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ईको-पर्यटन को बढ़ावा, नेचर कैंप मड हाउस से ग्रामीणों को मिलेगा रोजगार

रायपुर नेचर कैंप मड हाउस से स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में बारनवापारा अभ्यारण्य के पास स्थित देवपुर रेंज में ईको-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नए नेचर कैंप मड हाउस (मिट्टी के घर) शुरू किए गए हैं। ये घर पारंपरिक तरीके से मिट्टी और प्राकृतिक सामग्रियों से बने हैं, जो सैलानियों को प्रकृति के करीब रहने का अनूठा और शांत अनुभव प्रदान करते हैं।  नेचर कैंप मड हाउस से स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार           बलौदाबाजार वनमंडल के देवपुर वन परिक्षेत्र में ईको-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘नेचर कैंप मड हाउस’ का शुभारंभ किया गया। यह पहल वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डे के विशेष प्रयासों से शुरू की गई है। इससे स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे। गौरतलब है कि नेचर कैंप मड हाउस को प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक शैली से तैयार किया गया है। यहां आने वाले पर्यटकों को प्रकृति के करीब रहने का अनूठा अनुभव मिलेगा। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय लोगों की आय के स्थायी साधन विकसित करना है। इस परियोजना के संचालन में स्थानीय वन प्रबंधन समिति और स्व-सहायता समूहों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।               इसी क्रम में बारनवापारा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के पर्यटन ग्राम में एक आधुनिक रिसेप्शन भवन का भी शुभारंभ किया गया। पर्यटन विभाग की ओर से यहां पर मड हाउस मॉडल बनाए गए हैं। इन मड हाउस में ठहरने वालों को प्रकृति और ग्रामीण परिवेश का पूरा आनंद मिलेए इसकी व्यवस्था की गई है। बारनवापारा में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक रिसेप्शन भवन भी बनाए गए हैं। इन तमाम सुविधाओं और व्यवस्थाओं से स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि होगी, उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा, बेरोजगारी भी कम होगी।               इस नए कैंप को स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक निर्माण शैली के साथ तैयार किया गया है। मिट्टी, लकड़ी और प्राकृतिक सामग्री से बने मड हाउस पर्यावरण के अनुकूल हैं। आसपास के जंगल के साथ पूरी तरह घुलते.मिलते नजर आने वाले ये मड हाउस पर्यटकों को आकर्षित करेंगे। वन विभाग का उद्देश्य है, कि पर्यटन हो लेकिन प्रकृति पर दबाव कम से कम पड़े। इस केंद्र के माध्यम से आने वाले पर्यटकों को अभ्यारण्य की जैव विविधता, वन्यजीवों और प्राकृतिक विरासत की जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि वन मंत्री केदार कश्यप की मंशा के अनुरूप वन विभाग ऐसे विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है, जिनमें वन संरक्षण और स्थानीय विकास का संतुलन बना रहे।               इस अवसर पर वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर सहित विभागीय अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। यह पहल देवपुर क्षेत्र को ईको-पर्यटन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

अक्षर पटेल का कमाल देख दंग हुए गावस्कर, कहा– टीम इंडिया के भविष्य के महान ऑलराउंडर

नई दिल्ली पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर का मानना ​​है कि अक्षर पटेल क्रिकेट के हर विभाग में अपने शानदार कौशल और क्रिकेट की बहुत अच्छी समझ रखने के कारण भारत के महानतम खिलाड़ियों में से एक बनने की राह पर हैं। इसकी एक बानगी इंग्लैंड के खिलाफ टी20 विश्व कप सेमीफाइनल में देखने को मिली जिसमें उन्होंने अपनी शानदार फील्डिंग से प्रभावित किया। अक्षर पटेल ने खेल के दो अलग-अलग लेकिन महत्वपूर्ण चरणों में खतरनाक हैरी ब्रूक और विल जैक्स को आउट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अक्षर ने कवर पोजीशन से 24 मीटर पीछे दौड़कर शानदार कैच लेकर ब्रूक को पवेलियन भेजा। इसके बाद अर्शदीप सिंह की वाइड फुल टॉस गेंद को जैक्स ने डीप पॉइंट की ओर खेला। अक्षर ने अपनी बाईं ओर दौड़कर गेंद को लपका लेकिन सीमा रेखा पर संतुलन नहीं बना पाने के कारण उन्होंने उसे शिवम दुबे की तरफ उछाल दिया। गावस्कर ने स्टार स्पोर्ट्स पर कहा, ‘अक्षर ने ब्रूक का जो कैच लिया वह अविश्वसनीय था। ब्रूक मैच का रुख बदल सकते हैं और उनका विकेट हासिल करने का हर मौका भुनाना चाहिए। अक्षर ने वही किया। वह 24 मीटर दौड़े, गेंद पर नजर रखी, खुद पर नियंत्रण बनाए रखा और कैच लपक लिया। अविश्वसनीय।’ उन्होंने कहा, ‘विल जैक्स को आउट करने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। (जैकब) बेथेल और जैक्स की साझेदारी मैच को इंग्लैंड के पक्ष में कर रही थी। लेकिन अक्षर अपनी बाईं ओर दौड़े, गेंद पकड़ी और चतुराई दिखाकर उसे शिवम दुबे के पास पहुंचा दिया। इससे उनकी क्रिकेट की समझ और अच्छी सूझबूझ का पता चलता है।’ गावस्कर ने कहा, ‘शीर्ष स्तर पर आपकी सूझबूझ और जज्बा ही महान खिलाड़ियों को अन्य खिलाड़ियों से अलग करता है। अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी के दम पर अक्षर भारत के महान खिलाड़ियों में से एक बनने जा रहे हैं।’ गावस्कर ने कहा कि रवींद्र जडेजा के टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद अक्षर ने उनकी जगह को अच्छी तरह से भर दिया है। इस पूर्व सलामी बल्लेबाज ने कहा, ‘उनसे पहले हमारे पास रवींद्र जडेजा थे और अक्षर उनकी कमी को बखूबी पूरा कर रहे हैं। उनकी गेंदबाजी में थोड़ा और निखार की जरूरत है। अनुभव के साथ यह आ जाएगा। उनकी लाइन, लेंथ और गति में निरंतर सुधार हो रहा है।’ गावस्कर ने इसके अलावा जसप्रीत बुमराह की तारीफ करते हुए कहा, ‘जसप्रीत बुमराह जैसे तेज गेंदबाज सदियों में एक बार पैदा होते हैं। वह सभी प्रारूप में खेलते हैं। इसलिए चाहे टेस्ट मैच हो या वनडे या फिर टी20 आप उन्हें गेंद दे दीजिए और वह अपना काम बखूबी निभाएंगे।’

तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया गया प्रशिक्षण

रायपुर तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले शाखा-कर्तन कार्य के लिए कार्यशाला तेन्दूपत्ता की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाने के लिए संग्रहण (मार्च-अप्रैल) से पहले फरवरी-मार्च में वैज्ञानिक तरीके से शाखा-कर्तन किया जाता है। इस प्रक्रिया में झाड़ियों की कटाई-छंटाई की जाती है, जिससे नई कोमल पत्तियां (फड़) निकलती हैं, जो बीड़ी उद्योग के लिए उच्च गुणवत्ता वाली होती हैं।              वनमंडलाधिकारी कोरिया ने कहा कि छत्तीसगढ़ में तेन्दूपत्ता को हरा सोना कहा जाता है। यह कार्य ऐसे समय में होता है जब ग्रामीण और संग्राहकों के पास अन्य रोजगार कम होते हैं, इसलिए यह उनके लिए आय का महत्वपूर्ण साधन बनता है। उन्होंने निर्देश दिए कि तेन्दूपत्ता खरीदी का भुगतान साप्ताहिक खरीदी के तीसरे दिन तक अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि संग्राहकों को समय पर लाभ मिल सके। कोरिया वनमंडल अंतर्गत जिला लघु वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित बैकुंठपुर द्वारा तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य से पहले शाखा-कर्तन (बूटा कटाई) के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला बैकुंठपुर स्थित गेज रोपणी परिसर में आयोजित की गई। इसमें कोरिया वनमंडल के अंतर्गत आने वाली 17 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के 16 इकाइयों के फड़मुंशी, प्रबंधक, पोषक अधिकारी, फड़ अभिरक्षक सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए।  तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले शाखा-कर्तन कार्य के लिए कार्यशाला             परिक्षेत्र अधिकारी सोनहत जिला कोरिया वनमंडल ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले शाखा-कर्तन का कार्य कराया जाता है, जिससे बेहतर गुणवत्ता का पत्ता प्राप्त हो सके। यह कार्य प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से मार्च के प्रथम और द्वितीय सप्ताह में अनिवार्य रूप से पूरा किया जाएगा। साथ ही फड़मुंशी और फड़ अभिरक्षकों को उनके कर्तव्यों और जिम्मेदारियों की जानकारी भी दी गई। शाखा-कर्तन कार्य के लिए निर्धारित राशि के अनुसार 70 रुपये प्रति मानक बोरा भुगतान किया जाएगा, जिसका भुगतान समिति के पोषक अधिकारी और प्रबंधक द्वारा संयुक्त रूप से कार्य पूरा होने के तुरंत बाद किया जाएगा। परिक्षेत्र अधिकारी देवगढ़ ने तेन्दूपत्ता बूटा कटाई की तकनीकी जानकारी देते हुए फड़ों के चयन, शाखा-कर्तन की प्रक्रिया, तेन्दूपत्ता तोड़ाई, गड्डी बांधने तथा संग्रहण केंद्र में खरीदी की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति पटना के प्रबंधक ने भी तेन्दूपत्ता संग्रहण से लेकर क्रेता को पत्ता सुपुर्द करने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। कार्यक्रम में जिला यूनियन कोरिया के अध्यक्ष ने अधिकारियों और कर्मचारियों को उच्च गुणवत्ता का तेन्दूपत्ता संग्रहित करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर परिक्षेत्र अधिकारी सोनहत अजीत सिंह ने कोरिया वनमंडल की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 के तेन्दूपत्ता सीजन के लिए वनमंडल की सभी लॉट अग्रिम निवर्तन में पहले ही विक्रय हो चुकी हैं इस अवसर पर उप प्रबंध संचालक अखिलेश मिश्रा, तकनीकी अधिकारी सी.पी. पटेल सहित वनमंडल के अधिकारी-कर्मचारी, फड़ अभिरक्षक, फड़मुंशी, समिति के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, अग्रिम क्रेता के प्रतिनिधि और स्व.सहायता समूहों के सदस्य उपस्थित रहे।

सोनाखान के जंगलों में लगी आग पर पाया काबू

रायपुर सोनाखान के जंगलों में लगी आग पर पाया काबू वन केवल हमारी प्रकृति की सुंदरता नहीं बढ़ाते, बल्कि जलवायु संतुलन, जैव विविधता और जीवन के लिए आवश्यक संसाधन भी प्रदान करते हैं। छत्तीसगढ़ के जंगलों की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए वन विभाग लगातार सतर्कता के साथ कार्य कर रहा है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में वन अग्नि प्रबंधन को लेकर प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।            होली के त्यौहार के दौरान भी वन विभाग की टीम पूरी मुस्तैदी से अपने दायित्वों का निर्वहन करती रही। जब पूरा प्रदेश होली के उत्सव में व्यस्त था, उस समय वनकर्मी जंगलों को आग से बचाने के लिए फील्ड में तैनात रहे। बीती रात बलौदाबाजार वनमंडल के सोनाखान परिक्षेत्र अंतर्गत कसडोल-कोठारी मार्ग पर देवतराई और पौड़ी के बीच जंगल में आग लगने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और आग बुझाने की कार्रवाई शुरू की।        स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वनमंडलाधिकारी श्री धम्मशील गणवीर स्वयं मौके पर पहुंचे और टीम का नेतृत्व करते हुए आग पर काबू पाया। स्थानीय रेंज अधिकारी और बीट प्रभारियों ने फायर लाइन बनाकर, फायर बीटर और अन्य संसाधनों की मदद से आग को फैलने से रोक दिया। वनमंडलाधिकारी ने मौके पर मौजूद वनकर्मियों का उत्साह बढ़ाते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। वन विभाग का उद्देश्य बेहतर प्रबंधन, जागरूकता और जनसहभागिता के माध्यम से वनों को आग से सुरक्षित रखना और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना है।

