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यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि नगर निगम को उसका उचित हिस्सा मिले, की जाएगी गौशालाओं की मदद: रेखा गुप्ता

नई दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने मंत्रिमंडल के साथ रविवार को बवाना स्थित गोपाल गोसदन हरेवली गौशाला का दौरा किया और वहां उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण किया तथा गौशालाओं से संबंधित समस्याओं का समाधान किया। इस दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि नगर निगम को उसका उचित हिस्सा मिले। उन्होंने पिछली सरकारों की गलतियों से बचने की शपथ ली। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, “हम पिछली सरकारों के तरीके का पालन नहीं करेंगे, जिन्होंने नगर निगम को पैसे का उचित हिस्सा नहीं दिया। मैं यह सुनिश्चित करूंगी कि नगर निगम को उसका हिस्सा मिले और गौशालाओं का काम बिना किसी रुकावट के चलता रहे।” उन्होंने राष्ट्र की प्रगति और परंपराओं के संरक्षण के महत्व पर भी विचार व्यक्त किए। धार्मिक और सांस्कृतिक संरक्षण को दिल्ली सरकार की प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कहा, “आजादी के 70 साल बाद भी हमारा देश बर्बादी की स्थिति में था। हमारे सनातन धर्म में जो पूजनीय था, उसे भी नजरअंदाज किया गया। सभी तीर्थ स्थल, सभी गौशालाएं और हमारे भगवान के प्रति हमारी भक्ति, को किसी न किसी तरह नजरअंदाज क‍िया गया। 2014 के बाद एक नई सुबह आई, जिसने सनातन में आस्था रखने वालों के दिलों में उम्मीद जगाई।” वहीं भाजपा सांसद योगेंद्र चांदोलिया ने भी कार्यक्रम में बोलते हुए गौशालाओं के प्रति पूर्ववर्ती सरकार के रुख की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट हो चुका है कि किस तरह दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम ने अतीत में गौशालाओं के साथ भेदभाव किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से गौशालाओं के लिए आवंटित धनराश‍ि को जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि दिल्ली सरकार की ओर से गौशालाओं को सशक्‍त बनाया जाएगा।

ईडी ने दिल्ली के एयरपोर्ट से 3,558 करोड़ रुपये के घोटाले के मास्टरमाइंड को किया गिरफ्तार

नई दिल्ली दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रवर्तन निदेशालय ने 3,558 करोड़ रुपये के घोटाले के कथित मास्टरमाइंड सुखविंदर सिंह खरूर और डिंपल खरूर को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपित देश छोड़कर भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन लुक आउट सर्कुलर के चलते उन्हें एयरपोर्ट पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। क्या है घोटाले का मामला? ईडी के अधिकारियों के अनुसार, यह गिरफ्तारी व्यूनाउ मार्केटिंग सर्विसेज लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई है। गिरफ्तारी के बाद जालंधर की एक अदालत ने दोनों आरोपियों को ईडी की हिरासत में भेज दिया है, ताकि उनसे और जानकारी मिल सके। क्लाउड पार्टिकल घोटाले का खुलासा यह घोटाला ‘क्लाउड पार्टिकल स्कैम’ के नाम से जाना जा रहा है। इस घोटाले में निवेशकों को झूठे ‘सेल एंड लीज-बैक’ (SLB) मॉडल के जरिए फंसाया गया। ईडी ने इस मामले की जांच उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक प्राथमिकी के आधार पर शुरू की थी। ईडी की जांच में यह सामने आया कि सुखविंदर सिंह खरूर ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इस बड़े घोटाले को अंजाम दिया। इसके तहत निवेशकों से क्लाउड पार्टिकल टेक्नोलॉजी के नाम पर भारी रकम इकट्ठी की गई, जबकि इसका असली व्यापार या तो था ही नहीं या फिर इसे बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया। निवेशकों से ठगे गए 3,558 करोड़ रुपये ईडी के अनुसार, इस फर्जी निवेश योजना के जरिए करीब 3,558 करोड़ रुपये की रकम निवेशकों से ठगी गई। यह रकम बाद में गैर-व्यावसायिक कार्यों में इस्तेमाल की गई। इस पूरी स्कीम में निवेशकों को गुमराह किया गया और उन्हें धोखे में रखा गया।  

ट्रैफिक मैनेजमेंट से हादसों तक सबका होगा समाधान, दिल्ली पुलिस ने बनाया 100 दिन वाला ऐक्शन प्लान

नई दिल्ली दिल्ली पुलिस ने राजधानी में ट्रैफिक मैनेजमेंट में सुधार लाने और सड़क हादसों में कमी लाने के लिए 100 दिन का ऐक्शन प्लान बनाया है। सूत्रों ने बताया कि लागू किए गए इस ऐक्शन प्लान का मकसद यातायात की भीड़ को कम करना, वाहन चालकों और पैदल यात्रियों दोनों के बीच ट्रैफिक नियमों के अनुपालन को बढ़ाना, सड़क दुर्घटनाओं को कम करना और समन्वित अंतर-एजेंसी प्रयासों के माध्यम से अतिक्रमण हटाना शामिल है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस विभाग ने इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए 25 प्रमुख उपायों की रूपरेखा तैयार की है। इन उपायों में बस स्टैंडों को अधिक उपयुक्त स्थानों पर शिफ्ट करना, सड़कों की मरम्मत और उनका पुनर्निर्माण करना, सड़क चिन्हों को नया रूप देना और उचित संकेत और जेब्र क्रॉसिंग बनाना शामिल है। इस योजना में गड्ढों और पानी के रिसाव को दूर करने के लिए जल निकासी व्यवस्था को ठीक करना, कचरा डंप और अनधिकृत डंपिंग यार्ड को हटाना या शिफ्ट करना और सिविक एजेंसियों द्वारा नागरिक कार्यों को समय पर पूरा करना भी शामिल है। इसके अलावा, ऐक्शन प्लान में सड़क पर कटों को खोलना और बंद करना, साप्ताहिक बाजारों का बेहतर प्रबंधन और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा तय वेंडिंग जोन का आवंटन शामिल है। अन्य कदमों में अंडरपास और फुटओवर ब्रिज का उचित उपयोग सुनिश्चित करना और जहां आवश्यक हो, सड़कों या सेंट्रल वर्ज को बाधित करने वाले धार्मिक ढांचों को शिफ्ट करना हटाना शामिल है। ऐक्शन प्लान में ट्रैफिक नियमों से जुड़े रूल्स और रेगुलेशंस को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की भी सिफारिश की गई है। इनके अलावा हाईट बैरियर लगाना, बोलार्ड लेन डिसिप्लिन सिस्टम लागू करना, सेंट्रल वर्ज पर ग्रिल लगाना, विजिबिलिटी को बाधित करने वाले पेड़ों और झाड़ियों की नियमित छंटाई करना तथा टैक्सियों के लिए तय पार्किंग स्थान बनाना शामिल है। अधिकारी ने कहा कि दिल्ली पुलिस इस ऐक्शन प्लान को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य सभी हितधारकों के बीच तत्परता को बढ़ावा देना है ताकि पूरी दिल्ली में सड़क व्यवस्था और सुरक्षा में सुधार हो सके। हालांकि, अधिकारियों ने ऐक्शन प्लान को लागू करने में कई चुनौतियां होने की बात मानी है। इनमें खराब सड़क डिजाइन, बस स्टैंड और रैन बसेरों की अनुचित स्थिति, ट्रैफिक में बाधा डालने वाले आवारा पशु और अच्छी तरह से बनाए गए सेंट्रल वर्ज की कमी से उत्पन्न होने वाली समस्याएं शामिल हैं। अतिरिक्त चुनौतियों में गड्ढों और अवरोधों से भरी असुरक्षित सड़कें, पैदल यात्री क्रॉसिंग के लिए अपर्याप्त सुविधाएं, अपर्याप्त संकेत और आमतौर पर अनुशासनहीन सड़क उपयोगकर्ता शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद, व्यापक उपायों से शहर की यातायात स्थितियों में काफी सुधार होगा और सार्वजनिक सुरक्षा बढ़ेगी।

महिला समृद्धि योजना के दौरान आगामी 8 मार्च को ही खाते में पैसे भेजने को लेकर योजना बना रही दिल्ली सरकार

नई दिल्ली दिल्ली सरकार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आठ मार्च को महिला सम्मान योजना की शुरुआत कर सकती है। उसी दिन कुछ महिलाओं के खाते में पैसे भी ट्रांसफर किए जा सकते हैं। भाजपा ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान अपने घोषणा पत्र में योजना के तहत महिलाओं को ढाई हजार रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया था। सूत्रों के अनुसार, आठ मार्च को इस योजना के लिए महिलाओं के पंजीकरण की शुरुआत के साथ कुछ महिलाओं को यह राशि जारी भी की जा सकती है। हालांकि, दिल्ली सरकार की ओर से अभी तक इसपर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली सरकार आगामी 8 मार्च को इस योजना को लेकर एक बड़ा आयोजन दिल्ली में करने की योजना बना रही है। इस दौरान भाजपा का शीर्ष नेतृत्व भी मौजूद रह सकता है। इस कार्यक्रम में अलग-अलग विधानसभाओं से महिलाओं को आमंत्रित किया जाएगा। दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने के बाद से भाजपा महिला सम्मान योजना को तय समय पर पूरा करने की कवायद में जुट गई है। इसे लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की वित्त विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक भी हो चुकी है। इस बैठक में योजना की योग्यता और शर्तों पर चर्चा हुई थी। अधिकारियों को उसके आधार पर प्रस्ताव बनाने को कहा गया था। इसके साथ ही दूसरे राज्यों में जहां पहले से इस तरह की योजनाएं चल रही हैं उनका भी अध्ययन करने का निर्देश दिया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता कई मौके पर कह चुकी हैं कि पिछली सरकार ने राज्य की वित्तीय स्थिति को खराब कर रखा है, लेकिन हमने जो वादा किया है उसे पूरा करेंगे। किसे और कैसे मिलेगा लाभ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को इस योजना का लाभ देने की तैयारी है। संभावना है कि जो महिलाएं करदाता हैं या पेंशन पा रही हैं या सरकारी योजना के तहत उन्हें आर्थिक लाभ मिल रहा है वो इसके दायरे में नहीं आएंगी। योजना की पात्र महिलाओं से इससे जुड़े दस्तावेज मांगे जाएंगे और सत्यापन के बाद भी उन्हें इसका लाभ मिलेगा।

दिल्ली सरकार इस दिन से महिलाओं के खातों में डालेगी 2500 रुपये, जल्द करेगी नियम व शर्तों की घोषणा

नई दिल्ली दिल्ली सरकार 8 मार्च को महिला सम्मान योजना की शुरुआत कर सकती है। सूत्रों ने बताया कि 8 मार्च को महिलाओं के खातों में 2500 रुपये जमा किए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की मौजूदगी में महिला सम्मान योजना की शुरुआत की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, इस योजना की शर्तें और नियम आने वाले दिनों में आधिकारिक रूप से लागू कर दिए जाएंगे। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जेपी नड्डा की मौजूदगी में एक बैठक आयोजित कर महिलाओं की मौजूदगी में इसकी शुरुआत की जाएगी। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने होली से पहले महिलाओं को 2500 रुपये देने की आश्वासन दिया था। उल्लेखनीय है कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल ही में आश्वासन दिया था कि भाजपा सरकार महिलाओं को 2500 रुपये मासिक सहायता देने का अपना वादा पूरा करेगी। शपथ ग्रहण समारोह के लिए रामलीला मैदान रवाना होने से पहले अपने आवास के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने यह बात कही थी।

पूर्व छात्र नेता शेहला राशिद शोरा को बड़ी राहत, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को देशद्रोह का केस वापस लेने की मंजूरी दी

नई दिल्ली दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने JNU (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) की पूर्व छात्र नेता शेहला राशिद शोरा को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने साल 2019 के देशद्रोह मामले में उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस लेने की दिल्ली पुलिस की अर्जी स्वीकार कर ली है। शेहला के खिलाफ यह मामला भारतीय सेना को लेकर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक ट्विट्स करने के बाद दर्ज किया गया था। इस बारे में जानकारी देते हुए पुलिस सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि अदालत ने दिल्ली पुलिस को JNU की पूर्व उपाध्यक्ष शेहला राशिद शोरा के खिलाफ सेना पर उनके ट्वीट के लिए मामला वापस लेने की अनुमति दे दी है। मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अनुज कुमार सिंह ने अभियोजन पक्ष द्वारा दायर एक आवेदन पर 27 फरवरी को यह आदेश पारित किया। शेहला के खिलाफ यह मामला देशद्रोह समेत धर्म, भाषा, नस्ल और जन्म स्थान आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और दंगे भड़काने जैसे विभिन्न अपराधों के लिए दर्ज किया गया था। इन आरोपों में अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश पर LG ने वापस ली मंजूरी पुलिस ने केस वापस लेने की अपील तब की जब दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने शोरा के खिलाफ मुकदमा चलाने की अपनी मंजूरी वापस ले ली। एलजी का यह आदेश स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश पर आया। दिल्ली पुलिस की तरफ से कोर्ट में दिए गए आवेदन में बताया गया कि, ‘दिल्ली के उपराज्यपाल ने स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश को मंजूरी दे दी है…।’ उपराज्यपाल ने यह मंजूरी 23 दिसंबर, 2024 को दी थी। शेहला ने सेना को लेकर किया था आपत्तिजनक ट्वीट शेहला ने 18 अगस्त, 2019 को किए गए अपने ट्वीट में भारतीय सेना पर कश्मीर में घरों में घुसने और स्थानीय लोगों को यातना देने का आरोप लगाया था। हालांकि सेना ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया था। उनकी इसी पोस्ट को लेकर अलख आलोक श्रीवास्तव नाम के शख्स ने नई दिल्ली के स्पेशल सेल पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ ट्वीट के माध्यम से विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और सद्भाव बिगाड़ने वाले कृत्यों में शामिल होने को लेकर मामला दर्ज किया गया था। एलजी कार्यालय ने कहा कि अभियोजन स्वीकृति का प्रस्ताव दिल्ली पुलिस द्वारा पेश किया गया था और दिल्ली सरकार के गृह विभाग द्वारा इसका समर्थन किया गया था।

15 साल पुराने वाहनों पर सरकार का बड़ा फैसला, 31 मार्च के बाद दिल्ली के पेट्रोल पंपों पर नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

 नई दिल्ली  दिल्ली की सरकार ने वाहनों को लेकर शनिवार को एक बड़ा फैसला लिया। जिसमें पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा (Manjinder Singh Sirsa) ने कहा कि 31 मार्च के बाद दिल्ली के पेट्रोल पंपों पर 15 साल से अधिक पुराने वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाएगा। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने शनिवार को घोषणा की कि दिल्ली सरकार 31 मार्च के बाद शहर भर के ईंधन स्टेशनों पर 15 साल से अधिक पुराने वाहनों को पेट्रोल देना बंद कर देगी। प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम-सिरसा राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण से निपटने के उपायों पर चर्चा के लिए अधिकारियों के साथ एक बैठक के बाद, सिरसा ने कहा कि सरकार वाहनों से होने वाले उत्सर्जन और प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम उठा रही है। बैठक में पुराने वाहनों पर प्रतिबंध, अनिवार्य एंटी-स्मॉग उपाय और इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन में बदलाव सहित प्रमुख नीतिगत निर्णयों पर ध्यान केंद्रित किया गया. बैठक के बाद सिरसा ने कहा, “हम पेट्रोल पंपों पर गैजेट लगा रहे हैं जो 15 साल से ज़्यादा पुराने वाहनों की पहचान करेंगे और उन्हें कोई ईंधन नहीं दिया जाएगा.” उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार इस फ़ैसले के बारे में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय को सूचित करेगी. पुराने वाहनों को ईंधन की आपूर्ति को प्रतिबंधित करने के अलावा, सिरसा ने घोषणा की कि राजधानी में सभी ऊंची इमारतों, होटलों और वाणिज्यिक परिसरों में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए एंटी-स्मॉग गन लगाना अनिवार्य है. इसके अलावा, उन्होंने कहा कि दिल्ली में लगभग 90 प्रतिशत सार्वजनिक सीएनजी बसों को दिसंबर 2025 तक चरणबद्ध तरीके से हटा दिया जाएगा और उनकी जगह इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी, जो सरकार के स्वच्छ और टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन की दिशा में उठाए गए कदम का हिस्सा है. यह घोषणाएं शहर के निवासियों के लिए एक बड़ी चुनौती वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली के व्यापक प्रयासों के हिस्से के रूप में की गई हैं. AAP सरकार पर साधा निशाना उन्होंने पूर्व के AAP सरकार पर निशाना साधा और कहा कि पिछली सरकार ने प्रदूषण को कम करने के लिए कोई भी कम नहीं उठाया. केंद्र सरकार की तरफ से जो भी फंड दिया गया उनका भी इस्तेमाल नहीं किया गया था. दिल्ली में तीन विषय हैं- एक डस्ट प्रदूषण है, एक व्हीकल प्रदूषण है , एक कंस्ट्रक्शन प्रदूषण है. दिल्ली में स्प्रिंकलर भी नहीं लगाए थे. पर्यावरण मंत्री ने कहा कि हम एक टीम का गठन कर रहे हैं जो 15 साल पुराने व्हीकल को आईडेंटिफाई करेगी. हैवी व्हीकल को लेकर पहले जांच करेंगे कि आखिर कौन से व्हीकल दिल्ली में दाखिल हो रहे हैं. जो तय नियम है क्या उसी के तहत दिल्ली में दाखिल हो रहे हैं या नहीं. यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स को प्लांटेशन के ड्राइव में जोड़ा जाएगा. दिल्ली में कई बड़े ऑर्गेनाइजेशन हैं, जिनकी वजह प्रदूषण होता है. हम उन्हें भी निर्देश जारी कर रहे हैं कि प्रदूषण को कम करने के लिए नए गैजेट्स को लगाए. दिल्ली की हाई राइज बिल्डिंग पर एंटी स्मोग गन लगाना अनिवार्य होगा. होटलों को भी लगानी होगी स्मॉग गन मंत्री ने कहा कि दिल्ली में जितने कमर्शियल कंपलेक्स हैं, होटल हैं, उन्हें भी अनिवार्य होगा कि स्मॉग गन लगाई जाए. दिल्ली में जो खाली लैंड है, उसमें नए जंगल तैयार किए जाएंगे ताकि प्रदूषण में कमी लाई जा सके. हम क्लाउड सीडिंग को लेकर भी काम करना शुरू करेंगे. हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जब दिल्ली में प्रदूषण सबसे अधिक होगा तब क्लाउड सीडिंग के माध्यम से प्रदूषण को कम किया जा सके. दिल्ली में जो नई हाई राइज बिल्डिंग बन रही है, उसके लिए भी नए नियम लागू होंगे. हमारा एक ही लक्ष्य है, जो प्रदूषण कर रहा है समाधान भी वही देगा. जब हम अपने राज्य का प्रदूषण कम करेंगे तभी हम दूसरे राज्यों को बोल पाएंगे. दिल्ली का अपना प्रदूषण भी 50 फ़ीसदी से ज्यादा है. हमने अपनी अथॉरिटी को कहा है कि सरकार पूरी तरीके से सपोर्ट करने के लिए तैयार है.

कोरोना टीकाकरण के लिए केंद्र से मिले पैसे को भी केजरीवाल सरकार नेकाफी समय तक अटकाए रखा: सीएजी रिपोर्ट

नई दिल्ली नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य व्यवस्था की कलई खोल दी है। पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान दिल्ली में अस्पतालों में कर्मचारियों की कमी, ऑपरेशन थियेटर बंद होने और दवाओं की किल्लत का खुलासा किया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की ओर से शुक्रवार को विधानसभा के पटल पर रखी गई रिपोर्ट में कोरोना काल में भी कुप्रबंधन का जिक्र किया गया है। सीएजी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कोरोना महामारी के दौरान दिल्लीवालों के टीकाकरण के लिए जो पैसा केंद्र सरकार ने जारी किया था उसे भी तब की सरकार ने काफी समय तक अटकाए रखा। केंद्र से जो पैसा जनवरी और मार्च 2021 में मिला उसे अप्रैल और मई में आगे बढ़ाया गया। सीजएजी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टीकाकरण के लिए मिला पूरा पैसा खर्च भी नहीं हुआ। सीएजी की रिपोर्ट में पेज नंबर 125 पर कोरोना टीकाकरण के लिए पैसा जारी करने में देरी की बात कही गई है। कैग ने कहा है कि भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ‘कोविड-19 टीकाकरण के लिए दिल्ली सरकार को सहायता अनुदान आवंटित किया था, जिसे उसे दिल्ली स्टेट हेल्थ सोसाइटी (डीएसएचएस) को बढ़ाना था।’ सीएजी ने कहा है कि डीएसएचएस के आय-व्यय खाते (2020-21) और अन्य संबंधित आवंटन आदेशों से पता चला कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दो किस्तों में 9.60 करोड़ रुपए सहायता के रूप में आवंटित किए गए। जनवरी 2021 में 3.46 करोड़ और मार्च 2021 में 6.14 करोड़ रुपए जारी किए गए, लेकिन यह पैसा दिल्ली सरकार ने डीएसएचएस को अप्रैल और मई 2021 में दिया। डीएसएचएस ने यह फंड इंटीग्रेटेड डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसाइटीज को भेजा। उपयोगिता सर्टिफिकेट के मुताबिक मार्च 2022 तक 9.60 करोड़ रुपए में से 7.93 करोड़ रुपए ही खर्च हो पाए थे। गौरतलब है कि कोरोना महामारी का दिल्ली में घातक प्रभाव हुआ था। इसकी वजह से हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। देशभर में टीकाकरण के बाद संक्रामक महामारी पर काबू पाया जा सका।

दिल्ली के स्वास्थ्य ढांचे पर आई सीएजी की रिपोर्ट में फंड का कम इस्तेमाल और कोरोना कुप्रबंधन को उजागर किया

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा में शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट पेश की, जिसमें कई तरह की खामियों को उजागर किया है। दिल्ली के स्वास्थ्य ढांचे पर आई सीएजी की रिपोर्ट में फंड का कम इस्तेमाल और कोरोना महामारी के कुप्रबंधन को उजागर किया गया है। 255 पन्नों की इस रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं में कई गंभीर खामियां हैं, जिनमें स्टाफ की कमी, दवाओं की अनुपलब्धता, अधूरी स्वास्थ्य परियोजनाएं और वित्तीय कुप्रबंधन शामिल हैं। 31 मार्च 2022 को समाप्त हुए वित्त वर्ष के लिए इस ऑडिट रिपोर्ट में कोरोना महामारी से निपटने के इंतजाम और मोहल्ला क्लीनिक को लेकर कई अहम बातें हैं।

यमुना नदी की सफाई के लिए ‘यमुना मास्टर प्लान’ तैयार, जल्द ही पीएम मोदी की मंजूरी के लिए होगा पेश

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने यमुना नदी को साफ और स्वच्छ बनाने का वादा जनता से किया था। चुनाव में मिली शानदार जीत के बाद अब यह जिम्मेदारी नई भाजपा की सरकार की हो गई है कि यमुना को साफ करे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इसको लेकर अपनी प्रतिबद्धता जता चुके हैं। अब एक सुखद खबर सामने आ रही है कि केंद्र सरकार ने दिल्ली में यमुना नदी की सफाई करने के लिए एक ‘यमुना मास्टर प्लान’ तैयार किया है। इसे जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। मिडिया ने रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से इसकी जानकारी दी है। आपको बता दें कि यमुना की सफाई बीजेपी के साथ-साथ आप (AAP) के लिए भी प्रमुख चुनावी मुद्दा था। पिछले सप्ताह, दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना के आदेश पर प्रधानमंत्री मोदी के चुनावी वादे के तहत दिल्ली में यमुना की सफाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। सूत्रों के अनुसार, ‘यमुना मास्टर प्लान’ के लिए जल शक्ति मंत्रालय ने विशेषज्ञों से परामर्श किया है। इन्हीं विशेषज्ञों ने गुजरात के साबरमती नदी किनारे एक रिवर फ्रंट बनाया था। इसके अलावा मंत्रालय द्वारा कुछ बैठकें भी आयोजित की गईं। आपको बता दें कि यमुना सफाई परियोजना के चार प्रमुख तत्व हैं। कचरे और कीचड़ का निष्कासन, प्रमुख नालों की सफाई, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कड़ी निगरानी और इसका विस्तार। दिल्ली की चौथी महिला मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद रेखा गुप्ता ने अपनी कैबिनेट मंत्रियों के साथ मिलकर वसुदेव घाट पर यमुना आरती की। दिल्ली बीजेपी द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में सीएम के अलावा दिल्ली बीजेपी प्रभारी बैजयंत जय पांडा, परवेश वर्मा, आशीष सूद, मंजींदर सिंह सिरसा और कपिल मिश्रा जैसे मंत्री आरती करते हुए देखे गए। यमुना में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को लेकर दोनों दोलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप हुए। आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि बीजेपी शासित हरियाणा दिल्ली की जल आपूर्ति को बाधित करके यमुना में “जहर” मिला रहा है। हालांकि हरियाणा ने इसका पुरजोर तरीके से खंडन किया। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली की बदली हुई परिस्थितियों को देखते हुए योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की संभावना है। इसमें यमुना की सफाई भी शामिल है। जस्टिस बीआर गवई और ऑगस्टिन जॉर्ज मासिह की पीठ ने यह टिप्पणी ‘प्रदूषित नदियों का सुधार’ मामले की सुनवाई के दौरान की।

CAG की रिपोर्ट ने खोली दिल्ली की वर्ल्ड क्लास स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की पोल, मोहल्ला क्लीनिक में टॉयलेट नहीं, अस्पताल में डॉक्टर नहीं

नई दिल्ली दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 से निपटने के लिए केंद्र सरकार से मिले 787.91 करोड़ रुपये में से सिर्फ 582.84 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए, जबकि बाकी राशि बिना उपयोग के रह गई। इसके चलते कोरोना संकट के दौरान जरूरी सुविधाओं की भारी कमी रही। फंड की अनदेखी और भ्रष्टाचार के आरोप रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य कर्मचारियों की भर्ती और वेतन के लिए मिले 52 करोड़ रुपये में से 30.52 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं किए गए। इससे साफ है कि सरकार ने स्वास्थ्य कर्मियों की पर्याप्त भर्ती नहीं की, जिससे महामारी के दौरान लोगों को इलाज में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसी तरह दवाओं, पीपीई किट और अन्य मेडिकल सप्लाई के लिए मिले 119.85 करोड़ में से 83.14 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं हुए। सरकारी अस्पतालों में बेड की भारी कमी दिल्ली सरकार ने 2016-17 से 2020-21 के बीच 32,000 नए बेड जोड़ने का वादा किया था, लेकिन सिर्फ 1,357 बेड ही जोड़े गए, जो कि कुल लक्ष्य का मात्र 4.24% है। राजधानी के कई अस्पतालों में बेड की भारी कमी देखी गई, जहां बेड ऑक्यूपेंसी 101% से 189% तक रही, यानी एक ही बेड पर दो-दो मरीजों को रखा गया या मरीजों को फर्श पर इलाज कराना पड़ा। अस्पतालों की परियोजनाओं में देरी और लागत में भारी इजाफा रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दिल्ली में तीन नए अस्पताल बनाए गए, लेकिन सभी प्रोजेक्ट पहले की सरकार के कार्यकाल में शुरू हुए थे। इनके निर्माण में 5 से 6 साल तक की देरी हुई और लागत भी बढ़ गई।     इंदिरा गांधी अस्पताल: 5 साल की देरी, लागत 314.9 करोड़ रुपये बढ़ी।     बुराड़ी अस्पताल: 6 साल की देरी, लागत 41.26 करोड़ रुपये बढ़ी।     एमए डेंटल अस्पताल (फेज-2): 3 साल की देरी, लागत 26.36 करोड़ रुपये बढ़ी। डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी-     दिल्ली के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य विभागों में 8,194 पद खाली पड़े हैं।     नर्सिंग स्टाफ की 21% और पैरामेडिकल स्टाफ की 38% कमी है।     राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में डॉक्टरों की 50-74% कमी पाई गई।     नर्सिंग स्टाफ की 73-96% तक भारी कमी दर्ज की गई। सर्जरी के लिए लंबा इंतजार, कई उपकरण खराब     लोक नायक अस्पताल में बड़ी सर्जरी के लिए 2-3 महीने और बर्न व प्लास्टिक सर्जरी के लिए 6-8 महीने का इंतजार करना पड़ा।     चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय (CNBC) में पीडियाट्रिक सर्जरी के लिए 12 महीने का इंतजार करना पड़ा।     CNBC, RGSSH और JSSH जैसे अस्पतालों में कई एक्स-रे, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड मशीनें बेकार पड़ी रहीं। जरूरी सेवाओं की कमी और बदहाल मोहल्ला क्लीनिक-     27 अस्पतालों में से 14 में ICU सेवा उपलब्ध नहीं थी।     16 अस्पतालों में ब्लड बैंक की सुविधा नहीं थी।     8 अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई नहीं थी।     12 अस्पतालों में एंबुलेंस की सुविधा नहीं थी।     CATS एंबुलेंस भी जरूरी उपकरणों के बिना चलाई जा रही थीं। मोहल्ला क्लीनिकों की स्थिति भी खराब पाई गई     21 मोहल्ला क्लीनिकों में शौचालय नहीं थे।     15 क्लीनिकों में बिजली बैकअप की सुविधा नहीं थी।     6 क्लीनिकों में डॉक्टरों के लिए टेबल तक नहीं थी।     12 क्लीनिकों में दिव्यांगों के लिए कोई सुविधा नहीं थी। CAG रिपोर्ट ने दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत उजागर कर दी है। कोविड काल में सरकार द्वारा मिले फंड का सही इस्तेमाल नहीं करना, अस्पतालों में जरूरी सुविधाओं की भारी कमी, स्टाफ की भारी किल्लत और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। जनता के स्वास्थ्य से जुड़ी इस लापरवाही को लेकर अब सरकार को जवाब देना होगा।

बीजेपी निर्वाचन क्षेत्र में एक भी नहीं लगाया गया सीसीटीवी कैमरा, अब इस मामले की होगी जांच, PWD मंत्री ने दिए आदेश

नई दिल्ली दिल्ली के पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण मंत्री) प्रवेश साहिब सिंह ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि पिछली आप सरकार के दौरान भाजपा विधायकों के आठ निर्वाचन क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे क्यों नहीं लगाए गए, इसकी जांच की जाएगी। दिल्ली विधानसभा में इस मुद्दे पर संबोधित करते हुए वर्मा ने कहा कि इन निर्वाचन क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाना अब प्राथमिकता होगी। उन्होंने सदन को आश्वासन दिया कि राजनीतिक पूर्वाग्रह के कारण सुरक्षा उपायों से समझौता न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। बीजेपी निर्वाचन क्षेत्र में एक भी नहीं लगाया गया सीसीटीवी कैमरा भाजपा के विश्वास नगर से विधायक ओपी शर्मा ने विधानसभा सदन में यह मामला उठाया और आरोप लगाया कि आप सरकार के तहत उनके निर्वाचन क्षेत्र में एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं लगाया गया। उन्होंने मामले की केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) से जांच की मांग की। इस दावे का समर्थन करते हुए लक्ष्मी नगर विधायक अभय वर्मा ने साफ किया कि भाजपा विधायकों ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया था और अदालत के आदेश और मुख्य सचिव की सिफारिश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। BJP विधायकों के आठ विधानसभा क्षेत्रों को किया गया नजरअंदाज विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सदन को बताया कि दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में से प्रत्येक में 2,000 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने थे, लेकिन पिछली सरकार ने भाजपा विधायकों के आठ विधानसभा क्षेत्रों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने कहा कि आप ने सभी विधानसभा क्षेत्रों में लगाने के लिए 1.40 लाख कैमरे खरीदे, फिर भी इन आठ सीटों को बाहर रखा गया। इन चिंताओं का जवाब देते हुए पीडब्ल्यूडी मंत्री पवर्मा ने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों को परिणाम भुगतने होंगे।

मोहन सिंह बिष्ट बने दिल्ली विधानसभा के डिप्टी स्पीकर, आतिशी को मिली नेता प्रतिपक्ष की मान्यता

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आतिशी को विपक्षी दल के नेता के रूप में मान्यता प्रदान की है। यह निर्णय विधानसभा सदस्य आतिशी, जो सदन में सरकार के विपक्ष में सर्वाधिक सदस्यों वाले दल की नेता हैं, को दिल्ली विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता देने के लिए लिया गया। इस संदर्भ में विधानसभा अध्यक्ष ने 2001 के ‘विधानसभा नेता प्रतिपक्ष (वेतन एवं भत्ते) अधिनियम, 2001’ की धारा-2 के तहत आतिशी को तत्काल प्रभाव से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दी। दिल्ली विधानसभा चुनाव-2025 में आम आदमी पार्टी (आप) को भारतीय जनता पार्टी से कड़ी शिकस्त मिली। इस हार के बाद आतिशी मुख्यमंत्री पद से हट गईं, लेकिन उनकी सैलरी और भत्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दिल्ली में मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष को समान वेतन और सुविधाएं मिलती हैं। इसका मतलब यह है कि भले ही अब आतिशी मार्लेना की मुख्यमंत्री की कुर्सी छिन गई हो, उनकी सैलरी, भत्तों और सुविधाओं में किसी तरह की कोई कटौती नहीं होगी। अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद आतिशी को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया गया था। हालांकि, यह पहले से ही तय था कि विधानसभा चुनाव के बाद उन्हें यह कुर्सी छोड़नी होगी। चुनाव हारने के बाद आम आदमी पार्टी को विपक्ष में बैठना पड़ा और पार्टी ने आतिशी को नेता प्रतिपक्ष बना दिया। इसी वजह से उन्हें मुख्यमंत्री के समान वेतन और अन्य भत्ते मिलते रहेंगे। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया समेत तमाम दिग्गज नेताओं के हारने के बाद विधानसभा पहुंची आतिशी ही वह नेता थीं, जिसे आम आदमी पार्टी ने सर्वसम्मति से अपने दल का नेता चुना था।  दिल्ली की मुस्तफाबाद विधानसभा सीट से विधायक मोहन सिंह बिष्ट को डिप्टी स्पीकर चुना गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मोहन सिंह बिष्ट को डिप्टी स्पीकर बनाने का प्रस्ताव रखा था। मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने प्रस्ताव को समर्थन दिया था। वहीं, दिल्ली विधानसभा में वरिष्ठ नेता विजेंद्र गुप्ता स्पीकर हैं। करावल नगर से कई बार विधायक रह चुके हैं मोहन सिंह बिष्ट दिल्ली की सियासत में अनुभवी नेता माने जाते हैं। वह करावल नगर विधानसभा सीट से कई बार विधायक रह चुके हैं। हालांकि, इस बार वो मुस्तफाबाद सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) के आदिल अहमद खान को 17 हजार से अधिक वोट से शिकस्त दी थी। करावल नगर से कपिल मिश्रा को टिकट मिला करावल नगर सीट से मोहन सिंह बिष्ट ने पहली बार 1998 में चुनाव जीता था और 2015 तक इस सीट से विधायक रहे। 2015 के चुनाव में उन्हें कपिल मिश्रा के हाथों शिकस्त मिली थी। तब कपिल मिश्रा ‘आप’ के टिकट पर चुनाव लड़े थे। बाद में वो बीजेपी में शामिल हो गए। इसके बाद मोहन बिष्ट ने एक बार फिर 2020 में करावल नगर सीट से जीत दर्ज की, जबकि 2025 के चुनाव में उन्हें मुस्तफाबाद से टिकट मिला और यहां से चुनाव जीते। बीजेपी ने इस बार कपिल मिश्रा को करावल नगर से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने यहां बड़े अंतर से जीत दर्ज की और रेखा गुप्ता की सरकार में मंत्री बने। दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत बता दें कि 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 70 में से 48 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि आम आदमी पार्टी (आप) को 22 सीटें मिलीं। राष्ट्रीय राजधानी की सत्ता में बीजेपी 27 सालों के बाद वापसी की है।

17 वर्षीय युवक चार पैरों के साथ जी रहा था, दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने सर्जरी कर दिया नया जीवन

नई दिल्ली अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के सर्जन एक अभूतपूर्व सर्जिकल केस में सफल रहे हैं। उन्होंने उन्नाव (उत्तर प्रदेश) के 17 वर्षीय युवक से उसके परजीवी जुड़वां भाई के अवशेषों को निकालने में सफलता हासिल की। इस युवक के शरीर में एक अविकसित जुड़वां भाई था, जिसकी एक जोड़ी पैर और अविकसित पुरुष जननांग युवक के धड़ से बाहर निकले हुए थे। यह जन्मजात समस्या थी, जिससे युवक को 17 वर्षों तक परेशानियों का सामना करना पड़ा था। जटिल सर्जरी युवक के शरीर में जुड़वां भाई के अविकसित अवशेष होने के कारण उसकी जीवनशैली में कई कठिनाइयां थीं। इसके कारण युवक को शारीरिक और मानसिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता था और उसकी पढ़ाई भी आठवीं कक्षा में ही छूट गई थी। ऐसे मामलों में सर्जरी एक कठिन चुनौती होती है, क्योंकि इसमें नसों का जाल और अंगों को अलग करने की प्रक्रिया बहुत जटिल होती है। इस मामले में, एम्स के सर्जनों को छाती की दीवार, आंतों और किडनी के पास के टिशूज को अलग करना था। इस विशेष सर्जरी में युवक के अविकसित अंग न केवल बाहर निकले थे, बल्कि उनमें स्पर्श और दर्द का अहसास भी होता थाऔर समय के साथ यह अंग बढ़ते जा रहे थे। इनमें अविकसित पुरुष जननांग भी शामिल थे, जो युवक के लिए एक मानसिक चुनौती बन गए थे। सफल ऑपरेशन एम्स के डॉक्टरों की एक टीम ने इस जटिल ऑपरेशन को आठ फरवरी 2024 को सफलतापूर्वक पूरा किया। यह सर्जरी विशेष रूप से महत्वपूर्ण और दुर्लभ मानी जा रही है, क्योंकि दुनिया में इस तरह के केवल 40 मामले ही सामने आए हैं। इस प्रकार के ऑपरेशन में एक जुड़वां भाई विकसित हो जाता है, जबकि दूसरा अविकसित रहता है और शरीर में अलग तरह की जटिलताएं पैदा करता है। अब, युवक को एक नया जीवन मिला है और वह शारीरिक और मानसिक रूप से पहले से अधिक स्वतंत्र महसूस कर रहा है। उसे अब न केवल अपनी जिंदगी में एक नया मौका मिला है, बल्कि उसकी आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी हुई है।  

आतिशी मार्लेना की कुर्सी भले ही छिन गई, लेकिन उनके वेतन, भत्तों और सुविधाओं में कटौती नहीं होगी

  नई दिल्ली आम आदमी पार्टी की हार के बाद आतिशी मार्लेना की मुख्यमंत्री की कुर्सी भले ही छिन गई, लेकिन उनके वेतन, भत्तों और सुविधाओं में कटौती नहीं होगी। इसकी वजह यह है कि दिल्ली में मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष के लिए वेतन और भत्ते एक जैसे हैं। इनके अलावा डिप्टी स्पीकर और मंत्रियों के लिए भी यही वेतन-भत्ते लागू हैं। अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं आतिशी का चुनाव बाद इस पद से हटना तय था। यदि चुनाव में आम आदमी पार्टी की भी जीत हुई होती तो भी उन्हें सीएम की कुर्सी छोड़नी थी। पार्टी ने घोषणा की थी कि यदि चुनाव में जीत मिली तो अरविंद केजरीवाल दोबारा मुख्यमंत्री बनेंगे। ‘आप’ की हार के बाद ‘आप’ को विपक्ष में बैठना पड़ा है। ऐसे में पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल और चुने हुए विधायकों ने आतिशी को नेता विपक्ष के रूप में स्वीकार किया। नेता विपक्ष की कुर्सी मिलने से यह तय हो गया कि उन्हें पहले की तरह वेतन और अन्य भत्ते मिलते रहेंगे। दिल्ली विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में स्पीकर, डिप्टी, स्पीकर, मुख्यमंत्री-मंत्रियों और नेता विपक्ष की सैलरी और भत्ते समान हैं। मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाएं (14 फरवरी 2023 से लागू) मासिक वेतन– 60,000 प्रति माह निर्वाचन क्षेत्र भत्ता– 30,000 प्रति माह सचिवीय सहायता भत्ता– 25,000 प्रति माह प्रतिनिधिक भत्ता– 10,000 प्रति माह कुल वेतन और भत्ते– 25,000 प्रति माह अन्य सुविधाएं और भत्ते सरकारी वाहन, चालक और 700 लीटर तक पेट्रोल मुफ्त। यदि स्वयं का वाहन उपयोग किया जाए, तो 10,000 प्रति माह का वाहन भत्ता। दैनिक भत्ता – 1,500 प्रति दिन (पूरे कार्यकाल के दौरान)। डाटा एंट्री ऑपरेटर का वेतन प्रति माह 30,000 तक (दो ऑपरेटरों के लिए, प्रत्येक को 15,000)। एकमुश्त भत्ता– 1,00,000 का भुगतान लैपटॉप, कंप्यूटर, प्रिंटर, मोबाइल आदि की खरीद के लिए। कार के लिए अडवांस 12,00,000 तक का अग्रिम ऋण वाहन खरीदने के लिए, जिसे कार्यकाल के दौरान चुकाना होगा।ब्याज दर और वसूली का तरीका सरकार तय करेगी, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी की आवश्यकता होगी। आवास और बिजली और इलाज सरकारी आवास की सुविधा दी जाती है। यदि किराये पर रह रहे हैं तो अधिकतम 20 हजार रुपए मासिक दिए जाते हैं। यदि स्वयं के मकान में रहते हैं, तो उसकी दर की गणना कर उतनी ही राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री को प्रतिमाह 5000 यूनिट और मंत्रियों को 3 हजार यूनिट प्रतिमाह बिजली का खर्च। इसके अलावा सालाना एक लाख रुपए भारत में यात्रा के लिए दिए जाते हैं।

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