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भारत कनेक्शन या महज संयोग? ईरानी पोत IRIS Dena को अमेरिका ने समुद्र में किया तबाह, कई सवाल बाकी

वाशिंगटन अमेरिकी हमले का शिकार हुई ईरानी IRIS Dena को ईरान ने भारत का मेहमान बताया था। हालांकि, भारतीय नौसेना के साथ अभ्यास करने और विदा होने की तारीख अलग इशारा कर रही हैं। ईरान ने आरोप लगाए हैं कि अमेरिका ने भारत के मेहमान पर बगैर चेतावनी हमला कर दिया था। हाल ही में अमेरिकी स्ट्राइक में IRIS Dena डूब गई थी, जिसमें करीब 80 लोगों की मौत हो गई थी। कब आया भारत और कब निकला सूत्रों ने बताया है कि 28 फरवरी को युद्ध छिड़ने के बाद जहाज ने भारत से मदद नहीं मांगी थी। IRIS Dena 16 फरवरी से 25 फरवरी तक चले वाइजैग में IFR यानी इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू का हिस्सा बनी थी। खास बात है कि अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की शुरुात 28 फरवरी को की थी। भारतीय मेहमान थी या नहीं इस लिहाज से ईरानी जहाज 25 फरवरी के बाद भारतीय क्षेत्र के बाहर था और विदा होने के बाद अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में था। अखबार को सूत्रों ने बताया कि जहाज और उसमें शामिल लोग 16 फरवरी से 25 फरवरी के बीच भारतीय मेहमान थे। इसके बाद जहाज ने भारत किसी भी तरह की कोई मदद की मांग नहीं की थी। खास बात है कि अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ भी पोत पर हमले की पुष्टि कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह किसी दुश्मन युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबोने की पहली घटना है। ईरान ने बताया था भारतीय मेहमान ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा, ‘लगभग 130 नाविकों को ले जा रहे और भारत की नौसेना के अतिथि पोत ‘फ्रिगेट देना’ पर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिना किसी चेतावनी के हमला किया गया। मेरी बात याद रखना- अमेरिका ने जो उदाहरण पेश किया है, उसे उस पर अत्यधिक पछतावा होगा।’ ईरान के सबसे नए युद्धपोतों में से एक, आईरिस देना, मौदगे श्रेणी का एक फ्रिगेट है जो ईरानी नौसेना के लिए समुद्र में गश्त करता है। यह भारी तोपों, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, पोत-रोधी मिसाइलों और टॉरपीडो से लैस था। पोत पर एक हेलीकॉप्टर भी था। श्रीलंका ने बचाया बुधवार को विदेश मंत्री विजिथा हेराथ ने संसद को बताया कि श्रीलंका की नौसेना को सूचना मिली थी कि 180 लोगों को ले जा रहा पोत ‘इरिस देना’ संकट में है, जिसके बाद श्रीलंका ने बचाव अभियान के लिए अपने पोतों और वायुसेना के विमानों को भेजा।  

मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: ईरान के खिलाफ 100 दिन की लड़ाई के संकेत, अमेरिका ने मांगे और खुफिया अधिकारी

वाशिंगटन अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियानों का समर्थन करने के लिए पेंटागन से अतिरिक्त खुफिया कर्मियों की मांग की है। सेना कम से कम 100 दिनों के लिए यह मदद चाह रही है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि यह युद्ध शुरुआती अनुमानों की तुलना में काफी लंबा चल सकता है। सितंबर तक चल सकता है युद्ध ‘पॉलिटिको’ की रिपोर्ट में आंतरिक दस्तावेजों के हवाले से लिखा है कि यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अमेरिकी रक्षा विभाग से फ्लोरिडा स्थित अपने मुख्यालय में और अधिक सैन्य खुफिया कर्मचारियों को भेजने का आग्रह किया है। इसका उद्देश्य आने वाले महीनों में ईरान के खिलाफ अभियानों को सुचारू रूप से चलाना है। इस अतिरिक्त कर्मचारियों की मांग से पता चलता है कि अमेरिका एक लंबे अभियान की योजना बना रहा है, जो सितंबर तक खिंच सकता है। यह स्थिति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन पिछली टिप्पणियों के बिल्कुल उलट है, जिनमें उन्होंने युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद कहा था कि यह अभियान लगभग चार सप्ताह या उससे भी कम समय में पूरा हो सकता है। एक अमेरिकी अधिकारी ने पॉलिटिको को बताया कि रक्षा अधिकारी इस क्षेत्र में अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणालियां तैनात करने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें विशेष रूप से छोटी और कम खर्चीली ‘एंटी-ड्रोन तकनीक’ शामिल हैं, जिन्हें पेंटागन ने हाल के वर्षों में विकसित किया है। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ अमेरिका और इजरायल द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किया गया यह युद्ध 28 फरवरी को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के नाम से शुरू हुआ था। इस अभियान के पहले ही दिन ईरान की राजधानी तेहरान में एक बड़े हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई उनके आवास पर मारे गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने इस युद्ध के व्यापक परिणामों का पूरी तरह से अनुमान नहीं लगाया था। नतीजतन, अमेरिकी विदेश विभाग ने पूरे मध्य पूर्व से अपने राजनयिक कर्मचारियों को सुरक्षित निकालने के लिए अतिरिक्त संसाधन लगाने शुरू कर दिए हैं। निकासी प्रक्रिया का सीधा नियंत्रण अब विदेश विभाग के वरिष्ठ नेतृत्व के हाथों में है। इस अभियान के दौरान अब तक छह अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में और भी अमेरिकी सैनिक हताहत हो सकते हैं। पड़ोसी देशों पर खतरा इस संघर्ष का असर अब फारस की खाड़ी के अन्य देशों पर भी पड़ने लगा है। ईरानी ड्रोन और मिसाइलें संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, कुवैत और अन्य पड़ोसी देशों के हवाई क्षेत्र की ओर उड़ती देखी गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया भर में तेल निर्यात के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, वहां से जहाजों की आवाजाही काफी हद तक रुक गई है। ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे के कारण व्यापारिक और तेल के जहाज इस रास्ते से गुजरने से बच रहे हैं। इन युद्धों में लंबा फंसा अमेरिका     वियतनाम युद्ध लगभग 20 साल (अमेरिकी सैनिकों की प्रमुख मौजूदगी करीब 8 साल)। परिणाम: अमेरिका को भारी नुकसान (58,000+ अमेरिकी मौतें। 2. अफगानिस्तान युद्ध 20 साल – अमेरिका की सबसे लंबी जंग। परिणाम: ट्रिलियंस डॉलर खर्च, हजारों अमेरिकी मौतें, लेकिन 2021 में वापसी के साथ तालिबान फिर सत्ता में आ गया। 3. इराक युद्ध मुख्य ऑपरेशन करीब 8 साल, लेकिन ISIS के खिलाफ 2014 से आगे भी जारी (कुल 20+ साल का प्रभाव)। परिणाम: लाखों मौतें, क्षेत्र में अस्थिरता, और ISIS जैसी नई समस्याओं का जन्म।  

होली बनी काल! गुजरात में पानी में डूबने की अलग-अलग घटनाओं में 30 से ज्यादा लोगों की मौत

अहमदाबाद गुजरात में होली के दूसरे दिन मनाई जाने वाली धुलेटी का त्योहार इस बार कई परिवारों के लिए मातम लेकर आया। राज्य के अलग-अलग जिलों में तालाब, झील, नहर और नदियों में डूबने से 3 बच्चों समेत 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। ये हादसे करीब 10 अलग-अलग जगहों से सामने आये हैं। होली के बाद लोग रंग खेलने के बाद नहाने के लिए पानी के स्रोतों पर पहुंचते हैं, लेकिन कई बार यही खुशी बड़ी त्रासदी में बदल जाती है। इस साल भी ऐसा ही हुआ, जब राज्य के कई इलाकों से डूबने की दुखद खबरें सामने आईं। प्रशासन और स्थानीय लोगों ने कई जगह बचाव अभियान चलाया, लेकिन कई लोगों को बचाया नहीं जा सका। कई जिलों में डूबने की घटनाएं जानकारी के मुताबिक, राज्य के अलग-अलग जिलों में यह हादसे हुए। अहमदाबाद शहर में 4 लोगों की मौत हुई, जबकि अहमदाबाद जिले के मांडल में 3 बच्चों की जान चली गई। सूरत जिले के बारडोली में 4, मांगरोल में 3 और किम में 3 लोगों की मौत हुई। इसके अलावा महीसागर जिले में 6, अरावली में 4, मेहसाणा में 3, नर्मदा में 3 और अमरेली में 1 व्यक्ति की डूबने से मौत हुई। इन सभी घटनाओं ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया। त्योहार के दिन हुई इतनी बड़ी संख्या में मौतों से प्रशासन भी सतर्क हो गया है। साबरमती नदी में डूबे चार दोस्त अहमदाबाद शहर के कुबेरनगर इलाके में रहने वाले चार दोस्त पीयूष, साहिल, दुर्गेश और सनी धुलेटी के दिन साबरमती नदी में नहाने के लिए पहुंचे थे। वे शहर के कोतरपुर वॉटर वर्क्स के पीछे नदी में उतरे थे। इसी दौरान अचानक चारों गहरे पानी में फंस गए और डूबने लगे। शुरुआत में फायर ब्रिगेड को तीन युवकों के डूबने की सूचना मिली थी। जब रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ तो दमकलकर्मियों को चारों दोस्तों के शव मिले। इस घटना से इलाके में शोक की लहर फैल गई और परिवारों में मातम छा गया। महीसागर की झील में डूबे चार युवक महीसागर जिले के कोठंबा इलाके में भी एक दर्दनाक हादसा हुआ। राघवाना मुवाड़ा के पास नाका झील में नहाने गए चार युवकों की डूबने से मौत हो गई। ये सभी युवक कंतार गांव के रहने वाले थे और धुलेटी के दिन झील में नहाने पहुंचे थे। झील का पानी काफी गहरा था, जिसकी वजह से वे बाहर नहीं निकल सके। घटना की सूचना मिलते ही दमकलकर्मी और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद चारों के शव झील से निकाले गए और पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए। इसी जिले के लुणावाडा और वीरपुर में भी एक-एक युवक की डूबने से मौत हुई। अहमदाबाद जिले में तीन बच्चों की मौत अहमदाबाद जिले के मांडल तालुका के सीतापुर गांव में भी बड़ा हादसा हुआ। यहां झोलासर झील में डूबने से तीन बच्चों की मौत हो गई। धुलेटी खेलने के बाद बच्चे झील में नहाने के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान वे गहरे पानी में चले गए और डूब गए। बाद में स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से बच्चों के शव झील से निकाले गए। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे गांव में मातम छा गया। जो त्योहार खुशी और रंगों के साथ मनाया जा रहा था, वह अचानक शोक में बदल गया। सूरत के किम इलाके में तीन युवकों की मौत सूरत जिले के किम इलाके में भी धुलेटी के दिन दुखद घटना सामने आई। यहां किम नदी में नहाने गए तीन युवक अचानक गहरे पानी में डूब गए। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। कुछ ही देर में तीनों की मौत हो गई। बाद में पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और शवों को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। इस घटना से इलाके में शोक का माहौल बन गया। मांगरोल में गई तीन लोगों की जान सूरत जिले के मांगरोल तालुका के पानसरा गांव में एक अलग तरह की दुखद घटना सामने आई। धुलेटी का त्योहार मनाने के बाद कुछ लोग पास की नदी में नहाने गए थे। इसी दौरान हैप्पी सिंह नाम का युवक डूबने लगा। उसे बचाने के लिए उसका भाई चंद्र भूषण नदी में कूद गया। जब वह भी डूबने लगा तो उनके साथ आए संजय पटेल ने भी दोनों को बचाने के लिए छलांग लगा दी। लेकिन नदी का पानी इतना गहरा था कि तीनों ही डूब गए और उनकी मौत हो गई। बारडोली में नदी में डूबे पांच युवक सूरत जिले के बारडोली के इसरोली गांव के पास बहने वाली मिंढोला नदी में भी बड़ा हादसा हुआ। वहां पांच युवक नदी के किनारे नहाने के लिए पहुंचे थे। अचानक वे गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। स्थानीय लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया

ईरान वॉर के बीच भारत को रूस का सहारा, पुतिन ने 95 लाख बैरल तेल सप्लाई का दिया ऑफर

 नई दिल्‍ली मिडिल में तनाव बढ़ने के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्‍चे तेल आने का रास्‍ता बंद हो चुका है, जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है. ऐसे में रूस कच्चे तेल की खेप को भारत की ओर मोड़ने के लिए तैयार है।  रॉयटर्स की रिपोर्ट का दावा है कि इस समय भारतीय जलक्षेत्र के पास जहाजों पर लगभग 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल मौजूद है और इसे कुछ ही हफ्तों में भारत पहुंचाया जा सकता है.  गौरतलब है कि यह खबर तब सामने आई है, जब मिडिल ईस्‍ट से तेल आयात करने का रास्‍ता बंद है, जहां से भारत करीब 50 फीसदी तेल आयात करता था. यह भारत के लिए एक बड़ी राहत है।  रिपोर्ट का कहना है कि आपूर्ति में रुकावट बढ़ने के बीच भारतीय रिफाइनर्स के लिए यह एक बड़ी राहत है. हालांकि सूत्र ने यह स्‍पष्‍ट नहीं किया है कि जहाजों पर रखा माल कहां जा रहा था, लेकिन यह जरूर बताया कि गैर-रूसी बेड़े के जहाजों द्वारा ले जाए गए माल को जरूरत पड़ने पर जल्दी से भारत की ओर मोड़ा जा सकता है।  ऑप्‍शन की तलाश में भारत  भारत के पास अभी सीमित तेल भंडार पड़ा हुआ है, जिस कारण वह किसी विकल्‍प की तलाश में है, जहां से उसे तेल की सप्‍लाई होती रहे. रिपोर्ट का कहना है कि भारत के पास कच्चे तेल का भंडार लगभग 25 दिनों की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है, जबकि डीजल, पेट्रोल और पेट्रोलियम गैस जैसे रिफाइन उत्पादों का भंडार भी कम है।  रॉयटर्स ने कहा कि भारत के सरकारी सूत्र ने बताया कि नई दिल्ली ने वैकल्पिक आपूर्ति विकल्पों की खोज शुरू कर दी है क्योंकि मध्य पूर्व संघर्ष अगले 10-15 दिनों तक जारी रह सकता है, जिससे शिपमेंट प्रभावित हो सकते हैं. भारत के लिए कच्‍चे तेल का रिस्‍क होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अस्थिरता पैदा होने के कारण आया है।  रूस ने तेल भेजने को दिखाई तत्परता  भारत की रिफाइनरियां हर दिन लगभग 5.6 मिलियन बैरल तेल को रिफाइन करती हैं, जिसका अर्थ है कि शिपिंग मार्गों में किसी भी प्रकार की लंबी रुकावट से आपूर्ति में तेजी से कमी आ सकती है. उद्योग जगत के सूत्रों का कहना है कि अगर मध्य पूर्वी देशों से कच्चे तेल की आपूर्ति में कमी आती है तो मॉस्को इस अंतर को पाटने में मदद करने के लिए तैयार है, और संभावित रूप से भारत की कच्चे तेल की जरूरतों का 40% तक पूरा कर सकता है। 

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, महंगाई भत्ते में 4% का बढ़ा भुगतान

नई दिल्ली  बढ़ती महंगाई के बीच केंद्र सरकार ने आखिरकार केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत दे दी है। सरकार ने महंगाई भत्ता यानी DA और महंगाई राहत यानी DR में 4% की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इस फैसले से करीब 49 लाख केंद्रीय कर्मचारी और लगभग 65 लाख पेंशनभोगियों को सीधा फायदा मिलेगा। ऐसे समय में जब रोजमर्रा की चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, यह बढ़ोतरी लाखों परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। सरकार ने यह फैसला उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI-IW के ताजा आंकड़ों के आधार पर लिया है। महंगाई के कारण कर्मचारियों की जेब पर जो असर पड़ रहा था, उसे संतुलित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। आसान शब्दों में कहें तो यह बढ़ोतरी कर्मचारियों की क्रय शक्ति को बनाए रखने में मदद करेगी। DA और DR का महत्व: आपकी सैलरी पर सीधा असर महंगाई भत्ता सरकारी कर्मचारियों के बेसिक वेतन का एक तय प्रतिशत होता है। वहीं पेंशनभोगियों को इसी तरह की सहायता महंगाई राहत (DR) के रूप में दी जाती है। जब महंगाई बढ़ती है तो सरकार समय-समय पर DA और DR में संशोधन करती है, ताकि कर्मचारियों और पेंशनर्स की आय का वास्तविक मूल्य बना रहे। मान लीजिए किसी कर्मचारी का बेसिक वेतन 30,000 रुपये है। अगर पहले 50% DA मिल रहा था, तो उसे 15,000 रुपये महंगाई भत्ता मिलता था। अब 4% की बढ़ोतरी के बाद DA 54% हो जाएगा, यानी 16,200 रुपये। इस तरह हर महीने 1,200 रुपये की अतिरिक्त रकम सीधे सैलरी में जुड़ जाएगी। हालांकि यह सिर्फ एक उदाहरण है। असल बढ़ोतरी आपके पे-मैट्रिक्स और बेसिक पे पर निर्भर करेगी। एरियर और भुगतान की तारीख सरकार ने साफ किया है कि यह बढ़ोतरी पिछली तारीख से लागू मानी जाएगी, जो आमतौर पर 1 जनवरी से प्रभावी होती है। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को पिछले महीनों का बकाया यानी एरियर भी मिलेगा। यह एरियर एकमुश्त उनके बैंक खाते में जमा किया जाएगा। त्योहारों या घरेलू खर्चों के समय यह अतिरिक्त राशि काफी काम आएगी। पेंशनभोगियों को भी एरियर का लाभ मिलेगा, जिससे उन्हें मेडिकल खर्च और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत होगी। आमतौर पर बढ़ोतरी की घोषणा के बाद 1-2 महीनों के भीतर भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी जाती है। अर्थव्यवस्था और समाज पर असर DA में बढ़ोतरी का असर सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे बाजार पर पड़ता है। जब लाखों लोगों की आय बढ़ती है, तो उनकी खर्च करने की क्षमता भी बढ़ती है। इससे बाजार में मांग बढ़ती है और स्थानीय व्यापार को फायदा होता है। पेंशनभोगियों के लिए यह बढ़ोतरी खास मायने रखती है। कई बुजुर्ग पूरी तरह पेंशन पर निर्भर होते हैं। दवाइयों, इलाज और रोजमर्रा के खर्चों के बीच यह अतिरिक्त रकम उन्हें आर्थिक सहारा देती है। इसी वजह से DA और DR में संशोधन को सामाजिक सुरक्षा का अहम हिस्सा माना जाता है। क्या आगे और बढ़ सकता है DA? कर्मचारी संगठनों की मांग है कि भविष्य में DA को और बढ़ाया जाए और 8वें वेतन आयोग के गठन पर भी जल्द फैसला लिया जाए। हालांकि फिलहाल 4% की बढ़ोतरी को तात्कालिक राहत के रूप में देखा जा रहा है। महंगाई के आंकड़ों के आधार पर साल में दो बार DA की समीक्षा की जाती है, इसलिए आगे भी बदलाव संभव है। सरकार का कहना है कि वह आर्थिक संतुलन बनाए रखते हुए कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखेगी। फिलहाल यह बढ़ोतरी लाखों परिवारों के लिए बड़ी राहत है और इससे उनकी मासिक आय में साफ फर्क दिखाई देगा। कुल मिलाकर 4% DA बढ़ोतरी का फैसला केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए खुशखबरी लेकर आया है। बढ़ती महंगाई के दौर में यह अतिरिक्त रकम घर के बजट को संभालने में मदद करेगी। एरियर के साथ मिलने वाली राशि त्योहारों और जरूरी खर्चों में सहारा बनेगी। आने वाले समय में अगर महंगाई के आंकड़े इसी तरह बढ़ते रहे, तो DA में और संशोधन की संभावना भी बनी रहेगी। फिलहाल यह घोषणा लाखों परिवारों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए काफी है।

