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वैश्विक संकट में भरोसे का नाम भारत, अपने ही नहीं विदेशियों की भी की रक्षा

नई दिल्ली दुनिया भर में युद्ध और संकटग्रस्त क्षेत्रों में फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकालने के मामले में भारत को सबसे “प्रोएक्टिव और रिस्पॉन्सिव” देशों में से एक बताया गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े निकासी अभियानों के जरिए हजारों नागरिकों को संघर्ष क्षेत्रों से सुरक्षित बाहर निकाला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने तेज कूटनीतिक प्रयास, सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और सैन्य लॉजिस्टिक्स के जरिए कई सफल ऑपरेशन चलाए।  इनमें प्रमुख अभियान शामिल हैं:     Operation Raahat – यमन संकट के दौरान निकासी     Operation Sankat Mochan – दक्षिण सूडान से भारतीयों की वापसी     Operation Ganga – रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान छात्रों की निकासी     Operation Kaveri – सूडान संकट में राहत अभियान     इन अभियानों के जरिए हजारों भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया गया। विदेशी नागरिकों की भी मदद रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत ने केवल अपने नागरिकों को ही नहीं बल्कि संकट के समय अन्य देशों के नागरिकों को भी सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की, जिससे भारत की मानवीय छवि मजबूत हुई। जब मध्य-पूर्व में Iran और Israel के बीच तनाव बढ़ा, तब भारतीय सरकार ने स्थिति पर लगातार नजर रखी और निकासी के लिए तैयारियां तेज कीं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा सरकार की “सबसे बड़ी प्राथमिकता” है।  ‘ऑपरेशन सिंधु’ से सुरक्षित वापसी     2025 में पश्चिम एशिया के तनाव के दौरान भारत ने Operation Sindhu शुरू किया।     इस अभियान के तहत भारतीय नागरिकों को पहले Armenia पहुंचाया गया और फिर विशेष विमानों से भारत लाया गया।     रिपोर्ट के अनुसार इस प्रक्रिया को बेहद व्यवस्थित और सुरक्षित बताया गया। रूस-यूक्रेन युद्ध में सबसे बड़ा मिशन रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने Russia–Ukraine War में फंसे नागरिकों को निकालने के लिए Operation Ganga शुरू किया। इस अभियान में  23,000 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया। 18 देशों के 147 विदेशी नागरिकों को भी मदद मिली। इन लोगों को पहले पोलैंड, रोमानिया, हंगरी, स्लोवाकिया और मोल्दोवा जैसे पड़ोसी देशों में पहुंचाया गया और फिर विशेष उड़ानों से भारत लाया गया।  

दिल्ली-कोलकाता के बीच चल रहा था गोल्ड-सिल्वर स्मगलिंग रैकेट, करोड़ों का माल जब्त

नई दिल्ली राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने दिल्ली और कोलकाता के बीच सक्रिय एक संगठित सोना तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान एजेंसी ने 14.13 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का सोना, चांदी और भारतीय मुद्रा बरामद कर छह लोगों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बरामदगी में 8,286.81 ग्राम सोना शामिल है जिसकी कीमत लगभग 13.41 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अलावा 7,350.4 ग्राम चांदी जिसकी कीमत करीब 19.67 लाख रुपये है और 51.74 लाख रुपये की भारतीय नकदी भी जब्त की गई है। यह कार्रवाई सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत की गई है। ‎डीआरआई को मिली विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर यह ऑपरेशन शुरू किया गया था। अधिकारियों को सूचना मिली थी कि तस्करी का सोना ट्रेन के जरिए राष्ट्रीय राजधानी लाया जा रहा है। सूचना के आधार पर अधिकारियों ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर कोलकाता से ट्रेन द्वारा पहुंचे एक यात्री को रोका। जांच में उसके पास विदेशी मार्किंग वाला सोना मिला, जिसे स्टेशन के बाहर मौजूद एक व्यक्ति को सौंपा जाना था। मौके पर ही सोना लेकर आए व्यक्ति और रिसीवर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों से पूछताछ के बाद जांच दिल्ली के अन्य ठिकानों तक पहुंची। डीआरआई की आगे की कार्रवाई में शहर में चल रही एक अवैध सोना गलाने की इकाई का पता चला, जहां विदेशी मूल के सोने को पिघलाकर उसकी पहचान मिटाई जाती थी और बाद में उसे घरेलू सर्राफा बाजार में बेचा जाता था। छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने वहां से अतिरिक्त सोना-चांदी और बड़ी मात्रा में भारतीय नकदी बरामद की। इस अवैध यूनिट का संचालन करने वाले प्रबंधक को भी गिरफ्तार कर लिया गया। जांच आगे बढ़ने पर डीआरआई की टीम कोलकाता पहुंची, जहां तस्करी नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड का पता चला। वह एक अन्य अवैध मेल्टिंग यूनिट में मिला, जहां से और पिघलाया हुआ सोना बरामद हुआ। उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों के अनुसार, दो अन्य कैरियरों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उन्हें विदेश से तस्करी कर लाया गया सोना मिलता था, जिसे पहचान मिटाने के लिए पिघलाया जाता था और फिर ट्रेन के जरिए दिल्ली भेजा जाता था। तस्करी, परिवहन, सोना गलाने और बाजार में खपाने की साजिश में शामिल सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर सक्षम अदालत में पेश किया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है। भारत में सोने पर ऊंचे आयात शुल्क और घरेलू बाजार में इसकी मजबूत मांग के कारण सोना तस्करी लंबे समय से प्रवर्तन एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। तस्कर अक्सर सोने को अलग-अलग शहरों के रास्ते भेजकर और उसकी पहचान बदलकर बाजार में उतारने की कोशिश करते हैं।

मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर: खर्ग द्वीप के बाद ईरान का पलटवार, दुबई और कुवैत एयरपोर्ट निशाने पर

कुवैत कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी ड्रोन से हमले किए गए। हालांकि इन हमलों में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। इसके अलावा फुजैराह में धुआं उठते देखाय गया। यहां एक जॉर्डन के नागरिक के घायल होने की खबर है। दुबई में ईरान मिसाइल अटैक भी कर रहा है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी युद्ध भयानक रूप लेता जा रहा है। इस युद्ध के चलते पूरी दुनिया में फ्यूल का संकट खड़ा हो गया है। वहीं ईरान लगातार अपने पड़ोसी देशों में भी हमला कर रहा है। यूएई के दुबई में ईरान ने हमले बंद ही नहीं किए। रविवार को भी दुबई के मरीना और अल सुफूह इलाके में जोरदार धमाके हुए और काला धुआं उठताा हुआ दिखाई दिया। बतादें कि इस युद्ध को भी 16 दिन बीत रहे हैं।   कुवैत एयरपोर्ट पर हमला इसके अलावा कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी ड्रोन से हमले किए गए। हालांकि इन हमलों में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। इसके अलावा फुजैराह में धुआं उठते देखाय गया। यहां एक जॉर्डन के नागरिक के घायल होने की खबर है। दुबई में ईरान मिसाइल अटैक भी कर रहा है। हालांकि यहां एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात है। अमेरिका के खर्ग द्वीप पर हमले के बाद तनाव और बढ़ गया है। इसे ईरान की रीढ़ की हड्डी कहा जा सकता है क्योंकि यहीं से ईरान 90 फीसदी तेल का आयात करता है। ईरान ने करीब 1800 मिसाइल और ड्रोन अटैक यूएई पर किए हैं। इसके अलावा अन्य देशों में भी जमकर ड्रोन और मिसाइल अटैक हुए हैं। यूएई में ईरान ने 1600 ड्रोन, 294 मिसाइल और 15 क्रूज मिसाइल अटैक किए। इनमें कम से कम 294 लोग मारे गए हैं और 141 घायल हुए हैं। शनिवार को ही ईरान ने 33 ड्रोन हमले कर दिए। वहीं ड्रोन और मिसाइल अटैक की फुटेज सोशल मीडिया पर डालने वाले 10 विदेशियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। भारत के लिए भी खड़ी हो रही परेशानी पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति, भारत के निर्यात के लिए अनिश्चितता पैदा कर रही है। निर्यातक बदलते हालात पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि अतिरिक्त शुल्क और लंबा परिवहन समय माल की आवाजाही को प्रभावित कर रहे हैं। परिधान उद्योग के एक विशेषज्ञ ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण अगले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया क्षेत्र में जाने वाले निर्यात ऑर्डर में कमी आ सकती है और वहां खपत भी घट सकती है। भारत के कुल परिधान निर्यात का लगभग 11.8 प्रतिशत हिस्सा उन पश्चिम एशियाई देशों में जाता है, जो इस समय युद्ध के प्रभाव में हैं। भारत का तैयार वस्त्र निर्यात संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इजराइल, कुवैत, ओमान, कतर, इराक, बहरीन और ईरान जैसे देशों को वित्त वर्ष 2024-25 में 1.9 अरब डॉलर का रहा, जो 2023-24 में 1.82 अरब डॉलर था। कुल मिलाकर भारत का परिधान निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 में 15.97 अरब डॉलर रहा, जबकि 2023-24 में यह 14.51 अरब डॉलर था। चमड़ा निर्यातक परिषद के चेयरमैन रमेश कुमार जुनेजा ने कहा कि फारस की खाड़ी में जाने वाले माल की ढुलाई फिलहाल पूरी तरह रुक गई है। उन्होंने कहा, “बीमा शुल्क बढ़ गया है। 20 फुट के कंटेनर पर यह 1,200 अमेरिकी डॉलर और 40 फुट पर 2,400 अमेरिकी डॉलर बढ़ गया है।”  

मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: नेतन्याहू पर ईरान का सीधा निशाना, IRGC ने बदले की कसम खाई

ईरान मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान के शक्तिशाली सैन्य संगठन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक ऐसा बयान जारी किया है जिसने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। IRGC ने कसम खाई है कि वे अपने सर्वोच्च नेता की मौत का बदला लेने के लिए इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को ढूंढेंगे और उन्हें मार डालेंगे। ईरानी गार्ड्स ने अपनी वेबसाइट सेपाह न्यूज पर बयान जारी करते हुए कहा, “अगर बच्चों की जान लेने वाला यह अपराधी जिंदा है, तो हम पूरी ताकत से उसका पीछा करते रहेंगे और उसे मार गिराएंगे।” एक संदेश में IRGC के कमांडरों ने कहा कि 28 फरवरी को अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या एक ऐसा अपराध है जिसका हिसाब नेतन्याहू को अपनी जान देकर चुकाना होगा। अभी जारी रहेगा युद्ध: इजरायली रक्षा मंत्री वहीं, इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने शनिवार को कहा कि तेहरान के साथ युद्ध अब एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने ईरान के खर्ग द्वीप पर स्थित तेल निर्यात केंद्र पर अमेरिका द्वारा किए गए हमलों की सराहना की, जिन्हें वाशिंगटन ने सैन्य लक्ष्य बताया था। काट्ज़ ने एक टेलीविजन बयान में शीर्ष सैन्य अधिकारियों से कहा, “ईरान के खिलाफ वैश्विक और क्षेत्रीय संघर्ष का नेतृत्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू कर रहे हैं। यह अब और तेज हो रहा है और एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहा है। यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक इसकी आवश्यकता होगी।” पिता की मौत का लेंगे बदला इससे पहले गुरुवार को ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता का पद संभालने के बाद पहला बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि ईरान खाड़ी देशों पर हमले जारी रखेगा। साथ ही उन्होंने उस युद्ध में ‘अन्य मोर्चे’ खोलने की धमकी दी जिसने पहले ही विश्व ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय यात्रा को बाधित कर दिया है।  

मेगा रेड में बड़ा खुलासा: दिल्ली से MP-UP तक छापे, कैश और गहनों समेत 200 करोड़ की संपत्ति सामने

नई दिल्ली नोएडा, ग्रेटर नोएडा, दिल्ली, मध्यप्रदेश, लखनऊ, कानपुर,बांदा समेत देशभर के 35 बिल्डर और खनन कारोबारी के ठिकानों पर आयकर विभाग की जांच शुक्रवार को पूरी हो गई। आयकर सूत्रों के अनुसार नोएडा-ग्रेटर नोएडा, दिल्ली की प्रॉपर्टी में करीब 200 करोड़ रुपये अघोषित राशि के निवेश की जानकारी सामने आई है। अलग-अलग परिसर से करीब आठ करोड़ रुपये मिले हैं। इसके अलावा बड़ी मात्रा में जेवरात भी सीज किए गए। आयकर विभाग की टीमों ने बुधवार सुबह करीब छह बजे एक परिसरों पर साथ छापा मारा था। इसमें नोएडा-ग्रेटर नोएडा में सात और दिल्ली में दो परिसर शामिल थे। करोड़ों रुपये का कालाधन बिल्डर परियोजना, प्रॉपर्टी और अन्य निवेश में खपाने के आरोप को लेकर यह कार्रवाई की गई। आयकर सूत्रों के अनुसार परिसरों में जांच पूरी हो गई है। अब जब्त दस्तावेजों की जांच की जाएगी। सूत्रों का दावा है कि अब तक की जांच में प्रॉपर्टी में राजनीतिज्ञ, नौकरशाहों और खनन कारोबारियों का करीब 200 करोड़ अघोषित राशि के प्रॉपर्टी में निवेश की जानकारी मिली है। वहीं बांदा, लखनऊ और अन्य परिसरों से कुल करीब आठ करोड़ रुपये नगद जब्त किया गया। इसके अलावा जेवरात भी जब्त किए गए हैं।अलग-अलग बैंकों में करीब दस लॉकर सीज किए गए हैं। इनके खुलने पर कई और अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। इसमें कुछ लॉकर लोगों ने अपने पत्नी और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर खोले हुए थे। इनके ठिकानों पर हुई छापेमारी जांच में ग्रेटर नोएडा स्थित गोल्डन आई के निदेशक आनंद शुक्ला के नोएडा स्थित लोटस 300 सोसायटी के आवास, ग्रेटर नोएडा स्थित गोल्डन ग्रांडे व्यावसायिक प्रोजेक्ट और उनके कारोबार से संबंधित कुल सात ठिकानों पर कार्रवाई की गई। आयकर सूत्रों का दावा है कि बिल्डर प्रोजेक्ट और अन्य प्रॉपर्टी में खनन व अन्य कारोबारियों ने रुपये निवेश किए हैं। इनके सहयोगियों में खनन कारोबारी सीरजध्वज सिंह, जिनकी बांदा स्थित कंपनी और अन्य ठिकानों व एविएशन, खनन और रियल एस्टेट कारोबारी अज्ञात गुप्ता के दिल्ली, लखनऊ और मध्य प्रदेश स्थित ठिकानों पर जांच की गई। प्रॉपर्टी में निवेश सुरक्षित आयकर सूत्रों के अनुसार जांच पता लगा है कि कारोबारियों ने अन्य शहरों में प्रॉपर्टी में अघोषित रकम लगाई है। इसकी अहम वजह कारोबारी जिस शहर में कारोबार करता है, उसके बाद प्रॉपर्टी में निवेश करना वह सुरक्षित मानता है। कारोबारियों की सोच है कि जांच टीमों को इसके बारे में पता नहीं लगेगा। आयकर विभाग अभियान भी चला रहा आयकर विभाग द्वारा शुरू किया गया सक्षम नज अभियान रेस्टोरेंट्स और खाद्य क्षेत्र में स्वैच्छिक कर अनुपालन बढ़ाने की एक पहल है। यह अभियान गलत टैक्स रिपोर्टिंग और 408 करोड़ रुपये की छिपाई गई बिक्री का पता चलने के बाद शुरू किया गया है, जिसके तहत 63,000 रेस्टोरेंट्स को 31 मार्च 2026 तक अपने रिटर्न अपडेट करने को कहा गया है। पहले मिठाई की दुकानों और रेस्टोरेंट का हुआ सर्वे आयकर विभाग ने इससे पहले नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर समेत देश के अन्य शहरों में प्रमुख मिठाई दुकानों पर सर्वे कर बड़े पैमाने पर कर चोरी पकड़ी थी। 62 से अधिक रेस्टोरेंट्स और दुकानों में की गई जांच में 408 करोड़ से अधिक की बिक्री छिपाने का पता चला। यह कार्रवाई पेट-पूजा जैसे इलेक्ट्रॉनिक बिलिंग ऐप के माध्यम से की गई थी। इसमें नोएडा की दुकानों में 12 करोड़ रुपये कमाई छिपाने की जानकारी सामने आई थी।  

चुनावी रणभेरी: पांच राज्यों में मतदान की तारीखें तय, बंगाल में दो चरणों में चुनाव

नई दिल्ली  पश्चिम बंगाल, असम समेत पांच राज्यों/केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो गई है। पश्चिम बंगाल में दो चरण में मतदान होंगे, जबकि तमिलनाडु, असम, पुडुचेरी और केरल में सभी सीटों पर एक ही फेज में वोट डाले जाएंगे। सभी राज्यों के नतीजों का ऐलान चार मई को होगा। बंगाल में पहले चरण के तहत 23 अप्रैल को वोटिंग होगी, जबकि दूसरे फेज में 29 अप्रैल को मतदान होगा। असम, केरल और पुडुचेरी की सभी सीटों पर 9 अप्रैल को वोटिंग होगी, जबकि तमिलनाडु की सभी विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। पांच राज्यों में कुल 17.4 करोड़ वोटर्स मतदान करेंगे और कुल विधानसभा सीटें 824 हैं। इन राज्यों में चुनाव को सफलतापूर्वक संपन्न करवाने के लिए चुनाव आयोग 25 लाख कर्मचारियों की तैनाती करेगा। इस महीने की शुरुआत में चुनाव आयोग ने इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश का दौरा किया था और चुनावी तैयारियों का जायजा लिया था। आयोग ने इन राज्यों में राजनीतिक दलों, सुरक्षा एजेंसियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया है। किस राज्य में कब होगा मतदान पश्चिम बंगाल-दो फेज- 23 अप्रैल और 29 अप्रैल- चार मई रिजल्ट तमिलनाडु- एक फेज- 23 अप्रैल- चार मई रिजल्ट असम- एक फेज- 9 अप्रैल- चार मई रिजल्ट केरल- एक फेज- 9 अप्रैल- चार मई रिजल्ट पुडुचेरी- एक फेज- 9 अप्रैल- चार मई रिजल्ट संवाददाता सम्मेलन में चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधु और विवेक जोशी भी उपस्थित थे। ज्ञानेश कुमार ने कहा, “आयोग प्रत्येक मतदाता का मतदान केंद्र पर स्वागत करने के लिए तैयार है। हम खासकर पहली बार वोट डालने वाले और युवा मतदाताओं से अपील करते हैं कि वे अपने मताधिकार का उत्साह, आत्म सम्मान और विवेक के साथ प्रयोग कर लोकतंत्र में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।” 17.4 करोड़ वोटर्स डालेंगे वोट मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि पांच राज्यों में 17.4 करोड़ वोटर्स मतदान करेंगे। इन सभी राज्यों को मिलाकर कुल 824 विधानसभा सीटें हैं। 2.19 लाख पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। सीईसी के अनुसार, असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में प्रति पोलिंग बूथ पर मतदाताओं की औसत संख्या 750-900 है। उन्होंने मतदाताओं के बारे में ब्योरा देते हुए बताया कि अंतिम सूची के अनुसार असम में लगभग 2.25 करोड़, केरल में 2.7 करोड़, पुडुचेरी में 9.44 लाख, तमिलनाडु में 5.67 करोड़ मतदाता होंगे। और पश्चिम बंगाल में, 28 फरवरी को जारी अंतिम सूची में 6.44 करोड़ मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा, माननीय न्यायाधीशों के निर्णय के बाद जो भी पूरक सूची आएगी, उसे भी इसमें जोड़ दिया जाएगा।” किस राज्य में कब खत्म हो रहा कार्यकाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (CEC) ने कहा, ”असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के मतदाता। पिछले कुछ दिनों के दौरान, आयोग ने आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए चुनाव वाले सभी राज्यों का दौरा किया। इन दौरों के दौरान, आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से मुलाकात की और उनके सुझाव प्राप्त किए। आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों, एसपी, आईजी, डीआईजी और सभी प्रवर्तन एजेंसियों के नोडल अधिकारियों से भी मुलाकात की। आयोग ने संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, मुख्य सचिवों और डीजीपी के साथ भी बैठकें कीं।” असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई को, केरल विधानसभा का 23 मई को, तमिलनाडु विधानसभा का 10 मई को और पश्चिम बंगाल विधानसभा का सात मई को तथा पुडुचेरी विधानसभा का कार्यकाल 15 जून को समाप्त हो रहा है। इन तारीखों से पहले ही यहां नई विधानसभा का गठन होना है।  

बंगाल में डबल फेज वोटिंग, चार राज्यों में एक चरण; 4 मई को रिजल्ट घोषित

नई दिल्ली चुनाव आयोग आगामी विधानसभा चुनावों के लिए आज शाम 4 बजे दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा है। इस दौरान पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होगी। इन पांच राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं का कार्यकाल मई-जून 2026 में समाप्त हो रहा है। पश्चिम बंगाल की विधानसभा 7 मई, तमिलनाडु की 10 मई, असम की 20 मई, केरल की 23 मई और पुडुचेरी की 15 जून 2026 को खत्म होगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग लेंगे। चुनाव आयोग ने इन राज्यों में मतदाता सूची, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य तैयारियों का आकलन पूरा कर लिया है, जिसके बाद यह ऐलान किया जाएगा। यह चुनाव राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इनमें सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच कड़ी टक्कर होने की संभावना है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, तमिलनाडु में डीएमके, केरल में वाममोर्चा, असम में भाजपा और पुडुचेरी में एनआर कांग्रेस जैसी पार्टियां सत्ता बचाने या हासिल करने की कोशिश करेंगी। चुनाव आयोग ने सभी राज्यों में आचार संहिता लागू होने के साथ ही निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, ‘असम, केरल, पुदुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल—इन पांच राज्यों में कुल 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने वाले हैं, जहां 2.19 लाख मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं। 25 लाख ईवीएम मशीनों के माध्यम से 824 विधानसभा सीटों पर चुनाव कराया जा रहा है।’ मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, ‘असम, केरल, पुदुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के मतदाताओं के लिए सूचना है कि पिछले कुछ दिनों में निर्वाचन आयोग ने आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा के लिए सभी मतदान वाले राज्यों का दौरा किया। इन दौरों के दौरान आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से मुलाकात की और उनके सुझाव प्राप्त किए। आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों, एसपी, आईजी, डीआईजी तथा सभी प्रवर्तन एजेंसियों के नोडल अधिकारियों से भी भेंट की। साथ ही, संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, मुख्य सचिवों तथा डीजीपी के साथ भी बैठकें की गईं।’ चुनाव आयोग ने पहले असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी का दौरा पूरा किया, उसके बाद केरल (6-7 मार्च) और पश्चिम बंगाल (9-10 मार्च) का निरीक्षण किया। इन दौरों में राजनीतिक दलों, प्रशासनिक अधिकारियों और प्रवर्तन एजेंसियों से मुलाकात की गई ताकि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें। कितने चरणों में होगा चुनाव चुनावों की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो जाएगी, जिससे विकास कार्यों और सरकारी घोषणाओं पर रोक लग जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव एक से अधिक चरणों में हो सकते हैं, खासकर पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्य में जहां हिंसा की आशंका रहती है।

नौसेना की कमान में कोई LPG कमी नहीं, होर्मुज से धड़ाधड़ निकलेंगे भारत के जहाज

नई दिल्ली/तेहरान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने भी समुद्र में अपनी तैयारी तेज कर दी है. खबर है कि भारतीय नौसेना के कई युद्धपोत फारस की खाड़ी के पास तैनात हैं और भारत की ओर आने वाले व्यापारी जहाजों की मदद के लिए पूरी तरह तैयार रखे गए हैं. यानी हालात चाहे जितने तनावपूर्ण हों, भारत अपने जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर कोई ढील नहीं देना चाहता. न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी थी. यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब ईरान ने भारत के लिए राहत भरा संदेश दिया है. ईरानी अधिकारियों ने भारत की ओर आ रहे दो भारतीय झंडे वाले LPG जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है. ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण लगातार इन जहाजों पर खतरा बना है। शिवालिक जहाज कब पहुंचेगा भारत? इनमें से एक जहाज शिवालिक बताया जा रहा है, जो जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाली साइट के मुताबिक ओमान की खाड़ी में दिखा था और 21 मार्च तक अपने गंतव्य पर पहुंच सकता है. इससे साफ है कि भारी तनाव के बावजूद भारत की ओर से समुद्री हितों को लेकर अलग तरह की संवेदनशीलता दिखाई जा रही है. लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू कहीं ज्यादा गंभीर है. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में गिना जाता है, जहां से हर दिन दुनिया के तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक संकट बन सकती है। फारस की खाड़ी में भारत के कितने जहाज मौजूद? केंद्रीय पोत, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने शुक्रवार को फारस की खाड़ी की मौजूदा स्थिति और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर जानकारी दी थी. मंत्रालय के मुताबिक इस समय फारस की खाड़ी में 24 भारतीय झंडे वाले जहाज मौजूद हैं, जिन पर 668 भारतीय नाविक तैनात हैं. इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व में तीन जहाजों पर 76 भारतीय नाविक भी मौजूद हैं. यानी कुल मिलाकर बड़ी संख्या में भारतीय समुद्री कर्मी इस संवेदनशील क्षेत्र में सक्रिय हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से निकलेंगे भारतीय जहाज इस बीच भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने भी कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद भारत की ओर आने वाले जहाजों को होर्मुज से सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा. उन्होंने भारत और ईरान की पुरानी दोस्ती और साझा हितों का जिक्र करते हुए भरोसा दिलाया कि भारतीय जहाजों के लिए रास्ता खुला रहेगा. इस बयान ने भारत के लिए कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन क्षेत्र की हालत ऐसी है कि भरोसे के साथ-साथ चौकन्नापन भी जरूरी है. वहीं ईरानी विदेश मंत्री ने साफ कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मूज पूरी दुनिया के लिए खुला है, लेकिन अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों के लिए नहीं।

पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव, आयोग ने जारी किया पूरा शेड्यूल

 नई दिल्ली  पश्चिम बंगाल के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में वोट डाले जाएंगे। यहां पर 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। चुनाव आयोग ने प्रेस कांफ्रेंस में इसका ऐलान किया। यहां पर मतगणना 4 मई को होगी। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा दोनों चुनाव आयुक्त सुखवीर सिंह संधू और विवेक जोशी मौजूद रहे। बता दें कि आयोग इस माह इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश का दौरा कर चुनाव तैयारियों का जायजा ले चुका है। आयोग ने इन राज्यों में राजनीतिक दलों, सुरक्षा एजेंसियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया है। चुनाव पर्व, हम सबका गर्व चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहाकि पांच राज्यों के सभी राजनीतिक दलों से बातचीत की गई है। सभी पार्टियों से सुझाव लिया गया है। इस दौरान चुनावी तैयारियों की समीक्षा की गई है। पांच राज्यों में 17.4 करोड़ लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने कहाकि यह चुनाव निष्पक्ष तरीके से कराया जाएगा। इस दौरान उन्होंने कहाकि मैं युवाओं से अपील करना चाहूंगा कि वह चुनाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहाकि चुनाव पर्व हम सबका गर्व है। इन राज्यों के लिए भी घोषणा पश्चिम बंगाल के अलावा चुनाव आयोग ने असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। बता दें कि असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई को, केरल विधानसभा का 23 मई को, तमिलनाडु विधानसभा का 10 मई को और पश्चिम बंगाल विधानसभा का सात मई को तथा पुडुचेरी विधानसभा का कार्यकाल 15 जून को समाप्त हो रहा है। इन तारीखों से पहले वहां नई विधानसभा का गठन किया जाना है।  

बाइक के इंजन से भर गई खतरनाक गैस, रात में सोते समय पूरा परिवार हो गया खत्म

  चित्तूर आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के पुंगनूर कस्बे में ऐसा हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया. इस घटना में परिवार के चार लोगों की मौत हो गई है. यह हादसा किसी हमले या बीमारी से नहीं, बल्कि एक ऐसी गैस से हुआ, जो दिखाई नहीं देती, जिसकी कोई गंध नहीं होती और जिसका असर तब तक समझ में नहीं आता, जब तक बहुत देर न हो जाए। घटना पुंगनूर के त्यागराजू स्ट्रीट इलाके की है. यहां रहने वाले एक व्यक्ति ने हाल ही में अपनी बाइक का इंजन बोर करवाया था. यानी इंजन के कुछ हिस्सों की मरम्मत कर उसे दोबारा तैयार किया गया था. यह काम करवाने के बाद वह अपनी बाइक को घर ले आया। मैकेनिक ने उसे सलाह दी थी कि इंजन के नए पार्ट्स को ठीक से सेट करने के लिए बाइक को कुछ समय तक लगातार चलाना होगा. इसी सलाह को मानते हुए उसने बाइक को घर के अंदर खड़ा कर दिया और उसका इंजन चालू छोड़ दिया। रात का समय था और ठंड भी काफी थी. ठंड से बचने के लिए परिवार ने घर के सभी दरवाजे और खिड़कियां बंद कर दीं. शायद उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि घर के अंदर खड़ी बाइक का चलता हुआ इंजन धीरे-धीरे एक खतरनाक गैस छोड़ रहा है। बाइक से निकलने वाला धुआं और गैस कमरे में ही जमा होने लगी. घर पूरी तरह बंद होने के कारण उस धुएं को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला. कुछ ही देर में पूरा कमरा खतरनाक गैस से भर गया। जानकार इसे कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बता रहे हैं, ऐसी गैस जो रंगहीन, गंधहीन और स्वादहीन होती है. इंसान को इसका पता भी नहीं चलता और यह धीरे-धीरे शरीर में ऑक्सीजन की कमी पैदा कर देती है. अक्सर लोग इस गैस के संपर्क में आने के बाद बेहोश हो जाते हैं और फिर उनकी सांसें थम जाती हैं। यही इस परिवार के साथ भी हुआ. पति-पत्नी और उनके दो मासूम बच्चे रात को सोने के बाद फिर कभी नहीं जाग पाए. नींद के दौरान ही खतरनाक गैस ने चारों की जान ले ली। सुबह जब काफी देर तक घर का दरवाजा नहीं खुला और परिवार का कोई सदस्य बाहर नहीं आया तो पड़ोसियों को शक हुआ. आमतौर पर घर में सुबह-सुबह हलचल रहती थी, लेकिन उस दिन सन्नाटा था। पड़ोसियों ने कई बार दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला. धीरे-धीरे चिंता बढ़ने लगी और आखिरकार पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को देखते हुए घर का दरवाजा तोड़ना पड़ा. जैसे ही पुलिस और पड़ोसी अंदर पहुंचे, वहां का दृश्य देखकर सबके होश उड़ गए. पूरे परिवार के चारों सदस्य अचेत पड़े थे और घर के अंदर दमघोंटू माहौल था. तुरंत मेडिकल टीम को बुलाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. डॉक्टरों ने जांच के बाद चारों को मृत घोषित कर दिया। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि घर के अंदर बाइक का इंजन पूरी रात चालू रहा था और उसी से निकलने वाली गैस पूरे घर में फैल गई थी. बंद कमरा होने के कारण गैस बाहर नहीं निकल सकी और यही गैस पूरे परिवार के लिए जानलेवा बन गई. इस दर्दनाक घटना के बाद शोक और सन्नाटा फैल गया. बच्चों की हंसी और घर की चहल-पहल अब हमेशा के लिए खत्म हो गई। इस घटना से स्पष्ट है कि वाहन के इंजन या जनरेटर जैसी मशीनों को बंद जगहों के अंदर चलाना खतरनाक हो सकता है. फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. यह घटना लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है कि छोटी-सी लापरवाही कभी-कभी इतनी भारी पड़ सकती है, जिसकी भरपाई जिंदगी भर नहीं हो सकती।

सीजफायर पर ट्रंप का स्पष्ट इनकार, जंग रोकने की शर्तें नहीं मानी जाएंगी

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि फिलहाल ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए किसी समझौते पर बात नहीं बनी है. ट्रंप का कहना है कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन उसकी शर्तें अभी अमेरिका के लिए स्वीकार करने लायक नहीं हैं. ईरान की तरफ से उनके इस ताजा बयान पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। NBC News को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन मैं अभी इसके लिए तैयार नहीं हूं, क्योंकि उसकी शर्तें अभी अच्छी नहीं हैं.” उन्होंने यह भी कहा कि अगर भविष्य में कोई समझौता होता है तो उसकी शर्तें “बहुत मजबूत” होनी चाहिए. हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि हाल-फिलहाल ईरान की तरफ से क्या शर्तें रखी गई हैं और समझौते के लिए किस तरह उनसे संपर्क किया गया है। ट्रंप ने यह भी साफ किया कि किसी भी युद्धविराम या समझौते की एक बड़ी शर्त यह होगी कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह छोड़ दे. अमेरिका लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम का विरोध करता रहा है. यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजरायल की जंग तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर गई है. इन हमलों की वजह से मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है. इसका असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा है। जंग की वजह से तेल की कीमतों में भारी उछाल लगातार हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर असर पड़ा है और तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है. कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता का कारण बनती जा रही है. ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका उन देशों से मदद मांग रहा है जिनका तेल व्यापार होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है. उनका कहना है कि इन देशों को इस अहम समुद्री रास्ते को सुरक्षित रखने में योगदान देना चाहिए। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी संख्या में तेल के टैंकर गुजरते हैं. ट्रंप ने दावा किया कि कई देशों ने इस रास्ते की सुरक्षा में मदद करने का भरोसा दिया है, हालांकि उन्होंने इन देशों के नाम नहीं बताए। होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने के लिए दुनिया के अन्य देशों से ट्रंप की अपील राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर भी लिखा कि जो देश इस रास्ते से तेल हासिल करते हैं, उन्हें इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उठानी चाहिए. ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि कई देश अपने युद्धपोत भेज सकते हैं ताकि इस मार्ग को खुला और सुरक्षित रखा जा सके। जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिकी नौसेना जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा देगी, तो ट्रंप ने सीधे जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा कि इस बारे में अभी कुछ कहना उचित नहीं होगा, लेकिन ऐसा होना संभव है।

8वें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में 35% वृद्धि, जनवरी से एरियर का मिलेगा भुगतान

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन के साथ ही लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह आयोग फिलहाल लागू 7वें वेतन आयोग की जगह लेगा, जो साल 2016 से लागू है। नए वेतन आयोग का मकसद कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और भत्तों की पूरी संरचना की समीक्षा करके उसे मौजूदा आर्थिक हालात के हिसाब से अपडेट करना है। मांगे गए हैं सुझाव वित्त मंत्रालय ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए कर्मचारियों, पेंशनर्स, कर्मचारी संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव भी मांगे हैं। इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया है, जहां लोग अपनी राय और सुझाव भेज सकते हैं। यह सुविधा 30 अप्रैल 2026 तक खुली रहेगी। सरकार ने आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट देने के लिए करीब 18 महीने का समय दिया है। इसके बाद सरकार रिपोर्ट का अध्ययन करके अंतिम फैसला लेगी। कितनी बढ़ेगी सैलरी अगर पिछली वेतन आयोगों की बात करें तो हर बार वेतन में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है। 7वें वेतन आयोग के लागू होने पर केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दी गई थी, जबकि अधिकतम बेसिक सैलरी 2.5 लाख रुपये प्रति माह तय की गई थी। अब 8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों में उम्मीद है कि इस बार भी सैलरी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिटमेंट फैक्टर पर चर्चा सबसे बड़ी चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है। फिटमेंट फैक्टर वही गुणांक होता है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा करके नई सैलरी तय की जाती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर 2.4 से 3.0 के बीच हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो कर्मचारियों की सैलरी में लगभग 20% से 35% तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा। एरियर को लेकर भी कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर सामने आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही सरकार आयोग की सिफारिशों को मंजूरी देने में समय ले, लेकिन वेतन संशोधन का असर 1 जनवरी 2026 से माना जाएगा। यानी जब भी नया वेतन लागू होगा, कर्मचारियों को उस तारीख से लेकर लागू होने तक का एरियर भी मिल सकता है। एनालिस्ट ने क्या कहा फाइनेंस एनालिस्ट का कहना है कि अंतिम वेतन बढ़ोतरी कई आर्थिक कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें महंगाई की स्थिति, सरकार की वित्तीय क्षमता, टैक्स कलेक्शन और 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें शामिल हैं। ऐसे में सरकार कोशिश करेगी कि कर्मचारियों को अच्छा वेतन बढ़ोतरी पैकेज मिले, लेकिन साथ ही सरकारी खजाने पर ज्यादा बोझ भी न पड़े। इसलिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी अंतिम तस्वीर अगले 12–18 महीनों में ही साफ हो पाएगी।

नेपाल में मंदिर से लौट रही बस खाई में गिरी, 7 भारतीय श्रद्धालुओं की जान गई

कपिलवस्तु गोरखा जिले के प्रसिद्ध मनकामना मंदिर में दर्शन कर लौट रहे भारतीय श्रद्धालुओं की माइक्रो बस शनिवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य यात्री घायल हो गए।  प्रारंभिक जानकारी के अनुसार टूरिस्ट माइक्रो बस में 14 यात्री सवार होकर गोरखा में मनकामना मंदिर दर्शन के लिए गए थे। दर्शन के बाद लौटते समय कपिलवस्तु बॉर्डर से करीब डेढ़ सौ किलोमीटर दूर कांटार जिले के शहीद लखन गाऊ पालिका वार्ड नंबर-3 के पास बस अचानक अनियंत्रित हो गई और करीब 200 फुट गहरी खाई में जा गिरी। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और राहत टीम मौके पर पहुंच गई और बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस सुपरिटेंडेंट भारत बहादुर बीका ने बताया कि मृतकों में पांच पुरुष और तीन महिलाएं शामिल हैं। अभी उनके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं मिल पाई है। कहा कि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।  इससे पहले अगस्त 2024 में भी अनबुखैरेनी क्षेत्र में भारतीय श्रद्धालुओं से भरी एक बस हादसे का शिकार हो गई थी, जिसमें कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई थी. नेपाल में हाल के वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में वृद्धि देखी गई है. नेपाल ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक एक दशक पहले देश में 4,999 सड़क हादसे दर्ज किए गए थे, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 7,669 हो गई. विश्व बैंक की एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाला आर्थिक नुकसान 2007 के बाद से तीन गुना बढ़ चुका है और यह अब देश के सकल राष्ट्रीय उत्पाद का लगभग 1.5 प्रतिशत हो गया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सड़क हादसों का सबसे ज्यादा असर कमजोर वर्गों पर पड़ता है. नेपाल में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों में 70 प्रतिशत से अधिक लोग पैदल यात्री, साइकिल चालक और मोटरसाइकिल सवार जैसे संवेदनशील सड़क उपयोगकर्ता होते हैं.

तेहरान से भागकर रूस पहुंचे मोजतबा खामेनेई, पुतिन के विमान से किया गया उड़ान

मॉस्को अब तक ईरान-अमेरिका युद्ध को लेकर रूस की भूमिका को लेकर सिर्फ बातें की जा रही थीं लेकिन अब एक ऐसी खबर आ रही है, जो सच निकली तो ये युद्ध की दिशा बदलने वाला मोड़ होगा. डोनाल्ड ट्रंप से लेकर नेतन्याहू तक उस दिन से मोजतबा खामनेई के पीछे हाथ धोकर पड़े हुए हैं, जब से उन्हें अपने पिता की जगह ईरान का सुप्रीम लीडर बनाया गया है. उनके घायल होने की भी खबरें आईं और ईरान की ओर से इससे इनकार भी किया गया. हालांकि अब कुवैती अखबार अल जरीदा ने दावा किया है कि मोजतबा खामेनेई अपने देश में ही नहीं हैं।  अल जरीदा रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा को स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों से एक बेहद गुप्त अभियान में रूस ले जाया गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें रूसी सैन्य विमान से मॉस्को पहुंचाया गया, जहां उनका ऑपरेशन किया गया और फिलहाल उनका इलाज चल रहा है. बताया गया कि यह कदम उनकी खराब सेहत और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए उठाया गया. हालांकि, इन दावों की आधिकारिक तौर पर स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि हालिया हमलों में उन्हें चोटें आई थीं, लेकिन ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वह सुरक्षित और ठीक हैं और उनका इलाज जारी है।  कैसे तेहरान छोड़े पहुंच गए मॉस्को? रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गुरुवार को ही रूस के सैन्य विमान मोजतबा खामेनेई को लेकर मॉस्को आ गया. कहा ये भी जा रहा है कि उन्हें राष्ट्रपति भवन में मौजूद अस्पताल में भर्ती कराया गया. बमबारी और हवाई हमलों के बीच उनका इलाज असंभव होने के कारण उन्हें ईरान से निकालने का निर्णय लिया गया. रिपोर्ट में दावा किया गया कि पुतिन ने उन्हें अपने यहां शरण देने की पेशकश की, जिसके बाद वे वहां पहुंचे और जाते ही उनकी सफल सर्जरी हुई. सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि ईरानी सिक्योरिटी एजेंसीज को खामनेई की लोकेशन लीक होने का खतरा सबसे ज्यादा था, इसीलिए उन्हें मॉस्को में शिफ्ट किए जाने की सिफारिश पर सहमति जताई गई. दावा किया गया है कि खुद पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन के साथ बातचीत के दौरान ये प्रस्ताव रखा था।  डोनाल्ड ट्रंप ने कहा – ‘मैंने सुना मर गए मोजतबा’ इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की स्थिति को लेकर सवाल उठाए उन्होंने कहा कि उन्हें यह भी नहीं पता कि मोजतबा खामेनेई जिंदा हैं या नहीं. ट्रंप का यह बयान उस समय आया है जब ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के बीच उनके घायल होने की खबरें आईं. एनबीसी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा – ‘मुझे नहीं पता कि वह जिंदा भी हैं या नहीं. अभी तक किसी ने उन्हें दिखाया नहीं है. मैं सुन रहा हूं कि शायद वह जिंदा नहीं हैं. अगर वह जिंदा हैं तो उन्हें अपने देश के लिए समझदारी दिखाते हुए आत्मसमर्पण कर देना चाहिए.’ इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि खामेनेई किसी भी रूप में जिंदा हो सकते हैं लेकिन उनकी चोटों को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं। 

अहमदाबाद विमान दुर्घटना पर अमेरिकी एजेंसी का बड़ा बयान, विमान पहले से ही तकनीकी रूप से खराब था

अहमदाबाद अमेरिका के एक हवाई सुरक्षा संगठन का दावा है कि अहमदाबाद विमान दुर्घटना से जुड़े कई जरूरी दस्तावेज जांच अधिकारियों को दिए ही नहीं गए थे। ऐसे में इसकी जांच पर बड़े सवाल खड़े होते हैं। बता दें कि जून 2025 में हुई इस दुर्घटना में कम से कम 260 लोगों की जान चली गई थी। जांचकर्ताओं को भेजे गए ईमेल में एविएशन सेफ्टी फाउंडेशन के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर ईडी पियरसन ने कहा कि उसके हाथ कई ऐसे गुप्त दस्तावेज हाथ लगे हैं जिनसे पता लगता है कि विमान दुर्घटना के पीछे इलेक्ट्रिक फेल्योर कारण था। पियरसन ने कहा कि बोइंग 787 ड्रीमलाइनर रजिस्ट्रेशन वीटी-ANB के बारे में दस्तावेजों से पता चला है कि इसके इलेक्ट्रिक सिस्टम में पहले से ही खराबी चल रही थी। उन्होंने दावा किया कि इस विमान में लंबे समय से ही शॉर्ट सर्किट, धुआं निकलने और वायरिंग में दिक्कतें आ रही थीं। पियरसन ने कहा कि दुर्घटना का शिकार हुआ विमान कई बार इलेक्ट्रिक फाल्ट की वजह से उतारा जा चुका था। कई बार इसका पी100 पावर पैनल भी बदला गया था। विमान में बाएं इंजन से इलेक्ट्रिसिटी की सप्लाई होती थी। पियरसन ने कहा कि इस विमान को डिजाइन मोडिफिकेशन और सॉफ्टवेयर प्रोटेक्शन की जरूरत थी। उन्होंने कहा कि एएआईबी ने घटना से नौ महीने पहले से ही कोई सिफारिश नहीं की थी। उन्होंने कहा कि जांचकर्ताओं ने भी ऐसा नैरेटिव बना दिया जिससे कि सारी जिम्मेदारी पायलट्स पर आ गई।

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