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ईरान पर हमले से बढ़ा तनाव, पाकिस्तान ने किया विरोध; रक्षा मंत्री बोले- हालात बिगड़े तो मुश्किलें बढ़ेंगी

इस्लामाबाद ईरान पर हमलों का विरोध पाकिस्तान में हिंसक भी हुआ। अमेरिकी दूतावास को निशाने पर भी लिया गया, तो सांसदों ने भी विरोध के सुर बुलंद किए। संसद में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के संबोधन के दौरान भी ‘जाली बोर्ड ऑफ पीस से बाहर निकलो’ के नारे लगे। वहीं, अब तो रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी कहना शुरू कर दिया है कि जंग पाकिस्तान के लिए खतरनाक है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पोस्ट में जायनिज्म (यहूदियों का आंदोलन) को मुस्लिम दुनिया में अस्थिरता की मुख्य वजह बताया है और इसे मानवता के लिए खतरा बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरान पर चल रहा युद्ध पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन की जमीन पर इजरायल के कायम होने से लेकर आज तक इस्लामी दुनिया पर जो भी बड़ी-बड़ी मुसीबतें आई हैं, जो भी युद्ध थोपे गए हैं, उनमें जायनिस्ट विचारधारा और इजरायल का सीधा हाथ दिखता है। ख्वाजा आसिफ ने ईरान के बारे में कहा कि ईरान समझौते के लिए तैयार था, इसके बावजूद उन पर युद्ध थोपा गया है। यह सब जायनिस्ट एजेंडा का हिस्सा है, जिसमें इजराइल का प्रभाव पाकिस्तान की सरहद तक लाने की कोशिश शामिल है। अफगानिस्तान, ईरान और भारत को मिलाकर पाकिस्तान विरोधी एजेंडा बनाया जा रहा है, ताकि पाकिस्तान की सरहदें असुरक्षित हो जाएं, हर तरफ से दुश्मन घेर लें और पाकिस्तान कमजोर हो जाए। वहीं, पाकिस्तान की पूर्व राजदूत ने पीस बोर्ड से हटने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि शरीफ सरकार को ट्रंप का गाजा बोर्ड छोड़ देना चाहिए। पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने कहा कि नवाज शरीफ की सरकार को ट्रंप के बनाए “बोर्ड ऑफ पीस” से बाहर निकल जाना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पाकिस्तान को शुरुआत में ही इस बोर्ड में शामिल नहीं होना चाहिए था। लोधी ने आरोप लगाया कि “ट्रंप सरकार कई देशों पर हमले कर चुकी है और गाजा में इजरायली कार्रवाई में उसकी भूमिका रही है।”

सुरक्षा अलर्ट जारी: United States Embassy ने जॉर्डन और यरुशलम की यात्रा पर लगाई रोक

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका दूतावास ने जॉर्डन और यरुशलम के लिए एडवाइजरी जारी की है। अमेरिका ने स्थानीय खबरों पर नजर रखने और इन दोनों देशों की यात्रा करने से पहले विचार करने को कहा है। अमेरिका ने सुरक्षा कारणों से जॉर्डन में 2 मार्च को गैर-आपातकालीन अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। अमेरिकी दूतावास के कामकाज में बदलावों को दिखाने के लिए एडवाइजरी समरी को अपडेट किया गया। अमेरिकी दूतावास ने कहा कि आतंकवाद और सशस्त्र संघर्ष के कारण जॉर्डन की यात्रा पर फिर से विचार करें। अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को दुश्मनी शुरू होने के बाद ईरान से ड्रोन एवं मिसाइल हमलों और कमर्शियल उड़ानों में बड़ी रुकावटों का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा अगर जाते हैं तो इमरजेंसी में निकलने का प्लान बनाएं जो अमेरिकी सरकार की मदद पर निर्भर न हो। क्राइसिस और इवैक्यूएशन पर हमारी जानकारी देखें। अपने आसपास का ध्यान रखें। वहीं, येरुशलम को लेकर अमेरिकी दूतावास ने कहा, “इजरायल से निकलने वाले अमेरिकियों को निकालने या सीधे मदद करने की स्थिति में नहीं है। जब आप अपनी सुरक्षा योजना बना रहे हों तो आपकी जानकारी के लिए नीचे दी गई जानकारी दी गई है। इजरायली टूरिज्म मंत्रालय ने 2 मार्च से ताबा बॉर्डर क्रॉसिंग के लिए शटल चलाना शुरू कर दिया है। शटल के लिए पैसेंजर लिस्ट में शामिल होने के लिए आपको मिनिस्ट्री के इवैक्युएशन फॉर्म के जरिए रजिस्टर करना होगा।” यूएस एंबेसी ने कहा कि अमेरिकी दूतावास पर्यटन मंत्रालय के शटल के लिए कोई सिफारिश (पक्ष या विपक्ष में) नहीं कर सकती है। अगर आप निकलने के लिए इस ऑप्शन का फायदा उठाते हैं तो अमेरिकी सरकार आपकी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती। यह जानकारी उन लोगों के लिए एक कर्टसी के तौर पर दी गई है जो इजरायल छोड़ना चाहते हैं। इसके अलावा, फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति को लगता है कि तेहरान के साथ लंबे समय तक बातचीत के बावजूद समय खत्म हो रहा है। उन्होंने कहा, “हमने गर्मियों में ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के दौरान यूरेनियम संवर्धन फैसिलिटी को नष्ट कर दिया था।” उपराष्ट्रपति ने कहा कि सरकार का मकसद इसे कुछ समय के लिए रोकने से कहीं ज्यादा था। वेंस ने कहा, “ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल के पहले तीन, चार साल तक देश को सिर्फ ईरानी न्यूक्लियर हथियार से सुरक्षित ही नहीं रखना चाहते थे, बल्कि वह यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि ईरान के पास कभी न्यूक्लियर हथियार न बना सके।” वेंस ने कहा, ट्रंप ने अंदाजा लगाया कि ईरान अपने प्रोग्राम को आगे बढ़ाने पर तुला हुआ है और हर हाल में परमाणु हथियार बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, तब अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान पर एक्शन लेने का फैसला किया।” विदेश मंत्री मार्को रुबियो की इस टिप्पणी पर कि अमेरिका आगे और कड़ा कदम उठा सकता है, इस बारे में सवाल पूछे जाने पर वेंस ने अमेरिकी सेना की क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “ईरान के परमाणु कार्यक्रम को गंभीर नुकसान पहुंचाने की हमारी क्षमता कहीं अधिक है। साथ ही हम उन विभिन्न मिसाइलों को भी निशाना बना सकते हैं जो हमारे सैनिकों के लिए खतरा हैं। राष्ट्रपति के पास कई विकल्प उपलब्ध हैं।

जंग की आंच बाजार तक: तेल संकट गहराया, शिपमेंट रुकी तो चावल सप्लाई पर भी खतरा

ईरान   ईरान-इजरायल युद्ध के बाद पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ गए हैं। Strait of Hormuz में बढ़ते खतरे और जहाजों की आवाजाही पर असर ने वैश्विक सप्लाई चेन को झटका दिया है। कच्चे तेल और नेचुरल गैस की आपूर्ति पर दबाव के साथ-साथ भारत का बासमती चावल निर्यात भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। समंदर और बंदरगाहों पर अटका लाखों टन चावल ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के मुताबिक, भारत से खाड़ी देशों को भेजा गया करीब 4 से 6 लाख टन बासमती चावल ट्रांजिट में, भारतीय बंदरगाहों पर या गंतव्य देशों के पोर्ट पर फंसा हुआ है। आम तौर पर खाड़ी देशों तक चावल पहुंचने में करीब 40 दिन लगते हैं लेकिन मौजूदा संकट ने इस पूरी प्रक्रिया को बाधित कर दिया है। 5-6 हजार करोड़ रुपए दांव पर फंसे हुए कंसाइनमेंट की अनुमानित वैल्यू 5,000 से 6,000 करोड़ रुपए बताई जा रही है। शिपिंग कंपनियों के बीमा कवर रद्द होने और जोखिम बढ़ने से कंटेनर फ्रेट दरें दोगुनी से ज्यादा हो गई हैं। ऐसे में निर्यातकों ने नई बुकिंग और पैकिंग का काम रोक दिया है और पहले से किए गए अनुबंधों को प्राथमिकता दी जा रही है। 70% निर्यात खाड़ी पर निर्भर भारत हर साल करीब 60 लाख टन से अधिक बासमती चावल निर्यात करता है, जिसमें से लगभग 70% हिस्सा खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, ईरान और यूएई को जाता है। वित्त वर्ष 2024-25 में कुल 60.65 लाख टन बासमती का निर्यात हुआ, जिसकी कीमत 50,312 करोड़ रुपए (5.94 अरब डॉलर) रही।   फोर्स मेज्योर क्लॉज का सहारा? ट्रेड सूत्रों के अनुसार, यदि हालात लंबे समय तक बने रहते हैं तो कुछ निर्यातक ‘फोर्स मेज्योर’ क्लॉज का सहारा ले सकते हैं। यह प्रावधान युद्ध या प्राकृतिक आपदा जैसी अप्रत्याशित परिस्थितियों में अनुबंध की शर्तों से अस्थायी राहत देता है। क्या भारत में सस्ता होगा बासमती? रिकॉर्ड पैदावार के बीच मांग घटने से बासमती की कीमतों में पहले ही करीब 6% की गिरावट आ चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्यात बाधित रहा तो घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ने से दाम और नीचे आ सकते हैं। हालांकि ट्रेडर्स का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बासमती एक जरूरी खाद्य वस्तु है और भारतीय चावल का वास्तविक विकल्प नहीं है। जैसे ही हालात सामान्य होंगे, खाड़ी देशों से मांग दोबारा तेजी पकड़ सकती है। फिलहाल निर्यातक ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपना रहे हैं।

मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव: Benjamin Netanyahu ने दिए ईरान पर तेज कार्रवाई के संकेत

ईरान इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि तेहरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध कई साल नहीं चलेगा। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह युद्ध शनिवार को शुरू हुआ जब यूएस और इजरायल ने हमले किए, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को मार गिराया गया। नेतन्याहू ने फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम हैनिटी में कहा, ‘मैंने कहा था कि यह तेज और निर्णायक हो सकता है। इसमें कुछ समय लग सकता है, लेकिन यह कई साल नहीं चलेगा। यह कोई अनंत युद्ध नहीं है।’ बेंजामिन नेतन्याहू ने क्षेत्रीय पिछले युद्धों से अलग इसे सीमित और निर्णायक बताया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरू में युद्ध को चार से पांच सप्ताह का अनुमान लगाया था, लेकिन अब इसे व्यापक और खुला युद्ध सही ठहरा रहे हैं। जंग तेजी से फैल रही है। इजरायल ने लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह मिलिशिया पर फिर से हमले किए हैं, जबकि ईरान ने अमेरिकी आधार वाले खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन अटैक किए हैं। ईरान ने बहरीन में अमेरिकी एयर बेस पर हमला किया, जिसमें कई लक्ष्य नष्ट होने का दावा किया गया है। सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले हुए, जिससे आग लगी। कैसे युद्ध का हो रहा विस्तार इजरायल ने तेहरान में ईरान की स्टेट ब्रॉडकास्टर IRIB परिसर पर हमला किया और लेबनान में हिजबुल्लाह ठिकानों को निशाना बनाया। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में अधिक सैनिक तैनात किए हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान में 1,250 से अधिक लक्ष्यों पर हमले किए और 11 ईरानी जहाज नष्ट किए। इस संघर्ष में ईरान, इजरायल, लेबनान और अन्य देशों में सैकड़ों नागरिक मारे गए हैं। युद्ध के कारण क्षेत्रीय अराजकता फैल गई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरने वाला विश्व का 5वां तेल व्यापार प्रभावित हुआ है, जिससे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। हजारों यात्री अभी तक फंसे दुबई सहित प्रमुख खाड़ी हवाई अड्डे चौथे दिन भी बंद हैं, जिससे हजारों यात्री फंसे हुए हैं। कई उड़ानें रद्द हो गईं और एशियाई एयरलाइंस के शेयर गिरे हैं। शिपिंग दरें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने बहरीन, इराक और जॉर्डन से गैर-आपातकालीन कर्मचारियों को निकालने का आदेश दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करने का लक्ष्य बिना जमीनी सेना के हासिल किया जा सकता है, लेकिन ट्रंप किसी विकल्प को नहीं खारिज कर रहे। इजरायली अधिकारी ने कहा कि अभियान सप्ताहों तक चल सकता है, लेकिन जमीनी सेना ईरान में भेजना अभी मुश्लिकल लग रहा है।  

ईरान की रणनीति से अमेरिका पर बढ़ा दबाव, संकट से बचने के लिए तुरंत किए 10 उपाय

ईरान अमेरिका को भी अब इन हालातों में अपने सुरक्षाकर्मियों, राजदूतों और अन्य नागरिकों की चिंता सताने लगी है। उसने आनन-फानन में इजरायल, सऊदी अरब से लेकर बहरीन तक अपनी सुरक्षा के लिहाज से कुछ कदम उठाए हैं। कई देशों में दूतावास ही उसे बंद करने पड़े हैं। ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्लाह खामेनेई मारे गए हैं। इजरायल और अमेरिका की ओर से तेहरान समेत ईरान के अलग-अलग शहरों में हमले किए जा रहे हैं। इसके बाद भी ईरान के हौसले गिरे नहीं हैं। उसने ताबड़तोड़ हमले अब भी जारी रखे हैं। इजरायल के अलावा ईरान की ओर से मिडल ईस्ट के देशों पर भी लगातार हमले किए जा रहे हैं। यही नहीं अमेरिका को भी अब इन हालातों में अपने सुरक्षाकर्मियों, राजदूतों और अन्य नागरिकों की चिंता सताने लगी है। उसने आनन-फानन में इजरायल, सऊदी अरब से लेकर बहरीन तक अपनी सुरक्षा के लिहाज से कुछ कदम उठाए हैं। 1. यरूशलम में स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों को निईकालने में मदद पर हाथ खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी दूतावास ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे इजरायल के पर्यटन मंत्रालय की मदद से किसी भी तरह बाहर निकलें। दूतावास ने कहा कि फिलहाल हम स्थिति में नहीं हैं कि आप लोगों को बाहर निकाल सकें। 2. अमेरिकी कंपनी अमेजन के डेटा सेंटर को संयुक्त अरब अमीरात में हुए ईरानी हमले में नुकसान पहुंचा है। इस डेटा सेंटर पर ईरान के ड्रोन्स ने हमला किया। इसके चलते पूरे मिडल ईस्ट में अमेजन की क्लाउड सर्विस प्रभावित हुई है। बहरीन में भी अमेजन के एक फैसिलिटी सेंटर को ड्रोन अटैक से नुकसान पहुंचा है। 3. अमेरिका ने सऊदी अरब में अपनी कौंसुलर सर्विसेज को बंद कर दिया है। सोमवार को ही उसके एक दफ्तर पर हमला हुआ था। यह ड्रोन अटैक था और खामेनेई की हत्या के बाद किया गया था। इसी डर के चलते कनाडा ने भी फिलहाल सऊदी अरब में स्थित दूतावास को बंद कर दिया है। 4. इराक में स्थित अपने दूतावास से अमेरिका ने सभी सरकारी कर्मचारियों से निकलने को कहा है। इसके अलावा ट्रैवल को लेकर भी एडवाइजरी जारी की गई है। 5. इस तनाव को देखते हुए कुवैत में भी अमेरिका अलर्ट है। उसने यहां अपने दूतावास को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है। ईरान के हमले के बाद यहां दूतावास से धुआं उठता देखा गया था। दूतावास के लिए सभी तरह के अपॉइंटमेंट्स भी कैंसिल कर दिए गए हैं। 6. ईरान ने बहरीन में स्थित अमेरिकी एयरबेस को भी टारगेट किया गया है। यहां पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन अटैक हुए हैं। अब तक मिली जानकारी के अनुसार 20 ड्रोन्स और तीन मिसाइलों के जरिए यहां हमला किया गया था। 7. दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई के सबसे अहम रूट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ईरान ने बंद करने का ऐलान किया है। इससे अमेरिका के मित्र देशों को भी नुकसान उठाना पड़ेगा, जो इस रास्ते के माध्यम से तेल सप्लाई करते हैं। 8. एक दिलचस्प घटना कुवैत में हुई है, जहां अमेरिका के तीन फाइटर जेट्स मार गिराए गए। गलती से कुवैत ने ही यह हमला कर दिया। 9. अमेरिका ने सभी मिडल ईस्ट देशों को लेकर एक साझा बयान जारी किया है। अपने नागरिकों से तत्काल निकलने को कहा है। 10. सबसे बड़ा झटका अमेरिका यह लगा है कि उसे उम्मीद थी कि खामेनेई के मारे जाने के बाद ईरान पर उसकी पिट्ठू सरकार होगी। वहां के स्थानीय लोग खुद ही सत्ता बदल की मांग करेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो सका है।  

₹5,083 करोड़ की डिफेंस महाडील: कोस्ट गार्ड को स्वदेशी हेलीकॉप्टर, रूस से आएंगी घातक मिसाइलें

नई दिल्ली भारत ने अपनी सैन्य शक्ति को आधुनिक बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है. 3 मार्च 2026 को नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में दो अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए. कुल 5,083 करोड़ रुपये के इन सौदों का सीधा असर भारत की समुद्री सीमा और हवाई सुरक्षा पर पड़ेगा. सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ रहा है और समुद्री सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है. स्वदेशी हेलीकॉप्टर और ‘मेक इन इंडिया’ को रफ्तार इस मेगा डील का पहला हिस्सा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ हुआ है. इसके तहत 2,901 करोड़ रुपये की लागत से 6 एडवांस्ड लाइट (ध्रुव) हेलीकॉप्टर (ALH Mk-III) भारतीय कोस्ट गार्ड के लिए खरीदे जाएंगे. ये हेलीकॉप्टर समुद्री निगरानी, मछुआरों की सुरक्षा और पर्यावरण की देखरेख में गेमचेंजर साबित होंगे. सबसे बड़ी बात यह है कि इस प्रोजेक्ट से 200 से ज्यादा MSMEs को फायदा होगा और करीब 65 लाख मानव-घंटों का रोजगार पैदा होगा. यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को सच करने की दिशा में मील का पत्थर है. रूसी मिसाइलों से लैस होंगे भारतीय युद्धपोत दूसरा समझौता भारतीय नौसेना की हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किया गया है. 2,182 करोड़ रुपये की लागत से रूस की कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ ‘वर्टिकल लॉन्च श्टिल’ मिसाइलों का सौदा हुआ है. ये मिसाइलें युद्धपोतों पर तैनात की जाएंगी, जो दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को पलक झपकते ही तबाह करने की क्षमता रखती हैं. इससे न केवल नौसेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि भारत और रूस की पुरानी रक्षा साझेदारी को भी नई ऊर्जा मिलेगी.

तेज धमाकों से दहला तेहरान, शपथ के दो दिन बाद रक्षा मंत्री की मौत से सियासी भूचाल

ईरान-इजरायल ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच एक बड़ा झटका! इजरायली मीडिया ने दावा किया है कि ईरान के नए रक्षा मंत्री सैयद माजिद अब अल-रेज़ा (या माजिद इब्न अल-रेज़ा) को इजरायली हमले में मार गिराया गया है। खबर के मुताबिक, उन्होंने शपथ ग्रहण के महज 24-48 घंटे बाद ही अपनी जान गंवा दी। यह घटना अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के चौथे दिन हुई, जिसमें ईरान के कई शीर्ष नेता पहले ही ढेर हो चुके हैं। नियुक्ति और तुरंत मौत ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह और आईआरजीसी कमांडर मोहम्मद पाकपुर सहित कई बड़े अधिकारियों की मौत हो गई थी। राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने तुरंत रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के जनरल सैयद माजिद अब अल-रेज़ा को कार्यवाहक रक्षा मंत्री नियुक्त किया। लेकिन नियुक्ति के एक-दो दिन के भीतर ही इजरायली चैनल 12 की रिपोर्ट में दावा किया गया कि इजरायल ने उन्हें निशाना बनाकर हमला किया और मार गिराया। हमला तेहरान में हुआ माना जा रहा है, जहां सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही चरमराई हुई है। अब तक 787 से ज्यादा लोगों की मौत शनिवार से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के परमाणु ठिकाने, मिसाइल साइट्स, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य कमांड सेंटर निशाने पर रहे। ईरान रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार अब तक 787 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें 176 बच्चे शामिल हैं। इजरायल का कहना है कि हमले ईरान की मिसाइल क्षमता और परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने तक जारी रहेंगे। इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने स्पष्ट किया कि ईरान पर भारी बमबारी जारी रहेगी।

मुंबई से दुबई उड़ान पर मंडराया खतरा, मिसाइल अलर्ट के बाद इमरजेंसी एक्शन

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान में जारी जंग के बीच एक विमान हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गया। जानकारी के मुताबिक मुंबई से दुबई के लिए उड़ान भरने वाली इस फ्लाइट को रास्ते में अचानक मिसाइल का अलर्ट मिला, जिसके बाद एक अप्रत्याशित कदम उठाना पड़ा। मिसाइल हमले का अलर्ट मिलने के तुरंत बाद एमिरेट्स के विमान को UAE एयरस्पेस में रेयर गतिविधि करते देखा गया। Flightradar24 के डेटा के मुताबिक EK501 नाम का विमान मंगलवार सुबह UAE एयरस्पेस के बाहर रोक दिया गया। रक्षा मंत्रालय ने अलर्ट भेजा कि देश के एयर डिफेंस ईरान की तरफ से लॉन्च की गई बैलिस्टिक मिसाइलों का जवाब दे रहे हैं और विमान को खतरा हो सकता है। इसके बाद लाइव प्लेन ट्रैकर के मुताबिक विमान को दुबई में लैंड करने से पहले डबल रिवर्स करते देखा गया, जिसे बेहद ‘दुर्लभ’ कदम बताया जा रहा है। फ्लाइट को पहले मुंबई वापस जाते देखा गया था। हालांकि बाद में अधिकारियों द्वारा रोके जाने से पहले विमान वापस दुबई की ओर जाने लगी। चुनिंदा उड़ानें शुरू इससे पहले तनाव के बीच भारतीय विमान सेवा कंपनियों ने मंगलवार से पश्चिम एशिया के चुनिंदा शहरों के लिए नियमित और विशेष उड़ानें शुरू करने की घोषणा की है। निजी विमान सेवा कंपनी स्पाइसजेट ने बताया है कि वह आज और अगले कुछ दिनों के लिए संयुक्त अरब अमीरात के फूजैराह से दिल्ली और कोच्चि के लिए एक-एक और मुंबई के लिए दो विशेष उड़ानों का परिचालन करेगी। इसके अलावा 4 मार्च से वह फूजैराह से दिल्ली और मुंबई के लिए अपनी नियमित उड़ानें शुरू करेगी। वहीं अकासा ने भी 3 मार्च से मुंबई और सऊदी अरब के शहर जेद्दा के बीच अपनी नियमित उड़ान शुरू करने की घोषणा की है। वह बुधवार से मुंबई और अहमदाबाद से जद्दा के लिए नियमित उड़ानों का परिचालन करेगी। हालांकि अबू धाबी, दोहा, कुवैत और रियाद को जाने वाली उसकी सभी उड़ानें 4 मार्च तक रद्द रहेंगी। इंडिगो जेद्दा से आज मुंबई, हैदराबाद और अहमदाबाद के लिए चार उड़ानों का परिचालन कर रही है। उसने बताया है कि इन उड़ानों का परिचालन उन यात्रियों के लिए किया जा रहा है जिन्होंने पहले से इंडिगो की फ्लाइट में टिकट बुक कराये हुए थे। एयर इंडिया ने भी शुरू की सेवाएं इसके अलावा एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी आज से ओमान की राजधानी मस्कट से दिल्ली, कोच्चि, कोझीकोड, बेंगलुरु, मुंबई और तिरुचिरापल्ली के लिए नियमित उड़ानें शुरू करने की घोषणा की है। हालांकि बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को जाने वाली उसकी सभी उड़ानें आज आधी रात तक रद्द रहेंगी। वहीं एयर इंडिया ने अमेरिका, कनाडा, यूरोप और ब्रिटेन को जाने वाली अपनी सभी उड़ानें आज से नियमित रूप से चलाने की घोषणा की है। उसने बताया है कि आज आधी रात तक पश्चिम एशिया को जाने वाली उसकी सभी उड़ानें रद्द है।  

विकास पर फोकस: पुष्कर सिंह धामी का दावा – 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड के लिए निर्णायक

देहरादून उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के विकास को लेकर बड़ा संकल्प दोहराया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा बाबा केदारनाथ धाम से किए गए ऐलान के अनुसार 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा, और राज्य सरकार इसी दिशा में तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, “हम सब मिलकर, एकता और आपसी मेलजोल से उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ेंगे। यह दशक विकास, सुशासन और जनभागीदारी का दशक होगा।” विकास, एकता और जनसहभागिता पर जोर धामी ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए बुनियादी ढांचे, पर्यटन, रोजगार सृजन और निवेश को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे आपसी सहयोग और समन्वय के साथ राज्य निर्माण में भागीदार बनें। ‘उत्तराखंड का दशक’ बनाने का संकल्प मुख्यमंत्री ने दोहराया कि यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प है। सरकार का उद्देश्य है कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुए। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान और मजबूत करेगा।

