LATEST NEWS

सिखों के आनंद विवाह रजिस्ट्रेशन के लिए नई नियमावली को कैबिनेट ने दी मंजूरी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में निर्माणाधीन दो महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं में उत्तर प्रदेश की वित्तीय हिस्सेदारी को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने लखवार मल्टीपरपज प्रोजेक्ट और रेणुकाजी डैम प्रोजेक्ट के लिए राज्य के हिस्से की धनराशि खर्च करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। लखवार बहुउद्देशीय परियोजना कैबिनेट ने उत्तराखंड के देहरादून और टिहरी गढ़वाल जिले के लोहारी गांव के पास यमुना नदी पर निर्माणाधीन लखवार बहुउद्देशीय परियोजना में उत्तर प्रदेश के हिस्से के रूप में 356.07 करोड़ रुपये खर्च करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस परियोजना की पुनरीक्षित लागत 5747.17 करोड़ रुपये (प्राइस लेवल 2018) है। परियोजना के तहत 204 मीटर ऊंचा बांध, 300 मेगावाट क्षमता का भूमिगत बिजलीघर और एक बैराज के साथ संतुलन जलाशय (Balancing Reservoir) का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना में लाभार्थी राज्यों द्वारा वहन की जाने वाली कुल लागत 1146.69 करोड़ रुपये है, जिसमें उत्तर प्रदेश का जल उपभोग शेयर 31.05 प्रतिशत है। इस परियोजना से हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित लाभार्थी राज्यों के लगभग 33,780 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए 78.83 एमसीएम जल तथा 300 मेगावाट (572.54 मिलियन यूनिट) आकस्मिक विद्युत उत्पादन का भी प्रावधान है। इस परियोजना को वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था और इसे दिसंबर 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रेणुकाजी बांध परियोजना कैबिनेट ने हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में गिरी नदी पर निर्माणाधीन रेणुकाजी बांध परियोजना में भी उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी के रूप में 361.04 करोड़ रुपये खर्च करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस परियोजना की कुल लागत 6946.99 करोड़ रुपये (प्राइस लेवल 2018) है, जबकि जल घटक की लागत 6647.46 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के तहत 148 मीटर ऊंचा और 430 मीटर लंबा बांध बनाया जा रहा है, जिसकी कुल जल संचयन क्षमता 498 एमसीएम और लाइव स्टोरेज क्षमता 330 एमसीएम होगी। इसके अलावा परियोजना से 40 मेगावाट बिजली उत्पादन भी प्रस्तावित है। लाभार्थी राज्यों द्वारा वहन की जाने वाली कुल लागत 1162.66 करोड़ रुपये है, जिसमें उत्तर प्रदेश का जल उपभोग शेयर 31.05 प्रतिशत है। इस परियोजना के माध्यम से संग्रहित जल का उपयोग हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों में सिंचाई के लिए किया जाएगा। इस परियोजना को वर्ष 2009 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था और इसे दिसंबर 2032 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उत्तर प्रदेश को मिलेगा अतिरिक्त जल इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने के बाद उत्तर प्रदेश को कुल 3.721 बीसीएम (31.05 प्रतिशत) जल प्राप्त होगा। इस अतिरिक्त जल का उपयोग पूर्वी यमुना नहर प्रणाली और आगरा नहर प्रणाली के माध्यम से सिंचाई के लिए किया जाएगा। साथ ही इससे यमुना नदी में जल प्रवाह बढ़ेगा और नदी की तनुता में भी सुधार होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश भिक्षावृत्ति प्रतिषेध अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के 7 मई 2025 के आदेश के अनुपालन में लिया गया है। प्रस्तावित संशोधन के तहत अधिनियम की धारा 21 से कुष्ठ रोग से संबंधित प्रावधानों को हटाया जा रहा है। साथ ही इन प्रावधानों को मेंटल हेल्थकेयर एक्ट 2017 के अनुरूप बनाया जाएगा, ताकि कानून आधुनिक स्वास्थ्य और मानवाधिकार मानकों के अनुरूप हो सके। इस संशोधन से कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त करने में मदद मिलेगी और उन्हें समाज में सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिलेगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रस्तावित उत्तर प्रदेश भिक्षावृत्ति प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक, 2026 को आगे की प्रक्रिया के लिए राज्य विधानमंडल में प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सिख समुदाय के विवाह पंजीकरण को आसान बनाने के लिए “उत्तर प्रदेश आनंद विवाह रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2026” को प्रख्यापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सिख धर्म में प्रचलित ‘आनंद कारज’ विवाह के पंजीकरण को सुगम बनाने के लिए यह नियमावली लागू की जा रही है। यह व्यवस्था आनंद मैरिज एक्ट, 1909 (संशोधित 2012) की धारा-6 के तहत राज्य सरकार को प्राप्त अधिकारों के आधार पर बनाई गई है। साथ ही यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट में दायर रिट याचिका अमनजोत सिंह चड्ढा बनाम भारत संघ व अन्य में 4 सितम्बर 2025 को दिए गए निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है। नई नियमावली के तहत आनंद विवाह के पंजीकरण के लिए तहसील स्तर पर उप जिलाधिकारी (एसडीएम) को रजिस्ट्रार, जनपद स्तर पर जिलाधिकारी को जिला रजिस्ट्रार, मंडल स्तर पर मंडलायुक्त को मंडलीय रजिस्ट्रार तथा राज्य मुख्यालय पर निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ को मुख्य रजिस्ट्रार नामित किया जाएगा। नियमावली के अनुसार विवाह के पक्षकार या उनके रिश्तेदार विवाह संपन्न होने की तिथि से तीन महीने के भीतर निर्धारित प्रारूप में 1500 रुपये के न्यायालय शुल्क स्टाम्प के साथ विवाह पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकेंगे। निर्धारित समय के बाद भी आवेदन देने की व्यवस्था होगी, लेकिन इसके लिए नियमानुसार विलंब शुल्क देना होगा। इसके साथ ही यदि कोई पक्ष रजिस्ट्रार के आदेश से असंतुष्ट होता है तो वह जिला रजिस्ट्रार के समक्ष अपील कर सकेगा। जिला रजिस्ट्रार के आदेश के खिलाफ मंडलीय रजिस्ट्रार के पास अपील की व्यवस्था भी की गई है। नियमावली में विवाह रजिस्टर के रख-रखाव और उसकी प्रमाणित प्रति प्राप्त करने से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। नियमावली के लागू होने से प्रदेश में सिख समुदाय के आनंद विवाह का विधिवत पंजीकरण आसान होगा और विवाह से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ेगी।

ट्रंप की ‘मैडमैन थ्योरी’ क्या है? क्यों ईरान पर कभी नरमी तो कभी युद्ध की भभकी देते हैं

