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शिक्षक का कमाल: 2,900 रुपये में बनाई एआई मैडम, 95 प्रतिशत बढ़ गई हाजिरी

Teacher’s amazing feat: AI Madam created for Rs 2,900, attendance increased by 95% Recorded in India Book Recorded in India Book में दर्ज भोपाल। Recorded in India Book एआई के बढ़ते इस्तेमाल ने लोगों को इससे जुड़े इनोवेशन के लिए प्रेरित किया है। बाहर के देशों में तो एआई से जोड़कर लोग नए-नए प्रयोग कर ही रहे हैं। भारत में भी प्रतिभाएं सामने या रही हैं। झांसी के एक सहायक शिक्षक मोहनलाल सुमन ने कम खर्च में एक खास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) रोबोट शिक्षक बनाया, जिसे एआई टीचर कहा जा रहा है। इसके लिए मोहनलाल को इंडिया बुक ऑफ रिकॉड्र्स 2025 में जगह मिली है।मोहनलाल ने सिर्फ 2,900 रुपये खर्च करके सर्वो मोटर, तारों और फे्रम से इस रोबोट को तैयार किया। यह रोबोट अब स्कूल में बच्चों को पढ़ा रहा है। इसका नाम सुमन मैडम रखा गया है। सुमन मैडम ने मई में राजापुर गांव के कम्पोजिट स्कूल में पढ़ाना शुरू किया था, जिसके बाद से स्कूल की हाजिरी 65 प्रतिशत से बढ़कर 95 प्रतिशत हो गई। बच्चे सुमन मैडम की क्लास छोडऩा नहीं चाहते। हर विषय के सवालों का जवाब Recorded in India Bookमोहनलाल बताते हैं कि उनके द्वारा बनाई गई एआई रोबोट सुमन मैडम कभी थकती नहीं है। वह हर विषय के सवालों का जवाब देती है, बच्चों की तारीफ करती है और पहेलियां पूछती है। बच्चे उनके साथ पढ़ाई का मजा लेते हैं और उत्साह के साथ क्लासरूम में आते हैं। अब इसके लिए मोहनलाल को इंडिया बुक ऑफ रिकॉड्र्स के चीफ एडिटर बिस्वरूप रॉय चौधरी ने उन्हें प्रमाणपत्र दिया। यह सम्मान उन्हें इसलिए मिला, क्योंकि उन्होंने इतने कम खर्च में एआई रोबोट बनाया है। पढ़ाने के साथ-साथ सुनाती है कहानी-कविता Recorded in India Bookसुमन मैडम बच्चों सिर्फ पढ़ाती ही नहीं, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाती है। उन्हें आगे बढऩे के लिए प्रेरित करती है। एआई टीचर सुमन मैडम बच्चों को कहानियां कहानी सुनाती है, कविता सिखाती है और साइंस पढ़ाने से लेकर ड्रॉइंग करने में भी मदद करती है। सुमन मैडम के चेहरे पर भाव भी आते हैं, आंखों की पलक झपकने से लेकर होठों के मूवमेंट तक भी होते हैं, ये सब मोटर के सहारे होते हैं। इससे बच्चे सुमन मैडम से जुड़ाव महसूस कर पाते हैं। गैर-शैक्षिक काम से आया आइडिया Recorded in India Bookमोहनलाल को यह रोबोट बनाने का विचार तब, आया जब उन्होंने देखा कि शिक्षकों को गैर-शैक्षिक काम करने पड़ते हैं, जैसे मिड-डे मील की देखरेख या चुनाव ड्यूटी। इन कामों की वजह से स्कूली बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी, लेकिन सुमन मैडम ने इस कमी को पूरा किया। उन्होंने एक टेक्नोलॉजी कंपनी की मदद से एक लकड़ी के पुतले में एआई असिस्टेंट फिट किया और उसे स्कूल के लिए तैयार किया।

झांसी में वंदे भारत में यात्री को पीटा, बीजेपी विधायक के समर्थकों पर आरोप

झांसी दिल्ली से भोपाल जा रही वंदे भारत एक्सप्रेस के एग्जीक्यूटिव कोच में सवार एक यात्री के साथ झांसी रेलवे स्टेशन पर आधा दर्जन लोगों द्वारा मारपीट की गई. इस मारपीट में यात्री लहूलुहान हो गया. उसने आरोप लगाया कि ये मारपीट बीजेपी विधायक राजीव सिंह पारीछा के इशारे पर हुई है. क्योंकि, पीड़ित ने विधायक के कहने पर सीट की अदला-बदली नहीं की थी. इसी से भन्नाए विधायक ने अपने गुर्गों को बुलवाकर उसे पिटवा दिया.   आपको बता दें कि राजीव सिंह पारीछा झांसी की बबीना सीट से बीजेपी के विधायक हैं. घटना वाले दिन वह भी वंदे भारत एक्सप्रेस में सवार थे. उनके साथ उनकी पत्नी और बेटा भी था. आरोपों के मुताबिक, विधायक एक यात्री की सीट पर बैठना चाहते थे, और उसे अपनी सीट पर जाने के लिए बोल रहे थे. जब यात्री ने मना किया तो दोनों में बहस हो गई. जिसके बाद विधायक ने मौके पर अपने साथियों को बुला लिया और उस यात्री को पिटवा दिया.    मामले में जीआरपी, आरपीएफ और रेलवे अधिकारियों ने घटना तो स्वीकारी लेकिन कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया. वहीं, बबीना विधायक राजीव सिंह ने कहा कि वह लिखित में अपना पक्ष रखेंगे. फिलहाल, झांसी जीआरपी में मामला दर्ज करा दिया है.  जानिए पूरा मामला और विधायक ने सफाई में क्या कहा ट्रेन नंबर- 20172 वंदे भारत एक्सप्रेस में झांसी के बबीना विधायक राजीव सिंह पारीछा अपनी पत्नी और बेटे के साथ दिल्ली से झांसी के लिए यात्रा कर रहे थे. कोच में सीट नंबर- 8 राजीव सिंह पारीछा, पत्नी कमली सिंह का सीट नंबर- 50 और बेटे श्रेयांश सिंह का सीट नंबर- 51 था. आरोप है कि ट्रेन जब झांसी रेलवे स्टेशन पहुंची तो आधा दर्जन लोग अंदर घुस गए और इसी कोच के सीट नंबर- 49 पर यात्रा करने वाले राज प्रकाश नाम के यात्री के साथ मारपीट कर दी. जब तक कोई कुछ करता सिग्नल होने के कारण ट्रेन भोपाल के लिए रवाना हो गई.  एमपी कांग्रेस के आरोप इसी बीच मध्य प्रदेश में पन्ना जिले के पूर्व पवई विधायक मुकेश नायक और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत ने ‘एक्स’ पर शिकायत करते हुए यात्री राज प्रकाश के साथ मारपीट का आरोप बबीना विधायक राजीव सिंह पारीछा के समर्थकों पर जड़ दिया. उन्होंने आरोप लगाते हुए यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए.  पूर्व विधायक मुकेश नायक ने एक्स पर लिखा- वंदे भारत ट्रेन में बुजुर्ग यात्री ने 49 नंबर सीट एक्सचेंज करने से इनकार किया तो बबीना के बीजेपी विधायक राजीव सिंह के समर्थकों ने झांसी स्टेशन पर उनको पीट दिया. उनके नाक से खून निकल आया. तो ये है सुशासन की असलियत.  जबकि, पूर्व मंत्री राम निवास रावत ने लिखा- वंदे भारत (20172 दिल्ली से भोपाल) में एक्ज़क्यूटिव क्लास (ई-2) में एक व्यक्ति के साथ 7/8 बाहर से आए लोगों ने पूरे कोच के यात्रियों के सामने मारपीट की. घायल व्यक्ति के नाक, मुंह, कान से खून बहने लगा. इन लोगों का साथ पुलिस के कुछ लोग भी दे रहे थे. वंदे भारत जैसी ट्रेन में ये स्थिति है तो आम ट्रेनों में यात्रियों का क्या हाल होगा. इस तरह की घटनाएं यात्रियों को भयभीत करने का काम करती है.  एफआईआर दर्ज  इस मामले में झांसी के बबीना विधायक राजीव सिंह पारीछा से बात की तो उन्होंने बताया कि मैंने झांसी जीआरपी में इसकी लिखित शिकायत कर दी है. शिकायत के मुताबिक, वह ट्रेन के कोच में अपनी पत्नी और बच्चे के साथ सीट नंबर 50, 51 और 8 पर यात्रा कर रहे थे. इसी कोच की सीट नंबर 49 और 52 पर बैठे दो यात्री आपत्तिजनक स्थिति में अत्यधिक पैर फैलाकर बैठे हुए थे, जिस कारण परेशानी हो रही थी.  विधायक ने उनसे विनम्रतापूर्वक ठीक से बैठने के लिए कहा तो यात्री गुस्से में आकर बहस करते हुए अशोभनीय भाषा का प्रयोग करने लगे. विधायक मामले को टालने का प्रयास कर रहे थे. झांसी स्टेशन पहुंचने पर विधायक के साथी आ गए. उपरोक्त यात्री उनसे भिड़ गए. किसी प्रकार बीच बचाव किया गया. फिलहाल, विधायक राजीव सिंह की शिकायत के आधार पर धारा 115 (2) और 352 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है.   

यूपी में पिछले आठ सालों में औसतन हर दिन छह एनकाउंटर हो रहे हैं, 234 अपराधियों को मार गिराया गया

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में योगी सरकार आने के बाद से अपराधियों की शामत आई हुई है। पिछले आठ सालों में औसतन हर दिन छह एनकाउंटर हो रहे हैं। इन एनकाउंटर में 234 अपराधियों को मार गिराया गया है। 9202 अपराधी इस दौरान घायल हुए हैं। इनमें से ज्यादातर को पुलिस ने लंगड़ा कर दिया है। गुरुवार को एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है। बयान के अनुसार आठ सालों में पुलिस के साथ मुठभेड़ की 14,741 घटनाएं हुईं। इनमें 30,293 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। अपराधियों से मुकाबला करते हुए 18 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई और 1700 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण के हवाले से बयान में कहा गया कि प्रदेश में सबसे अधिक मुठभेड़ मेरठ ज़ोन में हुई। यहां पुलिस ने 4,183 कार्रवाई की। इनमें 7,871 अपराधी पकड़े गए जबकि 2,839 अपराधी घायल हो गए। इस दौरान 77 कुख्यात अपराधी मौके पर ही मारे गए। इस दौरान 452 पुलिसकर्मी घायल हुए जबकि अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए दो पुलिसकर्मियों की मौत हो गयी। उन्होंने कहा कि वाराणसी ज़ोन में मुठभेड़ की 1,041 घटनाएं हुईं, जिनमें 2,009 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया जबकि 26 अपराधियों को मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया। इस दौरान 605 अपराधी और 96 पुलिसकर्मी घायल हुए। पूरे प्रदेश में वाराणसी जोन मुठभेड़ मामले में दूसरे स्थान पर है। बयान के मुताबिक इस संबंध में आगरा जोन राज्य में तीसरे स्थान पर है। यहां 2,288 मुठभेड़ की घटनाएं हुईं, जिनमें 5,496 अपराधियों को दबोचा गया। इस दौरान 715 अपराधी घायल हुए जबकि 19 अपराधी मार गिराए गए। मुठभेड़ के दौरान 56 पुलिसकर्मी घायल हुए। बयान के मुताबिक योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले आठ वर्ष में राज्य पुलिस ने “अपराधी या तो जेल में होगा या प्रदेश से बाहर” के संकल्प को धरातल पर उतारा। इससे अपराधियों में भय और आम जनता में सुरक्षा की भावना बढ़ी है। इसमें कहा गया है कि यही वजह है कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था की सराहना राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है।  

एक जुलाई तक पूरे राज्य में 100 प्रतिशत एफआरएस कवरेज हासिल करने के दिए निर्देश: योगी सरकार

लखनऊ यूपी में गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों को लेकर योगी सरकार नई योजना लागू करने जा रही है। जुलाई से ये योजना लागू हो जाएगी। दरअसल कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के लिए, यूपी सरकार ने पोषण ट्रैकर में ‘फेस रिकॉग्निशन सिस्टम’ (एफआरएस) को एकीकृत किया है, जिससे गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, किशोरों और छह महीने से छह साल की उम्र तक के बच्चों को ‘टेक-होम राशन’ (टीएचआर) का लक्षित और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित हो सके। एक बयान अनुसार, एक जुलाई तक पूरे राज्य में 100 प्रतिशत एफआरएस कवरेज हासिल करने के निर्देश दिए गए हैं और इसके लिए राज्यव्यापी जागरूकता और पंजीकरण अभियान चलाया जाएगा। बयान में कहा गया है कि पोषण ट्रैकर में एफआरएस दो-स्तरीय प्रमाणीकरण प्रणाली है, जिसमें चेहरे की पहचान और ‘वन टाइम पासवर्ड’ (ओटीपी) का उपयोग होता है। इसमें कहा गया है कि लाभार्थी की फोटो को आधार से जुड़े ई-केवाईसी के साथ मिलाया जाता है और उनके पंजीकृत मोबाइल पर भेजा गया ओटीपी आंगनवाड़ी केंद्र पर सत्यापित किया जाता है। यह प्रणाली धोखाधड़ी रोकने और राशन वितरण में पारदर्शिता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। बयान के मुताबिक, उप्र में 2024 से शुरू हुई इस योजना में एफआरएस प्रणाली को जुलाई 2025 तक प्रदेश में शत-प्रतिशत लागू करने के निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से दिये गये हैं। एफआरएस का पायलट चरण अगस्त 2024 में कानपुर नगर के बिधनू और सरसौल प्रोजेक्ट्स में शुरू हुआ। 13 जून 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, 1.18 करोड़ पात्र लाभार्थियों के ई-केवाईसी का कार्य किया जा रहा है।  

यूपी सरकार ने कानपुर सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी को सस्पेंड कर दिया गया, काम ना आया महाना और विधायकों का समर्थन

कानपुर कानपुर डीएम और सीएमओ के बीच चल रहे विवाद में बड़ा ऐक्शन हुआ है। यूपी सरकार ने कानपुर सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी को सस्पेंड कर दिया गया। उनकी जगह श्रावस्ती के अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. उदयनाथ को कानपुर का नया सीएमओ बनाया गया। डीएम से उलझने के बाद डॉ. हरिदत्त ने ट्रांसफर और निलंबन रुकवाने को लेकर काफी कोशिश की लेकिन सब बेकार हो गई। डॉ. हरिदत्त नेमी को कानपुर से न हटाए जाने की स्पीकर महाना से लेकर कई विधायक भी सिफारिश कर चुके हैं। इसके बाद भी सीएमओ पर गाज गिर गई और उन्हें गुरुवार को सस्पेंड कर दिया गया।  पिछले दिनों डीएम की ओर से सीएमओ के निलंबन की संस्तुति करते हुए शासन को पत्र भेजा गया था। इसके बाद सीएमओ के वायरल हो रहे ऑडियो को लेकर स्थिति गंभीर हो गई। रविवार को विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की ओर से सीएमओ के पक्ष में उपमुख्यमंत्री को लिखा 11 जून का पत्र वायरल हुआ। इसके अलगे ही दिन कानपुर के चार विधायकों के पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को लिखे गए लेटर में महाना ने सीएमओ का तबादला न करने की बात लिखी थी। लेटर में लिखा था, सीएमओ आवास पर आए थे। उन्होंने तबादला होने की बात बताई थी। पूरी बात सुनने के बाद मैंने 11 जून को डिप्टी सीएम एवं चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखा था। कानपुर में तैनात सीएमओ का कार्य एवं व्यवहार आमजन और जनप्रतिनिधियों के प्रति मृदुल व सराहनीय है। जनहित में इन्हें बनाए रखने पर विचार हो। रही बात डीएम और सीएमओ के बीच विवाद की तो जानकारी नहीं है। इसके बाद दो विधायकों ने भी शासन को पत्र लिखकर सीएमओ के समर्थन में सिफारिश की थी। डीएम ने सीएमओ को मीटिंग से निकाला था बाहर बीते शनिवार को सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में सभी विभागों के अफसरों की बैठक थी। सुबह 11 बजे से जिलाधिकारी सीएम डैश बोर्ड की समीक्षा करने पहुंचे थे। जिले भर के सभी अधिकारी बैठक में शामिल होने पहुंचे थे। इसमें सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी अपने साथ एसीएमओ रमित रस्तोगी को लेकर पहुंचे। बैठक शुरू होते ही सबसे पहले स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा का नंबर आ गया। तभी डीएम ने सीएमओ को देखते हुए कहा, सीएमओ साहब ये क्या हो रहा है। उनका संकेत एक वायरल ऑडियो की ओर था, जो सीएमओ का बताया जा रहा है। जिसमें डीएम के बारे में अमर्यादित टिप्पणी की गई है। जवाब में सीएमओ ने कहा सर, ये फेक ऑडियो हैं। किसी ने एआई से बनाकर वायरल किया है। यह सुनते ही जिलाधिकारी ने सीएमओ केा बाहर जाने का आदेश दे दिया। उन्होंने कहा, आप जाएं और जांच कराएं। फेक है तो एफआईआर दर्ज कराएं। क्या है पूरा मामला फरवरी में डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने सीमएओ कार्यालय का औचक निरीक्षण किया था। डीएम के निरीक्षण में सीएमओ सहित कई वरिष्ठ अधिकारी बिना सूचना के गैर हाजिर मिले थे। इसके बाद डीएम ने सीएचसी और पीएचसी का भी दौरा किया। वहां कागजातों में अनियमितता मिलीं। साथ ही कर्मचारियों की लापरवाही भी सामने आई। डीएम ने इसको गंभीरता से लेते हुए सीएमओ के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश कर दी थी। तब से ही डीएम और सीएमओ के बीच तनातनी चल रही है।  

यूपी के लखीमपुर खीरी में एक जीजा ने अपनी साली संग सारी हदें पार कर डालीं, प्रेग्नेंट हुई तो साथ रखने से किया मना

लखीमपुर खीरी यूपी के लखीमपुर खीरी में एक जीजा ने अपनी साली संग सारी हदें पार कर डालीं। जीजा ने पहले तो उसके साथ संबंध बनाए। साली जब प्रेग्नेंट हुई तो साथ रखने से मना कर दिया और एक खौफनाक कांड कर डाला। जीजा की इस हरकत के बाद साली की तबीयत बिगड़ने लगी। युवती के परिजनों को इसकी जानकारी दी गई तो पिता के साथ उसके घर भेज दिया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान युवती की मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद डॉक्टरों ने युवती का विसरा सुरक्षित कर लिया है। मौत का स्पष्ट कारण अब तक सामने नहीं आया है। पर आशंका जताई जा रही है कि गर्भपात के बाद संक्रमण से उसकी मौत हुई है। मझगई पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट व तहरीर का इंतजार है। पुलिस ने उसके जीजा को हिरासत में ले लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है। मझगईं थाना क्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति ने अपनी बेटी की शादी फूलबेहड़ थाना क्षेत्र में रहने वाले युवक के साथ की थी। उसकी बड़ी बेटी बीमार चल रही थी तो उसकी 21 वर्षीय छोटी बहन अपने जीजा के घर रहने चली गई। आरोप है कि जीजा ने युवती को झांसे में लेकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। जिससे वह गर्भवती हो गई। इसकी जानकारी जब जीजा को हुई तो उसने गर्भपात करा दिया। गर्भपात के बाद से युवती बीमार रहने लगी। जीजा ने उसका इलाज कराया। लेकिन जब उसकी हालत ज्यादा बिगड़ गई तो वह अपने पिता के घर थाना मझगईं आ गई। यहां 17 जून को उसकी मौत हो गई। गुरुवार को युवती के शव का पोस्टमार्टम हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में युवती की मौत का कारण संक्रमण होना बताया गया है। डॉक्टर ने विसरा भी प्रिजर्व किया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट की पुष्टि एसपी संकल्प शर्मा ने की। एसपी ने बताया कि गर्भपात की वजह से युवती को संक्रमण हुआ था। जिससे उसकी मौत हुई। पुलिस ने आरोपी जीजा अखिलेश को हिरासत में ले लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है। खबर लिखे जाने तक पुलिस को घटना की तहरीर नहीं मिली थी। एसपी ने बताया कि जल्द ही मुकदमा दर्ज कर आरोपी को जेल भेजा जाएगा। तेजाब पिलाने की बात निकली अफवाह सोशल मीडिया पर युवती को तेजाब पिलाए जाने की बात लिखी जा रही है। हालांकि युवती की मां उसे दवा के साथ जहर दिए जाने की बात कह रही थी। उसने यह बात वीडियो में भी कही। साथ ही दामाद के घरवालों पर भी साजिश में शामिल होने की बात कही। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से यह साफ हो गया कि युवती के पेट में तेजाब जैसी चीज नहीं थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उसकी मौत का कारण संक्रमण बताया गया है। डॉक्टर ने बिसरा भी सुरक्षित किया है, जिसे जांच के लिए लैब भेजा जाएगा।  

नैनी जेल में बंद अतीक अहमद के बेटे के बैरक से कई प्रतिबंधित सामान बरामद हुए, जेल में खातिरदारी पकड़ाई

लखनऊ  यूपी में माफियाओं और उनके घर वालों की जेल में अब भी बादशाहत कायम है। मुख्तार अंसारी के बेटे अ्ब्बास अंसारी के बाद अब माफिया अतीक अहमद के बेटे अली की नैनी जेल में खातिरदारी पकड़ाई है। नैनी जेल में बंद अतीक अहमद के बेटे के बैरक से कई प्रतिबंधित सामान बरामद हुए हैं। अली के पास कैश भी था। छापेमारी के दौरान उसने कैश जेल वार्डन को पकड़ा दिया लेकिन मामला सीसीटीवी में कैद हो गया। डीजी जेल ने तत्काल एक्शन लेते हुए जेल वार्डन और डिप्टी जेलर को निलंबित कर दिया है। डीआईजी जेल को पूरे मामले की जांच सौंपी है। नैनी जेल में अतीक अहमद के 60 से ज्यादा गुर्गे बंद हैं। अली के बैरक की 24 घंटे सीसीटीवी से निगरानी होती है। इसके बाद भी जेल अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत से अपराधी जेल में भी मौज काट रहे हैं। इससे पहले चित्रकूट जेल में मुख्तार अंसारी के विधायक बेटे अब्बास अंसारी की खातिरदारी का मामला पकड़ाया था। अफसरों की मिलीभगत से अब्बास अंसारी रोज अपनी पत्नी से जेल के खास कमरे में मुलाकात करता था। कई घंटे दोनों साथ रहते थे। प्रशासन की टीम ने अचानक छापेमारी कर अब्बास की पत्नी निकहत को भी जेल के उस खास कमरे से पकड़ा था। इसके बाद उसे भी गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था। अब्बास को कासगंज जेल भेज दिया गया था। इसके बाद कई जेल अधिकारियों को निलंबित किया गया था। माना जा रहा है कि अब्बास अंसारी के मामले की तरह यहां भी कई जेल अफसर नप सकते हैं। अतीक अहमद का बेटा अली 2022 से ही यहां बंद है। अब अतीक के बेटे अली के मामले में बताया जाता है कि डीआईजी राजेश श्रीवास्तव ने मंगलवार को अचानक नैनी जेल में चेकिंग की। इस दौरान अली की बैरक की तलाशी ली थी। इसी दौरान कई आपत्तिजनकर वस्तुएं उसकी बैरक से मिलीं। इसके अलावा उसके पास कैश भी था। चेकिंग के दौरान उसने कैश वहां मौजूद जेल वार्डन को पकड़ा दिया। अली से कैश लेते वार्डन सीसीटीवी में कैद भी हो गया था। बाद में कैश की गिनती हुई तो पता चला कि 1100 रुपए हैं। अति सुरक्षित बैरक में आपत्तिजनक वस्तुएं और कैश की जानकारी अधिकारियों को दी गई। इसके बाद डिप्टी जेलर कांति देवी और हेड वार्डर संजय द्विवेदी को सस्‍पेंड कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार अली अहमद से मिलने आए एक मुलाकाती ने उसे 1100 रुपये दिए थे ताकि वह जेल में उपयोग के लिए कूपन खरीद सके, लेकिन उसने कूपन नहीं खरीदे और पैसे छुपाकर रख लिए। केंद्रीय कारागार नैनी के वरिष्ठ जेल अधीक्षक रंग बहादुर पटेल ने बताया कि बीते मंगलवार को अली से मिलने कोई वकील आया था। जिसने अली को 1100 रुपए दिए थे। अली ने जेल से रुपए से टोकन न लेकर अपने पास रख लिया था। जांच में रुपए मिलने पर डिप्टी जेलर और जेल वार्डर को निलंबित किया गया है।  

अतीक अहमद के बेटे अली की बैरक से नकदी बरामद, नैनी जेल के जेलर और चीफ वार्डन सस्पेंड

प्रयागराज  नैनी सेंट्रल जेल में माफिया अतीक अहमद के बेटे अली अहमद की बैरक से नकदी बरामद होने के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। जेल प्रशासन ने डिप्टी जेलर कांति देवी और हेड वार्डर संजय द्विवेदी को सस्‍पेंड कर दिया है। बताया जा रहा है कि अली अहमद से मिलने आए एक मुलाकाती ने उसे 1100 रुपये दिए थे ताकि वह जेल में उपयोग के लिए कूपन खरीद सके, लेकिन उसने कूपन नहीं खरीदे और पैसे छुपाकर रख लिए। नैनी सेंट्रल जेल में बंद अतीक अहमद के बेटे अली अहमद की बैरक से नकदी बरामद होने के बाद जेल प्रशासन में खलबली मची है। मंगलवार को जेल डीआईजी राजेश श्रीवास्तव की रूटीन चेकिंग के दौरान यह घटना सामने आई। डीआईजी राजेश श्रीवास्तव ने हाई सिक्योरिटी बैरक की तलाशी ली, जहां अली अहमद बंद है। तलाशी के दौरान बैरक से 1100 रुपये नकद बरामद हुए हैं। जेल अधीक्षक ने दी जानकारी  जेल अधीक्षक रंग बहादुर के बताया कि अली अहमद से मिलने आए एक मुलाकाती ने उसे 1100 रुपये दिए थे, ताकि वो जेल में इस्तेमाल के लिए कूपन खरीद सके. जेल व्यवस्था के तहत, बंदियों को नकदी रखने की अनुमति नहीं होती और वह केवल कूपन के जरिए ही जरूरी सामान खरीद सकते हैं. जेल अधीक्षक ने बताया, अली ने ये कूपन नहीं खरीदे और पैसे अपने पास छिपाकर रख लिए. अब यही 1100 रुपये डीआईजी चेकिंग के दौरान बरामद कर लिए गए.  इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जेल प्रशासन ने नैनी जेल की डिप्टी जेलर कांति देवी और हेड वार्डर संजय द्विवेदी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. वहीं, डीआईजी ने जेलर, डिप्टी जेलर समेत अन्य कर्मियों की भूमिका की भी जांच के आदेश दे दिए हैं, जिससे यह पता लगाया जा सके कि कहीं यह पूरा मामला मिलीभगत का हिस्सा तो नहीं है.  गौरतलब है कि अली अहमद इस समय हाई सिक्योरिटी बैरक में बंद है. वह रंगदारी मांगने के एक मामले में सरेंडर करने के बाद से जेल में है.  इसके अलावा, वह उमेश पाल हत्याकांड की साजिश जेल से रचने का भी आरोपी है.  अली अहमद पर अपने पिता अतीक अहमद की मौत के बाद गैंग आईएस 227 की कमान संभालने का भी आरोप है. ऐसे में उसकी बैरक से नकदी की बरामदगी और जेलकर्मियों की संलिप्तता पर सवाल खड़े हो गए हैं.  डीजीआई की चेकिंग में हुआ खुलासा जेल अधीक्षक रंग बहादुर के अनुसार, अली अहमद से मिलने आए एक मुलाकाती ने उसे 1100 रुपये दिए थे ताकि वह जेल में उपयोग के लिए कूपन खरीद सके। जेल व्यवस्था के तहत, बंदियों को नकदी रखने की अनुमति नहीं होती और वे केवल कूपन के जरिए ही जरूरी सामान खरीद सकते हैं। लेकिन अली ने ये कूपन नहीं खरीदे और पैसे अपने पास छुपाकर रख लिए। यही 1100 रुपये बाद में डीआईजी की चेकिंग में बरामद हुए। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जेल प्रशासन ने कार्रवाई की है।

प्रशिक्षण के लिए बनाए गए नियमों का करना होगा पालन, महिला सिपाही गर्भवती होने पर ट्रेनिंग का हिस्सा नहीं बन सकती

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में सिपाही नागरिक पुलिस भर्ती के लिए 60244 अभ्यर्थी चयनित हुए हैं, जिनमें 12048 महिलाएं हैं। इन महिला सिपाहियों को प्रशिक्षण के लिए बनाए गए नियमों का पालन करना होगा। महिलाओं के लिए नियम बनाए गए है कि कोई भी महिला सिपाही गर्भवती होने पर ट्रेनिंग का हिस्सा नहीं बन सकती। अगर वो गर्भवती हुई तो उसे वापस भेज दिया जाएगा।  डिलीवरी के बाद होगी ट्रेनिंग गर्भवती होने पर महिला सिपाहियों को वापस भेज दिया जाएगा। लेकिन डिलीवरी के बाद वो ट्रेनिंग में हिस्सा ले सकेगी। महिला प्रशिक्षुओं को डिलीवरी के एक साल बाद आगामी प्रशिक्षण सत्र में शामिल करने की व्यवस्था की जाएगी। अगर महिला सिपाही की प्रशिक्षण की अवधि साढे़ चार माह से कम होगी तो उसे फिर से नये सिरे से शुरू करना पड़ेगा, लेकिन अगर ट्रेनिंग की अवधि साढे़ चार महीने से ज्यादा है तो उसने यहां से छोड़ा था, वहीं से ही प्रशिक्षण शुरू करना पड़ेगा।  गर्भपात के लिए भी बनाए नियम  इसके अलावा ये भी नियम बनाए गए है कि अगर किसी महिला सिपाही का प्रशिक्षण शुरु होने से पहले या प्रशिक्षण के दौरान गर्भपात हो जाता है तो उसे फिर से प्रशिक्षण में शामिल होने के लिए अपने जिले के सीएमओ का मेडिकल फिटनेस का सर्टिफिकेट देना होगा। अगर कोई दूसरे राज्य की निवासी है तो उसे भी यह सर्टिफिकेट प्रशिक्षण संस्था के जिले के सीएमओ से प्राप्त करना होगा। वहीं, अगर किसी महिला का ट्रेनिंग शुरू होने से एक साल के अंदर प्रसव हो चुका है तो उसे भी मेडिकल फिटनेस का सर्टिफिकेट देना होगा। इसके बाद ट्रेनिंग में शामिल हो सकेगी।    

रौंगटे खड़े कर देने वाला मामला आया सामने- लव मैरिज की जिद पर शिवानी की हत्या, रातोंरात पिता ने जला दी लाश

बागपत  समाज में ‘इज़्ज़त’ के नाम पर हो रहे अपराधों की काली सच्चाई एक बार फिर सामने आई है। लव मैरिज की ज़िद कर रही शिवानी नाम की युवती को उसके अपने ही पिता ने मौत के घाट उतार दिया। हत्या के बाद परिवार ने रातोंरात शव को जला डाला और अस्थियां यमुना नदी में प्रवाहित कर दीं, ताकि कोई सुराग न बचे। रौंगटे खड़े कर देने वाला मामला उत्तर प्रदेश के बागपत ज़िले का है। जहां 21 वर्षीय शिवानी, जो अपने पड़ोसी अंकित से प्रेम करती थी और उससे शादी की ज़िद पर अड़ी थी, अपने ही परिवार की क्रूरता का शिकार हो गई। प्यार को ‘इज़्ज़त’ पर खतरा मान बैठे उसके अपनों ने मिलकर वो किया जिसे सुनकर दिल कांप उठे। गला दबाकर हत्या की, शव के पास घंटों बैठे रहे, फिर रातों-रात लाश को यमुना किनारे जलाकर अस्थियों को बहा दिया—ताकि दुनिया को खबर तक न हो। घटना की पूरी कहानी: शिवानी और अंकित पिछले डेढ़ साल से एक-दूसरे से प्यार करते थे और शादी करना चाहते थे। लेकिन जब यह बात परिवार को पता चली, तो उन्होंने शिवानी को घर में बंद कर दिया। अंकित के अनुसार, लड़की के घरवालों ने उसे समझाने की जगह मारपीट शुरू कर दी, लेकिन शिवानी अपने फैसले पर अडिग रही। प्रेमी की सतर्कता से खुला राज बुधवार सुबह जब अंकित ने शिवानी का फोन बंद पाया और उसे अनहोनी की आशंका हुई, तो उसने तुरंत पुलिस को सूचना दी। जैसे ही जांच शुरू हुई, परत-दर-परत परिवार का काला सच सामने आता गया। पुलिस ने शिवानी के माता-पिता को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि भाई और फुफेरी बहन फरार हैं। पुलिस का बयान: पुलिस अधीक्षक के अनुसार, यह मामला ऑनर किलिंग का है। फरार आरोपी रवि और बहन की तलाश के लिए टीमें गठित की गई हैं। शव और अस्थियों को नष्ट करने का उद्देश्य सबूत मिटाना था।

उत्तर प्रदेश में अब लोमड़ी और सियार के हमले में मौत पर मिलेगा ₹4 लाख रुपए का मुआवजा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने लोमड़ी और सियार के हमले से होने वाली मृत्यु को राज्य आपदा घोषित कर दिया है। इसके बाद पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। हालांकि मधुमक्खियों के हमले और इमारत गिरने से होने वाली जनहानि को अभी इस श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है। यह निर्णय मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में गठित राज्य कार्यकारी समिति की संस्तुति के बाद लिया गया है। अब राज्य आपदा की श्रेणी में कुल 11 वन्यजीव शामिल हो गए हैं। पोस्टमार्टम में हमले से मृत्यु की पुष्टि होने पर ही मुआवजा दिया जाएगा। राज्य सरकार ने लोमड़ी और सियार के हमले से होने वाली मृत्यु को राज्य आपदा घोषित कर दिया है। अब इनके काटने से होने वाली मृत्यु पर पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। मधुमक्खियों व इमारत गिरने से होने वाली जनहानि को फिलहाल राज्य आपदा की श्रेणी में नहीं रखा गया है। शासन ने सुझाव दिया है कि पहले वन विभाग से यह जान लिया जाए कि मधुमक्खियां वन्य जीव में आती हैं या नहीं। अगर वन्य जीव में आती हैं को उनके हमलों को भी राज्य आपदा घोषित किए जाने पर विचार किया जाएगा। राज्‍य आपदा में कुल 11 वन्‍यजीवों के हमले शामिल मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में गठित राज्य कार्यकारी समिति ने पिछले माह लोमड़ी, सियार और मधुमक्खी के हमले से होने वाली मौत को राज्य आपदा में शामिल करने की संस्तुति की थी। शासन ने लोमड़ी और सियार के हमले को राज्य आपदा के रूप में अधिसूचित कर दिया है। इसके साथ ही अब राज्य आपदा की इस श्रेणी में कुल 11 वन्यजीव शामिल कर लिए गए हैं। मधुमक्खी हमले का प्रस्ताव सरकार ने मधुमक्खी के हमले से होने वाली मौतों को भी राज्य आपदा में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया है, जो वर्तमान में विचाराधीन है. यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो मधुमक्खी हमले से मरने वाले परिवारों को भी मुआवजा का लाभ मिल सकेगा. यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते वन्यजीव और कीटों के हमलों से निपटने की दिशा में उठाया गया है. उद्देश्य और प्रभाव इस फैसले का उद्देश्य वन्यजीवों के हमले से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करना और राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार वन्यजीवों के संरक्षण के साथ-साथ मानव जीवन की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दे रही है. उन्होंने अधिकारियों को मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के निर्देश दिए हैं. इन जानवरों के हमले में मरने पर मिलता है मुआवजा अभी तक यूपी में मगरमच्छ, हाथी, गैंडा, बाघ, शेर, तेंदुआ, भेड़िया, लकड़बग्घा और जंगली सुअर के हमले से जान जाने पर पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये मुआवजा दिया जाता है। इन सभी जानवरों को मानव-वन्यजीव संघर्ष की श्रेणी-1 में रखा गया है। वहीं, श्रेणी-2 में लोमड़ी और सियार को रखा गया है।

सीएम योगी ने दिया आदेश- अब कोई भी ट्रांसफर अग्रिम आदेश तक प्रभावी नहीं होगा

लखनऊ  यूपी में तबादलों को लेकर विवादों के बाद सीएम योगी ऐक्शन में आ गए हैं। बेसिक और स्वास्थ्य विभाग में तबादला सत्र शून्य किए जाने के बाद अब स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग में स्थानांतरणों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। सीएम योगी ने आदेश दिया है कि अब कोई भी ट्रांसफर अग्रिम आदेश तक प्रभावी नहीं होगा। योगी के निर्देश पर स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग के प्रमुख सचिव ने तत्काल आदेश जारी करते हुए सभी तबादलों को स्थगित करने की सूचना दी है। इससे निबंधक और उप निबंधक पदों पर हो रहे तबादलों पर रोक लगाई गई है। इसके साथ ही पूरे मामले में जांच के निर्देश दिए गए हैं। उधर, मंत्री स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन रविन्द्र जयसवाल ने कहा कि तबादलो में अधिकारियों ने लापरवाही बरती। मेरिट का पालन नहीं हुआ। जब हमारे पास लिस्ट आई तो हमें गड़बड़ी मिली। हमने मुख्यमंत्री से मुलाक़ात कर उनके सामने पूरी बात रखी तो उन्होंने यह तबाद्ले निरस्त कर दिए। अब इसकी जांच होगी और दोषियों पर कड़ी कार वाई होगी। आयुक्त स्तर पर भी लापरवाही हुई है। आपको बता दें कि यूपी में तबादले को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। विवाद के बाद बेसिक और स्वास्थ्य विभाग में तबादला सत्र शून्य होने के बाद स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग में भी शिकायत की मिली। मामला सीएम योगी तक पहुंचा तो वह तुरंत ऐक्शन में आ गए। तत्काल संज्ञान लेते हुए स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग में हुए तबादलों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। इसके साथ ट्रांसफर मामले की जांच बैठा दी। दरअसल, महानिरीक्षक निबंधन ने 13 जून को तीन अलग-अलग पत्रों के माध्यम से 58 उपनिबंधकों, एक अन्य उपनिबंधक तथा 29 नव-प्रोन्नत उपनिबंधकों के तबादले व तैनाती आदेश दिया था। इसके अलावा एक दिन बाद 14 जून को जारी एक अन्य आदेश के तहत 114 कनिष्ठ सहायक (लिपिक) का भी तबादला किया गया। इन तबादलों में अनियमितता की बात कही गई। अब सभी तबादला आदेशों को अग्रिम आदेशों तक के लिए स्थगित कर दिए गए। इससे पहले बेसिक शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में भी तबादलों को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद दोनों विभाग में तबादला सत्र को शून्य कर दिया गया है।  

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे कल से होगा शुरू, 91 KM लंबे लिंक रोड से पूर्वांचल को मिलेगी रफ्तार

 गोरखपुर  पूर्वांचल को रफ्तार की सौगात मिलने जा रही है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे खुलने को तैयार है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कल 20 जून को गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद चालू हो जाएगा। प्रवेश नियंत्रित मार्ग होने के कारण गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे की कुल 91.35 किमी की दूरी एक घंटे से भी कम समय में पूरी की जा सकती है। यही नहीं, इस लिंक एक्सप्रेसवे से होकर, आजमगढ़ में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होते हुए लोगों को गोरखपुर से लखनऊ पहुंचने में महज साढ़े तीन घंटे का समय लगेगा। इसके साथ लखनऊ के बाद भी आगरा, यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए पूर्वांचल से दिल्ली तक सफर आसान होगा। इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू होने के साथ ही रफ्तारपूर्ण यातायात सुगमता, उद्योग और इसके जरिये रोजगार को लेकर सरकार ने जो पूर्वानुमान लगाए थे, वे साकार भी होने लगे हैं। लिंक एक्सप्रेसवे की बेहतरीन कनेक्टिविटी से पूर्वी उत्तर प्रदेश के विकास का नक्शा और सुनहरा होना तय माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के अनुसार, गोरखपुर, संतकबीरनगर, अंबेडकरनगर और आजमगढ़ जिले में पड़ने वाले एक्सप्रेसवे के निर्माण पर 7283 करोड़ 28 लाख रुपये की लागत आई है। इसमें भूमि अधिग्रहण की लागत भी शामिल है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में से एक गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे गोरखपुर बाईपास एनएच- 27 ग्राम जैतपुर के पास से प्रारंभ होकर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर आजमगढ़ के सालारपुर में समाप्त हो रहा है। इस एक्सप्रेसवे से गोरखपुर क्षेत्र, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के माध्यम से लखनऊ, आगरा एवं दिल्ली तक त्वरित एवं सुगम यातायात कॉरिडोर से जुड़ रहा है। राज्य सरकार का रोड इंफ्रास्ट्रक्चर सुदृढ़ करने पर सतत जोर है। गोरखपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख केंद्र है और चारों तरफ फोरलेन सड़कों की कनेक्टिविटी से यह विकास के नए मॉडल के रूप में विकसित हो रहा है। विकास की इस प्रक्रिया में नवनिर्मित गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 91 किमी से अधिक लंबाई वाला यह एक्सप्रेसवे आजमगढ़ में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़कर राजधानी लखनऊ और फिर वहां से अन्य प्रमुख महानगरों की राह सुगम करेगा। यातायात सुगमता का सकारात्मक असर व्यापार और उद्योग पर भी पड़ेगा। खुल गया गोरखपुर एक्सप्रेसवे पूर्वी उत्तर प्रदेश को सड़क मार्ग के जरिए रफ्तार देने की दिशा में एक कदम और बढ़ चुका है। जी हां, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे की राइडिंग क्वालिटी और राइडिंग कंफर्ट का टेस्ट होते ही वाहनों के लिए 20 जून को खोल दिया जाएगा। इस एक्सप्रेसवे पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ियां दौड़ा सकेंगे। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPIEDA) ने गोरखपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में वाइब्रेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित ईटीएच यूनिवर्सिटी ज्यूरिख, स्विट्जरलैंड और इसी यूनिवर्सिटी की स्वतंत्र कंपनी (स्पिन ऑफ कंपनी) आरटीडीटी लैबोरेटरी एजी की तकनीक और उपकरणों का इस्तेमाल किया है। इस तकनीकि का किया गया इस्तेमाल इसके अंतर्गत वाइब्रेशन टेक्नोलॉजी एंड एक्सीलरोमीटर बेस्ड 7 सेंसर (4 राइडिंग क्वालिटी और 3 राइडिंग मोशन के लिए), एस मोशन सेंसर, मिजरमेंट और डाटा कलेक्शन के आवश्यक उपकरण इनोवा वाहन में स्थापित किए गए। यूपीडा ने इस तकनीक से प्रदेश के सभी एक्सप्रेसवे के प्रत्येक लेन की राइडिंग क्वालिटी और राइडिंग कंफर्ट सुनिश्चित करने के लिए संपूर्ण जांच तथा सुधारात्मक उपाय करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद फोर लेन की जांच पूर्ण की जा चुकी है और प्राप्त मूल्यांकित आंकड़ों और परिणाम के आधार पर राइडिंग क्वालिटी एवं राइडिंग कंफर्ट में सुधार कर इसे विश्व स्तरीय बना लिया गया है। एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से लैस एक्सप्रेसवे गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (Advanced Traffic Management System एटीएमएस) से लैस किया गया है। इससे पहले, यूपीडा द्वारा बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (Bundelkhnad Expressway) को भी आईटीएमएस युक्त करने की प्रक्रिया को लेकर भी कार्य शुरू किया गया था जो कि निरंतर प्रगति पर है। गोरखपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण से आर्थिक विकास के साथ कृषि क्षेत्र, व्यापार, पर्यटन और उद्योग धंधों, होटल रेस्टोरेंट में बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा एक्सप्रेसवे के दोनों ओर औद्योगिक कॉरिडोर बनाए जाएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिलेगा। साथ रियल स्टेट क्षेत्र को बूस्ट मिलेगा। लखनऊ पहुंचने में नहीं लगेगी देर पूर्वी यूपी यानी गोरखपुर से लखनऊ को जोड़ने के लिए गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे अहम भूमिका निभाएगा। 91 किलोमीटर लंबा तक फैला यह 4 लेन एक्सप्रेसवे गोरखपुर और आजमगढ़ को सीधे जोड़ेगा। इसके अलावा यह पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा, जिससे लखनऊ और गोरखपुर के बीच अधिक सुविधाजनक मार्ग और कम समय में यात्रा पूरी हो सकेगी। इस हाईटक मार्ग से गोरखपुर, अम्बेडकरनगर, संतकबीरनगर, आजमगढ़ सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे की खासियत गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को आईटीएमएस इनेबल्ड बनाने की कार्ययोजना के तहत ट्रैफिक मैनेजमेंट कमांड सेंटर की स्थापना की गई। इसके जरिए ट्रैफिक मॉनिटरिंग व मैनेजमेंट प्रक्रिया को बल मिलेगा। ट्रैफिक मैनेजमेंट कंट्रोल (Traffic Management Control) यूनिट को रिकॉर्डिंग सर्वर स्टोरेज व बैकअप रिकॉर्डिंग्स सर्वर युक्त किया जाएगा। टीएमसी यूनिट को फैसिलिटी मॉनिटरिंग सिस्टम कंट्रोलर, ग्राफिक डिस्पले, इंटरनेट व एसएमएस सर्वर तथा फाइबर चैनल होस्ट से युक्त किया जाएगा। इमर्जेंसी टेलिफोन हेल्पलाइन कंसोल, स्टाफ के लिए आधार इनेबल्ड बायोमीट्रिक फिंगरप्रिंट स्कैनर मशीन समेत विभिन्न प्रकार की सुविधाओं से टीएमसी यूनिट को युक्त किया जाएगा। कैमरा रखेगा निगरानी मोशन डिटेक्शन सर्विलांस कैमरा व व्हीकल स्पीड डिटेक्शन सिस्टम को गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ इंस्टॉल किया गया है। इससे, ओवरस्पीडिंग (Overspeeding) करने वाली गाड़ियों के विषय में अलर्ट जारी हो सकेगा और कंट्रोल रूम द्वारा इसे तुरंत ट्रैक किया जा सकेगा। वहीं, वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन एनफोर्स्ड सिस्टम (वीआईडीएस) तथा इंसिडेंट डिटेक्शन एनफोर्स्ड सिस्टम (आईडीएस) को भी आईटीएमएस प्रक्रिया के अंतर्गत लागू किया जाएगा। चयनित एजेंसी को इन सभी इक्विप्मेंट्स की प्रोक्योरमेंट, इस्टॉलेशन, ऑपरेशन व मेंटिनेंस से संबंधित कार्यों को पूर्ण करना होगा। इसके अतिरिक्त यूपीडा स्टाफ को इसके संचालन के लिए ट्रेनिंग भी उपलब्ध करायी जाएगी। इस क्रम में, टेक्निकल स्टाफ व कंट्रोल रूम ऑपरेशन स्टाफ की नियुक्ति का कार्य भी एजेंसी द्वारा पूर्ण किया जाएगा। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे : एक नजर में -प्रारंभ बिंदु : जैतपुर (गोरखपुर) -अंतिम बिंदु : सालारपुर (आजमगढ़) -पूर्णतः प्रवेश नियंत्रित फोरलेन (सिक्सलेन में विस्तारणीय) -2 टोल प्लाजा 3 रैम्प प्लाजा -7 फ्लाईओवर -16 वेहिकुलर अंडरपास -50 लाइट वेहिकुलर अंडरपास … Read more

लौह पुरुष पटेल और पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की याद में अयोध्या में बनायाजाएगा स्मृति द्वार

अयोध्या योगी सरकार के नेतृत्व में अयोध्या धार्मिक, सांस्कृतिक और बुनियादी ढांचे के विकास में नए आयाम स्थापित कर रहा है। अब यहां लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में ‘स्मृति द्वार’ का निर्माण कराया जाएगा। शासन ने इसकी स्वीकृति देते हुए निर्माण के लिए पहली किस्त भी जारी कर दी है। इस परियोजना से अयोध्या की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक गरिमा और बढ़ेगी। अंबेडकर नगर मार्ग में बाकरगंज बाजार में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल स्मृति द्वार और अयोध्या-गोंडा मार्ग पर पेट्रोल पंप के पास अटल बिहारी वाजपेयी द्वार का निर्माण कराया जाएगा। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल स्मृति द्वार की लागत 16.57 लाख रुपए आएगी, जिसके तहत 9.42 लाख रुपए की प्रथम किस्त अवमुक्त की जा चुकी है। अटल बिहारी वाजपेयी द्वार की लागत 17.17 लाख आएगी, जिसकी प्रथम किस्त के रूप में 10.302 लाख की धनराशि अवमुक्त कर दी गई है। अयोध्या धाम में फटिक शिला पार्किंग का निर्माण व पर्यटन सुविधाओं का विकास का कार्य, रामपथ व धर्मपथ पर मिस्टिंग फैन का कार्य, राम की पैड़ी पर आरती घर व पर्यटन विकास का कार्य, लता चौक के दाहिनी तरफ राम की पैड़ी कैनाल रोड पर धर्मपथ के समानांतर राष्ट्र की संस्कृति को प्रदर्शित करने वाले थीम वाल का सौंदर्यीकरण प्रस्तावित है। इसके साथ नगर निगम क्षेत्र में 17 सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है। रीडगंज चौराहे से गुलाबबाड़ी तक मार्ग का चौड़ीकरण 9.50 करोड़, लगभग 33 करोड़ की लागत से रामपथ से ग‌द्दोपुर होते हुए रायबरेली रोड तक चौड़ीकरण, 40 करोड़ की लागत से देवकाली से जेल रोड का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण, लगभग 113 करोड़ की लागत से नियावां चौराहे से पाटेश्वरी देवी मंदिर होते हुए रामपथ तक फोरलेन का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। रामकथा पार्क में नवीन पर्यटक आवास गृह का निर्माण कार्य, गुलाबबाड़ी पार्क का सौंदर्यीकरण, गुप्तारघाट में यात्रियों की सुविधा के लिए बेंच व प्रकाश व्यवस्था, राजघाट के निकट एम्पिथिएटर एवं फूड कोर्ट का कार्य किया जाएगा। योगी सरकार ने स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया है। इसके तहत 351 करोड़ रुपए की लागत से 27 हजार घरों को सीवर लाइन से जोड़ा जाएगा, जिससे शहर की स्वच्छता और जनस्वास्थ्य में सुधार होगा। साथ ही नियावां से पाटेश्वरी मंदिर होते हुए रामपथ तक फोरलेन सड़क का निर्माण होगा, जो यातायात को सुगम बनाएगा और तीर्थयात्रियों की सुविधा बढ़ाएगा। इसके अतिरिक्त, नगर निगम क्षेत्र में अन्य सड़कों के निर्माण और सौंदर्यीकरण का कार्य भी प्रस्तावित है, जो अयोध्या को आधुनिक और आकर्षक स्वरूप प्रदान करेगा। विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार में भयमुक्त परिवेश के कारण आज उत्तर प्रदेश निवेशकों की पसंद बन गया है। अमृत-2 के तहत 351.4 करोड़ की लागत से नगर निगम की सीवरेज योजना पार्ट-2 के तहत 27 हजार घरों को जोड़ा जाएगा। इस परियोजना की लागत 351 करोड़ रुपए है, जिसमें चार पंपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। इसमें टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। रामनगरी के विकास में संत-महंतों के साथ आम जनता की सरकार से अपेक्षा व सुझाव को समाहित करना सबसे ज्यादा जरूरी है। इसमें पूरे विश्व से आने वाले पर्यटकों व तीर्थयात्रियों की आवश्यकताएं भी शामिल हैं। इसके लिए लगातार तीर्थयात्रियों व आम जनता से संवाद स्थापित करते हुए उनकी अपेक्षा व सुझावों को सरकार तक पहुंचाने का कार्य किया गया है। जिससे विकास की इस पटकथा में जनता आज खुद को जोड़कर देख रही है।

संभल में ह‍िंसा भड़काने का है आरोप- सपा सांसद बर्क और जामा मस्जिद के सदर सहित 22 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

संभल जामा मस्जिद के सर्वे के विरोध में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और जामा मस्जिद के सदर जफर अली एडवोकेट सहित 22 आरोपितों के खिलाफ बुधवार को चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। जबकि, विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल को क्लीन चिट दे दी गई है। करीब 1100 पेज की चार्जशीट में सांसद को हिंसा के लिए लोगों को भड़काने और जफर अली को भड़काने के साथ पुलिस के समत्क्ष गलत साक्ष्य प्रस्तुत करने का आरोपित बनाया गया है। हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी। 30 अधिकारी व पुलिसकर्मी घायल हुए थे। हिंसा में सात प्राथमिकी पुलिस की ओर से दर्ज कराई गईं। चार मृतकों के स्वजन और एक प्राथमिकी घायल के स्वजन ने दर्ज कराई थी। सभी 12 मुकदमों में 10 में पहले चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। पुलिस की ओर से दर्ज एक मुकदमे में सांसद और विधायक के बेटे को नामजद और 700-800 अज्ञात लोगों को शामिल किया गया था। मस्जिद कमेटी के सदर को जांच के दौरान नाम सामने आने पर गिरफ्तार किया गया था। सांसद गिरफ्तारी को लेकर हाई कोर्ट के स्टे पर हैं। उनसे पुलिस ने आठ अप्रैल को चार घंटे पूछताछ की थी। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि एक अन्य मुकदमे में भी जल्द चार्जशीट दाखिल की जाएगी। 19 नवंबर, 2024 को सिविल जज(सीनियर डिवीजन) की कोर्ट ने मस्जिद के हरि हर मंदिर होने का वाद दायर किया गया था। कोर्ट ने उसी दिन अधिवक्ता रमेश राघव को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया था। एडवोकेट कमिश्नर ने उसी दिन सर्वे किया। भीड़ होने के कारण उन्हें लौटना पड़ा। इसके बाद 24 नवंबर को फिर सर्व करने पर हिंसा भड़क गई थी। दो जनवरी को कोर्ट में सर्वे रिपोर्ट पेश की जा चुकी है, जिसमें मस्जिद में मंदिर होने के साक्ष्य मिलने की जानकारी दी गई है। पुलिस की ओर से दर्ज एक मुकदमे में सांसद और विधायक के बेटे को नामजद और 700-800 अज्ञात लोगों को शामिल किया गया था। मस्जिद कमेटी के सदर को जांच के दौरान नाम सामने आने पर गिरफ्तार किया गया था। सांसद गिरफ्तारी को लेकर हाई कोर्ट के स्टे पर हैं। उनसे पुलिस ने आठ अप्रैल को चार घंटे पूछताछ की थी। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि एक अन्य मुकदमे में भी जल्द चार्जशीट दाखिल की जाएगी। 19 नवंबर, 2024 को सिविल जज(सीनियर डिवीजन) की कोर्ट ने मस्जिद के हरि हर मंदिर होने का वाद दायर किया गया था। कोर्ट ने उसी दिन अधिवक्ता रमेश राघव को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया था। एडवोकेट कमिश्नर ने उसी दिन सर्वे किया। भीड़ होने के कारण उन्हें लौटना पड़ा। इसके बाद 24 नवंबर को फिर सर्व करने पर हिंसा भड़क गई थी। दो जनवरी को कोर्ट में सर्वे रिपोर्ट पेश की जा चुकी है, जिसमें मस्जिद में मंदिर होने के साक्ष्य मिलने की जानकारी दी गई है।

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