अमेरिका का बड़ा शक्ति प्रदर्शन: ईरान वॉर के बीच Doomsday मिसाइल टेस्ट, हिरोशिमा से भी ज्यादा विनाश का दावा; स्पेन झुका

न्यूयॉर्क/ तेहरान मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच मंगलवार रात अमेरिका ने कैलिफोर्निया तट पर एक डूम्सडे बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सांता बारबरा के पास वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से रात 11 बजे ‘मिनटमैन III बैलिस्टिक मिसाइल’ लॉन्च की गई, जो हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से 20 गुना ज्यादा ताकतवर परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।  यूएस स्पेस फोर्स के मुताबिक, जीटी 254 के रूप में जाना जाने वाला निहत्था रॉकेट, पश्चिम-मध्य प्रशांत महासागर में मार्शल द्वीप के पास अपने टार्गेट पर जाकर गिरा. फोर्स ग्लोबल स्ट्राइक कमांड के मुताबिक, मिसाइल को ‘प्रभावशीलता, तत्परता और सटीकता को सत्यापित करने’ के लिए दागा गया था।  576वें फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल कैरी व्रे ने एक प्रेस रिलीज में कहा, “इससे हमें मिसाइल सिस्टम के अलग-अलग घटकों के प्रदर्शन का आकलन करने की अनुमति मिली।  जंग की ज़द में पूरा मिडिल ईस्ट पिछले दिनों अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया, जिसमें देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की तेहरान में मौत हो गई. इसके बाद पूरा मिडिल ईस्ट जंग की चपेट में आ गया है।   खामेनेई की मौत के बाद ईरान की तरफ से लगातार इजरायल और मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी हैं. उधर हिज्बुल्लाह के एक्टिव होने के बाद इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरुत में हमलों की झड़ी लगा दी है।  राष्ट्रपति ट्रंप ने बाद में ईरान पर हमले तेज करने की कसम खाई और चेतावनी देते हुए कहा कि बड़ा हमला होने वाला है.  धमकी और स्पेन आ गया लाइन पर! मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक नया विवाद सामने आया है. इस बार मामला केवल ईरान, इज़राइल और अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यूरोप का प्रमुख देश स्पेन भी इसमें खिंच आया. महज दो दिनों के भीतर स्पेन की सरकार के बयान और रुख में जो बदलाव दिखाई दिया, उसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में आर्थिक दबाव की ताकत को फिर से सामने ला दिया।  पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने ईरान पर अमेरिका और इज़राइल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना की. उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ता युद्ध दुनिया के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. सांचेज़ के अनुसार, इस तरह की लड़ाई लाखों लोगों की ज़िंदगी को खतरे में डाल सकती है. उन्होंने टेलीविजन पर अपने संबोधन में कहा कि स्पेन ऐसी किसी कार्रवाई का हिस्सा नहीं बनेगा जो दुनिया के लिए नुकसानदेह हो और उसके अपने मूल्यों के खिलाफ जाती हो. उनका कहना था कि केवल किसी देश के दबाव या डर से स्पेन अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेगा. लेकिन स्पेन का यह रुख ज्यादा देर तक बिना प्रतिक्रिया के नहीं रहा।  ट्रंप की कड़ी चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुरंत सख्त प्रतिक्रिया दी. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर स्पेन अपने यहां मौजूद संयुक्त सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए अमेरिका को नहीं करने देता, तो अमेरिका स्पेन के साथ व्यापारिक संबंध खत्म कर सकता है. ट्रंप के इस बयान को यूरोप में गंभीरता से लिया गया. वजह यह है कि ट्रंप पहले भी कई बार टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों की धमकी देकर दूसरे देशों पर दबाव बनाते रहे हैं. स्पेन ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के लिए अपने ठिकानों का इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया था. यही फैसला ट्रंप को नागवार गुजरा।  सैन्य अड्डों पर शुरू हुआ विवाद स्पेन के दक्षिण में दो अहम सैन्य अड्डे हैं रोता नौसैनिक अड्डा और मोरॉन वायुसेना अड्डा.इनका इस्तेमाल अमेरिका और स्पेन दोनों करते हैं, लेकिन इन पर नियंत्रण स्पेन का ही है. ट्रंप ने इन अड्डों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर अमेरिका चाहे तो उनका इस्तेमाल कर सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि हम वहां जाकर उनका उपयोग कर सकते हैं, कोई हमें रोक नहीं सकता।  स्पेन का साफ संदेश: युद्ध नहीं ट्रंप की धमकी के बावजूद सांचेज़ ने शुरुआत में अपना रुख बरकरार रखा. उन्होंने कहा कि स्पेन की नीति बहुत स्पष्ट है युद्ध नहीं.उनका कहना था कि अगर ईरान पर हमले बढ़ते हैं तो मध्य पूर्व एक बार फिर लंबे और महंगे युद्ध में फंस सकता है, जैसा पहले इराक और अफगानिस्तान में हुआ था.इन युद्धों ने कई सालों तक क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित किया था और भारी मानवीय व आर्थिक नुकसान हुआ था।  यूरोपीय संघ के नियमों के मुताबिक व्यापार से जुड़े फैसले सामूहिक रूप से किए जाते हैं. इसलिए अगर अमेरिका स्पेन पर व्यापारिक कार्रवाई करता है तो उसका असर पूरे यूरोप पर पड़ सकता है. यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता ओलोफ गिल ने कहा कि यूरोपीय संघ अपने सदस्य देशों के साथ खड़ा है और जरूरत पड़ने पर अपने आर्थिक हितों की रक्षा करेगा।  ऐसे होता है दोनों के बीच व्यापार  आंकड़ों के अनुसार अमेरिका और स्पेन के बीच व्यापार काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन इतना बड़ा भी नहीं कि तुरंत आर्थिक संकट पैदा हो जाए. स्पेन के केंद्रीय बैंक बैंक ऑफ स्पेन के मुताबिक अमेरिका के साथ स्पेन का कुल व्यापार उसके सकल घरेलू उत्पाद का करीब 4.4 प्रतिशत है.स्पेन से अमेरिका को होने वाला निर्यात करीब 16 अरब यूरो का है.इस हिसाब से अमेरिका स्पेन का छठा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है. फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका की चेतावनी का असर केवल आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक भी होता है।  ट्रंप के बयान के बाद स्पेन के उद्योग और व्यापार जगत में चिंता बढ़ गई. वहां के प्रमुख कारोबारी संगठन सीईओई, सीईपीवाईएमई और एटीए ने कहा कि अमेरिका स्पेन का एक अहम आर्थिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को प्रभावित नहीं होना चाहिए. व्यापारिक संगठनों ने उम्मीद जताई कि दोनों देश बातचीत के जरिए इस विवाद को सुलझा लेंगे।  सरकार की तरफ से संयम बरतने का संदेश स्पेन के मंत्री कार्लोस कुएर्पो ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि ट्रंप की टिप्पणियों के अलावा अमेरिका की तरफ से कोई नया कदम नहीं उठाया गया है. उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय शांत रहने की अपील की।  स्पेन और ट्रंप प्रशासन के बीच यह पहला विवाद नहीं है. पिछले साल स्पेन ने नाटो के उस प्रस्ताव … Read more