पर्यटन और संरक्षण साथ-साथ: मैनपुरी-इटावा में तैयार होगा सारस सर्किट

लखनऊ योगी सरकार प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस (क्रेन) के संरक्षण और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए सारस सर्किट की स्थापना कर रही है। सारस सर्किट का विकास प्रदेश के मैनपुरी और इटावा जिलों के वेटलैंड्स में किया जा रहा है, जिसके तहत मैनपुरी के किर्थुआ, सहस, कुर्रा जरावां, सौज एवं समन के साथ इटावा के सरसई नावर और परौली रामायण वेटलैंड एरिया में सारस सर्किट विकसित किया जा रहा है। सारस सर्किट में सारस पक्षी के संरक्षण के साथ इको-टूरिज्म की गतिविधियों को भी शामिल किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य सारस पक्षी और वेटलैंड्स संरक्षण के साथ स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा देना है। यह स्थानीय लोगों को आय के अवसर उपलब्ध करवाएगा और सारस पक्षी और वेटलैंड्स के संरक्षण के लिए भी प्रेरित करेगा। इन परियोजनाओं का विकास ईको-टूरिज्म विकास बोर्ड के माध्यम से प्रदेश का वन विभाग कर रहा है। दुनिया में सबसे लंबी उड़ान के लिए जाना जाने वाला सारस पक्षी, उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी है। इसका आवास और प्रजनन क्षेत्र विशेषतौर पर राज्य के मैनपुरी, इटावा, एटा, अलीगढ़ की वेटलैड्स में है। जिसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार सारस पक्षी के संरक्षण के लिए सारस सर्किट का विकास कर रही है। जहां प्रदेश का वन विभाग, यूपी ईको टूरिज्म विकास बोर्ड के माध्यम से क्षेत्र के उथले जलाशयों, तालाबों और अन्य वेटलैड्स को संरक्षित कर सारस पक्षी के अनुकूल बनाने का प्रयास कर रहा है। साथ ही क्षेत्र में ईको टूरिज्म की गतिविधियों को भी विकसित किया जा रहा है। इस क्रम में मैनपुरी और इटावा जिलों के सारस सर्किट में प्रवेश द्वार, व्यू पॉइंट, डेक एवं बोटिंग स्पॉट, बटरफ्लाई गार्डन, सोलर साइट लाइटिंग, इंटरप्रिटेशन सेंटर, पार्किंग जैसी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। साथ ही, सारस सर्किट में पर्यटकों की सुविधा के लिए सूचना केंद्र, ईको-टॉयलेट ब्लॉक, पार्किंग, इंटरैक्टिव साइनेज, फूड कियोस्क और ओडीओपी व स्मृति चिन्ह की दुकानें भी विकसित की जाएंगी। ये सुविधाएं पर्यटकों को सारस के प्राकृतिक आवास को देखने और समझने का अवसर प्रदान करेंगी। योगी सरकार की यह पहल न केवल सारस (क्रेन) और अन्य पक्षियों जैसे ग्रे हेरॉन, ओपन-बिल्ड स्टॉर्क आदि की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि क्षेत्र के वेटलैंड्स के संरक्षण को भी बढ़ावा देगी। यह इन क्षेत्रों में भू-जल स्तर में वृद्धि के साथ ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों को कम करने और सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा। साथ ही, इन क्षेत्रों में इको-टूरिज्म की गतिविधियों के विकास से स्थानीय समुदाय के लोगों को आय और रोजगार के अवसर मिलेंगे। इससे स्थानीय लोगों और घूमने के लिए आने वाले पर्यटकों में भी पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता में बढ़ोतरी होगी। सारस पक्षी को उसके प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षा और संरक्षण प्रदान कर योगी सरकार क्षेत्र की जैव विविधता को संजोने का अनूठा प्रयास कर रही है। ये परियोजनाएं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सतत विकास की अवधारणा को सफल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

रायपुर में प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, जमुना पाण्डे के घर में सौर ऊर्जा से हो रही रोशनी

रायपुर : प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना: जमुना पाण्डे का घर सौर ऊर्जा से हो रहा रोशन बिजली बिल से मिली राहत रायपुर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की मंशानुरूप प्रत्येक घरों में छत पर सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाकर आमजनों को ऊर्जा के लिए आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का संचालन किया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से  मुंगेली जिले के अनेक घर सौर ऊर्जा से रोशन हो रहे हैं और लोग बिजली खर्च से मुक्त होकर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह योजना न केवल नागरिकों को आर्थिक राहत प्रदान कर रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित हो रही है।          नगर पंचायत सरगॉव की जमुना पाण्डे ने अपने आवास पर 02 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित कराया है। सोलर संयंत्र के चालू होते ही उनका घर सौर ऊर्जा से रोशन हो रहा है। जमुना पाण्डे ने बताया कि सोलर पैनल स्थापना होने से बिजली बिल से राहत मिली है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत सरल प्रक्रिया और सब्सिडी सुविधा ने उन्हें सोलर सिस्टम अपनाने के लिए प्रेरित किया। 02 किलोवाट सोलर सिस्टम स्थापित होने के बाद न केवल उनके घर के बिजली बिल में कमी आई है, बल्कि वे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में भी अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने इस योजना को आम आदमी के लिए राहत और भविष्य के लिए निवेश बताते हुए शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने अन्य नागरिकों से भी अपील की कि वे सौर ऊर्जा को अपनाकर न केवल आर्थिक लाभ प्राप्त करें, बल्कि ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में सहभागी बनें।            उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापना पर केन्द्र और राज्य शासन द्वारा 30 हजार रूपए से 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। 01 किलोवाट क्षमता पर 45 हजार रुपये, 02 किलोवाट पर 90 हजार रुपये तथा 03 किलोवाट क्षमता के सोलर सिस्टम पर 01 लाख 08 हजार रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। यह प्रावधान सोलर ऊर्जा को आम नागरिकों के लिए सुलभ और किफायती बना रहा है। आमजनों को योजना के लिए प्रोत्साहित करने शासन के निर्देशानुसार बैंकों द्वारा कम ब्याज दर पर आसान किश्तों में ऋण की सुविधा प्रदान की जा रही है। इससे आमजनों को योजना का लाभ लेना आसान हो गया है।

नारायणपुर के ग्रामीणों को राहत, सुदूर गांवों में स्वास्थ्य शिविर से 107 लोगों को उपचार

रायपुर नारायणपुर के सुदूर गांवों में पहुंच रही हैं स्वास्थ्य सेवाएं नारायणपुर जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ग्राम पंचायत घमंडी के आश्रित ग्राम जटवर में सुशासन एक्सप्रेस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान लगाए गए विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।            शिविर में ग्राम पंचायत घमंडी के अंतर्गत आने वाले जटवर, घमंडी, कोगालीं, ओरछापार, कारकाबेड़ा, हिकोनार, गोडेलेमाका और वाडापेंदा जैसे गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। दो दिनों तक चले इस शिविर में कुल 107 मरीजों का उपचार किया गया और उन्हें आवश्यक दवाइयों के साथ स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी दिया गया।       स्वास्थ्य जांच के दौरान 84 लोगों की मलेरिया जांच की गई, जिनमें 15 मरीज पॉजिटिव पाए गए। इसके अलावा टीबी स्क्रीनिंग, रक्तचाप, शुगर, हीमोग्लोबिन और नेत्र जांच भी की गई। गर्भवती महिलाओं की विशेष एएनसी जांच कर उन्हें आवश्यक सलाह दी गई, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।            शिविर में मौसमी बीमारियों जैसे सर्दी-खांसी, बुखार, खुजली, दस्त, कमजोरी और दर्द से पीड़ित मरीजों को भी उपचार और आवश्यक दवाइयां प्रदान की गईं। साथ ही ग्रामीणों को विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी दी गई और उन्हें अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर 80 ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना के तहत् आयुष्मान कार्ड भी वितरित किए गए।              इस स्वास्थ्य शिविर में 10 सदस्यीय स्वास्थ्य टीम ने सेवाएं दीं, जिसमें डॉ. बृजनंदन बनपुरिया, राजीव सिंह, डॉ. हेमेंद्र जुरी, प्रदीप देवांगन, सूरज साहू, रामनाथ उसेंडी, जयसिंह मांझी, नकुल पोटाई, कमलेश कुमार नाग और कु. चंद्रिका गोटा शामिल थे। शिविर का संचालन उप स्वास्थ्य केंद्र वाडापेंदा के माध्यम से किया गया।              दो दिवसीय सुशासन एक्सप्रेस कार्यक्रम के सफल आयोजन से ग्रामीणों को अपने ही क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हुईं। इससे न केवल लोगों को समय पर उपचार मिला, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ी। यह पहल दूरस्थ गांवों तक शासन की सेवाएं पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

