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SC ने NEET काउंसलिंग पर रोक लगाने से किया इनकार, NTA से जवाब-तलब

नई दिल्ली  मेडिकल में दाखिले से जुड़ी नीट (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस एग्जाम) परीक्षा में गड़बड़ी के मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर नीट-यूजी 2024 को रद करने की मांग की गई। हालांकि, कोर्ट ने परीक्षा रद्द करने की मांग को खारिज कर दिया। वहीं, कोर्ट ने कहा कि काउंसलिंग भी रद्द नहीं की जाएगी। कोर्ट ने एनटीए को जारी किया नोटिस सुनवाई करते हुए कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को फटकार भी लगाई। कोर्ट ने कहा कि परीक्षा की शुचिता प्रभावित हुई है। वहीं, इस पूरे मामले पर कोर्ट ने एनटीए को नोटिस भा जारी किया है। स्पेशल बेंच ने क्या कहा? शीर्ष अदालत ने 10 उम्मीदवारों की ओर से नीट परीक्षा को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हम यह मान रहे हैं कि परीक्षा परिणाम प्रभावित हुए हैं और इसको लेकर एनटीए और सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जा रहा है, लेकिन परीक्षा को रद्द नहीं किया जाएगा और ना ही काउंसलिंग पर रोक लगाई जाएगी। जस्टिस विक्रम नाथ और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की स्पेशल बेंच ने काउंसलिंग पर रोक लगाने और परीक्षा को रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया। 67 टॉपर्स से नीट यूजी पर खड़े हुए हैं सवाल बता दें कि नीट यूजी परीक्षा 5 मई को आयोजित हुई थी जिसका रिजल्ट 4 जून को जारी हुआ। रिजल्ट को लेकर शिकायतें तब आई जब 67 स्टूडेंट्स ने इस परीक्षा को टॉप किया। पिछले 2-3 साल में 3-4 स्टूडेंट्स ही परीक्षा को टॉप कर पाए हैं, लेकिन इस बार टॉपर्स की संख्या ने एग्जाम में गड़बड़ी की ओर इशारा किया। रिजल्ट के बाद से ही पेपर लीक के आरोप एनटीए पर लग रहे हैं। हालांकि एनटीए ने भी माना है कि उसके कुछ सेंटर्स पर पेपर में गड़बड़ी हुई है। हालांकि पेपर लीक की बात को एनटीए ने खारिज किया है। शिवांगी मिश्रा और अन्य 9 ने दाखिल की थी याचिका बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में शिवांगी मिश्रा और अन्य 9 लोगों ने याचिका दाखिल कर नीट यूजी परीक्षा को रद्द करने की मांग की थी। ये याचिका 1 जून को दाखिल हुई थी। सभी 10 याचिकाकर्ताओं ने नीट यूजी परीक्षा को दोबारा आयोजित करने की मांग की थी। बता दें कि एनटीए के शेड्यूल के मुताबिक रिजल्ट भी 10 दिन पहले जारी किया गया था। रिजल्ट जारी होने की तारीख पहले 14 जून थी। याचिका में कुछ उम्मीदवारों को ग्रेस मार्क्स देने के एनटीए के फैसले पर भी सवाल उठाया गया है। याचिकाकर्ता ने क्या दी दलील? छात्रों की सहायता और फायदे के लिए काम करने वाले एक संगठन के दो सदस्यों द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि नीट के पेपर लीक की खबर ने उन्हें अंदर तक झकझोर कर रख दिया है क्योंकि कई मेधावी छात्रों ने भविष्य में डॉक्टर बनने का अवसर खो दिया है। याचिका में आगे कहा गया है,”याचिकाकर्ता केवल पीड़ित छात्रों को न्याय दिलाने के उद्देश्य से वर्तमान याचिका दायर कर रहे हैं, जिन्होंने अपने-अपने परिवार के सदस्यों की सहायता से अपना पूरा समय, गाढ़ी कमाई और ऊर्जा नीट, 2024 की तैयारी में लगाई थी, लेकिन उन्हें समान अवसर नहीं दिया गया।” याचिका के मुताबिक, कुछ छात्रों ने 718 और 719 अंक हासिल किए हैं, जो सांख्यिकीय रूप से संभव नहीं है। परीक्षा का पूरा संचालन विवेकहीन एवं मनमाने तरीके और छात्रों को पिछले दरवाजे से प्रवेश देने के दुर्भावनापूर्ण इरादे से किया गया। कोई पेपर नहीं हुआ लीक: एनटीए इससे पहले एनटीए के डायरेक्टर जनरल सुबोध कुमार सिंह ने परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर उठ रहे सवालों पर सफाई दी थी। उन्होंने कहा था,”हमारी समिति की बैठक हुई और उन्होंने केंद्रों और सीसीटीवी के सभी विवरणों का अध्ययन किया। उन्होंने आगे कहा कि एनटीए को पता चला कि कुछ केंद्रों पर समय बर्बाद हुआ और छात्रों को इसके लिए मुआवजा दिया जाना चाहिए। छात्रों की शिकायतों पर समिति विचार करेगी। वहीं, गड़बड़ियों का समाधान निकाला जाएगा।” हालांकि, सुबोध कुमार सिंह ने दावा किया कि परीक्षाल में कोई पेपर लीक नहीं हुआ है। वहीं, पूरी परीक्षा प्रक्रिया बेहद पारदर्शी रही।

देश में आजादी के बाद पहली बार, मुस्लिम मंत्री के बिना भारत सरकार; पर 5 अल्पसंख्यक मंत्रियों को प्रभार

