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मौजूदा चैंपियन एंड्रीवा ने हार के बाद रैकेट तोड़ा और दर्शकों पर चिल्लाई

इंडियन वेल्स (कैलिफोर्निया) मौजूदा चैंपियन मीरा एंड्रीवा ने बीएनपी परिबास इंडियन वेल्स टेनिस टूर्नामेंट के महिला एकल के तीसरे दौर में हारने के बाद अपना रैकेट कई बार पटका और फिर दर्शकों पर चिल्लाती हुई कोर्ट से बाहर चली गई। एंड्रीवा गैर वरीयता प्राप्त कैटेरीना सिनियाकोवा से 4-6, 6-7(5), 6-3 से हार गई। मैच के दौरान भी उनका व्यवहार अच्छा नहीं रहा और हारने के बाद वह अपना आपा खो बैठी। दूसरे सेट का टाईब्रेकर हारने के बाद एंड्रीवा ने अपना रैकेट फेंक दिया और फिर उसे तोड़ दिया जो नियमों का उल्लंघन था। उन्होंने मैच प्वाइंट के बाद अपना रैकेट फिर से फेंक दिया। वह सिनियाकोवा से हाथ मिलाने के लिए नेट पर गई। इसके बाद एंड्रीवा दर्शकों की ओर इशारा करते और चिल्लाते हुए कोर्ट से बाहर चली गई। एंड्रीवा ने बाद में कहा, ‘‘मैं अपने व्यवहार से वास्तव में खुश नहीं हूं। मैंने आखिर में जो कुछ किया उस पर मुझे गर्व नहीं है। यह ऐसी चीजें हैं जिन पर मुझे वास्तव में जल्द से जल्द काम करने की जरूरत है।’’  

महिला स्वावलंबन को बढ़ावा: महिला कोष योजनाओं के विस्तार की जरूरत—मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

रायपुर महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए महिला कोष की योजनाओं का विस्तार जरूरी : मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ में रोजगार और स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं और महिला कोष की योजनाएं महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिविरों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से अधिक से अधिक जरूरतमंद महिलाओं तक इन योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि वे इसका लाभ लेकर आत्मनिर्भर बन सकें। मंत्री  राजवाड़े अटल नगर, नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में छत्तीसगढ़ महिला कोष के शासी बोर्ड एवं आमसभा की बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं। बैठक में महिला कोष की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-25 में ऋण योजना के तहत 1500 महिला स्व-सहायता समूहों को 30 करोड़ रुपये तथा सक्षम योजना के तहत 1000 पात्र महिलाओं को 14 करोड़ रुपये के ऋण वितरण की साख योजना के कार्योत्तर अनुमोदन एवं उपलब्धियों की जानकारी दी गई। साथ ही सक्षम योजना, ऋण योजना और स्वावलंबन योजना के लक्ष्यों एवं उपलब्धियों पर भी चर्चा की गई। बैठक में यह जानकारी दी गई कि महिला स्व-सहायता समूहों को वर्तमान में द्वितीय बार अधिकतम 6 लाख रुपये तक ऋण दिए जाने का प्रावधान है। इसी प्रकार सक्षम योजना के अंतर्गत महिलाओं को अधिकतम 2 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान किया जाता है। इन प्रावधानों में आवश्यकता अनुसार संशोधन किए जाने के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया। सितंबर 2025 की स्थिति में जिलों में कुल 8 लाख 2 हजार 843 रुपये की राशि ब्याज के रूप में जमा होने की जानकारी दी गई, जिसका उपयोग महिला कोष के सॉफ्टवेयर निर्माण के लिए किए जाने पर विचार किया गया। बैठक में कार्यरत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को भी पात्रता के आधार पर सक्षम योजना से लाभान्वित करने तथा योजना में महिलाओं की आयु सीमा 25 से 50 वर्ष करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक  शम्मी आबिदी ने बताया कि महिलाओं को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ महिला कोष का गठन किया गया है। इसके तहत महिलाओं को मात्र 3 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे स्वरोजगार और छोटे व्यवसाय प्रारंभ कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। बैठक में महिला एवं बाल विकास, वाणिज्य एवं उद्योग, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास, समाज कल्याण, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, ग्रामोद्योग, कृषि, नगरीय प्रशासन, वन तथा कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों के साथ ही नेहरू युवा केन्द्र, नाबार्ड, छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक, भारतीय स्टेट बैंक तथा यूनिसेफ के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

चंडीगढ़ बैंक फ्रॉड मामला: IDFC फर्स्ट बैंक ने 645 करोड़ रुपये के दावों का निपटारा किया

