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डिजिटल भविष्य की ओर कदम, मोदी और अबू धाबी क्राउन प्रिंस ने AI साझेदारी पर की अहम चर्चा

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच गुरुवार को द्विपक्षीय बैठक हुई। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हुई मुलाकात में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा, “भारत-यूएई के ऐतिहासिक रिश्तों को याद करते हुए, दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग पर चर्चा की और अलग-अलग क्षेत्रों में हुई तरक्की पर खुशी जताई। उन्होंने एआई में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा की।” अबू धाबी के क्राउन प्रिंस, यूएई के राष्ट्रपति की ओर से पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल हो रहे हैं। ग्लोबल साउथ में पहली बार हो रहे इस अहम इवेंट में कई राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, वरिष्ठ अधिकारी, टेक एक्सपर्ट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर के खास फैसले लेने वाले लोग शामिल हो रहे हैं। शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल होने के लिए बुधवार देर रात नई दिल्ली पहुंचे थे। केंद्रीय ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। एमईए ने एक्स पोस्ट में लिखा, “एआई इम्पैक्ट समिट में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस, शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान का भारत में स्वागत है। केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने एयरपोर्ट पर पहुंच माननीय का स्वागत किया। भारत और यूएई एडवांस्ड टेक्नोलॉजी में भरोसेमंद पार्टनर हैं जो एक स्मार्ट और साझा भविष्य के लिए एआई को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।” पीएम मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का उद्घाटन किया। लोगों को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि यह ग्लोबल साउथ के लिए गर्व का पल है कि एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी भारत में की गई है, साथ ही उन्होंने तेजी से बदलते टेक्नोलॉजी के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार और नैतिक इस्तेमाल की तुरंत जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “मैं आप सभी का दुनिया के सबसे बड़े और सबसे ऐतिहासिक एआई समिट में स्वागत करता हूं। भारत, जहां यह समिट हो रहा है, एक ऐसा देश है जो दुनिया के 1/6 हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है; यह एक युवा देश है, दुनिया के सबसे बड़े टेक पूल का केंद्र है, और टेक इकोसिस्टम का उदाहरण है। भारत नई टेक्नोलॉजी बनाता भी है और अभूतपूर्व तरीके से उसे अपनाता भी है।” उन्होंने कहा, “140 करोड़ भारतीयों की तरफ से शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले राष्ट्राध्यक्षों, वैश्विक एआई इकोसिस्‍टम के नेताओं और इनोवेटर्स का हार्दिक स्वागत करता हूं। भारत में इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी करना न केवल देश के लिए बल्कि ग्लोबल साउथ के लिए भी गर्व की बात है। उनके भाषण के दौरान, बैकग्राउंड में एआई-इनेबल्ड साइन लैंग्वेज इंटरप्रिटेशन (एआई-चालित सांकेतिक भाषा व्याख्या) दिखाया गया, जो समिट में डिस्कस की जा रही टेक्नोलॉजी के प्रैक्टिकल एप्लीकेशन को दिखाता है।

एपस्टीन फाइल्स कांड में बड़ी कार्रवाई, ब्रिटिश शाही परिवार पर सवाल, प्रिंस एंड्रयू हिरासत में

ब्रिटेन एपस्टीन मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई हुई है। ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स के छोटे भाई पूर्व प्रिंस एंड्रयू को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को ब्रिटेन की थेम्स वैली पुलिस ने पूर्वी इंग्लैंड के सैंड्रिंघम एस्टेट में वुड फार्म से एंड्रयू को गिरफ्तार किया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, छह बिना नंबर वाली पुलिस कारें और लगभग आठ सादे कपड़ों में पुलिस अधिकारी दिन में पहले पूर्वी इंग्लैंड के सैंड्रिंघम एस्टेट स्थित वुड फार्म पर पहुंचे और प्रिंस को गिरफ्तार कर लिया। बता दें कि पिछले महीने अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से 30 लाख से अधिक पृष्ठों के दस्तावेज जारी किया गया था। इन दस्तावेजों में ऐसे ईमेल शामिल हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि एंड्रयू ने 2010 में जेफ्री एपस्टीन के साथ गोपनीय व्यापारिक जानकारियां साझा की थीं। गौर करने वाली बात यह है कि यह लेन-देन दिवंगत वित्त प्रबंधक को बाल यौन अपराधों के लिए दोषी ठहराये जाने के दो साल बाद हुआ था। इसके अलावा फाइलों के ईमेल सुझाव देते हैं कि पूर्व प्रिंस एंड्रयू ने सिंगापुर, हांगकांग और वियतनाम के दौरों से संबंधित रिपोर्टों के साथ-साथ अफगानिस्तान में निवेश के संभावित अवसरों के बारे में संवेदनशील जानकारी भी साझा की थी। फाइलों के अनुसार, कुछ सामग्रियां एंड्रयू के तत्कालीन सलाहकार से प्राप्त होने के कुछ ही मिनटों बाद आगे भेज दी गयी थीं। इससे यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या आधिकारिक गोपनीयता नियमों का उल्लंघन किया गया था। उस समय एंड्रयू एक सरकारी व्यापार प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत था। यह एक ऐसा पद था, जहां संवेदनशील वाणिज्यिक और राजनीतिक जानकारी की सुरक्षा के लिए सख्त दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य था। पूर्व प्रिंस ने लगातार किसी भी गलत काम से इनकार किया है और दस्तावेजों की नवीनतम खेप जारी होने के बाद से कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। ब्रिटेन में ‘टेम्स वैली पुलिस’ के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि वे इस बात का आकलन कर रहे हैं कि क्या औपचारिक जांच शुरू करने का कोई ठोस आधार है। राजशाही विरोधी अभियान समूह ‘रिपब्लिक’ की दर्ज करायी गयी शिकायत की अधिकारी समीक्षा कर रहे हैं। इसमें सार्वजनिक पद पर रहते हुए कदाचार के आधिकारिक गोपनीयता कानूनों के संभावित उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। वरिष्ठ शाही सदस्यों ने भी खुद को इस विवाद से दूर रखने की कोशिश की है। प्रिंस विलियम और वेल्स की प्रिंसेज कैथरीन के प्रवक्ता ने कहा कि लगातार हो रहे खुलासों से यह दंपती ‘गहरी चिंता’ में है और उनका ध्यान ‘पीड़ितों पर केंद्रित’ है। बता दें कि एंड्रयू विंडसर ने 2019 में एपस्टीन के साथ अपने संबंधों से उपजे भारी विवाद और आलोचनाओं के बीच सार्वजनिक कर्तव्यों से दूरी बना ली थी। 2022 में उन्होंने वर्जीनिया ग्यूफ्रे से वित्तीय समझौता किया था। ग्यूफ्रे ने उन पर तब यौन शोषण करने का आरोप लगाया था, जब वह किशोर थीं। इन आरोपों से एंड्रयू ने बार-बार इनकार किया था। तब 2022 में ही एंड्रयू से उनकी सैन्य उपाधियां और ‘हिज रॉयल हाईनेस’ शैली का उपयोग करने का अधिकार छीन लिया गया था। ग्यूफ्रे ने पिछले साल आत्महत्या कर ली थी।

AI समिट में हाई-वोल्टेज ड्रामा, बड़े दिग्गजों ने नहीं मिलाया हाथ, जानें पूरा विवाद

नई दिल्ली नई दिल्ली में आयोजित की जा रही एआई समिट की चर्चा दुनियाभर में हो रही है। एआई के क्षेत्र के तमाम दिग्गज इस समय भारत में मौजूद है। पीएम मोदी समेत इन नेताओं और एआई दिग्गजों में भारत मंडपम के मंच पर एक साथ खड़े होकर फोटो भी खिंचवाई, लेकिन इसी फोटो को खिंचवाते समय कुछ ऐसा हुआ जिसने सभी लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा। दरअसल, सत्र के अंत में पीएम मोदी ने पारंपरिक फोटो सेशन के लिए सभी दिग्गजों को एक साथ मंच पर बुलाया। इस दौरान ओपन एआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई पास में खड़े हुए थे, पीएम मोदी ने जैसे ही सभी को आपस में हाथ पकड़कर फोटो खिंचवाने की कोशिश की। इन दोनों ने आपस में हाथ नहीं मिलाया और बिना पकड़े ही हाथ खड़े कर दिए। एआई के क्षेत्र में प्रतिद्वंदिता की वजह से व्यवहार सैम ऑल्टमैन और डारियो के बीच हुए एक व्यवहार की वजह से दुनिया की नजर एआई के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिद्वंदिता के ऊपर भी पड़ी है। दरअसल, एंथ्रोपिक की स्थापना ओपन एआई के ही पूर्व अधिकारियों द्वारा 2021 में की गई थी। जिनमें डारियो अमोदेई भी शामिल थे, जो पहले ओपनएआई के रिसर्च वाइस प्रेसिडेंट के रूप में कार्यरत थे। ऐसे में दोनों एक दूसरे को अच्छे से जानते हैं। एंथ्रोपिक के आने के बाद से दोनों के बीच बातचीत तो होती है, लेकिन साथ ही एक प्रतिद्वंदी की भावना भी है। दोनों ही पक्ष एक-दूसरे को अपना कड़ा प्रतिद्वंदी मानते हैं। सैम ऑल्टमैन को जहां ओपन एआई और चैटजीपीटी के लिए जाना जाता है, तो वहीं एंथ्रोपिक को क्लॉड के लिए जाना जाता है। एआई के क्षेत्र में दोनों टेक्नोलॉजी और मार्केट रणनीति को लेकर बार-बार आपस में उलझे हुए नजर आते हैं। इसी वजह से एआई इम्पैक्ट समिट में भी इन दोनों का आपस में हाथ न मिलाना भी एक कंपटीशन के तौर पर ही देखा गया है। एआई को लेकर भी सैम और डारियो के मतभेद हैं। उदाहरण के तौर पर सैम एआई मॉडल पर विज्ञापन दिखाने के पक्षधर हैं, तो वहीं डारियो इसके सख्त खिलाफ हैं। इसके अलावा एंथ्रोपिक खुद को एक सुरक्षा-केंद्रित एआई प्रयोगशाला के रूप में स्थापित करती है, जो अपने क्लाउड मॉडल परिवार के माध्यम से समन्वय और जिम्मेदार विकास पर जोर देती है। जबकि ओपनएआई सुरक्षा अनुसंधान के साथ-साथ तेजी से उत्पाद विकास पर ध्यान केंद्रित किया है। इसी वजह से उसने चैटजीपीटी जैसे तमाम एआई उपकरणों को बड़े पैमाने पर बाजार में उतारा है। हालांकि दोनों के बीच में कोई आधिकारिक विवाद तो नहीं है, लेकिन एक ही फील्ड में होने की वजह से दोनों पक्षों की तरफ से लगातार एक-दूसरे के विरुद्ध रणनीतियां बनाई जाती रहती हैं।  

सरकार का बड़ा ऐलान: लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को सीधा फायदा

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत की खबर है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने मेडिकल रीइम्बर्समेंट यानी इलाज के खर्च की प्रतिपूर्ति की अधिकतम सीमा बढ़ा दी है। अब मंत्रालयों/विभागों के हेड ऑफ डिपार्टमेंट 10 लाख रुपये तक के मेडिकल क्लेम बिना इंटीग्रेटेड फाइनेंस डिविजन (IFD) से सलाह लिए मंजूर कर सकेंगे। पहले यह सीमा 5 लाख रुपये थी। यह फैसला 16 फरवरी 2026 को जारी ऑफिस मेमोरेंडम (OM) के जरिए बताया गया है। क्या है डिटेल मंत्रालय ने एक और अहम बदलाव किया है। जिन मामलों में किसी तरह के नियमों में छूट (relaxation) नहीं दी जाती और पूरा भुगतान तय CGHS रेट्स के हिसाब से होता है, ऐसे मामलों में निपटान की सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। यानी अगर क्लेम पूरी तरह नियमों के तहत है और दरें स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (CGHS) के मुताबिक हैं, तो अब ज्यादा राशि का भुगतान आसान होगा। इससे कर्मचारियों को लंबे इंतजार और फाइलों की देरी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि 10 लाख रुपये की नई सीमा के साथ दो साफ शर्तें भी जोड़ी गई हैं। पहली, क्लेम में CGHS या CS(MA) नियमों में कोई ढील नहीं दी जाएगी। दूसरी, रीइम्बर्समेंट की रकम पूरी तरह CGHS/CS(MA) की तय दरों के अनुसार ही होगी। मतलब साफ है—अगर अस्पताल का बिल तय रेट से ज्यादा है और नियमों में छूट चाहिए, तो मामला पहले की तरह उच्च स्तर पर ही जाएगा। मंत्रालय ने अपने पुराने 23 नवंबर 2016 के आदेश का भी जिक्र किया है, जिसमें बिना नियमों में छूट वाले मामलों की सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख की गई थी। कहां होता है आवेदन CGHS मेडिकल क्लेम की प्रक्रिया भी साफ कर दी गई है। पेंशनर्स को इलाज या डिस्चार्ज के छह महीने के भीतर अपने वेलनेस सेंटर के CMO के पास आवेदन देना होता है। इसके साथ मेडिकल रीइम्बर्समेंट क्लेम फॉर्म, चेकलिस्ट, डिस्चार्ज समरी की कॉपी, रेफरल/परमिशन स्लिप, इमरजेंसी सर्टिफिकेट (यदि लागू हो), अस्पताल के ओरिजिनल बिल और रसीदें, वैध CGHS कार्ड की कॉपी और बैंक डिटेल्स के लिए कैंसल चेक या मंडेट फॉर्म जमा करना जरूरी है। दस्तावेज पूरे और सही होने पर प्रक्रिया तेज हो जाती है। जहां तक एंबुलेंस खर्च का सवाल है, वह भी रिइम्बर्सेबल है, लेकिन एक शर्त के साथ। शहर के भीतर एंबुलेंस का खर्च तभी मिलेगा, जब इलाज करने वाले डॉक्टर का प्रमाण पत्र हो कि किसी और माध्यम से ले जाने पर मरीज की जान को खतरा था या हालत और बिगड़ सकती थी। कुल मिलाकर, सरकार के इस फैसले से मेडिकल क्लेम की मंजूरी में तेजी आएगी और कर्मचारियों-पेंशनर्स को बड़ी रकम के मामलों में भी राहत मिलेगी।

मिडिल ईस्ट में संकट गहराया, इस देश ने नागरिकों से ईरान छोड़ने की अपील की

तेहरान मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से तनाव चरम पर पहुंच गया है। रिपोर्ट्स सामने आई हैं कि इस हफ्ते के आखिर में अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है, जिससे दुनियाभर में टेंशन बढ़ गई है। इस बीच, विभिन्न देश ईरान में बिगड़ती स्थिति को देखते हुए वहां से अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने में लग गए हैं। पोलैंड के प्रधानमंत्री ने गुरुवार को ईरान में रह रहे अपने नागरिकों से तुरंत वहां से निकलने के लिए कह दिया है। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने गुरुवार को कहा कि ईरान में मौजूद पोलिश नागरिकों को तुरंत निकल जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि हथियारों से लैस लड़ाई की संभावना के कारण कुछ ही घंटों में निकलना मुमकिन नहीं होगा। टस्क ने कहा, “प्लीज तुरंत ईरान छोड़ दें… और किसी भी हालत में इस देश में न जाएं।” इस बीच, ईरान ने अमेरिका पर पलटवार किया है। ईरान के एटॉमिक एनर्जी चीफ मोहम्मद इस्लामी ने कहा कि कोई भी देश इस्लामिक रिपब्लिक को न्यूक्लियर एनरिचमेंट के उसके अधिकार से वंचित नहीं कर सकता। गुरुवार को एतेमाद डेली में पब्लिश हुए एक वीडियो के मुताबिक, इस्लामी ने कहा, “न्यूक्लियर इंडस्ट्री का आधार एनरिचमेंट है। न्यूक्लियर प्रोसेस में आप जो कुछ भी करना चाहते हैं, उसके लिए आपको न्यूक्लियर फ्यूल की जरूरत होती है।” उन्होंने आगे कहा, “ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के नियमों के मुताबिक चल रहा है, और कोई भी देश ईरान को इस टेक्नोलॉजी से शांति से फायदा उठाने के अधिकार से वंचित नहीं कर सकता।” यह कमेंट्स मंगलवार को जिनेवा में तेहरान और वाशिंगटन के बीच ओमान की मध्यस्थता वाली बातचीत के दूसरे राउंड के बाद आए हैं। बुधवार को, ट्रंप ने अपनी ट्रुथ सोशल साइट पर एक पोस्ट में फिर से इशारा किया कि अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है। एक और एयरक्राफ्ट बहुत जल्द होगा रवाना वॉशिंगटन ने बार-बार ज़ीरो एनरिचमेंट की मांग की है, लेकिन ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम और इलाके में मिलिटेंट ग्रुप्स को उसके सपोर्ट पर भी बात करने की कोशिश की है। पश्चिमी देश इस्लामिक रिपब्लिक पर न्यूक्लियर हथियार हासिल करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हैं। तेहरान ऐसी मिलिट्री महत्वाकांक्षाओं से इनकार करता है, लेकिन सिविलियन मकसदों के लिए इस टेक्नोलॉजी पर अपने अधिकार पर जोर देता है। ट्रंप, जिन्होंने ईरान पर समझौते के लिए दबाव बढ़ाया है, ने इलाके में एक बड़ी नेवी फोर्स तैनात की है, जिसे उन्होंने आर्मडा बताया है। जनवरी में एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन और एस्कॉर्ट बैटलशिप को गल्फ में भेजने के बाद, उन्होंने हाल ही में इशारा किया कि एक दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर, गेराल्ड फोर्ड, बहुत जल्द मिडिल ईस्ट के लिए रवाना होगा।

भगवान बचाए… CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी, याचिका पर सुनवाई नहीं

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत एक याचिका देखकर भड़क गए। उन्होंने यह तक कह दिया कि याचिकाओं के कानून को भगवान बचाए। इतना ही नहीं उन्होंने याचिकाकर्ता को भी जमकर फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को रद्द कर दिया। साथ ही इसकी वजहें भी गिनाईं हैं। बार एंड बेंच के अनुसार, CJI सूर्यकांत ने PIL यानी जनहित याचिका को सुनने से मना कर दिया। अदालत ने इसकी वजह याचिका का अस्पष्ट होना बताया है। CJI ने कहा, ‘अगर भारत के शीर्ष न्यायालय के सामने याचिकाओं का ऐसा स्तर है, तो भगवान याचिका के कानून को बचाए।’ AI से याचिकाएं लिखने पर भी जताई थी नाराजगी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने AI से याचिकाएं लिखने की आदत पर चिंता जाहिर की थी। पीठ शिक्षाविद रूप रेखा वर्मा की एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, ‘हम यह देखकर परेशान हैं कि कुछ वकीलों ने याचिकाओं का मसौदा तैयार करने के लिए एआई का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। यह बिल्कुल अनुचित है।’ जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि उन्हें हाल में ‘मर्सी बनाम मैनकाइंड’ नाम का एक ऐसा केस मिला जो अस्तित्व में है ही नहीं। प्रधान न्यायाधीश ने ऐसे ही एक मामले का जिक्र किया और कहा कि जस्टिस दीपांकर दत्ता की अदालत में, ‘एक नहीं बल्कि ऐसे कई फैसलों का हवाला दिया गया था।’ न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि कई बार, जिन फैसलों का जिक्र किया जाता है वे सही होते हैं, लेकिन उन फैसलों के साथ फर्जी उद्धरण जोड़ दिए जाते हैं और इससे उनकी विषयवस्तु का सत्यापन करना बहुत मुश्किल हो जाता है। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, ‘इससे न्यायाधीशों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।’ इस बीच, न्यायमूर्ति बागची ने विधिक मसौदा तैयार करने की कला में गिरावट पर दुख जताया और कहा कि कई विशेष अनुमति याचिकाओं में ज्यादातर पिछले फैसलों के लंबे उद्धरण होते हैं, जिनमें कानूनी आधारों की मौलिक जानकारी बहुत कम होती है।  

क्या छिड़ेगा नया युद्ध? ट्रंप के फैसले से ईरान-अमेरिका टकराव तेज, वैश्विक तेल बाजार सहमा

वॉशिंगटन  अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा सैन्य कदम उठाया जा सकता है. CNN की खबर के मुताबिक सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी सेना इस वीकेंड तक (22 फरवरी तक) ईरान पर हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है, हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है. सूत्रों ने बताया कि व्हाइट हाउस को जानकारी दे दी गई है कि अगर आदेश मिलता है तो अमेरिकी सेना कुछ ही घंटों में कार्रवाई कर सकती है. पिछले कुछ दिनों में मिडिल ईस्ट में अमेरिकी वायु और नौसैनिक ताकत में भारी बढ़ोतरी की गई है. दुनिया का सबसे आधुनिक विमानवाहक पोत USS गेराल्ड आर फोर्ड क्षेत्र में पहुंच सकता है. ईरान और अमेरिका में नहीं हो सकी डील ब्रिटेन में तैनात अमेरिकी फाइटर जेट और ईंधन भरने वाले टैंकर विमानों को मिडिल ईस्ट में भेजा जा रहा है. एक सूत्र ने कहा, ‘राष्ट्रपति इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. वह सैन्य कार्रवाई के पक्ष और विपक्ष दोनों तर्क सुन रहे हैं.’ मंगलवार को जिनेवा में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच करीब साढ़े तीन घंटे तक अप्रत्यक्ष बातचीत हुई. ईरान ने कहा कि कुछ ‘मार्गदर्शक सिद्धांतों’ पर सहमति बनी है, लेकिन अमेरिकी पक्ष का कहना है कि अभी कई मुद्दों पर साफ बातचीत होनी बाकी है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि कूटनीति ट्रंप की पहली पसंद है, लेकिन सैन्य विकल्प भी मेज पर मौजूद है. उन्होंने किसी समयसीमा का ऐलान करने से इनकार किया. ईरान पर बढ़ा परमाणु दबाव अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 28 फरवरी को इजरायल जाएंगे और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात करेंगे. इजरायल लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है. उधर सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों को और मजबूत कर रहा है. कई महत्वपूर्ण स्थलों को कंक्रीट और मिट्टी की मोटी परत से ढका जा रहा है, ताकि संभावित हवाई हमलों से बचाव हो सके. एक और वॉर्निंग लेविट ने बताया है कि ट्रंप कई लोगों से इस संबंध में बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रपति कई लोगों से बात कर रहे हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम है। राष्ट्रपति इस मामले को बहुत गंभीरता से लेते हैं। वे हमेशा वही सोचते हैं जो अमेरिका, हमारी सेना और अमेरिकी जनता के हित में हो, और किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई का निर्णय वे इसी आधार पर लेते हैं।’ ईरान से बातचीत लेविट का बयान ऐसे समय में आया है, जब जिनेवा में अमेरिका-ईरान के बीच परमाणु वार्ता फिर से शुरू हुई है, जिसमें अमेरिका के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ओमानी मिल रहे हैं। हालांकि दोनों पक्षों ने बात कुछ आगे बढ़ने की बात कही है, लेकिन अधिकारियों ने कहा है कि अभी भी काफी कमियां हैं। इधर, अमेरिका सेना लगातार ऐक्शन मोड में नजर आ रही है। ईरान ने भी धमकाया एजेंसी वार्ता के अनुसार, विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की ओर से 2025 की शुरुआत में अपनाई गई अधिकतम दवाब की नीति ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव डाला है, जिससे अमेरिका के अधिकारी कूटनीति सफलता के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर रहे हैं। इसके बावजूद ईरान प्रतिबंध में राहत की मांग कर रहा है और उसने चेतावनी दी है कि अमेरिका का कोई भी हमला इस इलाके में अमेरिकी सेना के खिलाफ जवाबी कार्रवाई शुरू कर देगा। बात फेल तो शुरू होगा वॉर हाल ही में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस के हालिया टिप्पणियों के अनुरूप है, जिन्होंने एक न्यूज चैनल को बताया था कि अमेरिकी प्रशासन को कूटनीति के जरिये समस्या का समाधान बहुत पसंद है, लेकिन अगर बातचीत विफल हो जाती है तो सैन्य कार्रवाई लेने का विकल्प भी उसके पास है। ट्रंप क्या करेंगे फैसला? फिलहाल राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर साफ टार्गेट नहीं बताया है कि हमला होने की स्थिति में उसका अंतिम उद्देश्य क्या होगा. उन्होंने सिर्फ इतना कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन बेहद अहम होंगे. अगर बातचीत में ठोस प्रगति नहीं होती, तो मिडिल ईस्ट एक बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ सकता है. वहीं, अगर कूटनीति सफल होती है तो आखिरी वक्त पर युद्ध टल भी सकता है. सैन्य जमावड़ा और ‘आर्मडा’ की तैनाती अमेरिका ने ईरान के तट के पास अपनी सैन्य शक्ति को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ा दिया है। नौसेना: ईरान के करीब इस समय दो एयरक्राफ्ट कैरियर (विमान वाहक पोत) और एक दर्जन युद्धपोत तैनात हैं। वायुसेना: सैकड़ों लड़ाकू विमान, जिनमें F-35, F-22 और F-16 शामिल हैं, क्षेत्र में पहुंच चुके हैं। रसद और हथियार: पिछले 24 घंटों में 150 से अधिक सैन्य कार्गो उड़ानों के जरिए भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद अमेरिकी ठिकानों पर पहुंचाया गया है। निगरानी: जापान, जर्मनी और हवाई से विशेष E-3 अर्ली वार्निंग विमानों को सऊदी अरब भेजा गया है, जो बड़े पैमाने पर हवाई हमलों के समन्वय में मदद करेंगे। कूटनीतिक विफलता और कारण इस संभावित हमले का मुख्य कारण कूटनीतिक बातचीत का विफल होना बताया जा रहा है। परमाणु विवाद: जेरेड कुश्नर और स्टीव विटकॉफ के नेतृत्व में बातचीत का प्रयास विफल रहा क्योंकि ईरान ने परमाणु विकास रोकने की ट्रंप की मांग को खारिज कर दिया। शासन परिवर्तन: सूत्रों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य केवल सैन्य ठिकानों को तबाह करना नहीं, बल्कि ईरान में ‘सत्ता परिवर्तन’ लाना भी हो सकता है। इसमें इजरायल और अमेरिका मिलकर ऑपरेशन चला सकते हैं। ईरान की जवाबी कार्रवाई और वैश्विक प्रभाव हॉर्मुज जलडमरूमध्य की बंदी: ईरान ने सैन्य अभ्यास के नाम पर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को आंशिक रूप से बंद कर दिया है। दुनिया का 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। धमकी: ईरानी नेतृत्व और अयातुल्ला ने अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की धमकी दी है। यदि यह मार्ग पूरी तरह बंद होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर विनाशकारी असर पड़ सकता है। अमेरिकी घरेलू राजनीति पर असर रिपब्लिकन: आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले इस कदम को राष्ट्रपति की स्थिति मजबूत करने या जोखिम में … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने मुफ्त स्कीमों पर जताई नाराजगी, CJI ने सरकारों को दी सख्त चेतावनी

नई दिल्ली भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने फ्रीबीज बांट रहे राज्यों को कड़ी फटकार लगाई है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि आखिर करदाता के अलावा इन योजनाओं का खर्च और कौन उठाएगा। उन्होंने का कि भोजन और बिजली के बाद अब सीधा कैश ट्रांसफर होने लगा है। साथ ही अदालत ने कहा है कि सरकार को रोजगार पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास पर अब कम खर्च किया जा रहा है। गुरुवार को सीजेआई ने कर्ज के बाद भी राज्यों की तरफ से मुफ्त में चीजें बांटने पर चिंता जाहिर की। उन्होंने सवाल किया, ‘आखिर करदाता नहीं, तो इन योजनाओं के लिए भुगतान कौन करेगा?’ सुप्रीम कोर्ट ने नकद बांटने और मुफ्त की सुविधाएं देने को लेकर वित्तीय समझदारी पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने का कोर्ट का कहना है कि राज्यों को मुफ्त की रेवड़ियां या ‘डोल्स’ बांटने के बजाय रोजगार पैदा करने को प्राथमिकता देनी चाहिए। सीजेआई ने चेताया है कि विकास पर अब कम खर्च किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘अगर आप मुफ्त खाना…, मुफ्त साइकिल…, मुफ्त बिजली देने लगेंगे… और अब तक सीधा कैश ट्रांसफर हो रहा है।’ सुप्रीम कोर्ट बेंच ने कहा है कि कई राज्य राजस्व घाटे का सामना कर रहे हैं, लेकिन फिर भी कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार किए हुए हैं। कोर्ट का मानना है कि कर्मचारियों के वेतन और ‘मुफ्त की सुविधाओं’ का बोझ इतना बढ़ गया है कि वे विकास के लिए जरूरी फंड को खत्म कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक साल में जुटाए गए राजस्व का 25 प्रतिशत हिस्सा…, इसे विकास में क्यों नहीं लगाया जा सकता? सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु विद्युत वितरण निगम बनाम भारत सरकार केस की सुनवाई कर रहा था। अदालत ने निगम को उपभोक्ता की वित्तीय स्थिति पर गौर किए बिना हर किसी को मुफ्त बिजली देने का वादा करने के लिए फटकार लगाई। कोर्ट ने मुफ्त की सेवा के कल्चर की कड़ी आलोचना की। साथ ही कहा कि यह आर्थिक विकास में बाधा डालती है। क्या है फ्रीबीज वाला मामला? दरअसल, सुप्रीम कोर्ट आज तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट रूल्स 2024 के रूल 23 को चुनौती दी गई थी. इस याचिका पर सुनवाई के दौरान ही सीजेआई सूर्यकांत फ्रीबीज पर भड़क गए. उन्होंने तमिलनाडु के साथ-साथ अन्य राज्यों को भी इस मामले में अच्छे से सुना दिया. सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड की उस याचिका पर आई, जिसमें सभी को मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव रखा गया था, चाहे उपभोक्ता की आर्थिक स्थिति कुछ भी हो. चलिए सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत ने क्या-क्या कहा?     सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव से पहले फ्रीबी कल्चर पर सख्त टिप्पणी की और कहा कि अब ऐसे नीतियों पर फिर से विचार करने का समय आ गया है, क्योंकि इससे देश का आर्थिक विकास रुक जाता है. तमिलनाडु सरकार द्वारा चुनाव से पहले ‘फ्रीबी’ बांटने पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया, ‘आप किस तरह की संस्कृति विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं?’     सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा, ‘देश के ज्यादातर राज्य राजस्व की कमी से जूझ रहे हैं, फिर भी वे विकास को नजरअंदाज कर इस तरह की मुफ्त चीजें बांट रहे हैं.’     पीठ ने कहा कि इस तरह की मुफ्त चीजों की बांटने से देश का आर्थिक विकास प्रभावित होता है और राज्यों को सभी को मुफ्त भोजन, साइकिल, बिजली देने के बजाय रोजगार के अवसर खोलने चाहिए.     हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके सरकार के नेतृत्व वाली पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी की याचिका पर केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किया है, जिसमें मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव रखा गया है.     पीठ ने पूछा, “हम भारत में किस तरह की संस्कृति विकसित कर रहे हैं? यह समझ में आता है कि आप कल्याणकारी योजना के तहत उन लोगों को मुफ्त बिजली देना चाहते हैं जो बिजली का बिल चुकाने में असमर्थ हैं. लेकिन बिना यह फर्क किए कि कौन भुगतान कर सकता है और कौन नहीं, आप सबको बांटने लगते हैं. क्या यह तुष्टिकरण नीति नहीं है?’     पीठ ने पूछा कि बिजली दरें घोषित होने के बाद तमिलनाडु कंपनी ने अचानक मुफ्त बांटने का फैसला क्यों किया. मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘राज्यों को रोजगार के अवसर खोलने चाहिए. अगर आप सुबह से शाम तक मुफ्त भोजन, फिर मुफ्त साइकिल, फिर मुफ्त बिजली देने लगेंगे तो कौन काम करेगा और फिर काम करने की संस्कृति का क्या होगा?’     पीठ ने कहा कि राज्य विकास परियोजनाओं पर खर्च करने के बजाय दो काम करते हैं- वेतन देना और इस तरह की मुफ्त चीजें बांटना.  

महुआ मोइत्रा का हाईकोर्ट रुख, पूर्व प्रेमी और पालतू कुत्ते को लेकर छिड़ा विवाद

कलकत्ता तृणमूल कांग्रेस (TMC) की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा और उनके पूर्व प्रेमी जय अनंत देहाद्रई के बीच कानूनी लड़ाई अब उनके पालतू कुत्ते ‘हेनरी’ (रॉटवीलर नस्ल) की कस्टडी तक पहुंच गई है। महुआ मोइत्रा ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने साकेत कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसने उन्हें उनके पालतू कुत्ते हेनरी की अंतरिम कस्टडी देने से इनकार कर दिया था। गुरुवार को जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने इस याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने महुआ के पूर्व प्रेमी और वकील जय अनंत देहाद्रई को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को तय की गई है। सुनवाई के दौरान देहाद्रई व्यक्तिगत रूप से पेश हुए और उन्होंने तर्क दिया कि मोइत्रा की इस याचिका को शुरुआत में ही खारिज कर दिया जाना चाहिए। कैश-फॉर-क्वेरी मामला यह पालतू कुत्ते का विवाद दोनों के बीच चल रही एक बड़ी कानूनी और राजनीतिक जंग का हिस्सा है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब देहाद्रई ने आरोप लगाया कि महुआ मोइत्रा ने संसद में सवाल पूछने के बदले व्यवसायी दर्शन हिरानंदानी से रिश्वत ली थी। गंभीर आरोप: देहाद्रई और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया था कि मोइत्रा ने अपने लोकसभा के लॉगिन क्रेडेंशियल हिरानंदानी को दिए थे, ताकि वह अपनी पसंद के सवाल सीधे पोस्ट कर सकें। आरोप है कि उनके द्वारा पूछे गए 61 सवालों में से 50 हिरानंदानी से संबंधित थे। संसद से निष्कासन: इन आरोपों के आधार पर लोकसभा की आचार समिति ने जांच की और उन्हें निष्कासित करने की सिफारिश की। परिणामस्वरूप, 8 दिसंबर, 2023 को महुआ मोइत्रा को संसद से निष्कासित कर दिया गया। मोइत्रा का बचाव: उन्होंने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि हिरानंदानी उनके मित्र हैं, लेकिन किसी भी तरह के ‘क्विड प्रो क्वो’ (लेन-देन) से इनकार किया। मानहानि का मुकदमा और कोर्ट की टिप्पणी महुआ मोइत्रा ने देहाद्रई और निशिकांत दुबे के खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी दायर किया था। हालांकि, मार्च 2024 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने तब कहा था कि यह आरोप पूरी तरह से गलत नहीं हैं कि मोइत्रा ने अपने लॉगिन क्रेडेंशियल शेयर किए और उपहार स्वीकार किए। फिलहाल यह मुख्य मामला अभी भी अदालत में लंबित है।

जंगी माहौल में ईरान को भूकंप का सामना, 5.5 तीव्रता और सुरक्षा सवाल उठाए

तेहरान  दक्षिणी ईरान में गुरुवार को 5.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर चिंता का माहौल बन गया. जर्मनी के भू-विज्ञान अनुसंधान केंद्र ने बताया कि भूकंप की गहराई लगभग 10 किलोमीटर थी. कम गहराई पर आए झटकों के कारण सतह पर असर अधिक महसूस किया गया. ईरान जंग के मुहाने पर है और लंबे समय से परमाणु पर काम करने के आरोप लगते रहे हैं. ऐसे में किसी भी भूकंपीय झटके के बाद दुनिया आशंकित हो जाती है कि कहीं ईरान ने न्यूक्लियर टेस्ट तो नहीं किया? भूकंप के बाद प्रभावित क्षेत्रों में लोगों में दहशत देखी गई और आपातकालीन सेवाओं को सतर्क कर दिया गया. राहत और आपदा प्रतिक्रिया दल संभावित नुकसान और आफ्टरशॉक की आशंका को देखते हुए हाई अलर्ट पर हैं. अधिकारियों ने कहा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां की गई हैं. हालांकि यह भूकंपीय गतिविधि प्राकृतिक मानी जा रही है, लेकिन क्षेत्र में मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के कारण कुछ हलकों में अटकलें भी सामने आई हैं. हाल के दिनों में ईरान द्वारा रॉकेट टेस्टिंग और सैन्य गतिविधियों की खबरों के बीच हर भूकंपीय घटना को अतिरिक्त सावधानी से देखा जा रहा है. ईरान में जब भी भूकंप आते हैं तो अक्सर लोग सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हैं कहीं यह किसी गुप्त परमाणु परीक्षण से जुड़ा तो नहीं है. विशेषज्ञों का कहना है कि 10 किलोमीटर की गहराई पर आया 5.5 तीव्रता का भूकंप सामान्य भूकंपीय गतिविधि के दायरे में आता है और ऐसे झटके इस क्षेत्र में पहले भी दर्ज होते रहे हैं. दक्षिणी ईरान भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र माना जाता है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के कारण समय समय पर झटके महसूस किए जाते हैं. फिलहाल किसी भी तरह के परमाणु परीक्षण या असामान्य गतिविधि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. जर्मन भू-विज्ञान अनुसंधान केंद्र सहित अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां स्थिति की निगरानी कर रही हैं. तनावपूर्ण क्षेत्रीय हालात के बीच आए इस भूकंप ने सुरक्षा एजेंसियों और आम नागरिकों दोनों की चिंता बढ़ा दी है. हालांकि अब तक किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है, लेकिन प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है.

ओम बिरला के AI वीडियो पर कार्रवाई, कांग्रेस के 8 नेताओं को जवाब देने के लिए नोटिस

 नई दिल्ली लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के AI वीडियो प्रकाशित करने के आरोप में लोकसभा विशेषाधिकार विभाग ने कांग्रेस मीडिया सेल को नोटिस जारी किया है. नोटिस में तीन दिनों के अंदर सभी नेताओं के अपना जवाब देने का निर्देश दिया गया है, अन्यथा सदन की अवमानना और विशेषाधिकार उल्लंघन के मामले में कार्रवाई करने की बात कही गई है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीजेपी सांसद विष्णु दत्त शर्मा की शिकायत के आधार पर लोकसभा के विशेषाधिकार विभाग ने कांग्रेस सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत और एआईसीसी के आठ अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का नोटिस जारी किया है. सचिवालय ने ये कदम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ एक अपमानजनक कैरिकेचर और एआई वीडियो प्रकाशित करने के बाद उठाया गया है. लोकसभा सचिवालय के निदेशक बाला गुरु जी ने 11 फरवरी को ये आधिकारिक पत्र भेजकर सभी आरोपियों से स्पष्टीकरण मांगा है. लोकसभा सचिवालय द्वारा भेजे गए इस पत्र में सुप्रिया श्रीनेत और अन्य पदाधिकारियों को अपनी सफाई पेश करने के लिए तीन दिनों का वक्त दिया गया है. नोटिस में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया है कि इस संचार की प्राप्ति के तीन दिनों के अंदर अपना जवाब प्रस्तुत करें. ये जवाब लोकसभा अध्यक्ष के विचारार्थ पेश किया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी. सचिवालय ने प्राप्तकर्ता से पत्र की प्राप्ती (Receipt) भी तुरंत भेजने का अनुरोध किया है, ताकि कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके. क्या मामला आपको बता दें कि ये पूरा विवाद सोशल मीडिया पर साझा की गई एक सामग्री से जुड़ा है, जिसे लोकसभा अध्यक्ष की गरिमा के खिलाफ माना गया है. शिकायतकर्ता विष्णु दत्त शर्मा का आरोप है कि कांग्रेस के मीडिया विभाग ने जानबूझकर भ्रामक एआई वीडियो और अपमानजनक तस्वीरों का सहारा लिया. इस मामले को सदन की अवमानना की श्रेणी में रखा गया है, क्योंकि ये सीधे तौर पर संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के सम्मान से जुड़ा है. जाने क्या हैं मामला  पीएम मोदी-स्पीकर की AI जेनरेटेड वीडियो को लेकर कांग्रेस के 9 नेताओं को नोटिस पीएम मोदी, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की AI जेनरेटेड वीडियो को लेकर लोकसभा सचिवालय ने कांग्रेस संचार विभाग के 9 नेताओं को विशेषाधिकार हनन और कंटेम्प ऑफ हाउस का नोटिस दिया है. जिन नेताओं को नोटिस दिया गया है, उनमें जयराम रमेश, पवन खेड़ा, सुप्रिया श्रीनेत, संजीव सिंह समेत नौ नेता शामिल हैं. इनलोगों से तीन दिन में जवाब मांगा गया है. कांग्रेस के इन नेताओं पर पीएम मोदी और स्पीकर ओम बिरला का एक AI जेनरेटेड वीडियो साझा करने का आरोप है. जयराम रमेश, पवन खेड़ा, सुप्रिया श्रीनेत और संजीव सिंह सहित नौ नेताओं से 3 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है. दरअसल, सितंबर 2025 में बिहार कांग्रेस के आधिकारिक हैंडल से एक 36 सेकंड का AI वीडियो पोस्ट किया गया था. इसमें पीएम मोदी की दिवंगत माताजी को उनकी राजनीति की आलोचना करते हुए दिखाया गया था. वहीं, पिछले साल दिसंबर में लोकसभा स्पीकर का एक डीपफेक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्हें ‘आर्थिक सहायता स्वावलंबन’ योजना के तहत गरीब परिवारों को 12,000 रुपये देने की घोषणा करते हुए दिखाया गया था. जांच में फर्जी पाया गया वीडियो पीआईबी फैक्ट चेक और अन्य जांच में पाया गया कि यह वीडियो पूरी तरह फर्जी था. ओरिजिनल वीडियो 1 दिसंबर 2025 का था, जिसमें स्पीकर दिवंगत सांसदों को श्रद्धांजलि दे रहे थे, लेकिन AI के जरिए उनकी आवाज और ऑडियो बदल दिया गया था. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की अलग-अलग धाराओं के तहत FIR दर्ज की थी. पटना हाई कोर्ट ने कांग्रेस को यह वीडियो सोशल मीडिया से तुरंत हटाने का निर्देश दिया था.

दक्षिण कोरिया का न्याय: पूर्व राष्ट्रपति को देश में मार्शल लॉ लगाने के लिए उम्रकैद

सियोल दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को उम्रकैद की सजा सुनाई है. अदालत ने उन्हें 2024 में देश में मार्शल लॉ लागू करने, सत्ता के दुरुपयोग और विद्रोह की साजिश रचने का दोषी पाया. इस मामले में उन्हें मृत्युदंड तक की सजा हो सकती थी, लेकिन अदालत ने आजीवन कारावास का फैसला सुनाया. 65 वर्षीय यून सुक येओल ने दिसंबर 2024 में सेना और पुलिस बलों को सक्रिय कर संसद पर नियंत्रण की कोशिश की थी. आरोप है कि उन्होंने उदारवादी बहुमत वाली नेशनल असेंबली को अवैध तरीके से कब्जे में लेने की कोशिश की. उन्होंने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि यह कदम “राष्ट्र विरोधी ताकतों” को रोकने के लिए जरूरी था, जो उनके एजेंडे को बाधित कर रही थीं. मार्शल लॉ करीब छह घंटे तक लागू रहा था. भारी हथियारों से लैस सैनिकों और पुलिस ने संसद भवन की घेराबंदी कर दी थी. हालांकि सांसदों ने अवरोध तोड़ते हुए भीतर पहुंचकर सर्वसम्मति से मार्शल लॉ हटाने के पक्ष में मतदान किया था, जिसके बाद आपात आदेश वापस लेना पड़ा. इस घटना ने देश में गहरा राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया था. दक्षिण कोरिया में 1997 के बाद से किसी को फांसी नहीं जनवरी में अभियोजकों ने यून के लिए मृत्युदंड की मांग की थी. उनका कहना था कि “असंवैधानिक और अवैध मार्शल लॉ ने नेशनल असेंबली और चुनाव आयोग के कामकाज को कमजोर किया और उदार लोकतांत्रिक संवैधानिक व्यवस्था को नष्ट करने का प्रयास किया.” हालांकि दक्षिण कोरिया में 1997 के बाद से किसी को फांसी नहीं दी गई है और इसे व्यवहारिक रूप से मृत्युदंड पर रोक माना जाता है. पूर्व राष्ट्रपति का साथ देने वालों पर भी कार्रवाई अदालत ने मार्शल लॉ लागू कराने में शामिल कई पूर्व सैन्य और पुलिस अधिकारियों को भी दोषी ठहराया. पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग ह्यून को इस योजना की केंद्रीय भूमिका और सेना को सक्रिय करने के लिए 30 साल की जेल की सजा दी गई. यून को पिछले महीने गिरफ्तारी का विरोध करने, मार्शल लॉ की घोषणा से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर करने और कानूनी रूप से अनिवार्य पूर्ण कैबिनेट बैठक किए बिना आपात आदेश जारी करने के मामले में पांच साल की सजा भी सुनाई गई थी. पूर्व प्रधानमंत्री को अन्य केस में पाया गया दोषी सियोल सेंट्रल कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री हान डक सू समेत दो अन्य कैबिनेट सदस्यों को भी अलग मामलों में दोषी ठहराया. हान डक सू को 23 साल की सजा दी गई है. उन पर आरोप था कि उन्होंने कैबिनेट बैठक के जरिए आदेश को वैध ठहराने, रिकॉर्ड में हेरफेर करने और शपथ के तहत झूठ बोलने की कोशिश की. उन्होंने फैसले के खिलाफ अपील दायर की है.

इंतज़ार खत्म! AI समिट में पक्की हुईं अहम डील्स, भारत को मिला बड़ा लाभ

 नई दिल्ली AI Impact Summit का आज चौथा दिन है. इस दौरान भारत को विदेशी कंपनियों से ढेरों इनवेस्टमेंट मिले हैं, जिसमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया और क्वालकॉम जैसी कंपनियों के नाम शामिल हैं. AI इंम्पैक्ट समिट के दौरान कंपनियों ने बताया है कि वे भारत में डेटा सेंटर्स और न्यू AI मॉडल को डेवलप करेंगे.  बुधवार को Google के सीईओ सुंदर पिचाई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और और बताया कि कंपनी अगले 5 साल में भारत में करीब 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर का इनवेस्टमेंट करेगी. AI इम्पैक्ट समिट के दौरान गूगल सीईओ और गूगल डीपमाइंड जीफ डेमिस हासाबिस दोनों भारत में हैं.  गूगल बनाएगा देश में बड़ा AI हब   गूगल का इनवेस्टमेंट देश के पहले बड़े AI हब को तैयार करेगा. प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा हिस्सा आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में बनने वाला मेगा AI डेटा सेंटर है. इसमें AI मॉडल ट्रेनिंग, क्लाउड सर्विस  और कंप्यूटिंग का केंद्र बनेगा.  Microsoft ने किया बड़े इनवेस्टमेंट का प्लान  एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में माइक्रोसॉफ्ट ने बुधवार को ऐलान किया है कि वह ग्लोबल साउथ में 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर का इनवेस्टमेंट करेगी. यह इनवेस्टमेंट आने वाले चार साल के दौरान की जाएगी. माइक्रोसॉफ्ट ने बीते साल भारत में 17.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर की इनवेस्टमेंट का ऐलान किया था.  एनवीडिया का योट्टा और L&T के साथ पार्टनरशिप  योट्टा डेटा सर्विसेज ने भी ऐलान किया है कि वह एनवीडिया के लेटेस्ट चिप्स के डेवलपमेंट पर 2 अरब डॉलर से अधिक का इनवेस्टमेंट करेंगे. इसके लिए वह एक AI कंप्यूटिंग हब तैयार करेंगे, जिसमें देश की शुरुआती चरण में मौजूद AI पहल को बड़ा बढ़ावा मिलेगा. इसके लिए योट्टा अपने एक्सपेंशन के इनवेस्टर्स से करीब 1.2 अरब डॉलर इकट्ठा करने की योजना बना रहा है.  L&T के साथ पार्टनरशिप की तैयारी  AI इम्पैक्ट समिट के दौरान देश में दुनियाभर की टेक और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर काम करने वाली कंपनियां मौजूद हैं. इस दिशा में Nvidia भारत में एक मेगा AI फैक्टरी लगाने का काम प्लान बना रही है, जिसके लिए वह भारतीय कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के साथ हाथ मिलाएगी.  पार्टनरशिप के तहत अरबो डॉलर का इनवेस्टमेंट होगा.  भारतीय स्टार्टअप Neysa ai ने 1.2 बिलियन डॉलर यानी करीब 10,000 करोड़ रुपये की बड़ी फंडिंग जुटाकर सभी का ध्यान खींचा. इसमें ग्लोबल दिग्गज Blackstone ने भी इनवेस्ट किया है. Neysa असल में एक AI इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी है. यह कोई चैटबॉट या कंप्यूमर ऐप नहीं बनाती है, बल्कि सीधे तौर पर टेक्निकल स्ट्रक्चर तैयार करती है.

ड्रग्स तस्करी पर बड़ी सफलता, बेंगलुरु एयरपोर्ट से 4.776 किलो कोकीन बरामद, आरोपी गिरफ्तार

बेंगलुरु    नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक ब्राज़ीलियन नागरिक से 4.776 kg कोकीन ज़ब्त की है। ‘X’ पर एक पोस्ट में, NCB ने कहा कि यह प्रतिबंधित पदार्थ, जिसकी गैर-कानूनी बाज़ार में कीमत लगभग 23.88 करोड़ रुपये है, उस यात्री के चेक-इन बैगेज से बरामद किया गया जो साओ पाउलो से दोहा होते हुए बेंगलुरु आया था।   ‘X’ पोस्ट में कहा गया, “बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बड़ा ड्रग बस्ट। NCB ने एक ब्राज़ीलियन नागरिक के चेक-इन बैगेज से 4.776 kg कोकीन ज़ब्त की। ज़ब्त किए गए प्रतिबंधित पदार्थ की गैर-कानूनी बाज़ार में कीमत लगभग 23.88 करोड़ रुपये है। आरोपी साओ पाउलो से दोहा होते हुए बेंगलुरु आया था। अधिकारियों ने कोकीन मिला कपड़ा रखने वाले छिपे हुए कम्पार्टमेंट वाले चार मॉडिफाइड हैंडबैग बरामद किए।” NCB के मुताबिक, अधिकारियों को चार मॉडिफाइड हैंडबैग मिले जिनमें छिपे हुए कम्पार्टमेंट थे और उनमें कोकीन मिला कपड़ा था।   आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है, और आगे की जांच चल रही है। NCB ने लोगों से 1933 पर MANAS हेल्पलाइन के ज़रिए नशीले पदार्थों के बारे में जानकारी शेयर करने की अपील की है, और जानकारी देने वालों की गोपनीयता का भरोसा दिलाया है। इस बीच, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने मैसूर में एक इंटर-स्टेट ड्रग ट्रैफिकिंग सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, साथ ही एक गुप्त ड्रग बनाने वाली लैब का भी पता लगाया है।   NCB द्वारा 31 जनवरी को शेयर किए गए एक ‘X’ पोस्ट में, एजेंसी ने 10 करोड़ रुपये की ड्रग्स के साथ 25.6 लाख रुपये कैश, एक SUV और 500 kg से ज़्यादा अलग-अलग केमिकल ज़ब्त किए। ‘X’ पोस्ट में कहा गया, “NCB ने एक बड़े इंटर-स्टेट ड्रग ट्रैफिकिंग सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है और मैसूर में एक खुफिया ड्रग बनाने वाली लैब का पता लगाया है। इस मामले में अब तक लगभग 10 करोड़ रुपये (स्ट्रीट वैल्यू) की ड्रग्स, 25.6 लाख रुपये कैश, एक टोयोटा फॉर्च्यूनर और 500 kg से ज़्यादा अलग-अलग केमिकल ज़ब्त किए गए हैं।”  

अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की मौजूदगी, पीएम शहबाज़ शरीफ़ होंगे ट्रंप के साथ बैठक में शामिल

इस्लामाबाद/वॉशिंगटन   पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मिशन पर अमेरिका पहुँच चुके हैं। 18 से 20 फरवरी तक चलने वाले इस दौरे का मुख्य केंद्र वॉशिंगटन में होने वाली उच्च स्तरीय बैठकें और अमेरिकी नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता है। ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ में शिरकत : पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष आमंत्रण पर ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ की पहली बैठक में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका गए हैं। महत्वपूर्ण बैठक : यह बैठक आज यानी गुरुवार, 19 फरवरी को होनी है। पृष्ठभूमि : गौरतलब है कि पिछले महीने स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम’ के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में इस शांति बोर्ड का गठन किया गया था। वरिष्ठ मंत्रियों का दल साथ : प्रधानमंत्री अकेले इस दौरे पर नहीं हैं। उनके साथ पाकिस्तान का एक शक्तिशाली प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद है, जिसमें शामिल हैं-उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार। मंत्रिमंडल के अन्य वरिष्ठ मंत्री और उच्चाधिकारी। द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा : ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ की बैठक के अलावा, शहबाज़ शरीफ़ अमेरिका की वरिष्ठ लीडरशिप के साथ अलग से भी मुलाकातें करेंगे।एजेंडा : इन बैठकों में मुख्य रूप से पाकिस्तान-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों, सुरक्षा सहयोग और वर्तमान वैश्विक मुद्दों पर गहन चर्चा होने की संभावना है।कूटनीतिक महत्व : राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में पाकिस्तान के साथ संबंधों की यह नई दिशा अंतरराष्ट्रीय गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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