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आदि और अंत से परे है सनातन : कंगना रनौत का बड़ा बयान

मुंबई  बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने हाल ही में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। समिति के अनुसार, केदारनाथ और बद्रीनाथ समेत कई मंदिरों में गैर-सनातनियों के प्रवेश को वर्जित किया जाएगा। अब केवल वही गैर-हिंदू मंदिर में प्रवेश कर पाएंगे, जो प्रवेश से पहले सनातन धर्म में आस्था का औपचारिक शपथ पत्र जमा करते हैं, जिससे मंदिर में दर्शन की अनुमति मिलेगी। फैसले को लेकर मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने उदाहरण देते हुए अभिनेत्री सारा अली खान का नाम जोड़ा। उन्होंने कहा कि अगर सारा अली खान जैसी हस्ती भी केदारनाथ आती हैं, सनातन में अपनी आस्था जताती हैं और अगर एफिडेविट देती हैं, तो उन्हें दर्शन से नहीं रोका जाएगा। अभिनेत्री अक्सर केदारनाथ के दर्शन के लिए जाती रहती हैं। साल 2018 में उन्हें अपनी पहली फिल्म ‘केदारनाथ’ की शूटिंग के दौरान इस स्थान से विशेष लगाव हो गया था। बुधवार को भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने संसद परिसर आईएएनएस से बातचीत में कहा कि सारा को यह कहने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए क्योंकि वे भी सनातन धर्म में विश्वास रखती हैं और अगर बद्रीनाथ और केदारनाथ में दर्शन करना चाहती हैं, तो वे लिखित रूप में दें। यहां पर सभी लोग सनातनी हैं, क्योंकि जन्म से ही हम इस परंपरा से जुड़े हुए हैं। ‘सनातन’ का अर्थ है, जिसका न कोई आदि है और न ही अंत। कंगना ने आगे कहा कि सारे अन्य धर्म कुछ ही साल पुराने हैं, लेकिन सनातन ही सत्य है और अनादि-अनंत है, तो मुझे लगता है कि सारा को शपथ पत्र देने में कोई घबराहट नहीं होनी चाहिए। अभिनेत्री ने आगे लोकसभा के नेता विपक्ष राहुल गांधी के व्यवहार पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का संसद में व्यवहार अमर्यादित है। कंगना ने कहा, “वे तू-तड़ाक करके बोलते हैं। अगर कोई इंटरव्यू दे रहा हो तो अनुचित शब्द इस्तेमाल करते हैं, जो बहुत अनकम्फर्टेबल फील करवाते हैं।” संसद पहुंचा ‘सरके चुनर तेरी’ सॉन्ग विवाद, अश्विनी वैष्णव बोले- गाने पर लगाया बैन केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि नोरा फतेही के विवादित गाने ‘सरके चुनर तेरी सरके’ पर बैन लगा दिया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी उचित पाबंदियों के दायरे में ही होनी चाहिए, जो समाज और संस्कृति का सम्मान करती हों। लोकसभा में बोलते हुए वैष्णव ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी पूरी तरह से असीमित नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, ‘इस गाने पर बैन लगा दिया गया है। हमें बोलने की आजादी के तहत तय की गई उचित पाबंदियों के हिसाब से ही काम करना चाहिए। बोलने की आजादी पूरी तरह से असीमित नहीं हो सकती; इसे समाज और संस्कृति के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।’ दरअसल, यह मुद्दा निचले सदन में समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने उठाया था। उन्होंने सरकार से इस विवादित गाने के बारे में स्पष्टीकरण मांगा था।   क्या है गाने पर विवाद? इस गाने में एक्ट्रेस नोरा फतेही और संजय दत्त नजर आए थे। यह गाना आने वाली कन्नड़ फिल्म ‘केडी: द डेविल’ का है। ऑनलाइन रिलीज होते ही यह गाना एक बड़े विवाद में घिर गया था। कई दर्शकों ने इसके लिरिक्स को अब तक का सबसे अश्लील और इसके सीन को काफी सेक्शुअल बताते हुए इस पर आपत्ति जताई। इस गाने का हिंदी वर्जन इसी हफ्ते की शुरुआत में यूट्यूब पर अपलोड किया गया था। गाने पर विरोध तेज होने पर इसे बाद में हटा दिया गया। हालांकि  कन्नड़, मलयालम, तेलुगु और तमिल भाषाओं वाले वर्जन अभी भी वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। यह फिल्म 30 अप्रैल को रिलीज होने वाली है और ये एक पैन इंडिया रिलीज है। इस गाने के ओरिजिनल लिरिक्स कन्नड़ भाषा में फिल्म के डायरेक्टर प्रेम ने लिखे थे। हिंदी वर्जन के गीतकार रकीब आलम ने इस विवाद से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने तो बस ओरिजिनल बोलों को ट्रांसलेट किया था।  

सस्ती यात्रा की दिशा में बड़ा कदम: भारतीय रेलवे ने बढ़ाए नॉन-एसी कोच, 45% तक छूट

नई दिल्ली भारतीय रेलवे यात्रियों को किफायती यात्रा उपलब्ध कराने के लिए नॉन-एसी जनरल और स्लीपर कोच की संख्या बढ़ा रहा है। सरकार के अनुसार, किराए को कम रखने के लिए प्रति यात्री औसतन करीब 45 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है। रेल मंत्रालय के मुताबिक, कुल कोचों में करीब 70 प्रतिशत जनरल और स्लीपर क्लास के हैं। इसके अलावा, 2024-25 में लगभग 1,250 नए जनरल कोच जोड़े गए हैं और 2025-26 में करीब 860 और कोच जोड़े जाने की योजना है। रेलवे हर साल यात्रियों को करीब 60,000 करोड़ रुपए की सब्सिडी देता है। वहीं, मुंबई जैसे उपनगरीय इलाकों के लिए करीब 3,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सब्सिडी दी जाती है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि माल ढुलाई (फ्रेट) में भी बड़ा इजाफा हुआ है। यह 2013-14 के 1,055 मिलियन टन से बढ़कर अब लगभग 1,650 मिलियन टन हो गया है, जिससे भारतीय रेलवे दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फ्रेट कैरियर बन गया है। उन्होंने कहा कि रेलवे का विद्युतीकरण तेजी से बढ़ा है और अब लगभग 47,000 किलोमीटर ट्रैक इलेक्ट्रिफाई हो चुका है, यानी नेटवर्क का 99 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा बिजली से चल रहा है। ट्रैक निर्माण में भी तेजी आई है। पहले जहां करीब 15,000 किलोमीटर ट्रैक बनाए गए थे, वहीं अब यह बढ़कर करीब 35,000 किलोमीटर हो गया है। सुरक्षा के लिहाज से भी रेलवे ने बड़ा काम किया है। रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) और रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) की संख्या करीब 4,000 से बढ़कर 14,000 हो गई है। वहीं, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग 1,500 किलोमीटर से बढ़कर 4,000 किलोमीटर से ज्यादा हो गई है। रेल मंत्री ने बताया कि सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, जिसके तहत ट्रैक और ट्रेन (रोलिंग स्टॉक) की मेंटेनेंस, नई तकनीक और कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर खास ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एलएचबी कोच (ज्यादा सुरक्षित कोच) की संख्या तेजी से बढ़ी है और हाल के वर्षों में करीब 48,000 कोच जोड़े गए हैं। इसके अलावा, लोकोमोटिव (इंजन) की संख्या करीब 12,000 तक पहुंच गई है और वैगन (माल ढुलाई डिब्बे) की संख्या 2 लाख से ज्यादा हो गई है। सरकार ने परियोजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नीति आयोग और वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर एक मजबूत सिस्टम बनाया है। रेल मंत्री ने बताया कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) में भी तेजी से काम हुआ है। अब तक करीब 2,800 किलोमीटर कॉरिडोर तैयार हो चुका है, जहां रोजाना लगभग 480 मालगाड़ियां चल रही हैं।

रूस-ईरान गठजोड़ पर भड़के जेलेंस्की, कहा- जंग में कोई नहीं जीतेगा, US को ऑफर

यूक्रेन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने मंगलवार को रूस और ईरान को ‘नफरत के मामले में भाई-भाई’ बताया है और पश्चिमी देशों से यूक्रेन को ना भूलने की गुजारिश की है। जेलेंस्की ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से ऐसे वक्त में समर्थन मांगा जब पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण अमेरिका की मध्यस्थता वाली रूस-यूक्रेन शांति वार्ता की रफ्तार धीमी पड़ गई है। जेलेंस्की ने इस दौरान पश्चिमी देशों को ईरानी ड्रोन का मुकाबला करने के लिए मदद की भी पेशकश की है। ब्रिटेन की संसद में अपने बयान में जेलेंस्की ने कहा, ”रूस और ईरान की सरकारें नफरत के मामले में भाई-भाई हैं और इसीलिए वे हथियारों के मामले में भी भाई-भाई हैं। हम चाहते हैं कि नफरत पर आधारित सरकारें कभी किसी भी चीज में जीत हासिल ना कर सकें।” वहीं लंदन में 10 डाउनिंग स्ट्रीट में जेलेंस्की से बातचीत के दौरान स्टार्मर ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को ईरान संघर्ष से लाभ नहीं मिलना चाहिए, चाहे वह तेल कीमतों में बढ़ोतरी हो या प्रतिबंधों में ढील। स्टार्मर और जेलेंस्की के बीच यह बैठक ऐसे समय हुई जब अमेरिका ने वैश्विक आपूर्ति के दबाव को कम करने के लिए रूसी तेल पर कुछ प्रतिबंध अस्थायी रूप से हटा दिए। जेलेंस्की और कुछ अन्य यूरोपीय नेताओं ने अमेरिका के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि इससे मॉस्को को आर्थिक लाभ मिलेगा। मदद की पेशकश इस दौरान जेलेंस्की ने कहा है कि अमेरिका और अन्य देश पश्चिम एशिया के संघर्ष में यूक्रेन की ड्रोन रोधी प्रौद्योगिकी का उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने एक बयान में कहा, “मिडिल ईस्ट और खाड़ी क्षेत्र में 201 यूक्रेनी मौजूद हैं। और 34 अन्य तैनात होने के लिए तैयार हैं। ये सैन्य विशेषज्ञ हैं, ऐसे विशेषज्ञ जो जानते हैं कि मदद कैसे करनी है और शाहेद ड्रोन से बचाव कैसे करना है।” उन्होंने आगे कहा, “हमारी टीमें पहले से ही अमीरात, कतर, सऊदी अरब में मौजूद हैं, और कुवैत के रास्ते में हैं। हम कई अन्य देशों के साथ भी काम कर रहे हैं। और मैंने इन सैन्य विशेषज्ञों को अपने साझेदारों, जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका भी शामिल है,के अनुरोध पर भेजा है।”  

अब ऐसे बनेगा PAN Card! 1 अप्रैल से नियमों में बड़ा बदलाव, जानें क्या करना होगा जरूरी

नई दिल्ली अगर आप नया PAN Card बनवाने की सोच रहे हैं या आने वाले समय में आपको पैन कार्ड बनवाना है तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। सरकार ने PAN कार्ड से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। नए नियम के मुताबिक, अब PAN Card के लिए अप्लाई करते समय सिर्फ Aadhaar का ही इस्तेमाल किया जाएगा। यानी अब अलग-अलग पहचान पत्र और एड्रेस प्रूफ देने की जरूरत धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे आवेदन प्रक्रिया आसान, तेज और ज्यादा सुरक्षित बनेगी। 31 मार्च 2026 तक पुरानी व्यवस्था लागू रहेगी, लेकिन उसके बाद पूरा Aadhaar आधारित हो जाएगी। 1 अप्रैल से बदल जाएगा PAN अप्लाई करने का तरीका सरकार ने PAN Card अप्लाई करने के प्रोसेस को और सरल बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। 1 अप्रैल 2026 से PAN के लिए आवेदन करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। अब तक जहां लोगों को अलग-अलग डॉक्युमेंट्स जैसे पहचान पत्र, एड्रेस प्रूफ और जन्मतिथि प्रमाण देना पड़ता था, वहीं अब यह प्रोसेस काफी आसान होने जा रहा है। इस वजह से किया जा रहा यह बड़ा बदलाव सरकार का कहना है कि इस बदलाव का मकसद PAN सिस्टम को ज्यादा ट्रांसपेरेंट और सुरक्षित बनाना है। Aadhaar के जरिए वेरिफिकेशन होने से फर्जी PAN कार्ड बनने की संभावना कम होगी और एक ही व्यक्ति के नाम पर कई PAN जारी होने की समस्या भी खत्म होगी। इसके अलावा, Aadhaar आधारित सिस्टम से अप्लाई करने का प्रोसेस तेज होगा और कम समय में PAN जारी किया जा सकेगा। क्या इससे आम लोगों पर असर पड़ेगा? इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर नए PAN आवेदकों पर पड़ेगा। अब उन्हें अलग-अलग डॉक्युमेंट्स जुटाने की जरूरत नहीं होगी, जिससे समय और मेहनत दोनों की बचत होगी। हालांकि जिन लोगों के पास Aadhaar नहीं है, उनके लिए यह बदलाव थोड़ा मुश्किल साबित हो सकता है। ऐसे लोगों को पहले Aadhaar बनवाना होगा, तभी वे PAN के लिए आवेदन कर पाएंगे।  

किसानों के लिए डबल खुशखबरी! PM Kisan के बाद कपास पर ₹1718 करोड़ MSP फंडिंग को मंजूरी

नई दिल्ली PM Kisan Yojana की 22वीं किस्त के एक सप्ताह बाद मोदी सरकार ने किसानों को एक बड़ा तोहफा दिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने कपास के किसानों के लिए कपास सीजन 2023-24 के लिए 1718.56 करोड़ रुपये की MSP फंडिंग को मंजूरी दी। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह मंजूरी दी गई। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को इस मंजूरी के तहत 1718.56 करोड़ रुपये की MSP के लिए फंडिंग दी जाएगी। यह फंडिंग कपास वर्ष 2023-24 के लिए है। इस फंडिंग का लक्ष्य कपास के किसानों को सीधे तौर पर राहत देना है। एमएसपी का संचालन कपास के किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए विशेष तौर पर उस अवधि में किया जाता है जब मार्केट में कपास की कीमतें मिनिट सपोर्ट प्राइस से कम होती हैं। इस उपाय कपास की कीमतों को स्थिर करने, संकटपूर्ण बिक्री को रोकने और किसानों को लाभकारी प्रतिफल सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।कृषि बाजारों में समावेशिता को बढ़ाकर, MSP परिचालन कपास उगाने वाले समुदायों की आर्थिक सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। 60 लाख किसानों की आजीविका का आधार है कपास कपास भारत की सबसे महत्वपूर्ण नकदी फसलों में से एक बनी हुई है, जो लगभग 60 लाख किसानों की आजीविका का आधार है और प्रसंस्करण, व्यापार तथा वस्त्र उद्योग सहित इससे जुड़ी अन्य गतिविधियों में लगे 400-500 लाख लोगों को सहारा देती है। 2023-24 के कपास सीजन के दौरान, इसकी खेती का रकबा लगभग 114.47 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान था, जबकि उत्पादन 325.22 लाख गांठ (बेल्स) आंका गया, जो वैश्विक कपास उत्पादन का लगभग 25% है। भारत सरकार, कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर, बीज कपास (कपास) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित करती है। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया नोडल एजेंसी के रूप में नामित सरकार ने कपास के क्षेत्र में MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) से जुड़े कार्यों को पूरा करने के लिए ‘कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया’ (CCI) को केंद्रीय नोडल एजेंसी के रूप में नामित किया है। जब भी बाज़ार में कपास की कीमतें MSP के स्तर से नीचे गिर जाती हैं, तो CCI किसानों से ‘फेयर एवरेज क्वालिटी’ (FAQ) वाले सभी कपास की खरीद बिना किसी मात्रात्मक सीमा के करता है; इस प्रकार, यह किसानों को एक सुनिश्चित सुरक्षा कवच प्रदान करता है।  

लाखों नौकरियों का रास्ता साफ! मोदी कैबिनेट ने 33,660 करोड़ की योजना को दी हरी झंडी

