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एमपी अजब है एमपी गजब है ….. स्वास्थ्य मंत्री ने 1000 डॉक्टर को दरकिनार कर अपनी पत्नी का किया प्रमोशन

भोपाल . स्वास्थ्य विभाग में पदोन्नति में परिवारवाद का मामला सामने आया है। मंगलवार को स्वास्थ्य संचालनालय से एक आदेश जारी हुआ। इसमें बताया गया कि भोपाल की जिला स्वास्थ्य अधिकारी नीरा चौधरी को क्षेत्रीय कार्यालय में संयुक्त संचालक बनाया गया है। बता दें कि नीरा चौधरी प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी की पत्नी हैं और उन्हें पदोन्नत कर जो पद दिया गया है, वरिष्ठता सूची के आधार पर उस पद के लिए नीरा से पहले 1000 अन्य डॉक्टर दावेदार थे। स्वास्थ्य विभाग ने 2017 में प्रथम श्रेणी डॉक्टराें की अंतिम वरिष्ठता सूची जारी की थी। इसमें 1042 डॉक्टरों के नाम थे, लेकिन नीरा का नाम नहीं था। नीरा की नई नियुक्ति से डॉक्टरों में भी नाराजगी है। इस मामले में जब स्वास्थ्य मंत्री से संपर्क किया गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से मना कर दिया। 34 जिलों में सीनियर को दरकिनार कर जूनियर को बनाया सीएमएचओ प्रदेश के 52 जिलों में से 34 ऐसे जिलें है, जहां पिछले एक साल में सीनियर डाॅक्टरों के बजाय जूनियर को सीएमएचओ बनाया गया है। इनमें शाजापुर में डाॅ. राजू निदारिया को सीएमएचओ बनाया गया है, जबकि वहां उनसे सीनियर तीन अन्य डाॅक्टर एसडी जायसवाल, सुनील सोनी और आलोक सक्सेना पदस्थ हैं। खरगोन में रजनी डाबर को सीएमएचओ बनाया गया है, जबकि वहां एसएस चौहान, विजय फूलोरिया, राजेंद्र जोशी, डाॅ. कानूनगो, वंदना कानूनगो, इंदिरा गुप्ता और संजय भट्‌ट सीनियर हैं। बड़वानी में डॉ. अनिता सिंगारे को सीएमएचओ बनाया है, जबकि वहां तीन डाॅक्टर उनसे सीनियर हैं। इसी तरह रतलाम में डाॅ प्रभाकर नानावरे से 6 डाॅक्टर सीनियर हैं। धार, छतरपुर, दमोह, कटनी, रीवा, शहडोल समेत अन्य जिलों में पदस्थ सीएमएचओ से वरिष्ठ चिकित्सक पदस्थ हैं। इसी तरह अन्य जिलों में भी यही स्थिति हैं। वरिष्ठता क्रम में दो पद पीछे थीं नीरा नियमानुसार संयुक्त संचालक पद पर सिर्फ प्रथम श्रेणी अधिकारी को ही पदस्थ किया जा सकता है। इनमें वरिष्ठता क्रम में उप संचालक और उससे नीचे मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमएचओ) आते हैं। नीरा जिला स्वास्थ्य अधिकारी थीं और अकेले भोपाल में ही 70 से ज्यादा प्रथम श्रेणी डॉक्टर हैं। ये सभी डिप्टी डायरेक्टर पद पर हैं। इनमें अर्चना मिश्रा, प्रज्ञा तिवारी, दुर्गेश गौर, दिलीप हेड़ाऊ, हिमांशु जायसवाल, मनीष सिंह, राजीव श्रीवास्तव, अलका परगनिया, पद्माकर त्रिपाठी, इंद्रजीत सिकरवार और वीरेंद्र गौर समेत अन्य चिकित्सकों के नाम हैं। ये सभी पिछले 15 साल से संचालनालय में प्रशासनिक पदों पर हैं और ट्रांसफर की वजह से पदोन्नति नहीं चाहते हैं।

MP : शुरू हुआ ठगी का नया खेल, फेक हेल्थ अफसर के झांसे से ऐसे बचा छात्र, आप भी रहें सतर्क

भोपाल। कोरोना कहर के बीच अब ठगों ने कोविड वैक्सीन को ठगी का नया हथियार बनाया है। भोपाल में एक छात्र को वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के नाम पर ठगी का शिकार बनाने का प्रयास किया गया। आरोपी ने छात्र को जल्दी रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर वैक्सीन खत्म होने का झांसा देते हुए ओटीपी नंबर मांगा था। हालांकि, छात्र की समझदारी से वह ठगी का शिकार होने से बच गया। उसने इसकी शिकायत साइबर सेल में की है। एएसपी रजत सकलेचा ने बताया कि शहर में रहने वाले एक छात्र को बुधवार को कॉल आया। कॉलर ने खुद को केंद्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग का अधिकारी बताया। उसने कहा- भारत में कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए हैं। इसी के संबंध में आपको कॉल किया गया है। रजिस्ट्रेशन फीस के 500 रुपए भरे जाने हैं। बाकी रुपए वैक्सीन लगाने के दौरान लिए जाएंगे। रजिस्ट्रेशन के लिए आपके मोबाइल पर ओटीपी नंबर आएगा। आपको उसे शेयर करना है। इसके बाद आपका रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। छात्र ने कॉलर से कहा कि अभी तो वैक्सीन ही नहीं आई, तो रजिस्ट्रेशन कैसे होने लगे? उसने समझदारी दिखाई और फोन काट दिया। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। हालांकि आरोपियों का पता नहीं चल पाया है। ऐसे फोन अटेंड न करें एएसपी सकलेचा के मुताबिक, कोरोना वैक्सीन के लिए आए फोन कॉल को अटेंड न करें। रजिस्ट्रेशन के नाम पर आप का आधार नंबर मांगा जाएगा। फिर कहेंगे कि आप के मोबाइल पर OTP आएगा, वो बताओ, रजिस्ट्रेशन हो जाएगा और वैक्सीन जल्द मिल जाएगी। OTP बताते ही ठग एकाउंट को हैक कर लेगा। इस तरह से फंसाते हैं जाल में साइबर ठग किसी भी तरह ओटीपी नंबर हासिल करना चाहते हैं। इसके लिए एटीएम कार्ड से लेकर क्रेडिट कार्ड एक्सपायर होने, खाता सीज होने, ऑन ऑन लाइन पेमेंट एप बंद होने और खाते में रुपए ट्रांसफर करने के नाम पर लिंक को क्लिक करने तक का झांसा देते हैं। इसलिए किसी को भी एटीएम नंबर, खाता नंबर, पिन (पासवर्ड) और ओटीपी नंबर शेयर नहीं करना चाहिए।

डायबिटीज : वेटलॉस और डाइट पर कंट्रोल करेंगे तो ठीक हो जाएगी ये बीमारी

नई दिल्ली। डायबिटीज के बारे में एक आम राय है कि ये बीमारी जिसे होना है उसे जरूर होगी। लेकिन, विशेषज्ञ अब इसे पूरी तरह सच नहीं मानते। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की प्रोफेसर और हार्वर्ड वुमन्स हेल्थ वॉच की एडिटर इन चीफ डॉ. होप रिकीओटी कहती हैं कि प्री-डायबिटीज को ठीक किया जा सकता है। क्या है प्री- डायबिटीज? प्रीडायबिटीज वह अवस्था होती है जब व्यक्ति का शरीर ग्लूकोज को आसानी से ऊर्जा में नहीं बदल पाता। इससे शुगर का स्तर बढ़ जाता है, लेकिन यह इतना नहीं होता कि इसे डायबिटीज कहा जाए। हालांकि यह स्थिति आगे चलकर बीमारी में बदल जाती है। डॉ. रिकीओटी कहती हैं कि उस समय अपने वजन को पांच से सात फीसदी तक कम कर लिया जाए और खानपान को सुधार लिया जाए तो डायबिटीज से लंबे समय तक बचा जा सकता है। वे कहती हैं कि ऐसे व्यक्ति को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट एक्सरसाइज करनी चाहिए। भोजन में फल, सब्जी, होल ग्रेन, हेल्दी फिट शामिल करना चाहिए और शुगर कम कर देनी चाहिए। उसे हेल्दी लाइफ स्टाइल अपनानी चाहिए। हैल्दी लाइफस्टाइल डायबिटीज से बचने का उपाय मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल की फिजिशियन डॉ. मोनीक टेला बताती हैं कि ‘द डायबिटीज प्रिवेंशन प्रोग्राम’ एक लंबी अवधि का अध्ययन है। 20 साल के मेडिकल रिसर्च में यह साबित हुआ है कि यदि हेल्दी लाइफ स्टाइल अपनाई जाए तो डायबिटीज से बचा जा सकता है। बल्कि अगर डायबिटीज़ की बीमारी नई है तो इसे रिवर्स भी किया जा सकता है। ऐसे समझें क्या है लो-कैलोरी डाइट इंग्लैंड में हुई रिसर्च में पाया गया कि जिन लोगों को नई डायबिटीज है वो लो-कैलोरी डाइट पर जाकर बीमारी को ठीक कर सकते हैं। रिसर्च में।ऐसे मरीजाें को दो से पांच माह तक 625 से 850 कैलोरी की लिक्विड डाइट लेने काे कहा गया। इसके बाद उन्हें सामान्य डाइट के लिए कहा गया, लेकिन इसमें भी हेल्दी चीजें लेनी थी ताकि वजन न बढ़े। अध्ययन में पाया गया कि करीब 50% लोगों का शुगर लेवल एक साल तक नहीं बढ़ा। ऐसी डाइट डॉक्टर के परामर्श पर ही लेनी चाहिए।

देश में जनवरी में वैक्सीनेशन शुरू, शायद महामारी का सबसे बुरा दौर खत्म

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने उम्मीद जताई है कि देश में कोरोना वैक्सीन लगाने का काम जनवरी में शुरू हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में शायद कोरोना महामारी का सबसे बुरा दौर खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि जनवरी के किसी भी हफ्ते में भारत अपने नागरिकों को वैक्सीन देने की स्थिति में होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने रविवार को न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा, ‘मुझे निजी तौर पर लग रहा है कि जनवरी के किसी हफ्ते में वैक्सीन का पहला डोज दे दिया जाएगा। हम इस स्थिति में पहुंच चुके हैं। हालांकि, हमारी पहली प्राथमिकता है कि वैक्सीन सुरक्षित और इफेक्टिव रहे। इसके साथ हम किसी भी तरह का समझौता नहीं कर सकते हैं।’ हमारा रिकवरी रेट दुनिया में सबसे अच्छा हर्षवर्धन ने कहा, ‘कुछ ​महीनों पहले देश में कोरोना के 10 लाख एक्टिव केस थे, जो अब करीब तीन लाख हैं। संक्रमण के एक करोड़ मामले आ चुके हैं। इनमें से 95 लाख से ज्यादा मरीज ठीक हो चुके हैं। हमारा रिकवरी रेट दुनिया में सबसे ज्यादा है। मुझे लगता है कि जितनी तकलीफों से हम गुजरे हैं अब वे खत्म होने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इतना बड़ा देश होते हुए भी हम दूसरे बड़े देशों से बेहतर स्थिति में है।’ प्रायोरिटी वाले लोगों में से सभी को वैक्सीन लगाने की कोशिश स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भारत सरकार बीते चार महीनों से राज्य सरकारों के साथ मिलकर राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर वैक्सीनेशन की तैयारियां कर रही है। 260 जिलों में 20 हजार वर्कर्स को इसकी ट्रेनिंग दी गई है। हमारी कोशिश होगी कि हमारी प्राथमिकता में शामिल हर व्यक्ति को वैक्सीन लगाई जाए, लेकिन कोई इसे नहीं लगवाना चाहे तो उस पर दबाव नहीं डाला जाएगा। कोरोना के खिलाफ हर तरह से तैयार रहना होगा भारत को पोलियो की तरह कोरोना मुक्त करना मुमकिन है? इस सवाल पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने पोलियो और COVID-19 अलग-अलग बीमारियां हैं। पोलियो को खत्म करना वैज्ञानिक रूप से संभव था। आखिरकार कोरोनावायरस भी कम हो जाएगा और हम छिटपुट मामलों के बारे में सुनेंगे।

इंदौर में कोरोना से आबकारी सब इंस्पेक्टर की मौत

इंदौर। कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार सुबह आबकारी विभाग के सब इंसपेक्टर संतोष सिंह (44) की कोरोना के चलते मौत हो गई। इंदौर में अब तक 837 लोग कोरोना का शिकार हो चुके है। सीधी के रहने वाले संतोष सिंह लंबे समय से यहां पदस्थ थे। उनकी 12 साल की बेटी और 10 साल का बेटा है। अधिकारियों ने बताया कि लंबे समय से वह कोविड-19 से जूझ रहे थे और निजी अस्पताल में भर्ती थे लेकिन रविवार सुबह उनका निधन हुआ है। 13 दिसम्बर को हाई कोर्ट जज की मौत कुछ दिनों पहले इंदौर हाईकोर्ट जज वंदना कसरेकर की भी कोरोना से मौत हुई थी और हाईकोर्ट में 52 से अधिक कर्मचारी इस संक्रमण का शिकार हुए थे जिसके बाद लगातार यह आंकड़ा बढ़ते जा रहा है। इंदौर में सबसे पहली मौत निरीक्षक देवेंद्र चन्द्रवंशी की कोविड-19 कॉल शुरू होते ही हुई थी। उन्हें भी लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रखा था लेकिन स्वास्थ्य अधिकारी उनकी जान नहीं बचा पाए थे। इंदौर में अब तक कुल पॉजिटिव मरीजों की संख्या 51563 है। शनिवार को एक ही दिन में 395 पॉजिजिव मिले थे। 837 लोगों की मौत हो चुकी है।

अगले महीने से भारत में भी वैक्सीन लगने लगेगी

नई दिल्ली । सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) दिसंबर के अंत तक अपनी वैक्सीन कोवीशील्ड के अंतिम फेज के क्लिनिकल ट्रायल्स के डेटा को रेगुलेटर को सौंप देगी। अगर डेटा संतोषजनक रहता है तो कोवीशील्ड को जनवरी के पहले हफ्ते में इमरजेंसी अप्रूवल मिल सकता है। यानी जनवरी से वैक्सीनेशन ड्राइव शुरू हो सकती है। इस वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और ब्रिटिश फर्म एस्ट्राजेनेका ने मिलकर डेवलप किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, SII अगले दस दिन में अंतिम डेटा रेगुलेटर को सौंप देगा। दरअसल, पिछले हफ्ते ही ड्रग रेगुलेटर सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (SEC) की मीटिंग हुई। इसमें कोवीशील्ड के साथ ही भारत बायोटेक की कोवैक्सिन और फाइजर की वैक्सीन के डेटा पर चर्चा हुई। इन तीनों वैक्सीन के लिए इमरजेंसी अप्रूवल मांगा गया है। कमेटी ने तीनों ही वैक्सीन कैंडिडेट्स के इमरजेंसी अप्रूवल के आवेदन पर कुछ सवाल उठाए और कंपनियों से जवाब मांगे थे। फाइजर, सीरम और भारत बायोटेक ने मांगा इमरजेंसी अप्रूवल; कुछ ही हफ्तों में मिलेगी वैक्सीन कमेटी ने SII से कहा था कि भारत में चल रहे फेज-2/3 क्लिनिकल ट्रायल्स का सेफ्टी डेटा अपडेट किया जाए। साथ ही, UK और भारत में हुए क्लिनिकल ट्रायल्स का इम्युनोजेनेसिटी डेटा पेश किया जाए। इसके अलावा ब्रिटेन में ड्रग रेगुलेटर के इमरजेंसी अप्रूवल पर फैसले के बारे में भी पूछताछ की गई थी। फाइजर ने कमेटी से कुछ समय मांगा था। वहीं, भारत बायोटेक के कोवैक्सिन के फेज-3 ट्रायल्स के डेटा के लिए अभी इंतजार करना पड़ सकता है। भारत की टॉप वैक्सीन साइंटिस्ट और वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर डॉ. गगनदीप कांग के मुताबिक, पिछले साल ही भारत के नए क्लिनिकल ट्रायल्स के नियम बने हैं। इसमें रेगुलेटर को आपात परिस्थितियों में बिना ट्रायल के भी दवा या वैक्सीन को इमरजेंसी यूज के लिए मंजूरी देने का अधिकार दिया है। डॉ. कांग के मुताबिक, इमरजेंसी यूज की परमिशन देने के बाद भी मॉनिटरिंग क्लिनिकल ट्रायल्स जैसी ही होती है। हर पेशेंट के डिटेल्स जरूरी होते हैं। उन पर नजर रखी जाती है। जिस कंपनी को अपने प्रोडक्ट के लिए कहीं और लाइसेंस मिला है, उसे प्री-क्लिनिकल और क्लिनिकल ट्रायल्स का पूरा डेटा रेगुलेटर को सबमिट करना होता है। जब कंपनी इमरजेंसी रिस्ट्रिक्टेड यूज की परमिशन मांगती है, तो रेगुलेटर के स्तर पर दो स्टेज में वह प्रोसेस होती है। सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी उस एप्लिकेशन पर विचार करती है। उसके अप्रूवल के बाद मामला अपेक्स कमेटी के पास जाता है। इस कमेटी में स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े विभागों के सचिव भी होते हैं।

कोरोना वैक्सीन पर बड़ी खुशखबरी, एम्स डायरेक्टर बोले- अगले महीने तक भारत को मिल जाएगा टीका

देश में कोरोना की दूसरी लहर थमती नजर आ रही है. पिछले 24 घंटे में कोरोना के करीब 35 हजार नए मामले सामने आए हैं. कोरोना की थमती रफ्तार पर दिल्ली एम्स के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने खुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि हम कोरोना ग्राफ देख रहे हैं और अगर नियमों का पालन करते रहे तो यह गिरावट जारी रहेगी. डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि आने वाले तीन महीने काफी महत्वपूर्ण हैं. अगर हम सावधानी बरतना जारी रखते हैं तो कोरोना महामारी के खतरे को टाल सकते हैं. कोरोना वैक्सीन पर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि भारत में जो टीके बनाए जा रहे हैं, वह अंतिम चरण के ट्रायल में है. डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने उम्मीद जताई कि इस महीने के अंत तक या अगले महीने की शुरुआत तक हमें कोरोना वैक्सीन के इमरजेंसी वैक्सीनाइजेशन की इजाजत मिल जाए. हमें वैक्सीन डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर सख्त कदम उठाने की जरूरत है, जिससे जनता को वैक्सीन देना शुरू किया जा सके. डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहना है कि कोरोना वैक्सीन को लेकर अच्छा डेटा उपलब्ध है कि टीके बहुत सुरक्षित हैं. वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावकारिता से कोई समझौता नहीं किया गया है. 70,000-80,000 स्वयंसेवकों ने टीका लगवाया, कोई महत्वपूर्ण गंभीर प्रतिकूल प्रभाव नहीं देखा गया. डेटा से पता चलता है कि अल्पावधि में टीका सुरक्षित है. डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि जब हम बड़ी संख्या में लोगों को टीका लगाते हैं, तो उनमें से कुछ को कोई न कोई बीमारी हो सकती है, जो टीके से संबंधित नहीं हो सकती है.

कोरोना पर पीएम मोदी क्यों बोले – हमें किनारे पर कश्ती नहीं डूबने देनी है

नई दिल्ली। देश में अभी कोरोना की वैक्सीन आने में वक्त है। और जब तक वैक्सीन न आ जाए, हिदायतें ही काम आएंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश को ऐसी ही हिदायतें दी हैं। मंगलवार को वे बीते आठ महीने में नौवीं बार मुख्यमंत्रियों की बैठक ले रहे थे। 9 राज्यों के सीएम के साथ करीब चार घंटे चली इस मीटिंग के बाद प्रधानमंत्री बोले- ‘अभी यह तय नहीं है कि कोरोना वैक्सीन की एक डोज देनी होगी या दो। उसकी कीमत क्या होगी, यह भी तय नहीं है। अभी ऐसे किसी भी सवाल का जवाब हमारे पास नहीं हैं।’ हालांकि, प्रधानमंत्री ने वैक्सीन आने के बाद की बात जरूर की। उन्होंने कहा कि वैक्सीन के बारे में तो वैज्ञानिक ही बताएंगे, लेकिन हमें वैक्सीन आने के बाद की तैयारी अभी से करनी होगी। यानी उसका स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन। इन 9 राज्यों के CM शामिल हुए मीटिंग में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे, छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल, गुजरात के सीएम विजय रूपाणी, हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर, केरल के सीएम पिनाराई विजयन और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शामिल हुए। महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात उन राज्यों में शामिल हैं, जहां एक्टिव केस तेजी से बढ़ रहे हैं। मोदी ने कहा- वैक्सीन की रिसर्च आखिरी दौर में पहुंची है। भारत जो भी वैक्सीन देगा, वो वैज्ञानिक तौर पर खरी होगी। भारत सरकार हर डेवलपमेंट पर बारीकी से नजर रख रही है। अभी यह तय नहीं है कि वैक्सीन की एक डोज होगी, दो डोज होगी। कीमत भी तय नहीं है। इन सवालों के जवाब हमारे पास नहीं हैं। वैज्ञानिक हैं, जो वैक्सीन बनाने वाले हैं। कॉरपोरेट वर्ल्ड का भी कंपटीशन है। हम इंडियन डेवलपर्स और दूसरे मैन्यूफैक्चरर्स के साथ भी काम रहे हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि वैक्सीन आने के बाद यही प्राथमिकता हो कि सभी तक पहुंचे। अभियान बड़ा होगा और लंबा चलने वाला है। हमें एकजुट होकर एक टीम के रूप में काम करना ही पड़ेगा। वैक्सीन को लेकर भारत के पास जैसा अनुभव है, वो बड़े-बड़े देशों को नहीं। भारत जो भी वैक्सीन देगा, वो वैज्ञानिक तौर पर खरी होगी। वैक्सीन डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर राज्यों के साथ मिलकर खाका रखा गया है। फिर भी ये निर्णय तो हम सब मिलकर करेंगे।

CM शिवराज ने PM को बताया- प्रदेश में लॉकडाउन नहीं लगाया जाएगा

भाेपाल . मध्य प्रदेश में कोरोना वैक्सीन की कोल्ड चेन और टीकाकरण के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। इसके लिए जिलों में टास्क फोर्स बनेगी। मुख्यमंत्री ने पीएम के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कहा कि मध्य प्रदेश में कोरोना वैक्सीन के लिए ह्यूमन ट्रायल भी शुरू हो गए हैं। शिवराज ने प्रधानमंत्री मोदी को बताया कि प्रदेश में लॉकडाउन नहीं लगाया जाएगा। कोरोना के टीके को लेकर मध्य प्रदेश सरकार ने तैयारी कर ली है। इसके मुताबिक सबसे पहले प्रदेश के 5 लाख स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीका लगाया जाएगा। इसके बाद प्रदेश के करीब 30 लाख लोग जो 60 साल से ज्यादा उम्र के हैं, उन्हें टीका लगाया जाएगा। सीएम ने कहा कि टीकाकरण अभियान कैसे किया जाए, इसकी व्यवस्था हमने बना ली है। मध्य प्रदेश पूरी तैयारी कर रहा है, स्वास्थ्य कर्मियों को इसकी ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि वैक्सीन आने पर नागरिकों को लगाई जा सके। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की है। बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। प्रधानमंत्री ने कोरोना की स्थिति की समीक्षा करने के साथ वैक्सीन के वितरण की रणनीति को लेकर मुख्यमंत्रियों से चर्चा की है। वर्चुअल मीटिंग के माध्यम से चल रही यह बैठक दो चरणों में हुई। पहले चरण में प्रधानमंत्री उन आठ राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात की, जहां कोरोना का कहर सबसे ज्यादा है। इसके बाद दोपहर 12 बजे से बाकी बचे राज्यों की स्थिति पर समीक्षा की। प्रधानमंत्री मोदी कोरोना की स्थिति की समीक्षा के लिए अब तक कई बार राज्यों के साथ बैठक कर चुके हैं। मध्य प्रदेश की वर्तमान स्थिति की बात करें, तो पिछले एक सप्ताह में कोरोना केस तेजी से बढ़े हैं। जिसे देखते हुए भोपाल, इंदौर और ग्वालियर सहित सात जिलों में नाइट कर्फ्यू भी लगाया गया है। केंद्र सरकार की ओर से लगातार यह प्रयास भी हो रहे हैं कि जब भी कोरोना का टीका उपलब्ध होगा, उसके सुचारू वितरण की व्यवस्था हो सके। भारत फिलहाल पांच वैक्सीन तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा हैं। इनमें से चार परीक्षण के दूसरे या तीसरे चरण में हैं जबकि एक पहले या दूसरे चरण में है।

देश में वैक्सीन के इमरजेंसी यूज पर विचार कर रही सरकार

नई दिल्ली । देश में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 91 लाख के पार हो गया है। अब तक 91 लाख 39 हजार 560 लोग संक्रमित हो चुके हैं। राहत की बात है कि इनमें 85 लाख 60 हजार 625 लोग ठीक हो चुके हैं। अभी 4 लाख 43 हजार 125 मरीजों का इलाज चल रहा है। संक्रमण के चलते जान गंवाने वालों की संख्या अब 1 लाख 33 हजार 750 हो गई है। रविवार को 24 घंटे के अंदर 43 हजार 652 नए मरीज मिले। 40 हजार 586 लोग रिकवर हुए और 487 की मौत हो गई। इस बीच, केंद्र सरकार ने जल्द से जल्द कोरोना वैक्सीन को लोगों तक पहुंचाने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले बताया कि केंद्र सरकार कोविड-19 वैक्सीन के इमरजेंसी यूज पर भी विचार कर रही है। मतलब तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल के बाद अगर सबकुछ सही रहा तो सरकार वैक्सीन के इमरजेंसी यूज के लिए मंजूरी दे सकती है। इमरजेंसी यूज के लिए नियम बनेगा केंद्र सरकार की ओर से वैक्सीन को लेकर बनाई गई टीम ने पिछले दिनों बैठक की। बताया जाता है कि इसमें वैक्सीन के प्राइज, खरीददारी, वैक्सीनेशन प्रॉसेस, स्टोरेज आदि मसलों पर बातचीत की गई। इसमें नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) विनोद पॉल, सरकार के चीफ साइंटिफिक एडवाइजर के. विजय राघवन और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण शामिल हुए थे। इसी में वैक्सीन के इमरजेंसी यूज को लेकर भी चर्चा हुई। तय हुआ कि वैक्सीन के इमरजेंसी यूज की मंजूरी देने के लिए कुछ नियम बनाए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित राज्य के प्रतिनिधियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बातचीत कर सकते हैं। न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी। बताया कि प्रधानमंत्री दो बैठकें करेंगे। सबसे पहले संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित 8 राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कॉन्फ्रेंसिंग होगी। दूसरी मीटिंग में अन्य राज्यों और केंद्र शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों या प्रतिनिधियों से बातचीत होगी। इसमें वह वैक्सीन के वितरण प्रक्रिया, दूसरी लहर के रोकथाम जैसे मुद्दों पर बात करेंगे।

कोरोना वैक्सीन के लिए करीब 52 हजार करोड़ का फंड, हर डोज पर 500 से 600 रु. खर्च होंगे

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा था कि देश के हर नागरिक को वैक्सीन लगाई जाएगी। देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार ने 130 करोड़ की आबादी तक वैक्सीन पहुंचाने के लिए खाका तैयार कर लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने वैक्सीन खरीदने और पूरे देश में इसके डिस्ट्रीब्यूशन के लिए करीब 51 हजार करोड़ रुपए का फंड निर्धारित कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, करंट फाइनेंशियल ईयर में वैक्सीन के लिए पैसों की कमी न आए, इसके लिए पहले से ही तैयारी कर ली गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशासनिक अफसरों का अनुमान है कि देश में हर व्यक्ति पर वैक्सीन का करीब 500 से 600 रुपए (6 से 7 डॉलर) का खर्च आएगा। ऐसी है सरकार की तैयारी देश में हर व्यक्ति को दो बार वैक्सीन लगाया जाएगा। एक डोज का खर्च करीब 2 डॉलर यानी लगभग 147 रु. आएगा। एक व्यक्ति के वैक्सीन के रख-रखाव और उसके ट्रांसपोर्टेशन पर 2 से 3 डॉलर यानी लगभग 219 रु. का खर्च आएगा। सरकार समर्थित पैनल ने भविष्यवाणी की है कि भारत संक्रमण के चरम पर है, फरवरी तक इसका प्रसार जारी रह सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा था कि वैक्सीन देश के सभी लोगों तक पहुंचाई जाएगी। ऐसा अनुमान है कि सरकार ने वैक्सीन के लिए पर्याप्त रकम जुटा ली है और आगे भी इसमें कोई कमी नहीं आएगी। मोदी सरकार ठोस कदम उठा सकती है सरकार के पैनल ने अनुमान लगाया है कि भारत में कोरोना का एक पीक आ चुका है। संक्रमण अभी फरवरी तक फैलेगा। कोरोना के चलते देश की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचा है। इसलिए, मोदी सरकार आने वाले दिनों में अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई ठोस कदम उठा सकती है।

कोरोना : देश में नए केस में 3 महीने की सबसे बड़ी गिरावट, सिर्फ 45 हजार मरीज मिले, 70 हजार ठीक हुए

नई दिल्ली . कोरोना के ग्राफ में लगातार गिरावट आ रही है। सोमवार को सिर्फ 45 हजार 490 नए केस आए। 69 हजार 800 मरीज ठीक हो गए। इससे 24 हजार एक्टिव केस कम हो गए। अब 7.47 लाख मरीजों का इलाज चल रहा है। 17 सितंबर को यह आंकड़ा 10.17 लाख तक पहुंच गया था। नए केस में यह तीन महीने की सबसे बड़ी गिरावट है। इससे कम केस 39 हजार 170 केस 20 जुलाई को आए थे। देश में अब तक 75.74 लाख केस आ चुके हैं, 67.30 लाख मरीज ठीक हो चुके हैं, 1.15 लाख मरीजों की इस बीमारी ने जान ले ली है। सोमवार को 589 लोगों की मौत हुई। ये आंकड़े covid19india.org से लिए गए हैं। मध्यप्रदेश : राज्य में सोमवार को 1015 लोग संक्रमित पाए गए। 1287 लोग रिकवर हुए और 13 मरीजों की मौत हो गई। अब तक 1 लाख 61 हजार 203 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए जा चुके हैं। इनमें 12 हजार 996 मरीजों का अभी इलाज चल रहा है, जबकि 1 लाख 45 हजार 421 लोग ठीक हो चुके हैं। संक्रमण के चलते अब तक 2786 मरीजों की मौत हो चुकी है।

कोरोना पर खुशखबरी देश में फरवरी तक पूरी तरह से काबू में होगा कोरोना

नई दिल्ली। भारत में कोरोना वायरस के मामले में राहत भरी है। कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में दुनिया भर में दूसरे पायदान पर पहुंच चुके भारत के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। सरकार की ओर से बनाई गई वैज्ञानिकों के एक पैनल का कहना है कि भारत में कोरोना वायरस महामारी अपने चरम से गुजर चुकी है और अब ढलान पर है। यानी कोरोना वायरस महामारी का सबसे बुरा दौर गुजर चुका है। सरकारी पैनल तो यहां तक कह रहा है कि फरवरी 2021 तक, यानी अगले करीब सवा चार महीनों में यह महामारी काबू में आ जाएगी। सरकारी पैनल का कहना है कि भारत में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या एक करोड़ छह लाख से ज्‍यादा नहीं होगी। अभी भारत में कोरोना के करीब 75 लाख केस हैं। पैनल का कहना है कि वायरस से बचाव को लेकर किए जा रहे उपाय जारी रखे जाने चाहिए। पैनल ने महामारी के रुख को मैप करने के लिए कम्‍प्‍यूटर मॉडल्‍स का इस्‍तेमाल किया है। IIT हैदराबाद के प्रोफेसर एम. विद्यासागर की अध्यक्षता में बने इस पैनल ने कहा कि वायरस से बचाव को लेकर किए जा रहे उपाय जारी रखे जाने चाहिए। देशवासियों को सभी सावधानियों जैसे- मास्‍क, सोशल डिस्‍टेंसिंग, क्‍वारंटीन का पालन करते रहना होगा। फरवरी तक महामारी पर काबू होने की भी उम्मीद है। लेकिन यह तभी संभव होगा जब लोग कोरोना से बचाव के नियमों का पूरी तरह से पालन करना जारी रखें। एक्टिव केस हो रहे हैं कम कोरोना महामारी को नियंत्रण में तभी माना जाएगा एक्टिव केस बहुत कम बचे हों। देश में एक्टिव केसों की संख्या में लगातार गिरवाट देखने को मिल रही है। जो कि अच्छे संकते मिल रहे हैं। 17 सितंबर को 10.7 लाख ऐक्टिव केसेज का पीक था। उसके बाद एक बार 26-27 सितंबर को थोड़ा उछाल देखा गया। हालांकि उसके बाद से तेजी से ऐक्टिव केसेज कम हुए हैं। 18 अक्‍टूबर तक देश में 7.83 लाख ऐक्टिव केस थे। टोटल केसेज में ऐक्टिव केसेज का हिस्‍सा अब केवल 10.45 फीसदी रह गया है। इसे 1% से कम पर लाना होगा। अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो सरकारी पैनल का अनुमान सही साबित हो सकता है।

दिसंबर तक देश के लिए कोरोना टीके की 30 करोड़ तक खुराक बना लेंगे

नई दिल्ली। सीरम इंस्टीट्यूट (एसएसआई) ने कहा कि वह दिसंबर तक कोरोना वैक्सीन के 30 करोड़ डोज बना लेगा। संस्थान के कार्यकारी निदेशक डाॅ. सुरेश जाधव ने कहा कि डीसीजीआई से लाइसेंस मिलते ही टीके लॉन्च कर दिए जाएंगे। सीरम इंस्टीट्यूट ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्रेजेनेका के साथ मिलकर वैक्सीन बना रहा है। डॉ. जाधव ने कहा कि सीरम 5 अलग-अलग उत्पादों पर काम कर रहा है। जो डोज बनेंगे, उनमें से आधे भारत व आधे मिलिंडा-बिल गेट्स की संस्था गैवी के जरिए गरीब देशों की मदद के लिए भेजे जाएंगे। रूसी वैक्सीन के ट्रायल की सिफारिश: सीडीएससीओ की एक्सपर्ट कमेटी ने भारत में रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-5 के दूसरे चरण के ट्रायल की सिफारिश की है। दो दिन में मंजूरी मिल सकती है। टीका कब मिलेगा? डाॅ जाधव ने कहा- हम दिसंबर में नियामक डीसीजीआई को तीसरे चरण के ट्रायल का डेटा उपलब्ध करा देंगे। नियामक संतुष्ट होते हैं तो हमें मार्केटिंग प्राधिकार के साथ एक महीने में टीके के आपात इस्तेमाल का लाइसेंस मिल सकता है। फिर हम प्रीक्वालिफिकेशन के लिए डब्ल्यूएचओ जाएंगे। उसके बाद टीके बाजार में आ जाएंगे। पहले किसे मिलेगा? सीरम ने कहा- टीका लगाने की प्राथमिकता सूची में सबसे पहले स्वास्थ्यकर्मी होने चाहिए। दूसरे नंबर पर 60 साल से ऊपर के बुजुर्ग हों। 18 साल से कम उम्र वालों पर बहुत कम परीक्षण चल रहे हैं, इसलिए हो सकता है कि उनका नंबर बाद में आए। 18 से 50 साल के उम्र के नागरिकों को आिखर में टीका लगाया जा सकता है।

कोरोना वैक्सीन को लेकर PM मोदी ने की बैठक, कहा- देश में हर किसी के पास पहुंचे वैक्सीन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शनिवार को देश में कोविड-19 महामारी की स्थिति और वैक्सीन की स्थिति, वितरण और प्रशासन की तैयारियों को लेकर समीक्षा की. प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में अधिकारियों से कहा कि कोरोना वैक्सीन के वितरण को लेकर ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे जल्दी से जल्दी पूरे देश में कोरोना वैक्सीन पहुंच सके. साथ ही वैक्सीन का वितरण सुचारू रुप से होना चाहिए. साथ ही वितरण के लिए हमें चुनाव प्रबंधन के अनुभव का इस्तेमाल करना चाहिए. बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक समुदाय की मदद करने के प्रयास में आगे बढ़ने का निर्देश देते हुए कहा कि हमें अपने अपने प्रयासों को तत्काल पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं रखना चाहिए. तेजी से पहुंच हो सुनिश्चितः PM मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया कि देश की भौगोलिक स्थिति और विविधता को ध्यान में रखते हुए वैक्सीन की पहुंच तेजी से सुनिश्चित की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक्स, वितरण और प्रशासन में हर कदम को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए. इसमें कोल्ड स्टोरेज चेन, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, मॉनिटरिंग मैकेनिज्म, एडवांस असेसमेंट और आवश्यक उपकरण तैयार करने की एडवांस प्लानिंग शामिल होनी चाहिए. कोरोना वैक्सीन के वितरण को लेकर पीएम मोदी ने आगे निर्देश दिया कि हमें देश में चुनाव और आपदा प्रबंधन के सफल आयोजन के अनुभव का उपयोग करना चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समान तरीके से वैक्सीन के वितरण और प्रशासन प्रणालियों को लागू किया जाना चाहिए. इसमें राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, जिला स्तरीय पदाधिकारियों, सिविल सोसाइटी के संगठनों, स्वयंसेवकों, नागरिकों और सभी आवश्यक डोमेन के विशेषज्ञों की भागीदारी होनी चाहिए. पूरी प्रक्रिया में एक मजबूत आईटी बैकबोन होना चाहिए और सिस्टम को इस तरह से डिजाइन किया जाना चाहिए ताकि हमारी स्वास्थ्य प्रणाली के लिए स्थायी मूल्य हो. इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में कोरोना केस और वृद्धि दर में लगातार गिरावट को नोट किया. पीएम मोदी के साथ बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव, नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य), प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार, वरिष्ठ वैज्ञानिक, पीएमओ और भारत सरकार के अन्य विभागों के के अधिकारी हिस्सा लिया. पाकिस्तान शामिल नहीं कोरोना महामारी से निजात पाने के लिए भारत समेत कई देशों में वैक्सीन की खोज का काम जारी है. भारत में तीन वैक्सीन की खोज का काम एडवांस स्तर पर चल रहा है, जिनमें से 2 दूसरे चरण में हैं और एक तीसरे चरण में है. भारतीय वैज्ञानिक और रिसर्च टीम पड़ोसी देशों अफगानिस्तान, भूटान, बांग्लादेश, मालदीव, मॉरीशस, नेपाल और श्रीलंका में अनुसंधान क्षमताओं को सहयोग और मजबूत कर रहे हैं. साथ ही बांग्लादेश, म्यांमार, कतर और भूटान से अपने यहां क्लीनिकल ट्रायल की गुजारिश की गई है. हालांकि इन सबमें पाकिस्तान शामिल नहीं है. वैश्विक समुदाय की मदद करने के प्रयास में प्रधानमंत्री मोदी ने आगे निर्देश दिया कि हमें अपने अपने प्रयासों को तत्काल पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि वैक्सीन वितरण प्रणाली के लिए वैक्सीनंस, दवाइयां और आईटी प्लेटफॉर्म प्रदान करने के लिए पूरी दुनिया में पहुंचना चाहिए.

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