अनुज अग्निहोत्री बने UPSC के पहले टॉपर, राजेश्वरी दूसरे स्थान पर: जानें अनुज की सफलता की कहानी

नई दिल्ली यूपीएससी 2025 का परिणाम घोषित हो चुका है. पहले स्थान पर अनुज अग्निहोत्री हैं. इनके अलावा टॉप-20 में शामिल अभ्यर्थियों के नाम भी सामने आ चुके हैं. इस बार सफल 958 उम्मीदवारों में 317 जनरल कैटेगरी, 104 ईडब्ल्यूएस, 3306 ओबीसी, 158 एससी, 73 एसटी वर्ग के हैं.पहले नजर डालते हैं टॉप-10 में शामिल सफल अभ्यर्थियों की सूची पर  अनुज के बाद दूसरे स्थान पर  राजेश्वरी सुवे एम और तीसरे पर एकांश धुल हैं. यूपीएससी के टॉप टेन में राघव झुनझुनवाला को चौथा स्थान मिला है. वहीं इशान भटनागर पांचवे पायदान पर हैं। 1. अनुज अग्निहोत्री 2. राजेश्वरी सुवे एम 3.एकांश धुल 4. राघव झुनझुनवाला 5.इशान भटनागर 6. जिनिया अरोरा 7. एआर राजा मोहाइदीन  8. प्रकाश सेक्रेट्री 9. आस्था जैन 10. उज्जवल प्रियांक यूपीएससी सीएसई 2025 में अंतिम रूप से सफल होने वालों में छठे स्थान पर जिनिया अरोरा, 7वें पर एआर राजा मोहाइदीन, 8वें नंबर पर प्रकाश सेक्रेट्री, नौवें पायदान पर आस्था जैन और 10वें स्थान पर उज्जव प्रियांक हैं। टॉप टेन के बाद भी सफल हुए दूसरे अभ्यर्थियों के नाम आउट हो चुके हैं. यूपीएससी के 20 टॉपर्स के नाम घोषित हो चुके हैं. इनमें 11वें नंबर पर यशश्वी राजवर्धन, 12वें पायदान पर अक्षित भारद्वज, 13 नंबर पर अनन्या शर्मा, 15वें स्थान पर सिमरनदीप कौर, 16वें पर मोनिका श्रीवास्तव, 17वें स्थान पर चितवन जैन, 18वें पायदान पर श्रुति आर, 19वें स्थान पर निसार दिशांत अमृतलाल और 20वें नंबर पर रवि राज हैं.  UPSC 2025 की लिखित मुख्य परीक्षा अगस्त 2025 में हुई थी. इसमें सफल होने वाले उम्मीदवारों के लिए फरवरी 2026 इंटरव्यू का आयोजन किया गया था. इसके बाद आज अंतिम परिणाम की घोषणा हुई। अनुज अग्निहोत्रीने किया टॉप, राजस्थान के रावतभाटा से है कनेक्शन संघ लोक सेवा आयोग ( यूपीएससी ) ने आज सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) 2025 का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है. इस वर्ष अनुज अग्निहोत्री ने परीक्षा में टॉप किया है. उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइटों upsc.gov.in और upsconline.nic.in पर अपने परिणाम देख सकते हैं. यह परीक्षा देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक मानी जाती है. इस परीक्षा की प्रक्रिया काफी लंबी और कठिन होती है. पहले अगस्त 2025 में लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी. इसके बाद सफल उम्मीदवारों का फरवरी 2026 में इंटरव्यू लिया गया. इन सभी चरणों के बाद यूपीएससी ने अंतिम मेरिट लिस्ट जारी की है। UPSC टॉपर अनुज अग्निहोत्री कौन हैं? अनुज अग्निहोत्री UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 के टॉपर हैं. अनुज अग्निहोत्री राजस्थान के रावतभाटा के रहने वाले हैं. उन्होंने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में पहला स्थान हासिल किया और पूरे देश में सबसे ज्यादा अंक प्राप्त किए. UPSC को भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है. हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन अंतिम चयन केवल कुछ सौ उम्मीदवारों का ही होता है. ऐसे में टॉप करना बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. अनुज राजस्थान के रावतभाटा के रहने वाले हैं. इसके बाद वो ग्रेजुएशन करने के लिए जोधपुर चले गए. जहां उन्होंने एम्स से एमबीबीएस से पढ़ाई की है. उन्होंने 2023  में एमबीबीएस की पढ़ाई की थी. इसके बाद उन्होंने Danics जॉइन किया था, जो Central Civil Services (Group-B) की प्रशासनिक सेवा है। अगर बात करें भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की, तो इस साल इसके लिए कुल 180 पद खाली हैं. इनमें अलग-अलग वर्गों के लिए आरक्षण भी तय किया गया है।     सामान्य वर्ग के लिए 74 पद     ओबीसी के लिए 47 पद     अनुसूचित जाति (SC) के लिए 28 पद     आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 18 पद     अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 13 पद इसी तरह भारतीय विदेश सेवा (IFS) में भी इस साल कुल 55 पद उपलब्ध हैं. इनमें भी अलग-अलग वर्गों के लिए सीटें तय की गई हैं।     सामान्य वर्ग के लिए 22 पद     ओबीसी के लिए 15 पद     अनुसूचित जाति के लिए 8 पद     ईडब्ल्यूएस के लिए 6 पद     अनुसूचित जनजाति के लिए 4 पद यूपीएससी ने साफ किया है कि सभी उम्मीदवारों की नियुक्ति सिविल सेवा परीक्षा नियम 2025 और उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर ही अंतिम रूप से तय की जाएगी. कुल मिलाकर, इस परीक्षा में सफल हुए 958 उम्मीदवार अब देश की अलग-अलग प्रशासनिक सेवाओं में शामिल होकर शासन और प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। UPSC परीक्षा कितने चरणों में होती है UPSC सिविल सेवा परीक्षा कुल तीन चरणों में होती है: 1. प्रारंभिक परीक्षा (Prelims)     यह पहला चरण होता है. इसमें दो पेपर होते हैं –     सामान्य अध्ययन (General Studies)     CSAT     इस परीक्षा में पास होने वाले उम्मीदवार ही अगले चरण में जाते हैं. 2. मुख्य परीक्षा (Mains)     दूसरा चरण मुख्य परीक्षा है. इसमें कई लिखित पेपर होते हैं जैसे:     निबंध (Essay)     सामान्य अध्ययन के चार पेपर     वैकल्पिक विषय (Optional Subject)     यह चरण सबसे कठिन माना जाता है. 3. इंटरव्यू (Personality Test) मेन परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। इसमें उम्मीदवार की सोच, व्यक्तित्व, निर्णय लेने की क्षमता और देश-समाज के प्रति समझ को परखा जाता है।     कब हुआ था UPSC 2025 का एग्जाम     लिखित मुख्य परीक्षा: अगस्त 2025     इंटरव्यू: फरवरी 2026     अंतिम परिणाम: 6 मार्च 2026 इन सभी चरणों के बाद अंतिम मेरिट लिस्ट जारी की गई. UPSC पास करने के बाद क्या बनते हैं अधिकारी UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवारों को देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में नौकरी मिलती है, जैसे Indian Administrative Service, Indian Police Service, Indian Foreign Service. इसके अलावा कई ग्रुप A और ग्रुप B केंद्रीय सेवाओं में भी नियुक्ति मिलती है।  

इजरायल का बड़ा खुलासा: 90 दिन पहले खामेनेई की हत्या की थी योजना

तेहरान  इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने 5 मार्च 2026 को एक टीवी इंटरव्यू में बड़ा खुलासा किया है कि देश ने पिछले साल नवंबर में ही अयातुल्ला अली खामेनेई को मारने का फैसला कर लिया था. यह फैसला प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक बहुत छोटी और गोपनीय बैठक में लिया गया था। शुरू में योजना थी कि यह काम छह महीने बाद यानी मध्य 2026 में किया जाएगा लेकिन बाद में हालात इतने तेजी से बदल गए. अमेरिका और इजरायल ने मिलकर फरवरी के अंत में ही हमला शुरू कर दिया. इस हमले के पहले ही घंटों में खामेनेई की मौत हो गई, जो दुनिया के इतिहास में किसी देश के सबसे बड़े नेता को हवाई हमले से मारने का पहला मामला बन गया है. अब यह संयुक्त हवाई अभियान एक हफ्ते से ज्यादा चल चुका है. पूरे क्षेत्र में युद्ध की आग फैल गई है। नवंबर 2025 में क्या हुआ और नेतन्याहू ने क्यों लिया यह फैसला रक्षा मंत्री काट्ज ने इजरायल के चैनल 12 टीवी को बताया कि नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने एक बहुत छोटे समूह के साथ बैठक बुलाई थी. इसमें सिर्फ चुनिंदा लोग थे. उस बैठक में नेतन्याहू ने साफ कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को खत्म करना हमारा लक्ष्य है।  उस समय योजना बनाई गई कि यह ऑपरेशन मध्य 2026 में किया जाएगा क्योंकि इजरायल को लगता था कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइलें इजरायल के लिए अस्तित्व का खतरा बन चुकी हैं. इजरायल का मानना है कि ईरान हथियार बना रहा है जो इजरायल को पूरी तरह नष्ट कर सकता है. इसलिए इस खतरे को जड़ से खत्म करने का फैसला किया गया। जनवरी 2026 में योजना क्यों बदली गई और US को कब बताया गया काट्ज ने आगे बताया कि दिसंबर के बाद जनवरी 2026 में ईरान में बड़े-बड़े विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. ईरान के लोग अपने नेता और सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए थे. इजरायल को डर था कि यह दबाव झेल रहे शासक किसी भी समय इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर हमला कर सकते हैं। इसलिए योजना को तेज कर दिया गया. इजरायल ने इस पूरे प्लान को अमेरिका को बताया. दोनों देशों ने मिलकर तैयारी शुरू कर दी. रक्षा मंत्री ने कहा कि हम नहीं चाहते थे कि ईरान पहले हमला कर दे इसलिए प्लान को बदला गया। 28 फरवरी 2026 को शनिवार के दिन अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर बड़ा हवाई अभियान शुरू किया. पहले ही कुछ घंटों में खामेनेई को उनके घर और दफ्तर वाले इलाके में मार दिया गया. यह हमला इतना सटीक था कि ईरान के कई बड़े सैन्य नेता भी उसी में मारे गए। हमले ने पूरे क्षेत्र को युद्ध में झोंक दिया अब यह अमेरिका-इजरायल का संयुक्त हवाई हमला एक हफ्ते से ज्यादा चल रहा है. शुरू के दिनों में ही ईरान के कई बड़े नेता मारे गए जिससे ईरान का शासन हिल गया है. ईरान ने जवाब में इजरायल पर मिसाइलें दागीं गल्फ देशों और इराक में भी हमले किए। इजरायल ने ईरान के करीबी सहयोगी हिजबुल्लाह पर लेबनान में हमले तेज कर दिए हैं. पूरा मध्य पूर्व अब युद्ध की आग में जल रहा है. ईरान की सरकार ने कहा है कि वह लड़ाई जारी रखेगी. लेकिन इजरायल का कहना है कि हमारा मकसद सिर्फ खतरा खत्म करना है। इजरायल के असली लक्ष्य क्या हैं – परमाणु कार्यक्रम और शासन बदलना इजरायल ने साफ कहा है कि उसका मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट को पूरी तरह खत्म करना है. इजरायल को लगता है कि ईरान ये हथियार बना लेगा तो इजरायल के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं बचेगी। इसके अलावा इजरायल चाहता है कि ईरान में शासन बदल जाए यानी वहां मौजूदा सरकार गिर जाए और एक नई सरकार आए जो शांतिप्रिय हो. रक्षा मंत्री काट्ज ने कहा कि अगर ईरान नया नेता चुनता है तो वह भी इजरायल का निशाना बनेगा क्योंकि इजरायल किसी भी ऐसे नेता को बर्दाश्त नहीं करेगा जो इजरायल को नष्ट करने की सोचे। ईरान की स्थिति और भविष्य में क्या हो सकता है ईरान ने अब तक कोई संकेत नहीं दिया है कि वह सत्ता छोड़ेगा या बातचीत करेगा. उल्टे ईरान ने इजरायल और अमेरिका पर कई जगहों पर हमले किए हैं जिससे तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है. गल्फ के देश डर में हैं. इजरायल और अमेरिका का कहना है कि अभियान तब तक चलेगा जब तक ईरान का परमाणु खतरा पूरी तरह खत्म न हो जाए. यह पूरा मामला दशकों पुरानी इजरायल-ईरान दुश्मनी का सबसे बड़ा मोड़ है।  

डीजीसीए से एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद शुरू हो सकेंगे फ्लाइट ऑपरेशंस

लखनऊ योगी सरकार के महत्वाकांक्षी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) परियोजना को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। एयरपोर्ट को ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी की ओर से सिक्योरिटी वेटिंग क्लीयरेंस (Security Vetting Approval) मिल गया है। यह प्रक्रिया एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्थाओं की विस्तृत जांच के बाद पूरी की जाती है। इस मंजूरी के साथ ही अब डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) से एयरोड्रम लाइसेंस मिलने का रास्ता साफ हो गया है, जिसके बाद यहां से फ्लाइट ऑपरेशंस शुरू किए जा सकेंगे। प्रदेश सरकार की प्राथमिकता वाली इस परियोजना को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में तेजी से आगे बढ़ाया गया है। योगी सरकार का लक्ष्य जेवर एयरपोर्ट को देश के सबसे आधुनिक और बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल करना है, जो उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभाएगा। सुरक्षा मानकों की हुई विस्तृत जांच यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यीडा) के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने बताया कि एयरपोर्ट पर फ्लाइट संचालन शुरू होने से पहले सुरक्षा मानकों का परीक्षण अनिवार्य होता है। इसके लिए ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (बीसीएएस) की टीम एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी प्रणाली, एक्सेस कंट्रोल, यात्रियों और कार्गो की जांच व्यवस्था सहित कई पहलुओं का निरीक्षण करती है। सभी मानकों के अनुरूप पाए जाने पर ही सिक्योरिटी वेटिंग क्लीयरेंस दिया जाता है। डीजीसीए लाइसेंस के बाद उड़ानें होंगी शुरू सिक्योरिटी वेटिंग अप्रूवल का मतलब है कि एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था उड़ान संचालन के लिए सुरक्षित मानी गई है। इसके बाद ही फ्लाइट शुरू होने की अंतिम प्रक्रिया आगे बढ़ती है। सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद अगला चरण डीजीसीए द्वारा एयरोड्रम लाइसेंस जारी करना होता है। यह लाइसेंस मिलने के बाद ही किसी एयरपोर्ट से व्यावसायिक उड़ानों का संचालन संभव होता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने जेवर एयरपोर्ट को राज्य के सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के रूप में विकसित किया है। यह एयरपोर्ट न केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लिए एक महत्वपूर्ण एविएशन हब के रूप में उभर रहा है। सरकार का मानना है कि इसके शुरू होने से प्रदेश में निवेश, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और व्यापार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। साथ ही हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में होगा शामिल योगी सरकार का लक्ष्य जल्द से जल्द नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का शुभारंभ कर उसे ऑपरेशनल करने का है। इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को कई चरणों में विकसित किया जा रहा है। पूर्ण रूप से विकसित होने के बाद यह देश ही नहीं एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल हो जाएगा। इसकी क्षमता प्रतिवर्ष करोड़ों यात्रियों को संभालने की होगी और यह उत्तर प्रदेश को वैश्विक एविएशन नेटवर्क से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

किदांबी श्रीकांत: परिवार की प्रेरणा और कोच की सलाह से बने भारत के स्टार शटलर

नई दिल्ली किदांबी श्रीकांत की गिनती विश्व के सर्वश्रेष्ठ बैडमिंटन खिलाड़ियों में होती है, जिन्होंने अपनी तेज आक्रामक खेल शैली से भारत को कई अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में गौरव दिलाया है। साल 2017 में 4 सुपर सीरीज खिताब जीतने वाले किदांबी ओलंपिक में भी देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 7 फरवरी 1993 को आंध्र प्रदेश के किसान परिवार में जन्मे श्रीकांत ने बड़े भाई को देखकर 7 साल की उम्र में रैकेट थामा था। उनके भाई नंद गोपाल किदांबी भी नामी बैडमिंटन खिलाड़ी रहे, जिनके नक्शेकदम पर चलते हुए किदांबी श्रीकांत ने इसी खेल में अपने करियर को बनाने का फैसला किया। श्रीकांत दो साल की ट्रेनिंग के लिए अपने भाई के साथ विशाखापत्तनम के साई सेंटर में रहने लगे। जल्द ही श्रीकांत ने पुलेला गोपीचंद एकेडमी में ट्रेनिंग शुरू कर दी, जहां उन्होंने कड़ी मेहनत की। साल 2011 में उन्होंने कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता, जिसके बाद ऑल इंडिया जूनियर इंटरनेशनल बैडमिंटन चैंपियनशिप में 2 स्वर्ण पदक अपने नाम किए। किदांबी को युगल खिलाड़ी के तौर पर सफलता मिलने लगी थी, लेकिन हेड कोच की सलाह पर एकल मुकाबलों में उतरने लगे। कोच की सलाह बेहद काम आई और साल 2013 में उन्होंने थाईलैंड ओपन का खिताब जीत लिया। श्रीकांत ने साल 2014 में चीन के ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट लिन डैन को उनके ही देश में शिकस्त देकर चाइना ओपन का खिताब अपने नाम किया। साल 2015 में स्विस ओपन ग्रां प्री गोल्ड में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष बने। 2016 रियो ओलंपिक में किदांबी श्रीकांत ने देश का प्रतिनिधित्व करते हुए मेंस सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई, लेकिन खिताब नहीं जीत सके। साल 2017 किदांबी श्रीकांत के लिए बेहद खास रहा, जब उन्होंने पांच सुपर सीरीज के फाइनल में जगह बनाई और चार खिताब जीते। इसी के साथ वह एक कैलेंडर ईयर में चार खिताब जीतने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में चोंग वेई, लिन डैन और चेन लोंग जैसे नामी खिलाड़ियों के साथ शामिल हो गए। इसी साल नवंबर में फ्रेंच ओपन के दौरान किदांबी के घुटने में चोट लग गई। नेशनल चैंपियनशिप के दौरान यह काफी बढ़ भी गई, लेकिन श्रीकांत ने शानदार वापसी करते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में गोल्ड जीतकर वर्ल्ड रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया। वह इस मुकाम तक पहुंचने वाले पहले भारतीय पुरुष शटलर बने, लेकिन इसके बाद किदांबी की फॉर्म में गिरावट आने लगी। वह 2020 टोक्यो ओलंपिक में जगह बनाने से भी चूक गए। साल 2021 में किदांबी ने बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप में इतिहास रचते हुए पुरुष एकल में सिल्वर जीता। इसके बाद मई 2022 में थॉमस कप में युवा भारतीय टीम का नेतृत्व करते हुए खिताब जीता। राष्ट्रमंडल खेल 2022 के सिंगल्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के साथ मिश्रित टीम इवेंट में सिल्वर अपने नाम किया। बैडमिंटन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए किदांबी श्रीकांत को साल 2015 में ‘अर्जुन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया, जिसके बाद साल 2018 में पद्म श्री खिताब से नवाजा गया।  

400 से अधिक एसटीपीआई यूनिट्स और 100 इन्क्यूबेटर का लक्ष्य

लखनऊ उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित स्किलिंग को बढ़ावा देने की दिशा में योगी सरकार लगातार नए कदम उठा रही है। स्टार्टअप नीति और एआई प्रज्ञा प्रोग्राम के माध्यम से प्रदेश में नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में तैयारी जारी है। सरकार का लक्ष्य है कि एआई और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में लगभग 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर उपलब्ध कराए जाएं। स्टार्टअप नीति, एआई स्किलिंग और तकनीकी निवेश के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश के कानपुर, लखनऊ, नोएडा और वाराणसी जैसे शहरों में स्टार्टअप गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे एमएसएमई क्षेत्र को भी नई दिशा मिल रही है और युवा उद्यमिता को बढ़ावा मिल रहा है। प्रदेश में टेक्नोलॉजी आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) की लगभग 400 यूनिट्स सक्रिय हैं। इसके साथ ही प्रदेश में 100 से अधिक स्टार्टअप इन्क्यूबेटर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन इन्क्यूबेटरों के माध्यम से युवाओं को अपने नवाचार और तकनीकी विचारों को व्यवसाय में बदलने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी वैश्विक तकनीकी कंपनियों के साथ साझेदारी के माध्यम से युवाओं को आधुनिक डिजिटल स्किल्स और एआई तकनीक की ट्रेनिंग दी जा रही है। उत्तर प्रदेश का इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र भी तेजी से विस्तार कर रहा है। देश में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में लगभग 65 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रदेश एक बड़े विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। इससे स्टार्टअप और एमएसएमई क्षेत्र को भी नई ऊर्जा मिल रही है। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण से जुड़ी सप्लाई चेन में कई छोटे और मध्यम उद्योगों को नए अवसर मिल रहे हैं, जिससे रोजगार के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। युवाओं को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने के लिए प्रदेश के 49 आईटीआई संस्थानों में एआई लैब स्थापित की जा रही हैं। इन प्रयोगशालाओं के माध्यम से छात्रों को एआई, डेटा एनालिटिक्स और उन्नत डिजिटल तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना और उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बनाना है। आईटी और तकनीकी क्षेत्र में बढ़ते निवेश का असर निर्यात पर भी दिखाई दे रहा है। प्रदेश से आईटी-आईटीईएस क्षेत्र का निर्यात लगातार बढ़ता जा रहा है, जो वर्तमान में 44 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश तेजी से डिजिटल और तकनीकी नवाचार के केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।

पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सारस पक्षी और वेटलैंड्स के संरक्षण के लिए किया जाएगा प्रेरित

लखनऊ योगी सरकार प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस (क्रेन) के संरक्षण और इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए सारस सर्किट की स्थापना कर रही है। सारस सर्किट का विकास प्रदेश के मैनपुरी और इटावा जिलों के वेटलैंड्स में किया जा रहा है। जिसके तहत मैनपुरी के किर्थुआ, सहस, कुर्रा जरावां, सौज एवं समन के साथ इटावा के सरसई नावर और परौली रामायण वेटलैंड एरिया में सारस सर्किट विकसित किया जा रहा है। सारस सर्किट में सारस पक्षी के संरक्षण के साथ इको टूरिज्म की गतिविधियों को भी शामिल किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य सारस पक्षी और वेटलैंड्स संरक्षण के साथ स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा देना है। यह स्थानीय लोगों को आय के अवसर उपलब्ध करवाएगा और सारस पक्षी और वेटलैंड्स के संरक्षण के लिए भी प्रेरित करेगा। इन परियोजनाओं का विकास ईको-टूरिज्म विकास बोर्ड के माध्यम से प्रदेश का वन विभाग कर रहा है।  टूरिस्ट सुविधाओं के विकास से आएगा आकर्षण दुनिया में सबसे लंबी उड़ान के लिए जाना जाने वाला सारस पक्षी, उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी है। इसका आवास और प्रजनन क्षेत्र विशेषतौर पर राज्य के मैनपुरी, इटावा, एटा, अलीगढ़ की वेटलैड्स में है। जिसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार सारस पक्षी के संरक्षण के लिए सारस सर्किट का विकास कर रही है। जहां प्रदेश का वन विभाग, यूपी ईको टूरिज्म विकास बोर्ड के माध्यम से क्षेत्र के उथले जलाशयों, तालाबों और अन्य वेटलैड्स को संरक्षित कर सारस पक्षी के अनुकूल बनाने का प्रयास कर रहा है। साथ ही क्षेत्र में ईको टूरिज्म की गतिविधियों को भी विकसित किया जा रहा है। इस क्रम में मैनपुरी और इटावा जिलों के सारस सर्किट में प्रवेश द्वार, व्यू पॉइंट, डेक एवं बोटिंग स्पॉट, बटरफ्लाई गार्डन, सोलर साइट लाइटिंग, इंटरप्रिटेशन सेंटर, पार्किंग जैसी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। साथ ही सारस सर्किट में पर्यटकों की सुविधा के लिए सूचना केंद्र, ईको-टॉयलेट ब्लॉक, पार्किंग, इंटरैक्टिव साइनेज, फूड कियोस्क और ओडीओपी व स्मृति चिन्ह की दुकानें भी विकसित की जाएंगी। ये सुविधाएं पर्यटकों को सारस के प्राकृतिक आवास को देखने और समझने का अवसर प्रदान करेंगी। स्थानीय लोगों और पर्यटकों में बढ़ेगी पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता योगी सरकार की यह पहल न केवल सारस (क्रेन) और अन्य पक्षियों जैसे- ग्रे हेरॉन, ओपन-बिल्ड स्टॉर्क आदि की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी, बल्कि क्षेत्र के वेटलैंड्स के संरक्षण को भी बढ़ावा देगी। यह इन क्षेत्रों में भू-जल स्तर में वृद्धि के साथ ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों को कम करने और सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा। साथ ही इन क्षेत्रों में इको टूरिज्म की गतिविधियों के विकास से स्थानीय समुदाय के लोगों को आय और रोजगार के अवसर मिलेंगे। इससे स्थानीय लोगों और घूमने के लिए आने वाले पर्यटकों में भी पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता में बढ़ोतरी होगी। सारस पक्षी को उसके प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षा और संरक्षण प्रदान कर योगी सरकार क्षेत्र की जैव विविधता को संजोने का अनूठा प्रयास कर रही है। ये परियोजनाएं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सतत विकास की अवधारणा को सफल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

राहु-मंगल-बुध का खतरनाक योग, इन 3 राशियों को रहना होगा खास ध्यान!

इंदौर आसमान में ग्रहों की स्थिति में बड़ा उलटफेर हुआ है. कुंभ राशि में राहु, बुध और मंगल का एक साथ आना ज्योतिष शास्त्र में अशुभ संयोग माना जा रहा है. 11 अप्रैल तक का यह समय कई लोगों के लिए परीक्षा की घड़ी जैसा है. ज्योतिष के जानकारों का मानना है कि जब भ्रम के कारक राहु के साथ ऊर्जा और आवेश के प्रतीक मंगल और बुद्धि के स्वामी बुध मिलते हैं, तो इंसान का सही-गलत का फैसला लेने का विवेक डगमगाने लगता है. इस दौरान आपको अपनी वाणी और फैसलों पर बहुत सोच-समझकर काम करने की जरूरत है।  क्यों है यह समय चुनौतीपूर्ण? कुंभ राशि में इन ग्रहों की मौजूदगी मानसिक तनाव और गलत निर्णयों को बढ़ावा दे रही है. मंगल के प्रभाव से जहां गुस्सा बढ़ सकता है, वहीं बुध की युति बुद्धि को भ्रमित कर सकती है. नतीजतन, आप जो भी योजनाएं बनाएंगे, उनमें रुकावटें आ सकती हैं.  उम्मीद के मुताबिक नतीजे न मिलने से निराशा हो सकती है।  राशियों पर असर  कर्क राशि: आपके लिए यह समय उतार-चढ़ाव भरा रहेगा. किसी भी कागजी काम या निवेश में सावधानी बरतें. पुराने दोस्तों से विवाद हो सकता है।  कन्या राशि: करियर के मोर्चे पर अचानक रुकावटें आ सकती हैं. ऑफिस में सीनियर के साथ तालमेल बिठाकर चलें. अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें।  धनु राशि: इस दौरान बिना सोचे-समझे किसी को उधार न दें, न ही कोई बड़ा फैसला लें. वाद-विवाद से दूर रहना ही आपकी भलाई में है।  मेष, वृषभ, मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ और मीन: इन राशियों के लिए भी यह समय मिला-जुला रहेगा. किसी को भी अपनी बात कहने से पहले दो बार सोचें. खासकर घर के बड़े-बुजुर्गों की सेहत का ध्यान रखें।  बचाव के लिए क्या करें? इस दौरान मन में नकारात्मक विचार आ सकते हैं. इससे बचने के लिए  किसी से भी बहस करने से बचें.कोई भी नया काम शुरू करने से पहले किसी अनुभवी व्यक्ति से सलाह जरूर लें. रोजाना सुबह भगवान गणेश की पूजा करें और पक्षियों को दाना डालें. इससे मानसिक स्पष्टता बनी रहेगी। 

कविंद्र गुप्ता बने हिमाचल के राज्यपाल, 13 साल की उम्र में RSS से जुड़े, 13 महीने जेल में रहे; शिव प्रताप शुक्ल को तेलंगाना का गवर्नर बनाया

शिमला  लद्दाख के उप-राज्यपाल कविंद्र गुप्ता हिमाचल प्रदेश के नए गवर्नर नियुक्त किए गए। हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को तेलंगाना का गवर्नर बनाया गया है। राष्ट्रपति कार्यालय ने गुरुवार देर रात इस बाबत आदेश जारी किए। लद्दाख और हिमाचल समेत 9 राज्यों में गवर्नर बदले गए। यह फेरबदल पश्चिम बंगाल के गवर्नर डॉ. सीवी आनंद बोस के इस्तीफा देने के बाद किया गया। हिमाचल के नए गवर्नर कविंद्र गुप्ता जम्मू-कश्मीर विधानसभा के स्पीकर और जम्मू के मेयर रह चुके हैं। इसके बाद उन्हें जुलाई 2025 में लद्दाख का उप-राज्यपाल बनाया गया। उन्होंने पिछले साल 18 जुलाई को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के तीसरे उप राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। उन्होंने करीब 9 महीने तक इस पद सेवाएं दी और बीते कल अपने पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद उन्हें हिमाचल प्रदेश के गवर्नर की जिम्मेदारी दी गई है। 3 बार मेयर रह चुके जम्मू शहर के जानीपुर निवासी 66 वर्षीय कुलविंद्र गुप्ता निरंतर 3 बार जम्मू के महापौर भी रह चुके हैं। उन्होंने BJP की राज्य इकाई के महासचिव के तौर पर भी काम किया था।इसके अलावा 1993 से 1998 तक वह लगातार दो बार भारतीय जनता युवा मोर्चा की जम्मू कश्मीर इकाई के अध्यक्ष भी रहे। कविंद्र गुप्ता साल 2014 के विधानसभा चुनाव में गांधी नगर सीट से पहली बार MLA चुने गए थे। इसके बाद, उन्हें विधानसभा स्पीकर चुना गया। उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत विश्व हिंदू परिषद के सेक्रेटरी के तौर पर काम करते हुए हुई थी और इमरजेंसी के दौरान करीब 13 महीने वह जेल में भी रहे थे। अब तेलंगाना गवर्नर का जिम्मा संभालेंगे शुक्ल वहीं, हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुल्क को तेलंगाना गवर्नर का जिम्मा दिया है। शुल्क ने 18 फरवरी 2023 को हिमाचल के राज्यपाल के तौर पर शपथ ली थी। उन्होंने लगभग 3 साल तक हिमाचल गवर्नर के तौर पर सेवाएं दी। इन प्रदेशों में भी बदले गवर्नर राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी आदेशों के अनुसार- तरनजीत सिंह संधु को दिल्ली का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। तेलंगाना के राज्यपाल जिश्नु देव वर्मा को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। नंद किशोर यादव को नगालैंड और लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया। तमिलनाडू के राज्यपाल आरएन रवि अब से पश्चिम बंगाल और केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर तमिलनाडु के राज्यपाल का काम संभालेंगे, जबकि दिल्ली के राज्यपाल वीके सक्सेना को लद्दाख का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

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