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दिल्ली के सेलेक्ट सिटी मॉल के सिनेमा हॉल में लगी आग, फिल्म ‘छावा’ देख रहे दर्शकों में मची अफरा-तफरी

नई दिल्ली दिल्ली के साकेत स्थित मशहूर सेलेक्ट सिटी मॉल में एक सिनेमाघर में आग लग गई. बुधवार (26 फरवरी) को हुई इस घटना की जानकारी मिलने के बाद छह फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं. आग पर काबू पा लिया गया. दिल्ली फायर सर्विस ने इसकी जानकारी दी. राजधानी दिल्ली के सेलेक्ट सिटी मॉल में उस वक्त हड़कंप मच गया जब बुधवार शाम 5:44 बजे इस मॉल के एक सिनेमाघर में आग लग गई. इस घटना को लेकर मॉल प्रशासन की ओर से इसकी सूचना दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग को दी गई. इसके बाद 6 फायर टेंडर्स को मौके पर भेजा गया. फायर ब्रिगेड की टीम ने तत्परता से काम करते हुए आग पर काबू पाया. आग की घटना में कोई हताहत नहीं जानकारी के अनुसार आग सेलेक्ट सिटी मॉल में स्थित पीवीआर ऑडी-3 सिनेमाघर के स्क्रीन में लगी थी. राहत की बात यह है कि इस घटना में कोई भी जनहानि नहीं हुई है और सभी लोग सुरक्षित हैं. आग की वजह का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन घटना के समय मॉल में ज्यादा भीड़ नहीं थी, जिससे बड़ा हादसा होने से बच गया. विकी कौशल की फिल्म ‘छावा’ की चल रही थी स्क्रीनिंग बताया जा रहा है कि जिस व्यक्ति यह हादसा हुआ उसे वक्त पीवीआर स्क्रीन नंबर 3 पर अभिनेता विकी कौशल की बहुचर्चित फिल्म ‘छावा’ की स्क्रीनिंग चल रही थी. इस दौरान अचानक से पर्दे पर आग लग गई. सिनेमा हॉल में मूवी देख रहे लोगों में भगदड़ मच गई. हालांकि सिनेमा हॉल में कई सारे एग्जिट गेट होने के चलते सभी लोग बड़ी आसानी से सिनेमाघर से बाहर निकल गए. सलेक्ट सिटी मॉल में सामान्य स्थिति बहाल आग बुझाने के बाद फायर ब्रिगेड द्वारा स्थिति का निरीक्षण किया गया और मॉल में सुरक्षा उपायों को लेकर अधिकारियों को सूचित किया गया. फिलहाल मॉल में सामान्य स्थिति बहाल है. दिल्ली फायर सर्विस के डायरेक्टर अतुल गर्ग ने जानकारी देते हुए बताया, ”इस पूरे घटनाक्रम में किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है. आग बहुत ही छोटी थी जिस पर दमकल कर्मियों ने कुछ ही देर में काबू पा लिया”. बता दें कि दिल्ली के उपहार सिनेमा हॉल में 1997 में लगी आग में करीब 60 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी.

केजरीवाल बतौर मुख्यमंत्री जिस बंगले में रहते थे उसका दो साल का बिल 41 लाख रुपए, भाजपा ने दागे सवाल

नई दिल्ली दिल्ली में सरकार चलाते हुए जनता के लिए 200 यूनिट खपत पर बिजली मुफ्त करने वाले अरविंद केजरीवाल अब अपने ही बिल को लेकर घिर गए हैं। अत्यधिक बिजली खपत का आरोप लगा भाजपा उन पर सवाल उठा रही है। भाजपा को यह मौका सूचना के अधिकार (RTI) के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब से मिला है, जिसमें दिल्ली सरकार ने बताया है कि अरविंद केजरीवाल बतौर मुख्यमंत्री जिस बंगले में रहते थे उसका दो साल का बिल 41 लाख रुपए से अधिक का था। आरटीआई एक्टिविस्ट कन्हैया कुमार की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में बताया गया कि अक्टूबर 2022 से अक्टूबर 2024 के बीच 6 फ्लैग स्टाफ रोड के बंगले में 41.5 लाख रुपए की बिजली खपत हुई। इस बंगले को भाजपा और कांग्रेस की ओर से शीशमहल कहा जाता है। बंगले में सुख-सुविधा पर करोड़ों रुपए खर्च का आरोप है और इसकी जांच चल रही है। आरटीआई से मिले जवाब के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल के बंगले में दो साल में 560335 यूनिट की बिजली खपत की गई, जिसका बिल 41,51,350 रुपए है। इस लिहाज से औसत निकालें तो हर दिन करीब 767 यूनिट बिजली खपत की गई, जिसका मूल्य करीब 5700 रुपए है। दिल्ली में CM के लिए कितनी बिजली मुफ्त दिल्ली विधानसभा की वेबसाइट पर मंत्रियों और मुख्यमंत्री के वेतन और भत्ते की विस्तार से जानकारी दी गई है। इसमें मुफ्त बिजली का भी जिक्र है। इसमें बताया गया है मुख्यमंत्री को हर महीने 5000 यूनिट बिजली के बिल के लिए प्रतिपूर्ति (रिइंबर्समेंट) का प्रावधान है, जबकि मंत्रियों के लिए सीमा 3000 यूनिट मासिक है। इस लिहाज से देखें तो अरविंद केजरीवाल के लिए हर महीने 5000 यूनिट बिजली मुफ्त थी जबकि उनकी खपत औसतन करीब 21000 यूनिट मासिक थी। भाजपा का तीखा हमला आरटीआई जवाब के बहाने भाजपा अब केजरीवाल पर हमलावर है। भाजपा के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने तीखा प्रहार किया है। उन्होंने एक वीडियो में कहा, ‘शीशमहल के खर्च की कहानी तो हम सबने सुनी है। हमें पता है कि किस तरह केजरीवाल ने जनता के 45 करोड़ रुपए इस पर खर्च किए। पर अब एक और चौंकाने वाली खबर है। आरटीआई दिखाती है कि 2 साल में मुख्यमंत्री निवास में बिजली का बिल 41.5 लाख रुपए का था। 5.60 लाख यूनिट बिजली खर्च हुई। हर दिन 5700 रुपए का प्रतिदिन है। आप समझ सकते हैं कि कितने एसी नॉन स्टॉप चल रहे ते। यह वही केजरीवाल है जिसने करोड़ों रुपए खर्च किए अपने ऐशो-आराम पर। वैगनार कार में घूमते थे और फिर 1.5 करोड़ रुपए की गाड़ी खरीद ली वह भी आरटीआई से सामने आया था। शीशमहल की कहानी दरअसल बंगले नहीं मानसिकता के रेनोवेशन की है।’

दिल्ली पुलिस के SHO CL मीणा की वकीलों ने पिटाई की, पुरानी रंजिश का मामला

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में  सुबह दिल्ली पुलिस के SHO की पिटाई होने की खबर आग की तरह सोशल मीडिया पर फैली। मगर अधिकारिक तौर पर मामले में किसी ने कुछ नहीं कहा। यहां तक की पीड़ित खुद भी कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं हुआ। सबसे पहले अपने पाठकों को बताने जा रहा है कि आखिरकार उस दिन कोर्ट में हुआ क्या था। सान्ध्य टाइम्स संवाददाता के हाथ इस मामले में दर्ज हुई एफआईआर की कॉपी लगी है। जिसमें SHO की आपबीती दर्ज है। SHO मारपीट में जमीन पर गिरे एफआईआर के मुताबिक, 54 वर्षीय पीड़ित इंस्पेक्टर सीएल मीणा इन दिनों सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के कमला मार्केट थाने में तैनात हैं। सोमवार सुबह वह साल 2014 में शकरपुर थाने में दर्ज हुए धोखाधड़ी के एक मामले में सुनवाई पर आए थे। कोर्ट नंबर 32 में सुनवाई के बाद वह करीब 11:30 बजे वापस लौट रहे थे। आरोप है कि वह अभी कोर्ट कॉम्प्लेक्स बिल्डिंग, पोस्ट ऑफिस के सामने पहुंचे ही थे कि तभी उन्हें आरोपी वकील और उसके साथियों ने घेर लिया। मुख्य आरोपी उनका हाथ खींचकर उन्हें घसीटने लगा और कहने लगा आज हम तुझे छोड़ेंगे नहीं। इसके बाद सभी ने SHO को लात-घूंसे मारने शुरू कर दिए। इस दौरान कई वकील उन्हें घेरे खड़े रहे। वकीलों ने पिटाई कर उनकी वर्दी तक फाड़ दी। SHO जमीन पर गिर गए। फिर भी आरोपी रुके नहीं। आरोपी ने पर्स भी छीना आरोपी उन्हें पीटते रहे और गालियां देते रहे। मुख्य आरोपी ने उनका पर्स भी छीन लिया। जिसमें पीड़ित का आधार कार्ड, सीजीएचएस कार्ड, दिल्ली पुलिस का आईडी कार्ड और करीब सात हजार रुपये कैश थे। पीड़ित के दोनों मोबाइल भी वहां गिर गए। अब कुछ और वकील आए और उन्होंने SHO को भीड़ से बचाकर कोर्ट के गेट नंबर-4 से बाहर किया। एक वकील ने उनके दोनों मोबाइल लौटाए। वकील ने बोला, ये उसे जमीन पर पड़े मिले थे। इसके बाद SHO ने पुलिस कंट्रोल रूम को कॉल की। हेडगेवार अस्पताल में मेडिकल करवाया और फिर थाने में जाकर आरोपियों के खिलाफ शिकायत दी। जिस पर मुख्य आरोपी के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई। SHO से पुरानी रंजिश वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि SHO की आरोपियों से कोई पुरानी रंजिश है। किसी गाड़ी को लेकर इनके बीच थाने में बहसबाजी हुई थी। उसी का बदला लेने के लिए मारपीट की गई। गैर जमानती धाराओं में केस दर्ज हुआ है। मगर उन धाराओं में सात साल से कम सजा होने का प्रावधान है। इस कारण आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। पुलिस बार को आरोपी के खिलाफ शिकायत देगी। वहीं इस पूरे मामले पर पीड़ित SHO से बातचीत करने का प्रयास किया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि मैं कुछ नहीं बोल पाउंगा।

भ्रष्ट केजरीवाल सरकार की शराब नीति के चलते 2,002.68 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ: वीरेंद्र सचदेवा

नई दिल्ली दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने मंगलवार को मीडिया को संबोधित करते हुए दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (आप) पर शराब घोटाले में संलिप्तता का आरोप लगाया। सचदेवा ने कहा कि दिल्ली विधानसभा में प्रस्तुत सीएजी रिपोर्ट से स्पष्ट है कि भ्रष्ट केजरीवाल सरकार की शराब नीति के चलते 2,002.68 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। सचदेवा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की सरकार ने इस रिपोर्ट को टेबल करने से बार-बार बचने की कोशिश की। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शराब घोटाले की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया है और अब सब कुछ सामने आ रहा है। ये भ्रष्टाचारियों के कार्य हैं, जिनका पर्दाफाश हो चुका है। उन्होंने कहा कि वह पहले से ही आरोप लगाते रहे हैं कि अगर दिल्ली में कोई शराब का दलाल है तो वह अरविंद केजरीवाल हैं। इस रिपोर्ट में साफ तौर पर यह साबित हो रहा है कि कैसे दिल्ली सरकार को 2002.68 करोड़ रुपये का रेवेन्यू लॉस हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि रेवेन्यू लॉस तो एक हिस्सा है, असल में भ्रष्टाचार और लूट तो और भी ज्यादा है, जो इन लोगों ने की है। सचदेवा ने आगे कहा कि रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि शराब की दुकानों के लिए गलत नियम बनाए गए थे और पूरे क्षेत्र में कानून का उल्लंघन किया गया। दिल्ली विधानसभा में प्रस्तुत सीएजी रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया कि दिल्ली की आप-दा सरकार की ‘शराब नीति’ अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की महाभ्रष्ट जुगलबंदी का परिणाम थी। इन्होंने एकाधिकार को बढ़ावा दिया, कुछ ही कंपनियों को शराब आपूर्ति का पूरा नियंत्रण मिला। इंडोस्पिरिट, महादेव लिकर और ब्रिंडको ने 71 फीसदी सप्लाई पर कब्जा जमाया। उन्होंने आगे कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार में कैबिनेट प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया। बिना कैबिनेट और एलजी की मंजूरी के शराब नीति में बड़े बदलाव किए गए। शराब की अवैध दुकानें खोली गईं, रिहायशी इलाकों में एमसीडी-डीडीए की ब‍िना मंजूरी के ठेके खोल दिए गए, एमसीडी ने 4 अवैध दुकानें सील कीं। सचदेवा ने कहा कि कोरोना महामारी की आड़ में शराब व्यापारियों को छूट दी गई, जिसका परिणाम यह हुआ कि सरकार को 144 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। यह पैसा सीधे तौर पर मनीष सिसोदिया, अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की जेब में जा रहा था। सरकारी विभागों में जमा किए गए डिपॉजिट का लाभ इन नेताओं ने उठाया, इससे सरकार को 27 करोड़ रुपये का और नुकसान हुआ।

विजेंद्र गुप्ता ने पदभार संभालते ही कहा था कि अब सदन को अखाड़ा नहीं बनने दूंगा, नियम से यहां काम होगा

नई दिल्ली लगातार रोहिणी विधानसभा सीट से तीसरी बार जीत दर्ज करने वाले विधायक विजेंद्र गुप्ता को दिल्ली विधानसभा का स्पीकर चुना गया। उन्होंने पदभार संभालते ही कहा था कि अब सदन को अखाड़ा नहीं बनने दूंगा, नियम से यहां काम होगा। ऐसे में दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया तो विजेंद्र गुप्ता ने सदन में हंगामा कर रहे ‘आप’ विधायकों को पहले तो चेतावनी दी, फिर विधायकों को बाहर निकालने के लिए मार्शलों का सहारा लिया। सदन की कार्यवाही में हंगामा मचाने के आरोप में आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों को तीन दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया। वहीं, दिल्ली विधानसभा का यह विशेष सत्र तीन दिनों के लिए बढ़ा भी दिया गया है। यानी विपक्षी विधायक अब सोमवार तक सदन की कार्यवाही मे सम्मलित नहीं हो पाएंगे। वैसे मंगलवार को आम आदमी पार्टी के एक विधायक अमानतुल्लाह खान विधानसभा में उपस्थित नहीं थे, इसलिए उन्हें निलंबित नहीं किया गया। 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की लहर के बीच भी विजेंद्र गुप्ता रोहिणी से चुनकर आए। उन्होंने 2015 से 2020 के बीच विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाई। फिर पिछले अगस्त के महीने से भी वह कुछ समय के लिए नेता प्रतिपक्ष रहे। वह दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 1997 में एक पार्षद के तौर पर उन्होंने अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया था। जबकि 2013 में नई दिल्ली सीट से वह अरविंद केजरीवाल के खिलाफ पहला विधानसभा चुनाव लड़े और हार गए थे। वह इससे पहले डीडीए के मेंबर भी रहे और एमसीडी स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन भी रह चुके हैं। जून 2015 का वह दिन जब दिल्ली विधानसभा का सत्र चल रहा था और नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता को सरकार का विरोध करने के लिए मार्शल द्वारा घसीट कर सदन से बाहर निकाला गया था। उस दिन वह सरकार से चौथे दिल्ली वित्त आयोग की रिपोर्ट पेश करने की मांग कर रहे थे। इसके बाद अक्टूबर 2016 में वह सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए एक मेज पर चढ़ गए। वह नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट सदन में पेश करने पर जोर दे रहे थे और उन्हें एक बार फिर जबरन सदन से बाहर निकाला गया था। यानी दिल्ली की नई सीएम रेखा गुप्ता ने जिस बात का अंदेशा सोमवार को लगाया था। वह काम विजेंद्र गुप्ता ने मंगलवार को करके अपना बदला ले लिया। रेखा गुप्ता ने सोमवार को ही बोल दिया था कि ‘आप’ विधायकों का अब अपना व्यवहार सदन में सही रखना होगा। ऐसे में मंगलवार को जब उपराज्यपाल के अभिभाषण के बीच में ही आम आदमी पार्टी के विधायक हंगामा करने लगे तो विजेंद्र गुप्ता ने उन्हें समझाने की खूब कोशिश की और शांत रहने की अपील करते रहे। लेकिन, जब इस पर भी ‘आप’ विधायक नहीं माने तो विजेंद्र गुप्ता ने मार्शल बुलवाकर ‘आप’ विधायकों को सदन से बाहर निकलवा दिया। इसके बाद ‘आप’ के जो बचे विधायक थे वह सीएम रेखा गुप्ता के द्वारा सीएजी की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखते समय हंगामा करने लगे तो एक बार फिर विजेंद्र गुप्ता ने ‘आप’ के बचे विधायकों को मार्शल के सहारे बाहर का रास्ता दिखा दिया और उनको तीन दिन के लिए सदन की कार्यवाही से सस्पेंड कर दिया। इस तरह मंगलवार को दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आखिरकार अपना बदला ले ही लिया। राष्ट्रीय राजधानी में करीब 27 साल बाद भारतीय जनता पार्टी की सत्ता में वापसी हुई है, जिसमें से 12 साल तक राष्ट्रीय राजधानी की सत्ता में आम आदमी पार्टी का कब्जा रहा है। सदन में उस समय विपक्ष इतना मजबूत नहीं था। 2015 में तो भाजपा के केवल तीन विधायक थे, जिसमें से विजेंद्र गुप्ता एक थे और वह नेता प्रतिपक्ष भी थे। लेकिन, तब आदमी पार्टी की सरकार के द्वारा हर सत्र से इसी तरह भाजपा नेताओं को मार्शल के द्वारा बाहर भेजा जाता था। वहीं, 2020 के चुनाव में भी आम आदमी पार्टी के 62 और भाजपा के आठ विधायक थे। यह क्रम तब भी नहीं रूका और बार-बार सदन चलते समय मार्शल के द्वारा भाजपा नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया जाता रहा। याद कीजिए, जब दिल्ली विधानसभा का सत्र चल रहा था और तारीख थी 30 नवंबर 2015, इस दिन ‘आप’ विधायक अलका लांबा पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में भाजपा विधायक ओपी शर्मा के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। फिर इसको लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ। स्पीकर राम निवास गोयल ने तब विजेंद्र गुप्ता से कहा था कि वह सदन से बाहर जाएं, लेकिन, उन्होंने मना कर दिया। इसके बाद मार्शलों ने उन्हें जबरदस्ती उठाकर बाहर निकाल दिया। यानी जिनको कभी मार्शल उठाकर सदन से बाहर फेंकते रहे, अब वही असेंबली के स्पीकर बनकर वापस आए हैं। बीते 10 साल में तो दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान कई ऐसे मौके आए, जब बीजेपी नेता को असेंबली से बाहर किया गया। विजेंद्र गुप्ता जब सोमवार को दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष बने तो उस समय सीएम रेखा गुप्ता ने उन्हें बधाई देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी के सामने ही पिछले सदन के दौरान हुए अपमान की भी याद दिलाई थी। मतलब साफ है कि भाजपा इस बार ‘आप’ के नेताओं के सदन में जारी अराजक रवैये को सहने के मूड में बिल्कुल नहीं नजर आ रही है।

केजरीवाल और सिसोदिया के लिए नई मुश्किलों का हो सकता है आगाज, PAC के पास जाएगी CAG की रिपोर्ट

नई दिल्ली दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार के दौरान लागू की गई नई शराब नीति पर नियंत्रक एवं मसहालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट को काफी समय तक लंबित रहने के बाद मंगलवार को विधानसभा में पेश किया गया। रिपोर्ट में कई तरह की गड़बडियों और इससे सरकारी खजाने को 2000.68 करोड़ रुपए के नुकसान की बात कही गई है। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इस रिपोर्ट को आगे की कार्रवाई के लिए प सरब्लिक अकाउंट्स कमिटी (पीएसी) के पास भेजने की बात कही है। माना जा रहा है कि इसके बाद अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के लिए नई मुश्किलों का आगाज हो सकता है, जो पहले भी इस मामले में जेल जा चुके हैं। दिल्ली विधानसभा में सीएजी रिपोर्ट पेश होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने एएनआई से बातचीत में कहा कि इस रिपोर्ट पर अभी विधानसभा में और भी चर्चा होनी है। इसके बाद इसे आगे की कार्रवाई के लिए पीएएसी के पास भेजा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, गुप्ता जल्द ही इस पर 12 सदस्यीय पीएसी का गठन कर सकते हैं, जिसमें भाजपा और ‘आप’ के सदस्यों को शामिल किया जाएगा। पीएसी की जांच के बाद रिपोर्ट स्पीकर को सौंपी जाएगी और इसके बाद वह इस पर आगे ऐक्शन का आदेश दे सकते हैं। तलब किए जा सकते हैं केजरीवाल और सिसोदिया जानकारों का कहना है कि सीएजी रिपोर्ट पीएसी के पास जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आबकारी मंत्री रहे मनीष सिसोदिया के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन्हें एक बार फिर इस मामले में सवाल-जवाब का सामना करना पड़ सकता है। पीएसी की ओर से उन्हें तलब किया जा सकता है। पीएसी के पास इस मामले से जुड़े लोगों को तलब करने का अधिकार है। पीएसी की ओर से अरविंद केजरीवाल के अलावा तब के जीओएम (ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स) को भी बुलाया जा सकता है। पीएससी की ओर से संबंधित पक्षों से पूछताछ के बाद एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी और इसे स्पीकर को भेजा जाएगा। कमिटी इसमें सिफारिश करेगी कि आगे क्या कार्यवाही की जाए।

विधानसभा में सीएजी रिपोर्ट पेश, केजरीवाल कार्यकाल के दौरान जो लूट-खसूट की गई उसके कच्चे खुलेंगे चिट्ठे

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा में पिछली सरकार के दौरान हुए कामकाज को लेकर कई सीएजी (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) रिपोर्ट को मंगलवार को विधानसभा में पेश किया जाएगा। पिछले 3 साल के 14 सीएजी रिपोर्ट लंबित हैं, जिन्हें भाजपा सरकार पटल पर रखने जा रही है। रिपोर्ट्स के सामने आने से पहले ही भाजपा सरकार आम आदमी पार्टी और इसके मुखिया अरविंद केजरीवाल पर आक्रामक है। रेखा गुप्ता सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा है कि केजरीवाल को सारी लूट-करप्शन सामने आ जाने का डर था जिसकी वजह से वह इन रिपोर्ट्स को 3 साल तक दबाए बैठे रहे। सिरसा ने विधानसभा जाने से पहले पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘आज दिल्ली विधानसभा में अरविंद केजरीवाल द्वारा किए गए घोटालों को, जो कैग रिपोर्ट से सामने आई थी, जिसको तीन साल से दबा रखा था, एक-एक करके विधानसभा में पेश किया जाएगा। अरविंद केजरीवाल के कार्यकाल के दौरान जो दिल्ली में लूट-खसूट की गई उसके कच्चे चिट्ठे खुलेंगे।’ सिरसा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल इसलिए इन्हें दबाकर बैठे थे क्योंकि जो करप्शन करके उन्होंने दिल्ली को लूटा था वह कैग ने हाईलाइट करके निकाल लिया था। केजरीवाल जानते थे कि ये रिपोर्ट अगर सामने आ जाएगी, तो उनकी सारी लूट, खसूट के चिट्ठे सामने आ जाएंगे। लेकिन बचा नहीं पाए, सरकार बदल गई। केजरीवाल की पहली सरकार है जिसने कैग रिपोर्ट को भी टेबल नहीं किया और इसके लिए भी विपक्ष को हाई कोर्ट जाना पड़ा। सोचिए कितने कट्टर बेईमान हैं केजरीवाल कि कैग रिपोर्ट भी टेबल नहीं होने देते, तीन साल तक। जनता के सामने आएंगे काले कारनामे: सचदेवा दिल्ली विधानसभा में सीएजी रिपोर्ट पेश होने से पहले दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि इससे अरविंद केजरीवाल सरकार के दौरान हुए काले कारनामे सामने आएंगे। उन्होंने कहा, ‘सीएजी रिपोर्ट ‘आप’ के काले कारनामे का चिट्ठा है और हमने चुनाव में वादा किया था जिस-जिस ने भ्रष्टाचार किया है उसे जवाब देना पड़ेगा। तो आज हम उम्मीद करते हैं कि उपराज्यपाल के भाषण के बाद सीएजी रिपोर्ट पेश किया जाएगा तो जितने भी इनके काले कारनामे हैं वो दिल्ली की जनता के सामने आएगी।’

इसलिए दबाए रहे केजरीवाल; सिरसा बोले- CAG की 14 रिपोर्ट्स से खुलेगा लूट का चिट्ठा

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा सत्र का आज दूसरा दिन है। आज का सत्र हंगामेदार होने की पूरी संभावना है। सूत्रों के मुताबिक आज CAG की 14 रिपोर्ट में से सिर्फ एक ही रिपोर्ट ही पेश की जाएगी, जिसमें शराब घोटाला प्रमुख है। उसके बाद हो सकता है कि दूसरे दिन डीटीसी बसों को लेकर कैग की दूसरी रिपोर्ट पेश की जाए। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) पर सीएजी की रिपोर्ट में वित्तीय घाटे का गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि 2015-16 से 2021-22 तक, डीटीसी का संचयी घाटा 25,300 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 60,750 करोड़ रुपये हो गया। इसका प्रमुख कारण पुराना बेड़ा था, 45% बसें पुरानी हो चुकी थीं और उनके खराब होने का खतरा था, जिसके परिणामस्वरूप बेड़े का उपयोग कम हो रहा था। सूत्रों के अनुसार यह रिपोर्ट्स होंगी पेश 1. मार्च 2021 को खत्म हुए साल के लिए राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट 2. 31 मार्च 2020 और 2021 को खत्म हुए साल के लिए राजस्व, आर्थिक, सामाजिक और सामान्य क्षेत्र और सार्वजनिक उपक्रम रिपोर्ट 3. 31 मार्च 2021 को खत्म हुए साल के लिए दिल्ली में वाहन वायु प्रदूषण की रोकथाम और मिटिगेशन परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट 4. 31 मार्च 2021 को खत्म हुए साल के लिए देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट 5. मार्च 2022 को खत्म हुए साल के लिए राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट 6. दिल्ली में शराब आपूर्ति पर परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट 7. मार्च 2023 को खत्म हुए साल के लिए राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट 8. सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन पर परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट 9. दिल्ली परिवहन निगम के कामकाज पर सीएजी की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट 10. 31 मार्च 2022 के लिए सीएजी की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट सूत्रों ने बताया कि कुल 14 रिपोर्टों में से 4 रिपोर्ट फाइनेंस अकाउंट और अप्रोप्रीएशन (स्वायत्तीकरण) अकाउंट हैं, जिन्हें दिल्ली सरकार के लेखा नियंत्रक ने 2021-22 और 2022-23 के लिए तैयार किया है। इससे पहले, दिसंबर 2024 में, दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने विधानसभा के समक्ष सीएजी रिपोर्ट पेश करने में विफल रहने के लिए पूर्व सीएम आतिशी की निंदा की थी, जिसके कारण उन्होंने 19-20 दिसंबर को एक विशेष सत्र भी बुलाया था। पूर्व सीएम आतिशी को लिखे पत्र में, सक्सेना ने विधायिका के सामने वैधानिक ऑडिट रिपोर्ट पेश करने के सरकार के संवैधानिक कर्तव्य पर जोर दिया था। उन्होंने पूर्व सीएम को याद दिलाया कि ये रिपोर्ट सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। सक्सेना ने बताया था कि लगातार याद दिलाने के बावजूद, सीएजी रिपोर्ट को दो साल तक रोककर रखा गया। उन्होंने इन रिपोर्टों को पेश करने में सरकार की विफलता को ‘जानबूझकर की गई चूक’ बताया और पारदर्शिता की कमी के लिए प्रशासन की आलोचना की। सीएम रेखा गुप्ता ने पिछली सरकार पर लोगों की मेहनत की कमाई का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है और कहा है कि उन्हें एक-एक पाई का हिसाब देना होगा। गुप्ता ने कहा, ‘हम दिल्ली से किए अपने वादों पर खरे उतरेंगे और उन्हें पूरा किया जाएगा।’ सीएम गुप्ता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘सबसे अहम बात आने वाली है। हमने कहा था कि हमें पहले सत्र में सीएजी रिपोर्ट सदन के पटल पर रखनी चाहिए। यह लोगों की मेहनत की कमाई है जिसका पिछली सरकार ने दुरुपयोग किया। उन्हें लोगों के सामने एक-एक पाई का हिसाब देना होगा।’

पीएम मोदी ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में मरने वालों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त

नई दिल्ली नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार रात मचे भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई तो दर्जनों लोग घायल हो गए। घटना में जान गंवाने वाले अधिकतर लोग बिहार के हैं। 7 साल के बच्चे से लेकर 79 साल के बुजुर्गों तक ने घटना में अपनी जान गंवाई है। मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए मुआवजे का ऐलान किया गया है। मृतकों में 12 महिलाएं शामिल हैं तो 4 बच्चों को भी जान चली गई। भगदड़ में मारे गए बच्चों की उम्र 7 साल से लेकर 15 साल तक की है। 18 मृतकों में से 9 की पहचान बिहार निवासी के रूप में हुई है। बक्सर, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और पटना के कई लोगों ने हादसे में अपनी जान गंवा दी। इनकी गई जान 1. आहा पत्नी पति रविंदे नाथ, निवासी बक्सर, उम्र- 79 साल 2. पिंकी पत्नी पति उपेंद्र शर्मा, निवासी संगम विहार दिल्ली, उम्र- 41 साल 3. शीला पत्नी पति उमेश गिरी, निवासी सरिता विहार दिल्ली, उम्र 50 साल 4. व्योम पुत्र धर्मवारी, निवासी बवाना दिल्ली, उम्र- 25 साल 5. पूनम देवी पत्नी मेघा नाथ, निवासी सारन बिहार, उम्र- 40 साल 6. ललिता देवी पत्नी संतोश, निवासी- पटना बिहार, उम्र- 35 साल 7. सुरुचि पुत्री मनोज शाह निवासी मुजफ्फरपुर बिहार, उम्र- 11 साल 8. कृष्णा देवी पत्नी विजय शाह, निवासी- समस्तीपुर बिहार, उम्र- 40 साल 9. विजय शाह पुत्र राम स्वरूप शाह निवासी- समस्तीपुर बिहार, उम्र- 15 साल 10. नीरज पुत्र इंद्रजीत पासवान, निवासी वैशाली बिहार, उम्र- 12 साल 11. शांति देवी पत्नी राज कुमार मांझी, निवासी- नवादा बिहार, उम्र 40 साल 12. पूजा कुमार पुत्री राज कुमार मांझी, नवादा बिहार, उम्र- 8 साल 13. संगीता मलिक पत्नी मोहित मलिक, निवासी- भिवानी हरियाणा, उम्र 34 साल 14. पूनम पत्नी वीरेंद्र सिंह, निवासी महावीर एनक्लेव उम्र 34 साल 15. ममता झा पत्नी विपिन झा, निवासी- नांगलोई दिल्ली, उम्र 40 साल 16. रिया सिंह पुत्री ओपिल सिंह, निवासी- सागरपुर दिल्ली, उम्र 7 साल 17. बेबी कुमारी पुत्री प्रभु शाह, निवासी- बिजवासन दिल्ली, उम्र- 24 साल 18. मनोज पुत्र पंजदेव कुशवाहा, निवासी नांगलोई दिल्ली, उम्र 47 साल प्रयागराज होते हुए बिहार जाने वाली स्वतंत्रता सेनानी भी थी लेट शनिवार रात महाकुंभ जाने वाले यात्रियों की रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। प्लेटफॉर्म 14, 15 के बीच पुल पर भीड़ के अनियंत्रित हो जाने से सीढ़ियों पर खड़े लोग हादसे का शिकार हो गए। एक अधिकारी ने बताया कि स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस और भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस देरी से चल रही थीं और इन ट्रेन के यात्री भी प्लेटफार्म नंबर 12, 13 और 14 पर मौजूद थे। स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस प्रयागराज होते हुए बिहार जाती है। बड़ी संख्या में लोग स्वतंत्रता सेनानी में बैठना चाहते थे। कई गाड़ियों के लेट होने के बीच जब एक स्पेशल ट्रेन की घोषणा हुई तो अधिक से अधिक लोग उसकी तरफ बढ़ना चाहते थे, जिससे यह हादसा हुआ। पीड़ितों के लिए मुआवजे का ऐलान रेलवे ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजन को 10-10 लाख रुपए मुआवजा देने घोषणा की। रेलवे ने कहा कि गंभीर रूप से घायलों को ढाई-ढाई लाख रुपये और मामूली रूप से घायल हुए लोगों को एक-एक लाख रुपए दिए जाएंगे। भगदड़ की पुलिस ने शुरू की जांच दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ की घटना की रविवार को जांच शुरू कर दी जिसके तहत सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण कर यह पता लगाया जाएगा कि अफरातफरी क्यों मची। पुलिस सूत्रों ने यह जानकारी दी। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार देर रात भगदड़ मचने से कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई और 12 से अधिक लोग घायल हो गए। पुलिस सूत्रों ने कहा, ‘हमारा मुख्य लक्ष्य भगदड़ के मुख्य कारण की जांच करना है। हम सीसीटीवी फुटेज और उस दौरान की गई घोषणाओं का सारा डेटा एकत्र करेंगे।’  नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार रात मची भगदड़ में 18 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे में कई लोग घायल हैं, जिनका दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में इलाज चल रहा है। रेलवे ने हादसे की जांच के लिए कमिटी गठित कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, रेलवे की रिपोर्ट में सामने आया है कि स्टेशन पर इतना बड़ा हादसा कैसे हुआ। रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। घंटेभर में 1500 जनरल टिकट बेचे गए रिपोर्ट में सामने आया है कि नई दिल्ली स्टेशन पर प्रयागराज के लिए ट्रेन आने वाली थी। प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के लिए भारी संख्या में लोग शाम से ही स्टेशन पहुंचना शुरू हो गए थे। जिन लोगों के पास ट्रेन का कंफर्म टिकट था, उनके अलावा भी हजारों की तादाद में लोग प्लेटफॉर्म पर पहुंचे। रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली स्टेशन पर एक घंटे में 1500 जनरल टिकट बेचे गए। ये संख्या बताती है कि स्टेशन पर यात्रियों की कितनी भारी भीड़ थी। अचानक कैसे मची भगदड़? जानकारी के अनुसार, भगदड़ स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 14 पर हुई। दरअसल 14 नंबर प्लेटफॉर्म पर प्रयागराज एक्सप्रेस आने वाली थी। वहीं 13 नंबर प्लेटफॉर्म पर बिहार के लिए आने वाली ट्रेन देरी से चल रही थी। इसके बाद अनाउंसमेंट हुआ कि प्लेटफॉर्म नंबर 16 से एक स्पेशल ट्रेन प्रयागराज के लिए चलेगी। घोषणा के बाद ही लोग प्लेटफॉर्म नंबर 14 से 16 की ओर बढ़ने लगे। प्लेटफॉर्म नंबर 14 पर पहले से ही ओवर क्राउड था। भीड़ सीढ़ियों की मदद से ऊपर की ओर बढ़ी, वहीं सीढ़ियों पर पहले से ही पैर रखने की जगह नहीं थी। ऐसी धक्का-मुक्की में कुछ लोग बेहोश हो गए और नीचे गिर गए। लोगों को कुचलते हुए भीड़ आगे बढ़ने लगी। प्लेटफॉर्म पर भगदड़ की स्थिति हो गई।   रेलवे अधिकारी ने बताई भगदड़ की वजह उत्तर रेलवे के CPRO हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा, “कल जब यह दुखद घटना हुई, उस समय नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 14 पर पटना की ओर जाने वाली मगध एक्सप्रेस और प्लेटफार्म नंबर 15 पर जम्मू की ओर जाने वाली उत्तर संपर्क क्रांति खड़ी थी। इसी दौरान फुट ओवर ब्रिज से प्लेटफार्म नंबर 14-15 की ओर आने वाली सीढ़ियों पर यात्रियों के फिसलकर गिरने से उनके पीछे खड़े कई यात्री इसकी चपेट … Read more

दिल्ली के नए सीएम का नाम सभी जानना चाहते, 15 नाम तय किए जा चुके हैं, 9 मंत्री बनेंगे

नई दिल्ली दिल्ली के नए सीएम के लिए लगातार कयासों का दौर जारी है. बीजेपी में बैठकों का दौर जारी है. पीएम मोदी विदेश दौरे पर थे. वे अब भारत लौट आए हैं. अब विधायक दल के लिए पर्यवेक्षक की नियुक्ति की जा सकती है. इसके बाद ही नए मुख्यमंत्री के नाम का फैसला होगा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को बीजेपी के बैठक में 48 विधायकों में से 15 विधायकों की एक लिस्ट तैयार की गई है. इस लिस्ट से 9 विधायकों को सलेक्ट किया जाएगा, जो दिल्ली के मुख्यमंत्री और मंत्री होंगे. मुख्यमंत्री बनने के रेस में कौन-कौन? सूत्रों के हवाले से मीडिया में खबर है कि दिल्ली के सीएम रेस में रेखा गुप्ता का नाम सबसे आगे है. वो एक महिला विधायक है. इनके अलावा आशीष सूद, जितेंद्र महाजन और राजकुमार भाटिया बीजेपी के पुराने पंजाबी चेहरे हैं. ब्राह्मण और संगठन के पुराने व्यक्ति में पवन शर्मा और सतीश उपाध्याय हैं. प्रवेश वर्मा जाट चेहरा हैं. विजेंद्र गुप्ता और मोहन सिंह बिष्ट के स्पीकर के लिए चुने की संभावना है. खबर है कि दिल्ली में 19 या 20 फरवरी को शपथग्रहण हो सकता है. आज 15 जनवरी है. इसका मतलब ये कि दिल्ली को 5 दिनों के अंदर नया मुख्यमंत्री मिल जाने की पूरी पूरी संभावना है. जानकारी ये भी है कि 17 या 18 फरवरी को बीजेपी विधायक दल की बैठक हो सकती है, उसमें सीएम के नाम पर मुहर लग सकती है. सूत्रों से खबर है कि 48 में से 15 विधायकों के नाम छांटे गए हैं, उसमें से 9 नाम शॉर्ट लिस्ट किए जाएंगे. फिर उन 9 में से ही मुख्यमंत्री, मंत्री और स्पीकर का नाम तय किया जाएगा. इन नामों की चर्चा तेज फिलहाल जिन नामों की चर्चा मुख्यमंत्री को लेकर हो रही है… उनमें रेखा गुप्ता, शिखा राय, प्रवेश वर्मा, मोहन सिंह बिष्ट, विजेंद्र गुप्ता, सतीश उपाध्याय, आशीष सूद और पवन शर्मा जैसे नाम शामिल हैं… पहले बात रेखा गुप्ता और शिखा राय की… रेखा गुप्ता आरएसएस के बैकग्राउंड से हैं. वो शालीमार बाग सीट से पहली बार विधायक बनीं हैं. दिल्ली नगर निगम में तीन बार की पार्षद हैं. वहीं एक और नाम है शिखा राय का.. जो तीन बार से विधायक हैं. इस बार उन्होंने ग्रेटर कैलाश सीट से कैबिनेट मंत्री सौरभ भारद्वाज को हराया है. प्रवेश वर्मा भी रेस में दिल्ली की लड़ाई में इस बार सबसे अहम चेहरा रहे प्रवेश वर्मा भी रेस में हैं. नई दिल्ली सीट से उन्होंने केजरीवाल को चुनाव में हराया है. 2 बार के विधायक और 2 बार सांसद रह चुके हैं. दिल्ली के पूर्व सीएम साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं. 6 बार के विधायक हैं मोहन सिंह विष्ट एक नाम मोहन सिंह बिष्ट का है जो 6 बार के विधायक हैं. मूल रुप से उत्तराखंड के रहने वाले बिष्ट छात्र जीवन में ही आरएसएस से जुड़ गए थे. विजेंदर गुप्ता का नाम भी… दिल्ली बीजेपी का बड़ा चेहरा माने जाने वाले विजेंदर गुप्ता भी रेस में हैं. वो लगातार 3 बार के विधायक हैं. दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष रह चुके हैं. बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं. कौन हैं सतीश उपाध्याय वहीं, सतीश उपाध्याय भी दावेदारों में हैं. वो ब्राह्मण चेहरा होने के साथ इस बार चुनाव भी जीता है. पहले वो दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं. इसके अलावा एक नाम आशीष सूद का है जो पहली बार विधायक बने हैं. फिलहाल वे गोवा बीजेपी के प्रभारी हैं और जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के सह-प्रभारी हैं. नवनिर्वाचित विधायक पवन शर्मा का नाम भी सामने आ रहा है. वो इस बार उत्तम नगर से विधायक चुने गए हैं. दरअसल, दिल्ली में बीजेपी का सीएम कौन होगा, ये चर्चा इसलिए भी हो रही है, क्योंकि चुनाव के वक्त बीजेपी ने कोई चेहरा घोषित नहीं किया था. और आम आदमी पार्टी बार-बार बीजेपी पर सीएम के चेहरे को लेकर प्रहार कर रही थी. बीजेपी ने 48 सीट जीती दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में बीजेपी ने 48 सीट पर जीत दर्ज की. जबकि आम आदमी पार्टी (आप) को 22 सीट से संतोष करना पड़ा. वहीं, कांग्रेस 2015 और 2020 के बाद एक बार फिर अपना खाता नहीं खोल पाई.

पूर्व सीएम केजरीवाल के शीशमहल के रिनोवेशन की जांच होगी, CVC ने दिया आदेश

नई दिल्ली अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक सीएम आवास पर सीपीडब्ल्यूडी द्वारा एक तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) ने 13 फरवरी को 6 फ्लैगस्टाफ बंगले (पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल का निवास) के नवीनीकरण की जांच का आदेश दिया। CVC ने सीपीडब्ल्यूडी से इन आरोपों की विस्तृत जांच करने को कहा है कि 40,000 वर्ग गज (8 एकड़) में फैली एक भव्य हवेली के निर्माण के लिए भवन निर्माण मानदंड जारी किए गए थे। केजरीवाल ने जो भ्रष्टाचार किया वो सबके सामने आया है-विजेंद्र गुप्ता वहीं पर इस पूरे मामले पर भाजपा नेता और रोहिणी से विधायक विजेंद्र गुप्ता (vijender gupta) ने कहा- ‘शीशमहल’ को लेकर आप और अरविंद केजरीवाल का भ्रष्टाचार अब खुलकर सामने आ गया है। सीवीसी ने तथ्यों के आधार पर संज्ञान लिया है। मैंने 14 और 21 अक्टूबर को सीवीसी को दो पत्र लिखे। मैंने सीवीसी को लिखा कि ‘शीशमहल’ का क्षेत्रफल मूल रूप से 10,000 गज से कम था, लेकिन बगल के बंगलों और 8 टाइप-5 फ्लैटों को खाली करा लिया गया और इसमें 50,000 गज के करीब विलय कर दिया गया। पूरी संरचना अवैध है। मैंने यह भी लिखा कि करोड़ों रुपये की बेहिसाब विलासिता की वस्तुएं स्थापित की गईं। मेरे द्वारा लिखे गए दो पत्रों के आधार पर, सीवीसी ने सीपीडब्ल्यूडी से एक तथ्यात्मक रिपोर्ट देने को कहा है। सीवीसी ने सीपीडब्ल्यूडी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर जांच का आदेश दिया है। मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी दिया बयान वहीं पर इस मामले पर बोलते हुए राजौरी गार्डन से भाजपा के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा (Manjinder Singh Sirsa) ने कहा कि मैं यह जानकर हैरान हूं कि बंगले का क्षेत्रफल 8 एकड़ है। अरविंद केजरीवाल को रहने के लिए 8 एकड़ के घर की जरूरत थी। मैं इसके खिलाफ सतर्कता जांच का स्वागत करता हूं।

दिल्ली पुलिस ने अभियान के दौरान 90 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया, मादक पदार्थ जब्त

नई दिल्ली दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच, स्पेशल सेल और सभी 15 जिलों की स्थानीय पुलिस यूनिट ने आपरेशन ‘कवच 7.0’ के तहत बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर नशे के कारोबारियों और संगठित अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। यह 24 घंटे का समन्वित अभियान 12 फरवरी की शाम 6 बजे से 13 फरवरी की शाम 6 बजे तक चला, जिसमें दिल्ली के 15 जिलों में 784 स्थानों पर छापेमारी की गई। 48 दोपहिया वाहन भी जब्त अभियान के दौरान 87 एनडीपीएस मामलों में 90 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया और भारी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त किए गए। बरामदगी में 553.05 ग्राम हेरोइन, 43.028 किलोग्राम गांजा, 199 ग्राम कोकीन और 2,07,600 अल्प्राजोलम टैबलेट शामिल हैं। इसके अलावा, 48 दोपहिया वाहन भी जब्त किए गए। विशेष पुलिस आयुक्त अपराध देवेश चंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री के निर्देशानुसार दिल्ली पुलिस (Delhi Police) द्वारा नशीली दवाओं और नशीली दवाओं के तस्करों के खिलाफ जीरो टोलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। अभियान के तहत नार्को-अपराधियों पर समन्वित छापेमारी की कार्रवाई की योजना बनाई गई। मानव खुफिया जानकारी के साथ-साथ तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से जानकारी विकसित की गई और पूरी दिल्ली में एक साथ ये ऑपरेशन चलाया गया। 784 स्थानों पर छापेमारी कर की कार्रवाई 87 एनडीपीएस मामलों में 90 नार्को-अपराधियों को किया गिरफ्तार। 553.05 ग्राम हेरोइन, 43.028 किलोग्राम गांजा, 199 ग्राम कोकीन और अल्प्राजोलम की 2,07,600 गोलियां की गईं जब्त। आबकारी अधिनियम के तहत 157 मामले दर्ज किए गए, जिसमें 161 व्यक्तियों की गिरफ्तारी हुई। 94 बोतलें और 432 कैन बीयर, 33,098 क्वार्टर अवैध शराब और 5 हुक्का जब्त। 27 आर्म्स एक्ट मामलों में 29 लोगों को किया गया गिरफ्तार। 1 रिवॉल्वर, 1 पिस्टल, 6 कट्टे, 11 कारतूस, 1 सर्जिकल ब्लेड, 18 चाकू, 24,000 नकद और 2 चोरी की मोटरसाइकिलें और 2 चोरी के रिक्शा बरामद। 909 व्यक्तियों को निवारक हिरासत में लिया गया, 5077 व्यक्तियों को 65 डीपी अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया। 48 वाहनों को यू/एस 66 डीपी अधिनियम के तहत जब्त किया गया। शैक्षणिक संस्थानों के 100 मीटर के दायरे में अवैध तंबाकू बिक्री पर कार्रवाई करते हुए 1,407 लोगों पर कोटपा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। कोटपा अधिनियम के तहत एक व्यक्ति को 10,000 सिगरेट पैकेट के साथ गिरफ्तार किया गया।  

दिल्ली में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 19 या 20 फरवरी को हो सकता है, सरकार गठन की प्रक्रिया तेज

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 19 या 20 फरवरी को हो सकता है। वहीं, विधायक दल की बैठक 17 और 18 फरवरी को आयोजित की जाएगी, जिसमें नई सरकार के गठन से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात अमेरिका से दिल्ली पहुंचेंगे। इसके बाद सरकार बनाने को लेकर एक अहम बैठक होगी। पीएम मोदी के साथ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और पार्टी के अन्य शीर्ष नेता भी मौजूद होंगे। इन नेताओं की बैठक में दिल्ली में सरकार गठन के लिए अंतिम रूप से निर्णय लिया जाएगा। इस दौरान दिल्ली का अगला सीएम कौन होगा, यह भी तय हो जाएगा। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने दिल्ली में सरकार गठन के लिए पहले ही होमवर्क पूरा कर लिया है। पार्टी ने दिल्ली में सरकार गठन के लिए विधायकों के नामों की एक सूची तैयार की है, जिसमें 48 में से 15 विधायकों के नाम को प्राथमिकता दी गई है। इन 15 विधायकों में से 9 नामों को अंतिम रूप से चुना जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री, मंत्री और स्पीकर के नाम तय किए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री निर्वाचित विधायकों में से होगा और इस बारे में निर्णय विधायक दल की बैठक में लिया जाएगा। नड्डा ने यह भी संकेत दिया कि मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के बाद पहली कैबिनेट बैठक में कुछ महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लिए जाएंगे। एक अन्य महत्वपूर्ण घोषणा यह है कि दिल्ली में नई भाजपा सरकार में कोई उपमुख्यमंत्री नहीं होगा। बता दें कि 8 फरवरी को दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित किए गए। इस चुनाव में भाजपा ने 42 सीटों पर शानदार जीत हासिल की, तो वहीं, आम आदमी पार्टी महज 22 सीटों पर सिमट गई। इस चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस का खाता नहीं खुला। दिल्ली विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 26 फरवरी को समाप्त हो रहा है और नई सरकार को उससे पहले कार्यभार संभालना होगा।

दिल्ली में केजरीवाल पर पहला बड़ा एक्शन! 51 लाख लोगों को जारी होंगे आयुष्मान भारत कार्ड, मोहल्ला क्लिनिक बनेंगे ‘आरोग्य मंदिर’

नई दिल्ली दिल्ली में सत्ता परिवर्तन हो चुका है, जिसके बाद कई तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे। भाजपा ने इसे लेकर प्लान भी बनाने शुरू कर दिए हैं। इसी बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय सरकार बनने के बाद दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिकों के स्टेटस की समीक्षा करने वाला है, जिसमें उन्हें संभावित रूप से ‘आरोग्य मंदिर’ में बदलने की योजना है। यह कदम क्लीनिकों में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर उठाया गया है, जिसके चलते मंत्रालय ने नए स्वास्थ्य मंत्री से रिपोर्ट मांगी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, ‘केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय योजनाओं पर चर्चा करेगा और दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिकों को आरोग्य मंदिर के रूप में बेस्ट पॉसिबल मेकओवर के रूप से बदलने की कोशिश करेगा। साथ ही, मोहल्ला क्लीनिकों में भ्रष्टाचार के आरोपों पर नए स्वास्थ्य मंत्री से रिपोर्ट भी मांगेगा।’ एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, मंत्रालय दिल्ली में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) को लागू करने पर भी जोर देगा। 51 लाख लोगों को मिलेंगे आयुष्मान कार्ड मंत्रालय आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना (AB-PMJAY) के कार्यान्वयन की भी समीक्षा करेगा. सूत्रों के अनुसार, 51 लाख लोगों को आयुष्मान भारत कार्ड जारी किए जाने की संभावना है. यदि मोहल्ला क्लिनिकों को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में बदला जाता है, तो उन्हें योजना के दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा. एक सूत्र ने बताया, “सरकार मोहल्ला क्लिनिकों में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर बहुत चिंतित है. दिल्ली के नए स्वास्थ्य मंत्री से मोहल्ला क्लिनिकों की स्थिति पर और यह जानने के लिए रिपोर्ट मांगी जाएगी कि क्या इन्हें आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में बदला जा सकता है.” जनवरी में, उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने दिल्ली सरकार द्वारा संचालित मोहल्ला क्लिनिकों में निजी प्रयोगशालाओं को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी डायग्नोस्टिक टेस्ट के आरोपों पर सीबीआई जांच का आदेश दिया था. आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के तहत, सामान्य गैर-संक्रामक बीमारियों (NCDs) जैसे कि सर्वाइकल, ब्रेस्ट और ओरल कैंसर की स्क्रीनिंग सेवा का एक अनिवार्य हिस्सा है. AAP के नेतृत्व वाली रही दिल्ली सरकार और टीएमसी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल ने अभी तक AB-PMJAY योजना को लागू नहीं किया. AAP सरकार ने लागू नहीं की थी योजना AAP के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार और पश्चिम बंगाल ने अभी तक AB-PMJAY योजना को लागू नहीं किया है. AB-PMJAY सरकार की एक प्रमुख योजना है, जो भारत की आबादी के आर्थिक रूप से कमज़ोर 40 प्रतिशत हिस्से में से 12.37 करोड़ परिवारों के लगभग 55 करोड़ लाभार्थियों को माध्यमिक और तृतीयक देखभाल अस्पताल में भर्ती होने के लिए प्रति वर्ष प्रति परिवार 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर प्रदान करती है. हाल ही में, इस योजना का विस्तार करके 4.5 करोड़ परिवारों के 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को शामिल किया गया है, चाहे उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति कुछ भी हो. सूत्रों ने बताया, ‘एक और बड़ा कदम दिल्ली में एबी-पीएमजेएवाई योजना को लागू करना है, जिसके तहत 51 लाख लोगों को आयुष्मान कार्ड जारी किए जाने की संभावना है।’ आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना देश के गरीब और कमजोर परिवारों को 5 लाख रुपये तक की मुफ्त चिकित्सा सेवा प्रदान करती है। इस योजना में 70 साल या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिक भी शामिल हैं। दिल्ली चुनाव के लिए भाजपा ने अपने घोषणापत्र में आयुष्मान योजना को लागू करने का वादा किया था। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली शानदार जीत के बाद अब पार्टी से इस वादे को पूरा करने की उम्मीद है। इस योजना से दिल्ली के करीब 51 लाख लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है, जिन्हें आयुष्मान कार्ड जारी किए जाएंगे। दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले दिल्ली के सभी सात भाजपा सांसदों द्वारा दायर एक जनहित याचिका के बाद आप सरकार द्वारा आयुष्मान योजना को लागू न करने पर सवाल उठाए थे। भाजपा को जनता ने ऐतिहासिक जनादेश दिया है। पार्टी ने 48 सीटें जीतीं, जिसमें 27 साल बाद दिल्ली में उसकी सत्ता में वापसी हुई। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत आप के कई नेता अपनी सीटें हार गए, जबकि आतिशी अपनी सीट बचाने में सफल रहीं। 8 फरवरी को घोषित दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों में पार्टी ने शानदार जीत हासिल की। ​​पार्टी ने दिल्ली विधानसभा का नेतृत्व करने के लिए अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की फिलहाल घोषणा नहीं की है। दिल्ली में पिछली भाजपा सरकार 1993 से 1998 तक थी।

दिल्ली में कुछ ऐसे नाम हैं जिन्हें कैबिनेट में जगह मिलना लगभग तय माना जा रहा है

नई दिल्ली दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत के बाद से ही नए मुख्यमंत्री और कैबिनेट को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाईं जा रही हैं। मुख्यमंत्री और मंत्रियों को लेकर कई नामों की चर्चा तेज है। संभव है कि रविवार तक नए मुख्यमंत्री का चुनाव हो जाए और अगले सप्ताह शपथ ग्रहण हो सकता है। दिल्ली में सीएम समेत अधिकतम 7 मंत्री बनाए जा सकते हैं। आम आदमी पार्टी के 10 साल पुराने शासन को खत्म करके भाजपा ने दिल्ली की 70 में से 48 सीटों पर जीत हासिल की है। बहुमत से 12 अधिक सीटें हासिल करने वाली भाजपा ने चुनाव से पहले किसी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया था। पीएम मोदी के नाम और उनकी गारंटियों पर बनी सरकार का चेहरा कोई ऐसा शख्स भी हो सकता है, जो अभी तक रेस में नहीं बताया जा रहा है। राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में भाजपा चौंका चुकी है। हालांकि, कुछ ऐसे नाम हैं जिन्हें कैबिनेट में जगह मिलना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे 8 में से कम से कम 3 विधायकों की कुर्सी पक्की बताई जा रही है। पहले जाट चेहरों की बात, एक केजरीवाल का पुराना साथी पिछले दो चुनावों में भाजपा एक भी जाट बहुल सीट नहीं जीत पाई। लेकिन इस बार जाटों ने खुलकर भगवा पार्टी का साथ दिया। यही वजह है कि भाजपा ने सभी 10 जाट बहुल सीटों मुंडका, नजफगढ़, नांगलोई जाट, मटियाला, बिजवासन, महरौली, बवाना, नरेला, रिठाला और विकासपुरी में जीत दर्ज की। ऐसे में अब जाटों को रिटर्न गिफ्ट भी मिल सकता है। नई दिल्ली सीट पर अरविंद केजरीवाल को हराने वाले प्रवेश वर्मा भी जाट समुदाय से आते हैं। सीएम की रेस में भी वह सबसे आगे बताए जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यदि नेतृत्व ने सीएम के तौर पर किसी और को भी चुना तो प्रवेश वर्मा को मंत्री पद मिलना लगभग तय है। वहीं, जाट चेहरे के तौर पर पूर्व मंत्री कैलाश गहलोत भी रेस में हैं। गहलोत ने चुनाव से ठीक पहले इस्तीफा देकर आम आदमी पार्टी सरकार को बड़ा झटका दिया था। इस बार वह भाजपा के टिकट पर बिजवासन से विधायक बने हैं। ‘आप’ सरकार में गृह और परिवहन जैसे अहम मंत्रालय संभाल चुके कैलाश गहलोत के अनुभव को देखते हुए उन्हें सरकार में शामिल किया जा सकता है। 3 में से एक सिख नेता को मिल सकता है पद भाजपा के टिकट पर तीन दिग्गज सिख नेता भी चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। इनमें किसी एक को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। राजौरी गार्डन से जीत हासिल करने वाले मनजिंदर सिंह सिरसा प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। शीला दीक्षित सरकार में मंत्री रहे और लोकसभा चुनाव से ठीक पहले दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़कर भाजपा में शामिल हुए अरविंदर सिंह लवली भी रेस में आगे बताए जा रहे हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी के दूसरे सबसे बड़े नेता मनीष सिसोदिया को जंगपुरा जैसी सीट से हराने वाले तरविंदर सिंह मारवाह को भी दांव लग सकता है। इन तीन में से एक सिख नेता का मंत्री बनना लगभग तय बताया जा रहा है। 3 पूर्वांचली नेताओं में भी रेस दिल्ली में इस बार भाजपा ने उन सीटों पर भी शानदार सफलता हासिल की है, जहां पूर्वांचली वोटर्स की अधिकता है। भाजपा ने झुग्गी-झोपड़ी और कच्ची कॉलोनियों वाली 17 सीटों पर जीत हासिल की है। चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच पूर्वांचली वोटर्स के लिए खूब खींचतान देखने को मिली। दिल्ली की राजनीति में पूर्वांचलियों की अहमियत को देखते हुए कैबिनेट में कम से कम एक पूर्वांचली नेता का शामिल होने की पूरी गुंजाइश है। इस मामले में लक्ष्मी नगर से जीते अभय वर्मा की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है तो आप लहर में भी यहां कमल खिलाने में कामयाब रहे थे। अभय मूल रूप से दरभंगा के रहने वाले हैं। अभय वर्मा के अलावा संगम विहार से जीते चंदन चौधरी और विकासपुरी से जीते पंकज कुमार सिंह भी दावेदार हैं।

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