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Reno 14 सीरीज़ जल्द ही चीन में होगी लॉन्च

नई दिल्ली  Oppo ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि उसकी अगली पीढ़ी की Reno 14 सीरीज़ जल्द ही चीन में लॉन्च होने जा रही है. चीनी माइक्रोब्लॉगिंग साइट Weibo पर एक पोस्ट के माध्यम से कंपनी ने सिर्फ आगामी Reno 14 सीरीज़ का नाम टीज़ किया है. जारी किए गए टीज़र में चीन के तीन अलग-अलग शहरों में मई माह में होने वाले प्रचार अभियानों की तारीखें दर्शाई गई हैं, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि Reno 14 सीरीज़ का लॉन्च मई में तय है. हालांकि Oppo ने फिलहाल स्मार्टफोन से जुड़ी अन्य जानकारियाँ गोपनीय रखी हैं. हालांकि कंपनी ने अब तक आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन लीक और अफवाहों के आधार पर डिवाइस की झलक सामने आ चुकी है. प्रसिद्ध टिप्स्टर Digital Chat Station ने Weibo पर दो नई इमेज शेयर की हैं, जिनमें आगामी Oppo Reno 14 का डिज़ाइन देखा जा सकता है. इन लीक रेंडर्स में फोन के बैक और साइड व्यू का खुलासा हुआ है, जिससे इसके नए डिज़ाइन और कैमरा लेआउट की जानकारी मिलती है. Reno 14 का रियर डिज़ाइन एक फ्लैट, स्कल्प्टेड ग्लास पैनल के साथ आता है, जिसमें कैमरा मॉड्यूल के चारों ओर उभरी हुई आकृति नजर आती है. फोन के ऊपरी हिस्से में चमकदार सफेद फिनिश और चिकनी chamfered एज दिखाई देती हैं, जो कुछ हद तक पुराने iPhone 12 की डिज़ाइन लैंग्वेज की याद दिलाती हैं. फोन के फ्रेम के लिए एल्युमिनियम का उपयोग किया गया है, और पावर बटन तथा वॉल्यूम रॉकर दाईं ओर स्थित हैं. वहीं, अफवाहें हैं कि डिवाइस के बाईं ओर एक नया “मैजिक क्यूब” बटन हो सकता है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है. कैमरा सेटअप को R-आकार के लेआउट में एक हल्के आयताकार मॉड्यूल में सजाया गया है. इसमें दो लेंस वर्टिकल फॉर्म में बाईं ओर स्थित हैं, जबकि तीसरा लेंस एक कैप्सूल-आकार की रिंग में है, जिसके साथ ट्रिपल LED फ्लैश भी मौजूद है. पिछली लीक रिपोर्ट्स के अनुसार, Reno 14 में 50 मेगापिक्सल का मुख्य सेंसर (OIS के साथ), 8 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड लेंस और 50 मेगापिक्सल का पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा (3.5x ज़ूम के साथ) हो सकता है. साइड व्यू से यह भी स्पष्ट होता है कि पेरिस्कोप कैमरा मुख्य कैमरा मॉड्यूल के भीतर ही एकीकृत है. दिलचस्प बात यह है कि Reno 14 का डिज़ाइन काफी हद तक Reno 13 Pro से मेल खाता है, जिससे प्रतीत होता है कि Oppo ने लुक में बड़ा बदलाव करने के बजाय उसे और निखारने पर ज़ोर दिया है. हालांकि एक बड़ा बदलाव यह है कि इस बार कर्व्ड डिस्प्ले की जगह 120Hz फ्लैट OLED पैनल देखने को मिल सकता है. इसके अतिरिक्त, Reno 14 Pro के IP68/IP69 वॉटर रेजिस्टेंस रेटिंग के साथ आने की उम्मीद है, जो डस्ट और वॉटर से पूरी सुरक्षा प्रदान करेगा. हालांकि Oppo ने अब तक इन सभी जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन अब तक सामने आए संकेत एक परिष्कृत और दमदार अपग्रेड की ओर इशारा कर रहे हैं.

नया डिस्प्ले साइज के साथ जल्द हो लॉन्चिंग सकती है Apple Watch SE 3

मुंबई Apple ने पहली बार 2020 में अपनी किफायती स्मार्टवॉच Apple Watch SE पेश की थी, जो कुछ फीचर्स में कटौती करते हुए एक अफॉर्डेबल विकल्प के तौर पर आई थी. 2022 में लॉन्च हुई Apple Watch SE 2 भी इसी राह पर चली थी, जिसमें 1.57-इंच और 1.73-इंच डिस्प्ले साइज के विकल्प दिए गए थे. लेकिन अब ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, आगामी Apple Watch SE 3 में डिस्प्ले साइज में बदलाव देखने को मिल सकता है. प्रसिद्ध विश्लेषक Ross Young के अनुसार, Apple ने अपनी अगली SE सीरीज़ की वॉच पर काम शुरू कर दिया है और इसमें 1.6-इंच और 1.8-इंच डिस्प्ले साइज पेश किए जा सकते हैं. यानी वर्तमान मॉडलों की तुलना में मामूली लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे. Apple ने Watch SE को खासतौर पर किफायती सेगमेंट और युवा यूज़र्स को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया था. ऐसे में एक कॉम्पैक्ट बॉडी के साथ बड़ी स्क्रीन और पतले बेज़ल्स वाला नया डिज़ाइन काफी आकर्षक हो सकता है. पिछली बार Watch SE का डिज़ाइन Series 6 पर आधारित था. माना जा रहा है कि इस बार भी Apple इसी डिज़ाइन लैंग्वेज को फॉलो कर सकता है, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि कंपनी इसमें Series 7 के बड़े केस साइज (41mm और 45mm) से भी प्रेरणा ले सकती है. इसके अलावा, कुछ अफवाहें बताती हैं कि Apple एक हार्ड प्लास्टिक बॉडी वाला वेरिएंट भी प्लान कर रहा है, जो कई चमकीले रंगों में आ सकता है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह योजना वास्तविकता की ओर बढ़ी है या नहीं. अगर ऐसा होता है, तो Apple Watch SE 3 एक पतली बॉडी के साथ 1.6-इंच और 1.8-इंच डिस्प्ले पेश कर सकती है, जो पुराने 38mm और 42mm मॉडल्स के साइज के क़रीब हो सकता है. इससे यूज़र्स को कॉम्पैक्ट साइज में ज़्यादा स्क्रीन एरिया मिल सकेगा. यह भी ध्यान देना ज़रूरी है कि रिपोर्ट किए गए डिस्प्ले साइज में मामूली राउंडिंग का अंतर हो सकता है. फिर भी, नए डिज़ाइन और बेहतर स्क्रीन के साथ Watch SE 3 में कई दिलचस्प बदलाव देखने को मिल सकते हैं. Apple Watch Series 11 और Ultra 3 भी जल्द लॉन्च के लिए तैयार 2025, Apple Watch के लिए एक महत्वपूर्ण साल साबित हो सकता है. इस साल कई नई खूबियाँ और हेल्थ-फोकस्ड अपडेट्स आने की उम्मीद है, हालांकि डिज़ाइन में ज़्यादा बदलाव नहीं होंगे. प्रसिद्ध टेक जर्नलिस्ट Mark Gurman के अनुसार, आगामी Apple Watch Series 11 और Ultra 3 का डिज़ाइन मौजूदा मॉडलों के जैसा ही रहेगा. लेकिन इनमें कुछ बड़े अपग्रेड्स देखने को मिल सकते हैं. सबसे महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर, Ultra 3 में सैटेलाइट कनेक्टिविटी और 5G RedCap टेक्नोलॉजी का सपोर्ट मिल सकता है, जिससे कनेक्टिविटी के नए दरवाज़े खुलेंगे. हेल्थ फीचर्स की बात करें तो Series 11 और Ultra 3 में ब्लड प्रेशर डिटेक्शन जैसे एडवांस्ड फीचर्स दिए जाने की चर्चा है. यह फीचर यूज़र को हाई ब्लड प्रेशर के संभावित संकेतों के बारे में अलर्ट करेगा, हालांकि यह पूरी डिटेल्ड रीडिंग नहीं देगा. इसके अलावा, Apple एक नए AI-ड्रिवन हेल्थ कोचिंग सर्विस और एक अपडेटेड Health App पर भी काम कर रहा है, जो यूज़र्स को पर्सनलाइज़्ड वेलनेस सपोर्ट देगा. उम्मीद है कि ये नए फीचर्स आगामी AirPods के साथ भी पेश किए जा सकते हैं, जो हार्ट रेट मॉनिटरिंग टेक्नोलॉजी से लैस होंगे. यानी भले ही डिज़ाइन में बड़े बदलाव न हों, लेकिन Apple आने वाले समय में अपने स्मार्टवॉच एक्सपीरियंस को और ज़्यादा हेल्थ-केंद्रित और स्मार्ट बनाने पर ज़ोर देने वाला है.

लाइफ में सक्सेज पाने के लिए ये चीजे है जरूरी

लाइफ में सक्सेज तो सभी चाहते हैं। लेकिन सफलता उसे ही मिलती है जो मेहनत करता है। हालांकि इसके साथ मेहनत किस दिशा में और कितनी की जा रही है, ये बात भी निर्भर करती है। अगर आप अपने करियर, फैमिली या किसी भी चीज में सफलता चाहते हैं तो इन तीन चीजों को जरूर याद रखें। तभी सक्सेज मिलने में आसानी होगी। जानें क्या हैं वो तीन चीजें, जिसे करने के लिए हर सफल इंसान कहता है। आत्मविश्वास किसी भी काम को करने के लिए आत्मविश्वास का होना सबसे ज्यादा जरूरी है। जब आप खुद पर भरोसा करेंगे कि ये काम आप कर सकते हैं। फिर वो चाहे आसान हो या कठिन पूरा जरूर होता है। स्पष्टता लाइफ में किस इंसान के साथ जिंदगी बितानी है या फिर किस दिशा में करियर बनाना है। आपकी सोच और माइंड बिल्कुल क्लियर होना चाहिए। तभी आप सफल हो सकते हैं। जब आपका माइंड बिल्कुल क्लियर होगा उसमे दुविधा की स्थिति नहीं होगी तभी आप सही दिशा में मेहनत कर पाएंगे और खुद में आत्मविश्वास भी महसूस करेंगे। निरंतरता यानी कंस्सिटेंसी ‘करत-करत अभ्यास ते, जड़मत होत सुजान’ इस दोहे का अर्थ है कि लगातार अभ्यास करने से मूर्ख भी बुद्धिमान हो जाता है। जब आप किसी काम को लगातार करते हैं, बिना रुके करते हैं। तो एक ना एक दिन सफलता आपको जरूर मिलती है। इसलिए अपने काम में निरंतरता बनाकर रखें। बिना रुके सही दिशा में और पूरे आत्मविश्वास के साथ किया गया काम आपको सफलता जरूर दिलाता है।

आज से चार धाम यात्रा शुरू, ये 5 गैजेट जरूर साथ रखें, मुसीबत में आएंगे काम

नई दिल्ली अक्षय तृतीया के मौके पर आज से चार धाम यात्रा शुरू हो रही है। ये यात्रा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और आत्मिक अनुभव प्रदान करती है। हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों और बदलते मौसम की वजह से यह यात्रा काफी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ऐसे में कुछ काम के गैजेट्स साथ रखना जरूरी हो जाता है। ये गैजेट्स न सिर्फ आपकी यात्रा को सुविधाजनक बनाते हैं, बल्कि कई मौकों पर आपको सुरक्षा भी प्रदान कर सकते हैं। आज हम 5 ऐसे गैजेट्स के बारे में बात करेंगे जिन्हें साथ ले जाने से आप न सिर्फ अपनी यात्रा को आराम से पूरा कर पाएंगे बल्कि जरूरत पड़ने पर दूसरे श्रद्धालुओं की भी मदद कर पाएंगे। मोबाइल फोन जाहिर सी बात है कि आप अपना स्मार्टफोन तो यात्रा पर लेकर जाएंगे ही। हालांकि हम यहां बात एक फीचर फोन की कर रहे हैं। यात्रा में अपने साथ एक बटन वाला फीचर फोन जरूर रखें। इस तरह के फोन की बैटरी कई दिनों तक चलती है और जरूरत पड़ने पर इसका साथ होना काफी काम आ सकता है। हमारी सलाह है कि इस एक्स्ट्रा फोन को पूरा चार्च करने के बाद ऑफ करके अपने पास रखें। इससे फोन की बैटरी खर्च नहीं होगी और अगर किसी वजह से आपको इस फोन को इस्तेमाल करने की जरूरत पड़ती है, तो आप इसे ज्यादा समय तक इस्तेमाल कर पाएंगे। पावर बैंक चार धाम यात्रा पर जा रहे हैं, तो अपने साथ एक पावर बैंक जरूर लेते जाएं। अच्छा होगा कि आप अपने साथ कम से कम 20,000mah का पावर बैंक रखें। दरअसल 10,000 mah का पावर बैंक आपके स्मार्टफोन को ज्यादा से ज्यादा दो या ढाई बार चार्ज कर पाएगा। वहीं एक 20,000mah का पावर बैंक आपके स्मार्टफोन को 4 से 5 बार चार्च कर सकता है। इसके अवाला आपके साथ मौजूद फीचर फोन आपको बैटरी की कमी महसूस नहीं होने देगा। GPS डिवाइस या ऑफलाइन मैप ऐप्स जरूरी नहीं कि चार धाम यात्रा पर आपको हर जगह मोबाइल नेटवर्क मिल पाए। ऐसे में अपने साथ एक ऑफलाइन मैप या GPS डिवाइस लेते जाएं। आप चाहें तो अपने फोन में भी ऑफलाइन मैप डाउनलोड करके रख सकते हैं। यह ऐसे समय में आपको रास्ता ढूंढ़ने में मदद कर सकता है जब आपके पास रास्ता पता करने के लिए कोई न हो। इसकी मदद से आप निश्चिंत होकर अपनी यात्रा को पूरा कर पाएंगे। कंपास यात्रा में अपने साथ एक कंपास भी जरूर रखें। यह दिशा बताने के काम आएगा और इसके लिए कभी भी फोन में मौजूद कंपास ऐप पर निर्भर न हों। दरअसर फोन में मौजूद कंपास ऐप तब तक ही काम के हैं, जब तक कि उन्हें GPS का सिगनल मिल रहा है। बिना GPS सिग्नल के वह आपको सही रास्ता नहीं बता पाएगा। ऐसे में यात्रा के दौरान अपने साथ एक छोटा कंपास जरूर रखें। स्मार्ट वॉच या फिटनेस ट्रैकर आप अपने साथ एक अच्छा फिटनेस ट्रैकर या स्मार्ट वॉच भी लेकर जा सकते हैं। यह वॉच या ट्रैकर आपकी हेल्थ से जुड़ा जरूरी डेटा जैसे कि ऑक्सीजन लेवल, हार्ट बीट या स्टेप काउंट आदि देता रहेगा। कुछ अच्छे और प्रीमियम स्मार्टवॉच में हाइकिंग के लिए खास तौर पर कुछ फीचर्स दिए जाते हैं। इनमें आप अपना ट्रैक आदि भी मैप कर सकते हैं। इससे रास्ता भटकने की गुंजाइश नहीं बचती। इसके अलावा प्रीमियम स्मार्टवॉच में आपको लंबा बैटकी बैकअप भी मिल पाएगा। इससे हर दिन उसे चार्ज करने की समस्या नहीं रहेगी।

पाकिस्‍तान साइबर हमले की ‘हवा’ बनाने में जुटा, जिसका कोई फायदा नहीं

नई दिल्ली भारत से युद्ध की आशंका में डरा पाकिस्‍तान दर-दर की ठोंकरे खाकर दुनिया के अन्‍य देशों में मदद के लिए ग‍िड़‍डिड़ा रहा है। धमकी तो वह न्‍यूक्लियर हमले की देता है, लेकिन बचकानी हरकत के रूप में भारत पर साइबर हमले कर रहा है। इन साइबर हमलों में वह पहलगाम आतंकी हमले से अपना पल्‍ला झाड़ रहा है। भारत को धमकियां दे रहा है। हकीकत यह है कि पाकिस्‍तान ऐसी ‘हवा’ बनाने में जुटा है, जिसका कोई फायदा उसे नहीं हुआ है। पड़ोसी की ऐसी हरकतों पर देश की सरकार रिएक्‍ट करना तक सही नहीं समझती। लेकिन हम और आप इसी बहाने साइबर अटैक की गुत्‍थी को समझते हैं। क्‍या होते हैं साइबर अटैक एक्‍सपर्ट के अनुसार, साइबर अटैक में किसी देश के नेटवर्क, उसके कंप्‍यूटर सिस्‍टम और डिजिटल डिवाइस को टार्गेट किया जाता है। उन तक पहुंचने की कोशिश की जाती है और सिस्‍टम में स्‍टोर डेटा, ऐप्‍स या बाकी चीजों को चुराने का प्रयास होता है। कई बार सिस्‍टम में मौजूद डेटा को बर्बाद करने के लिए भी ऐसे अटैक किए जाते हैं। साइबर हमला करने वाले किसी भी देश से हो सकते हैं। वो सरकारी वेबसाइटों से लेकर प्राइवेट कंपनियों की वेबसाइटों को निशाना बना सकते हैं। क्‍याें किया जाता है साइबर अटैक एक्‍सपर्ट के अनुसार, साइबर अटैक के पीछे तीन तरह की मानसिकताएं होती हैं। यह क्र‍िमिनल एक्टिविटी के लिए किया जाता है। राजनीतिक वजह या फ‍िर पर्सनल वजहों से भी साइबर अटैक होता है। क्र‍िमिनल एक्टिवि‍टी में पैसे चुराने या बैंक अकाउंट हैक करने की कोशिश होती है। या फ‍िर डेटा को चुराकर पैसों के लिए उसे डार्क वेब पर बेचा जाता है। लोगों से उनकी जानकारी बदलने पैसे भी ऐंठे जाते हैं। जो साइबर अटैक पर्सनल वजहों से होता है, उसमें कई बार कंपनियों के पूर्व कर्मचारी ही ऑफ‍िसेज को टार्गेट करते हैं। वह संवेदनशील डेटा में सेंध लगाते हैं। वहीं, पॉलिटिकल कारणों में साइबर वॉर जैसी चीज को अंजाम दिया जाता है। इसमें एक देश अपने दुश्‍मन देशों की सरकारी एजेंसियों से जुड़ी वेबसाइटों को टार्गेट करता है। पाकिस्‍तान भी इन दिनों यही करने की कोशिश में जुटा है। इसका कोई खास फायदा उसे होता हुआ नहीं दिख रहा। किसे टार्गेट करता है साइबर अटैक साइबर अटैक में मुख्‍य तौर पर एक कंप्‍यूटर नेटवर्क को टार्गेट किया जाता है। नेटवर्क में सेंध लगाने का मकसद होता है पैसा चुराना, फाइनेंशल डेटा चुराना, क्‍लाइंट लिस्‍ट पर कब्‍जा करना, कस्‍टमर डेटा चुराना जिसमें ग्राहकों की पर्सनल जानकारी भी शामिल होती है। इसके साथ ही इमेल अड्रेस, लॉगइन क्रेडेंशियल को हथियाने की कोशिश होती है। कई मामलों में हमलवार कुछ भी चोरी नहीं करते, बल्कि सिस्‍टम को बाधित करके गलत सूचनाएं फैलाते हैं जैसा कि मौजूदा केस में हुआ है। कई हैकर्स वेबसाइटों के होम पेज को टार्गेट करके वहां अपना मैसेज दिखाते हैं।

सफलता की सीढ़ी चढ़ना है तो इन जगहों पर नहीं करना चाहिए संकोच और शर्म

शर्म और लिहाज को सभ्य व्यक्ति की निशानी माना जाता है। वहीं बात अगर महिलाओं की करें तो उनके लिए ये दो गुण गहनों के समान महत्वपूर्ण बताए गए हैं। बावजूद इसके चाणक्य ने अपनी किताब नीति शास्त्र में 5 ऐसे मौके बताए गए हैं, जहां शर्म करने से व्यक्ति को हमेशा असफलता का मुंह देखना पड़ता है। इन जगह पर शर्म या संकोच करने से व्यक्ति सफलता की सीढ़ी नहीं चढ़ पाता है। आइए जानते हैं ऐसे कौन से वो 5 मौके हैं, जहां व्यक्ति को बिल्कुल भी शर्म नहीं करना चाहिए। भोजन करते समय न करें शर्म आचार्य चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति भोजन करते समय शर्म या संकोच महसूस करता है, वह हमेशा ही नुकसान में रहता है। ऐसे व्यक्ति का पेट खाली रहता है और उसका ध्यान भूख की वजह से किसी और काम में नहीं लगता है। चाणक्य नीति के अनुसार भूखे व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता कम हो जाती है। जिसकी वजह से वो कई बार जीवन में गलत फैसले ले सकता है। पैसों से जुड़े मामले में शर्म चाणक्य नीति के अनुसार किसी भी व्यक्ति को पैसों के लेन-देन के मामले में शर्म नहीं करनी चाहिए। अगर आप किसी को उधार दिए पैसों को मांगने में शर्म करेंगे तो आपको हमेशा पैसों से जुड़े नुकसान उठाने पड़ सकते हैं। ऐसे में बिना किसी झिझक के आपको दोस्तों और रिश्तेदारों से उधार दिए पैसे वापस मांग लेने चाहिए। शिक्षा लेने में शर्म आचार्य चाणक्य के अनुसार जीवन में सफलता हासिल करने के लिए व्यक्ति को हमेशा नई-नई चीजें सीखते रहनी चाहिए। कई बार आपसे कम उम्र का व्यक्ति भी आपको कई नई चीजें सीखा सकता है। ऐसे में कभी भी नई चीज सीखने में संकोच महसूस ना करें वरना जीवन में आगे बढ़ने में आपको काफी परेशानी हो सकती है। अपनी बातों रखने में शर्म आचार्य चाणक्य के अनुसार एक व्यक्ति को अपनी बात दूसरों के सामने रखने से कभी भी संकोच महसूस नहीं करना चाहिए। अगर आपको किसी दूसरे व्यक्ति की कोई बात बुरी या गलत लग रही हो तो उसे तुरंत कह डालें। याद रखें, जो व्यक्ति अपने मन की बात दूसरों के सामने रखने में संकोच महसूस करता है, वह जीवन में कभी भी आगे नहीं बढ़ पाता है। मेहनत करने में शर्म जो व्यक्ति कठिन परिश्रम करने में संकोच या आलस महसूस करता है, वह भी अपने जीवन में कभी सफलता का मुंह नहीं देख पाता है। एक सफल जीवन की बुनियाद कड़ी मेहनत ही है। दोस्तों या आलस के चक्कर में मेहनत करने से ना बचें।

OpenAI ने ChatGPT में एक नया शॉपिंग फीचर जोड़ा

नई दिल्ली OpenAI, ChatGPT के लिए बड़ा अपडेट लेकर आया है। दरअसल अब ChatGPT पर शॉपिंग भी की जा सकेगी। इस अपडेट के बाद लोग ChatGPT पर किसी आइटम को सर्च करने से लेकर ऑर्डर तक कर पाएंगे। इसके अलावा किसी भी प्रोडक्ट को खरीदने के लिए यूजर को किसी अलग साइट पर नहीं जाना पड़ेगा। ChatGPT के साथ शॉपिंग करते समय प्रोडक्ट को सर्च करने से लेकर ऑर्डर करने तक का सारा काम उसी चैट विंडो में पूरा हो सकेगा। इस अपडेट के बाद जानकारों का मानना है कि जिस तरह से लोगों का जानकारी इक्ट्ठा करने का तरीका ChatGPT ने बदला है उसी तरह यह लोगों के ऑनलाइन शॉपिंग करने के तरीके को भी बदल कर रख देगा। क्या है शापिंग फीचर अभी तक ChatGPT पर किसी भी प्रोडक्ट को सर्च करने पर उससे जुड़े लिंक आपको मिल जाते थे। अब ChatGPT आपको प्रोडक्ट और उसके बारे में सारी जानकारी चैट विंडो में ही उपलब्ध कराएगा। अगर आप चाहेंगे, तो यह एक से ज्यादा प्रोडक्ट्स को कंपेयर भी कर पाएगा और साथ ही बता पाएगा कि वह प्रोडक्ट सस्ता कहां मिल रहा है। इसके अलावा इस बात का पूरा ध्यान रखा जाएगा कि प्रोडक्ट यूजर की पसंद के हिसाब से दिखाया जाए न कि विज्ञापनों के अनुसार। फिलहाल ChatGPT में फैशन, ब्यूटी, घर का सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कैटेगरी को शामिल किया गया है। Google से होगा मुकाबला इस फीचर की वजह से ChatGPT का मुकाबला Google से होगा। दरअसल ChatGPT पर लोग अपनी पसंद के हिसाब से सामान खरीद पाएंगे और सामान को लोगों की इच्छा के अनुसार पेश किया जाएगा। वहीं Google पर शॉपिंग करते समय विज्ञापन वाले प्रोडक्ट्स को पहले दिखाया जाता है। बता दें कि OpenAI की ओर से जानकारी दी गई है कि पिछले एक हफ्ते में यूजर्स ने एक बिलियन वेब सर्च ChatGPT पर की हैं। शॉपिंग फीचर ऐसे करेगा काम ChatGPT पर लोग बहुत ही आसान भाषा में अपने काम का प्रोडक्ट सर्च कर पाएंगे और ChatGPT भी लोगों के प्रॉम्प्ट के अनुसार उन प्रोडक्ट्स को पेश कर पाएगा जो कि लोग असल में खरीदना चाहते हैं। ChatGPT पर शॉपिंग करने के लिए:     उस प्रोडक्ट के बारे में लिखें जो आप खरीदना चाहते हैं जैसे कि “Best earbuds under rs 500” आप जितना बेहतर तरीके से अपनी पसंद को बता पाएंगे ChatGPT उतने अच्छे रिजल्ट आपके लिए लेकर आएगा।     इसके बाद ChatGPT प्रोडक्ट को सर्च करके आपको रिजल्ट दिखाएगा। यह नतीजे विज्ञापनों से प्रभावित नहीं होंगे।     इसके बाद आप अपनी पसंद का प्रोडक्ट चुनकर, चैट विंडो में ही उसे खरीद पाएंगे। फिलहाल यह फीचर ChatGPT और ChatGPT Pro इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को मिलेगा।

वाई-फाई के फुल सिग्नल के लिए आजमाएं ये आसान हैक्स

नई दिल्ली आज वाई-फाई सभी घरों में बेहद आम है लेकिन इसके साथ आने वाली एक समस्या भी आम तौर पर सभी घरों में मिलती है। दरअसल कई बार ऐसा होता है कि वाई-फाई के सिग्नल सही से पूरे घर में नहीं आते। इसकी वजह से इंटरनेट स्लो हो जाता है या बार-बार रुकने लगता है। ऐसी समस्या हो सकता है आप भी झेल रहे हों और घर के किसी भी कोने में आपको भी वाई-फाई के कम सिगनल मिल रहे हों। ऐसा खासकर पर तब होता है जब घर बड़ा हो या दीवारें मोटी हों। लोग इसे ठीक करने के लिए नया राउटर या महंगे डिवाइस पर पैसे खर्च करने के बारे सोचने लगते हैं लेकिन ऐसा ज़रूरी नहीं है। कुछ आसान और घरेलू तरीकों से भी वाईफाई के सिग्नल को बेहतर किया जा सकता है। आज हम ऐसे ही 5 तरीके बताएंगे, जिन्हें कोई भी खुद घर पर बिना किसी टेक्निकल जानकारी के आजमा सकते हैं और अपने वाई-फाई को कहीं ज्यादा तेज और मजबूत बना सकते हैं। राउटर की जगह सोच कर चुनें घर में वाईफाई के सिग्नल अच्छे से आ पाएं इसके लिए राउटर को हमेशा घर के बीचों बीच और खुली जगह पर रखने की सलाह दी जाती है। अगर आपने राउटर किसी कोने में या अलमारी के अंदर रखा है, तो सिग्नल को पूरे घर में ट्रैवल करने में समस्या आएगी। एक्सपर्ट कहते हैं कि राउटर को ऊंचाई पर रखना चाहिए, जैसे किसी मेज या ऊंचे शेल्फ पर। आज चाहें तो इसे छत पर भी अटैच करवा सकते हैं। अक्सर दफ्तरों में राउटर सीलिंग के साथ अटैच करके इस्तेमाल किए जाते हैं। एक ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि राउटर के आस-पास माइक्रोवेव, वायरलेस फोन या बड़े मेटल के सामान न रखें हों क्योंकि ये सिग्नल को जाम करते हैं। अगर आप राउटर को सही जगह पर रखते हैं, तो सिग्नल पूरे घर में आसानी से पहुंच पाएगा। पुराने राउटर का सॉफ्टवेयर अपडेट करें जैसे मोबाइल में सॉफ्टवेयर अपडेट जरूरी होता है, वैसे ही वाईफाई राउटर का फर्मवेयर अपडेट करना भी जरूरी होता है। राउटर के लिए आने वाले अपडेट में बेहतर सिक्योरिटी और तेज नेटवर्क फीचर्स दिए जाते हैं। अगर आपके राउटर में स्पीड या सिग्नल से जुड़ी को समस्या आ रही है, तो हो सकता है कि कंपनी उसे नए अपडेट में ठीक कर चुकी हो। ऐसे में अगर आपका राउटर बहुत पुराने सॉफ्टवेयर पर चल रहा है, तो उसकी परफॉर्मेंस कमजोर हो सकती है। आप राउटर की सेटिंग्स में जाकर उसका फर्मवेयर अपडेट कर सकते हैं।​ राउटर को रीस्टार्ट करते रहें अक्सर देखा गया है कि लोग एक बार राउटर को लगाने के बाद उसे कभी ऑफ नहीं करते। इससे वाईफाई की स्पीड धीमी हो जाती है क्योंकि राउटर में बहुत ज्यादा लोड या छोटे-छोटे एरर आ जाते हैं। जैसे इंसानों को लगातार काम करने से थकावट होती है वैसे ही आपका राउटर भी थक कर स्लो हो जाता है। इसे ठीक करने के लिए हफ्ते में एक बार राउटर को बंद करके 1-2 मिनट बाद फिर से चालू करना चाहिए। ऐसा करने से राउटर का सिस्टम रिफ्रेश होता है और नेटवर्क की छोटी-मोटी दिक्कतें अपने आप ठीक हो जाती हैं। अगर आपके राउटर में ऑटोमैटिक रीस्टार्ट का ऑप्शन है, तो उसे ऑन रखना चाहिए। वाईफाई रिपीटर या बूस्टर का इस्तेमाल करें अगर आपका घर काफी बड़ा है और सिग्नल एक कोने से दूसरे कोने तक नहीं पहुंच पाता, तो वाईफाई रिपीटर या बूस्टर का इस्तेमाल करें। इस डिवाइस की मदद से आप राउटर के सिग्नल की पहुंच को बढ़ा सकते हैं। इसे प्लग में लगाकर आसानी से सेट किया जा सकता है। इसकी मदद से घर के दूर-दराज के हिस्सों में भी तेज वाईफाई सिग्नल पहुंच सकते हैं। यह तरीका बड़े घरों, दफ्तरों या दो मंजिल वाले मकानों के लिए बहुत अच्छा रहता है। बता दें कि आप पुराने राउटर को भी रिपीटर या बूस्टर के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं।​ बेकार के डिवाइस नेटवर्क से हटाएं घर में जब बहुत सारे डिवाइस एक साथ वाईफाई से जुड़े रहते हैं, तो नेटवर्क पर दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में वाइफाई की परफॉर्मेंस कमजोर होना लाजमी है। ऐसे में जिन डिवाइसेज की जरूरत न हो, उन्हें वाईफाई से डिस्कनेक्ट कर देना बेहतर होता है। आप राउटर की सेटिंग में जाकर चेक कर सकते हैं कि कौन-कौन से डिवाइस उससे कनेक्ट हैं। इसके बाद आप आसानी से उन डिवाइसेज को राउटर से डिस्कनेक्ट कर सकते हैं जो बेकार ही आपके राउटर का लोड बढ़ा रहे हैं।

एमेजॉन की सैटेलाइट इंटरनेट एंट्री, 27 सैटेलाइट इंटरनेट का पहला बैच अंतरिक्ष में पहुंचाया

नई दिल्ली सैटेलाइट इंटरनेट की दुनिया में अबतक हमने सिर्फ एलन मस्‍क की इंटरनेट कंपनी स्‍टारलिंक का नाम सुना है या कहें ज्‍यादा सुना है। स्‍टारलिंक, भारत में भी अपनी सेवाएं शुरू करना चाहती है और उसने जियो व एयरटेल के साथ पार्टनरशिप की है। कई और कंपनियां जैसे- वनवेब भी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस दुनिया तक पहुंचा रही हैं। अब इस क्षेत्र में एमेजॉन ने एंट्री कर ली है। एमेजॉन बरसों से अपने प्रोजेक्‍ट कुइपर (Project kuiper) को पूरा करने का ख्‍वाब देख रही थी। वह एक-दो नहीं, बल्कि 3 हजार से ज्‍यादा सैटेलाइट्स को पृथ्‍वी की निचली कक्षा में पहुंचाएगी। इसकी शुरुआत सोमवार को हो गई, जब कंपनी ने 27 सैटेलाइट इंटरनेट का पहला बैच अंतरिक्ष में पहुंचाया। 2019 में ऐलान, अब फ्लोरिडा से लॉन्‍च रिपोर्टों के अनुसार, एमेजॉन ने साल 2019 में प्रोजेक्‍ट कुइपर का ऐलान किया था। साेमवार को कंपनी ने इसकी शुरुआत की। 27 इंटरनेट टर्मिनल्‍स को लो-अर्थ ऑर्बिट में पहुंचा दिया। एमेजॉन का यह प्रोजेक्‍ट करीब 10 अरब डॉलर का है। कंपनी कुल 3236 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में पहुंचाने का लक्ष्‍य रखती है। इस क्षेत्र में उसका सीधा मुकाबला एलन मस्‍क की कंपनी स्‍टारलिंक से होगा। प्रोजेक्‍ट कुइपर का मकसद क्‍या है जिस तरह से स्‍टारलिंक दुनियाभर में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं उपलब्‍ध कराती है। उसी तरह से एमेजॉन भी कुइपर प्रोजेक्‍ट के जरिए यह काम करेगी। रिपोर्टों के अनुसार, वह उन इलाकों तक सैटेलाइट इंटरनेट पहुंचाएगी, जहां इंटरनेट की पहुंच नहीं है। सोमवार को हुए लॉन्‍च के दौरान कंपनी ने स्‍टारलिंक से कोई मदद नहीं ली। उसने अपने सैटेलाइट को बोइंग और लॉकहीड मार्टिन की कंपनी यूनाइटेड लॉन्च एलायंस (ULA) की मदद से अंतरिक्ष में भेजा। एटलस रॉकेट के जरिए सैटेलाइट को अंतरिक्ष में पहुंचाया गया। देरी से लॉन्‍च हुआ है प्रोजेक्‍ट एमेजॉन अपने प्रोजेक्‍ट कुइपर को पिछले साल ही लॉन्‍च कर देना चाहती थी, लेकिन इसमें देरी होती गई। अमेरिका के फेडरल कम्‍युनिकेशंस कमीशन ने कंपनी से कहा है कि वह तेजी से काम करे। अगले साल जून तक कम से कम आधे सैटेलाइट लॉन्‍च कर दे। यानी कंपनी को 15 सौ से ज्‍यादा सैटेलाइट लॉन्‍च करने होंगे। स्‍टारलिंक से मुकाबले के लिए यह जरूरी भी है। अगर कंपनी और देर करती है तो वह एलन मस्‍क की कंपनी से पिछड़ सकती है। मस्‍क की स्‍टारलिंक अब अमेरिका से बाहर निकलकर अफ्रीकी देशों, एशियाई देशों में अपनी सर्विस पहुंचा रही है। एमेजॉन को अमेरिका से शुरुआत करनी होगी और सिर्फ 27 सैटेलाइटों के दम पर यह नहीं हो पाएगा। ज्‍यादा से ज्‍यादा टर्मिनल्‍स को समय रहते स्‍पेस में पहुंचाना होगा।

हार्ट अटैक से बचने के उपाय

दिल की सेहत पर ही निर्भर करती है, हमारे शरीर की सेहत। और दिल को सेहतमंद रखने के लिए बहुत जरूरी है कि हम संतुलित जीवनशैली अपनाएं और नियमित व्याहयाम करें। पर्याप्त नींद हार्वर्ड के 70,000 महिलाओं पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार, नींद हमारे दिल को सेहमतमंद रखने में काफी मदद करती है। इस अध्य यन में पाया गया कि जो लोग रात को एक घंटा अधिक सोते हैं, उन्हेंु दिल की बीमारी अन्यव लोगों की तुलना में कम होती है। वहीं सात घंटे से कम सोने वाले लोगों को दिल की बीमारी होने की आशंका अधिक होती हैद्य कोलेस्ट्रॉल कम करें रक्त में अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल धमनियों की भीतरी दीवारों पर जम जाता है। इससे धमनियां सिकुड़ जाती हैं और परिणामस्वॉरूप दिल तक कम मात्रा में खून पहुंचता है। इसलिए आपको चाहिए कि अपने कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखें और इसकी नियमित जांच भी करवाते रहें। उच्च रक्त कोलेस्ट्रॉल, कोरोनरी हृदय रोग विकसित होने की संभावना को बढ़ा देता है। नियमित रूप से व्यायाम करें नियमित रूप से व्यायाम स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद करता है। इससे मधुमेह होने की आशंका भी कम हो जाती है। मधुमेह रोगियों के बीच हार्ट अटैक का खतरा ज्याकदा होता है। गैर इंसुलिन निर्भर मधुमेह के रोगियों में सभी मौतों में से लगभग आधी दिल की बीमारी के कारण होती हैं। फैट से बचें भोजन में तेल का प्रयोग कम कर ताजी हरी सब्जियों और फल की मात्रा बढ़ाएं। ये रेशेदार और एंटी ऑक्सीडेंट्स के स्रोत हैं जो खून की वाहिकाओं में खराब कोलेस्ट्रोल के असर को कम करती हैं। इनके प्रतिदिन प्रयोग से दिल की बीमारी से बचा जा सकता है। साथ ही जंक फूड का सेवन कम से कम करें। भोजन समय पर करें। धूम्रपान न करें सिगरेट पीना महिलाओं में दिल की बीमारी का सबसे प्रमुख कारण है। मध्य म वर्ग की महिलाओं में तंबाकू के कारण लगभग 50 प्रतिशत हार्ट अटैक के मामलें देखने को मिलते हैं। वैज्ञानिकों द्वारा यह बात सिद्ध की जा चुकी है कि धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में दिल का दौरा या आकस्मिक हृदय रोग से मृत्यु होने का खतरा आम व्यक्तियों की तुलना में दोगुनी होता है। धूम्रपान छोड़ देने के 10 वर्षो के अंदर इन बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। वजन को नियंत्रित करें यदि आपका वजन अधिक है तो आपके हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। उसे तेजी से धड़कना पड़ता है। अधिक वजन का कारण असंतुलित भोजन और व्यायाम की कमी है, जिससे कई अन्य रोग भी जन्म लेते हैं। इससे बचाव का सबसे अच्छा तरीका है, रेशे वाले अनाजों तथा उच्च किस्म के सलादों का सेवन। साथ ही नियमित रूप से आधे घंटे टहलना। यह आपके अच्छे कोलेस्ट्रोल यानी एचडीएल कोलेस्ट्रोल को बढ़ाने में आपकी मदद कर सकता है। तनाव में कमी मनोवैज्ञानिक तनाव को हार्ट अटैक की मुख्य वजह मानते हैं। तनाव के प्रभाव को कम करने के और दैनिक आधार पर सामना करने वाले तनाव का प्रबंधन के लिए स्वस्थ तरीके खोजें। इसके अलावा, पौष्टिक आहार योजना और नियमित रूप से व्यायाम आपके स्वापस्य्नी  पर पड़ने वाले तनाव को कम करने में मदद कर सकता है। शराब का सेवन कम अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, शराब का अत्यधिक सेवन हाई बीपी ओर दिल की बीमारियों का नेतृत्व कर सकता हैं। हालांकि, कुछ अध्ययनों से पता चला है कि कम मात्रा में शराब के सेवन से कोलेस्ट्रॉल सही रहता है और इसलिए यह दिल के लिए फायदेमंद है।  

जानिए प्रेगनेंसी के दौरान कौन से मेडिकल टेस्ट है जरूरी

गर्भधारण के दौरान समय-समय पर कई तरह की जांच की जाती हैं। इससे मां और बच्चे के स्वास्थ्य की जानकारी मिलती है। साथ ही कोई कंप्लीकेशन ना हो इसकी जानकारी भी चिकित्सक को मिल जाती है। यदि कोई कंप्लीकेशन होती भी है तो चिकित्सक समय रहते उसका इलाज कर बच्चे और मां को किसी भी परेशानी से बचाया जा सकता है। आइये जानते हैं कि गर्भधारण के दौरान डिलिवरी तक कौन-कौन सी चिकित्सा जांच की जाती हैं सीबीसी यानी कम्पलीट ब्लड काउंट टेस्ट डॉक्टर आपका सीबीसी टेस्ट आपके गर्भवती होने के बाद करेगा। इससे आपके रक्त में लाल और सफेद कोशिकाओ का पता लगाया जाता है । इसके साथ ही हीमोग्लोबिन, हेमैटक्रीट और प्लेटलेट्स कणों को भी काउंट किया जाता है। हीमोग्लोबिन रक्त में मौजूद प्रोटीन होता है जो कि सेल्स को ऑक्सीजन देता है और हेमैटक्रीट शरीर में लाल रक्त कणों को जांचने का माप है। दोनों में से किसी के भी कम होने पर एनीमिया कहा जाता है। प्लेटलेट्स रक्त में थक्का जमने में सहायता करती हैं। महिला नार्मल डिलिवरी के दौरान तकरीबन आधा लीटर रक्त खो देती है। ऐसे में रक्त की कमी होने पर बच्चे और मां दोनों के लिए स्थिति खतरनाक हो सकती है। आरएच फैक्टर टेस्ट आरएच फैक्टर टेस्ट में लाल रक्त कणों के सरफेस में प्रोटीन की मात्रा देखने को किया जाता है। अगर प्रोटीन होता है तो इसे आरएच पॉजिटिव कहा जाता है अन्यथा नेगेटिव। यह टेस्ट लगभग 85 प्रतिशत महिलाओं में पॉजिटिव ही आता है। यूरिन टेस्ट डॉक्टर यूरिन टेस्ट से ही गर्भवती महिला के स्वास्थ्य की सही जानकारी लगा पाते हैं। इसमें मुख्यत शुगर की जांच की जाती है। इसके साथ ही किडनी के इन्फेक्शन का पता लगाने के लिए यूरिन में प्रोटीन की मात्रा, जांच की जाती है। इस टेस्ट के माध्यम से बैक्टीरिया की जांच की जाती है जिससे यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का पता चल पता  है। केटोन्स की भी जांच होती है जिससे यह पता लगता  है कि शरीर कार्बोहाइड्रेट की जगह वसा का  इस्तेमाल ऊर्जा के लिए तो नहीं कर रहा है। रक्तचाप की जांच गर्भवती महिला के रक्तचाप की जांच की जाती है ताकि रक्तचाप ज्यादा या कम दोनों ही होने की स्तिथी में महिला को किसी भी प्रकार की हानि से बचाया जा सके। भ्रूण का अल्ट्रासाउंड भ्रूण के शारीरिक विकास को देखने के लिए समय समय पर अल्ट्रासाउंड किया जाता है। इसमें प्लेसेंटा की स्थिति और बच्चे के शरीर का हर माप देखा जाता है। बच्चे की मूवमेंट और अन्य क्रियाओं का भी पता अल्ट्रासाउंड से ही चलता है। मल्टीपल मार्कर स्क्रीनिंग यह दो तरह का होता है। ट्रिपल स्क्रीन टेस्ट और क्वाड स्क्रीन टेस्ट। यह आहार नाल न्यूरल टयूब में किसी भी तरह के डिफेक्ट को देखने के लिए किया जाता है। भ्रूण की हृदय गति मापना हर महीने भ्रूण की हृदय गति में बदलाव आता है। जन्म के समय भी यह बदल जाती है। डॉक्टर समय-समय पर जांच कर यह चेक करते हैं की हार्ट बीट सामान्य है या नहीं। यदि ह्रदय गति कम आये तो माना जाता है कि बच्चे को ऑक्सीजन कम मिल रही है।  

सरकार ने Sarvam नाम की कंपनी को भारत का पहला स्वदेशी AI मॉडल तैयार करने के लिए चुना

नई दिल्ली इंडिया AI मिशन में एक बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने Sarvam नाम की कंपनी को भारत का पहला स्वदेशी AI मॉडल तैयार करने के लिए चुना है। यह कंपनी देश का पहला LLM यानी कि लार्ज लेंग्वेज मॉडल बनाएगी। यह अपने आप में एक ऐसा AI मॉडल बनाने की पहली कोशिश होगी जो भारतीय भाषाओं को समझने में माहिर हो, रीजनिंग कर सकता हो और जिसे भारत जितने बड़े देश की जनसंख्या के लिए ऑप्टिमाइज किया गया हो। बता दें कि इसकी घोषणा खुद आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने की और उन्होंने AI मॉडल तैयार करने के लिए आए 67 प्रपोजल में से Sarvam को चुना। देश का पहला AI मॉडल इस बारे में आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश का पहला AI फाउंडेशनल मॉडल तैयार करने के लिए Sarvam AI नाम के स्टार्टअप को चुना गया है, आने वाले समय में दो से तीन और स्टार्टअप इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बन सकते हैं। बता दें कि Sarvam AI नाम का यह स्टार्टअप पहले ही मेटा के LLAMA2-7B पर आधारित हिंदी भाषा में काम करने वाला भाषा मॉडल तैयार किया था। इतना ही नहीं यह मॉडल हिंदी, इंग्लिश और हिंग्लिश में माहिर है और यह ChatGPT 3.5 जितनी परफॉर्मेंस दे सकता है। सरकार का समर्थन सरकार Sarvam AI को करीब 200 करोड़ के GPU उपलब्ध कराएगी ताकि वह अपने प्रोजेक्ट को पूरा कर सकें। इससे AI की ट्रेनिंग में इस्तेमाल होने वाले डेटा को भारत में रखने में भी मदद मिलेगी और यह भारत के AI सेक्टर को आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद करेगा। Sarvam AI नाम का यह स्टार्टअप विवेक राघवन और प्रतीयुष कुमार ने साल 2023 में शुरू किया था और इसी साल अपनी सीरीज ए फंडिंग राउंड में 41 मिलियन डॉलर जुटाने में कामियाब रहे थे। विवेक राघवन और प्रतीयुष कुमार इंफोसिस के सह संस्थापक नंदन निलेकणी के AI4Bharat में भी काम कर चुके हैं। विवेक राघवन ने इस मौके पर बताया कि “Sarvam AI भारतीय उद्यमों के डेटा का इस्तेमाल करेंगा और खास डोमेन वाले AI मॉडल तैयार करेगा।” ये है लक्ष्य Sarvam AI का लक्ष्य है कि वह भारतीय भाषाएं समझने वाला AI मॉडल तैयार करे। यह स्वास्थय, शिक्षा और कृषि जैसी जगहों में मददगार साबित होगा। इस तरह से देखा जाए, तो Sarvam देश के AI सेक्टर की वह पहली सीढ़ी साबित होगा, जो आगे जाकर भारत को इस क्षेत्र के विश्व गुरू के तौर पर स्थापिक कर सके।

इन आसान तरीको से बचाये व्हाट्सऐप का खोया हुआ डाटा

नई दिल्ली व्हाट्सऐप पर हम कई किस्म की बातें करते हैं। आम चैट से लेकर दफ्तर की जरूरी बातें। कई चीजें इतनी महत्वपूर्ण होती हैं कि आप उन्हें बाद में भी आकर खोजते रहते हैं। अगर आपने अपना फोन खो दिया या फिर उसे किसी कारण से फॉर्मेट करना पड़ा तो आपको व्हाट्सऐप फिर से इंस्टॉल करना पड़ेगा। ऐसे में आपके पुराने चैट गायब जाएंगे। लेकिन आप व्हाट्सऐप का बैकअप बनाना जानते हैं तो इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। एंड्रॉयड पर व्हाट्सऐप का बैकअप गूगल ड्राइव पर बनाया जा सकता है। आइए हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं ताकि आपके सारे चैट, फोटो और वीडियो सुरक्षित स्टोर रहें। और जरूरत पड़ने पर उन्हें फिर से रीस्टोर किया जा सके। अगर आपने अब तक इस फीचर को इस्तेमाल नहीं किया है तो पहली बार जब आप व्हाट्सऐप इंस्टॉल करेंगे तो आपसे इस फीचर को स्विच ऑन करने के बारे में पूछा जाएगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो मेन्यू में जाकर इसे सेटअप कर सकते हैं। आपको ऐप के मुख्य इंटरफेस पर दायीं तरफ टॉप में तीन बिन्दु नजर आ आएंगे। उन पर टैप करें। इसके बाद सेटिंग्स में जाएं, फिर चैट्स एंड कॉल्स में। इसके बाद चैट बैकअप पर टैप करें। यहां आपको गूगल ड्राइव सेटअप करने का विकल्प मिलेगा।   आपको बता दें कि यहां पर इंटरनल बैकअप भी बनता है। आप पहले बैकअप पर टैप करके फोन की इंटरनल स्टोरेज में बैकअप रख सकते हैं। लेकिन फोन का डेटा डिलीट होते ही यह बैकअप भी डिलीट हो जाएगा। इसी पेज पर निचले हिस्से में गूगल ड्राइव सेटिंग्स नजर आएगा। सबसे पहले बैकअप टू गूगल ड्राइव पर टैप करें। यहां पर बैकअप का समय निर्धारित कर सकते हैं। आपको कभी नहीं, दैनिक, साप्ताहिक और मासिक जैसे विकल्प मिलेंगे। हमारा सुझाव होगा कि आप दैनिक चुनें। इसके बाद चूज एन अकाउंट पर टैप करें। यहां पर आप तय कर सकते हैं कि किस जीमेल आईडी पर व्हाट्सऐप का बैकअप बने। आपको पहला विकल्प उस मेल आईडी का मिलेगा जिसका इस्तेमाल एंड्रॉयड डिवाइस को इंस्टॉल करने के लिए किया गया है। अगर आपने चाहते हैं तो किसी और ईमेल आईडी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आपको एड अकाउंट पर टैप करना होगा। और आ दिए गए निर्देशों का पालन भी करना होगा।   अब आप यह तय कर सकते हैं कि आप बैकअप किस किस्म के इंटरनेट पर बनाना चाहेंगे। सिर्फ वाई-फाई पर, या वाई-फाई प्लस सेल्युलर पर। बैकअप सेटिंग्स में आपको वीडियो का भी बैकअप बनाने का विकल्प मिलता है। आप इन्क्लुड वीडियो पर क्लिक करके व्हाट्सऐप पर आने वाले वीडियो का भी बैकअप बना सकते हैं। ध्यान रहे कि यहां पर बैकअप किया गया डेटा आपके गूगल ड्राइव अकाउंट में स्टोर होता रहता है। उसे ड्राइव क्लाइंट के तौर पर ब्राउज करके नहीं पढ़ा जा सकता। आईफोन पर बैकअप:- आईफोन पर व्हाट्सऐप इस्तेमाल करने वाले यूजर भी कुछ इस अंदाज में ही बैकअप बना सकते हैं। आईओएस पर व्हाट्सऐप खोलें। फिर सेटिंग्स में जाकर चैट सेटिंग्स में जाएं। यहां पर चैट बैकअप का विकल्प मिलेगा। यहां पर दिए गए विकल्पों में अपनी सुविधा अनुसार चुनाव कर लें। आईओएस में बैकअप बनाने की सुविधा आईक्लाउड पर होती है। ऐसे करें रीस्टोर:- आप जैसे ही नए व्हाट्सऐप को इंस्टॉल करते हैं तो आपको रीस्टोर करने के बारे में पूछा जाएगा। ध्यान रहे कि आपको अपने एंड्रॉयड डिवाइस पर उसी गूगल अकाउंट से साइन इन करना होगा जिस पर आपने व्हाट्स ऐप  का बैकअप बनाया था।  

60% भारतीयों को नहीं है AI की जानकारी

नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर भले ही सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा हो रही हो, लेकिन एक नई रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में इसकी पहुंच अब भी शुरुआती दौर में है. Google और मार्केट रिसर्च कंपनी Kantar India की एक संयुक्त स्टडी के मुताबिक, भारत में 60% से ज्यादा लोग अभी भी AI से अनजान हैं, और सिर्फ 31% लोगों ने ही कभी कोई जनरेटिव AI टूल इस्तेमाल किया है. यह रिपोर्ट 18 से 44 वर्ष के बीच के 8,000 लोगों पर आधारित है, जिन्हें टियर-1 और टियर-2 शहरों से चुना गया. इसका खुलासा Google के पहले “Gemini Day India” इवेंट में किया गया, जहां कंपनी ने अपने लेटेस्ट AI टूल्स जैसे Veo 2 (टेक्स्ट-टू-वीडियो जनरेटर), Gemini Live with Video, Gemini Canvas, Deep Research और Audio Overviews का लाइव डेमो भी दिया. 100 भारतीय भाषाओं की समझ के साथ आगे बढ़ रहा Gemini AI Google DeepMind के सीनियर डायरेक्टर मनीष गुप्ता ने इवेंट के दौरान बताया कि Gemini Live फिलहाल 9 भारतीय भाषाओं में काम करता है, और उनकी टीम इसे 100 से ज्यादा भाषाओं तक ले जाने की दिशा में काम कर रही है. उन्होंने बताया कि Gemini 2.5 मॉडल की लंबी कंटेंट प्रोसेसिंग क्षमता इसकी एक बड़ी ताकत है. “यह मॉडल न केवल पूरी नॉवेल सीरीज़ या दो घंटे की वीडियो समझ सकता है, बल्कि कोड की बड़ी लाइब्रेरी को भी डिटेल में ट्रैक कर सकता है.” AI अपनाने की भारत में अब भी बड़ी संभावना Google इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट (मार्केटिंग) शेखर खोसला ने कहा— “हमारा लक्ष्य है कि हम Google की तकनीकी ताकत का इस्तेमाल कर हर व्यक्ति के लिए एक पर्सनल, हेल्पफुल AI असिस्टेंट बनाएं.” Google-Kantar स्टडी को दो चरणों में किया गया:     पहले फेज में 5,133 लोगों से AI टूल्स की जागरूकता और उपयोग के बारे में जानकारी ली गई.     दूसरे फेज में 3,415 लोगों पर Gemini के प्रभाव का मूल्यांकन किया गया. Gemini यूजर्स को मिला जबरदस्त फायदा रिपोर्ट में सामने आया कि Gemini यूजर्स को काफी सकारात्मक अनुभव हुए:     93% यूजर्स ने प्रोडक्टिविटी में इजाफा बताया     95% ने कहा कि इससे उनकी क्रिएटिविटी को प्रेरणा मिली     80% को कॉम्प्लेक्स डिसीजन मेकिंग में मदद मिली     69% ने स्किल डेवेलपमेंट में इसे फायदेमंद बताया     77% ने किसी नई क्रिएटिव या प्रोफेशनल दिशा में कदम बढ़ाया दुनियाभर में 35 करोड़ यूजर्स, लेकिन ChatGPT से पीछे हालांकि भारत में Gemini के यूजर्स की संख्या रिपोर्ट में नहीं बताई गई, लेकिन हाल की रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनियाभर में Gemini के यूजर्स की संख्या 350 मिलियन (35 करोड़) को पार कर गई है. फिर भी यह OpenAI के ChatGPT से पीछे है, जिसके 600 मिलियन मंथली एक्टिव यूजर्स (MAUs) हैं. वहीं Meta AI के भी लगभग 500 मिलियन MAUs हैं. रिपोर्ट से यह साफ है कि भारत में AI को लेकर अभी बड़ी संभावनाएं और अवसर मौजूद हैं. लेकिन इसके लिए जागरूकता बढ़ाने और भाषाई पहुंच को मजबूत करने की जरूरत है—जिस दिशा में Google का Gemini बड़ा कदम साबित हो सकता है.

मुहांसों से बचने के लिए अपनाए ये 8 कारण

क्या चेहरे पर जब-तब उभर आने वाले मुहांसो का कारण आप जानते हैं। सिर्फ ऑइली फूड खाने से ही नहीं बल्कि इन 5 कारणों से भी हो सकते हैं मुहांसे। मुहांसों के यह 8 कारण आप नहीं जानते होंगे, लेकिन मुहांसों से बचने के लिए इन्हें जानना जरूरी है… 1 तनाव – जी हां तनाव भी मुहांसों का एक कारण हो सकता है। दरअसल जब आप तनाव में होते हैं तो शरीर में कार्टिसोल हार्मोन का स्त्राव होता है। कार्टिसोल, सिबेकस द्वारा त्वचा पर सीबम या तेल के उत्पादन को प्रोत्साहित करता है जिसके कारण त्वचा पर मुहांसे होने लगते हैं। 2 कुछ कॉस्मेटिक उत्पाद भी त्वचा पर मुहांसों का कारण बनते हैं, जैसे कोल्ड क्रीम, फाउंडेशन, चिकनाई युक्त उत्पाद, तेल आदि के कारण त्वचा पर मुहांसे हो सकते हैं, खास तौ से तब, जब आपकी त्वचा तैलीय है। 3 कभी-कभी कुछ विशेष दवाओं का सेवन भी आपकी त्वचा पर मुहांसे पैदा कर सकता है। स्टीरॉयड्स, लिथियम, आयोडाइड्स के कारण त्वचा पर मुहांसों की संभावना बढ़ जाती है। 4 तापमान और मौसम में परिवर्तन के कारण भी अक्सर त्वचा पर मुहांसों की समस्या होती है। खास तौर से गर्म या नमीयुक्त मौसम पसीने के साथ ही बैक्टीरिया पैदा करता है, जो मुहांसों का भी कारण बनता है।   5 शरीर में हार्मोन परिवर्तन के कारण मुहांसों का उभरना बेहद सामान्य घटना है। महिलाओं में मासिकधर्म के पहले या उस दौरान मुहांसे होना इसका ही एक उदाहरण है, जब हार्मोन्स परिवर्तत या असंतुलित होते हैं। 6 कई बार मुहांसों का लगातार होना अनुवांशिकता भी हो सकता है। अगर आपके माता-पिता या दादा-दादी को यह समस्या रही है, तो हो सकता है कि आपको यह समस्या अनुवांशिक रूप से प्राप्त हुई हो। 7 अत्यधिक तेल व मसालेदार भोजन करना और फास्ट फूड का सेवन त्वचा पर मुहांसे पैदा करने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इसके अलावा पेट खराब होना या पाच संबंधी समस्याएं भी मुहांसों का एक कारण है। 8 त्वचा पर किसी भी प्रकार की गंदगी, चाहे वह धूल मिट्टी या मृत त्वचा के जमाव के कारण हो, त्वचा पर मुहांसे पैदा करने में अहम भूमिका निभाती है। इसके लिए त्वचा की सफाई का विशेष ध्यान रखें।  

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