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मिडल-ईस्ट तनाव से ट्रैवल सेक्टर को रोज़ ₹5500 करोड़ का नुकसान, दुबई ना जा पाने के कारण कोच्चि-पुरी की यात्रा 200% बढ़ी

नई दिल्ली मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक टूरिज्म इंडस्ट्री पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमलों और क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण दुनियाभर में ट्रैवल सेक्टर को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल (WTTC) के अनुमान के मुताबिक इस संघर्ष की वजह से दुनिया भर के टूर और ट्रैवल सेक्टर को हर दिन करीब 5,500 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। मिडिल-ईस्ट के कई देशों में बढ़ते तनाव और सुरक्षा चिंताओं के चलते पर्यटक अपने ट्रैवल प्लान बदल रहे हैं, जिससे पर्यटन उद्योग प्रभावित हो रहा है। अगर भारतीय पर्यटकों की बात करें तो हर साल भारत से विदेश यात्रा करने वाले लगभग आधे यात्री यूएई, सऊदी अरब, कतर और ओमान जैसे मिडिल-ईस्ट देशों की यात्रा करते हैं। इनमें से करीब 40 प्रतिशत लोग पर्यटन के उद्देश्य से इन देशों में जाते हैं। लेकिन हालात को देखते हुए अब कई भारतीय पर्यटक अपने ट्रैवल प्लान में बदलाव कर रहे हैं। टूर ऑपरेटर्स के अनुसार अब भारतीय पर्यटक थाईलैंड, मलेशिया और जापान जैसे देशों के लिए ज्यादा पूछताछ कर रहे हैं। इन देशों को फिलहाल सुरक्षित और बेहतर विकल्प माना जा रहा है, इसलिए यहां पर्यटन की मांग बढ़ रही है। वहीं दूसरी ओर भारत के अंदर भी घरेलू पर्यटन में तेजी देखने को मिल रही है। एयरलाइंस के किराए बढ़ने के बावजूद कई पर्यटक अब कोच्चि, पुरी और अंडमान जैसे भारतीय पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ट्रैवल एजेंसियों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में इन घरेलू डेस्टिनेशन के लिए पूछताछ में करीब 200 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।  2026 घरेलू पर्यटन के लिए अच्छा साबित हो सकता है ल्ल दिल्ली स्थित ट्रैवल कंपनी टीमवन हॉलिडेज की प्रवक्ता अनीशा शर्मा के मुताबिक, फिलहाल खाड़ी देशों की यात्रा के लिए लगभग 100% तक कैंसिलेशन देखने को मिल रहे हैं। यदि यह रुझान जारी रहता है तो 2026 भारत के घरेलू पर्यटन के लिए बेहद मजबूत साल साबित हो सकता है। यात्री देश के नजदीकी और विविध पर्यटन स्थलों को खोज रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय यात्रा प्लेटफॉर्म पिकयोरट्रेल के सीईओ हरि गणपति के मुताबिक मिडिल-ईस्ट क्षेत्र की बुकिंग में 60% तक की गिरावट आई है। ल्ल मेकमाईट्रिप के को-फाउंडर राजेश मागो कहते हैं- यदि संघर्ष लंबा चलता है, तो लोग घरेलू गंतव्यों या अप्रभावित अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों की ओर रुख कर सकते हैं। ल्ल वहीं ईज माईट्रिप के फाउंडर निशांत पिट्टी का कहना है- थाईलैंड, मलेशिया, मालदीव और जापान जैसे देशों के लिए बुकिंग में अच्छी बढ़त देखी जा रही है। घरेलू पर्यटन लगातार मजबूत बना हुआ है।’

अवैध धर्मांतरण से हुई शादी में जन्मे बच्चे का धर्म तय करने के लिए सरकार ला रही है नया कानून

