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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व: अब दूसरों को कैसे दिखाएंगे वन्यजीवों के संग बिताए यादगार पल? बदल गए जंगल सफारी के नियम

Bandhavgarh Tiger Reserve: How will you now show others your memorable moments with wildlife? Jungle safari rules have changed. मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में अब जंगल सफारी का अनुभव पूरी तरह बदलने जा रहा है। कोर क्षेत्र में पर्यटकों के लिए मोबाइल फोन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। नए नियम के तहत पर्यटकों को सफारी पर जाने से पहले अपने मोबाइल फोन बंद कर सुरक्षित रूप से जमा कराने होंगे। बिना मोबाइल फोन जमा किए किसी भी पर्यटक को कोर एरिया में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। पार्क प्रबंधन का कहना है कि यह फैसला जंगल और वन्यजीवों के प्रति पर्यटकों की संवेदनशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। बीते वर्षों में देखा गया था कि अधिकांश पर्यटक सफारी के दौरान फोटो खींचने, वीडियो बनाने और सोशल मीडिया के लिए रील्स रिकॉर्ड करने में ही व्यस्त रहते थे। इससे न केवल उनका ध्यान वन्यजीवों से भटकता था, बल्कि कई बार जानवरों की स्वाभाविक गतिविधियां भी प्रभावित होती थीं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय के अनुसार मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से जंगल की शांति भंग हो रही थी। उन्होंने बताया कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर सभी प्रवेश द्वारों पर मोबाइल जमा करने के लिए विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। यहां पर्यटकों को सुरक्षित व्यवस्था के तहत अपने फोन जमा करने की सुविधा मिलेगी, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के 17 नवंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में लिया गया है। आदेश में देश के सभी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्रों में मोबाइल फोन के उपयोग पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) शुभरंजन सेन ने इस संबंध में सभी रिजर्व प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश जारी किए थे, जिसके बाद बांधवगढ़ प्रबंधन ने तुरंत अमल शुरू कर दिया। नए नियम से सोशल मीडिया पर जंगल की तस्वीरें और वीडियो साझा करने का चलन कम होगा। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे वन्यजीव संरक्षण को मजबूती मिलेगी और पर्यटकों को प्रकृति के साथ वास्तविक जुड़ाव का अवसर मिलेगा। बाघों की अच्छी संख्या के लिए प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। प्रबंधन को उम्मीद है कि यह कदम जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देगा और जंगल का मूल स्वरूप बनाए रखने में मददगार साबित होगा।

शावकों के शव क्षत-विक्षत कैसे हुए, 36 घंटे बाद भी फारेस्ट नहीं ढूंढ पा रहें है जवाब

How did the bodies of the cubs get mutilated, the forest is not able to find the answer even after 36 hours उदित नारायणभोपाल। कूनो नेशनल पार्क से जन्मे दोनों शावकों की मौत पर प्रबंधन पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि शावकों के शव क्षत-विक्षत कैसे हुए..? क्या बाड़े में कोई और वन्य प्राणी पहुंचे थे या फिर मां स्वयं ही अपने शावकों पर हमला करके उन्हें मौत के घाट उतार दिया..? मौत के चार दिन बाद भी वन विभाग द्वारा अधिकृत जवाब नहीं आया है। सबसे बड़ा सवाल लिया है कि प्रधानमंत्री की ड्रीम प्रोजेक्ट में इतनी बड़ी लापरवाही के लिए कौन अफसर जवाबदेह है।श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों के वंश वृद्धि की कड़ी में 22 नवंबर को चीता निर्वा ने शावकों को जन्म दिया था। जन्म के 2 दिन बाद यानि 25 को दोनों शावकों की मौत हो गई। डीएफओ कुनो के अधिकृत प्रेस नोट में दोनों मृत शावकों के शव को क्षति-विक्षिप्त बताया। अर्थात शावकों की मौत किन जानवरों के हमले से हुई? इस सवाल का उत्तर खोजा जा रहा है। हालांकि सीसीएफ उत्तम कुमार शर्मा ने आशंका व्यक्त की है कि निर्वा पहली बार मां बनी है, इसलिए वहीं हमले कर सकती है। बिल्ली प्रजाति के एनिमल का यह स्वभाव भी होता है। इसके बावजूद भी आखिरकार कुनो पार्क के प्रबंधन पर सवाल उठना लाजमी है। 24 घंटे की मॉनिटरिंग कैसे की जा रही थी? सभी चीता को कॉलर आईडी से मीनिंग हो रही है तो फिर निर्वा के मूवमेंट पर नजर क्यों नहीं रखी गई..? यदि निर्वाह पर नजर रखी जाती तो उसके हमले से शावकों को बचाया जा सकता था।

वन विभाग में बड़े ट्रांसफर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक को हटाया

Major transfers in the forest department, Principal Chief Forest Conservator removed भोपाल। मध्यप्रदेश शासन ने गुरुवार रात वन विभाग के दो बड़े अधिकारियों का तबादला कर दिया है. इस ट्रांसफर ऑर्डर को भी बांधवगढ़ मामले से जाेड़कर देखा जा रहा है. दरअसल, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 10 हाथियों की मौत के मामले के बाद लगातार अधिकारियों के तबादले हो रहे हैं. वहीं अब मोहन यादव सरकार ने भारतीय वन सेवा के दो अधिकारियों को प्रशासकीय हित का हवाला देते हुए स्थानांतरित किया है. किन IFS के हुए ट्रांसफर मध्य प्रदेश शासन ने गुरुवार को एक आदेश जारी किया है, जिसमें प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) मुख्यालय भोपाल वीएन अम्बाड़े का ट्रांसफर कर दिया गया है. उनकी जगह वित्त एवं बजट शाखा के प्रधान मुख्य वन संरक्षक शुभरंजन सेन को प्रदेश का नया प्रधान मुख्य वन संरक्षक नियुक्त किया गया है. वहीं वीएन अम्बाड़े को वन राज विकास निगम भोपाल में प्रबंध संचालक बनाकर भेजा गया गया है. हाथियों की मौत के बाद प्रशासनिक सर्जरी गौरतलब है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व कुछ दिन पहले एक-एक करके 11 हाथियों की मौत हो गई थी. घटना के कुछ समय बाद ही बांधवगढ़ के दो अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया था. वहीं अब वाइल्डलाइफ वार्डन को भी हटा दिया गया है, और उन्हें नई जिम्मेदारी सौंप दी गई है.

मध्यप्रदेश: 10 हाथियों के मरने की वजह आई सामने, मिलेट का फंगी कनेक्शन

Madhya Pradesh: Reason for death of 10 elephants revealed, understand the fungal connection of millet भोपाल: मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले महीने 10 हाथियों की मौत का कारण कोदो में फफूंद संक्रमण बताया जा रहा है। हैदराबाद के ICRISAT के वैज्ञानिकों ने यह जानकारी राज्य सरकार को दी है। वन अधिकारियों का कहना है कि ICRISAT की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है। तीन तरह के फंगस मिले ICRISAT ने शुरुआती जांच में कोदो के नमूनों में तीन तरह के फफूंद – एस्परजिलस फ्लेवस, एस्परजिलस पैरासिटिकस और पेनिसिलियम साइक्लोपियम की मौजूदगी की पुष्टि की है। इन फफूंदों से साइक्लोपिआज़ोनिक एसिड नामक जहरीला पदार्थ पैदा होता है, जिसके सेवन से हाथियों की मौत होने की आशंका है। फाइनल रिपोर्ट का इंतजार वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि हमें ICRISAT की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है। उन्होंने पुष्टि की है कि हाथियों द्वारा खाए गए कोदो में ये फफूंद मौजूद थे। घटना की जांच के लिए, एमपी के अधिकारियों ने ICRISAT सहित पूरे भारत में 10 प्रयोगशालाओं में नमूने भेजे थे। ICRISAT, हैदराबाद स्थित एक गैर-लाभकारी अनुसंधान संगठन है, जो विशेष रूप से अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में कृषि प्रणालियों को बेहतर बनाने में माहिर हैं। बरेली से आ गई है रिपोर्ट बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) ने भी अपनी विषाक्तता परीक्षा रिपोर्ट में पुष्टि की है कि कोदो में फफूंद विषाक्त पदार्थों, विशेष रूप से साइक्लोपिआज़ोनिक एसिड के कारण हाथियों की मौत हुई। जहर की नहीं हुई थी पुष्टि हाथियों के लीवर, किडनी, तिल्ली और आंतों सहित विभिन्न अंगों के नमूने विश्लेषण के लिए IVRI भेजे गए थे। परीक्षणों में साइनाइड, भारी धातुओं, या ऑर्गनोफॉस्फेट या पाइरेथ्रोइड जैसे सामान्य कीटनाशकों का कोई निशान नहीं पाया गया। हालांकि, सभी नमूनों में साइक्लोपिआज़ोनिक एसिड पाया गया, जिसकी सांद्रता 100 पार्ट्स प्रति बिलियन (ppb) से अधिक थी। सात एकड़ में कोदो की खेती हाथियों ने जिस कोदो की फसल को खाया था वह बांधवगढ़ के अंदर 7 एकड़ जमीन पर थी। असामान्य फफूंद वृद्धि के संकेतों के बावजूद, जांचकर्ताओं को इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि उस क्षेत्र में कीटनाशकों का उपयोग किया गया था। स्थानीय किसानों ने भी ऐसे किसी भी रसायन के उपयोग से इनकार किया है। हाथियों की मौत 29 अक्टूबर, 2024 को शुरू हुई थी। शुरुआत में फफूंद संक्रमण पर ही संदेह जताया गया था। अधिकारी अभी भी इस मामले की जांच कर रहे हैं, ताकि फंगस की पूरी सीमा और क्षेत्र के वन्यजीवों पर इसके प्रभाव को समझा जा सके।

जंगल महकमे में रिक्त है एमडी से लेकर फील्ड डायरेक्टर तक के पद, खेला जा रहा है प्रभार का खेल

Posts from MD to Field Director are vacant in the forest department, the game of charge is being played. भोपाल। जंगल महकमे में पीसीसीएफ कैम्पा, वन विकास निगम के एमडी से लेकर वन वृत के संरक्षक, डीएफओ और पेंच और कान्हा नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर के पद रिक्त है। इन पदों पर पूर्णकालिक पोस्टिंग के बजाय राज्य शासन के शीर्ष अधिकारी प्रभार का खेल खेल रहे हैं। केंद्र की फटकार के बाद ही बांधवगढ़ में साल भर बाद फील्ड डायरेक्टर की पोस्टिंग की गई। पीसीसीएफ कैंपा और वन विकास निगम के एमडी, वन संरक्षक, छतरपुर वन वृत शिवपुरी वन वृत के वन संरक्षक, इंदौर वन वृत में वन संरक्षक, वन मंडल रीवा, सिवनी दक्षिण, शहडोल उत्तर, शाजापुर, राजधानी परियोजना वन मंडल, विदिशा इत्यादि वन मंडलों में डीएफओ के पद रिक्त है। वन मंडलो के अलावा भोपाल और सागर को छोड़कर सभी अनुसंधान एवं विस्तार वन वृत्त में पद खाली पड़े हुए है। इन पदों पर प्रभार देने का खेल खेला जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस खेल में मंत्रालय से लेकर मुख्यालय तक के शीर्ष अधिकारी शामिल हैं। वन विभाग ने प्रभार देने का कोई क्राइटेरिया तय नहीं किया गया है। पीपी मोड और शीर्ष अधिकारियों की गणेश परिक्रमा करने वाले आईएफएस अफसरों को ही प्रभार को दिया जा रहा है। मसलन, वन विकास निगम के एमडी का प्रभार इंदौर में पदस्थ एपीसीसीएफ अजय यादव को दिया गया है। पीसीसीएफ कैम्पा का प्रभार देने में मुख्यालय से लेकर मंत्रालय तक कंफ्यूज रहे। कैंपा पीसीसीएफ महेंद्र धाकड़ के रिटायर होने पर पीसीसीएफ संदीप सिंह को केंप का प्रभाव दिया गया। इस आदेश के 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि अचानक शासन ने अपने आदेश में संशोधन करते हुए केंप का प्रभार पीसीसीएफ पीके सिंह को दे दिया गया। वर्तमान में पीके सिंह के पास पीसीसीएफ सामाजिक वानिकी के अलावा संरक्षण का भी प्रभार है। कैम्पा का प्रभार आने पर उनके पास महकमे के दो-दो प्रमुख शाखों का प्रभार है। कान्हा का प्रभार डिप्टी डायरेक्टर को दिया एसीएस के ब्लू आई ऑफिसर एवं डिप्टी डायरेक्टर कान्हा नेशनल पार्क पुनीत गोयल को फील्ड डायरेक्टर का भी प्रभार दे दिया गया। ऐसा पहली बार किया गया है, क्योंकि कैडर में फील्ड डायरेक्टर पद सीसीएफ अथवा सीएफ का पद है। अंतरराष्ट्रीय स्तर छवि वाले कान्हा नेशनल पार्क में नक्सली मूवमेंट भी है। ऐसे डिप्टी डायरेक्टर के ऊपर कान्हा टाइगर रिजर्व का प्रबंध छोड़ देना, यह वन मंत्रालय की अक्षमता का परिचायक है। पेंच नेशनल पार्क के बफर जोन का वर्किंग प्लान बनाने वाले आईएफएस अधिकारी जे देवा प्रसाद को पेंच नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर के अलावा अनुसंधान विस्तार सिवनी का भी प्रभार दिया गया है। यानि प्रसाद को तीन पदों का प्रभार एक साथ दिया गया है। इंदौर वन वृत का प्रभार मस्तराम बघेल वन संरक्षक उज्जैन, छतरपुर का प्रभार अनिल कुमार सिंह वन संरक्षक सागर को दिया गया है। रिक्त सभी वन मंडलों में डीएफओ का प्रभार भी प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रशासन एक विवेक जैन की विशेष कृपा पर ही दिया गया है। प्रभार देने की खेल के चलते ही हाल ही में 6 आईएफएस अधिकारियों की वर्किंग प्लान बनाने के लिए में पोस्टिंग की गई, जिनमें से केवल देवांशु शेखर को ही सागर अनुसंधान एवं विस्तार का प्रभार दिया गया है। आपदा को अवसर में बदला प्रभार का खेल खेलने में मंत्रालय से लेकर मुख्यालय के शीर्ष अधिकारी ने तो आपदा को अवसर में बदल दिया है। यानी अधिकारियों की कृत्रिम कमी दर्शाकर प्रभार का खेल खेला जा रहा है। उदाहरण के तौर पर बांधवगढ़ नेशनल पार्क में फील्ड डायरेक्टर के पद के लिए बृजेंद्र झा, अनिल शुक्ला, रमेश विश्वकर्मा, रविंद्रमणि त्रिपाठी और नरेश यादव जैसे वाइल्ड लाइफ एक्सपीरियंस होल्डर आईएफएस अधिकारी के होते हुए भी शिवपुरी में पहले से कार्यरत वन संरक्षक अनुपम सहाय को फील्ड डायरेक्टर बनाकर वन संरक्षक शिवपुरी का पद जानबूझकर रिक्त कर दिया गया। ताकि इस पद को मैनेजमेंट कोटे से भरा जा सके। पोस्टिंग के इंतजार में है अफसर प्रभार का खेल खेलने के कारण ही वर्किंग प्लान बना चुके आईएफएस अधिकारियों की पोस्टिंग नहीं की जा रही है। दिलचस्प पहलू यह है कि इस मामले में मुख्यालय के अधिकारी बताते हैं कि प्रस्ताव शासन के पास लंबित है। यानी शासन के स्तर पर पोस्टिंग में कोई दिलचस्पी नहीं ली जा रही है। यही वजह है कि प्रभार का खेल खेलने के लिए मैदान खाली है। धार का वर्किंग प्लान बना चुके आदर्श श्रीवास्तव, जबलपुर में पदस्थ वर्किंग प्लान अधिकारी रमेश विश्वकर्मा, वर्किंग प्लान अधिकारी पीएन मिश्रा, वर्किंग प्लान अधिकारी एचएस मिश्रा जैसे आईएफएस अफसर को अपनी पोस्टिंग का इंतजार है। इनमें से कुछ अधिकारियों की सेवा के 5 महीने बचे हैं तो किसी अफसर के रिटायर होने की साल भर की मियाद बाकी है। अब सीएफ और डीएफओ भी खेलने लगे भोपाल से शुरू हुआ प्रभार देने का खेल अब वन संरक्षक और डीएफओ भी खेलने लगे हैं। धार वन मंडल में तो एक-एक डिप्टी रेंजरों को दो-दो रेंज के अलावा उन्हें एसडीओ का भी प्रभार दिया गया है। धार में इसी वर्ष वनपाल से बने प्रभारी उप वन क्षेत्रपालों को दो रेंजों का प्रभार दे दिया है। जबकि वन मंडल धार में ओरिजिनल उपवन क्षेत्रपाल विक्रम सिंह निनामा एवं कमलेश मिश्रा पदस्थ हैं और वे सीनियर भी हैं किन्तु उन्हें नहीं दिया गया। इसके कारण वन मंडल में असंतोष है और यही कारण है कि धार वन मंडल में अवैध कटाई और अतिक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। रीवा वन वृत के अंतर्गत आने वाले रीवा, सीधी, सतना और सिंगरौली, छतरपुर वन वृत्त के अलावा प्रदेश के अधिकांश वन मंडलों में एसडीओ- रेंजर के पद लंबे समय से रिक्त है। इन पदों पर भी प्रभार का खेल खेला जा रहा है।

बांधवगढ़ पहुंचकर नए विवाद में उलझे वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार

State Forest Minister Dilip Ahirwar got embroiled in a new controversy after reaching Bandhavgarh उदित नारायणभोपाल। वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने स्वयं वन्य प्राणी प्रोटेक्शन एक्ट की धज्जियां उड़ाते नजर आए। वह अपने गनमैन के साथ शनिवार को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की कुछ स्थल पर पहुंचे, जहां जहरीला पदार्थ खाने से जंगली हाथी दम तोड़ रहे थे। देश का यह पहला मामला है जब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में तीन दिन में 10 जंगली हाथियों की मौत हो गई।मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर शनिवार को वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार विभाग के अपर मुख्य सचिव और वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव के साथ बांधवगढ़ पहुंचे थे। वन्य प्राणी एक्सपर्ट अधिकारियों की मौजूदगी में वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार अपने गनमैन के साथ बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पहुंच गए। वहां उपस्थित किसी भी अधिकारी ने राज्य मंत्री को यह बताने की कोशिश नहीं की कि वन्य प्राणी प्रोटेक्शन एक्ट के तहत अश्वशास्त्र के साथ टाइगर रिजर्व अथवा सेंचुरी में जाना वर्जित है। वन्य प्राणी प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 31के अनुसार – अस्त्र-शस्त्र के साथ अभयारण्य में प्रवेश का निषेध है। इसमें यह भी प्रावधान किया है कि कोई भी व्यक्ति मुख्य वन्य जीव संरक्षक या प्राधिकृत अधिकारी से लिखित पूर्व अनुमति के बिना किसी भी हथियार के साथ अभयारण्य अथवा टाइगर रिजर्व में प्रवेश नहीं करेगा। सूत्रों के अनुसार वनराज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने गनमैन के साथ टाइगर रिजर्व में जाने हेतु पीसीसीएफ वन्य प्राणी वीएन अम्बाड़े से लिखित में पूर्व से अनुमति नहीं ली थी। अब सवाल यह भी उठने लगा है कि क्या फॉरेस्ट के अधिकारी अपने राज्य मंत्री के खिलाफ एक्शन की हिम्मत जुटा सकेंगे..?

जंगलों में अतिक्रमण रोकने पर वन माफिया का कहर, वन अमले पर जानलेवा हमला फिर भी पुलिस ने नहीं किया मामला दर्ज

Forest mafia wreaked havoc on forest encroachment, deadly attack on forest staff but police did not register a case मध्य प्रदेश में जंगलों में अतिक्रमण करने वाले वन माफिया के हौसले अब इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे उन्हें रोकने की कोशिश करने वाले वन अमले पर भी हमला करने से बाज नहीं आ रहे हैं। प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र से वन अमले पर इसी तरह से कई प्राण घातक हमले करने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला निमाड़ के ही खंडवा जिले के गुड़ी वन परीक्षेत्र का है, जहां जंगल में किये जा रहे अतिक्रमण की जानकारी मिलते ही वन अमला हरकत में आया और उसे रोकने पहुंचा था। इस दौरान जंगल की जमीन पर जुताई कर रहा एक ट्रैक्टर चालक वन अमले को देख, उसका कल्टीवेटर जंगल में ही छोड़कर फरार हो गया। वहीं जब वन अमला उस कल्टीवेटर को जब्त कर वापस लौट रहा था। इस बीच करीब 30 से 35 महिलाओं के झुंड ने वन अमले पर लाठी, पत्थरों और डंडों से हमला कर दिया और उन्हें वहां से भाग जानें, नहीं तो जान से मार देने की धमकियां देने लगा। यही नहीं, कुछ महिलाओं ने तो वन अमले के साथ झूमा झटकी कर वन कर्मचारियों की वर्दी तक फाड़ दी। हालांकि इसकी नामजद शिकायत पिपलोद थाना में शुक्रवार को करने के बावजूद भी पुलिस ने इसपर कोई एक्शन नहीं लिया। निमाड़ के जंगलों में लगातार अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है और यहां की बेशकीमती वन संपदा का अतिक्रमणकारी जमकर दोहन कर प्रकृति के साथ ही शासन को आर्थिक नुकसान भी पहुंचा रहे हैं। इन वन माफियाओं के खिलाफ पुलिस की पुख्ता कार्रवाई नहीं होने के चलते अब इस तरह की घटनाओं में लगातार इजाफा होते जा रहा है। ऐसा ही मामला गुडी वन परिक्षेत्र में बीते गुरुवार को सामने आया, जब सभी दीपावली पर्व की खुशियां मना रहे थे, तब जिले के गुड़ी रेंज के रेंजर नरेंद्र सिंह और उनकी टीम सूचना मिलने पर अतिक्रमण रोकने बीट भिलाईखेड़ा के कक्ष क्रमांक 749 में नवाड की भूमि पर पहुंची थी। यहां टीम को देख मौके से जुताई कर रहा ट्रैक्टर चालक उसका कल्टीवेटर निकालकर भाग गया। टीम ने मौके से कल्टीवेटर को जब्त कर इस मामले में वन अपराध का प्रकरण दर्ज किया। वन अमले पर इस तरह हुआ हमला बताया गया कि जब्ती कार्रवाई के बाद जब वन अमला दो दलों में वापस लौट रहा था। इस बीच दोपहर करीब 2 बजे सरपंच टांडे की लगभग 30-35 महिलाओं ने पीछे रह गए वन स्टॉफ के परिक्षेत्र सहायक सरमेश्वर के शांतिलाल चौहान, परिक्षेत्र सहायक कोठा के पंजावराव पंडाग्रे, परिक्षेत्र सहायक आराखेडा के कैलाश लोवंशी सहित वन रक्षकों जितेन्द्र पगारे, मनोज तंवर और भरत भूषण मिश्र एवं सुरक्षा श्रमिक गनिया को घेर लिया। यही नहीं, इन महिलाओं के झुंड ने इस वन अमले के साथ मारपीट की एवं धमकी देते हुए कहने लगी कि यहां से भाग जाओ नहीं तो जान से मार देंगे। इस दौरान महिलाओं के हाथों में दराती, पत्थर एवं लाठी डंडे भी थे। महिलाओं ने वन स्टाफ को डंडे से पीटा और वर्दी तक फाड़ दी। इस हमले में जितेन्द्र पगारे वन रक्षक की पीठ पर डंडे से पिटाई के निशान थे, तो वहीं मनोज तंवर के गले मे नाखून के निशान थे, जिसके फोटोग्राफ भी लिए गये। वन अमले ने की थी नामजद शिकायत वहीं इस पूरे मामले में गुड़ी रेंजर नरेंद्र पटेल ने बताया कि अतिक्रमणकारियों को रोकने पहुंचे वन अमले के साथ 31 अक्तूबर को हुई इस घटना की जानकारी एक शिकायत पत्र के जरिए उसी दिन संबंधित पिपलोद थाना पर दी गई थी। इसके बाद अगले दिन वन अमला एक बार फिर से हमला करने वाली महिलाओं की पहचान करने उस जगह पहुंचा था, जहां से कुछ महिलाओं के नाम मालूम चलने पर 1 तारीख को थाने पर उन महिलाओं के नाम बताते हुए इसकी लिखित शिकायत की गई थी। साथ ही पीड़ित स्टाफ के चोट के निशान एवं फटी वर्दी भी थाना प्रभारी पिपलोद को दिखाई गयी थी। जांच के बाद ही हो सकेगा मामला दर्ज इधर पिपलोद थाना प्रभारी एसएन पांडे का कहना है कि वन अमले के साथ महिलाओं के द्वारा मारपीट करने और वर्दी फाड़ने जैसी शिकायत को लेकर उन्हें आवेदन तो मिला है, जोकि अभी जांच में है। इसलिए अब तक इस मामले में किसी तरह की एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि शासकीय कर्मचारियों के साथ हुई मारपीट को लेकर तीन दिन बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं करने का क्या कारण रहा? तब उन्होंने बताया कि अभी जांच जारी है, जिसके बाद ही मामला दर्ज हो पाएगा। वहीं इसको लेकर खंडवा डीएसपी अनिल चौहान ने बताया कि जानकारी मिली है कि फॉरेस्ट टीम पर हमला करने को लेकर शिकायत की गई है। इस मामले में पिपलोद थाने के द्वारा जांच की जा रही है।

दो दशक से सक्रिय नेक्सेस को नहीं तोड़ पाए वन बल प्रमुख, डीएफओ फिर जोड़ रहे हैं मनमानी शर्ते

 The forest force chief could not break the nexus that has been active for two decades, the DFO is again adding arbitrary conditions उत्तम शर्मा कमेटी द्वारा बनाई गई शर्ते डस्टबिन में  उदित नारायण  भोपाल। दो दशकों से जंगल महकमें में बने सीएफ-डीएफओ और सप्लायर्स नेक्सस को तोड़ने में वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव का नेक-नियति प्रयास भी असफल नजर आ रहैं है। वन बाल प्रमुख के निर्देश पर तैयार निविदा की एकजाई शर्तें को दरकिनार बैतूल उत्तर- पश्चिम, बड़वानी बुरहानपुर, खंडवा के डीएफओ सप्लायर्स के इशारे पर अपनी शर्ते अलग से जोड़ दे रहे हैं। कुछ डीएफओ को तो मंत्री के नाम पर शर्तें बदलवाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।  पिछले दिनों एक दर्जन से अधिक डीएफओ ने टेंडर आमंत्रित किए हैं। इसमें बुरहानपुर डीएफओ ने बीआईएस (BIS) की शर्ते जोड़ दी है। जबकि  उत्तम शर्मा कमेटी द्वारा बनाई गई निविदा की शर्तों में बीआईएस (BIS) की शर्त का उल्लेख नहीं है।  चैनलिंक फेंसिंग और बार्बेड वायर की निविदा में BIS शर्त जोड़कर फारेस्ट अफसरों ने महज तीन-चार बड़े कारोबारियों के बीच 70-80 करोड़ का बंदरबांट करना है। मध्य प्रदेश में चैनलिंक फेंसिंग के लिए BIS लाइसेंस केवल दो कंपनियों—मौर्य वायर और नवकार ग्रेनाइट्स—के पास है। इसी प्रकार बार्बेड वायर के कारोबार में BIS लाइसेंस सिर्फ तीन कंपनियों—मौर्य वायर (इंदौर), नवकार ग्रेनाइट्स (मंदसौर), और मां शारदा वायर (मंडला) के पास हैं। इसके अलावा चैनलिंक फेंसिंग: कोई भी कंपनी BIS लाइसेंस प्राप्त नहीं है। बार्बेड वायर: BIS लाइसेंस चार से पांच कंपनियों के पास है। अन्य डीएफओ द्वारा आमंत्रित निविदा में प्रीबीड मीटिंग में अनिवार्य रूप से हिस्सा लेने और प्रस्तावित चैनलिंक फेंसिंग के कंपार्टमेंट की फोटो अनिवार्य रूप से निविदा प्रपत्र में सबमिट करने के लिए कहा है। अब सवाल यह उठता है कि इंदौर और अन्य शहरों के सप्लायर्स बिना जानकारी के जंगल में स्पॉट कहां ढूंढते फिरेंगे? सूत्रों से खबर यह भी आ रही है कि डीएफओ अपने पसंदीदा सप्लायर के साथ एक फॉरेस्ट गार्ड भेजकर फोटो क्लिक करने में मदद करवा रहे हैं। इसी प्रकार प्रीबिड बैठक से सप्लायर के बीच समझौता होने लगा है और इससे कंपटीशन खत्म होने का खतरा बढ़ गया है।  प्रतिस्पर्धा बढ़े, मध्यम वर्ग को अवसर मिले वन बल प्रमुख श्रीवास्तव ने नेक्सस को तोड़ने और लघु एवं मध्यम वर्ग के कारोबारी को अवसर प्रदान करने के लिए पूरे प्रदेश के लिए एक जैसी शर्तें बनवाई। इन शर्तों को तैयार करने में अपर प्रधान मुख्यमंत्री वन संरक्षक उत्तम शर्मा के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई गई। कमेटी ने महीनों मंथन कर एक समान शर्तों का ड्राफ्ट तैयार किया। नई शर्तों का ड्राफ्ट सभी सीसीएफ, सीएफ और डीएफओ को भेजा गया। प्रदेश की कुछ डीएफओ द्वारा आमंत्रित निविदा की शर्तों में न तो एकरुपता है और न ही शर्मा कमेटी द्वारा तैयार शर्तों का अक्षरश: पालन किया गया है। वन बल प्रमुख बनने के बाद से असीम श्रीवास्तव को लगातार शिकायतें मिल रही थी कि टेरिटोरियल में बैठे डीएफओ और सीएफ कमीशन बाजी का खेल खेलने के लिए मनमानी शर्तें जोड़ रहे हैं। इसके कारण मध्य और लघु कारोबारी प्रतिस्पर्धा से बाहर होते जा रहे हैं।  क्या खरीदी होती है वन विभाग में हर साल चैनलिंक, वायरवेड, टिम्बर पोल्स, रूट ट्रेनर्स, मिट्टी, गोबर एवं रासायनिक खाद की खरीदी में बड़े पैमाने पर खरीदी होती है। सबसे अधिक खरीदी कैंपा फंड से की जा रही है। इसके अलावा विकास और सामाजिक वानिकी (अनुसंधान एवं विस्तार ) शाखा से भी खरीदी होती है। विभाग के उच्च स्तरीय सूत्रों की माने तो कुल रिलीज बजट की 18 से 20% धनराशि कमीशन के रूप में टॉप -टू – बॉटम बंटती है। यानि सप्लायर्स को हर साल लगभग 10-12 करोड़ कमीशन में बांटने पड़ते हैं। राजनीतिक दबाव में बदल दी जाती है शर्तें  मैनेजमेंट कोटे से फील्ड में पदस्थ आईएफएस अधिकारी राजनीतिक दबाव के आगे झुक जाते हैं। इसके बाद वे सप्लायर्स के अनुसार शर्तें जोड़-घटा कर कमीशनबाजी के खेल से जुड़ हैं। इस खेल में उन्हें तब अफसोस होने लगता है जब उनके खिलाफ जांच शुरू होने हो जाती है। इसी खेल से जुड़े तत्कालीन छतरपुर डीएफओ वन अनुराग कुमार के खिलाफ लोकायुक्त संगठन कर रहा है। बालाघाट मुख्य वन संरक्षक अरविंद प्रताप सिंह सेंगर के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है। सूत्रों की माने तो एक दर्जन से अधिक डीएफओ के खिलाफ शिकायतें विभागीय विजिलेंस में लंबित है।

डी-नोटिफिकेशन के बाद भी चम्बल अभयारण्य क्षेत्र में नहीं होगा रेत खनन

Sand mining will not happen in Chambal sanctuary area even after de-notification उदित नारायणभोपाल। राज्य सरकार द्वारा 31 जनवरी 2023 को मुरैना वनमंडल में स्थित राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य का 207.049 हेक्टेयर क्षेत्र स्थानीय निवासियों को उनकी आजीविका हेतु रेत आपूर्ति हेतु डिनोटिफाई किया गया था, परन्तु अब इस डिनोटिफिकेशन को निरस्त किया जायेगा। अब यह मामला राज्य शासन स्तर पर है जहां वन मंत्री रामनिवास रावत से डिनोटिफिकेशन की सूचना निरस्त करने का प्रशासकीय अनुमोदन मांगा गया है।दरअसल सुप्रीम कोर्ट एवं एनजीटी ने इस डिनोटिफिकेशन की प्रक्रिया कोरह रहे घड़ियालों, डाल्फिन एवं कछुओं के रहवास के प्रतिकूल माना है। मप्र के स्टेट वाईल्ड लाईफ बोर्ड की 11 जून 2024 को हुई बैठक में यह प्रकरण आया था जिसमें निर्णय लिया गया था कि राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य के अंतर्गत स्थानीय लोगों की रेत आपूर्ति हेतु किये गये डिनोटिफाई क्षेत्र के संबंध में सुप्रीम कोर्ट एवं एनजीटी द्वारा रेत आपूर्ति के संबंध में चम्बल अभयारण्य की नदी में दिये गये निर्णय के परिप्रेक्ष्य में प्रस्ताव का पुनः परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही की जाये। इस पर राज्य के वन मुख्यालय की वन्यप्राणी शाखा ने प्रस्ताव का परीक्षण कर अब रिपोर्ट दी है कि डिनोटिफिकेशन की सूचना निरस्त किया जाये। शुरु से ही हुई गड़बड़ी दरअसल स्थानीय लोगों को रेत की आपूर्ति हेतु हेतु 31 जनवरी 2023 को चम्बल नदी का 207.049 हेक्टेयर क्षेत्र डिनोटिफाई किया गया था। इसके बाद मुरैना डीएफओ ने आपत्ति ली कि डिनोटिफिकेशन क्षेत्र इको सेंसेटिव जोन में आता है जहां रेत की आपूर्ति नदी से नहीं हो सकती है। इस पर इको सेंसेटिव जोन को खत्म करने का प्रस्ताव लाया गया परन्तु सुप्रीम कोर्ट एवं एनजीटी ने इस प्रक्रिया को गलत माना। अब डिनोटिफिकेशन निरस्त करने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं बचा है। साल भर पहले एनजीटी ने भी दिया निर्देश नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य (एनसीएस) में अवैध खनन को नियंत्रित करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने अधिकारियों से रेत खनन संबंधी दिशा-निर्देशों को भी लागू करने को कहा है। यह निर्देश न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी की पीठ ने दिया है। इस मामले में कोर्ट ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, एसपीसीबी के साथ भिंड, मुरैना, ग्वालियर, आगरा, इटावा, झांसी, धौलपुर और भरतपुर के पुलिस अधीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट से अवैध खनन को नियंत्रित करने, उस पर निगरानी रखने और तीन महीनों के भीतर इस मामले में क्या कार्रवाई की गई, उस पर रिपोर्ट सबमिट करने को कहा था किन्तु आज तक उत्तर प्रदेश राजस्थान और मध्य प्रदेश के डीजीपी ने अपनी रिपोर्ट सबमिट नहीं की। पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने भी उठाया था मामला कांग्रेस के कद्दावर नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह ने भी चंबल अपहरण क्षेत्र में हो रहे रेट उत्खनन को लेकर एक अभियान चलाया था। डॉक्टर सिंह ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक को पत्र लिखा था पर उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई। यहां तक कि डॉ सिंह विधानसभा से लेकर सड़क तक जल जीवों की सुरक्षा को लेकर आवाज बुलंद किया था।

जब सभी सामाजिक वानिकी वन वृत का प्रभार सीसीएफ-सीएफ को तो सागर का प्रभार डीएफओ को क्यों…?

When CCF-CF is in charge of all social forestry forests then why is DFO in charge of Sagar? भोपाल। वन विभाग में जंगल राज कायम है। शायद यही वजह है कि परंपरा और क्राइटेरिया को तोड़-मरोड़कर पोस्टिंग और तबादले किए जा रहे हैं। पिछले दिनों वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रशासन एक के विवेक जैन ने परंपरा और प्रशासनिक मापदंड को दरकिनार करते हुए एक डीएफओ स्तर के WPO ( वर्किंग प्लान अफसर) को सामाजिक वानिकी वन वृत्त सागर को प्रभार सौंप दिया है। प्रशासनिक मापदंड के अनुसार कैडर में यह पद सीसीएफ अथवा सीएफ को दिया जा सकता है। जबकि सिवनी की तरह ही सागर सामाजिक वन वृत का सीसीएफ को दिया जा सकता था। चेहरा देखकर की गई पोस्टिंग को लेकर पूर्व नेता-प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह का कहना है कि हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर पोस्टिंग में हो रही नियमों की अनदेखी की और उनका ध्यान आकृष्ट कराएंगे। डब्बलूपीओ ( वर्किंग प्लान ऑफिसर) एवं डीएफओ देवांशु शेखर को कैडर के विरुद्ध सामाजिक वानिकी वन वृत्त का प्रभाव दिए जाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष डॉ सिंह ने अपने पत्र में लिखा है कि देवांशु शेखर के अलावा डीएफओ प्रशांत कुमार सिंह को वर्किंग प्लान खंडवा, डीएफओ डॉ किरण बिसेन को वर्किंग प्लान उज्जैन, डीएफओ मीना कुमारी मिश्रा वर्किंग प्लान शिवपुरी, डीएफओ अनुराग कुमार वर्किंग प्लान रीवा और डीएफओ सुश्री संध्या को वर्किंग प्लान बालाघाट के पद पर पदस्थ किया गया। इनमें से किसी को भी सामाजिक वन वृत्त का अतीक प्रभार नहीं दिया गया। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि प्रशासनिक कैडर के अनुसार सामाजिक वन वृत्त खंडवा, बैतूल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, रीवा, सागर, जबलपुर, और सिवनी में सीसीएफ अथवा सीएफ के पद रिक्त है। सामाजिक वन वृत्त बैतूल में वर्किंग प्लान ऑफिसर वन संरक्षक पीएन मिश्रा और वर्किंग प्लान ऑफिसर एवं वन संरक्षक आदर्श श्रीवास्तव को सामाजिक इंदौर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वर्किंग प्लान ऑफिसर एवं डीएफओ देवांशु शेखर इकलौते ऐसे अफसर हैं, जिन्हें पीसीएफ प्रशासन एक विवेक जैन ने सागर सामाजिक वन वृत का प्रभार देकर उपकृत किया है। इन बिंदुओं पर जांच होनी चाहिए। सामाजिक वानिकी वन वृत में रिक्त पद रिक्त पद किसे प्रभाररीवा राजेश राय cfजबलपुर कमल अरोरा cfखंडवा रमेश गनावा cfइंदौर आदर्श श्रीवास्तव cfबैतूल पीएन मिश्रा cfसिवनी एसएस उद्दे ccfरतलाम एमएस बघेल cfसागर देवांशु शेखर DYCF

जंगल महकमे में प्रभार का खेला, चहेतों को किया जा रहा उपकृत एसीएस की सिफारिश की गई अनदेखी

उदित नारायणभोपाल। जंगल महकमे में प्रभार देने का कोई क्राइटेरिया नहीं बनाया गया है । ऐसे में प्रशासन-एक के मुखिया ने अपने चहेते आईएफएस देवांशु शेखर को प्रभार देने में इतनी जल्दबाजी दिखाई कि सागर वर्किंग प्लान अफसर का पदभार ग्रहण करने से पहले उन्हें सामाजिक वानिकी का प्रभार दे दिया ही दे दिया। जबकि कैडर में यह पद सीसीएफ स्तर के अधिकारी का है। वैसे जब रीवा में सामाजिक वानिकी वृत का अतिरिक्त प्रभार वन संरक्षक रीवा के राजेश कुमार राय को दिया है तो फिर सामाजिक वानिकी का प्रभार डीएफओ को क्यों दिया गया, यह शोध का विषय है। जबकि सागर में सीसीएफ कार्यरत है।प्रधान मुख्य वन संरक्षक विवेक जैन ने बुधवार को जारी आदेश में 2011 बैच के डीएफओ वर्किंग प्लान ऑफिसर देवांशु शेखर को सामाजिक वानिकी वृत सागर का प्रभार दिया है। सनद रहे कि 27 सितंबर को राज्य शासन द्वारा जारी आदेश में देवांशु शेखर को उत्तर बैतूल डीएफओ से हटकर सागर वर्किंग प्लान ऑफिसर के पद पर पदस्थ किया है। देवांशु शेखर ने अभी तक वर्किंग प्लान ऑफिसर का पदभार भी ग्रहण नहीं किया है। अपने मूल पोस्टिंग का पदभार ग्रहण करने से पहले ही उन्हें पीसीसीएफ विवेक जैन ने एक आदेश जारी कर सामाजिक वानिकी वृत सागर का प्रभार देकर उपकृत कर दिया। विवेक जैन के इस आदेश को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि वर्किंग प्लान ऑफिसर देवांशु शेखर को सामाजिक वानिकी का अतिरिक्त प्रभार दिया जा सकता है तो फिर 2009 बैच के प्रशांत कुमार सिंह, किरण बिसेन और अनुराग कुमार समेत अन्य पांच वर्किंग प्लान ऑफिसर को सामाजिक वानिकी का अतिरिक्त प्रभार क्यों नहीं दिया गया ? जबकि भोपाल को छोड़कर सामाजिक वानिकी वृत के पद खाली है और वे सभी प्रभार में चल रहें हैं। शेखर पर विशेष कृपा के संबंध में चर्चा इस बात की शुरू हो गई है कि शहर के अलावा अन्य वर्जन प्लान ऑफिसर को सामाजिक वानिकी वृत का प्रभाव क्यों नहीं दिया गया? सागर वर्किंग प्लान अफसर डीएफओ देवांशु शेखर को पीसीसीएफ विवेक जैन ने किस फॉर्मूले के तहत उपकृत किया। क्या उनके बनाए फॉर्मूले में अन्य 5 वर्किंग प्लान अफसर फिट नहीं आ रहे हैं ? जबकि डीएफओ शेखर के खिलाफ की गई जांच रिपोर्ट अंतिम निर्णय के लिए शासन के पास विचाराधीन है। एससीएस की सिफारिश को किया दरकिनार सूत्रों ने बताया कि अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल ने वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव को एक नोटशीट लिखी है। इसके अनुसार सिवनी वन वृत के मुख्य वन संरक्षक एसएस उद्दे से सामाजिक वानिकी का प्रभार लेकर जबलपुर वर्किंग प्लान सबमिट कर चुके वन संरक्षक रमेश विश्वकर्मा को सौंप दिया जाए। वैसे भी वन संरक्षक विश्वकर्मा को अपनी पोस्टिंग का इंतजार है। एसीएस की सिफारिश में यह भी उल्लेख है कि सामाजिक वानिकी रीवा वृत्त वहां के वन संरक्षक राजेश राय और सामाजिक वानिकी सागर वृत्त का प्रभार मुख्य वन संरक्षक सागर अनिल कुमार सिंह को अतिरिक्त प्रभार के रूप में दे दिया जाए। यह बात अलग है कि वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव इस बात से इनकार किया है कि सामाजिक वानिकी का आर्थिक प्रभार देने संबंधित एसीएस की कोई नोटशीट उनके पास आई है। प्रभार देने से वर्किंग प्लान में होगी देरी एक पीसीसीएफ अधिकारी का कहना है कि वर्किंग प्लान ऑफिसर को आर्थिक प्रभार दिए जाने से कार्यायोजना बनाने में देरी होगी , क्योंकि अतिरिक्त प्रभार वाला पद अफसरों के लिए लाभप्रद होता है। वे ज्यादातर समय वर्किंग प्लान पर नहीं देकर शुभ-लाभ को ध्यान में रखते हुए काम करते है। जबकि वर्किंग प्लान बनाने का कार्य गंभीरता और बारीकी से किया जाता है।

प्रदेश में इस वर्ष 4.50 लाख विद्यार्थियों को वितरित की जा रही हैं साइकिल

विभागीय बजट में 195 करोड़ रूपये का प्रावधान Bicycles are being distributed to 4.50 lakh students in the state this year. भोपाल : प्रदेश में इस वर्ष 2024-25 में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को 4 लाख 50 हजार साइकिलें नि:शुल्क वितरित की जा रही हैं। इसके लिये विभागीय बजट में 195 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। साइकिल वितरण का कार्य इस वर्ष नवम्बर तक पूरा किया जाने के निर्देश जिला अधिकारियों को दिये गये हैं। नि:शुल्क साइकिल वितरण योजना में ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले विद्यार्थी, जो सरकारी स्कूलों में कक्षा 6वीं एवं 9वीं में अध्ययनरत हैं तथा वह जिस ग्राम के निवासी हैं, उस ग्राम में शासकीय माध्यमिक और हाई स्कूल संचालित न होने की वजह से विद्यार्थियों को सुविधाजनक तरीके से स्कूल पहुंचने के लिये साइकिल वितरित की जाती हैं। योजना में कक्षा 6वीं एवं 9वीं में प्रवेश लेने पर पात्र विद्यार्थी को साइकिल प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में कन्या छात्रावास में अध्ययनरत छात्राएं, जिनकी शाला छात्रावास से 2 किलोमीटर या अधिक दूरी पर है, उन्हें भी नि:शुल्क साइकिल प्रदाय की जा रही है। प्रदेश में वर्ष 2023-24 में इस योजना में 4 लाख 7 हजार विद्यार्थियों को नि:शुल्क साइकिल प्रदाय की गई थी। पीएमश्री स्कूल नरसिंहपुर में 142 छात्राओं को वितरित की गई साइकिल नरसिंहपुर जिले के पीएमश्री एमएलबी स्कूल नरसिंहपुर की 142 छात्राओं को नि:शुल्क साइकिल का वितरण किया गया। इन छात्राओं में ग्राम डोंगरगांव की छात्रा सोनम गोंड और कक्षा 9वीं की छात्रा अंकिता साहू, ग्राम पांसी की छात्रा शिवानी मोरिया व ग्राम भरवारा की छात्रा मुस्कान लोधी भी शामिल हैं। ग्राम डोंगरगांव की छात्रा सोनम गोंड़ का कहना है कि घर से स्कूल दूर है। कभी-कभी बस छूट जाने के कारण समय पर विद्यालय नहीं आ पाती थी। अब शासन द्वारा नि:शुल्क साईकिल मिल जाने से अब वे समय पर स्कूल आ-जा सकेंगी। इसी तरह ग्राम डोंगरगांव की ही छात्रा अंकिता साहू बताती हैं कि वे पीएमश्री एमएलबी स्कूल नरसिंहपुर में कक्षा 9 वीं में अध्ययन करती हैं। उन्हें स्कूल आने-जाने में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी बस में बहुत ज्यादा भीड़ हो जाने के कारण वे स्कूल नहीं जा पाती हैं। अब नि:शुल्क साईकिल मिल जाने से वे समय पर स्कूल आ-जा सकेंगी और अपनी पढ़ाई में रूकावट नहीं आने देंगी। ग्राम पांसी की रहने वाली छात्रा शिवानी मोरिया व ग्राम भरवारा की छात्रा मुस्कान लोधी बताती हैं कि कभी-कभी पैसे के अभाव में वे बस का किराया नहीं दे पाती थी। गांव से स्कूल आने-जाने में बहुत समय लग जाता था। इससे उनकी पढ़ाई बाधित हो जाती थी। लेकिन अब साईकिल मिल जाने से वे समय पर स्कूल आ जा सकेंगी और अपनी पढ़ाई बिना किसी रूकावट से कर सकेंगी।

वन स्टॉप सेंटर के प्रयासों से लौट रहा महिलाओं का सम्मान

Women’s respect is returning due to the efforts of One Stop Center भोपाल ! Women’s respect is returning महिलाओं के खिलाफ हिंसा एक गंभीर सामाजिक समस्या है जिससे निपटने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये प्रदेश में वन स्टॉप सेंटर की स्थापना की गई है। Women’s respect is returning महिला सशक्तिकरण की दिशा में मिशन शक्ति की संबल उपयोजना के अंतर्गत वन स्टॉप सेंटर की स्थापना महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की हिंसा से प्रभावित और संकटग्रस्त महिलाओं एवं बालिकाओं को एक ही स्थान पर विभिन्न आपातकालीन एवं गैर-आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराना है। महिला सशक्तिकरण में वन स्टॉप सेंटर की भूमिका सुरक्षित आश्रय एवं तात्कालिक सहायता – वन स्टॉप सेंटर उन महिलाओं को तत्काल आश्रय और सुरक्षा प्रदान करता है जो घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन हिंसा अथवा किसी भी प्रकार की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होती है। सेंटर में महिलाओं को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाती है और उन्हें सुरक्षित वातावरण में आश्रय दिया जाता है। कानूनी सहायता और परामर्श – वन स्टॉप सेंटर पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता प्रदान करता है ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सके और आवश्यक कानूनी कदम उठा सकें। कानूनी परामर्श और न्यायिक प्रक्रियाओं में सहायता मिलने से महिलाएँ अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ न्याय पाने की दिशा में सशक्त हो सकें। चिकित्सा सहायता – वन स्टॉप सेंटर पर महिलाओं को तत्काल चिकित्सा सहायता मिलती है। हिंसा या प्रताड़ना से घायल महिलाओं को नजदीकी स्वास्थ्य सेवाएँ के साथ समन्वय कर चिकित्सा सेवाएँ दी जाती है। मनोवैज्ञानिक परामर्श – हिंसा की शिकार महिलाएँ अक्सर मानसिक आघात से गुजरती है, वन स्टॉप सेंटर पर प्रशिक्षित परामर्शदाता महिलाओं को मानसिक और भावनात्मक समर्थन प्रदान करते है जिससे उनका आत्म-विश्वास मजबूत होता है। पुनर्वास सेवाएँ एवं समाज में पुनर्स्थापना – वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को पुनर्वास सेवाएँ भी प्रदान करते है। जरूरत पड़ने पर महिलाओं को उनके परिवार के साथ पुनर्स्थापित करने अथवा उन्हें स्वतंत्र जीवन जीने, अपने पैरों पर खड़ाहोने का अवसर प्रदान करता है। Read More : https://saharasamachaar.com/ifs-vs-missing-for-more-than-two-years-will-be-punished/ आर्थिक सशक्तिकरण के लिये प्रशिक्षण और रोजगार – वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को रोजगार और स्व-रोजगार देने के लिये प्रशिक्षण देने का भी प्रयास करते है। महिलाओं को विभिन्न कौशल में प्रशिक्षित किया जाता है। इससे वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र बन सकें और समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकें। प्रदेश के 52 जिलों में 57 वन स्टॉप सेंटर संचालित किये जा रहे है। प्रारंभ से अगस्त 2024 तक 98 हजार 636 महिलाओं को पंजीकृत कर विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की गई, जिसमें लगभग 78 प्रतिशत महिलाएँ (76,499) को घरेलू हिंसा से संबंधित सहायता प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त दहेज उत्पीड़न, बलात्कार, यौन अपराध, बाल विवाह, गुमशुदा, अपहरण, निराश्रित आदि से संबंधित प्रकरणों में यथोचित मदद की गई। वर्ष 2019-20 में कुल 6 हजार 352 महिलाओं को सहायता दी गई थी। वर्ष 2023-24 में 21 हजार 490 महिलाओं को मदद प्रदान की गई। अब सभी वन स्टॉप सेंटर में वाहनों का प्रावधान भी किया गया है, जिससे दूरस्थ महिलाओं को भी त्वरित सहायता मिल सकेगी।

दो साल से अधिक समय से गायब आईएफएस वीएस होतगी दण्डित

IFS VS missing for more than two years will be punished भोपाल। राज्य शासन ने 13 जनवरी 2011 से 26 जनवरी 2013 तक कर्तव्यस्थल से गायब भारतीय वन सेवा के एमपी कैडर के वर्ष 1994 बैच के अधिकारी वीएस होतगी को उनकी सभी वेतन वृध्दियां स्थगित करने से दण्डित किया गया है। इनके बैच के एपीसीसीएफ पद पर प्रमोट हो चुके है। होतगी अभी भी डीएफओ हैं। राज्य शासन उनके बर्खासतगी का प्रस्ताव भी दो साल भेज चुकी थी, जिसे केंद्रीय कार्मिक विभाग में उसे निरस्त कर दिया।दरअसल, होतगी 3 अगस्त 2009 से 10 फरवरी 2011 तक भिण्ड सामान्य वनमंडल के डीएफओ थे। उन्हें 28 दिसम्बर 2010 को अनुदेशक रेंजर्स कॉलेज बालाघाट पदस्थ किया गया था परन्तु उन्होंने रिलीव होने के बाद भी ज्वाईनिंग नहीं दी। उन्हें 21 फरवरी 2012 को इस अनियमितता पर आरोप-पत्र जारी किया गया परन्तु उन्होंने कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया। 20 मई 2019 को उनके खिलाफ विभागीय जांच बैठाई गई। 22 सितम्बर 2022 को विभागीय जांच की रिपोर्ट मिली, जिसमें उन्हें 754 दिनों तक कर्तव्य से अनुपस्थित होने का दोषी पाया गया। 22 अक्टूबर 2022 को होतगी को बचाव उत्तर देने का नोटिस दिया गया जिस पर उन्होंने 24 नवम्बर 2020 को बचाव उत्तर दिया। लेकिन उनका जवाब अमान्य किया गया और उन्हें अनुपस्थिति की अवधि को अकार्य दिवस मानते हुये उन्हें एक वेतवृध्दि असंचयी प्रभाव से रोकने के दण्ड से दण्डित किया गया। राज्य शासन ने होतगी प्रकरण संघ लोक सेवा आयोग को भेजा। आयोग ने भी 4 मार्च 2024 को होतगी को दोषी पाते हुये उन्हें सभी वेतनवृध्दियों से वंचित करने का दण्ड दिया गया। इस दण्ड के बारे में उत्तर देने के लिये होतगी को पत्र भेजा गया, परन्तु उन्होंने यह पत्र प्राप्त नहीं किया। इस पर उनके कार्यालयीन कक्ष की टेबल पर इसे चस्पा किया गया। इसके बाद भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इस पर अब राज्य शासन ने एकपक्षीय निर्णय लेकर उन्हें इस टिप्पणी के साथ दण्डित किया है कि 30 अक्टूबर 2024 तक होतगी को वेतन के समयमान में निचले स्तर के दो चरणों तक की कटौती की शास्ति और आगे इस निर्देश के साथ अधिरोपित की जाये कि वह कटौती की अवधि के दौरान वेतन वृध्दियां अर्जित नहीं करेंगे। इस अवधि की समाप्ति पर, इस कटौती का प्रभाव उनकी भावी वेतनवृध्दि को स्थगित करने पर पड़ेगा।

एमएफपी पार्क से छः महीने में ही अर्चना हटाई गई, जूनियर डीएफओ गीतांजलि बनी नई सीईओ

Archana was removed from MFP Park within six months, Junior DFO Gitanjali became the new CEO. उदित नारायणभोपाल। लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक विभाष ठाकुर ने एक बार फिर एमएफपी पार्क की सीईओ अर्चना पटेल को हटाकर 2020 बैच की आईएफएस गीतांजलि जे को नया सीईओ बनाया। संघ के एमडी ठाकुर ने 12 महीने में तीन को बदल चुके हैं पर ना दवाईयों का समय पर प्रोडक्शन हो पा रहा है ना उसकी गुणवत्ता में सुधार हो रही। चर्चा है कि जिस भी सीईओ ने गुग्गल सहित रॉ मटेरियल की खरीदी में हुई गड़बड़झाला की फाइल खोली, उसे वहां से रुखसत होना पड़ा है। पहले पीजी फुलजले और अब अर्चना पटेल को एमएफपी पार्क के सीईओ पद से हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया गया।2004 बैच के आईएफएस पीजी फुलजले को नवंबर 23 में एमएफपी पार्क का सीईओ के पद पर पोस्टिंग हुई और जब उन्होंने आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने के लिए गुग्गल और अन्य रॉ मटेरियल की खरीदी में हुई गड़बड़ झाला की फाइल खोली तो उन्हें हटाकर 2018 बैच की महिला आईएफएस अर्चना पटेल को सीईओ बनाया। जबकि संघ में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मनोज अग्रवाल ( वर्तमान में उनकी सेवाएं विभाग को वापस कर दी गई है) जैसे सीनियर आईएफएस कार्यरत थे। यानि सीनियर अफसर की कमी बताकर एमएफपी पार्क के स्थापना से अब तक की सबसे जूनियर और अनुभवहीन आईएफएस अर्चना पटेल को सीईओ बनाया गया। दिलचस्प पहले हुई है कि अर्चना पटेल के हटाए जाने की स्थिति वही निर्मित हुई, जिसके कारण फुलजले को सीईओ पद से हटाया गया। बताया जाता है कि सीईओ बनने के बाद पटेल 3-4 महीने तक रबर स्टाम्प के रूप में काम किया, वह जब खुद फैसला लेने लगी और गड़बड़झाले की फाइल खोलने लगी, तभी उन्हें भी हटा दिया गया। अबकी बार 2020 बैच की महिला आईएफएस गीतांजलि जे को सीईओ बनाया। अनुभवहीन अधिकारियों की पोस्टिंग बंद करने की कहीं साज़िश तो नहीं ? एमएफपी पार्क बरखेड़ा पठानी में उत्पादित औषधीय की क्वांटिटी और क्वालिटी में गिरावट आई है। चर्चा है कि लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र बरखेड़ा पठानी (एमएसपी पार्क) अनुभवहीन महिला अधिकारियों की पोस्टिंग के पीछे कहीं विंध्या हर्बल को बंद करने की साजिश तो नहीं चल रही है। यही वजह है कि एमएफपी पार्क बरखेड़ा पठानी में उत्पादित होने वाली औषधियों की क्वांटिटी और क्वालिटी में निरंतर गिरावट आ रही है। औषधि के गुणवत्ता को लेकर कई बार सवाल उठे। विगत वर्षों में केंद्र निरंतर प्रगतिशील रहा लेकिन पिछले 2 वर्षों में प्रशासनिक उदासीनता और गलत नीतियों से केंद्र को बहुत नुक़सान हुआ। कभी भारत के 17 राज्यों में आयुर्वेदिक दवाओं को सप्लाई करने वाले केंद्र को आयुष विभाग ने तो विंध्या हर्बल्स को ऑर्डर देना ही बंद कर दिया है। पिछले दिनों एक छोटा सा ऑर्डर इस वित्तीय वर्ष में केवल 1.8 करोड़ का आर्डर मिला है।

बाघों के संरक्षण में राजधानी की सड़कों पर टाइगर टॉक शो

Tiger Talk Show on the streets of the capital for the protection of tigers भोपाल। वन मंडल भोपाल की ओर से बाघ संरक्षण के प्रति जागरूकता हेतु राज्य स्तरीय वन्य जीव सप्ताह के अंतर्गत शुक्रवार को राजधानी की सड़कों पर टाइगर वॉक शो का आयोजन किया गया। इसमें में बड़ी संख्या में स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों, एनएसएस , एनसीसी के कैडेट विभिन्न एनजीओ के सदस्य, महिला एवं पुरुष लगभग 2000 प्रतिभागि हर्ष उल्लास के हिस्सा लिया। टाइगर वॉक की शुरुआत टीटी नगर स्टेडियम से हुई। इसका समापन मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय भोपाल में हुआ।टाइगर वॉक में वन एवं प्रचार वाहनों लाउडस्पीकर बाघ से संबंधित फिल्मों का प्रदर्शन करते हुए स्लोगन प्रचार पट्टिका तथा नृत्य कलाकारों के माध्यम से बाघ संरक्षण का संदेश दिया गया। भोपाल वन संरक्षक आलोक पाठक ने कहा कि वन्यप्राणी की दृष्टि से मध्य प्रदेश भारत का समृद्ध प्रदेश है। हमारे देश का भोपाल एकमात्र ऐसा शहर है जहां बाघ एवं मानव शहरी आबादी में रहते हैं। यह मध्य प्रदेश एवं भोपाल शहर के लिए बहुत ही बड़े गर्व की बात है। मध्य प्रदेश वन विभाग के वन एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण हेतु किये जा रहे प्रयासों का प्रतिफल है कि आज हमारा प्रदेश एवं भोपाल शहर बाघ के मामले में प्रथम स्थान पर है ।

तीन वित्तीय वर्षों के भीतर 17 वन मंडलों में कैंपा फंड में 364 करोड़ का गड़बड़झाला

Misappropriation of Rs 364 crore in CAMPA fund in 17 forest divisions within three financial years

Misappropriation of Rs 364 crore in CAMPA fund in 17 forest divisions within three financial years गणेश पाण्डेयभोपाल। कैग ने जंगल महकमे में पिछले वित्तीय वर्ष में विभाग के 17 वन मंडलों में 364 करोड़ से अधिक गड़बड़झाला होने की पुष्टि की है। यह गड़बड़ी 63 वनमंडलों में से केवल 17 वन मंडलों में हुई ऑडिट रिपोर्ट से उजागर हुई है। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि कैंपा फंड से कितने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हो सकती है ? यहां यह भी उल्लेखनीय है कि मौजूदा पीसीसीएफ कैंपा ने संरक्षण शाखा के हिस्से के वित्तीय अधिकार पर बलात कब्जा कर लिया है। जबकि परंपरा यह रही है कि फॉरेस्ट प्रोटक्शन से संबंधित व्यय करने वाली राशि का फंड संरक्षण शाखा द्वारा किया जाता रहा है।भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) की ऑडिट रिपोर्ट में कैंपा फंड की राशि में हुई गड़बड़ियों को लेकर विस्तार से ब्यूरोक्रेट का ध्यान आकर्षित कराया गया है। कैग ने अपने प्रतिवेदन में स्पष्ट तौर से उल्लेख किया है कि क्षतिपूर्ति वनीकरण के क्रियान्वयन में अनियमितता की गई है। कैग ने वित्तीय वर्ष 2017 से लेकर 2019-20 में 17 वनमंडल अनूपपुर, पूर्वी छिंदवाड़ा, खरगोन, खंडवा, इंदौर, रतलाम, भोपाल, सिंगरौली, दक्षिण शहडोल, उत्तर सागर दक्षिण सागर, नौरादेही होशंगाबाद, ग्वालियर, छतरपुर उत्तर बैतूल और वन विकास निगम में क्षतिपूर्ति वनीकरण के लिए कैंपा फंड से 839.88 करोड़ के लगभग खर्च किए गए। कैंपा फंड से खर्च किए गए राशि का विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट केवल 17 वन मंडलों में की। यानी कैग ने कुल 63 वन मंडलों में से केवल 17 वन मण्डलों में किए गए ऑडिट में 364.83 करोड़ रुपए की उपयोगिता पर सवाल खड़े किए हैं। गंभीर जनक पहलू यह है कि वनीकरण क्षतिपूर्ति के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद वर्ष 2017 और 2019 के बीच प्रदेश में वन घनत्व घटा और खुले वन आवरण क्षेत्र में 1.3% की वृद्धि हुई है। क्षतिपूर्ति वनीकरण के नाम पर हुए पौधारोपण के लिए स्थल के चयन से लेकर वृक्षारोपण तक में गड़बड़ी की गई। रोपित किए गए पौधों की जीवितता का प्रतिशत 75% होना चाहिए था। जबकि कैग ने अपने रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि वनीकरण क्षतिपूर्ति के नाम पर हुए पौधारोपण की जीवतता का प्रतिशत 6 से 60 फीसदी से भी कम पाए गए हैं।वनीकरण के लिए त्रुटिपूर्ण स्थल का चयनप्रतिपूरक वनीकरण के लिए अधिकारियों ने त्रुटिपूर्ण स्थल का चयन किया गया। प्रतिपूरक वृक्षारोपण के लिए अनूपपुर, सिंगरौली, होशंगाबाद और दक्षिण शहडोल मैं 18 विभिन्न स्थलों की 875 हेक्टेयर वन भूमि का चयन किया गया। प्रतिवेदन के अनुसार चयनित स्थलों में कैनोपी का घनत्व 40% से अधिक था। जबकि चयनित वृक्षारोपण स्थल की कैनोपी घनत्व 0.1 से 0.4 होनी चाहिए थी। अपने प्रतिवेदन में कैग ने यह भी उल्लेख किया है कि सिंगरौली वन मंडल में 16.40 करोड़ की लागत से आठ स्थानों पर वृक्षारोपण के लिए स्वीकृति दी गई थी। चयनित स्थान में या तो घने जंगल थे या अन्य योजनाओं के तहत वृक्षारोपण किया गया था। यानी 17 करोड़ से अधिक राशि का निष्फल व्यय किए गए। यानी राजस्व हानि हुई है।लक्ष्य के विरुद्ध वृक्षारोपण में कमीप्रतिवेदन में यह अभी कहा है कि ऑडिट टीम ने पाया कि तीन मंडलों में 5 का परियोजनाओं में 201.08 हेक्टयर के क्षेत्र में वृक्षारोपण के लिए डीपीआर तैयार किए गए थे। मानकों के अनुसार न्यूनतम 3,02,363 रुपए जाने थे जबकि वन मंडलों ने केवल 2 लाख 31 हजार 90 पौधे रोपे। यानी 71273 पौधों कम रोपे गए। यह महज एक उदाहरण है। लेखा परीक्षा ने पाया कि अनूपपुर उत्तर सागर और ग्वालियर वन मंडलों में प्रतिपूरक वनीकरण की पांच वृक्षारोपण स्थलों का 2010 11 से 2014-15 के बीच शुरू किया गया था। रोपे गए 2,79, 790 में से केवल 1 लाख 2 हजार 320 ही बच पाए।कैम्पा के तहत अपात्र गतिविधियों पर व्ययलेखा परीक्षा ने कैंपा के अभिलेखों में पाया कि 163.83 करोड़ की धनराशि विभिन्न गतिविधियों के लिए स्वीकृत की गई थी, जिसमें से 53.29 करोड़ की राशि अप्रैल 17 से मार्च 2020 की अवधि में अपात्र गतिविधियों पर खर्च कर दी गई। जबकि इस पर खर्च नहीं किया जाना था। कैग ने सरकार की उत्तर को अस्वीकार करते हुए कहा कि यह कैंपा फंड के संबंध में जारी किए गए दिशा- निर्देशों की अवहेलना है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में अनुभूति कार्यक्रम पर 5.88 करोड़, वन भवन निर्माण के लिए 20 करोड़, कृषि समृद्धि योजना पर 20 करोड़, रेंजर और राज्य वन सेवा के अधिकारियों के प्रशिक्षण पर 5.94 करोड़, वन स्टाफ के प्रशिक्षण पर 4.87 करोड़, और एस एफआरआई के अनुसंधान गतिविधि पर खर्च किए गए 4 करोड़ 59 लख रुपए को अनियमित बताया। यानी कैम्पा फंड में पदस्थ रहे पीसीसीएफ एमके सपरा और एबी गुप्ता ने अंधा बांटे रेवड़ी चिन्ह -चिन्ह कर देत,की तर्ज पर फंड वितरित किए। मौजूदा पीसीसीएफ कैम्पा महेंद्र सिंह धाकड़ भी इसी तर्ज पर फंड रिलीज करते आ रहे हैं।

राजनीतिक रसूख के चलते  बांधवगढ़ में पदस्थ रेंजर सब पर भारी

Due to political influence the ranger posted in Bandhavgarh is stronger than everyone

Due to political influence the ranger posted in Bandhavgarh is stronger than everyone उदित नारायण  भोपाल। बांधवगढ़ में पदस्थ रेंजर पुष्पा सिंह राजनीतिक रसूख के चलते सीनियर अधिकारियों के आदेशों के नाफरमानी कर रही है। इसी बात को लेकर डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश कुमार वर्मा ने उन्हें नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि  आपके द्वारा आज दिनांक तक वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश का पालन नहीं किया गया है। यही नहीं आपके द्वारा राजनैतिक दबाव अधिकारियों पर डलवाना अनुशासनिक नियमों के विपरीत है। क्यों न आपके विरूद्ध म.प्र. सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम (3) (1) के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु वरिष्ठ कार्यालय को प्रस्ताव भेजा जाये? अतः आपको निर्देशित किया जाता है, कि पत्र प्राप्ति के 3 दिवस के अन्दर सन्दर्भित आदेश का पालन करते हुए प्रभार सूची से इस कार्यालय को अवगत कराया जायेगा। अन्यथा आदेश का पालन नहीं करने पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का अवहेलना करने के संबंध में क्यों न आपके विरूद्ध विरूद्ध म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 16 (1) (क) के आपके विरूद्ध के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु वरिष्ठ कार्यालय को प्रस्ताव भेजा जायेगा। जिसके लिए आप स्वयं जिम्मेवार होंगें। नोटिस का रेंजर पुष्पा सिंह ने आज दिनांक तक जवाब नहीं दिया। करंजिया रेंज के लिए लिखवाई नोटशीट  सूत्रों का कहना है कि रेंजर पुष्पा सिंह अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करते हुए बांधवगढ़ से डिंडोरी वन मंडल के करंजिया रेंज में वापसी का प्रयास कर रही है। उनकी करंजिया रेंज डिंडोरी में पोस्टिंग के लिए एक उप मुख्यमंत्री ने  सिफारिश की है। इसी सिफारिश के कारण उन्होंने शासकीय आवास खाली नहीं किया है। बताया जाता है कि मंत्रालय में पदस्थ अफसर भी उनकी मदद कर रहे हैं।  हमेशा विवादों की सुर्खियों में रहीं  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पदस्थ रेंजर पुष्पा सिंह अक्सर विवादों की सुर्खियों में रही हैं। डिंडोरी वन मंडल के  करंजिया रेंज में पदस्थी के दौरान आर्थिक गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे थे। कारंजा रेंज में उन पर आरोप था कि उन्होंने वन सुरक्षा समिति खारीडीह में रोड निर्माण हेतु आठ लाख अड्टालीस हजार की सड़क मात्रा डेढ़ लाख में बनाया गया जिसमे डिप्टी रेंजर को सस्पेंड किया गया। जबकि किंतु पुष्पा सिंह पर विभागीय जांच वर्तमान में चल रही है। रोचक तथ्य है कि वह एक भी पेशी में आज तक उपस्थित नहीं हुई। इसके पहले वह जब वह शहडोल में पदस्थ थीं तब  इनका रेत माफियों से लेन-देन संबंधित एक ऑडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। इस मामले में उन्हें निलंबित भी किया गया था।

हॉफ के मौखिक फरमान और सीसीएफ ने लिखे तीन पत्र फिर भी नहीं दिया चार्ज

Hoff's verbal order and CCF's three letters, still no charge was given

Hoff’s verbal order and CCF’s three letters, still no charge was given उदित नारायण  भोपाल। 2010 बैच के आईएफएस गौरव चौधरी का पद वन संरक्षक, पोस्टिंग डायरेक्टर बांधवगढ़ पर डीएफओ के पद का चार्ज नहीं देने पर आमादा है। फील्ड डायरेक्टर बांधवगढ़ टाइगर गौरव चौधरी को डीएफओ शहडोल उत्तर वन मण्डल का चार्ज देने के सीसीएफ शहडोल तीन पत्र लिख चुके हैं और गत बुधवार को वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने भी निर्देश दिए किन्तु वे चार्ज नहीं देने पर बालहठ करके बैठे हैं।   केंद्र सरकार की मंशा थी कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पूर्णकालिक फील्ड डायरेक्टर हो। यही वजह रही कि केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के सख्त निर्देश पर राज्य शासन ने एक सितम्बर दिन रविवार को सिंगल आदेश जारी कर गौरव चौधरी को डीएफओ शहडोल उत्तर वनमंडल से फील्ड डायरेक्टर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पद पर कर दिया गया। राज्य शासन के आदेश के बाद गौरव चौधरी ने फील्ड डायरेक्टर का पदभार तो संभाल लिया किंतु शहडोल उत्तर वनमंडल के डीएफओ का चार्ज आज तक नहीं दिया। जबकि सीसीएफ  शहडोल एलएस उईके ने फील्ड डारेक्टर गौरव चौधरी को उत्तर शहडोल वनमंडल का चार्ज  उमरिया के डीएफओ विवेक सिंह को देने के लिए  अब तक तीन पत्र लिखे और उसकी कॉपी वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव और पीसीसीएफ विवेक जैन को भी भेजी। श्रीवास्तव ने गत बुधवार को सीसीएफ को निर्देश दिए कि गौरव चौधरी से चार्ज लेकर विवेक सिंह को दें।  इनका कहना चार्ज नहीं देने की कुछ तो वजह होगी। जहां तक सीसीएफ के चार्ज देने संबंधित पत्र की कॉपी हमें नहीं मिला है। कई बार डाक आने में देरी हो जाती है।   विवेक जैन,  पीसीसीएफ प्रशासन-एक बांधवगढ़ में रेंजर सब पर भारी बांधवगढ़ में पदस्थ रेंजर पुष्पा सिंह राजनीतिक रसूख के चलते सीनियर अधिकारियों के आदेशों के नाफरमानी कर रही है। इसी बात को लेकर डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश कुमार वर्मा ने उन्हें नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि  आपके द्वारा आज दिनांक तक वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश का पालन नहीं किया गया है। यही नहीं आपके द्वारा राजनैतिक दबाव अधिकारियों पर डलवाना अनुशासनिक नियमों के विपरीत है। क्यों न आपके विरूद्ध म.प्र. सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम (3) (1) के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु वरिष्ठ कार्यालय को प्रस्ताव भेजा जाये? अतः आपको निर्देशित किया जाता है, कि पत्र प्राप्ति के 3 दिवस के अन्दर सन्दर्भित आदेश का पालन करते हुए प्रभार सूची से इस कार्यालय को अवगत कराया जायेगा। अन्यथा आदेश का पालन नहीं करने पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का अवहेलना करने के संबंध में क्यों न आपके विरूद्ध विरूद्ध म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 16 (1) (क) के आपके विरूद्ध के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु वरिष्ठ कार्यालय को प्रस्ताव भेजा जायेगा। जिसके लिए आप स्वयं जिम्मेवार होंगें। नोटिस का रेंजर पुष्पा सिंह ने आज दिनांक तक जवाब नहीं दिया।

एसडीओ फारेस्ट के बिगड़े बोल, मैंने अवार्ड दे दिया है…. तुझसे जो बने उखाड़ लेना…..

SDO Forest's harsh words, I have given the award.... do whatever you can to get it done...

SDO Forest’s harsh words, I have given the award…. do whatever you can to get it done… भोपाल। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला में पदस्थ एसडीओ दिलीप मराठा के बिगड़े बोल के ऑडियो सोशल मिडिया और अफसरों के बीच खूब वायरल हो रहे है। एसडीओ ताला दीपक ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायतकर्ता को फोन कर धमका रहा है कि ‘हलो मैंने अवार्ड दे दिया है, तुझसे जो बने उखाड़ लेना।’  यह वाकिया बुधवार की है। ग्राम पंचायत बनचाचर, जनपद जयसिंहनगर के अजय यादव ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की कि विस्थापन मुआवजे के वितरण में फर्जीवाड़ा की जा रही है। इस शिकायत पर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पदस्थ एसडीओ दिलीप मराठा भड़क गए। एसडीओ दिलीप मराठा ने शिकायतकर्ता अजय यादव को फोन लगाया।  एसडीओ मराठा – हलो, कौन अजय बोल रहे.. यार एकाध दिन ताला आओ न आप… हम एसडीओ फारेस्ट बोल रहें हैं….आपने शिकायत की हैं न… उसी सम्बन्ध में आपसे चर्चा करना चाहते हैं… अजय – जी, सर मैं आ जाऊंगा… नमस्ते सर… एसडीओ – आ जाओ किस दिन आ रहे हो…. अजय – आप कौन हो… सर  एसडीओ – एसडीओ बोल रहा हूं  अजय – तो ऑफिस में मुलाक़ात होगी..सर  एसडीओ – ऑफिस में नहीं जहां कहो वहां भी आ सकता हूं…. अजय – वैसे सर आपसे निवेदन है कि आप यहां आ जाए तो… एसडीओ – तुम्हारा नौकर नहीं हूं… तुमने सीएम हेल्पलाइन बहुत लगा रखी है…आ जा तो तेरे को मैं समझता हूं…तू सोच रहा है कि मैंने कलेक्टर – कमीशनर और दुनिया को रिपोर्ट कर दी तो बड़ा हो गया… अजय – सुनिए सर.. आप इस तरह से बात न करो.. एसडीओ – आ तो मैं तेरे को बताता हूं… हां, मैंने अवार्ड ( विस्थापन मुआवजा) कर दिया है, जो बने उखाड़ लेना। क्या है शिकायत अजय यादव ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की है कि ग्राम पंचायत डोभा ग्राम गढ़पुरी जनपद पंचायत मानपुर के अंतर्गत विस्थापन हेतु मुआवजे की राशि वितरित की जा रही है। इसमें प्रकाशित सूची क्रमांक 424, 425, और 426 में जो नाम प्रकाशित किए गए हैं, उनमें रामशरण, विजय और  विनीत के नाम हैं। ये तीनों नाम ग्राम पंचायत बनचाचर जनपद पंचायत जयसिंहनगर के निवासी हैं। पीएम आवास आवासीय पट्टा शासन के द्वारा चलाए गए अन्य लाभ ग्राम बनचाचर में प्राप्त कर चुके है। मुआवजे के लालच में अपना नाम ग्राम गढ़पुरी में रामलाल से रामशरण करवा लिए हैं, जिससे मुवावजे की राशि मिल सके। एक ही व्यक्ति के द्वारा नाम बदल-बदल कर शासन के साथ फ्राड कर सभी लाभों को प्राप्त कर रहें हैं। जिसकी शिकायत उप संचालक बांधवगढ़ नेशनल पार्क को 15 मई 24 को की गई है। इस पर आज दिनांक तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इनका कहना  ‘मुझे मुख्यालय से ऑडियो भेजा गया है। मैं एसडीओ के अभद्र भाषा को लेकर नोटिस दे रहा हूं। उन्हें पब्लिक से ऐसी भाषा का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके अलावा सीएम हेल्पलाइन में की गई शिकायत के तथ्यों की भी जांच करूंगा।’  प्रकाश वर्मा,  उपसंचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व   एसडीओ का ऑडियो मिला है। मैंने पीसीसीएफ वन्य प्राणी और बांधवगढ़ नेशनल पार्क की डिप्टी डायरेक्टर को भेज दिया है। डिप्टी डायरेक्टर से जांच करने के लिए भी कहा है। समिता राजौरा  एपीसीसीएफ वन्य प्राणी

जंगल महकमे में पोस्टिंग में हो रही महिला आईएफएस अफसरों की अनदेखी

Women IFS officers are being ignored for posting in the forest department.

Women IFS officers are being ignored for posting in the forest department. गणेश पाण्डेयभोपाल। जंगल महकमे में पॉवर और मैनेजमेंट के चलते महिला आईएफएस अफसरों की पोस्टिंग में अनदेखी की जा रही है। जबकि कुछ महिला अधिकारी तो विषय-विशेषज्ञ भी है फिर भी मुख्यधारा के हाशिये पर हैं। मसलन, इंदौर सर्किल से रिटायर्ड हुए वन संरक्षक नरेन्द्र सनोडिया के रिक्त पद का प्रभार वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने 54 किलोमीटर दूर स्थित उज्जैन सर्किल के वन संरक्षक मस्तराम बघेल को सौंप दिया। जबकि इंदौर सर्किल में ही बघेल से सीनियर 2001 बैच की महिला आईएफएस अधिकारी एवं मुख्य वन संरक्षक पदमाप्रिया बालकृष्णन क्षेत्रीय वर्किंग प्लान ऑफिसर है। वैसे तो इंदौर सर्किल का प्रभार तो पदमाप्रिया को मिलना था पर वह मैनेजमेंट के खेल में पिछड़ गई और प्रमोटी आईएफएस बघेल को दे दिया गया। पूर्व में जब एपीसीसीएफ मनोज अग्रवाल उज्जैन सर्कल में पदस्थ थे तब उन्हें भी इंदौर सर्किल का प्रभार दिया गया था किन्तु तत्कालीन वन बल प्रमुख आरके गुप्ता ने प्रभार सौंपने वाले निर्णय में संशोधन करते हुए इंदौर सर्किल में ही पदस्थ वन संरक्षक आदर्श श्रीवास्तव को प्रभार दे दिया था।इंदौर सर्किल पाने के लिए जो जोर-अजमाइशइंदौर सर्किल में पदस्थ होने के लिए कई आईएफएस अधिकारी पीपी मैनेजमेंट फार्मूले के अंतर्गत प्रयासरत है। जबकि शासन और विभाग प्रमुख को पीपी मैनेजमेंट फार्मूले को दरकिनार कर सीनियर-कम-मेरिट के सिद्धांत पर पोस्टिंग करना चाहिए। यानि पुरानी परंपरा के अनुसार 2001 बैच की महिला आईएफएस मुख्य वन संरक्षक पदमा प्रिया बालकृष्णन इंदौर सर्किल में पदस्थ होने की हकदार हैं। वैसे भी कैडर में इंदौर सर्किल का पद मुख्य वन संरक्षक का ही है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि यदि उनकी पोस्टिंग अभी इंदौर सर्किल के मुख्य वन संरक्षक के पद पर नहीं होती है तो वे अगले साल एपीपीसीएफ के पद पर प्रमोट हो जाएंगी। यदि ऐसा हुआ तो वह इकलौती ऐसी अफसर होंगी, जो सर्किल सीसीएफ के पद पर कार्य किए बिना ही एपीसीसीएफ पद पर प्रमोट हो जाएंगी।वाइल्डलाइफ डिप्लोमा धारी करा रही है वीआइपी को दर्शनमहकमे में एक और महिला आईएफएस डॉ किरण बिसेन की योग्यता की अनदेखी की जा रही है। डॉ बिसेन पशु चिकित्सा के साथ-साथ वन्य प्राणी मैनेजमेंट की डिप्लोमा धारी भी है। यही नहीं, वह चीता मैनेजमेंट पर दक्षिण अफ्रीका में ट्रेनिंग भी ले चुकी हैं। इसके पहले बिसेन पेंच नेशनल पार्क में तीन साल से अधिक समय तक उप संचालक के पद पर पदस्थ रह चुकीं है। बावजूद इसके, विभाग ने उन्हें अघोषित तौर पर उज्जैन डीएफओ के पद पर पदस्थ कर वीआईपी और वीवीआईपी को साढ़े तीन साल से दर्शन कराने की जिम्मेदारी दी है। जबकि पेंच नेशनल पार्क में फील्ड डारेक्टर का पद खाली है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में सदस्थ फील्ड डायरेक्टर एवं एपीसीसीएफ एल कृष्णमूर्ति की वन्यप्राणी मुख्यालय में वापसी होने जा रही है। ऐसी स्थिति में यहां भी एक वन्य प्राणी विशेषज्ञ आईएफएस की आवश्यकता है। विभाग में वन्य प्राणी विशेषज्ञ आईएफएस की कमी है।इनकी भी हो रही है अनदेखी1995 बैच की महिला आईएफएस अर्चना शुक्ला की भी वन विभाग ने अनदेखी की है। वे लंबे समय से विभाग की मुख्य धारा के हासिए पर है। वर्तमान में भी वे डेपुटेशन पर एपीसीसीएफ वन विकास निगम में पदस्थ है। इसके पहले भी वे प्रतिनियुक्ति पर लघुवनोपज संघ में पदस्थ रह चुकीं है। वर्तमान में फेडरेसन के प्रसंस्करण केंद्र बरखेड़ा पठानी में सबसे जूनियर प्रमोटी डीएफओ अर्चना पटेल को पदस्थ किया गया है। पटेल की अनुभवहीनता के कारण फेडरेशन के एमएफपी पार्क के उत्पादन और उसकी गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। इसके पहले एमएफपी पार्क के सीइओ के पद पर एपीसीसीएफ स्तर के अधिकारियों की पोस्टिंग होती रही है। वर्तमान में इस पद के लिए दो महिला अधिकारी हकदार है। पहली एपीसीसीएफ अर्चना शुक्ला और दूसरी 2007 बैच की राखी नंदा, जिन्हें सामाजिक वानिकी में पदस्थ किया गया है। यहां यह उल्लेखनीय है कि सामाजिक वानिकी का कार्य वन मंडल में पदस्थ सीनियर आईएफएस अधिकारी भी संभाल सकता है। इसके अलावा 2011 बैच की आईएफएस संध्या को तो सबसे अधिक उपेक्षित रही है। वह किसी भी वन मंडल में 5-6 महीने से अधिक टेरिटोरियल डीएफओ नहीं रहीं है। जबकि उनकी कार्य शैली फॉरेस्ट प्रोटक्शन की रही है।

बेखौफ हुए शिकारी जंगल में बिछा रहे करंट, तेंदुए के साथ युवक की मौत जांच जारी

Fearless hunters are spreading current in the forest, investigation into death of young man with leopard

Fearless hunters are spreading current in the forest, investigation into death of young man with leopard शहडोल ! जिले में करंट लगाकर जंगली जानवरों का शिकार करने का मामला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जंगल में करंट लगाकर जंगली जानवर का शिकार करने के दौरान एक युवक के साथ तेंदुए की मौत का मामला प्रकाश में आने के बाद वन विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। घटना गोहपारू वन परिक्षेत्र अंतर्गत चुहिरी सर्किल के कोडार बीट की है। बुधवार की सुबह तेंदूऐ के शव से 100 मीटर की दूरी में एक युवक का शव मिला है। बताया गया कि युवक कमलेश बैगा पिता बिरजू बैगा उम्र 38 वर्ष निवासी ग्राम कुदरी का रहने वाला था, जिसका कोडार बीट के जंगल में तेंदुए के शव के पास ही युवक का शव मिला है। सुबह जंगल की ओर गए ग्रामीणों ने तेंदुए के पास पड़े युवक के शव को देखकर मामले की जानकारी पुलिस के साथ वन विभाग के अधिकारियों को दी। जानकारी मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी एवं पुलिस मौके पर पहुंच मामले की पड़ताल में जुटी हुई है। जहां यह दोनों शव मिले हैं, वहां 11 हज़ार केवी की लाइन से जंगल में करंट बिछाया गया था। करंट की चपेट में आने से ही दोनों की मौत होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इस मामले पर वन विभाग के साथ पुलिस जांच कर रही है। ग्रामीणों ने बताया कि मृतक कमलेश बैगा जंगल में शिकार करने अपने अन्य साथियों के साथ गया था। तभी 11 हज़ार केवी की लाइन से जीआई तार के माध्यम से जंगली जानवरों के शिकार के लिए बिछाए गए करंट की चपेट में युवक खुद आ गया और उसकी मौत हुई है। युवक को करंट लगता देख उसके अन्य साथी वहां से फरार हो गए, कुछ देर उसी रास्ते जा रहा तेंदुआ भी इसकी चपेट में आ गया, जिससे दोनों की ही मौत हो गई। वन विभाग अधिकारी अपनी टीम के साथ घटना स्थल बुधवार की सुबह पहुंचे और जांच कर रहे हैं, रेंजर ने अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा है। आए दिन जंगल में लगाए जाते हैं करंटबीते दिनों केशवाही वन परिक्षेत्र के जंगल में जंगली जानवरों के शिकार के लिए लगाए गए करंट में पिता पुत्री चपेट में आ गए थे, जिससे दोनों बुरी तरीके से झुलस गए थे। ग्रामीणों का यह भी आरोप था कि वन विभाग के अधिकारियों के साठ गाठ से शिकारी यहां शिकार करते हैं। गोपाहरू वन परिक्षेत्र में कई तेंदुए जंगल में विचरण कर रहे हैं। लेकिन वन विभाग की गश्ती पर यह घटना ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अधिकारी तो कागजों में कई बार निर्देश जारी करते रहते हैं। लेकिन मैदानी अमला गस्ती नहीं करता, जिसकी वजह से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। बता दें, जिस बीट में यह घटना घटी है वहां के डिप्टी रेंजर स्वयं मुख्यालय में नहीं रहते। ऐसा विभागीय सूत्रों का कहना है। रेंजर की लापरवाही की वजह से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। लोगों का कहना है कि रेंजर ने जब से वन परिक्षेत्र गोहपारु की कमान संभाली है, तब से जंगल में गश्ती कम हो गई है और मैदानी अमला भी गश्ती नहीं करता, जिसकी वजह से शिकारी बेखौफ हो गए हैं और करंट लगाकर जंगली जानवरों का शिकार कर रहे हैं। गोहपारू रेंजर हेमंत कुमार प्रजापति का कहना है कि लगातार गश्ती की जाती है, जो कर्मचारी मुख्यालय में नहीं रहते उन पर कई बार कार्रवाई की जा चुकी है। तेंदुए के समीप ही युवक का शव मिला है। जंगल में शिकार करने युवक गया था या नहीं, अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता।मामले की जांच चल रही है। डॉग एस्कॉर्ट को मौके पर बुलवाया गया है।

चीता पवन की मौत, मध्य प्रदेश में इस साल 13 का हुआ जन्म, चार की गई

Cheetah Pawan died, 13 were born this year in Madhya Pradesh, four died

Cheetah Pawan died, 13 were born this year in Madhya Pradesh, four died चीतों के लिहाज से 2024 का समय अब तक ठीक-ठाक रहा है. 2024 के इन आठ महीनों के दौरान 13 शावकों ने जन्म लिया जबकि इस दौरान दो व्यस्क चीते सहित दो शावकों की मौत भी हुई है. अब कूनो नेशनल पार्क में चीता पवन की मौत के बाद संख्या 24 रह गई है, जिनमें 12 वयस्क और 12 शावक शामिल हैं. चीतों के लिए मध्य प्रदेश उपयुक्त माना गया और साल 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीते लाए गए. इन चीतों को बाड़े में रिलीज करने के लिए प्रधानमंत्री खुद आए और चीतों को बाड़े में रिलीज किया. इसके बाद 18 सितंबर 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए थे. अब तक चीतों की दो खेप ही आई है. शुरुआती दौर में चीता प्रोजेक्ट काफी मुश्किल भरा था. नई जगह और नई आबो हवा की वजह से चीतों की मौत हो रही थी, लेकिन अब धीरे-धीरे चीते यहां के वातावरण में ढलने लगे हैं. 2024 का अब तक समय भी अच्छासाल 2023 में ज्यादा चीतों की मौत हुई थी, लेकिन साल 2024 का अब तक का समय बहुत अच्छा निकला है. इस दौरान 4 दुखभरी तो 3 खुशियों भरी खबर आई. खुशखबरी में साल 2024 में 13 शावकों ने जन्म लिया, जबकि दुख भरी खबर ये है कि इसी साल दो व्यस्क चीतों सहित दो शावकों की मौत हुई है. एक चीता पवन बीते मंगलवार (27 अगस्त) को ही मृत अवस्था में पाया गया. चीता प्रोजेक्ट पर एक नजर

करोड़ों की रॉयल्टी नुकसान पर वन -राजस्व सीमा विवाद में ढाई दशक से अटका है कटनी की झिन्ना खदान

Katni's Jhinna mine is stuck for two and a half decades in forest revenue border dispute over royalty loss worth crores.

Katni’s Jhinna mine is stuck for two and a half decades in forest revenue border dispute over royalty loss worth crores. भोपाल। वन-राजस्व सीमा विवाद के चलते 30 में कटनी के झिन्ना की खदान का प्रकरण का निराकरण नहीं हो पाया है। इस मसले पर राज्य शासन और वन विभाग असमंजस में है। फरवरी 2020 में मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दे चुके हैं कि इस प्रकरण में न्यायालयीन प्रक्रिया से प्रदेश के राजस्व में सतत हानि हो रही है। बावजूद इसके, 2017 से सुप्रीम कोर्ट में कटनी का झिन्ना खदान विवाद लंबित है। इससे जहां सरकार को करोड़ों की रेती का नुकसान हो रहा है वही 20 गांव के 2000 से अधिक लोग रोजगार से मेहरूम है। दिलचस्प पहलू यह है कि समय-समय पर अधिकारियों के सुर आदेश बदलते रहे।शिकायती पत्र के मुताबिक, कटनी के खनन कारोबारी आनंद गोयनका मेसर्स सुखदेव प्रसाद गोयनका को मध्य प्रदेश की तत्कालीन दिग्विजय सरकार के कार्यकाल में 1994 से 2014 तक की अवधि के लिए 48.562 हेक्टेयर भूमि पर खनिज करने का पट्टा मिला था। खनिज पट्टा आवंटित होने की पीछे भी बहुत कुछ छिपा है। दरअसल मध्य प्रदेश शासन ने ग्राम झिन्ना तहसील ढीमरखेड़ा जिला कटनी के वन क्षेत्र की 48.562 हेक्टेयर भूमि पुराना खसरा नम्बर 310, 311, 313, 314/1, 314/2, 315, 316, 317, 318, 265, 320 में खनिज के लिए एक अप्रैल 1991 में 1994 से लेकर 2014 तक की अवधि के लिए निमेष बजाज के पक्ष में खनिज पट्टा स्वीकृत किया था। जिसे वर्ष 1999 में मध्य प्रदेश शासन के खनिज विभाग के आदेश से 13 जनवरी 1999 को उक्त खनिज पट्टा मेसर्स सुखदेव प्रसाद गोयनका प्रोप्राइटर आनंद गोयनका के पक्ष में हस्तांतरित किया गया। लेकिन साल 2000 में वन मंडल अधिकारी कटनी के पत्र के आधार पर कलेक्टर कटनी ने आदेश पारित कर लेटेराइट फायर क्ले और अन्य खनिज के खनन पर रोक लगा दी थी।खदान से संबंधित फैक्ट फाइल नौकरशाह और आईएफएस अफसर के सुर बदलते रहेइस मामले में सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि आईएएस अफसर हो या फिर आईएफएस समय-समय पर सभी के सुर बदलते रहे। मसलन जब अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल दूसरी बार वन मंत्रालय संभाला तो एक आदेश जारी कर पूर्व एसीएस वन जेएन कंसोटिया के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें कटनी जिले की तहसील ढीमरखेड़ा के ग्राम झिन्ना की खदान के मामले में सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी वापस लेने का आदेश दिया था। अपने आदेश को तत्काल अमल में लाने के लिए कंसोटिया ने बाकायदा डीएफओ कटनी को कारण बताओं नोटिस की तलब किया था। यहां यह भी तथ्य भी गौरतलब है कि जब वर्णवाल प्रमुख सचिव वन थे तब उन्होंने भी एसएलपी वापस लेने का आदेश जारी किया था। अब वही बता सकते है कि वे तब सही थे या फिर अब..? फिलहाल पिछले महीने वन विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने वन मुख्यालय को निर्देश दिये हैं कि यदि यह केस अब तक वापस नहीं लिया गया है तो केस वापस लेने की कार्रवाई आगामी आदेश तक रोक दी जाये। वर्णवाल के आदेश के बाद जंगल महकमे में लाख टके का सवाल उठ रहा है कि आखिर किस अदृश्य शक्ति के दबाव में आकर पूर्व एसीएस कंसोटिया ने एसएलपी वापस लेने का आदेश जारी किया था। इसी प्रकार रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी जेपी शर्मा जब भू-अभिलेख शाखा में एपीसीसीएफ थे तब उन्हें विवादित खदान भूमि वन भूमि का हिस्सा दिखा करती थी पर जब रिटायर हो गए तो उन्हें भी विवादित भूमि राजस्व भूमि नजर आने लगी है। अफसरों की कमेटी ने लिया था एसएलपी वापस लेने का निर्णयएसएलपी वापस लेने संबंधित आदेश जारी करने के पूर्व 13 अक्टूबर 23 को अपर मुख्य सचिव वन कंसोटिया की अध्यक्षता में एक विशेष बैठक बुलाई गई थी। बैठक में अतुल कुमार मिश्रा सचिव वन, अशोक कुमार पदेन सचिव, आरके गुप्ता तत्कालीन वन बल प्रमुख, अतुल कुमार श्रीवास्तव तत्कालीन पीसीसीएफ वर्किंग प्लान और अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक भू अभिलेख डॉ वीएस अन्नागिरी भी उपस्थित थे। यह बैठक में ग्राम झिन्ना एवं हरैया तहसील ढीमरखेड़ा जिला कटनी में स्वीकृत खनिज पट्टे विवाद के निराकरण के लिए बुलाई गई थी। इस कमेटी के निर्णय के बाद ही तत्कालीन एसीएस कंसोटिया ने एसएलपी वापस आदेश जारी किया। यह बात अलग है कि इसी आदेश के चलते ही उनसे वन मंत्रालय से हटा दिया गया।

विरूद्व वन अपराध प्रकरण क्रमांक 31/12 दिनांक 24 फरवरी 24 के माध्यम से पंजीबद्ध किया गया,अनुमति के विरुद्ध 27.9 हेक्टेयर पर निर्माण किया

construction was done on 27.9 hectares against the permission.

Forest offence case number 31/12 dated 24 February 24 was registered against him, construction was done on 27.9 hectares against the permission. (विशेष संवाददाता ) भोपाल। कंपनी द्वारा स्थल पर कक्ष कमांक पी-546 में 182.00 हेक्टेयर में निर्माण कार्य किया गया है, जिसमें सीमेन्ट फैक्ट्री प्लांट, रिहायसी कॉलोनी, स्कूल, रेस्टहाउस आदि सम्मिलित हैं। कक्ष कमांक पी-546 में 182 हेक्टेयर में निर्माण कार्य के अतिरिक्त कंपनी द्वारा कक्ष कमांक पी-555 में 27.9 हेक्टेयर में बैंक, लेबर कॉलोनी, कॉलेज, हॉस्पिटल, बाजार आदि का निर्माण किया गया है। अतएव फैक्ट्री प्रबंधन को कुल आवंटित 188.23 हेक्टेयर वनभूमि में से कन्वेयर बेल्ट हेतु आवंटित 5.855 हेक्टेयर वनभूमि को हटाकर कुल 182.375 हेक्टेयर में निर्माण कार्य करने की अनुमति प्राप्त थी किंतु कंपनी द्वारा आवंटित 182.375 हेक्टेयर वन भूमि के विरुद्ध बीट सगमनिया के कक्ष क्रमांक पी-546 में 182 हेक्टेयर तथा बीट बम्हनी के कक्ष क्रमांक पी-555 मैं 27.9 हेक्टेयर में निर्माण कार्य किया गया। इस प्रकार कंपनी को निर्माण कार्य हेतु कुल आवंटित वन भूमि 182.375 हेक्टेयर के विरुद्ध कुल 209.9 हेक्टेयर वन भूमि में फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा निर्माण कार्य किया गया। अतएव कंपनी द्वारा 27.9 हेक्टेयर वन भूमि अतिरिक्त अवैध निर्माण कार्य किया गया है।  वर्किंग प्लान में भी अतिक्रमण का था उल्लेख  वनमण्डल सतना की कार्य आयोजना में वर्ष 2008-09 से 2017-18 में 30 हेक्टेयर तथा वर्तमान कार्य आयोजना वर्ष 2019-20 से 2028-29 भाग-3 आलेख में 24.94 हेक्टेयर अतिक्रमण कक्ष कमांक पी-555 में लेख किया गया है। जो 2005 के पूर्व का है। कार्य आयोजना (वर्ष 2008-09 से 2017-18) एवं वर्तमान कार्य आयोजना (वर्ष 2019-20 से 2028-29) के अनुसार भी कक्ष कमांक पी-555 में कंपनी प्रबंधन द्वारा किये गये 27.9 हेक्टेयर में निर्माण कार्य अतिक्रमण के रूप में अंकित है एवं यह अतिक्रमण वर्ष 2005 से पूर्व का है।  गूगल इमेजरी में भी अतिक्रमण उजागर  गूगल अर्थ इमेजरी वर्ष 2002 तक ही उपलब्ध है एवं वर्ष 2002 के पूर्व की गूगल इमेजरी उपलब्ध नहीं है। वर्ष 2002 की गूगल इमेजरी में यह अतिक्रमण देखा जा सकता है। अतएव यह अतिक्रमण वर्ष 2002 के पूर्व का है। फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा इनके निर्माण वर्ष के सम्बन्ध में कोई भी दस्तावेज तथा कथन प्रदाय नहीं किये गये हैं। जांच के समय स्थानीय बुजुर्गों से पूछतांछ की गई, जिसमें उनके द्वारा बताया गया कि अस्पताल, कॉलोनी एवं ग्राउन्ड वर्ष 1981 से 1984 के मध्य में बना है तथा कॉलेज एवं बाजार 2000 से 2002 के मध्य प्रारंभ किया गया है तथा कॉलेज को वर्ष 2005 में मान्यता प्राप्त हुई है।  किसी राजस्व अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं  अल्ट्राटेक सीमेण्ट फैक्ट्री द्वारा उक्त भूमि के संबंध में आज दिनांक तक केवल कलेक्टर, सतना द्वारा वर्ष 1993 में (1977 से 2078, 99 वर्ष की अवधि के लिए) दी गई लीज डीड की छायाप्रति प्रदाय की गई है। साथ ही फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा वर्ष 1990 के एक नक्शे की छायाप्रति प्रदाय की गई है, जिसमें किसी भी राजस्व के अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं, इसमें केवल एसएन नाचने तत्कालीन डीएफओ सतना के हस्ताक्षर है। यह कोई मानचित्र नहीं है, बल्कि कंपनी द्वारा स्थल पर किये गये निर्माण कार्य का लेआउट प्लान है, जो कि उन्होंने अतिक्रमण पश्चात् बनाया है, जिसकी कोई वैधता नहीं है। साथ ही लेख है कि इस क्षेत्र के राजस्व मानचित्र भू-अभिलेख कार्यालय जिला सतना एवं मैहर में उपलब्ध नहीं है। साथ ही कलेक्टर जिला सतना द्वारा वर्ष 1993 में प्रदाय की गई लीज डीज की मूल फाइल तथा संबंधित अन्य अभिलेख भी अद्यतन स्थिति में प्राप्त नहीं हुए है।

एक दशक से सक्रिय सिंडीकेट पर वन बल प्रमुख का चोट, पूर्व में किए गए टेंडर निरस्त करने के आदेश

Forest Force chief hits out at syndicate active for a decade, orders to cancel tenders made earlier

Forest Force chief hits out at syndicate active for a decade, orders to cancel tenders made earlier उदित नारायण भोपाल। वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने डीएफओ-सीएफ और सप्लायर्स के बीच बने सिंडीकेट को तोड़ने की मंशा से कड़ा फैसला लिया है। वन बल प्रमुख ने बुधवार को एक आदेश जारी कर फील्ड के अफसरों को सख्त निर्देश दिए हैं कि टेंडर की नई शर्ते बनने तक पूर्व में किए गए खरीदी संबंधित निविदाएं निरस्त किए जाएं। यही नहीं, विभाग के मुखिया ने खरीदी के कारोबार में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की मंशा से पूरे प्रदेश में एक समान शर्तें लागू करने के लिए कमेटी बना दी है। इसके पहले भी श्रीवास्तव ने एक आदेश जारी कर सभी टेंडर विभागीय वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि इस निर्देश का पालन कई डीएफओ नहीं कर रहे हैं।  जंगल महकमेमें एक दशक से अधिक समय से फील्ड के अफसरों और सप्लायर्स के बीच एक सिंडीकेट बना हुआ है। इस सिंडीकेट को अभी तक कोई तोड़ नहीं पाया। सिंडीकेट से जुड़े 10 -12 बड़े सप्लाययर्स ही वन विभाग में हर वित्तीय वर्ष में 90-100 करोड़ के करोड़ के कारोबार करते आएं है। उनके इस कारोबारी साम्राज्य में कोई और घुसपैठ न कर सके, इसके लिए फील्ड के अफसर से खरीदी संबंधित निविदाओं में नई-नई शर्तों जुड़वाते आ रहे थे। इन निविदाओं की जानकारी भी उन्हें ही लगती थी, जो सिंडीकेट से जुड़े होते हैं। वन बल प्रमुख बनने के बाद से असीम श्रीवास्तव को लगातार शिकायतें मिल रही थी कि टेरिटोरियल में बैठे डीएफओ और सीएफ कमीशन बाजी का खेल खेलने के लिए मनमानी शर्तें जोड़ रहे हैं। इसके कारण मध्य और लघु कारोबारी प्रतिस्पर्धा से बाहर होते जा रहे हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सबसे पहले वन बल प्रमुख ने एक आदेश जारी किया जिसमें सभी को निर्देशित किया है कि निविदा चाहे जेम (Gem) के जरिये हो या फिर अखबार में प्रकाशित की गई हो, उन्हें विभाग के साइट पर भी अपलोड कराया जाएं। हालांकि इस आदेश के बाद मॉनिटरिंग की व्यवस्था मुख्यालय स्तर पर नहीं की गई है जिसके कारण डीएफओ और सीएफ अभी भी नफरमानी कर रहे हैं। लेकिन 14 अगस्त को जारी आदेश से सिंडीकेट से जुड़े अधिकारियों और सप्लायर्स में हड़कंप है।  क्या क्या खरीदी होती है वन विभाग में हर साल चैनलिंक, वायरवेड, टिम्बर पोल्स, रूट ट्रेनर्स, मिट्टी, गोबर एवं रासायनिक खाद की खरीदी में बड़े पैमाने पर खरीदी होती है। सबसे अधिक खरीदी कैंपा फंड से की जा रही है। इसके अलावा विकास और सामाजिक वानिकी (अनुसंधान एवं विस्तार ) शाखा से भी खरीदी होती है। विभाग के उच्च स्तरीय सूत्रों की माने तो कुल रिलीज बजट की 18 से 20% धनराशि कमीशन के रूप में टॉप -टू – बॉटम बंटती है। यानि सप्लायर्स को हर साल लगभग 10-12 करोड़ कमीशन में बांटने पड़ते हैं।  चहेती फर्म को उपकृत करने जोड़ देते हैं ये शर्तें राजनीतिक दबाव में बदल दी जाती है शर्तें मैनेजमेंट कोटे से फील्ड में पदस्थ हुए आईएफएस अधिकारी राजनीतिक दबाव के आगे झुक जाते हैं। इसके बाद सिंडीकेट से जुड़े आईएफएस अपनी स्वार्थ सिद्धी के लिए सप्लायर्स के अनुसार शर्तें जोड़-घटा कर कमीशनबाजी के खेल से जुड़ हैं। इस खेल में उन्हें तब अफसोस होने लगता है जब उनके खिलाफ जांच शुरू होने हो जाती है। इसी खेल से जुड़े तत्कालीन छतरपुर डीएफओ एवं वर्तमान अवर सचिव वन अनुराग कुमार के खिलाफ लोकायुक्त संगठन कर रहा है। बालाघाट मुख्य वन संरक्षक अरविंद प्रताप सिंह सेंगर के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है। सूत्रों की माने तो एक दर्जन से अधिक डीएफओ के खिलाफ शिकायतें विभागीय विजिलेंस में लंबित है।  सीनियर अधिकारियों ने की है तारीफ  वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव द्वारा बुधवार को किए गए आदेश की तारीफ की है। एक सीनियर अधिकारी ने कहा है कि इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और लघु एवं मध्यम कारोबारी भी प्रतिस्पर्धा से जुड़ जाएंगे। यही राज्य शासन की भी मंशा है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के एक अधिकारी का कहना है कि फील्ड के अधिकारी अनावश्यक जांच और सप्लायर्स के  दबाव से मुक्त रहेंगे।

वन भवन की अनोखी पहल, बनाया बीज बैंक

A unique initiative of Van Bhavan, created a seed bank

A unique initiative of Van Bhavan, created a seed bank उदित नारायण बीज बैंक स्थापना एक ऐतिहासिक पहल है. वन विभाग के समस्त स्टाफ तक एक मैसेज पास कर देंगे तो बहुत बड़ा काम हो जाएगा.  इस तरह है वन भवन में स्थापित बीज बैंक में करोडो बीज जुटाने में सफल हो जायेंगे  कृपया  वन भवन  स्टाफ अपने घरों में आने वाले सभी फलों के बिजों को गुठलियों को कचरे में ना फेंके उन्हें धोकर सुखाकर पॉलिथीन में पैक करके वन भवन में बीज बैंक के बॉक्स में दान करें.  सांसें हो रही हैं कम आओ वृक्ष लगाएं हम

एमएफपी पार्क की दुर्दशा पर एएमडी अग्रवाल भड़के, बोले, पार्क वालों को…. संघ से बाहर कर दो

AMD Agrawal got angry on the plight of MFP park

AMD Agrawal got angry on the plight of MFP park, said, expel the park people from the union उदित नारायण भोपाल। लघुवनोपज संघ के प्रसंस्करण केंद्र (एमएफपी पार्क) की दुर्दशा, घटती उत्पादन और व्याप्त गड़बड़झाला के चलते अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मनोज अग्रवाल अत्यंत दुखी और व्यथित हैं। यही वजह रही कि शुक्रवार को एक बैठक में एमएफपी पार्क के सीईओ, उत्पादन प्रभारी प्रबंधक और अन्य अधिकारी- कर्मचारी  को देखकर भड़क गए। उन्होंने गुस्से में बोल गए कि एमएसपी पार्क वालों को…. संघ से बाहर कर दो। गनीमत यह रही कि दूसरी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। अग्रवाल के व्यवहार को लेकर सोमवार को पार्क के अधिकारी-कर्मचारी ज्ञापन रोकने की तैयारी कर रहे हैं।  अंतर्राष्ट्रीय वन मेले की तैयारी को लेकर लघु वनोपज सहकारी संघ के एएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने शुक्रवार को एक बैठक बुलाई। इस बैठक में पीजी फूलझेले, कार्यकारी संचालक, अर्चना पटेल, मुख्य कार्यपालन अधिकारी,  केके द्विवेदी सचिव, संजय मौर्य प्रबंधक वित्त, व्ही.एस. पिल्लई प्रबंधक,  सुनीता अहिवार उप प्रबंधक, प्रियंका बाथम उप प्रबंधक समेत 17 अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित है। बैठक में अग्रवाल ने वन मेले की तैयारी संबंधित एजेंडा को दरकिनार करते हुए एसपी पार्क की दुर्दशा पर चर्चा करते हुए कहा कि अधिकारियों ने 20 साल की कड़ी मेहनत करके एमएफपी पार्क को यहां लाकर खड़ा किया कि उसकी पूरे देश में साख है। आप सभी ने उसे बर्बाद कर दिया कोई काम- धाम नहीं करते हो। बस इधर-उधर घूमते दिखाई देते हो। आज एक करोड़ का वर्क आर्डर मिला है लेकिन अभी तक उत्पादन शुरू नहीं हो पाया। इसके बाद एएमडी अग्रवाल ने एमएफपी के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए जो कहा उसको अक्षरश: लिखा नहीं जा सकता। यहां यह उल्लेख करना उचित होगा कि मनोज अग्रवाल की गुस्से में भाषा शैली जरूर अनुचित थी किन्तु बात शत-प्रतिशत सही है। कभी एमएसपी पार्क देश के 17 राज्यों में अपने आयुर्वेदिक उत्पाद विक्रय करता था। लेकिन गत 2 वर्षों में अनुभवहीन अफसर के हाथों में एमएफपी का संचालन, प्रशासनिक उदासीनता, उत्पादन मैनेजर की स्वेच्छाचारिता और गड़बड़ियों के चलते केंद्र को बहुत नुक़सान हुआ वर्ष 2023-24 में केवल 18 करोड़ का ही ऑर्डर मिला और अभी 2024-25 के वित्तीय वर्ष में केवल 1.8 करोड़ का आर्डर मिला है।  अग्रवाल को घेरने की तैयारी में पार्क के अधिकारी आईएफएस अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल, लघु वनोपज सहकारी संघ द्वारा बरखेड़ा पठानी की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमति अर्चना पटेल और श्रीमति अर्चना पटेल, रेंजर सुनीता अहिरवार, रेंजर प्रियंका बाथम, डॉ अनिल कुमार को भरी मीटिंग में सबके सामने दुर्व्यहार किए जाने के विरोध में सोमवार को ज्ञापन सौंपने जा रहे हैं। इस ज्ञापन के मजमून को जातिसूचक रंग देने की कवायत चल रही है। इसके पहले भी वो ऐसा कारनामा कर चुके हैं, अर्चना पटेल को इतना प्रताड़ित किया गया था की वो अस्वस्थ हो गई थी और उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ा। ओबीसी संगठन मनोज अग्रवाल के कृत्य की घोर निन्दा करता है और मांग करता है कि इन्हें तत्काल यहां से हटाया जाए । अग्रवाल लघु वनोपज संघ में प्रतिनियुक्ति पर है। अनुभवहीनों के भरोसे विंध्या हर्बल्स की कमान लघुवनोपज संघ की इकाई लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र एमएसपी पार्क बरखेड़ा पठानी विगत 20 वर्षों से विंध्या हर्बल नाम से आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्माण करता आ रहा है। विगत वर्षों में एमएसपी पार्क निरंतर प्रगतिशील रहा। एक समय था, जब एमएसपी पार्क देश के 17 राज्यों में अपने आयुर्वेदिक उत्पाद विक्रय करता था। लेकिन गत 2 वर्षों में अनुभवहीन अफसर के हाथों में एमएसपी का संचालन, प्रशासनिक उदासीनता, उत्पादन मैनेजर की स्वेच्छाचारिता और गड़बड़ियों के चलते केंद्र को बहुत नुक़सान हुआ वर्ष 2023-24 में केवल 18 करोड़ का ही ऑर्डर मिला और अभी 2024-25 के वित्तीय वर्ष में केवल 1.8 करोड़ का आर्डर मिला है जिसकी सप्लाई करना संस्थान को असंभव लग रहा है। अभी तक उत्पादन ही नहीं शुरू हो पाया है। इसकी वजह उत्पादन प्रभारी एसडीओ सुनीता अहीरवार का अधिकारियों के साथ समन्वय का न होना है। बताया जाता है कि सुनीता अहीरवार पार्क की सीईओ अर्चना पटेल को रिपोर्ट नहीं करती। वे सीधे एमडी बिभाष ठाकुर को रिपोर्टिंग करती है।  पिछले सीईओ प्रफुल्ल फ़ुलझेले से सुनीता की भ्रष्ट नीतिओं की जांच शुरू करने के वाद-विवाद के बाद हटा दिया गया था और अहिरवार के खिलाफ शुरू होने वाली जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

930 रुपए किलो का गुग्गल 1700 रूपये किलो में खरीदा, 30 लाख से अधिक का गड़बड़झाला

Guggal worth Rs 930 per kg bought for Rs 1700 per kg, fraud worth more than Rs 30 lakh

Guggal worth Rs 930 per kg bought for Rs 1700 per kg, fraud worth more than Rs 30 lakh उदित नारायण सीनियर आईएफ एस के संरक्षण के चलते प्रभारी उत्पादन प्रबंधन की मनमानी जारी भोपाल। लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक बिभास ठाकुर ने एमएफपी पार्क बरखेड़ा पठानी में रॉ मटेरियल खरीदी में गड़बड़झाला पर कार्यवाई करने की जगह उसे दबा दिया हैं। प्रभारी एसडीओ एवं उत्पादन प्रबंधक ने टेंडर की दर से न खरीदकर आर्यन फार्मेसी से ₹1700 किलो की दर से खरीदी की है। यही मौजूदा सीइओ अर्चना पटेल एमएसपी पार्क के उत्पादन प्रबंधक की मनमानी नहीं रोक पा रहीं है।सूत्रों ने बताया कि एमएसपी पार्क के प्रबंधक ने गूग्गल सहित प्रष्टपर्णी, काली मिर्च, हींग, पुनर्नवा आदि रॉ मैटेरियल की खरीदी के लिए टेंडर किया था। टेंडर में गुग्गल के लिए हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार का रेट 930 रूपये प्रति किलोग्राम था। एसपी पार्क के कर्ताधर्ता ने हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार से खरीदी न करके आर्यन फार्मेसी से ₹1700 की कीमत पर 4000 किलो खरीदी की। हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार फर्म से न तो वर्क आर्डर दिया गया और न किसी प्रकार का पत्राचार किया गया। आर्यन से खरीदी से संघ को 30 लाख 80000 रुपए का अधिक भुगतान करना पड़ा है। प्रभारी एसडीओ एवं उत्पादन प्रबंधक ⁠सुनीता अहीरवार के कार्यकाल में 6 करोड़ों की govt सप्लाई में 3 करोड़ से अधिक की रॉ -मटेरियल ख़रीदी के भुगतान किये गये है, जिसमें 2 करोड़ के बिल तो आर्यन फ़ार्मेसी के थे। इसके अलावा 30-35 लाख के मरम्मत के भुगतान किये जा चुके है।लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र बरखेड़ा पठानी के सीईओ पीएल फुलझले हटने के बाद से ही प्रभारी एसडीओ सुनीता अहीरवार मनमानी बढ़ गई है। यहां तक कि फुलझले की जगह प्रमोट आईएफएस अर्चना पटेल को डमी के रूप में सीईओ बनाया गया है। पार्क के अधिकारी और कर्मचारी इसकी मुख्य वजह भी एसीएस से मिल रहे हैं संरक्षण को बताया जा रहा है। एमडी के आदेश का ही नहीं हो रहा पालन लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक ठाकुर ने भंडारण की जांच के लिए एसीएफ मणि शंकर मिश्र को 7 दिन में जांच का रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे किंतु अभी तक जांच शुरू नहीं हुई। चिंताजनक पहलू यह है कि एसीएफ मिश्रा जांच के भंडारण से संबंधित दस्तावेज मांगने के लिए एमडी ठाकुर से लगातार चिट्ठीयां लिखना शुरू किया तो उन्हें ही वहां से हटा दिया गया। मिश्रा ने दस्तावेज मांगने के लिए हटाए jaane के पूर्व तक करीब चार रिमाइंडर सुनीता अहिरवार को भेज चुके थे और इतने ही पत्र एमडी ठाकुर को स्मरण पत्र लिखा था। मिश्रा के हटाने से यह चर्चा है कि एमडी ठाकुर उत्पादन प्रबंधक सुनीता अहिरवार के खिलाफ कार्यवाई नहीं करना चाहते हैं। इसके बाद से उत्पादन प्रबंधक की मनमानी बढ़ गई है। उनकी मनमानी से दुखी सीइओ अर्चना पटेल ने उनके खिलाफ अनुशासनहीनता का नोटिस दिया हुआ है। यही नहीं, विद्या निनारे को भंडार में रा मटेरियल जाँच करने के मौखिक निर्देश प्रबंध संचालक और सीईओ ने मीटिंग में सबके सामने दिये थे। उस मीटिंग में सुनीता अहीरवार भी मौजूद थी फिर भी अपने भ्रष्टाचार को छुपाने और एसीएस वन से जान-पहचान की धुन में नियमों को भी धता बता रही है।

सीएफ-डीएफओ सप्लायर्स के लिए नहीं जोड़ पाएंगे औचित्यहीन टेंडर की शर्ते

CF-DFO will not be able to add unreasonable tender conditions for suppliers

CF-DFO will not be able to add unreasonable tender conditions for suppliers उदित नारायणभोपाल। हर वित्तीय वर्ष में 70 से 80 करोड रुपए की चैनलिंक जाली, बारवेड वायर, टिम्बर पोल्स, रूट ट्रेनर्स, मिट्टी और गोबर खाद वगैरह की खरीदी में डीएफओ और सीएफ टेंडर की शर्तों में मनमानी नहीं कर सकेंगे। वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने पूरे प्रदेश में एक समान शर्तें लागू करवाने के लिए एक कमेटी गठित कर दी है। कमेटी को 7 दिन में अपनी रिपोर्ट प्रधान मुख्य वन संरक्षक विकास को सौंपने के निर्देश दिए हैं। वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने शर्तें बनाने के लिए 10 सदस्य कमेटी गठित की है। दिलचस्प पहलू यह है कि कमेटी में डीएफओ विजयानंतम टीआर दक्षिण बैतूल को शामिल किया गया है, जिन्होंने भी अपने वन मंडल के लिए जारी निविदा में अनावश्यक शर्तें जोड़ी हैं। इस कमेटी में उत्तम शर्मा एपीसीसीएफ सिंह परियोजना को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। शर्मा के अलावा राखी नंदा सीएफ सामाजिक वानिकी, राजेश राय सीएफ रीवा, कमल अरोरा सीएफ जबलपुर, आलोक पाठक सीएफ वन मंडल भोपाल, बृजेंद्र श्रीवास्तव सीएफ वन मंडल पूर्व छिंदवाड़ा, प्रदीप मिश्रा डीएफओ देवास, विजयानंतम टीआर दक्षिण बैतूल और नीथ्यानंतम डीएफओ पश्चिम मंडला को बतौर सदस्य शामिल किया है। उल्लेखनीय है कि वन बल प्रमुख और पीसीसीएफ को लगातार शिकायतें मिल रही थी कि फील्ड में पदस्थ डीएफओ और सीएफ चहेते सप्लायर्स को वर्क आर्डर देने के लिए उनके मुताबिक निविदा में शर्तें जोड़ रहे हैं। इनमें ऐसी भी शर्तें जोड़ी गई, जो अनावश्यक होती है। मसलन, 10 प्रकार के आईएसओ और इपीएफओ का प्रमाण पत्र। आईएसओ की शर्तों को लेकर जब पीसीसीएफ विकास यूके सुबुद्धी ने कतिपय डीएफओ जब आईएसओ और इपीएफओ का प्रमाण पत्र के औचित्य पर सवाल किए तब टेंडर निरस्त कर दिए गए। इनमें से कुछ डीएफओ तो अभी भी अपनी मनमानी पर अड़े हुए हैं। सरकार के निर्देशों की अवहेलना राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देश है कि वायरवेट, चैनलिंक और पोल की खरीदी में लघु उद्योग निगम को प्राथमिकता दें किंतु 95% खरीदी जेम्स और ई टेंडर से हो रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि लघु उद्योग निगम की दर और जेम (GEM) की दरों में डेढ़ गुना अंतर है। यानी लघु उद्योग निगम में वायरवेट किधर 83 रुपए से लेकर 85 रुपए तक निर्धारित की गई है। जबकि जेम (GEM) में ₹150 तक है। सरकार की मंशा यह भी है कि लघु और मध्यम उद्यमियों को इस कारोबार से जोड़ा जाए। मुख्यालय से लेकर फील्ड के अफसर टेंडर की शर्तों में ऐसी शर्ते जुडवा देते हैं जिसके चलते लघु और मध्यम उद्यमी प्रतिस्पर्धा की दौड़ से बाहर हो जाते हैं। चहेती फर्म को उपकृत करने जोड़ दी जाने वाली शर्तें हॉफ के आदेश का हवा में उड़ा रहे हैं डीएफओ वन मंडलों द्वारा ई-टेंडर अथवा जेएम (GeM) के लिए वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने नया आदेश जारी किया है। वन बल प्रमुख श्रीवास्तव के इस आदेश का अधिकांश डीएफओ पालन नहीं कर रहे हैं। इस संबंध में आईटी शाखा ने एक पत्र लिखकर हॉफ को अवगत भी कराया है। आईटी शाखा ऐसे डीएफओ की सूची भी बना रहा है, वेबसाइट पर अपलोड नहीं कर रहे हैं। क्या है हॉफ के आदेश? हॉफ श्रीवास्तव ने इस आदेश कहा है कि प्रति वर्ष विभाग के विभिन्न कार्यों हेतु सामग्री का क्रय जेम के माध्यम से किया जाता है। जेम के माध्यम से क्रय की जाने वाली सामग्री की जानकारी से मुख्यालय अनभिज्ञ रहता है एवं इस कारण वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा तत्समय यदि टेंडर में कोई त्रुटि होती है, वनमंडलाधिकारियों को उचित निर्देश नही दिये जा पाते। अतः भविष्य में जेम के माध्यम से क्रय की जाने वाली सामग्री का टेंडर की जानकारी/विज्ञापन विभागीय पोर्टल पर भी अपलोड किया जाना सुनिश्चित करें। दर्शन इसकी मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है, जिसके कारण डीएफओ अभी भी मनमानी कर रहे हैं। 18 से 20% धनराशि बंटते है कमीशन में चालू वित्त वर्ष में जंगल महकमे में करीब 60 से 70 करोड़ रूपए की चैनलिंक, बारवेड वायर और टिम्बर पोल्स की खरीदी में बड़े पैमाने पर कमीशन बाजी का खेल खेला जा रहा है। सबसे अधिक खरीदी कैंपा फंड से की जा रही है। इसके अलावा विकास और सामाजिक वानिकी (अनुसंधान एवं विस्तार ) शाखा से भी खरीदी होती है। विभाग के उच्च स्तरीय सूत्रों की माने तो कुल रिलीज बजट की 18 से 20% धनराशि कमीशन के रूप में टॉप -टू – बॉटम बंटती है। यानि सप्लायर्स को हर साल लगभग 10-12 करोड़ कमीशन में बांटने पड़ते हैं।

आईएफएस के एपीएआर संशोधन संबंधित शासन के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में दी चुनौती

The government's order regarding IFS's APAR revision was challenged in the Supreme Court

The government’s order regarding IFS’s APAR revision was challenged in the Supreme Court गणेश पाण्डेय  भोपाल। मध्य प्रदेश में अखिल भारतीय दो सेवाओं के बीच टकराहट की स्थिति निर्मित हो गई है। प्रदेश की नौकरशाही जंगल में भी अपनी हुकूमत चलाने की मंशा से 22 साल से चली आ रही एपीएआर लिखने की प्रक्रिया में संशोधन आदेश करते हुए डीएफओ और वन संरक्षक के मूल्यांकन का अधिकार कलेक्टर कमिश्नर को दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि प्रदेश सरकार द्वारा जारी आदेश दिनांक 29 जून 2024 और विशेष रूप से पैरा 2 और पैरा 3 को रद्द करें। मध्य प्रदेश सरकार को टी.एन. गोदाबर्मन के फैसले में उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए एक नया आदेश जारी करने का निर्देश दें। याचिका में उल्लेखित है कि 29 जून 2024 के अपने आदेश आईएफएस के अधिकार को भी कमजोर करता है। विवादित आदेश में एपीएआर प्रक्रिया में अन्य सेवाओं [अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस)/प्रधान सचिव (पीएस)] के अधिकारियों को शामिल किया गया है, जो इस आवश्यकता के विपरीत है कि रिपोर्टिंग अधिकारी वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी हों। मसलन, डीएफओ, वन संरक्षक और मुख्य वन संरक्षक जैसे पदों के लिए रिपोर्टिंग प्राधिकारी, मूल्यांकन और स्वीकार कर्ता आईएफएस ही होना चाहिए। याचिका कर्ता एडवोकेट गौरव कुमार बंसल ने अपने याचिका में कहा है कि  29 जून 24 के अपने आदेश के तहत मध्य प्रदेश राज्य ने प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) से लेकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) तक के भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए पीएआर चैनल के संबंध में एक नई व्यवस्था शुरू की है। 29 जून 2024 के आक्षेपित आदेश का प्रासंगिक भाग, जो सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का सीधा उल्लंघन है। मूल्यांकन प्रक्रिया में गैर-वन विभाग के अधिकारियों को शामिल करने से न केवल भारतीय वन सेवाओं का प्राथमिक अधिदेश अर्थात वनों और वन्यजीवों का वैज्ञानिक प्रबंधन, सुरक्षा और संरक्षण कमजोर होगा, बल्कि संरक्षण पर भी प्रभाव पड़ेगा।  याचिका कर्ता बंसल ने यात्रा में कहा है कि राजस्व जैसे विभागों के अधिकारियों को वन अधिकारियों का मूल्यांकन करने की अनुमति देकर वन, वन्य प्राणी और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को एक महत्वपूर्ण झटका देता है। हरियाणा राज्य बनाम पी.सी. वाधवा (1987 (3) एससीसी 404) ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के लिए रिपोर्टिंग प्राधिकारी उसी सेवा के भीतर तत्काल वरिष्ठ होना चाहिए। विवादित आदेश, इस स्थापित मिसाल से हटकर, कानूनी असंगतता पैदा करता है और भविष्य के प्रशासनिक आदेशों के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करता है। वन और पर्यावरण संरक्षण बनाम विकास के चलते टकराव भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए मुख्य चुनौती पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को संतुलित करना है। जबकि  आईएएस अधिकारियों का समग्र काम राजस्व और प्रशासनिक मामलों पर केंद्रित है। आईपीएस अधिकारियों का काम कानून और व्यवस्था पर केंद्रित है, वहीं आईएफएस अधिकारियों का काम प्रकृति में अधिक तकनीकी है। वह पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के लिए समर्पित हैं। राज्य कानूनों को लागू करने वाले आईएएस और  आईपीएस अधिकारियों के विपरीत, आईएफएस अधिकारी मुख्य रूप से वनों और वन्यजीवों से संबंधित केंद्रीय कानूनों को लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं।  कई बार आईएफएस अधिकारियों को अक्सर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। वन अधिनियम एवं वन संरक्षण कानून को लागू करवाने के प्रयास में आईएफएस अफसरों और  राजस्व अधिकारी टकराते हैं।

चैनलिंक, बारवेड वायर और पोल्स की 60 करोड़ की खरीदारी में कमीशनबाजी बंट जाते हैं 12 करोड़

12 crore commission is divided in the purchase of 60 crores of chainlink, barbed wire and poles.

12 crore commission is divided in the purchase of 60 crores of chainlink, barbed wire and poles. उदित नारायणभोपाल ! चालू वित्त वर्ष में जंगल महकमे में करीब 50 से 60 करोड़ रूपए की चैनलिंक, बारवेड वायर और टिम्बर पोल्स की खरीदी में बड़े पैमाने पर कमीशन बाजी का खेल खेला जा रहा है। सबसे अधिक खरीदी कैंपा फंड से की जा रही है। इसके अलावा विकास और सामाजिक वानिकी (अनुसंधान एवं विस्तार ) शाखा से भी खरीदी होती है। विभाग के उच्च स्तरीय सूत्रों की माने तो कुल रिलीज बजट की 18 से 20% धनराशि कमीशन के रूप में टॉप -टू – बॉटम बंटती है। यानि सप्लायर्स को हर साल लगभग 10-12 करोड़ कमीशन में बांटने पड़ते हैं। दिलचस्प पहलू यह है कमीशन में अधिक हिस्सेदारी न बढ़े, इसके लिए प्रोटेक्शन शाखा से बंटने वाली राशि भी अब कैंपा शाखा से बंटने लगी है। जबकि पूर्व में विभाग में परम्परा रही है कि फायर लाइन से लेकर मोबाइल, वायरलेस, वाहन आदि से समन्धित बजट प्रोटेक्शन शाखा से बंटता रहा है।मुख्यालय से सबसे अधिक फंड कैंपा शाखा से रिलीज किया जाता है। इसके बाद सामाजिक वानिकी और विकास शाखा से भी करोड़ों की धनराशि वन मंडलों को दिया जाता है। तीनों शाखाओं को मिलाकर हर वन मंडल को 5 से 7 करोड़ रूपए की राशि हर साल खरीदी के लिए रिलीज किया जा रहा है। चैनलिंक जाली, बारवेड वायर, टिम्बर पोल्स, रूट ट्रेनर्स, मिट्टी और गोबर एवं रासायनिक खाद वगैरह की खरीदी की जाती है। इस खरीदी में 15 से 18 फीसदी तक राशि कमीशन बाजी में बंटती है। इस खेल को रोकने के लिए पूर्व वन मंत्री विजय शाह ने ग्लोबल टेंडर बुलाने की पहल की थी किंतु मैदानी अफसरों के विरोध के चलते वे अपने मंसूबे में सफल नहीं हो पाए थे। इसकी मुख्य वजह यह है कि मुख्यालय से लेकर मैदानी अमले का नेक्सस से सीधा रिश्ता है। गौरतलब यह भी है कि मुख्यालय से विभिन्न शाखों द्वारा फंड रिलीज करने का कोई निर्धारित मापदंड नहीं है। चेहरा देखकर फंड वितरित किया जा रहा है। इस फार्मूले का उपयोग सबसे अधिक कैम्पा फंड में किया जा रहा है। अनूपपुर वन मंडल में तीन रेंज है जहां कैंपा फंड से फायर प्रोटक्शन के 24 लाख रुपए रिलीज किए गए। वहीं उत्तर शहडोल वन मंडल में बड़े जंगल हैं, उसके लिए कैम्पा शाखा से मात्र 14 लाख रूपये दिए गए। इसी प्रकार सिंगरौली में तीन रेंज है वहां 36 लाख और नरसिंहपुर वन मंडल के लिए मात्र ₹1200000 दिए। यह असमानता इसलिए है कि कैंपा पीसीसीएफ अपनी मनमर्जी के अनुसार डीएफओ को फंड डिलीट कर रहे हैं। जबकि संरक्षण शाखा फायर प्रोटक्शन के लिए वार्षिक एप्सन प्लान तैयार करता है। पीसीसीएफ डॉ दिलीप कुमार का कहना है कि कैंपा से फंड संरक्षण शाखा को ट्रांसफर होनी चाहिए और उसके बाद संरक्षण शाखा ही डीएफओ को अपने एक्शन प्लान के अनुसार बजट रिलीज करें।इसके कारण गड़बड़ी की आशंका बढ़ती जा रही है। सरकार के निर्देशों की अवहेलना राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देश है कि वायरवेट, चैनलिंक और पोल की खरीदी में लघु उद्योग निगम को प्राथमिकता दें किंतु 95% खरीदी जेम्स और ई टेंडर से हो रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि लघु उद्योग निगम की दर और जेम (GEM) की दरों में डेढ़ गुना अंतर है। यानी लघु उद्योग निगम में वायरवेट कि दर 83 रुपए से लेकर 85 रुपए तक निर्धारित की गई है। जबकि जेम (GEM) में ₹150 तक है। सरकार की मंशा यह भी है कि लघु और मध्यम उद्यमियों को इस कारोबार से जोड़ा जाए। मुख्यालय से लेकर फील्ड के अफसर टेंडर की शर्तों में ऐसी शर्ते जुडवा देते हैं जिसके चलते लघु और मध्यम उद्यमी प्रतिस्पर्धा की दौड़ से बाहर हो जाते हैं। सरकार के अन्य विभाग में टेंडर विभागीय वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाती है किंतु वन विभाग में या परंपरा नहीं है। प्रतिस्पर्धियों का कहना है कि सभी डीएफओ को अपने वन मंडल के प्रत्येक टेंडर विभागीय वेबसाइट पर अपलोड करें। चहेती फर्म को उपकृत करने जोड़ देते हैं नई शर्तें फंड बंटवारे को लेकर दो अफसर भिड़ चुके विभाग में फंड बंटवारे को लेकर दो सीनियर अधिकारी भिड़ चुके हैं। पीसीसीएफ कैंपा महेंद्र सिंह धाकड़ की पदस्थापना के पहले तक फॉरेस्ट प्रोटक्शन को लेकर कैंपा से फंड संरक्षण शाखा को रिलीज किया जाता था और फिर संरक्षण शाखा डीएफओ की मांग के आधार पर वितरित करता था। धाकड़ ने इस परंपरा को बदल दिया। अब वह प्रोटेक्शन की राशि भी स्वयं जारी करते हैं। पूर्व में पीसीसीएफ प्रोटेक्शन रहे अजीत श्रीवास्तव ने इसका पुरजोर विरोध किया था और तीखा पत्र भी लिखा था, लेकिन बात नहीं बनी। मुद्दे को लेकर एक बैठक में तो दोनों के बीच तीखी बहस भी हुई पर तत्कालीन वन बल प्रमुख आरके गुप्ता ने पीसीसीएफ कैंपा धाकड़ का साथ दिया। हालांकि अजीत श्रीवास्तव जल्द ही रिटायर हो गए। मौजूदा पीसीसीएफ प्रोटेक्शन डॉ दिलीप कुमार किंकर्तव्यविमुढ़ की स्थिति में है और वह सेवानिवृत्ति के दिन गिन रहे हैं। विभाग में चर्चा है कि पीसीसीएफ कैंपा महेन्द्र धाकड़ फाइनेंस कंपनी की तरह फंड रिलीज़ करते हैं। वे तो एक उच्च स्तरीय बैठक में यहां तक कह चुके हैं कि कैम्पा शाखा स्वायत्त संस्था है। ब्लैक लिस्ट फर्म कर रही हैं अभी भी धंधा वन विभाग में अलग-अलग वन मंडलों में कई फर्म को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है। इसके बाद भी ब्लैक लिस्ट फर्म अपने राजनीतिक रसूख के दम पर सामग्री की सप्लाई कर रही हैं। इसकी वजह भी साफ है कि वन विभाग में ऐसी कोई भी व्यवस्था नहीं है, जहां ब्लैक लिस्ट की गई फर्म को अन्य वन मंडलों में मैसेज कर धंधा करने से रोका जाए। वैसे पीडब्ल्यूडी जल संसाधन और अन्य विभागों में ऐसी व्यवस्था है कि ब्लैक लिस्ट फर्म की सूची बनाकर मैदानी अफसरों को भेजा जाता है और उन्हें निर्देशित किया जाता है कि इनसे कोई भी वर्क आर्डर न दिया जाए। कमीशन बाजी के खेल में प्रमुख संस्थाएं प्रखर इंटरप्राइजेज इंदौर, तिरुपति इंजीनियरिंग वर्क बालाघाट, जबलपुर वायरस जबलपुर, श्री विनायक स्टील इंदौर, राजपूत फेसिंग पोल भोपाल, अरिहंत मेटल (नाहटा), लकी 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आईएफएस संगठन से नहीं मिले सीएम और सीएस

The government's order regarding IFS's APAR revision was challenged in the Supreme Court

CM and CS did not meet IFS organization भोपाल ! आईएफएस संगठन के पदाधिकारियों की मुख्यमंत्री मोहन यादव और मुख्य सचिन वीरा राणा से मुलाकात नहीं हो सकी। ऐसे में एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री सचिवालय और सीएस कार्यालय को एपीएआर में किए गए बदलाव के विरोध पर प्रेजेंटेशन दिया। इसमें संगठन ने आग्रह किया एपीएआर लिखने में वर्ष 2004 से प्रचलित व्यवस्था में बदलाव न हो। संगठन का कहना है कि इस संबंध में 2016 में भी इसी तरह की आदेश शासन द्वारा जारी किए गए थे। संगठन ने अपने प्रेजेंटेशन में उल्लेख किया है कि अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों का एपीएआर अखिल भारतीय सेवा नियम 1970 के तहत जारी कार्यकारी निर्देशों द्वारा शासित होता है, जो अखिल भारतीय सेवा (प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट) नियम, 2007 के लिए प्रासंगिक हैं। संगठन का कहना है कि एपीसीसीएफ तक प्रदर्शन, मूल्यांकन रिपोर्ट सीनियर आईएफएस अधिकारियों द्वारा लिखा जाना चाहिए। पीसीसीएफ स्तर तक के आईएफएस अफसरों के एपीएआर एसीएस और मुख्य सचिव ही लिखे। संगठन ने यह भी कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह आदेश दिया गया था कि जिला कलेक्टर और मंडलायुक्त जिले में कार्यरत आईएफएस संवर्ग के डीएफओ और वन संरक्षक की एपीएआर नहीं लिख सकते आईएफएस संगठन डीओपीएंडटी के विचार से भी सहमत है कि यदि वन अधिकारी सचिवालय या अन्य विभागों में काम कर रहा है जहां उसका तत्काल पर्यवेक्षण अधिकारी गैर-वन अधिकारी है तो उसका सीआर. ऐसे अधिकारी द्वारा लिखा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से स्मरण है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 2004 में केंद्रीय कार्मिक विभाग ने यह व्यवस्था लागू की थी और सभी राज्यों के लिए अनिवार्य था। वैसे भी भारतीय वन सेवा, एक अखिल भारतीय सेवा, देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य वनों और वन्यजीवों का वैज्ञानिक प्रबंधन, सुरक्षा और संरक्षण करना है।संगठन ने माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए 1995 की रिट याचिका (सिविल) संख्या 202 (टी.एन. गोदावर्मन थिरुमुल्कपाद बनाम भारत संघ और अन्य) का उल्लेख करते हुए अपने प्रेजेंटेशन में कहा है कि वन विभाग के अधिकारियों की गोपनीय रिपोर्ट लिखने के लिए सक्षम प्राधिकारी के मुद्दे पर विचार किया था। पर्यावरण और वन मंत्रालय ने बाद में पत्र संख्या 22019/1/2001-IFS-1 दिनांक 8 नवंबर, 2001 के माध्यम से निर्देश जारी किए। सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिनांक 22 सितम्बर 2000 को एक विशेष संदर्भ में जारी किया गया था और इसे अन्य सेवाओं को कवर करने के लिए सामान्यीकृत नहीं किया जाना चाहिए। सीईसी का विचार है कि माननीय न्यायालय के दिनांक 22 सितम्बर 2000 के आदेश में किसी संशोधन की आवश्यकता नहीं है।

कटनी के झिन्ना की खदान का वन भूमि प्रकरण में कंसोटिया के आदेश को वर्णवाल ने बदला

Varnwal changed the order of Consotiya in the forest land issue of Jhinna mine of Katni.

Varnwal changed the order of Consotiya in the forest land issue of Jhinna mine of Katni. भोपाल। अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल ने पूर्व एसीएस वन जेएन कंसोटिया के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें कटनी जिले की तहसील ढीमरखेड़ा के ग्राम झिन्ना की खदान के मामले में सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी वापस लेने का आदेश दिया था। अपने आदेश को तत्काल अमल में लाने के लिए कंसोटिया ने बाकायदा डीएफओ कटनी को कारण बताओं नोटिस की तलब किया था। यहां यह भी तथ्य उल्लेखनीय है कि जब वर्णवाल प्रमुख सचिव वन थे तब उन्होंने भी एसएलपी वापस लेने का आदेश जारी किया था। अब वही बता सकते है कि वे तब सही थे या फिर अब..? गत दिवस वन विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने वन मुख्यालय को निर्देश दिये हैं कि यदि यह केस अब तक वापस नहीं लिया गया है तो केस वापस लेने की कार्रवाई आगामी आदेश तक रोक दी जाये। वर्णवाल के आदेश के बाद जंगल महकमे में लाख टके का सवाल उठ रहा है कि आखिर किस अदृश्य शक्ति के दबाव में आकर पूर्व एसीएस कंसोटिया ने एसएलपी वापस लेने का आदेश जारी किया था। एसएलपी वापस लेने संबंधित आदेश जारी करने के पूर्व 13 अक्टूबर 23 को अपर मुख्य सचिव वन कंसोटिया की अध्यक्षता में एक विशेष बैठक बुलाई गई थी। बैठक में अतुल कुमार मिश्रा सचिव वन, अशोक कुमार पदेन सचिव, आरके गुप्ता तत्कालीन वन बल प्रमुख, अतुल कुमार श्रीवास्तव तत्कालीन पीसीसीएफ वर्किंग प्लान और अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक भू अभिलेख डॉ वीएस अन्नागिरी भी उपस्थित थे। यह बैठक में ग्राम झिन्ना एवं हरैया तहसील ढीमरखेड़ा जिला कटनी में स्वीकृत खनिज पट्टे विवाह के निराकरण के लिए बुलाई गई थी। उल्लेखनीय है कि उक्त खदान के वन भूमि में आने के कारण इस पर रोक लगाई गई थी परन्तु खदान स्वामी हाईकोर्ट से जीत गया था जिस पर वन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट में 2017 से लंबित है मामला क्या है मामला-शिकायती पत्र के मुताबिक, कटनी के खनन कारोबारी आनंद गोयनका मेसर्स सुखदेव प्रसाद गोयनका को मध्य प्रदेश की तत्कालीन दिग्विजय सरकार के कार्यकाल में 1994 से 2014 तक की अवधि के लिए 48.562 हेक्टेयर भूमि पर खनिज करने का पट्टा मिला था। खनिज पट्टा आवंटित होने की पीछे भी बहुत कुछ छिपा है। दरअसल मध्य प्रदेश शासन ने ग्राम झिन्ना तहसील ढीमरखेड़ा जिला कटनी के वन क्षेत्र की 48.562 हेक्टेयर भूमि पुराना खसरा नम्बर 310, 311, 313, 314/1, 314/2, 315, 316, 317, 318, 265, 320 में खनिज के लिए एक अप्रैल 1991 में 1994 से लेकर 2014 तक की अवधि के लिए निमेष बजाज के पक्ष में खनिज पट्टा स्वीकृत किया था। जिसे वर्ष 1999 में मध्य प्रदेश शासन के खनिज विभाग के आदेश से 13 जनवरी 1999 को उक्त खनिज पट्टा मेसर्स सुखदेव प्रसाद गोयनका प्रोप्राइटर आनंद गोयनका के पक्ष में हस्तांतरित किया गया। लेकिन साल 2000 में वन मंडल अधिकारी कटनी के पत्र के आधार पर कलेक्टर कटनी ने आदेश पारित कर लेटेराइट फायर क्ले और अन्य खनिज के खनन पर रोक लगा दी थी। वन भूमि का इतिहास-ग्राम झिन्ना की भूमि जमींदारी उन्मूलन के बाद वन विभाग को वर्ष 1955 में 774.05 एकड़ भूमि प्रबंधन में मिली थी। जो वर्ष 1908-09 से 1948-49 तक जमींदार रायबहादुर खजांची, बिहारी लाल व अन्य के नाम दर्ज थी जिसे 10 जुलाई 1958 की सूचना और एक अगस्त 1958 की प्रकाशन तिथि से संरक्षित वन घोषित किया गया। इसके बाद भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 4 की अधिसूचना क्रमांक डी-3390-3415-07-दस-3 दिनांक 24 सितम्बर 2007 प्रकाशन दिनांक 14 दिसम्बर 2007 से वनमंडल झिन्ना के अंतर्गत ग्राम झिन्ना के खसरा नम्बर 304, 333, 320 में कुल रकबा 153.60 एकड़ क्षेत्र अधिसूचित कर एसडीएम ढीमरखेड़ा को वन व्यवस्थापन अधिकारी नियुक्त किया गया जो कि वन विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज है। वर्ष 2019-19 में एसडीएम ढीमरखेड़ा (वन व्यवस्थापन अधिकारी) द्वारा राजस्व प्रकरण क्रमांक /01अ-19(4)/2018-19 में पारित आदेश दिनांक 18-9-2019 के अंतर्गत उल्लेख किया गया कि वादग्रस्त भूमि खसरा नम्बर 320 वर्ष 1906 से 1951 तक मालगुजारी की जमीन नहीं थी। एसडीएम ढीमरखेड़ा (वन व्यवस्थापन अधिकारी) द्वारा पारित आदेश दिनांक 18-07-2008, 18-10-2011 और 18-09-2019 को पारित प्रत्येक आदेश में उक्त भूमि को वन भूमि मानने से इंकार किया। जिसे कलेक्टर कटनी द्वारा अपने आदेश दिनांक 4-मार्च 2010, 19-मार्च -2013 और 19-दिसम्बर -2019 के माध्यम से एसडीएम ढीमरखेड़ा (वन व्यवस्थापन अधिकारी) द्वारा पारित आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक लगाई गई है।

टाईगर, चीता, तेंदुआ, कि मौतों का अड्डा बना प्रदेश, एक और मादा तेंदुआ कि मौत

The state became a den of deaths of tiger

The state became a den of deaths of tiger, cheetah and leopard, another female leopard died. बुरहानपुर । नयाखेड़ा-केरपानी रोड़ के पास मामा-भांजे बलडी में बुधवार को मादा तेंदुए का शव मिलने से गांव में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही बुरहानपुर डीएफओ विजय सिंह, एसडीओ अजय सागर सहित वन अमला मौके पर पहुंचा। शव का पीएम कराकर फोरेंसिक जांच के लिए सैंपल को इंदौर भेजा गया है। घाघरला के जंगल में मादा तेंदुए का अंतिम संस्कार किया गया। करीब दस दिन पहले इसी क्षेत्र में एक नर तेंदुआ बीमार अवस्था में मिला था। जिसका इंदौर में उपचार चल रहा है। एक ही क्षेत्र में तेंदुए का बीमार होना सवालों को जन्म दे रहा है। राजस्व की भूमि पर पर शव की जानकारी मिली थीएसडीओ अजय सागर ने बताया कि मामा-भांजे की राजस्व की भूमि पर एक वन्य प्राणी का शव पड़ा होने की सूचना किसान से मिली। सूचना मिलते ही बुधवार सुबह 11 बजे मौके पर वन अमला पहुंचा। शव करीब दो दिन पुराना मादा तेंदुए का है। जो वयस्क होकर करीब तीन वर्ष के करीब है। शरीर पर घाव अथवा चोट के नहीं थे न‍िशानशव पर कोई घाव या शिकार के कोई चोट के निशान भी नहीं पाए गए है। इससे वन विभाग को शिकार की आशंका नहीं है। संक्रामक बीमारी से मौत की बात बताई जा रही है। सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। एक माह बाद रिपोर्ट आने पर ही मौत का खुलासा हो पाएगा। हालांकि इसके पूर्व भी खेत में रेस्क्यू किए गए तेंदुए के पैर भी संक्रमण से ग्रसित पाए गए थे। 10 दिन पूर्व किया था तेंदुए को रेस्क्यूनयाखेड़ा गांव में चार माह से तेंदुए का आतंक चल रहा था। उसके द्वारा गोवंशी का शिकार किया जा रहा था।ग्रामीणों के अनुसार नौ जुलाई को किसान अकरम बाबू खां के खेत में तेंदुआ सुस्त अवस्था में मिला था।तेंदुए को वन विभाग ने रेस्क्यू किया था। जानकारी के अनुसार इसकी लोगों ने 10 फीट की दूरी से सेल्फी ली।लोगों से पता चला है कि इस दौरान तेंदुआ न तो गुर्रा रहा था और न ही उसके तेवर कोई आक्रामक थे।यह जानकारी भी मिली है कि तेंदुए के पीछे के पैर काम नहीं कर रहे थे। वह इससे कमजोर लग रहा था।तेंदुए को इसके बाद इंदौर कमला नेहरू संग्रहालय भेजा गया था। जहां उसका उपचार किया जा रहा है।तेंदुआ संक्रमण की बीमारी से ग्रसित पाया गया है। तेंदुआ किसी अन्‍य बीमारी से ग्रस्त बताया जा रहा है। क्षेत्र में और भी तेंदुए होने की आशंकाउल्लेखनीय है कि क्षेत्र में और भी तेंदुए होने की आशंका जताई जा रही है। क्योंकि नेपानगर सहित आसपास के करीब एक दर्जन से अधिक गांव में आए दिन तेंदुआ दिखाई देने की जानकारी सामने आ रही है।

पहली बार घायल शावकों को लाने के लिये एक डिब्बे की विशेष ट्रेन चली

For the first time, a special train of one compartment ran to bring the injured cubs.

For the first time, a special train of one compartment ran to bring the injured cubs. भोपाल। पहली बार सीहोर जिले के बुदनी मिडघाट पर ट्रैन एक्सीडेंट में घायल बाघिन के घायल शावकों को लाने के लिये एक डिब्बे की विशेष ट्रेन चलाई गई। विशेष ट्रेन से घायल शावकों को रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के पहले आरपीएफ थाने के सामने उन्हें उतार कर उपचार के लिए वन विहार में शिफ्ट किया गया। घायल शावकों के साथ ट्रैन में डीआरएम भोपाल, सीसीएफ भोपाल राजेश खरे, सीहोर कलेक्टर प्रवीण सिंह और डीएफओ एमएस डाबर भी थे। मंगलवार को घायल शावकों को रेस्क्यू करने का नेतृत्व सीसीएफ राजेश खरे ने किया। सीसीएफ खरे ने रेलवे अधिकारियों से भी सहयोग मांगा। घटना की गंभीरता को देखते हुए भोपाल डीआरएम अपने अधिकारियों के साथ एक डिब्बे की विशेष ट्रेन लेकर मिडघाट पहुंचे। दोनों घायल शावकों को ट्रेन से भोपाल लाकर वन विहार के वन्य प्राणी चिकित्सालय में भर्ती किया गया। दोनों घायल शावाकों का इलाज अभी चल रहा है। इस पूरी कार्रवाई में सीनियर डीओएम निरीश कुमार राजपूत, वन मंडल अधिकारी एमएस डाबर, एसडीएम राधेश्याम बघेल सहित राजस्व एवं वन विभाग की टीम उपस्थित रही। उल्लेखनीय है कि गत सोमवार 15 जुलाई को सुबह करीब 6 बजे सीहोर जिले के बुदनी के मिडघाट रेलवे ट्रैक पर बाघिन के तीन शावक ट्रेन की चपेट में आ गए थे। इस दुर्घटना में एक शावक की मृत्यु हो गई। दो शावक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना की सूचना मिलते ही वन्य प्राणी चिकित्सकों की टीम घटना स्थल पर पहुंची। दोनों घायल शावकों की स्थिति को देखते हुए वहां इलाज संभव नहीं था। दोनों को इलाज के लिए वन्य प्राणी चिकित्सालय भोपाल में तत्काल भर्ती कराना जरूरी था।

छतरपुर वन वृत के सीएफ संजीव झा के खिलाफ भोपाल हुई गंभीर शिकायत: आला अफसरों ने कहा जांच कर करेंगे कार्यवाही, वन महकमे मचा हड़कंप

Forest gives clean chit in case of IFS officers trapped in Rs 7 crore scam

Serious complaint lodged against CF Sanjeev Jha of Chhatarpur forest circle

कूनों में बच्चों संग बारिश का आनंद लेती दिखी चीता गामिनी, केंद्रीय मंत्री ने शेयर किया वीडियो

Cheetah Gamini was seen enjoying the rain with children in the pond, Union Minister shared the video

Cheetah Gamini was seen enjoying the rain with children in the pond, Union Minister shared the video

रानी दुर्गावती टाईगर रिजर्व में कल से शुरू होगी गिद्ध गणना

Vulture census will start from tomorrow in Rani Durgavati Tiger Reserve, many species were found in the month of February. वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में सेकेंड फेज के तहत सोमवार से गिद्ध गणना शुरू हो रही है। बता दें कि इसी साल फरवरी माह में गिद्ध गणना हुई थी। यह गणना विश्व व्यापी रूप में हुई थी। जिसमें गिद्धों की प्रजाति के साथ सामन्य वन और अभयारण्य में भी गणना हुई थी। दमोह : प्रदेश के सबसे बड़े वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में सेकेंड फेज के तहत सोमवार से गिद्ध गणना शुरू हो रही है। जबकि फरवरी माह में एक गणना हो चुकी है, जिसमें पिछली गणना की अपेक्षा पांच गुना ज्यादा गिद्ध मिले थे और कल से शुरू हो रही गणना में इनकी संख्या काफी अधिक बड़ने के आसार हैं। इसी साल फरवरी माह में गिद्ध गणना हुई थी। यह गणना विश्व व्यापी रूप में हुई थी। जिसमें गिद्धों की प्रजाति के साथ सामन्य वन और अभयारण्य में भी गणना हुई थी। दोनों मंडलों में तीन दिन गणना के बाद परिणाम अच्छे निकलकर आये थे। यह गणना दो वर्ष बाद हुई थी, इससे पूर्व 2021 में हुई थी। उस समय नौरादेही में गिद्धों की संख्या 300 थी जबकि फरवरी माह में हुई गणना में यह सख्या 1500 से अधिक पहुंच गई थी जो दो साल में पांच गुनी बड़ी थी। यही आलम दमोह के सामन्य वनों में देखने मिला था। सामान्य वन में भी गिद्धों की संख्या में बढ़ोतरी हुई थी। जिस पर वन विभाग के अधिकारियों ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा था कि भारत से विलुप्त प्रजाति गिद्ध यहां अपना आशियाना बना रही है। बलचर रेस्टोरेंट की होनी थी शुरूआतगिद्ध प्रजाति के बचाव के लिए वन विभाग अनेक तरह के उपाय खोज रहा है। लगभग दो से तीन माह पूर्व नौरादेही के डीएफओ ने एक प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा था, जिसका उद्देश्य विलुप्त प्रजाति गिद्धों की संख्या को नौरादेही में बढ़ाने के लिए बलचर रेस्टोरेंट चालू करने का हवाला दिया गया था और यह वल्चर रेस्टोरेंट नौरादेही की दो रेंज में खोले जाने थे, जिसकी शुरूआत अप्रैल माह से होनी थी। इस वल्चर रेस्टोरेंट का उद्देश्य था कि वल्चर रेस्टोरेंट में गिद्धों को एकत्र किया जाएगा, उनके लिए भोजन दिया जाएगा। जिससे प्रजाति में वृद्धि हो सके और रहवासी गिद्ध दूसरे क्षेत्रों में ना जा सकें। यह बलचर रेस्टोरेंट डोगरगांव और मुहली रेंज में चालू होने की जानकारी मिली थी, लेकिन यह कार्य अभी चालू नहीं हो पाया है। इसलिए हो रही गणनामुहली रेंजर नीरज बिसेन ने बताया कि ग्रीष्मकालीन गणना पहली बार हो रही है। इस गणना का उदेश्य है जो रहवासी गिद्ध हैं वह गर्मियों में यही रह जाते हैं, लेकिन प्रवासी गिद्ध इन दिनों यहां से प्रवास कर जाते हैं। विभाग की यह मंशा है कि जो गिद्ध स्थाई रूप से रहने वाले हैं उनकी प्रजाति और संख्या की गणना की जाये। गिद्ध गणना लगातार तीन दिन तक जारी रहेगी और उसमें रहवासी गिद्ध और प्रवासी गिद्धों की जानकारी एकत्रित की जायेगी। उन्होंने बताया कि बल्चर रेस्टोरेंट शुरू होने थे उनके प्रस्ताव भेजे गये थे, लेकिन अभी मंजूरी नहीं आई है। जिसके कारण बल्चर रेस्टोरेंट का कार्य अभी आरंभ नहीं हुआ है। आदेश आने के बाद शुरूआत होगी।

जंगल महकमे में प्रभार का खेल: मंत्री ने नोटशीट लिख पूछा क्या है नियम…?

Game of charge in the forest department: The minister wrote a notesheet and asked what are the rules…? भोपाल। जल संसाधन, लोक निर्माण और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग की तरह जंगल महकमे में भी प्रभार का खेल शुरू हो गया है। वन विभाग के आला अफसरों द्वारा अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के आधार पर अपने चहेतों को दो-दो प्राइम पदों का प्रभार दिए जाने का खेल खूब चल रहा है। दिलचस्प पहलू यह है कि प्रभार के खेल में मंत्री को विश्वास में नहीं लिया जा रहा है। यही वजह रही कि विभागीय मंत्री नागर सिंह चौहान ने एक नोटशीट लिखकर विभाग से जानना चाहा कि प्रभार के नियम क्या है और दूसरे राज्यों में क्या व्यवस्था है..? हालांकि उनकी यह नोटशीट महीने भर से अधिक समय से प्रशासन-एक शाखा में धूल खा रही है। वन विभाग में सर्किल प्रमुख, वन संरक्षक सामाजिक वानिकी, डीएफओ और एसडीओ के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इन पदों को नियमित रूप से भरने के लिए अपर मुख्य सचिव से लेकर वन बल प्रमुख प्रमुखता से पहल नहीं कर रहें है। इसके बदले वे अपने चहेते अफसरों को एक से अधिक पदों का प्राइम प्रभार देकर उन्हें उपकृत कर रहें हैं। यही नहीं, उन्हें बाकायदा विकास और कैम्पा मद से अधिक फंडिंग भी दे रहें है। वन मंत्री नागर सिंह चौहान को प्रभार के खेल का फंडा उनके विश्वसनीय अधिकारी ने समझाया। यही नहीं, इसके लिए वन मंत्री चौहान के थिंक टैंक अफसर ने नोट शीट लिखकर विभाग के मुखिया से प्रभार देने के नियम और दूसरे राज्यों में व्यवस्था की जानकारी मांगी है। हालांकि उनकी नोटशीट को लेकर विभाग के अफसर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। यही वजह है कि एक महीने से उनकी नोटशीट धूल खा रही है। मुख्यालय में एपीसीसीएफ ग्रीन इंडिया मिशन से लेकर एपीसीसीएफ सामाजिक वानिकी जैसी महत्वपूर्ण शाखाएं प्रभार पर संचालित की जा रही है। इसके अलावा टीकमगढ़, दक्षिण सिवनी, अनूपपुर और दतिया बरमंडल प्रभाव में संचालित हो रहे हैं। एफडी बांधव टाइगर रिजर्व, बैतूल सर्किल, सामाजिक वानिकी रीवा और सामाजिक वानिकी सागर सर्किल, बालाघाट और खंडवा उत्पादन वन मंडल भी प्रभार में संचालित हो रहे हैं। मैहर के रेंजर को रीवा में दो-दो एसडीओ का प्रभारप्रभार के खेल का ताजा उदाहरण रीवा सर्किल का है। मुख्य वन संरक्षक रीवा राजेश राय ने 70 किलोमीटर दूर मैहर में पदस्थ प्रभारी एसडीओ और रेंजर यशपाल मेहरा को रीवा एसडीओ का प्रभार सौंपा है। राय यही नहीं रुके बल्कि मेहरा पर और उदारता बढ़ाते हुए उन्हें एसडीओ मऊगंज का भी प्रभार दे दिया है। जबकि रीवा में दो-दो वरिष्ठ एसडीओ कार्यरत है। रीवा में पदस्थ दोनों एसडीओ पर राय ने विश्वास नहीं जताया। सवाल यह उठता है कि 70 किलोमीटर दूर मैहर में पदस्थ प्रभारी एसडीओ मेहरा रीवा और मऊगंज का प्रभार की जिम्मेदारी कैसे संभालेंगे..? सवाल यह भी उठ रहा है कि प्रभारी एसडीओ राजसात की कार्रवाई करने में सक्षम नहीं है तो फिर यह करवाई कौन करेगा..? रेंजर मेहरा मैहर एसडीओ प्रभार के रूप में काम कर रहे हैं और उन्हें दो और प्रभारी एसडीओ का दायित्व सौंपने के पहले वन बल प्रमुख को विश्वास में नहीं लिया गया। यही वजह है कि प्रभार के आदेश की प्रतिलिपि वन बल प्रमुख को नहीं सौंपी। इसी प्रकार अनूपपुर वन मंडल में तो एक डिप्टी रेंजर को तीन-तीन रेंज के प्रभार दिए गए हैं। चर्चा है कि जंगल महकमे में ऊंचे पदों के प्रभार लेने के लिए पॉवर के साथ-साथ पैसे भी खर्च करने पड़ते हैं। इसी के दम पर वन विभाग में कई बड़े पद प्रभार में चल रहे है। मंडला, सहित आधा दर्जन से अधिक वन मण्डलों में प्रभार के खेल खूब फूल-फल रहा है।

10 लाख रुपए तक की खरीदी एमएफपी पार्क के सीईओ कर सकेंगे

CEO of MFP Park will be able to purchase up to Rs 10 lakh भोपाल। लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक बिभाष ठाकुर ने वनोपज प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र (एमएफपी पार्क) गड़बड़झाला पर नकेल कसने की कवायत तेज कर दी है। अब बिना टेंडर कोई भी निर्माण कार्य अथवा खरीदी नहीं की जाएंगी। इसके लिए ठाकुर ने वित्तीय अधिकारों में संशोधन करते हुए पार्क के सीईओ को ₹5लाख से बढ़कर अब 10 लाख रुपए कर दिए गए हैं।संघ के प्रबंध संचालक बिभाष ठाकुर ने बताया कि अब एमएफपी पार्क के सीईओ को टुकड़ों-टुकड़ों में कार्य नहीं कराने की सख्त हिदायत दी गई है। अब अगर किसी एक ही कार्य को टुकड़े-टुकड़े में कराए जाएंगे तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि 10 लाख रुपए से अधिक और 20 लाख रुपए तक खरीदी अथवा निर्माण कार्य कराने की अनुमति संघ के प्रबंध संचालक दे सकेंगे. इसी प्रकार 20 लाख रुपए से अधिक तक वित्तीय अनुमतियां संघ के प्रशासक एवं अपर मुख्य सचिव जेएन कंसोटिया के पास है। समितियों से खरीदी करने पर जोर संघ के एमडी ठाकुर ने एमएफपी पार्क के सीईओ अर्चना पटेल को निर्देशित किया है कि अब कोई भी रॉ मटेरियल प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों की एनओसी के बगैर निजी फर्म से नहीं खरीदे जाएंगे। यानि खरीदी में सबसे पहली प्राथमिकता वन उपज सहकारी समितियां को देना होगी। समितियां के इनकार के बाद ही टेंडर के जरिए निजी फर्म से खरीदी हो सकेगी। करीब 1000 वनौपज समितियां रजिस्टर्ड है। संघ ने एक पुस्तक तैयार की है जिसमें उल्लेख है कि कौन-कौन सी वनोपज कितनी मात्रा में एकत्रित की जाती है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में खासतौर से महुआ और बहेड़ा की खरीदी वनोपज सहकारी समितियों से ही की जाएगी। खरीदी के पहले ही उत्पादन प्रबंधन की अध्यक्षता वाली कमेटी एक सूची तैयार करेगी कि किन-किन औषधीय के लिए कौन-कौन से रॉ मैटेरियल कितनी मात्रा में खरीदी जाना है। इनमें से कौन-कौन से रॉ मैटेरियल किन-किन वनोपज समितियों में उपलब्ध है।

डीएफओ के गलत जवाब-दावा देने पर वन बल प्रमुख को हाईकोर्ट में मांगनी पड़ी माफ़ी

Forest Force Chief had to apologize in High Court after DFO gave wrong answer-claim भोपाल। डीएफओ के निरंकुश और बेलगाम कार्यशैली के कारण वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव को हाई कोर्ट जबलपुर के जस्टिस विवेक अग्रवाल की भरी अदालत में माफी मांगनी पड़ी। वन बल प्रमुख श्रीवास्तव ने विभाग की गलती स्वीकारते हुए उसे दुरुस्त करने के लिए एक माह का समय मांगा था पर हाई कोर्ट ने उन्हें 15 दिन की मोहलत दी है। उच्च न्यायालय जबलपुर में पदोन्नति को लेकर सेवानिवृत्ति रेंजर शीतल प्रसाद पांडेय द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश विवेक अग्रवाल ने वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव को वताया कि उत्तर बालाघाट वन मंडल के सेवानिवृत्ति एवं तत्कालीन वन मंडलाधिकारी आरबीएस बघेल द्वारा जवाब – दावा में गलत दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं। जस्टिस अग्रवाल ने विभाग की खिंचाई करते हुए कहा कि किसी ने भी मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर अपना दिमाग लगाने की जहमत नहीं उठाई। यहां तक ​​कि सरकार द्वारा जो रिकॉर्ड भी पेश किया गया है वह याचिकाकर्ता के डिप्टी के पद पर पदोन्नति के मामले पर विचार के संबंध में है। रेंजर और रेंजर के पद पर नहीं। इस पर वन बल प्रमुख श्रीवास्तव ने 16 अप्रैल 24 को जस्टिस विवेक अग्रवाल की अदालत में यह स्वीकार किया कि उत्तर दाखिल करने में विभाग की ओर से कुछ गलतियां हुई हैं। वह इसके लिए बिना शर्त माफी मांगते हैं। उनका कहना है कि गलती सुधारने और उचित कदम उठाने के लिए उन्हें कुछ समय दिया जाए। विभाग के मुखिया के आग्रह पर जस्टिस अग्रवाल ने गलती को सुधारने और याचिकाकर्ता के दावों को देखने के लिए 15 दिन का समय दिया। क्या था मामला याचिकाकर्ता शीतल प्रसाद पांडेय फॉरेस्ट गार्ड के रूप में वन विभाग में भर्ती हुए थे। 1976 -77 में उनके साथियों को डिप्टी रेंजर पद पर पदोन्नति दे दी गई किंतु शीतल प्रसाद पांडेय इससे महरूम हो गए, क्योंकि उनका एसीआर क प्लस नहीं था। इसी प्रकार 1994 को उनके बैच के कर्मचारियों को डिप्टी से रेंजर के पद पर पदोन्नति कर दिया गया। पदोन्नति से वंचित शीतल प्रसाद पांडेय ने राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण के समक्ष एक मामला दायर किया था जिसे ओए के रूप में पंजीकृत किया गया था। क्रमांक 1355/1995, जो उच्च न्यायालय में स्थानांतरित होने पर डब्ल्यूपी के रूप में पंजीकृत किया गया था। इस मामले में उच्च न्यायालय ने 14 नवंबर 06 को आदेश पारित किया था जिसमें यह उल्लेख किया गया है कि अतिरिक्त प्रधान मुख्य संरक्षक द्वारा कहा कि याचिकाकर्ता का मामला अपने कनिष्ठों को वरीयता देते हुए पदोन्नति पर विचार करने का हकदार है। एसडीओ कल्पना के मामले में भी हो सकती है वन बल प्रमुख की सिंचाई 16 अप्रैल को हाईकोर्ट में वन बल प्रमुख द्वारा माफी मांगने के बाद अब चर्चा है कि कहीं डॉ असीम श्रीवास्तव को पन्ना दक्षिण में पदस्थ एसडीओ कल्पना तिवारी के मामले में भी उच्च न्यायालय की फटकार सुनना न पड़ जाय ? पन्ना दक्षिण वन मंडल में पदस्थ एसडीओ कल्पना तिवारी ने जस्टिस गुरपाल सिंह अहलूवालिया उच्च न्यायालय जबलपुर में 12 दिसंबर 23 को रिट पिटीशन (WP/30843/2023) दायर की। उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा 21 दिसम्बर 2023 को सुनवाई करते हुए को 45 दिनों में निर्णय लिये जाने हेतु आदेश पारित किया। 5 महीने बाद भी विभाग ने उच्च न्यायालय द्वारा पारित किये गये निर्णय का पालन नहीं किया। न्यायालय के आदेश के बाद भी विभाग द्वारा निर्णय नहीं लिए जाने के कारण जहां विभाग के मुखिया को एक बार फिर न्यायालय की अवमानना का सामना करना पड़ सकता है वहीं एसडीओ कल्पना तिवारी आईएफएस की दौड़ से बाहर हो गई है। सूत्रों का कहना है कि जिस प्रकरण को लेकर कल्पना तिवारी ने हाई कोर्ट जबलपुर में दस्तक दी है उसमें वन विभाग के ओएसडी अनुराग कुमार और बालाघाट सीसीएफ एकेएस सेंगर मुख्यत: दोषी है और दो आईएफएस को बचाने के लिए एसडीओ कल्पना तिवारी को बलि का बकरा बनाया गया है। संक्षेप में मामला यह है कि टीकमगढ़ वन मंडल में हुई चैनलिंक फेंसिंग और वायरवेड खरीदी में गड़बड़ी के मुख्य जिम्मेदार तत्कालीन डीएफओ एकेएस सेंगर और तत्कालीन प्रभारी डीएफओ एवं वर्तमान ओएसडी वन विभाग अनुराग कुमार है। सेंगर ने निर्धारित प्रक्रिया एवं मापदंड के अनुसार खरीदी नहीं की और अनुराग कुमार ने भौतिक सत्यापन कराए बिना चालान के आधार पर भुगतान कर दिया है। यह मामला लोकायुक्त में लंबित है।

वित्त विभाग से गैर हाजिर होकर वन मंत्री के लिए ओएसडी के रूप में काम करने वाले चौहान को निलंबित करने मुख्य सचिव को लिखा पूर्व विधायक ने पत्र

The former MLA wrote a letter to the Chief Secretary to suspend Chauhan who was working as OSD for the Forest Minister while being absent from the Finance Department भोपाल। पूर्व विधायक एवं संयुक्त क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष किशोर समरीते ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर वित्तीय सेवा के अधिकारी रणजीत सिंह चौहान को निलंबित कर जांच करने की मांग की। पूर्व विधायक समरीते ने पत्र लिखा है कि चौहान वित्त विभाग से गैरहाजिर होकर वन मंत्री नागर सिंह चौहान के लिए अनाधिकृत तौर पर ओएसडी के रूप में काम कर रहे हैं। चौहान स्वयं को ओएसडी बता कर  विभाग के सीनियर आईएफएस अधिकारियों से लेकर डीएफओ तक पर दबाव डालकर अपनी मनमर्जी से काम करवा रहे हैं।  पूर्व विधायक ने मुख्यमंत्री को लेकर पत्र में कहा है कि  रणजीत सिंह चौहान वित्तीय सेवा अधिकारी जिसकी सेवाएं प्रमुख सचिव वित्त विभाग द्वारा  अभी तक विधिवत तौर पर प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन विभाग को स्थानांतरित नहीं की है। दिलचस्प पहलू यह है कि मुख्यमंत्री सचिवालय ने भी इनके द्वारा वन मंत्री के जरिए भिजवाई गई ओएसडी बनाने संबंधित नोटशीट को भी वापस कर दी गई है। इन सबके विपरीत रणजीत सिंह चौहान वित्त अधिकारी, अनाधिकृत तौर पर विशेष कर्तव्य अधिकारी, वन मंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं। यह मामला पद एवं अधिकारों के दुरूपयोग एवं कदाचरण  का है तथा गंभीर जांच का विषय है।  पूर्व में भी इनके खिलाफ की गई थी शिकायतें  पूर्व में  इनके विरूद्ध श्रीनिवास मूर्ति सदस्य सचिव जैव विविधता बोर्ड की शिकायत पर भी शासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई। अपर मुख्य सचिव केके सिंह के वित्तीय सलाहकार रहते हुये इनके द्वारा अपने लिये लग्जरी कार की मांग एवं अतिरिक्त वित्तीय लाभ लेने के कारण हटाये गये थे। बीजनेस रूल का हवाला देते हुये गलत तरीके से शासन में बैठे अधिकारियों के बीच कार्य विभाजन करवाने के पीछे भी चौहान ही मुख्य सूत्रधार थे। इस मुद्दे पर तत्कालीन वन मंत्री उमंग सिंघार और अतिरिक्त मुख्य सचिव एपी श्रीवास्तव के बीच विवाद ब्यूरोक्रेसी में खूब उछला था और मामला अभी भी जांच के लिये लंबित है।   पूर्व विधायक ने लगाए कथित रूप से पैसे लेने का आरोप  अपने पत्र में पूर्व विधायक ने सिवनी सीसीएफ  एवं भारतीय वन सेवा के अधिकारी एसएस उद्दे की प्रमाणित शिकायत पर जांच को प्रभावित करने तथा निलंबन नहीं करने में 20 लाख रूपये लिये गये। इसी तरह बालाघाट के प्रभारी मुख्य वन संरक्षक सेंगर को टीकमगढ़ में वन मण्डलाधिकारी रहते हुये चैन लिंक (बारवेड) एवं अन्य खरीदी में निलंबन से बचाने 50 लाख रूपये लिये तथा उसे बालाघाट में प्रभारी मुख्य वन संरक्षक बना दिया गया। बालाघाट डीएफओ  अभिनव पल्लव वन मण्डलाधिकारी उत्तर वन मण्डल सामान्य के विरूद्ध शिकायत में सप्लाई तथा खरीदी में लाखों के फर्जी भुगतान में निलंबन से बचाने के लिए  रिश्वत के रूप लाखों रुपए लिये गये। यह अत्यंत गंभीर मामला है। अंत में समरीते ने मुख्य सचिव से अनुरोध किया है कि आप इस मामले की जांच करवाकर विशेष कर्तव्य अधिकारी रणजीत सिंह चौहान को तत्काल निलंबित कर इसकी सेवायें वित्त विभाग को वापिस करने तथा इसकी सम्पत्ति की जांच करवाएं।

930 रुपए किलो का गुग्गल 1700 रूपये किलो में खरीदा, 30 लाख से अधिक का गड़बड़झाला

Guggal worth Rs 930 per kg bought for Rs 1700 per kg, fraud worth more than Rs 30 lakh भोपाल। अपर मुख्य सचिव वन जेएन कंसोटिया का संरक्षण होने की बदौलत ही लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक बिभास ठाकुर भी एमएफपी पार्क बरखेड़ा पठानी में रॉ मटेरियल खरीदी में गड़बड़झाला को नहीं रोक पा रहे हैं। ताजा मामला गुग्गल खरीदी का प्रकाश में आया है। प्रभारी एसडीओ एवं उत्पादन प्रबंधक ने टेंडर की दर से न खरीदकर आर्यन फार्मेसी से ₹1700 किलो की दर से खरीदी की है। सूत्रों ने बताया कि एमएसपी पार्क के प्रबंधक ने गूग्गल सहित प्रष्टपर्णी, काली मिर्च, हींग, पुनर्नवा आदि रॉ मैटेरियल की खरीदी के लिए टेंडर किया था। टेंडर में गुग्गल के लिए हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार का रेट 930 रूपये प्रति किलोग्राम था। एसपी पार्क के कर्ताधर्ता ने हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार से खरीदी ना करके आर्यन फार्मेसी से ₹1700 की कीमत पर 4000 किलो खरीदी की। हर्बल ऑटोमेशन हरिद्वार फर्म से न तो वर्क आर्डर दिया गया और न किसी प्रकार का पत्राचार किया गया। आर्यन से खरीदी से संघ को 30 लाख 80000 रुपए का अधिक भुगतान करना पड़ा है। प्रभारी एसडीओ एवं उत्पादन प्रबंधक ⁠सुनीता अहीरवार के कार्यकाल में 6 करोड़ों की govt सप्लाई में 3 करोड़ से अधिक की रॉ -मटेरियल ख़रीदी के भुगतान किये गये है, जिसमें 2 करोड़ के बिल तो आर्यन फ़ार्मेसी के थे। इसके अलावा 30-35 लाख के मरम्मत के भुगतान किये जा चुके है।लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र बरखेड़ा पठानी के सीईओ प्रसन्ना फुलझले हटने के बाद से प्रभारी एसडीओ सुनीता अहीरवार मनमानी बढ़ गई है। यहां तक कि फुलझले की जगह प्रमोट आईएफएस अर्चना पटेल को डमी के रूप में सीईओ बनाया गया है। पार्क के अधिकारी और कर्मचारी इसकी मुख्य वजह भी एसीएस से मिल रहे हैं संरक्षण को बताया जा रहा है। एमडी के आदेश का ही नहीं हो रहा पालन लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक ठाकुर ने भंडारण की जांच के लिए एसीएफ मणि शंकर मिश्र को 7 दिन में जांच का रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे किंतु 15 दिन से अधिक का समय बीत गया, अभी तक जांच शुरू नहीं हुई। मिश्रा को भंडारण से संबंधित दस्तावेज उत्पादन प्रबंधन द्वारा नहीं दिए जा रहे हैं। दस्तावेज मांगने के लिए अभी तक मिश्रा ने करीब चार रिमाइंडर सुनीता अहिरवार को भेज चुके हैं। इसकी जानकारी भी एमडी को भेजी गई है किंतु वहां से भी किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है। यही नहीं विद्या निनारे को भंडार में रा मटेरियल जाँच करने के मौखिक निर्देश प्रबंध संचालक और सीईओ ने मीटिंग में सबके सामने दिये थे। उस मीटिंग में सुनीता अहीरवार भी मौजूद थी फिर भी अपने भ्रष्टाचार को छुपाने और एसीएस वन से जानपहचान की धुन में नियमों को भी धता बता रही है। नरेंद्र नागर पर क्यों मेहरबान है केंद्र के अफसर एमएसपी पार्क बरखेड़ा पठानी के सीईओ से लेकर प्रबंधक तक उन पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान है। पिछले एक दशक से एमएसपी पार्क बरखेड़ा पठानी में कंस्ट्रक्शन, फेब्रिकेशन, पुताई कार्य से लेकर दवाइयां के रॉ मैटेरियल प्रदाय करने का ठेका तक के वर्क आर्डर नरेंद्र नागर को दिया जाता है। जबकि उनका मूल काम कंस्ट्रक्शन का है। नियमों की अनदेखी कर नरेंद्र नागर के कंस्ट्रक्शन फर्म को बिना टेंडर कोटेशनों के आधार पर लाखों रुपए के कार्य दिए जा रहे हैं। वर्तमान में उनके द्वारा मेंटेनेंस का कार्य किया गया है, जो कि लगभग 30 से 35 लाख रुपए की बिलिंग हो चुकी है। चर्चा है कि अधिक कमीशन पर उन्हें काम दिए जा रहे हैं। हद तो तब है जब विंध्या हर्बल में कंस्ट्रक्शन वर्क हो या पुताई का कार्य या फिर फेब्रिकेशन के कार्य कोई भी अन्य एजेंसी ही क्यों न करें लेकिन बिल नागर के फर्मो के नाम पर ही बनता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका कैलाश रघुवंशी की होती है। आर्यन फार्मेसी का एकाधिकार पिछले एक दशक में एमएसपी पार्क में आर्यन फार्मेसी अथवा सिस्टर कंसर्न का एकाधिकार रहा है। दवाइयां को बनाने के लिए जो भी संबंधित रॉ मटेरियल खरीदे जाते हैं, उसमें 70 से 80% रॉ मैटेरियल आर्यन फार्मेसी के ही होते हैं। हालांकि फेडरेशन के एमडी ठाकुर दावा कर रहे हैं कि वह व्यवस्था को बदलने में जुटे हैं। यानी उनके अनुसार अब भविष्य में गड़बड़ियों की गुंजाइश बहुत कम रहेगी। बावजूद इसके, जांच के नाम पर फेडरेशन के एमडी को सिर्फ खाली गुमराह किया जा रहा है।

1479 करोड़ के बजट के बंटवारे का अधिकार हाथ से छीनने के भय से ठेके पर देने में वन विभाग कर रहा है ना-नुकुर

The Forest Department is reluctant to give the right to distribute the budget of Rs 1479 crore on contract due to the fear of snatching it away. भोपाल। राज्य शासन को अपने एक आदेश का पालन कराने के लिए अब तक एक के बाद एक, चार आदेश जारी करना पड़े। इसके बाद भी उस पर क्रियान्वयन होने में 6 महीने का समय और लग सकता है। ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि वन विभाग के कैंपा शाखा और विकास शाखा में पदस्थ पीसीसीएफ नहीं चाहते हैं कि रिटायरमेंट के पहले ही बजट बांटने का अधिकार उनके हाथ से निकल जाए। यही वजह है कि मैन्युअल और शर्तों के निर्धारण की आड़ में पीसीसीएफ द्वय टेंडर प्रक्रिया से वानिकी कार्य कराने संबंधित आदेश का क्रियान्वयन अक्टूबर-नवंबर तक टालने की उधेड़बुन में लगे हैं। अक्टूबर में पीसीसीएफ महेंद्र सिंह धाकड़ (कैम्पा) और नवंबर में पीसीसीएफ (विकास) उत्तम कुमार सुबुद्धि सेवानिवृत होने जा रहे हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि अंधा बांटे रेवड़ी….की तर्ज पर कैंपा शाखा 959 करोड़ और विकास शाखा 520 करोड रुपए का बंदरबांट किया जाता है। प्रदेश में वन और वन्य प्राणियों के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ-साथ जंगलों की सुरक्षा और बढ़ते अपराध पर रोकने की दिशा में पूरा अमला मुस्तैद रहे। इसी बात को दृष्टिगत रखते हुए राज्य शासन ने वन विभाग में अधोसंरचना निर्माण कार्य, पशु अवरोधक दीवार से लेकर वारवेड वायर एवं चैनलिंक फेंसिंग और पॉलीहाउस आदि के कार्य निविदा बुलाकर कराने का पहला आदेश 29 मई 23 को प्रसारित किया था। जबकि इसकी स्क्रिप्ट 29 अप्रैल 22 को लिखी गई थी। तत्कालीन वन मंत्री डॉ विजय शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विभाग के सभी अधिकारियों को निविदा बुलाकर वानिकी कार्य करने के निर्देश दिए थे। यहीं नहीं, शाह ने विकास शाखा के तत्कालीन प्रमुख चितरंजन त्यागी को इसके लिए नियम और शर्तें बनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। चूंकि त्यागी अक्टूबर 22 में रिटायर होने वाले थे, इसलिए नियम बनाने में टालमटोल करते रहे। उनके सेवानिवृत्ति के बाद मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया। जब एसीएस जेएन कंसोटिया ने वन विभाग का दायित्व संभाला तब फिर से निविदा बुलाकर कार्य करने संबंधित फाइल मंत्रालय में मूव होने लगी। 29 मई 23 को शासन ने पहला आदेश जारी किया कि 2 लाख के कार्य विभागीय रूप से किया जाएगा। विभागीय अधोसंरचना निर्माण कार्य ग्रामीण यांत्रिकीय विभाग के निर्माण कार्यों की दरों के आधार पर वन विभाग अपने मैन्युअल के आधार पर कराए। 31 दिसंबर तक निविदा प्रक्रिया के स्थान पर विभाग में पुरानी व्यवस्था अनुसार निर्माण कार्यों की अनुमति दी जाती है। 1 जनवरी 24 से जो भी कार्य प्रारंभ हो, उन्हें निविदा प्रक्रिया के उपरांत कराए जाएं। विभागीय अफसरों ने नहीं दिखाई रुचि वन बल प्रमुख से लेकर कैंपा शाखा और विकास शाखा के प्रमुख तक शासन के आदेश के क्रियान्वयन में कोई रुचि नहीं दिखाई। 31 दिसंबर 23 तक पूर्व वन बल प्रमुख आरके गुप्ता चाहते थे कि उनके सेवानिवृत होने के बाद इस पर क्रियान्वयन हो। यही वजह रही कि शासन के 29 में 23, 17 अगस्त 23 और 19 अक्टूबर 23 को जारी आदेश का क्रियान्वयन नहीं हो पाया। इस बीच सभी पीसीसीएफ स्तर के अधिकारियों ने एक प्रेजेंटेशन बनाकर अपर मुख्य सचिव कंसोटिया को सौपा। इसमें निविदा से कार्य करने की तमाम सारी विसंगतियां बताई गई थी। बताते हैं कि कंसोटिया भी विभाग के शीर्ष अधिकारियों के तर्क पर सहमत हो गए थे। निविदा से कार्य करने का मामला ठंडा पड़ चुका था। अचानक 7 मार्च 24 को कंसोटिया ने फिर से आदेश जारी करने का हुक्म अपने मातहत को दिया। आदेश जारी होते वन भवन से फील्ड तक में हड़कंप मच गया। वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव और उनके सिपहसालार पीसीसीएफ सक्रिय हुए। वन बल प्रमुख ने आनन-फानन में पीसीसीएफ स्तर के अधिकारियों की बैठक बुलाई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इसके लिए वन विभाग एक मैन्युअल और शर्ते बनाए। ऐसा करने में 6 महीने का समय निकल जाएगा और तब तक 1479 करोड़ रुपए का 30% बजट पहले त्रेमासिक के लिए पुरानी व्यवस्था के आधार पर चहेते डीएफओ को अपने मन माफिक बजट आवंटित कर दिया जाएगा। बैठक में ही उपस्थित एक सीनियर आईएफएस अधिकारी का कहना है कि मैन्युअल और शर्ते बनाने में अधिक से अधिक 1 महीने का समय लग सकता है। प्रदेश में आचार संहिता लागू है। ऐसे में अफसर चाहे तो 15-20 दिन में ही मैन्युअल और निविदा की शर्ते से बना सकते है। चर्चा है कि कैंपा और विकास शाखा में पदस्थ से पीसीसीएफ नहीं चाहते हैं कि उनके रिटायरमेंट के पहले शासन के आदेश पर क्रियान्वयन हो।

लघु प्रसंस्करण और अनुसंधान केंद्र के लेखों में गड़बड़झाला, प्रबंधक को फटकार, अकाउंटेंट की वेतन वृद्धि रोकी

Irregularities in accounts of Small Processing and Research Center, manager reprimanded, increment of accountant stopped भोपाल। लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक विभाष ठाकुर ने प्रसंस्करण केंद्र बरखेड़ा पठानी के लेखा-जोखा में गड़बड़झाला और भंडार क्रय नियमों के घोर उल्लंघन किए जाने पर जहां उत्पादन प्रबंधको को फटकार लगाई वहीं लेखा प्रभारी नंदलाल कुशवाहा की एक वेतनवृद्धि रोकने के निर्देश दिये।संघ के पूर्णकालिक प्रबंध संचालक बनने के बाद से ही विभाष ठाकुर एक्शन मूड में नजर आने लगे हैं। सूत्रों ने बताया कि एमडी ठाकुर ने शुक्रवार को प्रशासन केंद्र पहुंचे और निरीक्षण के दौरान केंद्र में टुकड़ों -टुकड़ों में ख़रीदी के बिल वाउचर की जांच करते हुए गड़बड़ी पकड़ी। यह बात अलग है कि एमडी प्रशासन मनोज अग्रवाल के पत्र में उठाए गए गड़बड़ियों की जांच की शुरुआत नहीं हो पाई है। केंद्र में जांच के नाम पर समिति दर समितियां का गठन किया जा रहा है। इन समितियां में भी ऐसे लोगों को शामिल किया जा रहा जो खुद ही संदेह के दायरे में है। जैसे रॉ मैटेरियल समिति में जिस डॉ संजय शर्मा को शामिल किया गया है, वह स्वयं रॉ मटेरियल के मुख्य सप्लायर आर्यन फ़ार्मेसी डायरेक्टर का सहयोगी है। जबकि जांच भी आर्यन फ़ार्मेसी प्रदाय किए गए रॉ मटेरियल की होनी है। ऐसे में समितियां का गठन और जांच केवल रस्म अदाएगी तक सीमित रह जाएगी। उल्लेखनीय बात ये है कि विगत कई वर्षों का उत्पादन रिकॉर्ड और गुणवत्ता जांच रिकॉर्ड की ज़िम्मेदारी डॉ संजय शर्मा और डॉ विजय सिंह और उत्पादन प्रबंधक की थी वो रिकॉर्ड ग़ायब है या बनाये ही नहीं गये। इस पर 28 मार्च को मीटिंग में एसीएस जेएन कंसोटिया ने भी गंभीर आपत्ति ली और जांच कर संबंधित पर कार्यवाही करने के निर्देश दिये थे। लेकिन इसके उलट, जो जांच के दायरे में है, उन्हें ही समितियों में शामिल किया जा रहा है।उत्पादन प्रबंधन को लगाई फटकारसंघ के प्रबंध संचालक ठाकुर ने प्रसंस्करण केंद्र बरखेड़ा पठानी की कार्यप्रणाली को लेकर शुक्रवार को बैठक ली। बैठक उन्होंने केंद्र के आय-व्यय और ख़रीदी प्रक्रिया के अलावा उत्पादन प्रक्रिया को लेकर गंभीर प्रश्न उठाये तथा उत्पादन प्रबंधक सुनीता अहीरवार को फटकार लगाई। उत्पादन प्रक्रिया में सुधार लाने के लिये सख़्त निर्देश दिये है। ठाकुर ने उत्पादन प्रक्रिया में सुधार लाने के लिये स्टोर वेरिफिकेशन समिति और कार्य आवंटन को लेकर सख़्त निर्देश केंद्र के सीईओ पीएल फूलजले को दिये है।जांच अधिकारी मिश्रा को नहीं दिए जा रहे हैं दस्तावेजकेंद्र में हुई गड़बड़ियों की जांच कर रहे दागी एसीएफ मणि शंकर मिश्रा को प्रभारी उत्पादन प्रबंधक सुनीता अहिरवार जान से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कर रहीं है। दस्तावेज मिलने की प्रत्याशा में जांच प्रक्रिया तक शुरू नहीं हो पाई है। प्रभारी उत्पादन प्रबंधक अहिरवार को पत्र लिखकर से मिश्रा ने बिंदुवार जानकारियां मांगी है। कय किये गये दूध, लहसुन, अदरक, निबू आदि कय किये गये सामग्री की राशि व सभी वाउचरों की छायाप्रति प्रस्तुत करें।

प्रदेश में आदिवासियों और वन समिति से छीना वानिकी कार्य, अब ठेके पर देने की तैयारी

Forestry work taken away from tribals and forest committee in the state, now preparations to give it on contract ठेके से काम करने पर वन क्षेत्र से सटे गांवों में आदिवासियों और वन विकास समिति से रोजगार छिन जाएगा। भोपाल। मध्य प्रदेश में वन विभाग के समस्त वानिकी, क्षेत्रीय और तकनीकी कार्य ठेका पद्धति अर्थात निविदा के माध्यम से कराए जाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए वन विभाग ने सभी डीएफओ को निर्देश भी जारी कर दिए है। ठेके से काम करने पर वन क्षेत्र से सटे गांवों में आदिवासियों और वन विकास समिति से रोजगार छिन जाएगा। वानिकी कार्य में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था थी, जिससे वे रोजगार के लिए अन्य शहर या राज्य में पलायन न करें, लेकिन ठेका व्यवस्था होने से आदिवासियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा होगा। मध्य प्रदेश रेंजर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष शिशुपाल अहिरवार का कहना है कि मध्य प्रदेश वन विभाग द्वारा अभी तक जो भी उपलब्धि चाहे वो वन क्षेत्र के घनत्व में उन्नति की हो, मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट, तेंदुआ स्टेट, घड़ियाल स्टेट, चीता स्टेट और राजस्व दिलाने में नंबर एक स्टेट बनाने की हो। ये सभी उपलब्धियां केवल वर्दीधारी वन अमले और उनके साथ 24 घंटे रात दिन हर मौसम में साथ देने वाले स्थानीय वन समिति के सदस्य और वन क्षेत्र में रह रहे आदिवासियों के कारण ही संभव हो सका है, लेकिन वानिकी, क्षेत्रीय और तकनीकी कार्य ठेका पद्धति पर कराने से वन क्षेत्र के आस पास रहने वाले आदिवासियों के लिए रोजगार का संकट होगा। अहिरवार का कहना है कि वन क्षेत्र में जो भी काम होते हैं वो एक निश्चित समय में स्थानीय मजदूरों से कराए जाते हैँ। वन के समीप निवास करने के कारण यह जंगल को भलिभांति जानते और समझते हैं। लेकिन निविदा प्रक्रिया वन विभाग में लागू होती है तो निश्चित ही वन क्षेत्र में रह रहे आदिवासियों के अधिकारों का हनन होगा। इस तानाशाही पूर्ण निर्णय को तत्काल प्रभाव से वापस लेेने के साथ ही रेंजर एसोसिएशन इसकी घोर निंदा करता है और इस व्यवस्था का विरोध करेंगे।

चैनलिंक, बारवेड वायर और पोल्स की खरीदारी में करोड़ों की कमीशनबाजी का खेल

Crores of rupees of commission game in the purchase of Chainlink, Barbed Wire and Poles भोपाल। चालू वित्त वर्ष में जंगल महकमे में करीब 50 से 60 करोड़ रूपए की चैनलिंक, बारवेड वायर और टिम्बर पोल्स की खरीदी में बड़े पैमाने पर कमीशन बाजी का खेल खेला जा रहा है। सबसे अधिक खरीदी कैंपा फंड से की जा रही है। इसके अलावा विकास और सामाजिक वानिकी (अनुसंधान एवं विस्तार ) शाखा से भी खरीदी होती है। विभाग के उच्च स्तरीय सूत्रों की माने तो कुल रिलीज बजट के 18 से 20% धनराशि कमीशन कमीशन के रूप में टॉप -टू – बॉटम बंटती है। कई सालों से एक सिंडिकेट कम कर रहा है, जिसे आज तक कोई नहीं तोड़ सका है। इस सिंडिकेट की जड़े काफी मजबूत है।  मुख्यालय से सबसे अधिक फंड कैंपा शाखा से रिलीज किया जाता है। इसके बाद सामाजिक वानिकी और विकास शाखा से करोड़ों की धनराशि वन मंडलों को दिया जाता है। तीनों शाखों को मिलाकर हर वन मंडल को 5 से 7 करोड़ रूपए की राशि हर साल खरीदी के लिए रिलीज किया जा रहा है। चैनलिंक जाली, बारवेड वायर, टिम्बर पोल्स, रूट ट्रेनर्स, मिट्टी और गोबर एवं रासायनिक खाद वगैरह की खरीदी की जाती है. इस खरीदी में 15 से 18 फीसदी राशि कमीशन बाजी में बंटती है। इस खेल को रोकने के लिए  वन मंत्री विजय शाह ने ग्लोबल टेंडर बुलाने की पहल की थी किंतु मैदानी अफसरों के विरोध के चलते वे अपने मंसूबे में सफल नहीं हो पाए थे। गौरतलब यह भी है कि मुख्यालय से विभिन्न शाखों द्वारा फंड रिलीज करने का कोई निर्धारित मापदंड नहीं है। चेहरा देखकर फंड वितरित किया जा रहा है। इसके कारण गड़बड़ी की आशंका बढ़ती जा रही है।  सरकार के निर्देशों की अवहेलना  राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देश है कि वायरवेट, चैनलिंक और पोल की खरीदी में लघु उद्योग निगम को प्राथमिकता दें किंतु 95% खरीदी जेम्स और ई टेंडर से हो रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि लघु उद्योग निगम की दर और जेम (GEM) की दरों में डेढ़ गुना अंतर है। यानी लघु उद्योग निगम में वायरवेट किधर 83 रुपए से लेकर 85 रुपए तक निर्धारित की गई है। जबकि जेम (GEM) में ₹150 तक है। सरकार की मंशा यह भी है कि लघु और मध्यम उद्यमियों को इस कारोबार से जोड़ा जाए। मुख्यालय से लेकर फील्ड के अफसर टेंडर की शर्तों में ऐसी शर्ते जुडवा देते हैं जिसके चलते लघु और मध्यम उद्यमी प्रतिस्पर्धा के रहस्य बाहर हो जाते हैं।   चहेती फर्म को उपकृत करने जोड़ देते हैं नई शर्तें  फंड बंटवारे को लेकर दो अफसर भिड़ चुके  विभाग में फंड बंटवारे को लेकर दो सीनियर अधिकारी भिड़ चुके हैं। पीसीसीएफ कैंपा महेंद्र सिंह धाकड़ की पदस्थापना के पहले तक फॉरेस्ट प्रोटक्शन को लेकर कैंपा से फंड संरक्षण शाखा को रिलीज किया जाता था और फिर संरक्षण शाखा डीएफओ की मांग के आधार पर वितरित करता था। धाकड़ ने इस परंपरा को बदल दिया। अब वह प्रोटेक्शन की राशि भी स्वयं जारी करते हैं। पूर्व में पीसीसीएफ प्रोटेक्शन रहे अजीत श्रीवास्तव ने इसका पुरजोर विरोध किया था और तीखा पत्र भी लिखा था, लेकिन बात नहीं बनी। मुद्दे को लेकर एक बैठक में तो दोनों के बीच अच्छी बहस भी हुई पर तत्कालीन वन बल प्रमुख आरके गुप्ता ने पीसीसीएफ कैंपा धाकड़ का साथ दिया। हालांकि अजीत श्रीवास्तव जल्द ही रिटायर हो गए। मौजूदा पीसीएफ प्रोटेक्शन डॉ दिलीप कुमार किम कर्तव्यविमुढ़ की स्थिति में है और वह सेवानिवृत्ति के दिन गिन रहे हैं। ब्लैक लिस्ट फर्म कर रही हैं अभी भी धंधा  वन विभाग में अलग-अलग वन मंडलों में कई फर्म को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है. इसके बाद भी ब्लैक लिस्ट फर्म अपने राजनीतिक रसूख के दम पर सामग्री की सप्लाई कर रही हैं. इसकी वजह भी साफ है कि वन विभाग में ऐसी कोई भी व्यवस्था नहीं है, जहां ब्लैक लिस्ट की गई फर्म को अन्य वन मंडलों में मैसेज कर धंधा करने से रोका जाए. वैसे पीडब्ल्यूडी जल संसाधन और अन्य विभागों में ऐसी व्यवस्था है कि ब्लैक लिस्ट फर्म की सूची बनाकर मैदानी अफसरों को भेजा जाता है और उन्हें निर्देशित किया जाता है कि इनसे कोई भी वर्क आर्डर न दिया जाए. कमीशन बाजी के खेल में प्रमुख संस्थाएं तिरुपति इंजीनियरिंग वर्क बालाघाट, जबलपुर वायरस जबलपुर, श्री विनायक स्टील इंदौर, राजपूत फेसिंग पोल भोपाल, अरिहंत मेटल (नाहटा), लकी इंडस्ट्रीज इंदौर, आकांक्षा इंडस्ट्रीज विदिशा, नवकार ग्रेनाइट मंदसौर, बीएम मार्केटिंग वर्कर्स इंदौर, शारदा बारबेड  वायर एंड स्टील प्रोडक्ट मंडला, कृष्णा इंटरप्राइजेज छिंदवाड़ा, शारदा सीमेंट पाइप मंडला, ताप्ती एक्वा इंडस्ट्रीज बैतूल, शिल्पा कूलर छिंदवाड़ा, अपहरि प्लास्टिक बिलासपुर और गुरु माया इंडस्ट्रीज इटारसी.  इनका कहना  अगले वित्तीय वर्ष से टेंडर की शर्तें मुख्यालय से निर्धारित की जाएगी, ताकि उसकी एकरूपता बनी रहे। डीएफओ अपनी मनमानी शर्ते नहीं जोड़ पाएंगे. यूके सुबुद्धि पीसीसीएफ विकास

शैडो वन मंत्री की कार्यशैली से विधायकों एवं कार्यकर्ताओं में नाराजगी

Dissatisfaction among MLAs and workers due to the working style of Shadow Forest Minister भोपाल। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नागर सिंह चौहान को वन मंत्री बनाया। चौहान भानमती तो बन गए किंतु उनका मंत्रालय अपर संचालक स्तर के वित्तीय सेवा के अधिकारी रंजीत सिंह चौहान संचालित कर रहे हैं। जंगल महक में उन्हें शैडो वन मंत्री के रूप में देखा जा रहा है। विभाग में सप्लायर का वर्क आर्डर जारी करना हो या फिर ट्रांसफर पोस्टिंग, ये सभी कार्य अधिकारियों से मिलकर वह स्वयं कर रहे हैं। यही कारण है कि विधायकों और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की सिफारिशी तबादला आदेश चुनाव आचार संहिता लगने के पूर्व जारी नहीं हो सके। वन विभाग में अधिकांश अधिकारी वन मंत्री चौहान के अनादिकृत ओएसडी रणजीत सिंह चौहान को शैडो मंत्री के रूप में देखते हैं। फील्ड में पदस्थ डीएफओ यह मानते हैं कि रणजीत सिंह चौहान उनके नजदीकी है। उनकी मान्यताओं पर तब और बल मिलता है जब अधिकारी अपने मंत्री से मिलने जाते हैं और वे उन्हें चौहान की से मिलने का संकेत दे देते हैं। इसके कारण ही विभाग के अवसर उन्हें शैडो वन मंत्री के रूप में देखते हैं। अब नेताओं को भी ऐसा एहसास होने लगा है वह इसलिए कि धार, झाबुआ और अलीराजपुर के विधायकों एवं नेताओं ने वन विभाग के डीएफओ, एसडीओ से लेकर रेंजरों को हटाने और उनकी प्राइम पोस्टिंग करने के सिफारिश की थी। वन मंत्री चौहान ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मंथन कर सूची तैयार कर मंत्रालय को भेजी। इस बीच पार्टी हाई कमान ने उनकी पत्नी अनीता सिंह चौहान को झाबुआ-रतलाम लोकसभा का प्रत्याशी घोषित कर दिया। इस घोषणा के बाद वन मंत्री नागर सिंह चौहान राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त हो गए और इसका लाभ उठाते हुए विधायकों के सिफारिश वाले अधिकारियों के तबादले की सूची में नाम हटाकर चौहान ने अपने पसंदीदा डीएफओ, एसडीओ और रेंजरों के तबादला आदेश आचार संहिता लगने के चंद्र घंटे पहले जारी करवा दिए। वन मंत्री के नजदीकी सूत्रों का कहना है कि विधायकों और नेताओं की अनुशंसा वाले दबा दें आदेश जारी नहीं होने के कारण वन मंत्री के प्रति नाराजगी है और वे चुनाव बाद मुख्यमंत्री मोहन सिंह यादव से शिकायत करने का मन बनाया है। सप्लायर के कारोबार में भी है दखलअंदाजीवन विभाग में लंबे समय से सप्लायर का एक नेक्सस सक्रिय है। इस सिंडिकेट से वन मंत्री चौहान के अनाधिकृत ओएसडी चौहान भी जुड़ गए है। दबाव के चलते ही महकमे में एक दर्जन से अधिक डीएफओ ने चैन लिंक और वायरबेड खरीदी की निविदा में ऐसी शर्त जोड़ दी, जिसे केवल चौहान के नजदीकी फर्म को ही वर्क आर्डर मिल सके। बताया जाता है कि डीएफओ को फोन करके अपने चहेते फर्म को ठेका दिलवाने के लिए नई-नई शर्ते जुड़वा रहे हैं। दक्षिण सागर,बैतूल और बालाघाट समेत एक दर्जन डीएफओ ने चैनलिंक और वायरबेड खरीदी के लिए निविदा आमंत्रित बुलाई गई। इस निविदा में 3 करोड़ के टर्न-ओवर के साथ यह शर्त भी जोड़ दी कि भारत मानक ब्यूरो से मान्यता प्राप्त फर्म ही निविदा में हिस्सा ले सकेंगी। यह शर्त पहली बार जोड़ी गई। इस शर्त के कारण तीन दर्जन से अधिक संस्थाएं प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गई। मप्र में भारतीय मानक ब्यूरो से लाइसेंस प्राप्त दो फर्म ही रजिस्टर्ड हैं। यह दोनों फर्म ही कांग्रेस नेता के रिश्तेदार की है। यानी कांग्रेस नेता के रिश्तेदार को उपकृत करने के लिए प्रदेश के एक दर्जन डीएफओ ने पहली बार यह शर्त निविदा में जोड़ दी है। यह बात अलग है कि प्रतिस्पर्धा से बाहर हुई संस्थाओं ने शिकवे-शिकायतें शुरू कर दी हैं। जानकारों का कहना है कि मंत्री के यहां अनाधिकृत रूप से सक्रिय अपर संचालक स्तर के एक अधिकारी के कहने पर फील्ड के अफसरों ने निविदा में भारतीय मानक ब्यूरो की शर्त जोड़ी है। बताया जाता है कि अफसर पर दबाव बनाने वाले अनाधिकृत काम देख रहे अधिकारी का कांग्रेस नेताओं से पुराने संबंध रहे हैं। क्या है रंजीत सिंह चौहान का बैकग्राउंडरणजीत सिंह चौहान वित्तीय सेवा के अधिकारी

बफरजोन के पास जंगल में लगी भीषण आग, बुझाने में जुटा वन अमला

A massive fire broke out in the forest near the buffer zone, forest staff engaged in extinguishing it. दमोह ! तेज हवाओं के कारण वन अमले को आग बुझाने में भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी ओर देर शाम तक वन अमला आग बुझाने में जुटा रहा। जंगल में आग लगने से कई वन्य जीवों के रहवास भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।दमोह के मड़ियादो बफरजोन में कलकुआ के पास जंगल में शनिवार दोपहर भीषण आग लग गई और आग इतनी भीषण थी कि दूर से ही आग की लपटें और धुआं दिखाई दे रहा था। वन परिक्षेत्र अधिकारी हृदेश हरि भार्गव अमले के साथ मौके पर पहुंचे और आग पर नियंत्रण पाने लिए प्रयास शुरू किए गए।गर्मी शुरू होने से साथ जंगल में आग लगने की घटनाएं सामने आने लगी हैं। इस आग से जंगल में लगे वनस्पति पौधे, पेड़ , छोटे जीव आदि जल जाते है। शनिवार दोपहर तेज हवाओं के कारण आग विकराल हो गई और जंगल के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगने का कारण अज्ञात है। तेज हवाओं के कारण वन अमले को आग बुझाने में भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी ओर देर शाम तक वन अमला आग बुझाने में जुटा रहा। जंगल में आग लगने से कई वन्य जीवों के रहवास भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। क्योंकि यह क्षेत्र पन्ना टाइगर रिजर्व का हिस्सा है और यहां तेंदुआ, नीलगाय और चीतल जैसे कई वन्यजीव हर समय बड़ी संख्या में मौजूद रहते हैं। बता दें कि सड़क के दोनों ओर घास-फूस लगी है। जिससे राहगीरों द्वारा बीड़ी पीने के दौरान फेंकी गई जलती तीली के कारण आग लगने का अंदेशा है। इसके अलावा महुआ-आचार के पेड़ के नीचे सफाई और गर्मी अधिक करने के लिए भी लोग आग लगाते हैं जो जंगल में फैल जाती है। शनिवार दोपहर लगी आग से कितना नुकसान हुआ व वन्य जीव जलने संबंधी कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है अधिकारी आग बुझाने का प्रयास कर रहे हैं। शनिवार रात तक आग नहीं बुझाई जा सकी थी।

कांग्रेस नेता के परिजन को उपकृत करने एक दर्जन डीएफओ ने पहली बार जोड़ी नई शर्तें

To oblige Congress leader’s family, a dozen DFO added new conditions for the first time भोपाल। भाजपा सरकार में भी अफसर कांग्रेस नेताओं के रिश्तेदारों की फर्म पर मेहरबान है। इसी कड़ी में जंगल महकमे में एक दर्जन डीएफओ ने चैन लिंक और वायरबेड खरीदी की निविदा में ऐसी शर्त जोड़ दी, जिसे केवल कांग्रेस नेता के रिश्तेदार की फर्म को ही वर्क आर्डर मिल सके। बैतूल और बालाघाट समेत एक दर्जन डीएफओ ने चैनलिंक और वायरबेड खरीदी के लिए निविदा आमंत्रित की थी। इस निविदा में यह शर्त भी जोड़ दी कि भारत मानक ब्यूरो से मान्यता प्राप्त फर्म ही निविदा में हिस्सा ले सकेंगी। यह शर्त पहली बार जोड़ी गई। इस शर्त के कारण तीन दर्जन से अधिक संस्थाएं प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गई। मप्र में भारतीय मानक ब्यूरो से लाइसेंस प्राप्त दो फर्म ही रजिस्टर्ड हैं। यह दोनों फर्म ही कांग्रेस नेता के रिश्तेदार की है। यानी कांग्रेस नेता के रिश्तेदार को उपकृत करने के लिए प्रदेश के एक दर्जन डीएफओ ने पहली बार यह शर्त निविदा में जोड़ दी है। यह बात अलग है कि प्रतिस्पर्धा से बाहर हुई संस्थाओं ने शिकवे-शिकायतें शुरू कर दी हैं। जानकारों का कहना है कि मंत्री के यहां अनाधिकृत रूप से सक्रिय अपर संचालक स्तर के एक अधिकारी के कहने पर फील्ड के अफसरों ने निविदा में भारतीय मानक ब्यूरो की शर्त जोड़ी है। बताया जाता है कि अफसर पर दबाव बनाने वाले अनाधिकृत काम देख रहे अधिकारी का कांग्रेस नेताओं से पुराने संबंध रहे हैं।

खनिज पट्टा राजस्व में खनन हो रहा था वन भूमि पर, डीएफओ ने की निरस्त करने की अनुशंसा

Mining was being done on forest land to earn mineral lease revenue, DFO recommended its cancellation. भोपाल। विदिशा के 10 खनिज पट्टाधारकों ने वन भूमि पर खनन करने का नायाब तरीका अपनाया है। जंगल के आसपास के राजस्व भूमि पर खनिज पट्टा आवंटित कराते हैं और खनन वन भूमि पर कर अवैध परिवहन और विक्रय कर रहे हैं। मामला संज्ञान में आते ही डीएफओ ने कलेक्टर को पत्र लिखकर उसे निरस्त करने की अनुशंसा की है। दिलचस्प पहलू यह है कि मौजूदा डीएफओ के पहले यहां पदस्थ पूर्व के किसी भी डीएफओ की नजर वन भूमि पर हो रहे खनन के गोरखधंधों पर नहीं पड़ी। या यूं कहिए कि इस गोरख धंधे में पूर्ववर्ती डीएफओ भी रहे होंगे। विदिशा डीएफओ ओंकार सिंह मस्कोले ने विदिशा कलेक्टर को पत्र लिखा है कि 7 अक्टूबर 2002 को जारी वन मंत्रालय के निर्देश है कि वन सीमा के 250 मीटर के अंदर उत्खनन पट्टा स्वीकृत न किया जाय। डीएफओ ने कलेक्टर को लिखे पत्र में वन भूमि सीमा से ढाई सौ मीटर के अंदर पूर्व में दिए गए राजस्व भूमि पर पट्टे निरस्त किए जाएं। वन विभाग के मैदानी अमले के अनुसार पट्टाधारकों ने राजस्व सीमा पर आवंटित पट्टे की आड़ में वन भूमि पर बड़े पैमाने पर खनन कर रहे थे। इन्हीं सूत्रों का कहना है कि पिछले 7-8 वर्षों में खनन कारोबारियों ने करीब 6000 हेक्टेयर वन भूमि पर खनन कर डाले। खनन कारोबारी के साथ वन विभाग के मिली भगत के भी संकेत मिले हैं। सवाल यह उठता है कि पूर्ववर्ती डीएफओ ने वन भूमि सीमा के ढाई सौ मीटर के अंदर खनन के लिए कैसे अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिए? इनके पट्टे निरस्त करने की अनुशंसा बड़े पैमाने पर अतिक्रमण कर रहे हैं पट्टा धारक वन विभाग के मैदानी अमले के लिए वन अधिकार अधिनियम के तहत दिए गए पट्टा धारक भी सिरदर्द बनते जा रहे हैं। वनाधिकार के तहत पट्टे प्राप्त करने के बाद आदिवासी पट्टे की सीमावर्ती वन भूमि पर बेखौफ कब्जा करते चले जा रहे हैं। इस आशय की जानकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान एक छिंदवाड़ा सर्किल के डीएफओ ने एसीएस वन और वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव को दी है। मुख्यालय के अधिकारी भी मानते हैं कि यह समस्या अकेले छिंदवाड़ा सर्कल की नहीं है। पूरे प्रदेश से ऐसी खबरें मिल रही हैं। चूंकि चुनावी वर्ष है, इसलिए अधिकारी भी असमंजस में है कि उनके साथ कैसा सलूक किया जाए..?

संघ के एमडी एक्शन मूड में, सीईओ और उत्पादन प्रभारी की ली क्लास, तीन साल का ब्यौरा मांगा

Sangh’s MD in action mood, asks for details of CEO and production in-charge, details of three years भोपाल। लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक बिभाष ठाकुर ने अब एक्शन मूड में नजर आ रहें हैं। मंगलवार को प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र (एमएफपी पार्क) बरखेड़ा पठानी के सीईओ और  प्रभारी प्रबंधक उत्पादन की जमकर क्लास ली। ठाकुर ने गत 3 साल में केंद्र में खरीदी गई जड़ी- बूटी समेत अन्य सामग्रियों का पूरा ब्यौरा मांगा है। प्रबंध संचालक द्वारा प्रसंस्करण केंद्र में उत्पादन से संबंधित समीक्षा बैठकों में कई बिंदुओं पर उत्पादन प्रभारी प्रबंधक सुनीता अहिरवार को सुधार करने की कड़ी चेतावनी दी है।  संघ के प्रबंध संचालक ठाकुर ने प्रशंसकरण एवं अनुसंधान केंद्र में लंबे समय से हो रही गड़बड़ियों को गंभीरता से लिया है। मंगलवार को बातचीत में ठाकुर ने अनौपचारिक चर्चा में बताया कि मैंने सीईओ पीजी फुलजले और उत्पादन प्रभारी प्रबंधक सुनीता अहिरवार से 3 साल में क्रय की गई सामग्रियों को बिंदुवार जानकारी मांगी है। मसलन, कितनी सामग्री, किस संस्था से और किस दर पर खरीदी की गई है ? खरीदी गई सामग्री टेंडर से परचेस किए गए हैं या फिर बिना निविदा बुलाए खरीद ली गई हैं। सभी डिटेल तीन दिन के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अप्रैल से नई पॉलिसी लागू करने जा रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि इससे गड़बड़ झाले और दलाली पर ब्रेक लगेगा। नई नीति के तहत सभी खरीदी जिला वनोपज यूनियन के अंतर्गत काम करने वाले संग्रहण कर्ताओं से की जाएगी।   4 सालों का उत्पादन रिकॉर्ड भी गायब जानकारी में आया है कि पिछले 4 सालों गंभीर अनियमितताएं की गई। सूत्रों का कहना है कि विगत 4 सालों में लगभग 90 करोड़ रुपये कि दवाईओं का उत्पादन किया गया है। लेकिन उत्पादन का रिकॉर्ड संधारित ही नहीं किया गया है। विगत वर्षों की ख़रीदी का मिलान उत्पादन रिकॉर्ड से ही किया जा सकता है, परंतु उत्पादन रिकॉर्ड के नाम पर बिल वाउचर ही मिल रहे है। जिनका सही प्रमाणीकरण सही तरीक़े से जांच द्वारा ही किया जा सकता है। इस संबंध में न तो पूर्व एसडीओ पर कार्यवाही की गई न ही प्रभारी एसडीओ सुनीता अहिरवार पर कार्यवाही की जा रही है। सीईओ फ़ुलझेले द्वारा केवल एक आदेश निकाल कर इतिश्री कर ली गई है। सुनीता अहिरवार द्वारा भी बिल्डिंग मेंटेन्स, नर्सरी रखरखाव, और फर्जी लेवर दिखा कर करोड़ों रुपए का गड़बड़ झाला किया जा चुका है। दिलचस्प पहलू है कि  अपर प्रबंध संचालक मनोज अग्रवाल के पत्र में दर्शित बिंदुओं पर जांच करने के लिये कोई कमेटी अभी तक नहीं बनी है। तीन आईएफएस आएंगे जांच की जद में  पूर्व एसडीओ पिल्लई के कार्यकाल में हुई अनियमितताएँ उस अवधि में मुख्यकार्यपालन अधिकारी रहे अफ़सरों की मिली भगत से ही संभव हुआ है। यदि एसडीओ पिल्लई पर कार्यवाही हुई तो बड़े अफ़सर भी जद में आयेंगे। इसमें पूर्व सीईओ एवं सेवानिवृत आईएफएस एलएस रावत, एपीसीसीएफ विवेक जैन वर्तमान में वन विकास निगम में प्रभारी एमडी और  प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ दिलीप कुमार पर भी चार्जशीट बन सकती है। इन तीन आईएफएस अफसर को बचाने के लिए जांच कमेटी का गठन नहीं किया जा रहा है।

12 साल से एचआरडी शाखा में जमीं प्रभारी पर लगने लगी गंभीर वित्तीय अनियमितता के आरोप

Allegations of serious financial irregularities started being leveled against the ground in-charge of HRD branch for the last 12 years. भोपाल। शासकीय अधिवक्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट कौशल पांडेय ने वन मंत्री से लेकर पीसीसीएफ एवं एपीसीसीएफ विजिलेंस को पत्र लिखकर वन विभाग के मानव संसाधन विकास शाखा में 12 साल से पदस्थ सहायक ग्रेड-2 एवं कार्यालय प्रभारी अधीक्षक विनीता फांसिस विल्सन और उनके मददगार सेवा निवृत्त कर्मचारी कृष्णन पर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाते हुए बर्खास्त करने की मांग की है। इसके अलावा शासकीय अधिवक्ता ने सीनियर अधिकारी से निष्पक्ष जांच का भी आग्रह किया है। वन मंत्री और सीनियर अधिकारियों को संबोधित पत्र में शासकीय अधिवक्ता पांडे ने लिखा है कि विनीता फांसिस विल्सन सहायक ग्रेड-2 कार्यालय प्रभारी अधीक्षक के पास बजट आवंटन, भंडार कक्ष, भारतीय वन सेवा प्रशिक्षण, राज्य वन सेवा प्रशिक्षण, रेजर प्रशिक्षण, उपवन क्षेत्रपाल और वनरक्षक प्रशिक्षण का प्रभार है। अपने पद का दुरूपयोग करते हुए विनीता फॉसिस विल्सन ने 65 वर्षीय सेवा निवृत्त कर्मचारी कृष्णन एवं एक अन्य महिला रिश्तेदार को जॉबदार पर कार्य पर रखा है। यही नहीं, प्रभारी अधीक्षक ने अपने घर का काम कराने के लिए एक काम वाली एक सर्वेंट को रखा है, जिसका वेतन भुगतान वनरक्षक प्रशिक्षण स्कूल के माध्यम से किया जाता है। पत्र में कथित रूप से आरोप लगाया गया है कि प्रतिमाह स्टेशनरी कय/कम्प्यूटर-प्रिंटर मरम्मत के फर्जी बिल तैयार कर भण्डार कय नियमों का उल्लघंन कर नियम विरूद्ध भुगतान किया जा रहा है। विल्सन प्रभारी अधीक्षक द्वारा एसी/ कुलर/वलफेन/हिटर/फोटो कापी मशीन / कम्प्यूटर/पिंटर/आलमरी अन्य कीमती समान सतपुड़ा भवन से वन भवन शिफ्टिंग के दौरान हेराफेरी की गई है। प्रशिक्षु रेंजर और एसीएफ से भी स्टाइफंड की राशि रिलीज़ करने सहित अन्य मसलों की आड़ में धन वसूले जाते हैं।हटाए जाने के बाद कृष्णन क्यों बैठते अधीक्षक कक्ष में..?एचआरडी शाखा में 35 साल तक सेवा देने के बाद सेवानिवृत हुए कृष्णन आज भी शाखा में बैठकर काम करते नजर आएंगे। हटाए जाने के बाद कृष्णन क्यों बैठते अधीक्षक कक्ष में..? यह सवाल वन भवन में अधिकारी एवं कर्मचारियों के बीच यक्ष प्रश्न बना हुआ है। जबकि शाखा के पीसीसीएफ बिभाष ठाकुर ने साफ तौर पर कहा है कि कृष्णन एचआरडी शाखा में ना तो संविधान नियुक्ति है और न ही उनको दैनिक वेतन भत्ते पर रखा गया है। ठाकुर ने तो यहां तक कह दिया है कि हमने उसे मना कर दिया है। इसके बाद भी कृष्णन आज भी एचआरडी शाखा के अधीक्षक कक्ष पर बैठा नजर आता है। कृष्णन पर नए रेंजर/ डिप्टी रेंजर और ट्रेनिंग स्कूलों को फंड रिलीज करने एवज में कमीशन बाजी के काम में लिप्त होने का आरोप है। इसके अलावा वह विभागीय रेंजरों की परीक्षा के पेपर की सेटिंग और परीक्षा कॉपी की डि-कोडिंग का काम करते हैं।

कमीशन खोरी पर ब्रेक लगाने एमडी ने लिया बड़ा फैसला, अब प्राइवेट फर्म से नहीं होगी खरीदी

MD took a big decision to put a stop to commission embezzlement, now purchases will not be made from private firms भोपाल। लघु वनोपज संघ के प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र में लंबे समय से चली आ रही कमीशन खोरी पर ब्रेक लगाने के लिए प्रबंध संचालक बिभास ठाकुर ने बड़ा फैसला लिया है। ठाकुर ने तय किया है कि वन मेले में होने वाले क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में अब निजी फर्म हिस्सा नहीं लेंगे। यानी अब खरीदी जिला वनोपज समितियों से ही होगी। संघ के प्रबंध संचालक ने यह निर्णय ऑडिट आपत्ति के बाद लिया है।संघ के एमडी विभाष ठाकुर द्वारा वन मेले में क्रेता विक्रेता अनुबंध में वनोपज समिति और वन धन केंद्रों से ही अनुबंध किया गया है। जबकि पहले प्राइवेट सप्लायर से भी अनुबंध कर के उन्हीं से ख़रीदी को प्राथमिकता दी जाती थी।पिछले 5 सालों का रिकॉर्ड देखे तो अनुबंधों में सबसे ज़्यादा ख़रीदी आर्यन फार्मेसी से की गई और तो और शहद जो की मध्यप्रदेश में वनसमिति संग्रहण करती है उसके बाद भी अदिति ट्रेडर्स राजस्थान से शहद ख़रीदा गया। आडिट रिपोर्ट में ख़रीदी प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति ली गई है।लैब रिपोर्ट में कई फ़ार्मो के रॉ-मटेरियल ख़राब होने के बाद भी ख़रीदी कर भुगतान कर दिया गया।सूत्रों ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्षों के आडिट आपत्तियों में गंभीर वित्तीय अनियमितता की ओर प्रसंस्करण केंद्र के सीईओ और एमडी का ध्यान आकर्षित कराया गया है। मसलन, मशीन के रखरखाव पर एक साल में ढाई करोड रुपए का भुगतान किया गया है। कहते हैं कि इतने में तो नई मशीन आ जाती। मशीन के मेंटेनेंस का ठेका भी 3-4 सालों से एक ही फर्म को दिया जा रहा है। ऑडिट में इस बात को लेकर भी आपत्ति की गई है कि पिछले वर्ष के वन मेले में संपन्न क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में क्रय अनुबंध प्राथमिक समितियां से किया गया। जबकि 80 लाख से अधिक की आयुर्वेद औषधि के लिए रॉ मटेरियल की खरीदी आर्यन फार्मेसी से की गई। यही नहीं, जब स्टॉक वेरिफिकेशन और उसके पेमेंट का लेखा-जोखा देखा तो ऑडिट टीम के सदस्यों की आंखें फटी रह गई। प्लास्टिक से बने डिब्बे वगैरह भी आयर्न फर्म से खरीदे गए हैं। ऑडिट रिपोर्ट में यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि निजी फर्म से हुई खरीदी के भुगतान टुकड़ों- टुकड़ों में एक ही तारीख में हुआ है। यह सिलसिला पिछले तीन-चार सालों से जारी है। गंभीर वित्तीय ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद मौजूदा प्रबंध संचालक विभाग ठाकुर ने निर्णय लिया है कि अब वन मेला में आयोजित क्रेता विक्रेता सम्मेलन में अधिकारियों कर्मचारियों के चहेते निजी फर्म को हिस्सा नहीं लेंगे। संघ में सदस्य अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मनोज अग्रवाल ने भी 5 वर्षों में व्याप्त गड़बड़झाले की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए एक तीखा पत्र लिखा है। पत्र से केंद्र के अधिकारियों में हड़कंप है। जांच कहां से शुरू करें संशय में है सीईओ लघु वनोपज संघ में पदस्थ एपीपीसीएफ मनोज अग्रवाल के पत्र के बाद प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र के सीईओ पीजी फुलजले असमंजस मैं पड़ गए हैं की जांच कहां से शुरू करें..?, क्योंकि गड़बड़ियों की फेहरिस्त बड़ी लंबी है। फुलजले ने बातचीत में यह जरूर कहा कि हमने एसडीओ को जांच के निर्देश दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि सीईओ ने जांच की आड़ में केवल एसडीओ और प्रभारी एसडीओ एवं रेंजर सुनीता अहिरवार के बीच काम का बंटवारा कर दिया। लेकिन वित्तीय अधिकार महिला रेंजर अहिरवार के पास ही निहित है। यानी खरीदी में हुई गड़बड़ियों की जांच पर लीपा पोती के लिए अहिरवार से वित्तीय अधिकार नहीं लिया गया। इसके पीछे संघ में चर्चा है कि मंत्रालय में पदस्थ एक शीर्षस्थ अधिकारी की सिफारिश से ही केंद्र में रेंजर को एसडीओ का प्रभारी बनाया गया और वित्तीय अधिकार दिए गए हैं।इनका कहनाएपीसीसीएफ के पत्र को संज्ञान में लिया है और जांच के लिए एसडीओ को निर्देश दिए हैं।पीजी फूलजले, सीईओ प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र बरखेड़ा पठानी

11 घंटे का समर तय कर त्रिदेव नामक हाथी पहुंचा कान्हा टाइगर रिजर्व

Elephant named Tridev reached Kanha Tiger Reserve after traveling 11 hours त्रिदेव हाथी को सकुशल पहुंचाने दौरान पूरे रास्ते में पुलिस दल,वनविभाग के अधिकारी/कर्मचारी मौजूद रहे। अनूपपुर। जिले के वन परिक्षेत्र जैतहरी अंतर्गत गोबरी बीट के ठाकुरबाबा के पास गोबरी गांव में विगत डेढ़ माह से निरंतर विचरण कर रहे त्रिदेव नामक हाथी को कान्हा टाइगर रिजर्व में स्थित हाथी ठहराव स्थल पर पहुंचा दिया गया है। कुचल दिया था एक व्‍यक्ति को त्रिदेव नामक हाथी ने एक व्यक्ति को कुचल दिया था। इसके बाद उपजे आक्रोश के बाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम द्वारा रेस्क्यू आपरेशन चलाया गया। सफलतापूर्वक ट्रेंकुलाइज किया इसके बाद तीस वर्षीय त्रिदेव नामक हाथी काे सफलतापूर्वक ट्रेंकुलाइज करने बाद ट्रक में पिंजरे में रखकर सड़क मार्ग से गोबरी से राजेन्द्रग्राम डिंडोरी, मण्डला होकर 11 घंटे का सफर तय करते हुए रविवार की रात नौ बजे मंडला जिले के कान्हा टाइगर रिजर्व स्थित हाथी ठहराव स्थल पर पहुंचा द‍िया गया। अधिकारी, कर्मचारी साथ थे त्रिदेव हाथी को सकुशल पहुंचाने दौरान पूरे रास्ते में पुलिस दल,वनविभाग के अधिकारी/कर्मचारी मौजूद रहे। बीच-बीच में बांधवगढ़ एवं संजय टाइगर रिजर्व सीधी के डाक्टर नितिन गुप्ता,डाक्टर सेंगर के साथ मंडला जिले में प्रवेश करते ही मंडला जिले के कान्हा टाइगर रिजर्व के वन अधिकारी,पार्क के डाक्टर द्वारा समय-समय पर स्वास्थ्य का परीक्षण किया गया जिसमें वह स्वस्थ पाया गया। अब ग्रामीणों ने ली चैन की सांस आक्रामक हाथी के सुरक्षित रेस्क्यू एवं जिले से बाहर कान्हा पहुंचाये जाने के बाद जैतहरी एवं अनूपपुर तहसील के विभिन्न ग्रामीण अंचलों के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। बताया गया अब त्रिदेव को यहां रखा जाएगा और प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि इसका स्वभाव भी शांत हो जाए।

सांभर के शिकार के तीन आरोपी गिरफ्तार

Three accused of hunting Sambhar arrested बालाघाट। कान्हा टाईगर रिजर्व के समनापुर बफरजोन अंतर्गत अकलपुर वृत्त के सरईपतेरा भाग-1 बीट कक्ष क्रमांक 203 वनक्षेत्र में सांभर के शिकार की खबर वन अमले को 18 फरवरी को मिली थी। जिसके बाद कान्हा टाईगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक एस.के. सिंह के मागर््दर्शन में कान्हा टाईगर रिजर्व और वन परिक्षेत्र रेंगाखार की टीम की संयुक्त कार्यवाही में सांभर का अवैध शिकार में संलिप्त तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सांभर के शिकार के बाद कान्हा टाईगर रिजर्व क्षेत्र संचालक श्री सिंह के मार्गदर्शन में वन परिक्षेत्र रेंगाखार, वन परिक्षेत्र समनापुर बफरजोन, वन परिक्षेत्र खापा बफरजोन और कान्हा की डॉग स्क्वायड टीम ने संयुक्त रूप से कड़ी मेहनत के बाद सहायक संचालक मलाजखंड अजय ठाकुर एवं रेंगागार परिक्षेत्र अधिकारी विजेन्द्र तिवारी के नेतृत्व में तीन आरोपियों छत्तीसगढ़ के सरईपतेरा निवासी 35 वर्षीय प्रभुसिंह धुर्वे पिता कुमानसिंह धुर्वे, 44 वर्षीय सोनसिंह धुर्वे पिता मोहरसिंह धुर्वे, बालाघाट जिले के बिरसा अंतर्गत अकलपुर निवासी 50 वर्षीय घासीराम पिता बिगारी परते को गिरफ्तार कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। जिनके पास से वनविभाग की टीम ने सांभर का मांस, चमड़ा, श्रृंगाभ, मोटर सायकिल, कुल्हाड़ी और छुरी जब्त किया। आरोपियों के खिलाफ भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 2 की उपधारा 16(क), धारा 9, 39, 50, 51 और 52 के तहत अवन अपराध कायम कर बैहर न्यायालय में पेश किया। इस कार्यवाही मे खापा बफर रेंजर श्रीमती संध्या देशकर, समनापुर बफर परिक्षेत्र अधिकारी श्रीमती सीता जमरा, परिक्षेत्र सहायक शिवकुमार यादव, वनरक्षक नरोत्तमसिंह मेरावी, घनश्याम सैयाम, टहेलसिंह मानेश्वर, कान्हा टाईगर रिजर्व डॉग स्क्वायड टीम के सदस्य भागीरथ ककोड़िया एवं डॉग स्टार्म ने आरोपियों को पकड़ने में सराहनीय भूमिका निभाई।

पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर जोन में लगी भीषण आग, कई बाघों का है ठिकाना

A massive fire broke out in the core zone of Panna Tiger Reserve, many tigers are missing. पन्ना टाइगर रिजर्व में लगी आग पन्ना टाइगर रिजर्व में भीषण आग लग गई है, जिसके बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। इस टाइगर रिजर्व में कई बाघ रहते हैं। खबर लिखे जाने तक आग पर काबू नहीं पाया गया है। पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर जोन में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया है। बताया गया है कि पन्ना टाइगर रिजर्व के रमपुरा गेट से अंदर तालगांव क्षेत्र के जंगल में आग लग गई है। इस क्षेत्र में कई बाघों का ठिकाना है, जिससे यहां आम प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित है। कुछ समय से यहां फायर लाइन कटाई का काम चल रहा था, शायद इसी वजह से आग बहक कर घास में पहुंच गई होगी। बताया गया है कि दर्जन भर से अधिक सुरक्षा श्रमिक और वनकर्मी आग को काबू करने के प्रयास में जुटे हैं, लेकिन अभी तक आग पर काबू नहीं पाया जा सका।

प्रकृति की धरोहर गिद्ध प्रजाति को बचाने की जरूरत है विजयराघवगढ एवं रीठी में हुई गिद्धों की गणना कैमोर की पहाड़ियों में मिले गिद्ध के आशियाने वन विभाग में खुशी

There is a need to save the nature’s heritage vulture species. Counting of vultures was done in Vijayraghavgarh and Reethi. Happiness in the Forest Department. Home of vultures found in the hills of Kaimur. कटनी । गिद्ध प्रजाति बचाने की बहुत जरूरत वन क्षेत्रों में पक्षी राज कहे जाने वाले देशी गिद्घों का कुनबा बढ़ने से वन विभाग के अधिकारियों के चेहरों में खुशी देखने को मिल रही है। मिली जानकारी के अनुसार तीन दिन चली गणना के बाद पिछली गणना से दोगुने से अधिक देशी गिद्ध जिले के दो वन परिक्षेत्रों में पाए गए हैं। गणना का कार्य पूरा होने के बाद रविवार की देर शाम तक वरिष्ठ कार्यालयों को जानकारी भेजी गई। जिले में वर्ष 2019 की गणना के दौरान विजयराघवगढ़ व रीठी वन परिक्षेत्र में 75 गिद्ध मिले थे और वर्ष 2021 में गणना में इनकी संख्या घटकर 64 हो गई थी। जिसके चलते सफाई मित्र के नाम से जाने वाली इस प्रजाति की घटी संख्या वन विभाग के लिए चिंता का विषय थी। विशेषज्ञों के साथ वन विभाग की टीम ने विजयराघवगढ़ क्षेत्र में गिद्धों की संख्या अधिक होने के कारण यहां पर जागरूकता अभियान चलाया था। जिसका असर देखने को मिला है और इस वर्ष की गणना के बाद गिद्धों की संख्या बढ़कर 191 हो गई है। जिसके बाद वन अमले के चेहरों में खुशी देखने को मिल रही है। जिले में 16 फरवरी से 18 फरवरी तक हुई गिद्ध गणना में जहां 140 व्यस्क गिद्ध मिले हैं तो वहीं 51 अव्यस्क गिद्ध वन अमले को मिले हैं।गिद्घों के मिले चार आवास, कैमोर की पहाड़ी में अधिकवन विभाग के विजयराघवगढ़ वन परिक्षेत्र के कैमोर की पहाड़ियों में गिद्धों के सबसे अधिक आशियाने वन विभाग को मिले हैं। यहां पर कैमोर से मेहगांव के बीच पहाड़ी पर गिद्धों के तीन आशियाने टीम को मिले हैं। रेंजर विवेक जैन की अगुवाई में सुबह तीन दिन हुई गणना में 51 अव्यस्क और 136 व्यस्क देशी गिद्ध आशियानों में बैठे मिले। वहीं रीठी वन परिक्षेत्र में कुम्हरवारा टैंक के पास देशी गिद्घों का एक आशियाना मिला है, जिसमें गिद्घों की संख्या चार मिली है, हालांकि पहले व दूसरे दिन यहां पर छह गिद्ध मिले थे लेकिन अंतिम गणना को मानते हुए यहां पर चार की संख्या आंकी गई है। रीठी क्षेत्र में रेंजर महेश पटेल की अगुवाई में गिद्घों की गणना हुई। दो वन परिक्षेत्रों के अलावा अन्य क्षेत्रों में गिद्धों की प्रजाति देखने को नहीं मिली।

वन विभाग के दागी अफसरों पर मेहरबान है शीर्ष अफसर

The top officer is kind to the tainted officers of the forest department भोपाल। जंगल महकमे के शीर्ष अधिकारी कुछ चहेते अफसरों को बचाने के लिए पूरी ताकत लगाते आ रहें है। शीर्ष अधिकारी गंभीर वित्तीय मामले में घिरे आईएफएस अधिकारियों बचाने के लिए आरोप पत्र को जारी करने के बजाय शो कॉज नोटिस जारी कर रहे हैं। जिनके खिलाफ आरोप पत्र जारी भी कर दिए गए हैं, उनके विरुद्ध आगे की कार्यवाही पेंडिंग कर दी जा रही है। विभाग के शीर्ष अधिकारियों की ढुलमुल रवैया के कारण आरोपित अधिकारी धीरे-धीरे रिटायर भी होते जा रहें है। विभाग सेवानिवृत्त अधिकारियों पर सद्भावना दिखाते हुए पेंशन भी स्वीकृत कर रहा है. मसलन, एम काली दुर्रई, देवेंद्र कुमार पालीवाल, प्रभात कुमार वर्मा जांच कार्यवाही के लंबित रहते हुए सेवानिवृत्त हो गए और अब उनके समस्त देयकों के भुगतान करने पर उदारता बरती जा रही है। दागी अफसरों को बचाने के लिए शीर्ष अधिकारी क्यों उदारता बरत रहे हैं, शोध का विषय है। इन अफसरों को अभयदान देने के प्रयास आरपी राय: खंडवा सर्किल में पदस्थ सीसीएफ आर पी राय के खिलाफ 10 जून 2019 को आरोप पत्र जारी हुआ था। आरोप था कि वन मंडल इंदौर के अंतर्गत वन परीक्षेत्र चोरल में बड़े पैमाने पर अवैध कटाई हुई थी। जांच के दौरान राय अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असफल रहे। इसके कारण 6 लाख 93 हजार 361 रुपए की राजस्व हानि हुई थी। अभी इनसे वसूली नहीं हुई है। मामला विभाग में ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। राय अगले मई महीने सेवानिवृत्त हो गए। यही नहीं, विभागीय मंत्री की विशेष कृपा होने के कारण इनसे छह लाख 93 हजार की वसूली नहीं हो पाई।** एपीएस सेंगर: बालाघाट सर्किल में पदस्थ सीसीएफ एपीएस सेंगर के खिलाफ 24 अगस्त 2022 को आरोप पत्र जारी हुआ। मामला तब का है, जब वे टीकमगढ़ के डीएफओ हुआ करते थे। इन पर आरोप है कि भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया। खरीदी में गड़बड़ी हुई। इनके खिलाफ आरोपपत्र भी बन गया परंतु प्रशासन-1 शाखा ने उदारता दिखाते हुए शो कॉज नोटिस जारी कर उन्हें बालाघाट सर्किल में प्राइम पोस्टिंग दे दी गई है। दुर्भाग्य जनक पहलू यह है कि विभाग ने इनके खिलाफ कार्रवाई करने की अद्यतन स्थिति से शासन को अवगत नहीं कराया है। यही नहीं, बल्कि सेंगर को बालाघाट सर्किल की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई। एम काली दुर्रई: 1996 बैच के आईएफएस अधिकारी एम काली दुर्रई प्रतिनियुक्ति पर हॉर्टिकल्चर में पदस्थ रहे। यहां पदस्थ रहते हुए दुर्रई ने किसानों की सब्सिडी देने के मामले में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की। इसके चलते उन्हें कमिश्नर हॉर्टिकल्चर पद से हटाया गया। मूल विभाग वन विभाग में लौटते ही उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई। प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के जांच अफसर सीके पाटिल को जांच के लिए 2 साल का पर्याप्त समय मिलने के बाद भी विभागीय जांच कंप्लीट नहीं कर पाए और वे रिटायर हो गए। राजनीतिक दबाव के चलते विभाग के अफसर उनके खिलाफ कोई बड़ी कार्यवाही नहीं कर पाए। सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले देयकों का भुगतान भी उदारता से किया जा रहा है। डीके पालीवाल: सीसीएफ शिवपुरी के पद से रिटायर हुए हैं। इनके पेंशन के भुगतान पर आपत्ति की गई है, क्योंकि धार और फिर गुना डीएफओ पद रहते हुए आर्थिक गड़बड़ी कर शासन को नुकसान पहुंचाया है। धार में पदस्थ रहते हुए पालीवाल ने एक रेंजर का समयमान वेतनमान का फिक्सेशन अधिक कर दिया। जब मामला संज्ञान में आया, तब तक पालीवाल वहां से स्थानांतरित हो गए थे। विभाग ने अतिरिक्त भुगतान के गए राशि वसूलने के नोटिस सेवानिवृत्त रेंजर को भेजा तो कोर्ट ने उस के पक्ष में फैसला देते हुए फिक्सेशन करने वाले अफसर पालीवाल से ₹300000 की वसूली करने के आदेश दिए। इसी प्रकार गुना में कैंपा फंड की राशि से गड़बड़झाला करने का भी आरोप है। इनके खिलाफ पूर्व एसीएस वन अशोक वर्णवाल ने आरोप पत्र जारी करने के निर्देश दिए थे। वर्णवाल के निर्देश पर विभाग ने उनके खिलाफ आरोप पत्र तैयार किया किंतु बड़े अफसरों के चहेते होने की वजह से आरोप-पत्र को शो-कॉज नोटिस परिवर्तित कर दिया गया है। बजट शाखा ने उनके पेंशन जारी करने पर आपत्ति लगाई है किंतु शीर्ष अफसरों ने शो-कॉज नोटिस जारी कर उनके पेंशन और समस्त देयकों के भुगतान के रास्ते प्रशस्त कर दिए। प्रभात कुमार वर्मा : 2001 बैच के आईएफएस अधिकारी प्रभात कुमार वर्मा जनवरी में सेवानिवृत्त हुए हैं। वे जब 2020 में वन विकास निगम में पदस्थ थे तब आर्थिक गड़बड़ियों के चलते उन्हें आरोप पत्र जारी किया गया। यही नहीं, विभाग ने 4 जनवरी 2022 को वन विकास निगम के एमडी को पत्र लिखकर गड़बड़ियों से संबंधित प्रचलित नस्ती उपलब्ध कराने के निर्देश दिए किंतु नस्ती उपलब्ध नहीं कराने के कारण उनके मामले में निर्णय नहीं हो सका। वे सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। जांच लंबित रहते हुए उनके देयकों के भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू है। वर्मा पर आरोप यह भी है कि वे अपने मातहत अधिकारियों के खिलाफ दुर्भावना से कार्रवाई करते हैं। इनके शिकार खंडवा डीएफओ देवांशु शेखर, सुश्री नेहा श्रीवास्तव, अधर गुप्ता और एसडीओ विद्या भूषण मिश्रा हो चुके हैं. इनके द्वारा दुर्भावना से कार्रवाई करने की वजह से मिश्रा आईएफएस की दौड़ में पीछे रह गए हैं। दुर्भावना से की गई कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज भी बड़े अधिकारियों को सौंपे हैं। उन पर लघु वनोपज संघ के अंतर्गत अधोसंरचना विकास के मद में भी गड़बड़ी करने के आरोप हैं। बृजेंद्र श्रीवास्तव: छिंदवाड़ा पूर्व में पदस्थ डीएफओ बृजेंद्र श्रीवास्तव के खिलाफ 21 जुलाई 2022 को नियम दस के तहत आरोप पत्र जारी किया गया था। इन पर आरोप है कि स्थानांतरण नीति के विरुद्ध जाकर कर्मचारियों के तबादले किए। आरोप पत्र का जवाब अभी तक नहीं दिया गया है। इनका तबादला वन मंत्री शाह की सिफारिश पर ग्वालियर से पूर्व छिंदवाड़ा वन मंडल जैसे महत्वपूर्ण वन मंडल में कर दिया गया है। भारत सिंह बघेल: भोपाल मुख्यालय में पदस्थ भारत सिंह बघेल को आरोप पत्र 22 मई 2006 को जारी किया गया था। बघेल ने अपने प्रभाव अवधि के दौरान पूर्व लांजी क्षेत्र में प्रभार अवधि में राहत कार्य अंतर्गत कार्यों … Read more

वन विभाग के दागी अफसरों पर मेहरबान है शीर्ष  अफसर

Top officers are kind to the tainted officers of the Forest Department विशेष संवाददाता  जंगल महकमे के शीर्ष अधिकारी कुछ चहेते अफसरों को बचाने के लिए पूरी ताकत लगाते आ रहें है। शीर्ष अधिकारी गंभीर वित्तीय मामले में घिरे आईएफएस अधिकारियों बचाने के लिए आरोप पत्र को जारी करने के बजाय शो कॉज नोटिस जारी कर रहे हैं। जिनके खिलाफ आरोप पत्र जारी भी कर दिए गए हैं, उनके विरुद्ध आगे की कार्यवाही पेंडिंग कर दी जा रही है। विभाग के शीर्ष अधिकारियों की ढुलमुल रवैया के कारण आरोपित अधिकारी धीरे-धीरे रिटायर भी होते जा रहें है। विभाग सेवानिवृत्त अधिकारियों पर सद्भावना दिखाते हुए पेंशन भी स्वीकृत कर रहा है. मसलन, एम काली दुर्रई, देवेंद्र कुमार पालीवाल, प्रभात कुमार वर्मा जांच कार्यवाही के लंबित रहते हुए सेवानिवृत्त हो गए और अब उनके समस्त देयकों के भुगतान करने पर उदारता बरती जा रही है। दागी अफसरों को बचाने के लिए शीर्ष अधिकारी क्यों उदारता बरत रहे हैं, शोध का विषय है। इन अफसरों को अभयदान देने के प्रयास  आरपी राय: खंडवा सर्किल में पदस्थ सीसीएफ आर पी राय के खिलाफ 10 जून 2019 को आरोप पत्र जारी हुआ था। आरोप था कि वन मंडल इंदौर के अंतर्गत वन परीक्षेत्र चोरल में बड़े पैमाने पर अवैध कटाई हुई थी। जांच के दौरान राय अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असफल रहे। इसके कारण 6 लाख 93 हजार 361 रुपए की राजस्व हानि हुई थी। अभी इनसे वसूली नहीं हुई है। मामला विभाग में ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। राय अगले मई महीने सेवानिवृत्त हो गए। यही नहीं, विभागीय मंत्री की विशेष कृपा होने के कारण इनसे छह लाख 93 हजार की वसूली नहीं हो पाई। एपीएस सेंगर: बालाघाट सर्किल में पदस्थ सीसीएफ एपीएस सेंगर के खिलाफ 24 अगस्त 2022 को आरोप पत्र जारी हुआ। मामला तब का है, जब वे टीकमगढ़ के डीएफओ हुआ करते थे। इन पर आरोप है कि भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया। खरीदी में गड़बड़ी हुई। इनके खिलाफ आरोपपत्र भी बन गया परंतु  प्रशासन-1 शाखा ने उदारता दिखाते हुए शो कॉज नोटिस जारी कर उन्हें बालाघाट सर्किल में प्राइम पोस्टिंग दे दी गई है। दुर्भाग्य जनक पहलू यह है कि विभाग ने इनके खिलाफ कार्रवाई करने की अद्यतन स्थिति से शासन को अवगत नहीं कराया है। यही नहीं, बल्कि सेंगर को बालाघाट सर्किल की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई।   एम काली दुर्रई:  1996 बैच के आईएफएस अधिकारी एम काली दुर्रई प्रतिनियुक्ति पर हॉर्टिकल्चर में पदस्थ रहे। यहां पदस्थ रहते हुए दुर्रई ने किसानों की सब्सिडी देने के मामले में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की। इसके चलते उन्हें कमिश्नर हॉर्टिकल्चर पद से हटाया गया। मूल विभाग वन विभाग में लौटते ही उनके खिलाफ  विभागीय जांच शुरू की गई। प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के जांच अफसर सीके पाटिल को जांच के लिए 2 साल का पर्याप्त समय मिलने के बाद भी विभागीय जांच कंप्लीट नहीं कर पाए और वे रिटायर हो गए। राजनीतिक दबाव के चलते विभाग के अफसर उनके खिलाफ कोई बड़ी कार्यवाही नहीं कर पाए। सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले देयकों का भुगतान भी उदारता से किया जा रहा है।    डीके पालीवाल: सीसीएफ शिवपुरी के पद से रिटायर हुए हैं। इनके पेंशन के भुगतान पर आपत्ति की गई है, क्योंकि धार और फिर गुना डीएफओ पद रहते हुए आर्थिक गड़बड़ी कर शासन को नुकसान पहुंचाया है। धार में पदस्थ रहते हुए पालीवाल ने एक रेंजर का समयमान वेतनमान का फिक्सेशन अधिक कर दिया। जब मामला संज्ञान में आया, तब तक पालीवाल वहां से स्थानांतरित हो गए थे। विभाग ने अतिरिक्त भुगतान के गए राशि वसूलने के नोटिस सेवानिवृत्त रेंजर को भेजा तो कोर्ट ने उस के पक्ष में फैसला देते हुए फिक्सेशन करने वाले अफसर पालीवाल से ₹300000 की वसूली करने के आदेश दिए। इसी प्रकार गुना में कैंपा फंड की राशि से गड़बड़झाला करने का भी आरोप है। इनके खिलाफ पूर्व एसीएस वन अशोक वर्णवाल ने आरोप पत्र जारी करने के निर्देश दिए थे। वर्णवाल के निर्देश पर विभाग ने उनके खिलाफ आरोप पत्र तैयार किया किंतु बड़े अफसरों के चहेते होने की वजह से आरोप-पत्र को शो-कॉज नोटिस परिवर्तित कर दिया गया है। बजट शाखा ने उनके पेंशन जारी करने पर आपत्ति लगाई है किंतु शीर्ष अफसरों ने शो-कॉज नोटिस जारी कर उनके पेंशन और समस्त देयकों के  भुगतान के रास्ते प्रशस्त कर दिए।  प्रभात कुमार वर्मा : 2001 बैच के आईएफएस अधिकारी प्रभात कुमार वर्मा जनवरी में सेवानिवृत्त हुए हैं। वे जब 2020 में वन विकास निगम में पदस्थ थे तब आर्थिक गड़बड़ियों के चलते उन्हें आरोप पत्र जारी किया गया। यही नहीं, विभाग ने 4 जनवरी 2022 को वन विकास निगम के एमडी को पत्र लिखकर गड़बड़ियों से संबंधित प्रचलित नस्ती उपलब्ध कराने के निर्देश दिए किंतु नस्ती उपलब्ध नहीं कराने के कारण उनके मामले में निर्णय नहीं हो सका। वे सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। जांच लंबित रहते हुए उनके देयकों के भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू है। वर्मा पर आरोप यह भी है कि वे अपने मातहत अधिकारियों के खिलाफ दुर्भावना से कार्रवाई करते हैं। इनके शिकार खंडवा डीएफओ देवांशु शेखर, सुश्री नेहा श्रीवास्तव, अधर गुप्ता और एसडीओ विद्या भूषण मिश्रा हो चुके हैं. इनके द्वारा दुर्भावना से कार्रवाई करने की वजह से मिश्रा आईएफएस की दौड़ में पीछे रह गए हैं। दुर्भावना से की गई कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज भी बड़े अधिकारियों को सौंपे हैं। उन पर  लघु वनोपज संघ के अंतर्गत अधोसंरचना विकास के मद में भी गड़बड़ी करने के आरोप हैं।  बृजेंद्र श्रीवास्तव: छिंदवाड़ा पूर्व में पदस्थ डीएफओ बृजेंद्र श्रीवास्तव के खिलाफ 21 जुलाई 2022 को नियम दस के तहत आरोप पत्र जारी किया गया था। इन पर आरोप है कि स्थानांतरण नीति के विरुद्ध जाकर कर्मचारियों के तबादले किए। आरोप पत्र का जवाब अभी तक नहीं दिया गया है। इनका तबादला वन मंत्री शाह की सिफारिश पर ग्वालियर से पूर्व छिंदवाड़ा वन मंडल जैसे महत्वपूर्ण वन मंडल में कर दिया गया है। भारत सिंह बघेल: भोपाल मुख्यालय में पदस्थ भारत सिंह बघेल को आरोप पत्र 22 मई 2006 को जारी किया गया था। बघेल ने अपने प्रभाव अवधि के दौरान पूर्व लांजी क्षेत्र में प्रभार अवधि में राहत कार्य अंतर्गत कार्यों … Read more

कैंपा फंड के फायर प्रोटेक्शन मद से उपकरणों की खरीदी में गड़बड़ झाला

Jhala: Irregularities in purchasing equipment from fire protection item of Campa Fund. उदित नारायण भोपाल। जंगल महकमे में कैंपा फंड से फायर प्रोटक्शन के लिए 11 करोड़ रूपए रिलीज किए गए हैं। 11 करोड़ रूपया रिलीज होते ही सप्लायरों का एक सिंडिकेट सक्रिय हो गया है। इस सिंडिकेट में वित्तीय सेवा के एक अधिकारी के शामिल होने की खबर विभाग में सुर्खियों में है। हालांकि शासन की ओर से अधिकारी की पदस्थापना अभी मंत्री स्टाफ में नहीं हो पाई है। बावजूद इसके, इनके द्वारा फील्ड में पदस्थ वन संरक्षक और डीएफओ पर दबाव बनाया जा रहा है। दिलचस्प पहलू यह है कि सिंडिकेट के संचालक कर्ता धार, अलीराजपुर और झाबुआ से जुड़े हैं। फायर प्रोटेक्शन के लिए कैंपा फंड से 11 करोड़ रूपया रिलीज किए गए हैं, क्योंकि 15 मार्च तक खर्च किया जाना है। 11 करोड़ रूपये से ब्रशयुक्त कटर, ब्लोअर, अग्निरोधी किट  और पानी की जैरीकेन की खरीदी होनी है। इन उपकरणों मार्केट रेट से दुगना और डेढ़ गुना दाम पर हो रही है। मसलन, ब्रशयुक्त कटर की बाजार दर 12000 से लेकर 14000 रुपए तक है किंतु विभाग 45000 रुपए में खरीद रहा है। इसी प्रकार ब्लोअर की बाजार दर अधिक से अधिक 14000 रुपए है। जबकि विभाग ₹60000 प्रति ब्लोअर की दर से भुगतान करने जा रहा है। 5000से ₹6000 में मिलने वाला अग्निरोधी किट वन विभाग ₹12000 में खरीद रहा है। सूत्रों का कहना है यह है कि यह डर इसलिए निर्धारित किए गए हैं क्योंकि अधिकारियों का सिंडिकेट संचालक कर्ता द्वारा सप्लायरों से 15% कमीशन की डिमांड किये जाने की खबर है। सूत्रों ने बताया कि वन मंत्री के नाम से सिंडिकेट में शामिल अनाधिकृत अफसर फील्ड के अफसरों (डीएफओ- सीएफ) को धमकाया जा रहा है कि वर्क ऑर्डर इन्हीं फर्मों को ही दिया जाय। यह फॉर्म में भी सिंडिकेट में शामिल सदस्यों की ही है। सूत्रों की माने तो  खंडवा सतना और दक्षिण शहडोल के अलावा किसी भी अधिकारी ने टेंडर नहीं बुलाए हैं।  एक सीनियर अधिकारी की सलाह है कि विभाग में जो भी खरीदी हो उसके टेंडर अथवा बिड विभाग की साइट पर अपलोड किए जाएं। इससे अधिक से अधिक फर्म पार्टिसिपेट कर सकेंगी और विभाग को वित्तीय फायदा भी होगा। फील्ड के अवसर दबाव में आकर बीट के द्वारा खरीदी की जाती है, जिसकी जानकारी सिर्फ सिंडिकेट के सदस्यों को ही रहती है। फायर प्रोटक्शन के लिए खरीदी होने वाली उपकरण  नाम                   संख्या            मद (करोड़)  ब्रशयुक्त कटर      4400            1.98  ब्लोअर                440             2.64  अग्निरोधी किट    4400           5.28 पानी जैरीकेन       4400           1.10

वन विभाग की टीम पर लाठी-डंडों और पत्थर से हमला, 3 वनकर्मी घायल

Forest department team attacked with sticks and stones, 3 forest workers injured राजगढ़ में वन विभाग की टीम पर लाठी-डंडों और पत्थर से हमला हुआ है। जिसमें तीन वनकर्मी घायल हो गए हैं। किशनगढ़ में कुछ लोगों ने वन विभाग की जमीन पर कब्जा कर लिया था। राजगढ़ ! जिले के किशनगढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने ग‌ई वन विभाग की टीम पर मंगलवार को हमला हो गया। हमला करने वालों ने कुल्हाड़ी, लाठी-डंडे और पत्थरों से अतिक्रमण हटाने ग‌ई टीम पर हमला कर दिया। हमलें में तीन वनकर्मीयों को चोटें आई हैं। वन विभाग की शिकायत पर कोतवाली थाने में तीन लोगों पर विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। राजगढ़ रेंज ऑफिसर गौरव गुप्ता ने बताया कि वन विभाग के किशनगढ़ क्षेत्र की डेढ़ हेक्टेयर जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया था। कब्जा करने वालों ने वन विभाग की जमीन पर लकड़ी के खंभे गाड़कर तार फेसिंग कर दी थी। जिसकी सूचना मिलने पर मंगलवार दोपहर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। कब्जा करने वालों ने इसका विरोध किया। उन्होंने टीम पर लाठी-डंडे, कुल्हाड़ी और पत्थर से हमला कर दिया। टीम ने अपनी जान बचाते हुए पुलिस को सूचना दी। कुछ देर बाद 20 से 25 पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। पुलिस को देखकर हमलावर मौके से भाग निकले। तीन वनकर्मीयों को आई चोंटे इस घटना में में तीन वनकर्मीयों को पत्थर लगे हैं। उन्हें गंभीर चोट नहीं आई है। पुलिस की मौजूदगी में टीम ने अतिक्रमणहटाने की कार्रवाई की। इसके बाद राजगढ़ थाने पहुंचे और हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज करवाया। पुलिस ने शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने पर आरोपी मोहन उर्फ बंटी गुर्जर, भारत गुर्जर, राजू गुर्जर पर विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है।

अग्निवीर की तर्ज पर प्रदेश सरकार लायेंगी वनवीर भर्ती योजना

On the lines of Agniveer, the state government will bring Vanveer recruitment scheme. भोपाल। जंगल और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए मध्य प्रदेश सरकार सेना के अग्निवीर की तर्ज पर मध्य प्रदेश में वन वीर की भर्ती करेगी। इसके लिए भर्ती नियम बना लिए गए हैं। इनमें वन्य जीवों की सुरक्षा का खास ध्यान रखने के लिए बाघ मित्र, चीता मित्र और हाथी मित्र नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत जंगल के अंदर और उसके आस-पास रहने वाले ग्रामीण, वनवासी और आदिवासी युवाओं की पांच साल के लिए भर्ती की जाएगी। हर वर्ष उनका प्रदर्शन देखकर उनकी सेवा में वृद्धि की जाएगी। पांच साल तक उन्हें मानदेय भी दिया जाएगा। पांच साल बाद भर्ती किए गए कुल वनवीरों में से अच्छा प्रदर्शन करने वाले 30 प्रतिशत लोगों को वन रक्षक के पद पर नियमित नियुक्ति दी जाएगी।वहीं चीतों के प्रति जागरूकता लाने और ग्रामीणों में उनके प्रति डर को समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर ‘चीता मित्र’ भी बनाए गए हैं। वे स्थानीय लोगों को चीतों की प्रवृति से अवगत करा कर उन्हें चीताें की रक्षा कर संरक्षण के लिए जागरूक करते हैं। अब वन वीर भर्ती में चीता मित्रों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता, क्योंकि वे जंगल को अच्छे से समझते हैंवन वीर भर्ती की व्यवस्था इसलिए की जा रही है क्योंकि स्थानीय समुदाय के युवा जंगल को अच्छे से पहचानते हैं और जंगल एवं वन्य प्राणियों की भली भांति रक्षा भी कर सकते हैं। वन रक्षक के पदों पर सीधी भर्ती में कई बार शहरी युवा भी आ जाते हैं, जिन्हें जंगलों में रहने की आदत नहीं होती है। वन एवं वन्यप्राणियों के संरक्षण के लिए स्थानीय युवा मददगार साबित होते हैं तथा इससे उन्हें रोजगार के भी नए अवसर मिलेंगे हर साल की जाएगी पांच सौ से अधिक भर्तियां वन विभाग की तैयारी है कि वन वीर योजना के तहत हर साल मध्‍य प्रदेश में पांच सौ से अधिक भर्तियां की जाएगी। इन्हें 15 से 20 हजार रुपये मासिक मानदेय भी दिया जाएगा। लोकसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार यह प्रक्रिया शुरू कर सकती है। वन वीर भर्ती के लिए शारीरिक मापदंड और व्यवहारिकता को प्राथमिकता में रखा जाएगा। साथ ही न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता में 10वीं या 12वीं उत्तीर्ण को प्राथमिकता दी जा सकती है। एक नजर मेंकुल वनरक्षक के पद: 20,670 वर्तमान में सेवाएं दे रहे वनरक्षक: 16,875 खाली पद: 3,795

बांधवगढ़ में लगातार बाघों की मौत फिर भी सरकार मौन क्यों?

Continuous death of tigers in Bandhavgarh, yet why is the government silent? उमरिया । विश्व प्रसिद्ध और बाघ दर्शन के लिए मशहूर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक बार फिर वन्य प्राणी प्रेमियों के लिए बुरी खबर सामने आई है। जिसमें एक नर बाघ शावक की मौत हो जाने की जानकारी मिली है। प्रबंधन के द्वारा मृत बाघ शावक का पीएम आदि कराकर टाइगर रिजर्व की वरिष्ठ अधिकारियों और डॉक्टरों की मौजूदगी में एनटीसीए की गाइडलाइन के तहत उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया है। दरअसल बांधवगढ़ में लगातार बाघों की मौत से जहां प्रबंधन कटघरे में है।वहीं बीते दिसंबर माह में दर्जन भर बाघों की असमय मौत हो जाना प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है। इस बार भी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर बफर परिक्षेत्र अंतर्गत बरबसपुर बीट के कक्ष क्रमांक 125 में एक नर बाघ शावक मृत अवस्था में गश्ती दल को मिला है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के प्रबंधन की ओर से जानकारी दी गई है कि अमृत न भाग सावन के आसपास एक दूसरे बैग की पगमार्क मिले हैं इसके अलावा मृत शावक को घसीटने के भी निशान दिखाई दे रहे हैं। मृत शावक के शरीर के सभी अंग मौजूद हैं। इसके बाद मृत शावक का डॉक्टर नितिन गुप्ता और बी बी एस मार्को के द्वारा पोस्टमार्टम कर जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजने सैंपल एकत्रित किए गए हैं। मृत शावक का पीएम उपरांत बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की वरिष्ठ अधिकारियों एनटीसीए के मेम्बर की मौजूदगी और एनटीसीए गाइडलाइन के तहत अंतिम संस्कार किया गया है। बताया गया कि नर बाघ शावक की मौत प्रथम दृष्ट्या किसी दूसरे बाघ से आपसी संघर्ष के कारण होना प्रतीत होता है।

कूनो में चीते की मौत नामीबिया से लाए एक और चीते ने तोड़ा दम

भोपाल। मॉनीटरिंग टीम को चीता शौर्य अचेत अवस्था में मिला था। कूनो में अब तक दस चीतों की मौत हो चुकी है, इनमें सात चीते और तीन शावक शामिल हैं। लॉयन प्रोजेक्ट के डायरेक्टर ने बताया कि आज करीब सवा तीन बजे चीता शौर्य की मौत हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत का खुलासा होगा। अब तक 7 चीते और 3 शावक की मौत कूनो में अब तक चीते और शावक को मिलाकर यह 10वीं मौत है। इनमें 7 चीते और 3 शावक हैं। प्रोजेक्ट चीता में सितंबर 2022 में आठ चीतों को नामीबिया से लाया गया था। इसके बाद फरवरी 2023 में 12 और चीतों को दक्षिण अफ्रीका से लाया गया था। नामीबिया से लाया गया चीता शौर्य अपने सगे भाई गौरव के साथ आया था। दोनों हमेशा एकसाथ रहते थे, साथ शिकार करते थे। कुछ समय पहने दोनों की अग्नि और वायु चीते से भिड़ंत हुई थी। वे दोनों भी सगे भाई थे। इसमें अग्नि चीता गंभीर रूप से घायल हो गया था। इसके बार चीतों को बाड़े में बंद कर दिया था। + कब-कैसे हुई चीतों की मौत… 26 मार्च 2023: साशा की किडनी इंफेक्शन से मौत  नामीबिया से लाई गई 4 साल की मादा चीता साशा की किडनी इंफेक्शन से मौत हो गई। वन विभाग ने बताया कि 15 अगस्त 2022 को नामीबिया में साशा का ब्लड टेस्ट किया गया था, जिसमें क्रियेटिनिन का स्तर 400 से ज्यादा था। इससे ये पुष्टि होती है कि साशा को किडनी की बीमारी भारत में लाने से पहले ही थी। साशा की मौत के बाद चीतों की संख्या घटकर 19 रह गई। 27 मार्च : ज्वाला ने चार शावकों को जन्म दिया साशा की मौत के अगले ही दिन मादा चीता ज्वाला ने चार शावकों को जन्म दिया। ज्वाला को नामीबिया से यहां लाया गया था। कूनो नेशनल पार्क में इन शावकों को मिलाकर चीतों की कुल संख्या 23 हो  गई। 23 अप्रैल : उदय की दिल के दौरे से मौत साउथ अफ्रीका से लाए गए चीते उदय की मौत हो गई। शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में बताया गया कि उदय की मौत कार्डियक आर्टरी फेल होने से हुई। मध्यप्रदेश के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जेएस चौहान ने बताया कि हृदय धमनी में रक्त संचार रुकने के कारण चीते क्की मौत हुई। यह भी एक प्रकार का हार्ट अटैक है। इसके बाद कूनो में शावकों सहित चीतों की संख्या 22 रह गई।  9 मई : दक्षा की मेटिंग के दौरान मौत दक्षा को दक्षिण अफ्रीका से कूनो लाया गया था। जेएस चौहान ने बताया कि मेल चीते को दक्षा के बाड़े में मेटिंग के लिए भेजा गया था। मेटिंग के दौरान ही दोनों में हिंसक इंटरेक्शन हो गया। मेल चीते ने पंजा मारकर दक्षा को घायल कर दिया था। बाद में उसकी मौत हो गई। इसके बाद कूनो में शावकों सहित चीतों की संख्या 21 रह गई। 23 मई : ज्वाला के एक शावक की मौत मादा चीते ज्वाला के एक शावक की मौत हो गई। जिएस चौहान ने बताया कि ये शावक जंगली 31 परिस्थितियों में रह रहे थे। 23 मई को श्योपुर में भीषण गर्मी थी। तापमान 46-47 डिग्री सेल्सियस था। दिनभर गर्म हवा और लू चलती रही। ऐसे में ज्यादा गर्मी, डिहाइड्रेशन और कमजोरी इनकी मौत की वजह हो सकती है। इसके बाद कूनो में शावकों सहित चीतों की संख्या 20 रह गई। 25 मई : ज्वाला के दो और शावकों की मौत पहले शावक की मौत के बाद तीन अन्य को चिकित्सकों की देखरेख में रखा गया था। इनमें से दो और शावकों की मौत हो गई। अधिक तापमान होने और लू के चलते इनकी तबीयत खराब होने की बात आमने सामने आई थी। इसके बाद कूनो में एक शावक सहित 18 चीते बचे। 11 : मेल चीता तेजस की मौत चीते तेजस की गर्दन पर घाव था, जिसे देखकर अनुमान लगाया गया कि चीतों के आपसी संघर्ष में उसकी जान गई है। इस मौत के बाद कूनो में 17 चीते बचे थे। 14 जुलाई : मेल चीता सूरज की मौत चीते सूरज की गर्दन पर भी घाव मिला। कूनो प्रबंधन का अनुमान है कि चीतों के आपसी संघर्ष में ही सूरज की जान गई है। इससे नेशनल पार्क में चीतों की संख्या घटकर 16 रह गई थी। 2 अगस्त : मादा चीता धात्री की मौत कूनो परिसर में ही मादा चीता धात्री का शव मिला था। पोस्टमॉर्टम में इंफेक्शन से मौत की वजह सामने आई थी। धात्री की मौत होने के बाद चीतों की संख्या 15 रह गई थी। 03 जनवरी : आशा ने तीन शावक जन्मे इसी साल 03 जनवरी को श्योपुर जिले के कूनो बेशनल पार्क से बड़ी खुशखबरी आई। मादा चीता आशा ने तीन शावकों को जन्म दिया। कूनो में अब 4 शावक समेत कुल 18 चीते हो गए थे। नामीबिया से कूनो नेशनल पार्क लाई गई मादा चीता आशा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह नाम दिया था।  16 जनवरी 2024: नर चीते शौर्य की मौत नामीबिया से 17 सितंबर 2022 को कूनो नेशनल पार्क लाए गए नर चीते शौर्य ने दम तोड़ा। अब यहां 4 शावक समेत 17 चीते बचे हैं।

कलेक्टर-एसपी और सेना अफसरों के लिए निशुल्क सफारी करने नियमों में करें प्रावधान

Make provision in the rules for free safari for Collector-SP and Army officers भोपाल। वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1974 के नियम 34 में संशोधन की प्रक्रिया चल रही है। इसी कड़ी में विभाग ने टाइगर रिजर्व के सभी फील्ड डायरेक्टरों से सुझाव मांगे गए हैं। पन्ना नेशनल पार्क के क्षेत्र संचालक विजेंद्र झा ने सुझाव दिया है कि कलेक्टर-एसपी, न्यायालयीन अधिकारियों और सेना के अफसरों को टाइगर रिजर्व में निशुल्क सफारी करने के लिए नियम 34 में प्रावधान किया जाए। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी को लिखे पत्र में फील्ड डायरेक्टर विजेंद्र झा ने कहा है कि पार्क सफारी में आने वाले न्यायालयीन अधिकारी, सेना के अधिकारी, जिला प्रशासन एवं पुलिस अधिकारी निःशुल्क प्रवेश की अपेक्षा रखते हैं, इस सम्बन्ध में भी नियमों में प्रवाधान किया जाना आवश्यक है। झा ने पीसीसीएफ (वाइल्डलाइफ) को स्मरण करवाया है कि टाइगर फाउण्डेशन सोसायटी की बैठक के दौरान माननीय वन मंत्री द्वारा जन प्रतिनिधियों को रियायती पास दिये जाने की घोषणा की गई थी, इसका उल्लेख भी नियमों के उल्लेख किये जाने का कष्ट करें। पांडवफॉल के लिए ₹50 शुल्क करें झा ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि नवीन नियम प्रारूप में पन्ना टाइगर रिजर्व के विशिष्ट स्थल पाण्डवफाल हेतु दर निर्धारित नहीं की गई है। प्रारूप नियम की तालिका 02 के वर्ग 03(ग) में दर्शायी शुल्क रु० 100/- अधिक प्रतीत होती है। वर्ष 2021 में जारी अधिसूचना में प्रवेश दर रु0 25/- थी। अतः पाण्डवफाल हेतु प्रतिव्यक्ति प्रवेश शुल्क की राशि रु० 50/- किये जाने का सुझाव है।

प्रेरकों के साथ बच्चों ने की जंगल की सैर, देखी ( मै भी बाघ ) डाक्यूमेंट्री

Children took a trip to the jungle with the inspirations, watched the documentary (Main Bhi Bagh) हरिप्रसाद गोहे आमला ! स्कूली क्षात्रो को वन, वन्यप्राणी एवं पर्यावरण के संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकाशित करने के उद्देश्य को लेकर मध्य प्रदेश वन विभाग एवं मध्य प्रदेश ईकोपर्यटन विकास बोर्ड द्वारा दिनांक 11 जनवरी 2024 को भूमका देव (सारणी-बेलोण्ड रोड), आमला में वनसंरक्षक वनवृत्त बैतूल एवं वनमंडल अधिकारी दक्षिण बैतूल, उ.व.म.अ. आमला (सा.) के कुशल मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में वन परिक्षेत्र आमला अंतर्गत अनुभूति वर्ष 2024 कार्यक्रम का आयोजन आयोजित किया गया।कार्यक्रम में अशासकीय मदरलैंड पब्लिक अकादमी स्कूल आमला के 126 छात्र/छात्रों ने भाग लिया । आयोजित शिविर में छात्रों ने प्रदेश के अनुभूति प्रेरक श्री के.एल. चंदेलकर सहित वन विभाग के 3 अन्य प्रेरकों के साथ एक प्राकृतिक सैर में हिस्सा लिया, जहाँ उन्हें पेड़ों और पक्षियों की विविध प्रजातियों के बारे में जानकारी दी गई । इस दौरान बच्चों को अनसिले कपड़े से बैग बनाने के साथ साथ “मैं भी बाघ” थीम पर डाक्युमेंट्री दिखाई गई । वहीं छात्र/छात्राओं के लिए चित्रकला, रंगोली, और क्विज प्रतियोगिता का आयोजन भी वन विभाग द्वारा आयोजित किया गया । शिविर के दौरान मुख्य अतिथि बतौर गणेश यादव जनपद पंचायत अध्यक्ष आमला, भाजपा किसान नेता हरी यादव , सुखराम कुमरे सभापति जैवविविधता वन समिति के साथ सुखदेव यादव सरपंच, रामाधार यादव सरपंच,भगवंतसिंह रघुवंशी जिला मंत्री भाजपा अतिथि के रूप में शामिल हुये । प्रतियोगिता के विजेताओं को मुख्य अतिथियों द्वारा प्रथम/द्वितीय/तृतीय पुरस्कार वितरण किया गया। कार्यक्रम में “मैं भी बाघ” थीम गान का गायन किया गया एवं प्रकृति और वन्य जीव संरक्षण की प्रतिज्ञा के साथ अनुभूति कार्यक्रम सफलतापूर्वक समापन हुआ ।

वनविभाग नहीं कर रहा मजदूरी का भुगतान,रेंजर और एसडीएफओ को सुनाई अपनी पीड़ा

वनविभाग ने मजदूरों से खुदाए चोपनी बिट में गड्डे भुगतान के लिए लगा रहे विभाग के चक्कर Forest department is not paying wages भैंसदेही ! दक्षिण (सामान्य) उप वन मंडल भैंसदेही के मजारवनी एवम चोपनी क्षेत्र में मजदूरी करने वाले मजदूर अपनी समस्या लेकर मुख्यालय के वन विभाग पहुंचे जहा उन्होंने रेंजर अमित चौहान को मजदूरी का भुगतान नहीं होने से आ रही समस्या से अवगत कराया। उपस्थित मजदूरों ने बताया की उनके द्वारा चोपनी बिट में बिट अधिकारी के कहने पर गड्ढा खुदाई का काम किया गया। परंतु उन्हें लगभग 2 से 3 माह हो चुके है मजदूरी का भुगतान नहीं मिल पाया है। एसडीएफओ कार्यालय से महीनो आगे नहीं बढ़ती फाइलें….?मांजरवानी चौपनी ग्राम के मजदूर विभाग पहुंचकर एसडीएफओ पांडे जी से भी अपनी मजदूरी की समस्या को लेकर मिले मजदूरों ने बताया की काफी इंतजार के बाद साहब अपने सरकारी क्वाटर से बाहर आए उसके बाद हम मजदूरों ने उनको भी अपनी मजदूरी की समस्याएं से अवगत कराया। उन्होंने हमे जल्द भुगतान कराने का आश्वासन दिया। तो वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी में सामने आया की दक्षिण (सामान्य) उप वन मंडल का कोई भी भुगतान संबंधित या अन्य कार्य एसडीएफओ कार्यालय से होकर ही जिले को जाता है। जानकारी में यह भी सामने आया की एसडीएफओ कार्यालय में महीनो फाइलों को रोककर रखा जाता है। आगे उच्च विभाग में नहीं भेजी जाती। अब क्यों नही भेजी जाती , कितनी पेंडेंसी एसडीएफओ कार्यालय में पढ़ी है। क्या इन मजदूरों की फाइल भी एसडीएफओ कार्यालय में पेंडिंग है । प्राप्त जानकारी में कितनी सत्यता है जिसकी पुष्टि के लिए जब दक्षिण (सामान्य) उप वन मंडल भैंसदेही परिक्षेत्र अधिकारी एसडीएफओ देवानंद पांडे को जब कॉल पर संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करनी चाही तो महोदयजी ने फोन रिसीव नहीं किया। और न ही खबर का समय होते तक कॉल बैक कर संपर्क किया। बता दे की पूर्व वन परिक्षेत्र अधिकारी श्री बसोड़ द्वारा हमेशा जब भी कार्य में व्यस्त होने के चलते यदि कोई कॉल रिसीव नहीं किया जाता था तो वह जिम्मेदारी से कॉल बैक कर संपर्क साधा करते थे। जब तक वह मुख्यालय पर रहे हमेशा उन्होंने एक जिम्मेदार अधिकारी होने का परिचय दिया है। इनका कहना हैचोपानी बिट में पौधा रोपण के लिए गद्दे खोदने और तार फिनिशिंग का कार्य किया है, दो माह से भुगतान नहीं मिला बड़ी समस्याएं आ रही है। 50 से अधिक मजदूरों ने मजदूरी का काम किया है। इसलिए हम सभी मजदूर भैंसदेही आए है,साहब से मिलने। गुड्डू कास्देकरमजदूर साहब के कहने पर चोपनी में गड्डे खोदने के काम पर गए थे, दो महीने हो गए पैसे नही मिले। साहब से उसके बारे में ही पूछने आए है। घर चलाने में बहुत परेशानी हो रही है। रामरती बाईमजदूर मांजरवानी मजारवानी,चोपनी ग्राम के मजदूर अपनी मजदूरी की समस्या लेकर आए थे। हमारे द्वारा समय पर उनके भुगतान के लिए 28 दिसंबर 2023 को ही समस्त बिल बाउचर बना कर उच्च अधिकारियों को भेज दिए थे।अब भुगतान क्यों नही हुआ उसकी जानकारी फिलाल मुझे नही है।मैं अपने उच्च अधिकारियों को इन ग्रामीण मजदूरों की समस्या से अवगत कराकर मजदूरों को जल्द भुगतान हो उसके लिए प्रयास करूंगा। अमित चौहानरेंजर दक्षिण (सामान्य) उप वन मंडल भैंसदेही

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व , गहरी खाई में बाघ शावक का कंकाल मिला

Bandhavgarh Tiger Reserve skeleton of tiger cub found in deep ditch बाघ शावक का कंकाल मिला, संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से प्रबंधन चिंता में उमरिया ! बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बुधवार को गहरी खाई में बाघ शावक का कंकाल मिला है। उसकी संदिग्ध मौत को लेकर प्रबंधन में चिंता है। बताया जा रहा है कि करीब 25 दिन पहले ही शावक की मौत हो गई थी। उमरिया के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में फिर बाघ का कंकाल मिला है। संदिग्ध परिस्थितियों में बाघ शावक की मौत से प्रबंधन चिंता में है। माना जा रहा है कि 25 दिन पहले शावक की मौत हुई है।उमरिया जिले के बांधवगढ़ में लगातार बाघों की संख्या बढ़ रही है तो वहीं तेजी से कम भी होती हुई नजर आ रही है। प्रबंधन चाहे कितने भी दावे क्यों न कर ले, लेकिन वह ट्रैप कर पाने में नाकाम साबित होता नजर आ रहा है। पैदा होने से लेकर बड़े होने तक चारों तरफ कैमरे को लगाकर बाघ के बच्चों की निगरानी की जाती है, लेकिन फिर भी बाघ के बच्चे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जहां उसका अब कंकाल मिला है। बता दें कि बुधवार के दिन कैमरा ट्रैप को लगाते समय गहरी खाई में बाघ शावक का कंकाल देखा गया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र की पतौर परिक्षेत्र अंतर्गत चिल्हारी बीच के आर 421 के कुशवाहा नाला के समीप यह कंकाल मिला है। प्रबंधन की मानें तो यह कंकाल देखकर उन्हें लग रहा है कि यह लगभग 25 दिन पुराना कंकाल है। जहां किसी वजह से उसकी मौत हो गई है। हालांकि प्रबंधन अब पूरे मामले की जांच-पड़ताल कर रहा है।

गांधी सागर अभयारण्य में विदेश से आएंगे चीते.

In Gandhi Sagar Wildlife Sanctuary, cheetahs will be brought from abroad. गांधी सागर अभयारण्य में विदेश से आएंगे चीते, 28 किमी क्षेत्र में फेंसिंग का काम पूरा करने में जुटा वन विभाग – फरवरी में चीतों के लिए अभयारण्य पूरी तरह तैयार हो जाएगा, जल्द निर्णय करेगी केंद्र सरकार  उदित नारायण भोपाल। गांधी सागर अभयारण्य में 64 किमी को बाड़ा तैयार कर लिया गया है। यहां पर करीब 28 किमी की फेंसिंग का काम करीब करीब पूरा हो गया है। इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 17 से 18 करोड़ के आसपास है। अगले माह यानी फरवरी में चीतों के लिए अभयारण्य पूरी तरह तैयार हो जाएगा। इसके बाद चीतों को लाने का निर्णय होगा। केंद्र सरकार की किसी अफ्रीकी देश से चीते लाने को लेकर चर्चा चल रही है। गांधी सागर अभयारण्य का क्षेत्र छोटा है। इसलिए यहां पर 5 से 6 चीतों को ही लाकर रखा जाएगा।  बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सबसे पहले 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए आठ चीते श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में छोड़े गए थे। इसके बाद 18 फरवरी को 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते कूनो नेशनल पार्क में लाकर छोड़े गए। कूनो के जंगल में कुल 20 चीते लाए गए। इनमें से छह चीतों की मौत हो गई है। कूनो में अभी 14 बड़े चीते हैं और एक शावक है। वहीं, तीन नए शावकों ने अभी जन्म लिया है। कूनो नेशनल पार्क में एक-एक कर चीतों को खुले जंगल में छोड़ा जा रहा है। अब तक दो को ही खुले में छोड़ा गया है। कूनो नेशनल पार्क में चीता सफारी की भी शुरूआत कर दी गई। कूनो से शिफ्ट नहीं होंगे चीते – प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) असीम श्रीवास्तव ने बताया कि गांधी सागर अभयारण्य में कूना से चीते शिफ्ट नहीं किए जाएंगे। वहां विदेश से नए चीते लाए जाएंगे। इसका निर्णय केंद्र सरकार करेगी। अभयारण्य में तैयारी अंतिम दौर में है।

जांच एजेंसियां की सुस्त रफ्तार के चलते दागी अफसरों की पदोन्नत

Promotion of tainted officers due to slow pace of investigation agencies भोपाल ! भ्रष्टाचार के जीरो टॉलरेंस की भाजपा सरकार की नीति को प्रदेश की जांच एजेंसियां लोकायुक्त एवं ईओडब्ल्यू गंभीरता से नहीं ले रही है। जांच एजेंसियां की सुस्त रफ्तार के चलते दागी अफसरों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है, वहीं वे प्रमोशन और प्राइम पोस्टिंग से उपकृत किए जा रहें हैं। हाल ही में वन विभाग में जिस आईएफएस के खिलाफ लोकायुक्त संगठन में दो प्रकरण दर्ज है, उसे डीएफओ से वन संरक्षक के पद पर पदोन्नति दे दी गई। जबकि उनकी सुनवाई के दौरान लोकायुक्त विभाग द्वारा कोई कारवाई नहीं किए जाने पर अफसरों को फटकार लगा चुका है। इस मामले में अब नए वन मंत्री नागर सिंह चौहान ने प्रकरण की फाइल तलब की है।पिछले दिनों वन विभाग में ने 2010 बैच के आईएफएस अफसरों को डीएफओ से सीएफ के पद पर प्रमोट किया गया। प्रमोशन पाने वालों में शहडोल उत्तर में कार्यरत आईएफएस गौरव चौधरी भी है. अधिकृत जानकारी के अनुसार चौधरी के खिलाफ लोकायुक्त संगठन में आर-क्रमांक 216/16 और आर -क्रमांक 218/18 प्रकरण की सुनवाई चल रही है। लंबित प्रकरण होते हुए भी वन संरक्षक के पद पदोन्नत कर दिया गया। पदोन्नति करने के पहले विभागीय विजिलेंस शाखा ने गौरव चौधरी के खिलाफ आर्थिक गड़बड़ी एवं कदाचरण से समन्धित पूरी कुंडली बनाकर विभागीय पदोन्नति कमेटी के भेजा। बावजूद इसके, सीनियर अफसरों ने कमेटी को गुमराह करते हुए गौरव चौधरी को पदोन्नत करने की सिफारिश कर दी। इस आधार पर दाग़दार होने के बाद उन्हें प्रमोट कर दिया गया।लघु वनोपज में भी लंबित हैं मामलासीधी में पदस्थापना के दौरान लोकायुक्त की जांच झेल रहे उत्तर शहडोल के डीएफओ गौरव चौधरी एक बार फिर विवादों से घिर गए हैं। डीएफओ चौधरी ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना सीधे फर्म को भुगतान कर दिया गया। प्रधानमंत्री वन धन विकास योजना के अंतर्गत स्व सहायता समूह का गठन किया गया था। इस योजना के अंतर्गत कोई भी भुगतान इसी समूह के माध्यम से किया जाना था किंतु गौरव चौधरी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बाबू सतीश त्रिपाठी और रेंजर के जरिए मैकल ट्रेडिशनल ऑर्गेनिक फार्मर शहडोल और केके मेमोरियल समिति शाहपुरा को सीधे भुगतान कर दिया गया। इसी प्रकार डीएफओ द्वारा तेंदूपत्ता लाभांश राशि से कराए गए वृक्षारोपण का भुगतान भी समितियों के माध्यम से न कराकर रेंजर के माध्यम से कराया गया।

अभय कुमार पाटिल वन विभाग के नए मुखिया

Abhay Kumar Patil new head of forest department एक महीने के लिए ही होगा कार्यकालउदित नारायणभोपाल. राज्य शासन ने वन विकास निगम के प्रबंध संचालक अभय कुमार पाटिल को वन बल प्रमुख के पद पर पदस्थ करने के आदेश जारी कर दिया है। उनका कार्यकाल एक महीने का ही होगा। फरवरी में वन विभाग के नए मुखिया असीम श्रीवास्तव होंगे।राज्य शासन ने इस आशय का आदेश शुक्रवार को जारी किया है। उल्लेखनीय है कि मौजूदा वन बल प्रमुख आरके गुप्ता और लघु वनोपज संघ के एमडी पुष्कर सिंह 31 दिसम्बर को अवकाश रहने के कारण शुक्रवार को ही वरिष्ठ अधिकारियों को मुख्यालय के अफसरों ने दोनों वरिष्ठ अफसरों को भावभीनी विधाई दी। राज्य शासन ने अलग-अलग आदेश जारी कर सिंह परियोजना एवं चीता प्रोजेक्ट के सीसीएफ उत्तम कुमार शर्मा को एपीसीसीएफ के पद पर पदोन्नति करते हुए वहीं पदस्थ किया है। इसी प्रकार दो वन संरक्षक को मुख्य वन संरक्षक के पद पर पदोन्नति किया है। इनमें जे देव प्रसाद वर्किंग प्लान पेंच नेशनल पार्क और राज्य शासन में पदस्थ विशेष कर्तव्य अधिकारी अशोक कुमार के नाम शामिल है।दागी डीएफओ भी पदोन्नतिराज्य शासन ने शहडोल उत्तर में कार्यरत डीएफओ गौरव चौधरी के खिलाफ लोकायुक्त प्रकरण लंबित होते हुए भी वन संरक्षक के पद पदोन्नत किया। सूत्रों ने बताया कि गौरव चौधरी के प्रकरण को लेकर विभागीय पदोन्नति समिति के समक्ष वन विभाग के सीनियर अधिकारियों ने लोकायुक्त में जांच लंबित रहने संबंधित स्थिति स्पष्ट नहीं की थी। जबकि 2009 बैच कि आईएफएस और उज्जैन डीएफओ किरन बिसेन के मामले कई वर्ष पुराने जांच लंबित रहने की वजह से प्रमोशन पर ब्रेक लग गया है। वन संरक्षक के पद पर प्रमोट होने वालों में पन्ना नेशनल पार्क के उपसंचालक रिपुदमन सिंह भदौरिया, राज्य वन अनुसन्धान संस्थान जबलपुर में पदस्थ रविन्द्रमणि त्रिपाठी, और सिवनी उत्तर डीएफओ में पदस्थ बासु कनोजिया का नाम शामिल है।चार डीएफओ को मिला प्रवर श्रेणी वेतनमानराज्य शासन ने 2011 बैच के आए थे अधिकारियों को प्रमाण श्रेणी वेतनमान देने का आदेश जारी किया है। इनमें मीना कुमारी मिश्रा, अनुराग कुमार और सुश्री संध्या शामिल किया है। जबकि डीएफओ बुरहानपुर विजय सिंह को सशर्त प्रवर श्रेणी वेतनमान देने का आदेश जारी किया है. दरअसल विजय सिंह को 10 जून 20 को जारी विभागीय आदेश में कनिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड में इस शर्त के साथ नियुक्त किया गया था कि वे मिड कैरियर फेज-।।। कार्यक्रम में अनिवार्यतः भाग लेंगे। किंतु उनके द्वारा आज दिनांक तक मिड कैरियर फेज-।।। कार्यक्रम में भाग नहीं लिया गया है। अतः प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेकर प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर ही उनका वेतन निर्धारण करने की शर्त पर प्रवर श्रेणी वेतनमान स्वीकृत किया जाता है।

वन विहार उपचार हेतु लाये गये तेंदुआ शावक की मृत्यु.

Death of leopard cub brought for treatment in forest parkभोपाल। सामान्य वनमंडल अलीराजपुर की परिक्षेत्र जोबट के ग्राम छोटा उण्डवा से रेस्क्यू कर उपचार के लिए लाए गए तेंदुआ शावक की 28 एवं 29 दिसम्बर 2023 की दरम्यानी रात में उक्त तेंदुआ शावक की मृत्यु हो गई। प्रथम दृष्टया मृत्यु का कारण निमोनिया परिलक्षित हुआ है। मृत तेंदुआ शावक का सेम्पल एकत्रित कर परीक्षण हेतु स्कूल आफ वाईल्डलाईफ फॉरेंसिक हैल्थ जबलपुर भेजे गये है। पोस्टमार्टम उपरांत मृत नर तेंदुआ शावक का नियमानुसार वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में वन विहार के अधिकारियों तथा उपस्थित कर्मचारियों के समक्ष दाह संस्कार किया गया।वन विहार राष्ट्रीय उद्यान के वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. अतुल गुप्ता वन विहार एवं वन्यप्राणी चिकित्सक, वाईल्ड लाईफ एस.ओ.एस. डॉ. रजत कुलकर्णी, द्वारा संयुक्त रूप से पोस्टमार्टम किया गया। उल्लेखनीय है कि तेंदुआ शावक मां से बिछड़ गया था। मां से अलग होने के बाद रेस्क्यू कर अलीराजपुर डिपो परिसर में रखा गया। शावक की अत्यंत कमजोर स्थिति को देखते हुये वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार इसे को दिनांक 23.08.2023 को वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में उपचार एवं रखरखाव हेतु लाया गया था। तत्समय उक्त तेंदुआ शावक को क्वेरेंटाईन बाड़े में रखा जाकर उसका उपचार एवं रखरखाव किया गया। क्वेंरेटाईन अवधि पूर्ण होने के पश्चात उक्त शावक को स्वस्थ्य हालत में तेंदुआ हाउसिंग में स्थानांतरित किया गया था।

अग्रवाल और सुबुद्धि को नए साल में प्रमोट करने विभाग ने मांगे पी.पी.सी.एफ के चार नए पद.

The department to promote Agarwal and Subuddhi has sought four new positions for the PPCF in the New Year. उदित नारायणभोपाल। वन विभाग ने सेवानिवृत होने से पहले दो वरिष्ठ आईएफएस अधिकारियों को प्रमोशन देने के लिए राज्य शासन से पीसीसीएफ के चार पद मांगे है। इस आशय का प्रस्ताव मंत्रालय वल्लभ भवन में भेज दिया गया है। राज्य शासन 6 महीने के लिए अस्थाई तौर पर पीसीसीएफ के चार पद स्वीकृत कर सकता है। पीसीसीएफ के चार पद की मंजूरी मिलने के बाद 1991 बैच के दो अपर प्रधान मुख्यमंत्री वन संरक्षक (वन्य प्राणी) और एपीसीसीएफ (वित्त एवं बजट) पंकज अग्रवाल के अलावा 1992 बैच के एपीसीसीएफ (विकास) यूके सुबुद्धि तथा वन विकास निगम में पदस्थ एपीसीसीएफ सुदीप सिंह पीसीसीएफ के पद पर प्रमोट हो जाएंगे। विभाग ने प्रस्ताव बनाकर शासन को मंजूरी के लिए भेज दी है। 1991 बैच के एपीसीसीएफ पंकज अग्रवाल मार्च 24 में और 1992 बैच के यूके सुबुद्धि नवम्बर 24 में रिटायर हो जाएंगे। यहां यह भी उल्लेखनीय है केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय के अनुसार राज्य में पीसीसीएफ के निर्धारित मापदंड (2%) से अधिक पद पर कार्य कर रहें है। इसके पहले भी वन विभाग ने रिटायरमेंट के पहले के रमन को पीसीसीएफ पद पर प्रमोशन देने की मंशा से राज्य शासन ने पद मांगे थे, जिसे तत्कालीन मुख्य सचिव इक़बाल सिंह बैस ने ख़ारिज कर दिया था।आईएफएस के लिए डीपीसी टलीराज्य सरकार के गठन की प्रक्रिया के चलते 13 राज्य वन सेवा से आईएफएस अवार्ड के लिए 22 दिसंबर को प्रस्तावित पदोन्नति कमेटी की बैठक टल गई है। इस बैठक में 2009 बैच के राज्य वन सेवा के अधिकारी रामकुमार अवधिया को आईएफएस पद पर प्रमोट करने के लिए हरी झंडी मिलने की संभावना थी। कमेटी 2011 बैच के आशीष बांसोड़, विद्याभूषण सिंह, गौरव कुमार मिश्रा, तरुणा वर्मा, हेमंत यादव, सुरेश कोड़ापे, प्रीति अहिरवार, लोकेश निरापुरे, राजाराम परमार, करण सिंह रंधा और माधव सिंह मौर्य को आईएफएस अवार्ड के लिए हरी झंडी दे सकती है। गड़बड़ियों में उलझे रहने की वजह से 2011 बैच की डॉ कल्पना तिवारी और राजबेंद्र मिश्रा के नाम विचार नहीं किया जाएगा। हालांकि 13 अधिकारियों को आईएफएस अवार्ड देने के लिए 2011 बैच से 2013 बैच के करीब राज्य वन सेवा के 39 अफसरों के नाम पर मंथन होना था।

वन विभाग ने वनों की सुरक्षा के लिए मांगी एस.ए.एफ की तीन अतिरिक्त कंपनियां

The Forest Department requested three additional companies of the Special Armed Forces (S.A.F.) for the protection of forests. उदित नारायण भोपाल। राज्य के वन विभाग ने मंत्रालय में दिये एक उच्च स्तरीय प्रेजेन्टेशन में एसएएफ की तीन अतिरित कंपनियां मांगी हैं। वर्तमान में एसएएफ की तीन कंपनियां क्रमशः आठवीं वाहिनी छिन्दवाड़ा, 15 वीं वाहिनी इंदौर एवं 26 वीं वाहिनी गुना के 221 सशस्त्र अधिकारी एवं कर्मचारी वन क्षेत्र में पदस्थ हैं जिन्हें 14 संवेदनशील वनमंडलों में संलग्न किया गया है। चूंकि वनकर्मियों को बंदूक चलाने का अधिकार नहीं दिया गया है, इसलिये वन विभाग ने एसएएफ की तीन अतिरिक्त कंपनियों को देने की और मांग की है। इसी प्रकार, प्रेजेन्टेशन में वन अधिकारियों को पुलिस की तरह वाहनों में बीकन लाईन लाइट लगाने, वन्य प्राणी के हमले में जनहानि होने पर 12 लाख रुपये हर्जाना देने, वन कर्मचारियों को पुलिस की तरह 13 माह का वेतन देने, पौष्टिक आहार भत्ता देने एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पदस्थी पर पुलिस की तरह नक्सल भत्ता देने की भी मांग की है जिससे वन कर्मियों का मनोबल बढ़ सके।

दागी रेंजर को बचाने सीसीएफ और डीएफओ आमने- सामने.

CCF and DFO face off to save the Ranger. उदित नारायणभोपाल । एक दागी रेंजर को लेकर ग्वालियर सर्कल के सीसीएफ तोमर सिंह सूलिया और श्योपुर डीएफओ चंदू सिंह चौहान आमने-सामने आ गए है। डीएफओ दागी रेंजर के खिलाफ उनके नियम विरुद्ध कृत्य पर कार्यवाई चाहते है। जबकि सीसीएफ सूलिया की इच्छा है कि वह दाग़ रहित रिटायर हो जाए। रेंजर की सेवानिवृत इस माह है।वन विभाग में किसी भी अधिकारी हो या फिर कर्मचारी उनके विरुद्ध जांच कछुआ चाल से की जाती है। इसके कारण कई बार बिना किसी कार्यवाई से वह रिटायर भी जाते है। वर्तमान में सबलगढ़ के गेम रेंज में पदस्थ केएम त्रिपाठी से जुड़ा मामला है। त्रिपाठी की जब 2017-18 में विजयपुर में पोस्टिंग थी तब केम्पा फंड से विभिन्न कार्य कराए गए थे। इन कार्यों के सम्पादन में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए बीएल ओझा और बनवारी शर्मा ने विभाग के विजिलेंस को शिकायत की थी। 2019 में की गई शिकायत का आज तक निराकरण नहीं हुआ। हालांकि विजिलेंस के निर्देश पर एसडीओ जोगेन्दर पारदे की अध्यक्षता के कमेटी ने जांच में कई बिन्दुओ पर रेंजर त्रिपाठी को क्लीनचिट दे दी किन्तु पूर्व में जॉच दिलीप आदिवासी एवं पवन आदिवासी द्वारा की गर्य शिकायत पर आनन्द सिंह चौहान उप वनमण्डलाधिकारी विजयपुर द्वारा की गई जांच में पत्र रेंजर केएम त्रिपाठी तत्कालीन वन परिक्षेत्र अधिकारी विजयपुर पश्चिम एवं रामवरन शर्मा उप वनक्षेत्रपाल को अग्नि सुरक्षा के 47,950 रुपये की राशि के फर्जी प्रमाणक तैयार करने के मामले में दोषी ठहराने को कमेटी ने भी दोषी माना है।इनका कहना“मैंने डीएफओ से आरोप पत्र पर अभिमत मांगा है। उनके अभिमत के बाद निर्णय लिया जाएगा।”टीएस सूलिया, सीसीएफ ग्वालियर“मैंने आरोप पत्र के साथ अपना अभिमत भेज दिया है। अगर दोबारा अभिमत मांगा है तो मैं दिखवाता हूं।”सीएस चौहान, डीएफओ श्योपुर

गांव में घूमने वाली बाघिन पिंजरे में कैद.

The tigress roaming in the village has been captured and placed in a cage. उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की बाघिन को प्रबंधन टीम ने शुक्रवार को रेस्क्यू कर पिंजरे में कैद कर लिया है। बाघिन पतौर कोर परिक्षेत्र में बीते कई माह से सक्रिय थी और मंगलवार- बुधवार को यही बाघिन उमरिया में गांव के आसपास घूम रही थी। इसके बाद प्रबंधन ने हाथियों की मदद से बाघिन को गांव के बाहर भेजा था. प्रबंधन लगातार हाथियों की मदद से बाघिन के रेस्क्यू कार्य में जुटा रहा। तीन दिन में सफल हुआ अभियानबाघिन के रेस्क्यू कार्य में प्रबंधन की एक्सपर्ट टीम को 72 घंटे से भी ज्यादा का समय सफलता हासिल करने में लगा है बता दें इलाके में बाघिन की दहशत के कारण ग्राम बमेरा पतौर बकेली और उमरिया के लोगो का आवागमन बंद रहा है और प्रबंधन के ऊपर लगातार दवाब बढ़ रहा था।

नए साल में पाटिल होंगे वन विभाग के नए मुखिया

Patil will be the new head of forest department in the new year डीपीसी कमेटी ने लगाई उनके नाम पर मुहर उदित नारायणभोपाल ! वन विकास निगम के प्रबंध संचालक अभय कुमार पाटिल जंगल महकमे के नए मुखिया होंगे। उनका कार्यकाल एक महीने का ही होगा। फरवरी में वन विभाग के नए मुखिया असीम श्रीवास्तव हो बनेंगे।मुख्य सचिव वीणा राणा की अध्यक्षता में शुक्रवार को डीपीसी की बैठक हुई। बैठक में उत्तर प्रदेश के वन बल प्रमुख सुधीर शर्मा विशेष रूप से उपस्थित थे। इसी बैठक में पहली बार वन बल प्रमुख के लिए डीपीसी कमेटी ने 1986 बैच के अभय कुमार पाटिल और 1988 बैच के असीम श्रीवास्तव के नाम पर अपनी मुहर लगाई। ऐसा इसलिए किया, क्योंकि अगले वन बल प्रमुख पाटिल का कार्यकाल एक महीने का ही है। यानि फरवरी में हॉफ पद के लिए दोबारा डीपीसी न करनी पड़े। फरवरी में बनने वाले वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव का कार्यकल जुलाई 2025 तक रहेगा। कमेटी ने बैठक में 1990 बैच के बिभाष ठाकुर और विवेक जैन को एपीपीसीएफ से पीसीसीएफ पद पर प्रमोट करने पर मुहर लगाई है। उल्लेखनीय है कि मौजूदा वन बल प्रमुख आरके गुप्ता और लघु वनोपज संघ के एमडी पुष्कर सिंह दिसम्बर में सेवानिवृत होने जा रहें है। नए साल में होंगे बदलाववन विभाग में कई नए बदलाव होने जा रहें है। ये सभी बदलाव नई सरकार के गठन के बाद होने की संभावना है। लघु वन वनोपज संघ एमडी पुष्कर सिंह के रिटायरमेंट के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव नए एमडी होंगे। वर्तमान में डॉक्टर श्रीवास्तव वर्किंग प्लान शाखा के प्रमुख हैं। गौरतलब यह है कि अभी तक विभाग में हुई पदस्थापना के दौरान डॉक्टर श्रीवास्तव की वरिष्ठता की अनदेखी की गई। इसी कारण यह संभावना जताई जा रही है कि नई सरकार में उनकी पदस्थापना वरिष्ठता के आधार पर होगी। निगम के मौजूदा एमडी पाटिल के वन बल प्रमुख बनने पर पीसीसीएफ प्रशासन -एक के आरके यादव को निगम में एमडी के पद पर पदस्थ किए जाने की संभावना है। कैडर में पीसीसीएफ का पद प्रशासन-एक का नहीं है। कैडर में यह पद अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के अधिकारी के लिए निर्धारित है। डॉ श्रीवास्तव के संघ में चले जाने पर वर्किंग प्लान शाखा का प्रभार पीसीसीएफ जेएफएम पीके सिंह को दिया जा सकता है। फरवरी में अम्बाडे होंगे पीसीसीएफ वन्य प्राणीपाटिल के जनवरी में रिटायर होने पर पीसीसीएफ वन्य प्राणी असीम श्रीवास्तव वन बल प्रमुख बनेंगे और उनकी जगह पर 88 बैच के आईएफएस विजय एन अम्बाडे पीसीसीएफ वन्य प्राणी होंगे. विभाग में अम्बाडे की छवि वन्य प्राणी विशेष के रूप में बनी हुई है।

हरे भरे वृक्षों की कटाई जारी, विभाग अंजान, जिम्मेदार चुप.

Continued Cutting of green trees, department unaware, responsible parties silent. कटनी । वन विभाग की लचर कार्य प्रणाली के चलते जंगल काटे जा रहे हैं हरे-भरे वृक्षों को ऊजाडा रहा है जिससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है लेकिन विभाग के द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है जिसे सवाल खड़े हो रहे हैं यह बात जिम्मेदार अधिकारियों तक भी है लेकिन मामले को दबाया जा रहा है जानकारी के अनुसार बरही रेंज सुधरने का नाम नहीं ले रहा है अभी हाल ही में बंजर बरेला और सलैया सिहोरा में हज़ारों क्विंटल लकड़ी हर रोज काटी जा रही हैं फ़ोटो मे तुरन्त की कटान स्पश्ट दिखाई दे रही है जी पी एस के साथ फोटो खींची गईं हैं ताकि विभाग राजस्व की ज़मीन न बता सके सारी तस्वीर जी पी एस के साथ हैं जब भी कोई बात आती है तभी किसी न किसी बहाने से जांच को भटकाया जाता है ताकि संलिप्त कर्मचारियों को बचाया जा सके और जंगल ऐसे ही कटते और लुटते रहें। और आरोपी पर्दे के पीछे रहें। किन्तु अब वन विभाग की बेशर्मी की हद हो गई कार्यालय में बैठकर ही काम किया जा रहा है पूरी तरह फील्ड में जाने से अधिकारी गुरेज कर रहे हैं मजे की बात तो यह है कि जंगल को सुरक्षित रखने का विभाग वन विभाग का होता है लेकिन कर्मचारियों के द्वारा ही जिम्मेदारी से काम नहीं किया जाता है

पूर्व वन मंत्री शाह के टाइगर रिजर्व में पिकनिक मनाने की जांच आरोपी अधिकारी को ही सौंपी.

The investigation into the allegations of the former Forest Minister Shah enjoying a picnic in the Tiger Reserve has been entrusted to the accused officer. भोपाल। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में पूर्व वन मंत्री विजय शाह की चिकन-बाटी पार्टी की जांच में नया मामला सामने आया है। इस मामले में आरोपी अधिकारी ही मामले की जांच कर रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने आरोपी अधिकारी से ही जांच रिपोर्ट मांगी है। इस मामले में वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने मध्य प्रदेश के पीसीसीएफ और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी दिल्ली को शिकायत की थी। इसमें उन्होंने टाइगर रिजर्व के अधिकारी कृष्णमूर्ति पर गंभीर आरोप लगा कर सख्त कार्रवाई की मांग की थी। अब इस मामले में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) असीम श्रीवास्तव ने फील्ड डायरेक्टर एल कृष्णमूर्ति से ही जांच रिपोर्ट मांग ली है। वहीं, फील्ड डायरेक्टर ने डिप्टी डायरेक्टर को जांच सौंप दी है। इस पर अजय दुबे का कहना है कि बिना वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के टाइगर रिजर्व में आग लगाने से लेकर निजी वाहनों को प्रवेश नहीं मिल सकता। इसमें वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। टाइगर रिजर्व में फील्ड डायरेक्टर से ऊपर कोई अधिकारी नहीं है। ऐसे में भोपाल के वरिष्ठ अधिकारी से मामले की जांच कराई जानी चाहिए। पिछले दिनों वायरल हुआ था वीडियो- बता दें, पूर्व वन मंत्री विजय शाह का अपने एक दोस्त के साथ सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में ह्यसिद्ध बाबा पहाड़ी के पास पिकनिक मनाने का वीडियो सामने आया था। यह वीडियो वायरल होने के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। शिकायत के अनुसार सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में निजी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित है।

खुदाई में मिला अंग्रेजों से लूटा टंट्या मामा का गड़ा हुआ खजाना

खंडवा! एमपी के खंडवा जिले में अंग्रेजों के जमाने का खजाना मिला है। यहां के खिडगांव में पुराने मकान के मलबे में सोने चांदी के सिक्के मिले। स्कूल के बच्चे यहां खेलने आए तो उनकी नजर सिक्कों पर पड़ी। बच्चों को सिक्के मिलने की खबर गांव में फैली तो यहां लोगों की भीड़ लग गई। गांव वालों ने यहां कई गड्ढे खोद डाले और इनमें से कई लोगों को सोने-चांदी के सिक्के मिले। दस दिन पुरानी इस घटना के बारे में अब एक नई बात सामने आई है। अंग्रेजों के इन सिक्कों को यहां के जननायक क्रांतिकारी नेता टंट्या भील का खजाना बताया जा रहा है। क्षेत्र में उन्हें प्यार से टंट्या मामा भी कहा जाता है। गांव में एक पुराने मकान की जगह नया मकान बनाया जा रहा है। इसके लिए खुदाई की गई और मलबे को पास की नदी के किनारे डाल दिया गया।10 दिसंबर को यहां स्कूल के बच्चे खेलने आए तो उन्हें यहां ब्रिटिश कालीन सिक्के मिले। बच्चों को सोने-चांदी के सिक्के मिलते ही यहां लोगों की भीड़ लग गई और पूरा गांव सिक्कों की खोज में लग गया। बाद में पुलिस ने कुछ लोगों से ये पुराने सिक्के बरामद किए।अंग्रेजों के इन सिक्कों को अब जानकार लोग टंट्या भील का खजाना बता रहे हैं। इतिहासकारों, विशेषज्ञों के मुताबिक टंट्या भील अंग्रेजों से लूट करते और सारा सामान इलाके में बांट देते थे। उस जमाने में टंट्या द्वारा दिए गए सिक्कों को सुरक्षित रखने के लिए लोग उन्हें जमीन में गड़ा देते थे। गड़ा हुआ यही खजाना खिडगांव में लोगों को मिला है। इससे पहले भी इलाके में कई बार लोगों को जमीन में गड़े सोने चांदी के सिक्कों का खजाना मिल चुका है। खंडवा और पास के जिलों में कई जगहों पर ऐसी घटनाएं हुईं। तीन साल पहले खंडवा के ही पुनासा में खुदाई में करीब तीन सौ सिक्के मिले थे। सात साल पहले खरगोन के भगवानपुरा में भी सिक्के प्राप्त हुए थे। यहां के टांडा बरुड गांव में भी सोने चांदी के सिक्के खुदाई में मिले थे। इन सभी जगहों पर मिले सिक्कों को जननायक टंट्या भील का अंग्रेजों से लूटा गया खजाना ही कहा गया था। कौन थे टंट्या भीलटंट्या भील अंग्रेजी हुकूमत का विरोध करते हुए आदिवासियों के हितों के लिए काम करते थे। वे अंग्रेजों का धन लूटते और उसे गरीबों में बांट देते। लूटे गए सोने चांदी के सिक्कों और जेवरात देकर उन्होंने कई कन्याओं की शादी कराई। उन्होंने सन 1878 में बुरहानपुर का सरकारी खजाना लूटा था। उस जमाने में लोग धन संपत्ति को जमीन में गड़ा देते थे। मालवा निमाड़ इलाके में यही गड़ा हुआ खजाना जब तब खुदाई में मिल जाता है।1889 में जब टंट्या भील को गिरफ़्तार किया गया तब कई विदेशी अखबारों में भी इसका जिक्र किया गया। अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार न्यूयार्क टाइम्स में टंट्या भील को भारत के राबिन हुड की उपाधि दी गई थी।

प्रशासन बेखबर भू माफिया निडर कर रहे अवैध उत्खनन कोपरे मुरम का परिवहन.

The administration is unaware that the fearless illegal excavation by the land mafia is being transported to Muram in trucks. माइनिंग विभाग की उदासीनता और क्षेत्रीय प्रशासन की अनदेखी से फल फूल रहे भू माफिया अलताफ खान सिरोंज! सिरोंज अवैध उत्खनन का मुख्य गढ़ अरोन रोड इस बात की गवाही देता है कि 24 घंटे अवैध उत्खनन करता भू माफिया अपनी गिट्टी क्रेशर मशीन की आड़ में अवैध कोपरे मुर्मू का कारोबार धड़ल्ले से कर रहे हैं! गिट्टी क्रेशर मशीनों के आसपास शासकीय भूमि हो या वन विभाग की भूमि हो सारी भूमियों को अवैध उत्खनन कर्ताओं ने बड़े-बड़े गढ्ढ़ों में तब्दील कर दिया है अगर क्षेत्रीय प्रशासन इस और ध्यान दे तो सरकार को लाखों रुपए का चुना लगाने वाले भू माफिया पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है क्योंकि माइनिंग विभाग तो इस और लापरवाही बरत्ता चला आ रहा है! आज तक माइनिंग विभाग ने ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की है! जिस्स के भू माफिया को हानि पहुंची हो या क्रेशर मशीनों के स्थान पर जाकर जांच की हो के कितनी तादाद में भू माफिया अवैध कोपरा उत्खनन निकालकर परिवहन कर रहे हैं! आरोन रोड पर स्थित एवं इमलानी रोड पर स्थित गिट्टी क्रेशर मशीनों की आड़ में अवैध कोपरे मुरम का धड़ल्ले से चला रहे कारोबार 24 घंटे आरोन रोड की घाटी से कोपरे मुरम से भरे हुए डंपर क्षेत्र में कॉलोनी ओर प्लांटो में बगे़र रॉयल्टी के बेझिझक डाल रहे हैं माइनिंग विभाग सिरोंज से लगभग 90 किलोमीटर दूर विदिशा जिले में बैठी हुई है! लेकिन निष्क्रिय नजर आती है माइनिंग विभाग द्वारा कभी भी क्रेशर मशीनों पर जाकर चेक नहीं किया जाता कि उनके आसपास की जमीन को क्रेशर मशीनों के मालिकों ने बड़े-बड़े गढ़ों में तब्दील कर दी है! कुछ जमीन राजस्व विभाग की भी है तो कुछ जमीन वन विभाग की भी है! क्या कभी इन्होंने इतनी रॉयल्टी दी माइनिंग विभाग के अधिकारी कभी ऐसा नहीं करते कई बार मीडिया कर्मियों द्वारा अधिकारियों को जानकारी दी जा चुकी है फिर भी वह इस ओर ध्यान नहीं देते हां सूत्र बताते हैं कि कभी-कभी माइनिंग विभाग सिरोंज क्षेत्र में आता है तो कभी छोटा-मोटा रेता के ट्रैक्टर ट्राली को पड़कर कैस बना देते हैं और गिट्टी क्रेशर मशीनों पर घूम कर वापस आ जाते हैं जिससे मॉर्निंग विभाग की मिली भगत भी इसमें शामिल हो सकती है लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद भी प्रशासन इन भू माफियाओं पर कार्रवाई करने से बच रहा है इस विषय मैं जब हमारे प्रतिनिधि की बात जब भी सिरोंज प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से होती है! या उनको इस विषय में जानकारी दी जाती है! तो इनका कहना साफ रहता है हमें भनक लगेगी के क्षेत्र में अवैध कोपरे के डंपर पर आ रहे हैं हम कार्रवाई करेंगे वहीं जब भी हमने माइनिंग विभाग अधिकारी से संपर्क करने का सोचा है तो इनसे संपर्क नहीं हो पता का क्योंकि मीनिंग भाग अधिकारी फोन उठाना उचित नहीं समझते अब एक सवाल यहां भी बनता है कि माइनिंग विभाग क्यों नहीं क्रेशर गिट्टी मशीनों पर जाकर इसकी जांच करता

अपर सचिव वन के खिलाफ लोकायुक्त में मामला दर्ज.

A case has been filed against the Deputy Secretary of Forests in the Lokayukta. लोकायुक्त संगठन तत्कालीन छतरपुर डीएफओ एवं वर्तमान अवर सचिव वन अनुराग कुमार के खिलाफ वायरबेड और चैनलिंक खरीदी में अनियमित किए जाने पर प्रकरण पंजी बात कर लिया है। जांच की जिम्मेदारी एसपी सागर लोकायुक्त को दी गई है। लोकायुक्त संगठन ने वन विभाग को पत्र लिखकर खरीदी से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के बार-बार निर्देश दिए जा रहे है किन्तु विभाग दस्तावेज उपलब्ध कराने में टालमटोल कर रहा है। उज्जैन एसपी लोकायुक्त ने 3 साल पहले एपीसीसी सत्यानंद के खिलाफ प्रकरण पंजीबद किया था। इसके बाद से सत्यानंद से संबंधित जांच आगे नहीं बढ़ पाई। इसके अलावा खरगोन डीएफओ प्रशांत कुमार, इको टूरिज्म बोर्ड में पदस्थ साहिल गर्ग सहित आधा दर्जन आईएफएस अधिकारियों के खिलाफ जांच लंबित है किंतु फैसला अभी तक नहीं लिया जा सका है। मैं इस मामले को दिखवाता हूं। कमल अरोरा सीसीएफ जबलपुर

वन विभाग में कमीशन का खेल: चहेते सप्लायर को उपकृत करने मार्केट से हो रही है खरीदी.

The Game of Commission in Forest Department. उदित नारायण भोपाल। वन विभाग में कमीशनबाजी का खेल बदस्तूर जारी है। निर्वतमान वन मंत्री विजय शाह ने अपने कार्यकाल में कमीशनबाजी के खेल पर रोक लगाने की मंशा से प्रदेश स्तर पर एकजाई टेंडर करने के आदेश जारी किए थे। अफसरों ने उनके आदेश को धुंआ में उड़ाते वनमंडल स्तर पर खरीदी का क्रम जारी रखा है। ताज़ा मामला मंडला पूर्व और मंडला पश्चिम का है। दोनों ही वनमंडल की कमान एक ही अफसर के हाथ में है. यही वजह है कि डीएफओ ने अपने चहेते सप्लायर्स जैन बंदुओं को बिल्डिंग मैटेरियल्स और नीमखली गोबर खाद और उपजाऊ मिट्टी प्राय करने का वर्क आर्डर जारी कर दिया। सूत्रों के अनुसार डीएफओ को खरीदारी की इतनी जल्दबाजी थी कि वर्क आर्डर पहले जारी कर दिया और टेंडर बाद में बुलाई। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि मुख्यालय से आदेश जारी है कि वर्मी खाद और नीमखली अनुसंधान एवं विस्तार शाखा से ही खरीदा जाए किंतु विभाग की शाखा से खरीदने पर कमीशन बाजी का खेल नहीं हो पता, इसलिए निविदा कर मार्केट से खरीदी की जा रही है, वह भी डीएफओ के पसंदीदा गगन जैन के फर्म से खरीदने का फरमान है। डीएफओ ने निविदा 15 दिसंबर को बुलवाई और वर्क आर्डर 14 दिसंबर को ही कर दिया। बिल्डिंग मैटेरियल सप्लाई का ऑर्डर भी अचल जैन की फर्म को दिया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि पौधारोपण के कार्य अनुसंधान एवं विस्तार शाखा के द्वारा किया जाता है। मंडल वन मंडल में यह कार्य टेरिटोरियल डीएफओ कर रहे हैं. डीएफओ नित्यानंद ने पश्चिमी वन मंडल के लिए नीम खली गोबर खाद और उपजाऊ मिट्टी सप्लायर का ठेका गगन जैन की फर्म को दिया है। इन सामग्रियों की खरीदी मार्केट दर से कई गुना अधिक है। पश्चिमी वन मंडल में खरीदी का लेखा-जोखा नीम खली 7350 कुंटल गोबर खाद 881 कुंटल उपजाऊ मिट्टी 1742 कुंटल

बाघ एवं कछुओं की अंतर्राज्यीय तस्करी करने वाला गिरफ्तार.

Caught the international poacher involved in tiger and turtle smuggling. भोपाल। स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स भोपाल ने अलग अलग स्थानों पर कार्यवाही करते हुये! डिण्डोरी एवं राज्य के बाहर अयोध्या उप्र से बाघ के अंगों एवं दुर्लभ प्रजाति के कछुओं की तस्करी करने वाले 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।कछुआ तस्करी में विगत 3 माह से फरार एक आरोपी को अयोध्या उप्र से गिरफ्तार कर न्यायालय नर्मदापुरम के समक्ष पेश किया गया। वहीं वन्यप्राणी बाघ के शिकार एवं उसके अवयवों की अंतराज्जीय तस्करी के प्रकरण में संगठित बावरिया गिरोह के 1 अन्य आरोपी को केन्द्रीय जेल चन्द्रपुर महाराष्ट्र से प्रोडक्शन वारंट पर न्यायालय नर्मदापुरम के समक्ष पेश किये जाने उपरांत रिमांड पर लिया जाकर बाघ के शिकार एवं उससे अवयवों में लिप्त गिरोह के अन्य सदस्यों के संबंध मे विस्तृत पूछताछ की गई एवं आरोपी को तमिलनाडू राज्य में बाघ के शिकार वाले स्थान पर ले जाकर आवश्यक कार्यवाही की गई। उक्त प्रकरण में पूर्व में कुख्यात अंतर्राष्ट्रीय तस्कर कल्ला बावरिया को गिरफ्तार किया था। जिसके विरूद्ध भारत एवं नेपाल राष्ट्र में बाघ के शिकार एवं उसके अवयवों की तस्करी के कई प्रकरण दर्ज हैं।

कूनो नेशनल पार्क से आई खुशखबरी,जल्द शुरू होगी चीता सफारी.

Good news from Kuno National Park, cheetah safari will start soon. उदित नारायणभोपाल। पर्यटकों के लिए मध्य प्रदेश में एक नया जंगल सफारी जल्द ही शुरू होने वाली है जिसका इंतजार लंबे समय से पर्यटकों को था अभी तक ज्यादर जंगल सफारी सागर संभाग,जबलपुर ,सेहडोल या रीवा संभाग में थी अब चंबल संभाग में पहली जंगल सफारी जल्द ही से होने वाली है।प्रदेश के पालपुर कूनो नेशनल पार्क में चीता सफारी के लिये सेसईपुरा में नया गेट बनाया जायेगा। इसके लिये करीब 56 एकड़ भूमि श्योपुर कलेक्टर से मांगी गई है। साथ ही चीता सफारी के लिये केंद्र की जू- अथॉरिटी से स्वीकृति भी आने वाली है। यह जानकारी गुरुवार को मंत्रालय में वन विभाग के एसीएस जेएन कंसोटिया के समक्ष वन विभाग की वन्यप्राणी शाखा के प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने प्रस्तुत की।बैठक में बताया गया कि चीतों की नई खेप भी विदेश से जल्द आने वाली है जिसके लिये गांधी सागर अभयारण्य में तैयारी जारी है। वहां एक गांव के विस्थापन के कारण फेंसिंग आदि की कार्यवाही रुकी हुई थी। गांव वालों को मुआवजे का भुगतान कर दिया गया है। गांधी सागर अभयारण्य में चीतों को बसाने के लिये सभी तैयारियां पूर्ण करने हेतु 31 जनवरी 2024 तक का समय प्रदान किया गया है। बाघ शावकों को शिकार करना सिखाया जायेगाबैठक में बताया गया कि प्रदेश के टाईगर रिजर्व में अनेक बाघ शावक ऐसे हैं जो अकेले हैं। इन्हें बाड़ों में रखकर इनका लालन-पालन किया जायेगा और इन्हें शिकार करना सिखाया जायेगा। इसके लिये बजट की व्यवस्था गेट मनी जोकि विकास निधि में जमा होती है, से की जायेगी।

वन एवं पर्यावरण स्वीकृति हुई आसान, केंद्र ने किया वन एवं पर्यावरण नियमों में संशोधन.

Approval for forest and environment became easier as the central government made amendments to the forest and environmental regulations. उदित नारायण,    भोपाल। केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों को सरल कर दिया है ताकि बड़े प्रोजेक्ट के क्लीयरेंस जल्द से जल्द मिल सके। नए संशोधन के तहत अब कंसलटेंट वन और पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए सीधे तकनीकी कमेटी को फॉरेस्ट और पर्यावरण  के लिए अपना प्रस्ताव भेज सकेंगे। यानी अब सिया कमेटी की भूमिका को निष्प्रभावी बना दिया गया है।  केंद्र सरकार ने वैज्ञानिक डेटा संचालित तरीके से हितधारकों और तकनीकी मूल्यांकन को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए, मंत्रालय ने जीआईएस, एडवांस डेटा एनालिटिक्स आदि जैसी उभरती तकनीकी परिवेश के दायरे का विस्तार किया है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के नियमों में संशोधन करते हुए कठिन और जटिल प्रक्रियाओं को सरल बनाने की कोशिश की है। अब से, सभी नए प्रस्ताव चाहे किसी भी प्रकार के हों, प्रारंभिक जांच के लिए सदस्य सचिव (एमएस), एसईएसी ( स्टेट  एक्सपर्ट अप्रैज़ल कमेटी ) को प्रस्तुत किए जाएंगे। परिवेश पोर्टल पर ही संबंधित एसईआईएए को स्पष्ट सिफारिशें करने के लिए विशेषज्ञ समिति (एसईएसी) द्वारा जांच और आगे विचार किया जाएगा। नए संस्करण ने अब एमएस, एसईएसी को उपरोक्त ओएम में उल्लिखित प्रक्रिया के अनुसार मानक टीओआर जारी करने में सक्षम बना दिया है। क्या थी पुरानी व्यवस्था संशोधन के पहले तक व्यवस्था यह थी कि प्रोजेक्ट के कंसलटेंट को अपने प्रस्ताव को पहले सिया कमेटी के किंतु-परंतु बिंदुओं के सवालों जवाबों से गुजरना पड़ता था। इसके कारण प्रस्ताव को वन और पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए काफी समय तक इंतजार करना पड़ता था। कई बार ऐसा भी हुआ कि सरकारी प्रोजेक्ट भी सिया कमेटी के समक्ष ही महीना और वर्षों तक लंबित रहे। इन समस्याओं को लेकर कई बार भारत सरकार केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को शिकायत भी कई गई और इस शिकायत के आधार पर नया संशोधन आदेश जारी किया गया है।

रिहयासी इलाके में तेंदुए की दस्तक, इलाके में दहशत का माहोल।

Intrusion of a Leopard in the Residential Area, Atmosphere of Terror Prevails in the Locality. वन अमला लगा सर्चिंग में । मामला उप नगरी बोड़खी का ।Forest Department Amala engaged in searching. The case is of the sub-town Bodhki. हरिप्रसाद गोहेआमला । सुबह छः बजे नगर के उपनगरी बोडखी आमला बैतूल मुख्य सड़क से हथिया निवास की ओर जाते तेंदुए को देखे जाने की खबर से क्षेत्र में दहशत का माहोल है । मिली जानकारी अनुसार उक्त घटना क्रम वहा स्थित आकृति सुपर मार्केट के सीसी टीवी कैमरे में कैद हुआ । तेंदुए की जंगल से शहरी क्षेत्र में प्रवेश पर लोग तरह तरह के कयास लगा रहे है । जानकारी अनुसार लोगों ने तेंदुए को देखा खेतों में पग मार्क भी मिले है। वहीं किसी भी अप्रिय घटना की खबर नहीं है । बहरहाल तेंदुए की आमद की सूचना वन विभाग को मिली है । वन परिक्षेत्र अधिकारी आमला रामस्वरूप उईके ने बताया वन अमले को सर्चिग के लिए लगाया गया है। साथ ही प्राप्त विडियो फुटेज को भी दिखवाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार शहर से सटा हुआ चिखलार,धाराखोह, मरामझिरी ये ऐसे इलाके हैं जिसके बाद मैदानी स्तर के कर्मचारियों को सतर्क करने के साथ साथ ग्रामीणों को भी सावधान रहने की नसीहतें दी जाती हैं। उत्तर वन मंडल के अंतर्गत आने वाले जंगल का बहुत बड़ा हिस्सा सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से सटा होने के कारण सारणी, चोपना सहित बैतूल शहर से सटे जंगलों में शेर तेंदुए का कभी कभी मूवमेंट हो जाता है, लेकिन विभागीय कर्मचारियों की इस पर पूरी नजर रहती है।

नये वन भवन के बेचे गये तीन फ्लोर की रजिस्ट्री फिर रोकी.

Registration of the three floors sold in the new government building has been halted again. उदित नारायणभोपाल। राजधानी के तुलसी नगर में बने नये वन भवन के तीन फ्लोर को बेचे जाने के बाद इसकी रजिस्ट्री एक बार फिर रुक गई है। दरअसल इस भवन के तीन फ्लोर कर्मकार कल्याण मंडल, इलेक्ट्रानिक विकास निगम एवं स्टेट माईनिंग कारपोरेशन को करीब 60 करोड़ रुपये में बेचे गये थे ताकि वन भवन को बनाने में लगी भारी भरकम लागत 182 करोड़ रुपये की कुछ भरपाई हो सके। लेकिन 8 अगस्त 2023 को जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उक्त नये भवन का लोकार्पण किया था तब उन्होंने घोषणा कर दी थी कि अगर नवीन वन भवन में जगह की कमी पड़ती है तो पूरा परिसर वन भवन को दे दिया जायेगा। दरअसल सीएम को बताया गया था कि जगह की कमी होने से वन विभाग का जैव विविधता बोर्ड, राज्य बांस मिशन एवं इको पर्यटन बोर्ड नये वन भवन में स्थानांतरित नहीं किया जा सका है। इसी कारण से सीएम ने उक्त घोषणा कर दी थी। लेकिन सीएम की यह घोषणा तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह ने सीएम घोषणा पोर्टल पर दर्ज नहीं होने दी। इस पर लोक परिसम्पत्ति विभाग जिसने उक्त तीनों फ्लोर की नीलामी कराई थी, ने वन विभाग को पत्र लिख कर कहा है कि वह वन भवन के बेचे गये तीन फ्लोर की रजिस्ट्री करा दे। वन विभाग ने भी वन बल प्रमुख को रजिस्ट्री कराने के लिये पत्र भेज दिया। लेकिन वन बल प्रमुख रमेश गुप्ता ने इनकी रजिस्ट्री यह कहकर रुकवा दी है कि वे उच्च स्तर पर बातचीत कर इन बेचे गये तीन फ्लोर को वापस वन मुख्यालय को दिलवायेंगे। नई सरकार के गठन होने पर यह उच्च स्तरीय बातचीत हो सकेगी।

भारतीय नौसेना दिवस आज, जानें इस दिन का इतिहास

Indian Navy Day 2023: आज के समय में दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेनाओं में भारतीय सेना का नाम लिया जाता है। इसके पीछे की वजह है कि, भारत की तीनों सेनाएं थल, वायु और जल सेना हर तरफ से देश की सुरक्षा में तत्पर है। अगर इतिहास के पन्नों को उठा कर देखें तो भारत की सेनाओं ने हर जगह दुश्मनों को पस्त किया है। यही वजह है कि दुश्मन की सेना, भारतीय सेना के नाम से थर-थर कांपती है। जिस तरह से जमीन और हवा में भारतीय सेना के सैनिक मुस्तैद रहते हैं, ठीक उसी तरह से देश की सुरक्षा में जल सेना का भी बड़ा हाथ है। भारतीय नौसेना के जवान, जिन्हें हम जल प्रहरी कह सकते हैं, वह जल मार्ग की सुरक्षा में मुस्तैद रहते हैं। ऐसे में उनके इसी योगदान को सलाम करने के लिए हम 4 दिसंबर के दिन नौसेना दिवस मनाते हैं। इस दिन को मनाने की शुरुआत तब से हुई थी, जब 1971 में भारत पाक के युद्ध में भारतीय जल सेना ने देश को जीत दिलाई। इसी एतिहासिक दिन हर साल नोसेना दिवस मनाया जाता है। दुनिया की टॉप 10 नौसेना में से एक है भारतीय नौसेना भारतीय नौसेना दुनिया की टॉप 10 नौसेना में से एक है और इसका स्थान सातवें नंबर पर आता है. यह दक्षिण एशिया की सबसे शक्तिशाली नौसेना है. भारतीय शस्त्र सेना में तीन प्रभाग होते हैं- भारतीय थल सेना, वायुसेना और नौसेना. भारतीय थल सेना हमारी धरती की रक्षा करती है. नौसेना पानी में रक्षा करती है और वायुसेना आकाश में हमारी रक्षा करती है. आधुनिक भारतीय नौसेना की नींव 17वीं शताब्दी में रखी है. ईस्ट इंडिया कंपनी ने समुद्री सेना के रूप में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की और 1934 में रॉयल इंडियन नेवी की स्थापना हुई. न झुकने दिया तिरंगे को, न युद्ध कभी ये हारे हैं,भारत माता तेरे वीरों ने दुश्मन चुन-चुन के मारे हैं।

मप्र को मिले 14 नए आईएफएस, इनमें 5 प्रदेश के मूल निवासी.

Madhya Pradesh has been allocated 14 new Indian Forest Service (IFS) officers, out of which 5 officers are originally from the state. राज्य के चयनित 8 नए आईएफएस को दूसरे प्रदेश का कैडर आवंटित भोपाल। केंद्रीय कार्मिक विभाग ने 2023 बैच के लिए सिलेक्टेड 140 आईएफएस में से 13 को मध्य प्रदेश के लिए आवंटित किया है। इनमें से 5 आईएफएस प्रदेश के मूल निवासी हैं। इस सूची में 14 आईएफएस अधिकारी मध्य प्रदेश से चयनित हुए हैं, जिसमें से 8 आईएफएस अफसर को दूसरे राज्य के कैडर आवंटित किए गए हैं। *प्रदेश के लिए आवंटित आईएफएस 13 आईएफएस अजय गुप्ता, प्रज्जवल चौरसिया, आकाश साहू, अलकापुरी गोस्वामी, चंचल पवार, शोभित जोशी, हर सिमरन सिंह चीमा, अपूर्व, बिहारजसवंत सिंह मीना, रमेश चंद्र मीना, राजस्थानकृष्णा प्रसाथ, विशाल कुमार, कुमार साहू, जयप्रकाश, यश ढोबले, उदयन सुबुद्धि, गौरव शर्मा, तन्मय कौशिक, अथर्व तिवारी, आकांक्षा जैन, चंद्र प्रकाश अग्रवाल, असम मेघालय और उपमा जैन.

जंगल के संरक्षक को चाहिए संरक्षण.

The guardian of the jungle needs protection. अंतरराष्ट्रीय जगुआर दिवस आज डॉ. केशव पाण्डेय दुनियाभर में जैव विविधता संरक्षण के लिये अनेक दिवस मनाने के साथ ही विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। एक महत्वपूर्ण प्रजाति, सतत् विकास और मध्य एवं दक्षिण अमेरिका की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक के रूप में अंतरराष्ट्रीय जगुआर दिवस मनाया जाता है। यह अमेरिका की सबसे बड़ी जंगली बिल्ली है। “गार्जियन ऑफ द जंगल“ कहे जाने वाले जगुआर की प्रजाति उसके संरक्षण और महत्व से जुड़ी एक खास रिपोर्ट। देश और दुनिया में प्रति वर्ष 29 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय जगुआर दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य जगुआर के सामने दिनों-दिन बढ़ते खतरों को टालना है। साथ ही मेक्सिको से अर्जेंटीना तक इसके अस्तित्व को सुनिश्चित करने वाले महत्त्वपूर्ण संरक्षण प्रयासों के बारे में लोगों का जागरूक करना है। ताकि जंगल की इस खास प्रजाति का संरक्षण हो सके।जगुआर दिवस का मनाना कई मायनों में महत्वपूर्ण है। संयुक्त राष्ट्र के सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के व्यापक प्रयासों का ही यह परिणाम है। इसके तहत जगुआर कॉरिडोर और उनके आवासों के संरक्षण की ज़रूरत पर ध्यान आकर्षित करने के लिये राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय साझीदारों के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय जगुआर दिवस संबंधित देशों की सामूहिक आवाज़ का प्रतिनिधित्त्व करता है। इसके महत्व को ऐसे समझा जा सकता है कि मार्च 2018 में “जगुआर 2030 फोरम“ के लिए संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 14 रेंज देशों के प्रतिनिधि न्यूयॉर्क में एकत्रित हुए। इस फोरम के परिणामस्वरूप जगुआर 2030 स्टेटमेंट अस्तित्व में आया, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी जगुआर संरक्षण पहलों की एक विस्तृत श्रृंखला को रेखांकित किया।ब्राजील सहित अनेक रेंज देश राष्ट्रीय जगुआर दिवस समारोह भी मना रहे हैं। जिसने जगुआर को जैव विविधता के प्रतीक के रूप में मान्यता दी है। सबसे खास बात यह है कि जगुआर दिवस मनाने की मांग करने वालों में वैश्विक जंगली बिल्ली संरक्षण संगठन, पैंथेरा के सह संस्थापक,पूर्व सीईओ व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एलन रैबिनोविट्ज़ शामिल थे।जिस तरह भारत में टाइगर सहित चीतों व अन्य प्रजातियों के संरक्षण को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। ठीक उसी तरह दुनिया भर में विलुप्त होते जगुआर के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2023 में इसकी थीम “गार्जियन आफ द जंगल“ रखी गई है। मतलब जंगल का अभिभावक… ताकि लोगों को अधिक से अधिक जागरूक किया जा सके। कुदरत ने इन्हें बड़ा खूबसूरत बनाया है। हालांकि चीता और जगुआर दोनों ही पैंथर हैं, जिनके बीच बहुत अंतर है। एक के शरीर पर रोसेट (गुलाब के फूल जैसा) पैटर्न होता है। लेकिन भारत में जगुआर नहीं पाया जाता है। भारत में मेलेनिस्टिक तेंदुओं को ब्लैक पेंथर कहा जाता है। अमेरिका में मेलानिस्टिक जगुआर को ब्लैक पैंथर कहा जाता है। भारत में चार प्रजातियां पाई जाती हैं। गिर शेर, टाइगर, भारतीय तेंदुआ और हिम तेंदुआ इसके अलावा क्लाउडेड तेंदुआ भी पाया जाता है। जगुआर और चीता 1940 के दशक में विलुप्त हो गए थे। हालांकि भारत सरकार ने देश में चीता के संरक्षण के लिए 2022 में विशेष प्रयास किए और मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में इनका नया घर बनाया गया है।खासतौर पर जगुआर लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी मांसाहारी और एकमात्र बड़ी बिल्ली है, जो मेक्सिको से अर्जेंटीना तक 18 देशों में मौजूद है। इसका वैज्ञानिक नाम पैंथेरा ओंका है। यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी बिल्ली शिकारी और अमेज़ॅन वर्षावन की एक महत्वपूर्ण प्रजाति है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की खतरे वाली प्रजातियों की रेड लिस्ट में “ संकटग्रस्त प्रजाति” के रूप में जगुआर अल सल्वाडोर और उरुग्वे में विलुप्त है। शेष रेंज देशों में दबाव का सामना कर रहा है। वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन सूचीः परिशिष्ट आई में आते हैं। कारण स्पष्ट है कि जगुआर को अपने प्राकृतिक आवास रेंज में 50 प्रतिशत से अधिक संकट का सामना करना पड़ा है। जगुआर अच्छे तैराक होते हैं और यहाँ तक कि पनामा नहर में तैरने के लिये भी जाने जाते हैं। जगुआर की पहचान इसकी पूरी शृंखला में एक प्रजाति के रूप में की गई है, जो प्रजातियों की आनुवंशिक विविधता के लिये इसके निवास स्थान के संबंध और संरक्षण को महत्त्वपूर्ण बनाती है। जगुआर की शक्ति का अदांजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह कछुए का कवच हो या मगरमच्छ की खाल दोनों का शिकार कर लेता है।देश में इस दिन विभिन्न राष्ट्रीय प्राणी उद्यानों में इसे मनाने के साथ ही लोगों को इसके संरक्षण के बारे में जागरूक किया जाता है। ऐसे में आवश्यक है कि “जंगल के सरंक्षक को भी मिले मानव का संरक्षण“। तभी इस दिन को मनाने की सार्थकता सिद्ध होगी।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर प्रबंधन का जीपीएस बघीरा एप्प बना खिलौना.

The GPS Bagheera app has become a tool for management within the Bandhavgarh Tiger Reserve. भारत सरकार के कई लाखो की राशियों से खरीदा गया घटिया मोबाईल जीपीएस, प्रतिबंधित संरक्षित क्षेत्र में नियम विरुद्ध तरीके से प्रवेश वाहनों पर वाहन चालकों पर व गाइडो पर जीपीएस बघीरा एप्प लोकेशन अनुशार प्रबंधन कार्यवाही करने में हों रहा है नाकाम.बांधवगढ़ जंगल सफ़ारी में निर्धारित गति के नियमों की उड़ रही धज्जिया पर्यटको हेतु प्रतिबंधित संरक्षित क्षेत्र में भी प्रवेश कर रही है खुले आम पर्यटक वाहन फुल डे सफारी वाहन चालक व गाइड पर्यटक मिलकर वन्य जीव के रहवासी स्थल में पैदा करते हैं खलल. विश्व विख्यात पर्यटक स्थल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अपनी छवि का मोहताज नही है किंतु कुछ वाहन चालक गाइड वह पर्यटक अपने निजीगत लाभ प्राप्त करने के लिए विश्व विख्यात पर्यटक स्थल बांधवगढ़ की छवि धूमिल करने में पीछे नहीं है उपरोक्त मामला जब प्रकाश में आया की स्थानीय कुछ वाहन चालक व गाइडों का कहना है की प्रबंधन द्वारा दिए जा रहे गाइड च्वाइस सुविधा जिसका आदेश किसी भी राज्य पत्र व कोई ऐसी टाइगर रिजर्व की पॉलिसी में नहीं है उपरोक्त मामला पूर्व के क्षेत्र संचालक व प्रबंधन की जानकारी में लाई गई थी जिस पर क्षेत्र संचालक द्वारा मनपसंद गाइड को ले जाने पर रोक भी लगाया गया था किंतु कुछ ऐसे फोटो ग्राफर्स है जो नार्मल सफारी के वापस पार्क से आने के बाद करप्शन के रूप में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों के पास काफी नजदीक लेकर ले जाकर फोटोग्राफी करना चाहते हैं व साथ में रोड में अथवा रोड के पास में सोए हुए बाघों को जगाने का प्रयास कर फोटो ग्राफी करते हैं उपरोक्त कार्य में हर गाइड सम्मिलित होने से मना कर देता है तो फीर पर्यटक ऐशे कार्य वाले गाइड वाहन चालक को तलाशता है और उपरोक् कार्यो को अंजाम देने के लिए ऊपर के रसूख दारो से पर्यटक द्वारा दवाब वनवाया गया जिसके कारण बड़े ऐसे फोटोग्राफरों के व् रसूखदार के दबाव में आकर प्रबंधन ने यह कहते हुए की उपरोक्त मामला राजपत्र या एल ए सी में पारित करवाया जाएगा तब तक के लिए वैकल्पिक गाइड व्यवस्था चालू किया जाए किन्तु आज दिनाक तक कोई ऐशा क़ानून पारित नही किया गया जिसका खुलेआम दुरुपयोग देखने को मिल रहा है औए यह भी देखा गया की कुछ वाहन चालक व गाइड चंद पैसों के लिए सभी नियम कानून को रौंदते हुए वन्य जीव व बाघ के राहवास में खलल पैदा करते है जिस पर वन्य प्राणियों के जीवन यापन पर असर पड़ रहा है जिस पर राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण विभाग ने भारत सरकार राजपत्र में नियम पारित करते हुए 20 की स्पीड नियंत्रण व् वाहन से से वाहन की दूरी 50 मी किसी भी जानवर के पास 15 से 20 मिनट से अधिक न रुकने का और किसी भी वन्य प्राणी से वाहन की दूरी 20 मी पर वाहन रोकने का निर्देश जारी किया है और बाघ के मेटिंग पीरियड के दौरान व शिकार पर खाने के दौरान पूर्णतः प्रतिबंध हुआ है लेकिन बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में देखा गया कि सबसे अधिक वाहन तेज गति में उपरोक्त स्थान पर ही पहुंचाते हैं और उपरोक्त स्थान पर ही काफी देरी तक काफी नजदीक पर खड़े रहते हैं और यह सब नजारा प्रबंधन की आंखों के सामने ही होता होता है निर्धारित गति के नियमों की उड़ रही धज्जियाजहा बाघों के गढ़ की सफारी में लगे वाहन जंगलों के अंदर तय गति सीमा की धज्जियां उड़ा रहे हैं, लेकिन प्रबन्धन उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं मध्य प्रदेश। बाघों के गढ़ की सफारी में लगे वाहन जंगलों के अंदर तय गति सीमा की धज्जियां उड़ा रहे हैं जिस पर की राज्य सरकार व भारत सरकार द्वारा पार्क में चल रहे पर्यटक वाहनों में स्पीड गति नियंत्रण हेतु जीपीएस बगीरा एप्प हेतु अभी हाल में ही कई लाख रु का बजट संचालन हेतु दिया है किंतु प्रबंधन द्वारा उपरोक्त राशि का वारा न्यारा कर दिया गया ,और प्रबन्धन उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं। बाघ क्षेत्रों में सफारी ने न सिर्फ तय नियम और कायदों की धज्जियां उड़ाने में जुटे है, बल्कि सरकार के राजपत्र की अवमानना भी कर रहे हैं, लेकिन बाघ सहित अन्य वन्य प्राणियों के सरोकारता का दम भरने वाला बांधवगढ़ प्रबन्धन चिर निंद्रा में लीन है। बाघ सफारी के लिए सफारी हेतु जिन जिप्सियों का उपयोग किया जाता है, उन जिप्सियों की गति सीमा एनटीसी निर्धारित की गई है, जिसमें अचानक वन्यप्राणियों या बाघ के आने पर वाहन नियंत्रित हो सके, तो वहीं बाघों के फ़ोटोग्राफी और विडियोग्राफी के लिए भी दूरियां तय की गई हैं फिर भी पार प्रबंधक के आंखों के सामने सभी नियम कानूनों को जिप्सी संचालको व गाइडों द्वारा रौंदते हुए फोटोग्राफी बाघों के पास वाहन लगा कर शोरगुल कराते हुए वन्य जीव के विचरण क्षेत्र में खलल पैदा किया जा रहा है। पहले हो चुकी है घटनाबावजूद इसके नियम बीटीआर में दम तोड़ रहे हैं, खबर है कि इन सबकी जानकारी बीटीआर फील्ड डायरेक्टर व प्रबंधन के अमला को भलीभांति है, लेकिन उनके द्वारा कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है। विदित हो कि पूर्व में फोटोग्राफी व मोबाइल फोन के फेर में एक पर्यटक वाहन तेज गति में अपना नियंत्रण खो दिया था, जिसमें कई पर्यटक घायल हो गए थे। बावजूद इसके पार्क प्रबन्धन नियमों का पालन कराने और न ही सफारी वाहन संचालकों द्वारा नियमों का पालन कराने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं, बल्कि उदासीन रवैया घटना की पुनरावृत्ति के ताक में बैठा है। फोटोग्राफी पर लगा प्रतिबंधपार्क क्षेत्र में हुई दुर्घटनाओं को देखते हुए 29 मई 2018 के राजपत्र में पर्यटक भ्रमण के दौरान वाहन चालकों के फोटोग्राफी पर प्रतिबंध लगा दिया गया, किंतु कुछ वाहन चालक सरेआम राजपत्र की धज्जियां उड़ाते हुए खुलेआम फोटोग्राफी कर रहे हैं और तो और वन्यप्राणियों के अधिकतम पास वाहनों को सटाकर फोटोग्राफी करते और कराते हैं, जो भारत राजपत्र व एनटीसीए के नियमों के विपरीत है। पार्क प्रबंधन ने बंद की आंखेंबांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सफ़ारी के दौरान पर्यटक वाहनों के शोरगुल के दबाव में आकर संरक्षित क्षेत्र के बाघ अपना क्षेत्र छोड़ बफर क्षेत्रों में पलायन कर जाते हैं, जिसके बाद उनकी … Read more

नए साल में पाटिल होंगे वन विभाग के नए मुखिया, दिसंबर में हो रही है गुप्ता की विदाई.

In the new year, Patil will be the new chief of the Forest Department, and Gupta’s farewell is scheduled for December. डॉ श्रीवास्तव लघु वनोपज संघ और यादव होंगे वन विकास निगम नए एमडी उदित नारायणभोपाल. नए साल में वन विभाग में कई नए बदलाव होने जा रहें है। ये सभी बदलाव नई सरकार के गठन के बाद होने की संभावना है। मौजूदा वन बल प्रमुख आरके गुप्ता और लघु वनोपज संघ के एमडी पुष्कर सिंह दिसम्बर में सेवानिवृत होने जा रहें है। सूत्रों के अनुसार वर्तमान वन विभाग के हॉफ गुप्ता के सेवानिवृत्ति के बाद वन विकास निगम के एमडी एके पाटिल वन बल प्रमुख होंगे। हालांकि उनका कार्यकाल एक महीने का ही होगा। इसी प्रकार लघु वन वनोपज संघ एमडी पुष्कर सिंह के रिटायरमेंट के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव नए एमडी होंगे। वर्तमान में डॉक्टर श्रीवास्तव वर्किंग प्लान शाखा के प्रमुख हैं। गौरतलब यह है कि अभी तक विभाग में हुई पदस्थापना के दौरान डॉक्टर श्रीवास्तव की वरिष्ठता अनदेखी की गई। इसी कारण संभावना जताई जा रही है की नई सरकार में उनकी पदस्थापना वरिष्ठता के आधार पर होगी। निगम के मौजूदा एमडी पाटिल के वन बल प्रमुख बनने पर पीसीसीएफ प्रशासन -एक के आरके यादव को निगम में एमडी के पद पर पदस्थ किए जाने की संभावना है। कैडर में पीसीसीएफ का पद प्रशासन-एक का नहीं है। कैडर में यह पद अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के अधिकारी के लिए निर्धारित है। डॉ श्रीवास्तव के संघ में चले जाने पर वर्किंग प्लान शाखा का प्रभार पीसीसीएफ जेएफएम पीके सिंह को दिया जा सकता है। फरवरी में अम्बाडे होंगे पीसीसीएफ वन्य प्राणीपाटिल के जनवरी में रिटायर होने पर पीसीसीएफ वन्य प्राणी असीम श्रीवास्तव वन बल प्रमुख बनेंगे और उनकी जगह पर 88 बैच के आईएफएस विजय एन अम्बाडे पीसीसीएफ वन्य प्राणी होंगे. विभाग में अम्बाडे की छवि वन्य प्राणी विशेष के रूप में बनी हुई है। अनूपपुर डीएफओ पर गिर सकती है गाजअनूपपुर डीएफओ सुशील प्रजापत पर गाज गिरने की संभावना प्रबल हो गई है। महिला कर्मचारियों के साथ बदसलूकी और खरीदी में गड़बड़ी संबंधित जांच रिपोर्ट प्रशासन-एक को मिल गई है। पीसीसीएफ प्रशासन एक शाखा ने आरोप पत्र तैयार कर लिए है। शीघ्र ही उन्हें जारी किया जा रहा है। डीएफओ प्रजापत के खिलाफ जांच वन संरक्षक शैलेंद्र गुप्ता ने की थी। सूत्रों ने बताया कि जांच प्रतिवेदन में उन्हें दोषी करार दिया गया है। इस बीच डीएफओ द्वारा वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ बदसलूकी का सिलसिला जारी है।

वन विभाग में चल रहा जंगलराज – हरियाली बढ़ाने के बजाय 10 हजार पौधों को फेंका.

Jungle Raj is prevailing in the Forest Department – instead of promoting greenery, 10 thousand saplings were thrown away. जेसीबी से मिट्टी और खाद नालों में डाली, एसडीओ ने रिपोर्ट में दस्तावेज और फोटो दिए, फिर भी डीएफओ ने कोई एक्शन नहीं लियाThe Soil and Fertilizers were added, and the SDO provided documentation and photos in the report. District Forest Officer (DFO) did not take any action. उदित नारायणभोपाल। मध्य प्रदेश में वन विभाग के अंदर जंगलराज पूरी तरह से फैल चुका है। हरियाली को बढ़ाने के लिए लाए गए करीब दस हजार पौधों जंगल में फेंकने का कारनामा उजागर हुआ है। जूनियर अधिकारी की रिपोर्ट के बाद भी वृक्षारोपण में बरती गई। इस लापरवाही पर कोई एक्शन नहीं हुआ है। ताजा मामला खरगोन जिले के भीकनगांव का है। खरगोन के इस मामले में भी बार-बार एसडीओ की रिपोर्ट पर डीएफओ ने अब तक कार्रवाई नहीं की है। एसडीओ ने अपनी रिपोर्ट में दस्तावेज और फोटो संलग्न किए हैं, बावजूद इसके डीएफओ ने कोई एक्शन नहीं लिया है। वृक्षारोपण में गड़बड़ी का मामला खरगोन वन मंडल के भीकनगांव रेंज का है। एसडीओ ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि 10 हजार से अधिक पौधे जंगल में फेंक दिए गए जिनका प्लांटेशन नहीं किया गया। यही नहीं प्लांटेशन के लिए खोदे गए गड्ढे के पास खाद और मिट्टी का ढेर लगा हुआ है। इसकी तस्वीर भी एसडीओ ने अपनी जांच रिपोर्ट में डीएफओ को भेजी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फर्जी और घटिया काम के प्रमाणकों को पास करने के लिए दबाव बनाया जाता है। वृक्षारोपण के लिए गड्ढों में मिट्टी परिवर्तन और खाद भी नहीं डाला गया है। जेसीबी से मिट्टी और खाद नालों में फेंके गए हैं। इस मुद्दे को लेकर वन विभाग के अफसरों ने चुप्पी साध ली। सूत्रों का कहना है कि खरगोन डीएफओ प्रशांत कुमार जब सागर दक्षिण में पदस्थित है तब वनीकरण क्षतिपूर्ति के तहत किए गए वृक्षारोपण में भी इसी तरीके की धांधली पाई गई थी। ऐसी गड़बड़ी के चलते उनके खिलाफ विभाग की जांच अभी भी चल रही है। इसके बाद भी खरगोन में वृक्षारोपण की गड़बड़ी पर उनकी लापरवाही बनी हुई है।

वन विभाग में मलिक-मकबूजा मद में करोड़ों की वित्तीय अनियमितताएं उजागर

अकेले सीहोर वन मंडल के हिसाब-किताब में 12 करोड़ से अधिक राशि का अंतर। एक वन संरक्षक से मांगा स्पष्टीकरण, जांच की जद में आए कई आईएफएसबाद अन्य IFS पर भी होगी कार्यवाही। उदित नारायण भोपाल। वन विभाग मध्य प्रदेश के वन मंडलों में पदस्थ डीएफओ की घोर लापरवाहीपूर्ण कार्यशैली के कारण बैतूल, हरदा और सीहोर वन मंडल के मालिक-मकबूजा में करोड़ों रुपए की वित्तीय हेर-फेर होने की जानकारी सामने आ रही है। अकेले सीहोर वन मंडल में ही विभागीय राजस्व लेखों के मिलान पर वित्तीय वर्ष 2022-23 में 12 करोड़ 27 लाख 99 हजार 81 रुपए की हेर-फेर हुई है। सीहोर वन मंडल में इस गड़बड़ी का सिलसिला अक्टूबर 2017 से शुरू हुई थी। गौरतलब है कि सीहोर वन मंडल में डीएफओ के पद पर पदस्थ रह चुके कई आईएफएस अफसर जांच की जद में आ रहे हैं। पीसीसीएफ मुख्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों से जानकारी निकल कर सामने आई है कि सीहोर के अलावा बैतूल और हरदा वन मंडल में भी मलिक मकबूजा लेखों में वित्तीय अनियमितता हुई है। सीहोर वन मंडल में हुई वित्तीय हेर-फेर की जांच के लिए मुख्य वन संरक्षक राजेश खरे ने डीएफओ एमएस डाबर की अध्यक्षता में तीन सदस्य जांच कमेटी गठित कर दी है। जांच कमेटी के अध्यक्ष डाबर ने बताया कि 1 महीने के भीतर समिति अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।विभागीय सूत्रों के मुताबिक मलिक-मकबूजा मद वित्तीय हेर-फेर का सिलसिला अक्टूबर 2017 से शुरू हुआ था, तब सीहोर डीएफओ के पद पर मनोज अर्गल पदस्थ थे और तब से लेकर अब तक यह सिलसिला चला आ रहा था। इस बीच कई डीएफओ पदस्थ हुए और पदोन्नति होकर मलाईदार पदों पर कार्य करते रहे हैं, ये सिलसिला अभी तक जारी है। विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सीहोर डीएफओ के पद पर सबसे लंबा कार्यकाल वर्तमान खंडवा सीएफ रमेश गनावा का रहा है। वर्तमान पीसीएफ उत्पादन ने इस गड़बड़ी को उजागर किया। पीसीसीएफ मुख्यालय को सभी सीसीएफ को पत्र लिखकर अपने-अपने वन मंडलों में जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे हुई है वित्तीय हेर-फेर 1. सीहोर वन मंडल में 0406 के विभागीय मद के स्थान पर 0408 अन्य विभाग के मद में कराई जा रही थी। 2. लेखा शीर्ष 0406 मद में जमा की जाने वाली राशि पूरे वित्तीय वर्ष 2022-23 में मात्र एक बार बिना किसी गणना के जमा की गई है. यह स्थिति प्रक्रिया अनुसार एवं नियमानुकूल नहीं है। 3. कोषालय से प्राप्त किए गए सब्सिडी डायरी रजिस्टर और साइबर रिसिप्ट रिपोर्ट से विभागीय राजस्व लेखों के मिलान पर वित्तीय वर्ष 2022-23 में रुपए 12 करोड़ 27 लाख 99 हजार 81 रुपए का अंतर परिलक्षित हुआ। 4. सीहोर वन मंडल में मालिक-मकबूजा की राशि जो कि राजस्व प्राप्ति नहीं है, इसको निरंतर राजस्व प्राप्ति के रूप में जमा कर अनियमितता की गई। 5. जितने भी डीएफओ पदस्थ रहे किसी ने भी वन विभाग के स्थान पर राजस्व प्राप्ति किसी अन्य विभाग के मद में जमा कराई जा रही राशि की मॉनिटरिंग नहीं की। अकेले सहाय को नोटिस, अन्य पर कार्रवाई क्यों नहीं सीहोर वन मंडल में यह अनियमितता अक्टूबर 2017 से शुरू हुई। इस वन मंडल में सबसे अधिक कार्यकाल रमेश गनावा का रहा है, किन्तु विभाग ने अकेले अनुपम सहाय को ही कारण बताओं नोटिस जारी किया है। जबकि वहां पर पदस्थ रहे अन्य अफसर से भी स्पष्टीकरण लिया जाना चाहिए लेकिन फिलहाल इस गड़बड़ झाले में अधिकारियों को बचाने के लिए एक बाबू को बलि का बकरा बनाया गया है। गनावा के पास आधा दर्जन से अधिक पदों का प्रभार वन विभाग में रमेश गनावा ऐसे अकेले आईएफएस अधिकारी हैं, जिनके पास आधा दर्जन से अधिक प्रभार दिए गए हैं। वर्तमान में उनकी पदस्थापना खंडवा सर्किल में है। इसके बाद पिछले दिनों बैतूल सीएफ फूलजले के तबादले के बाद वहां का प्रभार भी गनावा को ही दिया गया है। जबकि इसके पूर्व में बैतूल सर्कल में सीएफ का पद रिक्त होने पर प्रभार होशंगाबाद सर्कल में पदस्थ अफसर को दिया जाता रहा है। इसके अलावा उनके पास वर्किंग प्लान ऑफिसर शिवपुरी, वर्किंग प्लान ऑफिसर भोपाल, वन संरक्षक सामाजिक वानिकी बैतूल, और सामाजिक वानिकी खंडवा की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई है।

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