ईरान ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से मिडिल-ईस्ट में छिड़े युद्ध के 10 दिन बीत चुके हैं। बावजूद इसके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अभी तक यह स्पष्ट रूप से नहीं बता पाए हैं कि ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने की ठोस वजह क्या थी और इसका अंतिम लक्ष्य क्या है। ऐसे में ईरान जंग पर ट्रंप सरकार की न शुरुआत स्पष्ट है और न ही युद्ध अंत करने का कोई रोडमैप सामने आ रहा है। इससे अमेरिका और विश्व राजनीति में अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। इतना ही नहीं ट्रंप की ईरान नीति पर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने के बाद ट्रंप प्रशासन की रणनीति और संदेश लगातार बदलते रहे हैं। दस दिन बाद भी, ट्रंप अभी तक इस बात का कोई पक्का कारण नहीं बता पाए हैं कि उन्होंने युद्ध क्यों किया। अब, वह इशारा कर रहे हैं कि शांति जल्द ही आ सकती है, जबकि दूसरी तरफ वह खुद और उनके टॉप सहयोगी साथ चेतावनी दे रहे हैं कि लड़ाई और तेज और भीषण हो सकती है और ज़्यादा समय तक चल सकती है। ट्रंप एक तरफ कड़ी सैन्य कार्रवाई और तेल आपूर्ति रोकने पर “20 गुना घातक” हमले की धमकी दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मदद और बातचीत की संभावनाओं पर भी चर्चा कर रहे हैं। इससे अमेरिका समेत पूरी दुनिया में भारी कन्फ्यूजन का स्थिति है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर इस युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। शेयर बाजारों में गिरावट और तेल की कीमतों में तेज उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरे की आशंका पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह जंग लंबी खिंचती है तो इसका असर विश्व आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है। इसके साथ ही ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों से पूरे मध्य-पूर्व में बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका और गहरा सकती है। अमेरिका के अंदर बढ़ रहा राजनीतिक दबाव खबर के मुताबिक, अमेरिका के भीतर भी इस युद्ध को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। आम चुनावों और मध्यावधि चुनावों की पृष्ठभूमि में महंगाई और बढ़ती ऊर्जा कीमतों ने सरकार के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। कई सर्वेक्षणों में यह संकेत मिला है कि अमेरिकी जनता का बड़ा हिस्सा किसी नए विदेशी युद्ध के पक्ष में नहीं था। दूसरी तरफ, फ्लोरिडा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने दावा किया कि यदि अमेरिका ने हमला नहीं किया होता तो ईरान पूरे मध्य-पूर्व पर कब्जा कर सकता था। हालांकि उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया। विशेषज्ञों की अलग राय ट्रंप ने यह भी कहा कि यह अभियान अमेरिका के लिए आर्थिक रूप से लाभदायक साबित होगा और अंततः इससे तेल और गैस की कीमतें कम हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह एक जरूरी सैन्य कार्रवाई थी और युद्ध अपने अंतिम चरण में हो सकता है। हालांकि, कई विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध शुरू होने का एक कारण यह भी हो सकता है कि ईरान पहले से ही कमजोर स्थिति में था। हाल के वर्षों में हमास और हिज्बुल्ला जैसे ईरान समर्थित समूहों को भारी सैन्य नुकसान हुआ था, जबकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था भी दबाव में थी। ट्रंप की “मैडमैन थ्योरी” क्या? कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यह कन्फ्यूजन दरअसल ट्रंप की “मैडमैन थ्योरी” (Madman Theory) का हिस्सा हो सकता है, जहाँ वे दुश्मन को अनिश्चित रखकर दबाव बनाना चाहते हैं। साथ ही, घरेलू स्तर पर तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी युद्धों के प्रति अमेरिकी जनता की कम सहनशीलता भी उन्हें जल्द युद्ध खत्म करने का दावा करने पर मजबूर कर रही है। हालांकि, युद्ध शुरू करने के पीछे उनके तर्क बदलते रहे हैं, कभी इसे ईरान का आसन्न परमाणु खतरा बताया, तो कभी दावा किया कि ईरान अमेरिका पर हमला करने वाला था, और कभी इसे इजरायल के हितों की रक्षा से जोड़ा। असली सवाल: क्या युद्ध खत्म करना आसान होगा? विशेषज्ञों के अनुसार अब सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि ट्रंप युद्ध खत्म करना चाहते हैं या नहीं, बल्कि यह है कि क्या वे इसे जल्दी समाप्त कर पाएंगे। अमेरिका और इजरायल द्वारा किए जा रहे हमलों ने ईरान की सैन्य क्षमता, मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु ढांचे को काफी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन अभी तक स्वतंत्र रूप से इसकी पूरी पुष्टि नहीं हुई है। बहरहाल, ईरान युद्ध अब केवल सैन्य संघर्ष नहीं रह गया है। यह वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अमेरिकी घरेलू राजनीति- तीनों पर गहरा असर डाल रहा है। जब तक स्पष्ट रणनीति और कूटनीतिक समाधान सामने नहीं आता, तब तक इस संघर्ष के जल्दी समाप्त होने की संभावना अनिश्चित बनी हुई है।  

प्रदेशभर की स्वच्छता दीदियां, महिला हितग्राही एवं स्वसहायता समूहों की महिलाएं जोश और उत्साह से हुईं शामिल