नई दिल्ली आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने मंगलवार को बताया कि उसने अपनी चंडीगढ़ शाखा में हुए धोखाधड़ी मामले से जुड़े दावों के रूप में 645 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया है। यह राशि बैंक के शुरुआती अनुमान से लगभग 55 करोड़ रुपए ज्यादा है। बैंक ने यह भी कहा कि जांच के दौरान अब तक कोई नई गड़बड़ी सामने नहीं आई है। बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में कहा कि पहले 590 करोड़ रुपए की मूल राशि का अनुमान लगाया गया था, लेकिन बाद में मिले दावों के आधार पर कुल 645 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। बैंक के अनुसार, यह सभी दावे उसी घटना और उसी चंडीगढ़ शाखा से जुड़े हैं; कोई नया मामला सामने नहीं आया है। बैंक ने यह भी बताया कि सभी संबंधित खातों का मिलान पूरा कर लिया गया है और 25 फरवरी 2026 के बाद से देश भर में कोई नया दावा नहीं मिला है। बैंक ने कहा कि उसने अपने सिद्धांतों के अनुसार प्रभावित ग्राहकों को यह भुगतान किया है और आगे भी धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा ताकि नुकसान की राशि की वसूली की जा सके। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने बताया कि इस घटना के बावजूद बैंक की जमा राशि (डिपॉजिट बेस) स्थिर बनी हुई है। 28 फरवरी तक बैंक का कुल डिपॉजिट 2,92,381 करोड़ रुपए था, जबकि दिसंबर के अंत में यह 2,91,133 करोड़ रुपए था। बैंक ने अपने ग्राहकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह सिर्फ चंडीगढ़ की एक शाखा से जुड़ी अलग घटना है। बैंक का लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (एलसीआर) भी मौजूदा तिमाही में 114 प्रतिशत के आरामदायक स्तर पर है। बैंक को उम्मीद है कि भविष्य में भी डिपॉजिट और लोन की वृद्धि पहले की तरह जारी रहेगी। इससे पहले बैंक ने बताया था कि हरियाणा सरकार के खातों से जुड़े लगभग 590 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था, जिसमें बैंक के कुछ कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। मामले की जांच के लिए बैंक ने केपीएमजी को फॉरेंसिक ऑडिट सौंपा है, जिसकी अंतिम रिपोर्ट चार से पांच सप्ताह में आने की उम्मीद है। साथ ही जांच पूरी होने तक बैंक ने चार अधिकारियों को निलंबित भी कर दिया है। घटना के बाद हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी कामकाज से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है।

CBSE का बड़ा बयान: 12वीं गणित का पेपर लीक नहीं हुआ, परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित

नई दिल्ली सीबीएसई के कक्षा 12 के गणित प्रश्नपत्र को लेकर सोशल मीडिया पर कई शंकाएं साझा की जा रही हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई ने मंगलवार को इन शंकाओं पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्र पूरी तरह असली और सुरक्षित हैं। बोर्ड के मुताबिक परीक्षा पत्र की सुरक्षा में किसी प्रकार की कोई कमी या सेंध नहीं लगी है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब प्रश्नपत्र पर दिए गए एक क्यूआर कोड को स्कैन करने पर वह यूट्यूब वीडियो से जुड़ने लगा। इसके कारण प्रश्नपत्र की प्रामाणिकता पर सवाल उठने लगे। सीबीएसई ने मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान में बताया कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बोर्ड द्वारा कई सुरक्षा व्यवस्था की जाती हैं। इन सुरक्षा उपायों में क्यूआर कोड भी शामिल हैं। क्यूआर कोड का उपयोग किसी संभावित सुरक्षा उल्लंघन की स्थिति में प्रश्नपत्र की सत्यता की पुष्टि करने के लिए किया जाता है। गौरतलब है कि 9 मार्च को कक्षा 12 के छात्रों की गणित विषय की परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद कुछ छात्रों और अभिभावकों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि प्रश्नपत्र पर दिए गए एक क्यूआर कोड को स्कैन करने पर वह यूट्यूब वीडियो से जुड़ रहा है। इस घटना के बाद कुछ लोगों ने प्रश्नपत्र की प्रामाणिकता (असली होने) पर सवाल उठाए। यही वह कारण है जिससे छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच प्रश्न पत्र को लेकर चिंता उत्पन्न हो गई। हालांकि सभी प्रश्नपत्र की प्रामाणिकता को लेकर बोर्ड ने स्पष्ट कहा है कि प्रश्नपत्र पूरी तरह से सही व असली है। सीबीएसई ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि परीक्षा में वितरित किए गए सभी प्रश्नपत्र पूरी तरह असली हैं। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा में कोई समझौता नहीं हुआ है। बोर्ड के अनुसार, क्यूआर कोड से जुड़े इस मामले के कारण जो संदेह उत्पन्न हुआ था, उसे अब दूर कर दिया गया है। बोर्ड का कहना है कि उन्होंने इस मामले को पूरी गंभीरता से लिया गया है। बोर्ड ने कहा कि इस घटना को गंभीरता से लिया गया है और सीबीएसई ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है। सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक डॉ संयम भारद्वाज ने कहा कि छात्रों और अभिभावकों को किसी भी तरह की अफवाह पर विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित है। कुछ प्रश्नपत्रों के क्यूआर कोड स्कैन करने पर यूट्यूब वीडियो खुलने की बात सामने आई। भविष्य में ऐसी समस्या न हो, इसके लिए बोर्ड कदम उठा रहा है। हालांकि सीबीएसई ने स्पष्ट किया कि प्रश्नपत्र असली हैं और सुरक्षा में कोई सेंध नहीं लगी।

ASI की रिपोर्ट से बढ़ी हलचल: भोजशाला के शिलालेखों के अक्षर जानबूझकर मिटाए गए

धार ऐतिहासिक भोजशाला एक बार फिर इतिहास के सबसे संवेदनशील सवालों के केंद्र में है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की मैसूर स्थित एपिग्राफी (उत्कीर्णित लेखों का अध्ययन) शाखा ने वर्ष 2024 के सर्वे के दौरान यहां 244 शिलालेखों का विस्तृत अध्ययन किया था। ये शिलालेख 12वीं से 16वीं शताब्दी के बीच के माने जा रहे हैं। इन पर नागरी लिपि में संस्कृत, प्राकृत तथा स्थानीय बोली में रचनाएं अंकित हैं। सर्वे की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कई शिलालेखों के अक्षर जानबूझकर छेनी से मिटाए गए और उन्हें भवन के अलग-अलग हिस्सों में पुनः इस्तेमाल कर लिया गया। मध्यकालीन धरोहर पर आघात और नए साक्ष्य ये जानकारियां मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में प्रस्तुत एएसआइ की सर्वे रिपोर्ट में दर्ज हैं। रिपोर्ट पर 16 मार्च को सुनवाई होनी है। याचिकाकर्ता आशीष गोयल के अनुसार अभिलेखविदों ने रिपोर्ट में बताया है कि ये खंड कभी बड़े शिलालेखों का हिस्सा थे, जिनमें साहित्यिक रचनाएं अंकित थीं। अक्षरों को जानबूझकर मिटाना मध्यकालीन सांस्कृतिक धरोहर पर गंभीर आघात रहा। हालिया सर्वे में 50 नए शिलालेख खंड और एक टूटी हुई प्रतिमा के आसन के टुकड़े का भी परीक्षण किया गया है। पारिजातमंजरी से नागबंध तक: सम्राट भोज का वैभव सर्वे में तीन शिलालेख विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताए गए हैं। पहला, ‘पारिजातमंजरी नाटिका शिलालेख’ बताता है कि इस नाटक की रचना धार के राजा अर्जुनवर्मन के गुरु मदन ने की थी और इसका पहला मंचन ‘शारदा देवी के सदन’ में हुआ था। दूसरा, ‘अवनिकूर्मशतम शिलालेख’ में प्राकृत भाषा के दो काव्य हैं, जिनमें प्रत्येक में 109 श्लोक हैं और दोनों की रचना सम्राट भोजदेव द्वारा की गई। तीसरा, ‘नागबंध शिलालेख’ व्याकरण और शिक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, जिसमें परमार वंश के राजा नरवर्मन का उल्लेख है। इतिहास की धूल से निकले सदियों पुराने शिल्पकारों के नाम सर्वे में 34 छोटे उत्कीर्ण नाम भी सामने आए। 13वीं सदी के शिल्पकारों में मदन, माधव और जकिजु के नाम हैं, जबकि 16वीं सदी में मोहिला, कामदेव, सोमदेव, रणपाल और परमार सहित डेढ़ दर्जन से अधिक शिल्पकारों के नाम मिले हैं। ये नाम उन कारीगरों की जीवित गवाही हैं जो सदियों से इतिहास की धूल में दबे थे। बता दें, भोजशाला से जुड़े शिलालेखों का पहला अध्ययन वर्ष 1951 में हुआ था।  

सीट के नीचे छिपा था ‘सॉ-स्केल्ड वाइपर स्नेक’, युवक को चलती बाइक में जहरीले सांप ने डसा

कोटा. शहर से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई, जहां चलती बाइक पर बैठे युवक को जहरीले सांप ने डंस लिया। बाद में पता चला कि करीब 2 फीट लंबा ‘सॉ-स्केल्ड वाइपर’ बाइक की सीट के नीचे छिपकर बैठा हुआ था। सांप के काटने के बाद युवक को तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां उसका इलाज जारी है। घटना कोटा के नयागांव रोड इलाके की है। जानकारी के अनुसार योगेश नाम का युवक अपने दोस्त मोहित के साथ लाइट का काम करने के लिए जा रहा था। बाइक मोहित चला रहा था जबकि योगेश पीछे बैठा हुआ था और उसके हाथ में लाइट व वायर थे। रास्ते में अचानक योगेश को कमर के पास तेज चुभन महसूस हुई। पहले उसे लगा कि शायद किसी मच्छर ने काट लिया। कुछ ही देर बाद जब योगेश ने उस जगह पर हाथ लगाया तो सांप ने उसकी उंगली पर भी काट लिया। तभी उसे बाइक में सांप होने का पता चला और वह घबरा गया। यह देखकर मोहित ने तुरंत बाइक रोकी और बिना देर किए योगेश को मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल लेकर पहुंचा जहां उसे इमरजेंसी में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। इस घटना की सूचना मिलने के बाद मोहित के पिता ने स्नेक कैचर गोविंद शर्मा को बुलाया। मौके पर पहुंचे गोविंद शर्मा ने बाइक की जांच की तो सीट के नीचे एक जहरीला सॉ-स्केल्ड वाइपर छिपा हुआ मिला। उन्होंने सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़कर जंगल में छोड़ दिया। काफी जहरीला होता है सॉ-स्केल्ड वाइपर स्नेक कैचर गोविंद शर्मा ने बताया कि यह सांप करीब 2 फीट लंबा था। सॉ-स्केल्ड वाइपर बेहद जहरीली प्रजाति में गिना जाता है। इसका जहर काफी खतरनाक होता है। सांप के काटने के तुरंत बाद युवक को अस्पताल पहुंचा दिया था, जिससे समय रहते उसका इलाज शुरू हो सका और युवक की जान बच गई।

