं, जब शुक्रवार को यहां आर. प्रेमदासा इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में टी20 वर्ल्ड कप 2026 में जिम्बाब्वे का मुकाबला टूर्नामेंट की फेवरेट टीम ऑस्ट्रेलिया से होगा। ऑस्ट्रेलिया इस मुकाबले में जीत की जबरदस्त संभावना और दुनिया भर में दबदबे के साथ उतर रहा है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिम्बाब्वे इस एडिशन का पहला बड़ा उलटफेर कर सकता है? सिकंदर रजा की टीम ने चुपचाप मोमेंटम बना लिया है। ओमान पर उनकी आठ विकेट की बड़ी जीत ने गेंद से डिसिप्लिन और बल्ले से धैर्य दिखाया। लेकिन शुक्रवार का मुकाबला एक बिल्कुल अलग चुनौती पेश करता है – ऑस्ट्रेलियाई टीम का सामना करना जिसमें पावर-हिटर्स, अच्छे ऑलराउंडर्स और कोलंबो के हालात के हिसाब से एक मजबूत स्पिन अटैक है। जिम्बाब्वे की उम्मीदें निडर रवैये पर टिकी होंगी। ब्रायन बेनेट, जिन्होंने पिछले गेम में 48 रन बनाए, पिछले साल उनके सबसे लगातार परफॉर्मर रहे हैं और टॉप पर अहम होंगे। अगर बेनेट और तदीवानाशे मारुमानी नई गेंद को संभालकर एक मजबूत प्लेटफॉर्म तैयार कर पाते हैं, तो ब्रेंडन टेलर, रज़ा और रयान बर्ल की अनुभवी तिकड़ी बीच के ओवरों में स्कोरिंग को आगे बढ़ा सकती है। असली मौका गेंद के साथ हो सकता है। ब्लेसिंग मुजराबानी और रिचर्ड नगारवा ने अपने पिछले मैच में छह विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया था। एक ऐसी सतह पर जिससे शुरू में स्विंग और बाद में टर्न मिलने की उम्मीद है, ज़िम्बाब्वे का पेस-स्पिन कॉम्बिनेशन ऑस्ट्रेलिया के आक्रामक टॉप ऑर्डर की परीक्षा ले सकता है। आयरलैंड के खिलाफ थोड़ी कमज़ोरी दिखाने वाले मिडिल ऑर्डर को बेनकाब करने के लिए शुरुआती ब्रेकथ्रू जरूरी होंगे। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया अभी भी मजबूत है। कप्तान ट्रैविस हेड लीडर के तौर पर पहली जीत हासिल करने के बाद आगे से लीड करने के लिए बेताब होंगे। जोश इंग्लिस, ग्लेन मैक्सवेल, मार्कस स्टोइनिस और कैमरन ग्रीन की मौजूदगी पूर्व चैंपियन को ऐसी गहराई देती है जिसका मुकाबला कुछ ही टीमें कर सकती हैं। एडम जम्पा और मैथ्यू कुहनेमन की उनकी स्पिन जोड़ी भी कोलंबो की धीमी होती पिच का फ़ायदा उठा सकती है। प्रेमदासा की पिच ने हमेशा लक्ष्य का पीछा करने वाली टीमों को फ़ायदा पहुँचाया है, पिछले दस में से आठ मैच बाद में बैटिंग करने वाली टीम ने जीते हैं। मैच के दिन बादल छाए रहने का अनुमान है, जिससे गेंदबाजों को शुरुआत में और मदद मिल सकती है, जिससे मुकाबले में एक और अप्रत्याशित बात जुड़ जाएगी। ज़िम्बाब्वे के लिए, यह सिर्फ़ ग्रुप-स्टेज का मैच नहीं है। यह सोच को बदलने और खुद को सिर्फ़ हिस्सा लेने वाले के बजाय असली दावेदार के तौर पर पेश करने का मौका है। उलटफेर टी20 वर्ल्ड कप की धड़कन रहे हैं, और सबसे छोटे फ़ॉर्मेट में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होती। कागज़ पर ऑस्ट्रेलिया शायद बहुत ज़्यादा पसंदीदा हो, लेकिन अगर ज़िम्बाब्वे खास मौकों का फ़ायदा उठाता है – खासकर पावरप्ले और डेथ ओवरों में – तो कहानी एक बड़ा मोड़ ले सकती है। मंच तैयार है। पसंदीदा टीमें पक्की हैं। लेकिन टी20 क्रिकेट में, भरोसा भी नाम जितना ही ताकतवर हो सकता है।  

सोशल मीडिया पर AI कंटेंट का सफाया? सरकार ने जारी किया नया कड़ा नियम

 नई दिल्ली सरकार ने AI से बने कंटेंट को लेकर नए नियम लागू कर दिए हैं. अब सोशल मीडिया पर जो भी फोटो, वीडियो या ऑडियो AI टूल्स से बनेगा, उस पर साफ लेबल दिखाना जरूरी होगा. इसके लिए कंपनियों को 20 फरवरी तक का डेडलाइन मिला है.  प्लेटफॉर्म्स को यह भी पक्का करना होगा कि यूज़र सच बता रहा है या नहीं कि कंटेंट AI से बना है. भ्रामक या गैरकानूनी AI कंटेंट को तीन घंटे के अंदर हटाने का नियम भी लाया गया है. मतलब डीपफेक और फेक वीडियो पर अब ढील नहीं चलेगी. ये बदलाव 20 फरवरी 2026 से लागू होंगे. सोशल मीडिया कंपनियों के लिए असली चुनौती इन नियमों के बाद इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स का काम करने का तरीका बदलेगा. अभी तक AI कंटेंट अक्सर बिना पहचान के घूमता रहा है. कई बार यूज़र को पता भी नहीं चलता कि वीडियो या फोटो असली है या मशीन से बना है. अब अपलोड के वक्त ही यह जानकारी लेनी होगी कि उस वीडियो में कितना AI यूज हुआ है. यहां अब सिर्फ यूज़र की बात पर भरोसा नहीं चलेगा. प्लेटफॉर्म्स को टेक्निकल तरीके से भी चेक करना होगा. दिक्कत यह है कि हाई क्वालिटी डीपफेक आज इतने रियल लगते हैं कि सिस्टम भी कन्फ्यूज हो जाता है. ऊपर से तीन घंटे में कंटेंट हटाने की डेडलाइन बहुत टाइट है. इतने बड़े प्लेटफॉर्म पर हर केस में इतनी तेजी से एक्शन लेना आसान नहीं होगा. AI कंटेंट क्रिएटर्स के लिए क्या मुश्किलें बढ़ेंगी इन नियमों का सबसे सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो AI से रील्स, फेसस्वैप वीडियो, फेक वॉइस या जनरेटेड क्लिप्स बनाकर ग्रो कर रहे थे. अब कंटेंट पर AI का लेबल दिखेगा. मतलब जो लोग जानबूझकर रियल जैसा दिखाकर वीडियो वायरल करते थे, उनकी ट्रिक पकड़ी जाएगी. इससे क्लिकबेट और शॉक वैल्यू कम होगी. अगर नोटिस के बावजूद कोई कंटेंट क्रिएटर इसे इग्नोर करेगा तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स उन्हें हमेशा के लिए बैन कर सकती हैं. क्योंकि सरकार की तरफ से सख्त हिदायत मिल चुकी है.  AI क्रिएटर्स को अब यह भी ध्यान रखना होगा कि किसी असली इंसान का चेहरा या आवाज बिना परमिशन यूज न करें. आज जो मजाक या ट्रेंड लग रहा है, वही कल कानूनी परेशानी बन सकता है. अगर प्लेटफॉर्म ने पकड़ लिया कि आपने जानबूझकर AI कंटेंट को छुपाया है, तो अकाउंट पर स्ट्राइक या बैन का रिस्क भी रहेगा. यानी अब AI से कंटेंट बनाना सिर्फ क्रिएटिव काम नहीं रहेगा. उसमें जिम्मेदारी भी जुड़ जाएगी. यूज़र का एक्सपीरियंस कैसे बदलेगा नए नियम यूज़र की आदतें भी बदलेंगे. अब फीड में दिखने वाले वीडियो या फोटो पर लेबल देखना पड़ेगा. अगर AI लिखा है, तो समझना होगा कि यह असली घटना या असली व्यक्ति का वीडियो नहीं है. इससे लोग थोड़ा रुककर सोचेंगे. अभी तक बहुत से लोग डीपफेक को सच मानकर शेयर कर देते थे. अब शायद वह आदत बदले. हालांकि एक खतरा यह भी है कि अगर हर दूसरी पोस्ट पर AI टैग दिखने लगे, तो लोग उसे इग्नोर करना शुरू कर दें. तब लेबल का असर धीरे धीरे कम हो सकता है. प्लेटफॉर्म्स के बिजनेस पर असर यह बदलाव सिर्फ टेक्निकल नहीं है. यह बिजनेस का भी सवाल है. AI कंटेंट आज सोशल मीडिया की ग्रोथ का बड़ा हिस्सा बन चुका है. रील्स और शॉर्ट्स में AI ट्रेंड्स खूब चलते हैं. अब अगर हर AI कंटेंट पर सख्त लेबल और चेकिंग होगी, तो एंगेजमेंट पैटर्न बदल सकता है. कुछ यूज़र AI कंटेंट से दूरी बना सकते हैं. वहीं ब्रांड्स और एडवर्टाइज़र ज्यादा सेफ फील करेंगे क्योंकि फेक और भ्रामक कंटेंट पर कंट्रोल बढ़ेगा. प्लेटफॉर्म्स को अब ग्रोथ और रेगुलेशन के बीच बैलेंस बनाना होगा. आगे क्या बदलेगा आने वाले वक्त में सोशल मीडिया पर कुछ भी चलेगा वाला माहौल खत्म होगा. डीपफेक, फेक डॉक्यूमेंट और बिना सहमति वाली तस्वीरों पर पहले जैसी ढील नहीं मिलेगी. सरकार साफ कह चुकी है कि प्लेटफॉर्म्स को जिम्मेदारी लेनी होगी. इसका मतलब ज्यादा मॉडरेशन टीम, बेहतर टेक और भारत के हिसाब से अलग सिस्टम बनाना पड़ेगा. कुल मिलाकर, नए AI कंटेंट नियम सोशल मीडिया को ज्यादा जिम्मेदार बनाने की कोशिश हैं. यह बदलाव एकदम परफेक्ट नहीं होगा. शुरुआत में टेक्निकल दिक्कतें आएंगी. गलतियां भी होंगी. लेकिन लंबे वक्त में सोशल मीडिया का माहौल बदलेगा. कंटेंट बनाना अब सिर्फ क्रिएटिविटी का खेल नहीं रहेगा. उसमें जवाबदेही भी जुड़ जाएगी. यही इस पूरे बदलाव की असली दिशा है. रास्ता आसान नहीं है भले ही सरकार ने डेडलाइन दे दी है, लेकिन टेक्निकल तौर पर बात करें तो ये तुरंत इंप्लिमेंट करना आसान नहीं है. क्योंकि लेबल लगाए हुए वीडियो को डाउनलोड करके फिर से अपलोड किया जा सकता है. AI डिटेक्शन सिस्टम भी पूरी तरह ठीक से काम नहीं करते हैं. कई बार वो असली को नकली और नकली को असली समझने की भी गलती कर रहे हैं.  

50 साल की तलाश खत्म, कटनी में मिली सोने की खदान, MP में मार्च से खनन की तैयारी

कटनी  मध्यप्रदेश के कटनी जिले की धरती अब सोना-चांदी उगलेगी. दरअसल, कटनी जिले के इमलिया गांव की पहचान अब जल्द ही सुनहरी होने जा रही है, क्योंकि इस गांव में साढ़े 6 हेक्टेयर धरती में खनन कर करीब 7 लाख टन सोना-चांदी सहित मिनरल्स निकाले जाएंगे.यह काम मुंबई की निजी कंपनी प्रोस्पेक्ट रिसोर्स मिनिरल्स प्राइवेट लिमिटेड स्लीमनाबाद करेगी. इसके लिए जिला प्रशासन के साथ 50 साल के लिए करार किया गया है, जहां कटनी जिले को कंपनी से टैक्स के रूप में करीब 100 करोड रुपए से अधिक का राजस्व मिलेगा. करीब 50 साल की लंबी खोज और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बाद, जिले की ढीमरखेड़ा तहसील के इमलिया गांव में सोने का खनन शुरू होने की तैयारी अंतिम चरण में है। अनुमान है कि मार्च के दूसरे पखवाड़े से खनन का काम शुरू हो जाएगा। एक साल की तेज प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद स्वर्ण खनन की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, मार्च से खनन कार्य शुरू होने का अनुमान है, जो मध्यप्रदेश के खनिज इतिहास में नया अध्याय लिखेगा, 121 करोड़ की ऐतिहासिक बोली ने इमलिया को राष्ट्रीय मानचित्र पर ला खड़ा किया है। अब कटनी सिर्फ जिला नहीं, स्वर्ण नगरी बनने की दहलीज पर खड़ी है…। जिले के इतिहास में एक ऐसी उपलब्धि जुडऩे जा रही है, जो न केवल जिले बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की पहचान बदल देगी। ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम इमलिया में स्वर्ण खनन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं और मार्च माह के दूसरे पखवाड़े से खनन कार्य शुरू होने का अनुमान है। यह मध्यप्रदेश की पहली सक्रिय स्वर्ण खदान होगी, जिससे राज्य को राष्ट्रीय खनिज मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। ई-नीलामी प्रक्रिया के तहत मुंबई की कंपनी प्रॉस्पेक्ट रिसोर्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड खनन कंपनी ने 121 करोड़ रुपए की ऊंची बोली लगाकर इमलिया गोल्ड ब्लॉक की खनन लीज हासिल की। कंपनी और कलेक्टर आशीष मिवारी के बीच खनन अनुबंध (एग्रीमेंट) पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते के साथ ही जिले में विकास, निवेश और रोजगार की संभावनाओं के नए द्वार खुल गए हैं। यह परियोजना न केवल कटनी को ‘स्वर्ण नगरी’ के रूप में एक नई पहचान देगी, बल्कि यह मध्य प्रदेश की पहली सक्रिय स्वर्ण खदान भी होगी। इस ऐतिहासिक कदम से राज्य का नाम देश के खनिज मानचित्र पर प्रमुखता से अंकित हो गया है। 121 करोड़ की ऐतिहासिक बोली इस स्वर्ण खदान के लिए हुई ई-नीलामी प्रक्रिया में मुंबई की कंपनी ‘प्रॉस्पेक्ट रिसोर्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड’ ने सबसे ऊंची बोली लगाई। कंपनी ने 121 करोड़ रुपए की बोली के साथ इमलिया गोल्ड ब्लॉक की खनन लीज हासिल की। इसके बाद, कंपनी और कटनी के कलेक्टर आशीष तिवारी के बीच खनन अनुबंध (एग्रीमेंट) पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे खनन का रास्ता आधिकारिक तौर पर साफ हो गया। 50 साल की खोज का अंत इमलिया में सोने की मौजूदगी की खोज पिछले पांच दशकों से चल रही थी। बीते एक साल में प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी लाई गई, जिसके परिणामस्वरूप यह परियोजना अब हकीकत बनने की दहलीज पर है। इस समझौते ने जिले में बड़े निवेश, विकास और रोजगार की नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। बदलेगी जिले की पहचान अब तक कटनी की पहचान चूना पत्थर और संगमरमर जैसे खनिजों से होती थी, लेकिन अब यह सोने की चमक से भी जाना जाएगा। इस परियोजना से न केवल राज्य सरकार को राजस्व का लाभ होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। यह मध्यप्रदेश के खनिज इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री ने दिया था बड़ा संकेत इस परियोजना को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी लगातार सक्रियता रही। 18 सितंबर को बड़वारा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंच से कटनी को कनकपुरी की संज्ञा देते हुए इमलिया गांव में स्वर्ण भंडार की सार्वजनिक जानकारी दी थी। इसके बाद नवरात्रि के पहले दिन ही खनन से जुड़ा एग्रीमेंट होना, इस परियोजना की प्राथमिकता और गंभीरता को दर्शाता है। यह है सोना व उत्पादन का स्तर खनन विभाग की तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार इमलिया गोल्ड ब्लॉक से प्रतिवर्ष लगभग 33,214 टन अयस्क उत्पादन का अनुमान है। यहां कुल स्वर्ण खनिज भंडार 3,57,789 टन बताया गया है, जिसमें से 3,35,059 टन खानयोग्य है। तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, प्रति टन अयस्क से औसतन 1.13 ग्राम सोना निकलने की संभावना है। इसके अलावा तांबा 2,71,632 टन, लेड-जिंक 3,88,726 टन, चांदी 3,86,468 टन का अनुमान है। रोजगार और विकास की नई उम्मीद गांव और आसपास के क्षेत्र में इस परियोजना को लेकर उत्साह का माहौल है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि खनन शुरू होने से स्थानीय युवाओं को रोजगार, बेहतर सडक़, बिजली, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी। इमलिया की पहचान अब सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जानी जाएगी। अब तक देश में बड़े पैमाने पर स्वर्ण खनन कर्नाटक के कोलार और हत्ती क्षेत्रों तक सीमित था, लेकिन इमलिया खदान के शुरू होते ही मध्यप्रदेश भी स्वर्ण उत्पादक राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा। मार्च से शुरू होने वाला यह खनन न केवल कटनी को स्वर्ण नगरी के रूप में स्थापित करेगा, बल्कि प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास को भी नई ऊंचाई देगा।

MP में मार्च में सरकारी छुट्टियों का दौर, स्कूल-ऑफिस और बैंक बंद रहेंगे कुल 14 दिन

भोपाल  एमपी में रहने वाले लोगों के लिए मार्च का महीना छुट्टियों से भरा होने वाला है। अगले महीने सरकारी कर्मचारियों को कई सारी छुट्टियां मिलने वाली हैं। बता दें कि आने वाले दिनों में आप परिवार, दोस्तों के साथ क्वालिटी टाइम बिता सकते है। मार्च के महीने में 6 छुट्टियां मिलने वाली है। इन छुट्टियों को ध्यान में रखते हुए यात्रा की योजना बनाई जा सकती है। जानें कब-कब रहेगी छुट्टी जानकारी के लिए बता दें कि आने वाले मार्च के महीने में 03, 19, 20, 21, 27 और 31 मार्च को सरकारी छुट्टी रहेगी। मध्यप्रदेश के सरकारी कलेंडर 2026 के मुताबिक 03 मार्च को होली, 19 मार्च को गुड़ी पड़वा, 20 मार्च चैती चांद, 21 मार्च ईद-उल-फित्र, 27 मार्च को रामनवमी, 31 मार्च को महावीर जयन्ती की छुट्टी रहेगी। इस दौरान सभी बैंक, स्कूल, ऑफिस बंद रहेंगे। मार्च में 14 दिन बंद रहेंगे ऑफिस सबसे ज्यादा मार्च माह में 14 दिन ऑफिस बंद रहेंगे और इस माह 17 दिन ही काम होगा। क्योंकि मार्च में शनिवार-रविवार की नौ छुट्टियों के अलावा छह त्यौहारों की छुट्टियां हैं, हालांकि इनमें से एक छुट्टी शनिवार में शामिल है। इससे 14 दिन ऑफिसों में ताला रहेगा। वहीं फरवरी व जुलाई माह में शनिवार व रविवार के अलावा कोई अन्य छुट्टियां नहीं हैं, इससे जुलाई माह में सबसे ज्यादा 23 दिन ऑफिस खुले रहेंगे। इस साल एक छुट्टी अधिक साल 2026 में सरकारी कर्मचारियों को 2025 की तुलना में एक सार्वजनिक अवकाश अधिक मिलेगा। इस बार गणेश चतुर्थी को सार्वजनिक अवकाश की सूची में जोड़ा गया है। 14 सितंबर को पड़ने वाली इस छुट्टी के शामिल होने से कुल सार्वजनिक अवकाशों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। इससे त्योहारों के दौरान कर्मचारियों को थोड़ी राहत जरूर मिलेगी।

जयपुर तैयार, 28 फरवरी को होगा महामूर्ख सम्मेलन, ठहाकों से गूंजेगा पूरा शहर

जयपुर.  फरवरी की हल्की ठंडक के बीच 28 तारीख को मानसरोवर का दीप स्मृति ऑडिटोरियम कुछ अलग ही रंग में नजर आएगा। यहां न कोई गंभीर भाषण होगा, न सियासी बहस… बल्कि मंच सजेगा ठहाकों, तंज और व्यंग्य की धार से। मौका होगा तरुण समाज (गुलाबी) के तत्वावधान में आयोजित 50वें महामूर्ख सम्मेलन का। जैसे-जैसे तारीख करीब आ रही है, शहर में उत्सुकता बढ़ती जा रही है—आखिर इस बार हंसी का बादशाह कौन बनेगा? कौन अपनी चुटीली बातों से दर्शकों को लोटपोट कर देगा? सम्मेलन में देशभर से हास्य और व्यंग्य के दिग्गज जुटेंगे। अजमेर के रासबिहारी गौड़ से लेकर बारां के सुरेन्द्र यादवेन्द्र, मध्यप्रदेश के संदीप शर्मा और नाथद्वारा के लोकेश महाकाली तक—हर नाम अपने साथ हंसी का तूफान लाएगा। गुरुग्राम के अशोक बत्रा, दिल्ली की बलजीत कौर, शक्करगढ़ के राजकुमार बादल और अलवर के राजेंद्र खंडेलवाल भी मंच पर रंग जमाएंगे। कविताओं के तीर चलेंगे, व्यंग्य के वार होंगे और दर्शक ठहाकों में डूब जाएंगे। यह सिर्फ सम्मेलन नहीं, बल्कि हंसी का ऐसा उत्सव होगा, जहां ‘मूर्खता’ ही सबसे बड़ा सम्मान बनेगी।

सिंहस्थ मद से इंदौर को नहीं मिली नई सौगात, पहले सड़कों पर खर्च हो चुका धन

इंदौर  उज्जैन में ढाई साल बाद लगने वाले सिंहस्थ मेले की तैयारियां जोरों पर है। हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बैठक लेकर अफसरों को तय सयमसीमा में काम करने के निर्देश दिए। 25 से ज्यादा विभागों को अलग-अलग निर्माणों की जिम्मेदारी दी गई है। प्रदेश के बजट में भी सिंहस्थ मद में राशि बढ़ाकर रखी जाएगी, लेकिन इस मद से इंदौर में अभी तक कोई बड़ा काम नही हुआ है, जबकि पिछले दो सिंहस्थ मेलों को दौरान इस मद में इंदौर में भी करोड़ों काम हुए,क्योकि इंदौर उज्जैन का निकटवर्ती शहर है और इंदौर से होकर ही ज्यादातर भक्त उज्जैन जाते है। सरकार का फोकस उज्जैन की कनेक्टिविटी और शिप्रा नदी के शुद्धिकरण पर है। अफसरों का अनुमान है कि सिंहस्थ मेले मेें पंद्रह करोड़ के करीब लोग सकते है, उसके हिसाब से ही घाटों के विस्तार, मेला क्षेत्र के दायरे के प्रोजेक्ट डिजाइन किए गए है। शाही स्नान के दौरान डेढ़ करोड़ से अधिक भक्तों के आने का अनुमान भी जताया जा रहा है। इंदौर-उज्जैन छह लेन का काम चल रहा है। इसके अलावा इंदौर-उज्जैन फोरलेन का काम भी अब जल्दी ही शुरू होगा, लेकिन इंदौर शहर के लिए अलग से कोई प्रोजेक्ट सिंहस्थ मद में मंजूर नहीं हुआ है।  पिछले सिंहस्थ में बनी थी एमआर-4 सड़क पिछले सिंहस्थ मेले के समय इंदौर विकास प्राधिकरण को 30 करोड़ रुपये सिंहस्थ मद में मिले थे। यह राशि एमआर-4 के निर्माण पर खर्च की गई थी। इसे लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन से जोड़ा गया था। वर्ष 2004 के सिंहस्थ के समय रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के आसपास के अतिक्रमण हटाकर रोड चौड़ी की गई थी,लेकिन इस साल एमआर-12 सड़क इंदौर विकास प्राधिकरण अपने खर्च पर बना रहा है। इसके अलावा कुर्मेडी में बस स्टैंड बनकर तैयार हो चुका है। इसका निर्माण भी प्राधिकरण ने किया है।    

धीरेंद्र शास्त्री बोले, धर्म की रक्षा के लिए मठों से सक्रिय होना होगा, माला और भाला साथ रखना जरूरी

छतरपुर  बागेश्वर धाम में 301 कन्या विवाह महोत्सव के दौरान  सवा लाख हनुमान चालीसा पाठ किया जा रहा है। इस दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि सीताराम-सीताराम करने भर से धर्म नहीं बचेगा, बल्कि माला और भाला रखना होगा।  उन्होंने कहा- 12 देशों के बाद अब अमेरिका में भी बागेश्वर धाम का सुंदरकांड मंडल बनेगा। इस साल यूरोप के 8 देशों में भी बनाएंगे। सुंदर कांड मंडल बनाने के बाद हम शस्त्र और शास्त्र का भी प्रशिक्षण देंगे। बेटियों को जूडो कराटे सिखाएंगे। दाढ़ी तब बनाएंगे जब बेटियों का विवाह हो जाएगा धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- हम दाढ़ी तब बनाएंगे जब बेटियों का विवाह हो जाएगा। हम एक जाप कर रहे हैं। एक टाइम फलाहार और दूसरे टाइम दवा कर खा रहे हैं। बेटियों का विवाह बहुत ही पुण्य का काम है। हमारी समिति और शिष्यमंडल ने ये जिम्मेदारी उठाई है। यूपी के मऊ से भी पाठ के लिए 300 सदस्य पहुंचे हैं हनुमान चालीसा पाठ के लिए उत्तर प्रदेश के मऊ से श्री हनुमत कृपा सेवा समिति के 300 सदस्य पहुंचे हैं। समिति के सदस्यों ने बताया कि 7100 सदस्यों की ओर से 21 बार पाठ होना है। इसमें राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के संयोजक मोहम्मद फैज खान भी शामिल हैं। 15 फरवरी को सात फेरे, बारात और विदाई होगी शुक्रवार से मेहंदी और हल्दी रस्म होना है। दूसरे दिन संगीत होगा। 15 फरवरी को सात फेरे, बारात और विदाई होगी। इससे पहले, सुबह 8 बजे से 11 बजे तक सुंदर कांड पाठ किया गया था। दोपहर 12 बजे से सवा लाख हनुमान चालीसा का पाठ किया जा रहा है। पाठ से पहले पूजन किया गया। शाम को भागवत कथा होगी और रात में हवन किया जाएगा। सेवादार कमल अवस्थी ने बताया कि ऑनलाइन हवन में करीब 5 लाख लोगों के जुड़ने की उम्मीद है। कल मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव मंडप कार्यक्रम में बेटियों को आशीर्वाद देने आएंगे।

मधुर भंडारकर की नई फिल्म में मौनी रॉय, महक के रूप में करेंगी धमाल; शूटिंग हुई खत्म

मुंबई   अभिनेत्री मौनी रॉय निर्देशक मधुर भंडारकर की आगामी फिल्म ‘द वाइव्स’ में नजर आएंगी। इस फिल्म की शूटिंग हाल ही में पूरी हो गई है। बुधवार को मौनी रॉय ने इंस्टाग्राम के जरिए इस बात की जानकारी दी। फिल्म में मौनी रॉय ‘महक’ नाम का किरदार निभा रही हैं। अभिनेत्री ने बताया कि उन्होंने फिल्म की शूटिंग पूरी कर ली है और निर्देशक मधुर भंडारकर के साथ काम करना उनकी बकेट लिस्ट का एक अहम हिस्सा था। अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पर फिल्म की बीटीएस तस्वीरें शेयर कीं। इसमें मौनी के साथ-साथ फिल्म के बाकी कलाकार और मधुर भंडारकर भी नजर आ रहे हैं। मौनी ने लिखा, “शानदार फिल्म ‘द वाइव्स’ की मैंने शूटिंग पूरी कर ली है। यह मेरी जिंदगी की सबसे पसंदीदा फिल्मों में से एक बनने वाली है। मधुर भंडारकर सर का बहुत-बहुत धन्यवाद, जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया और मुझे यह किरदार दिया। आपके साथ काम करना मेरी बकेट लिस्ट का अहम हिस्सा था।” इसी के साथ ही मौनी ने अपने सह-कलाकारों की भी तारीफ की। उन्होंने लिखा, “मेरे शानदार को-स्टार्स का भी शुक्रिया, जो बहुत दयालु, प्यारे और सहयोगी रहे। फिल्म जल्द ही आपके नजदीकी सिनेमाघरों में रिलीज होगी।” निर्माता-निर्देशक मधुर भंडारकर आगामी फिल्म ‘द वाइव्स’ के जरिए सेलेब्स की पत्नियों की कहानी को पर्दे पर लेकर आ रहे हैं। फिल्म में बॉलीवुड की महिलाओं के ग्लैमर के पीछे छिपी जिंदगी से जुड़ी कहानी को दिखाया जाएगा। इसमें मौनी के अलावा, सोनाली कुलकर्णी, रेजिना कैसंड्रा, राहुल भट्ट, सौरभ सचदेवा, अर्जन बाजवा और फ्रेडी दारूवाला जैसे कलाकार भी नजर आएंगे। इसके अलावा, फिल्म में अन्य कलाकार भी नजर आएंगे, लेकिन अभी उनके बारे में जानकारी सामने नहीं आई है। मेकर्स ने रिलीज की तारीख अनाउंस नहीं की है। इसके अलावा, मौनी आगामी क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज ‘अब होगा हिसाब’ में नजर आएंगी। इस सीरीज में मौनी रॉय, शाहीर शेख और निमृत कौर अहलूवालिया भी मुख्य भूमिकाओं में हैं। हालांकि, मेकर्स ने सीरीज के रिलीज डेट की घोषणा अभी तक नहीं की।

इंदौर का लालबाग पैलेस लौट रहा आकर्षक रूप में, अगले हफ्ते जनता के लिए खुलेंगे दरवाजे

इंदौर  इंदौर के ऐतिहासिक लालबाग पैलेस का दरबार हॉल नए रूप में पर्यटकों के सामने आने के लिए तैयार है। करीब दो महीने तक चले संरक्षण और सौंदर्यीकरण कार्य के बाद अगले हफ्ते से इसे पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। फिलहाल काम के चलते दरबार हॉल को पर्यटकों के लिए बंद रखा गया था।  आईजीएनसीए ने संभाली संरक्षण की जिम्मेदारी लालबाग पैलेस के भीतर संरक्षण और फिनिशिंग का कार्य दिल्ली की इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के विशेषज्ञों द्वारा किया गया। पुराने एंटीक्स के संरक्षण के साथ दरबार हॉल के मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए सुधार कार्य किए गए। नवंबर में फिनिशिंग और मरम्मत कार्य के चलते इसे बंद किया गया था। पुराने वैभव के साथ लौट रही शाही चमक आईजीएनसीए की टीम ने दरबार हॉल को उसके मूल स्वरूप में ही नई चमक दी है। यहां किए गए स्टुको वर्क को पॉलिश और सफाई के साथ रीस्टोर किया गया। इसके लिए बड्स, रूई और छोटे ब्रशों की मदद से बेहद बारीकी से काम किया गया। छत पर लगे पानी के दाग भी साफ किए गए हैं और फॉल सीलिंग के कुछ हिस्सों में सुधार किया गया है। प्राकृतिक रंगों से हुआ पुनरुद्धार लालबाग के निर्माण के समय जिन रंगों का उपयोग किया गया था, उन्हीं रंगों को विशेषज्ञों की मौजूदगी में दोबारा लगाया गया है। इसका उद्देश्य लालबाग के ऐतिहासिक और शाही वैभव को यथावत बनाए रखना है, ताकि पर्यटक उसी पुराने दौर की भव्यता का अनुभव कर सकें। सेंट्रल म्यूजियम का भी हो रहा विकास लालबाग परिसर स्थित सेंट्रल म्यूजियम में भी विकास कार्य जारी हैं। सिंहस्थ से पहले यहां कई सुविधाओं का विस्तार किया जाना है। बाउंड्रीवाल का करीब 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। शेष कार्य स्टोन लगने और पॉलिशिंग के बाद पूरा किया जाएगा। आज कुछ हिस्सों से प्राचीन मूर्तियों को शिफ्ट किया जाएगा, जिसके बाद कैफेटेरिया, नए टिकट काउंटर और क्लॉक रूम का निर्माण कार्य शुरू होगा। आउटर गार्डन और कन्वेंशन सेंटर पर काम जारी लालबाग के बाहरी हिस्से और कन्वेंशन सेंटर का कार्य बीते वर्ष जून से मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा किया जा रहा है। यह कार्य सिंहस्थ से पहले पूरा किया जाना है। यहां आउटर गार्डन, फव्वारे, देवी अहिल्याबाई सेंटर फॉर सेल्फ डिफेंस, साइकिलिंग और वॉकिंग ट्रैक विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही पर्यटकों की रुचि बढ़ाने के लिए ओपन थिएटर का प्रस्ताव भी है। दरबार हॉल की ऐतिहासिक विशेषताएं लालबाग पैलेस का दरबार हॉल, जिसे दीवान-ए-आम भी कहा जाता है, इंदौर की शाही विरासत का प्रतीक है। इसका इंटीरियर रोकोको शैली से प्रेरित है और इसमें इटली से आयातित सफेद व रंगीन संगमरमर का उपयोग किया गया है। हॉल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि दिन के समय बिना बिजली के भी पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी मिलती है। इसकी छतों पर ग्रीक पौराणिक कथाओं के दृश्य चित्रित हैं। प्लास्टर ऑफ पेरिस पर की गई सुनहरी पॉलिश इसे शाही रूप देती है। यूरोप से मंगवाए गए भव्य क्रिस्टल झूमर, बेल्जियम के रंगीन कांच से बनी खिड़कियां और दरवाजे, तथा जॉर्जियन और रीजेंसी शैली का फर्नीचर इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं। दीवारों और कांच के पैनल्स पर होलकर राज्य का आदर्श वाक्य ‘जो प्रयास करता है, वही सफल होता है’ भी अंकित है।

महाशिवरात्रि 2026: उज्जैन महाकाल में श्रद्धालुओं का मेला, पुलिस ने सुरक्षा कड़े की

उज्जैन मध्यप्रदेश के उज्जैन में महाशिवरात्रि पर दर्शन व्यवस्था को लेकर बुधवार को पुलिस ओर प्रशासनिक अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई. पर्व पर 24 घंटे मंदिर खुला रहने ओर करीब 10 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देख अधिकारियों ने दर्शन की रणनीति तय की. वहीं दर्शनार्थियों के आने वाले मार्ग ओर पार्किंग व्यवस्था का भी निरीक्षण किया. महाशिवरात्रि के अवसर पर विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में इस बार 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। अनुमानित भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए हैं। पुलिस कंट्रोल रूम में एडीजी राकेश गुप्ता ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में डीआईजी नवनीत भसीन, एसपी प्रदीप शर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। मंदिर की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाओं तथा वीवीआईपी मूवमेंट की विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की गई। महाशिवरात्रि पर सुरक्षा के लिए 6 एएसपी, 18 डीएसपी, 38 थाना प्रभारी, 50 एसआई, 85 एएसआई सहित कुल 1500 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की जा रही है। मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिनका कंट्रोल रूम मंदिर परिसर में ही बनाया गया है। ड्रोन कैमरों से भी लगातार निगरानी रखी जाएगी। भीड़ प्रबंधन के लिए इस बार एक नई पहल की गई है। नगर एवं ग्राम रक्षा समिति के सदस्यों के साथ जिम में कसरत करने वाले युवा, आर्मी भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी तथा कॉलेज छात्रों को वालंटियर के रूप में लगाया जाएगा। प्रशासन ने श्रद्धालुओं को 40 मिनट के भीतर दर्शन कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। महाकाल नगरी पूरी तरह तैयार है, अब इंतजार है श्रद्धालुओं की आस्था के सैलाब का। 24 घंटे खुला रहेगा बाबा का दरबार इस संबंध में कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि नववर्ष के पहले दिन करीब 8 लाख दर्शनार्थी महाकाल मंदिर पहुंचे थे. 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर यह संख्या 10 लाख पहुंच सकती है. पर्व पर तड़के होने वाली भस्म आरती आधा घंटा पूर्व होगी और मंदिर 24 घंटे खुला रहेगा. इसलिए दर्शन व्यवस्था के साथ पार्किंग ओर दर्शनार्थियों के मार्ग का निरीक्षण किया जा रहा है. यह दिए निर्देश महाशिवरात्रि पर दर्शन हेतु आने वाले श्रद्धालुओं की अत्यधिक संख्या को दृष्टिगत रखते हुए कमिश्नर सिंह ने अधिकारियों के साथ मंदिर परिसर, महाकाल महालोक के आंतरिक एवं बाह्य क्षेत्रों का भ्रमण व निरीक्षण किया. उन्होंने दर्शन मार्ग,श्रद्धालुओं की आवाजाही,पार्किंग, जूता स्‍टेण्‍ड, पेयज , लड्डू प्रसाद, प्राथमिक चिकित्सा, सुरक्षा व्यवस्था, मूलभूत सुविधा और भीड़ प्रबंधन का अवलोकन कर अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए. साथ ही मंदिर परिसर एवं महाकाल लोक में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लेकर निर्माण एजेंसियों को कार्य समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने हेतु आवश्यक निर्देश दिए. 

नई आबकारी नीति पेश, मोहन सरकार का 21 हजार करोड़ रुपये का शराब राजस्व लक्ष्य

भोपाल   मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार कमाई और राजस्व बढ़ाने के लिए काम कर रही है। इसके लिए सरकार ने प्लान बनाने शुरु कर दिया है और इस दिशा में काम भी शुरु कर दिया है। दरअसल मोहन सरकार शराब से राजस्व हासिल करने की सोच रही है। जानकारी के मुताबिक सरकार शराब के जरिए 21 हजार करोड़ राजस्व हासिल करने का लक्ष्य एकत्र करने की योजना बना रही है। नई नीति में 19,000 से 21,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य मध्य प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति का मसौदा तैयार किया है, जिसमें शराब से लगभग 19,000 से 21,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य है। नई नीति में अवैध शराब की बिक्री पर अंकुश लगाने पर भी फोकस है। जिसके चलते दुकानों की नीलामी 20% अधिक दर पर की जा सकती है, इससे शराब महंगी हो सकती है। दरअसल  सरकार के आबकारी विभाग ने आबकारी नीति 2026-27 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। शासन की ओर से गठित तीन सदस्यीय मंत्रिमंडल समिति ने कैबिनेट की बैठक के बाद मंत्रालय में नई आबकारी नीति के ड्राफ्ट पर चर्चा की है। इस बैठक में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ने शिरकत की। नई नीति में शराब दुकानों की बिक्री से राजस्व का लक्ष्य बढ़ाकर 21 हजार  करोड़ रुपये करने पर केंद्रित किया गया है। मध्यप्रदेश में बहुत जल्द ही नई आबकारी नीति आने वाली है जिसमें बहुत सारे बदलाव देखने को मिल सकते हैं। दरअसल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इशारा किया है कि अप्रैल महीने में मध्य प्रदेश में नई आबकारी नीति लागू होगी। आबकारी नीति 2025- 26 में कई शहरों में शराब की बिक्री प्रतिबंधित कर दी जाएगी। वहीं, कुछ और बड़े फैसले लिए जाएंगे। कब तक मिल सकती है नई नीति को मंजूरी मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग की एक बड़ी अधिकारी ने नवभारत टाइम्स डॉट कॉम को बताया कि फरवरी महीने की आखिरी में या मार्च की शुरुआत में कैबिनेट नई शराब नीति के प्रस्ताव को मंजूरी दे सकती है। इसके तहत सबसे बड़ी शुरुआत मध्य प्रदेश की आध्यात्मिक और धार्मिक राजधानी उज्जैन से होगी। यहां की करीब 20 दुकान शराब की दुकान बंद कर दी जाएंगी। उज्जैन समेत 16 धार्मिक शहरों में होगी शराबबंदी उज्जैन के अलावा मध्य प्रदेश के करीब 15 शहरों में शराब की बिक्री बंद कर दी जाएगी। यह प्रावधान आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए नई नीति के ड्राफ्ट में किया है। यह ड्राफ्ट मंत्री परिषद की समिति को भेजा गया था,जिस पर सरकार ने चर्चा की है। मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने इशारों में है बात बताई है कि जहां से है कई शहरों में शराबबंदी की जाएगी, वहां कुछ बड़े शहरों में मिनी बार के विकल्प पर मंथन किया जा रहा है। यह मिनी बार की तरह होंगे। क्यों की जा रही है शराबंदी मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार चाहती है कि शराब की बिक्री को हतोत्साहित किया जाए ताकि नागरिक उसके दुष्प्रभाव से बच सकें। वहीं, नई नीति में 25 फीसदी पुरानी शराब की दुकानों के ठेके करीब 20% बढ़ोतरी के साथ रिन्यू किए जा सकते हैं। हालांकि आबकारी विभाग ने कुछ जगहों पर दुकान बंद करने तो कुछ जगहों पर नई दुकान शुरू करने का भी प्रावधान बनाया है। लेकिन कुल मिलाकर सरकार प्रदेश की अधिकांश शहरों में शराब की दुकान बंद करके शराब की बिक्री को हतोत्साहित करने की ओर बढ़ रही है। शराबबंदी को लेकर क्या बोले थे सीएम आपको बता दे कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उज्जैन में बयान देकर कहा है कि सरकार धार्मिक नगरों में शराब बंदी को लेकर आगे बढ़ रही है। नई वित्तीय वर्ष में इस पर अमल किया जा सकता है। चित्रकूट, उज्जैन, ओंकारेश्वर, अमरकंटक जैसे कई शहरों में शराब की दुकान बंद कर दी जाएगी। कई शहरों की शराब दुकान हटाकर उन्हें शहर की सीमा से दूर स्थापित किया जाएगा। नई नीति में अवैध शराब निर्माण, अवैध परिवहन को रोकने के लिए कड़े प्रावधान जानकारी के मुताबिक ज्यादा राजस्व प्राप्त करने के लिए नई नीति में शराब के अवैध निर्माण के साथ ही अवैध परिवहन को रोकने के लिए कड़े बताए जा रहे हैं। सबसे पहले नवीनीकरण के जरिए दुकानें आवंटित होंगी। फिर लॉटरी के जरिए और इसके बाद ई-टेंडर के माध्यम से शराब दुकानों का ठेका दिया जाएगा। आबकारी नीति ड्राफ्ट में जरूरी संशोधन के बाद सीएम मोहन यादव के समक्ष पेश किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक नई आबकारी नीति में मप्र आबकारी अधिनियम-1915 में संशोधन का प्रावधान किया गया है। इसके अनुसार अधिनियम की वो चीजें खत्म कर दी जाएंगी जो अब अव्यावहारिक हैं और न ही राजस्व प्राप्त नहीं हो रहा है। अगर  दुकान नहीं बिकती है तो ई टेंडर के माध्यम से होगी नीलामी जानकारी के मुताबिक नई आबकारी नीति में न कोई शराब दुकान बंद करने का प्रस्ताव है और न ही नई शराब दुकान खोला जाना प्रस्तावित है।  मप्र में शराब दुकानों की कुल संख्या 3,558 है। वहीं प्रदेश में  जहरीली शराब की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त प्रावधान बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही  नई आबकारी नीति में शॉपिंग मॉल में महंगी शराब के काउंटर खोले जाने की जानकारी भी है।

रूस ने ठहराया BRICS को ताकतवर विकल्प, अमेरिका पर कटाक्ष: ‘यहां कोई हुक्म नहीं चलता’

मास्को  रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने हाल ही में अमेरिका और पश्चिमी देशों के समूह नाटो के काम करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए उन पर निशाना साधा है। लावरोव ने कहा है कि ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) ज्यादातर मामलों में सर्वसम्मति के आधार पर फैसले करते हैं, जबकि नाटो के फैसले अमेरिका पर निर्भर करते हैं। लावरोव ने रूस के एक यूट्यूब चैनल एमपाशिया मनुची प्रोजेक्ट के साथ बातचीत में कहा, “ज्यादातर मामलों में अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन किया जाता है। जब बात हमारे पश्चिमी साथियों की हो तब नहीं, बल्कि जब उन प्रतिनिधियों की होती है जिन्हें हम वैश्विक बहुमत कहते हैं। ब्रिक्स, एससीओ, और सोवियत के बाद वाले सीएसटीओ, ईएईयू, और सीआईएस जैसे समूहों में आम सहमति ज़्यादातर बनी रहती है।” उन्होंने कहा, “ यहां आप नाटो की तरह आसानी से फैसले नहीं ले सकते, जहां अमेरिकी कहते हैं ‘चुप रहो’ और सबको पता है कि यह सब कैसे काम करता है।” लावरोव ने आगे कहा कि यूरोपीय संघ भी फैसलों पर असर डालता है। यूरोपीय संघ की तरह, जहां ब्रसेल्स में बिना चुने हुए नौकरशाह देश की चुनी हुई सरकारों को बताते हैं कि क्या करना है, कैसे बर्ताव करना है, किसके साथ व्यापार करना है और किसके साथ नहीं करना है। हमारे हंगरी के साथियों ने ब्रसेल्स के हाल के गलत कामों पर साफ और समझने लायक टिप्पणी की है।” बता दें कि हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने दिसंबर 2025 में कहा था कि यूरोपीय संघ यूक्रेनी संघर्ष को लंबा खींचने के लिए व्यवस्थित तरीके से कानून को रौंद रहा है। उन्होंने कहा कि यूराेपीय संघ में कानून का राज “ब्रसेल्स की तानाशाही” से बदल गया है। इससे पहले ने लावरोव ने रूसी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगाकर प्रतिस्पर्धियों को दबाने के लिए अमेरिका पर ‘अनुचित तरीकों’ का इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया। लावरोव ने एक इंटरव्यू में कहा, ”अमेरिका भारत और अन्य ब्रिक्स सदस्यों जैसे प्रमुख रणनीतिक साझेदारों के साथ हमारे व्यापार, निवेश सहयोग और सैन्य-तकनीकी संबंधों को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है।”

एमपी में टाउनशिप के नियम अपडेट: डेवलपर को 80% जमीन, पंजीयन जरूरी, राज्य स्तर पर शहरों की निगरानी