रायपुर उप मुख्यमंत्री अरुण साव महिलाएं ईश्वर की अनुपम कृति हैं। ईश्वर ने उन्हें विशेष शक्तियां और क्षमताएं दी हैं। महिलाओं ने अपनी लगन, मेहनत और काबिलियत से हर क्षेत्र में अपना स्थान बनाया है। हर क्षेत्र में उपलब्धियां और ऊंचाईयां हासिल की हैं। माताओं व बहनों का सम्मान एवं विशेष स्थान प्राचीन काल से हमारी संस्कृति और परंपरा में है। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने नारी शक्ति सम्मान समारोह में ये विचार व्यक्त किए। उन्होंने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा आज रायपुर के शासकीय मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में स्वच्छता, स्वावलंबन और सशक्तीकरण के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्वच्छता दीदियों, महिला हितग्राहियों एवं स्वसहायता समूहों की महिलाओं को सम्मानित किया। उप मुख्यमंत्री साव ने समारोह में नगरीय निकायों में हर महीने स्वच्छता के आंकलन के लिए छत्तीसगढ़ स्वच्छता लीग का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में स्वच्छता दीदियों के स्वास्थ्य की जांच के लिए 15 दिनों के विशेष शिविर आयोजित करने की घोषणा की। ये शिविर आगामी 14 मार्च से लगाए जाएंगे। नारी शक्ति सम्मान समारोह में प्रदेशभर की स्वच्छता दीदियां, महिला हितग्राही एवं स्वसहायता समूहों की महिलाएं जोश और उत्साह से शामिल हुईं। वे इस दौरान प्रसिद्ध लोक गायिका सुश्री गरिमा दिवाकर और स्वर्णा दिवाकर द्वारा प्रस्तुत फाग गीत पर जमकर झूमीं। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने नारी शक्ति सम्मान समारोह में महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में कभी निराश होने की जरूरत नहीं है। महिलाएं संघर्ष और करूणा की प्रतिमूर्ति हैं। आप में जो क्षमता और ताकत है, वो किसी और में नहीं है। देश में ऐसी अनेक घटनाएं और प्रसंग हैं जहां नारी शक्ति ने अपनी ममता, तपस्या, त्याग और बलिदान की अनूठी मिसालें पेश की हैं। साव ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद महिलाओं के सम्मान और सशक्तीकरण के लिए कई योजनाएं शुरू हुई हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत घर-घर में शौचालय बनाए गए हैं, उज्जवला योजना से रसोई गैस दिए गए हैं, जल जीवन मिशन ने महिलाओं की दिनचर्या पूरी तरह बदल दी है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ और ‘वीमेन फॉर ट्री’ जैसी योजनाओं ने महिलाओं की प्रतिष्ठा और सम्मान बढ़ाया है।  श्री साव ने बताया कि छत्तीसगढ़ के शहरों में स्वीकृत दो लाख 44 हजार प्रधानमंत्री आवासों में से एक लाख 77 हजार आवास महिलाओं के नाम से स्वीकृत हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना से यह संभव हुआ है कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं के पास खुद के नाम पर पक्का घर है। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत राज्य के 70 हजार महिला स्ट्रीट वेंडर्स को 88 करोड़ रुपए से अधिक का ऋण बैंकों के माध्यम से दिलाया गया है। उन्होंने कहा कि माता बच्चे की प्रथम शिक्षक होती है। इस नाते भावी पीढ़ी को अच्छे संस्कार, अच्छी शिक्षा, अच्छी सोच और अच्छी दिशा देने की महती जिम्मेदारी महिलाओं के कंधों पर है। रायपुर की महापौर मीनल चौबे ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर हमारे राज्य को और हमारे शहरों को जो प्रतिष्ठा मिलती है, वह आप लोगों के कार्यों की वजह से मिलती है। उन्होंने समारोह के आयोजन के लिए उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विधानसभा सत्र के बीच इसका आयोजन किया गया है। तमाम व्यस्तताओं के बावजूद आप लोगों का हौसला बढ़ाने और सम्मानित करने उप मुख्यमंत्री यहां मौजूद हैं। चौबे ने कहा कि आप लोगों की प्रेरणा और सहयोग से हम आगे बढ़ते हैं। आपकी सहभागिता से योजनाओं को हम धरातल पर उतारते हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस. ने कार्यक्रम में अपने स्वागत भाषण में कहा कि विभाग के कार्यों में महिलाएं महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। स्वच्छता दीदियों और स्वसहायता समूहों के साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना और पीएम स्वनिधि योजना के क्रियान्वयन में वे बड़ी भूमिका निभा रही हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक आर. एक्का, रायपुर नगर निगम के आयुक्त विश्वदीप, राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के सीईओ शशांक पाण्डेय, रायपुर नगर निगम में स्वास्थ्य विभाग की अध्यक्ष गायत्री सुनील चंद्राकर, संस्कृति विभाग के अध्यक्ष अमर गिदवानी, राजस्व विभाग के अध्यक्ष अवतार भारती बागल और पार्षद स्वप्निल मिश्रा सहित नगरीय प्रशासन एवं सूडा के अनेक अधिकारी भी समारोह में मौजूद थे। इनका किया गया सम्मान, चेक भी सौंपे गए समारोह में स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले नगरीय निकायों के स्वच्छता दीदियों के प्रतिनिधि के रूप में बिलासपुर की रामेश्वरी सागर, कुम्हारी की मंजू देवांगन, बिल्हा की संपति यादव, अंबिकापुर की संगीता गुप्ता, विश्रामपुर की भारती गुप्ता और पाटन की लता मंडलेश को सम्मानित किया गया। विपरीत परिस्थितियों के बीच नगर निगम के सहयोग से प्रधानमंत्री आवास का निर्माण करने वाली रायपुर की मांडवी कौशिक, बीरगांव की बिमला साहू, कुम्हारी की त्रिवेणी साहू, राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित बगीचा की महिला हितग्राही सुमन तिर्की तथा वीमेन फॉर ट्री में उत्कृष्ट कार्य करने वाली बिलासपुर की पल्लवी विजय क्षत्री, लोरमी की दुर्गा राजपूत और बगीचा की प्रभा यादव का भी सम्मान किया गया।  उप मुख्यमंत्री साव ने निर्धारित समयावधि में प्रधानमंत्री आवास का निर्माण पूर्ण कर मुख्यमंत्री गृहप्रवेश सम्मान का हकदार बनीं रायपुर की रजनी ध्रुव, कुम्हारी की गीता पाल और बीरगांव की पलक देवांगन को (प्रत्येक को) 32 हजार 850 रुपए का चेक प्रदान किया। उन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के अंतर्गत रायपुर नगर निगम की तीन स्ट्रीट वेंडर्स लक्ष्मी साहू, रत्ना दीप और बी. लावण्या को 50-50 हजार रुपए के चेक सौंपे।     

सरकारी कर्मचारियों के आचरण नियमों में बदलाव, निवेश और संपत्ति की जानकारी देना होगा अनिवार्य

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत जनपद मेरठ में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) के लिए अवस्थापना विकास कार्यों को मंजूरी दी गई है। इन कार्यों पर लगभग ₹213.81 करोड़ खर्च किए जाएंगे। प्रदेश में उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) द्वारा विकसित एक्सप्रेसवे (आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे) के किनारे 29 स्थानों पर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना के तहत इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मेरठ नोड में सड़क निर्माण, आरसीसी नालियां, आरसीसी कल्वर्ट, फायर स्टेशन, भूमिगत जलाशय, जलापूर्ति लाइन, फेंसिंग, बिजली व्यवस्था और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। इन सभी कार्यों को ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) मोड पर कराया जाएगा। व्यय-वित्त समिति द्वारा इन कार्यों के लिए लगभग ₹21381.93 लाख की लागत का आकलन किया गया था, जिसे अब कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इस क्लस्टर के बनने से मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जनपद कानपुर में ट्रांसगंगा सिटी को शहर से जोड़ने के लिए गंगा नदी पर नया सेतु बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। यह कार्य अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत कराया जाएगा। इस परियोजना के अंतर्गत गंगा नदी पर चार लेन का उच्च स्तरीय सेतु और उससे जुड़े पहुंच मार्ग का निर्माण किया जाना है। प्रस्तावित स्थल पर उत्तर प्रदेश स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीसीडा) द्वारा ट्रांसगंगा सिटी विकसित की जा रही है, जहां कानपुर और आसपास की औद्योगिक इकाइयों को स्थानांतरित करने की योजना है। सरकार के अनुसार ट्रांसगंगा सिटी के विकसित होने के बाद गंगा नदी पार करने के लिए भारी और हल्के वाहनों का यातायात काफी बढ़ेगा। इससे मौजूदा गंगा बैराज मार्ग पर जाम की समस्या और बढ़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए गंगा नदी पर नए सेतु के निर्माण का निर्णय लिया गया है। यातायात दबाव को देखते हुए चार लेन के एक पुल के बजाय दो-दो लेन के दो अलग-अलग सेतु बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि एक ही स्थान पर वाहनों का अत्यधिक दबाव न पड़े और आवागमन सुचारु बना रहे। इस परियोजना की कुल स्वीकृत लागत लगभग ₹753.13 करोड़ है। इसमें से ₹460 करोड़ की धनराशि अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत दी जाएगी, जबकि शेष राशि संबंधित प्राधिकरण अपने संसाधनों से खर्च करेगा। इस परियोजना से कानपुर क्षेत्र में औद्योगिक विकास और यातायात व्यवस्था को बड़ा लाभ मिलेगा। ख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली, 1956 के नियम-21 एवं नियम 24 में संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस बदलाव का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के निवेश और संपत्ति से जुड़े मामलों में अधिक पारदर्शिता लाना है। इन संशोधनों से सरकारी कर्मचारियों की वित्तीय गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ेगी और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। संशोधन के तहत नियम-21 में यह व्यवस्था की जा रही है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में अपने मूल वेतन के छह महीने से अधिक की राशि स्टॉक, शेयर या अन्य निवेश में लगाता है, तो उसे इसकी सूचना अपने समुचित प्राधिकारी को देनी होगी। इसी तरह नियम-24 में भी बदलाव किया गया है। अब यदि कोई कर्मचारी दो महीने के मूल वेतन से अधिक मूल्य की कोई चल संपत्ति खरीदता है, तो उसे इसकी जानकारी संबंधित प्राधिकारी को देनी होगी। पहले यह सीमा एक महीने के मूल वेतन के बराबर थी। इसके अलावा अचल संपत्ति की घोषणा से संबंधित नियम में भी संशोधन किया गया है। पहले सरकारी कर्मचारियों को हर पांच वर्ष में अपनी अचल संपत्ति की जानकारी देनी होती थी, लेकिन अब यह जानकारी हर वर्ष देना अनिवार्य किया जाएगा

असम में महिलाओं को 9 हजार रुपये की सौगात, चुनाव से पहले बड़ा मास्टरस्ट्रोक

असम असम में 40 लाख परिवारों की महिलाओं को 9,000-9,000 रुपये उनके बैंक खातों में भेजे गए। राज्य सरकार की योजना अरुणोदय के तहत मंगलवार को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए शिफ्ट की गई। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी में आयोजित केंद्रीय समारोह में इसकी शुरुआत की। उन्होंने कहा कि यह राशि राज्य सरकार की करुणामयी नीति का प्रतीक है, जो महिलाओं के नेतृत्व वाले घरों को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक्स पर पोस्ट करते हुए इसे महिलाओं की वित्तीय सुरक्षा और गरिमा को मजबूत करने वाली पहल बताया। राज्य भर में 3,800 से अधिक सार्वजनिक कार्यक्रमों के जरिए लाभार्थी महिलाएं वर्चुअली जुड़ीं, जिसमें गांव पंचायतें, स्वायत्त परिषद क्षेत्र, ग्राम विकास समितियां और शहरी वार्ड समितियां शामिल थीं। अरुणोदय योजना की शुरुआत वर्ष 2020 में भाजपा सरकार की ओर से गरीबी उन्मूलन के लिए की गई थी। इस योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार की एक महिला को प्रतिमाह 1,250 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। मुख्यमंत्री ने पहले घोषणा की थी कि इस साल जनवरी से चार महीनों की राशि (5,000 रुपये) के साथ बोहाग बिहू (असमिया नववर्ष) के अवसर पर अतिरिक्त राशि मिलाकर कुल 9,000 रुपये मार्च में एक साथ दिए जाएंगे। एकमुश्त मिली आर्थिक सहायता राशि रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह लाखों महिलाओं को एकमुश्त आर्थिक सहायता मिली, जो उनके परिवारों के लिए अहम सहारा साबित होगी। योजना केवल खास मानदंडों को पूरा करने वाली महिलाओं तक सीमित है, जिससे इसका दायरा नियंत्रित और टारगेटेड है। सीएम सरमा ने कहा कि अरुणोदय योजना का आगामी विधानसभा चुनावों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की तरह यहां कोई सामूहिक या सार्वभौमिक हस्तांतरण नहीं किया जाता। अगर यह चुनावी लाभ के लिए होती तो सभी को कवर किया जाता, लेकिन यह एक नियंत्रित और चयनित योजना है। सरमा ने दावा किया कि पिछले 6 वर्षों से सरकार करुणा के साथ इसे चला रही है। हिमंता बिस्वा सरमा ने जोर देकर कहा कि चुनाव जीतने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को जाता है, न कि योजनाओं को। अन्य विपक्षी शासित राज्यों में भी ऐसी योजनाएं चल रही हैं, लेकिन असम की यह योजना महिलाओं के सशक्तिकरण पर केंद्रित है। यह योजना असम में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और परिवारों में उनकी भूमिका को बढ़ाने में अहम साबित हो रही है। लाखों महिलाओं को नियमित सहायता मिलने से उनकी गरिमा और आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि ऐसी योजनाएं राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि निरंतर सामाजिक कल्याण के लिए चलाई जानी चाहिए।  

आदि परब ‘परम्परा से पहचान तक’ का भव्य आयोजन 13 मार्च से

रायपुर नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में 13 और 14 मार्च को आदि परब ‘परम्परा से पहचान तक’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन आदिम जाति विभाग द्वारा किया जाएगा। आदिम जाति विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि जनजातीय समाज की रचनात्मकता, जीवन-दर्शन और सांस्कृतिक विरासत को मंच प्रदान करने के उद्देश्य  से राज्य सरकार द्वारा जनजातीय कला, संस्कृति एवं परम्पराओं को समर्पित आदि परब 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में आदि रंग के माध्यम से जनजातीय चित्रकारों की कलाकृतियों की प्रदर्शनी, आदि परिधान में जनजातीय वेशभूषा पर आधारित आकर्षक प्रस्तुतियां, आदि आख्यान के अंतर्गत जनजातीय विषयों पर सेमीनार तथा आदि हाट में जनजातीय शिल्पकारों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प एवं पारम्परिक उत्पादों को प्रस्तुत की जाएगी। वहीं जनजातीय संस्कृति एवं परम्पराओं पर विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमांे का आयोजन भी किया जावेगा।  

COO का स्पष्ट संदेश: फुटबॉल विश्व कप जैसा मेगा टूर्नामेंट स्थगित करना आसान नहीं

डलास फीफा विश्व कप फुटबॉल प्रतियोगिता के मुख्य संचालन अधिकारी हेइमो शिर्गी ने कहा कि यह बहुत बड़ा टूर्नामेंट है तथा अमेरिका और इजरायल के ईरान के खिलाफ युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक उथल-पुथल के चलते इसे स्थगित करना आसान नहीं होगा। विश्व कप 11 जून से अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में खेला जाएगा जिसमें पहली बार 48 देश भाग लेंगे। इनमें ईरान भी शामिल है। शिर्गी ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय प्रसारण केंद्र में कहा कि फीफा ईरान युद्ध और उसके नतीजों पर करीबी नजर रखे हुआ है।शिर्गी ने कहा, ‘‘अगर मैं भविष्यवक्ता होता मैं अभी बता सकता था कि क्या होने वाला है, लेकिन जाहिर है कि स्थिति बदल रही है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘‘हालात दिन-प्रतिदिन बदल रहे हैं और हम उन पर कड़ी नजर रख रहे हैं। हम अपने सभी संघीय और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर स्थिति का मूल्यांकन कर रहे हैं। हम हर दिन के हिसाब से चल रहे हैं और किसी न किसी स्तर पर हमें इसका समाधान मिल जाएगा। विश्व कप तो होगा ही, है ना? विश्व कप बहुत बड़ा टूर्नामेंट है और हम उम्मीद करते हैं कि क्वालीफाई कर चुके सभी देश इसमें भाग लेंगे।’’ विश्व कप फुटबॉल में इससे पहले 32 देश भाग लेते थे लेकिन पहली बार इस टूर्नामेंट में 48 देश भाग लेंगे। इस प्रतियोगिता का आयोजन अमेरिका के 11, मैक्सिको के तीन और कनाडा के दो स्थानों पर किया जाएगा। अमेरिका ने पहले ही विश्व कप के लिए क्वालीफाई कर चुके चार देशों ईरान, आइवरी कोस्ट, हैती और सेनेगल पर यात्रा प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन खिलाड़ियों, टीम अधिकारियों और उनके करीबी रिश्तेदारों को छूट देने की बात कही है। शिर्गी ने कहा कि फीफा नई  जानकारी हासिल करने के लिए ईरानी फुटबॉल महासंघ के साथ लगातार संपर्क में है। उन्होंने हालांकि इन बातचीत का ब्यौरा नहीं दिया। फीफा के अधिकारी डलास में ‘फैन फेस्टिवल’ के कार्यक्रमों की घोषणा करने के लिए इस शहर में थे। यह कार्यक्रम विश्व कप के दौरान 34 दिन तक चलेगा।  

बम धमकी के बाद अलर्ट: राजस्थान के पासपोर्ट कार्यालयों की सुरक्षा बढ़ी, सीकर-जैसलमेर में ऑफिस बंद

जयपुर राजस्थान में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रदेश के कई जिलों में स्थित पासपोर्ट कार्यालयों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने की सूचना सामने आई। ई-मेल के जरिए भेजी गई इस धमकी में खुद को आईएसआई से जुड़ा बताया गया है और दावा किया गया है कि दोपहर एक बजे गैस बम विस्फोट किए जाएंगे। धमकी भरा मेल सामने आते ही पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो गईं। एहतियात के तौर पर जिन-जिन इमारतों में पासपोर्ट कार्यालय संचालित हो रहे हैं, उन्हें तत्काल खाली करवा दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावित खतरे से बचने के लिए व्यापक स्तर पर सुरक्षा जांच की जा रही है। सीकर में बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया सीकर जिले में भी पासपोर्ट कार्यालय को धमकी भरा ई-मेल मिला। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे परिसर की घेराबंदी कर दी। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए जयपुर से बम निरोधक दस्ता भी बुलाया गया है, जो परिसर और आसपास के क्षेत्रों की गहन जांच कर रहा है। जैसलमेर में कार्यालय बंद, बिल्डिंग खाली जैसलमेर में धमकी मिलने के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पासपोर्ट कार्यालय के बाहर ताला लगवा दिया। साथ ही पूरी बिल्डिंग को एहतियातन खाली करवा दिया गया। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां आसपास के इलाकों में सघन तलाशी अभियान चला रही हैं ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि का पता लगाया जा सके। कई जिलों में एक साथ मिले धमकी भरे ई-मेल सूत्रों के अनुसार, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर, अजमेर, कोटा और भीलवाड़ा जिलों के पासपोर्ट कार्यालयों को भी इसी तरह के ई-मेल प्राप्त हुए हैं। सभी जिलों में पुलिस ने तुरंत सतर्कता बढ़ा दी है और मेल की जांच के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पोस्ट ऑफिस परिसरों में संचालित होते हैं पासपोर्ट कार्यालय गौरतलब है कि राजस्थान के कई जिलों में पासपोर्ट सेवा केंद्र पोस्ट ऑफिस परिसरों में ही संचालित किए जा रहे हैं। इसी कारण धमकी मिलने के बाद संबंधित डाकघर भवनों को भी खाली कराया गया और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जांच की जा रही है। फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां ई-मेल के स्रोत का पता लगाने में जुटी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और सुरक्षा के सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं।

एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) 2026 को योगी कैबिनेट की मंजूरी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत किफायती आवास (एएचपी) और किफायती किराया आवास (एआरएच) घटकों के क्रियान्वयन के लिए नई नीति जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में वर्ष 2026 के लिए इन दोनों घटकों के संचालन हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। योजना के तहत मध्यम और दुर्बल आय वर्ग के लोगों के लिए किफायती दरों पर आवास उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इस योजना के अंतर्गत आवास निर्माण के लिए प्रत्येक लाभार्थी को केंद्र सरकार की ओर से 1.50 लाख रुपये और राज्य सरकार की ओर से 1 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। इसके अलावा व्हाइटलिस्टेड परियोजनाओं में काम करने वाले डेवलपर्स को भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क, मानचित्र स्वीकृति शुल्क, बाह्य विकास शुल्क में छूट दी जाएगी, वहीं लाभार्थियों को स्टाम्प शुल्क में भी राहत मिलेगी। किफायती किराया आवास (एआरएच) मॉडल-2 के तहत शहरी गरीबों, कामकाजी महिलाओं, औद्योगिक इकाइयों के कर्मचारियों तथा ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्ग के परिवारों के लिए निजी और सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा किराये के आवास बनाए जाएंगे, जिनका संचालन और रखरखाव भी वही संस्थाएं करेंगी। सरकार का उद्देश्य इस योजना के माध्यम से शहरों में सस्ती और सुलभ आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है। अनधिकृत लोगों से कांशीराम आवास खाली करवाकर पात्र दलितों को आवंटित किए जाएंगे निर्णय की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि बैठक के दौरान कांशीराम आवासों को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में बने कांशीराम आवास योजना के कई आवासों पर अनधिकृत कब्जे की शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे आवासों की पहचान कर उन्हें खाली कराया जाएगा और उनकी रंगाई-पुताई व मरम्मत कराकर पुनः पात्र दलित परिवारों को आवंटित किया जाएगा। इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया। सरकार का उद्देश्य इन आवासों को फिर से जरूरतमंद दलित परिवारों को उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके तहत रजिस्ट्री से पहले खतौनी और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण अनिवार्य किया जाएगा, ताकि फर्जी और विवादित जमीन की रजिस्ट्री को रोका जा सके। निर्णय की जानकारी देते हुए स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने बताया कि वर्तमान समय में कई मामलों में यह देखा गया है कि संपत्ति के वास्तविक स्वामी के अलावा अन्य व्यक्ति द्वारा संपत्ति का विक्रय कर दिया जाता है। इसके अलावा निषेधित या प्रतिबंधित संपत्ति का विक्रय, अपने अधिकार से अधिक संपत्ति का विक्रय, कुर्क संपत्ति का विक्रय तथा केंद्र या राज्य सरकार के स्वामित्व वाली भूमि के विक्रय विलेख का भी पंजीकरण करा लिया जाता है। ऐसे मामलों के कारण बाद में विवाद उत्पन्न होते हैं और लोगों को लंबे समय तक मुकदमेबाजी और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वर्तमान में रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के अंतर्गत किसी भी विलेख के पंजीकरण से इनकार करने के संबंध में उप-निबंधक को धारा 35 के तहत बहुत सीमित अधिकार प्राप्त हैं। इसी कारण कई बार संदिग्ध मामलों में भी रजिस्ट्री हो जाती है। इन समस्याओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश में रजिस्ट्रेशन अधिनियम और नियमावली में संशोधन करने का निर्णय लिया गया है। प्रस्तावित संशोधन के तहत अधिनियम में धारा 22 और धारा 35 के बाद नई धारा 22-A, 22-B और 35-A जोड़ी जाएंगी। धारा 22-A के तहत कुछ श्रेणियों के दस्तावेजों के पंजीकरण पर रोक लगाई जा सकेगी। धारा 22-B के तहत पंजीकरण से पहले अचल संपत्ति की पहचान सुनिश्चित करने के प्रावधान किए गए हैं। वहीं धारा 35-A(1) के अनुसार यदि धारा 17(1) के अंतर्गत आने वाली अचल संपत्ति के पंजीकरण के लिए प्रस्तुत लिखतों के साथ स्वामित्व, अधिकार, पहचान, विधिपूर्ण कब्जा या अंतरण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज संलग्न नहीं होंगे, जिन्हें राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से निर्धारित करेगी, तो पंजीकरण अधिकारी उस दस्तावेज को पंजीकृत करने से इनकार कर सकेगा। इस व्यवस्था के लागू होने से फर्जी और विवादित संपत्तियों की रजिस्ट्री पर प्रभावी रोक लगेगी और आम लोगों को अनावश्यक कोर्ट केस तथा अन्य परेशानियों से राहत मिलेगी। उल्लेखनीय है कि अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार के संशोधन कर ऐसे मामलों पर नियंत्रण का प्रयास किया गया है। यह प्रस्ताव भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची की प्रविष्टि-6 के अंतर्गत लाया गया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इससे संबंधित विधेयक को विधानमंडल में प्रस्तुत कर उसकी स्वीकृति प्राप्त की जाएगी।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में विकास प्राधिकरणों, आवास एवं विकास परिषद तथा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों की संपत्तियों के डिफॉल्टरों के लिए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) 2026 लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस योजना का उद्देश्य लंबे समय से बकाया धनराशि की वसूली करना और डिफॉल्टर आवंटियों को राहत देना है। वित्त मंत्री ने बताया कि विकास प्राधिकरणों और संबंधित संस्थाओं में संपत्तियों से जुड़े कुल 18,982 डिफॉल्टर प्रकरण हैं, जिनमें करीब 11,848.21 करोड़ रुपये की धनराशि बकाया है। इसी तरह मानचित्र स्वीकृति से जुड़े 545 डिफॉल्टर मामलों में लगभग 1,482.10 करोड़ रुपये की राशि लंबित है। इन बकाया रकम की वसूली के लिए ओटीएस योजना लाई जा रही है। योजना के तहत सभी प्रकार की संपत्तियों (आवासीय, व्यावसायिक तथा अन्य आवंटित संपत्तियों) पर यह योजना लागू होगी। इसमें नीलामी या आवंटन पद्धति से दी गई संपत्तियां भी शामिल होंगी। साथ ही सरकारी संस्थानों, स्कूलों, चैरिटेबल संस्थाओं और अन्य संगठनों को आवंटित संपत्तियों पर भी यह योजना लागू होगी। मानचित्र स्वीकृति से जुड़े डिफॉल्टर मामलों को भी इसमें शामिल किया गया है। ओटीएस योजना के तहत डिफॉल्टर आवंटियों से केवल साधारण ब्याज लिया जाएगा और दंड ब्याज पूरी तरह माफ किया जाएगा। योजना के लिए आवेदन करने की अवधि तीन माह होगी। प्राप्त आवेदनों का निस्तारण भी तीन माह के भीतर किया जाएगा। योजना की जानकारी सभी डिफॉल्टरों को ईमेल, एसएमएस और पत्र के माध्यम से दी जाएगी। भुगतान की व्यवस्था भी तय की गई है। यदि ओटीएस के बाद देय राशि 50 लाख रुपये तक … Read more

ऑपरेशन सिंदूर की गूंज: 10 महीने बाद भी पाकिस्तान के एयरबेस पर दिख रहा असर

नईं दिल्ली  मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष के दौरान भारतीय वायुसेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान के सैन्य बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया था। इस स्ट्राइक का सबसे घातक असर चकवाल स्थित मुरीद एयरबेस पर पड़ा, जहां पाकिस्तान का ‘कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ आज भी मलबे के ढेर में तब्दील है। 10 महीने बाद भी मरम्मत में नाकाम पाकिस्तान लेटेस्ट सैटेलाइट इमेजरी (फरवरी 2026) के विश्लेषण से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सैटेलाइट इमेजरी एनालिस्ट डेमियन साइमन के अनुसार, भारत के हमले में क्षतिग्रस्त हुई मुख्य इमारत अब पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। 28 फरवरी की वैंटोर (Ventor) इमेज दिखाती है कि जिस हिस्से को पाकिस्तान ने मरम्मत के लिए तिरपाल से ढका था, वहां अब सिर्फ गुलाबी-लाल मलबा और खाली जमीन बची है। राफेल और पेनेट्रेटर मिसाइलों का सटीक प्रहार 10 मई 2025 को तड़के 2 से 5 बजे के बीच भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के 10 एयरबेस पर हमले किए थे। मुरीद एयरबेस, जो कि ड्रोन ऑपरेशंस का मुख्य केंद्र था, को विशेष रूप से निशाना बनाया गया: राफेल की ताकत: इन हमलों के लिए राफेल फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया गया। पेनेट्रेटर मुनिशन: राफेल से लॉन्च किए गए पेनेट्रेटर वारहेड्स ने कंक्रीट की मजबूत छतों को भेदकर इमारत के भीतर विस्फोट किया। ढांचागत क्षति: विस्फोट इतना जबरदस्त था कि इमारत की आंतरिक संरचना (Internal Structure) पूरी तरह कमजोर हो गई, जिसे दोबारा उपयोग के लायक नहीं बनाया जा सका। छिपाने की कोशिशें हुईं नाकाम सैटेलाइट तस्वीरों के टाइमलाइन से पाकिस्तान की हताशा साफ झलकती है…     मई-जून 2025: हमले के तुरंत बाद नुकसान को छिपाने के लिए हरे तिरपाल का इस्तेमाल किया गया।     दिसंबर 2025: लाल तिरपाल और कंस्ट्रक्शन मेश लगाकर मरम्मत का नाटक शुरू हुआ।     फरवरी 2026: ताजा तस्वीरों से साफ है कि मरम्मत की कोशिशें पूरी तरह विफल रहीं और जर्जर हो चुकी पूरी इमारत को        अंततः तोड़ना पड़ा। अंडरग्राउंड फैसिलिटी पर भी सटीक चोट मुरीद एयरबेस पर केवल इमारत ही नहीं, बल्कि अंडरग्राउंड ड्रोन स्टोरेज और स्पेशल इक्विपमेंट फैसिलिटी के प्रवेश द्वार को भी निशाना बनाया गया था। गेट से मात्र 30 मीटर की दूरी पर बने 3 मीटर चौड़े क्रेटर (गड्ढे) ने पाकिस्तान की रणनीतिक तैयारियों को भारी नुकसान पहुंचाया।

दोहा में 10 दिन की मुश्किल के बाद घर लौटी भारतीय पुरुष बास्केटबॉल टीम

नई दिल्ली दोहा में 10 दिनों तक फंसे रहने के बाद भारतीय पुरुष बास्केटबॉल टीम अब घर लौट रही है। बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। भारतीय टीम एफआईबीए बास्केटबॉल वर्ल्ड कप 2027 के एशियाई क्वालीफायर के लिए दोहा गई थी, लेकिन उस क्षेत्र में जारी तनाव के कारण वे कतर की राजधानी में ही फंस गई। इस तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र और उड़ानों का संचालन बाधित हो गया था। कतर बास्केटबॉल फेडरेशन ने भारतीय टीम के लिए होटल और अन्य लॉजिस्टिक सहायता का इंतजाम किया। उन्होंने खिलाड़ियों और कर्मचारियों की सुरक्षा और संरक्षा के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए, और भारतीय दूतावास के साथ मिलकर टीम की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की। टीम सबसे पहले सड़क मार्ग से दम्माम गई, और वहां से उड़ानों की सीमित उपलब्धता के कारण टीम दो समूहों में रवाना हुई। एक समूह दम्माम से जेद्दा होते हुए मुंबई पहुंचा, जबकि दूसरा समूह दम्माम से सीधे लखनऊ के लिए रवाना हुआ। बीएफआई ने कहा कि इस दौरान उनके अध्यक्ष और महासचिव एफआईबीए के एशिया ऑफिस, भारत सरकार और दोहा स्थित भारतीय दूतावास के साथ लगातार संपर्क में रहे। उन्होंने कहा, “टीम की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए अध्यक्ष और महासचिव एफआईबीए एशिया कार्यालय, भारत सरकार और भारतीय दूतावास के साथ लगातार संपर्क में रहे। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान खिलाड़ियों की सुरक्षा और हित हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता रही।” फेडरेशन ने इस कठिन समय के दौरान समर्थन और सहायता के लिए एफआईबीए एशिया, कतर बास्केटबॉल फेडरेशन, दोहा स्थित भारतीय दूतावास और सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास के प्रति आभार जताते हुए कहा, “इन चुनौतीपूर्ण समय में अपने अमूल्य समर्थन और सहायता के लिए हम एफआईबीए एशिया कार्यालय, कतर बास्केटबॉल फेडरेशन, दोहा (कतर) स्थित भारतीय दूतावास और सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास के प्रति अपना हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं।”  

हर घर जल योजना को बढ़ावा: कैबिनेट ने जल जीवन मिशन विस्तार सहित 6 फैसलों को दी मंजूरी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आज केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में 6 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है, जिन पर कुल 8.8 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है। इस मीटिंग में कैबिनेट ने जल जीवन मिशन का विस्तार करने और उसे 2028 तक जारी रखने को मंजूरी दी है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मदुरै हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कैबिनेट मीटिंग में लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “जल जीवन मिशन 2.0 को आज मंज़ूरी मिल गई… अब इस प्रोजेक्ट को सस्टेनेबल बनाने का समय आ गया है। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह से रीस्ट्रक्चर किया जा रहा है। अब इंफ्रा क्रिएशन से सर्विस डिलीवरी पर फोकस होगा। वैष्णव ने बताया कि इसकी अलॉटेड रकम बढ़ाकर 8 लाख 70 करोड़ रुपये कर दी गई है और इसका मुख्य फोकस ऑपरेशन और मेंटेनेंस में समुदायों को शामिल करना होगा। उन्होंने बताया कि योजना के तहत सभी एसेट्स की डिजिटल मैपिंग की जाएगी… सभी प्रोग्राम सर्टिफाइड किए जाएंगे। एक रिलीज़ के मुताबिक, एक यूनिफ़ॉर्म नेशनल डिजिटल फ्रेमवर्क, जिसका नाम “सुजलम भारत” है, बनाया जाएगा, जिसके तहत हर गाँव को एक यूनिक सुजल गाँव / सर्विस एरिया ID दी जाएगी, जो सोर्स से नल तक पूरे पीने के पानी के सप्लाई सिस्टम की डिजिटल मैपिंग करेगी। ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी पक्का करने के लिए, “जल अर्पण” के ज़रिए स्कीमों को शुरू करने और फॉर्मल हैंडओवर करने में ग्राम पंचायतों और VWSCs को शामिल किया जाएगा। कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश के जेवर एयरपोर्ट को एलिवेटेड रोड के जरिए फरीदाबाद से जोड़ने वाली योजना को भी मंजूरी दी है और इसके लिए 3,631 करोड़ रुपये बजट को मंजबरी दी है।

गांवों के विकास में सरपंच सबसे बड़ी ताकत: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर मुख्यमंत्री से जशपुर जिले के सरपंचों ने की मुलाकात मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित उनके कार्यालय के सभा कक्ष में जशपुर जिले से चार दिवसीय अध्ययन भ्रमण पर आए सरपंचों के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।मुख्यमंत्री साय ने बड़ी आत्मीयता से सरपंचों से भेंट कर उनके क्षेत्र की स्थिति तथा विकास कार्यों के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ग्रामीण विकास में सरपंचों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं पंच के रूप में जनसेवा का कार्य प्रारंभ किया था। पंच रहने के बाद वे सरपंच बने और आगे चलकर विधायक तथा सांसद के रूप में भी जनता की सेवा करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि यदि किसी सरपंच में अपने गांव और पंचायत के विकास के लिए समर्पण और जज्बा हो, तो वह अपने क्षेत्र में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर अधोसंरचना विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की बड़ी जिम्मेदारी सरपंचों के कंधों पर होती है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को नई गति मिल रही है। उन्होंने सरपंचों से आग्रह किया कि वे योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें, ताकि ग्रामीण जनता को उनका पूरा लाभ मिल सके।उन्होंने कहा कि समर्पित नेतृत्व और योजना के सही क्रियान्वयन  से कोई भी पंचायत आदर्श पंचायत बन सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और विकास के अवसर बढ़ रहे हैं। उन्होंने सरपंचों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने पंचायत क्षेत्र की समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों पर विभागीय मंत्रियों और अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में रहें तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि अध्ययन भ्रमण का उद्देश्य अन्य क्षेत्रों में हुए विकास कार्यों को देखकर सीखना और उन्हें अपने गांवों में लागू करना है। उल्लेखनीय है कि जशपुर जिले से चार दिवसीय अध्ययन भ्रमण पर आए 35 सरपंचों का दल आज विधानसभा की कार्यवाही देखने विधानसभा पहुंचा था। भ्रमण के दौरान यह दल दुर्ग जिले के ग्राम पंचायत पतोरा तथा धमतरी जिले के ग्राम पंचायत सांकरा में हुए विकास कार्यों का अवलोकन भी करेगा। इस अवसर पर विधायकमती गोमती साय,मती रायमुनि भगत सहित जशपुर जिले से आए सरपंचगण उपस्थित थे।

सतना में सनसनी: महिला ने नाबालिग बेटी के साथ मालगाड़ी के सामने कूदकर की आत्महत्या

सतना प्रयागराज-सतना रेलखंड पर सोमवार रात दर्दनाक हादसा सामने आया। बगहा बाइपास के पास एक महिला और नाबालिग बालिका ने मालगाड़ी के सामने आकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। घटना में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलते ही आरपीएफ और जीआरपी की टीम मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है। घटना का विवरण और पुलिस कार्रवाई पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार सोमवार रात करीब 9 बजे प्रयागराज से सतना की ओर आ रही एक मालगाड़ी जब बगहा बाइपास पुल से आगे बढ़ रही थी, तभी लगभग 45 वर्षीय महिला और करीब 14 वर्षीय बालिका अचानक इंजन के सामने आ गईं। ट्रेन की चपेट में आने से दोनों की पलक झपकते ही मौत हो गई। मालगाड़ी के लोको पायलट ने स्टेशन मास्टर के माध्यम से घटना की सूचना रेलवे पुलिस को दी। इसके बाद आरपीएफ और जीआरपी की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। ड्राइवर के मुताबिक दोनों पहले ट्रैक से कुछ दूरी पर खड़ी थीं, लेकिन ट्रेन करीब आते ही अचानक ट्रैक पर आ गईं। मृतकों की पहचान और आगामी प्रक्रिया पुलिस के अनुसार अभी तक मृतकों की शिनाख्त नहीं हो सकी है। महिला ने गुलाबी रंग की फूलदार साड़ी और गुलाबी ब्लाउज पहन रखा था, जबकि बालिका ने काले रंग की जींस और सफेद टी-शर्ट पहनी थी। घटना स्थल सिविल लाइन थाना क्षेत्र में आता है। रात होने के कारण शवों को मौके से नहीं हटाया जा सका। मंगलवार सुबह पहचान के प्रयास किए जाएंगे और पंचनामा कार्रवाई के बाद क्षत-विक्षत शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाएगा। पुलिस मामले की जांच कर रही है।  

इंडियन वेल्स ओपन: जोकोविच का दमदार प्रदर्शन, नॉरी ने डी मिनौर को किया बाहर

नई दिल्ली नोवाक जोकोविच ने अमेरिकी खिलाड़ी अलेक्जेंडर कोवासेविक के खिलाफ 6-4, 1-6, 6-4 से जीत दर्ज करते हुए इंडियन वेल्स ओपन के चौथे राउंड में अपनी जगह पक्की कर ली। हालांकि, इस मुकाबले के दौरान पूर्व वर्ल्ड नंबर 1 नोवाक जोकोविच को कोवासेविक ने कड़ी चुनौती जरूर दी, लेकिन जोकोविच ने दबाव में भी सूझबूझ का परिचय दिया। नोवाक जोकोविच को इस हफ्ते लगातार दूसरे मैच में जीत के लिए तीन सेट तक संघर्ष करना पड़ा। टूर्नामेंट के अपने पहले मुकाबले में उन्होंने कामिल माजचर्जाक के खिलाफ भी कड़ा मुकाबला जीतकर अभियान की शुरुआत की थी। मास्टर्स 1000 टूर्नामेंट्स में 113वीं बार प्री-क्वार्टरफाइनल में पहुंचकर जोकोविच ने राफेल नडाल को पीछे छोड़ दिया और इस सूची में अकेले शीर्ष पर पहुंच गए। वह साल 2017 के बाद पहली बार इंडियन वेल्स के चौथे दौर में पहुंचे हैं, जहां उनका सामना मौजूदा चैंपियन जैक ड्रेपर से होगा। इस मुकाबले में अलेक्जेंडर कोवासेविक ने सर्बियाई दिग्गज के खिलाफ 16 ऐस लगाए, लेकिन मैच के आखिरी गेम में सर्विस बचाने में नाकाम रहे और मुकाबले से बाहर हो गए। नोवाक जोकोविच ने कहा, “इसका बहुत बड़ा श्रेय एलेक्स को जाता है। उन्होंने बहुत ही उच्च कोटि का खेल दिखाया। उनकी सर्विस जबरदस्त रही। मैं उनसे पहले सिर्फ एक बार ही भिड़ा हूं। मुझे नहीं लगता कि हम कभी हार्ड कोर्ट पर एक-दूसरे के आमने-सामने आए हैं। जिस खिलाड़ी की लंबाई बहुत ज्यादा न हो, उसके लिए इतनी बेहतरीन सर्विस करना और कोर्ट के सही हिस्सों में गेंद डालना, यह सचमुच एक असाधारण सर्विस थी, इसलिए इसका बहुत बड़ा श्रेय उन्हें ही जाता है।” इस बीच कैमरन नॉरी भी कैलिफोर्निया के रेगिस्तान में खेले जा रहे इंडियन वेल्स ओपन के चौथे दौर में चौथी बार पहुंच गए। नॉरी ने स्टेडियम-3 में एलेक्स डी मिनौर को 6-4, 6-4 से हराकर अपने करियर की 13वीं टॉप-10 जीत दर्ज की और कैलिफोर्निया में यह उनकी दूसरी ऐसी जीत रही। ब्रिटिश लेफ्ट-हैंडर ने दुनिया के नंबर-6 खिलाड़ी डी मिनौर के खिलाफ अपना रिकॉर्ड 3-2 कर लिया है। अब अगले दौर में उनका मुकाबला अलेक्जेंडर बुब्लिक या रिंकी हिजिकाटा में से किसी एक से होगा।  

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet