LATEST NEWS

विपक्ष का समर्थन करेगी TMC, लोकसभा स्पीकर के खिलाफ आएगा अविश्वास प्रस्ताव

नई दिल्ली. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर अब ममता बनर्जी की टीएमसी भी सहमत हो गई है। सूत्रों की मानें तो टीएमसी इस अविश्वास प्रस्ताव में विपक्ष का साथ देने को तैयार है। इससे पहले पार्टी ने अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष का साथ देने से इनकार कर दिया था। सोमवार के लिए सूचीबद्ध किया गया लोकसभा ने ओम बिरला को अध्यक्ष पद से हटाने से संबंधित प्रस्ताव पेश करने के लिए विपक्षी सदस्यों के एक नोटिस को सोमवार के लिए सूचीबद्ध किया है। पीठासीन सभापति द्वारा बुलाए जाने पर सदन के 50 सदस्यों को खड़ा होना होगा और फिर नोटिस स्वीकृत माना जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान होगा। यदि 50 सदस्य नोटिस के समर्थन में खड़े नहीं होते हैं, तो प्रस्ताव पेश नहीं किया जा सकता है। प्रस्ताव होगा पराजित? आगामी सोमवार के लिए तय एजेंडा पेपर के अनुसार, यह प्रस्ताव ही दिन के कामकाज के रूप में सूचीबद्ध एकमात्र विषय है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने लोकसभा सदस्यों को इस मुद्दे पर विचार के समय सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है। सदन में संख्या बल सरकार के पक्ष में काफी अधिक है, जिससे यह लगभग तय माना जा रहा है कि प्रस्ताव पराजित हो जाएगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने हाल ही में “पीटीआई-भाषा” को बताया था कि यह प्रस्ताव 9 मार्च को सदन के समक्ष आएगा । नोटिस तीन कांग्रेस सदस्यों मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि द्वारा पेश किया जाएगा। प्रस्तावित प्रस्ताव में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने की अनुमति नहीं देने और “विपक्ष की महिला सांसदों के खिलाफ अनुचित आरोप लगाने” के लिए अध्यक्ष के आचरण पर सवाल उठाया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि लोक महत्व के मुद्दे उठाने पर आठ विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया, जबकि सत्तापक्ष के सदस्यों द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ की गई “अत्यंत आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियों” पर उन्हें नहीं टोका गया। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि विपक्ष को लगता है कि बिरला अब सदन के सभी पक्षों का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक निष्पक्षता नहीं बरत रहे हैं। उनके पक्षपातपूर्ण रवैये से सदस्यों के अधिकारों की अनदेखी हो रही है और ऐसी व्यवस्थाएं दी जा रही हैं जो इन अधिकारों को कमजोर करते हैं। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि बिरला “सभी विवादास्पद मामलों में खुले तौर पर सत्तारूढ़ दल का पक्ष लेते हैं” और यह सब सदन के सुचारु संचालन तथा जनता की चिंताओं और शिकायतों को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए गंभीर खतरा है। इसलिए उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव रखा गया है। संविधान के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष नोटिस पर विचार किए जाने के दौरान सदन में उपस्थित रह सकते हैं। वह प्रस्ताव पर अपना पक्ष रख सकते हैं और मतदान भी कर सकते हैं, लेकिन जब इस विषय पर चर्चा होगी तब वे कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते। इस दौरान सदन में उनके बैठने को लेकर हालांकि नियम स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन वे संभवतः सत्तापक्ष की प्रमुख पंक्तियों में बैठ सकते हैं।

ईरान पर हमला करेंगे पाक और तुर्की?, इस्लामिक नाटो बनाने अचानक सऊदी पहुंचे मुनीर

तेहरान. मध्य पूर्व में लगातार बदल रहे हालात के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान से मुलाकात की है। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में सऊदी अरब की अरामको तेल रिफाइनरी पर हमला हुआ है। इसके अलावा, अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के मारे जाने के बाद तेहरान ने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में कड़ी जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका पैदा हो गई है। सऊदी रक्षा मंत्री ने ‘एक्स’ पर असीम मुनीर के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए इस बैठक की जानकारी दी। उन्होंने लिखा- पाकिस्तान के सेना प्रमुख और रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की। हमने किंगडम पर ईरानी हमलों और हमारे ‘संयुक्त रणनीतिक रक्षा समझौते’ के ढांचे के भीतर उन्हें रोकने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा की। हमने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करती हैं और उम्मीद जताई कि ईरानी पक्ष समझदारी दिखाएगा और किसी भी गलत कदम से बचेगा। रणनीतिक महत्व और ‘इस्लामिक नाटो’ की सुगबुगाहट इस बैठक को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ महीने पहले तुर्की ने परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ मिलकर त्रिकोणीय ‘इस्लामिक नाटो’ जैसा रक्षा गठबंधन बनाने की कोशिश की थी। इसका उद्देश्य अशांत मध्य पूर्व और उसके बाहर सुरक्षा समीकरणों को फिर से आकार देना है। पाकिस्तान का समर्थन हाल ही में जब सऊदी अरब की अरामको रिफाइनरी पर ईरानी हमले हुए, तो पाकिस्तान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए रियाद और अन्य खाड़ी देशों के साथ पूरी एकजुटता व्यक्त की थी। ईरान के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस्लामाबाद की प्रतिक्रिया केवल ‘मौखिक निंदा’ तक सीमित रहेगी? यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि सितंबर में पाकिस्तान और सऊदी अरब ने ‘2025 रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते’ पर हस्ताक्षर किए हैं। जिसके तहत ‘एक देश पर हमला मतलब दोनों देशों पर हमला’ माना जाएगा। नाटो के ‘अनुच्छेद 5’ जैसा क्लॉज इस समझौते में नाटो के ‘आर्टिकल 5’ के समान एक प्रावधान है, जिसमें कहा गया है कि किसी एक सदस्य के खिलाफ आक्रामकता को सभी पर हमला माना जाएगा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के हवाले से सूत्रों ने बताया है कि इस रक्षा व्यवस्था में तुर्की को शामिल करने पर बातचीत अंतिम चरण में है। यह संभावित विस्तार दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका में तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बढ़ते साझा रणनीतिक हितों को दर्शाता है। सैन्य हस्तक्षेप या कूटनीति: क्या करेगा पाकिस्तान? भले ही इस समझौते में एक पर हमला, सब पर हमला जैसी बात कही गई हो, लेकिन इसके मुख्य प्रावधान पारंपरिक सैन्य सहयोग जैसे- संयुक्त सैन्य अभ्यास, खुफिया जानकारी साझा करना और ड्रोन तकनीक पर ही केंद्रित हैं; इसमें कोई परमाणु प्रतिबद्धता शामिल नहीं है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ फोन पर बातचीत में पूर्ण एकजुटता तो दिखाई है, लेकिन सैन्य तैनाती के बजाय शांति प्रयासों का समर्थन किया है।जानकारों का मानना है कि अपनी सेना भेजने से पाकिस्तान एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में फंस सकता है, जिससे उसकी पहले से ही खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और आतंरिक सुरक्षा स्थिति और बिगड़ जाएगी। विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस्लामाबाद अपनी सेना भेजने के बजाय सऊदी अरब का समर्थन केवल कूटनीति, रसद और अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति देने तक ही सीमित रखेगा।

सरकार ने अटकलों का दिया जवाब, बिहार और बंगाल को काटकर बनेगा नया केंद्र शासित प्रदेश?

नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में बिहार के सीमांचल का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने बिहार के बड़े अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठक की। इसके बाद इस बात की अटकलें लगने लगी कि बिहार के कुछ जिलों और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों के मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की तैयारी चल रही है। इन अटकलों को बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने और हवा दे दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) बंगाल को बांटने की कोशिश कर रही है। इन अटकलों पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। पीआईबी फैक्ट चेक ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। इसे महज एक अफवाह करार दिया। आपको बता दें कि अटकलों में दावा किया जा रहा है कि बिहार के सीमांचल क्षेत्र (पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया) और पश्चिम बंगाल के उत्तरी जिलों (मालदा, उत्तर दिनाजपुर और सिलीगुड़ी कॉरिडोर) को जोड़कर एक नया प्रशासनिक केंद्र बनाया जाएगा। पीआईबी का कहना है कि भारत सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। यह पूरी तरह से एक अफवाह है। गृह मंत्रालय (MHA) या किसी भी आधिकारिक संस्था ने इस तरह की किसी योजना की पुष्टि नहीं की है। सरकार ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे ऐसी अपुष्ट और संवेदनशील खबरों को साझा न करें जो क्षेत्रीय भावनाओं या राजनीतिक तनाव को भड़का सकती हैं। अफवाह क्यों फैली? यह अफवाह तब और तेज हो गई जब हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के सीमांचल और उत्तर बंगाल का दौरा किया। गृह मंत्री ने सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ सुरक्षा व्यवस्था, घुसपैठ और ड्रग तस्करी रोकने के लिए बैठकें की थीं। वहीं, भारतीय सेना ने हाल ही में सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए किशनगंज (बिहार) और पश्चिम बंगाल में नई चौकियां स्थापित की हैं। विपक्षी दलों और कुछ स्थानीय मीडिया आउटलेट्स ने इन सुरक्षा कदमों को नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की तैयारी के रूप में प्रचारित किया, जिसका सरकार ने अब खंडन कर दिया है। आपको बता दें कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर पश्चिम बंगाल में स्थित भूमि की एक संकीर्ण पट्टी (20-22 किमी चौड़ी) है जो मुख्य भूमि भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ती है। यह रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है। सरकार यहां एक अंडरग्राउंड रेलवे प्रोजेक्ट (40 किमी) बनाने की योजना जरूर बना रही है ताकि युद्ध या आपदा के समय पूर्वोत्तर से संपर्क न टूटे, लेकिन इसके लिए किसी भौगोलिक या प्रशासनिक बदलाव का कोई इरादा नहीं है।

अमृतसर में लोहे की रॉड से किया हमला, पुलिस कॉन्स्टेबल की पीट-पीटकर हत्या

अमृतसर. अमृतसर के राजासांसी क्षेत्र के गांव जगदेव कलां में पंजाब पुलिस कॉन्स्टेबल की पीट पीट कर हत्या कर दी गई। रिश्तेदारों ने घर पर हमला कर लोहे की रॉड और डंडों से कांस्टेबल से मारपीट की। गंभीर रूप से घायल कॉन्स्टेबल को परिजन इलाज के लिए अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है। मृतक की पहचान गांव जगदेव कलां निवासी जगजीत सिंह के रूप में हुई है। वह गुरदासपुर में एक डीएसपी के सुरक्षा गार्ड के तौर पर तैनात थे। मृतक की भतीजी जतिंदर कौर ने बताया कि गांव निवासी बलराज सिंह उनका रिश्तेदार है और उसके साथ कुछ समय से विवाद चल रहा है। बलराज सिंह, उसका भाई, बेटा चन्नप्रीत सिंह, पत्नी कोमल, सुखराज सिंह, मनजीत सिंह, गज्जन सिंह और गुरलाल सिंह सहित 8-10 लोग दो गाड़ियों में सवार होकर उनके घर आ पहुंचे। आरोप है कि सभी ने मिलकर जगजीत सिंह और परिवार के अन्य सदस्यों पर हमला कर दिया। मारपीट के दौरान जगजीत सिंह के सिर पर लोहे की रॉड लगने से वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े। परिजन घायल जगजीत सिंह को अमृतसर ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। घटना से इलाके में सनसनी इस घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। वारदात के बाद से आरोपी फरार हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिवार के बयान के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस के मुताबिक यह मामला पारिवारिक रंजिश का है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें बना दी हैं और उनकी धरपकड़ के लिए रेड की जा रही है।

ट्रंप की हत्या का प्लान बनाने वाला आतंकी दोषी करार, पाकिस्तान में ट्रेनिंग और ईरान से लिया पैसा

तेहरान. ईरानी जासूसों द्वारा भर्ती किए गए 48 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट को शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश रचने के आरोप में दोषी ठहराया गया है। ब्रुकलिन की एक जूरी ने दो घंटे से भी कम समय तक विचार-विमर्श करने के बाद उसे ‘मर्डर-फॉर-हायर’ (पैसे देकर हत्या करवाना) और आतंकवाद के आरोपों में दोषी पाया। जूरी ने मर्चेंट के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उसने कहा था कि ईरान द्वारा उसके परिवार को ‘धमकी’ दिए जाने के कारण उसे मजबूरी में इस साजिश का हिस्सा बनना पड़ा था। बेतुकी योजना: जून 2024 में एफबीआई के खुफिया कैमरों ने क्वींस के फ्लोरल पार्क मोटर लॉज में मर्चेंट को अपने एक साथी (जो वास्तव में एफबीआई का मुखबिर था) के साथ रिपब्लिकन रैली में ट्रंप को मारने की योजना बनाते हुए कैद किया था। कागज और वेप से समझाया प्लान: मर्चेंट ने एक नोटबुक के पन्ने पर आयताकार बॉक्स बनाकर भीड़ और स्टेज को दर्शाया। फिर उसने एक तीर के निशान के ऊपर क्रीमसिकल रंग का वेप रखते हुए कहा- यह टारगेट है। यह कैसे मरेगा? एडवांस पेमेंट और गिरफ्तारी: पूर्व बैंकर रह चुके मर्चेंट ने भाड़े के हत्यारे (हिटमैन) बने दो अंडरकवर एफबीआई एजेंटों को 5000-5000 डॉलर का एडवांस भी दिया था। उसे अगस्त 2024 में अमेरिका से भागने की कोशिश करते समय गिरफ्तार कर लिया गया था। आसिफ मर्चेंट को पाकिस्तान में ट्रेनिंग मिली थी अदालत के दस्तावेजों और ट्रायल के दौरान दी गई गवाही के अनुसार, आसिफ मर्चेंट ने 2022 के अंत या 2023 की शुरुआत में पाकिस्तान में रहकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के लिए काम करना शुरू किया था। इसी अवधि में उसे ‘ट्रेडक्राफ्ट’ (जासूसी और खुफिया काम करने के तरीके) का विशेष प्रशिक्षण दिया गया था, जिसमें काउंटर-सर्विलांस (निगरानी या खुफिया एजेंसियों से बचने की तकनीक) की ट्रेनिंग मुख्य रूप से शामिल थी। मर्चेंट ने अदालत में यह भी स्वीकार किया कि उसे इस बात की पूरी जानकारी थी कि IRGC एक घोषित आतंकी संगठन है। इस ट्रेनिंग को पूरा करने के बाद, 2023 में उसे ऐसे संभावित IRGC रंगरूटों की तलाश करने के लिए अमेरिका भेजा गया था, जो वहां रहकर संगठन के लिए काम कर सकें। इसके अलावा, इस पूरी अवधि के दौरान मर्चेंट अपने IRGC हैंडलर से मिलने और निर्देश प्राप्त करने के लिए बार-बार ईरान की यात्रा भी करता रहा था। मकसद और अदालत में दलीलें मर्चेंट ने अदालत में गवाही दी कि अप्रैल 2024 में उसके ईरानी हैंडलर ने उसे अमेरिका भेजा था। उसके हैंडलर ने स्पष्ट रूप से किसी एक का नाम नहीं लिया था, बल्कि तीन संभावित लक्ष्य बताए थे- डोनाल्ड ट्रंप, जो बाइडेन और निक्की हेली। इस काम के लिए उसे दस लाख डॉलर तक मिलने की उम्मीद थी। बचाव पक्ष का दावा: मर्चेंट के वकील एवी मोस्कोविट्ज ने इस साजिश को हास्यास्पद बताया और कहा कि मर्चेंट को लगा कि ईरान में उसका परिवार खतरे में है, इसलिए उसने केवल इस योजना का हिस्सा होने का नाटक किया। अदालत में ‘नदीम अली’ के नाम से गवाही देने वाले मुखबिर की टिप पर एफबीआई ने यह पूरा जाल बिछाया था। सरकारी वकीलों का पलटवार: एफबीआई एजेंट ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी के बाद मर्चेंट ने किसी धमकी का जिक्र नहीं किया था। इसके बजाय, उसने पैसे और 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए शीर्ष ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए ट्रंप की हत्या की बात स्वीकार की थी। यह मुकदमा एक ऐसे समय में संपन्न हुआ है जब मध्य पूर्व में भारी तनाव है। अमेरिका और इजरायली सेनाओं के एक अभूतपूर्व सैन्य अभियान में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और दर्जनों अन्य शीर्ष ईरानी अधिकारी मारे गए हैं, जिससे युद्ध की स्थिति और गंभीर हो गई है। इस मामले में दोषी पाए जाने के बाद, अब सजा सुनाए जाने पर आसिफ मर्चेंट को अधिकतम उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।

चॉपर में धुआं भरा, सभी सुरक्षित, केशव प्रसाद मौर्य के हेलिकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के हेलिकॉप्टर की शनिवार को लखनऊ एयरपोर्ट में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। वह हेलिकॉप्टर से ला मार्टस् से कौशांबी जा रहे थे, तभी तकनीकी खराबी के कारण हेलिकॉप्टर के केबिन में धुआं भरने लगा। स्थिति को देखते हुए पायलट ने तुरंत लखनऊ एयरपोर्ट पर आपात लैंडिंग कराई। लैंडिंग के बाद सभी लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य शनिवार को एक बड़े हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गए।जानकारी के अनुसार, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत लखनऊ से कौशांबी के लिए रवाना हुए थे। हेलिकॉप्टर ने जैसे ही ला मार्टिनियर ग्राउंड से उड़ान भरी, तभी पायलट को तकनीकी खराबी का अहसास हुआ। उपमुख्यमंत्री के कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, उड़ान के दौरान हेलीकॉप्टर के भीतर अचानक धुआं भरने लगा, जिससे अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। लखनऊ एयरपोर्ट पर कराई गई हेलिकॉप्टर की लैंडिंग पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क किया और हेलिकॉप्टर को लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर मोड़ दिया। एयरपोर्ट पर पुख्ता इंतजामों के बीच हेलीकॉप्टर की सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। वही, चॉपर में सवार सभी यात्री सही सलामत हैं। इस घटना के बाद तकनीकी विशेषज्ञों की टीम हेलीकॉप्टर की जांच में जुट गई है।

ईरान संकट के बीच उछले कच्चे तेल के दाम, हफ्तेभर के युद्ध में ही हिली दुनिया

तेहरान. ईरान और अमेरिका-इजरायल के युद्ध को आज एक सप्ताह पूरा हो रहा है। एक सप्ताह में ही इस युद्ध का असर पूरी दुनिया में पड़ा है। एक तरफ यूरोप से लेकर एशिया तक की अर्थव्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं तो दूसरी ओर खाड़ी देशों में हमले भी खूब हुए हैं जिनमें जान और माल दोनों का नुकसान हुआ है। खाड़ी देशों में फंसे पर्यटक अब भी संकट का सामना कर रहे हैं। ईरान ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है। अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले किए थे जिनमें ईरान के सर्वोच्चा नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे। संघर्ष बढ़ता ही जा रहा इस सैन्य हमले के बाद ईरान ने मुख्य रूप से इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन तथा सऊदी अरब समेत कई खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए हमले किए। पिछले तीन दिनों में दोनों पक्षों की ओर से हमलों और जवाबी हमलों के बीच यह संघर्ष काफी बढ़ गया है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल युद्ध के सातवें दिन शुक्रवार को भी इजरायल के लड़ाकू विमान मंडराते रहे। समंदर में हजारों तेल के जहाज फंसे हुए हैं। इनमें 36 जहाज भारत के भी हैं। ऐसे में तेल की आपूर्ति में बड़ी बाधा उत्पन्न हुई है। कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने चेतावनी दी कि यह युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने पर तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। शुक्रवार को अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत दो वर्षों में पहली बार 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई। तेहरान में तेज हो गए हमले ईरान की राजधानी तेहरान में शनिवार तड़के कई विस्फोट हुए, जिनसे आसमान में काले धुएं के गुबार उठते दिखाई दिए। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल की ओर मिसाइलें दागीं। इस बीच अमेरिका ने चेतावनी दी कि जल्द ही बड़े पैमाने पर बमबारी अभियान शुरू किया जा सकता है, जिसे अधिकारी सप्ताह भर से जारी संघर्ष का अब तक का सबसे तीव्र हमला बता रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप सख्त क्षेत्र में लड़ाई खत्म होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने इज़राइल को 15.1 करोड़ डॉलर के नए हथियारों की बिक्री को मंजूरी दे दी। ट्रंप ने कहा कि ईरान के ”बिना शर्त आत्मसमर्पण” करने तक उससे कोई बातचीत नहीं होगी। वहीं, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने कहा कि देश अपनी रक्षा के लिए ”हर जरूरी कदम” उठाएगा। एक वीडियो फुटेज में पश्चिमी तेहरान के ऊपर विस्फोटों से धुएं के गुबार दिखाई दिए, जबकि इजराइल ने कहा कि उसने व्यापक हमलों का नया दौर शुरू किया है। इजराइली सेना ने कहा कि वह ईरान से दागी गई नयी मिसाइलों को रोकने की कोशिश कर रही है। ईरान के हमलों के बाद बहरीन में शनिवार सुबह सायरन बजे। सऊदी अरब ने कहा कि उसने अपने विशाल शायबह तेल क्षेत्र की ओर बढ़ रहे ड्रोन नष्ट कर दिए और प्रिंस सुल्तान एयर बेस की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को मार गिराया। इस बीच अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के अनुसार, रूस ने ईरान को ऐसी जानकारी दी है जिससे वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी युद्धपोतों, विमानों और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बात कर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर संवेदना जताई। ईरान में 1200 से ज्यादा मौतें इस संघर्ष में अब तक ईरान में कम से कम 1,230 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लेबनान में 200 से अधिक और इजराइल में करीब 12 लोग मारे गए हैं। छह अमेरिकी सैनिक भी इस संघर्ष में जान गंवा चुके हैं। ईरान के राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ”कुछ देशों” ने मध्यस्थता के प्रयास शुरू कर दिए हैं, लेकिन उन्होंने इसके बारे में विस्तार से नहीं बताया।

भोपाल में 918 रुपए में मिलेगा, 11 महीने बाद MP में घरेलू LPG सिलेंडर ₹60 महंगा

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर 60 रुपए महंगा कर दिया है। वहीं, 19 KG वाले कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम में 115 रुपए का इजाफा किया गया है। बढ़ी हुई कीमतें आज 7 मार्च से ही लागू हो गई हैं। मध्य प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो अब भोपाल में 918 रुपए, इंदौर में 941 रुपए, ग्वालियर में 996 रुपए, जबलपुर में 919 रुपए और उज्जैन में 972 रुपए में एलपीजी सिलेंडर मिलेगा। सबसे महंगी घरेलू गैस नर्मदापुरम में 1035 रुपए की मिलेगी। इससे पहले 8 अप्रैल 2025 को घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट बढ़ाए गए थे। हालांकि, 8 मार्च 2024 को महिला दिवस पर केंद्र सरकार ने इसके दाम में 100 रुपए की कटौती भी की थी। इसी महीने बढ़े थे कॉमर्शियल गैस के रेट इससे पहले 1 मार्च 2026 को कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 31 रुपए तक बढ़ाए गए थे। अब घरेलू गैस सिलेंडर के रेट भी बढ़ गए हैं। सरकार ने एलपीजी गैस सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी ऐसे वक्त की है, जब अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते देश में गैस किल्लत की आशंका जताई जा रही है। किल्लत रोकने LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश केंद्र सरकार ने 5 मार्च को इमरजेंसी पावर इस्तेमाल करते हुए देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया था। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने यह आदेश जारी किया। इसमें कहा गया है कि अब रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल सिर्फ रसोई गैस बनाने के लिए करेंगी। सभी कंपनियों को प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों को करनी होगी। सरकारी तेल कंपनियों में इंडियन ऑयल (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) शामिल है। इसका मकसद कंज्यूमर्स को बिना रुकावट गैस सिलेंडर की सप्लाई है। एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 क्या है सरकार ने यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम यानी एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 (ESMA) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करके जारी किया है। इससे पहले सरकार ने यूक्रेन युद्ध के बाद तेल क्षेत्र में ESMA के नियमों को लागू किया था। तब रिफाइनिंग कंपनियों से कहा गया था कि वे देश में फ्यूल की कमी न होने दें और इसे बाहर एक्सपोर्ट न करें, क्योंकि उस समय भारी मार्जिन मिलने की वजह से तेल बाहर बेचना काफी फायदे का सौदा बन गया था। कैसे तय होती है गैस सिलेंडर की कीमत तेल कंपनियां हर महीने पिछले महीने के अंतरराष्ट्रीय मूल्यों, एक्सचेंज रेट और अन्य लागतों के आधार पर LPG की बेस प्राइस तय करती हैं। इसके बाद टैक्स, ट्रांसपोर्ट और डीलर कमीशन जोड़कर खुदरा मूल्य निकाला जाता है। सब्सिडी वाले सिलेंडर के लिए सरकार अंतर की भरपाई करती है जबकि गैर सब्सिडी वाले सिलेंडर की पूरी कीमत ग्राहक चुकाता है।

बहुमत की ओर बालेन शाह की RSP, ‘सुनामी’ में उड़े नेपाल के कई दिग्गज

नई दिल्ली. नेपाल के संसदीय चुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझानों ने दक्षिण एशिया की राजनीति को स्तब्ध कर दिया है। 150 निर्वाचन क्षेत्रों में जारी मतगणना में रवि लामिछाने के नेतृत्व वाली RSP ने अभूतपूर्व बढ़त बना ली है। नेपाल की युवा पीढ़ी ने पारंपरिक पार्टियों नेपाली कांग्रेस (NC) और UML को पूरी तरह नकारते हुए बदलाव के पक्ष में वोट दिया है। 275 सीटों वाली प्रतिनिधि सभा राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी 108 सीटों पर आगे है। नेपाली कांग्रेस (NC) और CPN-UML 12-12 सीटों पर आगे है। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (NCP – संयुक्त मोर्चा) के खाते में फिलहाल सिर्फ 9 सीटें जाती दिख रही हैं। सबसे बड़ी खबर झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र से आ रही है, जहां 35 वर्षीय रैपर से नेता बने बालेन शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री और UML अध्यक्ष के.पी. शर्मा ओली पर एक मजबूत बढ़त बना ली है। के.पी. ओली के अलावा, शेर बहादुर देउबा की कांग्रेस के शेखर कोइराला, अरबपति विनोद चौधरी, विष्णु पौडेल, राजेंद्र लिंगदेन और पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल जैसे दिग्गज अपनी सीटों पर पिछड़ रहे हैं। पुराने नेताओं में केवल पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ही अपनी साख बचाते दिखे हैं। उन्हें पूर्वी रुकुम सीट से विजयी घोषित किया गया है। RSP की जीत के मायने भारत सरकार के रणनीतिक गलियारों में इस जीत को बहुत बारीकी से देखा जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत-नेपाल संबंध सीमा विवाद और चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण तनावपूर्ण रहे हैं। बालेन शाह और रवि लामिछाने की जोड़ी को व्यावहारिक और राष्ट्रवादी माना जाता है। भारत यह देखेगा कि क्या बालेन शाह के नेतृत्व में नेपाल अपनी “पड़ोसी पहले” नीति को फिर से संतुलित करेगा या चीन के साथ अपने संबंधों को और गहरा करेगा। नेपाल की संसद की 165 सीटें ‘फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट’ (प्रत्यक्ष चुनाव) के तहत आती हैं, जिनके परिणाम शनिवार तक स्पष्ट हो जाएंगे। शेष 110 सीटें ‘समानुपातिक प्रतिनिधित्व’ प्रणाली के माध्यम से भरी जाएंगी, जहां पार्टियों को मिलने वाले कुल वोटों का प्रतिशत उनकी अंतिम ताकत तय करेगा।

ईरान में खामेनेई की मौत के बाद खाली है पद, मोजतबा सुरक्षा कारणों से नहीं बनेंगे सुप्रीम लीडर?

तेहरान. ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद रिपोर्ट्स में कहा जा रहा था कि जल्द ही उनके बेटे मोजतबा खामेनेई की इसी पद पर ताजपोशी हो जाएगी। हालांकि अब इसमें देरी होती दिख रही है। जानकारों का कहना है कि सुरक्षा कारणों से फिलहाल ईरान की सुरक्षा परिषद ऐसा करने से बच रही है। अमेरिकी की निगाह इसी पर है कि जैसे ही कोई सुप्रीम लीडर नियुक्त किया जाए, वह उसके पीछे पड़ जाए। ईरान के अधिकारियों के मुतबिक मोजतब खामेनेई अयातुल्लाह अली खामेनेई के उत्तराधिकारी हो सकते हैं। कुछ अधिकारियों ने कहा कि उन्हें एक सुरक्षित जगह पर रखा गया है। इजरायल ने भी कहा है कि खामेनेई की जगह जिसे भी नेता चुना जाएगा, पहला लक्ष्य वही होगा। बता दें कि ईरान के सुप्रीम लीडर के अलावा कई कमांडर भी मारे गए हैं। कौन हैं मोजतबा खामेनेई मोजतबा खामेनेई एक धर्मगुरु हैं, जिन्होंने अपने अधिकतर राजनीतिक जीवन में कोई औपचारिक सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन वह सर्वोच्च नेता के कार्यालय के भीतर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उन्हें अक्सर सत्ता के गलियारों में प्रभावशाली ‘पावर ब्रोकर’ और ‘गेटकीपर’ के रूप में देखा जाता रहा है। समय के साथ उनकी पहचान दो प्रमुख पहलुओं से जुड़ी रही है। पहला, ईरान की सुरक्षा व्यवस्था, विशेष रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और उससे जुड़े कट्टरपंथी नेटवर्क के साथ उनके करीबी संबंध। दूसरा, सुधारवादी राजनीति और पश्चिमी देशों के साथ करीबी संबंधों के प्रति उनका कड़ा विरोध। साल 2019 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने मोजतबा खामेनेई पर प्रतिबंध लगाए थे और आरोप लगाया था कि वे बिना किसी औपचारिक सरकारी पद के भी सर्वोच्च नेता की ओर से प्रभावी भूमिका निभा रहे थे। ईरान के संविधान के अनुसार, देश के सर्वोच्च नेता का चयन 88 सदस्यीय धार्मिक निकाय ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ करती है। यह निकाय संभावित उम्मीदवारों की धार्मिक, राजनीतिक और नेतृत्व संबंधी योग्यता का मूल्यांकन करता है। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि व्यवहार में यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र नहीं मानी जाती और सत्ता प्रतिष्ठान का इसमें महत्वपूर्ण प्रभाव होता है।

दिल्ली में बुलडोजर ऐक्शन की मांग, उत्तम नगर मर्डर मामले में 4 और गिरफ्तार

नई दिल्ली. दिल्ली के उत्तम नगर में एक युवक की हत्या करने के मामले में पुलिस ने 4 और लोगों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अब तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया है। घटना को लेकर इलाके में तीसरे दिन भी तनाव जारी रहा। पुलिस ने बताया कि उत्तम नगर की जेजे कॉलोनी में होली के दौरान एक नाबालिग लड़की द्वारा फेंके गए पानी से भरे गुब्बारे को लेकर दो अलग-अलग समुदायों के दो परिवारों के बीच हुई झड़प में 26 साल के एक युवक की हत्या कर दी गई थी। इस घटना के दो दिन बाद शुक्रवार को चार और लोगों को गिरफ्तार कर हत्या के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी हुई है और एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है। दो वाहनों में आग लगाई इस बीच, इलाके में तीसरे दिन भी तनाव जारी रहा। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने दो वाहनों में आग लगा दी और दो अन्य वाहनों की खिड़कियां तोड़ दीं। अधिकारियों के अनुसार, बुधवार को एक हिंदू परिवार की 11 साल की लड़की अपनी छत पर होली मना रही थी और नीचे खड़े लोगों पर पानी के गुब्बारे फेंक रही थी। इनमें से एक गुब्बारा एक मुस्लिम महिला को लगा, जिसने आपत्ति जताई। जांचकर्ताओं के अनुसार, कहासुनी हिंसक झड़प में बदल गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमला किया। झड़प में हिंदू परिवार के तीन सदस्यों समेत कम से कम चार लोग घायल हो गए। 26 साल के तरुण कुमार ने गुरुवार सुबह दम तोड़ दिया। उनके परिवार ने पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया कि पड़ोसियों ने उन्हें घेर लिया और बल्ले, लाठी और पत्थरों से उन पर हमला किया। हिंदू राजनीतिक संगठन का प्रदर्शन शुक्रवार को उस समय सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया जब एक हिंदू राजनीतिक संगठन के सदस्यों ने कथित तौर पर विरोध प्रदर्शन करते हुए इलाके में आगजनी की। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दोपहर करीब 2 बजे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नारे लगा रहे प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने दो वाहनों में आग लगा दी। दिल्ली अग्निशमन सेवा के अधिकारियों ने घटनास्थल से मिली सूचना की पुष्टि की जहां एक कार और एक मोटरसाइकिल जलकर खाक हो गई थी। उत्तम नगर मेट्रो स्टेशन, थाना और हस्तसाल कॉलोनी के बाहर लगातार दूसरे दिन भी विरोध प्रदर्शन जारी रहा। लोगों ने सड़कों को जाम कर दिया। कई स्थानीय दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। आरोपियों के घर पर हमला करने की कोशिश एक दिन पहले तरुण कुमार के परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों ने एक हिंदू राजनीतिक संगठन के सदस्यों के साथ उत्तम नगर थाने के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। बाद में प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर मुस्लिम परिवार के घर पर हमला करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर ऐक्शन की मांग मृतक के चाचा रमेश ने बताया कि 11 साल की लड़की ने परिवार के सदस्यों पर गुब्बारे फेंके, लेकिन एक गुब्बारा जमीन पर फट गया और एक महिला के बुर्के पर छींटे पड़ गए। मैंने माफी मांगी और लड़की से भी माफी मंगवाई। हम और क्या कर सकते थे? उन्होंने पहले हमें पीटा। मेरे सिर, छाती और हाथों पर गंभीर चोटें आईं। डॉक्टरों ने 8 टांके लगाए। मुझे अभी भी दर्द हो रहा है। उन्होंने बताया कि तरुण आधे घंटे बाद आया। इससे पहले कि वह अपनी बाइक पार्क कर पाता, उन्होंने उस पर हमला कर दिया। अब वह आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर ऐक्शन की मांग करते हैं। उन्होंने पहले भी इसी परिवार के साथ झड़पों का आरोप लगाया। कहा कि यह पहली बार नहीं है। उन्होंने करीब 12 साल पहले भी होली के दौरान हम पर हमला किया था। दोनों परिवार मूलरूप से राजस्थान के तरुण के घायल दादा मान सिंह ने बताया कि दोनों परिवार 1960 के दशक से एक-दूसरे को जानते हैं। वे उत्तम नगर के पास की झुग्गियों में साथ रहते थे, फिर हस्तसाल कॉलोनी में रहने लगे। दोनों परिवार मूलरूप से राजस्थान के रहने वाले हैं। नाम न बताने की शर्त पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि ये परिवार दशकों से एक-दूसरे को जानते हैं। उनके बीच अक्सर छोटी-छोटी बातों पर झगड़े और मारपीट होती रहती है। डिजिटल मार्केटिंग में डिप्लोमा कर रहा था तरुण अधिकारी ने कहा कि यह पूरी तरह से सांप्रदायिक मामला नहीं है। ये परिवार हमेशा से कूड़े, पानी, पार्किंग और अन्य छोटी-मोटी बातों पर लड़ते रहे हैं। वे आपस में हाथापाई भी करते हैं और फिर बाद में मामले सुलझा लेते हैं। हम हर पहलू से जांच कर रहे हैं। तरुण के चाचा मेमराज ने बताया कि तीन भाई-बहनों में सबसे छोटा तरुण इंटीरियर डिजाइनिंग और डिजिटल मार्केटिंग में डिप्लोमा कर रहा था। वह महत्वाकांक्षी था। वह गुरुग्राम की किसी कंपनी में काम करना चाहता था।

जेल में ही रहेगा डेरा प्रमुख, लेकिन पत्रकार हत्याकांड में गुरमीत राम रहीम HC से बरी

नई दिल्ली. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने शनिवार को सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी कर दिया है। यह फैसला विशेष सीबीआई (CBI) अदालत द्वारा राम रहीम को दोषी ठहराए जाने और उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के करीब सात साल बाद आया है। यह अहम फैसला मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल की खंडपीठ ने 2019 की सजा को चुनौती देने वाली अपीलों पर सुनवाई करते हुए सुनाया। अदालत ने राम रहीम की सजा को रद्द करते हुए उन्हें इस मामले के सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है। जेल में ही रहेगा गुरमीत राम रहीम हालांकि अन्य तीन दोषियों कुलदीप, निर्मल सिंह और किशन लाल की सजा बरकरार रखी गई है। इन सभी को इस मामले में सीबीआई अदालत ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। गुरमीत राम रहीम व अन्य दोषियों ने 2019 के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े साक्ष्यों और दलीलों पर विस्तृत विचार करते हुए डेरा प्रमुख के खिलाफ आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित न होने के आधार पर उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया। वह फिलहाल रोहतक की सुनारिया जेल में दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म मामले में 20 साल की सजा काट रहा है। यानी इस मामले में बरी होने के बावजूद, राम रहीम बलात्कार सहित अन्य मामलों में मिली सजा के कारण फिलहाल जेल में ही रहेगा। क्या था पूरा मामला? अक्टूबर 2002 में सिरसा में अपना स्थानीय समाचार पत्र ‘पूरा सच’ चलाने वाले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी, जिससे बाद में उनकी मौत हो गई थी। इस हत्याकांड ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। दरअसल, पत्रकार छत्रपति ने अपने अखबार में डेरा प्रमुख के खिलाफ लगे आरोपों से संबंधित खबरें प्रमुखता से छापी थीं। इन रिपोर्टों में एक ऐसा गुमनाम पत्र भी शामिल था जिसमें डेरा के भीतर साध्वियों के यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसी के बाद राम रहीम के खिलाफ जांच का दायरा बढ़ा था। शुरुआती जांच के बाद यह हाई-प्रोफाइल मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था। जनवरी 2019 में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने राम रहीम और अन्य को हत्या की साजिश रचने का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट के इस फैसले पर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के 46 वर्षीय बेटे अंशुल छत्रपति ने गहरी निराशा व्यक्त की है और इसे एक बड़ा झटका करार दिया है। अंशुल ने स्पष्ट किया कि वे हार नहीं मानेंगे। उन्होंने कहा- हम शीर्ष अदालत का रुख करेंगे। हमारे पास कोई अन्य विकल्प नहीं है। हमारी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी और हम सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेंगे। अदालत द्वारा अन्य आरोपियों की सजा बरकरार रखने पर अंशुल ने कहा- हमारी लड़ाई डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ थी। मेरे पिता की दुश्मनी उन शूटरों या डेरा मैनेजर से नहीं थी। उस समय मेरे पिता केवल राम रहीम की ही पोल खोल रहे थे। अगर मुख्य आरोपी को ही बरी कर दिया गया है, तो निश्चित रूप से यह हमारे लिए बहुत बड़ा झटका है। 25 साल का संघर्ष अपनी लंबी कानूनी लड़ाई को याद करते हुए उन्होंने कहा- पिछले लगभग 25 वर्षों से मैं यह कानूनी लड़ाई लड़ रहा हूं। इतने प्रभावशाली व्यक्ति से टक्कर लेना कभी आसान नहीं होता। ट्रायल शुरू होने से पहले भी हमने ऐसे झटके सहे थे। हालांकि निचली अदालत ने हमें राहत दी थी, लेकिन अब हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हम अपनी लड़ाई आगे भी जारी रखेंगे; मेरी उम्मीदें अभी भी कायम हैं। 

रूसी तेल से और बैन हटा सकता है US, अचानक ढीले पड़े ट्रंप के तेवर?

नई दिल्ली. वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा बाजार में पिछले कुछ दिनों में एक बड़ा और हैरान करने वाला बदलाव देखने को मिला है। हमेशा आक्रामक रुख अपनाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने अचानक रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में ढील दे दी। इसके साथ ही, बिना किसी शोर-शराबे के भारत ने अपने लिए एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक जीत हासिल कर ली है। अमेरिकी ट्रेजरी (वित्त) मंत्री स्कॉट बेसेंट ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी सरकार और अधिक रूसी तेल से प्रतिबंध हटाने पर विचार कर रही है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है। इससे ठीक एक दिन पहले, अमेरिका ने भारत को मॉस्को से तेल खरीदने की अस्थायी मंजूरी दी थी। बाजार में आपूर्ति बढ़ाने की रणनीति फॉक्स बिजनेस से बात करते हुए ट्रंप के मंत्री स्कॉट बेसेंट ने शुक्रवार को कहा, ‘हम अन्य रूसी तेलों से भी प्रतिबंध हटा सकते हैं।’ उन्होंने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि समुद्र में करोड़ों बैरल प्रतिबंधित कच्चा तेल जहाजों पर मौजूद है। अनिवार्य रूप से, उन पर से प्रतिबंध हटाकर ट्रेजरी बाजार में एक नई सप्लाई पैदा कर सकता है। अमेरिका ने इस बात पर जोर दिया है कि इन नए कदमों का उद्देश्य मॉस्को को राहत देना बिल्कुल नहीं है। रूस पर ये प्रतिबंध यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की बातचीत में उसके आचरण के कारण लगाए गए थे। अमेरिका का कहना है कि यह नई छूट केवल उस सप्लाई को प्रभावित करेगी जो पहले से ही ट्रांजिट में है या जहाजों पर लदी है। बेसेंट ने यह भी कहा कि इस संघर्ष के दौरान बाजार को राहत पहुंचाने के लिए अमेरिका लगातार नए कदमों की घोषणा करता रहेगा, क्योंकि तेल की ऊंची कीमतें अमेरिकी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों के लिए परेशानी का सबब बन गई हैं। भारत को मिली विशेष छूट इससे पहले गुरुवार को, अमेरिकी सरकार ने आर्थिक प्रतिबंधों में अस्थायी रूप से ढील दी थी ताकि समुद्र में फंसे रूसी तेल को भारत को बेचा जा सके। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि विभिन्न प्रतिबंध व्यवस्थाओं द्वारा रोके गए जहाजों से होने वाले लेनदेन सहित इस तरह की खरीद-फरोख्त को 3 अप्रैल, 2026 के अंत तक के लिए अधिकृत किया गया है। अचानक क्यों ढीले पड़े ट्रंप के तेवर? (अमेरिका की मजबूरी) अमेरिका द्वारा रूसी तेल पर से प्रतिबंध हटाने या ढील देने के पीछे रूस से कोई प्रेम नहीं है, बल्कि यह एक भयंकर आर्थिक और भू-राजनीतिक मजबूरी है। अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ जो सीधा युद्ध छिड़ गया है, उसने खाड़ी क्षेत्र में आग लगा दी है। ईरान के जवाबी हमलों के कारण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ से होने वाला व्यापार लगभग ठप हो गया है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है। इस चोकपॉइंट के बंद होने से महज एक हफ्ते में कच्चे तेल की कीमतों में 30% का भारी उछाल आया है। शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में 8.5 प्रतिशत का भारी उछाल दर्ज किया गया। यह उछाल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आया जिसमें उन्होंने कहा था कि मध्य पूर्व का यह युद्ध केवल ईरान के बिना शर्त आत्मसमर्पण पर ही समाप्त होगा। अमेरिका में बढ़ती महंगाई और पेट्रोल की ऊंची कीमतें राष्ट्रपति ट्रंप के लिए घरेलू स्तर पर राजनीतिक नुकसान का कारण बन सकती हैं। ट्रंप ने भले ही ईरान के बिना शर्त आत्मसमर्पण तक युद्ध जारी रखने की बात कही हो, लेकिन वे जानते हैं कि लंबे समय तक तेल की इतनी ऊंची कीमतें अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मंदी में धकेल सकती हैं। बाजार को शांत करने के लिए अमेरिका को तुरंत किसी भी कीमत पर बाजार में तेल की जरूरत है। रूसी तेल से और बैन हटा सकता है अमेरिका: इसका मतलब क्या है? अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का बयान बहुत नपा-तुला लेकिन स्पष्ट है। अमेरिका रूस पर लगे मूल प्रतिबंधों को खत्म नहीं कर रहा है, बल्कि एक तकनीकी ढील निकाल रहा है। बेसेंट के अनुसार, प्रतिबंधों के कारण करोड़ों बैरल रूसी कच्चा तेल वर्तमान में जहाजों पर समुद्र में फंसा हुआ है। अमेरिका इन विशेष जहाजों पर से प्रतिबंध हटाकर इस तेल को बाजार में उतारना चाहता है। इससे वैश्विक आपूर्ति बढ़ेगी और तेल की कीमतों में कुछ नरमी आएगी। वाशिंगटन इसे रूस को राहत के तौर पर पेश नहीं कर रहा है। उनका तर्क है कि यह केवल ट्रांजिट में फंसे तेल के लिए है, न कि रूस के भविष्य के तेल उत्पादन के लिए। यह अमेरिका की मजबूरी में उठाया गया कदम है ताकि वैश्विक तेल संकट को टाला जा सके। खामोश रहकर भी भारत की जीत कैसे? इस पूरे वैश्विक उथल-पुथल में भारत सबसे बड़े विजेता के रूप में उभरा है, और वह भी बिना अमेरिका से कोई सीधा टकराव मोल लिए। भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% से अधिक आयात करता है। महंगे तेल का सीधा असर भारत की महंगाई और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। अमेरिका ने भारत को 3 अप्रैल 2026 तक समुद्र में फंसे इस रूसी तेल को खरीदने की विशेष और अस्थायी छूट दे दी है। चूंकि यह तेल प्रतिबंधित और फंसा हुआ था, इसलिए भारत इसे रूस से भारी डिस्काउंट पर खरीद सकेगा। इससे भारत का आयात बिल काफी कम होगा। भारत ने इस पूरे संकट में ‘स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी’ बनाए रखी। भारत ने ना तो अमेरिका का विरोध किया और ना ही रूस से अपने संबंध तोड़े। खामोश रहकर भारत ने बस सही समय का इंतजार किया। अमेरिका को वैश्विक तेल बाजार को क्रैश होने से बचाने के लिए भारत जैसे बड़े खरीदार की जरूरत थी, जो इस तेल को खपा सके। पहले जो तेल खरीदने पर भारत पर अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा मंडराता था, अब वही तेल भारत अमेरिकी सरकार की ‘आधिकारिक मंजूरी’ से खरीदेगा।

ईरान के शाहेद ड्रोन से अधिक खतरनाक और एडवांस हथियार बना चुका है भारत

 नई दिल्ली ईरान के सस्ते शाहेद-136 ड्रोन और अमेरिका के नए LUCAS ड्रोन ने युद्ध में कम कीमत पर बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया है. इन ड्रोनों से दुश्मन की महंगी एयर डिफेंस को भारी संख्या में हमला करके चकमा दिया जा सकता है. इसी तरह भारत भी अपना जवाब तैयार कर चुका है। बेंगलुरु की कंपनी न्यूस्पेस रिसर्च टेक्नोलॉजीज (NRT) ने शेषनाग-150 नाम का लंबी दूरी का स्वार्म अटैक ड्रोन बनाया है. यह ड्रोन पूरी तरह स्वदेशी है. विकास परीक्षण में तेजी से आगे बढ़ रहा है. यह ड्रोन पहली बार करीब एक साल पहले उड़ा था. अब ऑपरेशन सिंदूर जैसी हाल की घटनाओं के बाद इसकी जरूरत और ज्यादा तेज हो गई है। शेषनाग-150 ड्रोन क्या है और इसकी खासियतें शेषनाग-150 एक लंबी दूरी का लॉयटरिंग मुनिशन है, यानी यह लक्ष्य के ऊपर घूम सकता है. निगरानी कर सकता है. फिर हमला कर सकता है. इसकी रेंज 1000 किलोमीटर से ज्यादा है. यह 5 घंटे से अधिक समय तक हवा में रह सकता है. इसमें 25 से 40 किलोग्राम का वॉरहेड लगाया जा सकता है, जो इमारतों, वाहनों, रडार या सैनिकों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. यह ड्रोन स्वार्म अटैक कर सकता है, यानी कई ड्रोन साथ मिलकर हमला करते हैं। इससे दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम को ओवरलोड करके तोड़ा जा सकता है. ड्रोन खुद लक्ष्य ढूंढता है, ट्रैक करता है और हमला करता है. यह GPS बंद होने पर भी काम कर सकता है क्योंकि इसमें विजुअल नेविगेशन सिस्टम है, जो कैमरे से रास्ता देखता है। स्वार्म टेक्नोलॉजी और मदर-कोड की ताकत शेषनाग-150 का असली राज उसका स्वदेशी मदर-कोड है. यह एक खास सॉफ्टवेयर है जो कई ड्रोनों को एक साथ कंट्रोल करता है. ड्रोन आपस में बात करते हैं, खुद प्लान बनाते हैं और हमला करते हैं. अगर एक ड्रोन खराब हो जाए तो बाकी काम जारी रखते हैं. यह कोड ड्रोन को बहुत स्मार्ट बनाता है।  दुनिया में ऐसे स्वार्म ड्रोन कम हैं. भारत का यह सिस्टम ईरान के शाहेद से आगे है क्योंकि इसमें ज्यादा एडवांस्ड स्वार्म और GPS-डिनाइड नेविगेशन है. कंपनी ने इसे मॉड्यूलर बनाया है, यानी भविष्य में आसानी से बदलाव किए जा सकते हैं। क्यों अब यह ड्रोन इतना जरूरी हो गया पिछले कुछ सालों में यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व में संघर्ष और हाल ही में भारत-पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि सस्ते ड्रोन कितने खतरनाक हैं. पाकिस्तान ने सैकड़ों सस्ते ड्रोन से भारत की एयर डिफेंस को थका देने की कोशिश की. लेकिन भारत ने कम लेकिन ज्यादा प्रभावी ड्रोन और लॉयटरिंग मुनिशन से पाकिस्तान के रडार और एयर डिफेंस को निशाना बनाया। ऑपरेशन सिंदूर में NRT की कंपनी ने अपनी अन्य ड्रोन क्षमताएं दीं, जिससे शेषनाग-150 पर फोकस बढ़ गया. अब भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के लिए यह ड्रोन बहुत महत्वपूर्ण है. यह सस्ता, ज्यादा संख्या में बनाया जा सकता है. दुश्मन के महंगे सिस्टम को आसानी से नष्ट कर सकता है। भविष्य में क्या होगा शेषनाग-150 अभी विकास और परीक्षण के दौर में है. हाल में वर्ल्ड डिफेंस शो में इसका मॉडल दिखाया गया. कंपनी इसे सेना को पेश कर रही है. अगर यह सफल हुआ तो भारत की ड्रोन युद्ध क्षमता बहुत मजबूत हो जाएगी।

ईरान जंग से सीखा सबक, कुवैत में अमेरिकी फाइटर जेट जैसी गलती न हो, इसलिए भारत तैयार कर रहा तीनों सेनाओं का नया कमांड

नई दिल्ली भारत अब अपनी सेनाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. लंबे समय से मांग हो रही संयुक्त थिएटर कमांड (Joint Theatre Commands) को लागू करने की तैयारी तेज हो गई है. यह सुधार सेना, नौसेना और वायुसेना को एक साथ मिलाकर एकीकृत कमान बनाने का काम करेगा. यानी तीनों सेनाएं अलग-अलग नहीं बल्कि एक ही कमांडर के अधीन काम करेंगी. यह बदलाव भारत की सैन्य ताकत को बहुत बढ़ाएगा और दुश्मन के सामने बेहतर तैयारी करेगा। ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध से सबक लेते हुए भारत तैयार हो रहा मध्य पूर्व में चल रहे ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध से भारत ने बहुत कुछ सीखा है. इस युद्ध में हवाई हमलों और ड्रोन-मिसाइलों की संख्या बहुत ज्यादा है. ऐसे में भारत अपनी हवाई रक्षा और कमांड सिस्टम को मजबूत कर रहा है. इसी क्रम में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल के लिए इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) विकसित किया जा रहा है. यह सिस्टम ग्राउंड रडार, हवाई चेतावनी विमान (AEW&C) और फाइटर जेट्स से आने वाले डेटा को एक जगह इकट्ठा करेगा और पूरी हवाई स्थिति का एक साफ नक्शा दिखाएगा। ग्रुप कैप्टन अनुपम बनर्जी ने क्या कहा पूर्व फाइटर पायलट और वायुसेना के पूर्व प्रवक्ता ग्रुप कैप्टन अनुपम बनर्जी ने इंडिया टुडे को बताया कि रूस-यूक्रेन युद्ध हो या अब ईरान युद्ध – भारत हर बदलती स्थिति से सीख रहा है. खासकर एयर डिफेंस के मामले में तीनों सेनाओं के लिए एक ही स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि भारत के पास पहले से ही कई सिस्टम मौजूद हैं लेकिन अब उन्हें और एकीकृत किया जा रहा है ताकि कोई गलती न हो। IACCS क्या है और यह कैसे काम करेगा IACCS एक बहुत उन्नत और ऑटोमेटिक कमांड-कंट्रोल नेटवर्क है. यह भारत के लिए एक संयुक्त हवाई रक्षा कवच (एयर डिफेंस शील्ड) बनाएगा. इस सिस्टम से…     खतरे की तुरंत पहचान होगी।     दुश्मन के हवाई हमले को जल्दी नाकाम किया जा सकेगा.     फ्रेंडली फायर (अपनी ही सेना पर गलती से हमला) की घटनाएं रुकेंगी. ईरान युद्ध में अमेरिकी F-15 फाइटर जेट्स की क्रैश जैसी घटनाओं से बचने के लिए ही यह सिस्टम बनाया जा रहा है. IACCS आर्मी के अकाशतीर सिस्टम से भी जुड़ेगा ताकि तीनों सेनाओं में पूरी तरह तालमेल रहे। कौन बना रहा है और कब तैयार होगा? यह सिस्टम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) बना रहा है. BEL भारत की सबसे बड़ी डिफेंस कंपनी है जो रडार और कमांड सिस्टम में माहिर है. IACCS को 2026 तक पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य है. एक बार यह काम कर गया तो भारतीय वायुसेना (IAF) किसी भी हवाई खतरे का बहुत तेज और प्रभावी जवाब दे सकेगी। संयुक्त थिएटर कमांड और IACCS का बड़ा फायदा संयुक्त थिएटर कमांड से भारत की सेनाएं अब क्षेत्रीय आधार पर काम करेंगी. जैसे उत्तरी थिएटर में चीन के खिलाफ, पश्चिमी थिएटर में पाकिस्तान के खिलाफ – एक ही कमांडर तीनों सेनाओं को नियंत्रित करेगा. IACCS इस कमांड को हवाई हिस्से में और मजबूत बनाएगा. इससे…     फैसले तेज होंगे.       संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा.       दुश्मन के सामने एकजुट ताकत दिखेगी.     यह सुधार भारत को आधुनिक युद्ध के लिए तैयार कर रहा है जहां हवाई, जमीन और समुद्री ताकत एक साथ काम करती है। भविष्य में क्या होगा भारत की सेनाएं अब दुनिया के बड़े युद्धों से सीख रही हैं. अपनी कमजोरियों को दूर कर रही हैं. IACCS और संयुक्त थिएटर कमांड जैसे कदम भारत को न सिर्फ मजबूत बनाएंगे बल्कि पड़ोसी देशों को भी संदेश देंगे कि भारत की रक्षा व्यवस्था अब बहुत उन्नत हो गई है. 2026 तक IACCS चालू होने पर भारत की हवाई सुरक्षा दुनिया की सबसे बेहतरीन में शुमार हो जाएगी।  

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet