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193 विपक्षी सांसदों की बड़ी कार्रवाई: CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में नोटिस

नई दिल्ली विपक्षी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में नोटिस दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, 193 विपक्षी सांसदों ने लोकसभा और राज्यसभा में अलग-अलग नोटिस जमा किए हैं, जिसमें लोकसभा से 130 और राज्यसभा से 63 सांसद शामिल हैं। यह भारतीय संसदीय इतिहास में पहली बार है जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हटाने की ऐसी कार्रवाई की गई है। यह कदम मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व में उठाया गया है, जिसमें इंडिया गठबंधन की सभी पार्टियां, आप और कुछ निर्दलीय सांसदों ने समर्थन दिया है। विपक्ष ने नोटिस में सीईसी के खिलाफ 7 प्रमुख आरोप लगाए हैं। इनमें पक्षपातपूर्ण आचरण, चुनावी धांधली की जांच में जानबूझकर बाधा डालना, बड़े पैमाने पर मतदाता वंचित करना (मास डिसेनफ्रैंचाइजमेंट) और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को प्रभावित करना शामिल है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान लाखों वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा किया गया है, जिसे विपक्ष भाजपा को फायदा पहुंचाने की साजिश बता रहा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस अभ्यास की कड़ी आलोचना की थी और कहा था कि यह विपक्षी मतदाताओं को निशाना बनाने का प्रयास है। इसी तरह बिहार और अन्य राज्यों में भी एसआईआर को लेकर विवाद हुआ था, जहां विपक्ष ने इसे चुनावी धांधली का हिस्सा बताया। ये आरोप पिछले कुछ महीनों से बढ़ते जा रहे हैं, खासकर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले। चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल यह विवाद संसद में तनाव का कारण बन गया है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली अब निष्पक्ष नहीं रही और यह सत्ताधारी दल के पक्ष में काम कर रहा है। नोटिस में संविधान के अनुच्छेद 324(5) का हवाला दिया गया है, जो मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की तरह हटाने की प्रक्रिया बताता है। महाभियोग के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी है, जो वर्तमान में विपक्ष के पास नहीं है, लेकिन यह कदम राजनीतिक दबाव बनाने और मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उछालने का प्रयास है। सरकार या चुनाव आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, हालांकि पहले ज्ञानेश कुमार ने एसआईआर को योग्य मतदाताओं को शामिल करने और अयोग्य को हटाने का माध्यम बताया था। यह घटना लोकतंत्र की संस्थाओं पर सवाल उठाती है और आगामी चुनावों में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है। विपक्ष इसे चुनावी प्रक्रिया की स्वतंत्रता बचाने की लड़ाई बता रहा है, जबकि सत्ताधारी दल इसे राजनीतिक स्टंट करार दे सकता है। संसद में इस नोटिस पर चर्चा और आगे की कार्रवाई से राजनीतिक माहौल गरमाने की संभावना है। कुल मिलाकर, यह विवाद चुनाव सुधारों और संस्थागत निष्पक्षता पर बहस को जन्म देगा।  

ईरान तनाव के बीच अमेरिकी सैन्य विमान क्रैश, हवा में ईंधन भरते वक्त हुआ हादसा, 4 की मौत

वाशिंगटन ईरान पर मिलकर हमला करने वाले अमेरिका और इजरायल को भी युद्ध में भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इस युद्ध में अभी तक आधिकारिक रूप से अमेरिका के चार विमान गिर चुके हैं और एक महंगा एयर डिफेंस सिस्टम थाड़ (THAAD) का रडार भी नष्ट हो चुका है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने शुक्रवार को चौथे विमान के गिरने के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ईंधन भरने वाले एक विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से उसमें सवार 6 क्रू सदस्यों में से चार की मौत हो गई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस विमान के गिरने में अभी तक न तो दुश्मन की गोलीबारी और न ही अपने पक्ष की तरफ से की गई फायरिंग ही शामिल थी। सेंटकॉम के मुताबिक इस पर अभी जांच की जा रही है। सेंटकॉम की तरफ से इस घटना पर ज्यादा जानकारी देते हुए बताया गया कि इस घटना में दो विमान शामिल थे। क्रैश होने वाला विमान (बोइंग KC-135) ईरान में जारी अभियानों का हिस्सा था। यह एक टैंकर विमान है, जो कि दूसरे जेट्स को हवा में ही फ्यूल उपलब्ध कराता था। घटना के बाद अभी बचाव कार्य जारी है। इस विमान के क्रैश होने के बाद दूसरा विमान सुरक्षित रूप से लैंड कर गया है। आपस में टक्कर की आशंका सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो और तस्वीरों में अमेरिका के एक दूसरे ईंधन टैंकर विमान को तेल अवीव एयरपोर्ट पर उतरते हुए देखा गया है। इस जहाज के पिछले हिस्से को नुकसान पहुंचा हुआ दिख रहा है। ऐसे में कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि यह दोनों ईंधन वाहक जहाज हवा में ही एक-दूसरे से टकरा गए थे, जिसकी वजह से एक जहाज क्रैश हो गया, जबकि दूसरा जहाज सुरक्षित रूप से लैंड कर पाया। हालांकि, इसकी अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है। इस युद्ध में आधिकारिक रूप से अमेरिका के चार विमान गिर चुके हैं। केसी-135 के गिरने से पहले अमेरिका के तीन एफ-15 जहाज भी कतरी वायुसेना की गलती की वजह से मार गिराए गए थे। अमेरिकी वायुसेना अभियानों के लिए खास KC-135 अमेरिका की वायुसेना के लिए इस विमान की भूमिका बहुत ही खास है। बोइंग का KC-135 स्ट्रैटोटैंकर विमान हवा में उड़ते हुए अन्य लड़ाकू विमानों में ईंधन भरने की क्षमता रखता है। इस विमान में चार टर्बोफैन इंजन लगे होते हैं और यह अपने साथ करीब 146 टन वजन लेकर उड़ान भर सकता है। पिछले 60 सालों से यह लंबी दूरी के अमेरिकी सैन्य अभियानों में बेहद ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ईरान युद्ध के दौरान भी इन विमानों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है, ताकि अमेरिकी विमानों की उड़ने की क्षमता को बढ़ाया जा सके।

भारत की कूटनीतिक पहल रंग लाई: होर्मुज मामले पर जयशंकर की ईरान से चौथी चर्चा

नई दिल्ली भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों को लेकर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ टेलीफोन पर अहम बातचीत की है। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह चौथी बातचीत है। यह बातचीत ऐसे महत्वपूर्ण समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में जारी भारी संकट के बीच भारतीय जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर आगे बढ़े हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान ने हाल के संघर्ष के दौरान इस मार्ग पर मिसाइलों और ड्रोनों से हमले किए हैं, जिससे अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल आया है और भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चिंता बढ़ गई है। ईरान का रुख: आत्मरक्षा और ब्रिक्स से अपील बातचीत के दौरान, ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने एस. जयशंकर को अमेरिका और ‘जायोनी शासन’ (इजरायल) द्वारा ईरान के खिलाफ की गई आक्रामकता और अपराधों से उत्पन्न ताजा स्थिति की विस्तार से जानकारी दी। अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरानी सरकार, वहां की जनता और सशस्त्र बल हमलावरों के खिलाफ अपनी रक्षा के वैध अधिकार का प्रयोग करने के लिए पूरी तरह से दृढ़ संकल्पित हैं। अंतरराष्ट्रीय निंदा और ब्रिक्स की भूमिका उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों को ईरान के खिलाफ इस सैन्य आक्रामकता की निंदा करनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए ‘ब्रिक्स’ को एक महत्वपूर्ण मंच बताया और आग्रह किया कि इस नाजुक मोड़ पर वैश्विक शांति व सुरक्षा के लिए ब्रिक्स को एक रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। भारत का रुख: शांति और सामूहिक प्रयास विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय दोनों तरह के सहयोग को और अधिक विकसित करने के लिए भारत की तत्परता व्यक्त की। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि क्षेत्र में स्थायी स्थिरता और सुरक्षा कायम करना सबकी साझा जिम्मेदारी है और इसके लिए सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं। ईरान युद्ध और तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है। इस स्थिति के बीच, भारत अपने 28-30 भारतीय-ध्वज वाले मालवाहक (मर्चेंट) जहाजों के सुरक्षित मार्ग के लिए लगातार बातचीत कर रहा है। इसी प्रयास के तहत हाल ही में तीन जहाजों ने सफलतापूर्वक होर्मुज को पार किया है। इनमें शेनलॉन्ग (जो लाइबेरिया के झंडे वाला जहाज है, लेकिन इसका कप्तान भारतीय है), और दो भारतीय झंडे वाले जहाज- पुष्पक और परिमल शामिल हैं।  

ईरान की राजधानी तेहरान में धमाका, अलविदा जुमा पर जुटी भीड़ में मचा हड़कंप

तेहरान ईरान की राजधानी तेहरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच धमाका हुआ है। यह ब्लास्ट उस वक्त हुआ, जब तेहरान के फिरदौसी चौक पर हजारों लोग ईरान और अमेरिका के खिलाफ प्रदर्शन करने जुटे थे। आज ईद से पहले का आखिरी जुमा है, जिसे अलविदा जुमा कहा जाता है। इस कारण भी प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। इस दौरान जब धमाका हुआ तो दहशत फैल गई और लोग मौके से भागते नजर आए। इस धमाके के पीछे ईरानी एजेंसियों को इजरायल का हाथ होने का शक है। अब तक धमाके की वजह सामने नहीं आई है, लेकिन इजरायल ने हमलों की चेतावनी दी थी। ऐसे में माना जा रहा है कि यह धमाका भी इजरायल ने ही किया है। यह धमाका ऐसे वक्त में हुआ, जब ईरान में अलविदा जुमा मनाया जा रहा है। ईद से पहले के आखिरी जुमा के दिन खूब भीड़ जुटी थी और इसी दौरान यह धमाका हुआ। यह धमाका जिस इलाके में हुआ है, वह तेहरान यूनिवर्सिटी के भी काफी करीब है। अब तक इस बारे में जानकारी नहीं मिली है कि यह धमाका किसने और क्यों किया है। लेकिन यह कहा जा रहा है कि इजरायल का इसमें हाथ हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि आज ही उसकी ओर से चेतावनी दी गई थी कि वह इस इलाके में हमले कर सकता है। यह संदेह इसलिए भी है क्योंकि प्रदर्शन इजरायल के खिलाफ था और इसकी फिलिस्तीन के लोगों के लिए समर्थन था। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि धमाके चलते अफरातफरी मच गई थी। इसके बाद भी बड़ी संख्या में लोग वहां डटे रहे और डेथ टू इजरायल एवं डेथ टू अमेरिका जैसे नारे लगाते रहे। इस बीच ईरान भी ऐक्शन में ही दिख रहा है। उसने खाड़ी और अरब के देशों पर भी आज हमले किए हैं। दर्जनों ड्रोन्स से तो सऊदी अरब को ही निशाना बनाने की कोशिश की है। इसके अलावा दुबई को ईरान ने फिर से टारगेट किया है। गौरतलब है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामनेई पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि हम अमेरिका से बदला लेंगे और पीछे नहीं हटेंगे। गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ही कहा था कि अब ईरान से जंग खत्म होने की ओर है। लेकिन ईरान ने ही इस बात को खारिज किया था। उसका कहना है कि भले ही जंग को अमेरिका ने शुरू किया है, लेकिन इसे खत्म हम ही करेंगे। वहीं ट्रंप लगातार कह रहे हैं कि हमने ईरान को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है कि ईरान की नेवी खत्म हो गई है। एयर फोर्स बची नहीं हैं। मिसाइल, बम और ड्रोन्स आदि हमने तबाह कर दिए हैं।

कोकराझार से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान: 4,570 करोड़ की योजनाएं, ‘असम माला 3.0’ लॉन्च, तीन नई ट्रेनों को हरी झंडी

गुवाहाटी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी गुवाहाटी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए असम के कोकराझार में 4,570 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। उन्होंने तीन नई रेल सेवाओं को भी हरी झंडी दिखाई। पीएम मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “मौसम खराब होने की वजह से मैं कोकराझार नहीं आ पा रहा हूं। मैं आप सभी का क्षमाप्रार्थी हूं। यहां गुवाहाटी से ही आपसे संवाद संभव हुआ है। मैं दिल्ली से निकला था आपके पास आने के लिए, लेकिन मुझे गुवाहाटी में ही उतरना पड़ा और अब मैं यहां से आपके दर्शन भी कर रहा हूं और आपसे बात भी कर रहा हूं।” उन्होंने कहा कि भाजपा-एनडीए की डबल इंजन सरकार असम की विरासत के संरक्षण और असम के तेज विकास के लिए निरंतर काम कर रही है। आज यहां इस कार्यक्रम में ही इस क्षेत्र के विकास के लिए 4,500 करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। इसमें से 1,100 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि बोडोलैंड की सड़कों के लिए खर्च होने जा रही है। ‘असम माला अभियान’ के तीसरे चरण से असम की रोड़ कनेक्टिविटी और अधिक सशक्त होगी। इससे पहले, पीएम मोदी ने 3,200 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली एक प्रमुख सड़क इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर परियोजना ‘असम माला 3.0’ की शुरुआत की। इस योजना के तहत, अंतर-राज्यीय संपर्क को बेहतर बनाने और राष्ट्रीय राजमार्गों व ग्रामीण सड़कों के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए असम भर में 900 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (बीटीसी) क्षेत्र में लगभग 1,100 करोड़ रुपए के निवेश से निर्मित छह सड़क इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर परियोजनाओं का शिलान्यास किया, जिनमें चार फ्लाईओवर और दो पुल शामिल हैं। इन परियोजनाओं से कोकराझार जिले में यातायात जाम कम करने और संपर्क, पर्यटन, कृषि, स्वास्थ्य सेवा और ग्रामीण आवागमन में सुधार लाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, पीएम मोदी ने कोकराझार जिले के बाशबारी में आवधिक मरम्मत (पीओएच) कार्यशाला की आधारशिला रखी। पीएम मोदी ने असम और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में संपर्क सुधारने के उद्देश्य से शुरू की गई तीन नई रेल सेवाओं को भी हरी झंडी दिखाई। इनमें कामाख्या-चारलापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस शामिल है, जो उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत के बीच सीधी रेल कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। गुवाहाटी-न्यू जलपाईगुड़ी एक्सप्रेस, असम और पश्चिम बंगाल के बीच संपर्क को बेहतर बनाएगी। वहीं नारंगी-अगरतला एक्सप्रेस असम और त्रिपुरा के बीच संपर्क को सुधारते हुए यात्रियों, व्यापारियों और पर्यटकों के लिए अंतर-राज्यीय यात्रा को सुगम बनाएगी।

PM Kisan 22वीं किस्त जारी: करोड़ों किसानों के खाते में आए 2000 रुपये, जानें पूरी जानकारी

नई दिल्ली देश के करोड़ों अन्नदाताओं के लिए आज का दिन खुशियां लेकर आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम की धरती से पीएम किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Yojana) की 22वीं किस्त जारी कर दी है। इस डिजिटल ट्रांसफर के जरिए देशभर के 9.32 करोड़ किसान परिवारों के बैंक खातों में 18,640 करोड़ रुपये की राशि सीधे भेजी गई है। असम से मिली सौगात, खातों में पहुंचने लगा पैसा प्रधानमंत्री ने एक बटन दबाकर योजना की अगली किस्त हस्तांतरित की। गौरतलब है कि इससे पहले 19 नवंबर 2025 को तमिलनाडु से 21वीं किस्त जारी की गई थी। अब 22वीं किस्त के ₹2,000 किसानों के खातों में जमा होना शुरू हो गए हैं। चूंकि एक साथ 9 करोड़ से अधिक खातों में ट्रांजैक्शन किया जाता है, इसलिए तकनीकी कारणों से कुछ किसानों के खातों में पैसा पहुंचने में थोड़ा समय लग सकता है। यदि आपके खाते में अभी तक राशि नहीं आई है, तो घबराने की जरूरत नहीं है, कुछ समय इंतजार करें। अपना बैलेंस और स्टेटस कैसे चेक करें? अगर आप यह जानना चाहते हैं कि आपके खाते में 22वीं किस्त का पैसा आया है या नहीं, तो आप घर बैठे ही आधिकारिक पोर्टल के जरिए अपना स्टेटस चेक कर सकते हैं।     सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाएं।     होमपेज पर दाईं ओर ‘Know Your Status’ के विकल्प पर क्लिक करें।     अपना रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करें और स्क्रीन पर दिख रहा कैप्चा कोड भरें।     ‘Get Data’ पर क्लिक करते ही आपके सामने पूरी डिटेल आ जाएगी।     यहां आप देख सकते हैं कि आपको अब तक कितनी किस्तें मिली हैं और 22वीं किस्त का स्टेटस क्या है। पैसा न आने पर क्या करें? यदि स्टेटस में ‘Success’ दिख रहा है लेकिन बैंक से मैसेज नहीं आया है, तो अपनी पासबुक अपडेट कराएं। अगर स्टेटस में कोई समस्या (जैसे ई-केवाईसी या बैंक सीडिंग) दिख रही है, तो उसे तुरंत नजदीकी सीएससी (CSC) सेंटर पर जाकर ठीक कराएं।

इराक में बड़ा हादसा: अमेरिकी टैंकर विमान गिरा, 4 क्रू मेंबर्स की मौत

वाशिंगटन मिडिल ईस्ट में जारी संकट के बीच अमेरिकी वायुसेना को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा है. पश्चिमी इराक में अमेरिकी सेना का एक केसी-135 रिफ्यूलिंग विमान हादसे का शिकार हो गया. इस दौरान विमान में कुल छह क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें से चार की मौत हो गई है। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने भी क्रू मेंबर्स की मौत की पुष्टि की है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सेंटकॉम ने बताया कि केसी-135 रिफ्यूलिंग विमान में मौजूद छह में से चार क्रू मेंबर की मौत हो चुकी है, जबकि दो की तलाश और बचाव अभियान जारी है। सेंटकॉम का कहना है कि दुर्घटना के पीछे का कारणों का पता लगाया जा रहा है. अभी जांच जारी है. कुछ सामने आता है तो अधिक जानकारी साझा की जाएगी। अमेरिकी सेना ने साफ़ किया कि विमान हादसे का शिकार किसी दुश्मन के हमले या फ्रेंडली फायर की वजह से नहीं हुआ है. यानि साफ है कि शुरुआती जानकारी के अनुसार यह दुर्घटना किसी हमले से जुड़ी नहीं है। अमेरिका का केसी-135 विमान एक रिफ्यूलिंग विमान है. इसका इस्तेमाल आसमान में दूसरे सैन्य विमानों को ईंधन देने के लिए किया जाता है. इसे टैंकर विमान भी कहा जाता है. इन विमानों का इस्तेमाल लंबी दूरी के मिलिट्री ऑपरेशनों में बेहद अहम भूमिका निभाती है. सैन्य विमान या फाइटर जेट युद्ध के दौरान बिना ज़मीन पर उतरे लंबे समय तक आसमान में फिर रह सकते हैं और दुश्मनों पर क़हर बरपा सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिकी सैन्य ताकत की प्रशंसा की CENTCOM की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इस बारे में और जानकारी उपलपब्ध होने पर बताया जाएगा। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ‘ईरान हालात बहुत तेजी से बदल रहे हैं।’ अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिकी सैन्य ताकत की प्रशंसा की। ‘ईरान के साथ स्थिति बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है’ व्हाइट हाउस में आयोजित महिला इतिहास माह कार्यक्रम में बोलते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिकी सेनाएं मजबूत प्रदर्शन कर रही हैं और उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा कार्रवाई ईरान से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों से निपट रही हैं। उन्होने कहा कि ‘ईरान के साथ स्थिति बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा है। हमारी सेना का कोई मुकाबला नहीं है। इसके जैसी सेना पहले कभी नहीं रही। किसी ने भी ऐसा पहले कभी नहीं देखा।’ पोर्ट के अनुसार एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि दुर्घटनाग्रस्त हुआ KC-135 विमान में कम से कम 6 क्रू सदस्य सवार थे. वहीं अमेरिकी सेना की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह दुर्घटना न तो दुश्मन की गोलीबारी से हुई और न ही अपने ही पक्ष की गोलीबारी (फ्रेंडली फायर नहीं था) से. बयान में विमान को “एक नुकसान” बताया गया है। मिडिल ईस्ट में निगरानी करने वाला यू.एस. सेंट्रल कमांड ने कहा कि इस घटना में दो विमान शामिल थे. उनमें से एक सुरक्षित उतर गया, जबकि दूसरा पश्चिमी इराक में गिर गया। इसका पूरा बयान यह था- “यूएस सेंट्रल कमांड को यूएस केसी-135 ईंधन भरने वाले विमान के नुकसान की जानकारी है. यह घटना ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान फ्रेंडली हवाई क्षेत्र में हुई और बचाव प्रयास जारी हैं. घटना में दो विमान शामिल थे. एक विमान पश्चिमी इराक में गिर गया, और दूसरा सुरक्षित रूप से उतर गया. प्लेन न तो दुश्मन देश की फायरिंग से क्रैश हुआ न फ्रेंडली फायर में क्रैश हुआ. जैसे-जैसे स्थिति आगे बढ़ेगी, अधिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी. हम अतिरिक्त जानकारी जमा करने और जवानों के परिवारों के लिए क्लियरिटी देने के लिए लगातार धैर्य रखने का अनुरोध करते हैं।

सरकार का बड़ा फैसला: LPG कमी के बावजूद होटल-रेस्तरां की रसोई नहीं होगी बंद

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जंग के कारण पैदा हुए वैश्विक गैस संकट के बीच सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. इसमें होटल-रेस्तरां इंडस्ट्री को राहत देने की तैयारी है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में कमर्शियल एलपीजी की मौजूदा स्थिति और इसका होटल-रेस्तरां तथा पर्यटन सेक्टर पर पड़ रहे असर पर चर्चा की गई. सरकार ने हालात को संभालने के लिए तुरंत कुछ कदम उठाने का फैसला किया है. आज से व्यवसायों को हर महीने की औसत कमर्शियल LPG जरूरत का करीब 20 फीसदी कोटा दिया जाएगा, ताकि होटल और रेस्तरां की रसोई चलती रहे। इसके अलावा होटल और रेस्तरां को अतिरिक्त गैस सप्लाई देने के उपायों पर भी काम किया जा रहा है. पेट्रोलियम और पर्यटन मंत्रालय आपस में मिलकर और उद्योग से जुड़े लोगों के साथ लगातार संपर्क में रहेंगे, ताकि हालात पर नजर रखी जा सके और समस्याओं का जल्दी समाधान किया जा सके. सरकार का कहना है कि गैस की मौजूदा परेशानी चल रहे युद्ध की वजह से पैदा हुए वैश्विक संकट का हिस्सा है। होटल इंडस्ट्री परेशान दरअसल, पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही जंग ने वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है. भारत में 80-85 प्रतिशत एलपीजी आयात इसी इलाके से होता है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से. जहाजों की आवाजाही रुकने से देश में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों (नीले रंग वाले) की भारी कमी हो गई है. होटल, रेस्तरां, ढाबे और पर्यटन क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हैं. कई शहरों जैसे मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता और दिल्ली में रेस्तरां मेन्यू कम कर रहे हैं, कुछ बंद हो रहे हैं या समय कम कर रहे हैं. मुंबई में 20 प्रतिशत तक होटल-रेस्तरां बंद हो चुके हैं, और अगर हालात नहीं सुधरे तो दो-तीन दिनों में 50 प्रतिशत तक बंद हो सकते हैं. बेंगलुरु में होटल एसोसिएशन ने चेतावनी दी थी कि सप्लाई बंद रहने पर हजारों जगहें बंद हो जाएंगी। घरेलू सेक्टर पर जोर बैठक के बाद पुरी ने कहा कि ये समस्या वैश्विक है, जंग की वजह से पैदा हुई है, लेकिन सरकार घरेलू उपभोक्ताओं (घरों में इस्तेमाल वाली गैस) को प्राथमिकता दे रही है. घरेलू क्षेत्र कुल खपत का 87 प्रतिशत है, जबकि कमर्शियल सिर्फ 13 प्रतिशत. सरकार ने तुरंत राहत के कदम उठाए हैं. आज से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसी) व्यवसायों को उनकी औसत मासिक कमर्शियल एलपीजी जरूरत का करीब 20 प्रतिशत कोटा देंगी. राज्य सरकारों के साथ मिलकर ये कोटा असली जरूरतमंदों को दिया जाएगा, ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी न हो. ये कदम ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए है. इसके अलावा अतिरिक्त गैस सप्लाई के उपायों पर काम चल रहा है. पेट्रोलियम और पर्यटन मंत्रालय मिलकर उद्योग से जुड़े लोगों के साथ लगातार संपर्क में रहेंगे।

अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट करियर पर ईरान की मिसाइल हमला रिपोर्ट, अमेरिका ने खतरा नाकाम बताया

तेहरान पश्चिम एशिया के समुद्र में ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव एक बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन पर सटीक मिसाइल और ड्रोन हमला किया है, जिससे पोत को भारी नुकसान पहुंचा है. हालांकि, अमेरिका ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे एक असफल खतरा बताया है।  ईरानी सरकारी मीडिया ‘प्रेस टीवी’ के अनुसार, IRGC ने ओमान के पास समुद्र में एक “सटीक ऑपरेशन” को अंजाम दिया. ईरान का दावा है कि उसके उन्नत हथियारों ने ईरानी सीमा से 340 किमी दूर इस युद्धपोत को निशाना बनाया।  IRGC के बयान में कहा गया है कि इस हमले के बाद ‘लिंकन’ ऑपरेशनल नहीं रहा और उसे उच्च गति के साथ क्षेत्र से हटने के लिए मजबूर होना पड़ा. इसके साथ ही ईरान ने बहरीन स्थित अमेरिका के मीना सलमान नौसैनिक अड्डे पर भी दो लहरों में ड्रोन हमले करने का दावा किया है।  अमेरिका का पलटवार: ईरानी जहाज को मार गिराया दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान के दावों को कोरी कल्पना बताया है. ‘सीबीएस न्यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी नौसेना ने विमानवाहक पोत के बेहद करीब आ रहे एक ईरानी जहाज को समय रहते रोक दिया।  अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि पहले ‘मार्क-45’ गन से चेतावनी दी गई और बाद में हेलफायर मिसाइलों से लैस हेलीकॉप्टर ने उस ईरानी जहाज पर दो सटीक प्रहार किए. अमेरिका ने स्पष्ट किया कि उसका कोई भी पोत सुरक्षित है और उसने खतरे को सफलतापूर्वक खत्म कर दिया है।  यह सैन्य टकराव ईरान के नए क्रांतिकारी नेता मुजतबा खामेनेई के उस बयान के कुछ ही घंटों बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने दुश्मनों को “पछताने” वाली कार्रवाई की चेतावनी दी थी. वहीं, इराक में ईरान समर्थित गुटों द्वारा एक अमेरिकी रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट (KC-135) को मार गिराने की खबरों ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है. फिलहाल, दोनों महाशक्तियां अपनी सैन्य श्रेष्ठता का दावा कर रही हैं, जिससे खाड़ी क्षेत्र में पूर्ण युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। 

PM किसान की 22वीं किस्त का इंतजार खत्म: बिहार के 73 लाख किसानों को आज मिलेगा ₹2000, ऐसे देखें स्टेटस

नई दिल्ली देशभर के करोड़ों किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-Kisan) की अगली यानी 22वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। वहीं अब उनका इंतजार खत्म होने वाला है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 मार्च को असम के दौरे पर होंगे और इस दौरान 22वीं किस्त जारी करेंगे। जिससे किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है। इसके माध्यम से देशभर के करोड़ों किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए सहायता राशि भेजी जाएगी। बता दें कि पीएम किसान योजना की किस्तें आमतौर पर हर चार महीने के अंतराल पर जारी की जाती हैं। वहीं बिहार के 73 लाख से अधिक पात्र किसानों के बैंक खातों में लगभग 1,467 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को सीधे ट्रांसफर की जाएगी।   सालाना ₹6,000 की मदद इस योजना के तहत हर पात्र किसान परिवार को सालाना ₹6,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह रकम DBT (Direct Benefit Transfer) के ज़रिए तीन समान किस्तों—₹2,000-₹2,000 में दी जाती है। इस कारण रुक सकती है आपकी किस्त e-KYC अधूरी होना आधार से बैंक खाता लिंक न होना DBT (Direct Benefit Transfer) बंद होना भू-सत्यापन न होना वहीं कई मामलों में नाम की स्पेलिंग, खाता नंबर, जमीन के रिकॉर्ड में त्रुटि जैसी छोटी गलतियों के कारण भी भुगतान रोक दिया जाता है। किसान PM Kisan पोर्टल पर जाकर अपना स्टेटस ऑनलाइन चेक कर सकते हैं, जिससे पता चल जाता है कि किस्त क्यों रुकी है। इनमें से कोई भी समस्या किस्त रोक सकती है, लेकिन अच्छी बात यह है कि इन सबको आसानी से ठीक किया जा सकता है। पीएम किसान (PM Kisan) का स्टेटस कैसे देखें:- सबसे पहले pmkisan.gov.in पर जाएं। Farmers Corner’ पर क्लिक करें। Beneficiary Status ऑप्शन चुनें। आधार नंबर, मोबाइल नंबर या रजिस्ट्रेशन नंबर डालें।

‘उनका करियर खतरे में’—SC ने पीरियड लीव याचिका पर सुनवाई को ठुकराया

 नई दिल्ली सरकार के पास जाइए…’ पूरे देश में छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के लिए मासिक धर्म अवकाश की मांग वाली याचिका सुनने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार कर दिया है. सीजेआई सूर्यकांत की पीठ के सामने ये मामला उठाया गया था. ये याचिका शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी ने दायर की थी. मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा- इस तरह की याचिकाए कभी-कभी महिलाओं को कमजोर या कमतर दिखाने का माहौल बना देती हैं. ऐसी याचिकाएं यह डर पैदा करती हैं कि मासिक धर्म महिलाओं के साथ कुछ बुरा होने जैसा है. इससे उन्हें ही नुकसान होगा। महिलाओं को जिम्मेदार पद देने से हिचकेंगे… सीजेआई सूर्यकांत ने याचिका की सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि यदि ऐसी व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई तो नियोक्ता महिलाओं को जिम्मेदार पद देने से हिचक सकते हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि न्यायिक सेवाओं में भी महिलाओं को सामान्य ट्रायल जैसे महत्वपूर्ण काम सौंपने से बचा जा सकता है, जिससे उनके करियर पर असर पड़ सकता है।  सभी कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के पीरियड्स से जुड़ी तकलीफों के लिए अवकाश का प्रावधान बनाने को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इंकार किया है. मुकदमा सामने लाए जाने पर CJI जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर कोई कंपनी अपनी मर्जी से (पीरियड्स) इसके दौरान छुट्टी दे रही है तो बहुत अच्छी बात है। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) ने इस पर कहा कि स्वैच्छिक नीतियां स्वागतयोग्य हैं लेकिन उन्होंने ऐसे प्रावधानों को कानून के जरिये अनिवार्य बनाए जाने के प्रति आगाह किया. उन्होंने कहा, “स्वेच्छा से अवकाश दिया जाना बहुत अच्छी बात है लेकिन जैसे ही आप कहेंगे कि यह कानून के तहत अनिवार्य है तो कोई उन्हें नौकरी नहीं देगा. उन्हें न्यायपालिका या सरकारी नौकरियों में कोई नहीं लेगा; उनका करियर खत्म हो जाएगा.” पीठ ने ऐसी व्यवस्थाओं के कार्यस्थल पर प्रभाव और महिलाओं की पेशेवर प्रगति पर पड़ने वाले संभावित असर को भी रेखांकित किया. पीठ ने याचिकाकर्ता की दलीलों पर गौर करते हुए कहा कि याचिका दायर करने वाला व्यक्ति संबंधित प्राधिकारियों को पहले ही अभ्यावेदन दे चुका है। क्या नियोक्ता इससे खुश होंगे?  जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भी इस मुद्दे के आर्थिक और व्यावहारिक पहलुओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि व्यापारिक मॉडल के बारे में सोचिए. क्या नियोक्ता इससे खुश होंगे? याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि केरल, कर्नाटक और ओडिशा जैसे राज्यों में कुछ संस्थानों में मासिक धर्म अवकाश या रियायतें दी जाती हैं, इसलिए इसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है।    उन्होंने आगे कहा कि जैसे ही आप इस को कानून के तौर पर सख्ती से लागू करेंगे तो इसके दूसरे पहलुओं को भी ध्यान रखना पड़ेगा. अब जैसे हो सकता है कि महिलाओं को नौकरी पाने में दिक्कत हो. उन्हें सरकारी नौकरी, न्यायपालिका या बाकी नौकरियों में रखा ही न जाए। उन्होंने कहा कि उनका करियर ही बर्बाद हो जाए. ऐसे मे उन्हें कह दिया जाए कि वो घर पर ही रहें. इसके अलावा CJI ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप पहले ही केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सामने अपनी बात रख चुके हैं. सरकार को सभी पक्षों से बात करके एक पॉलिसी बनाने पर विचार करना चाहिए। दरअसल सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका में कहा गया था कि गर्भावस्था के लिए तो अवकाश मिलता है, पर मासिक धर्म सके लिए नहीं. कुछ राज्यों और कंपनियों ने महीने में 2 दिन छुट्टी का प्रावधान बनाया है. ऐसे मे सुप्रीम कोर्ट सब राज्यों को ही ऐसे नियम बनाने का निर्देश दे।  

ईरान तनाव के बीच भारत का फैसला, 8 LPG टैंकर होर्मुज से गुजरेंगे, घर-घर गैस की सप्लाई सुरक्षित

मुंबई  ईरान जंग का असर भारत में भी दिख रहा है. एलपीजी सिलेंडर को लेकर जगह-जगह हाय-तौबा मची है. गैस की कालाबाजारी चरम पर पहुंच गई है. आम जनता परेशान है. लोगों को डर सता रहा है कि एलपीजी गैस की कमी से उन्हें खाने-पीने की दिक्कत हो जाएगी. मगर सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी गैस की दिक्कत नहीं है. होर्मुज के बंद होने से इंधन संकट की चिंताओं के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. बहुत जल्द आठ एलपीजी टैंकर होर्मुज को पार कर भारत की सरजमीं पर होंगे. जी हां, इसके लिए भारत सरकार ने ईरान से बातचीत तेज कर दी है।  दरअसल, एक सरकारी सूत्र ने बताया कि भारत ईरान से बातचीत कर रहा है और उसे जल्द ही LPG की आपूर्ति मिलने की उम्मीद है. अधिकारी स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में हो रही बाधाओं के कारण ऊर्जा शिपमेंट पर लगातार असर पड़ रहा है. बता दें कि ईरान ने जंग के कारण होर्मुज को बंद कर दिया है. हालांकि, उसने भारत को इससे छूट दी है।  होर्मुज के पास 8 टैंकर इंतजार कर रहे हैं सूत्रों के अनुसार, आठ LPG टैंकर इस समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज यानी होर्मुज जलडमरूमध्य से ठीक पहले खड़े हैं. इन जहाजों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए सरकार ईरान के संपर्क में है. अधिकारियों ने बताया कि ईरानी अधिकारी इस प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं और उन्हें अपने उन नाविकों की भी चिंता है जो इस समय भारत में हैं. लगभग 250 ईरानी नाविक भारत में हैं, जो अपने घर लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं. भारतीय अधिकारियों ने उन्हें रहने की जगह दी है, जबकि उनके लौटने की व्यवस्था की जा रही है।  सरकार है एक्टिव एलपीजी गैस और तेल के संकट को टालने के लिए सरकार का क्राइसिसि मैनेजमेंट ग्रुप यानी संकट प्रबंधन समूह (Crisis Management Group) एक पूरी योजना पर काम कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत को किसी भी तरह की ईंधन किल्लत का सामना न करना पड़े. अधिकारी स्थिति का जायज़ा ले रहे हैं और LPG कुकिंग गैस की सप्लाई को संभालने के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ तालमेल बिठा रहे हैं।  LPG आयात पर भारत की निर्भरता भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60 से 67 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है. इस आयात का एक बड़ा हिस्सा सऊदी अरब और कतर जैसे खाड़ी देशों के सप्लायरों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है. इस रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट देश में LPG की उपलब्धता पर असर डाल सकती है।  भारतीय जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही के लिए कूटनीतिक बातचीत भारत एलपीजी शिपमेंट के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करने के लिए उच्च-स्तरीय बातचीत कर रहा है. इसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच कई बार फ़ोन पर बातचीत शामिल है. इतना ही नहीं, अपने ईंधन वाले जहाजों को सुरक्षित वापस लाने के लिए भारत नेवी के एस्कॉर्ट पर भी विचार कर रहा है। 

नाबालिग पीड़िता को गर्भपात की इजाजत नहीं, गुजरात हाई कोर्ट ने 26 हफ्ते के भ्रूण का मामला खारिज किया

अहमदाबाद  गुजरात हाई कोर्ट ने वडोदरा की एक रेप पीड़िता द्वारा अपने 26 हफ्ते के भ्रूण का गर्भपात कराने के लिए दिए गए आवेदन को मंजूर करने से इनकार कर दिया. मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर विचार करते हुए, हाई कोर्ट ने नाबालिग को गर्भपात की अनुमति नहीं दी। वडोदरा की एक नाबालिग ने गुजरात हाई कोर्ट में गर्भपात के लिए आवेदन किया था, क्योंकि वह इस प्रेग्नेंसी को जारी नहीं रखना चाहती थी, जबकि भ्रूण 26 हफ्ते का है. इस आवेदन की सुनवाई के दौरान, हाई कोर्ट ने वडोदरा के SSG अस्पताल के मेडिकल बोर्ड को नाबालिग की मेडिकल स्थिति का पता लगाने के लिए जांच करने का आदेश दिया. हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार, 11 मार्च को नाबालिग की मेडिकल जांच की गई और उसके बाद मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश की। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, यह पाया गया कि इस चरण में नाबालिग के लिए गर्भपात कराना चिकित्सकीय रूप से ज्यादा खतरनाक है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस चरण में गर्भपात कराने में बच्चे को जन्म देने की तुलना में अधिक जोखिम है। मेडिकल बोर्ड ने आगे कहा कि अगर बच्चा जीवित पैदा होता है, तो उसे सांस लेने में तकलीफ और रक्तस्राव जैसी गंभीर मेडिकल समस्याएं हो सकती हैं, और ऐसी स्थिति में, बच्चे को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखने की जरूरत पड़ सकती है। नाबालिग के भविष्य के लिए दिए अहम आदेश मेडिकल बोर्ड की इस राय को ध्यान में रखते हुए, गुजरात हाई कोर्ट ने नाबालिग को गर्भपात की अनुमति देने से इनकार कर दिया. इसके साथ ही, हाई कोर्ट ने नाबालिग के हितों और भविष्य को ध्यान में रखते हुए कुछ अहम आदेश भी दिए हैं. कोर्ट ने कहा है कि बच्चे को जन्म देने के लिए अस्पताल द्वारा नाबालिग को उचित मेडिकल देखभाल में मदद की जानी चाहिए. बच्चे के जन्म के बाद, नाबालिग की इच्छा जानने के बाद उसे किसी बच्चा गोद लेने वाली एजेंसी को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए. अगर नाबालिग अपने परिवार के साथ नहीं रहना चाहती है, तो उसे किसी महिला आश्रय गृह में रखने की व्यवस्था की जानी चाहिए। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि नाबालिग की डिलीवरी का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी. इसके अलावा, राज्य सरकार बच्चे के जन्म के बाद छह महीने तक नाबालिग और बच्चे की देखभाल और इलाज का खर्च भी उठाएगी. अदालत ने आदेश दिया है कि नाबालिग के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उसे व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाए और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) उसकी आगे की शिक्षा की व्यवस्था के संबंध में निर्णय ले। हाई कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि DLSA के सचिव इस पूरी प्रक्रिया पर लगातार नजर रखें, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इसका ठीक से पालन हो रहा है। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील भौमिक शाह ने बताया कि नाबालिग की स्थिति और उसकी इच्छाओं को अदालत के सामने रखा गया था. हालांकि, अदालत ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया, क्योंकि रिपोर्ट में गर्भपात से जुड़े चिकित्सीय जोखिमों की बात कही गई थी. उन्होंने आगे कहा कि अदालत ने नाबालिग के स्वास्थ्य, सुरक्षा और भविष्य को ध्यान में रखते हुए, उसे जरूरी सहायता और सुरक्षा प्रदान करने के लिए राज्य सरकार को विस्तृत निर्देश भी दिए हैं।

धार्मिक स्थलों की एंट्री अपडेट: बदरीनाथ-केदारनाथ में गैर हिंदुओं पर प्रतिबंध

देहरादून उत्तराखंड के चारधाम मंदिरों में विशेष धार्मिक महत्व रखने वाले बदरीनाथ-केदारनाथ समेत 47 मंदिरों में गैर सनातनियों के प्रवेश पर पाबंदी का फैसला लिया गया है। मंदिर समिति बीकेटीसी ने हाल ही में यह कड़ा कदम उठाया। समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि यह पाबंदी केवल उन लोगों पर लागू होगी जो सनातन धर्म में विश्वास नहीं रखते हैं और इसका मुख्य उद्देश्य चारधाम यात्रा और अन्य मंदिरों की पवित्रता और मर्यादा को बनाए रखना है। इस मामले में अब सरकार का रिएक्शन आया है। बदरीनाथ धाम, केदारनाथ में गैर सनातियों के प्रवेश पर रोक के बीकेटीसी के फैसले का सरकार अध्ययन करेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मीडिया कर्मियों से बातचीत में कहा कि बीकेटीसी का फैसला अभी सरकार के पास नहीं आया है। उन्होंने कहा कि जब यह प्रस्ताव सरकार के पास आएगा, उसका एक्ट के अनुसार अध्ययन किया जाएगा। सभी पक्षों से चर्चा के करने के बाद ही अंतिम निर्णय किया जाएगा। प्रतिबंध गर्भगृह और मुख्य परिसर में लागू समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि यह प्रतिबंध मंदिर के गर्भगृह और मुख्य परिसर के भीतर लागू होगा। उन्होंने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि केवल उन लोगों को ही धामों के दर्शन करने चाहिए जो सनातन धर्म में सच्ची श्रद्धा और विश्वास रखते हैं। गौरतलब है कि इस साल जनवरी में ही समिति ने ऐसे प्रतिबंध लगाने के संकेत दिए थे, जिस पर अब आधिकारिक मुहर लग गई है। चारधाम यात्रा के लिए 121 करोड़ बजट पास इसी बैठक में बीकेटीसी ने आगामी चारधाम यात्रा 2026-27 के लिए 121 करोड़ का बजट भी पास किया है। इस कुल राशि में से 57.5 करोड़ बदरीनाथ धाम और 63.6 करोड़ केदारनाथ धाम की व्यवस्थाओं के लिए आवंटित किए गए हैं। साथ ही, मंदिर के पुजारियों (तीर्थ पुरोहितों) की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए ‘तीर्थ पुरोहित कल्याण कोष’ बनाने के फैसले को भी बोर्ड ने हरी झंडी दे दी है। यह कोष पुजारियों को वित्तीय सहायता और अन्य कल्याणकारी लाभ प्रदान करेगा। 19 अप्रैल को खुल रहे कपाट 2026 की यात्रा के लिए कपाट खुलने की तारीखें भी तय हो चुकी हैं। केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल को खुलेंगे, जबकि बदरीनाथ मंदिर के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के कपाट अक्षय तृतीया के अवसर पर 19 अप्रैल को खुलेंगे। हर साल बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मंदिर समिति ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।

Iran War: होर्मुज से पार पाने के लिए नौसेना से संवाद जरूरी, ईरान ने स्पष्ट किया रुख

नई दिल्‍ली होर्मुज स्‍ट्रेट से जहाज लेकर जाने के लिए भारत लगातार ईरान से बातचीत कर रहा है. इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान सामने आया है, जिसका कहना है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने के लिए जहाज़ों को ईरान की नौसेना के साथ तालमेल बिठाना होगा। नौसेना के साथ बातचीत करने के बाद ही आप तेल-गैस जहाजों से लेकर जा सकते हैं. इस बयान से साफ है कि ईरान की नौसेना ‘होर्मुज स्‍ट्रेट’ पर नजर बनाए हुए है और उसका पूरा कंट्रोल है. रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने गुरुवार को मेहर समाचार एजेंसी द्वारा जारी एक बयान में कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने के लिए जहाज़ों को ईरान की नौसेना के साथ बातचीत करनी होगी। ऐसे में ईरान का यह संकेत साफ है कि वह इजरायल और अमेरिका सर्पोटिव जहाजों को छोड़कर बाकी देशों की जहाजों को ‘स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से गुजरने की अनुमति दे सकता है, लेकिन हमला करने वाले देशों को अनुमति नहीं देगा. यही बात ईरान के उप विदेश मंत्री ने भी स्‍पष्‍ट किया है। हमला करने वालों को अनुमति नहीं एएफपी के अनुसार, ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा कि कुछ देशों ने जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन के बारे में हमसे बातचीत की है और हमने उनके साथ सहयोग किया है. जहां तक ​​ईरान का सवाल है, हमारा मानना ​​है कि जिन देशों ने आक्रमण में साथ दिया, उन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन का लाभ नहीं मिलना चाहिए। होर्मुज स्‍ट्रेट को बंद रखेगा ईरान वहीं इस रिपोर्ट में आगे कहा गया कि नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने गुरुवार को अपने पिता की हत्या के बाद पहली बार बयान दिया और अपने एक चुनौती भरे बयान में कहा कि ईरान अपनी लड़ाई जारी रखेगा और अमेरिका-इज़राइल के खिलाफ एक दबाव के तौर पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद रखेगा। खामेनेई का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका बार-बार यह दावा कर रहा है कि ईरान के पास अब कुछ भी नहीं बचा है. ट्रंप का दावा है कि वह जब चाहें, तब युद्ध को समाप्‍त कर सकते हैं. वहीं अमेरिका अभी भी जहाजों को उस रास्‍ते से ले जाने को लेकर कतरा रहा है। 100 डॉलर के पार कच्‍चा तेल  मिडिल ईस्‍ट से तेल की सप्‍लाई बाधित होने के बाद कच्‍चे तेल की कीमतों में उछाल आया है. अभी ब्रेंट क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है. वहीं डब्‍ल्‍यूटीआई कच्‍चा तेल 95 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है. एलएनजी के दाम में भी तेजी देखी जा रही है. वहीं ईरान का कहना है कि कच्‍चे तेल की कीमतों को वह 200 डॉलर प्रति बैरल तक लेकर जाएगा और अभी युद्ध खत्‍म नहीं करेगा।

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