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अयोध्या एक्सटेंशन में 10-लेन रोड पर मिलेंगे किफायती फ्लैट्स, भोपाल में घर खरीदने का सुनहरा मौका

भोपाल. अगर आप राजधानी भोपाल में अपने सपनों का घर तलाश रहे हैं, तो मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल (MPHIDB) आपके लिए एक शानदार अवसर लेकर आया है। अयोध्या एक्सटेंशन की सबसे चर्चित लोकेशन पर मंडल ने ‘सुरम्या परिसर, फेज-2’ के तहत सर्वसुविधायुक्त फ्लैट्स की बुकिंग शुरू कर दी है। पंजीकरण की अंतिम तिथि 25 मार्च 2026 है। भोपाल के अयोध्या एक्सटेंशन में प्रस्तावित 10-लेन रोड की प्राइम लोकेशन पर यह प्रोजेक्ट स्थित है। ‘सुरम्या परिसर-2’ को इस तरह डिजाइन किया गया है कि निवासियों को शहर की कनेक्टिविटी के साथ-साथ शांतिपूर्ण वातावरण भी मिले। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो काम और सुकून के बीच संतुलन चाहते हैं। फ्लैट्स की उपलब्धता और कीमत इस योजना के तहत कुल 142 फ्लैट्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं। 2BHK फ्लैट्स: 119 यूनिट्स 3BHK फ्लैट्स: 23 यूनिट्स शुरुआती कीमत: मात्र 43.91 लाख रुपये। मिलेगी वर्ल्ड क्लास सुविधाएं MPHIDB ने इस प्रोजेक्ट में लग्जरी और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा है। यहाँ मिलने वाली प्रमुख सुविधाएं इस प्रकार हैं: सुरक्षा: पूरे परिसर में CCTV सर्विलांस की सुविधा। पार्किंग: हर फ्लैट के लिए कवर्ड कार पार्किंग। लिफ्ट: प्रत्येक ब्लॉक में 2 लिफ्ट की व्यवस्था। पर्यावरण: रेन वाटर हार्वेस्टिंग और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP)। अन्य: रिसेप्शन/लॉबी, पीए सिस्टम, पोडियम लेवल पर इंटरेक्टिव स्पेस, और हर अपार्टमेंट में सुंदर बालकनी व टेरेस। पंजीयन और आवेदन प्रक्रिया इच्छुक खरीदार इन फ्लैट्स के लिए ऑनलाइन माध्यम से ई-पंजीयन कर सकते हैं। आवेदन www.mponline.gov.in या मंडल की आधिकारिक वेबसाइट www.mphousing.in पर उपलब्ध हैं। ध्यान रहे कि पंजीयन की अंतिम तिथि 25 मार्च 2026 निर्धारित की गई है। बुकिंग से पहले बिंदुओं को ध्यान से पढ़ें: यदि आपके आवेदन को मंडल द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है और उसके बाद आप अपना पंजीयन निरस्त (Cancel) करवाते हैं, तो जमा की गई पूरी पंजीयन राशि नियमानुसार जब्त कर ली जाएगी। इसलिए आवेदन सोच-समझकर करें। फ्लैट की बेस कीमत के अलावा, राज्य शासन और मंडल के नियमों के अनुसार GST एवं अन्य सभी सरकारी टैक्स अलग से देने होंगे। शासन के नियमों के तहत लीजरेंट और कुल भवन मूल्य का 5% कार्पस फंड (Corpus Fund) अतिरिक्त रूप से देय होगा, जो भविष्य में भवन के रखरखाव के लिए उपयोग किया जाता है। आवास योजना से जुड़े अन्य सभी नियम और शर्तें मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल (MPHIDB) के अधीन होंगी। (MP Housing Board New Scheme) संपर्क जानकारी: अधिक विवरण के लिए संपदा अधिकारी, संभाग-4, सैटेलाइट प्लाजा, अयोध्या नगर, भोपाल से संपर्क करें या दिए गए नंबरों (6260753127, 9301302433, 9406912076, 9826644908) पर कॉल करें।

घर के अंदर सनस्क्रीन न लगाना पड़ सकता है भारी, जानें कैसे हो सकता है स्किन डैमेज

सूरज की यूवी किरणों से बचने के लिए सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना जरूरी है। इसलिए  ज्यादातर लोग मानते हैं कि सनस्क्रीन का इस्तेमाल केवल तभी करना चाहिए जब हम तेज धूप में बाहर जा रहे हों, लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। क्या आपने कभी सोचा है कि घर की चारदीवारी में रहते हुए भी आपकी स्किन पर टैनिंग, हाइपरपिग्मेंटेशन या फाइन लाइन्स क्यों नजर आने लगते हैं? इसका जवाब हो सकता है घर के अंदर सनस्क्रीन का इस्तेमाल न करना। आइए समझते हैं क्यों घर के अंदर भी सनस्क्रीन लगाना जरूरी है। खिड़कियों से आने वाली यूवी किरणें सूरज की किरणें मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं- यूवीए और यूवीबी     यूवीबी किरणें स्किन बर्न का कारण बनती हैं, लेकिन ये कांच को पार नहीं कर पातीं। इसलिए घर के अंदर आपको सनबर्न नहीं होता।     यूवीए किरणें ज्यादा खतरनाक होती हैं, क्योंकि ये बादलों और खिड़की के कांच को आसानी से पार कर सकती हैं। ये किरणें त्वचा की गहराई तक जाती हैं और कोलेजन को डैमेज कर देती हैं। इसलिए अगर आप घर में ऐसी जगह बैठते हैं, जहां खिड़की से रोशनी आती है, तो आपकी त्वचा लगातार यूवीए किरणों के संपर्क में रहती है। इससे चेहरे पर काले धब्बे और झुर्रियां पड़ने का खतरा बना रहता है। डिजिटल स्क्रीन और ब्लू लाइट आज के दौर में हम अपना ज्यादातर समय स्मार्टफोन, लैपटॉप और टीवी की स्क्रीन के सामने बिताते हैं। इन डिजिटल उपकरणों से हाई एनर्जी विजिबल लाइट निकलती है, जिसे हम ब्लू लाइट कहते हैं। लंबे समय तक ब्लू लाइट के संपर्क में रहने से त्वचा में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है। यह स्ट्रेस त्वचा की रंगत को असमान बना सकता है और पिगमेंटेशन की समस्या को बढ़ा सकता है। इसलिए भी घर के अंदर सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना जरूरी है।   सही सनस्क्रीन कैसे चुनें? घर के अंदर आपको बहुत भारी या चिपचिपी सनस्क्रीन लगाने की जरूरत नहीं है। आप इन बातों का ध्यान रख सकते हैं-     SPF 30- घर के अंदर के लिए भी कम से कम SPF 30 वाला सनस्क्रीन इस्तेमाल करें।     ब्रॉड स्पेक्ट्रम- चेक करें कि आपकी सनस्क्रीन UVA और UVB दोनों से सुरक्षा दे।     लाइटवेट फॉर्मूला- जेल या लोशन बेस्ड सनस्क्रीन घर में लगाने के लिए बेहतर हैं, क्योंकि ये लाइट वेट होते हैं।  

घने और लंबे बाल चाहते हैं? रुकी हुई हेयर ग्रोथ के लिए ट्राई करें दही के ये 5 असरदार हेयर मास्क

बालों की खूबसूरती और मजबूती के लिए हम अक्सर महंगे प्रोडक्ट्स पर हजारों रुपये खर्च कर देते हैं, लेकिन असली खजाना हमारी रसोई में ही छिपा है। दही न केवल स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, बल्कि यह बालों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। दही में मौजूद लैक्टिक एसिड, प्रोटीन और विटामिन बालों की जड़ों को पोषण देते हैं। साथ ही, यह स्कैल्प को एक्सफोलिएट करके डेड सेल्स और गंदगी साफ करता है। इसलिए अगर आप गिरते बालों या रुकी हुई हेयर ग्रोथ से परेशान हैं, तो दही से बने ये 5 हेयर मास्क आपके लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं। दही और करी पत्ता मास्क करी पत्ता बीटा-कैरोटीन और प्रोटीन से भरपूर होता है, जो बालों को झड़ने से रोकता है। इस हेयर मास्क को बनाने के लिए आधा कप दही में एक मुट्ठी करी पत्तों का पेस्ट मिलाएं। इसे स्कैल्प पर लगाकर 30 मिनट छोड़ दें और फिर माइल्ड शैम्पू से धो लें। दही, शहद और नींबू अगर डैंड्रफ की वजह से आपके बाल नहीं बढ़ रहे हैं, तो यह मास्क सबसे बेस्ट है। नींबू के एंटी-बैक्टीरियल गुण और शहद की नमी बालों को रेशमी बनाती है। इसके लिए एक कटोरी दही में एक चम्मच शहद और आधा नींबू का रस मिलाएं। इसे बालों की जड़ों में लगाएं और 20 मिनट बाद धो लें। यह स्कैल्प के pH लेवल को बैलेंस करता है। दही और अंडा मास्क बाल मुख्य रूप से केराटिन से बने होते हैं। अंडा और दही मिलकर बालों को जबरदस्त प्रोटीन डोज देते हैं। इसे बनाने के लिए एक अंडा फेंटें और उसमें 2-3 चम्मच दही मिलाएं। इसे पूरे बालों में लगाएं। 30 मिनट बाद ठंडे पानी से धोएं। गर्म पानी का इस्तेमाल न करें, वरना अंडा बालों में चिपक सकता है। यह मास्क बालों को घना बनाता है। दही और मेथी दाना मेथी में निकोटिनिक एसिड होता है जो बालों की री-ग्रोथ में मदद करता है। इसे बनाने के लिए रात भर भीगी हुई मेथी को पीसकर पेस्ट बना लें और इसे दही में मिलाएं। इसे स्कैल्प पर लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें और 45 मिनट बाद धो लें। यह बालों को जड़ों से मजबूती देता है। दही और एलोवेरा रूखे और बेजान बालों की ग्रोथ अक्सर रुक जाती है। एलोवेरा दही के साथ मिलकर स्कैल्प को हाइड्रेट करता है। इसे बनाने के लिए ताजे एलोवेरा जेल को दही के साथ बराबर मात्रा में मिलाएं। इसे बालों की लंबाई और जड़ों पर लगाएं। 1 घंटे बाद धो लें। इससे बाल उलझना कम होंगे और टूटना बंद हो जाएंगे। इन बातों का रखें ध्यान     ताजा दही- हमेशा ताजे और सादे दही का ही इस्तेमाल करें।     नियमितता- अच्छे परिणाम के लिए इनमें से कोई भी मास्क हफ्ते में कम से कम एक बार जरूर लगाएं।     पैच टेस्ट- अगर आपकी स्किन सेंसिटिव है, तो इस्तेमाल से पहले एक छोटा पैच टेस्ट जरूर कर लें।  

महिला स्व-सहायता समूहों को मिलेगा नया आयाम, मखाना उत्पादन से जुड़ेंगे किसान

रायपुर वनांचल क्षेत्र में आय के नए स्रोत- मखाना खेती से सशक्त होंगे महिला समूह  मखाना एक ऐसा पौधा है जो तालाबों, दलदलों और आर्द्रभूमि जैसे स्थिर जल निकायों में उगाया जाता है। इसका प्रसार बीजों द्वारा होता है और अंकुरण के लिए पूर्णतः परिपक्व बीजों की आवश्यकता होती है। मखाना की खेती में न्यूनतम खर्च आता है क्योंकि पिछले फसल से बचे हुए बीजों से नए पौधे आसानी से अंकुरित हो जाते हैं। पोषक तत्वों से भरपूर होने और नकदी फसल के रूप में किसानों की आय को दोगुना करने की अपार क्षमता को देखते मिलता है। मखाना खेती से धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलेगी ।  छोटी छोटी डबरी से समृद्धि तक धमतरी की महिलाओं को मखाना खेती में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह दिखायी दे रही है । शासकीय प्रयासों का प्रतिफल है कि मखाना खेती से धमतरी में आर्थिक सशक्तिकरण होगा ।                   उल्लेखनीय है कि केंद्रीय कृषिमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने धमतरी प्रवास के दौरान जिले को मखाना बोर्ड में शामिल करने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद जिला प्रशासन द्वारा मखाना उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है।                   धमतरी जिले के नगरी वनांचल क्षेत्र में आजीविका संवर्धन की दिशा में एक नई पहल के तहत मखाना खेती की तैयारी स्व-सहायता समूहों के माध्यम से प्रारंभ की गई है। जिले में कुल 100 एकड़ भूमि मखाना उत्पादन के लिए चिन्हांकित की गई है। प्रारंभिक चरण में संकरा क्षेत्र में 25 एकड़ रकबे में मखाना की खेती की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।                   विशेषज्ञों के अनुसार नगरी क्षेत्र की जलवायु, पर्याप्त जल उपलब्धता एवं प्राकृतिक वातावरण मखाना उत्पादन के लिए अनुकूल है। इससे स्थानीय किसानों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त होंगे। इस पहल से वनांचल क्षेत्र में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।                  कलेक्टर धमतरी बीते दिनों संकरा पहुंचकर मखाना खेती की तैयारियों का अवलोकन किया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि “मखाना खेती नगरी वनांचल क्षेत्र के लिए आय वृद्धि का प्रभावी माध्यम बन सकती है। स्व-सहायता समूहों को तकनीकी प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज एवं विपणन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। हमारा प्रयास है कि धमतरी जिला प्रदेश में मखाना उत्पादन का मॉडल विकसित करे।”                   कलेक्टर ने यह भी निर्देशित किया कि कृषि एवं उद्यानिकी विभाग समन्वय बनाकर किसानों को प्रशिक्षण प्रदान करें तथा जल प्रबंधन एवं फसल संरक्षण पर विशेष ध्यान दें। आने वाले समय में चरणबद्ध रूप से रकबे का विस्तार कर अधिक से अधिक समूहों को इस पहल से जोड़ा जाएगा। जिला प्रशासन की इस पहल से नगरी वनांचल क्षेत्र में आर्थिक सशक्तिकरण की नई संभावनाएं साकार होती दिखाई दे रही हैं।

‘फिट इंडिया’ के तहत तीन दिवसीय इंटरनेशनल महिला कार्निवल का शुभारंभ

नई दिल्ली फिट इंडिया मूवमेंट ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में शनिवार से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस कार्निवल शुरू किया। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस आठ मार्च को मनाया जाता है। इस कार्यक्रम की थीम ‘मजबूत महिलाएं, मजबूत राष्ट्र’ है। इसमें सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और दिल्ली पुलिस जैसे भारत के सशस्त्र बलों और सुरक्षा सेवाओं से जुड़ी 500 से अधिक महिलाएं भाग ले रही हैं। इसमें फिटनेस गतिविधियों और खेलों के माध्यम से महिलाओं की ताकत, लचीलेपन और नेतृत्वक्षमता को उजागर किया जा रहा है। इस कार्यक्रम की शुरुआत में कई प्रख्यात हस्तियों ने भाग लिया और फिटनेस, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार रखे। इनमें पैरालंपिक पदक विजेता और अर्जुन पुरस्कार पाने वाली प्रीति पाल, प्रसिद्ध पोषण विशेषज्ञ निधि निगम और तन्वी तुतलानी, उद्यमी युक्ति आर्य, ध्यान विशेषज्ञ निवेदिता श्रेयंस, योग विशेषज्ञ दिव्या आहूजा और पंखुड़ी श्रीवास्तव, फिजियोथेरेपिस्ट गरिमा बिस्वास और फिट इंडिया चैंपियन टिम्सी बेक्टर शामिल थीं। प्रीति पाल ने एक विज्ञप्ति में कहा, ‘‘जब मैंने खेल में अपने करियर की शुरुआत की, तो कई लोगों ने कहा कि मैं कुछ भी हासिल नहीं कर पाऊंगी। मैंने उन आलोचनाओं को प्रेरणा में बदल दिया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने ठान लिया था कि अगर वह मानते हैं कि मैं कुछ नहीं कर सकती तो मैं साबित कर दूंगी कि मैं बहुत कुछ कर सकती हूं। हमेशा याद रखें कि हम महिलाएं हैं और हम कुछ भी हासिल कर सकती हैं, कभी किसी को यह न कहने दें कि आप अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकतीं।’’  

MP के इस जिले में BJP का संगठन विस्तार, नई मंडल कार्यकारिणी में 25 पदाधिकारी नियुक्त

सुसनेर भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से सुसनेर मंडल की नई कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है। मंडल अध्यक्ष डॉ. सौरभ जैन ने 25 पदाधिकारियों को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपते हुए संगठन को और सक्रिय बनाने का संदेश दिया है। घोषित कार्यकारिणी में कल्याण सिंह, अभय जैन, पीरू सिंह सारखा, जसवंत सिंह पालड़ा, मानसिंह गुराड़ी और कमल भावसार को मंडल उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं लखन सेन और बनास कुंवर कालूसिंह चौहान को मंडल महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंडल मंत्री के रूप में गोपाल सिंह, जितेंद्र सिंह राजपूत, हेमराज जाट, कमलसिंह सेमली, सिद्धू सिंह पटपड़ा और दुर्गाबाई विक्रम चौहान को शामिल किया गया है। दिनेश कानुडिया को कोषाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि ईश्वर सिंह पटेल और गोपाल पाटीदार को सह-कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। संगठन के संचालन के लिए अनिल जैन को कार्यालय मंत्री बनाया गया है। उनके सहयोग के लिए नारायण सिंह कलारिया और मनोज सुमन को सह कार्यालय मंत्री नियुक्त किया गया है। मीडिया और आईटी से जुड़े दायित्वों में दीपक जैन को मीडिया प्रभारी, स्नेहा युगल किशोर परमार को सह मीडिया प्रभारी बनाया गया है। वहीं यशवंत बैरागी को सोशल मीडिया प्रभारी, सिया भावसार को सह सोशल मीडिया प्रभारी तथा कार्तिक शर्मा को आईटी सेल प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंडल अध्यक्ष ने कहा कि नई टीम संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मिलकर कार्य करेगी।

MP Health Alert: खसरे के 12 नए मरीज मिले, 4 जिलों में सतर्कता और सर्वे अभियान

भोपाल मध्य प्रदेश में एक बार फिर संक्रामक बीमारी खसरे (मीजल्स) ने पैर पसारना शुरू कर दिया है। फरवरी 2024 के बाद, अब 2026 में प्रदेश के चार जिलों- अलीराजपुर, दतिया, शिवपुरी और बुरहानपुर में खसरे के 12 नए मामले सामने आए हैं। इन क्षेत्रों में बुखार, शरीर पर दाने और खांसी के लक्षणों वाले मरीजों की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी कर दिया है। गौरतलब है कि साल 2024 में मैहर में खसरे से दो बच्चों की मौत हो गई थी, जिसके बाद अब मिल रहे नए केस ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। प्रभावित जिलों की स्थिति: कहां कितने मरीज? स्वास्थ्य विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम (RRT) ने प्रभावित गांवों का दौरा कर सैंपल लिए, जिसकी रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है: बुरहानपुर (बरौली गांव): यहां स्थिति सबसे गंभीर है, जहां भेजे गए सभी 5 सैंपल पॉजिटिव पाए गए हैं। संक्रमितों की उम्र 2 से 25 वर्ष के बीच है। दतिया (आगोरा गांव): यहां 8 में से 3 मरीज पॉजिटिव मिले हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यहां संक्रमितों की आयु सीमा 0 से 40 वर्ष तक है। शिवपुरी (गुदर गांव): खनियाधाना क्षेत्र में 5 में से 3 केस पॉजिटिव आए हैं (उम्र 4 से 15 वर्ष)।    अलीराजपुर (कांडा-चुलिया): जोबट क्षेत्र में 6 में से 1 केस पॉजिटिव मिला है। संक्रमण फैलने का मुख्य कारण ‘टीकाकरण में चूक’ खसरे के दोबारा उभरने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। विमुक्त और घुमक्कड़ समुदायों के लगातार स्थान बदलने के कारण बच्चों का नियमित टीकाकरण चक्र टूट जाता है।    महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने से कई बच्चे वैक्सीन की अनिवार्य डोज से वंचित रह गए थे। बच्चों के लिए जानलेवा हो सकता है खसरा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, खसरा न केवल श्वसन तंत्र पर हमला करता है, बल्कि बच्चों में अंधेपन (Blindness) का भी एक बड़ा कारण है। दुनिया भर में हर साल करीब 60 हजार बच्चे इसके कारण अपनी आंखों की रोशनी खो देते हैं। प्रमुख लक्षण और जटिलताएं     तेज बुखार, खांसी और शरीर पर लाल चकत्ते।     उल्टी, डायरिया और गंभीर डिहाइड्रेशन।     जटिल मामलों में निमोनिया और मस्तिष्क में सूजन (Encephalitis) बचाव और सरकारी प्रयास     नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) और स्वास्थ्य संचालनालय ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और घर-घर सर्वे शुरू कर दिया है मरीजों को लक्षणों के आधार पर दवाइयां और विटामिन-ए सॉल्यूशन दिया जा रहा है। विटामिन-ए की दो डोज संक्रमण की गंभीरता को कम करने में सहायक होती हैं विशेषज्ञों का कहना है कि मीजल्स-रुबेला (MR) वैक्सीन की दोनों डोज समय पर लगवाना ही इससे बचने का एकमात्र प्रभावी तरीका है।    ग्रामीणों और शिक्षकों को सलाह दी गई है कि संक्रमित मरीज को अलग (Isolate) रखें और साफ-सफाई व पोषण का विशेष ध्यान दें।  

निधि योजना के तहत उत्तर प्रदेश के 25 महिला संचालित स्टार्टअप्स को मिली वित्तीय सहायता

लखनऊ अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश में महिला उद्यमिता की बढ़ती ताकत साफ दिखाई दे रही है। प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार के साथ महिलाओं की भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है। प्रदेश में 9,600 से अधिक महिला संचालित स्टार्टअप्स सक्रिय हैं और यह संख्या करीब 30 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ आगे बढ़ रही है। टेक्नोलॉजी, एग्रीटेक, हेल्थकेयर और सेवा क्षेत्रों में महिलाएं नवाचार के साथ अपनी मजबूत उपस्थिति और पहचान बना रही हैं। महिला संचालित स्टार्टअप्स की यह बढ़ती संख्या प्रदेश में बदलती आर्थिक और सामाजिक तस्वीर को भी दर्शाती है। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से उद्यमिता का एक नया मॉडल उभर रहा है, जो आत्मनिर्भरता, नवाचार और समावेशी विकास को आगे बढ़ा रहा है। प्रदेश में महिला उद्यमिता के इस विकास के पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों और प्रोत्साहन योजनाओं की अहम भूमिका मानी जा रही है। प्रदेश सरकार द्वारा लागू स्टार्टअप नीति और नवाचार को बढ़ावा देने वाली योजनाओं ने महिलाओं को उद्यमिता की ओर आकर्षित किया है। इन पहलों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, मेंटरशिप, इन्क्यूबेशन और वित्तीय सहायता जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे वे अपने व्यावसायिक विचारों को वास्तविक उद्यम में बदल पा रही हैं। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से शुरू किया गया निधि (नेशनल इनिशिएटिव फॉर डेवलपिंग एंड हर्नेसिंग इनोवेशन्स) कार्यक्रम महिला स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के 25 महिला स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इस सहयोग से कई महिला उद्यमियों को अपने नवाचार को आगे बढ़ाने और व्यवसाय को विस्तार देने का अवसर मिला है। स्टार्टअप विशेषज्ञ अजय चतुर्वेदी का कहना है कि शुरुआती दौर में मिलने वाली ऐसी वित्तीय सहायता स्टार्टअप्स के लिए बेहद अहम होती है और इससे नए उद्यमों को टिकाऊ बनने में सहायता मिलती है। वित्तीय समर्थन के मामले में यूपी स्टार्टअप फंड भी महिलाओं के लिए एक बड़ा सहारा बनकर उभरा है। योगी सरकार द्वारा बनाए गए 1000 करोड़ रुपये के यूपी स्टार्टअप फंड में से अब तक लगभग 325 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। इनमें 900 से अधिक महिला स्टार्टअप्स को लाभ मिला है। यह वित्तीय सहयोग महिलाओं को अपने स्टार्टअप को आगे बढ़ाने, नई तकनीक अपनाने और बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता प्रदान कर रहा है। उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों की महिलाएं भी इसमें सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। कई महिला उद्यमी टेक्नोलॉजी आधारित समाधान, एग्रीटेक प्लेटफॉर्म और सेवा क्षेत्र में नए मॉडल विकसित कर रही हैं। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, बल्कि नवाचार को भी नई दिशा मिल रही है।

निगम परिषद में कलेक्टर गाइड लाइन पर तीखी बहस, ग्वालियर में पुरानी दर से ही होगी टैक्स वसूली

ग्वालियर. वित्तीय वर्ष 2026-27 में कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार निगम कमिश्नर के संपत्तिकर की दरों के निर्धारण के प्रस्ताव पर शुक्रवार को नगर निगम परिषद की बैठक में चर्चा हुई। सभी पार्षदों ने एकजुट होकर प्रस्ताव का विरोध किया। विरोध को देखते हुए सभापति ने प्रस्ताव को वापस कर दिया और जनता को राहत देते हुए संपत्तिकर को पुरानी गाइड लाइन से ही वसूलने निर्णय लिया। हालांकि, संपत्तियों की बोगस आइडियों को लेकर सत्ता पक्ष व प्रतिपक्ष के पार्षदों में काफी बहस भी हुई और एक दूसरे पर कई तरह के आरोप भी लगाए। यहां तक कि बहस में अमर्यादित शब्दों का भी उपयोग हुआ। नगर निगम परिषद की बैठक शुक्रवार को दोपहर तीन बजे से स्थानीय जलविहार स्थित परिषद भवन में आयोजित हुई। इसकी अध्यक्षता पैनल सभापति गिर्राज कंषाना ने की। बता दें कि 26 फरवरी को हुए परिषद के विशेष सम्मेलन के एजेंडे में कमिश्नर के 2026-27 की कलेक्टर गाइड लाइन के मुताबिक संपत्तिकर की दरों के निर्धारण करने का प्रस्ताव शामिल था, लेकिन 26 फरवरी को इस इस बिंदु पर चर्चा नहीं हो पाई थी और इस पर चर्चा करने के लिए शुक्रवार को विशेष सम्मेलन बुलाया गया। संपत्तियों की ID व राजस्व बढ़ाने पर अधिक चर्चा सम्मेलन में सत्ता पक्ष व प्रतिपक्ष ने एजेंडे के बिंदु पर तो कम चर्चा की, बल्कि शहर की बोगस संपत्तियों की ID हटाने, 40 प्रतिशत शहर जो संपत्तिकर के दायरे में नहीं हैं, उन्हें दायरे में लाने और पुराने ठहरावों पर अमल कराने पर अधिक बहस की। दोनों पक्ष एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहे। यहां तक कि कुछ प्रतिपक्ष के नेताओं ने तो सत्ता पक्ष, महापौर, एमआइसी व अफसरों पर भ्रष्टाचार करने व झूठी जानकारी देने के भी आरोप लगाए। हालांकि, सत्ता पक्ष प्रतिपक्ष के आरोपों का जवाब नहीं दे पाया। ऐसे में प्रतिपक्ष हावी रहा। किसने क्या कहा  – नेता प्रतिपक्ष हरिपाल ने कहा कि संपत्तियों की बोगस आइडियों को हटाने व नई ID बनाने के लिए 20 जुलाई 2023 व 19 जुलाई 2024 की बैठकों में ठहराव हुआ था, लेकिन निगम के अफसरों ने इसका अमल नहीं किया। अब जनवरी में इसका आदेश जारी किया है। ऐसे में निगम को राजस्व की हानि हो रही है। साथ ही शहर की 40 प्रतिशत संपत्तियां ऐसी हैं जिनसे कर वसूल नहीं किया जाता। इन संपत्तियों को वसूली के दायरे में लाया जाए। नई गाइड लाइन के मुताबिक संपत्तिकर वसूलने की जगह पुरानी दरों से ही वसूला जाए।     -भाजपा पार्षद देवेंद्र राठौर ने कहा कि संपत्तियों की ID न बनने से निगम को राजस्व की हानि हो रही है। साथ ही राजस्व वसूली न करने वालों पर सख्ती की जाए, ये संपत्तिकर वसूलने में कोताही बरतते हैं। इनकी तीन-तीन मंजिला कोठी बन गई हैं। राजस्व वसूली में 80 प्रतिशत इनकी जेब में जाता है। आइडी बनाने के भी पांच से दस हजार लेते हैं। पुराने ठहरावों पर अमल किया जाए।     – कांग्रेस पार्षद मनोज राजपूत ने BJP पार्षदों पर आरोप लगाया कि आपकी तानाशाही चल रही है, जबकि शहर में विकास हो रहा है और ग्वालियर बदल रहा है। भाजपा पार्षद विकास की नहीं, बल्कि उलझाने की बात करते हैं। संपत्तिकर को पुरानी गाइड लाइन से ही वसूल किया जाए।     – मदनमोहन सोनी ने कहा कि पुराने ठहराव 56 व 142 के पालन में निगम अफसरों क्या किया। ठहराव होने के दो साल में कितनी बोगस आइडी हटाई और कितनी बनाई, इसका बात का डेटा अफसरों को देना चाहिए। तभी पता चलेगा कितना काम हुआ है। पोर्टल की कमियों को दूर किया जाए, क्योंकि वहां संपत्तिकर दो साल का जमा होना है, लेकिन उस पर निकल छह साल का रहा है। नेता प्रतिपक्ष के अमर्यादित बोल -‘…आपको नहीं मिलेगी MIC’ कांग्रेस पार्षद मनोज राजपूत के प्रतिपक्ष पर विकास में सहयोग न करने के आरोप पर नेता प्रतिपक्ष हरिलाल ने उनसे अमर्यादित शब्दावली में कहा, ‘आपको MIC नहीं मिलेगी।’ हालांकि, नेता प्रतिपक्ष के इस कथन के बाद परिषद में अन्य पार्षदों ने थोड़ा हंगामा किया और उन्हें मर्यादित शब्दों का उपयोग करने के लिए कहा।

