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MP : जयचंदों..छलचंदों के दम पर ही तो सरकार बनी

….गोपाल वाजपेयी, वरिष्ठ पत्रकार…. जनभावनाओं, जनता की जरूरतों को कुचलकर सिर्फ सत्ताप्राप्ति व चुनाव जीतने को जन्मसिद्ध अधिकार समझने वाली बीजेपी बंगाल में अप्रत्याशित हार से सदमे में है। केंद्रीय स्तर पर बीजेपी खेमे में गम का साया है। इधर , मध्यप्रदेश बीजेपी में बंगाल हार का गम कम है। इधर असली गम दमोह का है। दमोह में मिली करारी शिकस्त को सीएम शिवराज, शिवराज समर्थक मंत्री और प्रदेश संगठन पचा नहीं पा रहा है। दमोह में मिली हार के असली कारण सामान्य जानकारी रखने वाला भी समझ रहा है। लेकिन एमपी बीजेपी के बड़े नेता इससे इतर बयानों के तीर चलाकर अपने समीकरण मजबूत करने में लगे हैं। बीजेपी नेता दमोह हार का कारण जयचंदों ..छलचंदों को बता रहे हैं। दरअसल, बीजेपी नेताओं के साथ दिक्कत ये भी है कि इन्हें बोलने की बीमारी होती है। कैमरे के फ़्लैश ऑन होते ही ये शुरू हो जाते हैं। कई बार ऐसे शब्दों का प्रयोग कर देते हैं, जिनका न तो अर्थ, मतलब जानते हैं और न उन शब्दों का इतिहास। दमोह हार को लेकर बीजेपी नेता कथित रूप से जयचंदों..छलचंदों को तलाश रही है। वे शायद भूल रहे हैं कि एक साल पहले मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार का गठन इन्हीं जयचंदों..छलचंदों के दम पर हुआ था। अगर एक साल से पहले का इतिहास देखें तो हम पाएंगे कि जब से बीजेपी को सत्ता रोग लगा तब से ही इस पार्टी में जयचंदों की मौज हुई है। ये बीजेपी वो नहीं जब चाल, चरित्र और चेहरा इनका नारा था। अब पार्टी में जयचंदों का राज चलता है। ये दर्द उन बीजेपी नेताओं व कार्यकर्ताओं से बेहतर कौन समझ सकता है जो बीते 30 साल से ज्यादा समय से निःस्वार्थ भाव से आज भी लगे हैं लेकिन उन्हें न चुनाव में मौक़ा मिलता और न लाभ या सुविधा वाला कोई पद । मैं ऐसे कई नेताओं को व्यक्तिगत रूप से जानता हूँ जिन्होंने पार्टी के लिए तन, मन , धन से सेवा की, ये 30 साल से लेकर आज भी उम्मीद के साये में ही काम कर रहे हैं । वहीं पार्टी में 5 से 7 पहले आये नेता बल्ले बल्ले कर रहे हैं। बहरहाल, जयचंदों.. छलचंदों को अगर बीजेपी नेता तलाशेंगे और उन्हें बाहर करेंगे तो पाएंगे कि आधी पार्टी ही साफ हो गयी। लेकिन आधी पार्टी साफ होने बाद जो बचेगा वही असली बीजेपी होगी, जिस पार्टी को संघर्ष के लिए जाना जाता था।

बीजेपी थिंकटैंक, बड़े बड़े नेताओं पर लगता है कुमति सवार है

गोपाल स्वरूप वाजपेयी कहते हैं कि इंसान का बुरा समय आने से पहले ईश्वर उसकी मति हर लेता है। अर्थात इंसान पर कुमति सवार हो जाती है। उसके सोचने व काम करने का ढंग पहले की तुलना में एकदम विपरीत होता है। बीजेपी के साथ ही ऐसा ही हो रहा है। बीजेपी थिंकटैंक, बड़े बड़े नेताओं पर लगता है कुमति सवार है। बीजेपी नेताओं में जनवरी से विवेक का नाश होना शुरू हो गया था । कैसे ? हम बताते हैं। जब देश को संभालने की जरूरत थी , तब कोरोना विजय उत्सव मनाने लगे, वैक्सीन उत्सव में झूमने लगे। जबकि इसी दौरान और इससे 4 माह पहले से विदेशों में कोरोना की दूसरी लहर प्रचंड रूप से बह रही थी। यह भी तय था कि ये लहर भारत में आएगी। कुछ जानकार लोग चेताते भी रहे। लेकिन जब दिमाग में कुमति सवार होती है, विनाश होना होता है तो विवेक उल्टा ही काम करता है। दूसरी लहर भारत में आ गयी वो भी अति प्रचंड रूप में। लोग अस्पताल के बाहर और अंदर मरने लगे। लाशों के अंबार लगने लगा। शमशान घाट कराहने लगे तो फुटपाथों पर दाह संस्कार होने लगे। ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचने लगा, मरीज तड़प तड़पकर मरने लगे। लगभग सभी राज्यों में यही हाल। इसके बाद भी बीजेपी की आंखों में बंगाल की सत्ता नाच रही थी। लाशों का अंबार लगता रहा , लेकिन पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह बंगाल में रैलियां करते रहे, अट्टहास करते रहे। देशभर से बीजेपी नेताओं का जमावड़ा बंगाल में हो गया। जनता तड़प तड़पकर सब देखती रही। और जब बंगाल चुनाव का नतीजा सामने आया तो बीजेपी में भूचाल आ गया। यहां लगा कि शायद बीजेपी पर अब कुमति का साया खत्म हो जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीजेपी इतने अहंकार में है कि उसे जनता के दर्द और उसकी भावनाओं से कोई लेना देना नहीं । बीजेपी समझने लगी कि चुनाव जीतना उसका जन्म सिद्ध अधिकार है। बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद वहां हिंसक वारदातें हुईं। इसमें बीजेपी समर्थकों के साथ अत्याचार की खबरें हैं। हिंसा किसी भी सभ्य समाज के लिए शुभ नहीं। बीजेपी ने इस हिंसा के खिलाफ पूरे देश में धरना कार्यक्रम घोषित कर दिया। लेकिन जनता सब देख रही है कि ये धरना क्यों और किसके खिलाफ किया जा रहा है। हिंसा के दौरान बंगाल में चुनाव आयोग व राज्यपाल का शासन चल है। आपका प्रशासन, आपकी पुलिस, आपका पैरा मिलिट्री फ़ोर्स। तो फिर धरना का मक़सद क्या है। क्या बीजेपी नेताओं ने , उसके थिंकटैंक ने यह नहीं सोचा कि इलाज के अभाव में हजारों लोग रोजाना मर रहे हैं , इनके लिए भी कम से कम श्रद्धांजलि का कार्यक्रम रख दें। ये न कर एकें तो मरीजों व जरूरतमंदों की सेवा के लिए कोई अभियान चला दें। लेकिन नहीं , इस पार्टी को हमेशा आपदा में अवसर चाहिए। जिन मुद्दों पर ये घिरते हैं उसकी काट के लिए नया शि गू फ़ा चाहिए, जिससे इनकी नाकामी छिप जाएं। इन्हीं हरकतों की वजह से अब बीजेपी का ग्राफ गिर रहा है और ये अब लगातार गिरेगा। क्योंकि ये पब्लिक है सब जानती है।

भाजपा की दमोह में करारी शिकस्त के बाद सुलगते सवाल

गोपाल स्वरूप वाजपेयी आसमान में उडऩे की मनाही नहीं है किसी को, शर्त इतनी है कि जमीन को नजरअंदाज ना करो । एक शायर की ये पंक्तियां मध्यप्रदेश के दमोह उपचुनाव में भाजपा की अप्रत्याशित हार के बाद प्रासंगिक हो रही हैं। वैसे विधानसभा की किसी भी एक सीट पर हार-जीत होना अमूनन सामान्य घटना मानी जाती है। लेकिन दमोह उपचुनाव में भाजपा की करारी शिकस्त को सामान्य घटना नहीं माना जा सकता। एक तरफ सर्वसुविधा संपन्न चतुरंगिणी सेना, दूसरी तरफ हताश-निराश व बेमन से मैदान में उतरी सेना। एक तरफ सत्ताबल, धनबल, प्रशासन का बल और दूसरी तरफ सिर्फ चुनाव लडऩे की औपचारिकता। इसके बाद भी जो चुनाव नतीजा सामने आया, उससे भाजपा खेमे में खलबली मच गई। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मुख्यमंत्री उमाभारती, प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा सहित प्रदेश के 20 से ज्यादा कैबिनेट मंत्री, 4 केंद्रीय मंत्री, भाजपा संगठन ने पूरा दमखम लगाया। सीएम शिवराज का एक पैर भोपाल में तो दूसरा पैर दमोह में रहा, प्रदेश के अधिकांश कैबिनेट मंत्री, वीडी शर्मा अपनी फौज के साथ 15 दिन डेरा डाले रहे। फिर भी करारी शिकस्त! कांग्रेस प्रत्याशी अजय टंडन ने भाजपा प्रत्याशी राहुल लोधी को 17 हजार से ज्यादा वोटों से हरा दिया। अब भाजपा झेंप मिटाने के लिए चाहे कुछ भी तर्क दे, बहाने बनाए, लेकिन सवाल सुलगने लगे हैं। आने वाले समय में ये सुलगते सवाल भाजपा के लिए नासूर बनेंगे अगर सही जवाब नहीं तलाशे गए और उन पर ईमानदारी से काम नहीं किया तो…! क्या दमोह की करारी शिकस्त के बाद भाजपा कुछ सबक लेगी? क्या भाजपा जनभावनाओं से खिलवाड़ कर सत्ताप्राप्ति व चुनाव में फतह की सनक व नशा दूर करेगी? क्या भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं में सत्ता का दंभ सार्वजनिक नहीं होने लगा? सत्ता के दंभ का इस्तेमाल केवल निजी स्वार्थों को पूरा करने के लिए हो रहा है, क्या इसे जनता नहीं समझ रही? क्या मध्यप्रदेश में सीएम शिवराज की लोकप्रियता का सूर्यास्त हो चुका है? क्या सीएम शिवराज के खिलाफ पार्टी में कई लॉबी काम कर रही हैं? क्या दमोह की हार शिवराज की कुर्सी छिनने की वजह बनेगी? क्या सत्ता व संगठन में तालमेल सिर्फ दिखावे के लिए है? क्या सत्ता में सिंधिया गुट की ज्यादा दखलदांजी से पार्टी में असंतोष पनप रहा है? क्या प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा जिला इकाइयों को सक्रिय तरीके से संगठित करने में नाकाम साबित हो रहे हैं? वीडी शर्मा को काम करने का फ्रीहैंड नहीं है? क्या दमोह की हार निकट भविष्य में होने वाले निकाय चुनाव में असर दिखाएगी? कोरोना की दूसरी लहर के दौरान लाशों का अंबार लगने से जनता में शिवराज सरकार के खिलाफ आक्रोश नहीं है? क्या दमोह चुनाव की कीमत पर शिवराज सरकार ने प्रदेश को मौत के मुंह में धकेला? सिर्फ अप्रैल माह में प्रदेश के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से सौ से ज्यादा लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन है? कोरोना से हो रही मौत के आंकड़ों को छिपाने से जनता के बीच शिवराज सरकार की छवि धूमिल नहीं हो रही है? अस्पतालों से लेकर श्मशान घाटों तक जिंदा इंसानों व मृतकों की दुर्दशा के लिए किसे जिम्मेदार माना जाए? कोरोना कफ्र्यू के दौरान जरूरी काम से घर से निकले लोगों पर अफसरों ने जमकर गुंडागर्दी की, क्या इन घटनाओं से राज्य सरकार व भाजपा के प्रति लोगों में आक्रोश नहीं बढ़ा? दमोह में शिवराज सरकार और संगठन ने पूरा दम लगाया। यहां तक कि दमोह से लगे आठ-दस जिलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं को बुला लिया गया। उन्हें बूथ व सेक्टर तक जिम्मेदारी दी गई। धन तो पानी की तरह बहाया गया। सरकार व संगठन लगभग अपनी जीत के प्रति पूरा आश्वस्त था। लेकिन सत्ता के नशे में चूर भाजपा नेताओं को यह सुध नहीं रही कि जनता के बीच असल में चल क्या रहा है? वे यह सब देखकर भी आंखें बंद किए रहे कि कोरोनाकाल में इलाज के लिए लोग अस्पतालों में तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे हैं। श्मशान घाटों में शवों का अंबार लगा है। घर-अस्पतालों से निकल रहीं चीत्कारों की आग पर चुनावी जुमलों ने जैसे घी डाल दिया। पूरे प्रदेश में हाहाकार है और दमोह में कोरोना से पीडि़त व मृतकों के आंकड़ों को कम दिखाया गया, जबकि दमोह की हकीकत मध्यप्रदेश के अन्य जिलों से जुदा नहीं थी। मुख्यमंत्री समेत भाजपा नेताओं के काफिले के सामने ही कोरोना में रैली-सभाओं को छूट दिए जाने पर पोस्टर दिखा दिए गए। बावजूद पार्टी इससे निश्चिंत बनी रहीं। दमोह की जनता सब देख रही थी। वह देख रही थी कि पूरे देश के साथ ही मध्यप्रदेश महामारी से जूझ रहा है। बीमारी से मरने वालों की लाशों के अंबार लग रहे हैं। अस्पतालों में ऑक्सीजन से लेकर दवाओं तक के लिए चीख-पुकार मची है। जनता सब समझ रही थी कि जब वो महामारी से कराह रही है, उसे सरकार की मदद और साथ की जरूरत है, जो नहीं मिली। उसी वक्त मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री समेत दर्जन भर से ज्यादा मंत्री दमोह में रैलियां करवाते हुए अपनी और अपनी पार्टी, अपने प्रत्याशी की ब्रांडिंग करते रहे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा पूरे समय दमोह में डेरा डाले नेताओं, कार्यकर्ताओं की बैठकें, सभाएं ले रहे थे। जनता सब देख रही थी कि और बखूभी समझ रही थी कि सरकार को जनता से ज्यादा सत्ता और चुनाव की पड़ी है। पूरे प्रदेश में लॉकडाउन, लेकिन दमोह में सब खुल्लमखुल्ला, चुनावी रैलियां और सभाएं बेहिसाब। प्रचार खत्म होते ही अगले दिन दमोह में कोरोना कफ्र्यू लगा दिया गया। दमोह की जनता सब देख रही थी और इंतजार कर रही थी मतदान का और भाजपा को सबक सिखाने का। और भाजपा को ऐसा सबक सिखाया, जिसका दर्द रह-रहकर तड़पाएगा, सताएगा। क्योंकि … एहसासों की नमी बेहद जरूरी है हर रिश्ते में, रेत भी सूखी हो तो हाथों से फिसल जाती है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार और विशेषज्ञ सोशल मीडिया एंड शेयर मार्केट हैं)

MP : अब सभी नगरीय क्षेत्रों में शनिवार-रविवार लॉकडाउन

मध्यप्रदेश. मध्यप्रदेश में अब सभी शहरों (नगरीय क्षेत्रों) में शनिवार-रविवार दो दिन का लॉकडाउन रहेगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को इसकी घोषणा की। चौहान ने कहा कि यह लॉकडाउन शुक्रवार शाम 6 बजे से सोमवार सुबह 6 बजे तक यानी कुल 60 घंटे का होगा। सरकार का यह फैसला मध्यप्रदेश के सभी बड़े-छोटे शहरों में लागू होगा। भोपाल के कोलार क्षेत्र में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए नौ दिन के लिए बड़े कंटेनमेंट जोन का ऐलान कर दिया है। 3 लाख की आबादी वाला कोलार प्रदेश का सबसे बड़ा कंटेनमेंट जोन क्षेत्र होगा। रतलाम जिले में नौ दिन का लॉकडाउन रहेगा। यहां 9 अप्रैल शुक्रवार की शाम 6 से 19 अप्रैल की सुबह 6 बजे तक सबकुछ बंद किया जा रहा है। खरगोन, कटनी और बैतूल में सात दिन तक 9 अप्रैल की शाम 6 बजे से 17 अप्रैल की सुबह 6 बजे तक सब लॉक रहेगा। इससे पहले छिंदवाड़ा में आज 8 अप्रैल गुरुवार रात 8 बजे से लगातार सात दिन के लिए लॉकडाउन लगाया गया है। एक दिन पहले को ही मध्यप्रदेश के सभी शहरों में नाइट कर्फ्यू की घोषणा की गई थी। लेकिन बुधवार को 24 घंटे में रिकॉर्ड 4324 कोरोना मरीज आने के बाद सरकार ने शनिवार-रविवार लॉकडाउन का ऐलान किया। इसकी घोषणा करते हुए सीएम ने कहा कि उनकी मंशा लॉकडाउन की नहीं रही है। मध्य प्रदेश के सभी छोटे और बड़े शहरों में अब शनिवार को भी लॉकडाउन रहेगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को यह ऐलान कर दिया। शुक्रवार शाम 6 से सोमवार के सुबह 6 बजे तक लगातार लॉकडाउन 60 घंटे का रहेगा। CM ने कहा कि मेरी मंशा कभी भी लॉकडाउन की नहीं रही है। बता दें कि एक दिन पहले ही प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में नाइट कर्फ्यू लगाया गया था। कोलार में 9 दिन के लिए बड़ा कंटेनमेंट जोन:तीन लाख की आबादी के लिए 9 अप्रैल शाम 6 बजे से 19 अप्रैल की सुबह 6 बजे तक लॉक; प्राइवेट जॉब वाले भी नहीं आ-जा सकेंगे प्रदेश में 7 अप्रैल तक एक्टिव केस की संख्या 27 हजार से ज्यादा हो चुकी थी। जबकि कोरोना की पहली लहर में एक्टिव केस का आंकड़ा 21 हजार से आगे नहीं बढ़ पाया था। राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश के सभी शहरों में संडे लॉकडाउन का ऐलान कर दिया है। सभी सरकारी दफ्तर अगले 3 महीने तक सप्ताह में केवल 5 दिन ही खुलेंगे। इनकी टाइमिंग सुबह 10 से शाम 6 बजे तक रहेगी। शनिवार और रविवार दफ्तर पूरी तरह बंद रहेंगे। प्रदेश के सभी शहरी क्षेत्रों में आज गुरुवार से अगले आदेश तक रोजाना रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू लागू रहेगा। छिंदवाड़ा जिले में रात 8 बजे से अगले 7 दिन तक टोटल लॉकडाउन रहेगा। CM शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार शाम को आपात बैठक में चर्चा के बाद यह फैसला लिया। बैठक में यह भी तय किया गया कि क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की सहमति लेकर कलेक्टर शहरी क्षेत्र में रविवार के अलावा शनिवार को भी लॉकडाउन का आदेश जारी कर सकते हैं। प्रदेश के अधिक संक्रमित शहरी क्षेत्रों में कंटेनमेंट ज़ोन बनाए जाएंगे कंटेनमेंट एरिया में 7 से10 दिन तक का लाॅकडाउन लगाया जा सकेगा। 12 फीसदी पर संक्रमण दर, छोटे शहरों में भी 100 से अधिक केस पिछले 24 घंटे में रिकाॅर्ड 4,043 पॉजिटिव केस मिले हैं। हालात बिगड़ने का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पॉजिटिविटी रेट 12% पहुंच गया है। मौतों का आंकड़ा 4086 हो गया है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के बाद अब बड़वानी, उज्जैन और उमरिया में 100 से अधिक केस मिले हैं।

मुरैना में कारोबारी ने पत्नी, बेटे और बेटी की गला काटकर हत्या की, खुद भी फांसी पर लटका

मुरैना। पलिया कॉलोनी में दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां किराना कारोबारी सत्यदेव शर्मा ने पत्नी, बेटे और बेटी की गला काटकर हत्या कर दी। बाद में उसने खुद भी फांसी लगा ली। घटना का पता तब चला, जब सुबह 9 बजे दूध वाला घर पहुंचा और दरवाजा खटखटाया। जवाब न मिलने पर उसने पड़ोसियों को सूचना दी और फिर पूरा मामला सामने आया। एक पड़ोसी नीरज ने छत से सत्यदेव के घर में झांका तो एक लटके हुए आदमी के पैर दिखाई दिए। नीरज ने शोर मचाया तो भीड़ लग गई। मोहल्लेवाले दरवाजा तोड़कर घर में घुसे तो सत्यदेव (45), उनकी पत्नी ऊषा (42), बेटे अश्विनी (12) और बेटी मोहिनी (10) के शव मिले। मुरैना आत्महत्या कांड:पत्नी के मायके से आने से पहले ही सत्यदेव नई रस्सी व चाकू लाया था, गृहक्लेश का कारण आ रहा सामने कुछ दिन पहले 65 लाख का मकान खरीदा सत्यदेव का परिवार समृद्ध है। कुछ दिन पहले ही सत्यदेव ने मुरैना मेें 65 लाख का मकान खरीदा है। एक अन्य मकान और 8 बीघा जमीन भी है। सत्यदेव के 3 भाई हैं, सभी के अपने मकान हैं। माता-पिता एक भाई के साथ गांव में रहते हैं। वे जब घटना स्थल पर पहुंचे तो बेसुध हो गए। रात 11 बजे दिखाई दी थीं कारोबारी की पत्नी कारोबारी की पड़ोसी 82 साल की कलावती ने बताया रात 11 बजे सत्यदेव की पत्नी ऊषा दिखाई दी थीं। घर से किसी तरह की लड़ाई की आवाजें भी नहीं सुनाई दीं। पुलिस और फॉरेंसिक विभाग की टीम मौके पर पहुंची। घटना की वजह अभी पता नहीं चल पाई है। माता-पिता और मोहल्लेवालों से पूछताछ की जाएगी। फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉक्टर अर्पिता सक्सेना ने बताया कि तेज धारवाले हथियार से 3 लोगों का गला काटा गया है। इसके बाद सत्यदेव ने फांसी लगाई है।

MP में बेशर्म सिस्टम : सरकारी अस्पताल के कोविड वार्ड में ऑक्सीजन सप्लाई रुकी, 2 मरीजों की मौत

भोपाल। मध्यप्रदेश में राजधानी भोपाल के जिला अस्पताल में बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां जेपी अस्पताल के कोरोना वार्ड में बुधवार देर रात दो मरीजों की मौत हो गई। मृतकों के परिजनों का आरोप है कि रात में ऑक्सीजन सप्लाई रुक गई थी, जिसके कारण मरीजों की जान चली गई। जान गंवाने वाली 50 साल की रामरती अहिरवार ICU में भर्ती थीं, जबकि सीबी मेश्राम कोरोना संदिग्ध वार्ड में भर्ती थे। आरोपों पर जेपी के सिविल सर्जन डॉ. राजेश श्रीवास्तव का कहना है कि ऑक्सीजन सप्लाई नहीं रुकी थी। दोनों मरीजों की हालत गंभीर थी। अब तक इस मामले में किसी तरह की जांच के आदेश नहीं दिए गए हैं। 11 दिसंबर 2020 को हमीदिया के कोरोना वार्ड की दो घंटे बिजली गुल होने से ऑक्सीजन सप्लाई बंद हो गई थी। तब ऑक्सीजन सपोर्ट पर चल रहे तीन मरीजों की मौत हो गई थी। हालांकि, जांच रिपोर्ट में क्लीनचिट दे दी गई थी। रामरती के बेटे जीवन ने भास्कर को बताया, ‘मां को 28 मार्च को जेपी में भर्ती कराया था, तब उन्हें तेज बुखार था। 29 को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। बुधवार रात को मां की हालत अच्छी थी। उन्होंने मुझसे बात की, दलिया खाया और सो गई थीं। मैं रात में वार्ड के बाहर ही रुका था। रात ढाई बजे वार्ड में कोई मरीज बुरी तरह चिल्ला रहा था। तब मैं वार्ड में जाना चाहता था, लेकिन गार्ड ने अंदर नहीं जाने दिया। सुबह 7 बजे डॉक्टर ने फोन कर बताया कि मां की हालत बहुत खराब है, आकर देख लो। अंदर मां बेसुध पड़ी थीं। हम मां को दूसरे अस्पताल ले जाना चाहते थे, उन्हें बाहर भी ले आए, लेकिन अस्पताल वालों ने पुलिस बुला ली और हमें मां को नहीं ले जाने दिया। अगले दिन दोपहर में शव सौंपा गया। इसके लिए भी मुझे मिन्नतें करनी पड़ीं।’ एंटीजन रिपोर्ट निगेटिव थी, फिर भी जान चली गई दूसरे मृतक सीबी मेश्राम को दो दिन पहले ही परिजनों ने यहां भर्ती किया था। उनको निमोनिया था। अस्पताल प्रबंधन की मानें तो उनकी कोरोना जांच कराई गई, लेकिन एंटीजन टेस्ट निगेटिव था। ऐसे में RTPCR सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया था। रिपोर्ट नहीं आने की स्थिति में उनको कोरोना सस्पेक्टेड वार्ड में रखकर इलाज किया जा रहा था। जहां गुरुवार तड़के करीब तीन बजे उनकी मौत हो गई।

मध्यप्रदेश में ऐसी है स्वास्थ्य सेवा ….. वाहन नहीं दिया तो पिता ठेले पर ले गया बेटे का शव

गुना। संदेहास्पद स्थिति में मंगलवार को हुई एक युवक की मौत के बाद भी समय पर पीएम न कर शव को घर भेज दिया गया। युवक के पिता ने इस पर आपत्ति ली और वह शव को बाइक से फिर स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचा। इसके बाद बुधवार काे पीएम कराया गया। असली कहानी इसके बाद शुरू होती है…जब शव ले जाने ने अस्पताल प्रबंधन ने कोई वाहन उपलब्ध नहीं कराया तो पिता ने एक हाथ ठेला किराए पर लिया और शव ले जाने लगा। इस शर्मसार घटना को देख नागरिक मंच कुंभराज और लोगों ने आपत्ति लेकर हंगामा किया, तब पुलिस ने एक ऑटो से शव के घर तक भिजवाया। सवाल: समय पर पीएम क्यों नहीं हुआ कुंभराज गीता नगर निवासी नितेश राव की संदेहास्पद स्थिति में मौत हो गई थी। मृतक के पिता हेमराज राव ने बताया कि उनके बेटे की अचानक तबीयत बिगड़ी। मंगलवार दोपहर 3.30 बजे स्वास्थ्य केंद्र कुंभराज पहुंचे तो डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद कहा कि शव को ले जाएं। पिता को लगा कि पीएम होना चाहिए। पुलिस ने पंचनामा बनाया। पिता का कहना है कि वह शव को फिर से अस्पताल ले गया लेकिन समय रहते पीएम नहीं हो सका। इसलिए शव को पीएम रूम में रखवा दिया। सुबह हुआ हंगामा, तब आई पुलिस बुधवार सुबह 9 बजे युवक का पीएम हुआ, शव को परिजन ले जाने लगे तो कोई गाड़ी तक नहीं मिली। पिता का कहना है कि पैसे नहीं थे, इससे ठेला किराया से लेकर शव ले जा रहे थे। मृतक ढोल बजाकर अपनी जीविका चलता था, लेकिन लॉकडाउन के बाद से ही आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे। ठेले से जब शव ले जाने लगे तो नागरिक मंच कुंभराज ने आपत्ति ली, और कहा कि विकास के नाम पर करोड़ों खर्च हो रहे हैं, एक शव वाहन तक नहीं है। इसके बाद हंगामा हुआ तो पुलिस पहुंची और ऑटो से शव को भेजा।  

भोपाल में कोविड वॉर्ड के बाथरूम में 24 घंटे तक पड़ा रहा होमगार्ड जवान का शव

भोपाल. भोपाल के ज़िला अस्पताल जेपी हॉस्पिटल में घोर लापरवाही का मामला सामने आया है. यहां कोविड वॉर्ड (Covid 19 ) में भर्ती कराए गए एक होमगार्ड जवान का शव (Deadbody) 24 घंटे तक बाथरूम में पड़ा रहा और अस्पताल स्टाफ ने देखा तक नहीं. परिवार के लोग अपने बेटे को तलाशते हुए पुलिस तक पहुंच गए. मामले की जांच के लिए तीन डॉक्टरों की कमेटी बना दी गयी है. साथ ही स्टाफ नर्स सहित तीन लोगों के खिलाफ एक्शन लिया गया है. आबकारी विभाग में पदस्थ होमगार्ड जवान पुष्पराज गौतम को भोपाल के जे पी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. कोविड वैक्सीन लगने के दो दिन बाद उनकी तबियत बिगड़ गयी थी. पेट फूलने और दर्द होने पर परिवार ने उन्हें शनिवार को यहां भर्ती कराया था. लेकिन रविवार रात 8 बजे के बाद परिवार से उनका संपर्क नहीं हो पाया. वो अचानक लापता हो गए. दिनभर खोजने के बाद पिता ने सोमवार शाम हबीबगंज थाने में पुष्पराज की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. और अब 24 घंटे बाद मंगलवार शाम बाथरूम में उनकी लाश मिली. गुमशुदगी की रिपोर्ट के बाद तलाश रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने तलाश शुरू की तो मंगलवार शाम पुष्पराज की लाश वार्ड के बाथरूम में पड़ी मिली. इससे पूरे अस्पताल में सनसनी फैल गई. जवान की मौत कैसे हुई, फ‍िलहाल इसका खुलासा नहीं हो सका है. पुष्पराज के परिवार वाले लगातार दावा कर रहे थे कि उनका बेटा अस्पताल से बाहर नहीं गया है. इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन ने उन्हें अस्पताल में ढूंढ़ने की कोशिश नहीं की. पुलिस का बयान पुलिस के मुताबिक पुष्पराज सिंह गौतम होमगार्ड में जवान थे. उन्‍हें कुछ दिन पहले ही कोरोना वैक्सीन का दूसरा डोज लगाया गया था. इसके दो दिन बाद उन्‍होंने स्वास्थ्य खराब होने की शिकायत की थी. शनिवार को उन्हें जेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. भर्ती के दौरान उनकी कोरोना की रैपिड एंटिजन जांच रिपोर्ट निगेटिव आई थी. उसके बाद उन्हें कोरोना संदिग्ध वार्ड में भर्ती कर आरटी-पीसीआर तकनीक से जांच के लिए सैंपल लिए गए थे. लेकिन इसकी रिपोर्ट आने के पहले ही रविवार रात आठ बजे के करीब वह गायब हो गए. परिवार ने खोजबीन करने के बाद सोमवार शाम को हबीबगंज थाने में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. पुलिस के मुताबिक पुष्पराज कमला नगर में रहते थे. रविवार रात में करीब साढ़े आठ बजे के बाद से वह जेपी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड से अचानक गायब हो गए थे. उनका मोबाइल भी बिस्तर पर ही था. स्टाफ पर कार्रवाई इस मामले में अस्पताल प्रशासन ने एक्शन लिया है. लापरवाही करने पर सिस्टर इंचार्ज शामली वर्गीस, स्टाफ नर्स शीला श्रीवास्तव और मेट्रन सरोज मीना श्रीवास पर कार्रवाई की गयी है. इस मामले की जांच के लिए तीन डॉक्टरों की कमेटी बना दी गयी है. इसमें डॉक्टर वी के दुबे, एम एस खान और डॉ यूडी सक्सेना को शामिल किया गया है.

MP में नाइट कर्फ्यू लगभग तय : राज्य में 24 घंटे में 467 केस आए

भोपाल. मध्यप्रदेश में कोरोना के केस लगातार बढ़ते जा रहे हैं। बीते 24 घंटे में प्रदेश में कोरोना के 467 नए केस आए हैं। इंदौर में 173 और भोपाल में 104 नए मरीज मिलने से सरकार की चिंताएं बढ़ गई हैं। इसके बाद से नाइट कर्फ्यू लगाने की अटकलें तेज हो गई हैं। एक महीने पहले एक फरवरी को 151 नए केस आए थे। बीते चार दिनों से 400 से ज्यादा केस आ रहे। इसे देखते हुए जल्द ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह कम से कम इंदौर और भोपाल में नाइट कर्फ्यू लगाने पर निर्णय ले सकते हैं। क्योंकि सीएम ने पहले ही आगाह कर दिया था कि अगर भोपाल-इंदौर में पॉजिटिव की संख्या बढ़ती है तो नाइट कर्फ्यू लगा सकते हैं। हर दिन आंकड़े अब तेजी से बढ़ रहे हैं। 52 जिलों से 39 में नए केस आए प्रदेश के 52 जिलों में से 39 जिलों में शनिवार को जारी रिपोर्ट में कोरोना संक्रमित मिले हैं। जबलपुर में 28, छिंदवाड़ा में 14, बुरहानपुर में 15, बैतूल में 11, सागर में 11, उज्जैन में 19 और जबलपुर में 11 पॉजिटिव मिले। इनके अलावा अलीराजपुर, अनूपपुर, बड़वानी, दमोह, देवास, डिंडोरी, गुना, ग्वालियर, हरदा, होशंगाबाद, जबलपुर, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नीमच, पन्ना, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सतना, सीहोर, सिवनी, शहडोल, शाजापुर, सीधी, सिंगरौनी, उमरिया और विदिशा में नए केस मिले। कुल 3,527 एक्टिव केस मध्यप्रदेश में अब तक कुल 2 लाख 64 हजार 214 कोरोना संक्रमित केस हो चुके हैं। इनमें से 2 लाख 56 हजार 819 मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि 3,868 संक्रमितों की कोरोना के कारण मौत की पुष्टि हुई है। प्रदेश में अब कोरोना एक्टिव केस की संख्या 3,527 तक पहुंच गई है। अब तक कुल 58 लाख 63 हजार 341 सैंपल लिए जा चुके हैं। करीब 10 लाख लोगों को टीका लगाया जा चुका है।

IAS अफसर से ब्लैकमेलिंग, महिला के खिलाफ ठाणे पहुंचे, महिला ने किया पत्नी होने दावा

भोपाल। शहर के लसूड़िया थाने में एक IAS अफसर संजीव वर्मा ने एक महिला के खिलाफ केस दर्ज कराया है। शिकायत में कहा है कि महिला ब्लैकमेल कर रही है। उसने दस्तावेज में पति के रूप में मेरा नाम दर्ज कराया है। पासपोर्ट और मतदाता परिचय पत्र भी मेरा नाम लिखवा लिया है। उधर, महिला ने नंवबर 2016 अफसर पर शादी के बाद धोखा देने का आरोप लगाया था। वह थाने में इसकी शिकायत भी कर चुकी है। संतोष वर्मा वर्तमान में नगर प्रशासन एवं विकास विभाग भोपाल में अपर आयुक्त के पद पर पदस्थ हैं। लसूड़िया टीआई इंद्रमणि पटेल के अनुसार संतोष वर्मा पिता रुमाल सिंह वर्मा की शिकायत पर आरोपी हर्षिता अग्रवाल निवासी ओमेक्स सिटी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। आरोपी हर्षिता अग्रवाल एलआईसी एजेंट है। IAS अफसर संतोष वर्मा ने पुलिस को बताया कि महिला उनसे एलआईसी एजेंट के रूप में ही मिली थी। उनके एलआईसी के नाम पर दस्तावेज ले लिए थे। महिला ने बाद में धोखाधड़ी करते हुए दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और वोटर आईडी में मेरा नाम अपने पति के रूप में दर्ज करवा दिया। पुुलिस ने धोखाधड़ी, कूटरचना सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। महिला ने शिकायत में कहा था- साथ रखकर ज्यादती की नवंबर में युवती ने इसी थाने में शिकायत की थी। शिकायत में उसने कहा था कि उज्जैन के अपर कलेक्टर संतोष वर्मा ने शादी का झांसा देकर उन्हें साथ रखा और ज्यादती की। उसने संतोष के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की थी। इसी दौरान दोस्ती हुई, जो प्रेम में बदल गई। दोनों ने विवाह कर लिया था। जब वह हरदा में पदस्थ थे तब वे पत्नी की तरह सरकारी क्वार्टर में साथ रही थी। उसके बाद उनका उज्जैन ट्रांसफर हो गया तो युवती को टाउनशिप में घर दिलवाया था। वह घर संतोष वर्मा की मां के नाम पर है। अपर कलेक्टर का पहले ही विवाह हो चुका था, लेकिन उन्होंने छुपाया। बाद में शादी से इनकार कर दिया। उन्होंने इसकी शिकायत कई जगह की थी।

MP : मंत्री बंगलों की सजावट पर 10 महीने में खर्च हुई ‌4.58 करोड़ की राशि

भोपाल। मंत्रियों के बंगले सजाने में 10 महीने में 4.58 करोड़ से ज्यादा खर्च किए गए हैं। सबसे ज्यादा एक करोड़ रुपए सीएम हाउस पर खर्च हुए हैं। इसके बाद सबसे अधिक 56 लाख रुपए पीडब्ल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव के बंगले की साज-सज्जा में लगे हैं। यह जानकारी विस में पांचीलाल मेड़ा के एक प्रश्न के उत्तर में सामने आई है। पीडब्ल्यूडी मंत्री भार्गव ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित मंत्रिमंडल के सदस्यों के बंगलों में 1 अप्रैल 2020 से 31 जनवरी 2021 तक साज-सज्जा में किए गए खर्च का ब्यौरा दिया। सीएम हाउस में बिजली के काम में 81 लाख से ज्यादा खर्च किए गए। वहां 18.52 लाख का सिविल वर्क हुआ है। मुख्यमंत्री के 74 बंगला स्थित एक अन्य बंगले बी-8 में 13.41 लाख का काम हुआ है। केवल सिविल वर्क देखा जाए तो मुख्यमंत्री निवास से ज्यादा काम गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह, स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी, सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया और परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के बंगले पर हुआ है। इस दौरान सबसे कम मात्र 1495 रुपए का व्यय खेल एवं युवा कल्याण मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया व पूर्व मंत्री इमरती देवी के बंगलों पर हुआ।

MP : कोरोना के इलाज पर 724 करोड़ रुपए खर्च:173 करोड़ प्राइवेट अस्पतालों को दिए

भोपाल। मध्यप्रदेश में कोरोना के इलाज पर 724 करोड़ रुपए खर्च हुए, जिसमें 173 करोड़ रुपए की राशि 8 प्राइवेट अस्पतालों में बंटी। इसमें खास यह है कि निजी अस्पतालों में बंटी राशि का 70 फीसदी से ज्यादा हिस्सा (125 करोड़ रुपए) भोपाल और इंदौर के दो अस्पतालों को मिला। इसमें भोपाल के चिरायु चैरिटेबल फाउंडेशन को 70 करोड़ रुपए और इंदौर के सर अरविन्दो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस को 55 करोड़ रुपए दिए। बकाया बची 53 करोड़ रुपए की राशि इंडेक्स, अमलतास, RD गार्डी, LN मेडिकल काॅलेज, पीपुल्स मेडिकल काॅलेज में बंटी। यह जानकारी बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी ने दी है। प्रदेश के आठ निजी अस्पतालों को 173 करोड़ रुपए की राशि 28964 कोरोना मरीजों के इलाज के एवज में दी गई। इलाज के दौरान इन अस्पतालों में 956 लोगों की मौत हो गई। काढ़े की पैंकिंग में ही लग गए 8 करोड़ रुपए सरकार द्वारा दी गई खर्च की जानकारी से यह भी साफ हो गया कि प्रत्येक मरीज के इलाज पर करीब 61 हजार रुपए का खर्चा आया। इधर, 30 करोड़ रुपए के त्रिकटू काढ़े की पैकिंग पर 8 करोड़ रुपए खर्च होने की जानकारी सामने आई। कोरोना इलाज में खर्च हुई राशि के बारे में कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी, जीतू पटवारी, मनोज चावला और हर्ष गहलोत ने सवाल पूछे थे। जनता इलाज के लिए भटकती रही, सरकार ने चहेतों को रेवड़िया बांटी कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार कोरोना जैसी आपदा में भी अवसर तलाशने में पीछे नहीं रही। व्यापमं कांड के दो कर्ताधर्ताओं चिरायु और अरविंदो को 70% से ज्यादा राशि बांट दी गई। जब जनता इलाज के लिए भटक रही थी तब सरकार चहेतों को रेवड़ियां बांटने में लगी थी। पैसा मरीजों के इलाज पर खर्च हुआ जरूरत हुई तो आगे भी जारी रखेंगे संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस के पास कोई मुद्दे है नहीं, इसलिए बेवजह आरोप लगाती रहती है। कोरोना के मरीजों को इलाज की जरूरत थी तब क्या सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती। हमने मरीजों के इलाज में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। मरीजों के इलाज पर खर्च हुआ है। आगे भी जारी रहेगा। कांग्रेस की सरकार तो जैकलीन के ठुमकों और फोटोशूट में व्यस्त थी चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि प्रदेश में जब कोरोना पैर पसार रहा था, तब तत्कालीन कांग्रेस सरकार तो जैकलीन के ठुमकों में व्यस्त थी। कमलनाथ, सलमान खान और जैकलीन के साथ फोटो सूट में व्यस्त थे। भाजपा की सरकार बनते ही हमने कोरोना के मरीजों के इलाज की व्यवस्था की।

उमा भारती बोलीं- राजस्व गया भाड़ में, शराबी भले ही भूखे मर जाएं लेकिन MP में शराबबंदी हो

ग्वालियर. मध्‍य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती (Uma Bharti) ने फिर दोहराया है कि वो शराबबंदी नशामुक्ति अभियान चलाएंगी. यह मेरा सपना है जो जल्द पूरा भी होगा. वो यहां तक कह गयीं कि शराबी भले ही भूखा मर जाए लेकिन शराब बंद होना चाहिए. ग्वालियर आयी उमा भारती बोलीं, ‘मैंने कहा था यह आंदोलन नहीं अभियान है. मैंने कभी नहीं कहा कि 8 मार्च से अभियान शुरू करेंगे. बल्कि मैंने कहा था कि 8 मार्च को छोटी बैठक होगी जिसमें आगे की रणनीति बनाई जाएगी.’ उन्होंने कहा कि शराबबंदी में स्वचेतना का जागरण होना चाहिए. मैं शिवराज और वीडी शर्मा से सहमत हूं और वह मुझसे सहमत हैं. अवैध शराब बंद हो प्रदेश में शराबबंदी ही नहीं नशाबंदी होनी चाहिए जो जागरण अभियान से भी अच्छा है. उमा ने सलाह देते हुए कहा कि सरकार को यह करना है नियम विरुद्ध दुकानें न खोली जाएं. आबकारी नियमों का पालन किया जाए, क्योंकि दो नम्बर की जो शराब बनती है वही अधिकतर जहरीली होती है. वह पूरी तरह से बंद हो. शराब से सख्त नफरत- भले ही शराबी भूखा मर जाए उमा भारती यहां तक कह गयीं कि मैंने शिवराजजी से कहा है जैसे ही राजस्व का रास्ता निकल आये आप शराबबंदी और नशाबंदी दोनों की तरफ आइए.मुझे शराब से इतनी नफरत है कि मेरा बस चले तो लोग भूखों मरते हैं तो मर जाएं राजस्व गया भाड़ में बस शराब बंद करो. उमा भारती ने दलील दी कि कोरोना में साबित हो गया शराब नहीं पीने से एक भी आदमी नहीं मरा.जैसे ही दुकानें खुलीं लोग मरना शुरू हो गए. इसका मतलब है कि शराब मृत्यु की कारक है शराब बंद करना मृत्यु का कारण नहीं है. शराब बंदी मेरी आस्था का विषय ये सपना जल्द पूरा होगा उमा भारती ने कहा मैं यह अभियान जरूर चलाऊंगी. यह मेरी आस्था है कि शराबबंदी हो. राममंदिर निर्माण में भी मेरी आस्था थी, हालांकि उसमें 30 साल लग गए थे. लेकिम शराब बंदी में सभी का समर्थन है और कम समय लगेगा. उमा का मानना है शराबखोरी से महिलाएं ज्यादा पीड़ित होती हैं.शराब पीकर मारपीट-अत्याचार और ज़ुल्म उन्हीं पर ढाए जाते हैं.दूसरी विचारणीय बात ये है कि गरीब वर्ग के लोग ही दो नंबर यानि अवैध शराब पीते हैं.अवैध शराब से राजस्व भी नहीं मिलता. राजस्व सिर्फ एक नंबर की शराब से मिलता है. उमा भारती ने कहा-वो शराबबंदी के बारे में इसलिए बोल पा रही हैं क्योंकि सीएम शिवराज और VD शर्मा संस्कारशील और संस्कृतिवान व्यक्ति हैं.दोनों ही बहुत अनुशासित व्यक्ति हैं.

इंदौर में पार्टी करके लौट रहे 6 दोस्तों की मौत, तेज रफ्तार कार खड़े टैंकर में घुसी

इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर में सड़क हादसे में छह दोस्तों की मौत हो गई। वे पार्टी करके लौट रहे थे। उनकी कार खड़े टैंकर में पीछे से भिड़ गई। टक्कर इतनी तेज थी कि डंपर की स्टेपनी टूट गई और कार का अगला हिस्सा पिछली सीट से जा मिला। हादसा सोमवार रात करीब एक बजे निरंजनपुर चौराहे के पास हुआ। दो दोस्त सीट से उछलकर बोनट पर आ गिरे। उनमें से किसी का हाथ तो किसी का सिर धड़ से अलग हो चुका था। वे देवास की तरफ से आ रहे थे। हालांकि, अभी यह नहीं पता चला है कि वे पार्टी करने कहां गए थे और हादसा किन परिस्थितियों में हुआ। जान गंवाने वाले सभी दोस्तों की उम्र 19 से 30 साल थी। यह पता नहीं चला कि ये पार्टी करने कहां गए थे। हादसे की वजह भी अभी पता नहीं चल सकी है। जान गंवाने वाले सभी दोस्तों की उम्र 19 से 30 साल थी। यह पता नहीं चला कि ये पार्टी करने कहां गए थे। हादसे की वजह भी अभी पता नहीं चल सकी है। 4 की मौके पर ही मौत, 2 दोस्तों ने अस्पताल में दम तोड़ा लसूड़िया पुलिस के एसआई नरसिंह पाल ने बताया कि कार बुरी तरह डैमेज हो चुकी थी। इसे गैस कटर से काटकर शवों को बाहर निकालना पड़ा। इसमें कुल छह लोग ही सवार थे। चार की मौके पर ही मौत हो गई। दो दोस्तों की सांसें चल रही थीं, लेकिन एमवाय अस्पताल में उन्होंने भी दम तोड़ दिया। जान गंवाने वाले सभी दोस्त इंदौर के ऋषि (19), 129 भाग्यश्री कॉलोनी, गोलू उर्फ सूरज (25), मालवीय नगर छोटू उर्फ चंद्रभान रघुवंशी (23), मालवीय नगर सोनू जाट (23), आदर्श मेघदूत नगर सुमित (30), भाग्यश्री कॉलोनी देव (28), 384/3 मालवीय नगर

MP : सीधी बस हादसे 47 मौत … हादसे के बाद मंत्री भोज पर सवाल

भोपाल। सीधी बस हादसे के बाद मौके पर जाने के बजाय परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के सहकारिता मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया के भोज में शामिल होने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री केके मिश्रा ने राजपूत की एक फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की है, जिसमें वह भदौरिया के निवास में भोजन करते दिखाई दे रहे हैं। जवाब में गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि मैं सुबह से मुख्यमंत्री के साथ हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन की मॉनिटरिंग कर रहा था। मंत्री भदौरिया ने बसंत पंचमी पर भोज रखा था, लेकिन यह सादा कार्यक्रम था। जहां मेरे अलावा कई मंत्री पहुंचे थे। मैं वहां कुछ देर ही रुक कर दाल-रोटी खाकर वापस आ गया था। कांग्रेेस के आरोप पर उन्होंने कहा, जो लोग हादसे के बहाने राजनीति करते हैं, मैँ उनकी निंदा करता हूं। बस हादसे में 47 लोगों की मौत होने पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शोक संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1 लाख 10 हजार हितग्राहियों के आवासों का लोकापर्ण कार्यक्रम रद्द कर दिया। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को दोपहर 12:30 बजे होने वाली कैबिनेट की बैठक को स्थगित कर दिया था। हालांकि देर शाम औपचारिक बैठक मंत्रालय में हुई। कांग्रेस ने सवाल इसलिए भी उठाए, क्योंकि हादसे का सीधे तौर पर वास्ता परिवहन मंत्री का है। वह मंगलवार को भोपाल में ही मौजूद रहे, लेकिन मुख्यमंत्री के निर्देश पर जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और राज्य मंत्री राम खिलेवान पटेल को घटना स्थल पर भेजा था। हालांकि राजपूत इस हादसे को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल हुए थे। बता दें, सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया का भोज पूर्व निर्धारित था, जिसमें सभी मंत्रियों को बुलाया गया था। इसमें मंत्री मोहन यादव, हरदीप सिंह डंग, ओमप्रकाश सकलेचा, ऊषा ठाकुर के अलावा प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, संगठन महामंत्री सुहास भगत भी भोज में शामिल हुए थे, लेकिन कांग्रेस ने परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को सीधी बस हादसे के लिए नैतिक रूप से जिम्मेदार मानते हुए भोज में शामिल होने पर सवाल खड़े किए हैं।

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