मुंबई  महाराष्ट्र विधानसभा में  ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ पेश किया गया। राज्य में अवैध और सामूहिक धर्मांतरण के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए लाए गए इस प्रस्तावित कानून में कई ऐसे प्रावधान हैं, जो हाल के वर्षों में अन्य राज्यों द्वारा बनाए गए धर्मांतरण विरोधी कानूनों से भी ज्यादा सख्त और विस्तृत हैं। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो महाराष्ट्र धार्मिक धर्मांतरण को विनियमित करने वाला देश का 10वां राज्य बन जाएगा। इससे पहले झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक और राजस्थान ऐसे कानून बना चुके हैं। बच्चे के धर्म और अधिकारों से जुड़ा अहम नियम यह इस विधेयक का सबसे अनूठा पहलू है, जो इसे अन्य राज्यों के कानूनों से अलग बनाता है। बच्चे का धर्म: यदि कोई विवाह अवैध धर्मांतरण के माध्यम से हुआ है, तो उस विवाह से पैदा होने वाले बच्चे का धर्म वही माना जाएगा जो विवाह से पहले उसकी मां का धर्म था। उत्तराधिकार और भरण-पोषण: धर्म के निर्धारण के बावजूद, बच्चे को दोनों माता-पिता की संपत्ति में कानूनी रूप से उत्तराधिकार का अधिकार होगा। इसके अलावा, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 144 के तहत बच्चा भरण-पोषण का भी हकदार होगा। कस्टडी: जब तक अदालत कोई अन्य निर्देश न दे, बच्चे की कस्टडी मां के पास ही रहेगी। धर्मांतरण के लिए तय की गई कानूनी प्रक्रिया इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, धर्म बदलने की इच्छा रखने वाले किसी भी व्यक्ति को अब एक सख्त प्रक्रिया से गुजरना होगा। धर्म बदलने से कम से कम 60 दिन पहले जिलाधिकारी को लिखित नोटिस देना होगा। इसमें उम्र, पेशा, वर्तमान धर्म और अपनाए जाने वाले धर्म की जानकारी देनी होगी। नोटिस मिलने के बाद जिलाधिकारी या पुलिस यह जांच करेगी कि यह धर्मांतरण स्वेच्छा से हो रहा है या किसी दबाव/धोखे से। धर्मांतरण के बाद, धर्म बदलने वाले व्यक्ति और समारोह आयोजित करने वाली संस्था दोनों को 60 दिनों के भीतर जिला प्रशासन को एक घोषणा पत्र सौंपना होगा। ऐसा न करने पर धर्मांतरण अमान्य माना जा सकता है। ‘अवैध’ धर्मांतरण और ‘प्रलोभन’ की नई और व्यापक परिभाषा विधेयक में प्रलोभन, धोखा, जबरदस्ती या शादी का झांसा देकर किए गए धर्मांतरण को अवैध माना गया है। इसकी परिभाषाओं का दायरा काफी बढ़ा दिया गया है। इसमें अब केवल पैसा, नौकरी, मुफ्त शिक्षा या दैवीय चमत्कार ही शामिल नहीं हैं, बल्कि एक धर्म को दूसरे से श्रेष्ठ बताना या दूसरे धर्म के रीति-रिवाजों को बुरा साबित करना भी ‘प्रलोभन’ के दायरे में आएगा। इसमें दैवीय नाराजगी का डर दिखाना, सामाजिक बहिष्कार, जान-माल की धमकी, या किसी भी तरह का शारीरिक और मानसिक दबाव शामिल है। अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर या धोखा देकर शादी करना अवैध होगा। केवल धर्मांतरण के लिए की गई शादी को अदालत शून्य घोषित कर सकती है। सजा और जुर्माने के सख्त प्रावधान यह अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होगा, जिसकी जांच सब-इंस्पेक्टर या उससे ऊपर के रैंक का अधिकारी करेगा। सामान्य मामले: 7 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये का जुर्माना। कमजोर वर्ग (महिला, नाबालिग, SC/ST): अगर धर्मांतरण इनका किया जाता है, तो जुर्माना बढ़कर 5 लाख रुपये हो जाएगा। सामूहिक धर्मांतरण: दो या अधिक लोगों का एक साथ धर्मांतरण कराने पर 7 साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना। बार-बार अपराध करने पर 10 साल तक की जेल और 7 लाख रुपये तक का जुर्माना। अगर कोई संस्था इसमें शामिल पाई जाती है, तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है और उसकी सरकारी फंडिंग रोकी जा सकती है। शिकायत कौन कर सकता है? धर्म बदलने वाला व्यक्ति खुद, उसके माता-पिता, भाई-बहन, या खून, शादी या गोद लेने से जुड़ा कोई भी रिश्तेदार एफआईआर (FIR) दर्ज करा सकता है। पुलिस इस मामले में स्वतः संज्ञान भी ले सकती है। यह साबित करने की जिम्मेदारी कि धर्मांतरण बिना किसी दबाव या लालच के स्वेच्छा से हुआ है, उस व्यक्ति या संस्था पर होगी जिसने धर्मांतरण कराया है। पीड़ित लोगों के पुनर्वास और उनकी सुरक्षा के लिए भी विधेयक में प्रावधान किए गए हैं।

मध्यप्रदेश में IPS तबादलों का वक्त, इन जिलों के SP के नाम सूचीबद्ध

भोपाल मध्यप्रदेश में आईपीएस  (IPS) अफसरों के तबादला सूची तैयार है और कभी भी ये ऐलान हो सकता है। सूची त्यौहारी सीजन के कारण अटकी थी लेकिन अब कभी भी घोषणा हो सकती है। त्यौहारी सीजन के कारण गृह विभाग की तरफ से इस सूची को होल्ड पर रखी थी। तबादला सूची में सबसे ज्यादा फायदा 2020 बैच के पांच आईपीएस अफसरों को होगा, जिन्हें जिलों में एसपी पद की कमान सौंपी जाएगी। क्योंकि अब तक 2019 बैच के आईपीएस भी जिलों में एसपी पद पर आ चुके हैं। इसके अलावा कोर्ट के आदेश से प्रमोटी आईपीएस बने अधिकारी भी जिले के एसपी बन सकते हैं। हट सकते हैं इन जिलों के एसपी वहीं इस प्रस्तावित सूची के अनुसार लगभग 20 जिलों में नए एसपी की पदस्थापना होगी। शाजापुर के एसपी यशपाल सिंह राजपूत, शिवपुरी के पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौर, डिंडौरी एसपी वाहिनी सिंह, मंडला एसपी रजत सकलेचा, छतरपुर एसपी अगम जैन, बुरहानपुर एसपी देवेंद्र कुमार पाटीदार, निवाड़ी एसपी राय सिंह नरवरिया, नीमच एसपी अंकित जायसवाल, दमोह एसपी श्रुतकीर्ति सोमवंशी, सिवनी एसपी सुनील कुमार मेहता, आगर मालवा एसपी विनोद कुमार सिंह, ग्वालियर एसपी धर्मवीर सिंह, उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा और जबलपुर एसपी संपत उपाध्याय को भी बदला जा सकता है। इनमें से छोटे जिलों के एसपी को बड़े जिलों की कमान सौंपी जा सकती है। इसके अलावा खंडवा एसपी मनोज राय, एसपी रेल भोपाल राहुल लोढा, एसपी रेल जबलपुर सिमाला प्रसाद, एसपी भिंड असित यादव, और एसपी धार मयंक अवस्थी डीआईजी बन चुके हैं, लिहाजा उन्हें भी बदला जाना प्रस्तावित है। इसके अलावा रीवा एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान, डीसीपी भोपाल विवेक सिंह, डीसीपी इंदौर कुमार प्रतीक और एसपी झाबुआ डॉ शिवदयाल भी इस साल एक जनवरी को डीआईजी बन चुके हैं और इन्हें भी नई पोस्टिंग मिलना तय है, ऐसे में इन जिलों में नए एसपी की तैनाती होगी। 

सूचना आयुक्त के पद पर आलोक नागर और राजेश भट्ट की नियुक्ति, राज्य सरकार ने नामों को किया मंजूर

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार राज्य सूचना आयोग में दो नए सूचना आयुक्त नियुक्त करने जा रही है। सरकार ने पूर्व रजिस्ट्रार (फर्म एवं सोसायटी) आलोक नागर और आकाशवाणी के पूर्व कार्यक्रम प्रभारी राजेश भट्ट को सूचना आयुक्त बनाने का निर्णय लिया है। इन दोनों नामों को राज्यपाल की मंजूरी भी मिल गई है। सूत्रों के अनुसार इन नियुक्तियों का फैसला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बीच हुई बैठक में लिया गया। बैठक में दोनों नामों पर सहमति बनने के बाद इन्हें अंतिम रूप दिया गया। राज्य सरकार ने  तीन सूचना आयुक्तों के पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था, हालांकि फिलहाल केवल दो पदों पर नियुक्ति की जा रही है। बताया जा रहा है कि तीसरे पद को लेकर फिलहाल निर्णय नहीं लिया गया। इसलिए फिलहाल दो ही नियुक्तियां की जा रही हैं।  वर्तमान में मुख्य सूचना आयुक्त के अलावा आयोग में तीन सूचना आयुक्त कार्यरत हैं। सरकार मुख्य सूचना आयुक्त के पद के साथ आयोग में छह अन्य पदों को भरने की तैयारी कर रही है। इसी प्रक्रिया के तहत इन नियुक्तियों को आगे बढ़ाया गया है। इस बार सरकार ने सूचना आयुक्त के रूप में किसी पूर्व प्रशासनिक अधिकारी या पत्रकार को नियुक्त नहीं किया है। आलोक नगर और राजेश भट्ट के पदभार ग्रहण करने के बाद आयोग में लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। 

राहुल द्रविड़ से लेकर शुभमन गिल, स्मृति मंधाना तक; BCCI ने अवॉर्ड्स का किया ऐलान

मुंबई  भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने सालाना अवॉर्ड की घोषणा कर दी है। Naman Awards 2026 में इस साल पूर्व भारतीय कोच राहुल द्रविड़ समेत भारतीय टेस्ट और वनडे टीम के कप्तान शुभमन गिल, महिला टीम की उप-कप्तान स्मृति मंधाना और पूर्व भारतीय कप्तान मिताली राज के साथ-साथ कई खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा। BCCI, प्रतिष्ठित ‘नमन अवॉर्ड्स 2026’ में भारतीय क्रिकेट के हर क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन का जश्न मनाएगा। यह समारोह रविवार, 15 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। यह वार्षिक समारोह अंतरराष्ट्रीय, घरेलू और आयु-वर्ग क्रिकेट में असाधारण प्रदर्शनों और लंबे समय तक दिए गए योगदानों को मान्यता देता है, और साथ ही उन व्यक्तियों को सम्मानित करता है जिनके काम ने देश में इस खेल के विकास और कद को आकार दिया है। इस साल के समारोह में,  रोजर बिन्नी और श्री राहुल द्रविड़ को ‘कर्नल सी. के. नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया जाएगा। यह BCCI का सर्वोच्च सम्मान है, जो भारतीय क्रिकेट में दी गई उत्कृष्ट सेवाओं को मान्यता देता है। वहीं मिताली राज को ‘BCCI लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड फॉर विमेन’ प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान भारत में महिला क्रिकेट के विकास और वैश्विक स्तर पर उसकी प्रतिष्ठा को बढ़ाने में उनके असाधारण योगदान को मान्यता देता है। नमन अवॉर्ड्स 2024–25 सीजन के दौरान अंतरराष्ट्रीय, घरेलू और आयु-वर्ग क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन को भी सम्मानित करेंगे। भारत के टेस्ट और ODI कप्तान शुभमन गिल को 2024–25 सीजन के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर (पुरुष)’ का पॉली उमरीगर अवॉर्ड दूसरी बार मिलेगा। स्मृति मंधाना को अपने करियर में पांचवीं बार ‘सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर (महिला)’ का अवॉर्ड मिलेगा। घरेलू खिलाड़ियों में, मुंबई की इरा जाधव को बल्ले से शानदार प्रदर्शन वाले सीज़न के बाद ‘सर्वश्रेष्ठ महिला क्रिकेटर (घरेलू)’ के लिए जगमोहन डालमिया ट्रॉफी मिलेगी। हरियाणा की शेफाली वर्मा को 2024–25 सीजन के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ महिला क्रिकेटर (सीनियर घरेलू एक दिवसीय)’ के लिए जगमोहन डालमिया ट्रॉफी से सम्मानित किया जाएगा। मुंबई के आयुष म्हात्रे को 2024–25 सीजन के लिए घरेलू लिमिटेड ओवर प्रतियोगिताओं में ‘सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर’ का लाला अमरनाथ अवॉर्ड मिलेगा, जबकि विदर्भ के हर्ष दुबे को 2024–25 सीजन के लिए रणजी ट्रॉफी में ‘सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर’ का लाला अमरनाथ अवॉर्ड मिलेगा। मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन को एक बार फिर BCCI घरेलू टूर्नामेंट्स में ‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन’ का अवॉर्ड मिलेगा, क्योंकि उन्होंने इस सीज़न में चार ट्रॉफियाँ जीतीं और दो में उपविजेता रहे। नमन अवार्ड्स 2026 का एक खास आकर्षण सभी पांच ICC ट्रॉफी जीतने वाली भारतीय टीमों का सम्मान होगा। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में यह पहली बार होगा। BCCI उन सभी टीमों को सम्मानित करेगा: सीनियर पुरुष टीम जिसने ICC चैंपियंस ट्रॉफ़ी 2025 और ICC पुरुष T20 विश्व कप 2026 जीता; सीनियर महिला टीम जिसने ICC महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 जीता; पुरुष अंडर-19 टीम जिसने ICC अंडर-19 विश्व कप 2026 जीता; और महिला अंडर-19 टीम जिसने ICC अंडर-19 विश्व कप 2025 जीता। यह विशेष सम्मान वैश्विक मंच पर भारतीय क्रिकेट की सफलता के एक असाधारण दौर का जश्न मनाता है। जगमोहन डालमिया ट्रॉफी: सर्वश्रेष्ठ महिला क्रिकेटर (जूनियर) घरेलू 2024-25: इरा जाधव (मुंबई) जगमोहन डालमिया ट्रॉफी: सर्वश्रेष्ठ महिला क्रिकेटर (सीनियर)घरेलू 2024-25 (सीनियर महिला वन डे)- शैफाली वर्मा (हरियाणा) जगमोहन डालमिया ट्रॉफी: 2024-25 में (अंडर16) विजय मर्चेंट ट्रॉफी में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज – एलीट ग्रुप: यशबर्धन सिंह चौहान (मध्य प्रदेश) जगमोहन डालमिया ट्रॉफी: (अंडर16) में सर्वाधिक विकेट लेने वाले खिलाड़ी 2024-25 में विजय मर्चेंट ट्रॉफी – प्लेट ग्रुप: किशन सरकार (त्रिपुरा) जगमोहन डालमिया ट्रॉफी: 2024-25 में विजय मर्चेंट ट्रॉफी (अंडर16) में सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी – एलीट ग्रुप: शांतनु सिंह (उत्तर प्रदेश) जगमोहन डालमिया ट्रॉफी: सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी (अंडर16) 2024-25 में विजय मर्चेंट ट्रॉफी – प्लेट ग्रुप: प्रीतम राज (बिहार) M.A. चिदंबरम ट्रॉफी: 2024-25 में (U19) कूच बिहार ट्रॉफी में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी – एलीट ग्रुप: हेमचुदेशन J (तमिलनाडु) M.A. चिदंबरम ट्रॉफी: 2024-25 में (U19) कूच बिहार ट्रॉफी में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी – प्लेट ग्रुप: अर्काजित रॉय (त्रिपुरा) M.A. चिदंबरम ट्रॉफी: 2024-25 में (U19) कूच बिहार ट्रॉफी में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी – एलीट ग्रुप: नित्या J पांड्या (बड़ौदा) M.A. चिदंबरम ट्रॉफी: 2024-25 में (U19) कूच बिहार ट्रॉफी में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी – प्लेट ग्रुप: राघवन राममूर्ति (पुडुचेरी) M.A. चिदंबरम ट्रॉफी: 2024-25 में (U23) कर्नल C.K. नायडू ट्रॉफी में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी – एलीट ग्रुप: विक्की ओस्तवाल (महाराष्ट्र) M.A. चिदंबरम ट्रॉफी: 2024-25 में (U23) कर्नल C.K. नायडू ट्रॉफी में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी – प्लेट ग्रुप: दीपज्योति सैकिया (असम) M.A. चिदंबरम ट्रॉफी: 2024-25 में (U23) कर्नल सी.के. नायडू ट्रॉफी में सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी – एलीट ग्रुप: मैकनील एच.एन. (कर्नाटक) M.A. चिदंबरम ट्रॉफी: (U23) में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी कर्नल C.K. नायडू ट्रॉफी 2024-25 – प्लेट ग्रुप: आर जशवंत श्रीराम (पुडुचेरी) माधवराव सिंधिया पुरस्कार: रणजी ट्रॉफी 2024-25 में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी – एलीट ग्रुप: हर्ष दुबे (विदर्भ) माधवराव सिंधिया पुरस्कार: रणजी ट्रॉफी 2024-25 में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी – प्लेट ग्रुप: सुचित J (नागालैंड) माधवराव सिंधिया पुरस्कार: रणजी ट्रॉफी 2024-25 में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी – एलीट ग्रुप: Y.V. राठौड़ (विदर्भ) माधवराव सिंधिया पुरस्कार: रणजी ट्रॉफी 2024-25 में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी – प्लेट ग्रुप: स्नेहल कौथंकर (गोवा) घरेलू लिमिटेड-ओवर्स प्रतियोगिताओं में सर्वश्रेष्ठ ऑल-राउंडर के लिए लाला अमरनाथ पुरस्कार, 2024-25: आयुष म्हात्रे (मुंबई) रणजी ट्रॉफी में सर्वश्रेष्ठ ऑल-राउंडर के लिए लाला अमरनाथ पुरस्कार, 2024-25: हर्ष दुबे (विदर्भ) 2024-25 के BCCI घरेलू टूर्नामेंट्स में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन: मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन 2023-24 में घरेलू क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ अंपायर: उल्हास गांधे (विदर्भ C A) – वन डे इंटरनेशनल में सर्वाधिक विकेट – 2024-25 – महिला: दीप्ति शर्मा वन डे इंटरनेशनल में सर्वाधिक रन बनाने वाली खिलाड़ी – 2024-25 – महिला: स्मृति मंधाना 2024-25 में सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय पदार्पण – महिला: एन श्री चरणी 2024-25 में सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू – पुरुष: हर्षित राणा 2024-25 में सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर – महिला: स्मृति मंधाना पॉली उमरीगर पुरस्कार – 2024-25 में सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर – पुरुष: शुभमन गिल कर्नल सी.के. नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार: रोजर बिन्नी कर्नल सी.के. नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार: राहुल द्रविड़ BCCI लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार – … Read more

