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CJI के घर शादी की उम्मीद में पहुंचे कपल, रील्स की सच्चाई जानकर रह गए हैरान

नई दिल्ली यूपी-बिहार में अपने घरों से भागकर दिल्ली पहुंचे एक प्रेमी जोड़े (कपल) को सुप्रीम कोर्ट ने त्वरित राहत देने से इनकार करते हुए हाई कोर्ट जाने के लिए कहा। दरअसल, कपल ऑनर किलिंग के डर से अपने घर से भागकर दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। दोनों ने सोशल मीडिया पर रील्स देखी थी कि ऐसे कपल सुप्रीम कोर्ट में शादी कर सकते हैं और फिर उन्हें सीजेआई के घर भी ले जाया जाता है। कोर्ट की पार्किंग में एक वकील को यह कपल दिखाई दिया, जिसके बाद पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। लाइव लॉ के अनुसार, वकील हरविंदर चौधरी कपल की सुनवाई के लिए सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच पर पहुंचीं। उन्होंने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट की पार्किंग में कपल मिला। लड़की बिहार से है, जबकि लड़का यूपी से ताल्लुक रखता है। दोनों को अपने परिजनों से जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं। उन्होंने बताया कि लड़की को ज्यादा धमकी मिल रही है और कहा जा रहा है कि उसे मारकर पेड़ से लटका दिया जाएगा। वकील ने कहा कि जब यह कपल अपनी सुरक्षा के लिए तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचा तो वहां उसकी मदद करने के बजाए, उसे हिरासत में लेने की कोशिश हुई। वकील ने कहा, ”मैं उन्हें दो अन्य लॉयर्स के साथ पुलिस स्टेशन पहुंची। वहां पर मुझे हैरानी हुई। मैं कहना नहीं चाहती, क्योंकि यह व्यवस्था के प्रति काफी हल्का और गैर जिम्मेदाराना होगा, लेकिन पुलिस ने हमें हिरासत में लेने की कोशिश की। इस पर मैंने उनसे खुद को हिरासत में लेने के लिए कहा, क्योंकि मैं एक कम उम्र की लड़की को पुलिस थाने में अकेला नहीं छोड़ सकती।” इसके बाद सीजेआई ने पूछा कि आखिर यह कपल दिल्ली आया ही क्यों, इस पर वकील ने कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया पर रील्स देखी थीं। उन्हें लगा कि सुप्रीम कोर्ट में शादी होती है और सीजेआई के घर जाया जाता है। मुझे यह स्ट्रेंज एटिट्यूड लगा, क्योंकि सोशल मीडिया की वजह से। इस पर सीजेआई ने कपल को आर्टिकल 226 के तहत हाई कोर्ट जाने के लिए कहा।

NCERT किताबों पर घमासान: सरकार ने बनाई कमेटी, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई खत्म

नई दिल्ली राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कक्षा 8 की किताब में न्यायपालिका से जुड़े चेप्टर को फिर से लिखने के लिए तीन सदस्यों वाली एक विशेषज्ञ समिति का गठन हुआ है। शुक्रवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी दी। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया कि तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। इसमें पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल, जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​और जस्टिस अनिरुद्ध बोस को शामिल किया गया है। सरकार ने ये फैसला एनसीईआरटी की किताब के उस हिस्से पर हुए विवाद के बाद उठाया है, जिसमें ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ का जिक्र था। कमेटी के गठन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपनी तरफ से शुरू की गई सुनवाई को खत्म कर दिया। गौरतलब है कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने हाल ही में कक्षा 8 के लिए सामाजिक विज्ञान की पुस्तक “एक्सप्लोरिंग सोसाइटीः इंडिया एंड बियॉन्ड” (भाग-2) प्रकाशित की थी। इस पुस्तक में “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका” शीर्षक से एक पाठ शामिल था। इसमें न्याय व्यवस्था पर विवादित पाठ्य सामग्री थी। यही कारण रहा कि इस अध्याय को लेकर विभिन्न पक्षों से आपत्तियां सामने आईं। स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने इस पर आपत्ति जताई थी। सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद एनसीईआरटी ने गलती मानते हुए चैप्टर को वापस ले लिया था। एनसीईआरटी के निदेशक और परिषद के सदस्यों ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि इस अध्याय के कारण उत्पन्न स्थिति के लिए वे बिना किसी शर्त और बिना किसी स्पष्टीकरण के सार्वजनिक रूप से क्षमा चाहते हैं। एनसीईआरटी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि विवादित अध्याय वाली पूरी पुस्तक को वापस ले लिया गया है। यह पुस्तक कहीं भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। परिषद ने कहा कि अध्याय के कारण उत्पन्न असुविधा के लिए उन्हें खेद है और वे सभी संबंधित पक्षों की समझदारी की सराहना करते हैं। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि दोबारा लिखा गया चैप्टर तब तक प्रकाशित नहीं किया जाएगा, जब तक डोमेन एक्सपर्ट कमेटी इसकी समीक्षा नहीं कर लेती। इसके बाद, कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार को डोमेन एक्सपर्ट कमेटी के गठन का आदेश दिया था।

सुरक्षा मांग लेकर पहुंचे ‘मोहम्मद’ दीपक को HC की फटकार, कहा– सोशल मीडिया पर क्यों दे रहे प्रवचन?

देहरादून उत्तराखंड हाई कोर्ट ने कोटद्वार मामले में दीपक कुमार उर्फ ‘मोहम्मद’ दीपक की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके व्यवहार और मांगों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने दीपक के खिलाफ दर्फ एफआईआर को रद्द करने से इनकार करते हुए पुलिस सुरक्षा की मांग और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई जैसी अपील को दबाव बनाने की रणनीति बताया। कोर्ट ने दीपक को फटकार लगाते हुए पूछा कि एक आरोपी पुलिस सुरक्षा कैसे मांग सकता है। कोर्ट ने कहा, इस तरह की मांगों का मकसद जांच को प्रभावित करना और पूरे मामले को सनसनीखेज बनाना है। कोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि जब याचिकाकर्ता खुद एक संदिग्ध आरोपी है तो पुलिस सुरक्षा मांगने के पीछे उसका क्या मतलब है। 26 जनवरी की एक घटना को लेकर मोहम्मद दीपक के खिलाफ दंगा करने, चोट पहुंचाने और शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमानित करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि कोटद्वार में एक मुस्लिम दुकानदार, वकील अहमद के अपनी दुकान का नाम ‘बाबा’ रखे जाने पर बजरंग दल के सदस्यों ने आपत्ति जताई थी और मोहम्मद दीपक ने इसका विरोध किया था। इस दौरान बजरंग दल के सदस्यों के साथ दीपक का झगड़ा भी हुआ जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ। उस दौरान जब दीपक से उनका नाम पूछा गया, तो उन्होंने खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताया था। कोर्ट ने दीपक की मांगों पर क्यों उठाए सवाल? बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस राकेश थपलिया ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि दीपक कुमार खुद इस मामले में एक संदिग्ध आरोपी हैं। ऐसे में यह समझ से परे है कि वह पुलिस सुरक्षा की मांग कैसे कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि दीपक सोशल मीडिया के जरिए इस मामले को बेफिजूल में तूल दे रहे हैं। जज ने तीखे लहजे में कहा, आप पर कौन दबाव डाल रहा है? आप सोशल मीडिया पर प्रवचन दे रहे हैं और मामले को सनसनीखेज बना रहे हैं। दीपक ने पक्षपात का आरोप लगाते हुए जांच अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की मांग की थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि एक आरोपी का ऐसी मांग करना न केवल गलत है, बल्कि यह जांच एजेंसी के मनोबल पर असर डालने जैसा है। सोशल मीडिया पर कमेंट करने पर रोक हाई कोर्ट ने दीपक को सोशल मीडिया पर कमेंट करने से भी रोक दिया है। जस्टिस राकेश थपलियाल साफ किया कि सोशल मीडिया पर चल रही बयानबाजी पुलिस की जांच में बाधा डाल सकती है। कोर्ट ने राज्य सरकार की उस दलील पर भी कड़ी नाराजगी जताई जिसमें कहा गया था कि दीपक कुमार जांच में सहयोग करने के बजाय सोशल मीडिया पर व्यस्त हैं। कोर्ट ने दीपक कुमार के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार करते हुए पुलिस को अपनी जांच जारी रखने का निर्देश दिया। हालांकि, अदालत ने पुलिस को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि वे ‘अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य’ मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करें, क्योंकि इस मामले में सजा सात साल से कम है।

ED का शिकंजा कसता गया: पश्चिम बंगाल में 16 लोकेशनों पर छापे, 20 करोड़+ की जब्ती

नई दिल्ली प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल में अवैध कॉल सेंटर केस में बड़ी कार्रवाई की है। कोलकाता जोनल ऑफिस ने 16 मार्च 2026 को राज्य के विभिन्न शहरों, कोलकाता, हावड़ा, सिलीगुड़ी और दुर्गापुर, में कुल 16 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। ये छापेमारी टेक्नोसोलिस इन्फॉर्मेटिक्स लिमिटेड, सुराश्री कर, सुभाजीत चक्रवर्ती और उनके सहयोगियों से जुड़ी हैं। तलाशी के दौरान ईडी ने महत्वपूर्ण जब्तियां कीं। इनमें 2.5 करोड़ रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी), सोने के सिक्के, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े रिकॉर्ड, आपत्तिजनक दस्तावेज और कई डिजिटल डिवाइस शामिल हैं। इसके अलावा, जांच में कई अचल संपत्तियों की पहचान हुई, जिनमें जमीन, होटल और रिसॉर्ट आदि हैं। इनकी अनुमानित कीमत 20 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। ये संपत्तियां कथित तौर पर आपराधिक गतिविधियों से अर्जित धन से खरीदी गई थीं।  ईडी ने दो बांग्लादेशी पासपोर्ट और चार लग्जरी वाहन भी जब्त किए, जिनमें एक मर्सिडीज कार शामिल है। सिलीगुड़ी के एक स्थान से 88 विभिन्न ब्रांड की शराब की बोतलें बरामद हुईं, जिन्हें पश्चिम बंगाल आबकारी विभाग को सौंप दिया गया। यह कार्रवाई राज्य में 2026 के विधानसभा चुनावों को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाने के प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है, क्योंकि अवैध गतिविधियां राजनीतिक फंडिंग या प्रभाव से जुड़ी हो सकती हैं। यह जांच पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है, जिसमें आईपीसी 1860 और भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम 1885 की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं। आरोपी एक बड़े अवैध कॉल सेंटर नेटवर्क चला रहे थे, जिसमें मुख्य रूप से अमेरिका के नागरिकों को टारगेट किया जाता था। वे फर्जी तरीके से लोगों को ठगते थे, जैसे तकनीकी सहायता या अन्य सेवाओं के नाम पर, और फिर उनके बैंक खातों से पैसे निकालते थे। इस धोखाधड़ी से कमाया गया पैसा गैर-कानूनी चैनलों से भारत लाया जाता था। पीएमएलए के तहत जांच में सामने आया कि टेक्नोसोलिस इन्फॉर्मेटिक्स लिमिटेड और स्वर्गीय दिबांगकर धारा, सुराश्री कर, सुभाजीत चक्रवर्ती सहित अन्य कंपनियों के नाम पर कई बैंक खाते खोले गए थे। इन खातों का इस्तेमाल विदेशी मुद्रा प्राप्त करने और ‘अपराध से प्राप्त धन’ को लॉन्डर करने के लिए किया जाता था। ये कंपनियां अवैध कॉल सेंटर के संचालन से जुड़ी हुई हैं। ईडी के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ सख्त रुख का हिस्सा है। छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेजों और डिवाइस की जांच से और अधिक खुलासे होने की संभावना है। आगे की जांच जारी है, जिसमें और गिरफ्तारियां और जब्तियां हो सकती हैं।

USS त्रिपोली की एंट्री से हलचल: क्या ईरान-अमेरिका टकराव अब निर्णायक मोड़ पर?

ईरान ईरान युद्ध का आज 21वां दिन है। एक तरफ इजरायली और अमेरिकी सेना ईरान पर मिसाइलें और बंकर बस्टर बम गिरा रहीं हैं, वहीं ईरान भी इजरायल और अमेरिका को कड़ा जवाब दे रहा है। ईरान ने एक दिन पहले ही इजरायल की हाइफा रिफायनरी पर बड़ा हमला किया है और अमेरिकी फाइटर जेट F-35 को भी मिसाइल से निशाना बनाया है। 20 दिनों की जंग में अब तक अमेरिका के तीन F-35 फाइटर जेट और 6 KC ट्रैंकर नष्ट हो चुके हैं। इस बीच, अमेरिका ने ईरान युद्ध के खात्मे की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। अमेरिका ने मिडिल-ईस्ट में तीन युद्धपोत भेजे हैं। इनमें उभयचर युद्धपोत ‘USS Tripoli’ और USS Boxer भी शामिल है। इस तरह अमेरिका 4000 नए सैनिकों की तैनाती खाड़ी देशों के करीब करने जा रहा है, जो ईरान से जंग लड़ेंगे। अमेरिका जिन युद्धपोतों को मिडिल-ईस्ट में भेज रहा है, वे आधुनिक मिसाइलों से लैस हैं। इनके अलावा उन पर F-35 फाइटर जेट भी तैनात हैं। माना जा रहा है कि होर्मुज स्ट्रेट के पास बढ़े तनाव को कम करने और उसे ईरानी कब्जे से उसे मुक्त कराने के लिए अमेरिका ने ये कदम बढ़ाया है। सैटेलाइट तस्वीरों में USS Tripoli को दक्षिण चीन सागर से गुजरते हुए देखा गया है। उसके साथ दो एस्कॉर्ट शिप भी देखे गए हैं। इस युद्धपोत के 22-23 मार्च के आस-पास युद्ध क्षेत्र में प्रवेश करने की उम्मीद है। क्या है USS त्रिपोली? यूएसएस त्रिपोली (USS Tripoli – LHA-7) अमेरिका-श्रेणी का दूसरा उभयचर हमलावर जहाज है, जिसे विशेष रूप से हवाई हमलों और मरीन सैनिकों को तैनात करने के लिए विकसित किया गया है। यह करीब 2500 सैनिक ले जाने में सक्षम है। फिलहाल इस पर 2000 नौसैनिक तैनात हैं। USS Tripoli की लंबाई करीब 844 फीट और वजन 45,000–50,000 टन के बीच है। इस पर F-35B लाइटनिंग II जैसे आधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट, MV-22 Osprey (ऑस्प्)रे और विभिन्न प्रकार के अटैक हेलीकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं। इसका मुख्य काम समुद्री मार्गों की सुरक्षा करना और जरूरत पड़ने पर जमीनी हमले के लिए सैनिकों को तैयार रखना है। इसमें लैंडिंग क्राफ़्ट के लिए “वेल डेक” नहीं है। इस डिज़ाइन की वजह से इसमें एक बड़ा हैंगर, ज़्यादा एविएशन फ़्यूल और विमानों के रखरखाव के लिए अधिक जगह मिल पाती है। अपने साथ MEU जवान ले जा रहा USS Tripoli अपने साथ 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट (MEU) के जवानों को ले जा रहा है। यह एक रैपिड-रिस्पॉन्स फ़ोर्स है जिसमें जापान के ओकिनावा में तैनात लगभग 2,200 मरीन और नौसेना के नाविक शामिल हैं। MEU में जमीनी और हवाई, दोनों तरह की लड़ाकू इकाइयाँ शामिल हैं। Fox News की एक रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन USS Tripoli ARG को 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट (MEU) के साथ तैनात कर रहा है, जो उसके अपने स्ट्राइक ग्रुप का हिस्सा है। ईरान के लिए सख्त संदेश न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय पश्चिम एशिया में 50,000 से ज़्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। तीनों युद्धपोत खासकर USS त्रिपोली के आने से इस क्षेत्र में पहले से मौजूद अमेरिकी सेना की बड़ी टुकड़ी और बड़ी हो जाएगी और ईरान पर सैन्य दबाव बढ़ने वाला है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र में अमेरिका तेजी से जवाब देने की तैयारी कर रहा है क्योंकि हॉर्मुज़ जैसे अहम तेल मार्ग को सुरक्षित रखना प्राथमिकता है। अमेरिका का हालिया कदम ईरान को सख्त संदेश भी माना जा रहा है। ऐसे में US ने तीन नए युद्धपोतों को भेजकर साफ संकेत दिए हैं कि वह ईरान के खिलाफ हर तरह के ऑप्शन (हवाई, समुद्री और जमीन पर) तैयार रखना चाहता है।  

ईरानी जहाज डूबा, पाकिस्तान ने खेला दुष्प्रचार का खेल—सच सामने आते ही खुल गई सच्चाई

नई दिल्ली श्रीलंका के तट के पास ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना पर अमेरिका के हमले और फिर इसके डूबने को लेकर पाकिस्तान ने अलग ही प्रोपेगैंडा शुरू कर दिया था। पाकिस्तान आधारित नेटवर्क ने सोशल मीडिया पर भारत के खिलाफ जाल बिछाया और बदनाम करने की कोशिश की। उसका कहना था कि भारत ने ही अमेरिका को ऐसी जानकारी दी थी जिससे उसने ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाया। हालांकि जब इस पूरे मामले को खंगाला गया तो सारी बातें सामने आ गईं। पाकिस्तानी आईएसआई और उससे जुड़े लोगों ने ही इस तरह की झूठी जानकारी का अभियान शुरू किया था। 4 मार्च को श्रीलंका के तट पर अमेरिका ने IRIS देना पर हमला कर दिया था। इसके बाद यह शिप डूब गया। अब इसके बाद सोशल मीडिया पर एक नैरेटिव गढ़ा गया कि भारत ने ही अमेरिका को संवेदनशील जानकारियां दीं। बाद में पता लगाया गया तो यही जानकारी मिली कि यह केवल झूठ जानकारी थी और पाकिस्तान के सोशल मीडिया हैंडल से ही इस तरह की बातें की जा रही थीं। OSINT ग्रुप ने पता लगाया कि 4 मार्च को ही @TacticalTribun नाम के अकाउंट से इस तरह की पोस्ट शेयर की गई थी। इसके बाद ऐसे अकाउंट्स से इस बात को आगे बढ़ाया गया जिनमें से 40 फीसदी पाकिस्तानी थे। इसके अलावा ये ऐसे लोग थे जो कि किसी ना किसी तरह पाकिस्तान से जुड़े हुए हैं। 100 अकाउंट से लगभग 500 पोस्ट इस तरह की की गईं। पूरी कोशिश की गई कि इस बात को वायरल करवा दिया जाए। ओपेन सोर्स इंटेलिजेंस असेसमेंट के मुताबिक घटना के तीन से 6 घंटे के अंदर ही इस तरह की जानकारी शेयर करने वाले लोग ऐक्टिव हो गए थे। इसके बाद हैश टैग शुरू किया गया और 80 यूजर इसे फैलाने में लग गए। इसके बाद आईआरआईएस देना की तस्वीरों के साथ पोस्ट शेयरिंग शुरू हो गई। एनालिस्ट्स् ने बताया कि इस अफवाह को फैलाने के लिे पाकिस्तान के लगभग 40 फीसदी अकाउंट, प्रो ईरान 15 फीसदी, प्रो फिलिस्तीन 12 फीसदी और एंटी वार कम्युनिटी के 8 फीसदी अकाउंट के इस्तेमाल किया गया। इसमें से बहुत सारे फर्जी अकाउंट भी थे। इस मामले के जानकार लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया पर कई एआई वीडियो जारी करके भी झूठ फैलाने की कोशिश की गई। क्या है श्रीलंका का स्टैंड श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने संसद को बताया कि सरकार ने मार्च की शुरुआत में अमेरिका के दो लड़ाकू विमानों को देश के दक्षिण-पूर्व स्थित मत्ताला अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उतरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। सरकार ने मार्च की शुरुआत में अमेरिका के दो लड़ाकू विमानों को देश के दक्षिण-पूर्व स्थित मत्ताला अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उतरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। चार मार्च को अमेरिका ने द्वीप के दक्षिणी तटीय शहर गाले के निकट ईरान के ‘आईआरआईएस देना’ पोत को निशाना बनाया, जिसमें 84 नाविकों की मौत हो गई, जबकि 32 को बचा लिया गया। यह पोत भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित नौसैनिक बेड़े की समीक्षा में भाग लेने के बाद स्वदेश लौट रहा था। दो दिन बाद ईरान का एक अन्य पोत ‘आईआरआईएस बुशहर’ 219 नाविकों के साथ कोलंबो बंदरगाह में प्रवेश की अनुमति चाहता था। श्रीलंका ने उसे कोलंबो तट के बाहर लंगर डालने के बाद पूर्वी बंदरगाह त्रिंकोमाली की ओर जाने को कहा। पोत के 204 नाविकों को फिलहाल कोलंबो के निकट नौसैनिक प्रतिष्ठान में ठहराया गया है।  

भारत में घरेलू LPG और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है, सरकार ने दी जानकारी

नई दिल्ली  पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण ऊर्जा की सप्लाई प्रभावित हुई है. जिसके दुनिया में ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं. भारत में भी इसका असर दिखने लगा है. हालांकि, सरकार ने आश्वासन दिया है कि देश के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने शुक्रवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि आज की स्थिति के अनुसार सभी रिफाइनरियां उच्चतम क्षमता पर संचालित हो रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है. उन्होंने कहा कि घरेलू LPG उत्पादन जारी है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, देशभर में किसी भी वितरक (डिस्ट्रीब्यूटर) पर ड्राय-आउट की कोई सूचना नहीं है. प्राकृतिक गैस के संबंध में, सभी उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि जहां संभव हो, वे पीएनजी (PNG) पर शिफ्ट करें. इस संबंध में राज्य सरकारों को भी पत्र लिखकर अनुरोध किया गया है. पैनिक बुकिंग में कमी आई… सुजाता शर्मा ने कहा कि शीर्ष 15 गैस क्षेत्रों में लगभग 13,700 से अधिक कनेक्शन दिए गए हैं और लगभग 7,500 उपभोक्ता एलपीजी से PNG पर शिफ्ट हुए हैं. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बुकिंग लगभग 93% है और डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड के माध्यम से की जा रही है. पैनिक बुकिंग में कमी आई है और कल लगभग 55 लाख रीफिल बुकिंग प्राप्त हुईं. उन्होंने कहा कि एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी सामान्य रूप से जारी है. वाणिज्यिक एलपीजी के लिए लगभग 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने आवंटन आदेश जारी किए हैं और पिछले एक सप्ताह में लगभग 11,300 टन वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति की गई है. सभी राज्यों के पास पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है. खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी 22 भारतीय जहाज सुरक्षित वहीं, संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पोत, पत्तन एवं जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि पिछले 24 घंटों में किसी भी समुद्री घटना की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है. खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हमारे सभी 22 जहाज और 611 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं, जिनकी निगरानी डीजी शिपिंग द्वारा लगातार की जा रही है. उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटों में 24×7 हेल्पलाइन, संचार केंद्र और कंट्रोल रूम को लगभग 125 कॉल और 200 से अधिक ईमेल प्राप्त हुए, जिनका समय पर जवाब दिया गया. इसके अलावा, पिछले 24 घंटों में 25 भारतीय नाविकों को सुरक्षित रूप से वापस लाया गया है. सिन्हा ने बताया कि न्यू मंगलौर पोर्ट ने क्रूड (Crude) और LPG से संबंधित कार्गो जहाजों के लिए वेवर (छूट) प्रदान करने हेतु एक सर्कुलर जारी किया है, जो 14 मार्च से 31 मार्च तक मान्य है. इसके अलावा, लगभग 3,500 वर्ग मीटर का अतिरिक्त कवर शेड और 76,000 वर्ग मीटर का ओपन यार्ड अतिरिक्त भंडारण क्षमता के लिए निर्धारित (ईयरमार्क) किया गया है. पश्चिम एशिया संकट पर विदेश मंत्रालय का बयान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओमान, मलेशिया, फ्रांस, जॉर्डन और कतर के नेताओं से बात की. उन्होंने पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत का पक्ष रखा और बातचीत, तनाव कम करने और शांति पर जोर दिया. उन्होंने ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की, जबकि सभी पक्षों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन और लगातार तालमेल के लिए अपना समर्थन दोहराया. उन्होंने त्योहारों की शुभकामनाएं भी दीं और भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी में मिले सहयोग की सराहना की. जायसवाल ने कहा कि मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय के साथ भी इसी तरह की चर्चाएं हुईं, जिसमें स्थिरता, सामान और ऊर्जा के निर्बाध आवागमन और लगातार तालमेल के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई. ईरान में फंसे 913 भारतीयों को वापस लाया गया उन्होंने कहा कि भारत खाड़ी देशों से लोगों को निकालने के अपने प्रयास जारी रखे हुए है; अब तक आर्मीनिया और अजरबैजान के रास्ते 913 फंसे हुए भारतीय नागरिकों को वापस लाया जा चुका है. विदेश मंत्रालय के कंट्रोल रूम ने कई कॉल संभाले हैं, जो मुख्य रूप से व्यापारिक जहाजों से संबंधित थे. सरकार लगातार सक्रिय है और भारतीयों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्थिति पर नजर रख रही है.

अमेरिकी फाइटर जेट को लैंडिंग की इजाजत नहीं, श्रीलंका के राष्ट्रपति बोले- हम तटस्थ रहते हुए निर्णय लेंगे

कोलंबो  श्रीलंका ने अमेरिका को अपनी जमीन पर जंगी जहाजों को उतारने की अनुमति नहीं दी है. ईरान जंग के दौरान अमेरिका अपने दो युद्धक विमानों को श्रीलंका के दक्षिणपूर्व मट्टाला अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर लैंड करना चाहता था. लेकिन राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने अमेरिका को इसकी अनुमति नहीं दी।  शुक्रवार को श्रीलंका के राष्ट्रपति ने संसद में इस बात की घोषणा की है. संसद में इस फैसले की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने  कहा कि जिबूती से अमेरिका के दो युद्धक विमानों ने 4 और 8 मार्च को श्रीलंका में  लैंड करने की अनुमति मांगी थी. लेकिन अमेरिका के ये दोनों अनुरोध अस्वीकार कर दिए गए।  राष्ट्रपति ने कहा, “कई दबावों के बावजूद हम अपनी तटस्थता बनाए रखना चाहते हैं. हम झुकेंगे नहीं. मध्य-पूर्व का युद्ध चुनौतियां खड़ी करता है, लेकिन तटस्थ बने रहने के लिए हम हर संभव प्रयास करेंगे।  वे जिबूती के एक बेस से आठ एंटी-शिप मिसाइलों से लैस दो लड़ाकू विमान मट्टाला इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लाना चाहते थे, और हमने साफ मना कर दिया,” श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने कहा।  दिसानायके का यह बयान दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिकी विशेष दूत सर्जियो गोर के साथ उनकी मुलाकात के एक दिन बाद आया है।  एक बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति दिसानायके और सर्जियो गोर ने महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा और बंदरगाहों को सुरक्षित बनाने, आपसी लाभकारी व्यापार और वाणिज्यिक संबंधों को मजबूत करने, तथा एक स्वतंत्र, खुला और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने के अमेरिकी प्रयासों पर चर्चा की।  4 मार्च को, अमेरिका ने गाले के पास ईरानी फ्रिगेट ‘आइरिस डेना’ पर टॉरपीडो से हमला कर दिया। गाले इस द्वीप का दक्षिणी तटीय शहर है। इस हमले में 84 नाविक मारे गए, जबकि 32 को बचा लिया गया। यह जहाज़ भारत के विशाखापत्तनम से एक नौसैनिक बेड़े की समीक्षा अभ्यास के बाद अपने वतन लौट रहा था। दो दिन बाद, एक दूसरा ईरानी जहाज़, ‘आइरिस बुशेहर’, 219 नाविकों के साथ कोलंबो बंदरगाह में प्रवेश की अनुमति मांगने लगा।  श्रीलंका ने इस जहाज़ को, जो यहाँ बंदरगाह के बाहर लंगर डाले खड़ा था, वहाँ से हटाकर पूर्वी बंदरगाह ‘त्रिंकोमाली’ भेजने का निर्देश दिया। इन नाविकों में से कुल 204 नाविकों को अब कोलंबो के पास स्थित नौसैनिक सुविधा केंद्र में ठहराया गया है। ईरान शिप को दी थी पनाह 4 मार्च 2026 को अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के दक्षिणी तट से लगभग 80 किमी दूर अंतरराष्ट्रीय जल में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर टॉरपीडो हमला किया. इस हमले में जहाज डूब गया. इस हमले में कम से कम 87 ईरानी नौसैनिक मारे गए, कई लापता हुए और जहाज पर सवार लगभग 180 लोगों में से 32 घायल बचाए गए।  इस दौरान श्रीलंका ने ईरानी जहाज से मिले डिस्ट्रेस सिग्नल पर तुरंत प्रतिक्रिया दी. श्रीलंकाई नौसेना और वायुसेना ने बड़े पैमाने पर खोज-बचाव अभियान चलाया. वे घटनास्थल पर पहुंचे. इस दौरान श्रीलंका ने 87 शव बरामद किए और 32 घायल ईरानी नौसैनिकों को बचाकर गाले में इलाज करवाया।  इसके अलावा श्रीलंका ने ईरानी सैनिकों के शव को ससम्मान ईरान भेजा. इसके अलावा हमले के एक दिन बाद एक अन्य ईरानी सहायक जहाज IRIS Bushehr ने इंजन खराबी का हवाला देकर श्रीलंका से मदद मांगी. श्रीलंका ने मानवीय आधार पर इसे अनुमति दी।   

लंबी दूरी के हमले का दावा या डराने की रणनीति? पाकिस्तान की नापाक चाल का विश्लेषण

इस्लामाबाद हाल ही में अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने सीनेट इंटेलिजेंस कमिटी के सामने 2026 एनुअल थ्रेट असेसमेंट पेश किया। इसमें उन्होंने रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान के साथ पाकिस्तान को भी उन देशों की सूची में शामिल किया है जो ऐसी मिसाइल डिलीवरी सिस्टम विकसित कर रहे हैं जिनकी रेंज अमेरिकी मुख्य भूमि तक पहुंच सकती है। गबार्ड ने स्पष्ट कहा कि ‘पाकिस्तान की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल डेवलपमेंट संभावित रूप से इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल्स (ICBMs) तक जा सकती है, जिनकी रेंज अमेरिका को टारगेट करने लायक होगी।’ आतंकवाद को पालने वाले पाकिस्तान के पास वर्तमान में सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली ऑपरेशनल मिसाइल शाहीन-3 है। इसकी रेंज 2,750 किलोमीटर है। यानी यह मिसाइल भारत के प्रमुख शहरों और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर तक पहुंच सकती है। शाहीन-3 कोई ICBM नहीं हालांकि, शाहीन-3 कोई अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) नहीं है। किसी भी बैलिस्टिक मिसाइल को ICBM की श्रेणी में आने के लिए कम से कम 5,500 किलोमीटर की रेंज की आवश्यकता होती है। वहीं, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच की दूरी 11,000 किलोमीटर से अधिक है। ऐसे में अमेरिका का जिक्र क्यों हो रहा है? यही 11000 किलोमीटर की दूरी अब अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक गंभीर रिपोर्ट के केंद्र में आ गई है। भले ही गबार्ड ने पाकिस्तानी मिसाइल कार्यक्रम की कोई सटीक समय-सीमा नहीं बताई, लेकिन अन्य अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान को एक कार्यात्मक लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल विकसित और तैनात करने में अभी कई साल से लेकर एक दशक तक का समय लग सकता है। पाकिस्तान का लक्ष्य अमेरिका क्यों? खुद को बचाने की नापाक चाल इस्लामाबाद का हमेशा से यही आधिकारिक रुख रहा है कि उसके परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम केवल भारत के खिलाफ बनाए गए हैं। 2025 में भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद, पाकिस्तान ने ‘आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड’ के गठन की घोषणा की थी जो छोटे देशों की क्षेत्रीय रक्षा और निवारक रणनीतियों के अनुरूप है। जब पाकिस्तान के पास क्षेत्रीय स्तर (भारत) पर हमले रोकने के लिए पर्याप्त हथियार मौजूद हैं, तो उसे ICBM की आवश्यकता क्यों है? विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस तरह की मिसाइल इसलिए भी बना रहा है ताकि उसके परमाणु हथियारों पर अमेरिका के किसी भी प्रकार के ‘निवारक हमले’ को रोका जा सके। इसके अलावा, पाकिस्तान भविष्य में किसी भी संभावित जंग में अमेरिका को सैन्य रूप से भारत के पक्ष में हस्तक्षेप करने से हतोत्साहित करना चाहता है। सीधे शब्दों में कहें तो पाकिस्तान खुद को बचाने की नापाक चाल चल रहा है। पाकिस्तान ने उत्तर कोरिया और ईरान की वर्तमान स्थिति से भी सबक लिया है। अमेरिका उत्तर कोरिया को एक बड़ा खतरा मानता है, लेकिन उसके पास परमाणु हथियार होने के कारण सीधे हमले से बचता है। दूसरी ओर, ईरान पर अमेरिकी बमबारी इसलिए हो रही है क्योंकि उसके पास अभी तक एक सक्षम परमाणु प्लेटफॉर्म नहीं है। भड़क गया पाकिस्तान पाकिस्तानी विश्लेषकों ने अमेरिकी दावों को सिरे से खारिज किया है। अल जजीरा से बात करते हुए परमाणु सुरक्षा विद्वान राबिया अख्तर ने कहा कि अमेरिकी आकलन में एक पुरानी खामी है- वे जमीनी और ठोस विश्लेषण के बजाय ‘सबसे खराब स्थिति की अटकलों’ को आधार बनाते हैं। इसके बावजूद, अमेरिकी खुफिया विभाग इस बात पर कायम है कि पाकिस्तान की ‘विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक’ नीति में अब वैश्विक स्तर पर शक्ति प्रदर्शन का तत्व भी शामिल हो गया है। ऐसा इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि इस्लामाबाद ने अमेरिका तक पहुंचने वाली ICBM विकसित करने की बात से न तो कभी साफ इनकार किया है और न ही इसकी पुष्टि की है। वर्तमान जमीनी हकीकत आज की तारीख में, पाकिस्तान के पास ऐसी कोई मिसाइल नहीं है जो अंतरमहाद्वीपीय रेंज के करीब भी हो। उनकी सबसे उन्नत MIRV (मल्टीपल वारहेड) सक्षम प्रणाली अबाबील है, जिसकी अनुमानित रेंज केवल 2,200 किमी है। वर्तमान में 2,750 किमी रेंज वाली शाहीन-3 ही उनकी सबसे लंबी दूरी की ऑपरेशनल मिसाइल बनी हुई है।  

बॉर्डर पर फिर भड़की चिंगारी: युद्धविराम के बावजूद पाकिस्तान पर अफगानिस्तान का बड़ा आरोप

काबुल पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने ईद के मद्देनजर 18 से 23 मार्च अस्थायी युद्ध विराम पर सहमति जताई है, लेकिन अफगानिस्तान का आरोप है कि पाकिस्तान की सेना युद्ध विराम के बावजूद गोलाबारी कर रही है। अफगानिस्तान के सशस्त्र बलों के प्रमुख फसीहुद्दीन फितरत ने पाकिस्तान की सेना पर डूरंड लाइन पर युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप लगाया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सीमा क्षेत्रों में पाकिस्तानी सेना के किए हमलों में कई लोगों की मौत हुई है। यह जानकारी अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के बयान में दी गई। फितरत ने कहा कि युद्धविराम के बावजूद पाकिस्तान की लगातार हो रही गोलाबारी यह दिखाती है कि इस्लामाबाद इस समझौते को लेकर गंभीर नहीं है और वह धोखा दे रहा है। उन्होंने कहा कि हालात और न बिगड़ें, इसलिए अफगानिस्तान ने अब तक कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की है और वह युद्धविराम के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए हुए है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसे हमले दोबारा हुए तो युद्धविराम का कोई मतलब नहीं रह जाएगा और तालिबान पाकिस्तान की कार्रवाई का निर्णायक जवाब देगा। बुधवार को अफगानिस्तान ने कहा था कि वह ईद के मौके पर अपनी ‘रद अल-जुल्म’ रक्षात्मक कार्रवाई को रोक देगा। यह फैसला सऊदी अरब, कतर और तुर्किये जैसे मध्यस्थ देशों के अनुरोध पर किया गया था। पाकिस्तान ने भी ईद के लिए सैन्य कार्रवाई में अस्थायी विराम देने की घोषणा की थी। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा था कि यह फैसला क्षेत्रीय मध्यस्थों के आग्रह पर लिया गया। अधिकारियों के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में 70 से अधिक तोप के गोले दागे। स्थानीय मीडिया के अनुसार, कुनार के सूचना और संस्कृति विभाग के प्रमुख जिया-उर-रहमान स्पिन घर ने बताया कि नरई जिले के बारिकोट, डोकलाम और त्सोंगलई समेत कई इलाकों में 35 गोले दागे गए। इसके अलावा मनोगई जिले के कुछ हिस्सों में 37 गोले गिरने की खबर है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है, जबकि अधिकारी हालात पर नजर बनाए हुए हैं। 16 मार्च को पाकिस्तानी हवाई हमले में काबुल के ओमिद नशामुक्ति केंद्र/अस्पताल को निशाना बनाया गया। जब अफगानिस्तान ने आम नागरिकों पर हमले को लेकर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घेरा तो पाकिस्तान ने कहा कि उसने किसी नागरिक ठिकाने को नहीं, बल्कि सैन्य ढांचे और “आतंकी इन्फ्रास्ट्रक्चर” को निशाना बनाया था। पिछले मंगलवार को अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने काबुल पर पाकिस्तानी हवाई हमलों की निंदा की थी और इसे मानवीय तथा इस्लामी सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन बताया था। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तानी हमले में 408 से अधिक लोग मारे गए और 260 से ज्यादा घायल हुए, जिनमें अधिकांश नशामुक्ति केंद्र में इलाज करा रहे मरीज थे। काबुल में राजनयिकों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मुत्ताकी ने कहा था कि पाकिस्तानी हवाई हमले में समाज के सबसे कमजोर वर्गों में से एक यानी नशे की लत का इलाज करा रहे लोगों को निशाना बनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि फरवरी से अब तक अफगानिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में नागरिक इलाकों पर बार-बार हमले हुए हैं, जिससे कूटनीतिक समाधान पर भरोसा कम हुआ है। मुत्ताकी ने चेतावनी दी कि अगर हमले जारी रहे तो अफगान बल रक्षात्मक जवाब देता रहेगा। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा जरूर करेगा।

लंबी कैद के बाद बाहर आए शरजील इमाम, रिहाई पर खुशी जाहिर, कोर्ट ने रखीं ये शर्तें

नई दिल्ली दिल्ली दंगों का आरोपी शरजील इमाम करीब 6 साल बाद जेल से बाहर निकला है। इमाम को दिल्ली की एक अदालत ने 10 दिनों की अंतरिम जमानत दी है। शुक्रवार को जब उसने तिहाड़ के गेट से बाहर कदम रखा तो ‘छोटी आजादी’ की बड़ी खुशी उसके चेहरे पर नजर आई। वह मीडिया के कैमरों के सामने मुस्कुराता हुआ और विक्ट्री साइन बनाता नजर आया। दिल्ली की एक अदालत ने 9 मार्च को 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी शरजील इमाम को पारिवारिक समारोह में शामिल होने के लिए कई शर्तों के साथ 10 दिन की अंतरिम जमानत दी थी। इमाम को अपने दोस्तों, रिश्तेदारों या परिवार के सदस्यों के अलावा किसी से भी नहीं मिलने और याचिका में उल्लिखित स्थानों के अलावा किसी अन्य स्थान पर नहीं जाने के लिए कहा गया है। इसके अलावा उसे सोशल मीडिया का उपयोग करने से भी प्रतिबंधित किया गया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी की अदालत में इमाम ने अपने भाई के विवाह समारोह में शामिल होने और ईद के त्योहार के दौरान परिवार के साथ समय बिताने के लिए छह सप्ताह की राहत मांगी थी। 25 मार्च को इमाम के भाई की शादी होनी है। अदालत ने इमाम को 50,000 रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने का भी निर्देश दिया। विक्ट्री साइन से दिखाई अपनी खुशी औपचारिकताओं को पूरी करने के बाद शुक्रवार को शरजील इमाम तिहाड़ से बाहर आया। रिमझिम बारिश के बीच उसे परिवार के कुछ लोग लेने पहुंचे थे। शरजील इमाम ने मीडिया की ओर से पूछे गए किसी सवाल का जवाब नहीं दिया और बचते हुए कार में जा बैठा। हालांकि, कार में बैठने के बाद वह काफी मुस्कुराता हुआ नजर आया। इसके अलावा एक बार विक्ट्री साइन बनाकर भी उसने अपनी खुशी जाहिर की। इन शर्तों का करना होगा पालन इमाम को मामले से जुड़े किसी भी गवाह या व्यक्ति से किसी भी तरह का संपर्क नहीं कर सकता है। शरजील इमाम को मामले के जांच अधिकारी को मोबाइल नंबर भी देने को कहा गया है। शरजील को 30 मार्च की शाम को जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा। 6 सप्ताह के लिए चाहता था राहत इमाम ने शादी में शामिल होने के लिए 15 मार्च से 26 अप्रैल तक छह सप्ताह की अंतरिम जमानत मांगी थी; हालांकि, अदालत ने केवल 10 दिनों की अवधि की जमानत मंजूर की। इमाम उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए दंगों से संबंधित मामले में आरोपी है, जिसमें 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हुए थे। यह हिंसा नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी। इमाम पर क्या आरोप पुलिस के अनुसार, उसने कथित तौर पर जेएनयू के मुस्लिम छात्रों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया और संचालित किया, जो लामबंदी और विरोध स्थलों की पहचान के लिए एक समन्वय तंत्र के रूप में कार्य करता था। पुलिस ने इमाम पर जंगपुरा में आयोजित उन गुप्त बैठकों में भाग लेने का आरोप लगाया है, जहां चक्का जाम और विरोध प्रदर्शनों को और तेज़ करने की रणनीति पर चर्चा हुई थी। पुलिस के अनुसार, इमाम की भूमिका केवल दिल्ली तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि उसने अलीगढ़ और अन्य स्थानों की यात्रा करके एक जनसंचालक और विचारक के रूप में भी काम किया। पुलिस ने इमाम पर शाहीन बाग विरोध स्थल के निर्माण और उसे कायम रखने में निर्णायक भूमिका निभाने का भी आरोप लगाया, जो एक प्रमुख सड़क पर चौबीसों घंटे चलने वाले लंबे विरोध प्रदर्शन में बदल गया। पुलिस ने आरोप लगाया कि इमाम की भूमिका आधारभूत और प्रारंभिक थी, और एक बार योजना शुरू हो जाने के बाद साजिश के लिए हिंसा स्थल पर शारीरिक उपस्थिति अनिवार्य नहीं होती।

मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जज की तीखी टिप्पणी

बेंगलुरु कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ शिकायत करने वाली महिला को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान शीर्ष न्यायालय ने महिला से कहा है कि अपनी लड़ाई कोर्ट में न लड़ें। साथ ही कहा है कि इस केस को उच्च न्यायालय में लेकर जाएं। महिला की तरफ से मांग की जा रही थी कि उन्हें सुरक्षा दी जाए। उन्होंने आरोप लगाए थे वह कर्नाटक से बाहर रहने के लिए मजबूर हैं। महिला ने क्या कहा बार एंड बेंच के अनुसार, महिला की तरफ से कोर्ट पहुंचे वकील ने कहा, ‘मुझे धमकियां मिल रहीं हैं। मैं कर्नाटक में प्रवेश नहीं कर पा रहीं हूं। मेरी सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है। मैं दिल्ली में रहने के लिए मजबूर हूं। मुझे बार-बार धमकियां मिल रहीं हैं।’ उन्होंने कहा कि वह कर्नाटक में अपने ही घर में रहना चाहती हैं, लेकिन ऐसा नहीं कर पा रहीं हैं। उन्होंने संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश के आरोप लगाए हैं। वकील ने कहा, ‘मैं वापस जाना चाहती हूं और अपने आवास में रहना चाहती हूं। मैंने शिकायतें दर्ज कराईं हैं, अपने पक्ष में कोर्ट के आदेश भी हासिल किए हैं, लेकिन इसके बाद भी धमकियां दी जा रहीं हैं। मेरे घर पर पत्थरबाजी हुई, गुंडे आए थे और तोड़फोड़ करके गए हैं। वो मेरी संपत्ति को हथियाना चाहते हैं।’ क्या बोला कोर्ट कोर्ट ने कहा, ‘कर्नाटक के मुख्यमंत्री आपके पीछे लोगों को दिल्ली भेज रहे हैं?’ कोर्ट ने कहा, ‘आप भी राजनेता हैं। आप अपनी लड़ाइयां कोर्ट में न लड़ें।’ इसपर वकील ने जवाब दिया, ‘मैं राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूं।’ सुप्रीम कोर्ट ने महिला को हाईकोर्ट जाने के लिए कहा है। वकील ने मांग की, ‘कम से कम मेरी सुरक्षा की जाए।’ इसपर कोर्ट ने अगले केस को सुनवाई के लिए बुलाया। फिल्म कहानी 2 पर भी हुई सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म ‘कहानी 2’ को लेकर फिल्मकार सुजॉय घोष के खिलाफ कथित कॉपीराइट उल्लंघन के एक मामले में झारखंड की एक अदालत के समक्ष लंबित कार्यवाही को शुक्रवार को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने घोष की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें झारखंड उच्च न्यायालय के 22 अप्रैल 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी। उच्च न्यायालय ने घोष के खिलाफ लंबित कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया था। पीठ ने घोष की याचिका स्वीकार करते हुए कहा, ‘मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) द्वारा सात जून, 2018 को पारित समन आदेश और उच्च न्यायालय द्वारा 22 अप्रैल, 2025 को पारित आदेश को रद्द किया जाता है तथा निरस्त किया जाता है।’  

भागवत ने कहा, ईरान युद्ध स्वार्थी हितों का नतीजा, भारत ही इसे समाप्त करेगा

नागपुर   ईरान-अमेरिका जंग पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दुनिया को शांति का संदेश दिया है. नागपुर में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि युद्ध केवल स्वार्थी हितों का परिणाम है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिए बगैर मोहन भागवत ने नसीहत दी कि दुनिया को संघर्ष की नहीं, बल्कि सद्भाव की जरूरत है. उन्होंने भी इस बात पर जोर दिया कि युद्ध केवल भारत ही खत्म कर सकता है।  महाराष्ट्र के नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने आज यानी शुक्रवार को कहा कि दुनिया में संघर्षों की जड़ स्वार्थ एवं वर्चस्व की चाह है और स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही प्राप्त की जा सकती है. कई देश कह रहे हैं कि केलल भारत ही चल रहे युद्ध को खत्म कर सकता है. दुनिया के चिंतकों के ध्यान में बार-बार देशों से आवाज़ उठ रही है कि चल रहे युद्ध को खत्म भारत ही कर सकता है क्योंकि विकासशील भारत की प्रवृत्ति का ज्ञान है।  मोहन भागवत ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया 2,000 वर्षों से संघर्षों के समाधान के लिए विभिन्न विचारों के साथ प्रयोग करती रही है लेकिन उसे खास सफलता नहीं मिली. उन्होंने कहा कि धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्म परिवर्तन और श्रेष्ठता एवं हीनता के विचार अब भी मौजूद हैं।  आरएसएस प्रमुख भागवत ने नागपुर में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कार्यालय की आधारशिला रखने के बाद इस सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का प्राचीन ज्ञान सिखाता है कि सभी जुड़े हुए हैं और एक हैं.’ उन्होंने संघर्ष से सौहार्द और सहयोग की ओर बढ़ने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान भी धीरे-धीरे इसी समझ की ओर बढ़ रहा है।  आरएसएस प्रमुख ने कहा कि दुनिया में संघर्षों की जड़ स्वार्थ एवं वर्चस्व की चाह है और स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही हासिल की जा सकती है. मोहन भागवत ने आचरण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि धर्म केवल शास्त्रों तक सीमित नहीं रह सकता बल्कि यह लोगों के व्यवहार में भी दिखना चाहिए।  उन्होंने कहा कि अनुशासन और नैतिक मूल्यों के पालन के लिए निरंतर अभ्यास की जरूरत होती है और इसमें अक्सर व्यक्तिगत कठिनाई भी झेलनी पड़ती हैं. भागवत ने कहा कि भारत मानवता में विश्वास करता है जबकि अन्य देश अस्तित्व के लिए संघर्ष और ताकतवर के टिके रहने के सिद्धांत को मानते हैं. उन्होंने कहा कि दुनिया को संघर्ष नहीं, बल्कि सौहार्द की जरूरत है। 

Eid-ul-Fitr 2026: त्योहार के मद्देनज़र देशभर में बढ़ी सुरक्षा, पुलिस सतर्क

नई दिल्ली ईद-उल-फितर के जश्न के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, क्योंकि इस त्योहार से पहले, रमजान के आखिरी दिन नमाज अदा करने के लिए नमाजी इकट्ठा हुए। धर्मगुरुओं ने घोषणा की है कि भारत में ईद-उल-फितर शनिवार को मनाई जाएगी, क्योंकि गुरुवार शाम को चांद नहीं दिखा। हालांकि, केरल में यह त्योहार शुक्रवार को ही मनाया गया। उत्तराखंड में हरदोई के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अशोक कुमार मीणा ने कहा कि ईद-उल-फितर त्योहार और चल रही चैत्र नवरात्रि को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। आज की ‘अलविदा नमाज’ के लिए हम कई जगहों पर फ्लैग मार्च कर रहे हैं और सभी मस्जिदों पर पुलिसकर्मी भी तैनात किए हैं। जिले को सेक्टरों और जोन में बांटा गया है। कहीं भी कोई दिक्कत नहीं है। हम किसी भी तरह के असामाजिक तत्वों पर भी नजर रख रहे हैं। दिल्ली के उत्तम नगर में भी भारी पुलिस तैनाती देखी गई, जिसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने एक निर्देश जारी कर इलाके की पुलिस और सिविल प्रशासन को ईद के त्योहारों के दौरान सुरक्षित और शांतिपूर्ण माहौल सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का आदेश दिया। दरअसल, 4 मार्च को होली के जश्न के दौरान 26 साल के तरुण कुमार की हत्या के बाद से इलाके में तनाव बना हुआ है। सुरक्षा उपायों के तहत रूट मार्च करने के बाद, उत्तर प्रदेश के मऊ के एसपी श्री एलमारन जी ने कहा कि हम पूरी गश्त और चेकिंग कर रहे हैं। सिविल वर्दी में तैनात पुलिसकर्मियों के अलावा, प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (पीएसी) के जवान भी तैनात किए जाएंगे। हमने जिला और पुलिस, दोनों स्तरों पर सभी के साथ बैठकें की हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पूरे त्योहार के दौरान निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। बिहार के संवेदनशील भागलपुर जिले को ईद, चैती छठ और रामनवमी त्योहारों से पहले अलर्ट पर रखा गया है। विभिन्न सुरक्षा बलों और समितियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव ने तैयारियों के तहत भागलपुर में एक मॉक ड्रिल की। ​​जिला मजिस्ट्रेट नवल किशोर चौधरी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि मार्च में कई त्योहारों और शहर की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन हाई अलर्ट पर है और स्थिति पर सक्रिय रूप से नजर रख रहा है। हैदराबाद के पुराने शहर में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई, क्योंकि अधिकारियों ने मक्का मस्जिद और चारमीनार के आसपास कड़े सुरक्षा उपाय लागू किए, ताकि ईद-उल-फितर से पहले जुमा-तुल-विदा (ईद से पहले का आखिरी शुक्रवार) की सभा शांतिपूर्ण ढंग से हो सके। कर्नाटक के मंगलुरु में एक मस्जिद में नमाज अदा करने के बाद विधानसभा स्पीकर यूटी खादर फरीद ने कहा कि मैं हर किसी को ईद-उल-फितर की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। हर धार्मिक त्योहार का संदेश शांति, हमारी संस्कृति को साझा करना, एकता बनाए रखना, और एक शांतिपूर्ण समाज, एक शांतिपूर्ण देश और एक शांतिपूर्ण दुनिया है। तमिलनाडु के मदुरै और कोयंबटूर में भी विशेष नमाज अदा करने के लिए मुस्लिम नमाजियों की बड़ी भीड़ देखी गई। इस बीच, जब केरल में शुक्रवार को ईद-उल-फितर मनाया जा रहा था, तो सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट और भाजपा नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस के उम्मीदवारों ने राज्य में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर, सुबह-सुबह राज्य भर में नमाज स्थलों का दौरा किया।

ज्योतिषाचार्य के रसूख का पर्दाफाश, सीएम से लेकर महिला आयोग अध्यक्ष तक को करता था प्रभावित

नासिक नासिक से रेप केस में गिरफ्तार ज्योतिषाचार्य अशोक खरात उर्फ कैप्टन खरात की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे उसके रसूख, पहुंच और प्रभाव की तस्वीरें भी साफ होती जा रही है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे एकनाथ शिंदे ने भी उससे मुलाकात की थी और उसने उनका ‘हाथ’ देखकर भविष्यवाणी की थी.  इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उस वीडियो को लेकर हो रही है, जिसमें महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर उनके पैर धोते हुए दिखाई दे रही हैं. खास बात यह है कि जिस व्यक्ति पर अब महिलाओं से जुड़े गंभीर आरोप हैं, उसी के साथ इस तरह की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद मामले को और संवेदनशील बना रही हैं।  नेताओं और प्रभावशाली लोगों से संपर्क अशोक खरात की पहचान सिर्फ एक ज्योतिषाचार्य तक सीमित नहीं थी. उसके पास राज्य के कई बड़े नेता, कारोबारी और प्रभावशाली लोग पहुंचते थे. कई लोग उसे अपना गाइड मानते थे और महत्वपूर्ण फैसलों से पहले सलाह लेने आते थे. यही वजह थी कि उसका नेटवर्क लगातार मजबूत होता गया और उसकी पहुंच बढ़ती चली गई. उस पर लगे रेप केस की जांच अब स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) कर रही है, जिसका नेतृत्व आईपीएस अधिकारी तेजस्विनी सातपुते कर रही हैं. उन्होंने आरोपी से करीब दो घंटे तक पूछताछ की है. हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन जांच एजेंसियां हर पहलू को खंगाल रही है।  शिरडी से जुड़ा नया मामला इस बीच शिरडी में एक और शिकायत सामने आई है, जिसने मामले को और गंभीर बना दिया है. एक महिला ने आरोप लगाया है कि उसे उसकी आपत्तिजनक तस्वीर भेजकर वायरल करने की धमकी दी गई और पैसे मांगे गए. इस मामले में खरात के ऑफिस से जुड़े कर्मचारी नीरज जाधव का नाम सामने आया है।  करोड़ों की संपत्ति पर भी सवाल जांच में सामने आया है कि अशोक खरात ने पिछले 15 सालों में करीब 200 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाई है. पाथर्डी, सिन्नर, मिरगांव, ओझर और शिरडी जैसे इलाकों में उसकी जमीनें और प्रॉपर्टी हैं. परिवार के नाम पर भी करोड़ों की संपत्ति दर्ज है. खरात की नासिक के पाथर्डी गांव में 30 एकड़ जमीन के बारे में भी पुलिस को पता चला है, जिसकी अनुमानित कीमत 150 करोड़ से ज्यादा की है. इसके अलावा नासिक जिले के सिन्नर तालुका के कहंदलवाड़ी मिरगांव में 45 एकड़ जमीन, 30 करोड़ रुपये से ज्यादा मार्केट वैल्यू वाली परचेज़ डीड, नासिक शहर के पाथर्डी, गौलाने इलाके में पत्नी कल्पना, बेटी सृष्टि और तृप्तबाला के नाम पर अलग जमीनों के कागज मिले हैं. वहीं 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की कीमत के  फार्महाउस की भी जांच की जा रही है. इस सब के अलावा कई अन्य इलाकों में भी कीमती जमीनों का पता चला है।  नासिक क्राइम ब्रांच की कार्रवाई में आरोपी के अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी ली. खबर है कि पुलिस ने 58 वीडियो जब्त किए हैं. बताया जा रहा है कि ये वीडियो कुछ मशहूर महिलाओं और सेलिब्रिटी से जुड़े लोगों के हैं. पुलिस द्वारा ज़ब्त किए गए वीडियो की पूरी जांच चल रही है, और उम्मीद है कि इससे और भी चौंकाने वाली बातें सामने आ सकती हैं।  पहले भी उठते रहे विरोध अंधविश्वास के खिलाफ काम करने वाले संगठनों ने पहले भी अशोक खरात के खिलाफ विरोध जताया था. उनका कहना था कि वह लोगों की आस्था का गलत इस्तेमाल कर रहा है. लेकिन तब यह मामला ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाया. अब गिरफ्तारी के बाद वही मुद्दे फिर से चर्चा में हैं।  इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू महिलाओं की शिकायतें हैं. एक ओर दुष्कर्म का आरोप है, वहीं दूसरी ओर ब्लैकमेलिंग से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं. इससे यह सवाल उठता है कि क्या प्रभाव और पहुंच के कारण पहले शिकायतें सामने नहीं आ पाईं। 

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