भोपाल  मध्य प्रदेश में अब एकीकृत टाउनशिप बनेंगी। किसान, किसानों के समूह या निजी व्यक्ति भी शहरों के आसपास लैंड पुलिंग के जरिये भूमि लेकर टाउनशिप बना सकेंगे। परियोजना के 15 प्रतिशत भू-भाग पर उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और एलआइजी श्रेणी के आवास बनाने होंगे। किफायती आवास बनाने पर अलग से अनुदान मिलेगा। विकासकर्ता को नगर तथा ग्राम निवेश में पंजीयन कराना होगा। ग्रीन बेल्ट जैसी पांबदियों से छूट मिलेगी। परियोजना के बीच सरकारी भूमि आने पर आठ हेक्टेयर तक छूट दी जा सकेगी। नियम अधिसूचित कर लागू कर दिए हैं नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने  नियम अधिसूचित कर लागू कर दिए हैं। प्रदेश में शहरीकरण को लेकर बढ़ते दबाव और बेतरतीब विकास को व्यवस्थित करने के लिए सरकार अब एकीकृत टाउनशिप को बढ़ावा देगी। इसके लिए नियम लागू कर दिए हैं, जो विकास प्राधिकरण सहित अन्य हाउसिंग एजेंसियों पर भी लागू होंगे। 10 से 20 हेक्टेयर न्यूनतम भूमि की शर्त नियमों के अनुसार पांच लाख से कम जनसंख्या वाले नगरों में एकीकृत टाउनशिप के लिए न्यूनतम 10 हेक्टेयर भूमि आवश्यक होगी। पांच लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में यह सीमा 20 हेक्टेयर तय की गई है। स्थानीय निकाय सीमा या योजना क्षेत्र में 40 हेक्टेयर या अधिक क्षेत्रफल वाली परियोजनाओं के लिए कम से कम 30 मीटर चौड़ी सड़क अनिवार्य होगी। बड़े शहरों में विकास योजना सड़क की चौड़ाई 24 मीटर निर्धारित की गई है। 66 वर्गमीटर तक अफोर्डेबल आवास का प्रावधान नियमों में अफोर्डेबल हाउसिंग के तहत अधिकतम 66 वर्गमीटर तक के आवास निर्माण की अनुमति दी गई है। परियोजना स्थल एक ही स्थान पर होना चाहिए। केवल राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग या प्रमुख जिला मार्ग से विभाजित स्थिति में छूट रहेगी। डेवलपर के पंजीयन के लिए संचालक नगर एवं ग्राम निवेश को पंजीयन अधिकारी बनाया गया है। आवेदन ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। 15 दिन के भीतर आवेदन स्वीकृत या निरस्त किया जाएगा। निरस्तीकरण की स्थिति में 20 प्रतिशत कटौती के बाद शुल्क वापस होगा। पंजीयन शुल्क 50 हजार, नवीनीकरण 25 हजार पंजीयन शुल्क 50 हजार रुपए और नवीनीकरण शुल्क 25 हजार रुपए तय किया गया है। पंजीयन पूरे राज्य में मान्य रहेगा। डेवलपर को शपथ पत्र देना होगा कि वह किसी आपराधिक मामले में दोषी नहीं है। पांच लाख से अधिक जनसंख्या वाले जिलों में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित होगी। इसमें संबंधित विभागों के प्रमुख अधिकारी सदस्य होंगे। अन्य जिलों में कलेक्टर अध्यक्ष होंगे और संबंधित स्थानीय अधिकारी सदस्य रहेंगे। बड़े जिलों में नगर एवं ग्राम निवेश संचालनालय नोडल एजेंसी होगा, जबकि अन्य में संयुक्त संचालक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा। भूमि अधिग्रहण में प्रशासनिक सहयोग का प्रावधान डेवलपर को कम से कम 80 प्रतिशत भूमि स्वयं प्राप्त करनी होगी। शेष भूमि के लिए आवश्यकता होने पर प्रशासनिक सहयोग लिया जा सकेगा। पारस्परिक सहमति के माध्यम से भूमि एकत्र करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यहां नियम लागू नहीं बनक्षेत्र के नदी-ताला, तालाब, बांध आदि राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य। रक्षा संपदा क्षेत्र, छावनी बोई। अधिसूचित पर्यावरण ईको संवेदनशील क्षेत्र। खदान, एसईजेड वन्यजीव गलियारा। ऐतिहासिक पुरा स्थलों से प्रभावित स्थल। रेलवे भूमि या जिसे राज्य सरकार ने प्रतिबंधित किया। यह करना अनिवार्य     टाउनशिप डेगालपर का टीएंडसीपी में पंजीयन।     पंजीयन शुल्क 50000, नवीनीकरण शुल्क 25000 व प्रमाण-पत्र की वैधता 5 वर्ष जैसी व्यवस्थाएं लागू।     कुल क्षेत्र का 2.5%, ग्रीन कवर।     टाउनशिप में कुल क्षेत्रफल का 10%, पार्क और खुला क्षेत्र राना अनिवार्य।     15% ईडबल्यूएस-निम्न आय वर्ग के लिए रिजर्व। कोई भी व्यक्ति या किसानों का समूह टाउनशिप विकसित कर सकेगा अभी तक टाउनशिप का विकास कालोनाइजरों तक सीमित था, लेकिन अब कोई भी व्यक्ति या किसानों का समूह टाउनशिप विकसित कर सकेगा। इन पर कालोनाइजर एक्ट के प्रविधान लागू होंगे। नागरिकों को पेयजल, बिजली, सड़क, नाली सहित सभी सुविधाएं देनी होंगी। निजी भूमि का आपसी सहमति से होगा अधिग्रहण टाउनशिप विकसित करने के लिए यदि भूमि कम पड़ती है और वहां सरकारी भूमि उपलब्ध है तो वह आठ हेक्टेयर की सीमा में उपलब्ध कराई जा सकेगी। बीच में यदि निजी भूमि आती है तो विकासकर्ता सरकार से अनुरोध कर आपसी सहमति के आधार पर अधिग्रहण करा सकेंगे। टाउनशिप का विकास अधिकतम तीन चरण में करना होगा निर्धारित शुल्क चुकाकर उन्हें पंजीयन भी कराना होगा। टाउनशिप का विकास अधिकतम तीन चरण में करना होगा। प्रत्येक चरण के लिए तीन वर्ष रखे जाएंगे। दूसरे चरण का काम तभी प्रारंभ किया जा सकेगा, जब पहले चरण का काम कम से कम 50 प्रतिशत पूरा हो जाए। पांच लाख से कम आबादी क्षेत्र के लिए दस हेक्टेयर भूमि नियम में स्पष्ट किया गया है कि पांच लाख से कम आबादी वाले शहरों के आसपास टाउनशिप के लिए कम से कम दस हेक्टेयर भूमि आवश्यक होगी। पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए यह 20 हेक्टेयर रहेगी। मार्ग चौड़ाई 24.0 मीटर से कम न हो। मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई 30.0 मीटर रखनी होगी 40 हेक्टेयर या उससे अधिक क्षेत्र वाले टाउनशिप में मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई 30.0 मीटर रखनी होगी। पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में टाउनशिप के विकास की अनुमति राज्य स्तर से लेनी होगी। इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में साधिकार समिति रहेगी। बाकी के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता वाली साधिकार समिति देगी। आवेदन करने पर 60 दिन के अंदर अनुमति देनी होगी।  

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet