LATEST NEWS

दहेज कानून की परिधि में लिव-इन संबंध? सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट इस समय एक बेहद महत्वपूर्ण और जटिल कानूनी प्रश्न पर विचार कर रहा है, जिसमें क्या एक विवाहित पुरुष के खिलाफ उसकी लिव-इन पार्टनर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A (दहेज प्रताड़ना) के तहत मुकदमा दर्ज करा सकती है? मामले की पृष्ठभूमि यह मामला कर्नाटक के एक हृदय रोग विशेषज्ञ, डॉक्टर लोकेश बीएच से जुड़ा है। लोकेश का विवाह साल 2000 में हुआ था, लेकिन एक अन्य महिला ने दावा किया कि उसका विवाह लोकेश से 2010 में हुआ और उसने उन पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने तथा जलाने के प्रयास का आरोप लगाया। लोकेश ने इन आरोपों को नकारते हुए तर्क दिया कि उनके और महिला के बीच कभी कोई वैध विवाह नहीं हुआ, इसलिए धारा 498A लागू ही नहीं होती। हाई कोर्ट बनाम सुप्रीम कोर्ट कर्नाटक हाई कोर्ट ने डॉक्टर की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि धारा 498A के प्रावधान लिव-इन रिलेशनशिप पर भी लागू हो सकते हैं। इस फैसले को चुनौती देते हुए डॉक्टर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनके वकील का तर्क है कि कानून के स्पष्ट प्रावधानों के अनुसार, केवल ‘वैध पत्नी’ ही पति या उसके रिश्तेदारों के खिलाफ यह शिकायत दर्ज करा सकती है। सुप्रीम कोर्ट का क्या है रुख? जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने इस सवाल को ‘विचारणीय’ माना है। न्यायालय ने केंद्र सरकार से इस पर जवाब मांगा है और वरिष्ठ अधिवक्ता नीना नरिमन को ‘एमिकस क्यूरी’ (अदालती सलाहकार) नियुक्त किया है। कोर्ट यह तय करेगा कि क्या “विवाह के समान” (Marriage-like) लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले पुरुष पर दहेज प्रताड़ना का मुकदमा चलाया जा सकता है या नहीं।

हवा में हिंसा! 30 हजार फुट पर यात्रियों की खून-खराबे वाली लड़ाई, अचानक करानी पड़ी लैंडिंग

तुर्की तुर्की से यूनाइटेड किंगडम (UK) जा रही Jet2 की एक फ्लाइट में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब यात्रियों के बीच हवा में ही हिंसक झड़प शुरू हो गई। इस घटना के चलते विमान को रास्ते में ही Belgium में डायवर्ट करना पड़ा। फ्लाइट LS896, जो Antalya से Manchester जा रही थी, में गुरुवार को अचानक दो यात्रियों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि विमान के गलियारे में यात्री एक-दूसरे पर घूंसे बरसा रहे हैं, जबकि आसपास बैठे लोग चीखते-चिल्लाते नजर आ रहे हैं। एयरलाइन की ओर से जारी बयान में इस घटना को “बेहद शर्मनाक और अस्वीकार्य व्यवहार” बताया गया।   जेट2 के मुताबिक, झगड़े में शामिल दोनों “डिसरप्टिव पैसेंजर्स” को ब्रसेल्स में विमान से उतार दिया गया, जहां स्थानीय पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। इसके बाद फ्लाइट ने दोबारा उड़ान भरी और मैनचेस्टर पहुंची। हालांकि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि झगड़े की शुरुआत किस वजह से हुई, लेकिन ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक चश्मदीद ने दावा किया है कि उड़ान के दौरान एक पुरुष यात्री ने कथित तौर पर नस्लवादी टिप्पणी की थी, जिसके बाद विवाद हिंसा में बदल गया। यह घटना एक बार फिर फ्लाइट सेफ्टी और यात्रियों के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में न सिर्फ यात्रियों की जान जोखिम में पड़ती है, बल्कि सैकड़ों लोगों की यात्रा भी प्रभावित होती है।

US में भारतीय छात्र लापता होने से हड़कंप, सैन फ्रांसिस्को में दूतावास ने संभाली कमान

न्यू यार्क अमेरिका से भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है। कर्नाटक के रहने वाले और University of California, Berkeley में पोस्ट-ग्रेजुएट की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्र साकेत श्रीनिवासैया लापता हो गए हैं। इस मामले पर Consulate General of India, San Francisco ने गहरी चिंता जताई है। दूतावास ने बताया कि वह छात्र के माता-पिता के संपर्क में है और स्थानीय अमेरिकी अधिकारियों के साथ मिलकर साकेत की तलाश में जुटा हुआ है। भारतीय वाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि साकेत श्रीनिवासैया के लापता होने की जानकारी बेहद चिंताजनक है और हरसंभव सहायता की जा रही है। यह घटना कोई पहली नहीं है। बीते वर्षों में विदेशों में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों ने नस्लीय भेदभाव, हमलों और स्थानीय प्रशासन की कथित लापरवाही की शिकायतें उठाई हैं। इसी मुद्दे पर लोकसभा में सांसद असदुद्दीन ओवैसी द्वारा सवाल पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय ने बताया था कि सरकार भारतीय छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, विदेशों में किसी भी अप्रिय घटना को तुरंत संबंधित देश की सरकार के सामने उठाया जाता है। भारतीय दूतावास छात्रों से लगातार संपर्क में रहते हैं, प्री-ओरिएंटेशन सत्र आयोजित करते हैं और MADAD पोर्टल, व्हाट्सऐप ग्रुप, इमरजेंसी हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि संकट की स्थिति में भारतीय समुदाय कल्याण कोष (ICWF) के जरिए छात्रों को मदद दी जाती है और जरूरत पड़ने पर बड़े पैमाने पर निकासी अभियान भी चलाए जाते हैं। साकेत श्रीनिवासैया की गुमशुदगी ने एक बार फिर विदेशों में भारतीय छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।  

‘सेवा तीर्थ’ बना सत्ता का नया केंद्र: साउथ ब्लॉक को अलविदा, यहां होंगी कैबिनेट बैठकें

नई दिल्ली प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का पता अब बदल गया है। कल 13 फरवरी 2026 को साउथ ब्लॉक में कैबिनेट की आखिरी बैठक हुई, जहां एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए भवन परिसर का उद्घाटन किया, जिसका नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया है। अब से कैबिनेट बैठकें और पीएमओ का काम इसी नए परिसर में होगा। साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण ब्रिटिश काल में हुआ था। ये भवन औपनिवेशिक शासन के प्रतीक थे, जिनके जरिए भारत को लंबे समय तक गुलामी में रखा गया। 1947 में आजादी मिलने के बाद भी प्रशासनिक ढांचा काफी हद तक उसी पुरानी व्यवस्था पर आधारित रहा। स्वतंत्रता के बाद से पीएमओ साउथ ब्लॉक से ही संचालित होता आया है। अब यह बदलाव एक ऐतिहासिक कदम है, जो औपनिवेशिक अतीत से मुक्ति और भारतीय मूल्यों पर आधारित नई शुरुआत का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा तीर्थ के उद्घाटन के दौरान कहा कि सेवा भारत की आत्मा और असली पहचान है। इस नए परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय भी एक छत के नीचे आ गए हैं। इससे प्रशासनिक कामकाज अधिक कुशल, एकीकृत और नागरिक-केंद्रित बनेगा। परिसर की दीवार पर ‘नागरिक देवो भव’ का आदर्श वाक्य अंकित है, जो सेवा की भावना को मजबूत करता है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह बदलाव सेंट्रल विस्टा परियोजना का हिस्सा है, जिसके तहत कई अन्य नाम भी बदले गए हैं, जैसे केंद्रीय सचिवालय को कर्तव्य भवन और राजपथ को कर्तव्य पथ। सरकार का मानना है कि ये कदम औपनिवेशिक प्रतीकों से दूर हटकर आधुनिक, भारतीय जनभावना के अनुरूप शासन व्यवस्था को मजबूत करेंगे। सेवा तीर्थ में आधुनिक सुविधाएं, डिजिटल एकीकरण और बेहतर समन्वय की व्यवस्था है, जो देश की प्रगति और विकास के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेगी।

बांग्लादेश: BNP कर सकती है PM मोदी को शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित, तैयारियां शुरू

नई दिल्ली बांग्लादेश में फरवरी 2026 के चुनावों में भारी बहुमत हासिल करने के बाद तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए तैयार हैं. इस ऐतिहासिक अवसर पर BNP ने भारत के साथ संबंधों में एक ‘नई शुरुआत’ करने का संकेत दिया है. सूत्रों के अनुसार, पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करने की तैयारी कर रही है. इसके अलावा बीएनपी सभी क्षेत्रीय राष्ट्राध्यक्षों को भी आमंत्रित कर सकती है. तारिक रहमान के विदेशी मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने पीटीआई से बात करते हुए स्पष्ट किया है कि यह समय दोनों देशों के लिए अपनी पुरानी धारणाओं को बदलने का है. उन्होंने कहा, ‘भारत को यह समझना होगा कि आज के बांग्लादेश में शेख हसीना और अवामी लीग का अस्तित्व नहीं बचा है. BNP ने भारत से अपील की है कि वह शेख हसीना जैसी “आतंकवादी” को अपनी जमीन पर पनाह न दे, जिन्होंने बांग्लादेश को अस्थिर करने का प्रयास किया. हुमायूं कबीर के अनुसार, यदि भारत ‘पड़ोसी प्रथम’ की नीति के तहत सम्मानजनक व्यवहार करता है, तो दोनों देश विकास के नए आयाम छू सकते हैं. पीएम मोदी और तारिक रहमान की बातचीत चुनाव परिणामों के तुरंत बाद, 13 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री मोदी ने तारिक रहमान से फोन पर बात की और उन्हें इस शानदार जीत की बधाई दी. बातचीत बेहद सौहार्दपूर्ण रही, जिसमें पीएम मोदी ने एक लोकतांत्रिक और समावेशी बांग्लादेश के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया. पीएम मोदी ने तारिक रहमान को अपनी सुविधानुसार भारत आने का निमंत्रण भी दिया है.  

भारत-कनाडा आर्थिक समझौते पर सकारात्मक संकेत, जल्द बन सकती है CEPA डील

कनाडा कनाडा में भारत के उच्चायुक्त ने भारत-कनाडा के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को लेकर बड़ा और सकारात्मक संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि यह डील “बिल्कुल भी मुश्किल नहीं” होनी चाहिए और इसके लिए औपचारिक व्यापार वार्ताएं फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में शुरू हो सकती हैं। कनाडा के प्रतिष्ठित अख़बार Financial Post को दिए साक्षात्कार में उच्चायुक्त पटनायक ने बताया कि भारत और कनाडा ने G20 शिखर सम्मेलन, जोहान्सबर्ग के दौरान CEPA वार्ता शुरू करने का फैसला किया था और फिलहाल दोनों देश Terms of Reference (संदर्भ शर्तों) को अंतिम रूप दे रहे हैं।  क्यों आसान होगी CEPA डील? दिनेश पटनायक ने कहा कि भारत-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत कई वर्षों से चल रही थी, लेकिन कुछ कारणों से यह प्रक्रिया रुकी हुई थी। अब वह “पॉज” हटा लिया गया है। उन्होंने बताया कि कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney की सरकार ने संसद को 90 दिन का नोटिस दे दिया है, जिसके बाद औपचारिक वार्ताएं शुरू हो सकेंगी।  उनका कहना है कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं में आए बदलाव, भारत की तेज़ आर्थिक वृद्धि और दोनों देशों द्वारा अलग-अलग व्यापार समझौते किए जाने से CEPA को नया आकार मिलेगा। पटनायक ने कहा -“दोनों पक्षों की मंशा साफ है, इसलिए मुझे भरोसा है कि हम इसे बहुत जल्द पूरा कर लेंगे।”   किन सेक्टरों पर होगा फोकस? उच्चायुक्त ने बताया कि CEPA केवल एक समझौता नहीं, बल्कि लगभग हर बड़े सेक्टर को कवर करेगा। इसमें शामिल होंगे:       डिफेंस और एयरोस्पेस     माइनिंग और एनर्जी     निवेश और फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स     रिसर्च, इनोवेशन और AI     उन्होंने कहा कि समझौते का मकसद होगा:     टैरिफ कम करना     कस्टम्स और दस्तावेज़ी प्रक्रिया सरल बनाना     नॉन-टैरिफ बैरियर्स हटाना     लॉजिस्टिक्स और निवेश को आसान बनाना पटनायक ने CEPA की तुलना “शादी” से की पटनायक ने CEPA की तुलना “शादी” से करते हुए कहा कि जैसे शादी में रिश्ते को आसान बनाने वाली बाधाएं हटाई जाती हैं, वैसे ही यह समझौता व्यापार में आने वाली अड़चनों को खत्म करेगा।     भारत-कनाडा व्यापार का मौजूदा आंकड़ा     भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार:     2024 में भारत का कनाडा को निर्यात: 8.02 अरब कनाडाई डॉलर     कनाडा से भारत का आयात: 5.30 अरब कनाडाई डॉलर     यह आंकड़े बताते हैं कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। CEPA से आगे भी रिश्तों पर जोर दिनेश पटनायक ने साफ किया कि CEPA अहम जरूर है, लेकिन यही एकमात्र केंद्रबिंदु नहीं है। भारत और कनाडा जल्द ही Canada-India Friendship Society शुरू करने पर भी विचार कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों की संसदों, सांसदों, नागरिक समाज और लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच सीधा संवाद बढ़े।उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में रिश्तों में आई “छोटी-सी खरोंच” के बावजूद  लोगों के बीच संबंध मजबूत रहे, व्यापार बढ़ता रहा, शिक्षा, शोध और नवाचार पर कोई असर नहीं पड़ा।  यह दोनों देशों के रिश्तों की असली मजबूती दिखाता है।  

‘उम्मीदों और लोकतंत्र की जीत’—तारिक रहमान का बड़ा बयान

ढाका बांग्लादेश चुनाव में मिली बंपर जीत के बाद पहली बार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) चीफ तारिक रहमान ने मीडिया के सामने देशवासियों का आभार जताया। उन्होंने इसे देश, लोकतंत्र और जनता की उम्मीदों की जीत करार दिया। बांग्ला संबोधन में रहमान ने कहा, “यह जीत बांग्लादेश की है, डेमोक्रेसी की है, और लोगों की उम्मीदों की है। मैं बांग्लादेश के लोगों को डेमोक्रेसी स्थापित करने में आई रुकावटों को पार करने के लिए बधाई देता हूं।” उन्होंने आगे कहा, “फासीवादी सरकार द्वारा संविधान और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की अनदेखी नाकाम हो गई है। हमारी सरकार अब पूरे देश में कानून और पक्की सुरक्षा व्यवस्था करेगी।” उन्होंने सत्ता की जवाबदेही का भरोसा दिलाया। बोले, “देश में डायरेक्ट वोटिंग के जरिए लोगों के प्रति जवाबदेह संसद और सरकार फिर से बनाई जा रही है। यह पक्का करने के लिए कि कोई भी बुरी ताकत देश में तानाशाही फिर से न ला सके और यह पक्का करने के लिए कि देश गुलाम देश न बन जाए, हमें एकजुट रहना होगा और लोगों की इच्छा का सम्मान करना होगा।” बीएनपी चेयरमैन तारिक रहमान ने आगे कहा, “बांग्लादेश के लोगों का बीएनपी पर दिखाया गया भरोसा दिखाता है कि नागरिकों का हम पर पूरा विश्वास है। इस भरोसे के जरिए, हम सभी बांग्लादेशियों के विकास और तरक्की के लिए अथक काम करेंगे। हमारे रास्ते और राय अलग हो सकते हैं, लेकिन देश हित में हमें एकजुट रहना होगा। मेरा पक्का मानना ​​है कि देश की एकता हमारी सामूहिक ताकत है।” तारिक रहमान ने विदेशी प्रेस से बात करते हुए अपनी मां और देश की पूर्व पीएम खालिदा जिया को भी याद किया। सभी पार्टियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि देश खालिदा जिया को बहुत याद कर रहा है। यह लोगों का जनादेश है और हम आप सभी को बधाई देते हैं। बांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव हुए थे। कुल 297 सीटों के परिणाम घोषित किए गए। इनमें सबसे बड़ी पार्टी के रूप में बीएनपी उभरी। जिसने 209 सीटें हासिल की। गठबंधन को कुल 212 सीटें मिलीं। नतीजतन एक बार फिर बांग्लादेश में बीएनपी सत्ता में वापसी कर रही है।

दुबई हिला देने वाला मामला: विवादित टिप्पणी के बाद वरिष्ठ अधिकारी का इस्तीफा

दुबई दुनिया के कुख्यात यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से कथित संबंधों को लेकर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच दुबई की एक प्रमुख बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स कंपनी के शीर्ष अधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह कदम उस वक्त उठाया गया, जब वैश्विक निवेशकों ने कंपनी में निवेश रोकने की चेतावनी दे दी थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस्तीफा देने वाले अधिकारी को दुबई के शासक का बेहद करीबी और उनका “राइट हैंड” माना जाता था। हाल ही में सार्वजनिक हुए एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में उनके नाम का उल्लेख सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल खड़े हो गए। इन दस्तावेजों में कथित तौर पर एपस्टीन के साथ कारोबारी अवसरों पर बातचीत, निजी मुलाकातों और महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक चर्चाओं का जिक्र है।रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इन बातचीतों में एक बार “100% रशियन महिला” का संदर्भ आया था, जिसने सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कर दीं। इसके साथ ही एपस्टीन नेटवर्क से जुड़े कथित टॉर्चर वीडियो और महिलाओं के शोषण के आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया।जैसे ही विवाद की आंच कंपनी तक पहुंची, कई अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और कारोबारी साझेदारों ने साफ कर दिया कि जब तक नेतृत्व स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होती, वे निवेश पर पुनर्विचार करेंगे। इसके बाद कंपनी के बोर्ड ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शीर्ष अधिकारी का इस्तीफा स्वीकार किया और नए नेतृत्व की नियुक्ति का ऐलान किया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटनाक्रम सिर्फ एक व्यक्ति के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि एपस्टीन कांड की गूंज अब वैश्विक कॉरपोरेट और राजनीतिक गलियारों में भी तेज़ी से सुनाई दे रही है। खाड़ी क्षेत्र की प्रतिष्ठित कारोबारी संस्थाओं पर पारदर्शिता और जवाबदेही का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

शहरों की किस्मत बदलेगा नया फंड, स्मार्ट के साथ ‘समृद्ध’ भी बनेंगे भारतीय नगर

नई दिल्ली   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने शनिवार को भारतीय शहरों की सूरत बदलने के लिए ‘अर्बन चैलेंज फंड’ (UCF) को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार अगले पांच वर्षों में ₹1 लाख करोड़ की सहायता राशि प्रदान करेगी। सरकार का लक्ष्य इस फंड के जरिए 2031 तक शहरी बुनियादी ढांचे में कुल ₹4 लाख करोड़ का निवेश जुटाना है। फंडिंग का बदला अंदाज यह योजना भारत के शहरी विकास में एक बड़े बदलाव का संकेत है। अब शहर केवल सरकारी Grants पर निर्भर नहीं रहेंगे। केंद्र सरकार किसी भी प्रोजेक्ट की लागत का केवल 25% हिस्सा देगी। शहरों को प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए कम से कम 50% रकम बाजार (बैंक लोन, म्युनिसिपल बॉन्ड या प्राइवेट निवेश) से जुटानी होगी। शेष 25% हिस्सा राज्य सरकार या नगर निगम को वहन करना होगा। शहरों के बीच होगी ‘टक्कर’ फंड के लिए शहरों का चयन ‘चैलेंज मोड’ के जरिए होगा। इसका मतलब है कि जिन शहरों के प्रोजेक्ट प्रस्ताव सबसे प्रभावी, सुधारवादी और परिणामोन्मुखी होंगे, उन्हें ही फंडिंग मिलेगी। यह फंड 2030-31 तक चालू रहेगा और भविष्य में इसे 2034 तक बढ़ाया जा सकता है। पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए विशेष कवच छोटे शहरों और पहाड़ी राज्यों (North-East) की मदद के लिए सरकार ने ₹5,000 करोड़ का एक विशेष कॉर्पस बनाया है। यह उन नगर निकायों के लिए ‘क्रेडिट गारंटी’ का काम करेगा जो पहली बार बाजार से कर्ज ले रहे हैं। इसका उद्देश्य इन निकायों को इतना मजबूत बनाना है कि वे खुद निवेश जुटाने में सक्षम हो सकें। किन कामों पर होगा खर्च? इस फंड का मुख्य फोकस तीन प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा:     शहरों को आर्थिक विकास का हब बनाना।     पुराने शहरी केंद्रों और हेरिटेज साइट्स का पुनर्विकास।     जल आपूर्ति और स्वच्छता प्रणालियों में सुधार (जैसे सीवेज नेटवर्क, कचरा प्रबंधन और बेहतर परिवहन)।  

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भारत से दोस्ती पर जोर, BNP ने PM मोदी को दिया धन्यवाद

ढाका बांग्लादेश में संसदीय चुनाव में शानदार जीत के बाद Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi के बधाई संदेश के लिए सार्वजनिक रूप से आभार जताया है। पार्टी ने इसे भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। BNP ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पार्टी प्रमुख Tarique Rahman के नेतृत्व को मिली मान्यता का वह स्वागत करती है। पार्टी ने कहा कि यह जीत बांग्लादेश की जनता के भरोसे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास को दर्शाती है। BNP ने अपने बयान में यह भी दोहराया कि वह लोकतांत्रिक शासन, समावेशिता और राष्ट्रीय विकास के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पार्टी ने संकेत दिया कि आने वाले समय में नई सरकार भारत के साथ रचनात्मक और सहयोगपूर्ण संबंधों को आगे बढ़ाना चाहती है। BNP ने कहा कि वह भारत के साथ पारस्परिक सम्मान, एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता और क्षेत्रीय शांति, स्थिरता एवं समृद्धि के साझा लक्ष्य के आधार पर काम करने को तैयार है।   इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को उनकी पार्टी की निर्णायक जीत पर बधाई दी थी और कहा था कि भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में हमेशा खड़ा रहेगा। 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनाव बांग्लादेश के लिए ऐतिहासिक माने जा रहे हैं। यह चुनाव 2024 के जन आंदोलनों के बाद पहला था, जिनके चलते लंबे समय से सत्ता में रहीं Sheikh Hasina को पद छोड़ना पड़ा था। चुनाव में BNP ने 300 सीटों वाली संसद में बहुमत हासिल कर सत्ता में वापसी की है, जबकि जमात-ए-इस्लामी गठबंधन मुख्य विपक्ष के रूप में उभरा है।  

प्रशासनिक ढांचे में बदलाव: नॉर्थ-साउथ ब्लॉक से नए कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट होंगे विभाग

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार को नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ व ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरण के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि साउथ ब्लॉक में अंतिम बार केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई। ये सिर्फ स्थान परिवर्तन का क्षण नहीं है, यह इतिहास और भविष्य के संगम के भी पल हैं। इस परिसर ने गुलामी से आजादी और फिर स्वतंत्र भारत की अनेक ऐतिहासिक घटनाओं को देखा है, गढ़ा है। मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा, “पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से नया प्रधानमंत्री कार्यालय, जिसे अब ‘सेवा तीर्थ’ के नाम से जाना जाएगा, राष्ट्र को समर्पित किया गया है। साउथ और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण अंग्रेजों ने भारत को गुलामी की बेड़ियों में जकड़े रखने के लिए किया था। 1947 में भारत को गुलामी से तो मुक्ति मिली, लेकिन इन भवनों को तत्कालीन सरकार की ओर से अपने कार्यों के निष्पादन के लिए बनाए रखा गया। स्वतंत्रता के बाद से ही प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक के इस भवन से कार्य करता रहा है।” उन्होंने कहा कि इस परिसर ने देश के 16 प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में बनी कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसले होते देखे हैं। इसकी सीढ़ियों पर जवाहरलाल नेहरू से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक के पदचिन्ह हैं। इस भवन की सीढ़ियों पर चढ़ते कदमों ने देश को नई ऊंचाई पर पहुंचाने में अहम योगदान दिया है। उन्होंने कहा, “बीते दशकों में यहां कैबिनेट की बैठकों में, संविधान के आदर्शों, जनता से मिले जनादेश और राष्ट्र की आकांक्षाओं से प्रेरित होकर अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। यहां भारत की सफलताओं का उत्सव भी मनाया गया, असफलताओं का आंकलन भी हुआ और साथ ही संकटों और चुनौतियों से निपटने के लिए कड़े और बड़े फैसले भी लिए गए।” मीडिया को संबोधित करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि साउथ ब्लॉक के इन कमरों ने विभाजन की विभीषिका भी देखी, युद्ध और आपातकाल की चुनौतियों को भी देखा और शांतिकाल की नीतियों पर भी चिंतन और मनन किया। इन्होंने टाइपराइटर से लेकर डिजिटल गवर्नेंस तक, तकनीक की लंबी छलांग को महसूस किया है। यहां बैठकर अधिकारियों की कई पीढ़ियों ने ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने भारत को आजादी के तुरंत बाद की अनिश्चितता से निकालकर स्थिरता की राह पर आगे बढ़ाया। सबके प्रयासों का परिणाम है कि आर्थिक चुनौतियों और संकटों से निकलकर, आज भारत एक आत्मविश्वासी राष्ट्र बनकर खड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, “बीते एक दशक में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में साउथ ब्लॉक राष्ट्र के अनेक ऐतिहासिक निर्णयों का केंद्र रहा। ये स्थान मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस की प्रेरणा स्थली बना। यहां से रिफॉर्म एक्सप्रेस को पूरे देश में प्रोत्साहन मिला है। यहीं से डीबीटी, ‘स्वच्छ भारत अभियान’, गरीब कल्याण से जुड़े अभियान, ‘डिजिटल इंडिया’ और जीएसटी जैसे व्यापक सुधारों को आकार मिला। यहां से ही आर्टिकल-370 की दीवार गिराने और तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाने जैसे सामाजिक न्याय के साहसिक और संवेदनशील निर्णय लिए गए। यहीं लिए गए ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, ‘एयर स्ट्राइक’ और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के निर्णयों के माध्यम से भारत ने अपनी दृढ़ और आत्मविश्वासी सुरक्षा नीति का स्पष्ट संदेश विश्व को दिया।” प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री ने कहा, “आज का भारत दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भारत आज एक सुरक्षित और सक्षम राष्ट्र के रूप में उभरकर सामने आया है और वैश्विक मंचों पर अपनी स्पष्ट और प्रभावशाली आवाज रख रहा है। आज देश विकसित भविष्य के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इसके लिए एक आधुनिक, तकनीकी और पर्यावरण के प्रति अनुकूल कार्यालय की आवश्यकता थी। एक ऐसा कार्यक्षेत्र, जो यहां काम करने वाले हर कर्मयोगी की उत्पादकता को बढ़ाए, सेवाभाव के उसके संकल्प को प्रोत्साहित करे।” अश्विनी वैष्णव ने कहा कि साउथ ब्लॉक के उ‌द्घाटन के करीब 95 साल के बाद शुक्रवार को भारत सरकार ने इन भवनों को खाली किया है और ‘सेवा तीर्थ’ व ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरित हुई है। यह प्रतीकात्मक रूप से गुलामी के अतीत से ‘विकसित भारत’ के भविष्य की ओर बढ़ने की ओर देश का एक और कदम है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में देश में ‘सत्ता भाव’ के बजाय ‘सेवा भाव’ की संस्कृति सशक्त हुई है। आज का ये स्थानांतरण, इन संस्कारों को और मजबूती देगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “शनिवार को कैबिनेट ने यह संकल्प भी लिया कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को ‘युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय’ का हिस्सा बनाया जाए, जो हमारी हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता से पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। ये संग्रहालय, हमारी कालातीत और शाश्वत सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाएगा और हमारे गौरवशाली अतीत को समृद्ध भविष्य से जोड़ेगा।”

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में गूंजा रुबियो का बयान: ‘अमेरिका यूरोप का चाइल्ड’, पश्चिमी नीतियों पर कड़ा प्रहार

म्यूनिख (जर्मनी) यूएस के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अमेरिका को यूरोप का ‘चाइल्ड’ यानी ‘संतान’ बताया है। उन्होंने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के मंच से उस इतिहास की बात की जिसे यूएस और यूरोप साझा करते हैं। दावा किया कि उनका देश यूरोप के साथ मिलकर खुशहाली का नया रास्ता तय करना चाहता है। उनके भाषण का सभागार में मौजूद विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने खड़े होकर और तालियां बजाकर स्वागत किया। बेहद सौम्य और साधारण अंदाज में उन्होंने ट्रांस-अटलांटिक युग के अंत का लक्ष्य न रखने की बात कही। रुबियो ने कहा, “ट्रांसअटलांटिक युग का अंत न तो हमारा लक्ष्य है और न ही हमारी इच्छा है। हम अमेरिकियों का घर भले ही वेस्टर्न हेमिस्फेयर में हो, लेकिन हम हमेशा यूरोप की संतान ही रहेंगे।” इसके बाद उन्होंने यूरोप-यूएस के बॉन्ड की बात की। साझा इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे यूएस की कहानी एक इतालवी एक्सप्लोरर से शुरू हुई और पहली कॉलोनियां अंग्रेजों ने बनाईं। फिर स्कॉटिश, आयरिश और जर्मन किसानों ने उन्हें आकार दिया। रुबियो के मुताबिक, “हमारा इतिहास और हमारी किस्मत दोनों हमेशा एक-दूसरे से जुड़े रहेंगे। अमेरिका खुशहाली की एक नई सदी के लिए रास्ता बना रहा है, लेकिन वह ऐसा यूरोप के साथ करना चाहता है। हम नहीं चाहते कि हमारे सहयोगी और साथी शर्म की जंजीरों में जकड़े हों।” अमेरिकी विदेश मंत्री की मानें तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगुआई में संयुक्त राज्य अमेरिका ग्लोबल “रिन्यूअल और रेस्टोरेशन” को लीड करना चाहता है। उन्होंने म्यूकहा कि यूनाइटेड स्टेट्स “एक ऐसे भविष्य के विजन से आगे बढ़ेगा जो उतना ही गौरवान्वित करने वाला होगा, उतना ही स्वायत्त और जरूरी होगा जितना हमारी सभ्यता का अतीत रहा है।” उन्होंने कहा, “और अगर जरूरत पड़ी, तो हम इसे अकेले करने के लिए तैयार हैं, लेकिन यह हमारी पसंद और उम्मीद है कि हम इसे  आपके साथ, यूरोप में हमारे दोस्तों के साथ मिलकर करेंगे।” रुबियो ने कहा, “हम चाहते हैं कि यूरोप मजबूत हो। हमारा मानना ​​है कि यूरोप को जिंदा रहना चाहिए।” रुबियो ने डीइंडस्ट्रियलाइजेशन (उद्योग धंधों को बंद करना) और बड़े पैमाने पर माइग्रेशन को यूरोप के लिए खतरनाक बताया। उनके मुताबिक डीइंडस्ट्रियलाइजेशन “आवश्यक नहीं था,” और यह युद्ध के बाद के “भ्रम” का एक “बेवकूफी भरा” नतीजा था। उन्होंने माइग्रेशन को हल्के में न लेने की सलाह भी दी। बोले, “बड़े पैमाने पर माइग्रेशन कोई मामूली चिंता नहीं है, था भी नहीं,” क्योंकि वह चेतावनी देते हैं कि यह “पूरे पश्चिम में समाजों को बदल रहा है और अस्थिर कर रहा है। यह हमारे समाज के ताने-बाने और हमारी सभ्यता के बने रहने के लिए एक बड़ा खतरा है।” म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन हर साल फरवरी में जर्मनी के म्यूनिख शहर में आयोजित किया जाता है। इसमें दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष, रक्षा मंत्री और सैन्य विशेषज्ञ जुटते हैं और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों, युद्ध और कूटनीति पर खुलकर चर्चा करते हैं।

ग्लोबल तनाव के बीच भारत पर भरोसा मजबूत, यूरोप-कनाडा संग गहरे हुए आर्थिक और रणनीतिक रिश्ते

असम   तेजी से बदलते वैश्विक हालात में भारत यूरोप और कनाडा के लिए एक अहम आर्थिक और रणनीतिक साझेदार बनकर उभर रहा है। अमेरिका, चीन और रूस के बीच बढ़ती टकरावपूर्ण राजनीति ने ब्रसेल्स और ओटावा को मजबूर कर दिया है कि वे अपनी अर्थव्यवस्थाओं को “डी-रिस्क” करने के लिए भारत के साथ रिश्ते और गहरे करें। हाल ही में Donald Trump और Narendra Modi के बीच हुए बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते ने अमेरिका-भारत संबंधों में आई गिरावट को थामने का काम किया है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ 25% से घटाकर 18% करने पर सहमति जताई, जबकि भारत ने अमेरिकी निर्यात पर शुल्क और गैर-शुल्क बाधाएं कम करने का वादा किया। हालांकि ट्रंप ने इस डील को भू-राजनीतिक रंग देते हुए दावा किया कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद करेगा और अमेरिका से ऊर्जा खरीदेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दावे की न तो पुष्टि की और न ही खंडन। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुप्पी रणनीतिक थी, क्योंकि भारत किसी बड़े ऊर्जा पुनर्संयोजन में खुद को बांधना नहीं चाहता।इस डील का समय भी बेहद अहम है। इसके ठीक पहले भारत और European Union के बीच 25 साल से अटके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर सहमति बनी। इस समझौते से दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक ब्लॉकों में से एक का निर्माण होगा। माना जा रहा है कि यह सफलता भारत-EU उत्साह से ज्यादा ट्रंप के टैरिफ दबाव और यूरोप के साथ उनके टकरावपूर्ण रवैये का नतीजा थी।   यूरोप आज दुविधा में है। एक ओर अमेरिका की अनिश्चित नीतियां और टैरिफ धमकियां हैं, तो दूसरी ओर China के साथ बढ़ते रिश्तों से जुड़ी सुरक्षा और मानवाधिकार संबंधी चिंताएं। यूरोपीय नेता चीन से व्यापार बढ़ाने को लेकर घरेलू आलोचना झेल रहे हैं, जहां उन्हें मुनाफे के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों से समझौते का आरोपी ठहराया जा रहा है। इसी बीच, यूरोप ने भारत को एक “तीसरे विकल्प” के रूप में देखना शुरू किया है ऐसा विकल्प जो चीन जैसी राजनीतिक बोझिलता के बिना विशाल बाजार और उत्पादन क्षमता देता है। यही सोच कनाडा में भी दिख रही है। प्रधानमंत्री Mark Carney के नेतृत्व में कनाडा अपनी रणनीति को विविध बना रहा है, ताकि वह वाशिंगटन और बीजिंग के बीच संतुलन बना सके। भारत के साथ बढ़ते रिश्ते इस नई नीति का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अब न सिर्फ एक उभरती अर्थव्यवस्था है, बल्कि एक स्थिर और भरोसेमंद साझेदार भी है जो यूरोप और कनाडा को वैश्विक अस्थिरता के दौर में आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सकता है।  

मुंबई में मेट्रो साइट पर बड़ा हादसा, पिलर का टुकड़ा गिरा—एक मृत, तीन घायल

मुंबई मुंबई में बड़ा हादसा हुआ है। मेट्रो के पिलर का हिस्सा टूटकर गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं, तीन अन्य घायल हो गए। यह हादसा मुलुंड पश्चिम के एलबीएस रोड पर हुआ। निर्माण के दौरान मेट्रो के पिलर का एक हिस्सा ऑटो रिक्शा और एक कार पर गिर पड़ा। इसके चलते दोनों वाहनों को काफी ज्यादा नुकसान हुआ है। घटनास्थल पर मौजूद एक फायर ब्रिगेड अधिकारी के मुताबिक मरने वाले की पहचान रामधन यादव के रूप में हुई है। वहीं, घायलों में राजकुमार इंद्रजीत यादव, महेंद्र प्रताप यादव और दीपा रुहिया हैं। राजकुमार की हालत काफी गंभीर है। उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां आईसीयू में हैं। वहीं, महेंद्र और रुहिया की हालत स्थिर है। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजनल डेवलपमेंट अथॉरिटी घटना को लेकर बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि मेट्रो लाइन निर्माण के पास मुलुंड फायर स्टेशन के पास पियर 196 के पास पिलर का एक हिस्सा सवा बारह बजे वहां से गुजरते ऑटो रिक्शा पर गिर गया। बयान के मुताबिक मेट्रो प्रोजेक्ट टीम मौके पर है और बीएमसी और आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के साथ मिलकर राहत कार्य और घटनास्थल की सुरक्षा में जुटी है। साथ ही हादसे के सटीक कारणों के बारे में पता लगाने के लिए जांच भी चल रही है।

बांग्लादेश चुनाव परिणाम: तारिक रहमान की BNP विजयी, हिंदू प्रतिनिधित्व में 3 सांसद शामिल

ढाका  बांग्लादेश के 13वें पार्लियामेंट्री चुनाव के नतीजों ने पूरे साउथ एशिया में हलचल मचा दी है. लगभग दो दशक के लंबे इंतजार के बाद, तारिक रहमान की लीडरशिप वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने सत्ता में जबरदस्त वापसी की है. ‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के मुताबिक, BNP ने 299 में से 212 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है. वहीं, कभी राजनीतिक रूप से हाशिए पर रहने वाली जमात-ए-इस्लामी 77 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी है. BNP के ‘हिंदू फेस’ ने लहराया जीत का परचम इस चुनाव में अल्पसंख्यकों की भागीदारी पर पूरी दुनिया की नजर थी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, BNP के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले तीन हिंदू उम्मीदवारों ने शानदार जीत दर्ज की है. गयेश्वर चंद्र रॉय: ढाका-3 सीट से जीत हासिल की. उन्होंने जमात के शाहीनूर इस्लाम को 15 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया. नितई रॉय चौधरी: मगुरा-2 सीट से कंफर्टेबल जीत दर्ज की. इन्हें BNP के भीतर अल्पसंख्यकों का सबसे बड़ा चेहरा माना जाता है. एडवोकेट दीपेन देवान: रांगामाटी संसदीय सीट से जीत हासिल कर संसद पहुंचे. इनके अलावा, अल्पसंख्यक समुदाय के ही सचिंग प्रू ने बंदरबन निर्वाचन क्षेत्र से BNP के लिए एक और सीट जीती. हालांकि, जमात-ए-इस्लामी की ओर से एकमात्र हिंदू उम्मीदवार कृष्णा नंदी को हार का सामना करना पड़ा. संविधान बदलने पर लगी मुहर  चुनाव के साथ-साथ बांग्लादेश में एक बड़ा रेफरेंडम (जनमत संग्रह) भी हुआ, जिसमें जनता से संविधान सुधारों पर राय मांगी गई थी. चुनाव आयोग के अनुसार, करीब 4.8 करोड़ लोगों ने ‘हां’ में वोट दिया, जबकि 2.25 करोड़ लोगों ने ‘ना’ कहा. इन सुधारों के बाद अब बांग्लादेश में कोई भी व्यक्ति 10 साल से ज्यादा प्रधानमंत्री नहीं रह पाएगा. साथ ही न्यायपालिका को ज्यादा आजादी देने और दो सदनों वाली संसद (Bicameral Parliament) बनाने का रास्ता भी साफ हो गया है. जमात का उदय  अगस्त 2024 में हुए छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना की अवामी लीग को चुनाव लड़ने से बैन कर दिया गया था. इसका सीधा फायदा BNP और जमात को मिला. जमात ने ढाका की 15 में से 6 सीटों पर कब्जा किया है, जो उनकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है. हालांकि, महिलाओं और रूढ़िवादी नीतियों पर जमात के पुराने स्टैंड के कारण वे BNP को मात नहीं दे पाए. दूसरी ओर, जमात ने नतीजों में देरी और ‘धांधली’ का आरोप लगाते हुए आंदोलन की धमकी भी दी है. क्या होगा आगे? मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार अब सत्ता तारिक रहमान को सौंपेगी. तारिक रहमान फिलहाल प्रधानमंत्री पद की रेस में सबसे आगे हैं. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रहमान को जीत की बधाई दी है और उम्मीद जताई है कि दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होंगे. चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जल्द ही सभी आधिकारिक गैजेट नोटिफिकेशन जारी कर दिए जाएंगे.

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet