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हेल्थ टिप्स – क्या ज्यादा फायदेमंद? आलू या शकरकंद, एक्सपर्ट से जानें बेनिफिट्स, ज्यादा खाने के नुकसान, किसे नहीं खाना चाहिए

Which is more beneficial? Potato or sweet potato

Which is more beneficial? Potato or sweet potato हर भारतीय रसोई में आलू और शकरकंद की खास जगह है। ये दोनों ही फूड हमारी थाली में अहम स्थान रखते हैं। इन दोनों में कई सारी समानताएं हैं, जो उन्हें एक जैसा बनाती हैं। अंग्रेजी भाषा में दोनों के नाम भी मिलते-जुलते हैं। आलू को ‘पोटैटो’ और शकरकंद को ‘स्वीट पोटैटो’ के नाम से जाना जाता है।आलू को सब्जियों का राजा कहा जाता है और हर भारतीय रसोई में हमेशा इसकी मौजूदगी होती है। वहीं शकरकंद अपने मीठे स्वाद और न्यूट्रिएंट्स की वजह से अलग पहचान रखता है।शकरकंद को कई डिश में मिठास के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सर्दी के मौसम में शकरकंद खूब खाया जाता है। हालांकि, जब बात सेहत की आती है, तो यह सवाल उठता है कि इन दोनों में से क्या अधिक फायदेमंद है? ऐसे में आज हम सेहतनामा में जानेंगे कि- आलू और शकरकंद में क्या ज्यादा सेहतमंद है?इन दोनों के क्या फायदे और नुकसान हैं? आलू के फायदे आलू के कई सारे चाहने वाले हैं। लोग इसे अलग-अलग रूपों में पसंद करते हैं। हालांकि इसके स्वाद के साथ हेल्थ बेनिफिट्स की वजह से भी इसे पसंद किया जाता है। विटामिन C: एक मध्यम आकार का यानी तकरीबन 115 ग्राम का एक आलू खाने से विटामिन C की दैनिक जरूरत की 11% पूरा हो जाता है।विटामिन C कोलेजन बनाने में मदद करता है। यह आयरन के अवशोषण में सहायक होता है। इसके अलावा आलू में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट भी होता है।विटामिन B6: आलू में विटामिन B6 भी होता है, जो हमारी दैनिक आवश्यकता का 25% पूरा करता है। विटामिन B6 रेड ब्लड सेल्स के उत्पादन में मददगार है।यह ऊर्जा के रूपांतरण और ब्रेन के न्यूरोट्रांसमीटर के निर्माण में मदद करता है, जो मूड और नींद को नियंत्रित करते हैं। फाइबर: आलू में फाइबर भी पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है।पोटेशियम: इसमें पोटेशियम होता है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है। यह नर्वस सिस्टम और मांसपेशियों के कार्य में मदद करता है। स्टार्च: आलू में एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट होता है, जिसे स्टार्च कहा जाता है। यह छोटी आंत में नहीं टूटता, बल्कि सीधे बड़ी आंत में जाता है। यह आंतों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। हालांकि, पेट की समस्या हो तो आलू खाने से बचना चाहिए। शकरकंद के फायदे शकरकंद अपने लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स और फाइबर के कारण डायबिटीज कंट्रोल करने और वजन घटाने में मददगार है। शकरकंद फाइबर, विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होता है। इसके छिलके में पाया जाने वाला फाइबर प्रीबायोटिक गुणों से भरपूर होता है, जो गुड बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देता है और आंतों की हेल्थ को बेहतर बनाता है। विटामिन A: नारंगी शकरकंद में बीटा-कैरोटीन और प्रोविटामिन A की भरपूर मात्रा होती है, जो आंतों में जाकर विटामिन A में बदल जाता है। एक मध्यम आकार का शकरकंद (114 ग्राम) खाने से रोज की विटामिन A की जरूरत का 122% मिल जाता है। यह सेल्स के विकास, इम्यून सिस्टम, प्रजनन और आंखों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी होता है। पॉलीफेनोल्स: शकरकंद में पॉलीफेनोल्स एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो सूजन को कम करने, कोलेस्ट्रॉल के स्तर को सुधारने और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। बैंगनी शकरकंद में पाया जाने वाला एंथोसाइनिन सूजन को कम करने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में सहायक होता है। विटामिन C और विटामिन B6: शकरकंद विटामिन C और विटामिन B6 का भी अच्छा स्रोत है। इसमें भी आलू की तरह प्रतिरोधी स्टार्च पाया जाता है, जो आंतों के स्वास्थ्य को सुधारने, ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद करता है। साथ ही इससे पेट भरे होने का एहसास होता है, जो वजन घटाने में मददगार हो सकता है।तो, क्या आपने यह सोच लिया है कि आपकी हेल्थ के लिए क्या बेहतर है– आलू या शकरकंद? आइए ग्राफिक के जरिए दोनों में पाए जाने वाले न्यूट्रिएंट्स और डेली वैल्यू के बीच के अंतर को समझते हैं। क्या आलू और शकरकंद का कुछ नुकसान भी है? आलू और शकरकंद दोनों ही हेल्थ के लिए फायदेमंद हैं, लेकिन अधिक मात्रा में खाने से कई नुकसान हो सकते हैं। साथ ही एलर्जी की समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों को शकरकंद खाने से बचना चाहिए।शकरकंद में विटामिन A की अधिकता होती है। इससे शरीर में पॉइजनिंग हो सकती है। वहीं अधिक मात्रा में आलू खाने से कई सारी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। आइए इसे ग्राफिक के जरिए जानते हैं। आपके लिए कौन सा बेहतर? आलू और शकरकंद दोनों ही हेल्थ के लिए फायदेमंद होते हैं। इनमें कार्बोहाइड्रेट्स, फाइबर, विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स की भरपूर मात्रा पाई जाती है। शकरकंद में विटामिन A की मात्रा ज्यादा होती है, जो आंखों की सेहत और इम्यून फंक्शन के लिए बेहद जरूरी है।अपनी हेल्थ को ध्यान में रखते हुए जरूरत के अनुसार, आलू और शकरकंद दोनों को हम अपनी डाइट में संतुलित मात्रा में शामिल कर सकते हैं। अगर इनके साथ प्रोटीन रिच फूड, कई सारी हरी सब्जियां और हेल्दी फैट्स हो, तो ये हमारी सेहत के लिए अधिक फायदेमंद साबित होते हैं। किसे आलू या शकरकंद नहीं खाना चाहिए क्रॉनिक डायबिटीज के मरीजों को आलू खाने से बचना चाहिए। इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।आलू में स्टार्च की अधिक मात्रा होती है। ऐसे में गैस्ट्रिक या एसिडिटी की समस्या से जूझ रहे लोगों को आलू से परहेज करना चाहिए।आलू में एक ऐसा केमिकल होता है, जो एनेस्थीसिया के असर को कम कर सकता है। साथ ही सर्जरी से रिकवरी में देरी का कारण बन सकता है। इसलिए किसी सर्जरी के बाद इसे खाने से बचना चाहिए।आलू में ऑक्सलिक एसिड पाया जाता है, जो ब्लैडर सर्जरी के बाद दर्द पैदा कर सकता है। इसलिए ब्लैडर सर्जरी से पहले आलू नहीं खाना चाहिए।क्रॉनिक डायबिटीज हो तो शकरकंद नहीं खाना चाहिए। इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।लिवर की बीमारी से जूझ लोगों को भी शकरकंद नहीं खाना चाहिए। शकरकंद में पोटैशियम बहुत ज्यादा होता है, जो लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।

मस्तिष्क शांत रखता है शशांकासन

अभी जिस अवस्था में आप सब हैं, उस अवस्था में शरीर में बहुत-से रासायनिक  परिवर्तन होते हैं। ये रासायनिक परिवर्तन हमारे शरीर व मन के विकास को बाधित करते हैं, इसलिए बालपन में ही हमलोग शारीरिक या मानसिक या भावनात्मक रूप से अधिक चंचल हो जाते हैं। अपने आपको केंद्रित व एकाग्र नहीं कर पाते। आप लोगों ने अनुभव किया होगा कि पढ़ाई, तो हम खूब करते हैं, लेकिन जैसे-जैसे परीक्षा के दिन निकट आते हैं, दिल में घबराहट बढ़ती है। रात को भी पढ़ाई के पश्चात सबेरे हमको याद नहीं रहता कि हमने क्या पढ़ा था। हमारे माता-पिता व शिक्षक कहते हैं कि बच्चे की बुद्धि ठीक तरह से विकसित नहीं हुई है। लेकिन अगर सच पूछा जाये, तो बच्च कभी पढ़ाई-लिखाई में कमजोर नहीं होता। बच्चे के शरीर के भीतर अनेक प्रकार की ग्रंथियां होती हैं। इन ग्रंथियों से जो हार्मोन या रसायन निकलता है, वह उसके शरीर व मन के विकास में या तो सहायक होता है या बाधक बनता है। जब उसके शरीर के भीतर उत्पन्न होनेवाले ये रसायन सहायक होते हैं, तब उसकी स्मृति, उसकी मेधाशक्ति, उसकी प्रतिभा बहुत तीव्र हो जाती है। थोड़ी-सी पढ़ाई करने पर वह अच्छे अंक भी ले आता है। लेकिन जब यही रसायन बाधा के रूप में आते हैं, तब अभिभावक बच्चों को चाहे कितने ही चिकित्सकों, हकीमों, वैद्यों या महात्माओं के पास ले जायें, बच्च ठीक नहीं हो सकता।  इन्हीं ग्रंथियों को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए योग में विविध आसनों के अभ्यास हैं। इनमें पहला अभ्यास है शशांकासन। यह अभ्यास अगर तुम सब रोज सबेरे उठ कर दस बार कर सकते हो, तो बहुत उत्तम होगा, क्योंकि इस अभ्यास में हम अपने मस्तिष्क को शांत करते हैं। इसके साथ-साथ हमारे शरीर में विशेष ग्रंथि है, जिसको एड्रीनल ग्रंथि कहते हैं। इससे जब रस निकलता है, जिसे एड्रिनलिन कहते हैं, तो शारीरिक व मानसिक उत्तेजना बहुत बढ़ जाती है। उस रस को नियंत्रित करने में यह आसन बहुत सहायक होता है। दूसरा अभ्यास है उष्ट्रासन। उष्ट्रासन का मतलब होता है, ऊंट के समान आकृति। उष्ट्रासन का अभ्यास मेरु दंड व पीठ के लिए उपयोगी है, क्योंकि विज्ञान ने शोध के द्वारा देखा है कि जब बहुत देर तक सिर झुका कर पढ़ते हैं, तो हमारे कंधे आगे की ओर झुक जाते हैं। यह अभ्यास पीठ को सीधा रखने के लिए बहुत उपयोगी है। एक और आसन है, जिसको सर्वागासन कहते हैं। यह शरीर के लिए बहुत उपयोगी अभ्यास है। इस आसन का प्रभाव गले की ग्रंथि पर पड़ता है, जिसे थायराइड ग्रंथि कहते हैं। यह थाइराइड ग्रंथि शरीर के विकास में अत्यंत उपयोगी व महत्वपूर्ण है। बचपन में कुछ लोग नाटे रहते हैं। कुछ लोग मोटे रहते हैं। नाटेपन व मोटेपन को दूर करने के लिए सर्वागासन व हलासन का अभ्यास होना चाहिए। ये तीन आसन हैं, जिनका अभ्यास तुम लोग रोज करोगे, तो अच्छे मानव के रूप में समाज को सही दिशा दे पाओगे।  

स्मार्टफोन सुरक्षित रखने की पांच टिप्स

अगर आप अपने सभी ऑफीशियल काम स्मार्टफोन में करते हैं तो आपको अपने फोन की सुरक्षा के लिए कुछ कड़े इंतजाम करने चाहिए। हम आपको 5 ऐसी टिप्स देंगे जिससे आप अपने फोन को सुरिक्षत रख सकते हैं। पासकोड:– अगर आप एंड्रायड फोन का प्रयोग कर रहे हैं तो स्मार्टफोन में पासकोड का प्रयोग करें, या फिर लॉक स्क्रीन पैटर्न सेट करें। इससे फोन का डेटा सुरिक्षत रख सकते हैं। वैरिफिकेशन:- अपने गूगल एकाउंट और आईक्लाउड एकाउंट को सुरिक्षत रखने के लिए सेटिंग में जाकर टू स्टेप वैरिफिकेशन ऑप्शन ऑन करें। इससे आपका आईक्लाउड स्टोरेज एकाउंट भी सेफ रहेगा। जेलब्रेकिंग:- इसकी मदद से आप फोन के सॉफ्टवेयर को अपनी तरह से सेट कर सकते हैं ये बिलकुल ऐसा ही जैसे किसी बाइक को मॉडीफाइ कर दें। एप्लीकेशन:- एप्लीकेशन इंस्टॉल करते समय सावधान रहें गूगल प्ले में एंड्रायड एप्लीकेशनों का ढेर लगा हुआ है लेकिन गूगल प्ले के अलावा ऑनलाइन कई फ्री एंड्रायड एप्लीकेशनें भी रहती है जिन्हें भूल कर भी डाउनलोड न करें। कोशिश करें कि एप्लीकेशन स्टोर से ही अलग से डाउनलोड कर इस्तेमाल करें, इससे सुरक्षा बढ़ती है। ब्राउजर:- जहां तक हो सके एप्लीकेशन का प्रयोग करें अगर आप अपने मोबाइल से बैंक से जुड़ा कोई काम कर रहे हैं या फिर शेयर मार्केट से जुड़े काम करते हैं तो इसके लिए मोबाइल ब्राउजर की जगह एप्लीकेशन का प्रयोग करें इसके लिए एप्लीकेशन स्टोर में जाकर एप्लीकेशन पहले डाउनलोड कर लें।  

कुदरती उपाय से भगायें बीमारियां

आज की भागदौड़ और व्यस्त जिंदगी में महिलाओं को अपने लिए समय नहीं मिल पाता है। घर और ऑफिस के काम से दबाव में उन्हें अपने स्वास्थ्य के साथ समझौता करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें दवा का सहारा लेना पड़ता है। ऊपर से शरीर की कुछ न कुछ परेशानियां हर रोज सताती है। पर, कुदरती तरीकों से कुछ खास शारीरिक समस्याओं को दूर किया जा सकता है। कमर और पीठ दर्द:- कमर और पीठ दर्द आमतौर पर हर महिला की समस्या है। 30 साल से ऊपर की महिलाओं में इसकी  शिकायत ज्यादा रहती है। कैल्सियम की कमी और मांसपेशियों में खिंचाव के कारण कमर व पीठ में दर्द रहता है। इसके लिए  हर रोज बिना चीनी का हल्दी वाला दूध पीयें। पानी का फुट बाथ लें। रीढ़ स्नान करें। इसके लिए मग में पानी लेकर उसे गर्दन से रीढ़ में डालें। घुटनों का दर्द:- घुटनों में दर्द के समस्या अब तो हर उम्र की महिला एवं युवतियों में देखी जा रही है। इसका मुख्य कारण अस्वस्थ जीवन शैली है। इसके लिए अजवाइन  के पानी  को गरम कर पट्टी के माध्यम से दर्द वाले हिस्से में सेकें। तिल एवं अश्वगंधा के तेल से मालिश करें। हल्दी वाला दूध पीयें। सिर दर्द:- दिन भर की थकान और तनाव के कारण सिर मे दर्द होने की शिकायत होने लगती है। इसके लिए योग, ध्यान और व्यायाम सबसे कारगर उपाय है। तुलसी वाली ग्रीन टी  पीयें।  अंकुरित दाल, गाजर पालक, कद्दू, शलगम, खीरा का सूप पीयें। चोकर युक्त आटा की रोटी खायें। हफ्ते में एक बार सिर में बादाम तेल से मालिश करें। गैस:- ज्यादा तला भूना और मसालदार खाना खाने से, रात में देर तक जागने एवं तनाव के कारण पेट में गैस बनती है। गैस से निजात पाने के लिए रोज सुबह दो गिलास गुनगुना पानी पीयें। धनिया, आंवला, मिश्रि,जीरे का आधा चम्मच चूर्ण खाना खाने के बाद लें। खाने में लहसुन एवं हींग का सेवन करे। नारियल पानी पीयें। साइनस:- महिलाएं घर का बचा खाना स्वयं खाती है। ठंठी चीजें खाने से साइनस की समस्या होती है। साइनस के मरीजों के लिए प्राणायाम बहुत कारगर है।  इसके लिए अदरक या तुलसी के रस को शहद में मिला कर लें। सौंफ, अदरक, तुलसी, छोटी इलायची, पुदीना का काढ़ा बना कर रोज पीयें। छुहारे वाला दूध पीयें।  

जीवन की असली परीक्षा शिक्षा पूरी करने के बाद होती है शुरू, अपनी किस्मत कर लें मुट्ठी में

हर व्यक्ति अपने जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहता है। जीवन की असली परीक्षा शिक्षा पूरी करने के बाद शुरू होती है, जब व्यक्ति प्रतियोगिता के दौर में स्वयं का मुकाम हासिल करने की कोशिश करता है। कठिन प्रतियोगिता के इस दौर में स्वयं को स्थापित करना किसी चुनौती से कम नहीं होता, इसलिए हर व्यक्ति जी-तोड़ मेहनत करता है। जीवन में सफलता पाने के लिए सबसे जरूरी है कि आप अपने पर विश्वास रखें। किसी भी कार्य की शुरुआत से पहले अपने अंदर यह विश्वास जगाएं कि आप उस काम को कर सकते हैं। कई बार कठिनाइयों को देखते हुए आप अपना विश्वास खोने लगते हैं। हम जब ऐसा करते हैं तो कई बार उस कार्य को पूरे फोकस से नहीं करते। ऐसा करना सफलता की राह में बड़ी परेशानी बन सकती है। व्यक्ति को हमेशा सकारात्मक सोचना चाहिए। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ता है। जब आप किसी कार्य को सकारात्मक सोच के साथ करते हैं तो आपको हमेशा यह सोच कर ही काम करना चाहिए कि जो कार्य आप कर रहे हैं, उसमें आपको सफलता जरूर मिलेगी। अगर किसी काम की शुरुआत में ही आप यह सोच लें कि आप जो कार्य कर रहे हैं, उसमें आपको सफलता नहीं मिलेगी, तो मुमकिन है कि आप उस कार्य में असफल हो जाएं।

छोटे बच्चों को पिलाते हैं बॉटल से दूध तो जान लें खतरे, हो सकती हैं ये बीमारियां

Baby Bottle Feeding Risks : छोटे बच्चों के लिए मां का दूध सबसे पौष्टिक माना जाता है. यह उनकी ओवरऑल हेल्थ की ग्रोथ में अहम रोल निभाता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चा मां का दूध जितना ज्यादा करेगा, उसका विकास उतना ही ज्यादा होता है. इससे बीमारियों का खतरा भी कम होता है. हालांकि, आजकल बिजी लाइफस्टाइल की वजह से कई बार वर्किंग वुमन अपने बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग कीबजाय बॉटल का दूध पिलाती हैं, जो बच्चे की सेहत (Child Health) के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है. यह उन्हें कई तरह से प्रभावित कर सकती है और ग्रोथ में भी समस्याएं पैदा कर सकती है. इससे कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं. कितने समय बाद बच्चे को दे सकते हैं बॉटल का दूध वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार, न्यूबॉर्न बच्चे को पहले 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध (mother’s milk) ही पिलाना चाहिए. इससे बच्चों का डेवलपमेंट सही तरह होता है. उनकी बॉडी स्ट्रॉन्ग होती है और इम्यूनिटी बढ़ती है.अगर किसी वजह से मां को दूध कम बन रहा है या नहीं मिल पा रहा है यानी ब्रेस्ट फीडिंग पॉसिबल नहीं हो पा रहा है तो जन्म के दो या तीन हफ्ते बाद बॉटल का दूध दे सकते हैं. हालांकि, यह सिर्फ अस्थायी उपाय ही है, कम से कम छह महीने तक इससे बचने की ही कोशिश करनी चाहिए. बच्चे को बॉटल का दूध पिलाने के खतरे बच्चे जब मां का दूध पीते हैं तो उनकी इम्यूनिटी मजबूत होती है. जब बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग की बजाय बॉटल से दूध पिलाया जाता है, तो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है. जिससे वह बार-बार सर्दी-खांसी, बुखार जैसी समस्याओं की चपेट में आ सकता है. छोटे बच्चों को बॉटल का दूध पिलाने से उनमें मोटापा बढ़ सकता है. खासकर तब जब बच्चों को जानवरों या पाउडर वाले दूध ही पिलाए जाए. दरअसल, जानवरों के दूध में फैट ज्यादा होती है,जो बच्चे के वजन को काफी ज्यादा बढ़ा सकता है. बॉटल का दूध पीने से बच्चों की ग्रोथ धीमी हो सकती है. बॉटल दूध से बच्चों के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक प्रवेश कर सकता है, जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास को स्लो कर सकता है. इससे उनकी ओवरऑल हेल्थ कमजोर हो सकती है. रबड़ के निप्पल वाले बॉटल से दूध पीने से बच्चों के फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है. इससे लंग्स कमजोर हो सकते हैं. जिससे बच्चे को सांस की समस्याएं हो सकती हैं. कई मामलों में यह निमोनिया का खतरा भी बढ़ा सकता है. Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

सर्दियों के लिए 5 हेल्दी आदतें आज ही अपनाएं

सर्दियों के दिनों में सुबह के वक्त उठना सबसे ज्यादा आलस भरा काम होता है और जब बात एक्सरसाइज करने की आती है तो ज्यादातर लोग इसे अगले दिन के लिए टाल देते हैं। दरअसल सर्दी के दिनों में रजाई की गरमाहट आपको उठने से रोकती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ चीजों को करने भर से आप रजाई जितनी ही गर्मी प्राप्त कर सकते हैं? आइए आपको बताते हैं ऐसे कुछ आसान टिप्स के बारे में, जिनकी मदद से आप शारीरिक और मानसिक रूप से ठंड के दिनों में खुद को फिट रख सकते हैं। ये टिप्स आपको सर्दियों में हेल्दी रखने के अलावा आपका आलसपना दूर करने में मदद कर सकते हैं। सर्दियों में 5 तरीकों से करें आलस को दूर वार्म अप करें सर्दियों के दिनों में सुबह उठकर, जो आपको सबसे पहले काम करना है वो ये कि आप हल्का-फुल्का वार्म अप करें। वार्म अप आपकी बंद आंखों को खोलने में मदद करेगा साथ ही शरीर को गर्माहट भी प्रदान करेगा। वार्म अप करने से न सिर्फ आपके शरीर को आलस दूर करने में मदद मिलेगी बल्कि आप पहले से ज्यादा बेहतर महसूस करेंगे। टहलें खाना खाने के बाद टहलना फायदेमंद माना जाता है लेकिन आप अगर सुबह-सुबह उठने के बाद थोड़ी दूर तक टहलने के लिए जाते हैं तो आप खुद को सर्दियों में फिट रख सकते हैं। आपको बस चलते वक्त अपने जोड़ों पर कम से कम दबाव डालना है और इतना ध्यान रखना है कि चलते वक्त आपके पैर बिल्कुल सही स्थिति में हों। इससे आपको अपनी हड्डियों को मजबूत बनाने में भी मदद मिलेगी। फार्टलेक ट्रेनिंग आपको कम से कम 15 मिनट तक तेजी से भागने और पैरों को जितना हो सके उतना फैला कर भागना चाहिए। ये ट्रेनिंग आपको फिट रखने के साथ-साथ शरीर को गर्म रखने में भी मदद करेगी। आप चाहें तो हर 2 मिनट बाद थोड़ी-थोड़ी दूर लंबी कूद भी कर सकते हैं या फिर हल्के-हल्के कदमों से भी दौड़ सकते हैं। स्किन का रखें ख्याल सर्दियों में अक्सर आपकी स्किन ड्राई हो जाती है इसलिए ये सलाह दी जाती है कि आपको मॉश्चराइजर का इस्तेमाल करने के साथ-साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की जरूरत होती है। सर्दियों में आपके होंठ या फिर हाथों की स्किन न फटे इसके लिए आप पैट्रोलियम जेली का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अच्छी डाइट लें सर्दियों में आपको अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। सर्दियों में गर्म खाने का मतलब ये नहीं है कि आप कुछ भी खा लें। बल्कि आपको ऐसे फूड्स का विकल्प चुनना चाहिए, जो आपका वजन बढ़ाए बिना आपको अंदर से गर्म रखने में मदद करें। आप एक्सरसाइज के साथ-साथ हेल्दी डाइट जरूर फॉलो करें।

कैसे इंस्टॉल करें अपने पीसी में फ्री एंटीवॉयरस

कंप्यूटर के लिए एंटीवॉयरस उसी तरह से काम करते हैं जैसे हमारे लिए सर्दी जुकाम से बचने के लिए दवाई। अगर आप बाजार में मौजूद महंगे एंटीवॉयरस नहीं खरीद सकते हें तो कई फ्री एंटीवॉयरस भी मौजूद है जिसे आप अपने कंप्यूटर या फिर लैपटॉप में डाउनलोड कर सकते हैं, अब इन्हें डाउनलोड कैसे करें इसके बारे में चिंता करने की कोई जरूरत नहीं क्योंकि एंटीवॉयरस को इंस्टॉल करना बेहद आसान है। नीचे दी गई स्टेप को फॉलों करके आप आसानी से अपने कंप्यूटर में एंटीवॉयरस इंस्टॉल कर सकते हैं। सबसे पहले जिस एंटीवॉयस को आप अपने कंप्यूटर में इंस्टॉल करना चाहते हैं उसे अपने कंप्यूटर पर डाउनलोड कर लें। जहां पर एंटीवॉयरस इंस्टॉल किया हैं उस ऑइकॉन पर राइट यानी कंप्यूटर माउस की बाईं तरफ क्लिक करें क्लिक करते ही रन का ऑप्शन दिखेगा जिसमें क्लिक कर दें रन पर क्लिक करते ही एंटीवायरस कंप्यूटर में इंस्टॉल होने लगेगा। इंस्टॉल होने से पहले एंटीवायरस में कस्टम और मैन्यूअल का ऑप्शन आएगा मतलब आप जिन चीजों को इंस्टॉल करना चाहते हैं उसे खुद सलेक्ट करेंगे या फिर एंटीवायरस खुद ही जरूरी अपडेट इंस्टॉल कर दे। एंटीवॉयरस इंस्टॉल हो जाने के बाद आपकी कंप्यूटर स्क्रीन पर एंटीवॉयरस का आइकॉन आ जाएगा जिस पर क्लिक कर दें आईकॉन पर क्लिक करते ही एंटी वॉयरस का कंट्रोल पैनल ओपेन हो जाएगा ध्यान रहे अब आपको एंटीवॉयरस एक्टीवेट करना होगा जिसके लिए इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत पड़ेगी। एक बार एंटीवॉयरस अपडेट हो जाने के बाद आपका कंप्यूटर सेफ हो जाएगा। पहली बार एंटीवॉयरस अपडेट करने पर हो सकता है थोड़ा समय लगे इसलिए थोड़ा सब्र करें एंटी वॉयरस अपडेट होने के बाद कंट्रोल पैनल में रेड की जगह ग्रीन कलर दिखनें लगेगा।  

लगातार काम करने से होती हैं ये शारीरिक समस्याएं, ऐसे बचें इनसे

भारत की 121 करोड़ से ज्यादा आबादी में 65 फीसदी लोगों की उम्र 35 साल या इससे कम है। देश के युवा अलग-अलग क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर युवा प्राइवेट कंपनियों में जॉब करते हैं। कामयाबी हासिल करने के लिए जी-तोड़ मेहनत करते हैं। पर हममे से कई लोग मेहनत के आगे अपनी हेल्थ को भूल जाते हैं। ऑफिस वर्क हो या फील्ड वर्क, लगातार काम करने और काम का प्रेशर लेने के चलते, कम उम्र में ही कुछ शारीरिक समस्याएं शुरू हो जाती हैं। आप अगर इन्हें नजरअंदाज करते हैं तो ये आगे चलकर बड़ी बीमारी का रूप ले सकती हैं। हमने कुछ फिजियोथैरेपिस्ट से ऑफिस जाने वाले लोगों से जुड़ी शारीरिक समस्याओं और उनके रोकथाम को लेकर बातचीत की। शायद आपको भी इनमें से कुछ हेल्थ प्रॉब्लम शुरू हुई हों या कई दिनों से आप परेशान हों। हम आपको बता रहे हैं कि कैसे खुद पर थोड़ा ध्यान देकर आप हेल्थ प्रॉब्लम्स को दूर रख सकते हैं या फिजियोथैरेपिस्ट की सलाह लेकर उन्हे जड़ से खत्म कर सकते हैं.. मेदांता हॉस्पिटल गुड़गांव के फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. आलोक मोहन कहते हैं, हमारे पास बैकपेन की समस्या लेकर ऐसे पेशेंट आते हैं, जो ऑफिस में ज्यादातर बैठकर काम करते हैं। पॉश्चर इमबैलेंस यानी ठीक ढंग से न बैठने की वजह से यह समस्या आती है। ग्वालियर के डॉ. गौरव त्रिपाठी के मुताबिक, ऑफिस गोइंग लोगों में स्पॉन्डलाइटिस और लंबर स्पॉन्डलाइटिस जैसी समस्याएं आम हैं। बचाव के उपाय डॉ. आलोक बताते हैं कि अगर आपको इन समस्याओं से बचना है तो ऑफिस में बैठने का सही तरीका काफी जरूरी है। लगातार सीट पर नहीं बैठना चाहिए। बीच में सीट पर बैठे-बैठे आप अपनी बॉडी को स्ट्रैच कर सकते हैं। इसके लिए एक्सरसाइज चार्ट देखिए। डॉ. गौरव बताते हैं कि सर्वाइकल या लंबर स्पॉन्डलाइटिस बढ़ जाने पर मशीन से एक्सराइज या अलग-अलग थैरेपी लेनी होगी। डॉ. आलोक बताते हैं कि फील्ड पर रहने वाले या लगातार बाइक चलाने वाले लोगों को कंधे में दर्द, अपर बैक पेन जैसी समस्याएं हो जाती हैं। डॉ. गौरव के मुताबिक, ज्यादा देर तक बैठकर काम करने से भी घुटने में दर्द हो सकता है। डॉ. गौरव ने कहा, सर्वाइकल बढ़ने पर सिर दर्द, चिड़चिड़ापन, उल्टी और चक्कर शुरू हो जाते हैं। चिड़चिड़ेपन से बीपी प्रॉब्लम भी हो सकती है। ऑफिस जाने से पहले घर पर:- -सिंगल नी टू चेस्ट स्ट्रेच-पीठ के बल लेटें और पैरों को सीधा रखें। -एक घुटने को पकड़कर छाती तक लाएं। -20 सेकेंड तक होल्ड करें। -रिलैक्स होकर दूसरे पैर के साथ भी ऐसा करें। -दोनों पैरों से 5 दफा रिपीट करें। स्टैंडिंग स्ट्रेच:- -पैर सीधे करके खड़े हो जाइए। -घुटने के पीछे से पैर को पकड़िए। -जितना हो सके पैर को ऊपर उठाइए। 20 सेकेंड तक होल्ड कीजिए। -रिलैक्स होकर दूसरे पैर के साथ ऐसा कीजिए। दोनों साइड से 5 बार ऐसा कीजिए। हिप रोलिंग:- पहले सीधे लेटें और अपने दोनों पैरों को थोड़ा ऊपर उठाएं। अपने हाथों को बांधकर छाती पर रखें। फिर अपने सिर को दाएं घुमाएं और मुड़े हुए पैरों को बाएं। फिर धीमे-धीमे पैरों को सीधे करके रिलैक्स हों। फिर पैर को वापस मोड़कर सिर सेंटर पर करें। फिर सिर को बाएं और मुड़े हुए पैरों को दाएं घुमाकर यह प्रक्रिया दोहराएं। साइड बेंडिंग:- सीधे खड़े हों। पैरों के बीच थोड़ा गैप रखें और हाथों को सीधे पैरों के सहारे नीचे। फिर अपने सिर को दाईं तरफ झुकाते हुए बायां हाथ सिर के सहारे दाईं तरफ ले जाएं और दायां हाथ सीधे रखें। फिर सीधे होने के बाद सिर को बाईं तरफ और दायां हाथ बाईं तरफ ले जाएं।  

जब आने वाला हो नन्हा मेहमान, इन बातों का रखें खास ध्यान

गर्भावस्था का पता चलने के बाद अक्सर महिलाएं कुछ बातों की जानकारी नहीं होने की वजह से ऐसे कदम उठा लेती हैं, जो आगे चलकर डिलिवरी के दौरान मुश्किल पैदा कर सकते हैं। कुछ एहतियात बरतकर इन कठिनाइयों से बचा जा सकता है। प्रेग्नेंसी एक ऐसा वक्त होता है, जो हर महिला के लिए बहुत खुशियां लेकर आता है, लेकिन स्वास्थ्य के लिए यह थोड़ा क्रिटिकल टाइम होता है। अब आप पर एक और जान की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। ऐसे में कुछ बातों का खास ध्यान रखकर इस दौरान आने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है। एकदम न बढ़ाएं डाइट:- अक्सर प्रेग्नेंसी की खबर मिलते ही घरवाले महिला की अधिक केयर करने लगते हैं। ऐसा करना ठीक है, लेकिन कुछ बातों को ध्यान रखने की जरूरत होती है। प्रेग्नेंसी के शुरुआती तीन महीनों में महिलाओं को जी-मचलाना, उल्टी, बदहजमी और गैस जैसी शिकायतें आम होती हैं। इसलिए इन महीनों के दौरान खाने की मात्रा को बढ़ाने की जरूरत नहीं होती। इसके स्थान पर डाइट में प्रोटीन, विटामिन और मिनरल वाले हल्के खाने को शामिल करना चाहिए। नाश्ते को न करें दरकिनार:- प्रेग्नेंसी के शुरुआती दौर में अक्सर महिलाएं ऑफिस या घर के कामकाज में सामान्य तौर पर लगी रहती हैं। इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन प्रेग्नेंसी का पता चलने के बाद नाश्ते को बिल्कुल अवॉइड नहीं करना चाहिए। पोषक तत्वों से भरपूर नाश्ता लेने के बाद यदि महिलाओं को दिन के आहार में थोड़ा कम पोषण मिले, तो यह होने वाले बच्चे की सेहत पर ज्यादा असर नहीं डालता। इसके साथ ही सुबह के समय थोड़ा-बहुत खाने से दिनभर गैस और एसिडिटी की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। लालच पर नियंत्रण रखें:- महिलाओं में चटपटा खाने की आदत पुरुषों के मुकाबले ज्यादा होती है। यह आदत प्रेग्नेंसी के दौरान और अधिक बढ़ जाती है। ऐसे में महिलाएं चुपचाप चाट, पानीपुरी, भेल जैसी चीजें खाने की कोशिश करती हैं। ये चीजें आने वाले नन्हे मेहमान की सेहत पर बुरा असर डाल सकती हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादा मसालेदार और चटपटी चीजों का सेवन करने से महिलाओं को कई तरह की परेशानी हो सकती है। कभी न भूलें एक्सरसाइज करना:- प्रेग्नेंट महिलाओं को अपने खानपान के साथ ही फिजिकल फिटनेस की तरफ भी विशेष ध्यान देना चाहिए। एक बार प्रेग्नेंसी का पता चल जाने के बाद नियमित एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी होता है। इससे बॉडी आने वाले मेहमान को संभालने के लिए तैयार हो जाती है। एक्सरसाइज के साथ हल्का योग और प्राणायाम भी लाभकारी होगा। दिन में कम से कम आधा घंटा एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए।  

लाइफ में खुश रहने के लिए इन 5 बातों को जरूर जानें और समझें

सक्सेजफुल होने के लिए खुद पर फोकस करना जरूरी है। जब तक आप खुश होकर किसी काम को करने की शुरुआत नहीं करेंगे। सक्सेज आसानी से हाथ नहीं लगेगी। इसलिए लाइफ कोच अक्सर अपने आप में इस तरह के 4-5 बदलावों को लाने के लिए बोलते हैं। जिससे ना केवल आप सक्सेजफुल बनें बल्कि लाइफटाइम हैप्पी भी रहे। खुद को एक्सेप्ट करना सीखें। दूसरों के प्रभाव में आकर खुद के अंदर फिजिकल या इमोशनल बदलाव लाने की जरूरत नही है। अगर आपको लगता है कि आप जैसे भी हैं अच्छे हैं तो किसी की बात का निगेटिव असर पर्सनैलिटी पर ना पड़ने दें। अपना बेस्ट दें जब भी किसी काम की शुरुआत करें तो अपना बेस्ट दें। उस काम को पूरा करने के लिए अपनी पूरी मेहनत और लगन लगा दें। भले ही उस काम में सक्सेज ना मिले लेकिन मन में किसी भी तरह का पछतावा नहीं रहना चाहिए। अपने आप पर भरोसा रखें आत्मविश्वास जरूरी है किसी भी काम को लाइफ में पूरा करने के लिए सेल्फ कॉन्फिडेंस रखें। तभी कठिन से कठिन काम को करना आासन हो पाएगा। खुद पर जुल्म ना करें किसी काम को पूरा करने के लिए या करियर में आगे बढ़ने के लिए भी अपनी फिजिकल या मेंटल हेल्थ के साथ खिलवाड़ ना करें। जितना हो सके बस उतना ही करें क्योंकि सेहत और लाइफ सबसे ज्यादा जरूरी है। जिस चीज को पसंद करें वो काम करें अगर आपको कोई काम अच्छा लगता है और वो पॉजिटिव काम करके खुशी मिलती है तो जरूर करें। अपनी हॉबी और शौक को पूरा जरूर करें। इससे मेंटल पीस मिलता है और आप ज्यादा एनर्जेटिक महसूस करते हैं।

अंगूर खाओगे, तो ये रोग होंगे दूर

अंगूर स्वादिष्ट होने के साथ-साथ अनेक पौष्टिक गुणों से युक्त होते हैं। इनमें विटामिन, पोटेशियम, कैल्शियम, फास्फोरस, कार्बोहाइड्रेट और ग्लूकोज पर्याप्त मात्रा में होता है, जो शरीर में खून की वृद्धि करता है व कमजोरी दूर करता है। एनर्जी:- अंगूर में मौजूद शर्करा रक्त में आसानी से अवशोषित हो जाती है और थकान दूर कर शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। सफाई:- अंगूर शरीर में मौजूद विषैले तत्वों को आसानी से शरीर से बाहर निकाल देता है। अंगूर रक्त की क्षारीयता को संतुलित करता है। किसी कारणवश शरीर में अम्लता बढ़ जाए तो वह हानिकारक साबित होती है। ऐसा होने पर 20 से 30 ग्राम अंगूर खाएं। मिर्गी:- अंगूर को रोजाना खाने से कैंसर, एपेंडिक्स, बच्चों में कमजोरी, मिर्गी, रक्त संबंधी विकार, आमाशय में घाव और कमजोरी में लाभ मिलता है। पाचन:- यदि किसी ने धतूरा खा लिया हो तो उसे दूध में अंगूर का सिरका मिलाकर दें। यह टायफॉइड, मानसिक परेशानी और पाचन की गड़बड़ी में भी लाभकारी होता है।  

Hare Matar Kabab Recipe: सर्दियों का मजा दोगुना करें हरे मटर के तीखे कबाब के साथ, जानें इसे बनाने की पूरी रेसिपी

hare matar kabab recipe jane ise banane ki aasan recipe Hare Matar Kabab Recipe: सर्दी में कुछ खास और सेहतमंद खाने की तलाश में हैं तो हरे मटर के तीखे कबाब आपके लिए एक शानदार विकल्प हो सकते हैं। यह कबाब स्वाद में तो लाजवाब होते ही हैं, साथ ही आपकी सेहत का भी ध्यान रखते हैं। तो इस सर्दी आप भी स्वादिष्ट और पौष्टिक कबाबों को घर पर बनाकर स्वाद का आनंद ले सकते हैं। Hare Matar Kabab Recipe: सर्दियों की ठंडी हवाएं दस्तक देने के साथ ही गरमागरम और मसालेदार खाने की चाहत बढ़ा देता है। ऐसे में हरे मटर के तीखे कबाब (Hare Matar Kabab Recipe) न केवल आपके स्वाद को बढ़ाते हैं, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद होते हैं। अगर आप इस सर्दी कुछ अलग और मजेदार ट्राई करना चाहते हैं, तो ये रेसिपी आपके लिए परफेक्ट है। आइए जानते हैं, इसे बनाने की शानदार रेसिपी। हरे मटर कबाब बनाने की विधि हरे मटर कबाब के फायदे हरे मटर के कबाब न केवल स्वाद में बेहतरीन होते हैं, बल्कि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी बेहद फायदेमंद होते हैं। आइए जानते हैं इन कबाबों के कुछ प्रमुख लाभ

कोलेस्ट्रॉल को है ठीक से समझने की जरुरत

कोलेस्ट्रॉल लिवर द्वारा बनाया जाने वाला लिपिड है, जो शरीर की कई क्रियाओं के लिए जरूरी होता है। पिछले कुछ समय से कोलेस्ट्रॉल को सेहत का दुश्मन माना जाने लगा है, जबकि यह पूरी तरह सही नहीं है। दिल, मधुमेह, ब्लड प्रेशर के लिए इसे खतरा मानने से पहले जानें इससे जुड़े कुछ मिथक… मिथक-1, हृदय रोगों का कारण रक्तप्रवाह के दौरान कोलेस्ट्रॉल एलडीएल और एचडीएल के जरिए एक जगह से दूसरी जगह जाता है। एचडीएल यानी अच्छा कोलेस्ट्रॉल रक्त से कोलेस्ट्रॉल को लिवर तक ले जाता है, वहीं एलडीएल (बुरा कोलेस्ट्रॉल) इसे लिवर से शरीर के दूसरे हिस्सों तक। आहार विशेषज्ञ अनुपमा मेनन कहती हैं, एचडीएल धमनियों में जमता नहीं है, वहीं एलडीएल धमनियों की दीवारों पर जम सकता है, जिससे रक्त प्रवाह सीमित होता है और हृदय रोगों की आशंका बढ़ती है। ऐसे में जरूरत एलडीएल के स्तर पर ध्यान देने की है। मिथक-2, प्रभावित होता है ब्लड कोलेस्ट्रॉल का स्तर गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट आदर्श सीके के अनुसार, ब्लड कोलेस्ट्रॉल दो स्रोत से उत्पन्न होता है, इसमें से अधिकतर यानी 85ः शरीर खुद बनाता है और शेष भोजन से मिलता है। ध्यान रखें, यदि भोजन में कोलेस्ट्रॉल अधिक है तो उसमें उच्च संतृप्त वसा व ट्रांस फैट की अधिकता भी होगी, जो ब्लड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा कर नुकसान पहुंचा सकता है। हमारा शरीर आहार में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा के आधार पर शरीर में कोलेस्ट्रॉल का निर्माण करता है। यदि आहार में कोलेस्ट्रॉल अधिक है तो शरीर इसका कम निर्माण करेगा। ब्लड कोलेस्ट्रॉल का स्तर जेनेरिक संरचना पर भी निर्भर करता है। मधुमेह पीड़ितों के लिए लिपिड प्रोफाइल व एलडीएल अधिक महत्व रखते हैं। मिथक-3, कोलेस्ट्रॉल कम करना है तो लें लो फैट डाइट अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन में छपे अध्ययन के अनुसार, कम वसा वाली डाइट का खास फायदा नहीं होता। इससे शरीर कई बार फायदेमंद वसा से भी वंचित रह जाता है और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ खाने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे हृदय रोग व मधुमेह का खतरा बढ़ता है। डॉ. अनुपमा मेनन कहती हैं, संतृप्त वसा जैसे रेड मीट, फुल क्रीम मिल्क प्रोडक्ट्स, घी और नारियल तेल शरीर में एलडीएल का स्तर बढ़ाते हैं, इसलिए इनका सेवन कम करना चाहिए। ट्रांस फैट, जो होइड्रोजेनेटेड वनस्पति तेल में पाए जाते हैं, सबसे हानिकर व शरीर के लिए अनुपयोगी वसा है, जिससे एलडीएल बढ़ता है और एचडीएल कम होता है। डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ जैसे आलू चिप्स, बेकरी प्रोडक्ट व मैदा आदि में फाइबर कम और ट्रांसफैट अधिक होता है। नारियल तेल को दोबारा इस्तेमाल करना भी ट्रांस फैट के स्तर को बढ़ाता है। मिथक-4, मेवा व अंडे का सेवन बढ़ाता है कोलेस्ट्रॉल पशु ऊतकों से ही कोलेस्ट्रॉल उत्पन्न होता है। मेवा वनस्पति जन्य है, इसमें कोलेस्ट्रॉल नहीं होता। सूखे मेवे में असंत़ृप्त वसा होती है, जिससे कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार आता है। डॉ. अनुपमा के अनुसार, अंडे के पीले भाग में मिनरल, असंतृप्त वसा, विटामिन डी व बी-12 प्रचुरता में होते हैं। एक अंडे में 200 से 300 एमजी कोलेस्ट्रॉल होता है, जो शरीर के लिए अनुकूल नियमित 200 एमजी की सीमा से अधिक है। जिन्हें कोलेस्ट्रॉल की समस्या नहीं है, वे सप्ताह में 5-6 दिन अंडा खा सकते हैं। कोलेस्ट्रॉल को यूं करें मैनेज:- -प्रतिदिन साबुत अनाज, प्राकृतिक खाद्य पदार्थ, फल व सब्जियां खाएं। -प्रतिदिन 30 मिनट व्यायाम करें। -ट्रांस फैट व सेचुरेटेड फैट का सेवन कम करें। -अच्छे कोलेस्ट्रॉल के लिए सूखे मेवे, अलसी के बीज, सूरजमुखी के बीज और फैटी फिश का सेवन करें। -कम वसा वाले डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करना चाहिए।  

घरेलू उपचार से संवारें अपने सौंदर्य को

आज की इस व्यस्त जीवनशैली में सुन्दर और आकर्षक त्वचा पाने की तमन्ना लिए रोज-रोज पार्लर के चक्कर लगाना किसी के लिए भी मुश्किल काम हो सकता है। ऐसे में अपनी इस समस्या के समाधान के लिए घर पर ही घरेलू उपाय अपनाकर भी आप सौंदर्य के रास्ते में आने वाली रुकावटों को दूर करके आकर्षक स्किन पा सकती हैं। वो कैसे, आइये जानें.. ओपन पोर्स – एक टी स्पून कैलेमाइन पाउडर व एक टी स्पून चंदन पाउडर में टमाटर का जूस मिलाकर पेस्ट बनाएं और उसकी लेयर अपने चेहरे पर लगाएं। इस पैक को 15-20 मिनट तक लगाए रखें और फिर ठंडे पानी से चेहरा धो लें। इस पैक में शामिल कैलेमाइन और चंदन पाउडर पोर्स को बंद करेंगे और टमाटर में मौजूद लाइकोपीन से स्किन टाइट होगी। ब्लैकहैड्स – एक टी स्पून मुल्तानी मिट्टी, एक टी स्पून जौ के आटे में थोड़ी सी खसखस, 4-5 चम्मच कच्च दूध और ताजी पुदीने की पत्तियों का पेस्ट मिलाकर स्क्रब बना लें। इस पेस्ट को पूरे चेहरे पर लगाएं और फिर सकरुलर दिशा में स्क्रब करें। कुछ देर के लिए उसे यूं ही छोड़ दें और फिर पानी से धो दें। इस स्क्रब से स्किन डीप क्लीन होगी, साथ ही रोजाना स्क्रब करने से ब्लैकहैड्स जैसी कोई समस्या नहीं होगी। पिंपल्स – नीम व पुदीने की सूखी पिसी पत्तियों के पाउडर में आधा चम्मच कैलेमाइन पाउडर, चुटकी भर हल्दी और गुलाब-जल मिलाकर पेस्ट बनाएं और अपने चेहरे पर लगाएं। इस पैक का रोजाना इस्तेमाल करने से मुहांसे कुछ ही दिनों में सूख जाएंगे। नीम में मौजूद डिसइंफेक्टिंग गुण और पुदीने में शामिल एंटी-बैक्टीरियल गुण स्किन का एक्ने से बचाव करेंगे, उन्हें हील करेंगे और गुलाब जल से त्वचा पर निखार आएगा। एक्ने मार्क्स और स्कॉर्स – मुहांसों के निशानों को हल्का करने के लिए घर पर स्क्रब बना सकती हैं। सूखी नीम की पत्तियां, 5-6 लौंग, एक-एक कटोरी उड़द की धुली दाल, लाल मसूर की दाल, चने की दाल को दरदरा पीस लें, फिर उसमें चुटकी भर हल्दी, आधी कटोरी चंदन पाउडर व मुल्तानी मिट्टी को मिलाकर पाउडर बना लें। प्रतिदिन एक चम्मच पाउडर में पपीते का गूदा मिलाकर पेस्ट बना लें और अपने चेहरे पर लगाएं। इसे 2-4 मिनट तक चेहरे पर मलें और दस मिनट बाद पानी से धो दें। कच्चे पपीते में पैपीन नामक एंजाइम होता है, जो रंग साफ करता है साथ ही दाग-धब्बों को दूर करता है। यदि चेहरे पर मुहांसे हैं तो कोई भी स्क्रब करने से बचें। पिट्स यानी गड्ढे – घरेलू तौर पर आप इन निशानों को हल्का करने के लिए नारियल तेल से मसाज कर सकती हैं या विटामिन ई के कैप्सूल्स को फोड़कर भी लगा सकती हैं। अगर ये पिट्स काफी सालों से हैं तो इनका घरेलू तौर पर ठीक हो पाना मुश्किल है। इसके लिए आप किसी अच्छे कॉस्मेटिक क्लीनिक से लेजर ट्रीटमेंट की सिटिंग ले सकती हैं। रिंकल्स – अवोकेडो, मेल्टेड चॉकलेट, मिल्क पाउडर, आल्मंड पाउडर और फ्रेश क्रीम को मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं और हल्का सा सूख जाने पर कुछ देर के लिए स्क्रब करें। 15-20 मिनट फेस को यूं ही छोड़ देने के बाद उसे ठंडे पानी से धो दें। इस पैक में शामिल चीजों से आपकी स्किन को पोषण मिलेगा और वो जवां नजर आएगी।  

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