मध्यप्रदेश को मिलेगी एक और बड़ी पहचान: नौरादेही अभयारण्य में बसेंगे चीते, सीएम डॉ. यादव की घोषणा

भारतीय क्रिकेट टीम ने बढ़ाया देश का मान मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंत्रीगण से चर्चा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नौरादेही का रानी दुर्गावती अभयारण्य चीतों का तीसरा घर बनने जा रहा है। जल्द ही वहाँ भी चीते छोड़े जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतकर भारतीय क्रिकेट टीम ने एक बार फिर सफलता का परचम लहराया है। खेलने वाले कुल 20 देश, 55 मैच और विजेता- भारत, यह आंकड़े बताते हैं कि भारतीय क्रिकेट टीम ने दृढ़ संकल्प, साहस और पराक्रम से यह उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे खिलाड़ियों ने पूरे विश्व में देश का मान-सम्मान बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश सरकार और पूरी मंत्रि-परिषद् की ओर से भारतीय क्रिकेट टीम को बधाई और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संघ लोक सेवा आयोग-2026 के हालिया घोषित रिजल्ट में मध्यप्रदेश के 2 होनहार अभ्यर्थियों द्वारा टॉप टेन अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट में स्थान प्राप्त करने पर दोनों ही अभ्यर्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष प्रदेश के कई विद्यार्थियों का यूपीएससी की परीक्षा में आईएएस, आईपीएस, आईआरएस इत्यादि कई पदों पर चयन हुआ है। हमारे विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में चयनित होकर प्रदेश का नाम रौशन कर रहे हैं। रानी दुर्गावती अभयारण्य (नौरादेही) में भी छोड़ेंगे चीते मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में चीते तेजी से फल-फूल रहे हैं। हाल ही में 5 नये शावकों की आमद से चीतों का परिवार और भी समृद्ध हुआ है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार करीब 2 महीने बाद रानी दुर्गावती अभयारण्य (नौरादेही) में भी चीते छोड़ने जा रही है। इससे मध्यप्रदेश में चीतों के 3 घर तैयार हो जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम मगर/घड़ियाल और कछुए भी विभिन्न जल क्षेत्रों में मुक्त करेंगे, ताकि हमारी जैव सम्पदा और भी समृद्ध हो सके। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री को भायी मध्यप्रदेश की जल संचय पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण से कहा कि मध्यप्रदेश में जल संचयन के लिए चलाए गए जल गंगा संवर्धन अभियान की केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सीआर पाटिल द्वारा सराहना की गई है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने 5 मार्च को हुई वीडियो काँफ्रेंसिंग में कहा था कि मध्यप्रदेश सामुदायिक सहभागिता से जल संरक्षण और सतत् जल प्रबंधन देश के सामने श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। मध्यप्रदेश में 250 से अधिक नदियां हैं। मध्यप्रदेश बांधों की संख्या के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा था कि जल संचयन के प्रोत्साहन के लिए भारत सरकार भी जल इस दिशा में जनभागीदारी से ऐसा ही कदम बढ़ाने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि केंद्र से मिली सराहना हमारी जल संचय नीति की सफलता का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के प्रथम चरण में 2.79 लाख से अधिक जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण कर महत्वपूर्ण योगदान दिया गया। दूसरे चरण में भी मध्यप्रदेश में 72 हजार 647 जल संग्रहण संरचनाओं के निर्माण कार्य पूरे कर लिए गए हैं और 64 हजार 395 जल संरचना निर्माण कार्य फिलहाल प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में इस साल 19 मार्च 2026 से जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण से कहा कि वे भी अपने-अपने क्षेत्रों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के काम बढ़ाएं। डिजिटल पंजीयन में मध्यप्रदेश ने रचा इतिहास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में दस्तावेजों के डिजिटल पंजीयन का काम शुरू हो गया है। मध्यप्रदेश में प्रति वर्ष करीब 16 लाख से अधिक दस्तावेजों का पंजीयन किया जाता है। यह एक बड़ा काम है पर हम इसे समय-सीमा में ही पूरा करेंगे। उन्होंने बताया कि संपदा 2.0 प्रणाली से दस्तावेजों का पूर्णत: पेपरलेस ई- पंजीयन शुरु कर दिया है। यह व्यवस्था नागरिकों को त्वरित सेवाएं देने के साथ-साथ प्रशासन में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित करेगी। संपदा प्रणाली से ई-पंजीयन और ई-स्टाम्पिंग की सुविधा प्रदान कर पूरी प्रक्रिया को इलेक्ट्रॉनिक बनाया गया है। इस प्रणाली में कोई भी व्यक्ति कहीं से भी ई-स्टॉम्प तैयार कर सकता है। यह व्यवस्था लागू करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। गेहूं उपार्जन 2026 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि मध्यप्रदेश सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं उपार्जन पर 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने जा रही है। साथ ही दलहन उत्पादन को प्रोत्साहन के लिए उड़द की खरीद पर भी 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने जा रही है। उड़द की खरीद पर बोनस देने के मामले में मध्यप्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जिसने यह कदम उठाया है। उन्होंने बताया कि गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन की अवधि 10 मार्च 2026 रखी गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को समय पर भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पचमढ़ी को बनाएंगे बेस्ट इन्वायरमेंटल मॉडल मुख्यमंत्री ने बताया कि पचमढ़ी को जर्मनी की एक अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण संस्था द्वारा ग्रीन डेस्टिनेशन के रूप में प्रमाणित किया गया है। यह मध्यप्रदेश में पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए हो रहे प्रयासों का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि पचमढ़ी देश का ऐसा पहला स्थल है, जिसे इस तरह का प्रमाणन मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम पचमढ़ी को देश के अनुकरणीय और बेस्ट इन्वायरमेंटल मॉडल के रूप में विकसित करेंगे। खाड़ी देशों में वर्तमान स्थिति के मद्देनजर हेल्पलाइन/कंट्रोल रूम स्थापित मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) में उपजी विषम परिस्थितियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खाड़ी देशों में रह रहे मध्यप्रदेश के निवासियों की सहायता के लिए मध्यप्रदेश भवन नई दिल्ली में एवं भोपाल के वल्लभ भवन (मंत्रालय) में 24×7 हेल्पलाइन/कंट्रोल रूम की स्थापना कर दी गई है। मध्यप्रदेश के निवासी जो खाड़ी देशों में अध्ययन, नौकरी, व्यवसाय, पर्यटन, इत्यादि के लिए गए मध्यप्रदेश के निवासी वर्तमान परिस्थतियों में किसी प्रकार की सहायता की अपेक्षा करते हों तो वे कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं। मध्यप्रदेश के लोगों की सकुशल स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए हम सभी … Read more

