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8वें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में 35% वृद्धि, जनवरी से एरियर का मिलेगा भुगतान

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन के साथ ही लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह आयोग फिलहाल लागू 7वें वेतन आयोग की जगह लेगा, जो साल 2016 से लागू है। नए वेतन आयोग का मकसद कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और भत्तों की पूरी संरचना की समीक्षा करके उसे मौजूदा आर्थिक हालात के हिसाब से अपडेट करना है। मांगे गए हैं सुझाव वित्त मंत्रालय ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए कर्मचारियों, पेंशनर्स, कर्मचारी संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव भी मांगे हैं। इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया है, जहां लोग अपनी राय और सुझाव भेज सकते हैं। यह सुविधा 30 अप्रैल 2026 तक खुली रहेगी। सरकार ने आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट देने के लिए करीब 18 महीने का समय दिया है। इसके बाद सरकार रिपोर्ट का अध्ययन करके अंतिम फैसला लेगी। कितनी बढ़ेगी सैलरी अगर पिछली वेतन आयोगों की बात करें तो हर बार वेतन में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है। 7वें वेतन आयोग के लागू होने पर केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दी गई थी, जबकि अधिकतम बेसिक सैलरी 2.5 लाख रुपये प्रति माह तय की गई थी। अब 8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों में उम्मीद है कि इस बार भी सैलरी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिटमेंट फैक्टर पर चर्चा सबसे बड़ी चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है। फिटमेंट फैक्टर वही गुणांक होता है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा करके नई सैलरी तय की जाती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर 2.4 से 3.0 के बीच हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो कर्मचारियों की सैलरी में लगभग 20% से 35% तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा। एरियर को लेकर भी कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर सामने आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही सरकार आयोग की सिफारिशों को मंजूरी देने में समय ले, लेकिन वेतन संशोधन का असर 1 जनवरी 2026 से माना जाएगा। यानी जब भी नया वेतन लागू होगा, कर्मचारियों को उस तारीख से लेकर लागू होने तक का एरियर भी मिल सकता है। एनालिस्ट ने क्या कहा फाइनेंस एनालिस्ट का कहना है कि अंतिम वेतन बढ़ोतरी कई आर्थिक कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें महंगाई की स्थिति, सरकार की वित्तीय क्षमता, टैक्स कलेक्शन और 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें शामिल हैं। ऐसे में सरकार कोशिश करेगी कि कर्मचारियों को अच्छा वेतन बढ़ोतरी पैकेज मिले, लेकिन साथ ही सरकारी खजाने पर ज्यादा बोझ भी न पड़े। इसलिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी अंतिम तस्वीर अगले 12–18 महीनों में ही साफ हो पाएगी।

नेपाल में मंदिर से लौट रही बस खाई में गिरी, 7 भारतीय श्रद्धालुओं की जान गई

कपिलवस्तु गोरखा जिले के प्रसिद्ध मनकामना मंदिर में दर्शन कर लौट रहे भारतीय श्रद्धालुओं की माइक्रो बस शनिवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य यात्री घायल हो गए।  प्रारंभिक जानकारी के अनुसार टूरिस्ट माइक्रो बस में 14 यात्री सवार होकर गोरखा में मनकामना मंदिर दर्शन के लिए गए थे। दर्शन के बाद लौटते समय कपिलवस्तु बॉर्डर से करीब डेढ़ सौ किलोमीटर दूर कांटार जिले के शहीद लखन गाऊ पालिका वार्ड नंबर-3 के पास बस अचानक अनियंत्रित हो गई और करीब 200 फुट गहरी खाई में जा गिरी। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और राहत टीम मौके पर पहुंच गई और बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस सुपरिटेंडेंट भारत बहादुर बीका ने बताया कि मृतकों में पांच पुरुष और तीन महिलाएं शामिल हैं। अभी उनके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं मिल पाई है। कहा कि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।  इससे पहले अगस्त 2024 में भी अनबुखैरेनी क्षेत्र में भारतीय श्रद्धालुओं से भरी एक बस हादसे का शिकार हो गई थी, जिसमें कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई थी. नेपाल में हाल के वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में वृद्धि देखी गई है. नेपाल ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक एक दशक पहले देश में 4,999 सड़क हादसे दर्ज किए गए थे, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 7,669 हो गई. विश्व बैंक की एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाला आर्थिक नुकसान 2007 के बाद से तीन गुना बढ़ चुका है और यह अब देश के सकल राष्ट्रीय उत्पाद का लगभग 1.5 प्रतिशत हो गया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सड़क हादसों का सबसे ज्यादा असर कमजोर वर्गों पर पड़ता है. नेपाल में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों में 70 प्रतिशत से अधिक लोग पैदल यात्री, साइकिल चालक और मोटरसाइकिल सवार जैसे संवेदनशील सड़क उपयोगकर्ता होते हैं.

मंडीदीप में LPG एजेंसी पर छापा, 200 सिलेंडर जब्त; जबलपुर में पुलिस ने हॉकर के घर से गैस सिलेंडर और बुक्स की बरामदगी की

मंडीदीप  मंडीदीप क्षेत्र में एक एलपीजी एजेंसी द्वारा अनुज्ञप्ति की शर्तों का उल्लंघन करने पर प्रशासन ने कार्रवाई की है। जांच के दौरान बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर नियमों के विपरीत खुले में रखे पाए गए। प्राप्त जानकारी के अनुसार सेक्टर-सी, प्लाट नंबर 15 स्थित एजेंसी के संचालक विनोद कुमार जैन, जो एचपीसीएल कंपनी के कमर्शियल सिलिंडरों के अधिकृत डीलर हैं, उनके परिसर में निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान 47.2 किलोग्राम क्षमता के 85 सिलिंडर ट्रक में रखे पाए गए। निर्धारित स्थान पर भेजने के बजाय परिसर में ही रखा ये सिलेंडर 13 मार्च को सिक्योरिटी पेपर मिल होशंगाबाद को सप्लाई के लिए प्राप्त हुए थे, लेकिन उन्हें निर्धारित स्थान पर भेजने के बजाय परिसर में ही रखा गया था। इसके अलावा परिसर में 19 किलोग्राम के 115 सिलिंडर तथा 5 किलोग्राम के 10 सिलेंडर (5 भरे और 5 खाली) भी पाए गए, जिन्हें गोदाम में रखने के बजाय खुले में रखा गया था। सिलिंडरों को जब्त कर पंचनामा तैयार किया इसे अनुज्ञप्ति की शर्तों का उल्लंघन माना गया। मौके पर सिलिंडरों को विधिवत जब्त कर पंचनामा तैयार किया गया तथा उन्हें एजेंसी संचालक के सुपुर्द किया गया। यह कार्रवाई कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा के निर्देशन में राजस्व अधिकारी चंद्रशेखर श्रीवास्तव, जिला आपूर्ति अधिकारी राजू कातुलकर, तहसीलदार हेमंत शर्मा, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी प्रताप सिंह, सहायक आपूर्ति अधिकारी संगीता तथा थाना प्रभारी रंजीत सराठे की उपस्थिति में की गई। हॉकर के घर पुलिस की छापेमारी भेड़ाघाट थाना क्षेत्र में गैस एजेंसी से जुड़े एक हॉकर द्वारा घर में अवैध रूप से गैस सिलिंडर रखने का मामला सामने आया है। राजस्व और खाद्य विभाग की टीम ने पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए आरोपी के घर पर छापेमारी की। इस दौरान घर से दस गैस सिलिंडर और 47 उपभोक्ताओं की गैस बुक बरामद की गईं। पुलिस ने मामले में आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। संयुक्त टीम ने की छापेमारी पुलिस के अनुसार रात राजस्व एवं खाद्य विभाग की टीम के साथ भेड़ाघाट पुलिस ने मीरगंज क्षेत्र के झिन्ना मोहल्ला स्थित सुनील पटेल के घर पर दबिश दी। टीम को सूचना मिली थी कि घर में बड़ी संख्या में गैस सिलिंडर अवैध रूप से रखे गए हैं। तलाशी के दौरान घर से छह घरेलू और चार व्यावसायिक गैस सिलिंडर बरामद हुए। इसके साथ ही 47 उपभोक्ताओं की गैस बुक भी मौके से मिलीं। पूछताछ में नहीं दे पाया संतोषजनक जवाब कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद सुनील पटेल से सिलिंडरों और गैस बुक के संबंध में पूछताछ की गई। हालांकि वह इस संबंध में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। इसके बाद टीम ने जब्त सामग्री को अपने कब्जे में ले लिया और मामले की जानकारी पुलिस को दी। गैस एजेंसी में हॉकर के रूप में करता है काम पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह गुलौआ चौक, संजीवनी नगर स्थित दीप गैस एजेंसी में हॉकर के रूप में काम करता है। उसका काम झिन्ना, मीरगंज, आमा हिनौता, कूडन, शिल्पी नगर और भेड़ाघाट क्षेत्र में उपभोक्ताओं को गैस सिलिंडर पहुंचाना है। उपभोक्ताओं की गैस बुक रख ली थीं अपने पास पुलिस के अनुसार इसी कारण उसने इन क्षेत्रों के 47 उपभोक्ताओं की गैस बुक अपने पास रख ली थीं। फिलहाल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और पूरे मामले की जांच जारी है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर कार्रवाई होगी।

वैज्ञानिकों की बड़ी खोज: अब दवाएं होंगी ज्यादा असरदार, कैंसर इलाज को मिलेगा नया रास्ता

क्या आपने कभी सोचा है कि बिना किसी बाहरी गर्मी, रोशनी या केमिकल के कोई रासायनिक प्रतिक्रिया अपने आप सेकंडों में पूरी हो सकती है? वैज्ञानिकों ने एक ऐसी ही अद्भुत और दुर्लभ खोज की है। इस नई खोज ने दवा निर्माण, प्रोटीन विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विकास के नए दरवाजे खोल दिए हैं। आइए, इस अहम वैज्ञानिक खोज को डिटेल में समझते हैं। क्या है यह नई रिसर्च? शोधकर्ताओं ने एक पूरी तरह से नई रासायनिक प्रक्रिया की खोज की है, जिसे ‘ट्राइसल्फाइड मेटाथेसिस प्रतिक्रिया’ नाम दिया गया है। इसके बारे में मशहूर विज्ञान पत्रिका ‘नेचर केमिस्ट्री’ में प्रकाशित किया गया है। इस प्रतिक्रिया की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सामान्य कमरे के तापमान पर, बिना किसी बाहरी एजेंट या उत्तेजना (जैसे गर्मी या रोशनी) के अपने आप काम करती है। यह प्रतिक्रिया कुछ ही सेकंडों में पूरी हो जाती है और इसके परिणाम बेहद साफ, सटीक और कुशल होते हैं। सल्फर-सल्फर बांड्स का खेल इस पूरी खोज के केंद्र में ‘सल्फर-सल्फर बांड’ हैं। ये बांड पेप्टाइड्स, प्रोटीन, दवा के अणुओं और वल्कनाइज्ड रबर जैसे पॉलिमर्स में मौजूद होते हैं। बता दें, ये प्रोटीन को उसकी संरचनात्मक मजबूती और स्थिरता देने के लिए बहुत जरूरी होते हैं। अब तक, बिना किसी बाहरी रसायन या गर्मी के इन बांड्स को अपनी मर्जी से बनाना या तोड़ना बहुत मुश्किल माना जाता था, लेकिन यह नई प्रतिक्रिया इसे स्वचालित रूप से कर सकती है। कैसे हुई यह खोज? इस अनोखी खोज की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया के फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जस्टिन चाल्कर और यूके के लिवरपूल विश्वविद्यालय के उनके सहयोगी टॉम हैसेल के काम से हुई। उन्होंने शुरुआत में कुछ खास सॉल्वेंट्स में S-S बांड्स के अजीब और हैरान करने वाले व्यवहार पर ध्यान दिया। इसके बाद, उन्होंने एक मॉडल तैयार किया जो यह समझाता है कि ये बांड कैसे टूटते हैं, कैसे फिर से बनते हैं और यह हमारे लिए कैसे उपयोगी हो सकता है। भविष्य के लिए इसके शानदार उपयोग फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस नई प्रतिक्रिया के कई बेहतरीन फायदे बताए हैं, जिनकी मदद से कई क्षेत्रों में क्रांति आ सकती है:     कैंसर की दवाओं में सुधार: चाल्कर लैब के शोधकर्ता हर्षल पटेल के अनुसार, इस प्रतिक्रिया का सफलतापूर्वक इस्तेमाल कैंसर रोधी दवाओं और दवाइयों की खोज से जुड़े केमिकल को संशोधित करने के लिए किया गया है।     रीसायकल होने वाला प्लास्टिक: इस तकनीक से ऐसे नए और बेहतरीन प्लास्टिक बनाए जा सकते हैं जिन्हें आसानी से आकार दिया जा सकता है, इस्तेमाल किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर रीसायकल करने के लिए तोड़ा जा सकता है। दवा और विज्ञान में तेज विकास: प्राकृतिक उत्पादों और दवाओं के अणुओं को बदलने में यह बेहद काम आ रही है। इसके उच्च प्रतिक्रिया दर की वजह से चिकित्सा से जुड़े यौगिकों को तेजी से तैयार किया जा सकता है। फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय के वरिष्ठ लेखक प्रोफेसर जस्टिन चाल्कर के शब्दों में कहें तो, किसी पूरी तरह से नई प्रतिक्रिया की खोज होना अपने आप में बहुत दुर्लभ है। और यह उससे भी ज्यादा दुर्लभ है कि एक ही खोज इतने सारे अलग-अलग क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो। शोधकर्ताओं की टीम इस बात को लेकर बेहद उत्साहित है कि आने वाले समय में इस रसायन विज्ञान को उन तरीकों से भी इस्तेमाल किया जाएगा, जिनकी अभी हमने कल्पना भी नहीं की है।  

लेफ्टिनेंट कर्नल की याचिका पर सुनवाई: कोर्ट ने एफआईआर रद्द करते हुए कहा, आपसी सहमति को रेप नहीं माना जा सकता

जबलपुर  वो युवती जो कि पहले तो लव रिलेशन में रहती है,आपसी सहमति से संबंध बनाती है, और फिर बाद में रेप का आरोप लगाते हुए पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करवाती है, उसे रेप की श्रेणी में नही माना जा सकता है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक मामले पर सुनवाई करते हुए कहा।  13 साल तक रिलेशनशिप में रही युवती एमपी पुलिस में पदस्थ एक महिला आरक्षक ने एफआईआर दर्ज करवाते हुए आरोप लगाया कि वह सेना में पदस्थ लेफ्टिनेंट कर्नल वरुण प्रताप सिंह के साथ 13 साल तक रिलेशनशिप में रही है। वह कहता था कि पत्नी बेकार है, तलाक होते ही तुमसे शादी कर लूंगा। मध्यप्रदेश पुलिस में कॉन्स्टेबल शीना (परिवर्तित नाम) ने सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल वरुण प्रताप सिंह के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज कराया। महिला का कहना था कि – मेरी वरुण ही नहीं, उसके मम्मी-पापा और भाई-बहन से भी बातचीत होती थी। दोनों के परिवारों के बीच संबंध मजबूत हो गए। वरुण ने कहा था कि जल्द ही हम शादी कर लेंगे, इसलिए मैं उसके साथ रिलेशन में आ गई। ऐसे ही समय बीतता गया, लेकिन भोपाल से ट्रांसफर के दौरान मुझे पता चला कि उसकी शादी तो पहले ही हो चुकी है। बच्चा भी है। अलग-अलग नामों से अकाउंट, कई लड़कियों से दोस्ती शीना ने पुलिस को एफआईआर में बताया कि वरुण की पोस्टिंग असम में हो गई थी। बाद में पता चला कि वहां एक असमिया लड़की से भी उसकी दोस्ती हो गई। उससे पूछा तो वो टालता रहा। इस बीच पता चला कि वरुण नाम से सोशल मीडिया पर आईडी तो है ही, साथ ही एक आईडी आदित्य प्रताप और एक आदित्य राज नाम से भी बना रखी है। इसमें उसकी फोटो लगी है, चैटिंग भी करता रहता है। इन सोशल मीडिया अकाउंट का उपयोग वह नई-नई लड़कियों को तलाशने और उन्हें अपने प्रभाव में लेने के लिए करता है। हनी ट्रैप का शिकार हो सकता है वरुण शीना ने अपनी एफआईआर में बताया कि वरुण सेना की जिम्मेदारी वाली नौकरी में रहकर कई सोशल मीडिया अकाउंट चला रहा है, यह खतरनाक हो सकता है। वो लड़कियों की फोटो लगी आईडी से आने वाली अनजान रिक्वेस्ट पर रिस्पॉन्स करता है। चैटिंग करने लगता है। मुझे डर है कि जिस तरह की उसकी एक्टिविटी है, वह आसानी से हनी ट्रैप का शिकार हो सकता है या हो चुका होगा। वरुण ने जो काम भोपाल में किया, वही असम में किया। पठानकोट जैसी संवेदनशील पोस्टिंग में रहते हुए भी उसकी आदत नहीं सुधरी। सेना को इसकी जांच करानी चाहिए, मैंने इसकी शिकायत भी की है। जिला कोर्ट ने याचिका खारिज की युवती की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। भोपाल कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई तो, वरुण की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। पीड़िता के वकील ने आरोपी की जमानत याचिका पर आपत्ति लगाते हुए अदालत को बताया कि यदि उन्हें जमानत मिलती है तो वो सबूतों को मिटा सकते हैं। साक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी की याचिका खारिज कर दी। आपसी संबंध रेप की श्रेणी नहीं मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने करीब 13 साल तक चले आपसी संबंधों को दुष्कर्म की श्रेणी में रखने से इनकार करते हुए सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को निरस्त कर दिया है। जस्टिस विनय सराफ की एकलपीठ ने मामले पर सुनवाई की है। महिला पुलिस आरक्षक ने याचिका पर बताया कि सेना अधिकारी ने स्वयं को अविवाहित बताते हुए उससे विवाह का वादा किया और इसी भरोसे पर दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। कोर्ट ने पाया कि दोनों के बीच लंबे समय तक आपसी सहमति से संबंध रहे, इसलिए इसे दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को रद्द कर दिया।

परंपरा से पोषण तक: आदि परब में जशप्योर स्टॉल को सराहना, महुआ बना सुपरफूड

रायपुर. आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI), नवा रायपुर द्वारा 13–14 मार्च 2026 को आयोजित आदि परब–2026 कार्यक्रम “From Tradition to Identity” थीम के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। भारत सरकार के सहयोग से आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान, हस्तशिल्प और वन आधारित उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागियों, शोधकर्ताओं, अधिकारियों तथा बड़ी संख्या में आगंतुकों ने भाग लिया। इस आयोजन में जशपुर जिले के ब्रांड जशप्योर  द्वारा भी स्टॉल लगाया गया, जिसे आगंतुकों, अधिकारियों और विशेषज्ञों से व्यापक सराहना प्राप्त हुई। स्टॉल पर प्रदर्शित उत्पादों की उच्च गुणवत्ता, पारंपरिक प्रसंस्करण पद्धति और प्रीमियम पैकेजिंग को लेकर लोगों ने विशेष रुचि दिखाई। स्टॉल का मुख्य आकर्षण महुआ आधारित उत्पाद रहे। बड़ी संख्या में आगंतुकों ने महुआ के पारंपरिक उपयोगों के साथ-साथ उसे पोषण से भरपूर एक प्राकृतिक सुपरफूड के रूप में प्रस्तुत करने की पहल की सराहना की। जय जंगल  द्वारा महुआ को केवल पारंपरिक मद्य से जोड़कर देखने की धारणा से बाहर निकालते हुए उसे स्वास्थ्य, पोषण और पारंपरिक खाद्य प्रणाली के रूप में स्थापित करने का प्रयास लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करता दिखाई दिया। जशप्योर, जशपुर जिले से शुरू हुई एक पहल है, जिसका उद्देश्य जंगल और जनजातीय समुदायों से जुड़े पारंपरिक खाद्य संसाधनों को सम्मानपूर्वक मुख्यधारा तक पहुँचाना है। यह पहल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की  दूरदर्शी सोच से प्रेरित है जिसमें महुआ को केवल शराब तक सीमित न रखकर उसे पोषण, स्वास्थ्य और जनजातीय आजीविका के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है। आदि परब–2026 में जशप्योर का प्रतिनिधित्व अनिश्वरी भगत एवं प्रभा साय द्वारा किया गया, जिन्होंने आगंतुकों को उत्पादों की विशेषताओं, पारंपरिक प्रसंस्करण विधियों तथा महुआ के पोषण महत्व के बारे में जानकारी दी। स्टॉल पर बड़ी संख्या में लोगों ने उत्पादों के बारे में विस्तार से जानकारी ली और जशपुर से जुड़ी इस पहल की सराहना की। जशप्योर के माध्यम से महुआ, मिलेट्स और पारंपरिक रूप से संसाधित चावल जैसे उत्पादों को आधुनिक उपभोक्ताओं तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें जनजातीय महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह पहल न केवल पारंपरिक खाद्य प्रणालियों को पुनर्जीवित करने का प्रयास है बल्कि स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी सशक्त बना रही है।

निरीक्षण में खुली पोल: सड़क निर्माण की खराब गुणवत्ता पर विधायक रायमुनी भगत नाराज, अधिकारियों को चेतावनी

जशपुर. छत्तीसगढ़ के जशपुर में बनी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। सड़क का निरीक्षण करने पहुंचीं विधायक रायमुनी भगत निर्माण कार्य की गुणवत्ता देखकर भड़क गईं और संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। विधायक रायमुनी ने सड़क की खराब हालत देखकर मौके से ही ईई संतोष नाग को वीडियो कॉल किया और सड़क की स्थिति दिखाई। उन्होंने कहा कि डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क कुछ ही महीनों में खराब होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। विधायक ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि खराब बनी सड़क को उखाड़कर दोबारा बनाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कल तक काम शुरू नहीं किया गया तो इस पूरे मामले को विधानसभा में उठाया जाएगा। बताया जा रहा है कि यह सड़क बगीचा नगर के वार्ड क्रमांक 4 से वार्ड क्रमांक 5 तक बनाई गई है। करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से बनी यह सड़क कुछ माह पहले ही तैयार हुई थी, लेकिन अब इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विधायक के सख्त रुख के बाद संबंधित विभाग में हड़कंप मच गया है और अब सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर जांच की भी संभावना जताई जा रही है।

आंधी-बारिश का अलर्ट: MP के 12 जिलों में अगले 4 दिन तक बारिश, ग्वालियर-जबलपुर भीगेंगे, भोपाल-इंदौर में गर्मी

भोपाल  मध्य प्रदेश में तेज गर्मी के बीच अब मौसम करवट लेने वाला है। प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक आंधी और बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने रविवार को उत्तर और दक्षिणी हिस्से के कई जिलों में बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग के मुताबिक, इस बदलाव के मुख्य कारण वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) और टर्फ सिस्टम हैं। 17 मार्च को एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करेगा, जिसका असर मध्य प्रदेश पर भी पड़ सकता है। इस प्रणाली के चलते अगले कुछ दिनों में आंधी, बारिश और गरज-चमक का दौर जारी रहेगा। ग्वालियर, मुरैना, भिंड, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, डिंडौरी और बालाघाट में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। विभाग का कहना है कि 18 मार्च तक प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी-बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। मार्च महीने में इस बार पहली बार मावठा गिरने की संभावना भी जताई जा रही है। जारी किए गए अलर्ट के अनुसार, 16 मार्च को बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, 17 मार्च को सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर और 18 मार्च को ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा में बारिश और आंधी का असर देखने को मिल सकता है। गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना इन मौसम प्रणालियों के कारण प्रदेश में वातावरण में नमी और अस्थिरता बढ़ रही है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 17 मार्च की रात से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करेगा। इसके असर से मध्यप्रदेश के कई जिलों में बादल छाने, गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या बौछारें पड़ने की संभावना है। खासकर पूर्वी और उत्तरी प्रदेश के जिलों में मौसम अधिक प्रभावित होने की संभावना है। बादलों की आवाजाही के कारण दिन के तापमान में हल्की गिरावट दर्ज हो सकती है। हालांकि कुछ स्थानों पर तेज हवा और गरज-चमक की स्थिति देखने को मिल सकती है। तीन दिन का मौसम पूर्वानुमा 16 मार्च: बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी और अनूपपुर में बारिश के आसार। 17 मार्च: सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर में मौसम खराब रह सकता है। 18 मार्च: ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर सहित 12 जिलों में बारिश और आंधी की संभावना जताई गई है। पश्चिमी विक्षोभ से बदलेगा मौसम मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ और वातावरण में बनी ट्रफ लाइन के कारण प्रदेश में बादल सक्रिय हो रहे हैं। 17 मार्च के आसपास एक और सिस्टम उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय होने की संभावना है, जिससे मौसम में अस्थिरता बनी रह सकती है। प्रदेश में गर्मी का असर बरकरार बारिश के अनुमान के बावजूद प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी का असर तेज बना हुआ है। शनिवार को नर्मदापुरम प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 40.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। खरगोन में भी पारा 39 डिग्री के करीब पहुंच गया।  तेज गर्मी का असर अब भी प्रदेश के कई हिस्सों में बना हुआ है। शनिवार को भी प्रदेश के कई शहरों में तीव्र लू चली और तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। खासकर, नर्मदापुरम प्रदेश में सबसे गर्म बना हुआ है। यहां पिछले तीन दिनों से लू का प्रभाव बना हुआ था, जहां अधिकतम तापमान 40.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से 6.9 डिग्री अधिक है। वहीं, इंदौर, भोपाल, ग्वालियर-उज्जैन से भी गर्म जबलपुर रहा। यहां अधिकतम तापमान 37.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। नर्मदापुरम के बाद खरगोन सबसे गर्म रहा। यहां पारा 39.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मंडला, रतलाम, दमोह, खंडवा, खजुराहो, रायसेन, शाजापुर, गुना, नरसिंहपुर, सतना, सिवनी, बैतूल, छिंदवाड़ा, टीकमगढ़, उमरिया, सागर और धार में तापमान 37 डिग्री या इससे ज्यादा दर्ज किया गया। प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में पारा 37.2 डिग्री, इंदौर में 36.6 डिग्री, ग्वालियर में 34.1 डिग्री, उज्जैन में 36.5 डिग्री और जबलपुर में 37.7 डिग्री रहा। अप्रैल-मई में और बढ़ेगी गर्मी मौसम विभाग का अनुमान है कि अप्रैल और मई में प्रदेश में गर्मी का असर और बढ़ेगा। कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, खासकर ग्वालियर-चंबल, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में। 

तेहरान से भागकर रूस पहुंचे मोजतबा खामेनेई, पुतिन के विमान से किया गया उड़ान

मॉस्को अब तक ईरान-अमेरिका युद्ध को लेकर रूस की भूमिका को लेकर सिर्फ बातें की जा रही थीं लेकिन अब एक ऐसी खबर आ रही है, जो सच निकली तो ये युद्ध की दिशा बदलने वाला मोड़ होगा. डोनाल्ड ट्रंप से लेकर नेतन्याहू तक उस दिन से मोजतबा खामनेई के पीछे हाथ धोकर पड़े हुए हैं, जब से उन्हें अपने पिता की जगह ईरान का सुप्रीम लीडर बनाया गया है. उनके घायल होने की भी खबरें आईं और ईरान की ओर से इससे इनकार भी किया गया. हालांकि अब कुवैती अखबार अल जरीदा ने दावा किया है कि मोजतबा खामेनेई अपने देश में ही नहीं हैं।  अल जरीदा रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा को स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों से एक बेहद गुप्त अभियान में रूस ले जाया गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें रूसी सैन्य विमान से मॉस्को पहुंचाया गया, जहां उनका ऑपरेशन किया गया और फिलहाल उनका इलाज चल रहा है. बताया गया कि यह कदम उनकी खराब सेहत और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए उठाया गया. हालांकि, इन दावों की आधिकारिक तौर पर स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि हालिया हमलों में उन्हें चोटें आई थीं, लेकिन ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वह सुरक्षित और ठीक हैं और उनका इलाज जारी है।  कैसे तेहरान छोड़े पहुंच गए मॉस्को? रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गुरुवार को ही रूस के सैन्य विमान मोजतबा खामेनेई को लेकर मॉस्को आ गया. कहा ये भी जा रहा है कि उन्हें राष्ट्रपति भवन में मौजूद अस्पताल में भर्ती कराया गया. बमबारी और हवाई हमलों के बीच उनका इलाज असंभव होने के कारण उन्हें ईरान से निकालने का निर्णय लिया गया. रिपोर्ट में दावा किया गया कि पुतिन ने उन्हें अपने यहां शरण देने की पेशकश की, जिसके बाद वे वहां पहुंचे और जाते ही उनकी सफल सर्जरी हुई. सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि ईरानी सिक्योरिटी एजेंसीज को खामनेई की लोकेशन लीक होने का खतरा सबसे ज्यादा था, इसीलिए उन्हें मॉस्को में शिफ्ट किए जाने की सिफारिश पर सहमति जताई गई. दावा किया गया है कि खुद पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन के साथ बातचीत के दौरान ये प्रस्ताव रखा था।  डोनाल्ड ट्रंप ने कहा – ‘मैंने सुना मर गए मोजतबा’ इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की स्थिति को लेकर सवाल उठाए उन्होंने कहा कि उन्हें यह भी नहीं पता कि मोजतबा खामेनेई जिंदा हैं या नहीं. ट्रंप का यह बयान उस समय आया है जब ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के बीच उनके घायल होने की खबरें आईं. एनबीसी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा – ‘मुझे नहीं पता कि वह जिंदा भी हैं या नहीं. अभी तक किसी ने उन्हें दिखाया नहीं है. मैं सुन रहा हूं कि शायद वह जिंदा नहीं हैं. अगर वह जिंदा हैं तो उन्हें अपने देश के लिए समझदारी दिखाते हुए आत्मसमर्पण कर देना चाहिए.’ इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि खामेनेई किसी भी रूप में जिंदा हो सकते हैं लेकिन उनकी चोटों को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं। 

रिश्ता बचाएँ या आत्मसम्मान? प्रेमानंद जी महाराज की बात बदल देगी आपकी सोच

जीवन में कई बार ऐसा मोड़ आ जाता है, जब समझ ही नहीं आता कि क्या करना सही रहेगा। खासतौर से जब बात उन रिश्तों की हो, जो हमारे दिल के बेहद करीब होते हैं। कई बार हम रिश्ता बचाना भी चाहते हैं, फिर हमें कहीं ना कहीं ये भी लगने लगता है कि अपना आत्मसम्मान बचाना ज्यादा जरूरी है। रिश्ते और आत्मसम्मान के बीच की ये कश्मकश चलती रहती है और कुछ हाथ नहीं लगता। प्रेमानंद जी महाराज के सत्संग में उनसे किसी ने यही सवाल किया कि रिश्ता अगर बिखर रहा हो तो आत्मसम्मान ज्यादा जरूरी है या फिर उस रिश्ते को बचाना। महाराज ने इसका जो उत्तर दिया है, वो वाकई हर किसी को जरूर सुनना चाहिए। रिश्ता या आत्मसम्मान, क्या जरूरी है? प्रेमानंद जी महाराज इस प्रश्न का उत्तर देते हुए कहते हैं कि आप जिस आत्म सम्मान की बात कर रहे हैं, वो कुछ नहीं बल्कि देहाभिमान है। इस अभिमान को मिटाकर ही रिश्तों का पोषण किया जा सकता है। अगर आप रिश्ते के बीच में इसे ले कर आते हैं, तो कभी ना कभी खटास होना तय है। आत्मसम्मान देव स्वरूप है लेकिन जो हमें आत्मसम्मान लगता है, वो ज्यादातर देहाभिमान होता है, जिसे सही नहीं माना गया है।इस देहाभिमान को मिटाकर हमें रिश्ता बचाना चाहिए। मान रहित हो कर सबका मान करें महाराज जी शास्त्रों में कहे गए एक श्लोक को दोहराते हुए बताते हैं कि जब आप मान रहित हो कर सबका मान करेंगे, तो रिश्ते अपने आप उज्ज्वल हो जाएंगे। वहीं जब हम अपने सम्मान की बात रखेंगे, तो रिश्ते में कहीं ना कहीं खटास आ ही जाएगी। इससे बेवजह आपका मन अशांत रहेगा और बेचैनी भी होगी। इसलिए शास्त्रों की सिद्धांत के अनुसार आपको अमानी यानी मान रहित होना चाहिए। ये होता है असली आत्मसम्मान प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि असली आत्मसम्मान वो होता है, जब सामने वाला आपसे कटु वचन कहे और आप फिर भी उसे प्यार से ही जवाब दें। ऐसे में आप खुद को किसी और के लिए नहीं बदलते हैं। ऐसे लोगों को भले ही कोई ना देख रहा हो लेकिन भगवान देख रहे होते हैं और जिससे भगवान प्रेम करें उससे दुनिया प्रेम करती है।

अहमदाबाद विमान दुर्घटना पर अमेरिकी एजेंसी का बड़ा बयान, विमान पहले से ही तकनीकी रूप से खराब था

अहमदाबाद अमेरिका के एक हवाई सुरक्षा संगठन का दावा है कि अहमदाबाद विमान दुर्घटना से जुड़े कई जरूरी दस्तावेज जांच अधिकारियों को दिए ही नहीं गए थे। ऐसे में इसकी जांच पर बड़े सवाल खड़े होते हैं। बता दें कि जून 2025 में हुई इस दुर्घटना में कम से कम 260 लोगों की जान चली गई थी। जांचकर्ताओं को भेजे गए ईमेल में एविएशन सेफ्टी फाउंडेशन के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर ईडी पियरसन ने कहा कि उसके हाथ कई ऐसे गुप्त दस्तावेज हाथ लगे हैं जिनसे पता लगता है कि विमान दुर्घटना के पीछे इलेक्ट्रिक फेल्योर कारण था। पियरसन ने कहा कि बोइंग 787 ड्रीमलाइनर रजिस्ट्रेशन वीटी-ANB के बारे में दस्तावेजों से पता चला है कि इसके इलेक्ट्रिक सिस्टम में पहले से ही खराबी चल रही थी। उन्होंने दावा किया कि इस विमान में लंबे समय से ही शॉर्ट सर्किट, धुआं निकलने और वायरिंग में दिक्कतें आ रही थीं। पियरसन ने कहा कि दुर्घटना का शिकार हुआ विमान कई बार इलेक्ट्रिक फाल्ट की वजह से उतारा जा चुका था। कई बार इसका पी100 पावर पैनल भी बदला गया था। विमान में बाएं इंजन से इलेक्ट्रिसिटी की सप्लाई होती थी। पियरसन ने कहा कि इस विमान को डिजाइन मोडिफिकेशन और सॉफ्टवेयर प्रोटेक्शन की जरूरत थी। उन्होंने कहा कि एएआईबी ने घटना से नौ महीने पहले से ही कोई सिफारिश नहीं की थी। उन्होंने कहा कि जांचकर्ताओं ने भी ऐसा नैरेटिव बना दिया जिससे कि सारी जिम्मेदारी पायलट्स पर आ गई।

तिहाड़ से छूटने के बाद आसिम मुनीर की मदद से पहलगाम में तबाही, अब बना मोस्ट वांटेड टेररिस्ट

नई दिल्ली. दो दशक पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के हाथ लगे दो आतंकवादी अब एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा सिरदर्द बन गए हैं. ये दोनों तिहाड़ जेल में सजा काट कर रिहा हुए थे. जांच एजेंसियों के अनुसार, ये दोनों आतंकी अब लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के मोस्ट वांटेड ऑपरेटिव बन चुके हैं और भारत के खिलाफ आतंकी साजिशों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. खतरनाक बात यह है कि इनमें से एक लश्‍कर आतंकवादी पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों का नरसंहार करने वाले आतंकी संगठन का सरगना है. इस कहानी की शुरुआत 9 मई 2002 की एक रात से होती है. उस रात दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को खुफिया सूचना मिली थी कि राजधानी में बड़ा आतंकी हमला हो सकता है. खुफिया सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने हुमायूं के मकबरे के पास और निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन इलाके में विशेष निगरानी शुरू कर दी थी. मुंबई से आने वाली पंजाब मेल ट्रेन से उतर रहे यात्रियों की भीड़ के बीच पुलिस ने तीन संदिग्ध आतंकियों (सज्जाद, मेहराजुद्दीन और फिरोज) को गिरफ्तार कर लिया. तलाशी के दौरान इनके पास से लगभग 5 किलो RDX, एक AK-47 राइफल, दो पिस्तौल, चार डेटोनेटर, प्लास्टिक विस्फोटक सामग्री और नकदी बरामद की गई थी. दो पाकिस्‍तानी आतंकवादियों का एनकाउंटर ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आतंकियों ने पुलिस को पास में खड़ी एक मारुति कार के बारे में जानकारी दी, जिसमें दो पाकिस्तानी आतंकवादी उनका इंतजार कर रहे थे. इसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी की. उस समय के डीसीपी अशोक चंद, एसीपी राजबीर सिंह और इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की टीम ने मुठभेड़ में दोनों पाकिस्‍तानी आतंकियों (अबू बिलाल और अबू जाबीउल्लाह) को मार गिराया. इस मामले में गिरफ्तार सज्जाद और उसके सहयोगियों को अदालत ने दोषी ठहराते हुए तिहाड़ जेल भेज दिया था. लेकिन ठहरिए… यह कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. पांच साल बाद… करीब पांच साल बाद जुलाई 2007 में स्पेशल सेल को फिर सूचना मिली कि एक आतंकी ऑपरेटिव दिल्ली भेजा गया है. इसके बाद पुलिस ने शब्बीर अहमद लोन नामक आतंकी को गिरफ्तार किया. उसके पास से ग्रेनेड, हथियार, गोला-बारूद, 280 अमेरिकी डॉलर और एक लाख रुपये बरामद हुए थे. इसके बाद लगभग एक दशक तक सज्जाद और शब्‍बीर अहमद लोन तिहाड़ जेल में बंद रहे. दोनों की रिहाई 2018 और 2019 के आसपास हुई. जेल से बाहर आने के बाद इन दोनों की गतिविधियों ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया. एक पाकिस्‍तान तो दूसरा गया बांग्‍लादेश जांच एजेंसियों के मुताबिक, रिहाई के बाद शब्बीर अहमद लोन पाकिस्तान भाग गया. वहां से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने उसे बांग्लादेश भेजा, जहां उसने एक नया आतंकी नेटवर्क खड़ा करना शुरू किया. हाल ही में उसके नेटवर्क के लोगों ने दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय AI शिखर सम्मेलन से पहले भड़काऊ पोस्टर चिपकाया था. इसके बाद जांच एजेंसियों के कान खड़े हो गए थे. सूत्रों के अनुसार, शब्‍बीर लोन इस समय बांग्लादेश में रहकर ISI के समर्थन और वित्तीय मदद से काम कर रहा है और उसका मुख्य लक्ष्य बांग्लादेशी युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलकर भारत के खिलाफ आतंकी साजिशों में शामिल करना है. फिर बन गया पहलगाम हमले का मास्‍टरमाइंड दूसरी ओर, सज्जाद उर्फ शेख सज्जाद गुल भी पाकिस्तान पहुंच चुका है और अब लश्कर के प्रॉक्सी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का प्रमुख ऑपरेटिव या सरगना माना जा रहा है. इसी संगठन को कई आतंकी हमलों के पीछे जिम्मेदार बताया गया है, जिनमें पहलगाम हमला भी शामिल है. इस अटैक में 27 पर्यटकों की निर्मम तरीके से हत्‍या कर दी गई थी. 1974 में जन्मे सज्जाद ने कश्मीर में शुरुआती शिक्षा प्राप्त की थी. उसने नगर से BSc. की पढ़ाई की, इसके बाद केरल में लैब टेक्नीशियन का कोर्स किया और 1996 में बेंगलुरु में एमबीए की पढ़ाई शुरू की थी. बाद में उसने कश्मीर में एक डायग्नोस्टिक सेंटर भी खोला, लेकिन इसी दौरान वह लश्कर के लिए ओवरग्राउंड वर्कर के तौर पर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हो गया. आसिम मुनीर के गढ़ में सज्‍जाद का ठिकाना सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पहलगाम हमले के बाद सज्जाद इस समय पाकिस्तान के रावलपिंडी में रह रहा है और उसे ISI की सुरक्षा भी दी गई है. रावलपिंडी में ही पाकिस्‍तान आर्मी का मुख्‍यालय भी है, जहां आसिम मुनीर रहते हैं. भारतीय एजेंसियों ने सज्जाद और लोन दोनों को कैटेगरी-A का बेहद खतरनाक आतंकवादी घोषित किया है. दोनों पर भारी-भरकम इनाम घोषित किया गया है और इनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि इन दोनों आतंकियों की गतिविधियों पर करीबी नजर रखी जा रही है और भारत के खिलाफ किसी भी आतंकी साजिश को विफल करने के लिए सुरक्षा एजेंसियां एकसाथ मिलकर लगातार कार्रवाई कर रही हैं.

रायपुर में न्याय की तेज रफ्तार: पहली नेशनल लोक अदालत में लंबित मामलों का होगा समाधान

रायपुर. रायपुर के जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में शनिवार को वर्ष 2026 की पहली नेशनल लोक अदालत लगी. इस अदालत में लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से बड़ी संख्या में लोग अपने विवादों के समाधान के लिए पहुंचे. आपराधिक, चेक बाउंस, पारिवारिक, बैंक रिकवरी, विद्युत, राजस्व और यातायात जैसे राजीनामा योग्य लंबित प्रकरणों का आपसी सहमति से त्वरित निस्तारण किया गया. 159 प्रकरण मामलों पर आपसी राजीनामा के लिए सुनवाई की गई, जिसमें से कुल 57 प्रकरणों का निराकरण हआ. इन मामलों में कुल 2 करोड़ 46 लाख रुपए से अधिक का भुगतान किया गया. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश बलराम प्रसाद वर्मा ने जानकारी दी कि राजीनामा से संबंधित मामले यहां रखे हुए थे. 12 लाख के करीब राजस्व के मामले हैं. नगर पालिका के करीब 2.5 लाख मामले हैं. कोर्ट के करीब 24 हजार से ज्यादा केस पेंडिंग है. यातायात से जुड़े मामले में सेटलमेंट के लिए है. उन्होने कहा कि 90 दिनों के अंदर, जिन्होंने चलान नहीं पटाया है. उन मामलों को भी नेशनल लोक अदालत में रखा गया है. इन सभी मामलों का आज निराकरण हो रहा है. ट्रैफिक से जुड़े मामले में मिनिमम दर के हिसाब चलान कर रहे हैं. मोहल्ला अदालत का आयोजन बलराम प्रसाद वर्मा ने कहा कि मोहल्ला अदालत का आयोजन भी किया गया है. इसमें अधिकारी मोहल्ले में बैठे हुए हैं. जिनकी बिजली, सड़क और पानी की जुड़ी समस्या है. वह अपनी समस्या बता सकतें है. तत्काल उनकी समस्या का निराकरण हो रहा है. क्या है लोक अदालत के लाभ ? आपको बता दें कि लोक अदालत में विभिन्न मामलों के निपटारे से जल्द न्याय मिलता हैं. लोक अदालत में निपटारा प्रकारणों में दोनों पक्षों की जीत होती है. आपसी राजीनामा के कारण मामलों की अपील नहीं होती. दीवानी प्रकरणों के परिणाम तुरंत मिलता है. दावा प्रकरणों में बीमा कंपनी राजीनामा मामलों में तुरंत एवार्ड राशि जमा करती है. लोक अदालत में राजीनामा करने से बार-बार अदालतों में आने से रुपयों, समय की बर्बादी और अकारण परेशानी से बचा जा सकता है. लोक अदालत में राजीनामा करने से दीवानी प्रकरणों में कोर्ट फीस पक्षकारों को वापस मिल जाती है, किसी पक्ष को सजा नहीं होती. मामले को बातचीत कर हल कर लिया जाता है. सभी को आसानी से न्याय मिल जाता है. फैसला अन्तिम होता है. फैसला के विरूद्ध कहीं अपील नहीं होती है.

MP में LPG संकट, होटल में गैस खत्म; इंदौर-भोपाल में इंडक्शन पर पक रहा खाना, घरेलू सिलेंडर के लिए 8 घंटे लंबी कतार

भोपाल   प्रदेश के कई जिलों में घरेलू गैस की किल्लत अब आम लोगों की परेशानी बढ़ाने लगी है. शहडोल से लेकर जबलपुर तक गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लंबी‑लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं. हालात ऐसे हैं कि लोग घंटों लाइन में खड़े रहने के बावजूद सिलेंडर मिलने का इंतजार करते नजर आ रहे हैं. कई जगहों पर एजेंसियों के बाहर भीड़ सड़कों तक फैल गई है, जिससे रोजमर्रा का कामकाज भी प्रभावित हो रहा है. उपभोक्ताओं का कहना है कि समय पर गैस नहीं मिलने से घरों में खाना बनाना तक मुश्किल हो गया है. वहीं प्रशासन और गैस एजेंसी संचालक गैस आपूर्ति सामान्य होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हालात इन दावों से अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय हालात और आपूर्ति में रुकावट को भी इस संकट की एक बड़ी वजह माना जा रहा है. बढ़ती भीड़ और लगातार मिल रही शिकायतों ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है. प्रदेश में रसोई गैस (LPG) का संकट बढ़ता जा रहा है। छह दिन से 50 हजार से ज्यादा होटल और रेस्टॉरेंट को कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिले हैं। भोपाल, इंदौर के कई होटल, रेस्टॉरेंट में गैस खत्म हो गई है। इसलिए वहां मेन्यू बदला है। कई रेहड़ी भी बंद हो गई है। इधर, घरेलू सिलेंडर को लेकर पूरे प्रदेश में मारामारी है। कॉमर्शियल के साथ घरेलू गैस सिलेंडर को लेकर भी मारामारी मची हुई है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर समेत अन्य शहरों में बुकिंग के बावजूद सिलेंडर नहीं मिल रहा है। छोटे बच्चे हो या बुजुर्ग, सब घंटों लाइन में लग रहे हैं। भोपाल में ऐसी तस्वीरें आम हो गई है। शनिवार को 8 घंटे तेज धूप में खड़े होने के बाद सिलेंडर नसीब हुआ। रविवार को भी किल्लत बनी रहेगी। ग्वालियर में हालात सामान्य: प्रशासन ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर; कहा– अफवाहों से बचें ग्वालियर जिले में हालात सामान्य हैं। घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर फैली आशंकाओं के बीच कलेक्टर रुचिका चौहान ने स्पष्ट किया है कि ग्वालियर में गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। खाद्य विभाग की टीम निरंतर गैस एजेंसियों का निरीक्षण कर रही है। सभी संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उपभोक्ताओं को सही जानकारी दें। स्टॉक व डिलीवरी में पारदर्शिता बरतें। कलेक्टर ने साफ किया है कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है, इसलिए नागरिक घबराएं नहीं। पुलिस की मौजूदगी में सिलेंडर विरतण इधर घरेलू गैस सिलेंडर को लेकर भी प्रदेश के कई शहरों में अफरा-तफरी का माहौल है। राजधानी भोपाल, इंदौर सहित कई जिलों में लोग गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही कतार में खड़े दिखाई दे रहे हैं। बुजुर्गों से लेकर महिलाएं और युवा तक सिलेंडर के लिए भागदौड़ कर रहे हैं। कहीं लोग अपने खाली सिलेंडर लेकर घंटों लाइन में खड़े हैं तो कहीं पुलिस की मौजूदगी में गैस सिलेंडरों का वितरण किया जा रहा है, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था या विवाद की स्थिति न बने। शनिवार को भोपाल में कई गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर पुलिस की गाड़ियां लगातार गश्त करती नजर आईं। प्रशासन को आशंका थी कि गैस की कमी को लेकर भीड़ में तनाव या हंगामा हो सकता है। शहर की करीब 23 गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की भीड़ लगी रही। इस बीच गैस बुकिंग का ऑनलाइन सर्वर भी ठप बताया जा रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि बुकिंग कराने के बावजूद उन्हें 7 से 8 दिन तक सिलेंडर नहीं मिल पा रहा, जिससे घरेलू रसोई भी प्रभावित हो रही है। जमाखोरी और कालाबाजारी पर होगी कार्रवाई इस बीच राज्य सरकार ने स्थिति को लेकर सफाई दी है। सरकार का कहना है कि प्रदेश में एलपीजी की आपूर्ति सामान्य है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। साथ ही प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसी को लेकर प्रदेश के कई जिलों में कलेक्टरों को भी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वितरण व्यवस्था पर नियंत्रण रखा जा सके। भोपाल में एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की कतारें एलपीजी संकट की स्थिति को समझने के लिए द मूकनायक की टीम शनिवार सुबह भोपाल के जिंसी चौराहे स्थित इंडेन गैस एजेंसी पहुंची। यहां सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतार लगी हुई थी। कई लोग अपने खाली सिलेंडर लेकर लाइन में खड़े थे, तो कुछ लोग सिर्फ बुकिंग नंबर लगवाने के लिए एजेंसी के बाहर इंतजार कर रहे थे। लाइन में खड़े लोगों से बातचीत करने पर सामने आया कि गैस बुकिंग की प्रक्रिया भी बड़ी समस्या बन चुकी है। एक ग्राहक ने बताया कि वह पिछले तीन दिनों से गैस सिलेंडर का नंबर लगाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ऑनलाइन बुकिंग नहीं हो पा रही है। उसने बताया कि आज वह सुबह से ही एजेंसी के बाहर लाइन में खड़ा है, ताकि किसी तरह सिलेंडर का नंबर लग सके। जब ऑन कैमरा बुकिंग नम्बर पर ग्राहक ने किया कॉल एक युवक ने मौके पर ही गैस बुकिंग के लिए दिए गए फोन नंबर पर कॉल करके देखा। कॉल करने पर उसे सूचना मिली कि सेवाएं फिलहाल इनकमिंग के लिए बंद हैं। युवक ने बताया कि वह लगातार वेबसाइट और फोन के जरिए बुकिंग करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन न तो वेबसाइट काम कर रही है और न ही कॉल के जरिए नंबर लग पा रहा है। मजबूर होकर वह सुबह से एजेंसी के बाहर लाइन में खड़ा है, ताकि सिलेंडर के लिए अपना नंबर दर्ज करा सके। समस्या हो तो यहां करें फोन (कंट्रोल रूम) आम नागरिकों की सुविधा और बुकिंग से जुड़ी समस्याओं के तुरंत निराकरण के लिए जिला प्रशासन ने कंट्रोल रूम का गठन किया है। यदि आपको सिलेंडर मिलने में कोई दिक्कत हो रही है, तो आप इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं: मोबाइल नंबर 1: 7247560709 मोबाइल नंबर 2: 7000878489 प्रशासन की अपील: नागरिक किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें और समस्या होने पर सीधे कंट्रोल रूम को सूचित करें। भोपाल: अब इंडक्शन बना सहारा भोपाल में रसोई गैस की सप्लाई लड़खड़ाने से उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जहांगीराबाद क्षेत्र के मोहम्मद रियाज ने … Read more

5 राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान आज, चुनाव आयोग से मिलेगी अहम जानकारी

नई दिल्ली असम, पश्चिम बंगाल समेत 5 राज्यों की चुनाव तारीखों का ऐलान आज हो सकता है. चुनाव आयोग ने आज शाम 4 बजे विज्ञान भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है. इस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग पांच राज्यों की चुनाव तारीखों का ऐलान किया जा सकता है। जिन 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनमें असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी शामिल हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक, असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई, केरल का 23 मई, तमिलनाडु का 10 मई, पश्चिम बंगाल का 7 मई और पुडुचेरी का 15 जून को खत्म हो रहा है. यानी 7 मई से पहले-पहले पांचों राज्यों में चुनाव खत्म हो सकते हैं। चुनाव आयोग ने चुनावी राज्यों का किया दौरा पिछले कुछ हफ्तों में चुनाव आयोग की टीम ने इन सभी राज्यों का दौरा किया था. फरवरी में असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी, 6-7 मार्च को केरल और 9-10 मार्च को पश्चिम बंगाल में तैयारियों का जायजा लिया गया. इन दौरों में राजनीतिक दलों, पुलिस, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों से मीटिंग हुई. आयोग ने हिंसा रोकने, मतदाता सूची सुधारने, EVM-VVPAT की जांच और CAPF तैनाती पर खास फोकस किया. मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार, यह ऐलान आज ही होगा क्योंकि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के खिलाफ अपील की आखिरी तारीख 15 मार्च (आज) है और बाकी राज्यों में यह समयसीमा पहले ही खत्म हो चुकी है. राज्यों का कार्यकाल कब खत्म हो रहा है?     पश्चिम बंगाल: 7 मई 2026     तमिलनाडु: 10 मई 2026     असम: 20 मई 2026     केरल: 23 मई 2026     पुडुचेरी: 15 जून 2026   पिछली बार क्या रहे थे नतीजे?     असम: 126 सीटों के लिए पिछली बार तीन चरणों में चुनाव हुए थे. एनडीए ने 75 सीटें जीती थीं. लगातार दूसरी बार असम में बीजेपी की सरकार बनी थी।     पश्चिम बंगाल: राज्य की 294 सीटों के लिए पिछली बार 8 चरणों में चुनाव हुए थे. टीएमसी ने 215 और बीजेपी ने 77 सीटें जीती थीं. ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनी थीं।     तमिलनाडु: 234 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में वोट डाले गए थे।  डीएमके ने 133 सीटें जीती थीं. अन्नाद्रमुक ने 66 और बीजेपी ने 5 सीटें जीती थीं. एमके स्टालिन सीएम बने थे।     केरल: 140 सीटों के लिए एक ही चरण में वोटिंग हुई थी. एलडीएफ ने 99 और यूडीएफ ने 41 सीटें जीती थीं. पिनराई विजयन लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने थे।     पुडुचेरी: 30 विधानसभा सीटों के लिए एक चरण में वोट पड़े थे. एनडीए ने 16 और यूपीए ने 9 सीटें जीती थीं. एनडीए के एन. रंगास्वामी मुख्यमंत्री बने थे।  

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