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भारत ने तेजी से कार्रवाई की और पाकिस्तान को सोचने का मौका ही नहीं दिया: उप प्रधानमंत्री डार

कराची  ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब भारत के मिसाइल पाकिस्तानी एयरबेस को निशाना बना रहे थे. तो उस वक्त सऊदी अरब ने पाकिस्तान के कहने पर भारत को मनाने की खूब कोशिश की थी. ये दावा पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने खुद एक इंटरव्यू के दौरान किया है. इशाक डार ने यह भी माना है कि हम भारत को जवाब देने की कोशिश कर ही रहे थे कि इससे पहले इंडिया ने नूर खान एयरबेस और शोरकोट एयरबेस पर हमला कर दिया था.  भारत ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में 7 मई की रात को पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया था. इस हमले में दहशतगर्दों ने 26 निर्दोष सैलानियों की हत्या कर दी थी.  जिओ न्यूज के एक कार्यक्रम में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने कहा कि नूर खान एयरबेस और शोरकोट एयरबेस पर भारत का हमला तब हुआ जब पाकिस्तान जवाबी अटैक करने ही जा रहा था.  इसका मतलब ये था कि भारत ने तेजी से कार्रवाई की और पाकिस्तान को सोचने का मौका ही नहीं दिया. इतनी तेजी से किए गए हमले से पाकिस्तान का शासन-प्रशासन अचंभित था.  ‘ब्रदर आप बात कर सकते हैं’ उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने इस इंटरव्यू में कहा कि, ‘भारत के हमले के बाद प्रधानमंत्री ने आर्म्ड फोर्सेज को जवाबी एक्शन के लिए अधिकृत कर दिया, डिटेल तय हो गई कि हमें क्या रोल आउट करना है, और हमने चार बजे के बाद शुरू किया, लेकिन मैं बदकिस्मती कहूंगा कि इंडिया ने ढाई बजे फिर वही हरकत कर दी, नूर खान एयरबेस पर, शोरकोट एयर बेस पर उन्होंने फिर अटैक किया, उसी रात को.” इस जंग में सऊदी अरब के रोल पर इशाक डार ने कहा कि, ‘इस हमले के 45 मिनट बाद ही मुझे सऊदी प्रिंस फैसल साहब का फोन आया और उन्होंने मुझे कहा कि ब्रदर मुझे समझ में आ रहा है कि आपकी बात अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से हुई है और क्या मैं जयशंकर से बात करने के लिए अधिकृत हूं कि आप रुकने के लिए तैयार हैं अगर वो रुक जाएं.’ डिप्टी पीएम इशाक डार ने आगे कहा कि उन्होंने सऊदी प्रिंस से कहा कि हां पाकिस्तान इसके लिए तैयार हैं और ब्रदर आप सऊदी प्रिंस से बात कर सकते हैं. इशाक डार ने आगे बताया कि सऊदी प्रिंस ने बाद में उन्हें फिर से फोन किया और कहा कि उन्होंने जयशंकर को ये बात कह दी है.  इससे पता चलता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने की कोशिश में सऊदी ने एक शांत लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. डार ने कहा कि इस्लामाबाद ने इस उम्मीद में संयुक्त राज्य अमेरिका से भी संपर्क किया कि भारत इस मामले में सैन्य तनाव को और न बढ़ाए. डार का कबूलनामा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तान के अन्य शीर्ष अधिकारियों द्वारा पहले किए गए दावों का भी खंडन करता है, जिन्होंने दावा किया था कि पाकिस्तान ने भारत को कड़ा जवाब दिया है. दरअसल पाकिस्तान भारत को जवाब देना तो दूर उसका पूरा फोकस भारत के आक्रमण से बचने में था. पाकिस्तान ने इसके लिए अमेरिका, सऊदी अरब, कतर जैसे देशों से कूटनीतिक सहायता मांगी.  शहबाज भी मान चुके हैं- भारत ने पहले हमला कर दिया पहले बड़ी-बड़ी डींगे हांकने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी बाद में स्वीकार किया है कि भारत ने रावलपिंडी हवाई अड्डे सहित कई क्षेत्रों को निशाना बनाकर ब्रह्मोस मिसाइल से हमले किए शरीफ ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा, “भारत ने फिर से ब्रह्मोस मिसाइल हमले किए और रावलपिंडी हवाई अड्डे और अन्य स्थानों सहित पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों को निशाना बनाया.” शहबाज शरीफ ने माना कि पाकिस्तान ने 10 मई को तड़के फजर की नमाज के बाद 4:30 बजे जवाबी हमला करने की योजना बनाई थी, लेकिन 9-10 मई की रात को भारत ने इससे पहले ही पाकिस्तान के कई एयरबेस को तहस-नहस कर दिया.  इससे पता चलता है कि भारतीय सेना ने न केवल पहले हमला किया, बल्कि भारत ने पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई को भी सफलतापूर्वक विफल कर दिया.  ऑपरेशन सिंदूर  भारत ने 7 मई से पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकी शिविरों और सैन्य ठिकानों पर कई ड्रोन और मिसाइल हमले किए.  भारत के हमले से बौखलाए पाकिस्तान ने 8, 9 और 10 मई को भारतीय सैन्य स्थलों पर हमला करने की नाकाम कोशिश की. हालांकि भारत ने और भी शक्तिशाली जवाबी हमले किए, उसके सैन्य ठिकानों पर हमला किया और पाकिस्तान की योजनाओं को विफल कर दिया.  चार दिनों तक बढ़ते तनाव और सीमा पार हमलों के बाद पाकिस्तान की गुहार पर भारत 10 मई को युद्धविराम पर सहमत हुआ.   

ईरान के अटैक का डर, अमेरिका ने मध्य पूर्व के सबसे बड़े सैन्य अड्डे से हटाए 40 मिलिट्री जेट, सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा

दोहा  इजरायल पर ईरान के मिसाइल हमलों के बाद अब अमेरिका को मध्य पूर्व में अपने सैन्य अड्डों की सुरक्षा का डर सताने लगा है। समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, कतर के एक प्रमुख अमेरिकी एयरबेस से पिछले दो सप्ताह में करीब 40 अमेरिकी मिलिट्री एयरक्राफ्ट गायब हो गए हैं। संभावना है कि उन्हें ईरानी हमलों से बचाने के लिए हटाया गया है। प्लैनेट लैब्स पीबीसी की 5 जून से 19 जून के बीच की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि कभी खचाखच भरा मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा एयरबेस पर लगभग पूरी तरह खाली हो गया है। कतर के अल उदीद एयरबेस पर 5 जून को C-130 हरक्यूलिस परिवहन विमानों और उन्नत टोही जेट समेत लगभग 40 विमान खुलेआम खड़े थे। 19 जून की सैटेलाइट तस्वीरों में केवल तीन ही बचे दिखाई दे रहे हैं। कतर में अमेरिकी दूतावास ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि बेस तक पहुंच अत्यधिक सावधानी और चल रही क्षेत्रीय शत्रुता के मद्देनजर सीमित होगी। इसके साथ भी बेस कर्मियों से अधिक सतर्कता बरतने का आग्रह किया। ट्रंप ने अभी तक नहीं लिया फैसला इजरायल और ईरान के बीच जंग शुरू होने के एक सप्ताह बाद भी अमेरिका इसमें शामिल नहीं हुआ है। 19 जून को वॉइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप अगले दो सप्ताह में इस बारे में फैसला लेंगे। एएफपी ने विमानों पर नजर रखने वाले ओपेन-सोर्स डेटा के विश्लेषण से बताया है कि कम से कम 27 सैन्य ईंधन भरने वाले विमान- केसी-46ए पेगासस और केसी-135 स्ट्रेटोटैंकर विमान- 15 से 18 जून के बीच अमेरिका से यूरोप की यात्रा पर गए। अमेरिका ने शुरू कर दी तैयारी उनमें से केवल दो विमान ही अमेरिका लौटे, जबकि 25 विमान बुधवार देर रात तक यूरोप में थे। हवा में ईंधन भरने वाले विमान लंबी दूरी के हवाई अभियानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और यह इस बात का संकेत हो सकता है कि अमेरिका लंबे मिशनों के लिए तैयारी कर रहा है। अमेरिका को किस बात का डर? अमेरिकी सेना में पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल और रैंड कॉरपोरेशन में डिफेंस रिसर्चर मार्क श्वार्ट्ज ने एएफपी को बताया कि ईरान के बेहद नजदीक होने के कारण अल-उदीद में विमान बेहद असुरक्षित होंगे। मध्य पूर्व में सेवा दे चुके श्वार्ट्ज ने कहा कि छर्रे भी विमान को मिशन के लिए अयोग्य बना सकते हैं। उन्होंने कहा, ऐसा करके (विमानों को हटाकर) अमेरिकी सेना, कर्मियों और उपकरणों दोनों के लिए जोखिम को कम करना चाहती है। अमेरिका के 40000 सैनिक तैनात इजरायल और ईरान में जंग के बीच मध्य पूर्व में अमेरिकी सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं। वर्तमान में पूरे क्षेत्र में लगभग 40,000 सैनिक तैनात है। जबकि सामान्य तौर पर यहां 30,000 की तैनाती रहती है। अक्टूबर में इजरायल और ईरान के बीच तनाव के दौरान और लाल सागर में जहाजों पर हूतियों के हमले के समय यह संख्या कुछ समय के लिए बढ़कर 43,000 हो गई थी।

