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पश्चिम एशियाई हालातों पर चर्चा: केंद्र ने बुलाई शीर्ष स्तर की बैठक

नई दिल्ली पश्चिमी एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच नई दिल्ली में सोमवार को उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल और सीडीएस अनिल चौहान के साथ बैठक की। कुछ देर बाद प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बैठक में पहुंचे। इससे पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पश्चिमी एशिया के हालातों पर संसद के दोनों सदन (लोकसभा और राज्यसभा) में वक्तव्य दिया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया में बदलते हालात पर करीब से नजर रख रहे हैं। गल्फ देशों में भारी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं। ताजा हालात को देखते हुए भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत लाने का ऑपरेशन तेजी से जारी है। उन्होंने कहा, “सरकार इस समय भारतीय नागरिकों को सपोर्ट करने के लिए प्रतिबद्ध है। लगभग 67,000 नागरिकों की सुरक्षित वापसी हुई है। आगे भी पश्चिमी एशिया से लोगों को वापस लाने की पूरी कोशिश की जा रही है।” जयशंकर ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं, इसलिए यह लड़ाई भारत के लिए खास चिंता की बात है। उन्होंने बताया, “हालात की गंभीरता को देखते हुए 1 मार्च को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट सुरक्षा समिति (सीसीएस) की मीटिंग हुई। इसमें ईरान में हुए एयरस्ट्राइक और उसके बाद कई खाड़ी देशों में हुए हमलों के बारे में जानकारी दी गई। सीसीएस इस इलाके में भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंतित थी। इसने इलाके की सुरक्षा और आर्थिक और कमर्शियल गतिविधियों पर पड़ने वाले असर पर भी ध्यान दिया।” विदेश मंत्री ने कहा, “लड़ाई लगातार बढ़ रही है और इलाके में सुरक्षा की हालत काफी खराब हो गई है। हमने देखा है कि असल में, लड़ाई दूसरे देशों में भी फैल गई है और तबाही और मौतें बढ़ रही हैं। पूरे इलाके में सामान्य जीवन और आर्थिक गतिविधियों पर साफ असर पड़ा है और कुछ मामलों में तो रुक भी गई हैं। इसलिए हमने 3 मार्च को बातचीत और डिप्लोमेसी की अपनी अपील दोहराई और लड़ाई को जल्द खत्म करने की बात कही। मुझे यकीन है कि पूरा सदन भी जानमाल के नुकसान पर दुख जताने में मेरे साथ है।”

हवाई यात्रा पर असर: इंडिगो की फ्लाइट इथोपिया सीमा से लौट आई मिडिल ईस्ट जंग के कारण

नई दिल्ली दिल्ली से मैनचेस्टर जा (UK) जा रही इंडिगो की फ्लाइट यू टर्न लेकर वापस दिल्ली लौट रही है। इंडिगो की फ्लाइट 6E33 इथियोपिया की सीमा के पास पहुंचकर अचानक बीच हवा से वापस मुड़ गया। इससे यात्रियों में हड़कंप मच गया। फ्लाइट ट्रैकिंग सेवा फ्लाइटराडार24 के अनुसार, दिल्ली से उड़ान भरने के बाद इंडिगो का विमान इथियोपिया की सीमा के निकट हवाई क्षेत्र में पहुंचते ही अचानक यू-टर्न (वापस मुड़ गया) हो गया। इसके बाद विमान भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश लिया। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच दिल्ली से मैनचेस्टर जाने वाली 26 फरवरी के बाद यह इंडिगो की पहली फ्लाइट थी। दिल्ली से मैनचेस्टर जाने वाली इंडिगो की यह फ्लाइट करीब 7 घंटे उड़ान के बाद वापस लौट रही है। फ्लाइटराडार24 की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली-मैनचेस्टर मार्ग की ग्रेट-सर्कल दूरी लगभग 6,829 किलोमीटर है, और मार्ग और मौसम की स्थिति के आधार पर औसत उड़ान समय लगभग 11 घंटे है।   क्यों लौटी वापस? इंडिगो ने एक बयान में कहा कि आखिर वक्त में हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद एयरलाइन को यह निर्णय लेना पड़ा। इंडिगो के प्रवक्ता ने कहा, ” मिडिल ईस्ट और उसके आसपास की बदलती स्थिति के कारण, हमारी कुछ उड़ानों को लंबे मार्ग से जाना पड़ सकता है या उनका मार्ग परिवर्तन करना पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में चल रही स्थिति के कारण अंतिम समय में हवाई क्षेत्र पर लगाए गए प्रतिबंधों के चलते दिल्ली से मैनचेस्टर जाने वाली हमारी उड़ान 6E 033 को अपने मूल स्थान पर वापस लौटना पड़ा।” इंडिगो के प्रवक्ता ने कहा, “हम यात्रा फिर से शुरू करने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ काम कर रहे हैं। हमेशा की तरह, हमारे ग्राहकों, चालक दल और विमान की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है।” एयरस्पेस पर पाबंदियां इंडिगो का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बदलते हालात की वजह से, कुछ फ्लाइट्स लंबे रूट ले सकती हैं या उन्हें डायवर्जन का सामना करना पड़ सकता है। एयरस्पेस पर पाबंदियों के कारण इंडिगो-दिल्ली से मैनचेस्टर जा रही फ्लाइट 6E 033 को वापस अपने रूट पर लौटना पड़ा।  

सप्लाई रुकावटें बढ़ीं, बहरीन की प्रमुख तेल कंपनी पर बड़ा हमला

मनामा बहरीन की सरकारी तेल कंपनी बापको एनर्जीज ने अपनी गतिविधि पर ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित किया है। इसका मतलब है कि अगर किसी वजह से तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो कंपनी उसकी जिम्मेदार नहीं मानी जाएगी क्योंकि हालात उसके नियंत्रण से बाहर हैं। यह फैसला तब लिया गया जब देश की मुख्य तेल रिफाइनरी की तरफ से घना धुआं उठता हुआ देखा गया। इससे पहले सरकार ने कहा था कि सित्रा इलाके में ईरानी ड्रोन हमले के कारण कुछ लोग घायल हुए हैं और संपत्ति को थोड़ा नुकसान भी हुआ है। बापको एनर्जीज बहरीन की मुख्य तेल रिफाइनरी चलाने वाली कंपनी है, और यह देश के ऊर्जा क्षेत्र का एक अहम केंद्र है। पोस्ट में कहा, “कंपनी ने साफ किया कि स्थानीय बाजार की सभी जरूरतें मौजूदा प्लान के हिसाब से पूरी तरह से काम कर रही हैं, जिससे सप्लाई जारी है। बापको एनर्जीज अपने सभी हितधारकों के साथ अपने रिश्तों को महत्व देती है और उन्हें अपडेट करती रहेगी।” यूएस-इजरायल और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष को एक हफ्ते से ज्यादा बीत गए हैं और इनकी लड़ाई का असर पूरे मध्य पूर्व पर दिख रहा है। अमेरिका-इजरायल के एयर स्ट्राइक के बदले ईरान मध्य पूर्व में स्थापित उनके बेस या उनसे जुड़े केंद्रों पर कर रहा है। फोर्स मेज्योर (अप्रत्याशित घटना) के तहत कंपनी को अपने कॉन्ट्रैक्ट में दिए दायित्वों को अस्थायी रूप से निलंबित या रद्द करने का अधिकार होता है। ये एक कानूनी धारा है। ऐसी अनुमति तब दी जाती है जब कंपनी के नियंत्रण से परे ऐसी असाधारण घटनाएं हो जाती हैं और उसे अपने दायित्वों को पूरा करने से रोकती हैं। इसके तहत कंपनी को बाद में कोई हर्जाना नहीं भरना पड़ता। 7-8 मार्च की दरमियानी रात ईरान की राजधानी तेहरान स्थित तेल ठिकानों पर जबरदस्त हमले किए गए थे। इसमें आग लगी और पूरा तेहरान जल उठा। कई तस्वीरें और वीडियो सोशल प्लेटफॉर्म पर अपलोड हुए जिसमें शहर धूं-धूं कर जलता दिखा। इसके बाद ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बघाई ने कहा कि ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर साइट्स पर यूएस-इजरायल की हवाई बमबारी लड़ाई के एक “खतरनाक दौर” की निशानी है और यह एक वॉर क्राइम है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “ईंधन डिपो को निशाने पर ले, हमलावर हवा में खतरनाक और जहरीले तत्व छोड़ रहे हैं, आम लोगों को जहर दे रहे हैं, पर्यावरण को बर्बाद कर रहे हैं, और बड़े पैमाने पर इंसानों को खतरे में डाल रहे हैं।” बघाई ने आगे कहा कि ये पर्यावरण और इंसानी तबाही के नतीजे ईरान की सीमाओं तक ही सीमित नहीं रहेंगे। ये हमले इंसानियत के खिलाफ अपराध और नरसंहार हैं।

सूखे से जूझ रहा मलावी: भारत का 1,000 मीट्रिक टन चावल भेजकर मानवता का संदेश

नई दिल्ली अफ्रीकी देश मलावी में अल नीनो की वजह से भारी सूखा पड़ा है। ऐसे हालात में भारत ने मलावी को 1,000 मीट्रिक टन चावल की मानवीय मदद भेजी है। भारत ने इस कदम के साथ ही ग्लोबल साउथ में साझेदारों का समर्थन करने और साउथ-साउथ सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा, “खाद्य सुरक्षा के लिए भारत-मलावी साझेदारी। अल नीनो के असर से आए सुखाड़ के बाद खाद्य सुरक्षा के लिए मलावी की कोशिशों का समर्थन करने के लिए, भारत ने न्हावा शेवा पोर्ट से मलावी के लोगों के लिए 1,000 मीट्रिक टन चावल की मानवीय खेप भेजी है। यह ग्लोबल साउथ में पार्टनर्स को सपोर्ट करने और साउथ-साउथ सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने के लिए भारत की लगातार प्रतिबद्धता को दिखाता है।” बता दें, मलावी में 40 लाख से ज्यादा लोग (आबादी का 20 प्रतिशत) खाने की बहुत ज्यादा कमी का सामना कर रहे हैं, जिससे कुपोषण बढ़ रहा है और परिवार खाना छोड़ रहे हैं। अल नीनो की वजह से मलावी में अनियमित बारिश हो रही है और चिलवा झील जैसे बड़े पानी के स्रोत सूख गए हैं। वहीं, मलावी सरकार ने आपदा की स्थिति घोषित कर दी है। बता दें, पिछले साल अक्टूबर में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने जॉर्ज चापोंडा को मलावी के विदेश मंत्री के तौर पर उनकी नियुक्ति पर बधाई दी थी। जयशंकर ने कहा कि वह भारत और मलावी के बीच द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा, “जॉर्ज चापोंडा को मलावी रिपब्लिक के विदेश मंत्री के तौर पर उनकी नियुक्ति पर बधाई। भारत के साथ उनके करीबी संबंध को देखते हुए, हम अपने द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं।” मलावी के नए राष्ट्रपति पीटर मुथारिका की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) के पुराने सदस्य जॉर्ज चापोंडा को वहां का विदेश मंत्री नियुक्त किया गया था। भारत और मलावी के बीच अच्छे द्विपक्षीय संबंध हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक नियमित उच्चस्तरीय बातचीत से भारत और मलावी के द्विपक्षीय संबंध और मजबूत हुए हैं। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भी 2024 में मलावी के राजकीय दौरे पर गई थीं।राष्ट्रपति भवन की एक विज्ञप्ति में कहा गया कि अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने तत्कालीन मलावी समकक्ष लाजरस मैकार्थी चकवेरा से मुलाकात की और भारत-मलावी संबंधों को और गहरा करने के लिए कई मुद्दों पर चर्चा की थी। इसके साथ ही उन्होंने कला और संस्कृति, युवा मामलों, खेल और फार्मास्यूटिकल सहयोग पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए थे। इस दौरान राष्ट्रपति मुर्मु ने लिलोंग्वे में नेशनल वॉर मेमोरियल का दौरा किया और पहले और दूसरे विश्व युद्ध और दूसरे सैन्य अभियानों के दौरान अपनी जान देने वाले सैनिकों और नागरिकों को पुष्पांजलि अर्पित की थी।

अजरबैजान ने ईरान बॉर्डर पर यातायात बहाल किया, तनाव के बीच खुला मार्ग

बाकू अजरबैजान ने ईरान के साथ अपनी सीमा को फिर से माल ढुलाई (कार्गो) के लिए खोल दिया है। यह जानकारी रूसी समाचार एजेंसी टीएएसएस की एक रिपोर्ट में दी गई है। पिछले हफ्ते अजरबैजान ने यह सीमा बंद कर दी थी। उसका कहना था कि नखचिवन स्वायत्त गणराज्य में कथित ईरानी ड्रोन हमले की घटना हुई थी, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। नखिचेवन अजरबैजान का एक अलग क्षेत्र है, जो ईरान के रास्ते उसके सहयोगी रूस से जुड़ता है और यह सबसे छोटा जमीनी रास्ता माना जाता है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से फोन पर बात की थी। अजरबैजान के राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, पेजेशकियान ने भरोसा दिलाया कि नखिचेवन की घटना में ईरान का कोई हाथ नहीं है और तेहरान इस मामले की जांच कर रहा है। 5 मार्च को अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर हमले की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा, “एक ड्रोन ने नखचिवन स्वायत्त गणराज्य में हवाई अड्डे की टर्मिनल बिल्डिंग पर हमला किया, जबकि दूसरा ड्रोन शकराबाद गांव में एक स्कूल बिल्डिंग के पास गिरा।” इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया गया था। अजरबैजान ने ईरान से जल्द इस मामले को स्पष्ट करने और भविष्य में ऐसी घटनाएं न होने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की थी। बाकू ने यह भी कहा कि अजरबैजान इस मामले में जवाबी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। साथ ही ईरान के राजदूत को बुलाकर इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया था। अजरबैजान, ने मिडिल ईस्ट संघर्ष में न्यूट्रल रुख अपनाया है। लेकिन इसने हाल ही में इजरायल और ट्रंप प्रशासन के साथ करीबी संबंध बनाए, जबकि धीरे-धीरे काकेशस में पारंपरिक सहयोगी रहे मास्को से दूरी बनाई। देश में कोई अमेरिकी मिलिट्री बेस भी नहीं है। ईरान और अजरबैजान दोनों में ही बहुसंख्यक शिया मुस्लिम हैं, और ईरान लाखों अजेरी लोगों का घर है—अनुमान है कि यह संख्या लगभग डेढ़ से 2 करोड़ से भी अधिक है—जिनमें से कई अजरबैजान की सीमा से लगे उत्तर-पश्चिमी प्रांतों में रहते हैं।

मुंबई में LPG सप्लाई पर संकट: कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे, डीलर्स ने क्या कहा?

मुंबई ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले की वजह से मुंबई में एलपीजी कुकिंग गैस की कमी हो गई है। जंग के चलते मुंबई में एलपीजी सप्लाई में रुकावट आई है, जिस वजह से लोगों को कुकिंग गैस की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। शहर में रिफिल बुक करने के बाद इंतजार का समय अब दो से लेकर आठ दिनों तक हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डीलरों का कहना है कि होटल और रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह से रुक गई है। इस वजह से अब खाने-पीने की जगहों पर मुश्किलें आ सकती हैं। मुंबई में सोमवार सुबह से ही बुकिंग में कई गुना बढ़ोतरी होने से पैनिक बाइंग पहले से ही दिख रही थी। इसके साथ ही जिन परिवारों के पास दो सिलेंडर थे, वे तुरंत डीलर आउटलेट पर रीफिल बुकिंग कराने के लिए दौड़ पड़े। ‘25 दिन बाद ही बुक होगा नया रिफिल’ एक डीलर ने बताया कि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के एक नए नोटिफिकेशन में कहा गया है कि घरेलू ग्राहक एक सिलेंडर मिलने के 25 दिन बाद ही नया रिफिल बुक कर सकते हैं। डीलर ने बताया कि यह पिछले हफ्ते जैसा नहीं है, जब आप एक या दो दिन में अगला सिलेंडर बुक कर सकते थे। उन्होंने बताया कि कम से कम घरेलू 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर अभी भी उपलब्ध है। उन्होंने आगे बताया कि रविवार से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह से बंद कर दी गई है। इससे उन होटलों और रेस्टोरेंट के लिए संकट पैदा हो जाएगा जो ये बड़े सिलेंडर खरीदते हैं। लोगों को करना पड़ रहा सिलेंडर के लिए इंतजार     ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले के चलते मुंबई में एलपीजी कुकिंग गैस की कमी     रिफिल बुक करने के बाद अब लोगों को करना पड़ रहा दो से लेकर आठ दिन तक का इंतजार     होटल और रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाली कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह से रुकी डीलर्स ने बताया- बढ़ सकती है ब्लैक मार्केटिंग एलपीजी डीलर्स का कहना है कि होटल और दूसरी कमर्शियल जगहों को ब्लैक मार्केट से घरेलू सिलेंडर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यह गैर-कानूनी होने के साथ-साथ खतरनाक भी है। एक डीलर ने बताया कि मेरा सुझाव है कि अगर जरूरी हो तो सरकार होटल के मालिकों से ज्यादा कीमत ले, लेकिन कमर्शियल सिलेंडर देना जारी रखे। उन्होंने आगे बताया कि वैसे भी रविवार को कमर्शियल और घरेलू दोनों सिलेंडर की कीमतों में एक के बाद एक 115 रुपये और 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।

नागौर कोर्ट को मिली धमकी, पूरे परिसर में हाई अलर्ट जारी

नागौर राजस्थान के नागौर कोर्ट को बम धमकी मिलने के बाद सोमवार को पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों ने पूरे परिसर को खाली करवा कर जांच शुरू कर दी। कोर्ट परिसर में तकनीक और डॉग स्क्वाड की मदद से हर एरिया की जांच की जा रही है ताकि जान और संपत्ति पर खतरा कम से कम हो। पुलिस ने बताया कि धमकी भरा ईमेल कहां से आया, इसकी भी पुष्टि की जा रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, ईमेल सीधे कोर्ट में आया था और उसके बाद बाकी कोर्ट को अलर्ट कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक, धमकियां ज्यादातर ईमेल के जरिए आ रही हैं और अभी तक उनका सोर्स पता नहीं चल पाया है। कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला कि धमकी कहां से आ रही है और क्यों दी जा रही है। जब भी ऐसे थ्रेट्स आते हैं तो पूरी सुरक्षा को हाई अलर्ट पर रखा जाता है। ऐसे में हमारा फोकस यही रहता है कि अगर थ्रेट एक्टिव भी हो जाए तो नुकसान को मिनिमम किया जा सके। एक वकील ने बताया कि धमकियों का सिलसिला पिछले एक महीने से चल रहा है। यह दूसरी बार है जब नागौर कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। इस दौरान कोर्ट की कार्यवाही प्रभावित हुई है और जमानत और अन्य मामलों में देरी हुई है। सुरक्षा के लिए पुलिस फोर्स कोर्ट परिसर में हर गतिविधि पर नजर रख रही है। उनका कहना है कि असली चुनौती है इस धमकी के सोर्स का पता लगाना। सरकार और संबंधित एजेंसियों को चाहिए कि मेल का सोर्स जल्दी से जल्दी पता करे। पिछले कुछ समय में ऐसी धमकियां जोधपुर, जयपुर, बीकानेर में भी मिली हैं। ऐसी धमकियों से कोर्ट और प्रशासन पर बहुत असर पड़ रहा है। पुलिस और कोर्ट स्टाफ पूरी मेहनत कर रहे हैं कि सुरक्षा में कोई कमी न आए और प्रशासनिक काम प्रभावित न हो, लेकिन बिना सोर्स का पता चले, ये धमकियां लगातार चिंता का कारण बन रही हैं। वकील और कोर्ट स्टाफ का कहना है कि प्रशासन और एजेंसियों को मिलकर इस सोर्स की पहचान करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी धमकियों से बचा जा सके।

भाजपा की मांग: बंगाल चुनाव के लिए चुनाव आयोग से चरणबद्ध योजना

कोलकाता भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई ने राज्य में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की पूर्ण पीठ के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति दी। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव आयोग के सामने रखे। भाजपा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक चलने वाली चुनाव प्रक्रिया से हिंसा और प्रशासनिक दखल की आशंका बढ़ जाती है। पार्टी ने आयोग से मांग की कि छह सप्ताह तक 7–8 चरणों में मतदान कराने के बजाय कम समय में अधिकतम एक या दो चरणों में मतदान कराया जाए। साथ ही, पिछले तीन चुनावों 2019 व 2024 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग के आदेश से स्थानांतरित किए गए सभी अधिकारियों को फिर से ट्रांसफर करने की मांग की। भाजपा ने “संवेदनशील बूथ” के बारे में बताते हुए कहा कि जहां पिछले तीन चुनावों के दौरान मतदान के समय या उसके बाद हिंसा हुई हो, या जहां 85 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है और अशांति फैलाई जा सकती है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भाजपा ने पश्चिम बंगाल पुलिस पर निर्भरता कम करने की बात कही। पार्टी ने मांग की कि पर्याप्त संख्या में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की अग्रिम तैनाती की जाए और उनके लिए क्षेत्र से परिचित कराने हेतु हैंडबुक उपलब्ध कराई जाए। साथ ही सीएपीएफ के नोडल अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि बल की तैनाती व आवाजाही पूरी तरह पारदर्शी हो और जवान स्थानीय लोगों से किसी प्रकार की मेहमाननवाजी स्वीकार न करें। भाजपा ने यह भी सुझाव दिया कि सामान्य पर्यवेक्षकों और पुलिस पर्यवेक्षकों को काफी पहले से तैनात किया जाए ताकि वे स्वतंत्र आकलन कर सकें। वहीं, सीएपीएफ की ओर से एरिया डॉमिनेशन, रूट मार्च और कॉन्फिडेंस बिल्डिंग उपाय स्थानीय पुलिस के बजाय ऑब्जर्वरों की पहचान के आधार पर किए जाएं। भाजपा ने वोटरों की पहचान के लिए दो चरणों की व्यवस्था, हर पोलिंग स्टेशन पर वेबकैम और राज्य व केंद्र सरकार के अधिकारियों की 50-50 फीसदी भागीदारी की भी मांग की। पार्टी का कहना है कि इन उपायों से चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बन सकेगी।

सैन्य रणनीति और तालमेल की मिसाल: भारत–सेशेल्स का ‘लामितिये–2026’ अभ्यास शुरू

नई दिल्ली भारत की सशस्त्र सेनाओं का एक संयुक्त दल हिंद महासागर के द्वीपीय देश सेशेल्स पहुंच गया है। यहां यह भारतीय सैन्य दल सेशेल्स रक्षा बलों के साथ एक संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘लामितिये–2026’ में भाग ले रहा है। यह सैन्य अभ्यास 9 मार्च से 20 मार्च तक सेशेल्स की रक्षा अकादमी में आयोजित किया जा रहा है। अभ्यास के दौरान भारत और सेशेल्स के सैनिक संयुक्त रूप से प्रशिक्षण लेंगे, विभिन्न मिलिटरी मिशनों की योजनाएं बनाएंगे और अलग-अलग सामरिक गतिविधियों को अंजाम देंगे। इसमें अर्ध-शहरी वातावरण में संभावित खतरों को निष्क्रिय करने के लिए कई प्रकार की युद्धक कार्रवाई की जाएंगी। इसके साथ ही नई पीढ़ी के सैन्य उपकरणों और आधुनिक तकनीक के उपयोग का अभ्यास भी किया जाएगा। ‘लामितिये’ शब्द क्रियोल भाषा का है, जिसका अर्थ मित्रता होता है। यह अभ्यास हर दो वर्ष में आयोजित किया जाता है और वर्ष 2001 से नियमित रूप से सेशेल्स में आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष यह इस महत्वपूर्ण अभ्यास का ग्यारहवां संस्करण है। भारत और सेशेल्स के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर दोनों पक्षों का मुख्य फोकस है। साथ ही, दोनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के उद्देश्य से इस अभ्यास का आयोजन किया जाता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार का अभ्यास विशेष महत्व रखता है, ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें पहली बार भारत की तीनों सेनाएं शामिल हो रही हैं। यहां पहुंचे भारतीय सैन्य दल में थल सेना, नौसेना और वायु सेना के जवान शामिल हैं। ये सभी एक साथ इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय सैन्य दल में मुख्य रूप से असम रेजिमेंट के सैनिक शामिल हैं। इसके साथ ही, भारतीय नौसेना का युद्धपोत ‘आईएनएस त्रिकंड’ तथा भारतीय वायु सेना का भारी परिवहन विमान ‘सी–130’ भी इस अभ्यास में भाग ले रहा है। इस संयुक्त सैन्य अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय, सहयोग और संयुक्त कार्य क्षमता को मजबूत बनाना है। अभ्यास के दौरान विशेष रूप से अर्ध-शहरी क्षेत्रों में होने वाले अभियानों से जुड़े प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा शांति स्थापना से जुड़े अभियानों के दौरान दोनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने का भी प्रयास किया जाएगा। करीब बारह दिनों तक चलने वाले इस संयुक्त सैन्य अभ्यास में मैदानी प्रशिक्षण, सामरिक चर्चा, अध्ययन उदाहरण, व्याख्यान और प्रदर्शन जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। अभ्यास के अंतिम चरण में दो दिनों का अंतिम संयुक्त अभ्यास किया जाएगा, जिसमें अब तक सीखे गए सभी कौशलों और रणनीतियों का परीक्षण किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के संयुक्त सैन्य अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी विश्वास, समझ और सहयोग को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे सैनिकों को एक-दूसरे के अनुभव, कौशल और श्रेष्ठ सैन्य तरीकों को साझा करने का अवसर मिलता है। भारत और सेशेल्स के बीच लंबे समय से घनिष्ठ रक्षा संबंध रहे हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत बनाने के लिए दोनों देश समय-समय पर इस प्रकार के संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित करते रहे हैं। ‘लामितिये–2026’ अभ्यास भी दोनों देशों के सैन्य संबंधों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वैश्विक तेल संकट की आहट! 1973 जैसी स्थिति बनी तो भारत समेत कई देशों में मचेगा हाहाकार

नई दिल्ली यदि आंशिक रूप से भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई रुकी तो संकट कहीं अधिक गहरा होगा। भारत अपनी तेल की जरूरतों का 85 फीसदी हिस्सा आयात करता है। ऐसी स्थिति में उसके लिए भी संकट पैदा होगा और पूरे हालात पर वह लगातार नजर बनाए हुए है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही जंग के चलते दुनिया भर में कच्चे तेल को लेकर दबाव की स्थिति है। हालात ऐसे हैं कि चंद दिनों में ही कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। इसके चलते 1973 जैसे तेल संकट की स्थिति पैदा हो गई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की सप्लाई बाधित है और यदि हालात लंबे खिंचे तो फिर बड़ी मंदी की ओर दुनिया बढ़ सकती है। फिलहाल हर दिन 100 मिलियन बैरल की सप्लाई बाधित हो रही है। इस तरह पूरे संकट की वजह एक चेकपॉइंट है। अमेरिकी एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन का कहना है कि हर दिन 20 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ही होती है। यह दुनिया की कुल खपत का 20 फीसदी है। इसके अलावा अन्य इलाकों में भी तेल की सप्लाई बाधित हो रही है। होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली तेल की सप्लाई का आधा हिस्सा चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया खरीदते हैं। ऐसी स्थिति में यदि सप्लाई बाधित रहेगी तो सबसे पहले भारत, चीन और साउथ कोरिया जैसे देशों को झटका लगेगा। मार्केट की जानकारी रखने वाली संस्थाओं का कहना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट बंद रहा तो यह तेल सप्लाई की सबसे बड़ी बंदी होगी। ऐसी स्थिति में दुनिया को करारा झटका लगेगा और महामंदी के हालात पैदा हो सकते हैं। इस तरह करीब 20 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई खतरे में होगी। यही नहीं 1973 के मुकाबले भी यह संकट बड़ा है। तब दुनिया की तेल की जरूरतें कम थीं और आज कहीं ज्यादा हैं। आज के दौर में 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन की खपत होती है, तब 4.5 से 5 मिलियन बैरल तेल ही यहां सप्लाई होता था। इसके अलावा जब ईरानी क्रांति के दौरान बंद होने की नौबत आई थी, तब यहां से सप्लाई का आंकड़ा 6 मिलियन बैरल ही था। ऐसी स्थिति में साफ है कि अबकी बार संकट कहीं अधिक गहरा हो सकता है। इसके अलावा गैस का संकट भी पैदा हो सकता है। साफ कहें तो होर्मुज के ब्लॉक होने पर तेल, गैस समेत सभी जरूरी ईंधन की कमी होगी। हालांकि एक राहत की बात यह है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश दूसरे रास्तों से सप्लाई जारी रख सकते हैं। ऐसी स्थिति में तेल की सप्लाई तो किसी तरह पहुंचती रहेगी, लेकिन उसकी लागत और कीमत में इजाफा हो जाएगा। इसके अलावा जो ऑइल रिजर्व हैं, वे भी जल्दी ही खत्म हो सकते हैं। यदि आंशिक रूप से भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई रुकी तो संकट कहीं अधिक गहरा होगा। भारत अपनी तेल की जरूरतों का 85 फीसदी हिस्सा आयात करता है। ऐसी स्थिति में उसके लिए भी संकट पैदा होगा और पूरे हालात पर वह लगातार नजर बनाए हुए है।

HC की महिला जज ने बताया अनुभव, मेरे चैंबर में घुसने पर वो जमकर पिटा

भुवनेश्वर. ओडिशा हाईकोर्ट की जज सावित्री राठो ने रविवार को खुलकर अपनी कानूनी पेशे की यात्रा पर बात की। उन्होंने बताया कि शुरुआत में एक शख्स उनके पीछे पड़ गया था और वह जहां भी जातीं, वहां पहुंच जाता। उन्होंने बताया कि बाद में उस शख्स की जमकर कुटाई भी हुई थी। जस्टिस राठो ने बताया कि कैसे पारिवारिक परेशानी के कारण कॉलेजियम की सिफारिश के बाद भी उनके नाम पर विचार नहीं किया गया। पीछे पड़ गया था एक शख्स बार एंड बेंच के अनुसार, जस्टिस राठो ने बताया कि जब उन्होंने कानूनी पेशे की शुरुआत की, तब एक शख्स उनके पीछे पड़ गया था। उन्होंने कहा कि वह कोर्ट में जहां भी जातीं, वह उनके पीछे आ जाता। उन्होंने बताया कि बात तब बढ़ गई थी, जब वह उनके चैंबर में तक घुस आया था। जस्टिस राठो ने कहा, ‘जब मैंने प्रेक्टिस शुरू की, तो एक शख्स मेरा पीछा करने लगा था। मुझे लगा कि वह हमेशा कोर्ट में है। मेरे पुरुष सहकर्मियों ने मेरी मदद की। एक बार वह मेरे चैंबर में भी आ गया था, लेकिन मैंने ऐसे दिखाया कि मैंने उसे देखा ही नहीं। हालांकि, बाद में उसकी जमकर कुटाई हुई थी।’ जज बनने में हुई दिक्कत जस्टिस राठो ने कहा कि कॉलेजियम की तरफ से जज बनने के लिए दो बार उनके नाम की सिफारिश भी की गई थी। उन्होंने कहा, ‘मेरे नाम की दो बार सिफारिश की गई थी, लेकिन जो इंचार्ज थे, उन्होंने इसे नहीं माना। उन्हें मेरे परिवार से कुछ परेशानी थी।’ पुरुष सहकर्मियों की तारीफ की उन्होंने कहा कि ये आम धारणा है कि इस पेशे में हमेशा एक महिला दूसरी महिला की मदद करती है। उन्होंने कहा कि उनका अनुभव अलग रहा है। जज ने बताया कि करियर की शुरुआत में पुरुष सहकर्मियों ने उनकी काफी मदद की है। उन्होंने कहा कि कई वकील जज लेनदेन के कारण जज बनने में संकोच करते हैं, लेकिन वो उनके लिए कभी चिंता की बात नहीं रही। स्टिस राठो अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर सुप्रीम कोर्ट में आयोजित Half the Nation – Half the Bench थीम पर पहली नेशनल कॉन्फ्रेंस में बोल रहीं थीं। यह आयोजन सीनियर एडवोकेट शोभा गुप्ता और महालक्ष्मी पवानी की तरफ से आयोजित किया गया था।

मध्य-पूर्व तनाव के बीच भारत की तैयारी: 50 उड़ानों से लोगों को निकालने की योजना

नई दिल्ली केंद्र सरकार के अनुसार ईरान युद्ध से प्रभावित पश्चिम एशिया क्षेत्र के हवाई अड्डों से सोमवार को भारत की एयरलाइंस द्वारा 50 आने वाली उड़ानों की योजना बनाई गई है। यह ऑपरेशन की क्षमता और मौजूद परिस्थितियों के आधार पर संचालित होंगी। भारतीय एयरलाइंस एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, इंडिगो, स्पाइस जेट और अकासा एयर दुबई, अबू धाबी, रास अल खैमाह, फुजैरा, मस्कट और जेद्दा से उड़ानें संचालित करने के लिए तैयार हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि वह पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है, जो भारत व पश्चिम एशिया के बीच हवाई यात्रा को प्रभावित कर रही है। मंत्रालय के बयान के अनुसार, “उड़ान कंपनियां मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक संचालन समायोजन कर रही हैं, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और उड़ानों का व्यवस्थित संचालन हो।” 7 मार्च को उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र से भारत के लिए 51 इनबाउंड उड़ानें भारतीय एयरलाइंस द्वारा संचालित की गईं, जिनमें 8,175 यात्री भारत पहुंचे। 8 मार्च को भी भारतीय एयरलाइंस ने इस क्षेत्र के हवाई अड्डों से 49 इनबाउंड उड़ानों की योजना बनाई थी। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय एयरलाइंस अन्य हवाई अड्डों की स्थिति का लगातार मूल्यांकन कर रही हैं ताकि इन जगहों से और भी उड़ानें संचालित की जा सकें। मंत्रालय एयरलाइंस और अन्य हितधारकों के साथ लगातार समन्वय में है। इसके साथ ही टिकट की कीमतों पर भी नजर रखी जा रही है ताकि कीमतें उचित रहें और इस अवधि में अनावश्यक वृद्धि न हो। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपने संबंधित एयरलाइंस से उड़ानों के शेड्यूल के नवीनतम अपडेट लेते रहें। मंत्रालय स्थिति पर निगरानी जारी रखेगा और आवश्यक होने पर आगे अपडेट जारी करेगा। इसी बीच, एयर इंडिया ने घोषणा की कि वह 10 मार्च से 18 मार्च 2026 के बीच नौ मार्गों पर 78 अतिरिक्त उड़ानें संचालित करेगी, ताकि पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति में यात्रियों को सहायता मिल सके। कंपनी ने कहा कि वह न्यूयॉर्क (जेएफके), लंदन (हीथ्रो), फ्रैंकफर्ट, पेरिस, एम्स्टर्डम, ज्यूरिख, कोलंबो और माले के लिए अतिरिक्त क्षमता तैनात कर रही है, जिससे दोनों दिशाओं में 17,660 सीटें उपलब्ध कराई जाएंगी। इन उड़ानों में दिल्ली–न्यूयॉर्क, दिल्ली–लंदन, मुंबई–लंदन शामिल हैं, जिससे जब यात्रा विकल्प सीमित हों, तब यात्रियों के लिए आवश्यक क्षमता बढ़ाई जा सके। इसके अलावा, फ्रैंकफर्ट, पेरिस, एम्स्टर्डम, ज्यूरिख, माले और कोलंबो से दिल्ली के लिए अतिरिक्त उड़ानें भी संचालित होंगी।

महिला जज ने साझा किया हैरान करने वाला किस्सा: चैंबर में घुस आया था वो, फिर लोगों ने जमकर पीटा

ओडिशा ओडिशा हाईकोर्ट की जज सावित्री राठो ने रविवार को खुलकर अपनी कानूनी पेशे की यात्रा पर बात की। उन्होंने बताया कि शुरुआत में एक शख्स उनके पीछे पड़ गया था और वह जहां भी जातीं, वहां पहुंच जाता। उन्होंने बताया कि बाद में उस शख्स की जमकर कुटाई भी हुई थी। जस्टिस राठो ने बताया कि कैसे पारिवारिक परेशानी के कारण कॉलेजियम की सिफारिश के बाद भी उनके नाम पर विचार नहीं किया गया। पीछे पड़ गया था एक शख्स बार एंड बेंच के अनुसार, जस्टिस राठो ने बताया कि जब उन्होंने कानूनी पेशे की शुरुआत की, तब एक शख्स उनके पीछे पड़ गया था। उन्होंने कहा कि वह कोर्ट में जहां भी जातीं, वह उनके पीछे आ जाता। उन्होंने बताया कि बात तब बढ़ गई थी, जब वह उनके चैंबर में तक घुस आया था। जस्टिस राठो ने कहा, ‘जब मैंने प्रेक्टिस शुरू की, तो एक शख्स मेरा पीछा करने लगा था। मुझे लगा कि वह हमेशा कोर्ट में है। मेरे पुरुष सहकर्मियों ने मेरी मदद की। एक बार वह मेरे चैंबर में भी आ गया था, लेकिन मैंने ऐसे दिखाया कि मैंने उसे देखा ही नहीं। हालांकि, बाद में उसकी जमकर कुटाई हुई थी।’ जज बनने में हुई दिक्कत जस्टिस राठो ने कहा कि कॉलेजियम की तरफ से जज बनने के लिए दो बार उनके नाम की सिफारिश भी की गई थी। उन्होंने कहा, ‘मेरे नाम की दो बार सिफारिश की गई थी, लेकिन जो इंचार्ज थे, उन्होंने इसे नहीं माना। उन्हें मेरे परिवार से कुछ परेशानी थी।’ पुरुष सहकर्मियों की तारीफ की उन्होंने कहा कि ये आम धारणा है कि इस पेशे में हमेशा एक महिला दूसरी महिला की मदद करती है। उन्होंने कहा कि उनका अनुभव अलग रहा है। जज ने बताया कि करियर की शुरुआत में पुरुष सहकर्मियों ने उनकी काफी मदद की है। उन्होंने कहा कि कई वकील जज लेनदेन के कारण जज बनने में संकोच करते हैं, लेकिन वो उनके लिए कभी चिंता की बात नहीं रही। जस्टिस राठो अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर सुप्रीम कोर्ट में आयोजित Half the Nation – Half the Bench थीम पर पहली नेशनल कॉन्फ्रेंस में बोल रहीं थीं। यह आयोजन सीनियर एडवोकेट शोभा गुप्ता और महालक्ष्मी पवानी की तरफ से आयोजित किया गया था।  

लोकसभा में हंगामे के बीच किरेन रिजिजू का तंज, बोले— क्या एक आदमी पूरे देश पर राज करेगा?

नई दिल्ली लोकसभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के वक्तव्य के दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी सदस्यों के हंगामे पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष बेमतलब हंगामा करने में लगा है। सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है। किरेन रिजिजू ने लोकसभा में कहा, “विपक्ष पूरी तरह कंफ्यूजन में है। उसके लोगों को यह नहीं पता है कि उन्हें क्या करना है। पहले ये लोग लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए, जो अभी तक पेंडिंग है, लेकिन उसी बीच दूसरा अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे रहे हैं, जिसका कोई मतलब नहीं है।” उन्होंने कहा कि विपक्ष जिस मुद्दे को उठा रहा है, उस पर विदेश मंत्री ने सदन में ही विस्तार से जवाब दिया है। लेकिन विपक्ष को जवाब सुनना ही नहीं है। रिजिजू ने कहा, “मैंने कभी इतनी गैर-जिम्मेदार पार्टी नहीं देखी। आपका एक परिवार या एक आदमी क्या पूरे देश का महाराजा है? इस देश में संविधान है और सदन में नियम हैं, लेकिन विपक्ष के लोग इन नियमों को ही नहीं मानते हैं।” रिजिजू ने कहा, “मैं कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से कहना चाहता हूं कि आप अपनी अंतरआत्मा में झांककर देखें कि आपकी हरकत से देश का क्या भला हो रहा है और संसद की गरिमा को कितना गिराया है।” केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा, “आप जो भी अनैतिक प्रस्ताव लेकर आए हैं, उस पर चर्चा के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है। अगर विपक्ष में हिम्मत है तो अभी चर्चा शुरू करे।” इससे बावजूद विपक्ष का हंगामा नहीं रुका। कांग्रेस और अन्य विपक्षी सांसदों ने वेल में आकर नारेबाजी की और तख्तियां लहराईं। इस हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। इससे पहले, जब राज्यसभा में पश्चिमी एशिया के मुद्दे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर वक्तव्य दे रहे थे, कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने हंगामा करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।

पश्चिम बंगाल SIR विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट: मतदाता सूची से नाम हटाने को चुनौती

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों के खिलाफ एक नई याचिका पर मंगलवार को विचार करने को सहमत हुआ। यह याचिका उन लोगों ने दायर की है जिनके नाम चुनाव आयोग ने हटा दिए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने बताया कि यह याचिका पहले के मतदाताओं के नाम हटाने से संबंधित है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने अधिवक्ता की दलीलें सुनीं। अधिवक्ता ने कहा कि ये वे मतदाता हैं जिन्होंने पहले मतदान किया था, लेकिन अब उनके दस्तावेज नहीं लिए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि वे न्यायिक अधिकारियों के निर्णयों पर अपील में नहीं बैठ सकते। हालांकि, वरिष्ठ अधिवक्ता ने अपील को सुनवाई योग्य बताया, जिसके बाद पीठ ने मंगलवार को सुनवाई करने का फैसला किया। 24 फरवरी को शीर्ष अदालत ने एसआईआर अभ्यास के लिए पश्चिम बंगाल के सिविल जजों की तैनाती की अनुमति दी थी। इसके अतिरिक्त 250 जिला जज और झारखंड व ओडिशा के न्यायिक अधिकारी भी तैनात किए गए थे। इनका काम मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का सामना कर रहे 80 लाख दावों और आपत्तियों को निपटाना था। कोलकाता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने 22 फरवरी को एक पत्र में बताया था कि 250 जिला जजों को भी इन दावों को निपटाने में करीब 80 दिन लगेंगे। 2002 की मतदाता सूची से वंशानुक्रम को जोड़ने में तार्किक विसंगतियां पाई गई हैं। इनमें माता-पिता के नाम का बेमेल होना शामिल है। साथ ही, मतदाता और उसके माता-पिता की उम्र का अंतर 15 साल से कम या 50 साल से अधिक होना भी एक विसंगति है। मुख्य न्यायाधीश कांत ने कहा कि अगर प्रत्येक न्यायिक अधिकारी प्रतिदिन 250 दावों को निपटाता है, तो भी इस प्रक्रिया में लगभग 80 दिन लगेंगे। पश्चिम बंगाल एसआईआर की समय सीमा 28 फरवरी थी। नौ फरवरी को शीर्ष अदालत ने राज्यों को स्पष्ट किया था कि वह एसआईआर को पूरा करने में किसी को भी बाधा डालने की अनुमति नहीं देगा। अदालत ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया था। यह निर्देश चुनाव आयोग के नोटिस जलाने के आरोपों पर एक हलफनामा दाखिल करने के लिए था। कुछ व्यक्तियों पर चुनाव आयोग के नोटिस जलाने का आरोप लगा था।

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