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बांग्लादेश चुनाव पर दाग: हत्या-रेप के आरोपियों को मिला टिकट, आंकड़े चौंकाने वाले

ढाका बांग्लादेश के चुनाव में इस बार कई बड़े अपराधियों को भी टिकट दिया गया था। इसमें जमात के अजहरुल इस्लाम का भी नाम है। उसपर 1971 के युद्ध के दौरान 1200 लोगों के कत्ल और 13 रेप का आरोप था। उसे दोषी भी ठहराया गया था। बांग्लादेश में कराए गए 13वें आम चुनाव में तारिक रहमान की अगुआई में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बड़ी जीत दर्ज की है। इनमें से कई ऐसे उम्मीदवारों ने भी जीत दर्ज की है जिनपर कभी आतंकवाद का ठप्पा लगा हुआ था। ऐसे दो प्रत्याशी बीएनपी से और एक जमात-ए-इस्लामी से है। शेख हसीना की सरकार गिरने से पहले इनमें से एक को फांसी की सजा सुना दी गई थी। हालांकि जब शेख हसीना की सरकार गिरी और मोहम्मद यूनुस की अगुआई में अंतरिम सरकार गठित की गई तो उनकी सजा भी माफ करदी गई। बीएनपी नेता लुफ्तोज्जमान बाबर और अब्दुस सलाम पिंटू दोनों ही बीएनपी के नेता हैं जिनपर गंभीर आरोप थे। वहीं जमात-ए-इस्लामी नेता अजहरुल इस्लाम पर आतंकवाद और देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे। दिसंबर 2004 में ही बांग्लादेश के हाई कोर्ट ने तारिक रहमान, लुत्फोज्जमान बाबर औ अन्य आरोपियों को 2021 के ग्रैनेड कांड मामले में बरी कर दिया था। उनपर शेख हसीना पर ग्रैनेड अटैक करवाने का आरोप था। इस हमले में कम से कम 24 लोग मारे गए थे। वहीं शेख हसीना की जान किसी तरह बच गई थी। लुत्फोज्जमान बाबर ने इस बार 1.6 लाख वोटों से चुनाव जीता है। उनकी ही पार्टी के अब्दुल सलाम पिंटू पर भारत विरोधी संगठन से संपर्क रखने का आरोप था। बाबर के बरी होने के एक साल बाद पिंटू को भी कोर्ट से राहत मिल गई। पिंटू पर पाकिस्तानी आतंकी संगठन हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी से जुड़े रहने का भी आरोप था। इस संगठन पर यूपी के वाराणसी में 2006 में बम ब्लास्ट करवाने और 2007 में अजमेर शरीफ की दरगाह में और दिल्ली में 2011 का बम ब्लास्ट करवाने का आरोप है। पिंटू ने इस चुनाव में दो लाख मतों के अंतर से जीत हासिल की है। तीसरे नेता की बात करें तो उनका नाम एटीएम अजहरुल इस्लाम हैं जो कि जमात के सीनियर नेता हैं। 1998 में से ही वह राजनीति में किस्मत आजमा रहे थे हालांकि किस्मत का ताला इस बार खुला है। वह 2012 से जमात-ए-इस्लामी में महासचिव के पद पर हैं। क्या हैं अजहरुल इस्लाम पर आरोप अजहरुल इस्लाम पर 1971 के युद्ध में 1200 से ज्यादा लोगों की हत्या करने का आरोप है। उसपर 13 रेप केस भी हैं। 2014 में उसे फांसी की सजा सुनाई गई थी। हालांकि शांति के नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने उसके सारे अपराध माफ कर दिए और सजा रद्द हो गई। भारत के नजरिए से देखें तो बांग्लादेश की हालत बहुत सुधरने वाली नहीं है। वहीं तारिक रहमान के रवैये पर भी कड़ी नजर रखने की जरूरत है।  

फ्लाइट में बम होने का दावा, पायलट को मिली रहस्यमयी पर्ची से मची हलचल

कोलकाता कोलकाता एयरपोर्ट पर शनिवार को तब हड़कंप मच गया जब पायलट को एक धमकी वाली पर्ची मिली। विमान उड़ान भरने ही वाला था कि पायलट को विमान को बम से उड़ाने की धमकी वाली एक पर्ची मिली और फिर विमान को खाली करा लिया गया। कोलकाता एयरपोर्ट पर इंडिगो के विमान की उड़ान से ठीक पहले पायलट को एक ऐसी पर्ची मिली जिसके बाद हड़कंप मच गया। तुरंत विमान को खाली करवाया गया। जानकारी के मुताबिक इस पर्ची में विमान को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। विमान को खाली कराए जाने के बाद जांच-पड़ताल की जा रही है। एयरपोर्ट पर भी हाई अलर्ट घोषित किया गया है। इंडिगो का 6E3074 विमान सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हाई अड्डे से शिलॉन्ग के लिए उड़ान भरने वाला था। वहीं बम की धमकी मिलने के बाद इसे आईसोलेशन बे में ले जाया गया। बोर्डिंग के दौरान ही पायलट टॉइलेट में एक पर्ची मिली। इसमें लिखा था कि विमान के अंदर बम है। इसके बाद यात्रियों को तुरंत विमान से उतारा गया। इस बात की जानकारी मिलने के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। चेतावनी के बाद विमान को एक अलग जगह पर ले जाया गया और सभी यात्रियों को उतार दिया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने विमान की तलाशी शुरू की। हवाई अड्डा के अधिकारियों ने कहा कि यह पता लगाने के लिए जांच की जा रही है कि विमान में नोट किसने रखा। सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद उड़ान पूर्वाह्न करीब 11:30 बजे अपने गंतव्य के लिए रवाना हुई। गौरतलब है कि इंडिगो के विमान में बम की सूचना की यह पहली घटना नहीं है। जनवरी में ही 222 यात्रियों को ले जा रही इंडिगो की दिल्ली-बागडोगरा उड़ान को उड़ान भरने के बाद बम की धमकी मिली, जिसके बाद उसे लखनऊ में आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी थी, जहाँ तलाशी ली गई। पिछले साल, कोलकाता-मुंबई इंडिगो की उड़ान (6ई-5227) में भी बम की धमकी मिली थी। उस समय एक अनजान व्यक्ति ने हवाई अड्डा पर फ़ोन करके दावा किया था कि उसमें विस्फोटक है। सभी 195 यात्रियों को निकाला गया और विमान की तलाशी ली गई, हालाँकि कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। हवाई अड्डा अधिकारियों ने कहा कि इस घटना में भी सुरक्षा मानक का पालन किया गया, और अब तक कोई विस्फोटक नहीं मिला है। एक दिन पहले ही दिल्ली में पांच स्कूलों को बम की धमकी वाले ईमेल मिले थे। इन्हें बाद में अफवाह घोषित कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि धमकी भरे ईमेल में उकसाने वाली और आपत्तिजनक सामग्री थी जिसमें दावा किया गया था, “दिल्ली खालिस्तान बन जाएगा और स्कूलों में दोपहर 1.11 बजे बम विस्फोट होगा।” ईमेल में यह भी कहा गया था कि दोपहर 2.11 बजे संसद के अंदर विस्फोट होगा, जिसके बाद विभिन्न एजेंसियों के बीच सतर्कता बढ़ा दी गई और समन्वय स्थापित किया गया।  

चुनी हुई सरकार की कार्यप्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, हाईकोर्ट को दी चेतावनी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और सर्दियों के मौसम में दुर्गम क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स की समस्याओं पर विचार करते हुए चुनावों को 31 मई तक पूरा करने का निर्देश दिया है। चुनी हुई सरकार को काम नहीं करने दे रहा है हाईकोर्ट; सुप्रीम कोर्ट नाराज, चेतावनी भी दी हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकायों के चुनावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने राज्य सरकार को राहत देते हुए चुनावों के लिए समय सीमा को एक महीने के लिए बढ़ा दिया है। अब यह चुनाव 31 मई, 2026 तक आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही हाईकोर्ट की दखलअंदाजी पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी भी जताई। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार के फैसलों में बार-बार किए जा रहे हस्तक्षेप पर नाराजगी जताई। मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि हाईकोर्ट निर्वाचित सरकार को काम नहीं करने दे रहा है। सर्वोच्च अदालत ने चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह के हस्तक्षेप को गंभीरता से लिया जाएगा। क्या कहा कोर्ट ने? सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की कार्यशैली पर नाराजगी जाहिर की, लेकिन उसने हाईकोर्ट के उस फैसले का समर्थन किया जिसमें उसने सीमांकन प्रक्रिया का हवाला देकर चुनावों को टालने के हिमाचल सरकार के अनुरोध को खारिज कर दिया था। पीठ ने स्पष्ट करते हुए कहा, ”सीमांकन अभ्यास का लंबित होना चुनावों को स्थगित करने का आधार नहीं हो सकता।” इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि संवैधानिक रूप से शहरी स्थानीय निकायों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के लिए समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है। चुनाव का नया कार्यक्रम और समय सीमा हिमाचल प्रदेश में लगभग 3,500 ग्राम पंचायतें, 90 पंचायत समितियां, 11 जिला परिषद और 71 शहरी स्थानीय निकाय हैं, जिनमें से अधिकांश के चुनाव इस वर्ष होने हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की 30 अप्रैल की समय सीमा को बढ़ाकर 31 मई कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने नई समय सीमा निर्धारित की है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, सभी प्रारंभिक कार्य जैसे कि सीमांकन, आरक्षण आदि 31 मार्च तक पूरे किए जाने चाहिए। पहले यह समय सीमा 28 फरवरी थी। चुनाव इसके बाद आठ सप्ताह के भीतर, यानी निश्चित रूप से 31 मई तक आयोजित किए जाने चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समय विस्तार के लिए कोई और आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। सर्दियों की चुनौतियां याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट ने 28 फरवरी की समय सीमा निर्धारित करते समय इस बात का ध्यान रखा था कि देशव्यापी जनगणना का काम 1 मई से शुरू हो जाएगा। दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि ने कहा कि हाईकोर्ट को चुनाव की समय सीमा निर्धारित करते समय सर्दियों में दूरदराज के क्षेत्रों में पहुंचने की तार्किक कठिनाइयों को ध्यान में रखना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और सर्दियों के मौसम में दुर्गम क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स की समस्याओं पर विचार करते हुए चुनावों को 31 मई तक पूरा करने का निर्देश दिया है।

बांग्लादेश की सत्ता बदलते ही एक्टिव तारिक रहमान, PAK मुद्दे पर क्या है रणनीति?

बांग्लादेश बांग्लादेश में नई सरकार बनने वाली है। प्रधानमंत्री के रूप में बीएनपी के तारिक रहमान शपथ लेंगे। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान को लेकर तारिक रहमान का रुख क्या रहता है। गौरतलब है कि केयरटेकर प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस के सत्ता में रहने के दौरान दोनों देशों के बीच संबंध काफी बेहतर हुए थे। यूनुस पर आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तान को बहुत कुछ दिया। उन्होंने पाकिस्तान के लिए वीजा शर्तों में ढील दी। इसके अलावा बांग्लादेश के समुद्र में पाकिस्तान को एक्सेस दी। जबकि सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह आतंकवादियों के लिए रास्ता हो सकता है। गौरतलब है कि साल 2001 से 2007 के बीच बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सत्ता संभाल चुकी है। इस दौरान पाकिस्तान से उसके रिश्ते कभी नरम तो कभी गरम रहे। हालांकि भारत ने कई बार आरोप लगाया कि तत्कालीन बांग्लादेश सरकार ने पाकिस्तानी आतंकियों को अपनी जमीन का इस्तेमाल करने दिया। बदल सकती हैं चीजें हालांकि इस बार चीजें बदल सकती हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि इस बार जमात-ए-इस्लामी सरकार में बीएनपी की समर्थक नहीं है। एनडीटीवी के मुताबिक अधिकारियों ने बताया कि बीएनपी पाकिस्तान से पूरी तरह दूरी तो नहीं बनाएगा। लेकिन उम्मीद है कि तारिक रहमान भारत के साथ अच्छे संबंधों की अहमियत को दिमाग में जरूर रखेंगे। एक्सपर्ट्स का दावा है कि वह पाकिस्तान के साथ संबंध सामान्य रखेंगे, लेकिन इस बात की उम्मीद बहुत कम है कि वह आईएसआई को अपने देश पर हावी होने देंगे। जबकि यूनुस सरकार के दौरान ऐसा हो रहा था। ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में पाकिस्तान एक अन्य अधिकारी ने दावा पाकिस्तान कुछ दिन तक वेट एंड वॉच की स्थिति में रहेगा। वह बहुत दबाव नहीं बनाएगा और तारिक रहमान के सेटल होने का इंतजार करेगा। अधिकारी ने कहा कि वैसे भी फिलहाल तारिक रहमान की सबसे बड़ी चुनौती हिंसाग्रस्त बांग्लादेश को स्थिर करना होगा। दूसरी तरफ भारत को बांग्लादेश और पाकिस्तान के अच्छे संबंधों पर आपत्ति नहीं होगी। हालांकि भारत को चौंकन्ना रहना होगा कि कहीं तारिक रहमान, मोहम्मद यूनुस के कदमों पर न चल पड़ें। पिछले कुछ अरसे में पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के लोग बांग्लादेश पहुंचे। इस दौरान पाकिस्तान ने बांग्लादेश के साथ मजबूत सैन्य संबंध स्थापित करने की कोशिश की। वहीं, इंटेलीजेंस ब्यूरो के अधिकारियों के मुताबिक इनके जरिए पाकिस्तान बांग्लादेश में बेस बनाकर भारत को निशाना बनाने की फिराक में था।  

बांग्लादेश में बदलेगा सिस्टम? 70% लोगों ने भारत जैसी संसद के पक्ष में दिया समर्थन

ढाका   बांग्लादेश के इतिहास में 12 फरवरी, 2026 की तारीख एक नए युग की शुरुआत के रूप में दर्ज हो गई है। देश में संपन्न हुए आम चुनावों में तारिक रहमान के नेतृत्व वाले बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) गठबंधन ने 297 में से 210 सीटों पर धमाकेदार जीत दर्ज की है। इस जीत के साथ ही, लगभग 35 वर्षों में तारिक रहमान बांग्लादेश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार हैं। यह चुनाव केवल सत्ता हस्तांतरण के लिए नहीं था, बल्कि देश की शासन प्रणाली को पूरी तरह से बदलने के लिए एक राष्ट्रीय जनमत संग्रह भी था। चुनाव आयोग द्वारा शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनमत संग्रह में 60.26 प्रतिशत मतदान हुआ। इनमें से 70 प्रतिशत लोगों ने भारत की तरह संसदीय व्यवस्था के पक्ष में मतदान किया है। मतदाताओं ने व्यापक सुधार पैकेज, जिसे “जुलाई चार्टर 2025” के रूप में जाना जाता है, के कार्यान्वयन के पक्ष में भारी जनादेश दिया है। हां के पक्ष में 4,80,74,429 मत मिले हैं। यह स्पष्ट बहुमत है। वहीं, ना के पक्ष में 2,25,65,627 पड़े हैं। आयोग के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद ने मीडिया को बताया कि जनता ने देश के पुनर्गठन के पक्ष में अपनी मुहर लगा दी है। क्या है जुलाई चार्टर? यह चार्टर अगस्त 2024 में प्रधान मंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाने वाले छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद तैयार किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य सत्ता के केंद्रीकरण को रोकना और राज्य की प्रमुख संस्थाओं को पुनर्गठित करना है ताकि भविष्य में तानाशाही और फासीवादी शासन की पुनरावृत्ति न हो। इस चार्टर में 84 सुधार बिंदु शामिल हैं, जिन्हें लागू करने के लिए एक संवैधानिक सुधार परिषद (Constitutional Reform Council) 270 कार्य दिवसों के भीतर काम करेगी। जुलाई चार्टर के प्रमुख प्रस्ताव 1. प्रधानमंत्री कार्यकाल की सीमा: सत्ता के दीर्घकालिक केंद्रीकरण को रोकने के लिए प्रधानमंत्री के लिए सख्त कार्यकाल सीमा निर्धारित करना। 2. द्विसदनीय संसद: विधायी शक्ति को संतुलित करने के लिए 100 सीटों वाले एक नए उच्च सदन का निर्माण, जिसमें सीटें पार्टी के राष्ट्रीय वोट शेयर के आधार पर आवंटित की जाएंगी। आपको बता दें कि भारत में भी लोकसभा और राज्यसभा जैसी दो सदन वाली संसदीय व्यवस्था है। 3. कार्यकारी शक्तियों में कमी: प्रधानमंत्री कार्यालय की शक्तियों को कम करने के लिए राष्ट्रपति की भूमिका को मजबूत करना। 4. न्यायिक और संस्थागत स्वतंत्रता: न्यायपालिका और अन्य प्रमुख राज्य संस्थाओं को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखने के उपाय। 5. विपक्ष की भागीदारी: प्रमुख संसदीय समितियों का नेतृत्व करने और डिप्टी स्पीकर के रूप में सेवा करने के लिए विपक्षी नेताओं के प्रावधान शामिल करना। 6. जुलाई सेनानियों को सुरक्षा: विद्रोह में भाग लेने वाले प्रतिभागियों जिन्हें “जुलाई सेनानी” कहा जाता है, को सुरक्षा प्रदान करना। 7. महिलाओं का प्रतिनिधित्व: संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाना। यह तीसरी बार है जब बांग्लादेश में सुधारों का चार्टर पेश किया गया है। अब BNP की नई सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह इन सुधारों को कैसे लागू करती है और पिछले शासन की अस्थिरता के बाद देश को स्थिरता की ओर कैसे ले जाती है।  

असम रैली में पीएम मोदी का बयान, कांग्रेस पर बोला तीखा प्रहार

गुवाहाटी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम में कांग्रेस पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है. उन्होंने कांग्रेस की तुलना ‘जहर’ से करते हुए कहा कि सत्ता से 10 साल दूर रहने के कारण यह पार्टी और भी ज्यादा खतरनाक हो गई है. उन्होंने जनता को आगाह किया कि कांग्रेस असम की शांति और संस्कृति के लिए सबसे बड़ा खतरा है. वह शनिवार को गुवाहाटी में कई परियोजनाओं का शुभारंभ करने के बाद एक जनसभा में बोल रहे थे. पीएम मोदी ने कांग्रेस की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पार्टी असम को फिर से पुराने दौर में ले जाना चाहती है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस असम को फिर से अशांति और अराजकता में झोंकना चाहती है. पीएम मोदी ने सीधा आरोप लगाया कि कांग्रेस तुष्टिकरण के लिए असम को ‘घुसपैठियों के हवाले’ करना चाहती है. उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस का एजेंडा असम की असली पहचान और संस्कृति को मिटाना है. पीएम मोदी ने कांग्रेस की मानसिकता पर प्रहार करते हुए कहा, “10 वर्ष सत्ता से बाहर रहने की वजह से कांग्रेस और ज्यादा जहरीली हो गई है.” उनका इशारा था कि सत्ता पाने के लिए कांग्रेस किसी भी हद तक जा सकती है, चाहे इसके लिए राज्य की सुरक्षा से समझौता ही क्यों न करना पड़े. ‘कांग्रेस कभी भारत का भला नहीं कर सकती’ कांग्रेस पर हमला करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “जो कांग्रेस भारत को राष्ट्र मानने से भी इनकार करती हो… जो सवाल करते हैं कि मां भारती क्या होती है, जो मां भारती के नाम तक से परहेज करती हो, जो मां भारती के प्रति जरा सा सम्मान तक नहीं दिखाते, वो कांग्रेस कभी भारत का भला नहीं कर सकती. आज की कांग्रेस हर उस विचार… हर उस आतंकी को कंधे पर बिठाती है… जो देश का बुरा सोचता है. जो लोग देश के टुकड़े-टुकड़े करने का सपना देखते हैं… जो लोग, नॉर्थईस्ट को भारत से अलग करने के नारे लगाते हैं… वो कांग्रेस के लिए पूजनीय बन चुके हैं.” बजट में रखा गया नॉर्थ-ईस्ट का ध्यान पीएम मोदी ने कहा, कांग्रेस के समय असम को टैक्स के हिस्से के रूप में सिर्फ 10 हजार करोड़ रुपये मिलते थे. अब भाजपा सरकार में असम को कांग्रेस सरकार के मुकाबले 5 गुना ज्यादा रुपये मिल रहे हैं. अगर पिछले 11 वर्ष की बात करें तो असम को तमाम विकास परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से 5.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक मिले हैं. बजट में बहुत अधिक फोकस नॉर्थ-ईस्ट को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर है. इस बार असम को टैक्स की हिस्सेदारी के रूप में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये मिलने वाले हैं. कांग्रेस के समय असम को कैसे पाई-पाई के लिए तरसा कर रखा जाता था. वो आपको भलीभांति याद होगा.” अगले 5 साल गेम-चेंजर: पीएम मोदी विपक्ष पर हमले के बाद पीएम मोदी ने असम के विकास का रोडमैप भी रखा. उन्होंने कहा कि आने वाले 5 साल असम के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. इस दौरान कई बड़े प्रोजेक्ट्स पूरे होने वाले हैं, जो असम की ग्रोथ को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे. पीएम ने जनता से अपील की कि विकास की इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए यहां ‘डबल इंजन’ (केंद्र और राज्य में भाजपा) की सरकार फिर एक बार बहुत जरूरी है. ‘नॉर्थ ईस्ट हमारे लिए अष्ठलक्ष्मी की तरह’ पीएम मोदी ने आगे कहा, “अभी कुछ दिन पहले ही देश का बजट आया है. बजट के बाद असम का और नार्थईस्ट का मेरा ये पहला दौरा है. जिस नार्थईस्ट को कांग्रेस ने हमेशा नजरअंदाज किया, हम उस नार्थईस्ट की भक्तिभाव से सेवा कर रहे हैं. नॉर्थ ईस्ट हमारे लिए अष्ठलक्ष्मी है. इस वर्ष का बजट… अष्टलक्ष्मी के लिए BJP-NDA के vision को और मजबूती देने वाला है.” भाजपा कार्यकर्ताओं की तारीफ भाजपा के कार्यकर्ताओं की प्रशंसा करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आज भाजपा जहां पहुंची है, उसका श्रेय अगर किसी को मिलता है, तो वो सिर्फ और सिर्फ भाजपा के कार्यकर्ताओं को जाता है. हमारा विश्वास संगठन में है. हम राष्ट्रजीवन में परिवर्तन का आधार संगठन की शक्ति मानते हैं. इसलिए, इतनी बड़ी तादाद में जमीन की जड़ों से जुड़े हुए कार्यकर्ताओं के दर्शन करना बहुत बड़ा सौभाग्य है. हम लोग एक ही मंत्र को लेकर जिए हैं, हम लोग एक ही मंत्र को साकार करने के लिए अपने आप को खपा रहे हैं.”

‘शक्तिमान’ योजना 1.6 लाख करोड़ की, चार राज्यों में रेलवे नेटवर्क का विस्तार, मोदी सरकार का ऐतिहासिक कदम

नई दिल्ली  देश में तेज विकास और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. कैबिनेट बैठक में रेलवे, स्टार्टअप और डेवलपमेट से जुड़े कई बड़े फैसले लिए गए हैं. इन योजनाओं पर करीब 1.6 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. सरकार का कहना है कि इन फैसलों से देश के परिवहन नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और आर्थिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलेगी. यह फैसला देश के विकास मॉडल को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ये फैसले लिए गए. आज शनिवार को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी है. अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार का फोकस रेलवे नेटवर्क के विस्तार, स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने पर है. उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी. सरकार का मानना है कि इन फैसलों से देश की लॉजिस्टिक लागत कम होगी और औद्योगिक विकास को नया बल मिलेगा. कैबिनेट के 1.6 लाख करोड़ के फैसलों में क्या-क्या शामिल है? सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे विस्तार, अर्बन चैलेंज फंड और स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड 2.0 जैसी बड़ी योजनाओं को मंजूरी दी है. इन योजनाओं का उद्देश्य देश के विकास को गति देना है. रेलवे विस्तार से माल और यात्री परिवहन आसान होगा, जबकि स्टार्टअप फंड से युवाओं को नए व्यवसाय शुरू करने में मदद मिलेगी. रेलवे प्रोजेक्ट्स में कौन-कौन से प्रमुख काम होंगे? कैबिनेट ने तीन बड़े रेलवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. इसमें अंबाला से दिल्ली, कसारा से मनमाड और होसपेट से बल्लारी रेल मार्ग पर तीसरी और चौथी लाइन बनाई जाएगी. खास तौर पर 131 किलोमीटर लंबे कसारा-मनमाड सेक्शन पर करीब 10,154 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. यह कॉरिडोर मुंबई को उत्तर और पूर्व भारत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. स्टार्टअप इंडिया फंड 2.0 का क्या उद्देश्य है? सरकार का लक्ष्य स्टार्टअप सेक्टर को मजबूत करना और नवाचार को बढ़ावा देना है. इस फंड के जरिए नए व्यवसायों को वित्तीय सहायता मिलेगी. इससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और देश में टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा. इन फैसलों से आम लोगों को क्या फायदा होगा? रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से यात्रा आसान होगी और माल परिवहन तेज होगा. इससे व्यापार और उद्योग को फायदा मिलेगा. साथ ही स्टार्टअप योजनाओं से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी. विकास को नई दिशा देने वाला मास्टरप्लान     सरकार का कहना है कि इन फैसलों से देश के परिवहन और लॉजिस्टिक सेक्टर में बड़ा बदलाव आएगा. रेलवे लाइन विस्तार से ट्रेनों की क्षमता बढ़ेगी और ट्रैफिक जाम कम होगा. इससे उद्योग और व्यापार को भी सीधा फायदा मिलेगा. सरकार का लक्ष्य देश को तेज रफ्तार विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाना है.     इन परियोजनाओं से क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा. खासकर औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में निवेश बढ़ेगा. इससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार पर सरकार का फोकस     अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया है कि इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी. रेलवे विस्तार और शहरी विकास परियोजनाएं देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगी.     केंद्रीय कैबिनेट ब्रीफिंग में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह सिर्फ स्थान परिवर्तन नहीं है, बल्कि इतिहास से जुड़ा एक अहम बदलाव है. उन्होंने कहा कि साउथ ब्लॉक के कमरों ने देश के कई महत्वपूर्ण फैसले देखे हैं, जहां जवाहरलाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक के कार्यकाल के निशान मौजूद हैं. उन्होंने आगे बताया कि इन कमरों ने टाइपराइटर से डिजिटल युग तक का सफर देखा और यहीं कई अहम फैसले, जैसे सर्जिकल स्ट्राइक, लिए गए. करीब 95 साल बाद इन भवनों को खाली किया जा रहा है और यहां ‘युगे-युगीन भारत संग्रहालय’ बनाया जाएगा.     कैबिनेट ने तीन मल्टी-ट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है, जो 12 जिलों और दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र व कर्नाटक सहित चार राज्यों को कवर करेंगी. इन परियोजनाओं से भारतीय रेल के नेटवर्क में करीब 389 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी, जिससे रेल क्षमता बढ़ेगी, भीड़ कम होगी और माल एवं यात्री परिवहन तेज और सुगम होगा. इसके अलावा असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 33.7 किलोमीटर लंबी अंडरवॉटर टनल परियोजना को मंजूरी दी गई है. इसे ट्विन-ट्यूब टनल बोरिंग मशीन डिजाइन से बनाया जाएगा. इसमें दोनों ट्यूब में दो-दो लेन सड़क होगी और एक ट्यूब में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर की भी व्यवस्था की जाएगी, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और विकास को बढ़ावा मिलेगा.  

चार दिन से अमेरिका में नहीं मिला भारतीय छात्र, पुलिस ने उठाया गंभीर खतरे का सवाल

न्यूयॉर्क अमेरिका में भारतीय छात्रों की मौत और लापता होने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हाल ही में अमेरिका के बर्कले में 22 साल के भारतीय छात्र साकेत श्रीनिवासैया लापता हो गए हैं। अमेरिकी पुलिस डिपार्टमेंट का कहना है कि साकेत की तलाश की जा रही है। अमेरिकी पुलिस ने उनकी जान को खतरा भीबताया है। मंगलवार की शाम 5 बजे उन्हें आखिरी बार देखा गया था। पुलिस ने बताया है कि साकेत की लंबाई 6 फीट 1 इंच थीऔर उनका वजन 72 किलो के आसपास था। उनकी आंखें भूरी हैं और बाल छोटे हैं। पुलिस ने इसके अलावा ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। सैन फ्रांसिस्को में कॉन्सुलेट जनरल ऑफ इंडिया ने बयान जारी करते हुए घटना पर चिंता जताई है। बयान में कहा गया गया है कि भारतीय कॉन्सुलेट जनरल को साकेत श्रीनिवासैया के गायब होने की चंता है। वह कर्नाटक के रहने वाले हैं और यूसी बर्कली में पोस्टग्रैजुएट स्टूडेंट हैं। कॉन्सुलेट उनके परिवार और यहां स्थानीय प्रशासन के संपर्क में है। श्रीनिवासैया बर्कले की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया में केमिकल ऐंड बायोमॉलीकुलर इंजीनयिरिंग डिपार्टमेंट में पोस्ट ग्रैजुएशन कर रहे थे। उनकी लिंक्ड इन प्रोफाइल के मुताबिक एमएस पीडीपी 26 प्रोग्राम के तहत उन्होंने यहां ऐडमिशन लिया था। उन्होंने आईआईटी मद्रास से 2025 में अपना बीटेक पूरा किया था। इसके बाद विदेश में पढ़ने का मौका मिला और उन्हें यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया में ऐडमिशन मिल गया। बता दें कि विदेश में पढ़ने वाले भारतीय छात्र के साथ यह कोई पहली घटना नहीं है। अकसर अमेरका और अन्य देशोंमें भारतीय छात्रों के साथ नस्लीय भेदभाव के मामले सामने आते रहते हैं। हाल ही में लोकसभा में एआईएमआईएम असुद्द्दीन ओवैसी ने विदेश में पढ़ने वाले छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था। उनको जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा था कि सरकार विदेश में पढऩे वाले भारतीय छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देती है। विदेश में मौजूद भारत के मिशन पूरा ध्यान रखते हैं कि भारतीयों के साथ बुरा व्यवहार ना होने पाए। बता दें कि श्रीनिवासैया के साथ रहने वाले बनेतस सिंह ने उनके गायब होने के बाद मदद के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। इसमें लिखा गया था कि श्रीनिवासैया 9 फरवीर से लापता हैं। आखिरी बार बर्कले हिल्स के बाद उन्हें देखा गया था। अगर किसी को भी उनके बारे में पता चलता है तो जानकारी दे। उन्होंने कहा, यह मेरे लिए बहुत मुश्किल समय है अगर कोई भी मदद कर सकता है तो कृपया संपर्क करे।

लखनऊ से DU तक सुलगते छात्र विरोध: UGC के इक्विटी कार्ड ने पैदा किया हंगामा

नई दिल्ली यूजीसी के ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026’ ने उच्च शिक्षा जगत को 2 हिस्सों में बांट दिया है. इन दिनों दिल्ली, लखनऊ, पटना और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में जो चल रहा है, उससे पता चलता है कि यह विवाद अब जमीनी संघर्ष बन चुका है. एक तरफ नियमों को ‘ऐतिहासिक’ मानकर समर्थन में मार्च निकाले जा रहे हैं तो दूसरी तरफ इसे ‘पूर्वाग्रह से ग्रसित’ बताकर इसके खिलाफ अदालतों और सड़कों पर मोर्चा खोला गया है. प्रशासनिक स्तर पर यूजीसी का तर्क है कि कैंपस में बढ़ते मानसिक उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए अब तक के मौजूद तंत्र (जैसे एंटी-रैगिंग सेल) नाकाफी साबित हुए हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी में विरोध कर रहे संगठनों का मानना है कि इन नियमों की आड़ में एक खास वर्ग को लक्षित किया जा रहा है. लखनऊ विश्वविद्यालय में समर्थन में उतरे छात्रों पर हुई पुलिसिया सख्ती ने इस पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है. इस विवाद की हर परत को यहां विस्तार से समझिए. समर्थन का पक्ष: क्यों जरूरी हैं यूजीसी के नियम? नियमों का समर्थन कर रहे छात्र संगठनों (जैसे AISA, SFI, NSUI और अन्य दलित-पिछड़ा वर्ग संगठन) का तर्क है कि ‘संस्थागत हत्याओं’ (Institutional Murders) को रोकने के लिए सख्त कानूनों की जरूरत है.     बढ़ती शिकायतों का सच: यूजीसी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव और प्रताड़ना की शिकायतों में 118% की वृद्धि दर्ज की गई है.     स्वतंत्र जांच तंत्र: समर्थकों का कहना है कि वर्तमान में भेदभाव की जांच वही प्रशासन करता है जिस पर आरोप होता है. नए नियम बाहरी निगरानी की वकालत करते हैं, जो निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेगा.     लखनऊ का ‘समता संवर्धन मार्च’: लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों ने मांग की कि ‘उच्च शिक्षा सामाजिक न्याय आयोग’ का गठन हो, जिससे फेलोशिप में देरी और पक्षपातपूर्ण मूल्यांकन (Biased Evaluation) जैसे मुद्दों पर कानूनी जवाबदेही तय की जा सके. विरोध का पक्ष: क्या हैं आशंकाएं? सवर्ण समाज समन्वय समिति (Coordination Committee) और कई ‘सामान्य श्रेणी’ के छात्र संगठनों ने इसे ‘काला कानून’ करार दिया है. उनके विरोध के मुख्य बिंदु नीचे लिखे हैं:     सुरक्षात्मक प्रावधानों का अभाव: विरोधियों का आरोप है कि 2025 के शुरुआती ड्राफ्ट में ‘झूठी शिकायत’ करने वालों पर दंड का प्रावधान था, जिसे आखिरी नोटिफिकेशन से हटा दिया गया है. इससे निर्दोष छात्रों और शिक्षकों को फंसाए जाने का डर है.     प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन: नए नियमों में ‘सबूत का भार’ (Burden of Proof) आरोपी पर डाल दिया गया है. यानी, अगर किसी पर भेदभाव का आरोप लगता है तो उसे खुद को निर्दोष साबित करना होगा, जो भारतीय दंड संहिता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ माना जा रहा है.     भेदभाव की ‘अस्पष्ट’ परिभाषा: विरोधियों का तर्क है कि ‘अपमानजनक व्यवहार’ की परिभाषा इतनी व्यापक और अस्पष्ट रखी गई है कि सामान्य शैक्षणिक चर्चाओं को भी इसके दायरे में लाकर किसी का करियर बर्बाद किया जा सकता है. कैंपस की मौजूदा स्थिति: लखनऊ से दिल्ली यूनिवर्सिटी तक का हाल हालिया घटनाक्रमों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. लखनऊ विश्वविद्यालय में समर्थन में उतरे छात्रों को जिस तरह पुलिस ने घसीटकर हिरासत में लिया, उसने समर्थकों का आक्रोश बढ़ा दिया है. वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय में सवर्ण संगठनों ने यूजीसी मुख्यालय का घेराव कर चेतावनी दी है कि अगर इन नियमों को वापस नहीं लिया गया तो देशव्यापी आंदोलन होगा. कई प्रोफेसर ने भी अपनी पहचान गुप्त रखते हुए कहा है कि ये नियम कैंपस में ‘मुक्त संवाद’ (Free Speech) का माहौल खत्म कर सकते हैं. यूजीसी विवाद: इन 5 धाराओं ने कैंपस को ‘अखाड़ा’ बना दिया यूजीसी इक्विटी कार्ड विवाद समझने के लिए आपको वो 5 धाराएं भी पता होनी चाहिए, जिनकी वजह से विभिन्न यूनिवर्सिटी में माहौल गर्माया हुआ है.     धारा 4.2: ‘भेदभाव’ की विस्तृत और अस्पष्ट परिभाषा- इस धारा के तहत ‘जातिगत भेदभाव’ की परिभाषा को इतना व्यापक बना दिया गया है कि इसमें किसी छात्र की शैक्षणिक आलोचना, उपहास या उसे किसी समूह से बाहर रखना भी शामिल है. विवाद की वजह: विशेषज्ञों का मानना है कि ‘उपहास’ या ‘भेदभावपूर्ण व्यवहार’ व्यक्तिपरक (Subjective) हो सकते हैं. विरोधियों को डर है कि सामान्य शैक्षणिक चर्चाओं या चुटकुलों को भी इस धारा के तहत ‘अपराध’ की श्रेणी में लाकर प्रोफेसरों और छात्रों को लक्षित किया जा सकता है.     धारा 6.1 (ख):आरोपी पर ‘सबूत का भार’- आमतौर पर किसी भी कानून में शिकायतकर्ता को आरोप साबित करना होता है, लेकिन इस क्लॉज ने इसे पलट दिया है. विवाद की वजह: अगर किसी छात्र ने भेदभाव का आरोप लगाया है तो आरोपी छात्र या शिक्षक को साबित करना होगा कि उसने ऐसा नहीं किया. इसे ‘प्राकृतिक न्याय’ (Natural Justice) के खिलाफ माना जा रहा है.. क्योंकि यह आरोपी को तब तक दोषी मानता है, जब तक वह अपनी बेगुनाही साबित न कर दे.     धारा 8.4: झूठी शिकायत पर दंड के प्रावधान का हटना- प्रारंभिक ड्राफ्ट (2025) में प्रावधान था कि अगर कोई दुर्भावनापूर्ण तरीके से झूठी शिकायत दर्ज कराता है तो उस पर कार्रवाई होगी. लेकिन 2026 की अंतिम अधिसूचना में यह सुरक्षा कवच हटा दिया गया है. विवाद की वजह: विरोध कर रहे छात्र संगठनों का तर्क है कि इस क्लॉज के हटने से व्यक्तिगत रंजिश निकालने के लिए झूठी शिकायतों की बाढ़ आ सकती है और आरोपी के पास इससे बचने का कोई कानूनी रास्ता नहीं बचेगा.     धारा 10.2: स्वतंत्र ‘लोकपाल’ (Ombudsman) और बाहरी हस्तक्षेप- यह धारा हर विश्वविद्यालय क स्वतंत्र ‘समान अवसर सेल’ और एक बाहरी लोकपाल नियुक्त करने का निर्देश देती है, जो संस्थान के प्रशासन का हिस्सा नहीं होगा. विवाद की वजह: समर्थकों (जैसे लखनऊ के प्रदर्शनकारी छात्र) के लिए यह सबसे मजबूत बिंदु है क्योंकि यह निष्पक्षता सुनिश्चित करता है. लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इसे अपनी ‘स्वायत्तता’ (Autonomy) पर हमला मान रहा है क्योंकि अब आंतरिक मामलों का फैसला बाहरी व्यक्ति करेगा.     धारा 12.1: फंड में कटौती और ‘डी-रिकग्निशन’ की शक्ति- यह धारा यूजीसी को अधिकार देती है कि अगर कोई संस्थान इन नियमों को सख्ती से लागू नहीं करता … Read more

सीमा के करीब पीएम मोदी की मौजूदगी, चीन को संकेत; नई आपात लैंडिंग सुविधा शुरू

असम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक दिवसीय असम दौरे पर पहुंचे हैं। उन्होंने डिब्रूगढ़ में मोरन बाइपास पर आपातकाली लैंडिंग सुविधा का उद्घाटन किया। उनका विमान इसी हाइवे पर उतारा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम के दौरे पर पहुंचे हैं। उनका विमान चीन की सीमा के पास असम के डिब्रूगढ़ में बने पहले इमर्जेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) पर उतरा। इसके बाद मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनेवाल ने उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस एक दिवसीय दौरे के दौरान मोरन बाइपास के पास आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) सहित कई परियोजनाओं का उद्घाटन कर रहे हैं। चीन के लिए कड़ा संदेश यह पिछले तीन महीने में मोदी का तीसरा असम दौरा है। राज्य में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थित में मोरन बाईपास पर फाइटर और ट्रांसपोर्ट विमानों के साथ ही हेलिकॉप्टर ने हवाई प्रदर्शन किए। पूर्वोत्तर के किसी भी राज्य में यह इमरजेंसी लैंडिंग की पहली सुविधा है। इसपर सेना और नागरिक विमान दोनों को टेकऑफ और लैंडिंग की सुविधा मिलेगी। ऐसे में इसे चीन के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है। इस लैंडिंग सुविधा को इंडियन एयरफोर्स के साथ मिलकर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य इमरजेंसी रिस्पॉन्स के लिए मजबूत तैयारी करना है। प्राकृतिक आपदाओं या फिर पड़ोसी से तनाव की स्थिति में उसका उपयोग रणनीतिक तौर पर किया जा सकेगा। यह फैसिलिटी 40 टन तक के लड़ाकू विमानों और 74 टन तक के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की लैंडिंग और टेकऑफ के लिए बनाया गया है। अन्य पांच जगहों पर भी है ऐसी सुविधा डिब्रूगढ़ में इमर्जेंसी लैंडिग फैसिलिटी पूर्वोत्तर के राज्यों में अपनी तरह की पहली सुविधा है। हालांकि उत्तर प्रदेश के आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और पूर्वाांचल एक्सप्रेस-वे पर भी ऐसी सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा ओडिशा के बालासोर और आध्र प्रदेश के नेल्लोर मे फैसिलिटी है। हालांकि डिब्रूगढञ में बनाया गया ईएलएफ ज्यादा मायने रखता है क्योंकि यह चीन की सीमा के पास है। प्रधानमंत्री गुवाहाटी में 3,000 करोड़ रुपये की लागत से बने कुमार भास्कर वर्मा सेतु का उद्घाटन करेंगे जो गुवाहाटी को उत्तर गुवाहाटी से जोड़ेगा। छह लेन वाला यह पुल गुवाहाटी और उत्तर गुवाहाटी के बीच निर्बाध संपर्क उपलब्ध कराएगा, क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देगा, भूकंपीय सुरक्षा को बेहतर बनाएगा और राज्य राजधानी क्षेत्र में विकास को गति देगा। मोदी निकटवर्ती लचित घाट से भारतीय प्रबंधन संस्थान-गुवाहाटी (आईआईएम-गुवाहाटी) के अस्थायी परिसर और कृत्रिम मेधा (एआई) सक्षम ‘हाइपरस्केल डेटा’ केंद्र का भी डिजिटल माध्यम से उद्घाटन करेंगे। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा था कि आईआईएम-गुवाहाटी के उद्घाटन से असम शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाएगा और उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा जिनमें अगली पीढ़ी की जरूरतों को पूरा करने के लिए आईआईटी, आईआईएम, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और अन्य सभी अग्रणी संस्थान होंगे। प्रधानमंत्री इसी स्थल से गुवाहाटी के लिए 100 विद्युत वाहन (ईवी) को भी रवाना करेंगे।  

मुंबई में मेट्रो निर्माण हादसा, ऑटो पर पिलर गिरने से 4 लोगों की हालत गंभीर

मुंबई  देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से डराने वाली खबर सामने आई है. अंडर कंस्‍ट्रक्‍शन मेट्रो के पिलर का एक चलते ऑटोरिक्‍शा पर ग‍िर गया. इस हादसे में 4 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. जानकारी के अनुसार, मुंबई के मुलुंड (पश्चिम) इलाके में शनिवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया, जब निर्माणाधीन मेट्रो का एक हिस्सा अचानक ढह गया. यह घटना दोपहर करीब 12:20 बजे एलबीएस रोड पर जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी के पास हुई. BMC के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान सीमेंट से बना मेट्रो पिलर का हिस्सा टूटकर नीचे सड़क पर चल रही एक ऑटो रिक्शा पर गिर पड़ा. हादसे में ऑटो में सवार 3 से 4 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. एक निजी कार भी इस दुर्घटना की चपेट में आ गई. घटना के तुरंत बाद मुंबई फायर ब्रिगेड, पुलिस, मेट्रो स्टाफ, वार्ड कर्मचारी और 108 एंबुलेंस सेवा मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया. बता दें कि मुंबई में मेट्रो नेटवर्क लगातार विस्‍तार कर रहा है. मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) अब मेट्रो लाइन 2B के मंडाले और चेंबूर के बीच एक अतिरिक्त स्टेशन जोड़ने की योजना बना रही है. प्रस्तावित ‘चेंबूर नाका’ स्टेशन इस रूट पर कनेक्टिविटी और राइडरशिप बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है. यह इलाका शहर के व्यस्त जगहों में से एक है. मुंबई मेट्रो की 23.64 किलोमीटर लंबी लाइन 2B शहर की पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है. यह लाइन ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करने में भी मददगार मानी जा रही है. फिलहाल मंडाले (मानखुर्द) से डायमंड गार्डन (चेंबूर) तक के हिस्से को आंशिक रूप से चालू करने की अनुमति मिल चुकी है। इस सेक्शन में अभी पांच स्टेशन शामिल हैं. नया मेट्रो कॉरिडोर मुंबई मेट्रो की लाइन 2B रूट पर छठा स्टेशन जोड़ा जाएगा. हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि केवल पांच स्टेशनों के साथ इस कॉरिडोर को अलग से ऑपरेट करने पर यात्रियों की संख्या कम रह सकती है. वर्तमान में इस सेक्शन में मानखुर्द रेलवे स्टेशन पर ही एकमात्र इंटरचेंज उपलब्ध है, जिससे कनेक्टिविटी सीमित हो जाती है. ऐसे में डायमंड गार्डन के बाद ‘चेंबूर नाका’ स्टेशन को जोड़ने से यात्रियों की सुविधा और उपयोगिता दोनों में सुधार होने की उम्मीद है. पिछले साल कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) ने मंडाले से डायमंड गार्डन सेक्शन का निरीक्षण कर इसे प्रमाणित किया था. अब MMRDA इस खंड को और प्रभावी बनाने के लिए छठा स्टेशन जोड़ने की दिशा में काम कर रही है. 37 स्‍टेशन का प्रस्‍ताव मेट्रो लाइन 2B बड़े मेट्रो 2 कॉरिडोर का हिस्सा है, जिसमें कुल 37 स्टेशन प्रस्तावित हैं. निर्माण कार्य में देरी के चलते इस प्रोजेक्ट को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है. जानकारी के अनुसार, लाइन 2B का पहला चरण लगभग पूरा हो चुका है और पूरी लाइन 2026-27 तक चालू होने की उम्मीद है. पूरी तरह ऑपरेट होने के बाद यह लाइन डीएन नगर को मेट्रो लाइन 1 से, बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स को मेट्रो लाइन 3 से और डीएन नगर को मेट्रो लाइन 2 से जोड़ेगी. ऐसे में यह परियोजना मुंबई के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्‍टम तंत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है.

पुलवामा हमले के शहीदों को याद करते हुए पीएम मोदी बोले- उनका साहस हमें हमेशा प्रेरित करता है

पुलवामा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 2019 के पुलवामा हमले में शहीद सीआरपीएफ जवानों को श्रद्धांजलि दी और देश के प्रति उनकी बहादुरी, समर्पण और सेवा को याद किया. उन्होंने कहा कि उनका साहस हर भारतीय को प्रेरित करता है. पीएम मोदी ने कहा, ‘2019 में आज के दिन पुलवामा में अपनी जान देने वाले बहादुर हीरो को याद करते हुए. देश के लिए उनकी भक्ति, इरादा और सेवा हमेशा हमारी सोच में बसी रहेगी. हर भारतीय को उनकी हिम्मत से ताकत मिलती है.’ एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, ‘2019 में आज के दिन पुलवामा में अपनी जान देने वाले बहादुर हीरो को याद कर रहा हूँ. देश के लिए उनकी भक्ति, इरादा और सेवा हमेशा हमारी सोच में बसी रहेगी. हर भारतीय को उनके लगातार साहस से ताकत मिलती है.’ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीर जवानों को दी श्रद्धांजलि रक्षा मंत्री ने एक्स पर लिखा, ’14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले में अपनी जान गंवाने वाले बहादुर सीआरपीएफ के जवानों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि देते है. पूरा देश उनकी याद में और उनके परिवारों के साथ एकजुटता में खड़ा है. उनका बलिदान हमारे देश के लिए आतंकवाद से पैदा हुए गंभीर खतरों की याद दिलाता है. भारत हर तरह के आतंकवाद से लड़ने और उसे खत्म करने के अपने इरादे पर अडिग है. हमारी सरकार भारत को सुरक्षित बनाने के हमारे सामूहिक इरादे को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है.’ अमित शाह ने किया नमन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वीर जवानों के शौर्य का स्मरण किया. उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘पुलवामा आतंकी हमले में शहीद होने वाले हमारे वीर जवानों के शौर्य का स्मरण कर उन्हें नमन करता हूँ. आतंकवाद मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है और भारत इसके समूल नाश के लिए दृढ़ संकल्पित है. आतंकवाद का सामना करने वाले हमारे सुरक्षा बलों व सुरक्षा एजेंसियों के साहस, समर्पण और बलिदान का देश सदैव ऋणी रहेगा.’ इससे पहले दिन में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी बहादुर सीआरपीएफ जवानों को विनम्र श्रद्धांजलि दी. उपराष्ट्रपति ने उनके बलिदान को याद करते हुए कहा कि यह बलिदान भारतीय इतिहास में हमेशा के लिए अंकित है और सदियों तक देश को प्रेरणा देता रहेगा. उन्होंने लिखा, ‘मैं पुलवामा आतंकी हमले में अपनी जान देने वाले बहादुर जवानों को श्रद्धांजलि देता हूं. उनका सर्वोच्च बलिदान हमेशा देश की याद में रहेगा और हमें एक मजबूत और सुरक्षित भारत बनाने के लिए प्रेरित करता रहेगा.’ जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में 14 फरवरी, 2019 को श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाईवे पर सीआरपीएफ के काफिले को निशाना बनाकर किए गए सबसे खतरनाक आतंकी हमलों में से एक हुआ था, जिसमें 40 सीआरपीएफ के जवान मारे गए थे. काफिले में 78 बसें थी जिनमें करीब 2500 लोग जम्मू से श्रीनगर जा रहे थे. एक लोकल न्यूज एजेंसी के मुताबिक पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि यह एक सुसाइड बॉम्बर ने किया था. हालांकि, भारत ने पाकिस्तान में आतंकी कैंपों पर एयरस्ट्राइक समेत कई काउंटर-टेरर ऑपरेशन शुरू किए, जिससे तनाव काफी बढ़ गया. पुलवामा आतंकी हमले से न सिर्फ भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा, बल्कि जम्मू-कश्मीर में बॉर्डर पार आतंकवाद और सुरक्षा को लेकर दुनिया भर में चर्चा भी हुई. हमले में अपनी जान देने वाले 40 बहादुर सीआरपीएफ जवानों को याद करने के लिए इसे ‘ब्लैक डे’ के तौर पर मनाया जाता है.

गुनाह स्वीकारने के बाद निखिल गुप्ता को कितने साल की सजा? जानें US की मांग

न्यूयॉर्क खालिस्तानी आतंकवादी और अमेरिकी नागरिक गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश वाले मामले में एक बड़ा नाटकीय मोड़ आया है। इस मामले के मुख्य आरोपी 54 साल के भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने शुक्रवार को अमेरिकी अदालत के समक्ष अपना गुनाह कबूल कर लिया है। यह कदम उनके पिछले रुख से बिल्कुल उलट है। जून 2024 में चेक गणराज्य से प्रत्यर्पण के बाद से वे लगातार खुद को निर्दोष बता रहे थे। निखिल गुप्ता ने अमेरिकी मजिस्ट्रेट जज सारा नेटबर्न के समक्ष तीन गंभीर आरोपों में अपना दोष स्वीकार किया है। उनके खिलाफ सुपारी देकर हत्या कराने, हत्या की साजिश रचने और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश रचने का आरोप है। उन्होंने इन तीनों में दोष कबूल कर लिया है। कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि अभियोजकों द्वारा जुटाए गए पुख्ता सबूतों के कारण निखिल गुप्ता के पास अपना गुनाह कबूल करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। इस मामले की सुनवाई 30 मार्च से शुरू होने वाली थी, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक संचार और वायरटैप की गई बातचीत पेश की जानी थी। इन रिकॉर्डिंग्स में कथित तौर पर निखिल गुप्ता को एक हिटमैन के साथ 1,00,000 डॉलर की सुपारी पर बातचीत करते हुए सुना गया था। अपना गुनाह कबूल करने के बाद अब निखिल गुप्ता एक हाई-प्रोफाइल ट्रायल से बच जाएंगे, जिसमें उन्हें अधिकतम 40 साल की सजा हो सकती थी। हालांकि सजा का अंतिम निर्णय न्यायाधीश के विवेक पर निर्भर करेगा, लेकिन अमेरिकी सरकार ने गुप्ता के लिए 21 से 24 साल की कैद की सिफारिश की है। सीनियर जिला जज विक्टर मरेरो आने वाले महीनों में सजा सुनाने के लिए औपचारिक सुनवाई की तारीख तय करेंगे। इस पूरी साजिश के केंद्र में भारत की खुफिया एजेंसी रॉ (RAW) के पूर्व अधिकारी विकास यादव का नाम भी उछला है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि यादव ने ही पन्नू की हत्या के समन्वय के लिए गुप्ता को भर्ती किया था। साल 2024 के अंत में यादव के खिलाफ संघीय गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, लेकिन वे फिलहाल भारत में हैं। भारत सरकार ने पुष्टि की है कि विकास यादव अब सरकारी सेवा में नहीं हैं, लेकिन उनके प्रत्यर्पण को लेकर फिलहाल कोई सहमति नहीं जताई गई है। भारत की आंतरिक जांच समिति ने स्वीकार किया है कि उक्त अधिकारी के आपराधिक लिंक थे, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। कौन है गुरपतवंत सिंह पन्नू? गुरपतवंत सिंह पन्नू ‘सिख फॉर जस्टिस’ (SFJ) नामक संगठन का जनरल काउंसल है, जो अमेरिका में सक्रिय है। हाल के महीनों में पन्नू ने भारत विरोधी गतिविधियों को तेज किया है, जिसमें अमेरिकी शहरों में खालिस्तान जनमत संग्रह आयोजित करना, एयर इंडिया के बहिष्कार के वीडियो जारी करना और भारत विरोधी हरकतों के लिए इनामों की घोषणा करना शामिल है। इन गतिविधियों के कारण भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पन्नू के खिलाफ आतंकवाद से संबंधित नए मामले दर्ज किए हैं।

डिब्रूगढ़ में बना नया इतिहास: हाईवे पर उतरा प्रधानमंत्री का विमान, क्या है आपात लैंडिंग सिस्टम?

डिब्रूगढ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम दौरे के तहत डिब्रूगढ़ पहुंच गए हैं. उनके दौरे की शुरुआत बेहद रणनीतिक रही, जब उनका विमान डिब्रूगढ़ के मोरान बाईपास पर नवनिर्मित इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा (ELF) पर उतरा. यह पहली बार है कि पीएम का विमान नेशनल हाइवे पर उतरा. पूर्वोत्तर भारत में अपनी तरह की यह पहली सुविधा है, जो युद्ध और प्राकृतिक आपदा जैसी स्थितियों में भारतीय वायुसेना के लिए गेम-चेंजर साबित होगी. प्रधानमंत्री ब्रह्मपुत्र नदी पर बने कुमार भास्कर वर्मा सेतु का उद्घाटन करेंगे. ₹3,030 करोड़ की लागत से बना यह 6-लेन पुल पूर्वोत्तर का पहला ‘एक्स्ट्राडोज्ड’ पुल है. इस आधुनिक पुल की मदद से गुवाहाटी और उत्तर गुवाहाटी के बीच का सफर जो घंटों में तय होता था, अब मात्र 7 मिनट में सिमट जाएगा. इसमें भूकंपरोधी तकनीक और रियल-टाइम हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है. प्रधानमंत्री आईआईएम गुवाहाटी (IIM Guwahati) का उद्घाटन करेंगे, जो क्षेत्र में उच्च शिक्षा के मानक बदलेगा. साथ ही, कामरूप जिले में राष्ट्रीय डेटा केंद्र (National Data Center) का शुभारंभ होगा. 8.5 मेगावाट क्षमता वाला यह केंद्र पूर्वोत्तर की सरकारी सेवाओं को डिजिटल रूप से सुरक्षित और सशक्त बनाएगा. शहरी परिवहन को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री 225 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाएंगे. इनमें से 100 बसें अकेले गुवाहाटी के लिए होंगी, जबकि बाकी नागपुर, भावनगर और चंडीगढ़ के लिए रवाना की जाएंगी. क्या है इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (14 फरवरी) असम के डिब्रूगढ़ में देश की पहली हाईवे इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) पर भारतीय वायुसेना के C-130J Super Hercules से लैंड किया. यह सुविधा ऊपरी असम में एक हाईवे स्ट्रिप पर बनाई गई है, जो युद्ध या आपातकाल में लड़ाकू विमानों, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टरों के लिए वैकल्पिक लैंडिंग की जगह देगी. यह पूर्वोत्तर भारत की रक्षा और रणनीतिक तैयारी में एक महत्वपूर्ण कदम है.  ELF क्या है और डिब्रूगढ़ में क्यों खास? इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी एक ऐसा हाईवे स्ट्रिप होता है जहां सामान्य समय में गाड़ियां चलती हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे रनवे में बदलकर विमान उतारे और उड़ाए जा सकते हैं. डिब्रूगढ़ ELF असम के ऊपरी हिस्से में है, जो भारत-चीन सीमा के बहुत करीब है.     भारतीय वायुसेना (IAF) को अगर मुख्य एयरबेस पर हमला हो या क्षतिग्रस्त हो जाएं, तो वैकल्पिक जगह देगी.     विमानों को तैनात करने की सुविधा देगी, जिससे दुश्मन का निशाना लगाना मुश्किल हो जाएगा.     पूर्वी सेक्टर में हवाई ऑपरेशंस की गहराई और जीवित रहने की क्षमता बढ़ाएगी. पहले ही सफल रिहर्सल हो चुकी है इस ELF की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. हाल ही में पूर्ण पैमाने ‘रिहर्सल’ की गई…     राफेल और सुखोई-30 MKI जैसे लड़ाकू विमान.     C-130J सुपर हरक्यूलिस ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट.     डोर्नियर सर्विलांस विमान.     एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH). ये सभी विमान हाईवे स्ट्रिप पर सफलतापूर्वक उतरे और उड़े. ‘टच एंड गो’ मैन्यूवर्स और कॉम्बैट फॉर्मेशन लैंडिंग भी की गई. हेलीकॉप्टरों से घायलों को निकालने (कैजुअल्टी इवैक्यूएशन) का अभ्यास भी हुआ. यह सुविधा युद्ध के साथ-साथ मानवीय सहायता मिशनों में भी काम आएगी. प्रधानमंत्री मोदी खुद IAF के C-130J विमान से इस स्ट्रिप पर उतरे. यह 2021 में उत्तर प्रदेश में बने इसी तरह के स्ट्रिप की तरह होगा, जहां भी उन्होंने विमान से लैंडिंग की थी. यह सेना की क्षमता का प्रदर्शन भी है. देशभर में ELF का नेटवर्क डिब्रूगढ़ ELF अकेला नहीं है. सड़क परिवहन मंत्रालय और IAF मिलकर देशभर में ऐसे 28 स्थानों की पहचान कर चुके हैं. असम में ही 5 ELF बन रहे हैं. कई पहले से ऑपरेशनल हैं. सभी IAF एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड्स को आधुनिक बनाया जा चुका है. पूर्वोत्तर में अन्य रणनीतिक प्रोजेक्ट्स यह सुविधा पूर्वोत्तर की रक्षा को मजबूत करने की बड़ी योजना का हिस्सा है… ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे प्रस्तावित अंडरवाटर रोड-रेल सुरंग – नदी के उत्तर और दक्षिण तट के बीच तेज आवाजाही. कई स्ट्रैटेजिक टनल और ऑल-वेदर रोड – बरसात या आपदा में भी कनेक्टिविटी बनी रहे. ये प्रोजेक्ट्स सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) पर निर्भरता कम करेंगे. सेना की तेज तैनाती सुनिश्चित करेंगे. क्यों जरूरी है यह सब? पूर्वोत्तर भारत की संवेदनशील सीमाओं (चीन, म्यांमार, बांग्लादेश) के पास है. यहां का इलाका मुश्किल है – नदियां, पहाड़, बाढ़. ये प्रोजेक्ट्स… प्राकृतिक आपदाओं और दुश्मन हमले दोनों से बचाव देंगे. सेना को तेज रिस्पॉन्स और बेहतर लॉजिस्टिक्स देंगे. रक्षा के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी कनेक्टिविटी और विकास लाएंगे. डिब्रूगढ़ ELF पूर्वोत्तर की रक्षा रीढ़ को मजबूत करने वाला मील का पत्थर है. यह भारत की रणनीतिक सोच को दर्शाता है – भूगोल की चुनौतियों को ताकत में बदलना. आने वाले समय में ऐसे प्रोजेक्ट्स पूर्वोत्तर को और सुरक्षित और विकसित बनाएंगे.

रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक: भारत ने चार बड़ी ताकतों के साथ संतुलन बनाकर दुनिया को चौंकाया

नई दिल्ली भारत के रक्षा मंत्रालय ने करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी. इससे पहले बीते कुछ महीनों में कई अन्य प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है. भारत ऐसा अपनी रक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाने के लिए कर रहा है. लेकिन, भारत ने अपनी इन रक्षा तैयारियों में अपनी पारंपरिक नीति से अलग एक बड़ा रणनीतिक बदलाव किया है. वह अब किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर नहीं है. उसने अपनी विदेश नीति की तरह ही रक्षा खरीद नीति में मल्टीपोलर बना दिया है. बीते कुछ महीनों के डेवलपमेंट को देखा जाए तो ऐसा लगता है कि भारत ने इस नीति में रूस के साथ-साथ अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी जैसे सुपरपावर्स को साधने का काम किया है. तकनीकी रूप से जर्मनी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नहीं है लेकिन वह एक बहुत बड़ी आर्थिक शक्ति और सैन्य शक्ति है. भारत की इस रणनीति का उद्देश्य किसी एक वैश्विक पावर पर अत्यधिक निर्भरता से बचते हुए पूर्व और पश्चिम दोनों से सर्वश्रेष्ठ तकनीक हासिल करने की है. हाल के महीनों में रूस, अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी के साथ बड़े सौदों ने न केवल इन देशों को साधने का काम किया है, बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता को भी मजबूत किया है. रूस के साथ मजबूत रणनीतिक रिश्ते रूस भारत का सबसे पुराना और भरोसेमंद रक्षा साझेदार बना हुआ है. वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों के बावजूद रूस मौजूदा वक्त में सैन्य हार्डवेयर का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है. ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का संयुक्त उद्यम इसका प्रमुख उदाहरण है. S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की दो स्क्वाड्रन इसी साल डिलीवर होने वाले थहैं. इतना ही नहीं गुरुवार को ही रक्षा मंत्रालय ने रूस से 10 हजार करोड़ में एस-400 सिस्टम की मिसाइलें खरीद फैसला किया. इसी तरह रूस के साथ मिलकर ही यूपी के अमेठी में 6 लाख से अधिक AK-203 असॉल्ट राइफलों का स्वदेशी उत्पादन चल रहा है. सरकारी कंपनी एचएएल में Su-30MKI इंजनों का निर्माण भी रूस के सहयोग से चल रहा है. ये सौदे रूस को भारत में स्थायी बाजार देते हैं, जबकि भारत को सस्ती और विश्वसनीय तकनीक मिलती है. अमेरिका से मिलेगा हाईटेक तकनीक अमेरिका के साथ संबंध खरीदार-विक्रेता से व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी तक पहुंच चुके हैं. GE-F414 जेट इंजन सौदा सबसे बड़ा ब्रेकथ्रू है, जिसमें HAL के साथ 80 फीसदी तकनीक ट्रांसफर की बात चल रही है. यह सुविधा पहले केवल NATO सहयोगियों को मिलती थी. यह सौदा मार्च 2026 तक फाइनल होने की उम्मीद है, जो तेजस MkII और AMCA जैसे स्वदेशी फाइटर को पावर देगा. इसके अलावा, 31 MQ-9B सी गार्जियन ड्रोन और 6 अतिरिक्त P-8I पोसीडॉन विमानों की खरीद हिंद महासागर में अभूतपूर्व निगरानी प्रदान करेगी. अमेरिका को भारत एक पसंदीदा सुरक्षा भागीदार मिलता है, जबकि भारत को ‘सबमरीन हंटर’ जैसी उन्नत क्षमता मिलती है. रक्षा मंत्रालय ने फ्रांस से 114 राफेल खरीदने को मंजूरी दे दी है. फ्रांस बना एक सबसे भरोसेमंद साझेदार फ्रांस भारत का सबसे भरोसेमंद पश्चिमी साथी साबित हुआ है, जहां तकनीक साझा करने में कोई शर्त नहीं लगाई जाती. 36 राफेल फाइटर की सफल खरीद के बाद रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद ने गुरुवार को 114 राफेल जेट्स की मंजूरी दी है. यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा है. इनमें से ज्यादातर भारत में निर्मित होंगे, जिसमें 50 फीसदी स्वदेशी सामग्री होगी. नौसेना के लिए 26 राफेल-एम (मरीन) पहले ही क्लियर हैं. स्कॉर्पीन (कलवरी-क्लास) सबमरीन पर सहयोग जारी है, जहां मझगांव डॉक अतिरिक्त यूनिट बना रहा है. फ्रांस को भारत में बड़ा बाजार और सह-उत्पादन मिलता है, जबकि भारत को हाई-परफॉर्मेंस फाइटर और जर्मनी के साथ सबमरीन डील जर्मनी भारत की अंडरवाटर डोमिनेंस में प्रमुख भूमिका निभा रहा है. प्रोजेक्ट-75(I) के तहत थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के साथ 6 एडवांस्ड कन्वेंशनल सबमरीन का सौदा करीब $8-10 बिलियन (70,000-90,000 करोड़) का है. जनवरी 2026 में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की यात्रा के दौरान सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए और मार्च तक यह सौदा फाइनल होने की उम्मीद है. ये सबमरीन मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड में बनेंगी, जिसमें फुल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा. ये सबमरीन लंबे समय तक पानी के नीचे रह सकेंगी.

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