राजौरी में संदिग्ध गुब्बारा बरामद, PIA लिखे विमान आकार ने बढ़ाई सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

राजौरी जिला राजौरी के थाना धर्मसाल के अंतर्गत आने वाले सरहोटी क्षेत्र में सोमवार दोपहर करीब दो बजे एक हवाई जहाज के आकार का गुब्बारा मिलने से क्षेत्र में कुछ समय के लिए हलचल मच गई। लाल और सफेद रंग के इस गुब्बारे पर उर्दू भाषा में कुछ शब्द लिखे हुए थे तथा उस पर पीआईए भी अंकित पाया गया। सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर गुब्बारे को अपने कब्जे में ले लिया। एहतियातन सीमांत इलाकों में अलर्ट जारी करते हुए स्थानीय लोगों को हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने के लिए कहा। किसी भी तरह की संदिग्ध हलचल दिखने पर नजदीकी पुलिस स्टेशन में संपर्क करने की सलाह भी दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थानीय लोगों ने सरहोटी गांव के समीप खुले क्षेत्र में हवाई जहाज की आकृति वाला गुब्बारा पड़ा देखा। गुब्बारा लाल और सफेद रंग का था और उस पर उर्दू में लिखावट के साथ पीआईए शब्द स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था। संदिग्ध वस्तु को देखकर कुछ लोगों ने एहतियातन तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। सुरक्षित तरीके से अपने कब्जे में लिया गुब्बारा सूचना मिलते ही पुलिस पोस्ट त्रियाठ की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। प्राथमिक जांच के बाद गुब्बारे को सुरक्षित तरीके से अपने कब्जे में ले लिया गया। पुलिस ने आसपास के क्षेत्र का भी निरीक्षण किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वहां कोई अन्य संदिग्ध वस्तु तो नहीं है। स्थानीय लोगों ने बताया कि गुब्बारा हवा के साथ उड़कर इस क्षेत्र में आ सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गुब्बारा कहां से आया और किस उद्देश्य से छोड़ा गया था। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने सतर्क रहने की दी सलाह घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गईं। हालांकि प्रारंभिक तौर पर इसे साधारण गुब्बारा बताया जा रहा है, फिर भी एहतियात के तौर पर इसे कब्जे में लेकर जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार की अफवाह से बचने की आवश्यकता है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। इस घटना के बाद कुछ समय के लिए स्थानीय लोगों में जिज्ञासा और हल्की चिंता देखी गई, लेकिन पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई किए जाने से स्थिति सामान्य हो गई। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु दिखाई दे तो वे तुरंत इसकी सूचना नजदीकी पुलिस थाना, सेना या प्रशासन को दें और स्वयं उससे छेड़छाड़ न करें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में जांच जारी है और यदि आवश्यक हुआ तो संबंधित एजेंसियों से भी सहयोग लिया जाएगा। फिलहाल क्षेत्र में शांति बनी हुई है और जनजीवन सामान्य रूप से चल रहा है।  

चीन की HQ-9B मिसाइल फिर नाकाम, घंटे भर भी नहीं टिक पाया सिस्टम

चीन भले ही ईरान पर हमले इजरायल और अमेरिका ने किए हो लेकिन इस हमले में चीन की भारी भद्द पिटी है। दरअसल, ईरान ने हमलों से सुरक्षा के लिए तेल के बदले हथियार योजना के तहत पिछले साल चीन से HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम खरीदे थे लेकिन शनिवार को जब ईरान पर हमले हुए तो ये डिफेंस सिस्टम घंटे भर भी ईरान की रक्षा करने में नाकाम साबित हुए। ऐसे में चीन का यह मिलिट्री हार्डवेयर न सिर्फ चर्चा के केंद्र में आ गया है बल्कि अब इसकी अग्नि परीक्षा की घड़ी आ चुकी है क्योंकि एक साल के अंदर लगातार दो लड़ाइयों में यह फेल साबित हुआ है। ईरान से पहले पड़ोसी पाकिस्तान ने भी HQ-9B सिस्टम को तैनात किया था, लेकिन मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी भारतीय फायरिंग के सामने यह चीनी डिफेंस सिस्टम फुस्स साबित हुआ था। HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम की वास्तविक क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 28 फरवरी 2026 को हुए हमलों में ईरान के 30 से अधिक प्रांतों में से 20 से ज्यादा प्रभावित हुए हैं। राजधानी तेहरान समेत कई संवेदनशील ठिकानों को इजरायली और अमेरिकी सैन्य बलों ने निशाना बनाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, HQ-9B सिस्टम को तेहरान के साथ-साथ नतांज और फोर्दो जैसे परमाणु स्थलों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था, लेकिन यह आने वाली मिसाइलों और ड्रोन को घंटे भर भी रोकने में विफल रहा। लिहाजा, इन हमलों में भारी तबाही हुई और सैकड़ों नागरिकों की मौत की खबरें सामने आई हैं। पाकिस्तान में भी हुआ था फुस्स यह पहली बार नहीं है जब HQ-9B पर सवाल उठे हों। मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान भी यह सिस्टम चर्चा में आया था। पाकिस्तान में तैनात HQ-9B भारतीय हमलों को रोकने में प्रभावी साबित नहीं हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, उस संघर्ष में पाकिस्तान की एयर डिफेंस प्रणाली धीरे-धीरे निष्क्रिय हो गई थी और कई महत्वपूर्ण ठिकानों को नुकसान हुआ। क्या है HQ-9B सिस्टम? HQ-9B चीन का लंबी दूरी का सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम है, जिसे रूस के S-300 और अमेरिका के पैट्रियट सिस्टम से प्रेरित माना जाता है। लगभग 260 किलोमीटर तक इसकी मारक क्षमता है। यह 50 किमी तक ऊंचाई पर टारगेट को भेदने में सक्षम है। इसके अलावा यह एक साथ 100 लक्ष्यों को ट्रैक करने की क्षमता रखता है। इतना ही नहीं HQ-9B सिस्टम 6–8 लक्ष्यों को एक साथ निशाना बनाने की क्षमता रखता है, बावजूद इसके वह साल भर में दो बार फेल साबित हुआ है। इसे चीन ने अपने रणनीतिक क्षेत्रों, जैसे बीजिंग और दक्षिण चीन सागर, की सुरक्षा के लिए भी तैनात किया है। क्यों नहीं कर पाया असरदार बचाव? विशेषज्ञों के अनुसार HQ-9B की नाकामी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। मसलन, अत्याधुनिक स्टेल्थ विमान और प्रिसिशन मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया हो, जिसे यह इंटरसेप्ट नहीं कर पाया। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से रडार सिस्टम का कमजोर कर दिया गया होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, एक साथ कई हमलों से सिस्टम ओवरलोड हो गया होगा, इस वजह से भी यह फेल हुआ हो सकता है। इसके अलावा अलग-अलग एयर डिफेंस सिस्टम के बीच समन्वय की कमी को भी एक वजह बताया जा रहा है। जुलाई 2025 में खरीदे थे HQ-9B सिस्टम ईरान ने पिछले साल जून में इजरायल के साथ सीजफायर के बाद अपने आसमान को मजबूत करने के लिए, चीन के साथ तेल के बदले हथियार की डील के तहत जुलाई 2025 में HQ-9B मिसाइल हासिल किए थे। इजरायल ने जून में ऑपरेशन राइजिंग लायन में, ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को रोकने के लिए ईरानी इलाके में अंदर तक घुसकर हमला किया था। इज़रायली ऑपरेशन के आखिर में US ने भी ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर बमबारी की थी। तब ईरान ने दावा किया था कि इन हमलों से उसके परमाणु ठिकानों पर कोई असर नहीं पड़ा है लेकिन इस बार ईरान दावा कर रहा है कि उसके परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जबकि IAEA का कहना है कि इसके ठोस सबूत नहीं मिल सके हैं। बता दें कि ईरान ने अपने रक्षा तंत्र में HQ-9B के साथ रूसी और घरेलू सिस्टम भी जोड़े थे, लेकिन संयुक्त हमलों के सामने यह “लेयर्ड डिफेंस” भी कमजोर पड़ गया।  

ओडिशा में कानून से ऊपर पंचायत? बकरी चोरी के शक में नाबालिग छात्र की बेरहमी से हत्या

अनुगुल ओडिशा में ‘कंगारू कोर्ट’ का बढ़ता चलन अब सीधे मासूमों की जान लेने लगा है। ताजा और दर्दनाक मामला मयूरभंज जिले से सामने आया है, जहां कंगारू कोर्ट की कथित सुनवाई के बाद भीड़ ने कक्षा नौ के छात्र को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। घटना इंदकोली गांव, थाना तिरिंग थाना क्षेत्र की है। मृतक 15 वर्षीय रायरांगपुर ग्रामीण थाना क्षेत्र का निवासी था। बकरी चोरी के शक में ‘फैसला’ और फिर भीड़ का कहर: बताया गया कि मृतक नाबालिग इन दिनों बसिंगी गांव में अपने चाचा के घर रहकर पढ़ाई कर रहा था। वह बसिंगी सरकारी हाई स्कूल में कक्षा नौ का छात्र था। सोमवार दोपहर इंदकोली गांव में कथित बकरी चोरी के आरोप में स्थानीय लोगों ने दो नाबालिगों को पकड़ लिया और गांव में ही अनौपचारिक ‘अदालत’ लगा दी। ग्रामीणों ने स्वयं ही ‘जांच’ और ‘सुनवाई’ कर डाली। इसके बाद भीड़ ने दोनों नाबालिगों की बेरहमी से पिटाई कर दी। इतना ही नहीं, गुस्साई भीड़ ने उसकी साइकिल को भी आग के हवाले कर दिया। अस्पताल में तोड़ा दम: सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को भीड़ से बचाकर पहले स्थानीय अस्पताल पहुंचाया। बाद में उन्हें रायरांगपुर उप जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान संबित ने दम तोड़ दिया। दूसरे किशोर की हालत गंभीर बनी हुई है। उसे बेहतर इलाज के लिए पंडित रघुनाथ मुर्मू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, बारीपदा रेफर किया गया है। 11 गिरफ्तार, और धरपकड़ संभव: पीड़ित के पिता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर अब तक 11 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और अन्य संलिप्त लोगों की पहचान की जा रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। सवालों के घेरे में कानून-व्यवस्था: राज्य के विभिन्न हिस्सों में कंगारू अदालतों के नाम पर हो रही ऐसी घटनाएं कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। चोरी के महज शक में एक स्कूली छात्र की जान चली जाना इस बात का संकेत है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कानूनी जागरूकता और पुलिस की सक्रियता दोनों पर और काम किए जाने की जरूरत है। क्या होती है ‘कंगारू अदालत’? ‘कंगारू अदालत’ (Kangaroo Court) उस अवैध और अनौपचारिक न्याय प्रणाली को कहा जाता है, जिसमें कुछ लोग बिना किसी कानूनी अधिकार के स्वयं ही अदालत बन बैठते हैं, आरोप तय करते हैं और सजा सुना देते हैं। इसमें न तो निष्पक्ष जांच होती है, न आरोपी को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिलता है और न ही कानून की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाता है। ऐसी ‘अदालतें’ भारतीय कानून में पूरी तरह अवैध हैं। किसी भी अपराध की जांच और सजा देने का अधिकार केवल विधिवत स्थापित न्यायालयों को है। ग्रामीण क्षेत्रों में कभी-कभी सामाजिक दबाव या अफवाहों के आधार पर इस तरह की भीड़तंत्र वाली व्यवस्था खड़ी हो जाती है, जो कई बार हिंसा और जानलेवा घटनाओं में बदल जाती है।  

आपदा पर सरकार सतर्क: पुष्कर सिंह धामी का आश्वासन – सुरक्षित निकासी के लिए हर संभव कदम

देहरादून ईरान और इजरायल में बढ़ते तनाव के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क है और सभी एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। मंगलवार को हरिद्वार पहुंचे मुख्यमंत्री ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि खाड़ी देशों में फंसे उत्तराखंड के लोगों को सुरक्षित वापस लाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार लगातार विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के संपर्क में है। धामी ने कहा कि विदेशों में मौजूद उत्तराखंडियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। वहां रह रहे लोगों से भी संपर्क साधा जा रहा है। उन्हें सुरक्षित भारत लाने की व्यवस्था जल्द की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि सबको सुरक्षित निकाला जाएगा। इस दौरान गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय और डीएम मयूर दीक्षित ने अब तक की तैयारियों से अवगत कराया। एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने यातायात-पार्किंग व्यवस्था की रूपरेखा रखी। इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, जिला पंचायत अध्यक्ष किरन चौधरी, मेयर किरन जैसल, प्रदेश महामंत्री (संगठन) अजेय कुमार, प्रदेश महासचिव अनिल गोयल, विधायक मदन कौशिक, आदेश चौहान और प्रदीप बत्रा, दर्जाधारी ओम प्रकाश जमदग्नि, अजीत चौधरी, जयपाल सिंह चौहान, देशराज कर्णवाल, शोभाराम प्रजापति, भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, आईजी-गढ़वाल राजीव स्वरूप, एडीजी एपी अंशुमन, महानिदेशक-सूचना बंशीधर तिवारी, एमडी-सिडकुल सौरव गहरवार, एसपी-अभिसूचना मणिकांत मिश्रा, सीडीओ ललित नारायण मिश्रा, एडीएम पीआर चौहान, अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती, सचिव एचआरडीए मनीष कुमार, एसडीएम जितेंद्र कुमार, एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह और सीओ सिटी शिशुपाल सिंह नेगी मौजूद रहे। सात मार्च से पहले हरिद्वार में हाई अलर्ट केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के सात मार्च को प्रस्तावित हरिद्वार दौरे से पहले प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को बैरागी कैंप पहुंचकर कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से पूरी हों।

भारत-ऑस्ट्रेलिया-कनाडा के नए ट्रायंगल का असर, जानें क्यों इसे गेमचेंजर माना जा रहा है

नई दिल्ली एक तरफ अमेरिका ट्रेड वॉर और भारी टैरिफ लगाकर अपनी अर्थव्यवस्था को समेट रहा है, तो दूसरी तरफ चीन ग्रीन टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स के बाजार पर एकाधिकार जमाकर बैठा है. इस खींचतान के बीच, दुनिया को एक नए और सुरक्षित रास्ते की तलाश थी. इसी तलाश को पूरा करने और चीन-अमेरिका पर निर्भरता को जड़ से खत्म करने के लिए तीन बड़े देशों ने हाथ मिलाया है. भारत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने मिलकर एक नया और बेहद शक्तिशाली अलायंस बनाया गया है, जिसे ACITI यानी ऑस्‍ट्रेल‍िया, कनाडा, इंडिया टेक्‍नोलॉजी एंड इनोवेशन ट्रायंगल नाम द‍िया गया है. यह नया ट्रायंगल सिर्फ एक डील नहीं है, बल्कि इससे दुनिया की ग्रीन सप्लाई चेन का पूरा गेम बदलने वाला है |  आज की दुनिया में तरक्की का मतलब क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक गाड़ियां, सोलर पैनल और विंड टर्बाइन है. इन सभी को बनाने के लिए लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे खनिजों की जरूरत होती है.दिक्कत यह है कि इन खनिजों को निकालने और रिफाइन करने के बाजार पर चीन का लगभग पूरा कब्‍जा है. ग्रीन हाइड्रोजन बनाने वाले इलेक्ट्रोलाइजर की सप्लाई भी चीन ही कंट्रोल करता है. दूसरी ओर, अमेरिका ने अपनी नई नीतियों और टैरिफ से दुनिया भर के व्यापार को डरा दिया है. एक देश (चीन) पर पूरी तरह निर्भर रहना अब दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका था. ACITI गठबंधन इसी सिंगल-कंट्री डिपेंडेंस को तोड़ने का अचूक हथियार है | कैसे काम करेगा यह नया ट्रायंगल?     यह गठबंधन तीन देशों की अलग-अलग ताकतों को मिलाकर एक सुपर-पावरफुल सप्लाई चेन बनाएगा. इस साझेदारी का फोकस मुख्य रूप से क्लीन एनर्जी, क्रिटिकल मिनरल्स और लॉन्ग-टर्म आर्थिक सुरक्षा पर होगा |      ऑस्ट्रेलिया की ताकत: ऑस्ट्रेलिया दुनिया में लिथियम का सबसे बड़ा उत्पादक है. यानी एक तरह से लीडर है. लिथियम वह मुख्य धातु है जिससे हर तरह की बैटरी बनती है |      कनाडा की ताकत: कनाडा के पास क्रिटिकल मिनरल्स का भारी भंडार है और वह ग्रीन टेक्नोलॉजी को विकसित करने के लिए भारी फंड्स और नीतियां बना रहा है |      भारत की ताकत: भारत दुनिया का सबसे बड़ा और तेजी से बढ़ता बाजार है. भारत ने 2030 तक 500 गीगावॉट र‍िन्‍यूएबल एनर्जी पैदा करने का विशाल लक्ष्य रखा है. यानी भारत के पास इस नई तकनीक की सबसे ज्यादा डिमांड है |      जब ऑस्ट्रेलिया का कच्चा माल, कनाडा की तकनीक-पैसा और भारत का विशाल बाजार और मैन्युफैक्चरिंग स्केल एक साथ मिलेंगे, तो यह तिकड़ी चीन के एकाधिकार को सीधी और कड़ी टक्कर देगी |  सिर्फ मुनाफा नहीं, धरती को बचाना है लक्ष्‍य अक्सर ऐसे बड़े गठबंधन सिर्फ पैसा कमाने के लिए बनते हैं, लेकिन ACITI का नजरिया अलग है. इस गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे अपना ध्यान सिर्फ स्मार्टफोन बनाने या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बुलबुले में पैसा फूंकने पर न लगाएं. इस ट्रायंगल का असली लक्ष्य टेक-फॉर-गुड यानी भलाई के लिए तकनीक बनाना है. इसके तहत तीनों देश मिलकर काम करेंगे कि खनिजों का खनन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना कैसे हो. पुरानी बैटरियों और इलेक्ट्रॉनिक कचरे से लिथियम, कोबाल्ट और तांबे को दोबारा कैसे निकाला जाए. यह गठबंधन सर्कुलर इकॉनमी यानी जहां चीजें बर्बाद न हों, बल्कि बार-बार इस्तेमाल हों, उस पॉल‍िसी को बढ़ावा देगा |   

सऊदी में हमले के बाद ट्रंप का ऐलान, कुवैत में US एंबेसी बंद, पाकिस्तान और इजरायल में नागरिक सेवाएं रद्द

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में जारी जंग और खतरनाक होती जा रही है. शनिवार को ईरान पर अमेरिका ने हमला किया था. अब खबर आ रही है कि हमले की आशंका के बावजूद ईरान के शीर्ष नेतृत्व को दिन में हमले की उम्मीद नहीं थी. शनिवार सुबह अयातुल्ला अली खामेनेई अपने सलाहकारों के साथ बैठक कर रहे थे. रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने सुरक्षित बंकर में जाने से इनकार किया और कहा कि छिपने से बेहतर है शहीद होना. बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद मिसाइलें गिरीं. इसके अलावा सोमवार को ईरानी मीडिया ने यह भी कहा कि खामेनेई की पत्नी मंसूरे खोजस्ते का निधन हो गया. बताया गया कि हमलों के बाद वह कोमा में थीं. उनकी उम्र 78 वर्ष थी और उनकी शादी 1964 में हुई थी  |  सऊदी और खाड़ी में भी तनाव न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास के पास धमाके की आवाज सुनी गई और धुआं उठता देखा गया. एक सऊदी अधिकारी ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने अपनी एयर डिफेंस क्षमता इजरायल की सुरक्षा के लिए मोड़ दी और खाड़ी देशों को ईरानी हमलों के सामने खुला छोड़ दिया |  कुवैत में अमेरिकी सैनिकों पर सीधा हमला संघर्ष में पहली बार अमेरिकी सैनिकों की बड़ी मौत की पुष्टि हुई है. कुवैत के शुआइबा पोर्ट पर रविवार को एक अस्थायी ऑपरेशन सेंटर पर ईरानी हमले में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए. रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि हमले के दौरान एक प्रोजेक्टाइल एयर डिफेंस को चकमा देकर अंदर पहुंच गया. इससे पहले इसे ड्रोन हमला बताया जा रहा था |  अमेरिकी F-15 भी क्रैश हुए तनाव के बीच कुवैत की एयर डिफेंस ने गलती से तीन अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमानों को मार गिराया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसे फ्रेंडली फायर की घटना बताया. छहों क्रू मेंबर सुरक्षित बाहर निकल गए और उनकी हालत स्थिर है. वीडियो में एक जलता हुआ विमान गिरता दिखा और एक पायलट पैराशूट से उतरता नजर आया |  अमेरिका में समर्थन घट रहा रॉयटर्स और इप्सोस के सर्वे के अनुसार, सिर्फ चार में से एक अमेरिकी ही ईरान पर हमले का समर्थन कर रहा है. लगातार बढ़ती अमेरिकी सैनिकों की मौत से घरेलू समर्थन और घट सकता है. खुद ट्रंप ने भी चेतावनी दी है कि आगे और नुकसान हो सकता है. मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं. मिसाइल, ड्रोन, एयर डिफेंस और अब दोस्ताना फायरिंग तक की घटनाएं दिखा रही हैं कि जंग का दायरा बढ़ चुका है |  कुवैत में अमेरिकी दूतावास बंद, कई देशों से स्टाफ हटाया गया अमेरिका ईरान का युद्ध: क्षेत्रीय तनाव के बीच अमेरिका ने कुवैत स्थित अपने दूतावास को अगली सूचना तक बंद करने का ऐलान किया है. इसके साथ ही अमेरिका ने बहरीन, जॉर्डन और इराक से गैर-जरूरी कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का आदेश दिया है. लगातार बढ़ते मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच यह कदम सुरक्षा के लिहाज से उठाया गया है |  पाकिस्तान में अपॉइंटमेंट्स रद्द… इजरायल में भी प्रभावित हुईं नागरिक सेवाएं ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं. कराची में अमेरिकी दूतावास (कॉन्सुलेट) पर हुए हमले और उसके बाद हुई हिंसा और सुरक्षा को देखते हुए पाकिस्तान में मौजूद अमेरिकी कॉन्सुलेट ने अपने कामकाज रोक दिए हैं |  इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास के साथ-साथ लाहौर और कराची के कॉन्सुलेट ने शुक्रवार, 6 मार्च तक के लिए सभी वीजा अपॉइंटमेंट रद्द कर दिए हैं. खामेनेई की मौत के विरोध में कराची की सड़कों पर हजारों लोग उतर आए थे. प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इतना ज्यादा था कि उन्होंने अमेरिकी कॉन्सुलेट पर हमला कर दिया और वहां जमकर तोड़फोड़ की. स्थिति को बिगड़ते देख सुरक्षा में तैनात अमेरिकी मरीन सैनिकों ने जवाबी गोलीबारी की. सूत्रों के मुताबिक, इस हिंसक झड़प में कई लोगों की मौत हो गई. वीजा सेवाएं और दूतावास पर सुरक्षा कड़ी सुरक्षा की नाजुक स्थिति को देखते हुए अमेरिकी दूतावास ने तत्काल प्रभाव से वीजा सेवाएं बंद करने का फैसला लिया है. जिन लोगों के अपॉइंटमेंट 6 मार्च तक तय थे, उन्हें अब नई तारीखों का इंतजार करना होगा. अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों को भी सतर्क रहने और भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है |  कुवैत में भी दूतावास बंद पाकिस्तान के अलावा मिडिल-ईस्ट के अन्य देशों में भी अमेरिका के खिलाफ गुस्सा देखा जा रहा है. कुवैत स्थित अमेरिकी दूतावास ने घोषणा की है कि सुरक्षा कारणों से वो अगले आदेश तक पूरी तरह बंद रहेगा |  वहीं, इजरायल में अमेरिकी दूतावास ने X पर पोस्ट करते हुए लोगों को इजराइल छोड़कर जॉर्डन के रास्ते न जाने न करने की सलाह दी है. दूतावास ने कहा, ‘इस समय अमेरिकी दूतावास इजरायल से बाहर जा रहे अमेरिकियों को निकालने या मदद करने की स्थिति में नहीं है |  शनिवार को ईरान पर इजरायल और अमेरिका ने हमला कर दिया, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. ईरान ने इसे “मुस्लिमों के खिलाफ युद्ध” करार दिया है, जिसके बाद से ही पाकिस्तान, कुवैत और इराक जैसे देशों में अमेरिका विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं. फिलहाल, पाकिस्तान और कुवैत में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं |  ईरान के साथ खड़ा हुआ चीन अमेरिका ईरान का युद्ध: चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बात की और चीन ने ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय गरिमा के समर्थन में खड़ा होने का बयान दिया. बीजिंग ने अमेरिका और इजरायल से तत्काल सैन्य कार्रवाइयों को रोकने, तनाव को और न बढ़ने देने और संघर्ष को पूरे मिडिल ईस्ट में फैलने से रोकने की अपील की है. चीन ने कहा कि वह ईरान के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा का समर्थन करता है और उम्मीद जताई कि सभी पक्ष तनाव कम करने के लिए सकारात्मक भूमिका निभाएंगे.  ट्रंप की कड़ी चेतावनी, बोले- दूतावास पर हमले का जवाब मिलेगा सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास पर हमला लाइव: सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है. ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन इस … Read more

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