नई दिल्ली   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य योजना) को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत 33,660 करोड़ रुपए की लागत से देश भर में 100 प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क बनाए जाएंगे, जिनका उद्देश्य आर्थिक विकास को तेज करना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य विश्वस्तरीय औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है, जिससे देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ेगी और भारत की आर्थिक वृद्धि को नई रफ्तार मिलेगी। यह योजना नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम (एनआईसीडीपी) के तहत बने इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी मॉडल की सफलता पर आधारित है, जिसे राज्यों और निजी क्षेत्र की भागीदारी से लागू किया जाएगा। ‘भव्य’ योजना में व्यापार करने में आसानी पर खास जोर दिया गया है। इसके तहत मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा, सिंगल विंडो सिस्टम लागू होगा और निवेशकों के लिए अनुकूल सुधार किए जाएंगे। इस योजना के तहत ऐसे इंडस्ट्रियल पार्क बनाए जाएंगे जहां उद्योगों को पहले से तैयार जमीन, जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और सभी सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी, जिससे कंपनियां जल्दी काम शुरू कर सकेंगी। इन इंडस्ट्रियल पार्क का आकार 100 से 1,000 एकड़ तक होगा। सरकार इनके विकास के लिए प्रति एकड़ 1 करोड़ रुपए तक की वित्तीय सहायता देगी। इसमें सड़कों, बिजली-पानी, ड्रेनेज, आईटी सिस्टम, फैक्ट्री शेड, वेयरहाउस और टेस्टिंग लैब जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इसके अलावा, योजना के तहत वर्कर्स के लिए आवास और अन्य सामाजिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। बाहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी परियोजना लागत का 25 प्रतिशत तक समर्थन दिया जाएगा, ताकि बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित हो सके। परियोजनाओं का चयन चैलेंज मोड के जरिए किया जाएगा, जिससे केवल बेहतर और निवेश के लिए तैयार प्रस्तावों को ही चुना जाएगा। इन इंडस्ट्रियल पार्क को भविष्य को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जाएगा और इन्हें पीएम गतिशक्ति के सिद्धांतों के अनुसार विकसित किया जाएगा ताकि मल्टीमोडल कनेक्टिविटी और बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधा मिल सके। साथ ही, इन पार्कों में ग्रीन एनर्जी और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी जोर दिया जाएगा। अंडरग्राउंड यूटिलिटी सिस्टम होने से बार-बार खुदाई की जरूरत नहीं पड़ेगी और उद्योगों का काम बिना रुकावट चलता रहेगा। सरकार का मानना है कि ‘भव्य’ योजना से बड़े स्तर पर रोजगार पैदा होंगे, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर में सीधे और अप्रत्यक्ष दोनों तरह की नौकरियां शामिल होंगी। यह योजना देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी, जिससे लाखों लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। बयान में आगे कहा गया है कि क्लस्टर-आधारित विकास के जरिए यह योजना उद्योग, सप्लायर और सर्विस प्रोवाइडर्स को एक साथ लाएगी, जिससे सप्लाई चेन मजबूत होगी और क्षेत्रीय औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा। इस योजना का सीधा लाभ मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), स्टार्टअप्स और ग्लोबल निवेशकों को मिलेगा, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से इसका फायदा मजदूरों, लॉजिस्टिक्स कंपनियों, सर्विस सेक्टर और स्थानीय लोगों को भी होगा।  

सुप्रीम कोर्ट से ममता बनर्जी को झटका, ED कार्रवाई में हस्तक्षेप पर उठाए सवाल

कोलकाता पश्चिम बंगाल में पिछले दिनों आई-पैक के दफ्तर पर हुई ईडी की छापेमारी के मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ममता सरकार को कड़ी फटकार लगाई। राज्य सरकार ने ईडी की याचिका पर सुनवाई टालने की अपील की थी, जिसके बाद कोर्ट ने दो टूक जवाब दिया कि आप हुक्म नहीं चला सकते हैं। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा, जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच इस मामले में सुनवाई कर रही थी। इसके अलावा, ईडी रेड के दौरान ममता बनर्जी के अचानक बीच में आने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आपने जो किया, वह गलत था। कोर्ट ने कहा, ”जो हुआ, वह कोई अच्छी स्थिति नहीं थी। यह असामान्य है।” दरअसल, इस साल की शुरुआत में ईडी ने तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनाव की रणनीति बनाने वाली आईपैक एजेंसी और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के घर और दफ्तर पर छापेमारी की थी। इस दौरान, ममता बनर्जी मौके पर पहुंची थीं, जिसके बाद उनका जांच एजेंसी के अधिकारियों से आमना-सामना भी हुआ था। ममता ने आरोप लगाया था कि ईडी टीएमसी के संवेदनशील डेटा और हार्ड डिस्क ले जा रही थी। ईडी ने हवाला कारोबार और कोयला तस्करी से जुड़े एक मामले में आईपैक व उसके प्रमुख पर रेड डाला था। लाइव लॉ के अनुसार, सुनवाई की शुरुआत में पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने सुनवाई टालने के लिए कहा। उन्होंने ईडी द्वारा दाखिल किए गए जवाबी हलफनामे पर जवाब दायर करने के लिए समय मांगा। इस पर ईडी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह सुनवाई में देरी करने की चाल है। हलफनामा तो चार हफ्ते पहले ही दायर कर दिया गया था और जवाब दाखिल करने के लिए उनके पास लंबा समय था। दीवान ने कहा कि अगर कोर्ट ईडी के जवाब को नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ रही है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन अगर इस पर विचार किया जाना है तो… इस पर जस्टिस मिश्रा ने तुरंत जवाब दिया, ”हम किसी भी चीज को नजरअंदाज क्यों करें। आप हम पर हुक्म नहीं चला सकते हैं। हम हर चीज पर विचार करेंगे।” उन्होंने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार की स्थिति काफी कमजोर है, क्योंकि हमें ईडी के आरोपों का जवाब देने के लिए बिना किसी लिखित जवाब के ही बहस करनी पड़ रही है। यह एक संवेदनशील मामला है, जिसमें एक विस्तृत जवाब की जरूरत है। बंगाल सरकार ने बुधवार को I-PAC पर हुई छापेमारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ को मामला भेजने की मांग की। सरकार ने दलील दी कि यह मामला संवैधानिक व्याख्या से जुड़े अहम सवाल उठाता है, खासकर केंद्र-राज्य संबंधों और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका की स्वीकार्यता को लेकर। राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ के सामने कहा कि मौजूदा कार्यवाही पर दो जजों की पीठ फैसला नहीं दे सकती, क्योंकि इसमें संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े बुनियादी सवाल शामिल हैं। उन्होंने दलील दी कि यह विवाद केंद्र और किसी राज्य के बीच के मुद्दों को सुलझाने के लिए सही मंच और तरीके से जुड़ा है, जिसकी, उनके अनुसार, संविधान की संघीय संरचना के आधार पर जांच की जानी चाहिए। दीवान ने दलील दी, “यह संविधान की व्याख्या से जुड़ा मामला है। इस मुद्दे की जांच करने का एक ढांचा और तरीका है… अनुच्छेद 32 का इस्तेमाल इस तरह से नहीं किया जा सकता। यह संघीय संरचना को कमज़ोर करता है, जो संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है।” दीवान ने आगे कहा कि ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसी को किसी राज्य के खिलाफ सीधे अनुच्छेद 32 का इस्तेमाल करने की अनुमति देना, केंद्र-राज्य विवादों को सुलझाने के लिए सावधानीपूर्वक तैयार किए गए संवैधानिक ढांचे को दरकिनार करना होगा  

चीन छोड़ भारत की तरफ बढ़ा रूसी तेल टैंकर, आखिर क्या है इस यू-टर्न की कहानी?

रूस दुनियाभर में ईंधन आपूर्ति को लेकर मचे हाहाकार के बीच रूसी तेल को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक एक रूसी तेल से भरा टैंकर, जो चीन की तरफ बढ़ रहा था, दक्षिण चीन सागर में अपना रास्ता बदलकर अब तेजी से भारत की ओर बढ़ रहा है। ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक ‘एक्वा टाइटन’ 21 मार्च को न्यू मैंगलोर तट पर पहुंचने वाला है। यह टैंकर अपने साथ ‘यूराल’ तेल का कार्गो ला रहा है, जिसे जनवरी के आखिर में बाल्टिक सागर के एक बंदरगाह से लोड किया गया था। जानकारी के मुताबिक यह जहाज शुरुआत में चीन के रिझाओ पोर्ट की तरफ जा रहा था। लेकिन हाल ही में इसने अपनी मंजिल बदल ली। वहीं ‘वॉर्टेक्सा लिमिटेड’ के मुताबिक रूस से तेल ले जा रहे कम से कम सात टैंकर ने सफर के बीच में ही चीन की बजाय भारत की ओर मुड़ गए हैं। इसके अलावा ट्रैकिंग डेटा से यह भी पता चला है कि ‘स्वेज़मैक्स ज़ूज़ू एन.’ जहाज ने भारत के सिक्का बंदरगाह को अपनी अगली मंजिल बताया है और यह 25 मार्च को यहां पहुंच सकता है। यह टैंकर कजाखस्तान का कच्चा तेल ले जा रहा है। होर्मुज प्रभावी रूप से बंद यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद सबसे अहम जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावी रूप से बंद हो गया है। अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ईरान से इस रास्ते से जहाजों को ना गुजरने की धमकी दी है। बता दें कि इस रास्ते से वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 से 25 फीसदी हिस्सा गुजरता है। रिफाइनर हुए सक्रिय जानकारी के मुताबिक यह मार्ग बाधित होने और अमेरिका द्वारा रूसी तेल खरीदने की ‘छूट’ मिलने के बाद भारत के सभी प्रमुख रिफाइनर रूसी कच्चे तेल को खरीदने के लिए सक्रिय हो गए हैं। भारतीय रिफाइनरियों ने बीते कुछ दिनों में रूस से करीब 30 मिलियन बैरल तेल खरीदा है। इससे पहले भारत ने स्पष्ट किया है कि वह ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अन्य स्रोतों के विकल्प भी तलाश रहा है और देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।  

किसी का धर्म नहीं बदल रहे… सारा अली खान के मामले में केदारनाथ मंदिर प्रशासन का बड़ा बयान