नई दिल्ली नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद के तौर पर लगातार तीसरी बार शपथ लेकर एक रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने इसके साथ ही देश के पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू की बराबरी कर ली है। यही नहीं उनकी इस तीसरी सरकार में एक और तथ्य की खूब चर्चा हो रही है। वह यह कि ऐसा पहली बार हुआ है, जब केंद्र सरकार में किसी मुस्लिम नेता को मंत्री नहीं बनाया गया। आमतौर पर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय की जिम्मेदारी किसी मुस्लिम नेता को ही मिलती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय की जिम्मेदारी इस बार किरेन रिजिजू को मिली है, जो बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं। यह भी एक तरह का रिकॉर्ड ही है कि देश में पहली बार किसी बौद्ध नेता को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है। यही नहीं उनके साथ एक राज्यमंत्री के तौर पर केरल से आने वाले जॉर्ज कुरियन जिम्मेदारी संभालेंगे। वह खुद ईसाई धर्म से ताल्लुक रखते हैं। जॉर्ज कुरियन तो किसी सदन के सदस्य भी नहीं हैं। पहले भाजपा की सरकारों में भी किसी मुस्लिम नेता को ही अल्पसंख्यक मंत्रालय मिलता था, लेकिन यह सिलसिला 2022 में तब खत्म हुआ, जब मुख्तार अब्बास नकवी से इस्तीफा ले लिया गया। उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो गया था, जिसके चलते उन्हें मंत्री पद भी छोड़ना पड़ा। उसके बाद यह विभाग स्मृति इरानी को दे दिया गया था। स्मृति इरानी मूल रूप से हिंदू हैं, लेकिन उनकी शादी पारसी से हुई है। वहीं उनके साथ काम करने वाले राज्य मंत्री जॉन बार्ला ईसाई समुदाय के थे। यही नहीं इन दिनों राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य भी इकबाल सिंह लालपुरिया हैं, जो एक सिख हैं। उनकी नियुक्ति के साथ भारत सरकार ने इस परंपरा को भी तोड़ा था, जिसके तहत किसी मुसलमान को ही अल्पसंख्यक आयोग की जिम्मेदारी दी जाती थी। बता दें कि एनडीए के ज्यादातर दलों से कोई मुस्लिम नेता चुनकर सदन में नहीं पहुंचा है। इस बार पूरे देश से कुल 28 मुस्लिम सांसद लोकसभा पहुंचे हैं। कुल 5 अल्पसंख्यक नेता बने हैं मोदी सरकार में मंत्री हालांकि एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि मोदी मंत्री परिषद में कुल 5 नेता अल्पसंख्यक समुदाय के हैं। इन नेताओं में हरदीप सिंह पुरी और रवनीत सिंह बिट्टू हैं, जो सिख समुदाय से आते हैं। इसके अलावा रामदास आठवले और किरेन रिजिजू बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं। वहीं केरल से आने वाले जॉर्ज कुरियन ईसाई समुदाय के हैं। बता दें कि इन मंत्रियों में से रवनीत सिंह बिट्टू किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। वह लोकसभी चुनाव में हार गए थे। वहीं जॉर्ज कुरियन ने चुनाव ही नहीं लड़ा था। माना जा रहा है कि पार्टी अब उन्हें राज्यसभा के रास्ते संसद भेजेगी। वह केरल में भाजपा के महासचिव भी हैं।

भारतीयों की सुरक्षा सबसे पहले, पाकिस्तान को भारत की शर्त पर ही मिलेगा दोस्ती का हाथ

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के तीन बार प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ ने पीएम मोदी को तीसरी बार शपथ लेने पर बधाई तो भारतीय प्रधानमंत्री ने पाकिस्तानी नेता को साफ कर दिया कि भारत के लिए अपने नागरिकों की सुरक्षा सबसे पहले है। वैसे तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी पीएम मोदी को बधाई संदेश भेजा था, लेकिन उनके बड़े भाई नवाज शरीफ के संदेश में गर्माहट ज्यादा थी। पीएमएल-एन मुखिया नवाज शरीफ ने एक्स पर लिखा, ‘तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर मोदी जी को मेरी हार्दिक बधाई। हाल के चुनावों में आपकी पार्टी की सफलता आपके नेतृत्व में लोगों के विश्वास को दिखाती है।’ इसके साथ ही उन्होंने भारत से दोस्ती की पहल भी की। शरीफ ने आगे लिखा, ‘आइए हम नफरत की जगह उम्मीद को लाएं और इस अवसर का लाभ उठाते हुए दक्षिण एशिया के दो अरब लोगों का भविष्य संवारें।’ पीएम मोदी ने नवाज शरीफ के संदेश की तारीफ की तो भारत का रुख भी साफ कर दिया। पीएम मोदी ने लिखा, ‘भारत के लोग हमेशा शांति और सुरक्षा तथा प्रगतिशील विचारों के पक्षधर रहे हैं। हमारे लोगों की भलाई और सुरक्षा को आगे बढ़ाना हमेशा हमारी प्राथमिकता होना चाहिए।’ पीएम मोदी ने दिया साफ संदेश पीएम मोदी का संदेश साफ बताता है कि मोदी 3.0 में भी भारत का रुख यही रहने वाला है कि पाकिस्तान को अगर भारत से दोस्ती करनी है तो उसे पहले आतंकवाद और आतंकवादियों को पालना बंद करना होगा। भारत ने पहले भी कहा है कि पाकिस्तान से बात तब ही हो सकती है जब यह भरोसा दिलाए कि वह भारत के खिलाफ अपने जहरीले मंसूबों को रोकना चाहता है। विश्लेषकों का मानना है कि मोदी ने अपने संदेश ने पाकिस्तान के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के लिए सीमा पार से आतंकवाद को समाप्त करने की शर्त को लेकर प्रतिबद्धता जाहिर की है। नवाज शरीफ ने मानी थी पाकिस्तान की गलती नवाज शरीफ भारत के साथ दोस्ताना संबंधों के पक्षधर रहे हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारत के साथ दोस्ती की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। नवाज शरीफ के दूसरे कार्यकाल के दौरान ही भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बस से लाहौर गए थे, जहां दोनों पक्षों ने लंबित मुद्दों को बातचीत से हल करने पर सहमति जताई थी लेकिन इसके कुछ महीनों बाद ही पाकिस्तान ने धोखा देते हुए कारगिल में घुसपैठ की जिसने पूरी प्रक्रिया को पटरी से उतार दिया।

‘शांति के पथ से लड़खड़ा रहा मणिपुर ‘, मोहन भागवत बोले

 नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को संघर्षग्रस्त पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर की स्थिति पर चिंता जताई। मणिपुर पिछले साल तीन मई से बड़े पैमाने पर अशांति से प्रभावित है। मोहन भागवत ने नागपुर में आरएसएस प्रशिक्षुओं (ट्रेनी) के एक समूह को संबोधित करते हुए कहा, “मणिपुर एक साल से शांति का इंतजार कर रहा है। हिंसा को रोकना होगा और इसे प्राथमिकता देनी होगी।” मणिपुर हिंसा पर मोहन भागवत की टिप्पणी लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के छह दिन बाद आई है। उन्होंने देश में हाल के चुनावों के दौरान गलत बयानबाजी के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग पर भी अपनी नाराजगी व्यक्त की। मोहन भागवत ने विपक्ष का नाम लिए बगैर संविधान में बदलाव और पिछड़ी जाति के समुदायों के लिए आरक्षण खत्म करने के विपक्ष के आरोपों का जिक्र किया। उन्होंने आगे कहा, “हमने कई क्षेत्रों में प्रगति की है जैसे- अर्थव्यवस्था, रक्षा, खेल, संस्कृति, प्रौद्योगिकी आदि। इसका मतलब यह नहीं है कि हमने सभी चुनौतियों पर काबू पा लिया है। चुनावी अभियान के दौरान ‘शालीनता और मर्यादा’ का अभाव था, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।” उन्होंने उम्मीद जताई की कि संसद में सौहार्दपूर्ण माहौल रहेगा। कम्पटीशन की संभावना है, लेकिन इसे युद्ध में नहीं बदलना चाहिए। आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि चुनाव आम सहमति बनाने की एक प्रक्रिया है। मोहन भागवत ने कहा कि संसद के दो पक्ष हैं, इसलिए किसी भी सवाल के दोनों पहलुओं पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने बीते दस सालों में सरकार की भूमिका की भी सराहना की। साथ ही कहा कि भारत ने आर्थिक मोर्चे, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और शिक्षा के क्षेत्र में सफलता हासिल की है। भारत ने हर चुनौती को स्वीकार किया है और कठिनाइयों पर विजय प्राप्त की है। अब चुनाव खत्म हो चुके हैं, इसलिए ध्यान देश के सामने मौजूदा चुनौतियों की तरफ होना चाहिए और उन पर विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। आरएसएस प्रमुख ने देश के लोगों से पारिवारिक मूल्यों को बनाए रखने का आह्वान किया।

खालिस्तानी अमृतपाल को जेल से बाहर लाने के लिए विदेशी पैरवी! कमला हैरिस से मिला अमेरिकी सिख वकील

 नई दिल्ली जेल में बंद खालिस्तान समर्थक नेता अमृतपाल सिंह एक तरफ लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बन गए हैं. वहीं, उन्हें जेल से रिहा करने के लिए अमेरिका में मुहिम शुरू हो गई है. अमेरिकी सिख वकील जसप्रीत सिंह ने उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से मुलाकात कर भारत की जेल में बंद अमृतपाल सिंह को रिहा कराने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है. जसप्रीत का कहना है कि उन्होंने इस मामले का गहन अध्ययन किया है और उनका मानना है कि अमृतपाल की गिरफ्तारी गलत है. अमृतपाल सिंह की रिहाई के लिए जसप्रीत सिंह की अमेरिकी सांसदों पर दबाव बनाने की योजना है. जसप्रीत ने यूट्यूब वीडियो में कहा कि मैं बीते दो से तीन महीनों में कमला हैरिस से दो बार मिला हूं. मैंने उनसे इमिग्रेशन के मुद्दे पर बात की थी. मैंने उनसे बात की थी. उन्होंने मुझे अपने ऑफिस आने का समय दिया था. मैं उनसे 11 जून को मिलूंगा. बता दें पंजाब की खडूर साहिब लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव जीत चुके अमृतपाल फिलहाल असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं. डिब्रूगढ़ जेल में बंद अमृतपाल सिंह ने लगभग दो लाख वोटों से कांग्रेस के कुलबीर सिंह को हरा दिया था. जसप्रीत ने कहा कि अमृतपाल की प्रचंड जीत हुई है और उनकी गिरफ्तारी मानवाधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करती है. वारिस पंजाब दे प्रमुख अमृतपाल सिंह को अप्रैल 2023 में पंजाब के मोगा में सरेंडर करने के बाद गिरफ्तार कर लिया गाय था. वह इससे एक महीने से फरार था. पंजाब पुलिस ने उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत मामला दर्ज किया था. बता दें कि कमला हैरिस भारतीय मूल की अमेरिकी नेता हैं. कमला हैरिस सहित कई सांसदों से मिल चुके हैं जसप्रीत जसप्रीत सिंह का कहना है कि वह नेवादा के सीनेटर जैकलिन शेरिल रोजन और एरिजोना के सांसद रूबेन गैलेगो सहित कई अमेरिकी सीनेटर्स से इस मामले पर मुलाकात कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि मैंने इस मामले पर 20 से अधिक अमेरिकी नेताओं से बात की है और वे इस पर सहमत हो गए हैं कि इस मामले को संज्ञान में लाया जाना चाहिए. अमेरिका मानव मूल्यों को महत्व देता है, फिर चाहे वह घरेलू हो या अंतर्राष्ट्रीय. उन्होंने कहा कि न्याय का एक सिद्धांत है कि सजा, अपराध के समान होनी चाहिए. हमने मानवाधिकार के एंगल से इस मामले को अमेरिकी सरकार के समक्ष उठाया है.  

सिंगापुर के पीएम ने दी बधाई ‘PM मोदी उल्लेखनीय परिवर्तनों के नेतृत्वकर्ता हैं’

संयुक्त राष्ट्र,  संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीसरे कार्यकाल की शुरुआत पर बधाई दी और वह उनके साथ काम करने के लिए उत्सुक हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, “भारत की जनता और सरकार को इस बड़े पैमाने पर चुनाव आयोजित करने के लिए बधाई, जो दुनिया में कहीं और नहीं देखा गया है। देश भर में लगभग 1.1 करोड़ मतदान कर्मचारियों द्वारा संचालित लगभग 10 लाख पोलिंग स्टेशनों पर करीब 64.2 करोड़ नागरिकों ने वोट डाला था। सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वॉन्ग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत में उल्लेखनीय परिवर्तनों का नेतृत्वकर्ता बनाया है। सिंगापुर के विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी एक पत्र में पीएम वॉन्ग लिखते हैं, मुझे पूरा भरोसा है कि पीएम मोदी आपके नेतृत्व में भारत तेजी से समृद्ध और विकसित होगा। उन्होंने भारत-सिंगापुर के बहुआयामी एवं मधुर संबंधों का जिक्र करते हुए लिखा, अगले वर्ष हमारे राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ है। हम इस मौके पर साझेदारी को बढ़ाने डिजिटलीकरण, कौशल विकास और स्वास्थ्य सेवा जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देंगे। वॉन्ग पिछले महीने ही सिंगापुर के प्रधानमंत्री बने हैं। उन्हें ली सीन लूंग से सत्ता मिली है, जिन्हें नरेंद्र मोदी के करीबी मित्रों में एक माना जाता है। और मजबूत होगी भारत-द. अफ्रीका के बीच साझेदारी : रामाफोसा दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी को ऐतिहासिक तीसरे कार्यकाल के लिए बधाई। मोदी भारत के लोगों के प्रति उनके समर्पण के लिए भी बधाई के पात्र हैं। उन्होंने भारत की जनता को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए भी बधाई दी। साथ ही कहा, भारत-दक्षिण अफ्रीका एक रणनीतिक साझेदार हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व में इस साझेदारी के और मजबूत होने की उम्मीद है। भारत से हुए समझौतों की समीक्षा कर रही मालदीव की संसद मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जु जब भारत में पीएम मोदी के शपथ समारोह में शामिल हो रहे थे, उसी दौरान मालदीव की संसद ने 2018 से 2023 के बीच दोनों देशों में हुए चार समझौतों की जांच शुरू कर दी। इनमें 2018-2023 के बीच हाइड्रोग्राफी संधि, उत्तरी थिलाफाल्हू में सैन्य डॉकयार्ड संधि, डोर्नियर विमान व हेलिकॉप्टर संधि की जांच शुरू की है।   सियासी, आर्थिक स्थिरता का संदेश है मोदी-3.0 कार्यकाल : यूएसआईबीसी भारत-अमेरिकी व्यापार परिषद (यूएसआईबीसी) ने कहा है कि नरेंद्र मोदी का लगातार तीसरी बार ऐतिहासिक कार्यकाल भू-रणनीतिक अनिश्चितता के बीच राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता का एक मजबूत संदेश दे रहा है। परिषद के अध्यक्ष अतुल केशप ने कहा, मोदी का यह कार्यकाल इसलिए भी अहम है क्योंकि विश्व स्तर पर कट्टरपंथ के बीच भारतीय वोटरों ने विकास का समर्थन किया है। यह समर्थन भारत को समृद्धि और तकनीकी नवाचार के आधार के साथ अमेरिका का अहम भागीदार भी बना रहा है।

मलावी के उपराष्ट्रपति को ले जा रहा विमान लापता, तलाश जारी

 लिलोंग्वे,  मलावी के उप-राष्ट्रपति साउलोस चिलिमा और नौ अन्य लोगों को ले जा रहा विमान लापता हो गया है। राष्ट्रपति कार्यालय के एक बयान में ये जानकारी दी गयी है। बीबीसी ने बताया कि मलावी रक्षा बल का विमान सोमवार सुबह राजधानी लिलोंग्वे से रवाना होने के बाद “रडार से गायब हो गया”। विमान से संपर्क न होने के बाद राष्ट्रपति ने खोज और बचाव अभियान का आदेश दिया। बीबीसी ने बताया कि विमान को स्थानीय समयानुसार सुबह 10 बजे के बाद देश के उत्तर में स्थित मज़ूज़ू अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरना था। उपराष्ट्रपति के मौत की आशंका विमान से संपर्क न हो पाने की स्थिति में राष्ट्रपति ने खोज एवं बचाव अभियान का आदेश दिया. टीम विमान को ट्रैक करने की कोशिश कर रही है, लेकिन अभी तक उसका सटीक लोकेशन नहीं पता चल सका है. इस हादसे के बाद मलावी के राष्ट्रपति लाजरस चकवेरा ने अपनी बहामास यात्रा को रद्द कर दी है. अफ्रीकन जर्नलिस्ट होपवेल ने बताया कि उनको सरकार के सूत्रों से पता चला है कि अब कम ही उम्मीद है कि उपराष्ट्रपति जीवित बचे हों. साथ ही इस बात की पुष्टि हुई हैं कि विमान में उनकी पत्नी मैरी सवार नहीं थी. एक विदेश यात्रा के बाद वह वापस लौटे थे और थकान में थे. घटना की जानकारी के बाद मलावी के राष्ट्रपति लाज़रस चकवेरा ने बहामास की अपनी यात्रा रद्द कर दी। राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा, “पूरी स्तिथि साफ़ होने के बाद ही घटनाक्रम के बारे में जनता को जानकारी दी जाएगी।” बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार विमान के लापता होने का कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। मलावी के सूचना मंत्री मूसा कुंकुयू ने बीबीसी को बताया कि विमान को खोजने के प्रयास जारी हैं। कुंकुयू ने कहा: “जिस हवाई अड्डे पर उन्हें उतरना था वो मज़ुज़ू के उत्तरी भाग में है।” बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, चिलिमा को 2022 में भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर सरकारी अनुबंध देने के बदले में पैसे लेने का आरोप था। हालांकि पिछले महीने अदालत ने सबूत के अभाव में आरोपों को खारिज कर दिया।

महिला टीचर ने ‘हिजाब’ विवाद में अपने पद से दे दिया इस्तीफा, वजह जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे

कोलकाता कोलकाता में एक प्राइवेट लॉ कॉलेज में हिजाब पहने जाने से रोकने पर एक महिला टीचर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और क्लास लेना भी बंद कर दिया. यह कॉलेज कलकत्ता यूनिवर्सिटी से संबद्ध है. न्यूज एजेंसी के मुताबिक जैसे ही यह मामला सामने आया कॉलेज में हंगामा मच गया. इसके बाद कॉलेज अधिकारियों ने दावा किया मिस कम्यूनिकेशन की वजह से ऐसा हुआ था. कॉलेज की तरफ से कहा गया है कि अपना इस्तीफा वापस लेने के बाद महिला टीचर 11 जून से वापस क्लास लेने लगेंगी. बता दें कि पिछले तीन सालों से एलजेडी लॉ कॉलेज में शिक्षिका रहीं संजीदा कादर ने हिजाब पहनने से रोके जाने पर 5 जून को इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने कहा था कि कॉलेज अधिकारियों ने उन्हें 31 मई के बाद कॉलेज में हिजाब न पहनने का निर्देश दिया था. उन्होंने कहा, ‘कॉलेज गवर्निंग बॉडी के आदेश से मेरे मूल्यों और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है.’ संजीदा कादर मार्च-अप्रैल से कार्यस्थल पर हेडस्कार्फ़ पहन रही थीं और पिछले सप्ताह उनके हिजाब पहनने की वजह से यह विवाद हुआ था. हालांकि, उनके इस्तीफे के सार्वजनिक होने के बाद, कॉलेज के अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया और जोर देकर कहा कि यह केवल मिस कम्यूनिकेशन था, उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें काम के घंटों के दौरान अपने सिर को कपड़े से ढकने से कभी मना नहीं किया गया था. इस पर संजीदा कादर ने कहा, ‘मुझे सोमवार को कॉलेज ऑफिस से एक ईमेल मिला, मैं अपने अगले कदम के बारे में सोचूंगी और फिर फैसला करूंगी, लेकिन मैं मंगलवार को कॉलेज नहीं जा रही हूं.’ वहीं उन्होंने कॉलेज की तरफ से मिले ईमेल को लेकर कहा, सभी संकाय सदस्यों के लिए ड्रेस कोड के अनुसार, समय-समय पर उसकी समीक्षा और मूल्यांकन किया जाता है, वो (महिला शिक्षक) क्लास लेते समय अपना सिर ढकने के लिए दुपट्टे या स्कार्फ का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र थीं. कॉलेज गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष गोपाल दास ने बताया, ‘कोई निर्देश या निषेध नहीं था, और कॉलेज के अधिकारी प्रत्येक हितधारक की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हैं. वह मंगलवार से क्लास फिर से शुरू करेंगी. कोई गलतफहमी नहीं है.  

केंद्रीय करों में बिहार को मिली 14 हजार 56 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी

नईदिल्ली केंद्र में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व सरकार बनी है और सोमवार को कैबिनेट गठन हुआ और सभी को उनके मंत्रिमंडल बांट दिए गए. फाइनेंस मिनिस्ट्री की जिम्मेदारी एक बार फिर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) को दी गई है. विभागों के बंटवारे के तुरंत बाद वित्त मंत्रालय ने बड़ा फैसला लेते हुए राज्यों को 1,39,750 करोड़ रुपये का टैक्स डिवोल्यूशन (Tax Devolution) जारी करने को हरी झंडी दिखाई. इसके तहत सबसे ज्यादा पैसा उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) को दिया गया है. बिहार को भी मिली मोटी रकम जहां केंद्र सरकार की तरफ से किए गए इस आवंटन में सबसे ऊपर योगी आदित्यनाथ की सरकार वाले उत्तर प्रदेश को किया गया है, केंद्र की ओर से UP को 25,069.88 करोड़ रुपये दिए हैं. तो वहीं गठबंधन के मजबूत सहयोगी नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला बिहार दूसरे नंबर पर है. वित्त मंत्रालय ने Bihar के लिए 14,056.12 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए हैं. इस लिस्ट में सबसे ज्यादा पैसा पाने वाला तीसरा राज्य मध्यप्रदेश (MP) है और इसके लिए 10,970.44 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं. राज्यों की ग्रोथ में किया जाएगा खर्च गौरतलब है कि अंतरिम बजट 2024-25 में राज्यों को कर हस्तांतरण के लिए 12,19,783 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन जारी करते हुए वित्त मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि जून 2024 के लिए डिवोल्यूशन राशि की नियमित रिलीज के अलावा एक अतिरिक्त इंस्टॉलमेंट जारी होगी. इसे राज्य सरकारें विकास और पूंजीगत खर्च में तेजी लाने के लिए इस्तेमाल कर सकेंगी. इस हिसाब से देखें तो अतिरिक्त इंस्टॉलमेंट के साथ सोमवार 10 जून को राज्यों को हस्तांतरित कुल राशि (वित्त वर्ष 2024-25 के लिए) 2,79,500 करोड़ रुपये है. इन राज्यों को भी मिला खूब पैसा अन्य राज्यों को मिले पैसों की बात करें, तो वित्त मंत्रालय की ओर से पश्चिम बंगाल को 10513.46 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र को 8828.08 करोड़ रुपये, राजस्थान को 8421.38 करोड़ रुपये, ओडिशा को 6327.92 करोड़ रुपये, तमिलनाडु को 5700.44 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश को 5655.72 करोड़ रुपये और गुजरात को 4860.56 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं. देश के 28 राज्यों को जारी की गई इस राशि में शामिल झारखंड को 4621.58 करोड़ रुपये, कर्नाटक को 5096.72 करोड़ रुपये, पंजाब को 2525.32 करोड़ रुपये, हिमाचल प्रदेश को 1159.92 करोडड रुपये, केरल को 2690.20 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं. इसके अलावा मणिपुर और मेघालय को क्रमश: 1000.60 और 1071.90 करोड़ रुपये मिले हैं.  

Modi Cabinet 2024 तीसरे कार्यकाल में छह पूर्व CM बने केंद्रीय मंत्री, देखें किसे मिला कौन सा विभाग

नई दिल्ली पीएम मोदी सरकार 3.0 में सोमवार को मंत्रालय का बंटवारा हो चुका है। इससे पहले नरेंद्र मोदी ने रविवार को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पीएम मोदी को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। पीएम मोदी ने शपथ ग्रहण करने के साथ देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की बराबरी कर ली, जो इससे पहले लगातार तीन बार देश के पीएम रह चुके हैं। नरेंद्र मोदी के बाद दूसरे नंबर पर राजनाथ सिंह और तीसरे नंबर पर अमित शाह ने केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में नितिन गडकरी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान, निर्मला सीतारमण, एस. जयशंकर ने केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण किया। वह करनाल लोकसभा सीट से जीतकर पहली बार संसद पहुंचे हैं। मोदी सरकार 3.0 में मोदी के साथ 71 मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली। इसमें 30 कैबिनेट मंत्री, 5 स्वतंत्र प्रभार और 36 राज्यमंत्री शामिल हैं। हम आपको इन सभी मंत्रियों की पूरी लिस्ट बता रहे हैं। पांच पूर्व मुख्यमंत्री बीजेपी से हैं, एक जेडीएस और HAM के नेता हैं इनमें से पांच पूर्व मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी से हैं, जबकि कुमारस्वामी जनता दल (सेक्युलर) और जीतन राम मांझी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) से हैं। सभी छह मुख्यमंत्रियों ने रविवार को राष्ट्रपति भवन में शपथ ग्रहण किया। सोमवार को इनके विभागों का बंटवारा कर दिया गया। बिहार के जीतन राम मांझी पहली बार केंद्रीय मंत्री बनाए गये हैं राजनाथ सिंह के पास रक्षा मंत्रालय है। वह मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में गृहमंत्री थे। दूसरे कार्यकाल में उन्हें रक्षा मंत्री बनाया गया। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में उन्हें फिर रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। शिवराज सिंह चौहान को कृषि मंत्रालय एवं किसान ग्रामीण विकास मंत्रालय दिया गया है। जीतन राम मांझी को लघु, कुटीर एवं मध्यम उपक्रम (MSME) मंत्रालय सौंपा गया है। मनोहर लाल खट्टर ऊर्जा मंत्रालय और शहरी विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। सर्बानंद सोनोवाल को पोर्ट और शिपिंग का पुराना मंत्रालय दिया गया है। एचडी कुमारस्वामी को उद्योग मंत्रालय एवं स्किल डेवलपमेंट मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। 1. मोदी सरकार 3.0 के कैबिनेट मंत्रियों के नाम और मंत्रालयों की लिस्ट क्रम संख्या कैबिनेट मंत्री मंत्रालय 1. राजनाथ सिंह रक्षा 2. अमित शाह गृह 3. नितिन गडकरी सड़क परिवहन और राजमार्ग 4. जेपी नड्डा स्वास्थ्य 5. शिवराज सिंह चौहान ग्रामीण विकास मंत्रालय और कृषि एवं किसान कल्याण 6. निर्मला सीतारमण वित्त 7. एस जयशंकर विदेश 8. मनोहर लाल खट्टर ऊर्जा और शहरी विकास 9. एचडी कुमारस्वामी स्टील और भारी उद्योग 10. पीयूष गोयल कॉमर्स और इंडस्ट्रीज 11. धर्मेंद्र प्रधान मानव संसाधन विकास 12. जीतन राम मांझी सूक्ष्म लघु एवं मझोले उद्योग 13. राजीव रंजन सिंह पंचायती राज, मछलीपालन, पशुपालन और डेयरी 14. सर्वानंद सोनोवाल पोत, जहाजरानी और जलमार्ग 15. डॉ. वीरेंद्र कुमार सामाजिक न्याय और आधिकारिता 16. राम मोहन नायडू नागरिक उड्डयन मंत्रालय 17. प्रह्लाद जोशी उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं जनवितरण 18. जुएल ओरावं आदिवासी मामले 19. गिरिराज सिंह कपड़ा मंत्रालय 20. अश्विनी वैष्णव सूचना और प्रसारण मंत्रालय, रेल मंत्री 21. ज्योतिरादित्य सिंधिया संचार, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास 22. भूपेंद्र यादव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन 23. गजेंद्र सिंह शेखावत पर्यटन 24. अन्नापूर्णा देवी महिला एवं बाल कल्याण 25. किरेन रिजिजू संसदीय कार्य, अल्पसंख्यक मामले 26. हरदीप सिंह पुरी पेट्रोलियम और नेचुरल गैस 27. मनसुख मांडविया श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, युवा मामले और खेल मंत्रालय 28. जी.किशन रेड्डी कोयला और खान मंत्रालय 29. चिराग पासवान खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय 30. सीआर पाटिल जल शक्ति 2. मोदी सरकार 3.0 के स्वतंत्र प्रभार मंत्रियों के नाम और मंत्रालयों की लिस्ट क्रम संख्या राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मंत्रालय 1. राव इंद्रजीत सिंह सांख्यिकी और प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन 2. जितेंद्र सिंह विज्ञान और प्रोद्योगिकी, पीएमओ, कार्मिक, जनशिकायत और पेंशन, एटॉमिक एनर्जी, स्पेस 3. अर्जुन राम मेघवाल कानून और न्याय, संसदीय कार्य 4. प्रतापराव गणपतराव जाधव आयुष, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण 5. जयंत चौधरी कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री 3. मोदी सरकार 3.0 के राज्य मंत्रियों के नाम और मंत्रालयों की लिस्ट क्रम संख्या राज्य मंत्री मंत्रालय 1. जितिन प्रसाद वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में राज्य मंत्री 2. श्रीपद नाइक ऊर्जा, न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी 3. पंकज चौधरी वित्त 4. किशन पाल गुर्जर सहकारिता 5. रामदास अठावले सामाजिक न्याय औरआधिकारिता 6. राम नाथ ठाकुर कृषि और किसान कल्याण 7. नित्यानंद राय गृह 8. अनुप्रिया पटेल स्वास्थ एवं परिवार कल्याण, केमिकल और फर्टिलाइजर 9. वी सोमन्ना जल शक्ति, रेलवे 10. डॉ. चंद्रशेखर पेम्मसानी ग्रामीण विकास, संचार 11. एसपी सिंह बघेल मछलीपालन, पशुपालन और डेयरी, पंचायती राज 12. शोभा करलंदाजे छोटे एवं मझोले उद्योग, श्रम एवं रोजगार 13. कीर्ति वर्धन सिंह पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन 14. बीएल वर्मा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं जनवितरण, सामाजिक न्याय और आधिकारिता 15. शांतनु ठाकुर पोत, जहाजरानी और जलमार्ग 16. सुरेश गोपी पेट्रोलियम और नेचुरल गैस, पर्यावरण 17. एल मुरुगन सूचना और प्रसारण, संसदीय कार्य 18. अजट टम्टा सड़क परिवार राज्य मंत्री 19. बंदी संजय कुमार गृह 20. कमलेश पासवान ग्रामीण विकास 21. भागीरथ चौधरी कृषि और किसान कल्याण 22. सतीश चंद्र दुबे कोयला और खान 23. संजय सेठ रक्षा 24. रवनीत सिंह बिट्टू खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, रेलवे 25. दुर्गा दास उईके आदिवासी मामले 26. रक्षा खड़से खेल एवं युवा मामले 27. सुकांता मजूमदार शिक्षा, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास 28. सावित्री ठाकुर महिला एवं बाल कल्याण 29. तोखन साहू आवास और शहरी मामले 30. राजभूषण चौधरी जल शक्ति 31. बीएल वर्मा भारी उद्योग, स्टील 32. हर्ष मल्होत्रा कंपनी मामले, सड़क परिवहन और राजमार्ग 33. एनजे बम्भानिया उपभोक्ता मामले, खाद्य और जनवितरण 34. मुरलीधर मोहोल सहकारिता, नागरिक उड्डयन 35. जॉर्ज कुरियन अल्पसंख्यक मामले, मछली पालन, पशुपालन और डेयरी 36. पी. मार्गरिटा विदेश, कपड़ा

राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका, सजा पर अब 11 जुलाई को सुनवाई होगी

वॉशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। हश मनी मामने में ट्रंप को सभी 34 आरोपों में दोषी करार दिया गया था। डोनाल्ड ट्रंप को क्या सजा मिलेगी, इस पर अब 11 जुलाई को सुनवाई होगी। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति से  न्यूयॉर्क के प्रोबेशन अधिकारी पूछताछ करेंगे, जो सजा सुनाए जाने से पहले एक जरूरी कदम है। इस कदम से परिचित तीन लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर एक मीडिया चैनल को बताया कि ट्रंप फ्लोरिडा के पाम बीच में मार-ए-लागो क्लब में अपने घर से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इंटरव्यू करेंगे। बता दें, न्यूयॉर्क में अपराधों के दोषी लोग आमतौर पर अपने वकीलों के बिना प्रोबेशन अधिकारियों से मिलते हैं। मगर ट्रंप को अनुमति मिल गई है कि इंटरव्यू के दौरान उनके वकील टोड ब्लैंच मौजूद रह सकते हैं। यह अनुमति जुआन मर्चन ने शुक्रवार को दी। क्यों लिया जाता है इंटरव्यू? सजा दिए जाने से पहले प्रोबेशन अधिकारियों द्वारा पूछताछ करने का मकसद एक रिपोर्ट तैयार करना होता है। इस रिपोर्ट के जरिए न्यायाधीश को प्रतिवादी के बारे में अधिक जानकारी मिलती है। साथ ही संभावित रूप से अपराध के लिए उचित सजा निर्धारित करने में मदद मिलती है। ऐसी रिपोर्ट आम तौर पर एक प्रोबेशन अधिकारी, एक सामाजिक कार्यकर्ता या प्रोबेशन विभाग के लिए काम करने वाले मनोवैज्ञानिक द्वारा तैयार की जाती है जो प्रतिवादी और संभवतः उस व्यक्ति के परिवार और दोस्तों के साथ-साथ अपराध से प्रभावित लोगों से पूछताछ करती है। सजा पर रख सकते हैं अपना पक्ष रिपोर्ट में प्रतिवादी का व्यक्तिगत इतिहास, आपराधिक रिकॉर्ड और सजा के लिए सिफारिशें शामिल हैं। इसमें रोजगार के बारे में जानकारी और परिवार के किसी सदस्य की देखभाल में मदद करने के लिए कोई दायित्व भी शामिल होगा। यह एक प्रतिवादी के लिए यह कहने का भी मौका होता है कि उन्हें कैसी सजा मिलनी चाहिए। क्या है मामला? डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ इस हश मनी केस में 34 आपराधिक मामले चल रहे हैं। अब इस मामले में जूरी पर फैसला छोड़ दिया गया था। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने साल 2016 में एक सेक्स स्कैंडल से बचने के लिए एडल्ट फिल्म स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स को पैसों का भुगतान किया था। डोनाल्ड ट्रंप उस वक्त रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद की दावेदारी कर रहे थे। उन्हें डर था कि अगर स्कैंडल सामने आ गया तो उनकी दावेदारी पर असर पड़ सकता है।    

अमेरिका, ब्रिटेन की खुली चेतावनी के बाद हूती विद्रोही अपनी हरकत से बाज नहीं आ

वॉशिंगटन  इस्राइल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद यमन के हूती विद्रोही जहाजों को निशाना बना रहे हैं। अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देश खुले शब्दों में चेतावनी दे चुके हैं, लेकिन हूती अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहे हैं। एक बार फिर विद्रोहियों ने अदन की खाड़ी में मिसाइल हमले कर दो वाणिज्यिक जहाजों को क्षतिग्रस्त कर दिया। पिछले 24 घंटों में दो जहाजों को निशाना अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने  बताया कि यमन के हूती विद्रोहियों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री नौवहन के खिलाफ मिलिशिया समूह के चल रहे अभियान के तहत पिछले 24 घंटों में दो जहाजों को निशाना बनाया है। जिन जहाजों को निशाना बनाया गया उनमें से एक का नाम तव्विशी था। स्विस के स्वामित्व वाले जहाज पर लाइबेरियाई झंडा लगा था। इस जहाज पर एंटी शिप बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया गया था। हालांकि, शुक्र रहा कि चालक दल को कोई चोट नहीं आई। इसे पर भी किया हमला सेंटकॉम के अनुसार, हूती विद्रोहियों द्वारा दागी गई दो मिसाइलें जर्मन स्वामित्व वाले मालवाहक जहाज नोर्डनी पर गिरीं। इस पर  एंटीगुआ और बारबाडोस के झंडे लगे हुए थे। सेंटकॉम ने कहा कि जहाज को नुकसान पहुंचा। मगर चालक दल का कोई सदस्य घायल नहीं हुआ। इससे पहले हूतियों ने दावा किया था कि उन्होंने नोर्डनी और तव्विशी पर हमला किया और बाद में आग के हवाले कर दिया था। अमेरिका को बना रहा निशाना बता दें, गाजा में हो रहे इस्राइल हमलों से मध्यपूर्व बौखलाया हुआ है। मध्यपूर्व गाजा में हो रहे हमलों का कारण अमेरिका को मानता है। इसी वजह से हूती विद्रोही अदन की खाड़ी में व्यापारिक जहाजों के खिलाफ हमले कर रहे हैं। साथ ही कभी ईरान तो कभी जॉर्डन को कभी सीरिया में अमेरिकी सेना और अमेरिकी प्रतिष्ठानों पर हमले हो रहे हैं। हाल ही में तुर्किये में दो बंदूकधारी एक अमेरिकी कंपनी में घुस गए, उन्होंने कंपनी में मौजूद सात लोगों को को बंधक बना लिया था।

गुड गर्ल कंपनी, दुबई, लास वेगास और कोलंबिया में ‘सेक्स आइलैंड’ की मेजबानी करने वाला

वॉशिंगटन  दुनिया में अय्याशी के कई अड्डे हैं। उनमें से एक ‘सेक्स आइलैंड’ है। यह जगह बेहद सीक्रेट होती है, जहां क्या होता है, इसके बारे में ज्यादा खबर नहीं। लेकिन रिपोर्ट्स का कहना है कि यहां हर तरह की सेक्सुअल फैंटेसी सच होती है। सेक्स आइलैंड साल में कुछ दिनों के लिए खुलता है। एक बार फिर यह शुरू हो गया है। इसकी आयोजक गुड गर्ल कंपनी, जून में दुबई, लास वेगास और कोलंबिया के कार्टाजेना के तट पर ‘सेक्स आइलैंड’ की मेजबानी करने वाला है। एक हफ्ते की इस ट्रिप पर 50 लोग जा सकते हैं, जिन्हें लाखों खर्च करने पड़ते हैं। सेक्स आइलैंड ड्रग्स पार्टियों के लिए मशहूर है। दुनिया के कई मशहूर लोगों का नाम इससे जोड़ा जाता रहा है, जो यहां जाते थे। हालांकि हर किसी की दिलचस्पी इसमें नहीं है। सेक्स आइलैंड के आलोचकों का कहना है कि यह डरावना और बेहद घृणित है। वहीं इसके आयोजकों का दावा है कि यह पूरी तरह से कानूनी है। वेबसाइट पर कहा गया है कि इसमें होलोग्राफिक संगीत कार्यक्रम, सुंदर महिलाएं, अनलिमिटेड सेक्स और नशा और ड्रग्स के लिए अनुकूल वातावरण, मुफ्त शराब रिसॉर्ट में उपलब्ध है। क्या-क्या होता है यहां? सेक्स आइलैंड के आयोजक इसे नशे के लिए ‘धरती पर स्वर्ग’ कहते हैं। वेबसाइट के मुताबिक कंपनी महिलाओं की अदला बदली की इजाजत देता है। पूरे बीच पर नग्न घूमा जा सकता है। वहीं एचआईवी और एसटीडी का टेस्ट भी किया जा सकता है। अपनी इस पार्टियों को लेकर कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर वीडियो शेयर किया है। गुड गर्ल कंपनी का दावा है कि यह कपल फ्रेंडली है, जहां आप प्रेमिका के साथ जा सकते हैं। हालांकि अपनी इन्हीं फैसिलिटीज के कारण इसे अय्याशी के अड्डे के रूप में देखा जाता है। कितना लगता है खर्च द सन की रिपोर्ट के मुताबिक यहां जाने वाले एक शख्स ने बताया कि वह अपने घर बिजनेस ट्रिप का बताकर आया था। उसने कहा, ‘नाव सुंदर महिलाओं से भरी थी। वह डांस कर रही थीं और शराब पी रही थीं। जैसे ही हम आगे बढ़े हमें ड्रिंक्स दिए गए और हम पार्टी एंजॉय करने लगे। उसने कहा कि हर व्यक्ति दो लड़कियां चुन सकता था जो पूरी यात्रा के दौरान उनके साथ रहतीं।’ हालांकि यह ट्रिप बेहद महंगी होगी। लास वेगास में सेक्स आइलैंड पर जाने वालों को तीन दिनों के लिए 4,500 डॉलर (3.75 लाख) देने होंगे। इस ट्रिप पर सिर्फ 50 लोग ही जा सकते हैं।

अर्जेंटीना सरकार पर भारी कर्ज, 40 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे रहने को मजबूर

ब्यूनस आयर्स अर्जेंटीना क्षेत्रफल के लिहाज से दुनिया का आठवां बड़ा देश है। प्रथम विश्व युद्ध से पहले इस दक्षिण अमेरिकी देश की गिनती दुनिया के टॉप 10 अमीर देशों में होती थी। लेकिन आज इस देश में महंगाई चरम पर है। दुनिया में सबसे ज्यादा महंगाई इसी देश में है। अप्रैल में अर्जेंटीना में महंगाई की सालाना दर 289 फीसदी पहुंच गई। दुनिया में कोई दूसरा देश महंगाई इस मामले में उसके आसपास भी नहीं है। तुर्की 75.45 फीसदी के साथ दूसरे और वेनेजुएला 64.9 फीसदी से साथ तीसरे नंबर पर है। अर्जेंटीना में महंगाई का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि यह भारत के मुकाबले करीब 60 गुना है। भारत में अप्रैल में खुदरा महंगाई की दर 4.83 फीसदी रही थी। सवाल यह है कि कभी दुनिया के अमीर देशों में शुमार अर्जेंटीना की यह दुर्गति कैसे हुई? प्रथम विश्व युद्ध से पहले अर्जेंटीना की गिनती दुनिया के टॉप अमीर देशों में होती थी। इस देश की अमीरी का अंदाजा इसी बात से ही लगाया जा सकता है कि As rich as an Argentine जैसे मुहावरे चलन में थे। 19वीं शताब्दी के अंत में और 20वीं सदी की शुरुआत में पूरे यूरोप से लोग अर्जेंटीना आए। यह देश धनधान्य से भरपूर था। लेकिन 1946 से देश में लोकलुभावन नीतियों और खर्च का ऐसा दौर शुरू हुआ कि उसकी इकॉनमी गर्त में चली गई। इसकी शुरुआत राष्ट्रपति जुआन पेरोन ने की जो 1946 से 1955 तक सत्ता में रहे। 1990 के दशक में राष्ट्रपति कार्लोस मेनम ने फ्री-मार्केट रिफॉर्म्स की कुछ कोशिशें की लेकिन वह नाकाम रहे। साल 2001 के अंत में चीजें हाथ से निकल गई जब देश को भयंकर आर्थिक संकट से गुजरना पड़ा और उसने 102 अरब डॉलर के कर्ज के भुगतान में डिफॉल्ट किया। 40 फीसदी आबादी गरीब अर्जेंटीना की सरकार ने अपनी करेंसी पीसो की कीमत डॉलर के बराबर रखने के लिए सख्त नीतियां बनाई। पिछले दो दशक से भी अधिक समय से देश में वामपंथी सरकारें रही जिन्होंने देश की आर्थिक समस्याओं को सुलझाने के बजाय लोकलुभावन नीतियों को आगे बढ़ाया और सरकारी खर्च पर लगाम लगाने में नाकाम रहीं। छह महीने पहले जेवियर मिलेई बड़े-बड़े वादों के साथ सत्ता में आए लेकिन जनता की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती जा रही हैं। पीसो की कीमत सालभर में चार गुना से ज्यादा गिर चुकी है। जानकारों का कहना है कि अगर इसे सरकारी नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त कर दिया जाए तो यह अब भी काफी नीचे जा सकती है। हालत यह है कि देश के अमीरों को भी दो जून की रोटी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। देश के पास कैश रिजर्व नहीं है, सरकार पर भारी कर्ज है जबकि 40 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे रह रही है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने नरेंद्र मोदी दी बधाई, निभाई औपचारिकता : राजनीतिक विश्लेषक

नई दिल्ली पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोमवार को नरेंद्र मोदी को लगातार तीसरी बार भारत का प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने एक्स पर लिखा कि भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने पर नरेंद्र मोदी को बधाई। पीएम मोदी को कई देशों के नेताओं ने बधाई संदेश भेजे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का पीएम मोदी को संदेश केंद्र सरकार के पिछले दो कार्यकालों के दौरान पड़ोसी देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों को देखते हुए काफी महत्व रखता है। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक जावेद सिद्दीकी ने कहा कि पीएम शहबाज के बधाई संदेश से दोनों देशों के बीच बनी दरार साफ झलकती है। संदेश में गर्मजोशी का कोई संकेत नहीं दिखा और न ही दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में काम करने की कोई उम्मीद जताई गई। इसके बजाय, यह प्रधानमंत्री को मजबूरी में की गई औपचारिकता जैसा लग रहा है। यह भी ध्यान देने की जरूरत है कि पीएम मोदी ने शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान को निमंत्रण नहीं दिया था। हालांकि, 2014 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को आमंत्रित किया गया था। सोमवार को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, उनके बड़े भाई और देश की सत्तारूढ़ पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के अध्यक्ष नवाज शरीफ द्वारा पीएम मोदी को भेजे गए संदेशों में भी काफी फर्क देखा गया। नवाज शरीफ ने एक्स पर लिखा कि नरेंद्र मोदी को तीसरी बार पदभार ग्रहण करने पर हार्दिक बधाई। हाल के चुनावों में आपकी पार्टी की सफलता आपके नेतृत्व में लोगों के विश्वास को दर्शाती है। आइए हम नफरत की जगह उम्मीद लाएं और दक्षिण एशिया के दो अरब लोगों की नियति को आकार देने के अवसर का फायदा उठाएं।

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