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सरकार की ओर से अब तक 1,31,000 कारीगरों को निःशुल्क प्रशिक्षण एवं टूल किट प्रदान की गई

ओडीओपी योजना से बदली कारीगरों की तकदीर, 3.16 लाख लोगों को मिला रोजगार ओडीओपी योजना से निर्यात दोगुना, पारंपरिक उत्पादों को मिला वैश्विक मंच, बजट में आवंटन बढ़ा सरकार की ओर से अब तक 1,31,000 कारीगरों को निःशुल्क प्रशिक्षण एवं टूल किट प्रदान की गई कारीगरों को मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना के तहत पांच लाख रुपये तक की सुरक्षा भी दी जा रही  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू की गई ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) योजना प्रदेश की अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव का माध्यम बनकर उभरी है। वर्ष 2018 में प्रारंभ की गई इस पहल ने पारंपरिक कारीगरों और स्थानीय उत्पादों को न केवल नई पहचान दी, बल्कि उन्हें बाजार, प्रशिक्षण और वित्तीय संबल भी उपलब्ध कराया। सरकार की ओर से अब तक 1,31,000 कारीगरों को निःशुल्क प्रशिक्षण एवं टूल किट प्रदान की जा चुकी है। योजना के अंतर्गत कारीगरों को मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना के तहत पांच लाख रुपये तक की सुरक्षा भी दी जा रही है। परंपरागत उत्पादों को मिला प्रोत्साहन प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने बजट सत्र 2026-27 में प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू हुई इस योजना ने प्रदेश के पारंपरिक कारीगरों और उत्पादकों को नई पहचान दी है। यह योजना परंपरागत उत्पादों को प्रोत्साहन देने, कारीगरों को प्रशिक्षण, टूल किट और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रभावी रूप से संचालित हो रही है। उन्होंने बताया कि सहारनपुर जनपद में 2275 कारीगरों को उन्नत टूल किट उपलब्ध कराई गई, जबकि 454 हस्तशिल्पियों को 16.26 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी वितरित की गई।  दोगुना से अधिक हुआ निर्यात उन्होंने बताया कि आर्थिक दृष्टि से भी ओडीओपी योजना ने उल्लेखनीय प्रभाव डाला है। वर्ष 2017-18 में प्रदेश का निर्यात 86 हजार करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें लगभग 50 प्रतिशत योगदान ओडीओपी एवं हस्तशिल्प उत्पादों का बताया गया है। वर्ष 2018 से अब तक इस योजना के माध्यम से 3,16,000 लोगों को रोजगार सृजित हुआ है। 200 करोड़ के बजट का प्रावधान वित्तीय प्रतिबद्धता भी इस योजना के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाती है। पिछले बजट में 145 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जिसमें से 135 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी वितरित की जा चुकी है। चालू वित्तीय वर्ष में इसे बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये कर दिया गया है। साथ ही प्रदेश के 79 उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रांडिंग को मजबूती मिली है। कारीगरों को स्वास्थ्य सुरक्षा और शिक्षा सुविधाओं से भी जोड़ा उन्होंने कहा कि ओडीओपी केवल आर्थिक योजना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक पुनर्जागरण का अभियान है। आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से कारीगरों को स्वास्थ्य सुरक्षा और शिक्षा सुविधाओं से भी जोड़ा गया है। इसके साथ ही ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन व्यंजन’ जैसी नई पहल स्थानीय पहचान को और व्यापक मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।

अंतरधार्मिक विवाह मामले में सुरक्षा कड़ी, पुलिस ने सभा पर लगाई पाबंदी

मेरठ  मेरठ में बकायदा कार्ड छपवाकर मुस्लिम युवक से शादी का ऐलान करने वाली हिंदू लड़की का मामला बहुत ज्यादा गरमा गया है। हिंदूवादी नेताओं ने शादी नहीं होने देने का ऐलान किया तो पुलिस एक्टिव हुई। रार बढ़ने पर फिलहाल आज यानी 13 फरवरी को होनी वाली शादी टल गई है। रिसोर्ट मालिक ने बुकिंग भी कैंसिल कर दी है। युवती के चाचा ने मुस्लिम युवक के खिलाफ धर्मांतरण और लव जेहाद का आरोप लगा मुकदमा गंगानगर थाने में दर्ज कराया है, जिसकी जांच शुरू कर दी गई है। वहीं, हिंदू संगठनों ने शादी वाले रिसोर्ट के बाहर हिंदू महापंचायत का ऐलान किया है। पुलिस इसे भी रोकने में जुट गई है। हिंदूवादी नेताओं को हाउस अरेस्ट किया गया है। क्या है पूरा मामला गंगानगर निवासी युवती की 13 फरवरी को पैराडाइज व्यू रिसोर्ट में शादी होनी थी। शादी के जो कार्ड युवती पक्ष ने छपवाए, उन पर दूल्हे का नाम साहिल था, जबकि युवक का असली नाम शाहवेज बताया गया। हिंदू संगठनों और अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने इसे लेकर हंगामा किया। मामला तूल पकड़ा तो पुलिस ने युवती के चाचा की तहरीर पर शाहवेज के खिलाफ धर्मांतरण का मुकदमा गंगानगर थाने में दर्ज किया। अभी शाहवेज की गिरफ्तारी नहीं की गई है। शादी टल गई है। अब सोशल मीडिया पर पैराडाइव व्यू रिसोर्ट के बाहर शुक्रवार दोपहर हिंदू महापंचायत का ऐलान किया गया है। लव जेहाद और धर्मांतरण के मुद्दे पर महापंचायत बुलाई है। कई संगठनों समेत हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी समेत कई संगठन के पदाधिकारियों ने महापंचायत में शामिल होने का ऐलान कर दिया है। इसके बाद पुलिस-प्रशासन अलर्ट हो गया है। पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने साफ किया है महापंचायत की अनुमति नहीं है, आयोजन नहीं होने दिया जाएगा। गंगानगर समेत सर्किल के बाकी थानों से फोर्स और पुलिस लाइन से अतिरिक्त फोर्स को शुक्रवार दोपहर गंगानगर में तैनात किया जा रहा है। धर्मांतरण का मुकदमा दर्ज कराने वाले युवती के चाचा को धमकी भी मिल चुकी है। एसएसपी अविनाश पांडेय के अनुसार पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने का काम कर रही है। इस मामले में पहले से मुकदमा दर्ज है और जांच शुरू कर दी गई है। नियमानुसार कार्रवाई कराई जा रही है। मंडप एसोसिएशन महामंत्री बोले, कोई बुकिंग नहीं मेरठ मंडप एसोसिएशन महामंत्री विपुल सिंघल ने बताया 13 फरवरी को गंगानगर मवाना रोड स्थित पैराडाइज व्यू रिसोर्ट में आकांक्षा और शाहवेज की शादी का कार्यक्रम निरस्त कर दिया गया है। रिसोर्ट मालिक सतीश मंगा ने बताया है कुछ संगठन द्वारा 13 अप्रैल को रिसोर्ट पर कथित हिंदू पंचायत को लेकर मैसेज वायरल किया जा रहा है। इस तरह के आयोजन के लिए रिसोर्ट पर न तो बुकिंग है और न ही ऐसी कोई पंचायत रिसोर्ट में होने दी जाएगी। न तो विवादित विवाह समारोह आयोजित होगा और न पंचायत के लिए कोई व्यवस्था की है। युवती ने पुलिस को दर्ज कराए बयान युवती ने मीडिया को बताया गंगानगर थाने में दर्ज मुकदमे को लेकर बयान दर्ज कराए हैं। 13 फरवरी को होनी वाली शादी को फिलहाल निरस्त कर दिया है। शाहवेज से बात नहीं हो पा रही है। पुलिस से मदद मांगी, लेकिन पुलिस ने मदद करने से इंकार कर दिया। कानून व्यवस्था का हवाला दिया। स्पेशल मैरिज एक्ट में एडीएम कार्यालय पर नवंबर में आवेदन किया था। इसके बाद ही शादी की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया। युवती ने कहा कि वह बौद्ध धर्म को मानती है और हिंदू धर्म से कोई वास्ता नहीं है। पुलिस जिसे खोज रही, वो सोशल मीडिया पर एक्टिव अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने बताया वह पंचायत को लेकर सोशल मीडिया पर लाइव थे। इसी दौरान वांटेड शाहवेज सोशल मीडिया पर आया और कमेंट किया। लिखा सिरोही जी, मेरा पीछा छोड़ दो, मेरी शादी हो जाने दो। सचिन सिरोही ने सवाल उठाया जिसके खिलाफ धर्मांतरण में मुकदमा है, वह सोशल मीडिया चला रहा है, लेकिन पुलिस पकड़ नहीं रही। युवती के बौद्ध धर्म वाले बयान पर कहा कि युवती ने अपने घर पर पांच दिन पहले माता की चौकी और पूजा का कार्यक्रम रखा था, जिसकी वीडियो भी है। यदि युवती बौद्ध धर्म अपना चुकी है तो ये पूजा क्यों हुई? बौद्ध धर्म अपनाने के साक्ष्य दें।

पिंक सॉलिड स्टोन से सजेगा प्रवेश द्वार, अयोध्या-गोण्डा मार्ग की बढ़ेगी गरिमा

राम की नगरी में आने वाले भक्तों का स्वागत करेगा लक्ष्मण द्वार एनएच-330ए पर बन रहा भव्य लक्ष्मण द्वार, 3,970.50 लाख रुपये की लागत से हो रहा निर्माण पिंक सॉलिड स्टोन से सजेगा प्रवेश द्वार, अयोध्या-गोण्डा मार्ग की बढ़ेगी गरिमा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में है अयोध्या का धार्मिक विकास अयोध्या  राम की नगरी अब भक्तों के लिए और अधिक आकर्षक व स्वागतमय बन रही है। राम मंदिर के दर्शनार्थ आने वाले लाखों श्रद्धालुओं का भव्य स्वागत करने के लिए एनएच-330ए (अयोध्या-गोण्डा मार्ग) पर एक शानदार लक्ष्मण द्वार का निर्माण तेजी से चल रहा है। यह प्रवेश द्वार अयोध्या की धार्मिक गरिमा को और निखारने के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह भव्य लक्ष्मण द्वार देईपुर/कटरा भागचंद्र अहतमाली क्षेत्र में 40 मीटर चौड़े मार्ग पर बनाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड को इस परियोजना की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कुल निर्माण लागत 3,970.50 लाख रुपये निर्धारित की गई है। द्वार को पिंक सॉलिड स्टोन से सजाया जाएगा, जो इसे राजसी एवं आकर्षक बनाएगा। पिंक स्टोन का उपयोग न केवल सौंदर्य बढ़ाएगा, बल्कि यह स्थानीय शिल्प कौशल को भी प्रदर्शित करेगा और अयोध्या की प्राचीन वास्तुकला से प्रेरित होगा। राजकीय निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर रविंद्र यादव ने बताया कि वर्तमान में परियोजना का 35 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। शेष कार्य को तेजी से पूरा करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और अक्टूबर तक पूरा लक्ष्मण द्वार तैयार हो जाएगा। भव्य और यादगार पड़ाव साबित होगा लक्ष्मण द्वार के बनने से यह मार्ग धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व का प्रतीक भी बन जाएगा। रामायण काल में लक्ष्मण जी के भाई राम के प्रति समर्पण की याद दिलाता यह द्वार भक्तों के मन में श्रद्धा एवं उत्साह का संचार करेगा। अयोध्या विकास की इस नई परियोजना से न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश का धार्मिक पर्यटन नक्शा और चमकदार हो रहा है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगी मजबूती मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में धार्मिक स्थलों का विकास एवं पर्यटन संवर्धन प्रमुख स्थान रखता है। अयोध्या में राम मंदिर के लोकार्पण के बाद यहां पर्यटकों एवं तीर्थयात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। लक्ष्मण द्वार का निर्माण इसी दिशा में एक और कदम है, जो न केवल श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा। स्थानीय व्यापारियों, होटलों, परिवहन सेवाओं और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों को इससे प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। एनएच-330ए पर यह लक्ष्मण द्वार अयोध्या-गोण्डा मार्ग की गरिमा को कई गुना बढ़ा देगा।

289 एकड़ भूमि पर विकसित होगा कार्बन-फ्री डेटा सेंटर, हजारों उच्च-कुशल रोजगार सृजन की संभावना

एएम ग्रुप और इन्वेस्ट यूपी के बीच एमओयू, 2030 तक पूर्ण क्षमता से संचालन का लक्ष्य यीडा के सीईओ ने एएम ग्रुप के प्रतिनिधियों को सौंपा लेटर ऑफ इंटेंट 289 एकड़ भूमि पर विकसित होगा कार्बन-फ्री डेटा सेंटर, हजारों उच्च-कुशल रोजगार सृजन की संभावना लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी एआई और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत एएम ग्रुप और राज्य सरकार की निवेश प्रोत्साहन एजेंसी ‘इन्वेस्ट यूपी’ के बीच सहमति बनी है। इसके तहत 1 गीगावॉट (GW) हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूट (HPC) एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) हब की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। गुरुवार को यीडा के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने एएम ग्रुप के प्रतिनिधियों को लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया है।  289 एकड़ भूमि के लिए एलओआई जारी यीडा द्वारा सेक्टर 28 में 114 एकड़ और सेक्टर 8डी में 175 एकड़, कुल 289 एकड़ भूमि के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) जारी किया गया है। यह अत्याधुनिक हब लगभग पांच लाख हाई-परफॉर्मेंस चिपसेट्स से लैस होगा और 24×7 कार्बन-फ्री ऊर्जा (पवन, सौर एवं पम्प्ड स्टोरेज) से संचालित होगा। यह परियोजना यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में स्थापित की जाएगी, जिसमें लगभग 25 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश प्रस्तावित है। इसे चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। वर्ष 2028 तक प्रथम चरण का संचालन शुरू होगा, जबकि 2030 तक पूर्ण 1 गीगावॉट क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। एआई और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग को नई गति भारत में एआई और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की तेजी से बढ़ती मांग को देखते हुए यह हब वैश्विक हाइपरस्केलर्स, अनुसंधान संस्थानों, उद्यमों और संप्रभु एआई पहलों की जरूरतों को पूरा करेगा। एएमजी एआई लैब्स ‘एआई के लोकतंत्रीकरण’ के तहत ऊर्जा से लेकर इंटेलिजेंट टोकन तक संपूर्ण वैल्यू चेन विकसित करने की दिशा में कार्यरत है। यह सुविधा भारतीय डेवलपर समुदाय को अत्याधुनिक चिपसेट्स तक व्यापक पहुंच देगी, जिससे घरेलू और वैश्विक स्तर पर एआई समाधान विकसित करने में तेजी आएगी। आर्थिक और औद्योगिक प्रभाव इस परियोजना से बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित होने की संभावना है। साथ ही हजारों उच्च-कुशल रोजगार सृजित होंगे। हार्डवेयर निर्माण, सॉफ्टवेयर विकास और विशेषीकृत कूलिंग तकनीकों के क्षेत्र में स्थानीय इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार का मानना है कि यह पहल उत्तर प्रदेश को डिजिटल अर्थव्यवस्था के अग्रिम पंक्ति के राज्यों में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

रक्षा शक्ति पर बड़ा बयान, सीएम योगी ने ब्रह्मोस के जरिए दिखाया ‘हार्ड पावर’ रोडमैप

सीएम योगी ने दिया ब्रह्मोस संग ‘हार्ड पावर’ विजन   मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर बदली कवर इमेज अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश करने वाली सरकार के मुखिया ने दिया ‘नए यूपी’ का संकेत   लखनऊ  उत्तर प्रदेश में अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश करने वाली सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने ‘नए यूपी’ की बढ़ती ताकत का संकेत दिया। बजट 2026-27 के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कवर इमेज बदल दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्रह्मोस संग अपनी फोटो लगाकर ‘हार्ड पावर’ विजन” का संदेश दिया।  सोशल मीडिया हैंडल पर मुख्यमंत्री का यह संदेश बताता है कि लखनऊ में ब्रह्मोस निर्माण के जरिए उत्तर प्रदेश एक तरफ रक्षा उत्पादन का उभरता वैश्विक हब हो गया है। वहीं दूसरी ओर 9.12 लाख करोड़ का बजट और सामरिक शक्ति के संगम का भी संकेत प्रदेशवासियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। बजट के जरिए सीएम योगी ने संदेश दिया कि यूपी की अर्थव्यवस्था “फर्श से अर्श तक पहुंच गई है, जो यूपी के विकास, सुरक्षा और निवेश के त्रिवेणी मॉडल को प्रदर्शित करता है। योगी का यह “‘सुपरसोनिक केसरिया’ संदेश बताता है कि उत्तर प्रदेश विकास का इंजन और प्रदेशवासियों की सुरक्षा का कवच भी बन गया है।

पहले OBC आयोग की रिपोर्ट, फिर पंचायत चुनाव—हाईकोर्ट में योगी सरकार का रुख साफ

लखनऊ यूपी पंचायत चुनाव का टलना लगभग तय माना जा रहा है। योगी सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि पहले समर्पित ओबीसी आयोग बनाया जाएगा, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण तय होगा। आयोग की रिपोर्ट के बाद ही चुनाव की तारीखें घोषित होने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में यह कदम उठाया गया है।   उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव का टलना तय माना जा रहा है। चुनाव की तैयारियों के बीच योगी सरकार ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में हलफनामा देते हुए बताया कि एक समर्पित पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग का गठन किया जाएगा। जिसकी रिपोर्ट के बाद चुनाव कराए जाएंगे। जस्टिस राजन राय और जस्टिस अवधेश चौधरी की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। दरअसल, हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग के अधिकारों को चुनौती दी गई थी, जिसके बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि नए समर्पित आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायत सीटों का आरक्षण तय किया जाएगा। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बाद पंचायत चुनाव यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप उठाया जा रहा है, जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों से पहले समर्पित आयोग का गठन जरूरी बताया गया है। प्रदेश का मौजूदा ओबीसी आयोग अक्टूबर 2025 में अपना मूल कार्यकाल पूरा कर चुका है। हालांकि सरकार ने इसका कार्यकाल अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दिया है, लेकिन कानूनी तौर पर उसे समर्पित आयोग के अधिकार नहीं मिले हैं, जिस पर सवाल उठे थे। अब नया आयोग पिछड़े वर्गों का ‘रैपिड सर्वे’ करेगा, जिससे उनकी वास्तविक आबादी का आकलन कर आरक्षण तय किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक स्थानीय निकाय चुनाव से पहले तीन साल के कार्यकाल वाला समर्पित आयोग जरूरी है। सरकार का कहना है कि आयोग की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान संभव होगा। सियासी गलियारों में क्या है चर्चा? वहीं राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की चुनावी रणनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव कराने को लेकर नेगेटिव फीडबैक है। पार्टी के कई नेताओं को आशंका है कि पंचायत चुनाव के दौरान प्रधान से लेकर जिला पंचायत के चुनाव तक पार्टी के ही नेता और कार्यकर्ता आपस में लड़ेंगे। ऐसे नेताओं को आशंका है कि पंचायत चुनाव में किसी एक कैंडिडेट का समर्थन करने से विधानसभा चुनाव में कार्यकर्ताओं के एक वर्ग की नाराजगी उठाने का खतरा है। इसलिए ये बात चल रही है कि पहले विधानसभा हो जाए, फिर तनावपूर्ण पंचायत चुनाव की बिसात बिछे। पंचायत चुनाव का टलना तय! ऐसे में अब पंचायत चुनाव का टलना लगभग तय माना जा रहा है। प्रदेश में ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल मई के पहले सप्ताह में हो जाएगा। वहीं, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्षों का पांच साल का कार्यकाल जुलाई के पहले सप्ताह में पूरा होगा। ऐसे में यदि समय पर चुनाव नहीं कराए जाते हैं तो ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्षों की जगह वहां सरकार की ओर से किसी सक्षम अधिकारी को रिसीवर (प्रशासक) नियुक्त किया जाएगा। पिछले पंचायत चुनाव 4 चरणों में हुए थे यूपी में 57 हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतें हैं, जिला पंचायत वार्ड 3051, जिला पंचायत 75, क्षेत्र पंचायत 826 हैं। पिछले पंचायत चुनाव कोरोना लहर के बीच साल 2021 चार चरणों में हुए थे। पहले चरण में 18 जिले, दूसरे और तीसरे चरण में 20-20 जिले, और चौथे चरण में 17 जिलों में चुनाव हुए थे।  

कानपुर हिट-एंड-रन पर कानूनी ट्विस्ट: 7 घंटे में छूटा आरोपी शिवम, रिमांड पर कोर्ट सख्त

कानपुर कानपुर लैंबॉर्गिनी कांड में तंबाकू व्यापारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा को एसीएमएम कोर्ट ने जमानत दे दी है। कोर्ट ने शिवम को 20-20 हजार के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश किया। साथ की पुलिस की 14 दिन की रिमांड अर्जी को खारिज कर दिया है। आज सुबह ही करीब 9 बजे शिवम की गिरफ्तारी हुई थी। और महज 7 घंटे में छूट गया है। हालांकि पुलिस जांच में सामने आया था कि हादसे के वक्त शिवम मिश्रा ही ड्राइविंग सीट पर था, और कार चला रहा था। आपको बता दें कानपुर के वीआईपी रोड पर करीब 12 करोड़ रुपये की लग्जरी लैंबॉर्गिनी कार से हुए हादसे के मामले में पुलिस ने बंशीधर टोबैको ग्रुप के मालिक केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा को आज ही गिरफ्तार किया था। हादसे में कई लोग घायल हुए थे, जिसके बाद मामला सुर्खियों में आ गया। पुलिस का दावा है कि दुर्घटना के समय शिवम मिश्रा खुद कार चला रहा था, जबकि बचाव पक्ष का कहना है कि वाहन ड्राइवर मोहन लाल चला रहा था। हालांकि वायरल वीडियो में शिवम ड्राइविंग सीट से बाहर निकलते हुए दिखाई दिया, जिससे पुलिस की जांच को मजबूती मिली। हादसे के बाद मौके पर मौजूद बाउंसरों की भूमिका भी सवालों में रही। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ लोग कार की नंबर प्लेट हटाने या ढकने की कोशिश करते नजर आए और उनके पास वॉकी-टॉकी भी थे। शुरुआती कार्रवाई में पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगे, जिसके बाद ग्वालटोली थाना प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया गया और सीसीटीवी फुटेज व वायरल वीडियो की जांच की गई। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस जब शिवम के घर पहुंची तो दरवाजा नहीं खोला गया, लेकिन गुरुवार को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया। मामले की आगे जांच जारी है।  

कानपुर हिट एंड रन: SOG ने डिकोड की पूरी साजिश, लैंबॉर्गिनी केस में मुख्य आरोपी गिरफ्तार

 कानपुर     कानपुर के चर्चित लैंबॉर्गिनी हादसे मामले में पुलिस ने आरोपी शिवम मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने कोर्ट को अवगत कराया कि 8 तारीख को घटना घटित होने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया. इसके अगले दिन, 9 तारीख को एक डमी ड्राइवर को वाहन चालक बताकर फर्जी हलफनामा तैयार किया गया. जिसे बाद में कोर्ट में भी दाखिल कर दिया गया. पुलिस जांच में स्पष्ट हुआ कि घटना के समय गाड़ी शिवम ही चला रहा था. इसके बाद पुलिस टीम नोटिस की तामील कराने उसके पास पहुंची और उसे जांच में शामिल होने के निर्देश दिए गए. लेकिन इसके बावजूद वह खुद को कानून से बचाने के लिए छिपता रहा और तरह-तरह के बहाने बनाता रहा. देर से गिरफ्तारी पर भी पुलिस का आया बयान उसकी गिरफ्तारी 35 बीएनएस का पालन न करने पर हुई है. वहीं आरोपी की देर से गिरफ्तारी को लेकर भी पुलिस का बयान आया है. पुलिस के मुताबिक मामले में लगी धाराएं 7 साल से कम सजा की होने के कारण अभियुक्त को तत्काल गिरफ्तार नहीं किया गया. बल्कि नोटिस तामील कराने के लिए पुलिस टीम उसके पास भेजी गई. हालांकि, अभियुक्त द्वारा 35-बीएस के नियमों का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते पुलिस के पास यह अधिकार सुरक्षित है कि वह 7 साल से कम सजा वाली धाराओं में भी अभियुक्त को गिरफ्तार कर सकती है. पुलिस ने कोर्ट से यह मांग की है कि आरोपी को 14 दिन की न्याय हिरासत में भेजा जाए.  मोहन को बनाया गया था डमी ड्राइवर कानपुर लैंबॉर्गिनी एक्सीडेंट मामले में शिवम मिश्रा की तरफ से समझौते के लिए शपथ पत्र दाखिल किया गया था. वादी के वकील ने कहा कि गाड़ी ड्राइवर मोहन चला रहा था. जबकि पुलिस जांच में सामने आया कि गाड़ी शिवम मिश्रा ही चल रहा था. कोर्ट में मोहन लाल का शपथ पत्र भी दिया गया था. जिसमें घटना से जुड़े तथ्यों का जिक्र है. न्यायालय ने सभी पक्षों की दलीलें और सबूतों को सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था. इस मामले में अधिवक्ता धर्मेद्र कुमार धर्मू ने कहा एसीजेएम-7 की कोर्ट से कार चालक का आत्मसमर्पण खारिज होने के फैसले के खिलाफ वह जिला जज कोर्ट में रिवीजन दाखिल करेंगे। चालक खुद बता रहा है कि हादसे के समय वह कार चला रहा था।शिवम की कार रिलीज अर्जी पर भी कोर्ट ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी। पुलिस ने रिपोर्ट में कहा वाहन संख्या डीएल 11 सीफ 4018 लेम्बोर्गिनी कार से अपराध कारित किया है। चालक शिवम कुमार मिश्रा का नाम सामने आया है। आरोपी की ओर से कार से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। पुलिस की इस रिपोर्ट पर कोर्ट ने शिवम को आदेश दिया वह कार से संबंधित समस्त दस्तावेज उपलब्ध कराए। थाना प्रभारी को आदेश दिया कार का परीक्षण कर 13 फरवरी तक अपनी रिपोर्ट दें। पुलिस ने शिवम को पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी कर तलब किया है। वहीं इस मामले में कोर्ट में समझौता पत्र दाखिल होने के बाद सामने आए वादी मो. तौफीक ने कहा हादसे में बाएं पैर में चोट आई थी। इलाज करा दिया, अब कोई शिकायत नहीं है। मो. तौफीक चमनगंज के घोसियाना में रहता है और ई-रिक्शा चलाकर परिवार का गुजर-बसर करता है। अधिवक्ता धर्मेंद्र सिंह धर्मू ने बताया कि चमनगंज घोसियाना निवासी मो. तौफीक ने मुकदमा दर्ज कराया था। उसने कोर्ट में एक समझौतानामा दाखिल किया है। उसने कहा कि हादसे में उसे चोट लगी थी। इसमें उसे इलाज का पैसा मिल गया है, जिससे वह संतुष्ट है। आपको बता दें कि कानपुर में लैंबॉर्गिनी कर दुर्घटना मामले में जितनी चर्चा दुर्घटना की है, उससे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि गाड़ी कौन चला रहा है. क्योंकि वीडियो में शिवम मिश्रा कार से बाउंसर के साथ निकलते हुए देखा गया. साथ ही पुलिस भी कह रही है कि गाड़ी शिवम मिश्रा ही चला रहा था. लेकिन कोर्ट में शिवम मिश्रा के एडवोकेट की तरफ से दावा किया गया था कि गाड़ी ड्राइवर मोहन चल रहा था. यह दावा खुद शिवम मिश्रा के पिता केकेबमिश्रा ने भी किया था. मोहन को सोमवार को कोर्ट में सरेंडर करना था. आज तक से बातचीत करने के दौरान डमी ड्राइवर मोहन ने बताया कि गाड़ी मैं ही चल रहा था. गाड़ी ठीक करने के लिए मैं दिल्ली से आया था. गाड़ी टेस्ट कर रहा था. बगल की सीट में शिवम मिश्रा बैठे थे. तभी वह मेरे ऊपर गिर गए. मैं कुछ समझ नहीं पाया और गाड़ी का बैलेंस खो गया.

होटल में छापा, 500 लड़कियों के साथ सेक्स रैकेट का भंडाफोड़, विदेशी भी शामिल

गाजियाबाद गाजियाबाद के वैशाली में बुधवार को एक बड़े सेक्स रैकेट का खुलासा हुआ जिसे महागुन सरोवर पोर्टिगो नाम के होटल से संचालित किया जा रहा था। पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि कुछ आरोपी फरार हैं। छापेमारी के दौरान पुलिस ने होटल से 11 लड़कियों को बरामद किया गया, जो देश के अलग-अलग राज्यों की रहने वाली हैं। मैनेजर के फोन से 500 लड़कियों की तस्वीरें मिलने की बात सामने आई है, जिससे पता चलता है कि यह रैकेट कितना बड़ा है। ग्राहकों को वॉट्सऐप पर लड़कियों की तस्वीरें और रेट भेजकर जिस्म का सौदा किया जाता था। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनमें होटल का मैनेजर राहुल शर्मा (46) भी शामिल है, जिसे रैकेट का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। इसके अलावा वेटर सुनील सिंह (39) और अंकित चौहान (19) को गिरफ्तार किया गया है। एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने सूचना के आधार पर पुलिस टीमों के साथ सेक्टर तीन एफ वैशाली स्थित होटल पर छापेमारी की। पुलिस के होटल में पहुंचते ही अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने होटल के अलग अलग कमरों से देह व्यापार के लिए लाई गईं 11 युवतियों को रेस्क्यू किया। इस दौरान कुछ लोग फरार भी हो गए। चार आरोपी अब भी फरार एसीपी ने बताया कि टीम ने मौके से होटल मैनेजर राहुल शर्मा, अंकित चौहान निवासी कासिमपुर पावर हाउस थाना जवा जिला अलीगढ़ और सुनील निवासी ग्राम दभी थाना अकराबाद जिला अलीगढ़ को गिरफ्तार किया है। इस धंधे में शामिल सुमित रावत निवासी कोटद्वार उत्तराखंड , राहुल, निर्दोष और अफजल फरार हैं। पुलिस इनकी तलाश कर रही है। निर्दोष का संबंध एक राजनीतिक दल से भी बताया जा रहा है। 21 से 31साल की लड़कियां, कई राज्यों से आईं एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि गोपनीय सूचना के बाद दोपहर करीब 2 बजे होटल पर छापेमारी की गई। उन्होंने कहा, ‘होटल से रेस्क्यू की गईं लड़कियां 21 से 31 साल की हैं। ये गुजरात, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और ओडिसा की रहने वाली हैं।’ पूछताछ के दौरान लड़कियों ने बताया कि राहुल रोजगार के नाम पर उन्हें होटल लाया था और दबाव डालकर गंदे धंधे में धकेल दिया। होटल में आती थीं विदेशी लड़कियां, ग्राहकों से लेते थे 15-20 हजार एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक महिलाओं ने पूछताछ के दौरान बताया कि ग्राहकों से 15 से 20 हजार रुपये लिए जाते थे, जबकि उन्हें एक रात के लिए 5 हजार रुपये मिलते थे। कुछ महिलाओं ने यह भी बताया कि होटल में विदेशी लड़कियां भी सेक्स वर्कर्स के रूप में आती थीं। राहुल के मुताबिक वह ग्राहकों को वॉट्सऐप पर लड़कियों की तस्वीरें भेजता था, जिसके बाद वे होटल में आते थे। इसके अलावा लड़कियों को ग्राहकों के साथ दूसरे होटलो में भी भेजा जाता था। उनके लिए रूम की बुकिंग ऑनलाइन की जाती थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस को मैनेजर के फोन से 500 से ज्यादा लड़कियों की तस्वीरें और 100 से ज्यादा ग्राहकों के फोन नंबर मिले हैं।

विवाद बढ़ा: AIMIM नेता का बयान ‘हिंदू भाई 4 नहीं 14 बच्चे पैदा करें’

मुजफ्फरनगर एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली मुजफ्फरनगर पहुंचे, जहां उन्होंने दो नुक्कड़ सभाओं को संबोधित किया. मीडिया से बातचीत में उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर कहा कि देश की आबादी बढ़ने से राष्ट्र मजबूत होता है. शौकत अली ने हिंदू संगठनों के चार बच्चे पैदा करने वाले बयानों पर तंज कसते हुए कहा कि हिंदू भाइयों को 4 नहीं बल्कि 14 बच्चे पैदा करने चाहिए. उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए तर्क दिया कि चीन अपनी विशाल आबादी के कारण ही हमसे अधिक मजबूत है, इसलिए भारत को भी अपनी जनसंख्या बढ़ानी चाहिए. बाबरी मस्जिद और नामकरण पर तीखे तेवर मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम से हो रहे निर्माण पर शौकत अली ने कहा कि संविधान किसी भी नाम से धार्मिक स्थल बनाने की अनुमति देता है. उन्होंने सवाल किया कि यदि कोई अपने बेटे का नाम बाबर रखकर काम शुरू करे, तो क्या उसे लाइसेंस नहीं मिलेगा? शौकत ने आरोप लगाया कि देश में दाढ़ी, टोपी और गोश्त के नाम पर मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है और मॉब लिंचिंग की घटनाएं बढ़ रही हैं. उनके अनुसार, यदि सरकार को जनसंख्या से आपत्ति है, तो वह ‘हम दो हमारे दो’ का कानून लेकर आए. चुनावों और बजट पर भी रखी अपनी बात शौकत अली ने आगामी जिला पंचायत और विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की तैयारियों का जिक्र किया. उन्होंने स्वीकार किया कि 2022 के चुनाव में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, इसलिए अब संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है. बजट पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें आम जनता के लिए राहत की उम्मीद बेहद कम है. उन्होंने दावा किया कि वर्तमान परिस्थितियों में मुसलमानों के साथ अन्याय हो रहा है, जिसे लेकर उनकी पार्टी आवाज उठाती रहेगी.

अलीगढ़ से हैरान करने वाली खबर: सास दूसरी बार फरार, दो लाख रुपये भी गायब

 अलीगढ़  अलीगढ़ की वह सास, जो पिछले साल अपने होने वाले दामाद के साथ भाग गई थी, एक बार फिर चर्चा में है. करीब दस महीने तक दामाद राहुल के साथ बिहार में पति-पत्नी की तरह रहने के बाद अब उसने उसे भी अलविदा कह दिया है. इस बार वह अपने जीजा के साथ भाग गई और जाते-जाते दो लाख रुपये नकद व जेवर भी साथ ले गई. परेशान राहुल शिकायत लेकर अलीगढ़ पहुंचा, लेकिन पुलिस ने यह कहकर लौटा दिया कि मामला बिहार का है. रिश्तों की यह उलझी कहानी अब एक नए मोड़ पर खड़ी है.  जब बेटी की शादी से पहले बदल गई कहानी यह पूरा घटनाक्रम अप्रैल 2025 से शुरू होता है. 16 अप्रैल को महिला की बेटी की शादी तय थी. घर में रंगाई-पुताई, रिश्तेदारों की आवाजाही और शादी की तैयारियां जोरों पर थीं. लेकिन शादी से महज 12 दिन पहले ऐसा हुआ जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. जिस युवक राहुल से बेटी की शादी होने वाली थी, उसी के साथ सास घर से चली गई. आरोप लगा कि वह घर से लाखों रुपये के जेवर और नकदी लेकर फरार हुई. परिवार ने तब दावा किया था कि करीब पांच लाख रुपये के जेवर और साढ़े तीन लाख रुपये कैश गायब थे. बेटी ने मीडिया के सामने कहा था, मां घर में दस रुपये भी नहीं छोड़कर गईं. मोबाइल से शुरू हुई नजदीकियां परिवार के मुताबिक, महिला ने राहुल को एक स्मार्टफोन दिलवाया था. धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी. पहले शादी की तैयारियों के नाम पर बात होती थी, फिर घंटों-घंटों फोन कॉल चलने लगे. महिला के पति जितेंद्र ने तब आरोप लगाया था कि जब वह शादी की तैयारी के सिलसिले में घर आए तो पता चला कि पत्नी और राहुल के बीच 15-20 घंटे तक फोन पर बातचीत हो रही है. पहले उन्होंने इसे सामान्य माना, लेकिन बाद में शक गहराता गया. भागकर कहां-कहां पहुंचे जब मामला सुर्खियों में आया और पुलिस सक्रिय हुई, तब पता चला कि दोनों अलीगढ़ से कासगंज, फिर बरेली होते हुए बिहार के मुजफ्फरपुर पहुंचे थे. कुछ दिन वहीं रुके. यहां तक कि नेपाल बॉर्डर जाने की भी योजना बनाई गई थी. राहुल ने बाद में बताया था कि जब उन्होंने मोबाइल चलाया तो देखा कि दोनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी हैं. हर तरफ चर्चा थी. तब दोनों ने खुद लौटने का फैसला किया. मुजफ्फरपुर से बस पकड़कर वे उत्तर प्रदेश लौटे और अंततः थाना दादों पहुंचकर सरेंडर कर दिया. पुलिस के सामने क्या कहा था थाने में पूछताछ के दौरान सास ने घरेलू हिंसा का आरोप लगाया था. उसने कहा कि उसका पति शराब पीकर मारपीट करता था, अपमानित करता था और अक्सर घर से निकाल देने की धमकी देता था. सास का कहना था कि जब राहुल फोन करता था तो कभी बेटी बात करती थी, कभी वह खुद. इसी बात को लेकर घर में विवाद बढ़ता गया. पति ताने मारते थे अब तो राहुल के साथ ही भाग जाओ. उसने पुलिस के सामने कहा था कि जब हालात असहनीय हो गए तो उसने वही किया जो उसे उस समय ठीक लगा. राहुल ने भी बयान दिया था कि वह महिला को पहले से जानता था और उसके कहने पर ही साथ गया. वह रोती थी, कहती थी कि अब जीने का मन नहीं करता. मुझे लगा कि उसे अकेला छोड़ना ठीक नहीं होगा. पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी कर महिला को राहुल के साथ जाने की अनुमति दे दी थी. दस महीने साथ रहने के बाद नया मोड़ करीब दस महीने तक दोनों बिहार में साथ रहे. स्थानीय सूत्रों के अनुसार, वे पति-पत्नी की तरह रह रहे थे. लेकिन हाल ही में राहुल ने आरोप लगाया कि महिला उसे छोड़कर अपने जीजा के साथ चली गई है. राहुल का कहना है कि जाते समय वह दो लाख रुपये नकद और कुछ जेवर भी साथ ले गई. राहुल ने कहा कि मैंने उसके लिए अपना घर छोड़ा, समाज की बातें सुनीं. अब वह मुझे ही छोड़कर चली गई.  शिकायत और पुलिस का जवाब राहुल अलीगढ़ पहुंचा और थाना दादों में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की. लेकिन पुलिस ने क्षेत्राधिकार का हवाला देते हुए कहा कि कथित घटना बिहार में हुई है, इसलिए वहीं की पुलिस कार्रवाई करेगी. अब राहुल बिहार जाकर शिकायत दर्ज कराने की तैयारी में है.

इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के लिए 400 करोड़ और चार्जिंग स्टेशन के लिए दिए गए 50 करोड़ रुपये

नव निर्माण के नौ वर्ष: बजट 2026-27  नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विकास को मिले नए पंख, बजट में 2,111 करोड़ रुपये की घोषणा जेवर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट को मिले 750 करोड़ रुपये, ऑपरेशन हब के रूप में होगा विकास इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के लिए 400 करोड़ और चार्जिंग स्टेशन के लिए दिए गए 50 करोड़ रुपये लखनऊ प्रदेश में नागरिक उड्डयन और परिवहन अवसंरचना को सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बजट 2026-27 में व्यापक वित्तीय प्रावधान किए हैं। इस क्रम में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट भाषण में नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विकास हेतु 2,111 करोड़ रुपये के प्रावधान की घोषणा की। इसमें विशेष रूप से जेवर एयरपोर्ट में नए विकास कार्यों के साथ प्रदेश के अन्य एयरपोर्टों पर हवाई पट्टियों के निर्माण के लिए बजट प्रावधान किया गया है। साथ ही सड़क परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए 400 करोड़ रुपये ईवी बसों की खरीद के लिए स्वीकृत किए गए हैं। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट भाषण के दौरान प्रदेश के महत्वाकांक्षी जेवर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट में नए निर्माण कार्यों के लिए 750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने बताया कि पीपीपी मोड पर बन रहे इस एयरपोर्ट के प्रथम चरण का विकास कार्य प्रगति पर है। राज्य सरकार ने यहां प्रस्तावित दो रनवे की संख्या बढ़ाकर पांच रनवे किए जाने का निर्णय लिया है। साथ ही जेवर एयरपोर्ट को एविएशन इनोवेशन एवं रिसर्च सेंटर के अलावा रखरखाव एवं ऑपरेशन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। साथ ही प्रदेश में हवाई पट्टियों के निर्माण, विस्तार, सुदृढ़ीकरण एवं भूमि अर्जन के लिए 1,100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है, जिससे क्षेत्रीय हवाई सेवाओं को मजबूती मिलेगी। साथ ही उन्होंने बताया कि प्रदेश में हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (आरसीएस) के माध्यम से हवाई सुविधाओं का निरंतर विकास किया जा रहा है। प्रदेश सरकार के बजट 2026-27 में सड़क परिवहन को सुदृढ़ बनाने और इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। वित्त मंत्री ने ईवी बसों की खरीद के लिए 400 करोड़ रुपये और बस अड्डों पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। वहीं परिवहन संरचना के सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से बस अड्डों के निर्माण के लिए 150 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं दुर्घटना के बाद त्वरित कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री सड़क सेफ्टी विजन योजना के अंतर्गत 50 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। योगी सरकार की इन पहलों से प्रदेश में हवाई और सड़क परिवहन ढांचे को नई गति मिलने की उम्मीद है, जिससे कनेक्टिविटी, निवेश और आर्थिक विकास को व्यापक प्रोत्साहन मिलेगा।

नव निर्माण के नौ वर्ष : एमएसएमई से हथकरघा और खादी तक, रोजगार व आत्मनिर्भरता को नई रफ्तार देता बजट 2026-27

एमएसएमई को 3,822 करोड़ का संबल, 3.11 करोड़ रोजगार वाले क्षेत्र को और मजबूती वस्त्रोद्योग में 5,041 करोड़ का प्रावधान, 30,000 नए रोजगार और मेगा टेक्सटाइल पार्क की तैयारी लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम, हथकरघा वस्त्र उद्योग और खादी ग्रामोद्योग क्षेत्रों को केंद्र में रखकर रोजगार और औद्योगिक विस्तार की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत की है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले इन क्षेत्रों के लिए बढ़े हुए बजटीय प्रावधानों के साथ नई योजनाओं और लक्ष्यों की घोषणा की गई है, जिनका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों स्तरों पर रोजगार सृजन, परंपरागत उद्योगों का आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के विजन को गति देना है।  सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम सेक्टर की योजनाओं के लिए 3,822 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव किया गया है। जो वर्ष 2025-26 की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र से लगभग 3.11 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। उत्तर प्रदेश एमएसएमई के मामले में सभी राज्यों में अग्रणी बना हुआ है। एमएसएमई उद्योगों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से सरदार वल्लभभाई पटेल इम्प्लायमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन की नई योजना प्रस्तावित की गई है, जिसके लिए 575 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान हेतु 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जिसके अंतर्गत प्रतिवर्ष 1 लाख सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है और आवश्यकता अनुसार इसे बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के लिए 225 करोड़ रुपये तथा एक जनपद एक व्यंजन योजना के लिए 75 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग   हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग क्षेत्र के लिए लगभग 5,041 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो वर्ष 2025-26 की तुलना में पांच गुने से अधिक है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में वस्त्रोद्योग क्षेत्र में 30,000 रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में गारमेंटिंग हब विकसित करने के लिए पीएम मित्र पार्क योजना के अंतर्गत विश्वस्तरीय मेगा टेक्सटाइल पार्क की स्थापना की जाएगी। हथकरघा बुनकरों के साथ पावरलूम बुनकरों के उत्थान के लिए अटल बिहारी बाजपेयी पावरलूम बुनकर विद्युत फ्लैट रेट योजना हेतु 4,423 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं गारमेंटिंग नीति 2022 के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

8.41 करोड़ कामगारों को फैमिली आईडी उपलब्ध, घर से दूर रहने वाले श्रमिकों के लिए लेबर अड्डों का होगा निर्माण

लखनऊ योगी सरकार के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सदन में 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि बजट में राज्य में रोजगार के अवसरों के विस्तार के लिए उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन समिति को संस्थागत मजबूती दी गई है। इसके गठन हेतु 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। इसके माध्यम से श्रमिकों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। अपने घर और गांव से दूर शहरों में कार्यरत मजदूरों के लिए लेबर अड्डों के निर्माण की घोषणा कर श्रमिकों को संगठित, सुरक्षित और व्यवस्थित कार्यस्थल उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की गई है। यह कदम प्रवासी श्रमिकों के श्रम प्रबंधन और सुविधा विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य के माध्यम से श्रमिक परिवारों का सशक्तिकरण बजट 2026-27 में श्रमिक परिवारों के सामाजिक उत्थान को भी प्राथमिकता दी गई है। अटल आवासीय विद्यालयों के माध्यम से कक्षा 6 से 12 तक निःशुल्क आदर्श शिक्षा प्रदान की जा रही है। वर्तमान में इन विद्यालयों में श्रमिकों के 10,876 बच्चे अध्ययनरत हैं। इस योजना हेतु बजट में 70 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। वित्त मंत्री ने बताया कि निर्माण श्रमिकों के स्वास्थ्य परीक्षण और स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान करने के लिए पहली बार मोबाइल हेल्थ वैन का संचालन पायलट प्रोजेक्ट के रूप में किया गया है। एक्स-ग्रेशिया अनुदान व्यवस्था के तहत पंजीकृत असंगठित श्रमिकों के दुर्घटना में मृत्यु या पूर्ण दिव्यांगता की स्थिति में 2 लाख रुपये तथा आंशिक दिव्यांगता पर 1 लाख रुपये के भुगतान का प्रावधान जारी रखा गया है।  8.41 करोड़ कामगारों को फैमिली आईडी वित्त मंत्री ने कहा कि कामगारों को मुख्यधारा की योजनाओं से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया है। वर्तमान में ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत 8.41 करोड़ कामगारों के सापेक्ष फैमिली आईडी उपलब्ध कराई गई है। इसका उद्देश्य योजनाओं का लक्षित क्रियान्वयन और पारदर्शिता को सुनिश्चित करना है। डिजिटल पहचान के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ाने का संकेत बजट में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के लिए 194 करोड़ की व्यवस्था

लखनऊ योगी सरकार के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट में वन-पर्यावरण क्षेत्र का भी विशेष ध्यान रखा। वित्त मंत्री ने बताया कि योगी सरकार ने 2017 से प्रदेश में अब तक 242.13 करोड़ से अधिक पौधरोपण किया। आगामी वर्षाकाल-2026 में भी 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य प्रस्तावित है। वित्त मंत्री ने बताया कि योगी सरकार में किए गए कार्यों की बदौलत उत्तर प्रदेश वनावरण व वृक्षादन में वृद्धि के मामले में देश में द्वितीय स्थान पर रहा है। योगी सरकार द्वारा चलाए जा रहे पौधरोपण अभियान के कारण राज्य को यह गौरव प्राप्त होने का श्रेय है।  वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट में वन एवं पर्यावरण विभाग का भी जिक्र किया और बताया कि बजट में सामाजिक वानिकी योजना के लिए 800 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। उन्होंने बताया कि पौधशाला प्रबंधन योजना के लिए 220 करोड़ रुपये तथा राज्य प्रतिकारात्मक वन रोपण योजना के लिए 189 करोड़ रुपये की व्यवस्था बजट में प्रस्तावित है।  वित्त मंत्री ने बताया कि लखनऊ स्थित कुकरैल वन क्षेत्र में नाइट सफारी पार्क की स्थापना के लिए लगभग 207 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। वहीं रानीपुर बांध फाउंडेशन, चित्रकूट के कॉर्पस फंड के गठन के लिए 50 करोड़ रुपये की भी व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।  परिसंकटमय अपशिष्ट निस्तारण सुविधा, सामूहिक जैव चिकित्सा अपशिष्ट निस्तारण सुविधा एवं ई. वेस्ट रिसाइकिलिंग एंडे ट्रीटमेंट सुविधा की स्थापना कराए जाने की कार्यवाही करायी जा रही है। उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट वर्ष 2025-2026 से 2030-2031 तक क्रियान्वित होना है। यह विश्व बैंक सहायतित मल्टीसेक्टोरल योजना है। इसके लिए 194 करोड़ रुपये की व्यवस्था बजट में प्रस्तावित की गई है।

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