कैंसर मरीजों के लिए खुशी की खबर, 2 लाख का जीवन रक्षक इंजेक्शन अब होगा फ्री

इंदौर  कैंसर (Cancer) से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत की खबर है। शासकीय कैसर अस्पताल में आने वाले दिनों में महंगी कैंसर रोधी इम्यूनोथेरेपी इंजेक्शन (Immunotherapy Injection) पात्र मरीजों को इस दवा का उपयोग कई प्रकार के कैंसर के उपचार में होता है। बाजार में निजी क्लिनिक या अस्पताल से जब इन्हें लिखा जाता है तो 85 हजार से 1.70 लाख रुपए तक मरीज के परिजन को वहन करना पड़ते हैं। चिकित्सकों के अनुसार यह आधुनिक इम्यूनोथेरेपी उपचार का हिस्सा है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय कर कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में मदद करती है। यह फेफड़ों, सिर-गर्दन, सर्वाइकल, त्वचा और कुछ अन्य प्रकार के कैंसर के इलाज में उपयोगी है। कई मामलों में मरीजों की जीवन अवधि बढ़ाने में भी सहायक पाया गया है। यह इंजेक्शन हर मरीज को नहीं दिया जाता। डॉक्टर मरीज की बायोप्सी, कैसर की स्टेज और अन्य टेस्ट देखकर तय करते हैं कि यह दवा मरीज के लिए फायदेमंद होगी या नहीं। 8 से 10 लाख तक के आते हैं इंजेक्शन डॉक्टरों का कहना है कि इस इंजेक्शन की कीमत निजी बाजार में प्रति डोज लाखों रुपए तक पहुंच जाती है और कई मामलों में इंजेक्शन पर ही 8 से 10 लाख रुपए से अधिक खर्च हो सकता है। अब शासकीय कैंसर अस्पताल में यह दवा पात्रता के आधार पर देने की तैयारी है। पूरे प्रदेश के शासकीय अस्पतालों में यह उपलब्ध रहेगी। शासन के निर्णय के बाद अब सरकारी दवा खरीदी की लिस्ट में इन इंजेक्शन को शामिल किया जाएगा। इसके बाद सप्लाई को लेकर प्रक्रिया पूरी होगी। यह इंजेक्शन केवल डॉक्टर की निगरानी में अस्पताल में ही दिया जाता है। इन कैंसर में होता है उपयोगी     फेफड़ों का कैंसर     त्वचा का कैंसर     सिर और गर्दन का कैंसर     गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर     मूत्राशय का कैंसर     पेट का कैंसर     लिवर का कैंसर     किडनी का कैंसर सरकार से मिलने वाली है अनुमति कैंसर की कोशिकाओं को तेजी से बढ़ने से रोकने के लिए इम्यूनोथेरेपी इंजेक्शन लगाया जाता है। सरकार की तरफ से अनुमति मिलने वाली है। अप्रेल में यह दवा खरीदी लिस्ट में शामिल करने की योजना है। इसके बाद शासकीय कैंसर अस्पताल में मरीज निःशुल्क लगा सकेंगे।- डॉ. ओपी गुर्जर, कैंसर विशेषज्ञ, शासकीय कैंसर अस्पताल इंदौर  

प्रमोशन में देरी से प्रभावित प्रशासनिक कैडर, एमपी में 68 IAS, 48 IPS और 87 IFS पदों की कमी

भोपाल  मध्यप्रदेश में अखिल भारतीय सेवाओं के प्रमोशन में लगातार हो रही देरी अब प्रशासनिक ढांचे पर सीधा असर डालने लगी है। हालात यह हैं कि राज्य में आईएएस,आईपीएस और आईएफएस कैडर के कुल 203 पद खाली पड़े हैं। इससे प्रशासनिक कामकाज, कानून-व्यवस्था और वन प्रबंधन तीनों क्षेत्रों में दबाव बढ़ गया है। 3 कैडर, 203 पद खाली सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में आईएएस के 68 पद, आईपीएस के 48 पद और आईएफएस के 87 पद रिक्त हैं। इन पदों के खाली रहने से कई जिलों में स्थायी कलेक्टर, एसपी और डीएफओ की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। प्रमोटी अफसरों को नहीं मिल पा रहा पूरा मौका प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा और राज्य वन सेवा से प्रमोट होकर आने वाले अधिकारियों को सीमित अवसर मिल पा रहे हैं। कई अफसर वर्षों से प्रतीक्षा सूची में हैं, लेकिन केंद्र से समय पर स्वीकृति और कैडर रिव्यू नहीं होने से प्रमोशन अटका हुआ है। केंद्र–राज्य समन्वय की कमी सूत्रों के अनुसार, अखिल भारतीय सेवाओं में भर्ती और प्रमोशन की प्रक्रिया केंद्र सरकार से जुड़ी होती है। कैडर स्ट्रेंथ बढ़ाने और रिक्त पद भरने के प्रस्ताव भेजे गए हैं, लेकिन लंबे समय से निर्णय नहीं हो पाया है। इसका सीधा असर राज्य के प्रशासनिक संचालन पर पड़ रहा है। जिले और विभाग अतिरिक्त प्रभार पर कई जिलों में एक ही अधिकारी के पास दो-दो या तीन-तीन जिलों का प्रभार है। वहीं, पुलिस और वन विभाग में भी वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। इससे निर्णय प्रक्रिया धीमी हो रही है और फील्ड लेवल पर निगरानी कमजोर पड़ रही है। आने वाले समय में और बढ़ेगी चुनौती विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही प्रमोशन और नई भर्ती की प्रक्रिया तेज नहीं की गई, तो आगामी वर्षों में रिटायरमेंट के चलते स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसका असर विकास कार्यों,कानून-व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण पर साफ दिखाई देगा। प्रमोशन समय पर हों तो सुधार की गुंजाइश इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि संघ लोक सेवा आयोग की भर्ती के अलावा राज्यों में प्रमोशन से भरने वाले पदों के जरिये इस रिक्तता को कम किया जा सकता है लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग, गृह विभाग और वन विभाग के अफसरों की लापरवाही और देरी के चलते तीनों ही कैडर की डीपीसी समय से नहीं हो रही है और इसका असर पद रिक्त होने के रूप में साफ दिख रहा है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा प्रशासनिक अनुभव की टाइम लिमिट को भी जिम्मेदार बताया जा रहा है। प्रशासनिक और नीतिगत कामों पर सीधा असर अधिकारियों का मानना ​​है कि स्वीकृत पदों के न भर पाने से कई दिक्कतें होती हैं। हालांकि पद रिक्त रहने के कई संरचनात्मक कारण भी बताए जा रहे हैं। संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से वार्षिक भर्ती सीमित है, जबकि हर साल सेवानिवृत्ति जारी हैं। राज्य सिविल सेवाओं से आईएएस में अधिकारियों की पदोन्नति में देरी ने भी इस अंतर को और बढ़ा दिया है। इसके अलावा कई राज्यों ने भर्ती में समानुपातिक वृद्धि किए बिना अपने कैडर की संख्या बढ़ा दी है।  

मध्य प्रदेश में जमीन और मकान की रजिस्ट्री महंगी होगी, रेट में बढ़ोतरी की तैयारी

भोपाल  मध्य प्रदेश में रजिस्ट्री के लिए जमीनों के रेट तय करने के लिए बनाई जा रही कलेक्टर गाइडलाइन में इस बार भी कोई तय फॉर्मूला नहीं बनाया गया है। मनमाने रेट बढ़ाने की तैयारी चल रही है। इस बार 10 से 30 फीसदी तक रेट बढ़ाने की तैयारी है। सरकार गाइडलाइन के साथ लागू किए जाने वाले उपबंधों में भी कोई बदलाव नहीं कर रही है। इससे खासतौर पर कृषि भूमि की रजिस्ट्री डेढ़ गुना से ज्यादा दर पर की जा रही है। जबकि प्रॉपर्टी के वास्तविक गुण, लैंड-यूज, सड़क की चौड़ाई, लोकेशन, सुविधाओं और टाइटल-क्वालिटी आदि को आधार बनाकर रेट तय होना चाहिए। गाइडलाइन पर फिर से आपत्तियां और सुझाव आना शुरू हो गए हैं। उज्जैन में प्रॉपर्टी लेना होगा और महंगा महाकाल की नगरी उज्जैन में भी कलेक्टर गाइड लाइन के तहत प्रॉपर्टी रेट बढ़ाने की तैयारी है। जिला मुल्यांकन समिति की बैठक में कई लोकेशन पर दरें बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। पिछले प्रस्तावों में जिले की करीब 91 लोकेशन्स पर रेट बढ़ाने की बात सामने आई थी। करीब 60 लोकेशन ऐसी थीं जिन के रेट 10-20 फीसदी तक बढ़ाए गए। वहीं 21 लोकेशन पर 20-30 प्रतिशत तक महंगाई बढ़ी थी। वहीं कुछ स्थानों पर 30 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव शामिल था।  बताया जा रहा है कि उज्जैन विकास प्राधिकरण की त्रिवेणी की और शिप्रा विहार योजनाओं समेत कई नई कॉलोनियों के रेट बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव पर आपत्तियां और सुझाव मिलने के बाद इसे केंद्रीय मूल्यांकन समिति को भेजा जाएगा। 74 हजार लोकेशन के सर्वे के बाद नई कलेक्टर गाइडलाइन की कवायद शुरू प्रदेश में जमीन और मकानों की कीमतों को नए सिरे से तय करने की कवायद तेज हो गई है। राजस्व और पंजीयन विभाग ने प्रदेश की करीब 74 हजार लोकेशन का विस्तृत सर्वे पूरा कर लिया है, जिसके आधार पर नई कलेक्टर गाइडलाइन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यह प्रस्ताव जल्द ही जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में चर्चा के बाद केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलते ही 1 अप्रैल से पूरे प्रदेश में नई प्रॉपर्टी दरें लागू कर दी जाएंगी। जहां ज्यादा कीमत पर रजिस्ट्री, वहीं बढ़ेंगी दरें जानकारी के अनुसार प्रदेश में कुल सवा लाख से अधिक लोकेशन हैं, लेकिन इनमें से लगभग 74 हजार लोकेशन ऐसी हैं जहां नियमित रूप से प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री होती है। इन्हीं स्थानों पर पंजीयन और राजस्व अधिकारियों ने संपदा-2 सॉफ्टवेयर, एआई तकनीक और अन्य माध्यमों से सर्वे किया है। सर्वे में यह आकलन किया गया कि किन क्षेत्रों में मौजूदा गाइडलाइन से अधिक कीमत पर रजिस्ट्रियां हो रही हैं। भोपाल की 500 से ज्यादा लोकेशन पर हाई रेट रजिस्ट्री राजधानी भोपाल में करीब 3 हजार लोकेशन का सर्वे किया गया, जिनमें से एक हजार से अधिक स्थानों पर प्रॉपर्टी लेनदेन हो रहा है। इनमें करीब 500 से ज्यादा लोकेशन ऐसी पाई गईं, जहां वर्तमान कलेक्टर दरों से अधिक कीमत पर रजिस्ट्री की गई है। इन्हीं क्षेत्रों को चिह्नित कर आकलन किया जा रहा है, ताकि नई गाइडलाइन में यथार्थ के अनुरूप दरें तय की जा सकें।  

BJP की बंगाल चुनाव रणनीति: सभी बड़े नेताओं को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी, CM उम्मीदवार कौन?

कलकत्ता  भाजपा पश्चिम बंगाल और केरल में मुख्यमंत्री पद के लिए घोषित चेहरे के बगैर चुनाव लड़ेगी। पश्चिम बंगाल में सभी 294 सीटों पर और केरल में एनडीए के दलों के साथ सभी 140 सीटों पर लड़ेगी। पश्चिम बंगाल में पार्टी पूर्व सांसदों के साथ ही लोकसभा में मौजूदा सांसदों को भी विधानसभा चुनाव मैदान में उतार सकती है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने दोनों राज्यों के विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नामों के साथ चुनावी रणनीति पर भी चर्चा की है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा पश्चिम बंगाल में इस बार पूरी ताकत से चुनाव मैदान में उतरेगी और वह अपने अधिकांश मौजूदा विधायकों के साथ पूर्व सांसदों को भी चुनाव मैदान में उतार रही है। पार्टी रणनीति के तहत मौजूदा सांसदों को भी चुनाव मैदान में उतारने पर विचार कर रही है। हालांकि, पार्टी इस बार भी किसी को बतौर मुख्यमंत्री पेश नहीं करेगी। सीएम कैंडिडेट कौन? केरल को लेकर पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा एनडीए के दो सहयोगी दलों ट्वेंटी 20 और भारतीय जन धर्म सेना के साथ सभी 140 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। भाजपा खुद 90 से 100 सीटों पर लड़ेगी और बाकी 40 सीट दोनों सहयोगियों को लगभग आधी-आधी बांटेगी। भाजपा ने पिछली बार 115 सीट पर और भारतीय जन धर्म सेना ने 21 सीट पर चुनाव लड़ा था। भाजपा इस बार बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के चुनाव लड़ेगी। उसने पिछली बार मेट्रो मैन ई. श्रीधरन को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया था, लेकिन उसका खाता भी नहीं खुला था। सूत्रों का कहना है कि इस बार चुनावी पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे के साथ केंद्र सरकार का नाम और काम रहेगा। राज्य के नेताओं में केरल भाजपा के प्रमुख राजीव चंद्रखेशर, ट्वेंटी 20 के प्रमुख साबू एम. जैकब और भारतीय जन धर्म सेना के प्रमुक टी. वेल्लापेल्ली का चेहरा भी रहेगा। केरल में भाजपा स्थानीय निकायों के नतीजों से काफी उत्साहित है। खासकर राजधानी तिरुवनंतपुरम में पार्टी ने पहली बार अपना मेयर बनाया है।

2031-32 तक डेटा सेंटरों के लिए 13.56 गीगावॉट बिजली की जरूरत, AI और डिजिटल सेवाओं से मांग में 800% वृद्धि

नई दिल्ली देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के कारण डेटा सेंटरों की बिजली मांग तेजी से बढ़ने का अनुमान है। 2031-32 तक डेटा सेंटरों से बिजली की मांग 13.56 गीगावॉट तक पहुंच सकती है। अभी देश में डेटा सेंटर क्षमता तेजी से बढ़ रही है। यह 2020 में 375 मेगावॉट थी, जो 2025 तक बढ़कर करीब 1,500 मेगावॉट हो गई है। अगले करीब 7 सालों में बिजली मांग 800% बढ़ने का अनुमान है। सरकार के अनुसार AI विकास को बढ़ावा देने के लिए 14 सेवा प्रदाताओं और डेटा सेंटरों के जरिए 38,231 जीपीयू उपलब्ध कराए गए हैं। इन्हें स्टार्टअप, शोध संस्थानों और शिक्षण संस्थानों को औसतन 65 रुपए प्रति घंटे की सब्सिडी दर पर दिया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने शुक्रवार को राज्यसभा में बताया कि देश के प्रमुख डेटा सेंटर मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, नोएडा और जामनगर में स्थित हैं। 65% भारतीय AI का इस्तेमाल कर चुके हैं भारत में AI का उपयोग बहुत तेजी से बढ़ रहा है। माइक्रोसॉफ्ट की 2024-25 की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 65% भारतीय लोगों ने कम से कम एक बार जनरेटिव AI (जैसे चैटबॉट या AI ऐप) का इस्तेमाल किया है। देश की आबादी लगभग 140 करोड़ है। इसका करीब 65% यानी लगभग 90–95 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में AI टूल का उपयोग कर चुके हैं। भारत में AI ऐप डाउनलोड तेजी से बढ़े हैं और 2025 में भारतीयों ने लगभग 0.6 अरब (60 करोड़) AI ऐप डाउनलोड किए। लोग AI का इस्तेमाल पढ़ाई, सवालों के जवाब, ट्रांसलेशन, काम की उत्पादकता बढ़ाने और कंटेंट बनाने के लिए कर रहे हैं। संसद में अन्य मंत्रालयों के सवाल-जवाब… देश में 16 साल में 4 गुना बढ़े सी-सेक्शन प्रसव भारत में 16 साल में सी-सेक्शन प्रसव 4 गुना से ज्यादा बढ़े। स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि 2008-09 में 12.03 लाख ऑपरेशन से प्रसव हुए थे, जो 2024-25 में 54.35 लाख हो गए। कुल प्रसव 1.88 करोड़ से 1.98 करोड़ हुए। 2024-25 में 27.46% प्रसव सी-सेक्शन रहे। इसी अवधि में मातृ मृत्यु दर 212 से 88 और शिशु मृत्यु दर 57 से 25 हो गई। बांग्लादेश में फरवरी 2026 तक 3100 हिंसक घटनाएं विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने बताया कि अगस्त 2024 से फरवरी 2026 के बीच बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों पर 3,100 घटनाओं में हिंसा हुई। मानवाधिकार संगठनों के इन आंकड़ों में घरों, संपत्तियों, कारोबार और पूजा स्थलों पर हमले भी शामिल हैं। ट्रांसजेंडर अधिकारों को लेकर संशोधन बिल लोकसभा में पेश सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने लोकसभा में ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन बिल, 2026 पेश किया। इस बिल का उद्देश्य ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 में बदलाव करना है, ताकि ट्रांसजेंडर लोगों की स्पष्ट परिभाषा तय की जा सके और उन्हें बेहतर कानूनी सुरक्षा मिल सके। मौजूदा कानून में ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषा साफ नहीं है, इसलिए नई परिभाषा तय करने का प्रस्ताव है। बिल में जरूरत पड़ने पर सलाह देने के लिए एक विशेष अथॉरिटी बनाने की बात कही गई है। ट्रांसजेंडर लोगों को सरकारी दस्तावेजों में जरूरी बदलाव कराने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव है। अपहरण या जबरन नुकसान जैसे गंभीर अपराधों पर कड़ी और अलग-अलग सजा देने की बात भी बिल में है।

हिमालय में बढ़ रही पेड़ों की कमी, सरकारी रिपोर्ट में दावा- 2 साल में 2.2% ग्रीन कवर गायब हुआ

 नई दिल्ली भारतीय हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण को लेकर एक परेशान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है. केंद्रीय मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में जानकारी दी है कि साल 2021 से 2023 के बीच हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘ट्री कवर’ में 2.27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार को राज्यसभा में एक सवाल का लिखित जवाब देते हुए मंत्री ने ‘इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट’ (ISFR) 2023 के आंकड़े पेश किए. रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में ट्री कवर 15,427.11 वर्ग किलोमीटर था, जो कि 2023 में घटकर 15,075.5 वर्ग किलोमीटर रह गया। ये आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ दो सालों में हिमालय की हरियाली में बड़ी कमी आई है. इस क्षेत्र में जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और उत्तर-पूर्वी राज्यों सहित कुल 13 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। कार्बन स्टॉक में मामूली बढ़ोतरी एक तरफ जहां पेड़ों की संख्या कम हुई है, वहीं जंगलों में मौजूद कुल कार्बन स्टॉक में बहुत मामूली बढ़ोतरी देखी गई है. 2021 में ये 3,272.68 मिलियन टन था, जो 2023 में बढ़कर 3,273.10 मिलियन टन हो गया है. कार्बन स्टॉक का बढ़ना पर्यावरण के लिए अच्छा संकेत माना जाता है क्योंकि ये वातावरण से कार्बन सोखने की क्षमता को दिखाता है। जंगलों की स्थिति पर बात करते हुए मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा, ‘जंगलों का स्वास्थ्य सिर्फ उनकी हरियाली से नहीं मापा जाता. ये कई इकोलॉजिकल और बायोफिजिकल स्टैंडर्ड्स पर निर्भर करता है। भारतीय वन सर्वेक्षण क्यों करता है जंगलों की स्टडी? भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) जंगलों की सेहत जांचने के लिए कई तरह के आंकड़े जुटाता है. इसमें मिट्टी की गहराई, मिट्टी का कटाव, वनस्पति की विशेषताएं और जंगलों को होने वाले खतरों की स्टडी की जाती है. ये सभी कारक मिलकर ये तय करते हैं कि किसी खास समय में जंगलों की स्थिति क्या है। हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण में हो रहे ये बदलाव विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि ये क्षेत्र न सिर्फ जैव विविधता बल्कि भारत की प्रमुख नदियों का भी स्रोत है।  

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