बाढ़ संकट से जूझ रहे मोजाम्बिक की मदद को आगे आया भारत, राहत सामग्री व दवाइयों की सप्लाई

नई दिल्ली पूर्वी अफ्रीका के देश मोजाम्बिक के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में आई भीषण बाढ़ का जनजीवन पर बुरा असर पड़ा है। हजारों लोग प्रभावित हुए हैं, और कई इलाकों में राहत एवं पुनर्वास की तत्काल जरूरत महसूस की जा रही है। इस कठिन परिस्थिति में भारत ने मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाते हुए बड़े पैमाने पर राहत सामग्री भेजी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने विभिन्न सोशल प्लेटफॉर्म्स पर इसकी सूचना दी है। इसमें बताया है कि अपनी ह्यूमनिटेरियन असिस्टेंस और डिजास्टर रिलीफ (एचएडीआर) कोशिशों के तहत, भारत ने मोजाम्बिक को सहायता सामग्री पहुंचाई है। इस सहायता में 500 मीट्रिक टन चावल, अस्थायी आश्रय के लिए टेंट, हाइजीन किट और पुनर्वास कार्यों में उपयोगी कई अन्य आवश्यक सामान शामिल हैं। इसके अलावा आपदा प्रभावित लोगों की तात्कालिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 10 मीट्रिक टन आवश्यक राहत सामग्री भी भेजी गई है। राहत अभियान के तहत भारतीय नौसेना के एक जहाज के माध्यम से लगभग 3 टन आवश्यक दवाइयां भी मोजाम्बिक पहुंचाई जा रही हैं, ताकि बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों से निपटने में स्थानीय प्रशासन को मदद मिल सके। भारत पहले ही समुद्री मार्ग के जरिए 86 मीट्रिक टन जीवन रक्षक दवाइयों की खेप मोजाम्बिक भेज चुका है। इन दवाइयों का उद्देश्य आपदा-प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और पीड़ितों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बाद खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाएं सबसे बड़ी चुनौती बन जाती हैं। ऐसे में भारत द्वारा भेजी गई खाद्य सामग्री, स्वच्छता किट और दवाइयां राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। भारत ने हमेशा प्राकृतिक आपदाओं के समय अपने मित्र देशों की सहायता की है। हिंद महासागर क्षेत्र और अफ्रीकी देशों के साथ भारत के मजबूत संबंध रहे हैं, और आपदा के समय दी जाने वाली मानवीय सहायता इन संबंधों को और मजबूत करती है। भारत मानवीय, चिकित्सीय और लॉजिस्टिक सहायता देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस पहल के माध्यम से भारत न केवल संकट के समय मदद पहुंचा रहा है, बल्कि हिंद महासागर और अफ्रीका क्षेत्र में एक भरोसेमंद और जिम्मेदार साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को भी मजबूत कर रहा है।