POCSO के तहत बड़ी घटना, 10वीं के बच्चों ने छोटे छात्रों के साथ किया अनुचित व्यवहार

 नाशिक महाराष्ट्र के नाशिक से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां कक्षा 10 में पढ़ने वाले कई छात्रों के खिलाफ POCSO के तहत केस दर्ज किया गया है। आरोप हैं कि ये छात्र अपने से भी कम उम्र के छात्रों के साथ अप्राकृतिक सेक्स करते थे। साथ ही इस अपराध को रैगिंग का नाम दिया जाता था। पुलिस ने अभिभावकों की शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया है।  रिपोर्ट के अनुसार, घटना नाशिक जिले के एक सरकारी हॉस्टल की है। आरोप हैं कि यहां कक्षा 10 के छात्रों ने कक्षा 5 और 6 के बच्चों के साथ अप्राकृतिक सेक्स किया है। मंगलवार को इस मामले में शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद एसपी बालासाहेब पाटिल मौके पर पहुंचे और जांच की। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘कक्षा 10 के कई छात्र कम उम्र के छात्रों के साथ रैगिंग के नाम पर अप्राकृतिक सेक्स करते थे। पीड़ितों के बयान के आधार पर बीते 6 से 7 महीनों से उनके साथ ऐसा काम किया जा रहा था। 22 फरवरी को उन्होंने इस मामले को हॉस्टल सुप्रीटेंडेंट सामने उठाया था।’ उन्होंने कहा, ‘इसके बाद सुप्रीटेंडेंट ने कक्षा 10 के लड़कों के माता पिता से संपर्क किया और उन्हें घर लेकर जाने के लिए कहा। उन्होंने पीड़ितों के पैरेंट्स को भी बुलाया। एक पीड़ित के माता पिता ने मंगलवार को कक्षा 10 के लड़कों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।’ कार्रवाई शुरू पुलिस ने सीनियर स्टूडेंट्स को हिरासत में लेने की शुरुआत कर दी है। इसके बाद उन्हें जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा। इसके अलावा हॉस्टल के सुप्रीटेंडेंट समेत तीन कर्मचारियों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। उनपर आरोप हैं कि घटना की जानकारी लगने के बाद भी उन्होंने पुलिस को सूचित नहीं किया था। हॉस्टल में 60 छात्रों के रहने की क्षमता है, लेकिन फिलहाल 48 रह रहे थे।

मिडिल ईस्ट संकट गहराया, भारत में 180 फ्लाइट्स रद्द; यात्रियों के लिए नई एडवाइजरी जारी

 नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रही लड़ाई का असर फ्लाइट पर भी दिख रहा है. दोनों तरफ से लगातार हमले हो रहे हैं, जिससे साफ है कि यह संकट अभी जल्द खत्म होता नहीं दिख रहा. हालात सुधरने के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे हैं. इस टकराव का असर कई देशों पर पड़ रहा है, खासकर अरब के मुस्लिम देशों के नागरिकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. लगातार हो रहे हमलों में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है।  रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान में मरने वालों की संख्या 1,000 से ज्यादा हो गई है. लेबनान में करीब 60 और इजरायल में लगभग एक दर्जन लोगों की मौत हुई है. इस संघर्ष में अमेरिका के 6 सैनिकों के मारे जाने की भी खबर है. बढ़ते तनाव का असर हवाई यात्रा पर भी पड़ा है. सुरक्षा कारणों से कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, जबकि कई फ्लाइट्स का रूट बदला गया है. कुछ एयरपोर्ट्स पर सेवाएं अस्थायी रूप से प्रभावित हुई हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है और हवाई सेवाओं पर भी असर पड़ा है. कतर की राजधानी दोहा में भारतीय दूतावास ने अहम सूचना जारी की है. दूतावास के मुताबिक, कतर के एयरस्पेस बंद होने की वजह से हमाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानें फिलहाल अस्थायी रूप से निलंबित हैं. कतर एयरवेज समेत अन्य एयरलाइंस की फ्लाइट्स भी कैंसिल है. यात्रियों से कहा गया है कि वे अपनी यात्रा को दोबारा तय करने के लिए संबंधित एयरलाइन से संपर्क में रहें. दूतावास ने यह भी बताया कि वह कतर प्रशासन और भारतीय समुदाय के नेताओं के साथ मिलकर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है. वहीं, स्काई न्यूज के अनुसार मिडिल ईस्ट संकट के बीच ब्रिटेन सरकार की पहली चार्टर्ड फ्लाइट उड़ान नहीं भर पाई।  एयर इंडिया की कई फ्लाइट कैंसिल एयर इंडिया ने जानकारी दी है कि मिडिल ईस्ट के लिए उसकी ज्यादातर उड़ानें 5 मार्च 2026 की रात 11:59 बजे (IST) तक निलंबित रहेंगी. हालांकि जेद्दा के लिए कुछ तय उड़ानें 5 मार्च से दोबारा शुरू की जाएगी. इनमें दिल्ली-जेद्दा-दिल्ली और मुंबई-जेद्दा-मुंबई रूट शामिल हैं. इसके अलावा एयर इंडिया 5 मार्च की सुबह मुंबई-दुबई-दिल्ली रूट पर एक अतिरिक्त फ्लाइट (AI909D/996D) चलाने की योजना बना रही है, ताकि फंसे हुए यात्रियों को वापस लाया जा सके. यह उड़ान बड़े B777 विमान से संचालित होगी, जिसमें ज्यादा यात्रियों के बैठने की क्षमता होती है।  भारत के कई शहरों से करीब 180 उड़ानें रद्द सूत्रों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और एयरस्पेस प्रतिबंधों के कारण 4 मार्च को मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के एयरपोर्ट से लगभग 180 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं. मुंबई एयरपोर्ट पर 48 प्रस्थान और 45 आगमन समेत कुल 93 उड़ानें रद्द हुईं. दिल्ली एयरपोर्ट पर 25 प्रस्थान और 27 आगमन मिलाकर 52 उड़ानें रद्द हुईं. बेंगलुरु एयरपोर्ट पर अलग-अलग एयरलाइनों की 34 उड़ानें रद्द की गईं, जिनमें 18 आगमन उड़ानें थीं।  फंसे यात्रियों को लाने के लिए चलाई गई विशेष फ्लाइट मुंबई एयरपोर्ट से 4 मार्च को कुछ विशेष फ्लाइट भी चलाई गईं. स्पाइसजेट ने फुजैराह से मुंबई के लिए दो विशेष उड़ानें संचालित की, जबकि एयर इंडिया ने दुबई से मुंबई के लिए एक फ्लाइट चलाई. इसके अलावा अमीरात ने दुबई से मुंबई के लिए तीन फ्लाइट संचालित की. गल्फ एयर और रॉयल जॉर्डन ने भी अम्मान (जॉर्डन) और दम्माम (सऊदी अरब) से मुंबई के लिए एक-एक फ्लाइट चलाई।  कोलकाता एयरपोर्ट पर भी कई फ्लाइट कैंसिल कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भी पश्चिम एशिया के लिए कई उड़ानें प्रभावित हुईं. दोहा, दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों के लिए कम से कम पांच फ्लाइट्स कैंसिल कर दी गईं. इनमें कतर एयरवेज और अमीरात की उड़ानें भी शामिल थीं. देश की बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने बताया कि एयरस्पेस प्रतिबंधों के कारण 28 फरवरी से 3 मार्च के बीच पश्चिम एशिया और अन्य अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए उसकी 500 से ज्यादा फ्लाइट कैंसिल करनी पड़ीं।  कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बढ़ाई गईं हालांकि यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए कुछ एयरलाइनों ने अन्य अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर अतिरिक्त उड़ानें शुरू की हैं. एयर इंडिया ने दिल्ली से टोरंटो, फ्रैंकफर्ट और पेरिस के लिए अतिरिक्त फ्लाइट जोड़ने का फैसला किया है. वहीं एयर इंडिया एक्सप्रेस ने मस्कट, दिल्ली और मुंबई के बीच अतिरिक्त सेवाएं शुरू करने की घोषणा की है।  विदेशी नागरिकों को निकालने की तैयारी अमेरिका के विदेश विभाग ने भी बताया कि मिडिल ईस्ट में फंसे अमेरिकी नागरिकों को निकालने के लिए विशेष चार्टर्ड फ्लाइट चलाई गई है और आगे भी ऐसी उड़ानें भेजी जाएंगी।  यूएई में ओवरस्टे जुर्माना माफ संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी बड़ा फैसला लेते हुए उन यात्रियों का ओवरस्टे जुर्माना माफ कर दिया है जो फ्लाइट रद्द होने या एयरस्पेस बंद होने की वजह से समय पर देश नहीं छोड़ पाए. कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब पूरी दुनिया की हवाई यात्रा पर पड़ रहा है. एयरलाइंस लगातार अपनी उड़ानें कैंसिल या बदल रही हैं और यात्रियों को अपनी यात्रा से पहले एयरलाइन से जानकारी लेने की सलाह दी जा रही है।  लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर एतिहाद एयरवेज का चेक-इन काउंटर बंद है और वहां उड़ानों में देरी और रद्द होने की सूचना लगाई गई है. अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद कई फ्लाइट्स प्रभावित हो गई हैं। 

25 साल पहले जारी फतवे में परमाणु हथियारों पर रोक, फिर भी ईरान को लेकर अमेरिका की चिंता बरकरार

तेहरान  ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन ने कहा कि सुप्रीम लीडर अली खामनेई के परमाणु हथियारों पर जारी फतवे के चलते ईरान कभी न्यूक्लियर हथियार विकसित नहीं करेगा. ईरान की ओर से आया ये बयान साफ करता है कि वो अमेरिका के साथ किसी भी तरह की लड़ाई में पड़ने के मूड में नहीं है. हालांकि अमेरिका की तैयारी को देखते हुए ईरान ने भी अपनी पूरी तैयारी रखी हुई है लेकिन उसने साफ किया है कि उस पर बनाया जा रहा दबाव फालतू है. अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता से पहले ईरानी राष्ट्रपति ने दोहराया कि खामेनेई का स्पष्ट ऐलान है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने गुरुवार को कहा कि उनका देश परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा, क्योंकि देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई पहले ही इस पर प्रतिबंध लगा चुके हैं. राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने कहा -‘जब हमारे सर्वोच्च नेता घोषणा करते हैं कि हम परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे, तो इसका मतलब है कि हम उन्हें नहीं बनाएंगे.’ उन्होंने यह भी कहा कि किसी समाज का धार्मिक नेता राजनीतिक नेताओं की तरह झूठ नहीं बोल सकता. परमाणु वार्ता से ठीक पहले आया बयान यह बयान अमेरिका के साथ परमाणु मुद्दे पर तीसरे दौर की वार्ता से पहले आया है. अमेरिका लगातार ईरान पर परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाता रहा है, जबकि तेहरान इन आरोपों से इनकार करता है. गौरतलब है कि अयातुल्ला अली खामेनेई ने 2000 के दशक की शुरुआत में एक फतवा जारी कर परमाणु हथियारों के विकास पर रोक लगा दी थी. ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है. ईरान ने पहले भी दी थी परमाणु कार्यक्रम घटाने की डील ईरान और अमेरिका के बीच जेनेवा में तीसरे दौर की वार्ता से पहले ईरान के राष्ट्रपति ने ये बयान दिया है. इससे पहले दूसरी वार्ता के दौरान विदेश मंत्री ने अमेरिका के सामने प्रस्ताव रखा था कि अगर वो अपने सारे प्रतिबंध ईरान पर से हटा लेता है, तो वो अपने यूरेनियम संवर्धन को 60 फीसदी तक घटाने के लिए तैयार है. ताजा खबरें आईं कि ईरान इसे 3-4 फीसदी तक भी सीमित रखने को तैयार हो सकता है, जैसा साल 2015 की डील में हुआ था. हालांकि अमेरिका चाहता है कि वो इसे खत्म कर दे, जिसे लेकर दोनों में विवाद बना हुआ है.

मौत के बाद की आवाज़ें: नई स्टडी से सामने आया चौंकाने वाला सच, इंसान क्या सुनता है?

न्यूयॉर्क    सोचिए… आपका दिल धड़कना बंद कर देता है. डॉक्टर CPR रोक देते हैं. आपको ‘डेथ’ घोषित कर दिया जाता है,लेकिन आपका दिमाग अब भी जिंदा है,और आपको सब कुछ सुनाई दे रहा है.यहां तक कि डॉक्टर आपकी मौत का समय भी बोल रहे हों! मौत आज भी दुनिया के लिए एक रहस्य बनी हुई है. इंसान के साथ मौत के बाद क्या होता है और आखिरी क्षणों में उसका अनुभव कैसा होता है.इस पर बहुत कुछ कहा जा चुका है. इन विषयों पर कई रिसर्च भी हो चुके हैं, लेकिन हाल ही में आई एक नई रिसर्च ने सभी को चौंका दिया. इसमें दावा किया गया है कि इंसान की मौत के बाद भी उसका दिमाग कुछ समय तक एक्टिव रहता है और वह अपने आसपास की आवाजें सुन सकता है. न्यूयॉर्क में एक डॉक्टर ने ऐसा खुलासा किया है जिसने मौत की परिभाषा को ही बदलकर रख दिया है. दिल की धड़कन रुक जाने के बाद भी इंसानी दिमाग सक्रिय रहता है, और कई बार मरीज डॉक्टरों द्वारा अपनी मौत की घोषणा तक सुन लेते हैं. यह दावा एक भयावह लेकिन महत्वपूर्ण स्टडी में किया गया है, जो Resuscitation में पब्लिश हुई है. मौत के बाद भी सबकुछ सुनाई देता है इस स्टडी का नेतृत्व न्यूयॉर्क के एनवाईयू लैंगोन मेडिकल सेंटर (NYU Langone Medical Center) के डॉक्टर सैम पारनिया ने किया. उन्होंने उन मरीजों से बात की जिन्हें क्लिनिकली मृत घोषित कर दिया गया था-यानी जिनका दिल धड़कना बंद हो चुका था,लेकिन बाद में वे दोबारा जिंदा हो गए. चौंकाने वाली बात यह थी कि कई मरीजों ने अपने कमरे में हो रही घटनाओं को सटीक रूप से याद किया. डॉ. पारनिया के अनुसार, इन मरीजों की याददाश्त इतनी स्पष्ट इसलिए थी क्योंकि दिल रुकने के बाद भी लगभग एक घंटे तक दिमाग में सामान्य और लगभग सामान्य ब्रेन ऐक्टिविटी पाई गई. उन्होंने बताया कि ये अनुभव न तो सपने जैसे होते हैं और न ही भ्रम या मतिभ्रम.ये एक्सपियरेंस खास होते हैं. इस शोध में अमेरिका और ब्रिटेन के 25 अस्पतालों में कार्डियक अरेस्ट से बचे 53 मरीजों की दिमागी गतिविधि और जागरूकता का अध्ययन किया गया. इसमें पाया गया कि 40 फीसदी मरीजों ने यादें या सचेत विचार होने की बात कही. डॉ. पारनिया के अनुसार, मौत के दौरान कई लोगों को लगता है कि वे अपने शरीर से अलग हो चुके हैं और कमरे में घूमकर चीजें देख-पहचान रहे हैं. जैसे कंप्यूटर अचानक रीबूट हो गया इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (EEG) से पता चला कि मरीजों में दिल रुकने के 35 से 60 मिनट बाद तक gamma, delta, theta, alpha और beta जैसी ब्रेन वेव्स मौजूद थीं, जो सोचने और जागरूकता से जुड़ी होती हैं. यह बताता है कि दिमाग दिल रुकने के बाद भी पूरी तरह बंद नहीं होता, बल्कि कभी-कभी उच्च स्तरीय गतिविधि दिखाता है-मानो कोई बंद कंप्यूटर अचानक रीबूट हो रहा हो. पूरी लाइफ का फ्लेशबैक एकसाथ डॉ. पारनिया का कहना है कि पहले यह माना जाता था कि दिल रुकने के 10 मिनट बाद दिमाग स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाता है, लेकिन यह शोध दिखाता है कि दिमाग CPR जारी रहने पर देर तक सक्रिय रह सकता है. यही ऊर्जा का उभार लोगों को अपने पूरे जीवन की यादें एक साथ देखने जैसा अनुभव भी दे सकता है.