देहरादून बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान को केदारनाथ मंदिर में प्रवेश करने के लिए शपथ पत्र देना होगा। यह बताना होगा कि उनकी सनातन धर्म के प्रति आस्था है। चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि यह सभी गैर सनातनियों के लिए अनिवार्य किया जाएगा। हिन्दुस्तान से खास बातचीत में हेमंत द्विवेदी ने कहा कि मंदिर कोई पिकनिक स्पॉट नहीं है। क्या शपथ पत्र किसी तरह का धर्मांतरण है? सवाल के जवाब में हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि यह किसी तरह का धर्मांतरण नहीं। मंदिर समिति का दायित्व मंदिरों की पवित्रतता बनाए रखना है। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि हम शपथ पत्र को लेकर एसओपी पर कार्य कर रहे हैं। जल्द ही इसकी डिटेल सार्वजनिक की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि शपथ पत्र मंदिर से ही मिलेगा। यदि आप सनातनी नहीं, लेकिन सनातन धर्म पर आस्था रखते हैं तो फिर धाम में आप सहज ही दर्शन कर सकते हैं। इसके लिए केवल बीकेटीसी के एक तय प्रारूप पर शपथ पत्र देना होगा। सारा अली खान पर क्या बोले हेमंत द्विवेदी हेमंत द्विवेदी ने कहा कि सारा अली खान की माता हिंदू हैं। हम यह नहीं कह रहे कि उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं मिलेगा। लेकिन उसके लिए उनकी सनातन के प्रति आस्था होनी जरूरी है। मंदिर कोई घूमने की जगह नहीं है। यह हिंदू आस्था का केंद्र है। धर्मांतरण से कितना अलग हेमंत द्विवेदी से सवाल किया गया कि लोगों के मन में इस बात को लेकर भ्रम की स्थिति है कि क्या यह उनका धर्मांतरण है? जवाब में द्विवेदी ने कहा कि हम किसी तरह का धर्मांतरण नहीं कर रहे हैं। क्या हमने लोगों को घरों से उठाकर धर्मांतरण करा रहे हैं? क्या हम मंदिर आने के लिए बाध्य कर रहे हैं… नहीं। इसलिए इसे धर्मांतरण कहना ठीक नहीं है। क्या सिख और अन्य धर्मों के लिए भी यही नियम हेमंत द्विवेदी से सवाल किया गया कि क्या यह शपथ पत्र सभी गैर हिन्दुओं के लिए अनिवार्य है? जिसमें सिख, बौद्ध और जैन समेत अन्य धर्म भी आते हैं। उन्होंने इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस पर वे टिप्पणी नहीं करना चाहते। यह जरूर बताया कि जल्द ही मंदिर समिति की ओर से इस पर बातें स्पष्ट हो जाएंगी। पूजा के रेट में बढ़ोतरी बदरी केदार धाम में होने वाली पूजाओं के शुल्क में भी 10 प्रतिशत की वृद्धि हो गई है। बोर्ड के इस फैसले के अनुरूप आगे जल्द शुल्क जारी कर दिए जाएंगे। अभी बदरीनाथ धाम में महाभिषेक पूजा 4700 रुपए, अभिषेक पूजा 4500 रुपए, पूरे दिन की पूजा 12 हजार, श्रीमद भागवत शप्थ पाठ 51 हजार रुपए, वेद पाठ 2500 रुपए लिया जाता है।

संसद में हल्की-फुल्की नोकझोंक: खरगे ने सांसद पर कसा तंज, मोदी की हंसी ने बढ़ाया माहौल

नई दिल्ली हंगामों से भरपूर सदन में बुधवार को तब जमकर ठहाके लगे, जब राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सांसद एचडी देवगौड़ा का जिक्र कर दिया। उन्होंने कहा कि देवगौड़ा ने शादी मोदी जी के साथ कर ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवगौड़ा के साथ खरगे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) प्रमुख शरद पवार की जमकर तारीफ की। क्या हुआ खरगे ने कहा, ‘मैं देवगौड़ा को बहुत दिन से, 54 सालों से जानता हूं। उनके साथ ही मैं काम किया, लेकिन क्या मुझे मालूम नहीं। वह तो प्रेम हमारे साथ किए, लेकिन शादी मोदी साहब के साथ कर लिए। ये हाल ही में हुए। तो आप कैसे माने ये मुझे मालूम नहीं है।’ उनकी इस टिप्पणी के बाद सदन में जमकर ठहाके लगे और पीएम मोदी भी हंसते हुए नजर आए। पीएम मोदी ने की तारीफ देवगौड़ा, खरगे और पवार की पीएम मोदी ने खास तौर पर सराहना की और उन्हें ऐसे स्तंभ बताया जिन्होंने अपने जीवन का आधे से अधिक समय संसदीय कार्यवाहियों में बिताया। उन्होंने कहा ‘जिस तरह वे नियमित रूप से सदन आते हैं, कार्रवाई में इतनी निष्ठा के साथ भाग लेते हैं, वह वास्तव में अनुकरणीय है। यह एक ऐसी भावना है जिससे सभी नए सांसदों को सीख लेनी चाहिए।’ पीएम मोदी ने राज्यसभा से सेवानिवृत्त हो रहे 59 सांसदों को विदाई देते हुए संसद को ‘एक खुला विश्वविद्यालय’ करार दिया। प्रधानमंत्री ने सेवानिवृत्त हो रहे सांसदों से राष्ट्रीय जीवन में योगदान जारी रखने का आह्वान करते हुए कहा ‘राजनीति में फुल स्टॉप नहीं होता।’ उन्होंने कहा, ‘भविष्य आपका भी इंतजार कर रहा है, और आपका अनुभव हमेशा हमारे राष्ट्रीय जीवन का स्थायी हिस्सा रहेगा।’ उन्होंने हल्के फुल्के अंदाज में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा ‘हमारे अठावले जी वास्तव में सदाबहार हैं। वह जा रहे हैं, फिर भी मुझे विश्वास है कि कोई खालीपन महसूस नहीं करेगा, वह लगातार सेवाएं देते रहेंगे।’  

बेरूत में मिसाइल अटैक से हड़कंप, इमारत जमींदोज, 6 लोगों की गई जान

बेरूत इजरायल ने अपने पड़ोसी देश लेबनान पर भीषण हमला किया है। बुधवार को उसने बिना किसी पूर्व सूचना के मिसाइल दाग दी, जिसमें एक बड़ी इमारत देखते ही देखते जमींदोज हो गई। इसका वीडियो भी दुनिया भर में तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना में 6 लोगों के मारे जाने की जानकारी मिली है। यही नहीं इजरायल का कहना है कि वह दक्षिणी लेबनान में हमला करने की तैयारी में था, लेकिन बेरुत में मिसाइल लॉन्च हो गई। ईरान से जारी जंग के बीच लेबनान में सक्रिय उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह ने इजरायल पर हमले किए थे। 2 मार्च को हुई इस घटना के बाद लेबनान भी जंग में शामिल हो गया और इजरायल ने उस पर लगातार हमले किए हैं।  

संसद के ऊपरी सदन में NDA की बढ़त, 140 पार के साथ भाजपा का दबदबा कायम

नई दिल्ली भाजपा को 2024 के लोकसभा चुनाव में 240 सीटें मिली थीं तो माना गया था कि यह उसके लिए झटका है। यही नहीं 2014 और 2019 के आम चुनाव के मुकाबले नई बनने वाली सरकार के भविष्य पर भी सवाल उठे थे। ऐसा इसलिए क्योंकि पहली बार पीएम नरेंद्र मोदी की लीडरशिप में भाजपा को गठबंधन पर निर्भर रहते हुए सरकार चलानी थी। इन सब आशंकाओं के बाद भी भाजपा और उसके नेतृत्व में एनडीए ने जिस तरह से सफलताएं हासिल की हैं, वह चौंकाने वाला है। भाजपा ने महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार और दिल्ली जैसे राज्यों के चुनाव 2024 के झटके के बाद ही जीते हैं। यही नहीं अब इसका असर राज्यसभा में भी दिखा है और उसकी संख्या पहली बार 100 के पार हुई है। फिर एनडीए भी पहली बार 141 सीटों पर पहुंच गया है। 250 सदस्यों वाली राज्यसभा में इतना एनडीए के पक्ष में इतना बड़ा बहुमत आना उसके लिए बड़ी सफलता है। खासतौर पर हाल ही में खाली हुईं 37 राज्यसभा सीटों में से 22 पर जीत हासिल करके एनडीए ने अपने स्कोर को 135 से बढ़ाकर 141 कर लिया है। ओडिशा, बिहार में भाजपा ने अतिरिक्त सीटें हासिल कर ली हैं। भाजपा के पास उच्च सदन में 101 निर्वाचित सांसद हैं, जबकि 5 मनोनीत सांसद भी उसके पक्ष में हैं। ऐसी स्थिति में उसके यहां 106 सदस्य हो जाते हैं। एनडीए में भाजपा के बाद एआईएडीएमके और जेडीयू के 5-5 सांसद हैं। फिर महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी एनसीपी के 4 सांसद हो गए हैं तो वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना के भी 2 सदस्य हैं। आंध्र प्रदेश में सत्ता चला रही टीडीपी के पास भी 2 राज्यसभा मेंबर हैं। भाजपा और एनडीए की इस ताकत से यह स्पष्ट है कि अब लोकसभा के साथ ही राज्यसभा में भी सत्ताधारी गठबंधन किसी भी बिल को आसानी से पास कराने की स्थिति में है। भले ही बीते दो कार्यकालों के मुकाबले लोकसभा में भाजपा और एनडीए के पास पहले मुकाबले कम सीटें हैं, लेकिन राज्यसभा में उसकी ताकत निरंतर बढ़ रही है। इससे स्पष्ट है कि 2029 में भी एनडीए के पास अपरहैंड रहेगा। अब यदि INDIA ब्लॉक की बात करें तो उसकी धुरी कही जाने वाली कांग्रेस के पास 29 सीटें हो गई हैं। भाजपा के मुकाबले यह संख्या एक तिहाई से भी कम है। इसके साथ ही विपक्ष की कुल सीटों की संख्या 62 है। विपक्ष में भी डीएमके को झटका लगा है, जिसके सांसदों की संख्या राज्यसभा में अब 8 ही रह गई है, जो पहले 10 हुआ करती थी। इसी तरह आरजेडी के सांसद भी अब 5 के मुकाबले तीन ही रह गए हैं।  

गुजरात विधानसभा पर बम धमकी से हड़कंप, बजट सत्र के दौरान बढ़ाई गई सुरक्षा

गांधीनगर, गांधीनगर स्थित गुजरात विधानसभा परिसर में बुधवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब बजट सत्र के दौरान बम की धमकी मिलने की सूचना सामने आई। अधिकारियों के अनुसार यह धमकी ईमेल के जरिए दी गई, जिसमें दावा किया गया था कि विधानसभा परिसर में बम लगाया गया है। विधानसभा में चल रहे बजट सत्र की कार्यवाही बुधवार सुबह 9 बजे शुरू होनी थी लेकिन उससे ठीक पहले करीब 8:45 बजे अधिकारियों को इस धमकी भरे ईमेल की जानकारी मिली। जैसे ही यह सूचना सामने आई, सुरक्षा एजेंसियां तुरंत हरकत में आ गईं और पूरे परिसर को खाली कराने का निर्णय लिया गया। पुलिस उपाधीक्षक पीयूष वांडा ने बताया कि ईमेल में स्पष्ट रूप से बम होने का दावा किया गया था, जिसके बाद एहतियातन सभी विधायकों, कर्मचारियों और अन्य मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। उन्होंने कहा, “धमकी मिलने की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंच गए और पूरे परिसर में सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया।” सुरक्षा एजेंसियों ने विधानसभा भवन के हर हिस्से की बारीकी से जांच की। बम निरोधक दस्ते के साथ डॉग स्क्वॉड की भी मदद ली गई, ताकि किसी भी संदिग्ध वस्तु का पता लगाया जा सके। शुरुआती जांच में अब तक कोई भी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई है। अधिकारियों ने बताया कि यह जांच अभी जारी है और ईमेल भेजने वाले की पहचान करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। साइबर क्राइम टीम को भी मामले की जांच में लगाया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि धमकी कहां से और किसने भेजी। इस घटना के बाद विधानसभा की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है लेकिन प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार है। भाजपा विधायक कसवाला महेश ने कहा, “बुधवार सुबह हुई घटना के संबंध में, गुजरात विधानसभा को एक ईमेल मिला जिसमें धमकी भरा संदेश था। एहतियाती कदम के तौर पर, सभी विधायकों को वहां से हटाकर पास के ही एक हॉल में बिठा दिया गया।” भाजपा विधायक दिनेश सिंह कुशवाह ने कहा, “धमकी झूठी निकली और कोई वास्तविक खतरा नहीं पाया गया। व्यवस्थाएं फिर से शुरू की गईं, और विधानसभा परिसर में लौटने से पहले सभी को द्वारका हॉल में बिठाया गया।”  

नेपाल में हेलिकॉप्टर क्रैश, लैंडिंग के वक्त हुआ हादसा, एक परिवार जा रहा था अंतिम संस्कार

 काठमांडू नेपाल के खोटांग जिले में बुधवार को एक बड़ा हादसा टल गया. एयर डायनेस्टी का एक हेलिकॉप्टर लैंडिंग के दौरान अचानक पलटकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस हेलिकॉप्टर में एक ही परिवार के पांच लोग सवार थे, जो काठमांडू से अपने एक परिजन के अंतिम संस्कार में शामिल होने खोटांग जा रहे थे। जिस परिवार पर पहले से ही दुख का पहाड़ टूटा था, उनके लिए यह हादसा किसी बुरे सपने जैसा था. दरअसल, नागमणि राई की पत्नी मनमछी राई का यूके (UK) में निधन हो गया था और उनका शव अंतिम विदाई के लिए नेपाल लाया गया था. हेलिकॉप्टर में जगह कम होने की वजह से शव को गाड़ी से भेजा गया, जबकि परिवार के पांच सदस्य हवाई रास्ते से खोटांग जा रहे थे. इसी दौरान लैंडिंग के समय यह हादसा हो गया। कैसे हुआ हादसा? नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (क्यान) के मुताबिक, हेलिकॉप्टर ने सुबह 11 बजे काठमांडू से उड़ान भरी थी. करीब 50 मिनट बाद जब यह खोटांग के केपिलासगढी में लैंड कर रहा था, तभी इसका संतुलन बिगड़ गया और यह जमीन पर गिरकर पलट गया. गनीमत यह रही कि इस डरावने हादसे में किसी की जान नहीं गई. पायलट समेत सभी यात्री सुरक्षित बाहर निकल आए, बस काजीबहादुर राई नाम के एक शख्स के पैर में मामूली चोट आई है। हादसे के तुरंत बाद कंपनी ने दूसरा हेलिकॉप्टर भेजा और घायल काजीबहादुर को रेस्क्यू करके वापस काठमांडू लाया गया, जो पत्नी को आखिरी विदाई देने जा रहे थे, उनके लिए यह पल काफी मुश्किल भरा रहा, लेकिन राहत की बात यही है कि मौत के मुंह से सब सही-सलामत बच निकले।

साध्वी निरंजन ज्योति को मिला राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष पद

 फतेहपुर  उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के पत्योरा गांव में निषाद बिरादरी में जन्मी साध्वी निरंजन ज्योति ने एक कथा वाचक के रूप में अपनी यात्रा प्रारंभ की। एक बार विधायक, दो बार सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री, निरंजनी अखाड़े में महामंडलेश्वर का सफर तय करने के बाद बुधवार को वह राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की अध्यक्ष बन गयीं। उनकी इस सफलता पर समर्थकों में खुशी और जश्न का माहौल है। हालांकि वह इस समय दिल्ली में हैं लेकिन जैसे ही लोगों को इस कामयाबी की जानकारी हुई लोग से उछल पड़े। तांबेश्वर नगर स्थिति आवास पर समर्थकों का आना-आना प्रारंभ हो गया, यहां से लोग उनके मूसानगर आश्रम भी जा रहे हैं। बता दें कि 1 मार्च 1967 में उनका जन्म निषाद परिवार में हुआ था। यूं तो उनका जीवन कठिन संघर्षों से गुजरा है। लेकिन 1990 के दशक में वह राममंदिर आंदोलन में जुड़ी और एक प्रखर वक्ता के रूप में पहचान बनीं। वह संतश्री परमानंद जी महराज के आश्रम में उनकी शिष्या के रूप में रहीं और 2012 में पहली बार हमीरपुर सदर सीट से विधायक बनीं। सोशल मीडिया पर जताया आभार नवनियुक्त अध्यक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तस्वीरें साझा करते हुए एक श्लोक के साथ अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने लिखा कि पिछड़े समाज के सम्मान, अधिकारों की रक्षा और उनके विकास के लिए वह पूरी प्रतिबद्धता से काम करेंगी। पिछड़े वर्ग के उत्थान पर जोर उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य पिछड़े वर्ग को न्याय, सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर दिलाना है। इसी दिशा में कार्य करने का संकल्प दोहराया। केंद्र सरकार में निभा चुकी हैं अहम भूमिकाएं     साध्वी निरंजन ज्योति नरेंद्र मोदी सरकार के पहले और दूसरे कार्यकाल में मंत्री रह चुकी हैं।     2014 में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री बनीं     2019 में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाली     2021 में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में राज्य मंत्री रहीं राजनीतिक सफर और पृष्ठभूमि उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में जन्मीं साध्वी निरंजन ज्योति निषाद मल्लाह समाज से आती हैं। वे फतेहपुर से सांसद रह चुकी हैं और 2012 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीति में अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2014 व 2019 में फतेहपुर लोकसभा से सांसद बनीं और केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में देशभर में काम किया। अब उन्हें राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग अध्यक्ष के पद की जिम्मेदारी मिली है। दैनिक जागरण से बाचचीत में राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि उनका जीवन समाज के अंतिम पायदान में खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए समर्पित रहा है। हमारे नेतृत्व ने जो अहम जिम्मेदारी दी है उसका निर्वहन पूरी निष्ठा व समर्पण भाव से किया जाएगा।

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