नए शहरों के विकास को रफ्तार, 8 शहरों को पहले चरण के लिए ₹425 करोड़

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत प्रदेश के आठ शहरों के विकास के लिए ₹425 करोड़ की धनराशि स्वीकृत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस योजना का उद्देश्य तेजी से बढ़ रही शहरी आबादी को ध्यान में रखते हुए नए शहरों का सुनियोजित और सुव्यवस्थित विकास करना तथा लोगों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार बरेली, वाराणसी, उरई, चित्रकूट, बांदा, प्रतापगढ़, गाजीपुर और मऊ में नए शहरों के समग्र विकास के लिए सीड कैपिटल के रूप में यह धनराशि जारी की जाएगी। योजना के तहत भूमि अर्जन में आने वाले खर्च का अधिकतम 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार सीड कैपिटल के रूप में उपलब्ध कराती है, जिसे अधिकतम 20 वर्ष की अवधि के लिए दिया जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के लिए कुल ₹3000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें से पहले चरण में ₹425 करोड़ जारी किए जाएंगे।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट शुरू होने की ओर एक और कदम, एयरोड्रम लाइसेंस सीएम योगी को सौंपा गया

लखनऊ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर भारत सरकार की ओर से जारी एयरोड्रम लाइसेंस प्रस्तुत किया। इसके साथ ही जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम पूरा हो गया है। इस लाइसेंस के बाद अब एयरपोर्ट के उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन समेत वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री को परियोजना की प्रगति और आगामी चरणों की जानकारी भी दी। अधिकारियों के अनुसार एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद अब नियामकीय स्वीकृतियों की अंतिम प्रक्रिया जारी है। एयरपोर्ट का एयरोड्रम सिक्योरिटी प्रोग्राम इस समय ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी के पास समीक्षा के लिए लंबित है। सुरक्षा से जुड़ी यह मंजूरी मिलते ही एयरपोर्ट प्रबंधन सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर औपचारिक उद्घाटन और वाणिज्यिक संचालन की तिथि तय करेगा। गौतमबुद्ध नगर के जेवर में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा है। इस एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है, जहां स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का समन्वय देखने को मिलेगा। एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन हैं। एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में एक रनवे और एक यात्री टर्मिनल भवन बनाया गया है, जिसकी क्षमता प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ 20 लाख यात्रियों की होगी। दूसरे चरण में क्षमता बढ़ाकर 3 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाई जाएगी। तीसरे और चौथे चरण में विस्तार के बाद कुल क्षमता 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल लगभग 1.38 लाख वर्गमीटर है, जिसमें 48 चेक इन काउंटर, 9 सुरक्षा जांच लेन और 9 इमिग्रेशन काउंटर बनाए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय लाउंज भी विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा यहां 10 एयरोब्रिज और 28 विमान पार्किंग स्टैंड की व्यवस्था की गई है। रनवे पर प्रति घंटे लगभग 30 उड़ानों के संचालन की क्षमता विकसित की गई है। एयरपोर्ट परिसर में आधुनिक कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब भी तैयार किया जा रहा है। प्रारंभिक चरण में इसकी क्षमता लगभग 2.5 लाख टन कार्गो प्रतिवर्ष होगी, जिसे आगे चलकर 15 लाख टन तक बढ़ाया जाएगा। तकनीकी दृष्टि से भी यह एयरपोर्ट अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। यहां डिजीयात्रा आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और डिजिटल पैसेंजर प्रोसेसिंग सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रहीं हैं ताकि यात्रियों को तेज और सहज यात्रा का अनुभव मिल सके। सतत विकास को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट को नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है। परिसर में सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर में हवाई यातायात का दबाव कम होगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

Yogi Adityanath कैबिनेट का बड़ा निर्णय: यूपी में अब रजिस्ट्रेशन के बिना नहीं चलेंगी Ola-Uber सेवाएं

लखनऊ  योगी सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा व सुविधा को देखते हुए परिवहन से जुड़ा बड़ा फैसला लिया है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में बताया कि यूपी में अब ओला व उबर को भी पंजीकरण कराना होगा। परिवहन मंत्री ने मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 93 का जिक्र किया और बताया कि भारत सरकार ने 1 जुलाई 2025 को नियमावली में संशोधन किया है। भारत सरकार के नियम को उत्तर प्रदेश भी अपनाएगा। ओला-उबर पर पहले नियंत्रण नहीं था, लेकिन अब इन्हें भी पंजीकरण कराना पड़ेगा। आवेदन, लाइसेंस और रिन्युअल शुल्क भी देना होगा। कौन गाड़ी चला रहा है, यह अभी तक हम नहीं जान पाते थे। इनका ड्राइवर का मेडिकल, पुलिस वेरिफिकेशन तथा फिटनेस टेस्ट आदि भी कराएंगे। परिवहन मंत्री ने बताया कि अब यूपी में बिना पंजीकरण शुल्क, फिटनेस, मेडिकल टेस्ट, पुलिस वेरिफिकेशन के गाड़ी नहीं चला पाएंगे। अधिसूचना जारी होने के बाद यह लागू हो जाएगी। आवेदन की फीस 25 हजार रुपये होगी, जबकि 50-100 या इससे अधिक गाड़ी चलाने वाली कंपनी की लाइसेंसिंग फीस पांच लाख रुपये होगी। रिन्युअल हर पांच साल पर होता रहेगा। रिन्युअल के लिए पांच हजार रुपये देना होगा। परिवहन मंत्री ने बताया कि ऐसा ऐप भी विकसित करेंगे, जिससे समस्त जानकारी पब्लिक डोमेन में रहे। इसके तहत ड्राइवर आदि की समस्त जानकारी भी प्राप्त होगी। अब प्रदेश के हर गांव तक पहुंचेगी बस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोकभवन में कैबिनेट बैठक हुई। वित्त व संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने पत्रकार वार्ता में बताया कि बैठक में कुल 31 प्रस्ताव आए, जिसमें से 30 प्रस्तावों पर कैबिनेट ने स्वीकृति दी। योगी सरकार ने ग्रामीणों के हित को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने ‘मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026’ को स्वीकृति दी। इस योजना के माध्यम से अब उत्तर प्रदेश के हर गांव तक बस पहुंचेगी। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 के संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अभी तक 12,200 गांवों तक बसें नहीं पहुंच रही थीं, लेकिन नई पॉलिसी के तहत उत्तर प्रदेश की सभी 59,163 ग्राम सभाओं तक बसें पहुंचेंगी। इन बसों को परमिट व टैक्स से मुक्त रखा गया है। बड़ी ग्रामीण आबादी लाभान्वित इससे प्रदेश की बड़ी ग्रामीण आबादी लाभान्वित होगी। ये बसें चलाने की अनुमति निजी लोगों को मिलेगी। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित होगी, जिसमें सीडीओ, एसपी, एआरटीओ, एआरएम सदस्य होंगे। ये बसें रात में गांव में ही रुकेंगी। सुबह ब्लॉक व तहसील होते हुए ये बसें सुबह 10 बजे तक जनपद मुख्यालय तक पहुंचेंगी। इस सेवा का लाभ विद्यार्थियों के अलावा कचहरी, ऑफिस या अपना उत्पाद शहर में बेचने जाने वाले लोगों को भी मिलेगा। कई गांवों में ऐसी सड़कें हैं, जहां बड़ी बसें टर्न होने में परेशानी होती है। 12,200 में से 5000 ऐसे गांव हैं, जहां बड़ी बसें टर्न नहीं हो सकतीं। इसलिए ये छोटी बसें होंगी, जिनकी अधिकतम लंबाई सात मीटर और अधिकतम सीट क्षमता 28 होगी।  

अयोध्या में बनेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, भूमि हस्तांतरण को योगी कैबिनेट की मंजूरी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जनपद अयोध्या में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। यह स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना के तहत बनाया जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार अयोध्या के चक नंबर-4, मोहल्ला वशिष्ठ कुंड, परगना हवेली अवध, तहसील सदर में स्थित नजूल भूमि के सात गाटा नंबर (1026, 1027, 1029, 1030, 1031, 1033 मि. और 1035) कुल लगभग 2500 वर्गमीटर क्षेत्रफल को अयोध्या म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के पक्ष में हस्तांतरित किया जाएगा। जिलाधिकारी अयोध्या द्वारा नगर आयुक्त के अनुरोध पर यह प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार यह भूमि कुछ शर्तों और प्रतिबंधों के अधीन नगर निगम अयोध्या को निःशुल्क आवंटित की जाएगी। सरकार का उद्देश्य इस भूमि पर आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण कर खेल सुविधाओं को बढ़ावा देना और स्थानीय युवाओं को बेहतर खेल अवसंरचना उपलब्ध कराना है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह भूमि हस्तांतरण अपवाद स्वरूप किया जा रहा है और इसे भविष्य में उदाहरण के रूप में नहीं माना जाएगा।

मंत्री परमार ने चित्रकूट स्थित पंचवटी घाट पर किया श्रमदान

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने सोमवार को चित्रकूट प्रवास के दौरान पवित्र पंचवटी घाट पर माँ मंदाकिनी नदी के स्वच्छता अभियान में भाग लेकर श्रमदान किया। मंत्री परमार ने स्वयं घाट परिसर में सफाई करते हुए लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। मंत्री परमार ने कहा कि चित्रकूट धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ बहने वाली माँ मंदाकिनी नदी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए इसकी स्वच्छता बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि स्वच्छता केवल सरकारी अभियान नहीं बल्कि जनभागीदारी से सफल होने वाला जनआंदोलन है। स्वच्छता अभियान में मंत्री श्री परमार ने घाट परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर घाट की सफाई की और लोगों से अपील की कि वे नदी में कचरा न डालें तथा आसपास के वातावरण को स्वच्छ बनाए रखने में सहयोग करें। सभी ने मिलकर माँ मंदाकिनी की स्वच्छता के लिए श्रमदान करते हुए स्वच्छता का संदेश दिया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

राजस्थान में ‘गैस बम’ से उड़ाने की धमकी: पासपोर्ट दफ्तरों की सुरक्षा बढ़ी, एजेंसियां जांच में जुटीं

जयपुर/सीकर/जैसलमेर राजस्थान के कई जिलों में स्थित पासपोर्ट सेवा केंद्रों (PSK) को मंगलवार दोपहर एक सनसनीखेज ई-मेल मिला, जिसमें दावा किया गया कि दोपहर 1 बजे कार्यालयों में ‘गैस बम ब्लास्ट’ किए जाएंगे। ई-मेल में आतंकी संगठन ISI का नाम लिखे होने के कारण सुरक्षा एजेंसियां तुरंत हरकत में आ गईं। सीकर : यहाँ पासपोर्ट कार्यालय को धमकी मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत इलाके की घेराबंदी कर दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जयपुर से बम निरोधक दस्ते (BDDS) को विशेष रूप से बुलाया गया है। जैसलमेर : सीमावर्ती जिले में धमकी मिलते ही पासपोर्ट कार्यालय पर ताला लगा दिया गया और पूरी बिल्डिंग को खाली करवाकर सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया। बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ : इन जिलों में भी इसी तरह के ई-मेल मिलने के बाद पुलिस ने एहतियातन कार्यालयों को बंद करवा दिया है और तकनीकी टीम मेल के सोर्स की जांच कर रही है। सुरक्षा उपाय और जांच : धमकी मिलने के साथ ही स्थानीय पुलिस ने संबंधित इमारतों से स्टाफ और आम जनता को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। शुरुआती जांच में इसे दहशत फैलाने की साजिश के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन ISI के नाम का जिक्र होने के कारण केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां और SOG भी मामले की निगरानी कर रही हैं। आमजन के लिए अपील : प्रशासन ने लोगों से धैर्य बनाए रखने और किसी भी लावारिस वस्तु की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की है। फिलहाल सभी प्रभावित पासपोर्ट कार्यालयों में काम रोक दिया गया है।

वन डिस्ट्रिक्ट, वन क्यूज़ीन योजना से जुड़ेगी इको-टूरिज्म वैन सेवा, पर्यटकों को मिलेगा स्थानीय व्यंजनों का स्वाद

लखनऊ उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) जल्द ही पर्यटन को नई दिशा देने वाली अनूठी पहल शुरू करने जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए इको टूरिज्म वैन सेवा शुरू की जाएगी। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इस क्रम में पहले चरण में मथुरा, वाराणसी और लखनऊ में इस सेवा की शुरुआत होगी। इन शहरों के फीडबैक के आधार पर इको टूरिज्म वैन सेवा को राज्य के अन्य जिलों में भी विस्तारित किया जाएगा। यूपीएसटीडीसी की इको टूरिज्म वैन सेवा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सतत पर्यटन की अवधारणा को साकार करेगी। इससे एक ओर पर्यटकों को अनोखा अनुभव मिलेगा, तो वहीं दूसरी ओर यह सेवा कार्बन फुटप्रिंट कम करने की दिशा में भी सार्थक कदम साबित होगी। मिलेगा ऐतिहासिक स्थलों, सांस्कृतिक धरोहरों और प्राकृतिक सुंदरता का वर्चुअल अनुभव यूपीएसटीडीसी पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इको टूरिज्म वैन सेवा की शुरुआत कर रहा है। यह पर्यटकों को सुविधा प्रदान करने के साथ पर्यटन यात्रा का अनोखा अनुभव भी प्रदान करेगी। इको वैन में आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) और वर्चुअल रियलिटी (वीआर) जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनके माध्यम से पर्यटक यात्रा के दौरान ऐतिहासिक स्थलों, सांस्कृतिक धरोहरों और प्राकृतिक सुंदरता का वर्चुअल अनुभव ले सकेंगे। साथ ही इको टूरिज्म वैन में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाया जाएगा। यह पर्यटकों की सुविधाजनक और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करेगा। वहीं टिकट बुकिंग के लिए डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी दी जाएगी। वन डिस्ट्रिक्ट, वन क्यूज़ीन योजना के साथ ग्रामीण पर्यटन स्थलों से भी जोड़ेगी यूपीएसटीडीसी इको-टूरिज्म वैन सेवा के साथ मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी वन डिस्ट्रिक्ट, वन क्यूज़ीन योजना को भी जोड़ेगा। इसके माध्यम से पर्यटकों को पर्यटन क्षेत्र के स्थानीय और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखने का अवसर मिलेगा। साथ ही क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजन बनाने वाले रेस्टोरेंट्स और रसोइयों को भी बढ़ावा मिलेगा। यह वैन पर्यटकों को इको फ्रेंडली तरीके से विभिन्न जिलों के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक ले जाएंगी। इससे रास्ते में पड़ने वाले ग्रामीण और कम ज्ञात पर्यटन स्थलों में भी पर्यटन गतिविधियों का विकास होगा। यूपीएसटीडीसी की यह पहल न केवल पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी सहायक सिद्ध होगी। योगी सरकार की इस नई रणनीति से उत्तर प्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित करेगा।

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