8th Pay Commission: इस दिन से बढ़ जाएगी केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी! सैलरी-पेंशन का स्ट्रक्चर, NPS और CGHS योगदान पर क्या होगा असर

नई दिल्ली सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है. इस साल की शुरुआत में ही केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को हरी झंडी दे दी , जो 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकता है. इससे देश के 1 करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों (Central Government Employees) और पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.  8वें वेतन आयोग से सैलरी और पेंशन में कितनी होगी बढ़ोतरी? 8वें वेतन आयोग से सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है. ऐसे में सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स जानना चाहते हैं कि उनकी सैलरी और पेंशन में कितना इजाफा होगा.आइए जानते हैं कि नए वेतन आयोग में सरकारी कर्मचारियों के लिए क्या-क्या बदलाव होने जा रहे हैं. इसके साथ ही ये भी जानेंगे कि केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को लिए ये बदलाव क्यों खास माना जा रहा है. बेसिक सैलरी और पेंशन में भारी इजाफा इस आयोग में सबसे अहम बात फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) को लेकर है, जिसकी मदद से नई बेसिक सैलरी  और पेंशन  (Salary and Pension Hike)  तय होती है. 7वें वेतन आयोग में ये फैक्टर 2.57 था, लेकिन अब इसे 2.86 तक बढ़ाया जा सकता है. अगर ऐसा होता है, तो 18,000 रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर लगभग 51,480 रुपये हो सकती है. वहीं, पेंशन 9,000 से बढ़कर करीब 25,740 रुपये हो सकती है.इस तरह सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में बंपर बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. 8वें वेतन आयोग में क्या होगा बदलाव? 8वां वेतन आयोग सरकारी कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में कई बड़े बदलाव ला सकता है। बेसिक सैलरी के अलावा, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) जैसे भत्तों में भी बदलाव की उम्मीद है। यह इस पर निर्भर करेगा कि कर्मचारी की पोस्टिंग किस शहर में है और उसका काम किस तरह का है। मतलब कि उन्हें दफ्तर में काम करना रहता है, या काम के सिलसिले में भागदौड़ करनी रहती है। इस वजह से, एक ही वेतन ग्रेड के दो कर्मचारी भी अलग-अलग कुल वेतन (Total Salary) पा सकते हैं, क्योंकि उनके भत्ते अलग-अलग होंगे। NPS और CGHS योगदान पर असर नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS): अभी केंद्र सरकार के कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) का 10 प्रतिशत योगदान करते हैं, जबकि सरकार 14 प्रतिशत योगदान देती है। 8वें वेतन आयोग में सैलरी बढ़ने के बाद, ये दोनों योगदान राशि भी बढ़ेंगी। केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS): CGHS की सदस्यता शुल्क सैलरी स्लैब पर आधारित होती है। जैसे ही बेसिक सैलरी बढ़ेगी, CGHS के शुल्क भी नए सैलरी स्ट्रक्चरके अनुसार रिवाइज होंगे। किस ग्रेड में कितनी बढ़ेगी सैलरी? प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर 2.86 के आधार पर ग्रेड के हिसाब से सैलरी में इजाफा भी अलग-अलग हो सकता है। आइए समझते हैं कि रिवाइज्ड सैलरी स्ट्रक्चर कैसा दिख सकता है: ग्रेड 2000 (लेवल 3): इस ग्रेड में बेसिक सैलरी ₹57,456 तक बढ़ सकती है। HRA और ट्रैवल अलाउंस (TA) जैसे भत्तों को मिलाकर, कुल मासिक वेतन (ग्रॉस सैलरी) करीब ₹74,845 हो सकता है। स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद अनुमानित इन-हैंड सैलरी लगभग ₹68,849 रहने की संभावना है। ग्रेड 4200 (लेवल 6): इस ग्रेड में संशोधित बेसिक वेतन ₹93,708 तक हो सकता है। कुल ग्रॉस सैलरी, भत्तों सहित, ₹1,19,798 के आसपास हो सकती है। डिडक्शन के बाद अनुमानित नेट मासिक सैलरी करीब ₹1,09,977 हो सकती है। ग्रेड 5400 (लेवल 9): इस वेतन ग्रेड में बेसिक वेतन ₹1,40,220 तक बढ़ सकता है। भत्तों को जोड़ने पर कुल वेतन ₹1,81,073 तक जा सकता है। कटौतियों के बाद इन-हैंड वेतन करीब ₹1,66,401 होने की संभावना है। ग्रेड 6600 (लेवल 11): इस ग्रेड में संशोधित बेसिक वेतन ₹1,84,452 हो सकता है। सभी भत्तों को मिलाकर, मासिक कुल आय ₹2,35,920 तक हो सकती है। स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद इन-हैंड सैलरी करीब ₹2,16,825 हो सकती है। अलग-अलग लेवल पर कितनी बढ़ेगी सैलरी? 8वें वेतन आयोग में अलग-अलग पे लेवल पर कितनी सैलरी मिल सकती है. आइए आसान भाषा में समझते हैं:     लेवल 3 (ग्रेड पे 2000): बेसिक सैलरी लगभग 57,456 रुपये, कुल सैलरी 74,845 रुपये, डिडक्शन के बाद इनहैंड सैलरी करीब 68,849 रुपये     लेवल 6 (ग्रेड पे 4200): बेसिक सैलरी करीब 93,708 रुपये, कुल सैलरी 1,19,798 रुपये, इनहैंड सैलरी लगभग 1,09,977 रुपये     लेवल 9 (ग्रेड पे 5400): बेसिक सैलरी 1,40,220 रुपये, कुल सैलरी 1,81,073 रुपये, इनहैंड करीब 1,66,401 रुपये     लेवल 11 (ग्रेड पे 6600): बेसिक 1,84,452 रुपये, कुल सैलरी 2,35,920 रुपये, इनहैंड सैलरी करीब 2,16,825 रुपये अलाउंस में भी होगा बदलाव बेसिक सैलरी बढ़ने के साथ-साथ हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) जैसे भत्तों में भी इजाफा होगा. ये इस पर निर्भर करेगा कि कर्मचारी किस लोकेशन में पोस्टेड हैं और उनका ट्रैवल कितना होता है. इसी वजह से एक ही ग्रेड के दो कर्मचारियों की कुल सैलरी अलग-अलग हो सकती है. NPS और CGHS में कितना बढ़ेगा कॉन्ट्रीब्यूशन? नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में अभी कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और डीए का 10% योगदान करते हैं, जबकि सरकार 14% देती है. बेसिक सैलरी बढ़ने से ये योगदान भी बढ़ेगा. सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) की फीस भी सैलरी के स्लैब से जुड़ी होती है. ऐसे में बेसिक सैलरी में इजाफा होने से CGHS की मासिक कटौती भी बढ़ सकती है. क्यों खास है ये बदलाव? 8वां वेतन आयोग सिर्फ सैलरी बढ़ाने का काम नहीं करेगा, बल्कि इससे जुड़े सभी खर्चों, सुविधाओं और कर्मचारियों की आर्थिक प्लानिंग पर भी असर पड़ेगा. खासकर रिटायरमेंट प्लानिंग, होम लोन EMI, टैक्स सेविंग और इंश्योरेंस जैसे मामलों में ये बढ़ी हुई सैलरी लोगों को नई राहत दे सकती है.

पुरी रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ का रथ खींचने के नियम, जानें प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी के रथ की खास बातें

पुरी  हर साल ओडिशा में आयोजित होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा में देश भर से लोग पहुंचते हैं. इस बार जगन्नाथ रथ यात्रा शुरुआत 27 जून से होने जा रही है. पुरी में होने वाले इस उत्सव का महत्व सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि यहां की सांस्कृितक विरासत को दिखाता है, जो टूरिस्टों के आकर्षक का भी केंद्र हैं. अगर आप भी इस साल रथ यात्रा में शामिल होना चाहते हैं तो जानिए यहां कैसे जाएं?  हिंदू पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि 26 जून दोपहर 1 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर 27 जून सुबह 11 बजकर 19 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार, यह पर्व 27 जून को मनाया जाएगा. रथ यात्रा नौ दिनों तक चलेगी और 5 जुलाई 2025 को समाप्त होगी. कैसे जाएं पुरी अगर आप ट्रेन से जाना चाहते हैं तो आपको पुरी रेलवे स्टेशन जाना होगा, जो देश के करीब सभी बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है. वहीं यात्रा के दौरान कई स्पेशल ट्रेनें भी चलाई जाती हैं. पुरी रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी 2 किलोमीटर के करीब है. यहां से आप ऑटो या रिक्शा लेकर जा सकते हैं. अगर आपको हवाई सफर करना है, तो करीबी एयरपोर्ट भुवनेश्वर में है. जो पुरी से करीब 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. एयरपोर्ट से आप बस या टैक्सी की मदद से पुरी तक जा सकते हैं.  पुरी में होटल और धर्मशाला के कई ऑप्शन मौजूद हैं, मंदिर के आसपास कई होटल हैं, जिनका बजट एक हजार से शुरू होता है. वहीं 500 रुपये में आपको धर्मशाला मिल जाएगा. मंदिर में दर्शन का समय सुबह 5 बजे से रात के 9 बजे तक का है. दिन में साढ़े 11 बजे से एक बजे तक भोग और विशेष पूजा के लिए दर्शन बंद रहता है. मंदिर में अगर भीड़ हो तो दर्शन करने में 3 से 4 घंटे का समय लग जाता है. जून और जुलाई के महीने में रथ यात्रा में शामिल होने के लिए दुनिया भर से भक्त यहां आते हैं. रथ यात्रा से 15 दिन पहले मंदिर में दर्शन बंद हो जाता है.   रथ यात्रा के दौरान राज्य सरकार की तरफ से कई इंतजाम किए जाते हैं. पुरी रेलवे स्टेशन के बाहर निशुल्क कैंप भी लगाए जाते हैं जहां तीर्थयात्री रह सकते हैं.  कैसे पहुंचें पुरी? जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने के लिए पुरी पहुंचना होगा। पुरी उड़ीसा में स्थित है। आप हवाई मार्ग से सफर कर रहे हैं तो पुरी से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट भुवनेश्वर में है। भुवनेश्वर का बीजू पटनाटक इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारत के कई शहरों से सीधी उड़ान के माध्यम से जुड़ा है। आप भुवनेश्वर एयरपोर्ट पहुंचकर टैक्सी या बस के जरिए 60 किमी की दूरी तय करके पुरी पहुंच सकते हैं।  बजट में सफर के लिए रेल यात्रा का विकल्प भी अपना सकते हैं। पुरी रेलवे स्टेशन देशभर से जुड़ा हुआ है। पुरी रेलवे स्टेशन से जगन्नाथ मंदिर और रथ यात्रा स्थल की दूरी लगभग ढाई से तीन किमी है। सड़क मार्ग से यात्रा के लिए भुवनेश्वर और कोणार्क से पुरी के लिए नियमित सरकारी और निजी बसें मिलती हैं। NH-316 द्वारा सड़क मार्ग भी सरल है। पुरी रथ यात्रा के लिए टिप्स पहले से बुकिंग रथ यात्रा में भारत ही नहीं विदेश से भी श्रद्धालु आते हैं। रथ यात्रा के दौरान काफी भीड़ होती है और मंदिर के पास के होटल बुक हो जाते हैं। ऐसे में पहले से परिवहन यानी ट्रेन या फ्लाइट का टिकट बुक कर लें। साथ ही होटल या धर्मशाला की बुकिंग भी पहले से ही कर लें ताकि आपको वहां पहुंचने या रहने में असुविधा न हो। मौसम समझें  जून के अंत में पुरी में गर्मी और बारिश दोनों हो सकते हैं। मौसम का पता लगाकर उसके अनुसार ही आरामदायक कपड़े और छाता साथ रखें।  सावधान रहें रथ यात्रा के दौरान भीड़ को देखते हुए बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। अगर स्वास्थ्य समस्या है तो दूर से यात्रा देखें। इसके साथ ही अपनी कीमती सामान की देखरेख भी करें।  मोबाइल ऐप का उपयोग रथ यात्रा से जुड़ी सभी जानकारी Shree Jagannatha Dham ऐप पर उपलब्ध रहेगी। इस ऐप से आप दर्शन, लाइन स्थिति, आवास और महाप्रसाद की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। रथ यात्रा क्यों निकाली जाती है? पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार भगवान जगन्नाथ की बहन सुभद्रा ने पुरी नगर दर्शन की इच्छा जताई. तब भगवान जगन्नाथ और बलभद्र ने उन्हें रथ पर बैठाकर नगर भ्रमण कराया और रास्ते में वे अपनी मौसी के घर भी कुछ दिन ठहरे. तभी से यह परंपरा हर साल रथ यात्रा के रूप में निभाई जाती है. रथ यात्रा का महत्व ऐसा माना जाता है कि रथ यात्रा में शामिल होने या इसका साक्षात दर्शन करने से हजार यज्ञों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है. और भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है. पुरी का जगन्नाथ मंदिर चार धामों में से एक है और यह यात्रा भक्तों को मोक्ष की ओर ले जाने वाली मानी जाती है. जानें प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी के रथ की खास बातें जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा भारत की सबसे पवित्र यात्राओं में से एक है। यह यात्रा हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होती है और दशमी तिथि तक चलती है। इस साल यह यात्रा 27 जून से शुरू होगी। 9 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा 5 जुलाई को समाप्त हो जाएगी। जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि जब भगवान जगन्नाथम बलभद्र और सुभद्रा जी की प्रतिमा को रथ में बैठाकर यात्रा निकाली जाती है, तो इसे भक्त खींचते हैं। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ की यात्रा में रथ खींचने वाले भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। आप भी अगर इस साल भगवान जगन्नाथ जी का रथ खींचना चाहते हैं, तो आपको रथ खींचने से जुड़े नियम जरूर जान लेने चाहिए। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा कहां से निकलती है तीन रथों को मोटी रस्सियों से खींचा जाता है। यह रथयात्रा जगन्नाथ मंदिर से गुंडीचा मंदिर तक जाती है। रथों को खींचकर चार किलोमीटर की दूरी तय की जाती है। हर व्यक्ति को रथ खींचने का अवसर मिलता है। कुछ … Read more

मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रूस के उपप्रधानमंत्री अलेक्सी ओवरचुक से मुलाकात कर कई मुद्दों पर की चर्चा

सेंट पीटर्सबर्ग केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को रूस के उपप्रधानमंत्री अलेक्सी ओवरचुक से मुलाकात की और ट्रांसपोर्ट, कनेक्टिविटी, इन्फ्रास्ट्रक्चर और रेयर अर्थ मेटल जैसे मुद्दों पर चर्चा की। दोनों देश के दिग्गज लीडर्स के बीच यह मुलाकात रूस के सबसे बड़े शहरों में एक सेंट पीटर्सबर्ग में हुई है। केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा,”रूस के उपप्रधानमंत्री अलेक्सी ओवरचुक से मुलाकात की। ट्रांसपोर्ट, कनेक्टिविटी, इन्फ्रास्ट्रक्चर और रेयर अर्थ मेटल सहित सहयोग के प्रमुख मुद्दों को लेकर चर्चा की।” सेंट पीटर्सबर्ग में भारत की कॉन्सुलेट जनरल की ओर से की गई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर की गई पोस्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (एसपीआईईएफ 2025) में भाग लेने के लिए सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचे हैं। एसपीआईईएफ 2025, 18 जून को शुरू हो चुकी है और यह 21 जून तक चलेगी। रूस जाने से पहले रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 17 जून को हरियाणा के मानेसर में मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड प्लांट में देश के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल का उद्घाटन किया था। मारुति सुजुकी के प्लांट में नया गति शक्ति कार्गो टर्मिनल ऑटोमोबाइल परिवहन की लॉजिस्टिक्स दक्षता को काफी हद तक बढ़ाता है। मानेसर प्लांट 10 किलोमीटर के रेल लिंक के माध्यम से पाटली रेलवे स्टेशन से जुड़ा हुआ है, जो हरियाणा रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एचआरआईडीसी) द्वारा विकसित किए जा रहे 121.7 किलोमीटर लंबे हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर का हिस्सा है। इस 10 किलोमीटर के लिंक के निर्माण के लिए 800 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है, जिसमें एचआरआईडीसी ने 684 करोड़ रुपए का योगदान दिया और शेष राशि मारुति सुजुकी द्वारा दी गई। इस गति शक्ति कार्गो टर्मिनल की लोडिंग क्षमता 4.5 लाख ऑटोमोबाइल प्रति वर्ष के साथ भारत में सबसे अधिक है। उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में भारतीय रेलवे में बड़ा बदलाव आया है। 2014 से पहले भारतीय रेलवे का वार्षिक बजट 24,000 से 25,000 करोड़ रुपए था, जो कि बढ़कर अब 2.5 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

रूस के उप-विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने अमेरिका को इजरायल को सीधे सैन्य सहायता देने के खिलाफ चेतावनी दी

मॉस्को इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग में रूस की भी एंट्री हो गई है। रूस ने ईरान का समर्थन करते हुए अमेरिका को खुली धमकी दे डाली है। रूस के उप-विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने अमेरिका को इजरायल को सीधे सैन्य सहायता देने के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “हम वॉशिंगटन को इस तरह के काल्पनिक विकल्पों के खिलाफ भी चेतावनी देते हैं। यह एक ऐसा कदम होगा जो पूरी स्थिति को पूरी तरह से अस्थिर कर देगा।” रूस ने कहा कि यह कदम अत्यंत खतरनाक होगा। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि ईरानी परमाणु बुनियादी ढांचे पर इजरायली हमलों का मतलब है कि दुनिया तबाही से मिलीमीटर दूर है। वहीं, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को इस संभावना पर चर्चा करने से इनकार कर दिया कि इजरायल और अमेरिका ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को मार देंगे और कहा कि ईरानी लोग तेहरान में नेतृत्व के इर्द-गिर्द एकजुट हो रहे हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खुले तौर पर अनुमान लगाया है कि इजरायल के सैन्य हमलों के परिणामस्वरूप ईरान में शासन परिवर्तन हो सकता है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका जानता है कि खामेनेई कहां छिपे हैं, लेकिन वॉशिंगटन उन्हें अभी नहीं मारने जा रहा है। यह पूछे जाने पर कि अगर इजरायल अमेरिका की सहायता से खामेनेई को मार देता है, तो उनकी प्रतिक्रिया क्या होगी, पुतिन ने कहा, “मैं इस संभावना पर चर्चा भी नहीं करना चाहता। मैं नहीं करना चाहता।” पुतिन ने कहा कि इजरायल ने मॉस्को को आश्वासन दिया है कि ईरान में बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र में दो और रिएक्टर बनाने में मदद करने वाले रूसी विशेषज्ञों को हवाई हमलों में कोई नुकसान नहीं होगा। पुतिन ने कहा कि मॉस्को के ईरान के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं और रूस परमाणु ऊर्जा में ईरान के हितों को सुनिश्चित कर सकता है। पुतिन ने कहा कि वह ट्रंप और नेतन्याहू के संपर्क में थे, और उन्होंने संघर्ष को हल करने के लिए मॉस्को के विचारों से अवगत कराया था।  

देश में कोविड-19 के एक्टिव मामलों में अब लगातार गिरावट देखी जा रही है: संस्थान के निदेशक डॉ. नवीन कुमार

नई दिल्ली  कोरोना वायरस के नए ‘सिंगापुर वेरिएंट’ की भारत में पुष्टि के बीच ICMR-NIV ने देशवासियों को राहत की खबर दी है। संस्थान के निदेशक डॉ. नवीन कुमार ने बताया कि देश में कोविड-19 के एक्टिव मामलों में अब लगातार गिरावट देखी जा रही है और फिलहाल जो वेरिएंट्स फैल रहे हैं, उनके लक्षण सामान्य और हल्के हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि कोविड पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन इसका असर उतना घातक नहीं है जितना पहले देखा गया था। ऐसे में घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है। डॉ. कुमार ने कहा, “हम कोविड के वेरिएंट्स की जीनोमिक जांच और डायग्नोसिस कर रहे हैं। सिंगापुर और उसके आसपास के देशों में मामलों की बढ़ोतरी के बाद हमने देखा कि वही वेरिएंट भारत में भी पिछले 5-6 हफ्तों से देखा जा रहा है। हमने इस पर अपनी निगरानी और टेस्टिंग बढ़ा दी है।” भारत में अभी कौन-कौन से वेरिएंट एक्टिव? ICMR-NIV के अनुसार, भारत में इस समय JN.1, LF.7, XFG और NB.1.8.1 जैसे ओमिक्रॉन के सब-वेरिएंट्स सक्रिय हैं। डॉ. कुमार के मुताबिक, “हमने इन सभी वेरिएंट्स को आइसोलेट कर लिया है और अभी तक इनमें कोई गंभीर लक्षण नहीं दिखे हैं। ज़्यादातर संक्रमण हल्के ही हैं।” सरकार की तैयारी ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने ANI से बातचीत में कहा कि सरकार तीन प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान दे रही है, जिसमें संक्रमण की गति और केसों में तेजी, क्या वायरस हमारी प्राकृतिक या वैक्सीन से बनी इम्यूनिटी से बच निकल रहा है? क्या ये वेरिएंट पहले से ज्यादा गंभीर हैं या फिर ओमिक्रॉन जैसे हल्के हैं, शामिल हैं। उन्होंने कहा, “फिलहाल ज़्यादातर मामलों में लक्षण ओमिक्रॉन जैसे ही हल्के और सामान्य हैं।” सरकार की रणनीति डॉ. बहल ने यह भी बताया कि अगर कोई नया वेरिएंट उभरता है, तो सरकार के पास दो विकल्प हैं- एक मौजूदा वैक्सीन की प्रभावशीलता की जांच करना और दूसरा विशेष रूप से नए वेरिएंट को टारगेट कर नई वैक्सीन बनाना। उन्होंने आगे कहा, “हमारी वैक्सीन डेवलपमेंट क्षमता तैयार है और ज़रूरत पड़ने पर नई वैक्सीन जल्द विकसित की जा सकती है। अभी स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सरकार पूरी तरह सतर्क है।”  

पीएम मोदी ने बताया- क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 शिक्षा जगत के लिए अच्छी खबर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में भारतीय विश्वविद्यालयों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए इसे देश के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है। पीएम मोदी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के एक एक्स पोस्ट को रीट्वीट करते हुए लिखा, “क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी 2026 रैंकिंग हमारे शिक्षा क्षेत्र के लिए बहुत अच्छी खबर लेकर आई है। हमारी सरकार भारत के युवाओं के लाभ के लिए अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।” धर्मेंद्र प्रधान ने एक्स पर लिखा, “वैश्विक स्तर पर सर्वश्रेष्ठ 54 उच्च शिक्षा संस्थानों में शामिल होने के साथ भारत ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी 2026 रैंकिंग में एक नया मुकाम हासिल किया है। साल 2014 में सिर्फ 11 संस्थानों से अब 54 तक, यह लगभग पांच गुना वृद्धि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए परिवर्तनकारी शैक्षिक सुधारों को दर्शाती है। मुझे विश्वास है कि अनुसंधान, नवाचार और अंतर्राष्ट्रीयकरण पर एनईपी पर जोर के साथ आने वाले समय में और अधिक भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान वैश्विक उत्कृष्टता हासिल करेंगे।” आपको बता दें, गुरुवार को जारी क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में कुल 54 भारतीय संस्थानों को शामिल किया गया है, जो भारत के लिए अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली शीर्ष रैंक वाला भारतीय संस्थान बनकर उभरा है, जो वैश्विक स्तर पर 150वें स्थान से 123वें स्थान पर पहुंच गया है, जो अब तक का उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। शिक्षा मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट किया, “आईआईटी दिल्ली भारत के शीर्ष रैंक वाले संस्थान के रूप में अग्रणी है। यह क्यूएस रैंकिंग में संस्थान के लिए एक ऐतिहासिक ऊंचाई है।” मंत्रालय ने यह भी कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने क्यूएस रैंकिंग में प्रतिनिधित्व में 390 प्रतिशत की आश्चर्यजनक वृद्धि दर्ज की है, जो जी-20 देशों में सबसे तेज है। पिछले साल की रैंकिंग में भारत का शीर्ष संस्थान आईआईटी बॉम्बे इस साल 118वें स्थान से फिसलकर 129वें स्थान पर आ गया है। इस वर्ष भारत के लगभग 48 प्रतिशत विश्वविद्यालयों ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है। वैश्विक शीर्ष 100 में पांच भारतीय संस्थानों ने भी स्थान प्राप्त किया है।

छात्र वीजा के लिए आवेदन करने वाले विदेशी विद्यार्थियों के लिए फिर खोले द्वार, वीजा के लिए नई रखी शर्त

वाशिंगटन  अमेरिका के विदेश विभाग ने कहा कि वह छात्र वीजा के लिए आवेदन करने वाले विदेशी विद्यार्थियों के लिए निलंबित प्रक्रिया को फिर से शुरू कर रहा है, लेकिन अब सभी आवेदकों को सरकारी समीक्षा के लिए अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘अनलॉक’ रखने होंगे। विभाग ने कहा कि वाणिज्य दूतावासों के अधिकारी उन पोस्ट और संदेशों पर नजर रखेंगे जिन्हें अमेरिका, उसकी सरकार, संस्कृति, संस्थानों या संस्थापक सिद्धांतों के लिए शत्रुतापूर्ण माना जा सकता है। बुधवार को सार्वजनिक किए गए एक नोटिस में, विभाग ने कहा कि उसने छात्र वीजा प्रक्रिया के निलंबन के अपने मई के आदेश को रद्द कर दिया है, लेकिन कहा कि नए आवेदक जो अपने सोशल मीडिया अकाउंट को ‘सार्वजनिक’ करने और उनकी समीक्षा करने की अनुमति देने से इनकार करते हैं, उनके आवेदन को खारिज किया जा सकता है। उसने कहा कि ऐसा करने से इनकार करना इस बात का संकेत हो सकता है कि वे बचने या अपनी ऑनलाइन गतिविधि को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने पिछले महीने अमेरिका में अध्ययन करने की उम्मीद कर रहे विदेशी छात्रों के लिए नए वीजा साक्षात्कारों की समय-सारणी को अस्थायी रूप से रोक दिया था, क्योंकि वह सोशल मीडिया पर उनकी गतिविधि पर निगरानी का विस्तार करने की तैयारी कर रहा था।   दुनिया भर के छात्र उत्सुकता से अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों द्वारा वीजा साक्षात्कार के लिए समय देने की प्रक्रिया फिर से शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि शिक्षण वर्ष की शुरुआत से पहले उनके पास यात्रा की बुकिंग करने और आवास की व्यवस्था करने के लिए कम समय बचा है। बुधवार दोपहर को, टोरंटो में 27 वर्षीय एक पीएचडी छात्र को अगले सप्ताह वीजा साक्षात्कार के लिए समय दिया गया। इस चीनी छात्र को जुलाई के अंत में शुरू होने वाली एक शोध इंटर्नशिप के लिए अमेरिका की यात्रा करने की उम्मीद है। चीन, भारत, मेक्सिको और फिलीपीन के छात्रों ने सोशल मीडिया साइट पर पोस्ट किया है कि वे वीजा बुकिंग वेबसाइटों पर नजर रख रहे हैं और विदेश विभाग की प्रेस ब्रीफिंग को बारीकी से देख रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि साक्षात्कार के लिए समय आवंटित करने की प्रक्रिया पुन: कब शुरू हो सकती है। वीजा प्रक्रिया को फिर से शुरू करते हुए विदेश विभाग ने वाणिज्य दूतावासों से उन छात्रों को प्राथमिकता देने के लिए भी कहा, जो उन कॉलेजों में दाखिला लेना चाहते हैं, जहां विदेशी छात्रों की संख्या 15 प्रतिशत से कम है। यह जानकारी अमेरिका के एक अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर दी।    

मौसम विभाग ने बताया- दिल्ली में हल्की बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी के साथ येलो अलर्ट जारी, मौसम रहेगा सुहावना

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में हो रही बारिश ने लोगों को तेज गर्मी से राहत दी है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आगामी 24 जून तक मौसम सुहावना बने रहने की संभावना जताई है। गुरुवार के लिए दिल्ली में हल्की बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी के साथ येलो अलर्ट जारी किया गया है। आईएमडी के अनुसार, इस सप्ताह के अंत तक मानसून दिल्ली समेत उत्तर भारत के और इलाकों में पहुंच सकता है। आज का मौसम – तापमान और हवाएं अधिकतम तापमान: 34 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान: 23 डिग्री सेल्सियस तेज हवाएं: 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं दिल्ली में बारिश से प्रदूषण में सुधार बारिश के बाद राजधानी की वायु गुणवत्ता में हल्का सुधार देखा गया। गुरुवार सुबह 6 बजे दिल्ली का औसत AQI 153 रिकॉर्ड किया गया जो मध्यम श्रेणी में आता है। दिल्ली के प्रमुख इलाकों में वायु गुणवत्ता इस प्रकार रही-पूसा में 113, पंजाबी बाग में100, नॉर्थ कैंपस में 104 रही।   उत्तर प्रदेश में बदलेगा मौसम, कई जिलों में बारिश की संभावना यूपी के कई हिस्सों में मानसून पहुंच चुका है। काशी, चंदौली, जौनपुर, बागपत, मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, लखनऊ, हरदोई, संभल, झांसी, जालौन और अमेठी में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। लखनऊ और रायबरेली में तेज बारिश का अनुमान है। बिहार में मानसून सक्रिय, कई जिलों में अलर्ट पटना, दरभंगा, कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल और अररिया जैसे जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने किसानों और नागरिकों से सतर्कता बरतने की अपील की है। राजस्थान, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में भी प्रभाव राजस्थान के जयपुर, डूंगरपुर, जोधपुर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर, चुरू और सीकर में हल्की वर्षा का अनुमान इन राज्यों में ऑरेज अलर्ट जारी असम, मणिपुर, सिक्किम और त्रिपुरा में ऑरेंज अलर्ट, भारी बारिश की संभावना जताई है। वहीं, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में भी भारी बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। साथ ही मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे सफर पर निकलने से पहले मौसम की जानकारी जरूर लें।  

चलती ट्रेन में महिला कोच में अश्लील हरकत, कैमरे में कैद हुआ आरोपी, टोकने पर भड़का, ट्रेन से कूदने की कोशिश

मुंबई देश की आर्थिक राजधानी मानी जाने वाली मुंबई में लोकल ट्रेनें जहां लाखों यात्रियों की जीवनरेखा हैं, वहीं आए दिन इनमें हो रही सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं चिंता का विषय बनती जा रही हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला 14 जून को सामने आया, जब एक शख्स ने महिला कोच में घुसकर बेहद अश्लील हरकतें कीं, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कैमरे में कैद हुई शर्मनाक हरकत घटना शुक्रवार सुबह लगभग 8 बजे की है, जब भीड़भाड़ वाले समय में एक महिला पत्रकार ने उस व्यक्ति की हरकतों को कैमरे में रिकॉर्ड किया। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि आरोपी व्यक्ति न सिर्फ महिला कोच में गलत तरीके से घुसा, बल्कि अपनी पैंट की ज़िप खोलने और उसे उतारने की कोशिश भी करता रहा। इस दौरान वह महिलाओं को घूरता भी नजर आया। टोकने पर भड़का, ट्रेन से कूदने की कोशिश जब यात्रियों ने उस पर सवाल उठाए और उसे बाहर निकलने के लिए कहा गया, तो वह आक्रामक हो गया और गुस्से में ऐसा बर्ताव करने लगा मानो वह चलती ट्रेन से कूदने की कोशिश करेगा। हालांकि, ऐन वक्त पर उसने दिशा बदली और अगले कोच की ओर बढ़ गया। घटना जीटीबी नगर स्टेशन के पास की बताई जा रही है, जहां आरोपी को दूसरे कोच में चढ़ते देखा गया। ‘एक्स’ पर हुआ खुलासा, पत्रकार ने शेयर किया वीडियो घटना का वीडियो पत्रकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर किया, जिसके बाद यह वायरल हो गया। पोस्ट के मुताबिक, शख्स नशे में धुत था और उसने चूनाभट्टी स्टेशन पर ट्रेन के नीचे से रेंगकर महिला कोच में एंट्री ली। जीटीबी स्टेशन पहुंचने पर उसे कोच से उतार दिया गया।

प्रधानमंत्री मोदी की मंशा के अनुरूप 2047 तक सिकल सेल एनीमिया को समूल खत्म करने का है संकल्प

भोपाल  राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि सिकल सेल के संपूर्ण उन्मूलन के लिए हम सबकी सक्रिय सामूहिक भागीदारी आवश्यक है। सबके विश्वास, साथ और प्रयासों से ही रोग का उन्मूलन होगा। राज्यपाल श्री पटेल विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर बड़वानी में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इंदौर से वर्चुअली कार्यक्रम से जुड़े। कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का प्रदेश की जनता के नाम संदेश और राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों पर आधारित अभिनंदन-पत्र का उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल द्वारा वाचन किया गया। जनजातियों के कल्याण का स्वर्ण काल राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जनजाति जीवन के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए समर्पित और संवेदनशील व्यक्तित्व है। उनके नेतृत्व में भारत में जनजाति कल्याण का स्वर्ण युग चल रहा है। सिकल सेल उन्मूलन मिशन के तहत प्रदेश सरकार सराहनीय कार्य कर रही है। राज्यपाल श्री पटेल ने सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों के लिए राज्य सरकार की पूरी टीम को बधाई दी। सिकल सेल के उन्मूलन के लिए दिए मंत्र राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि सिकल सेल उन्मूलन के लिए जागरूकता सर्वाधिक आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विवाह के पूर्व युवक-युवती अपने जेनेटिक कार्ड का मिलान ज़रूर करें। इसी प्रकार गर्भावस्था में माँ और बच्चे की सिकल सेल जाँच और जन्म के 72 घंटों में नवजात की जाँच किया जाना ज़रूरी है। राज्यपाल श्री पटेल ने सिकल सेल से पीड़ित रोगी और वाहकों से भी अपील की है कि वे नियमित व्यायाम, पौष्टिक आहार और चिकित्सक की सलाह अनुसार दवाइयाँ लें। उन्होंने अभिभावकों से भी कहा कि सिकल सेल प्रभावित बच्चों के साथ आत्मीय व्यवहार करें। उन्हें सिकल सेल को समझने, लड़ने और हराने में संबल प्रदान करें। जनजातीय प्रतिनिधियों से की सहयोग की अपील राज्यपाल श्री पटेल ने स्वयं जनजातीय समुदाय से आने की बात कहते हुए समुदाय के प्रतिनिधियों से अपील की कि जनजाति क्षेत्रों में सिकल सेल के जनजागरण प्रयासों में सतत्, सक्रिय और संवेदनशीलता के साथ सहयोग करें। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि सिकल सेल उन्मूलन के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार में सहयोगी बने। युवा अपनी प्रतिभा का उपयोग जनजातीय कल्याण में करें राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि सिकल सेल की जागरूकता और रोकथाम प्रयासों को शैक्षणिक संस्थानों की विभिन्न गतिविधियों के आयोजन के साथ पाठ्यक्रमों में भी शामिल करने के लिये कहा। उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई करने वाले जनजाति समुदाय के विद्यार्थियों से अपील की कि वे सिकल सेल रोग उन्मूलन के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करें। इस बीमारी पर शोध करें। अपने ग्रामीण अंचलों में जागरूकता प्रयासों में सहभागी बने। अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग अपने समुदाय के कल्याण और विकास में करें। प्रदेश में 1 करोड़ 6 लाख से नागरिकों की सिकल सेल स्क्रीनिंग हुई पूरी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारे समाज में शादी से पहले कुंडली मिलान की परंपरा है। अब समय आ गया है कि कुंडली के साथ हम वर-वधु का ‘सिकल सेल जेनेटिक कार्ड’ भी मिलाएं। इस बीमारी का पता जितनी जल्दी चल जाए इसे नियंत्रण में रखने और रोगी को स्वस्थ रखने की संभावना उतनी ही अधिक होती है। प्रदेश का जनजातीय समाज बड़ी संख्या में इस बीमारी से प्रभावित है। सिकल सेल हमारे लिए केवल एक स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है। वर्ष 2047 तक सिकल सेल को जड़ से मिटाने का लक्ष्य लेकर प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में “राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन-2047” प्रारंभ किया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्क्रीनिंग, रोग प्रबंधन, परामर्श और जन-जागरूकता, इन चारों महत्वपूर्ण स्तरों पर प्रदेश में समन्वित रूप से कार्य किया जा रह है। प्रदेश में अब तक 1 करोड़ 6 लाख से नागरिकों की सिकल सेल स्क्रीनिंग पूरी की जा चुकी है। सभी चिन्हित मरीजों को हाइड्रॉक्सी यूरिया, फॉलिक एसिड और नि:शुल्क रक्तदान की सुविधा दी जा रही है। सिकल सेल रोगियों की जेनेटिक कॉउंसिलिंग का कार्य भी जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खरगोन जिले में नए मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे संपूर्ण निमाड़ अंचल को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव बड़वानी पहुंचने के लिए भोपाल से रवाना हुए लेकिन मौसम खराब होने के कारण वे बड़वानी नहीं पहुंच पाए और उन्होंने इन्दौर से ही कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित किया।  राज्यपाल श्री पटेल ने प्रदेश ही नहीं राष्ट्रीय स्तर पर सिकल सेल एमीनिया के प्रति जागरुकता अभियान चलाया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्यपाल श्री मंगूभाई पटेल ने प्रदेश ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर सिकल सेल एमीनिया के प्रति जागरुकता अभियान चलाया है। प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र को इसका लाभ मिला है। सिकल सेल बीमारी से भावी पीढ़ियां खराब हो जाती हैं। सिकल सेल बीमारी से जनजातीय क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। सिकल सेल एनीमिया होने पर हमारी रक्त कोशिकाएं सिकुड़ने लगती हैं। यह बीमारी आनुवांशिक तौर पर आगे बढ़ती रहती है। प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग की है। इसमें बड़वानी जिले के सिकल सेल से सबसे ज्यादा प्रभावित होने की जानकारी मिली। यहां सिलक मित्र तैनात किए गए हैं। मु्ख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिकल सेल एमीनिया से डरने की आवश्यकता नहीं है। स्क्रीनिंग और रोकथाम के योग्य तरीकों से इस बीमारी से मुक्ति मिल सकती है। नवजात शिशुओं की जांच के लिए एम्स भोपाल में सिकल सेल जांच यूनिट शुरू की गई है। प्रदेश में जारी अभियान सिकल सेल के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसा है। जनजातीय अंचलों में खोली जा रहीं फूड प्रोसेसिंग यूनिट मु्ख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बड़वानी, झाबुआ, धार सहित प्रदेश के अन्य जनजातीय बहुल जिलों के लिए अनेक कल्याणकारी कदम उठाए हैं। निमाड़ के किसानों को अब सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। राज्य सरकार ने तापी मेगा रीचार्ज परियोजना पर कार्य शुरू किया है। जनजातीय अंचलों में फूड प्रोसेसिंग यूनिट करने के अभियान अंतर्गत प्रदेशभर में कृषि मेले लगाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने तीसरी फसल मूंग के लिए सरकारी खरीद शुरू करने के लिए पंजीयन शुरू कर दिया हैं। बिजली बिल से … Read more

मौसम विभाग ने बताया- 19 से 22 जून के बीच 20 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी, रेड और ऑरेंज अलर्ट भी लागू

नई दिल्ली देश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश का दौर जारी रहने वाला है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने देश के उत्तर, मध्य, पूर्व और दक्षिणी राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कुछ क्षेत्रों में रेड और ऑरेंज अलर्ट भी लागू किया गया है। यह मॉनसूनी बारिश कृषि के लिए राहत तो है, लेकिन जनजीवन पर असर डालने की भी आशंका जताई जा रही है। इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग के अनुसार, 19 से 22 जून के बीच मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ, झारखंड, बिहार, ओडिशा और गंगा के मैदानी इलाकों समेत 20 राज्यों में तेज बारिश के साथ बिजली गिरने की संभावना है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी 19, 22 और 23 जून को भारी बारिश हो सकती है। विशेष रूप से ओडिशा और झारखंड में आज और कल के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है, यानी वहां के लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। दक्षिण भारत में झमाझम बारिश के आसार तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल, माहे, लक्षद्वीप, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, रायलसीमा और यनम में 19 जून को व्यापक स्तर पर बारिश देखने को मिल सकती है। वहीं महाराष्ट्र के कोंकण, गोवा, मराठवाड़ा और गुजरात क्षेत्रों में 19 से 24 जून तक रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है।   उत्तर भारत भी भीगने को तैयार उत्तराखंड, पूर्वी राजस्थान और उत्तर प्रदेश में 19 से 24 जून के बीच भारी बारिश का पूर्वानुमान है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और आसपास के पहाड़ी इलाकों में 22 जून को बारिश हो सकती है। हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में 20 से 23 जून के बीच भारी बारिश की आशंका है। तापमान में गिरावट की संभावना मध्य भारत में अधिकतम तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है। हालांकि, इसके बाद तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा जाएगा। यूपी में मानसून की दस्तक उत्तर प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में मानसून 13 जून की सामान्य तिथि से पांच दिन की देरी से 18 जून को पहुंचा। अगले 2-3 दिनों में मानसून पूरे राज्य में फैलने के लिए अनुकूल रहेगा। इस दौरान राज्य के अधिकांश हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश जारी रहेगी। हिमाचल में अलर्ट, शनिवार को हो सकती है भारी बारिश हिमाचल प्रदेश में भी मानसून अगले कुछ दिनों में दस्तक दे सकता है। शुक्रवार को भारी बारिश के लिए येलो अलर्ट और शनिवार व रविवार के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। दिल्ली में भीगी शुरुआत संभव दिल्ली और एनसीआर में गुरुवार को बादल छाए रह सकते हैं और हल्की बारिश होने की संभावना है। शुक्रवार और शनिवार को बारिश की गतिविधि तेज हो सकती है। मानसून इस बार राजधानी में तय समय से पहले दस्तक दे सकता है।  

इजरायली ने मिसाइल हमले के कारण क्षतिग्रस्त हुईं खिड़कियों और इलाके से उठते घने काले धुएं के फुटेज प्रसारित किए, हुई क्षति

  तेल अवीव ईरान की एक मिसाइल बृहस्पतिवार तड़के दक्षिणी इजरायल के मुख्य अस्पताल पर गिरी जिससे कई लोग घायल हो गए और ‘‘व्यापक पैमाने पर क्षति’’ हुई। अस्पताल ने यह जानकारी दी। इजरायली मीडिया ने मिसाइल हमले के कारण क्षतिग्रस्त हुईं खिड़कियों और इलाके से उठते घने काले धुएं के फुटेज प्रसारित किए। ईरान ने तेल अवीव में एक ऊंची अपार्टमेंट इमारत और मध्य इजरायल में अन्य जगहों पर हमले किए। इजरायल की ‘मैगन डेविड एडम’ बचाव सेवा के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 40 लोग घायल हुए हैं। इस बीच इजरायल ने ईरान के अराक भारी जल रिएक्टर पर हमला किया। ईरान के विशाल परमाणु कार्यक्रम पर यह हमला संघर्ष के सातवें दिन किया गया। इजरायल ने सात दिन पहले ईरान के सैन्य स्थलों, वरिष्ठ अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाकर अचानक हमले किए जिससे यह संघर्ष शुरू हो गया। ईरान ने इजरायल पर सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन दागे लेकिन अधिकतर को इजरायल की बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली ने मार गिराया। 10 लाख निवासियों को सेवाएं देता है अस्पताल ईरानी मिसाइल ने ‘सोरोका मेडिकल सेंटर’ को निशाना बनाया जो इजरायल के दक्षिण में स्थित मुख्य अस्पताल है। अस्पताल की वेबसाइट के अनुसार, इस अस्पताल में 1,000 से अधिक बिस्तर हैं और यह इजरायल के दक्षिण के लगभग 10 लाख निवासियों को सेवाएं प्रदान करता है। बयान में कहा गया है कि चिकित्सा केंद्र के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए हैं और आपातकालीन कक्ष में मामूली रूप से घायल कई लोगों का इलाज किया जा रहा है। अस्पताल को नए रोगियों के लिए बंद कर दिया गया है और केवल उन मरीजों को भर्ती किया जा रहा है जो किसी जानलेवा समस्या से जूझ रहे हैं। यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमले में कितने लोग घायल हुए हैं। इजरायल के कई अस्पतालों ने पिछले सप्ताह आपातकालीन योजनाएं सक्रिय कर दी थीं और अस्पतालों की भूमिगत पार्किंग में मरीजों को स्थानांतरित कर दिया था। अराक रिएक्टर पर इजरायली हमला ईरान के सरकारी टेलीविजन चैनल ने बृहस्पतिवार को बताया कि इजरायल ने ईरान के अराक भारी जल रिएक्टर पर हमला किया है। चैनल ने बताया कि हमले के बाद ‘‘किसी भी तरह के विकिरण का खतरा नहीं’’ है और हमले से पहले ही केंद्र को खाली करा लिया गया था तथा रिएक्टर के आस-पास स्थित असैन्य इलाकों में कोई नुकसान नहीं हुआ है। इजरायल ने बृहस्पतिवार की सुबह पहले ही चेतावनी दी थी कि वह रिएक्टर पर हमला करेगा और उसने लोगों से क्षेत्र छोड़कर जाने को कहा था। हमले को लेकर विस्तृत जानकारी नहीं मिल पाई है लेकिन अग्निशमन कर्मियों ने कहा कि ऐसा लगता है कि चिकित्सकीय इमारत और कुछ अपार्टमेंट इमारतों को निशाना बनाया गया है। इस बात की तत्काल जानकारी नहीं मिल सकी कि इन हमलों में कोई हताहत हुआ है या नहीं। अराक रिएक्टर तेहरान से 250 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में है। परमाणु रिएक्टर को ठंडा करने के लिए भारी जल रिएक्टर का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन यह प्लूटोनियम भी बनाता है जिसका संभावित रूप से परमाणु हथियारों में उपयोग किया जा सकता है। ईरान पर इजरायल के हवाई हमले सातवें दिन भी जारी रहे। इससे एक दिन पहले ईरान के सर्वोच्च नेता ने अमेरिका के आत्मसमर्पण के आह्वान को खारिज कर दिया था और चेतावनी दी थी कि अमेरिकियों की किसी भी सैन्य भागीदारी से उन्हें ‘‘अपूरणीय क्षति’’ होगी। 400 मिसाइल और सैकड़ों ड्रोन दागे वाशिंगटन स्थित एक ईरानी मानवाधिकार समूह ने बताया कि ईरान में 263 आम नागरिकों सहित कम से कम 639 लोग मारे गए हैं और 1,300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने करीब 400 मिसाइल और सैकड़ों ड्रोन दागे हैं, जिससे इजरायल में कम से कम 24 लोग मारे गए हैं और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। इनमें से कुछ मिसाइल एवं ड्रोन मध्य इजरायल में अपार्टमेंट इमारतों पर गिरे जिससे भारी नुकसान हुआ है।  

पुतिन ने इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की पेशकश, ट्रंप ने लताड़ा

सेंट पीटर्सबर्ग  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनाव को खत्म करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की. अपनी यूक्रेन वाली जंग में फंसकर चारों खाने चित हो रहे पुतिन अब इजरायल और ईरान के बीच शांति का ‘मसीहा’ बनने चले हैं. सेंट पीटर्सबर्ग इकोनॉमिक फोरम में पुतिन ने बड़े जोश में कहा, ‘हम इजरायल-ईरान के झगड़े को सुलझा सकते हैं. रूस इस संकट के समाधान के लिए एक ऐसा समझौता कराने में मदद कर सकता है जिससे ईरान को शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम चलाने की अनुमति मिले और इजराइल की सुरक्षा चिंताएं भी दूर हों.’ लेकिन इस बयान को सुनकर दुनिया हैरान है. क्योंकि पुतिन अभी अपना युद्ध ही नहीं रोक पाए हैं. पुतिन ने कहा, ‘यह एक संवेदनशील मामला है, लेकिन मेरी नजर में इसका समाधान संभव है.’ लेकिन पुतिन को ट्रंप ने नसीहत दी है कि वह पहले अपनी जंग से निपटें और दूसरों की फिक्र करना छोड़ दें. पुतिन का यह बयान तब आया है जब यूक्रेन ने दावा किया है कि अब तक 10 लाख रूसी सैनिक इस युद्ध में मारे गए हैं. जब रूसी राष्ट्रपति से यह पूछा गया कि अगर इजराइल ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को मार दे तो रूस की प्रतिक्रिया क्या होगी, तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया. पुतिन ने कहा, ‘मैं इस संभावना पर चर्चा भी नहीं करना चाहता. लगातार बढ़ रहा है ईरान-इजरायल का संघर्ष ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और अमेरिका ने भी क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है. वहीं दूसरी तरफ रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध दो साल से ऊपर चला गया है और हालात सुधरने की जगह और बिगड़ते जा रहे हैं. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि यूक्रेन युद्ध में मारे गए लोगों की असली संख्या छुपाई जा रही है. उन्होंने कहा, “बहुत ज़्यादा लोग मारे गए हैं, जितना बताया जा रहा है उससे कहीं ज़्यादा. वहां एक बिल्डिंग गिरती है और कहा जाता है कि कोई घायल नहीं हुआ  क्या ये मजाक है?” वहीं, यह देखना दिलचस्प होगा कि पुतिन इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं. रूस के लिए यूक्रेन युद्ध का समाधान जितना दूर है, उतना ही जटिल इजरायल-ईरान संकट भी बनता जा रहा है. पुतिन ने की थी पेशकश बुधवार को पुतिन ने इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष को समाप्त करने में मध्यस्थता करने की पेशकश की थी. अंतर्राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के पत्रकारों के साथ एक गोलमेज सत्र में बोलते हुए, पुतिन ने कहा कि “यह एक नाजुक मुद्दा है. मेरे विचार से, एक समाधान पाया जा सकता है.” पुतिन ने कहा कि उन्होंने ईरान, इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ मास्को के प्रस्तावों को साझा किया. ट्रंप ने पुतिन को सुना दिया इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने इजरायल के हमलों के आगे झुकने से इनकार करते हुए चेताया कि अगर अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप करता है, तो यह उसके लिए ‘अपूरणीय क्षति’ साबित हो सकती है. पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस ने ईरान, इजराइल और अमेरिका को अपने प्रस्ताव साझा कर दिए हैं. उन्होंने कहा, ‘हम किसी पर कुछ थोप नहीं रहे हैं. हम सिर्फ इस स्थिति से बाहर निकलने का एक रास्ता सुझा रहे हैं. लेकिन अंतिम निर्णय इन देशों के राजनीतिक नेतृत्व का है, खासकर ईरान और इजरायल का.’ हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन की मध्यस्थता की पेशकश पर चुटकी लेते हुए कहा, ‘मैंने पुतिन से कहा, मुझ पर अहसान करो. पहले अपने ही मुद्दे सुलझा लो. बाद में बाकी की चिंता करना.’ ईरान से रिश्तों की दुहाई दे रहे पुतिन पुतिन ने बड़े गर्व से बताया कि रूस और ईरान की दोस्ती ‘पक्की’ है. रूस ने ईरान के बुशहर में परमाणु संयंत्र बनाया, और अब वहां दो और रिएक्टर बना रहा है. वहां 200 से ज्यादा रूसी कर्मचारी दिन-रात जुटे हैं. पुतिन ने ये भी कहा कि ईरान ने कभी उनसे सैन्य मदद नहीं मांगी. रूस ने इजरायल के साथ बातचीत कर यह सुनिश्चित किया है कि उसकी सुरक्षा से समझौता न हो. यूक्रेन युद्ध पर रूस का रुख पुतिन ने यह भी कहा कि वह यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से बातचीत को तैयार हैं, लेकिन दोहराया कि जेलेंस्की का कार्यकाल खत्म हो चुका है और अब वह वैध नेता नहीं हैं. हालांकि कीव और उसके सहयोगी देशों ने इस दावे को खारिज करते हैं. उन्होंने कहा, ‘हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन अगर समझौता नहीं हुआ तो हम अपने लक्ष्यों को सैन्य माध्यम से प्राप्त करेंगे.’

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