शीतलाष्टमी का पर्व: 10 मार्च को रांधा-पुआ, 11 मार्च को पूजा-अर्चना

जयपुर होली के बाद सातवें और आठवें दिन देवी शीतला माता की पूजा की परंपरा है। इन्हें शीतला सप्तमी या शीतलाष्टमी कहा जाता है। शीतला माता का जिक्र स्कंद पुराण में मिलता है। पौराणिक मान्यता है कि इनकी पूजा और व्रत करने से चेचक के साथ ही अन्य तरह की बीमारियां और संक्रमण नहीं होता है। ज्योतिषाचार्या ने बताया कि चैत्र मास में शीतला माता के लिए शीतला सप्तमी  10 मार्च और अष्टमी 11 मार्च का व्रत-उपवास किया जाता है। इस व्रत में ठंडा खाना खाने की परंपरा है। जो लोग ये व्रत करते हैं, वे एक दिन पहले बनाया हुआ खाना ही खाते हैं। 9 और 10 मार्च को रांधा पुआ होगा। जहां पर शीतला सप्तमी मनाई जाएगी। वहां पर 9 मार्च को रांधा पुआ होगा। जहां पर शीतला अष्टमी मनाई जायेगी। वहां पर 10 मार्च को रांधा पुआ होगा। कहीं पर सप्तमी के दिन और कहीं पर अष्टमी के दिन ठंडा भोजन किया जाता है। दरअसल, ये समय शीत ऋतु के जाने का और ग्रीष्म ऋतु के आने का समय है। इस दौरान मौसमी बीमारियां होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। शीतला सप्तमी और अष्टमी पर ठंडा खाना खाने से हमें मौसमी बीमारियों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है। ऐसी मान्यता है।  बसौड़ा हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है। शीतला अष्टमी को ’बसौड़ा पूजा’ के नाम से भी जाना जाता है। बसौड़ा पूजा, शीतला माता को समर्पित लोकप्रिय त्योहार है। यह त्योहार चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। आमतौर पर यह होली के आठ दिनों के बाद पड़ता है लेकिन कई लोग इसे होली के बाद पहले सोमवार या शुक्रवार को मनाते हैं। बसौड़ा या शीतला अष्टमी का यह त्योहार उत्तर भारतीय राज्यों जैसे गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में अधिक लोकप्रिय है। राजस्थान राज्य में शीतला अष्टमी का त्यौहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस अवसर मेलां व लोक संगीत के कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। भक्त इस पर्व को बड़े ही हर्षोल्लास और भक्ति के साथ मनाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस चुने हुए दिन पर व्रत रखने से उन्हें कई तरह की बीमारियों से बचाव होता है। बच्चों को बीमारियों से दूर रखने के लिए और उनकी खुशहाली के लिए इस त्योहार को मनाने की परंपरा बरसों से चली आ रही है। कुछ स्थानों पर शीतला अष्टमी को बासौड़ा भी कहा जाता है। इस दिन माता शीतला की बासी भोजन का भोग लगाने की परंपरा है और स्वयं भी प्रसाद के रूप में बासी भोजन ही करना होता है। नाम के अनुसार ही शीतला माता को शीतल चीजें पसंद हैं। मां शीतला का उल्लेख सर्वप्रथम स्कन्दपुराण में मिलता है। इनका स्वरूप अत्यंत शीतल है और कष्ट-रोग हरने वाली हैं। गधा इनकी सवारी है और हाथों में कलश, सूप, झाड़ू और नीम के पत्ते हैं। मुख्य रूप से इनकी उपासना गर्मी के मौसम में की जाती है। शीतला सप्तमी और अष्टमी कुछ जगह शीतला माता की पूजा चैत्र महीने के कृष्णपक्ष की सप्तमी को और कुछ जगह अष्टमी पर होती है। सप्तमी तिथि के स्वामी सूर्य और अष्टमी के देवता शिव होते हैं। दोनों ही उग्र देव होने से इन दोनों तिथियों में शीतला माता की पूजा की जा सकती है। निर्णय सिंधु ग्रंथ के मुताबिक इस व्रत में सूर्योदय व्यापिनी तिथि ली जाती है। शीतला सप्तमी वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि की शुरुआत 09 मार्च को देर रात 11:27 मिनट पर शुरू होगी और 10 मार्च को देर रात 01:54 मिनट पर समाप्त होगी। इस प्रकार यानी उदया तिथि से 10 मार्च को शीतला सप्तमी मनाई जाएगी। शीतला सप्तमी पर पूजा के लिए शुभ समय 10 मार्च को सुबह 06:24 मिनट से लेकर शाम 06:26 मिनट तक है। इस दौरान साधक देवी मां शीतला की पूजा कर सकते हैं।   शीतला सप्तमी शुभ योग चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इस दिन हर्षण योग का संयोग सुबह 08:21 मिनट तक है। इसके साथ ही रवि योग का भी संयोग है। इन योग में मां शीतला की पूजा करने से शुभ कामों में सफलता एवं सिद्धि मिलेगी। साथ ही आरोग्यता का वरदान मिलेगा। शीतला अष्टमी शुभ मुहूर्त चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 10 मार्च को रात 01:54 मिनट पर हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन 12 मार्च को सुबह 04:19 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार इस साल शीतला अष्टमी का व्रत 11 मार्च को रखा जाएगा। इस दिन ही बसौड़ा मनाया जाएगा। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मां शीतला की विशेष पूजा की जाती है। शीतला अष्टमी पर पूजा के लिए शुभ समय 11 मार्च को सुबह 06:03मिनट से लेकर शाम 05:56 मिनट तक है। इस दौरान साधक देवी मां शीतला की पूजा कर सकते हैं। स्कन्द पुराण में माता शीतला की अर्चना का स्तोत्र ‘शीतलाष्टक’ स्कन्द पुराण में माता शीतला की अर्चना का स्तोत्र ‘शीतलाष्टक’ के रूप में प्राप्त होता है। ऐसा माना जाता है कि- इस स्तोत्र की रचना स्वयं भगवान शंकर ने की थी। शास्त्रों में भगवती शीतला की वंदना के लिए यह मंत्र बताया गया है। मंत्र है- वन्देऽहंशीतलांदेवीं रासभस्थांदिगम्बराम्।। मार्जनीकलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्।। अगर आप अपने घर की सुख-समृद्धि बनाये रखना चाहते हैं तो आपको स्नान आदि के बाद शीतला माता के इस मंत्र का 51 बार जप करना चाहिए। मंत्र इस प्रकार है-    ऊँ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः। आज के दिन ऐसा करने से आपके घर की सुख-समृद्धि बनी रहेगी। साथ ही आपके परिवार के सदस्यों की सेहत भी अच्छी रहेगी। अगर आप भय और रोग आदि से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आपको देवी शीतला के इस मंत्र का 21 बार जप करना चाहिए। मंत्र है-     वन्देSहं शीतलां देवीं सर्वरोग भयापहम्। यामासाद्य निवर्तेत विस्फोटक भयं महत्।। अगर आप अच्छे स्वास्थ्य की कामना रखते हैं। साथ ही लंबी आयु का वरदान पाना चाहते हैं, तो आपको शीतलाष्टक स्त्रोत में दी गई इन पंक्तियों का जाप करना चाहिए। पंक्तियां इस प्रकार हैं-      मृणाल तन्तु सदृशीं नाभि हृन्मध्य संस्थिताम्। यस्त्वां संचिन्त येद्देवि तस्य मृत्युर्न जायते।। ऐसी प्राचीन … Read more

छत्तीसगढ़ का छिपा पर्यटन रत्न: जशपुर के चाय बागान और सोगड़ा आश्रम खींच रहे पर्यटकों को

बिलासपुर                                                              चाक पर रखी मिट्टी को सुन्दर सुराही का आकार देने का कार्य एक सिद्धहस्त कुम्हार ही कर सकता  है। मिट्टी से घड़ा बनाने का हुनर सीखते हुए  इस कुम्हार ने न  जाने कितने मिट्टी के घड़े और रोशनी देने वाले दिए तोड़े होंगे लेकिन उसकी भी जिद थी कि मुझे इस चाक पर काम करना है।  लगातार मिट्टी के साथ जुड़े रहकर कुम्हार इतना निपुण हो जाता है कि एक छोटा दिया भी अपनी खूबसूरती के साथ चाक से नीचे उतरने लगता है।  इसी तरह जंगलों पहाड़ों को भगवान मानने वाले आदिवासियों को अपने जंगलों की मिट्टी की पहचान खूब होती है।  पहाड़ों की ढलान पर पथरीली दोमट मिट्टी  की बार-बार खुदाई करके इसे सरस और  भुरभुरी बनाने की जिद ने इसे सोना बना दिया। ऐसी स्थिति में इन मेहनतकश  हाथों को चाय बागानों का  हुनर प्राप्त करने से कौन रोक सकता था। आदिवासी श्रम की पहचान जशपुर की सारुडीह पहाड़ियों के ढलान पर हंसते खिलखिलाते चाय के बगीचे अब छत्तीसगढ़ का हिस्सा बन चुके हैं।  साल वनों के बीच पहाड़ों की ढलान पर फैली चाय बागान की हरियाली पर्यटकों की अब पसंदीदा जगह बनती जा रही हैं।  इसी बगीचे की सारुडीह चाय और उसके बागान का सौंदर्य  यदि आप भी नजदीक से देखना चाहते हैं, तब आपको उत्तरी छत्तीसगढ़ के पूर्वी प्रवेश द्वार जशपुर की यात्रा करनी होगी।                                       जशपुर छत्तीसगढ़ का एक ऐसा जिला है जो झारखंड के गुमला, छत्तीसगढ़ के रायगढ़ एवं अंबिकापुर जिले की सीमा को आपस में साझा करता है।  विशाल भारत के मध्य प्रांत छत्तीसगढ़ के उत्तर पूर्व अंचल में बसा जशपुर ब्रिटिश शासन काल मे ब्रिटिश कमिश्नरी रांची का एक हिस्सा था। झारखंड राज्य से छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक वादियों में प्रवेश करने वालों के लिए जशपुर का यह पूर्वी द्वार स्वागत करता है। ऐतिहासिक विरासत के पन्नों में जशपुर की जानकारी स्पष्ट नहीं है लेकिन जितनी जानकारी उपलब्ध है वह इतनी रोचक है कि आप इसे जरूर जानना चाहेंगे।  कहते हैं कि 18 वीं सदी में डोम राजवंश का यहां शासन था  जिसे राजा सूर्यवंशी के बड़े बेटे सुजन राय ने हरा कर यहां अपना राज्य स्थापित किया।  विद्वान ज्योतिषी ठीक कहते हैं कि जिसके हाथों की भाग्य रेखा में राजयोग लिखा हो वह सन्यासी बनकर भी राजा बन जाएगा। एक छोटे से राज्य बंसवाड़ा में सुजन राय के पिता राज किया  करते थे।   शिकार के लिए निकले  सुजन राय की अनुपस्थिति में उनके पिता की अचानक मृत्यु हो गई। राजा की मृत्यु की सूचना से पहले राजगद्दी सूनी नहीं रहनी चाहिए, ऐसा कह कर वहां के बुजुर्गों ने छोटे भाई को राजगद्दी पर बैठा दिया। शिकार से लौटने के बाद सुजान राय को स्थितियों से अवगत कराया गया और सुजान राय को उनके पिता के राजगद्दी संभालने का प्रस्ताव दिया गया।  सुजन राय ने छोटे भाई को सौंपी सत्ता वापस लेना उचित नहीं है ऐसा सोचकर वे सन्यासी बनकर जंगलों की ओर प्रस्थान कर गए। अपने संन्यासी जीवन में यहां वहां  घूमते हुए वे खुड़िया गांव पहुंचे।  यहां के डोम राजा के कार्यों से वहां के निवासी असंतुष्ट थे और बगावत के लिए पूरी तैयारी कर ली थी।  बगावती लोगों के अनुरोध को मानकर सुजन राय ने इस संगठन का  नेतृत्व करना स्वीकार किया और डोम राजा रायबन को हराकर स्वयं वहां के राजा बन बैठे।  इसी खुड़िया का विस्तार बाद में जशपुर रियासत कहलाया। राज्य और सत्ता का यह खेल समय-समय पर  रियासतों के साथ हमेशा से होता रहा है।  सूजन राय जशपुर रियासत के अंतिम दिनों तक राजा रहे।  1905 तक ब्रिटिश शासन के छोटा नागपुर कमिश्नरी के अधीन रहने वाला जशपुर छत्तीसगढ़ के 14 रियासतों में से एक था।  कुछ छोटी रियासतों के साथ इसे भी सरगुजा ग्रुप में रखा गया था। प्रत्येक रियासत अपनी सुरक्षा के लिए ब्रिटिश सरकार को वार्षिक शुल्क टिकोली, रैयतवाड़ी या खिराज के नाम से देती थी।  यह शुल्क लेकर ब्रिटिश शासन रियासतों को सुरक्षा देने का वादा  करती थी।  अपने रियासत में सत्तारूढ़ रहते हुए स्वतंत्र रूप से राज करने तथा व्यापारियों और किसानों से शुल्क वसूलने की स्वतंत्रता देती थी।                                आजादी के बाद मध्य प्रदेश बनने पर जशपुर  रायगढ़ जिले का हिस्सा था और 25 मई 1998 को  नया जिला घोषित किया गया। सघन साल वनों से घिरा लगभग 6200 वर्ग किलोमीटर का जशपुर जिला अपने क्षेत्रफल का लगभग 900 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र का जंगल समेटे हुए है।  उत्तर से दक्षिण तक डेढ़ सौ किलोमीटर एवं पूर्व पश्चिम में 85 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला यह जिला अपने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ झील और झरनों के पर्यटन केंद्र के रूप में उभर रहा है। दो भागों में बंटा हुआ जशपुर भौगोलिक रूप से ऊपरी घाट एवं दक्षिणी भाग को नीच घाट के नाम से जाना जाता है ऊपरी घाट पन्डरा पाठ का हिस्सा ज्यादा ठंडा है। इसी घाट से गुजरते हुए  जशपुर से कुनकुरी और कैलाश गुफा (बगीचा) जाने वाले रास्ते का घुमाव “लोरो घाटी”  कहलाता है। घाट की ऊंचाई से नीचे गुजरते हुए बस से देखने पर ऐसा लगता है मानो किसी बच्चे ने अपनी काले स्लेट पर स्लेट पेंसिल से टेढ़ी-मेढ़ी लकीरें खींच दी हो। प्रकृति के खींचे गए इस तरह के प्राकृतिक दृश्य और बिम्ब एक सिद्ध हस्त कलाकार की ऐसी पेंटिंग है जो बिरले देखने को मिलती है।                              जशपुर के प्राकृतिक स्थलों में रानी दाह झरना, रजपुरी जलप्रपात,  अवधूत भगवान श्री राम का सोगड़ा अघोर आश्रम और सारुडीह चाय बागान जैसे पर्यटन स्थल पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।  विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग  “मधेसर पहाड़”  भी जशपुर जिले का हिस्सा है। पर्यटन के क्षेत्र में जशपुर जिला अपनी चाय बागानों के कारण पर्यटको की पसंदीदा जगह बनता जा रहा है।   जशपुर जिला  मुख्यालय से  साल वनों के … Read more

रमजान माह हो या श्रवाण माह -इबादत करों या भक्ति एक ही है।

बड़वानी  बड़वानी निवासी पिंकी गुप्ता द्वारा हाल ही में चल रहे रमजान माह के साथ रंगो का त्योहार होली में एक मिशाल पेश करते हुए। रंग ओर रहमत दोनों त्योहार को मनाते हुए हिन्दू मुस्लिम एकता का संदेश दिया। पिंकी गुप्ता मित्रों में जया शर्मा, प्रिया सोनी, निकिता,राजा परिहार,ओर अन्य मित्रगण के साथ मिलकर हम सब एक हैं हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई हम सब भाई भाई तर्ज़ पर संदेश दिया। भाजपा महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष मुनिरा सालिवाला एवं रानी खांन रमजान के पवित्र माह में मुस्लिम धर्म अनुसार प्रतिदिन बिना कुछ खाये पिये रोज़ा रख रहे हैं बड़वानी शहर के सामाजिक संगठनों द्वारा प्रतिदिन अलग अलग संगठन उनका रोज़ा शाम की नमाज़ के बाद फल फ्रुट एवं पेय पदार्थों के साथ खुलवाते। बड़वानी शहर में ज्यादा से ज्यादा यह शुभ कार्य पिंकी गुप्ता अपने मित्रमंडली के साथ कर रहे हैं। उक्त कार्य करने से बड़वानी शहर में सभी धर्मों एवं सभी वर्गों में खुशी का माहौल है।

महिला हॉकी विश्व कप 2026 के लिए भारतीय टीम तैयार, क्वालिफिकेशन में झोंकेगी पूरी ताकत

हैदराबाद.  भारत की महिला नेशनल फील्ड हॉकी टीम रविवार से हैदराबाद, तेलंगाना में शुरू हो रहे एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप क्वालिफायर 2026 में महिला हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में अपनी जगह पक्की करने के लक्ष्य के साथ उतरेगी। इस टूर्नामेंट में मेजबान भारत के अलावा इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, कोरिया, इटली, उरुग्वे, वेल्स और ऑस्ट्रिया शामिल हैं। सभी 8 टीमों को 4-4 के दो ग्रुप में बांटा गया है। ग्रुप ए में इंग्लैंड, कोरिया, इटली और ऑस्ट्रिया हैं, जबकि ग्रुप बी में भारत, स्कॉटलैंड, उरुग्वे और वेल्स हैं। प्रत्येक ग्रुप से 2-2 टीमें सेमीफाइनल में जाएंगी। फाइनल के अलावा एक कांस्य पदक मैच होगा। टूर्नामेंट में पहला, दूसरा और तीसरा स्थान हासिल करने वाली टीमें विश्व कप 2026 के लिए सीधा क्वालिफिकेशन हासिल करेंगी। इसके अलावा, हैदराबाद में चौथे स्थान पर रहने वाली दुनिया की सबसे ऊंची रैंक वाली टीम को भी टूर्नामेंट में जगह मिलेगी। आने वाले वर्ल्ड कप में पुरुषों और महिलाओं दोनों के कॉम्पिटिशन में 16 टीमें होंगी, जिसमें हर कैटेगरी में नौ टीमें पहले ही क्वालिफिकेशन हासिल कर चुकी हैं। भारत हैदराबाद में शानदार प्रदर्शन के लिए मजबूत घरेलू समर्थन पर भरोसा करेगा। टीम हाल ही में नियुक्त मुख्य कोच शोर्ड मारिन के नेतृत्व में खेलेगी। भारत अभी दुनिया में नौवें स्थान पर है और इंग्लैंड के बाद टूर्नामेंट में दूसरी सबसे ऊंची रैंक वाली टीम है, जो दुनिया भर में सातवें स्थान पर है। भारत टूर्नामेंट में विश्व कप में जगह बनाने के इरादे से उतरेगी। इंडियन टीम अपने कैंपेन की शुरुआत 8 मार्च को उरुग्वे के खिलाफ करेगी। 9 मार्च और 11 मार्च को स्कॉटलैंड और वेल्स के खिलाफ मैच होंगे। भारतीय महिला हॉकी टीम अब तक वर्ल्ड कप के आठ एडिशन खेल चुकी है। सबसे अच्छा प्रदर्शन 1974 में रहा था, जब टीम चौथे स्थान पर रही थीं। टूर्नामेंट से पहले, “भारतीय कप्तान सलीमा टेटे ने कहा, “हम अपने फैन्स के सामने अपने घर पर क्वालिफायर खेलने के लिए बहुत उत्साहित हैं। टीम इस टूर्नामेंट के लिए बहुत मेहनत कर रही है क्योंकि हम जानते हैं कि क्या दांव पर लगा है। यहां हर टीम विश्व कप में जगह बनाने के लिए मुकाबला कर रही है। हमें शुरू से ही मुश्किल मैचों की उम्मीद है।” उन्होंने कहा, “हैदराबाद में खेलना हमारे लिए बहुत खास होगा। घरेलू दर्शकों का हमेशा प्रेरणा देता है। हमारा फोकस एक बार में एक ही मैच पर रहने और अपना श्रेष्ठ देने पर होगा ताकि हम अच्छा प्रदर्शन कर सकें और विश्व कप में अपनी जगह पक्की कर सकें।”

कटनी में मनचले की पिटाई का वीडियो वायरल, आपत्तिजनक पोस्ट से नाराज़ युवती ने चप्पलों से धुना

कटनी स्लीमानाबाद थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां एक युवती ने छेड़छाड़ और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले 42 वर्षीय युवक की बीच बाजार चप्पलों से धुनाई कर दी। शनिवार को युवती का युवक पर चप्पलों से वार करते वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। फोटो एडिट कर आपत्तिजनक पोस्ट का आरोप जानकारी के मुताबिक, उमरियापान निवासी आरोपी शाकिर मंसूरी (42 वर्ष) पिछले काफी समय से युवती को सोशल मीडिया के माध्यम से परेशान कर रहा था। युवक ने युवती को इंस्टाग्राम पर कई बार फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी, जिसे युवती लगातार अस्वीकार करती रही। इसके बाद युवक ने युवती की प्रोफाइल से उसकी तस्वीरें चोरी कीं और उन्हें एडिट कर अपनी फोटो के साथ जोड़कर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक तरीके से पोस्ट कर दिया। बीच बाजार फूटा युवती का गुस्सा शुक्रवार को जब युवती स्लीमानाबाद बाजार में थी, तभी उसकी नजर आरोपित शाकिर मंसूरी पर पड़ गई। युवती ने तुरंत उसे रोका और विरोध जताया। देखते ही देखते युवती का गुस्सा फूट पड़ा और उसने सरेराह चप्पलों से आरोपी की पिटाई शुरू कर दी। बीच बाजार हुई इस घटना को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच शुरू घटना के बाद युवती सीधे स्लीमानाबाद थाने पहुंची और मामले की शिकायत दर्ज कराई। स्लीमानाबाद थाना प्रभारी सुदेश समन ने कहा कि युवती की शिकायत के आधार पर युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। आरोपित मजदूरी का काम करता है और पीड़िता ने उस पर लगातार परेशान करने का आरोप लगाया है। पुलिस अब युवक द्वारा सोशल मीडिया पर डाले गए आपत्तिजनक कंटेंट की भी तकनीकी जांच कर रही है।  

कल बंद होंगे NEET आवेदन: देश में 1.29 लाख MBBS सीटें, इन 4 बदलावों पर रखें नजर

नई दिल्ली नीट यूजी 2026 के लिए कल 8 मार्च 2026 आवेदन की अंतिम तिथि है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा में बैठने के इच्छुक जिन अभ्यर्थियों ने अभी तक आवेदन नहीं किया है, वे फौरन neet.nta.nic.in पर जाकर एप्लाई करें। अभ्यर्थी 10 मार्च से 12 मार्च के बीच आवेदन फॉर्म में करेक्शन कर सकेंगे। एग्जाम सिटी व एडमिट कार्ड की डेट को लेकर एनटीए बाद में सूचित करेगा। नीट यूजी परीक्षा 3 मई, 2026 को होगी। नीट परीक्षा के जरिए देश के एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीयूएमएस, बीएचएमएस, बीएससी नर्सिंग, बीवीएससी एंड एएच कोर्सेज में दाखिला मिलता है। इस वर्ष से फिजियोथेरेपी कोर्स में भी नीट यूजी से ही दाखिला होंगे। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के ताजा आंकड़ों मुताबिक देश के 824 मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 129603 हजार सीटें हैं। देश में सरकारी मेडिकल संस्थानों की संख्या 450 और एमबीबीएस सीटों की संख्या 63160, निजी मेडिकल संस्थानों की संख्या 374 और एमबीबीएस सीटों की संख्या 66443 है। 4 अहम बदलाव 1- रियल-टाइम लाइव फोटो इस बार आवेदन प्रक्रिया में कई अहम बदलाव किए गए हैं। एनटीए ने रियल-टाइम लाइव फोटो को अनिवार्य कर दिया है। एनटीए के नोटिफिकेशन के अनुसार अब केवल पुरानी पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करना पर्याप्त नहीं होगा। फॉर्म भरते समय उम्मीदवारों को वेबकैम या मोबाइल कैमरे से अपनी लाइव फोटो क्लिक करनी होगी। फोटो लेते समय टोपी, नजर का चश्मा या धूप का चश्मा पहनना मना है। एनटीए ने निर्देश दिया है कि फोटो में उम्मीदवार का चेहरा फ्रेम का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा कवर करे। चेहरे पर किसी तरह की छाया, मास्क या फिल्टर नहीं होना चाहिए। 2. आधार आधारित eKYC हुआ अनिवार्य नीट यूजी 2026 के लिए आधार आधारित eKYC को अनिवार्य कर दिया गया है। आवेदन करने वाले छात्रों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके आधार कार्ड से जुड़ा मोबाइल नंबर चालू हो। NTA ने साफ तौर पर कहा है कि आवेदन से पहले आधार से लिंक मोबाइल नंबर में नेटवर्क होना जरूरी है, ताकि वेरिफिकेशन के दौरान कोई दिक्कत न आए। आधार कार्ड का एक्टिव मोबाइल नंबर से लिंक होना जरूरी है, क्योंकि रजिस्ट्रेशन ओटीपी के जरिए आगे बढ़ेगा। 3- रैंडम परीक्षा केंद्र नहीं चुन सकेंगे रैंडम परीक्षा केंद्र नहीं चुन सकेंगे अब छात्र अपनी मर्जी से किसी भी रैंडम शहर को परीक्षा केंद्र नहीं चुन सकेंगे। नए नियमों के अनुसार केंद्र का आवंटन केवल उम्मीदवार के स्थायी या वर्तमान पते के आधार पर होगा। गलत पता भरने पर आवेदन रद्द हो सकता है। 4- इस वर्ष से देश भर में फिजियोथेरेपी कोर्स में भी नीट यूजी से ही दाखिला होंगे।

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