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मानवीय आधार पर ऐतिहासिक आदेश: 13 साल की रेप पीड़िता को 28 हफ्ते में भी गर्भपात की अनुमति

भोपाल Madhya Pradesh High Court ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 13 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता की 28 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की अनुमति दे दी है।   अदालत ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और पीड़िता की शारीरिक व मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने माना कि इतनी कम उम्र में गर्भावस्था जारी रखना नाबालिग के स्वास्थ्य और जीवन के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। मामले की सुनवाई के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि गर्भ जारी रहने से बच्ची पर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके बाद अदालत ने मानवीय आधार पर गर्भ समापन की अनुमति प्रदान की। यह निर्णय राज्य में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।

विधायक ने पीड़ितों के लिए माँगा मुआवजा, 14 लड़कियों का ‘अश्लील फोटो’ ब्लैकमेल कांड विधानसभा में गूंजा

अजमेर. राजस्थान का चर्चित ‘अजमेर ब्लैकमेल कांड’ एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। दरअसल, विधानसभा के बजट सत्र के बीच गुरुवार को 1992 के अजमेर ब्लैकमेल कांड की पीड़िताओं के मुआवजे का मुद्दा गरमाया रहा। कोटा दक्षिण से भाजपा विधायक संदीप शर्मा ने सरकार से पूछा कि आखिर न्यायालय के आदेश के बावजूद पीड़िताओं के खातों में ‘पीड़ित प्रतिकर राशि’ क्यों नहीं पहुंची? सरकार की ओर से जो जवाब आया, उसने इस मामले की पेचीदगी और पीड़िताओं के सामाजिक डर को एक बार फिर उजागर कर दिया। 17 में से सिर्फ 2 तक पहुंची मदद विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, माननीय न्यायालय ने 20 अगस्त 2024 को एक ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए इस कांड की 17 पीड़िताओं को प्रत्येक को 7-7 लाख रुपये की मुआवजा राशि देने का निर्देश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को दिया था। हैरान करने वाला आंकड़ा: आदेश के महीनों बाद भी अब तक केवल 2 पीड़िताओं को ही कुल 14 लाख रुपये का भुगतान हो पाया है। बाकी का क्या हुआ? शेष 14 पीड़िताओं को मिलने वाली 98 लाख रुपये की राशि अभी भी सरकारी फाइलों में कैद है। एक पीड़िता का निधन हो चुका है। “इच्छा जाहिर नहीं की”: सामाजिक डर या प्रशासन की विफलता? सरकार ने सदन में जो तर्क दिया, वह काफी चौंकाने वाला है। उत्तर में बताया गया कि प्रशासन ने पीड़िताओं से संपर्क करने के प्रयास किए, लेकिन कई पीड़िताओं या उनके परिजनों ने मुआवजा राशि प्राप्त करने की ‘इच्छा जाहिर नहीं की’ है। विशेषज्ञों का मानना है कि 32 साल बीत जाने के बाद कई पीड़िताएं अब अपनी नई पहचान के साथ समाज में रह रही हैं। वे मुआवजा लेने के लिए सामने आकर अपनी पहचान उजागर होने से डर रही हैं। यह ‘खामोशी’ उस गहरे मानसिक आघात का प्रतीक है जो अजमेर कांड ने इन मासूमों को दिया था। 1992 का वो ‘काला अध्याय’ जिसने अजमेर को रुला दिया था जो लोग नहीं जानते, उनके लिए बता दें कि 1992 में अजमेर में रसूखदार लोगों के एक गिरोह ने स्कूल और कॉलेज जाने वाली दर्जनों लड़कियों को नशीला पदार्थ खिलाकर या डरा-धमका कर उनके अश्लील फोटो खींचे थे। आरोप था कि इन फोटो के आधार पर लड़कियों का सालों तक यौन शोषण और ब्लैकमेल किया गया। यह आजाद भारत के सबसे बड़े और घिनौने सेक्स स्कैंडल्स में से एक माना जाता है, जिसकी गूँज संसद तक सुनाई दी थी। विधायक संदीप शर्मा की मांग: “घर जाकर दें हक” विधायक संदीप शर्मा ने सरकार के जवाब पर असंतोष जाहिर करते हुए एक मानवीय सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन को केवल औपचारिक पत्राचार नहीं करना चाहिए, बल्कि पीड़िताओं की निजता का ध्यान रखते हुए उनके घर जाकर संपर्क करना चाहिए। शर्मा ने मांग की कि सरकार ऐसी व्यवस्था करे जिससे पीड़िताओं की पहचान गुप्त रहे और उनका हक (7 लाख रुपये की राशि) सीधे उनके खातों में जमा हो जाए। अगले 3 साल तक जारी रहेंगे प्रयास सरकार ने आश्वासन दिया है कि आगामी 3 साल तक शेष पीड़िताओं को मुआवजा दिलाने के निरंतर प्रयास किए जाएंगे। यदि इस अवधि के बाद भी कोई पीड़िता सामने आती है, तो नियमानुसार उसे भुगतान किया जाएगा। वर्तमान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिए गए हैं कि वे संवेदनशीलता के साथ इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं।

हॉकी प्रो लीग: अर्जेंटीना के सामने बेबस भारत, 8-0 से मिली बड़ी हार

राउरकेला भारत को बृहस्पतिवार को यहां एफआईएच पुरुष प्रो लीग के राउरकेला चरण में अर्जेंटीना से 0-8 से हार का सामना करना पड़ा। अर्जेंटीना के लिए टॉमस डोमेने ने चार गोल दागे। डोमेन (15, 20, 26, 60वें मिनट) के अलावा टॉमस रुइज (14वें मिनट), लुसियो मेंडेज (22वें मिनट), इग्नासियो इबारा (25वें मिनट) और निकोलस डेला टोरे (30वें मिनट) ने भी गोल किए। भारत ने शुरुआत में बढ़त बनाने की कोशिश की, लेकिन कुछ देर तक दबदबे के बाद उन्होंने पहले क्वार्टर के अंत में पेनल्टी स्ट्रोक मिलने पर बढ़त लेने का सुनहरा मौका गंवा दिया। हरमनप्रीत सिंह के प्रयास को अर्जेंटीना के गोलकीपर ने रोक दिया। अर्जेंटीना ने तुरंत गोल दाग दिया। रुइज ने अपनी टीम को बढ़त दिला दी। मेहमान टीम ने जल्द ही अपनी बढ़त दोगुनी कर ली जब डोमेने ने सूरज करकेरा को छकाते हुए अपनी टीम को शुरुआती क्वार्टर में 2-0 की बढ़त दिला दी। भारत ने दूसरे क्वार्टर की शुरुआत अच्छी की जिसमें शिलानंद लाकड़ा और हरमनप्रीत सिंह को पेनल्टी कॉर्नर मिले। हालांकि वे गोल नहीं कर पाए। अर्जेंटीना ने दबाव बनाना जारी रखा। डोमेने ने बढ़त को तीन गुना कर दिया और मेंडेज ने जल्द ही चौथा गोल कर दिया। इबारा पांचवां गोल किया जबकि डोमेने ने जल्द ही अपनी हैट्रिक पूरी की। निकोलस डेला टोरे के गोल से अर्जेंटीना पहले हाफ में 7-0 से बढ़त बनाए था। भारत ने कुछ मौके बनाए लेकिन गोल नहीं हुआ। फिर अर्जेंटीना ने डोमेने के गोल से शानदार जीत दर्ज की।  

प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते कदम, कृषि रथ ने किसानों को किया जागरूक

भोपाल कृषक कल्याण वर्ष 2026 राज्य शासन द्वारा घोषित कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत किसानों को खेती की नई पद्धतियों की जानकारी दी जा रही है। इसी क्रम में हरदा जिले की ग्राम पंचायतों में कृषि रथ का संचालन किया गया। कृषि रथ के साथ कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, कृषि विभाग एवं संबद्ध विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा कृषकों से सीधा संपर्क कर ई-विकास प्रणाली से उर्वरक क्रय करने के लिये जागरूक किया गया। साथ ही नरवाई प्रबंधन, ग्रीष्मकालीन मूंग फसल के स्थान पर उडद, मूंगफली, तिल आदि फसलों को प्रोत्साहन के साथ प्राकृतिक और जैविक कृषि करने के लिए प्रेरित किया गया। मृदा स्वास्थ कार्ड के आधार पर उर्वरकों की संतुलित मात्रा का उपयोग करने और भूमि पर बोई गई फसल अनुसार सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग करने सहित समसामयिक सलाह भी प्रदान की गई। किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती करने के लिए प्रेरित करते हुए बताया गया कि रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से अनेक जानलेवा बीमारियां बढ़ रही हैं। प्राकृतिक और जैविक खेती से बीमारियां होने का खतरा नहीं रहता है। प्राकृतिक और जैविक खेती एक ऐसी खेती है जिसमें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों और जैविक पदार्थों का उपयोग करके फसलें उगाई जाती हैं। प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, जल संरक्षण होता है, जैव विविधता बढ़ने के साथ किसानों की आय बढ़ती है और फसलों की गुणवत्ता भी अच्छी होती है। किसानों को मिल रही सोलर पम्प की सौगात प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना के अंतर्गत हरदा जिले के किसानों को सिंचाई सुविधा सुलभ कराने की दिशा में प्रभावी कार्य किया जा रहा है। मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम द्वारा योजना के तहत हरदा जिले में 361 किसानों का ऑफ ग्रिड सोलर पम्प प्रदाय करने के लिए चयन किया गया है। इस योजना से किसानों को दिन के समय निर्बाध सिंचाई, कम लागत में खेती तथा पर्यावरण संरक्षण में सहभागिता का लाभ मिल रहा है।  

‘ग्रहण मंत्री’ बयान पर भड़के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, कहा— भाषा ही सोच को उजागर करती है

रायपुर कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ‘ग्रहण मंत्री’ बताए जाने पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि मुझे क्या कहा, क्या नहीं कहा, यह तो स्पष्ट हो रहा है. लेकिन ये जो कह रहे हैं, जो भूपेश बघेल कह रहे हैं, उनके शब्दों की निम्नता है. उस पर मैं केवल यही कह सकता हूं कि अपने गिरेबान में झांक कर देख लें. गृह मंत्री विजय शर्मा ने इसके साथ ही विधायक देवेंद्र यादव पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस शासनकार के दौरान हुई घटना की याद दिलाते हुए कहा कि टीचर्स डे पर एक टीचर से बलात्कार हुआ था, तब वे कहां थे? पाटन विधानसभा में जब सामूहिक हत्याएं हुईं थीं, तब वे कहां थे? उन्हें उस समय भी चिंता करनी चाहिए थी. गृह मंत्री ने इसके साथ भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के जेल वाले बयान पर कहा कि देखिए फर्क यह है कि आपको कहां-कहां राजनीति करनी है, कहां नहीं करनी है. वही जेल है, वही सेल है. वहां मैं भी था. वही जेल है. मैं बाहर निकाल कर आया तो मैंने नहीं कहा कि वहां ऐसा है, वैसा है. मतलब जबरदस्ती किसी बात पर राजनीति करनी हो तो यह तरीका है कांग्रेस के लोगों का. दरअसल, पूर्व कांग्रेस नेता, राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के पॉडकास्ट में भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल ने कहा था कि उन्हें जेल में कीड़े वाला पानी दिया गया. कैदी इंजेक्शन लगाते थे, और टॉयलेट वाली जगह पर ही रहना पड़ता था.

ग्राम स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन से साकार होगा विकसित भारत का संकल्प: मंत्री नेताम

रायपुर. आदिम जाति विकास मंत्री  रामविचार नेताम के उपस्थिति में जनपद पंचायत रामचन्द्रपुर में विकसित भारत के संकल्प को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (वीबी जी राम जी) विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। मंत्री  नेताम ने अपने संबोधन में कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा जब ग्राम पंचायत स्तर पर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन के साथ स्थानीय सहभागिता सुनिश्चित हो। उन्होंने जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने जल संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन को वर्तमान समय की आवश्यकता बताते हुए प्रत्येक ग्राम पंचायत को अपनी कार्ययोजना में  प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। कार्यशाला में मिशन अंतर्गत ग्राम स्तर पर ठोस एवं व्यवहारिक कार्ययोजना तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों द्वारा जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन, अधोसंरचना विकास, ग्रामीण आजीविका सृजन, आपदा निवारण एवं सामुदायिक संसाधनों के सुदृढ़ीकरण से संबंधित बिंदुओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। साथ ही बताया गया कि (वीबी जी राम जी) के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने तथा युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास किए जाएंगे।

धरती का चलता फिरता कल्प वृक्ष है गौमाता: जगदगुरू राजेन्द्रदास महाराज

भोपाल. बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में  रेवासा धाम एवं  वृंदावन धाम के पावन सानिध्य में मलूक पीठाधीश्वर  राजेंद्रदास जी महाराज द्वारा आयोजित गौकथा एवं गौ आधारित प्राकृतिक खेती विषयक दिव्य कथा का आज द्वितीय दिवस अत्यंत भावपूर्ण वातावरण में हुआ। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि महाराज जी के प्रवचनों से क्षेत्र में गौसेवा की भावना निश्चित रूप से सुदृढ़ होगी। गौमाता के आशीर्वाद से यह क्षेत्र धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक दृष्टि से समृद्धि की ओर अग्रसर होगा। बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में चल रही दिव्य कथा का देश के नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने भी श्रवण किया। उन्होंने महाराज  से आशीर्वाद प्राप्त किया। जगदगुरू  राजेंद्रदास जी महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में समाज की दुर्दशा का मूल कारण गौवंश की उपेक्षा है। उन्होंने कहा कि भौतिक संपत्ति असुरों के पास भी थी, किंतु वह आसुरी संपत्ति थी, दैवीय संपत्ति नहीं। आसुरी संपत्ति मनुष्य को संसार के मोहजाल में फँसाती है, जबकि दैवीय संपत्ति उसे मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करती है। महाराज जी ने गौ सेवा को सच्ची समृद्धि का आधार बताते हुए कहा कि गौ माता की सेवा से बुद्धि निर्मल होती है, जीवन में सुख-शांति आती है और व्यक्ति के समस्त अशुभ कर्म सहज ही क्षीण हो जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि धरती का कल्याण गौ संरक्षण से ही संभव है तथा गौ आधारित प्राकृतिक खेती ही आने वाले समय का सतत और सात्विक समाधान है। गौमाता धरती का चलता फिरता कल्पवृक्ष है जो सबकी कामनाओं की पूर्ति करती हैं।  राजेंद्रदास जी महाराज ने कहा कि ऋग्वेद में वर्णित है जिस मनुष्य के पास कम से कम एक भी गौ होती है, वह धरती पर इंद्र के समान सौभाग्यशाली माना गया है। बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में हजारों गायों का संरक्षण हो रहा है जिससे इसकी कीर्ति बढ़ रही है। रीवा जिले के ही हिनौती गौधाम में 25 हजार गायों के संरक्षण के लिए कार्य किया जा रहा है। यह गौधाम मध्यप्रदेश का प्रथम गौधाम होगा और मेरा सौभाग्य होगा कि मैं वहां गौमाता की कीर्ति यश का बखान कर सकूं। उन्होंने कहा कि गाय के दर्शन से राधा-कृष्ण का एक साथ दर्शन होता है। गाय संपूर्ण ब्रह्मांड की शक्ति का पोषण करती हैं। महाराज  ने कहा कि देवी भागवत में कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को सुरभि माता के प्राकट की कथा है। आज के परिवेश में मनुष्यता खो गई है। मनुष्य के क्षमा, दया, करूणा एवं सेवा आदि के पवित्र गुण विलुप्त हो गये हैं। आदर पूर्वक गौमाता के संरक्षण, संवर्धन व सेवा से ही मानवता आयेगी। महाराज  ने कहा कि बसामन मामा गौवंश वन्य विहार में 9 हजार से अधिक गौवंश संरक्षित किये गये हैं जो सुखपूर्वक निवास करते हैं और पास के जंगल में विचरण करते हैं। उनकी गौशाला में पूरे मनोभाव से सेवा की जाती है। गौवंश वन्य विहार में प्राकृतिक खेती का कार्य किसानों के लिए प्रेरणादायी होगा। शुद्ध, सात्विक, कीटाणु रहित आहार प्राकृतिक खेती से ही प्राप्त हो सकता है। यह क्षेत्र गौसेवा से अपनी दिव्यता को प्रकट कर रहा है। उन्होंने गौसेवा में लगे सेवकों को इस पुनीत कार्य के लिए साधुवाद दिया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही और वातावरण गौमय भक्ति, सेवा एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा।  

वंदे मातरम विवाद पर गरजे सीएम योगी, कहा- राष्ट्रगान का अपमान बर्दाश्त नहीं

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान कहा कि 6 करोड़ से अधिक की आबादी को पिछले आठ वर्षों के अंदर डबल इंजन सरकार के द्वारा किए गए सतत प्रयास से बहुआयामी गरीबी की रेखा से ऊपर किया गया है। उन्होंने कहा कि ये नीति आयोग के वे आंकड़े हैं जो उन्होंने पूरे देश भर में सरकार की विकासपरक योजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं के परिणामस्वरूप सामने आए हैं। इसका मतलब ये नहीं है कि उनको अन्य योजनाओं से वंचित कर दिया जाए। उनको जो राशन की सुविधा मिल रही है, वह यथावत मिलेगी। उन्हें स्वास्थ्य की सुविधाएं जो मिल रही हैं, वे यथावत मिलती रहेंगी और शासन की अन्य सभी प्रकार की सुविधाएं वैसे ही मिलती रहेंगी। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में कानून चंद हाथों की जागीर बन गई थी। कर्फ्यू और दंगा आम बात हो गई थी, पर्व आस्था नहीं आशंका के पर्याय बन गए थे, पुलिस का मनोबल टूटा था, न बेटी सुरक्षित थी न व्यापारी। उन्होंने कहा कि आज उपद्रव नहीं उत्सव प्रदेश है। उत्तर प्रदेश में आज भय का वातावरण नहीं, बल्कि लोगों के मन में आस्था का भाव है। कर्फ्यू कल्चर की जगह जीरो टॉलरेंस कल्चर ने ले ली है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वंदे मातरम का विरोध करने वालों को भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं है। बजट सत्र के दौरान विधानसभा में बोलते हुए उन्होंने सपा और कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्होंने राज्य में विकास और सांस्कृतिक पुनरुत्थान दोनों में बाधा डाली है। मुख्यमंत्री योगी ने राष्ट्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाते हुए कहा कि वंदे मातरम का विरोध करने वालों को भारतीय धरती पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। कुछ राजनीतिक समूह भारत से खाते-पीते हैं लेकिन वंदे मातरम गाने से इनकार करते हैं। उन्होंने सपा के नेतृत्व वाली पिछली सरकारों पर अयोध्या और मथुरा के विकास को रोकने और कांवड़ यात्रा और दीपोत्सव जैसे धार्मिक आयोजनों का विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश, आस्था का केंद्र होने के नाते, अब एक ऐसे मॉडल का गवाह बन रहा है जहां विकास और विरासत पुनर्जागरण का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य दंगा-प्रधान अर्थव्यवस्था से मंदिर-प्रधान अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर हुआ है। प्रयागराज में आयोजित माघ मेले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जहां पूर्व के वर्षों में लगभग 12 करोड़ श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होते थे, वहीं इस वर्ष के माघ मेले में लगभग 21 करोड़ तीर्थयात्रियों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि यह बेहतर कानून व्यवस्था में बढ़ती जन आस्था को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य नहीं रहा, बल्कि देश की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और विकास के इंजन के रूप में उभर रहा है। कानून प्रवर्तन सुधारों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अब 12 कार्यरत फोरेंसिक प्रयोगशालाएं हैं, जबकि पहले केवल दो या तीन ही थीं। इसके साथ ही लखनऊ में एक राज्य फोरेंसिक संस्थान की स्थापना भी की गई है। प्रत्येक जिले में साइबर पुलिस स्टेशन स्थापित किए गए हैं और सभी पुलिस थानों में साइबर डेस्क कार्यरत हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 60,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई है, पीएसी इकाइयों का पुनर्गठन किया गया है और महिला पीएसी बटालियन का गठन किया गया है, और कई अन्य बटालियनों का गठन प्रक्रियाधीन है।

‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ केस कर रहा हैरान, 93 साल की बुजुर्ग महिला का होगा DNA टेस्ट

जयपुर. राजस्थान हाई कोर्ट ने एक बेहद पेचीदा और भावनात्मक मामले में कानून की नई लकीर खींची है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि एक 93 वर्षीय महिला को यह साबित करने के लिए DNA टेस्ट से गुजरना होगा कि याचिकाकर्ता महिला उसकी सगी बेटी है या नहीं। जस्टिस बिपिन गुप्ता की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि भारतीय कानून में ‘पित्रत्व’ (Paternity) को लेकर तो धारणाएं मौजूद हैं, लेकिन ‘मातृत्व’ (Maternity) को नकारने का यह मामला अनूठा है। क्या है पूरा विवाद? इस कानूनी लड़ाई की शुरुआत एक पुश्तैनी कृषि भूमि को लेकर हुई। याचिकाकर्ता महिला के पिता ने साल 2014 में अपनी पैतृक संपत्ति को लेकर एक वसीयत रजिस्टर्ड करवाई थी। जब बेटी को इस वसीयत का पता चला, तो उसने इसे अदालत में चुनौती दी। उसका तर्क था कि पैतृक संपत्ति की वसीयत नहीं की जा सकती। उसने संपत्ति में अपनी मां के साथ आधे हिस्से की मांग की। यहीं से कहानी में ट्विस्ट आया। मां और दो अन्य लोगों ने कोर्ट में लिखित जवाब दिया कि याचिकाकर्ता महिला उनकी बेटी ही नहीं है। ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला ! हाई कोर्ट ने इस स्थिति पर गहरी हैरानी जताई। जस्टिस गुप्ता ने टिप्पणी की कि समाज में अक्सर पुरुष (पिता) बच्चे के पितृत्व को नकारते हैं (अक्सर बेवफाई के आरोपों के आधार पर), लेकिन यह बहुत ही दुर्लभ मामला है जहाँ एक महिला यह कह रही है कि बच्चा उसका नहीं है। कोर्ट ने ‘भारतीय साक्ष्य अधिनियम’ और नए ‘भारतीय साक्ष्य संहिता (BSA) 2023’ का हवाला देते हुए कहा कि कानून में शादी के दौरान पैदा हुए बच्चे के पिता के बारे में तो स्पष्ट प्रावधान हैं, लेकिन विधायिका ने कभी ऐसी स्थिति की कल्पना ही नहीं की थी जहाँ एक मां ही बच्चे को अपना मानने से मना कर दे। राइट टू प्राइवेसी बनाम सच का अधिकार निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने पहले बेटी की डीएनए टेस्ट की मांग को खारिज कर दिया था। निचली अदालत का तर्क था कि टेस्ट के लिए मजबूर करना बुजुर्ग महिला की निजता (Privacy) का उल्लंघन होगा। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए कहा,”आज की भौतिकवादी दुनिया में माता-पिता होने को स्वीकार करना या नकारना आसान हो गया है, लेकिन एक बच्चे के लिए यह साबित करना बहुत कठिन है कि वह किसका है। जब कानून में मातृत्व को लेकर कोई पूर्व धारणा नहीं है, तो विज्ञान (DNA) ही एकमात्र रास्ता है।” अगर मां ने टेस्ट से किया मना, तो…? हाई कोर्ट ने अपने आदेश में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच भी रखा है। कोर्ट ने कहा कि किसी को भी डीएनए टेस्ट के लिए जबरन मजबूर नहीं किया जा सकता। लेकिन, अगर 93 वर्षीय मां टेस्ट कराने से इनकार करती है या उपस्थित नहीं होती है, तो कोर्ट भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114 के तहत याचिकाकर्ता (बेटी) के पक्ष में ‘धारणा’ (Presumption) बना सकता है। यानी, इनकार को बेटी के दावे की पुष्टि मान लिया जाएगा। क्यों खास है यह फैसला? यह फैसला आधुनिक युग में बदलती पारिवारिक संवेदनाओं और कानूनी शून्यता (Legal Vacuum) को भरता है। कोर्ट ने माना कि जब विज्ञान के पास किसी सच्चाई को साबित करने के पुख्ता साधन मौजूद हैं, तो तकनीकी कारणों से किसी बच्चे को उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।

मंत्री ने अष्टधातु प्रतिमा का भी अनावरण किया

रायपुर. रामानुजगंज में सुशासन के प्रतीक भव्य अटल परिसर का किया लोकार्पण रामानुजगंज के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ते हुए, कैबिनेट मंत्री  रामविचार नेताम ने रामानुजगंज में नवनिर्मित श्अटल परिसरश् का फीता काटकर शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने परिसर में स्थापित भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की अष्टधातु प्रतिमा का अनावरण भी किया। कार्यक्रम में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मती पुष्पा नेताम विशेष रूप से उपस्थित रहीं। स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत सुमधुर स्वागत गीत ‘सांसों की सरगम गाए… सुस्वागतम‘ के साथ कार्यक्रम का आगाज हुआ। समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री  नेताम ने रामानुजगंज को एक ‘मॉडल नगर‘ के रूप में विकसित करने की बात कही। ’उन्होंने पूर्व में हुए कार्य की सराहना करते हुए कहा कि पूर्वे समय में’ तय किए गए मॉडल के अनुरूप ही आज नगर में सड़कों का जाल बिछा है और बड़े पैमाने पर रिनोवेशन व नाली निर्माण के कार्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि वार्डों में पेयजल, बिजली और नाली जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी नहीं होने दी जाएगी और विकास कार्यों में आने वाली किसी भी बाधा का समन्वय कर समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने निस्वार्थ भाव से जनसेवा करने और क्षेत्र को स्वच्छ, सुंदर एवं विकसित बनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं नगरवासी उपस्थित थे।

शोर पर लगाम: डीजे प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई, दर्जनभर से अधिक वाहन जब्त

बिलासपुर  बोर्ड परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए शहर में ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। हाईकोर्ट की नाराजगी और परीक्षा के दौरान छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसे गंभीरता से लेते हुए एसएसपी के निर्देश पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में आरटीओ को भी नोटिस जारी कर मॉडिफाइड डीजे वाहनों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस ने बीते दिनों शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए 12 से अधिक मॉडिफाइड डीजे वाहन जब्त किए हैं, जिनमें क्षमता से अधिक तेज स्पीकर लगाए गए थे। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि रात 10 बजे के बाद डीजे संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। ध्वनि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ वाहन जब्ती के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है। नियमों की अनदेखी करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई छत्तीसगढ़ बोर्ड की कक्षा 10वीं की परीक्षा 21 फरवरी से 13 मार्च 2026 तक और 12वीं की परीक्षा 20 फरवरी से 18 मार्च 2026 तक आयोजित की जाएगी। पुलिस का कहना है कि परीक्षा अवधि में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विद्यार्थियों को शांत और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा। नियमों की अनदेखी करने वाले डीजे संचालकों पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

रामानुजगंज और बलरामपुर में मितानिनों का सम्मेलन, कृषि मंत्री की सहभागिता

रायपुर. उत्कृष्ट कार्य करने वाली मितानिनों का किया गया सम्मान नगरपालिका परिषद रामानुजगंज के पंडित दीनदयाल सभागार में स्वस्थ्य पंचायत मितानिन सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आदिमजाति विकास एवं किसान कल्याण, मछली पालन एवं पशुधन विकास मंत्री  रामविचार नेताम द्वारा मां सरस्वती एवं छत्तीसगढ़ी महतारी की छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उन्होंने रामानुजगंज में महतारी सदन व विकासखंड अंतर्गत सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मितानिनों की बैठक हेतु शेड निर्माण की घोषणा की। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत के सरपंच, एएनएम एवं मितानिन दीदियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मंत्री  नेताम ने कहा कि कठिन और विपरीत परिस्थितियों में भी मितानिन दीदी सभी निरंतर सेवा भाव से कार्य करती है। मितानिनों के सहयोग से ही स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होता है। साथ ही संस्थागत प्रसव हेतु लोगों को प्रेरित किया जाता है। इस दौरान उन्होंने उपस्थित सभी लोगों को स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने को कहा। सम्मेलन के दौरान जन-संवाद आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न समस्याओं एवं मांगों से संबंधित कुल 260 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें नए मितानिन नियुक्ति से संबंधित आवेदन, महतारी वंदन योजना, आंगनबाड़ी समस्या, सड़क निर्माण, मितानिन प्रोत्साहन राशि, हैंडपंप नाली निर्माण से संबंधित आवेदन प्राप्त हुए। मंत्री  नेताम ने विभिन्न आवेदनों का तत्काल निराकरण करते हुए शेष प्रकरणों पर संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए।  इस दौरान पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मती पुष्पा नेताम, नगर पालिका परिषद रामानुजगंज अध्यक्ष  रमन अग्रवाल, जनपद अध्यक्ष  मुंद्रिका सिंह, उपाध्यक्ष  सुनील तिवारी, गणमान्य नागरिक  शैलेश गुप्ता, ’’ तारावती सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण,जनपद सीईओ  रणवीर साय, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी व बड़ी संख्या में मितानिन उपस्थित थे। 

महिला के लिवइन पार्टनर ने की थी गला घोंटकर हत्या

भोपाल निशातपुरा इलाके में हुए महिला के अंधे कत्ल का पुलिस ने चौबीस घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। इस मामले में मृतका के लिविंग पार्टनर समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी ने महिला से पीछा छुड़ाने के लिए उसका गला घोटकर हत्या कर दी और भाई-बहन तथा मां के साथ मिलकर लाश को ठिकाने लगाने के लिए लोहे की पेटी के अंदर भरकर सैप्टिक टैंक में फेंक दिया था। दोनों की पहचान डेटिंग एप के जरिए हुई थी। जानकारी के अनुसार निशातपुरा पुलिस ने गुरुवार को कमल नगर स्थित सेप्टिक टैंक से एक महिला की लाश बरामद की थी, जिसे लोहे की पेटी में भरकर फेंका गया था। शव का पोस्टमार्टम कराने और जांच के दौरान आए साक्ष्यों के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया था। आसपास के इलाके में पूछताछ पर शव की पहचान मिसबाह (22) निवासी गोंदिया महाराष्ट्र के रूप में हुई, जो पिछले कुछ समय से कमल नगर में रहने वाले समीर के साथ लिवइन में रह रही थी। पुलिस ने समीर को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने महिला की गला घोटंकर हत्या करने और एक दिन बाद भाई-बहन और मां के साथ मिलकर उसके शव को ठिकाने लगाने की बात स्वीकार कर ली।  डेंटिंग ऐप से हुई थी दोनों की पहचान  आरोपी समीर ने पुलिस को बताया कि डेटिंग ऐप की माध्यम से उसकी पहचान मिसबाह से हुई थी। उसके बाद अक्टूबर 2025 से वह उसके साथ लिवइन में रह रही थी। दोनों के बीच विवाद होने लगे तो समीर उससे पीछा छुड़ाना चाहता था, लेकिन मिसबाह उससे अलग होने के लिए पैसों की मांग कर रही थी। इसी बात को लेकर बीती सात-आठ फरवरी की रात उनके बीच विवाद हुआ तो समीर ने उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी। घटना के बाद उसने इसकी जानकारी अपने परिजनों को दी। एक दिन लाश को घर में रखने के बाद अगले दिन घरवालों के साथ मिलकर उसे ठिकाने लगा दिया।  चारों आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी समीर, उसके भआई साहिल, बहन सायमा और मां शहनाज को गिरफ्तार कर लिया है। सभी आरोपी कमल नगर के रहने वाले हैं। इस अंधे कत्ल का खुलासा करने में थाना प्रभारी मनोज पटवा, एसआई श्रीकांत द्विवेदी, अशोक शर्मा, सलीम खान, एएसआई गोपाल सिंह, हेड कांस्टेबल अभिषेक सिंह, राजेन्द्र, रवीश रावत, आरक्षक जितेन्द्र सिकरवार, मधुसूदन, धारा सिंह, शिवराज, राजकुमार, महिला आरक्षक हेमंतिका एवं सपना की सराहनीय भूमिका रही है। पहले पति से हो चुका है तलाक पुलिस ने बताया कि महिला मिसबाह का अपने पति से तलाक हो चुका है। उसका पहला पति गुजरात में रहता है। इधर समीर का अपनी पहली पत्नी से तलाक हो चुका है, जबकि दूसरी पत्नी जबलपुर में रह रही है। वह ऑटो चलाने का काम करता है।घटनास्थल से करीब 200 मीटर पर ही लाश के फेंक गया था, इसलिए मामले को सुलझाने में पुलिस को मदद मिली।

मिस्ट्री गहराई: FSL रिपोर्ट आई सामने, बदल गया साध्वी प्रेम बाईसा केस का एंगल

जयपुर पश्चिमी राजस्थान की लोकप्रिय कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में गुरुवार को बड़ा अपडेट सामने आया। निधन के 16 दिन बाद उनकी एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी गई है। देर शाम करीब 7 बजे यह रिपोर्ट जोधपुर पुलिस कमिश्नर को सौंपी गई पश्चिमी राजस्थान की लोकप्रिय कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया। निधन के 16 दिन बाद उनकी एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी गई है। देर शाम करीब 7 बजे यह रिपोर्ट जोधपुर पुलिस कमिश्नर को सौंपी गई, जिसके बाद इसे आगे की प्रक्रिया के लिए मेडिकल बोर्ड को भेज दिया गया। अब सभी की निगाहें मेडिकल बोर्ड की अंतिम राय पर टिकी हैं, जिससे मौत के वास्तविक कारणों पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। जहर की पुष्टि नहीं, अंतिम राय बाकी पुलिस सूत्रों के अनुसार एफएसएल रिपोर्ट में जहर की पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि साध्वी प्रेम बाईसा की मौत जहर या किसी अन्य अप्राकृतिक कारण से हुई हो, इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष मेडिकल बोर्ड की राय के बाद ही सामने आएगा। मेडिकल बोर्ड रिपोर्ट का अध्ययन कर अपनी चिकित्सकीय राय देगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। डीसीपी (पश्चिम) विनीत कुमार बंसल के माध्यम से रिपोर्ट मेडिकल बोर्ड को भेजी गई है। संभावना जताई जा रही है कि अगले 24 घंटों में मेडिकल ओपिनियन मिल सकता है। इसके बाद ही मौत के कारणों पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होगी। 28 जनवरी को बिगड़ी थी तबीयत घटना 28 जनवरी की है। उस दिन पाल रोड स्थित आरती नगर के आश्रम में साध्वी प्रेम बाईसा की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। बताया गया कि उन्हें दो इंजेक्शन लगाए गए थे। इसके कुछ समय बाद ही उनकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं और मामले ने तूल पकड़ लिया था। 29 जनवरी को देर शाम पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया। 30 जनवरी को बाड़मेर जिले के परेऊ गांव में उन्हें समाधि दी गई। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में अनुयायी और स्थानीय लोग मौजूद रहे। 2 फरवरी को भेजे गए थे विसरा सैंपल घटना के बाद विसरा सैंपल जांच के लिए सुरक्षित रखे गए थे। 31 जनवरी और 1 फरवरी को अवकाश होने के कारण सैंपल तत्काल एफएसएल नहीं भेजे जा सके। अवकाश समाप्त होने के बाद 2 फरवरी को सैंपल जांच के लिए प्रेषित किए गए। अब रिपोर्ट आने के बाद जांच में नया मोड़ आया है। एफएसएल रिपोर्ट को जांच प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है, क्योंकि प्रारंभिक स्तर पर जहर की आशंका को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही थीं। रिपोर्ट में जहर की पुष्टि नहीं होने से उन आशंकाओं को फिलहाल विराम मिला है, लेकिन मेडिकल बोर्ड की अंतिम राय से पहले कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा। पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ रही जांच पुलिस प्रशासन का कहना है कि पूरी जांच प्रक्रिया पारदर्शिता और तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार किसी भी तरह की अफवाह से बचते हुए केवल वैज्ञानिक रिपोर्ट और मेडिकल विशेषज्ञों की राय के आधार पर ही अंतिम निर्णय सार्वजनिक किया जाएगा। इस बीच, साध्वी प्रेम बाईसा के अनुयायियों और स्थानीय लोगों में मामले को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। सभी को मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि मौत स्वाभाविक कारणों से हुई या इसके पीछे कोई अन्य वजह रही। फिलहाल एफएसएल रिपोर्ट ने जांच की दिशा बदल दी है। अब अंतिम तस्वीर मेडिकल बोर्ड की राय के बाद ही साफ हो पाएगी। पुलिस का कहना है कि जैसे ही आधिकारिक निष्कर्ष सामने आएगा, उसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा।

भीलवाड़ा में शादी समारोह में 4 की मौत, शराब समझकर पी लिया एसिड

भीलवाड़ा. राजस्थान में भीलवाड़ा जिले के गंगापुर कस्बे में एक हृदय विदारक घटना सामने आई है। जहां शराब के धोखे में ‘केमिकल फ्यूल’ (एसिड) पीने से तीन महिलाओं सहित चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। बता दें कि राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संवेदनशीलता दिखाई है और मुख्यमंत्री सहायता कोष से प्रत्येक मृतक के परिवार को 1-1 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। कैसे हुई घटना? जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना गंगापुर थाना क्षेत्र के आलोली गांव से जुड़ी है। मृतकों ने 9 और 10 जनवरी को एक शादी समारोह में बर्तन साफ करने और अन्य कार्यों का ठेका लिया था। काम खत्म करने के बाद, ये लोग वहां से बर्तन धोने या खाना गर्म करने के काम आने वाला तरल पदार्थ (केमिकल फ्यूल) अपने साथ ले गए थे। गुरुवार देर रात इन लोगों ने उस तरल पदार्थ को गलती से शराब समझ लिया और उसका सेवन कर लिया। सेवन के कुछ ही देर बाद सबकी तबीयत बिगड़ने लगी। अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ा हालत बिगड़ने पर चारों को तत्काल गंगापुर अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने तीन महिलाओं को मृत घोषित कर दिया। वहीं, एक पुरुष की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। मृतकों की पहचान रतन (पुत्र मसरिया कंजर, निवासी माधोपुर) सुशीला देवी जमनी देवी (पत्नी शंकर कंजर) बदामी देवी कंजर प्रशासनिक मुस्तैदी और जांच के आदेश घटना की सूचना मिलते ही जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) धर्मेंद्र सिंह यादव मौके पर पहुंचे। इस हादसे से पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच के लिए एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें शामिल हैं पुलिस अधीक्षक (SP), मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और जिला आबकारी अधिकारी। पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह यादव ने बताया कि शव का पोस्टमॉर्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि वह फ्यूल असल में क्या था और उसे किस दुकान से खरीदा गया था। संबंधित दुकान की भी जांच जारी है। पीड़ित परिवारों में कोहराम शादी की खुशियों के बीच हुए इस हादसे ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। फिलहाल, पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और कानूनी कार्रवाई जारी है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों या लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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