दूध में यूरिया, डिटर्जेंट और पानी की मिलावट, टॉप डेयरी ब्रांड्स FSSAI जांच में फेल

भोपाल   भारत, जो दुनिया के कुल दूध उत्पादन में 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा उत्पादक देश है, अब ‘मिलावटी और असुरक्षित’ दूध के केंद्र के रूप में उभर रहा है। हाल ही में ‘ट्रस्टीफाइड’ (एक स्वतंत्र लैब टेस्टिंग प्रोग्राम) द्वारा की गई जांच ने देश के टॉप डेयरी ब्रांडों के दावों की पोल खोल दी है। बैक्टीरिया का स्तर खतरे के निशान से ऊपर ट्रस्टीफाइड की रिपोर्ट के अनुसार, कई नामी ब्रांडों के दूध के नमूनों में कोलीफॉर्म (Coliform) का स्तर FSSAI की निर्धारित सीमा से 98 गुना अधिक पाया गया। इसके अलावा, ‘टोटल प्लेट काउंट’ (Total Plate Count) भी सुरक्षित सीमा से कहीं ज्यादा था, जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। हर तीन में से एक नमूना फेल दूध की शुद्धता को लेकर सरकारी आंकड़े भी डराने वाले हैं। FSSAI द्वारा 2025 में की गई जांच में 38 प्रतिशत नमूने मिलावटी पाए गए। पिछले कुछ वर्षों का रुझान देखें तो स्थिति और भी चिंताजनक हुई है:     2015-2018: मिलावटी नमूनों की संख्या में 16.64% का इजाफा हुआ।     2022: कुल 798 नमूनों में से आधे मिलावटी पाए गए।     2025: लगभग हर तीसरा नमूना मानकों पर खरा नहीं उतरा। उत्तर भारत सबसे ज्यादा प्रभावित एफएसएसएआई की ‘मिल्क सर्विलांस रिपोर्ट’ के अनुसार, मिलावट के मामले में क्षेत्रीय स्तर पर भारी अंतर देखा गया है: क्षेत्र – मानकों में फेल नमूनों का प्रतिशत उत्तर भारत: 47% (सबसे असुरक्षित) पश्चिम भारत: 23% दक्षिण भारत: 18% पूर्वी भारत: 13% क्या मिलाया जा रहा है आपके दूध में? इंडियन जर्नल ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन की एक ताजा स्टडी में 330 नमूनों की जांच की गई, जिसमें से 70.6% में गंभीर मिलावट पाई गई। मिलावट के मुख्य कारक इस प्रकार हैं: पानी: 193 नमूनों में मात्रा बढ़ाने के लिए पानी मिलाया गया। डिटर्जेंट (23.9%): झाग बनाने और दूध को गाढ़ा दिखाने के लिए। यूरिया (9.1%): फैट और प्रोटीन की मात्रा को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए। स्वास्थ्य पर प्रभाव और सावधानी विशेषज्ञों का कहना है कि कोलीफॉर्म और डिटर्जेंट युक्त दूध पीने से पेट में संक्रमण, किडनी की बीमारी और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे दूध खरीदने से पहले ब्रांड की लेटेस्ट लैब रिपोर्ट और FSSAI मार्क की जांच जरूर करें। सोर्स- एफएसएसएआई

धारावी में ‘गरीबी का बाजार’: विदेशी 15,000 रुपये देकर 2 घंटे तक बदहाली का नजारा देखते हैं

मुंबई  सपनों की इस नगरी में ऐसा तिलिस्म है कि यहां की बदहाली भी नीलाम होती है. कहते हैं कि मुंबई के गटर भी सोने के हैं, जहां गरीबी अब केवल एक हालात नहीं, बल्कि एक ‘बिकाऊ वस्तु’ बन चुकी है. यह विडंबना ही है कि यहां के अभावों को ‘एक्सपोज़र’ और ‘एजुकेशन’ का मुलम्मा चढ़ाकर नुमाइश के लिए रखा जाता है. और इस नुमाइश के खरीदार सिर्फ सात समंदर पार से आए सैलानी ही नहीं, बल्कि मालाबार हिल और पेडडर रोड के वो संभ्रांत रईस भी हैं, जिनके लिए गरीबी एक ‘टूरिस्ट डेस्टिनेशन’ बन गई है|  दुनिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्तियों में से एक, धारावी में यह नज़ारा सबसे ज्यादा दिखाई देता है. मुंबई के दिल में बसी इस बस्ती की हालिया यात्रा के दौरान सबसे चौंकाने वाले दृश्यों में से एक था अभिजात वर्ग को गरीबी बेचा जाना, वह भी दो घंटे के 15,000 रुपये में.  जब धारावी की तंग गलियों में एक प्लंबर, राजू हनुमंता और उनके पड़ोसी इडली बेचने वाले शनप्पा का इंटरव्यू लिया, तो उसी वक्त वहां विदेशियों का एक समूह दिखाई दिया, एक ऐसी जगह जहां उनकी मौजूदगी की उम्मीद सबसे कम थी, उनके साथ एक “गाइड” भी था|  मुंबई का वो अंधेरा हिस्सा… धारावी में ऐसी कई गलियां हैं, जहां आम मुंबईकर भी जाने से हिचकिचाते हैं. ये गलियां मुंबई का वह अंधेरा हिस्सा हैं, जिन्हें कभी वरदराजन मुदलियार जैसे क्राइम बॉसों से जोड़कर देखा जाता था. उनके गुर्गे अब जबरन वसूली या खून-खराबे में तो नहीं, बल्कि उन धंधों में लगे हैं, जिन्हें अब वैध माना जाता है. जैसे रियल एस्टेट, जमीन से जुड़ी चीजें और ड्रग्स. लेखक और पूर्व खोजी पत्रकार एस. हुसैन जैदी, जो मुंबई के इस अंधेरे हिस्से को रग-रग से जानते हैं, उनका कहना है कि तरीके भले ही बदल गए हों, लेकिन फितरत अब भी वही है|  खैर, वह समानांतर अर्थव्यवस्था एक अलग कहानी है. यहां हम बात कर रहे हैं ‘गरीबी के व्यापार’ की…. गरीबी, खासकर भारत में, हाथों-हाथ बिकती है. धारावी की अरबों डॉलर की अर्थव्यवस्था में यह एक ऐसा पहलू है जिसके बारे में हमने सोचा तक नहीं था. विदेशियों के उस समूह का नेतृत्व एक स्थानीय व्यक्ति, ओंकार ढमाले कर रहा था. जब उससे पूछा गया कि वह इस ‘स्लम टूर’ के लिए कितना शुल्क लेता है, तो उसका जवाब था, “प्रति व्यक्ति 15,000 रुपये.” उसके साथ पांच विदेशी थे. यानी झुग्गियों में सिर्फ दो घंटे की पैदल सैर के लिए वह 75,000 रुपये कमाने वाला था|  गरीबी देखने आते हैं अमीर लोग सालों से चल रहा है गरीबी दर्शन  यह कोई नया चलन नहीं है,साल 2006 में ही पूरे भारत में फैल रहे ‘गरीबी पर्यटन’ (Poverty Tourism) पर रिपोर्ट दी थी, लेकिन अब कुछ बदल गया है. पहले इस तरह के टूर संगठित समूहों और प्रशिक्षित गाइडों द्वारा चलाए जाते थे. अब यह व्यवसाय खुद धारावी के निवासी संभाल रहे हैं और उनकी फीस किसी कॉर्पोरेट सैलरी के बराबर है. मुंबई आने वाले विदेशी अक्सर धारावी की लेदर मार्केट वाली सड़क तक ही आते हैं. लेकिन यह बस्ती उस मुख्य मार्ग से बहुत आगे, कई किलोमीटर तक गहराई में फैली हुई है. वहां ऐसी गलियां और कोने हैं जो दुनिया की नजरों से ओझल हैं, जहां सिर्फ वहां रहने वाले लोग ही जाते हैं. महज तीन फीट चौड़ी गलियां. ऐसी जगहें न केवल विदेशियों को, बल्कि मुंबई के उन निवासियों को भी आकर्षित करती हैं, जिन्होंने कभी यहां कदम रखने की हिम्मत नहीं की|  हालांकि, भारतीय इन स्लम टूर के लिए अलग कीमत चुकाते हैं- 1,500 रुपये से लेकर 7,000 रुपये के बीच, जहां अधिकतम कीमत भी किसी विदेशी पर्यटक से ली जाने वाली राशि की आधी होती है|  कई लोग इस तरह के दौरों को ‘वॉयूरिज्म’ (दूसरों की मजबूरी या निजी जिंदगी को मजे के लिए देखना) कहते हैं, लेकिन धारावी में पले-बढ़े और 12वीं तक पढ़े स्थानीय निवासी ढमाले के लिए अपने इलाके से कमाई करने में कुछ भी गलत नहीं है. उनका कहना है, “गोरे लोगों को झोपड़पट्टी पहली बार देखने को मिलता है इधर. अपना घर दिखा कर पैसा मिलता है, कायको नहीं दिखाएं? असली दिक्कत तब आती है, जब रईस लोग ही दूसरे अमीर लोगों को गरीबी की आधी-अधूरी जानकारी देकर पैसे कमाते हैं. धारावी की गलियों में कदम रखते ही आपको समझ आता है कि वहां जिंदगी कितनी जद्दोजहद भरी है, जहां हर शख्स अपनी पहचान बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है. जब आप ओंकार ढमाले जैसे गाइडों को विदेशियों के साथ वहां देखते हैं, जो बड़े शौक से उस गरीबी को देखने आते हैं, तब आपको मुंबई की उस उलझी हुई और अजीब सच्चाई का एहसास होता है|  धारावी वॉक्स का दूसरा पहलू जो केवल दिखावे से परे है लंबे समय तक, ‘खाकी टूर्स’ के संस्थापक भरत गोठोसकर ने पर्यटकों को धारावी ले जाने के विचार का विरोध किया. उन्होंने इंडिया टुडे डिजिटल को बताया, “पहले तीन-चार साल हमने ऐसा कभी नहीं किया.” उनके लिए यह सीधे तौर पर ‘पॉवर्टी टूरिज्म’ जैसा था. एक ऐसी स्थिति जैसा ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ फिल्म में दिखाया गया था, जहां एक जापानी पर्यटक मुंबई में “गरीब और भूखे लोगों” को देखने आता है|  कैसे बिक रही है गरीबी? लेकिन उन्होंने समझाया कि यह चलन अचानक पैदा नहीं हुआ था. 2005 में एक यूरोपीय सामाजिक कार्यकर्ता क्रिस वे और कृष्णा पुजारी द्वारा शुरू किए गए ‘रियलिटी टूर्स’ ने धारावी में व्यवस्थित तरीके से घूमने का एक खाका तैयार किया था. इसके पीछे विचार यह था कि स्थानीय छात्र इतना कमा सकें कि वे अपनी शिक्षा का खर्च उठा सकें. गोठोसकर ने कहा कि उनके मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा वापस उसी समुदाय के काम आता था. समय के साथ, जो एक व्यवस्थित पहल के रूप में शुरू हुआ था, वह कुछ और ही बन गया. उन्होंने आगे कहा- “अब धारावी में स्लम टूरिज्म एक ‘कुटीर उद्योग’ बन गया है. आज, कोई भी जो कामचलाऊ अंग्रेजी बोल सकता है, खुद को गाइड के रूप में पेश कर सकता है और “गरीबी बेच” सकता है|  समय के साथ गोठोसकर का अपना नजरिया भी बदला. खुद एक ऐसे ही धारावी दौरे में शामिल होने के बाद, उन्होंने इसे अलग तरह … Read more

2000 KM रेंज और ब्रह्मोस की स्पीड, दिल्ली से बटन दबाते ही किराना हिल्स पर आ जाएगा संकट

नई दिल्ली  मॉडर्न एज वॉर में मिसाइल की भूमिका काफी अहम है. घर बैठे एक बटन दबाते ही दुश्‍मन के खेमे में तबाही लाई जा सकती है. आज दुनिया के कई देशों के पास ऐसी कई मिसाइल्‍स हैं, जो सैकडों टन विस्‍फोटक लेकर हजारों किलोमीटर तक ट्रैवल कर टार्गेट पर अटैक कर सकती हैं. इन्‍हें इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यानी ICBM कहा जाता है. भारत ने अग्नि सीरीज के तहत इस तरह की मिसाइल डेवलप की है. अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल न्‍यूक्लियर वेपन ले जाने में सक्षम है. भारतीय डिफेंस साइंटिस्‍ट ऐसी मिसाइल डेवलप करने में जुटे हैं, जिसका इस्‍तेमाल बंकर बस्‍टर की तरह किया जा सके. बता दें कि अधिकांश देश अपने संवेदनशील सैन्‍य ठिकानों और परमाणु बम बनाने वाले प्‍लांट को जमीन के अंदर सुरक्षित कर रहे हैं. पिछले साल अमेरिका ने बंकर बस्‍टर बम का इस्‍तेमाल कर ईरान के ऐसे ही एक परमाणु ठिकाने को तबाह करने का दावा किया था. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने किराना हिल्‍स को टार्गेट कर पाकिस्‍तान को तबाही का ट्रेलर दिखाया था. पाकिस्‍तान का परमाणु ठिकाना किराना हिल्‍स की पहाड़ियों में ही अंडरग्राउंड स्थित है. इस अटैक से इस्‍लामाबाद थर-थर कांपने लगा था. अब भारत को अपने मिसाइल बेड़े में ब्रह्मोस से भी खतरनाक मिसाइल एड करने का ऑफर मिला है. इजरायल ने भारत को बेहद खतरनाक और सामरिक रूप से महत्‍वपूर्ण गोल्‍डन होराइजन एयर लॉन्‍च्‍ड बैलिस्टिक मिसाइल (ALBM) का ऑफर दिया है. यह मिसाइल डीप स्‍ट्राइक करने में सक्षम है. रेंज और स्‍पीड के मामले में यह मिसाइल ब्रह्मोस से दो कदम आगे है. इजरायल की ओर से भारत को लंबी दूरी की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए ‘गोल्डन होराइजन’ एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (ALBM) की पेशकश किए जाने की खबर सामने आई है. अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो भारत की स्‍ट्रैटजिक स्ट्राइक कैपेबिलिटी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. यह मिसाइल खास तौर पर गहरे और अत्यधिक सुरक्षित ठिकानों पर हमला करने के लिए डिजाइन की गई बताई जा रही है. यह मिसाइल इजरायल की ‘सिल्वर स्पैरो’ टार्गेट मिसाइल पर आधारित बताई जाती है, जिसकी लंबाई लगभग आठ मीटर और वजन करीब तीन टन है. सिल्वर स्पैरो का इस्तेमाल पहले मिसाइल डिफेंस सिस्टम के ट्रायल के दौरान बैलिस्टिक खतरे की नकल करने के लिए किया जाता था. अब इसी तकनीक को ऑपरेशनल हथियार में बदलकर गोल्डन होराइजन को एक कॉम्बैट-रेडी डीप-स्ट्राइक सिस्टम के रूप में विकसित किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, यह मिसाइल लड़ाकू विमानों से लॉन्च की जा सकती है और दुश्मन के अत्यधिक सुरक्षित रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम होगी. हालांकि, इसकी आधिकारिक तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन विभिन्न रक्षा आकलनों के अनुसार इसकी मारक क्षमता 1500 से 2000 किलोमीटर तक हो सकती है. कुछ अनुमान इसकी न्यूनतम प्रभावी रेंज लगभग 1000 किलोमीटर बताते हैं, जो पारंपरिक एयर लॉन्च्ड वेपन से काफी अधिक है. गोल्‍डन होराइजन: कुछ नहीं बचेगा यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब Indian Air Force अपनी स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक क्षमता को लगातार मजबूत कर रही है. भारतीय वायुसेना युद्धक्षेत्र के सामरिक लक्ष्यों से लेकर लंबी दूरी के रणनीतिक ठिकानों तक अलग-अलग स्तर की मारक क्षमता विकसित करने पर जोर दे रही है. भारत के पास पहले से ही इजरायल से प्राप्त कई सटीक हमले करने वाले हथियार मौजूद हैं, जो युद्धक्षेत्र में तेज और सटीक कार्रवाई के लिए उपयोग किए जाते हैं, लेकिन गोल्डन होराइजन जैसी मिसाइल भारत को रणनीतिक स्तर पर अधिक गहरी मार करने की क्षमता दे सकती है. इस तरह के सिस्टम से भारत की ‘डीप स्ट्राइक’ क्षमता मजबूत होगी और भविष्य की सैन्य रणनीति में नया लेयर जुड़ सकता है. इजरायल पहले ही भारत को कई उन्नत मिसाइल सिस्टम उपलब्ध करा चुका है. इनमें एयर लोरा मिसाइल शामिल है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 400 किलोमीटर है, जबकि रैम्पेज एयर-टू-सर्फेस मिसाइल करीब 250 किलोमीटर तक हमला कर सकती है. ये दोनों मिसाइलें मुख्य रूप से रडार स्टेशन, एयर डिफेंस सिस्टम, हथियार भंडार और कमांड सेंटर जैसे सामरिक लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए डिजाइन की गई हैं. लेकिन गोल्डन होराइजन इनसे अलग श्रेणी का हथियार है. इसे खास तौर पर अंडरग्राउंड न्‍यूक्लियर फैसिलिटी, मजबूत कमांड बंकर्स और कंक्रीट से सुरक्षित रणनीतिक ढांचों को नष्ट करने के लिए विकसित किया गया बताया जाता है. Golden Horizon मिसाइल क्या है? यह एक एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे लड़ाकू विमान से दागा जा सकता है. इसे इज़राइल की Silver Sparrow टारगेट मिसाइल तकनीक पर आधारित माना जाता है, जो पहले मिसाइल रक्षा परीक्षणों में इस्तेमाल होती थी. इस मिसाइल की मारक क्षमता कितनी बताई जा रही है? आधिकारिक जानकारी नहीं है, लेकिन अनुमान के अनुसार इसकी रेंज 1,000 से 2,000 किलोमीटर तक हो सकती है. यह दूरी भारत के मौजूदा एयर-लॉन्च्ड हथियारों से कहीं अधिक है. इसका उपयोग किन लक्ष्यों पर किया जाएगा? Golden Horizon को गहरे भूमिगत और मजबूत संरचनाओं जैसे परमाणु ठिकानों, कमांड बंकर और रणनीतिक सैन्य ढांचे को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है. यह मिसाइल इतनी खतरनाक क्यों मानी जा रही है? यह बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी में उड़ान भरती है और अंतिम चरण में हाइपरसोनिक गति के करीब पहुंच सकती है, जिससे इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है. इसकी तेज गति से टकराने पर भारी विनाशकारी ऊर्जा पैदा होती है. भारत के पास पहले से कौन-सी समान मिसाइलें हैं? इंडियन एयरफोर्स के पास पहले से Air LORA (लगभग 400 किमी रेंज) और Rampage (करीब 250 किमी रेंज) जैसी मिसाइलें हैं, लेकिन ये मुख्य रूप से सामरिक लक्ष्यों के लिए हैं. Golden Horizon रणनीतिक स्तर के हमलों के लिए अलग श्रेणी की प्रणाली होगी. क्या भारत ने इस मिसाइल को खरीदने का फैसला कर लिया है? अभी तक किसी आधिकारिक खरीद की पुष्टि नहीं हुई है. बातचीत प्रारंभिक चरण में बताई जा रही है, लेकिन इससे भारत की लंबी दूरी की सैन्य रणनीति में बदलाव के संकेत मिलते हैं. हाइपरसोनिक रफ्तार से अटैक एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल होने के कारण गोल्डन होराइजन लक्ष्य की ओर बढ़ते समय बैलिस्टिक मार्ग अपनाती है. लॉन्च के बाद यह ऊंचाई पर जाकर अत्यधिक तेज गति से नीचे आती है. इसकी अंतिम चरण की गति हाइपरसोनिक स्तर (कम से कम 6100 KMPH की रफ्तार) तक … Read more

हैरान कर देगा ये देश: 24 घंटे में सिर्फ 40 मिनट की रात, बाकी समय दिन ही दिन

नई दिल्ली प्राकृतिक का मतलब किसी के लिए सुंदरता है, तो किसी के लिए एक रहस्यमयी दुनिया है। कुछ लोग प्रकृति को एक रहस्यमयी दुनिया इसलिए भी मानते हैं, क्योंकि दुनिया में ऐसी कई अजीबो-गरीब चीजें हैं, जो इंसान को सोचने पर मजबूर कर देती है। जी हां, दुनिया में एक ऐसा अनोखा देश भी है जहां महज 40 मिनट के लिए ही रात होती है। इस देश में रात 12 बजकर 43 मिनट पर सूरज डूब जाता है और 40 मिनट के बाद पूरी जगमगाहट के साथ सूरज उग भी जाता है। यही नहीं इस देश में 76 दिनों तक रात नहीं होती है। अब आपके मन में यकीनन यह सवाल आ रहा होगा कि आखिर इस अनोखे देश का नाम क्या है और यहां एक लंबे दिन के बावजूद भी रात क्यों नहीं होती है। अगर हां, तो आज इस लेख के जरिये हम आपके इन्हीं सब सवालों के जवाब देंगे। साथ ही आपको एक ऐसे देश के बारे में भी बताएंगे जहां पूरे दो महीने तक सूरज नहीं उगता है और लोगों को अपनी दिनचर्या रात के अंधेरे से ही शुरू करनी पड़ती है।   नॉर्वे में होती है 40 मिनट की रात यूरोप में बसा नॉर्वे एक ऐसा अनोखा देश है, जहां दिन के उजाले के बाद रात महज 40 मिनट के लिए ही होती है। नॉर्वे के हेमरफेस्ट शहर में मई से जुलाई यानी 76 दिनों तक यहां केवल 40 मिनट के लिए ही सूरज ढलता है। बता दें, नॉर्वे के इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए देश के अलग-अलग कोने से पर्यटक आते हैं। यहां ज्यादा समय तक उजाला न होने की वजह से इस शहर को ‘Land of the Midnight Sun’ और ‘आधी रात का सूरज’ का सूरज भी कहा जाता है।   नॉर्वे में इस समय नहीं उगता सूरज अब तक हमने आपको बताया कि नॉर्वे में 76 दिनों तक केवल 40 मिनट के लिए ही सूरज निकलता है। लेकिन यह सिलसिला साल के बारह मास तक नहीं चलता है। नॉर्वे में नवंबर, दिसंबर और जनवरी के महीने में पूरी तरह से अंधेरा होता है और इन तीन महीनों के दौरान यहां सूरज नहीं निकलता है। क्यों होती है इतनी छोटी रात नॉर्वे में छोटी रात होने का मुख्य कारण यहां का भौगोलिक वातावरण है। दरअसल नॉर्वे आर्कटिक सर्किल के बेहद ही करीब है, जिसके कारण यहां गर्मियों के दिनों में सूरज की किरणें इस क्षेत्र पर सीधी पड़ती है। सूरज की किरणें इस क्षेत्र पर सीधी पड़ने के कारण यहां दिन लंबे और रात छोटी होती है। इसके अलावा, नॉर्वे में बोडो एंड साल्टेन, हेलजेलैंड, लोफोटेन कुछ ऐसे शहर भी है, जहां सूरज बिल्कुल भी नहीं ढलता है। अलास्का में दो महीने तक नहीं उगता सूरज धरती पर एक ऐसी जगह भी स्थित है, जहां पूरे दो महीनों तक सूरज नहीं निकलता है। जी हां, यह अनोखी जगह आर्कटिक सर्कल के भीतर अलास्का के उत्तरी हिस्से में है। बता दें, अलास्का में पूरे दो महीने तक सूरज नहीं निकलता है और यहां दिन छोटे व रातें लंबी होती है। अलास्का में इस भौगोलिक घटना को ‘पोलर नाइट’ के नाम से जाना जाता है। यहां रहने वाले लोग दिन के अंधेरे में ही अपने दिनचर्या की शुरुआत करते हैं और यहां बच्चे रात के अंधेरे में ही स्कूल पढ़ने के लिए जाते हैं।  

सूरज जैसी शक्ति अब इंसानों के पास, न्यूक्लियर फ्यूजन से हुआ संभव: आधा टन का चुंबक और अनलिमिटेड बिजली

नई दिल्ली न्यूजीलैंड की एक छोटी सी कंपनी ओपनस्टार टेक्नोलॉजीज ने न्यूक्लियर फ्यूजन की रेस में पूरी दुनिया को पीछे छोड़ दिया है. इस स्टार्टअप ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसे अब तक नामुमकिन माना जा रहा था. कंपनी ने आधे टन के भारी-भरकम चुंबक को हवा में तैराकर प्लाज्मा को सफलतापूर्वक कंट्रोल किया है. यह दुनिया में अपनी तरह का पहला कमर्शियल प्रयोग है. न्यूक्लियर फ्यूजन को मॉडर्न फिजिक्स का सबसे बड़ा लक्ष्य माना जाता है. अगर यह तकनीक पूरी तरह सफल होती है, तो इंसानों को असीमित बिजली मिल सकेगी. सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें न तो कार्बन उत्सर्जन होता है और न ही खतरनाक रेडियोएक्टिव कचरा निकलता है. हवा में तैरते चुंबक से कैसे पैदा होगी बिजली?     ओपनस्टार के फाउंडर रातु माताइरा ने इस मशीन के काम करने का तरीका समझाया है. उनकी कंपनी ‘लेविटेटेड डायपोल’ नाम की एक खास तकनीक पर काम कर रही है.     इसमें एक शक्तिशाली चुंबक को मैग्नेटिक फील्ड की मदद से हवा में लटकाया जाता है. इसी तैरते हुए चुंबक के चारों ओर प्लाज्मा को रोककर रखा जाता है.     अब तक पूरी इंडस्ट्री को लगता था कि ऐसी मशीन बनाना इंजीनियरिंग के हिसाब से संभव नहीं है. लेकिन न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है.     उन्होंने ‘जूनियर’ नाम के प्रोटोटाइप से यह दिखा दिया कि यह तकनीक न सिर्फ काम करती है, बल्कि इसे बड़े स्तर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है. फ्यूजन और फिशन के बीच क्या अंतर है? आजकल के परमाणु रिएक्टर ‘फिशन’ तकनीक पर चलते हैं. इसमें एटम्स को तोड़ा जाता है, जिससे एनर्जी निकलती है. लेकिन इस प्रोसेस में बहुत सारा खतरनाक कचरा भी पैदा होता है. इसके उलट ‘फ्यूजन’ की प्रक्रिया तारों और सूरज के अंदर होती है. इसमें दो एटम्स के केंद्र को आपस में जोड़ा जाता है. इस प्रोसेस से फिशन के मुकाबले कई गुना ज्यादा ऊर्जा निकलती है. सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इस प्रोसेस को शुरू करने के लिए बहुत ज्यादा बिजली की जरूरत पड़ती थी. ओपनस्टार की नई खोज ने इस मुश्किल को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. अब कम ऊर्जा खर्च करके ज्यादा बिजली बनाने का रास्ता साफ हो गया है. क्या 2030 तक घर-घर पहुंचेगी परमाणु बिजली? ओपनस्टार की सफलता के बाद अब अगले चरण की तैयारी शुरू हो गई है. कंपनी का अगला प्रोटोटाइप ‘ताही’ होगा, जिसकी मैग्नेटिक फील्ड मौजूदा मशीन से चार गुना ज्यादा ताकतवर होगी. न्यूजीलैंड की सरकार ने भी इस प्रोजेक्ट की अहमियत को समझते हुए 3.5 करोड़ डॉलर की मदद देने का वादा किया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह हाई-एनर्जी फ्लक्स-पंप तकनीक आने वाले समय में रिसर्च की दिशा बदल देगी. कंपनी का लक्ष्य है कि 2030 के दशक तक ऐसे कमर्शियल रिएक्टर तैयार कर लिए जाएं, जो शहरों को बिजली सप्लाई कर सकें. यह सफलता कोल और गैस जैसे पुराने ईंधन पर दुनिया की निर्भरता को पूरी तरह खत्म कर सकती है.

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