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गुरु-बुध केंद्र योग बनेगा 15 मार्च को, इन राशि वालों को मिलेगा किस्मत का साथ

मेष साप्ताहिक करियर राशिफल इस सप्ताह लगातार प्रयास करने के बाद भी सफलता नहीं मिलेगी। करियर की दृष्टि से अभी आपको कुछ समय और इंतजार करने की जरूरत है। सफलता मिलने में अभी देर है, लेकिन हताश न हों और हिम्मत रखें। वृषभ साप्ताहिक करियर राशिफल इस सप्ताह करियर के लिए चले आ रहे आपके प्रयास सफल होने वाले हैं। आपको कोई बड़ा पद या विदेश यात्रा पर जाने के योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र के लिए आप विदेश भी जा सकते हैं। मिथुन साप्ताहिक करियर राशिफल इस सप्ताह करियर में लाभ के योग बन रहे हैं। आप जिस क्षेत्र के लिए प्रयास कर रहे हैं, उसमें सफलता मिलेगी। आपको आपकी योग्यता के हिसाब से पद और सम्मान मिल सकता है। साथ ही विदेशी जाने के योग भी बन रहे हैं। कर्क साप्ताहिक करियर राशिफल करियर की दृष्टि से यह सप्ताह कोई नई उम्मीद लेकर आने वाला है। हो सकता है आप किसी की सलाह पर अपने कार्यक्षेत्र में परिवर्तन करने का विचार बना लें और यह आपके लिए लाभदायक भी रहेगा। सिंह साप्ताहिक करियर राशिफल करियर को लेकर इस सप्ताह आपको अत्यधिक परिश्रम करने की आवश्यकता है। अभी सफलता मिलने में समय है, हताश और निराश न हों। अपने क्षेत्र में प्रयास करते रहें, अत्यधिक मेहनत आपका भाग्य खोल सकती है। कन्या साप्ताहिक करियर राशिफल करियर को लेकर इस सप्ताह आप चिंता मुक्त हो सकते हैं। आपने यदि किसी प्रतियोगी परीक्षा में भाग लिया है, तो उसमें आपको सफलता मिल सकती है। आपको आपकी मनचाही जॉब या कार्यक्षेत्र में सम्मानित पद मिल सकता है। तुला साप्ताहिक करियर राशिफल इस सप्ताह करियर को लेकर आपको अत्यधिक परिश्रम की जरूरत है। केवल भाग्य के भरोसे रहना आपके लिए ठीक नहीं होगा। सप्ताह के उत्तरार्ध में प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने का सफल परिणाम मिलेगा, जिससे मन खुश रहेगा। वृश्चिक साप्ताहिक करियर राशिफल करियर को लेकर इस सप्ताह अभी आपको थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। आपको मनचाही सफलता प्राप्त करने में अभी समय है, निराश होने की जरूरत नहीं है। जो जातक करियर के लिए विदेश जाना चाहते हैं, उन्हें अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। धनु साप्ताहिक करियर राशिफल इस सप्ताह करियर में अत्यधिक परिश्रम करना पड़ सकता है। सफलता पाने में अभी आपके लिए समय है, इसलिए अपने कार्यक्षेत्र में पूर्ण ईमानदारी के साथ मेहनत करते रहें। सप्ताह के उत्तरार्ध में कोई अच्छी खबर मिल सकती है। मकर साप्ताहिक करियर राशिफल करियर को लेकर इस सप्ताह आप को बड़ी सफलता मिलने वाली है। आपको सुखद परिणाम प्राप्त होगा व बहुत दिनों से चली आ रही मेहनत इस सप्ताह सफल होगी। आपको मनचाहा पद कार्यक्षेत्र मिल सकता है। कुंभ साप्ताहिक करियर राशिफल करियर के हिसाब से इस सप्ताह आपको किसी विशिष्ट व्यक्ति की सलाह मशवरा मिल सकता है, जिससे आपको करियर के क्षेत्र में लाभ होगा। इसी के साथ आपको सही दिशा भी मिलने वाली है। मीन साप्ताहिक करियर राशिफल करियर को लेकर यह सप्ताह सुखद समाचार देने वाला रहेगा। आपकी अत्यधिक मेहनत इस सप्ताह रंग लाने वाली है। विशिष्ट व्यक्तियों के संपर्क में आने से आपको अपने कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त होने वाली है।  

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर 30 मार्च को देवी आराधना का पर्व चैत्र नवरात्र का होगा आरंभ, आठ दिन का रहेगा पर्वकाल

भोपाल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर 30 मार्च को देवी आराधना का पर्व चैत्र नवरात्र का आरंभ होगा। तिथि मतांतर से इस बार नवरात्र आठ दिन के रहेंगे। खास बात यह है कि महापर्व के दौरान चार दिन रवियोग तथा तीन दिन सर्वार्थसिद्धि योग का संयोग रहेगा। साधना, आराधना की दृष्टि से यह योग बेहद महत्वपूर्ण है। इन योगों में की गई साधना साधक, आराधक को शुभ व मनोवांछित फल प्रदान करती है। ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर 30 मार्च को रविवार के दिन वासंती नवरात्र का आरंभ होगा।   सर्वार्थसिद्धि योग होने से इसकी शुभता और बढ़ी इस दिन रेवती नक्षत्र, बव करण तथा मनी राशि उपरांत मेष राशि का चंद्रमा रहेगा। पंचांग के इन पांच अंगों की मौजूदगी में घट स्थापना का अनुक्रम रहेगा। रेवती पंचक का नक्षत्र है, ऐसे में नवरात्र में की गई देवी की साधना, आराधना पांच गुना शुभफल प्रदान करेगी। इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग होने से इसकी शुभता और भी बढ़ गई है। क्योंकि सर्वार्थसिद्धि योग सभी प्रकार की सिद्धि प्रदान करने वाला मना गया है। रेवती नक्षत्र से आरंभ साधना 5 गुना शुभ फल प्रदान करेगी इस बार नवरात्र का आरंभ और रेवती नक्षत्र में होने से यह विशेष फल प्रदान करेगी क्योंकि रेवती नक्षत्र पंचक का पांचवां नक्षत्र माना जाता है। पांचवां नक्षत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आरंभ होता है, तो विशेष कल्याणकारी माना गया है। अलग-अलग प्रकार के धर्म ग्रंथो में विशेष कर मुहूर्त चिंतामणि में इसका उल्लेख दिया गया है। इस दृष्टि से भी नवरात्र के दौरान की गई साधना विशेष फल प्रदान करेगी। तिथि का क्षय होने से 8 दिन की नवरात्रि इस बार नवरात्र आठ दिनों के रहेंगे। अलग-अलग पंचांगों में तिथि को लेकर के अलग-अलग प्रकार की गणना में बताया गया है। कुछ पंचांगों में तृतीया, कुछ पंचांग में द्वितीया तथा कुछ पंचांग में तृतीया व चतुर्थी संयुक्त दी गई है। इस दृष्टि से गणना का अलग-अलग प्रभाव दिया गया है। वर्षभर में चार नवरात्र विशेष पं.डब्बावाला ने बताया देवी की साधना, आराधना के लिए वर्षभर में चार नवरात्र विशेष माने गए हैं। इनमें दो प्राकट्य व दो गुप्त नवरात्र बताए हैं। चैत्र व शारदीय नवरात्र को प्राकट्य नवरात्र कहा जाता है। वहीं माद्य व आषाढ़ मास के नवरात्र गुप्त नवरात्र कहे गए हैं। लोकमान्यता में चैत्र नवरात्र बड़ी नवरात्र है, क्योंकि यह सृष्टि के आरंभ का दिन है। उज्जैन के लिए यह नवरात्र विशेष है, क्योंकि इसी दिन नगर दिवस भी मनाया जाता है। हरसिद्धि में प्रज्वलित होगी दीपमालिका देश के 52 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर में चैत्र नवरात्र में देवी का नित नया श्रृंगार होगा। शाम को गोधूलि वेला में दीपमालिका प्रज्वलित की जाएगी। सिद्धपीठ गढ़कालिका माता मंदिर में भी दीपमालिका प्रज्वलित होगी। भक्त माता गढ़कालिका की कुमकुम पूजा करेंगे। शहर के अन्य देवी मंदिरों में दर्शनार्थियों का तांता लगा रहेगा।

30 मार्च से सर्वार्थसिद्धि योग में चैत्र नवरात्र की होगी शुरुआत, आठ दिन का रहेगा पर्वकाल

 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर 30 मार्च को देवी आराधना का पर्व चैत्र नवरात्र का आरंभ होगा। तिथि मतांतर से इस बार नवरात्र आठ दिन के रहेंगे। खास बात यह है कि महापर्व के दौरान चार दिन रवियोग तथा तीन दिन सर्वार्थसिद्धि योग का संयोग रहेगा। साधना, आराधना की दृष्टि से यह योग बेहद महत्वपूर्ण है। इन योगों में की गई साधना साधक, आराधक को शुभ व मनोवांछित फल प्रदान करती है। ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर 30 मार्च को रविवार के दिन वासंती नवरात्र का आरंभ होगा। सर्वार्थसिद्धि योग होने से इसकी शुभता और बढ़ी इस दिन रेवती नक्षत्र, बव करण तथा मनी राशि उपरांत मेष राशि का चंद्रमा रहेगा। पंचांग के इन पांच अंगों की मौजूदगी में घट स्थापना का अनुक्रम रहेगा। रेवती पंचक का नक्षत्र है, ऐसे में नवरात्र में की गई देवी की साधना, आराधना पांच गुना शुभफल प्रदान करेगी। इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग होने से इसकी शुभता और भी बढ़ गई है। क्योंकि सर्वार्थसिद्धि योग सभी प्रकार की सिद्धि प्रदान करने वाला मना गया है। रेवती नक्षत्र से आरंभ साधना 5 गुना शुभ फल प्रदान करेगी इस बार नवरात्र का आरंभ और रेवती नक्षत्र में होने से यह विशेष फल प्रदान करेगी क्योंकि रेवती नक्षत्र पंचक का पांचवां नक्षत्र माना जाता है। पांचवां नक्षत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आरंभ होता है, तो विशेष कल्याणकारी माना गया है। अलग-अलग प्रकार के धर्म ग्रंथो में विशेष कर मुहूर्त चिंतामणि में इसका उल्लेख दिया गया है। इस दृष्टि से भी नवरात्र के दौरान की गई साधना विशेष फल प्रदान करेगी। तिथि का क्षय होने से 8 दिन की नवरात्रि इस बार नवरात्र आठ दिनों के रहेंगे। अलग-अलग पंचांगों में तिथि को लेकर के अलग-अलग प्रकार की गणना में बताया गया है। कुछ पंचांगों में तृतीया, कुछ पंचांग में द्वितीया तथा कुछ पंचांग में तृतीया व चतुर्थी संयुक्त दी गई है। इस दृष्टि से गणना का अलग-अलग प्रभाव दिया गया है। वर्षभर में चार नवरात्र विशेष पं.डब्बावाला ने बताया देवी की साधना, आराधना के लिए वर्षभर में चार नवरात्र विशेष माने गए हैं। इनमें दो प्राकट्य व दो गुप्त नवरात्र बताए हैं। चैत्र व शारदीय नवरात्र को प्राकट्य नवरात्र कहा जाता है। वहीं माद्य व आषाढ़ मास के नवरात्र गुप्त नवरात्र कहे गए हैं। लोकमान्यता में चैत्र नवरात्र बड़ी नवरात्र है, क्योंकि यह सृष्टि के आरंभ का दिन है। उज्जैन के लिए यह नवरात्र विशेष है, क्योंकि इसी दिन नगर दिवस भी मनाया जाता है। हरसिद्धि में प्रज्वलित होगी दीपमालिका देश के 52 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर में चैत्र नवरात्र में देवी का नित नया श्रृंगार होगा। शाम को गोधूलि वेला में दीपमालिका प्रज्वलित की जाएगी। सिद्धपीठ गढ़कालिका माता मंदिर में भी दीपमालिका प्रज्वलित होगी। भक्त माता गढ़कालिका की कुमकुम पूजा करेंगे। शहर के अन्य देवी मंदिरों में दर्शनार्थियों का तांता लगा रहेगा।

जानें कब है पापमोचनी एकादशी

एकादशी तिथि जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है. चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली पापमोचनी एकादशी व्रत का खास महत्व है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा करने से व्यक्ति को जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है. साथ ही भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है. तो आइए जान लेते हैं कि इस बार पापमोचनी एकादशी का व्रत कब किया जाएगा. पापमोचनी एकादशी कब है वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 25 मार्च को सुबह के 05 बजकर 05 मिनट शुरू हो रही है और तिथि का समापन 26 मार्च को सुबह में 03 बजकर 45 मिनट पर होने वाला है. उदया तिथि के अनुसार एकादशी का व्रत 25 मार्च को रखा जाएगा. पापमोचनी एकादशी पूजा विधि     पापमोचनी एकादशी के दिन व्रत एवं पूजन करने के लिए सुबह उठकर पवित्र स्नान करें.     भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें.     इसके बाद अपने घर व पूजा घर को साफ करें.     एक चौकी पर भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें.     भगवान का पंचामृत से स्नान करवाएं.     पीले फूलों की माला अर्पित करें.     हल्दी या गोपी चंदन का तिलक लगाएं.     पंजीरी और पंचामृत का भोग लगाएं.     विष्णु जी का ध्यान करें.     पूजा में तुलसी पत्र अवश्य शामिल करें.     आरती से पूजा को समाप्त करें.     पूजा के दौरान हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगे.     अगले दिन पूजा के बाद प्रसाद से अपना व्रत खोलें. पापमोचनी एकादशी व्रत पारण समय पापमोचनी एकादशी व्रत का पारण अगले दिन 26 मार्च को द्वादशी तिथि पर दोपहर के 01 बजकर 41 मिनट पर किया जाएगा और शाम 04 बजकर 08 मिनट तक है. इस दौरान व्रती अपने व्रत का पारण कर सकते हैं. स्नान-ध्यान कर विधि-विधान से पहले लक्ष्मी नारायण की पूजा अर्चना कर. व्रत खोल सकते हैं.

होली के त्यौहार पर जानिए सतयुग की है सबसे पुरानी और प्रचलित कथा

होली मनाने की शुरुआत कब और कैसे हुई, इस प्रश्न पर ज्योतिषाचार्य कहते हैं, इस बारे में कई कथाएं प्रचलित हैं। किंतु, सबसे पुरानी और प्रचलित कथा सतयुग है। ऐसे में कह सकते हैं कि होली सतयुग से मनाई जाती रही है। वह आगे कहते हैं, चार युग होते हैं- सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग। हमारे शास्त्रों में 1 युग लाखों वर्षों का बताया गया है। सतयुग करीब 17 लाख 28 हजार वर्ष, त्रेतायुग 12 लाख 96 हजार वर्ष, द्वापर युग 8 लाख 64 हजार वर्ष, तो कलियुग 4 लाख 32 हजार वर्ष का होना है। इस हिसाब से ही गणना कहती है कि होली 39 लाख वर्ष पहले, सतयुग से मनाई जा रही है। तब, भगवान ने नृसिंह अवतार लिया था और हिरण्यकश्यप का वध किया था। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, त्रिदेव इस सृष्टि का संचालन करते हैं। ब्रह्मा सृजक हैं, विष्णु पालनहार, तो शिव संहारक। इसके साथ ही विष्णु संतुलन बनाए रखने के लिए भी समय-समय पर अवतार लेते रहते हैं। गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु के 10 अवतारों का जिक्र है। सतयुग में उन्होंने मत्स्य, हयग्रीव, कूर्म, वाराह और नृसिंह अवतार लिया, तो त्रेता में वामन, परशुराम और श्रीराम का। द्वापर में वह श्रीकृष्ण रूप में भक्तों के बीच आए। कलियुग में वह कल्कि अवतार लेंगे। वह समय कलियुग और सतयुग के संधिकाल का होगा। अभी तो कलियुग की शुरुआत ही हुई है। प्रभु अपने सभी अवतारों में दुष्टों का संहार करते हैं, तो अपनी लीलाओं से जीवन जीने का तरीका भी सिखाते हैं। होली का त्योहार भी कुछ ऐसा ही है, जिसका आरंभ सतयुग में भगवान के नृसिंह अवतार के समय हुआ। क्या है सबसे प्रचलित कथा? ज्योतिषाचार्य कहते हैं, सतयुग में एक अति पराक्रमी दैत्य राजा था- हिरण्यकश्यप। हिरण्यकश्यप के भाई हिरण्याक्ष का भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर वध किया था। इस कारण हिरण्यकश्यप उन्हें दुश्मन मानता था। हिरण्यकश्यप का विवाह कयाधु से हुआ, जिससे उसे प्रह्लाद नामक पुत्र की प्राप्ति हुई। हिरण्यकश्यप ने मनचाहे वरदान के लिए ब्रह्मा की तपस्या शुरू की। इस दौरान देवताओं ने उसकी नगरी पर आक्रमण कर दिया और वहां अपना शासन स्थापित कर लिया। उस समय देवर्षि नारद मुनि ने कयाधु की रक्षा की और अपने आश्रम में स्थान दिया। वहीं पर हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद का जन्म हुआ। देवर्षि नारद मुनि की संगत में रहने के कारण प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त बन गया। उधर, कई वर्षों तक तपस्या के बाद हिरण्यकश्यप को ब्रह्मा ने दर्शन दिए। हिरण्यकश्यप ने वरदान मांगा कि मेरी मृत्यु मनुष्य या पशु के हाथों न हो, न किसी अस्त्र-शस्त्र से, ना दिन व रात में, ना भवन के बाहर और ना ही अंदर, न भूमि ना आकाश में हो मेरी मृत्यु हो। कुल मिलाकर, अपनी समझ में उसने अमरता का वरदान मांगा। ब्रह्मा ने उसे यह वरदान दे दिया। किंतु, इसके बाद वह निरंकुश हो गया। वह ऋषि-मुनियों की हत्या करवाने लगा और स्वयं को भगवान घोषित कर दिया। किंतु, स्वयं उसका पुत्र प्रह्लाद विष्णु भक्ति में लीन रहता। यह बात हिरण्यकश्यप को पता चली तो वह गुस्से से फट पड़ा। बार-बार समझाने के बाद भी प्रह्लाद ने जिद नहीं छोड़ी तो उसने उसे मारने का फ़ैसला कर लिया। अब शुरू होती है होलिका की कहानी हिरण्यकश्यप की एक बहन थी होलिका। होलिका को भी भगवान ब्रह्मा से एक वरदान मिला था। यह कि उसे अग्नि नहीं जला सकती। हिरण्यकश्यप ने होलिका को कहा कि वह प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए, ताकि प्रह्लाद भाग न सके और वह उसी अग्नि में जलकर ख़ाक हो जाए। होलिका ने किया तो ऐसा ही, किंतु वह ख़ुद भस्म हो गई और प्रह्लाद बच गया। कहा जाता है कि होलिका के एक वस्त्र में न जलने की शक्तियां समाहित थीं, किंतु भगवान विष्णु की कृपा से चली तेज आंधी से वह वस्त्र होलिका से हटकर, प्रह्लाद के शरीर से लिपट गया था। होलिका के जलने और प्रह्लाद के बच जाने पर नगरवासियों ने उत्सव मनाया, जिसे छोटी होली के रूप में भी जानते हैं। इसके बाद जब यह बात फैली तो विष्णु भक्तों ने अगले दिन और भी भव्य तरीके से उत्सव मनाया। होलिका से जुड़ा होने के कारण आगे इस उत्सव का नाम ही होली पड़ गया। उधर, हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए उसे एक खंभे में बांध दिया। वह प्रह्लाद को मारने ही वाला था कि भगवान विष्णु खंभा फाड़कर नरसिंह अवतार में प्रकट हुए। उन्होंने हिरण्यकश्यप को उसके भवन की चौखट पर ले जाकर, संध्या के समय, अपने गोद में रखकर नाखूनों की सहायता से उसका वध कर दिया। इस तरह ब्रह्मा का वरदान भी नहीं टूटा और आततायी का अंत हो गया। भगवान को भक्त प्रह्लाद को उसका उत्तराधिकारी बना दिया। भगवान शिव और कामदेव की कथा सबसे प्रचलित कथा सतयुग में होलिका दहन की ही है, लेकिन बाद के युगों में भी यह उत्सव अलग-अलग समय पर मनाया जाता रहा और इससे अन्य कथाएं भी जुड़ती गईं। होली की एक कहानी कामदेव की भी है। पार्वती शिव से विवाह करने के लिए उनकी तपस्या में लीन थीं लेकिन खुद ध्यानमग्न शिव ने काफी समय तक ध्यान नहीं दिया। ऐसे में कामदेव से रहा न गया और उन्होंने भगवान शिव पर पुष्प बाण चला दिया। ध्यान भंग होने से शिव को इतना गुस्सा आया कि उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल दी और कामदेव भस्म हो गए। कामदेव के भस्म होने पर उनकी पत्नी रति रोने लगीं और कामदेव को जीवित करने की गुहार लगाई। इसके अगले दिन क्रोध शांत होने पर शिव ने कामदेव को पुनर्जीवित कर किया। माना जाता है कि कामदेव के भस्म होने पर होलिका जलाई जाती है, तो उनके जीवित होने की खुशी में रंगों का त्योहार होली मनाई जाती है। महाभारत काल की कथा जानते हैं? महाभारत काल, यानि द्वापर में युधिष्ठिर को प्रभु श्रीकृष्ण ने एक कहानी सुनाई। एक बार श्रीराम के पूर्वज रघु के शासन मे एक असुर महिला थी। उसे कोई नहीं मार सकता था, क्योंकि उसे एक वरदान था। एक दिन, गुरु वशिष्ठ ने बताया कि उसे मारा जा सकता है, यदि बच्चे अपने हाथों में लकड़ी के छोटे टुकड़े लेकर शहर के बाहरी इलाके के … Read more

होली विशेष : श्रीकृष्ण और पूतना की पौराणिक कथा

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वर्ष के अंतिम माह फाल्गुन माह पूर्णिमा को होलिका दहन होता है। होली की पौराणिक कथा चार घटनाओं से जुड़ी हुई है। पहली होलिका और भक्त प्रहलाद, दूसरी कामदेव और शिव, तीसरी राजा पृथु और राक्षसी ढुंढी और चौथी श्रीकृष्ण और पूतना। आओ इस बार जानते हैं श्रीकृष्ण और पूतना की पौराणिक और प्रामाणिक कथा। वसुदेव का विवाह कंस की बहन देवकी से हुआ। कंस जब देवकी और वसुदेव को रथ पर बैठाकर उनके घर छोड़ने जा रहा था तो रास्ते में आकाशवाणी द्वारा उसे पता चला कि वसुदेव और देवकी का आठवां पुत्र उसकी मृत्यु का कारण बनेगा। बस फिर क्या था कंस ने दोनों को मथुरा के कारागार में डाल दिया। देवकी के छ: पुत्रों को कंस ने मार दिया था और सातवें पुत्र जो कि शेष नाग के अवतार बलराम थे। उनके अंश को योगमाया ने जन्म से पूर्व ही वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया था। फिर श्रीकृष्ण का अवतार आठवें पुत्र के रूप में हुआ। उसी समय वसुदेव ने रात में ही श्रीकृष्ण को गोकुल में नंद और यशोदा के यहां पहुंचा दिया और उनकी नवजात कन्या (योगमाया) को अपने साथ ले आए। परन्तु कंस उस कन्या का वध नहीं कर सका और फिर से आकाशवाणी हुई कि तुझे मारने वाला तो गोकुल मैं पहुंच गया है। इसी कारण कंस ने उस दिन गोकुल में जन्में सभी बच्चों को मारने के आदेश दे दिया। परंतु कोई भी श्रीकृष्‍ण के पास तक नहीं पहुंच सका। तब बालकृष्ण की हत्या करने का काम राक्षसी पूतना को सौंपा गया। उल्लेखनीय है कि पूर्व जन्म में पूतना राजा बलि की पुत्री रत्नबाला थी। वह राजकन्या थी। राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगने के लिए भगवान वामन आए तो उनका रूप सौन्दर्य देखकर उस राजकन्या को हुआ कि ‘मेरी सगाई हो गई है। काश, मुझे ऐसा ही बेटा हो तो मैं गले लगाऊं और उसको अपना खूब दूध पिलाऊं।’ परंतु जब नन्हा मुन्ना वामन विराट हो गया और उसने बलि राजा का सर्वस्व छीन लिया तो वह क्रोधित हो गई “मैं इसको दूध पिलाऊं? नहीं इसको तो मैं जहर पिलाऊं, जहर!’… भगवान ने उसकी मंशा जान ली और कहा तथास्तु। बाद में वही राजकन्या पूतना बनी। पूतना सुंदर नारी का रूप बनाकर बालकृष्ण को विष का स्तनपान कराने गई लेकिन बालकृष्ण के द्वार उसका स्तनपान करने से उसको भयंकर पीड़ा उत्पन्न हुई और वह बालकृष्ण को अपने स्तन से छुड़ाने लगी परंतु यह संभव नहीं हो पाया। कराहते हुए उसने अपना असली रूप धारण किया और चीखती हुई श्रीकृष्ण को लेकर आकाश में पहुंच गई। यह दृश्य देखकर माता यशोदा और माता रोहिणी सहित नगर के सभी लोग घबरा गए और उसके पीछे दौड़े। पूतना कराहते हुए चीखती रहती है। अंतत: वह भूमि पर गिरकर मर जाती है। दूध पीने के बाद बालकृष्ण उसकी छाती पर बैठ जाते हैं। सभी लोग वहां पहुंचते हैं। यशोदा और रोहिणी कहती हैं कोई बचाओ मेरे लल्ला को। तब एक ग्रामीण पूतना की छाती पर चढ़कर जैसे-तैसे लल्ला को नीचे उतार लाता है। यशोदा लल्ला को गले लगा लेती है। बाद में नंद आते हैं तो उनको इस घटना का पता चलता है। फिर एक बूढ़ी महिला कहती है कि ऐसी राक्षसी के हाथों बच जाना तो कोई दैवीय चमत्कार है। ऋषि शांडिल्य से कहकर पूजा और दान करवाओ और उत्सव मनाओ। जिस दिन राक्षसी पूतना का वध हुआ था उस दिन फाल्गुन पूर्णिमा थी। अत: बुराई का अंत हुआ और इस खुशी में समूचे नंदगांववासियो ने खूब जमकर रंग खेला, नृत्य किया और जमकर उत्सव मनाया। तभी से होली में रंग और भंग का समावेश होने लगा।

आज का राशिफल 14 मार्च के पहले दिन बना लक्ष्मी योग, मिथुन कन्या और मीन राशि के जातक पाएंगे लाभ

मेष राशि- मेष राशि वालों के लिए आज का दिन शुभ रहने वाला है। हालांकि खर्चों को लेकर मन परेशान रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। क्रोध से बचें। अफसरों से तालमेल बनाकर रखें। नौकरी में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। यात्रा के योग हैं। वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों को आज किसी शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती है। रोजी-रोजगार में तरक्की करेंगे। मन में शांति व प्रसन्नता रहेगी। आत्मविश्वास भी भरपूर रहेगा। नौकरी में बदलाव के योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र में वृद्धि होगी। काम का बोझ हो सकता है। मिथुन राशि- मिथुन राशि वालों का आज मन प्रसन्न रहेगा। लेकिन आत्मविश्वास में कमी रहेगी। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा। कार्यस्थल पर चुनौती या कठिनाई आ सकती है । आय में वृद्धि होगी। जीवनसाथी का भरपूर सहयोग मिलेगा। कर्क राशि- कर्क राशि वालों के आजआत्मविश्वास में कमी रहेगी। मन अशांत भी रहेगा। किसी राजनेता से भेंट हो सकती है। परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। किसी करीबी से सरप्राइज मिल सकता है। किसी मित्र की मदद से आर्थिक लाभ होने के संकेत हैं। सिंह राशि-सिंह राशि वालों की आज वाणी में मधुरता रहेगी। लेकिन जीवनसाथी के स्वास्थ्य व साथ को लेकर मन परेशान भी हो सकता है। पिता की सेहत का ध्यान रखें। खर्चों में वृद्धि होगी। भागदौड़ भी ज्यादा रहेगी। मित्रों का सहयोग मिलेगा। कन्या राशि- कन्या राशि वालों की आज आय में वृद्धि के संकेत हैं। व्यापार में विस्तार मिल सकता है। हालांकि बेकार के क्रोध से बचें। बातचीत में संतुलित रहें। सेहत का ध्यान रखें। परिवार का साथ मिलेगा। लिखने-पढ़ने से जुड़े कार्यों के लिए आज का दिन शुभ रहने वाला है। तुला राशि- तुला राशि वालों का मन प्रसन्न तो रहेगा लेकिन मनोबल गिरा रहेगा। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय को लेने की सोच रहे हैं तो फिलहाल के लिए टाल दें। अपनी भावनाओं को वश में रखें। कारोबार में बाधा आ सकती है। पिता से धन की प्राप्ति हो सकती है। सेहत का ध्यान रखें। वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि वालों को आज भाग्य का साथ मिलेगा। भाग्यवश कुछ काम बनेंगे। हालांकि किसी बात को लेकर मन खिन्न रह सकता है। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। मन परेशान भी हो सकता है। कारोबार में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकते हैं। फिर भी लाभ के अवसर भी मिलेंगे। धनु राशि- धनु राशि वालों के लिए आज का दिन शुभ रहने वाला है। अपनों का साथ मिलेगा। हालांकि बातचीत में बैलेंस बनाकर रखें। बेकार के वाद-विवाद से बचें। सेहत का ध्यान रखें। नौकरी में तरक्की के मौके मिल सकते हैं। मकर राशि- मकर राशि वालों के लिए आज का दिन उतार-चढ़ाव भरा रहेगा। ज्यादा उत्साही होने से बचें। किसी मित्र के सहयोग से कारोबार के अवसर मिल सकते हैं। माता से धन मिल सकता है। व्यावसायिक सफलता मिलने के योग हैं। कुंभ राशि- कुंभ राशि के जातक आज किसी अज्ञातभय से परेशान हो सकते हैं। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। भवन सुख में वृद्धि हो सकती है। परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। खर्च बढ़ेंगे।आर्थिक लेनदेन में बारीकी से नजर रखें। मीन राशि- मीन राशि वालों के लिए आज खर्च की अधिकता रहेगा। सिरदर्द या नेत्रपीड़ा भी हो सकती है। अज्ञात भय सताएगा। कुछ भी नुकसान होने का खतरा बना हुआ है। आर्थिक रूप से विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

माता लक्ष्मी की शुक्रवार को इस विधि से करें पूजा

हिंदू धर्म शास्त्रों में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित किया गया है. शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी को समर्पित किया गया है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता लक्ष्मी समुद्र मंथन के समय प्रकट हुईं थीं. हिंदू धर्म शास्त्रों में माता लक्ष्मी को धन, वैभव की देवी मााना गया है. शुक्रवार के दिन विधि-विधान से माता लक्ष्मी का पूजन और व्रत किया जाता है. मान्यताओं के अनुसार… मान्यताओं के अनुसार, जिस पर माता लक्ष्मी प्रसन्न हो जाती है उसके घर में धन और वैभव की कोई कमी नहीं रहती. घर में हमेशा खुशहाली रहती है. शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी के पूजन और व्रत के बारे में तो सभी जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शुक्रवार के दिन गुप्त लक्ष्मी की पूजा की जाती है. दरअसल, गुप्त लक्ष्मी, जिन्हें धूमावती भी कहा जाता है. ये अष्ट लक्ष्मी के रूप में भी जानी जाती हैं.मान्यता है कि जो भी शुक्रवार को गुप्त लक्ष्मी (अष्ट लक्ष्मी) की पूजा करता है उसके घर की तीजोरी हमेशा धन-दौलत से भरी रहती है. पूजा विधि     शास्त्रों में बताया गया है कि मां लक्ष्मी के पूजन के लिए रात का समय शुभ माना गया है.     शुक्रवार की रात 9 से 10 बजे के बीच मां लक्ष्मी का पूजन करना चाहिए.     पूजा के लिए सबसे पहले स्वस्छ वस्त्र धारण करने चाहिए.     फिर पूजा की चौकी पर गुलाबी कपड़ा बिछाकर श्रीयंत्र और गुप्त लक्ष्मी (अष्ट लक्ष्मी) की प्रतीमा या तस्वीर रखनी चाहिए.     फिर उनके माता के सामने 8 घी के दीपक जलाने चाहिए.     फिर अष्टगंध से श्रीयंत्र और अष्ट लक्ष्मी को तिलक लगाना चाहिए.     मां को लाल गुडहल के फूलों की माला पहनानी चाहिए.     खीर का भोग लगाना चाहिए     ऐं ह्रीं श्रीं अष्टलक्ष्मीयै ह्रीं सिद्धये मम गृहे आगच्छागच्छ नमः स्वाहा मंत्र का जाप करना चाहिए.     अंत में माता की आरती करनी चाहिए.     फिर आठों दीपक को घर की आठ दिशाओं में रख देना चाहिए. माता लक्ष्मी की पूजा का महत्व हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी की पूजा सिर्फ घर में धान-धान्य की बढ़ोतरी के लिए ही नहीं की जाती, बल्कि माता लक्ष्मी इसलिए भी होती है कि समृद्धि और सौभाग्य प्राप्त हो सके. माता लक्ष्मी की पूजा से नकारात्मक शक्तियां भी नष्ट हो जाती हैं.

होली पर भद्रा का साया, जाने कब होगा होलिका दहन

पंचांग के अनुसार, हर साल फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन किया जाता है. बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मनाया जाता है. होलिका दहन से पहले महिलाएं घर में सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं. उसके अगले दिन रंगों वाली होली खेली जाती है. मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में होलिका का पूजा और दहन करने शुभ फलों की प्राप्ति होती है. होलिका दहन से पहले महिलाएं घर की सुख-समृद्धि के लिए पूजा पाठ करती है और होलिका दहन के दौरान इसकी कच्चा सूत परिक्रमा करते हुए लपेटा जाता है. इसके साथ ही कई अन्य पूजा -पाठ की रस्में की जाती हैं, लेकिन इस बार होलिका दहन पर सुबह से ही भद्रा का साया है. होलिका दहन पर भद्र का समय वैदिक पंचांग के अनुसार, आज सुबह 10 बजकर 35 मिनट से लेकर रात 11 बजकर 26 मिनट तक भद्रा रहेगी. ऐसे में रात 11:30 बजे के बाद होलिका दहन किया जा सकेगा. होलिका दहन का महत्व होलिका दहन का अच्छाई पर बुराई की जीत का प्रतीक माना जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि वह अग्नि में नहीं जल सकती. उसने भक्त प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने का प्रयास किया, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका जलकर भस्म हो गई. मान्यता है कि इस होलिका दहन के दौरान परिक्रमा करते हुए प्रार्थना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

भद्रा काल ने बढ़ाई होलिका दहन पर मुश्किल, बस इतनी देर है पूजा का शुभ मुहूर्त

हर साल फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन करने की परंपरा है. इस साल होलिका दहन 13 मार्च की रात को किया जाएगा. होलिका दहन का त्योहार बुराई की अच्छाई पर जीत के प्रतीक के तौर पर मनाया जाता है. वहीं, भारतीय नव संवत्सर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को शुरू होता है. इससे पूर्व पुराने संवत्सर को विदाई देने और इसकी नकारात्मकता को समाप्त करने के लिए भी होलिका दहन किया जाता है. इसलिए इसे कहीं-कहीं संवत जलाना भी कहा जाता है. इस बार होलिका दहन के दिन भद्रा का साया रहने वाला है. इसलिए होलिका दहन के मुहूर्त को लेकर लोगों में बहुत कन्फ्यूजन है. आइए आज जानते हैं कि होलिका दहन पर भद्रा का साया कब से कब तक रहेगा. होलिका दहन का मुहूर्त क्या है और होलिका दहन से पूर्व पूजा का विधान क्या है. होलिका दहन का मुहूर्त क्या है? होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है. इसमें भद्रा काल का विशेष ध्यान रखा जाता है. भद्रा के साए में होलिका दहन वर्जित है. इस बार पूर्णिमा तिथि 13 मार्च यानी आज सुबह 10.36 से लेकर 14 मार्च को दोपहर 12.23 तक रहेगी. पूर्णिमा के साथ ही भद्रा काल आरम्भ हो जाएगा. जो रात 11.26 तक रहेगा. इसलिए भद्रा काल से बचते हुए 13 मार्च की रात को 11.27 के बाद होलिका दहन किया जाएगा. होलिका दहन से पहले क्या करें? पूजा की थाली लेकर होलिका दहन वाली जगह पर जाएं. भूमि को प्रणाम करें और जल अर्पित करें. इसके बाद उसी स्थान पर एक दीपक जलाएं. गोबर के उपले, हल्दी और काले तिल के दाने होलिका में डालें. होलिका की तीन बार परिक्रमा करते हुए कलावा बांधें. फिर सूखा हुआ नारियल चढ़ाएं. आखिर में घर के लोगों को और स्वयं को रोली या हल्दी का तिलक लगाएं. कैसे करें होलिका दहन? होलिका दहन में किसी वृक्ष कि शाखा को जमीन में गाड़कर, उसे चारों तरफ से लकड़ी, उपले से घेरकर निश्चित मुहूर्त में जलाया जाता है. इसमें छेद वाले गोबर के उपले, गेहूं की नई बालियां और उबटन जलाया जाता है. ताकि वर्ष भर व्यक्ति को आरोग्य की प्राप्ति हो और उसकी सारी बुरी बलाएं अग्नि में भस्म हो जाएं. होलिका की राख को घर में लाकर उससे तिलक करने की परंपरा भी है. होलिका दहन की विशेषता और लाभ कहते हैं कि होलिका दहन के दिन मन की तमाम समस्याओं का निवारण हो सकता है. रोग, बीमारी और विरोधियों की समस्या से निजात मिल सकती है. आर्थिक बाधाओं से राहत मिल सकती है. अगर आप ईश्वर की कृपा पाना चाहते हैं तो इस दिन आसानी से प्राप्त कर सकते हैं. अलग-अलग चीजों को अग्नि में डालकर अपनी अपनी बाधाओं से मुक्ति पा सकते हैं.

धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो चंद्र ग्रहण का कारण राहु-केतु माने जाते हैं, कल लगेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण

नई दिल्ली हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण खगोलीय, आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से एक विशेष घटना है। इसका जनमानस पर गहरा प्रभाव पड़ता है। धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो चंद्र ग्रहण का कारण राहु-केतु माने जाते हैं। ज्योतिष विद्या के अनुसार, ये ग्रहण केतु के कारण लगने वाला है। राहु और केतु छाया ग्रहों को सांप की भांति माना गया है, जिनके डसने पर ग्रहण लगता है। वहीं, कुछ लोगों का मानना है की जब राहु और केतु चंद्रमा को निगलने की कोशिश करते हैं तब चंद्र ग्रहण लगता है। वहीं वैज्ञानिक दृष्टि से जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य एक सीधी रेखा में आ जाते हैं,तो इस दौरान सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर पड़ता है,लेकिन चंद्रमा पर नहीं पड़ता है। इस घटना को ही चंद्र ग्रहण कहते हैं। चंद्र ग्रहण के प्रकार- चंद्र ग्रहण 3 प्रकार के होते हैं। आंशिक चंद्र ग्रहण, पूर्ण चंद्र ग्रहण और उपछाया चंद्र ग्रहण। आंशिक चंद्रग्रहण में चांद का सिर्फ एक भाग पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है। उपछाया चंद्र ग्रहण के दौरान धरती की छाया का हल्का बाहरी भाग चंद्रमा की सतह पर पड़ता है। इस ग्रहण को देखना थोड़ा मुश्किल होता है। पूर्ण चंद्र ग्रहण उस समय लगता है, जब पूरे चंद्रमा की सतह पर धरती की छाया पड़ती है। चंद्र ग्रहण- 14 मार्च, 2025 14 मार्च, 2025 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। इस दिन होली भी है। यह चन्द्र ग्रहण खग्रास चंद्र ग्रहण होगा। भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा। यहां दिखाई देगा चन्द्र ग्रहण यह चन्द्र ग्रहण मुख्यतः प्रशान्त महासागर, उत्तरी अमेरिका और दक्षिण अमेरिका, पश्चिमी यूरोप और पश्चिमी अफ्रीका में दिखाई देगा। भारतीय समयानुसार चंद्र ग्रहण का समय- सुबह 09 बजकर 27 मिनट पर भारतीय समयानुसार उपछाया ग्रहण प्रारंभ होगा और सुबह 10 बजकर 39 मिनट पर आंशिक और सुबह 11 बजकर 56 मिनट पर पूर्ण चंद्र ग्रहण समाप्त होगा। भारत में नहीं पड़ेगा कोई प्रभाव- इस चंद्र ग्रहण का प्रभाव भारत पर नहीं होगा, क्योंकि जिस समय ग्रहण होगा, उस समय यहां दिन हो रहा होगा। ऐसे में इसका धार्मिक महत्व नहीं माना जाएगा। सूतक काल मान्य नहीं होगा- यह ग्रहण भारत में नहीं दिखाई दे रहा है, जिस वजह से सूतक काल मान्य नहीं होगा।

होलिका दहन आज, होली पर्व का उत्साह होलिका दहन के साथ होगा शुरू, कल रंगों का पर्व मनाया जाएगा

जबलपुर होली पर्व का उत्साह आज रात होलिका दहन के साथ शुरू हो जाएगा, कल शुक्रवार को रंगों का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पं. सौरभ दुबे के अनुसार, होलिका दहन का शुभ मुहूर्त गुरुवार की रात्रि 11,30 बजे के उपरांत रहेगा। गुरुवार के दिन भद्रा दोपहर 11 बजकर सात मिनट से प्रारंभ होकर रात्रि 11 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। अतः होलिका दहन भद्रा उपरांत ही करना चाहिए। चंद्रमा का संचरण कन्या राशि मे रहेगा। जिसके कारण भद्रा का निवास पाताल लोक में रहता है। पाताल की भद्रा अनिष्टकारी मानी जाती है। इस कारण भद्रा समाप्त होने के उपरांत होलिका दहन शुभ रहेगा।   राशि अनुसार दें आहुति     मेष राशि : होलिका दहन में गुड़ की आहुति चढ़ाएं।     वृषभ राशि : होलिका दहन में मिश्री एवं नारियल गिर की आहुति चढ़ाएं।     मिथुन राशि : होलिका दहन में कपूर एवं इलायची की आहुति चढ़ाएं।     कर्क राशि : होलिका दहन में कच्चा चावल, सफ़ेद तिल की आहुति दें।     सिंह राशि : होलिका दहन में गूगल एवं गुड की आहुति चढ़ाएं।     कन्या राशि : होलिका दहन में पान और हरी इलायची की आहुति दें।     तुला राशि : होलिका दहन में कपूर एवं सफेद तिल की आहुति चढ़ाएं।     वृश्चिक राशि : होलिका दहन में गुड़ की आहुति चढ़ाए।     धनु राशि : होलिका दहन में हल्दी की गांठ व पीली सरसों की आहुति दें।     मकर राशि : होलिका दहन में काले तिल व लौंग की आहुति चढ़ाएं।     कुंभ राशि : होलिका दहन में काली सरसों, लौंग व गूगल की आहुति दें।     मीन राशि : होलिका दहन में पीली सरसों व गुड की आहुति चढ़ाएं।  

होली के दिन चंद्र ग्रहण से पहले कर लें ये उपाय बन जाएंगे काम

होली के दिन चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है जिसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व है. इस दिन चंद्र ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन कुछ विशेष उपाय करके इसके नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है. ज्योतिष शास्त्र में चंद्र ग्रहण को अशुभ माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि चंद्र ग्रहण के दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है और चंद्र ग्रहण के दौरान भगवान शिव की पूजा करना बहुत ही शुभ माना जाता है. भोलेनाथ की पूजा करने से राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सकता है. पंचांग के अनुसार, साल 2025 का पहला चंद्र ग्रहण 14 मार्च दिन शुक्रवार को लगेगा. भारतीय समयानुसार, चंद्र ग्रहण 14 मार्च को सुबह 9 बजकर 27 मिनट से दोपहर 3 बजकर 30 मिनट तक रहेगा. इस चंद्र ग्रहण की अवधि 6 घंटे 3 मिनट की होगी. यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा. यह ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, अधिकांश अफ्रीका, अटलांटिक आर्कटिक महासागर, पूर्वी एशिया आदि में देखा जा सकेगा. चंद्र ग्रहण से पहले कर लें ये काम     चंद्र ग्रहण के दौरान भगवान शिव की पूजा करना बहुत ही शुभ माना जाता है. भगवान शिव को चंद्रमा का स्वामी माना जाता है, इसलिए उनकी पूजा करने से चंद्र ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सकता है.     चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्र मंत्र का जाप करना भी बहुत ही लाभदायक होता है. आप “ॐ सोम सोमाय नमः” मंत्र का जाप कर सकते हैं.     चंद्र ग्रहण के दौरान दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है. आप गरीबों और जरूरतमंदों को सफेद वस्त्र, चावल, दूध या चांदी का दान कर सकते हैं.     चंद्र ग्रहण से पहले तुलसी के पत्ते तोड़कर रख लें और ग्रहण के समय उन्हें भोजन और पानी में डालकर प्रयोग करें.     ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान अवश्य करें और घर की साफ सफाई करें तो ग्रहों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सकता है. इन राशि वालों के बन जाएंगे बिगड़े काम चंद्र ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है, लेकिन कुछ राशियां ऐसी हैं जिन पर इसका प्रभाव अधिक होता है. इन राशियों के जातकों को चंद्र ग्रहण से पहले विशेष उपाय करने चाहिए.     वृषभ राशि के जातकों को चंद्र ग्रहण के दौरान भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए और चंद्र मंत्र का जाप करना चाहिए. इससे उनके बिगड़े हुए काम जल्दी बनने लगेंगे और जीवन में हर कार्य में सफलता प्राप्त होगी.     कर्क राशि के जातकों को चंद्र ग्रहण के दौरान दान करना चाहिए और तुलसी के पत्तों का प्रयोग करना चाहिए. ऐसा करने से लोगों पर ग्रहण का प्रभाव कम होता है.     वृश्चिक राशि के जातकों को चंद्र ग्रहण के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए और गरीबों को भोजन कराना चाहिए. इससे लोगों के संकट जल्द ही दूर होने लगेंगे.     मीन राशि के जातकों को चंद्र ग्रहण के दौरान भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए और पीले वस्त्रों का दान करना चाहिए. ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा से लोगों के जीवन में कभी परेशानियां नहीं आएंगी और हर कष्ट दूर होगा. इन बातों का रखें खास ध्यान चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए. चंद्र ग्रहण के दौरान भोजन और पानी का सेवन नहीं करना चाहिए और नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए. लोगों को यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि चंद्र ग्रहण एक प्राकृतिक घटना है, और इसका प्रभाव सभी लोगों पर अलग-अलग होता है. यदि आपको कोई चिंता है, तो आप किसी ज्योतिषी से सलाह ले सकते हैं.

13 मार्च 2025 का दिन आपके लिए कैसा रहेगा?इन राशियों की बदल जाएगी किस्मत

मेष राशि– आज विद्यार्थियों को अपना काम कल पर टालने से बचना चाहिए। आपका जीवनसाथी आज आपको एहसास दिलाएगा कि लव लाइफ में रिस्पेक्ट और केयर जरूरी हैं। हेल्दी डाइट लें। नए अवसरों की तलाश करें। वृषभ राशि– आज छोटे-मोटे व्यावसायिक मुद्दे सामने आएंगे। परिवार में वाद-विवाद होने की आशंका है। इसलिए ऐसे में खुद पर नियंत्रण रखें। आज स्वार्थी और गुस्सैल इंसान से बचें क्योंकि वह आपको तनाव दे सकता है। मिथुन राशि- मैनेजर्स और टीम लीडर को आज जूनियर्स को सिखाने का मौका मिलेगा। स्वास्थ्य के मामले में आप भाग्यशाली रहने वाले हैं। अपने बॉस के साथ कनेक्शन को मजबूत करने के लिए आज कोशिश कर सकते हैं। कर्क राशि– आज स्वास्थ्य संबंधी कोई बड़ी समस्या रोजमर्रा की जिंदगी पर असर नहीं डालेगी। आपके और आपके पार्टनर के बीच एक मजबूत कनेक्शन नजर आ रहा है। छोटी-मोटी आर्थिक दिक्कतों के बावजूद जिंदगी आराम से चलती रहेगी। सिंह राशि– बिना किसी हिचकिचाहट के अपना प्यार दिखाएं। दिन खत्म होने से पहले नए अवसर दरवाजे पर दस्तक देंगे। ऑफिस रोमांस में न पड़ें। कार्यस्थल पर किसी भी बड़े प्रोजेक्ट से निपटने के लिए पेशेवर रूप से तैयार रहें। कन्या राशि- आज आपको और आपके जीवनसाथी को कोई अच्छी खबर मिल सकती है। सिंगल्स, आपको पहली नजर में प्यार भी हो सकता है। परिवार की जरूरतों को पूरा करते-करते आप अक्सर खुद को आराम देना भूल जाते हैं। तुला राशि- आज बड़े वित्तीय डिसीजन लेने की स्थिति में रहेंगे। किसी दोस्त के साथ पैसों से संबंधीत विवाद को सुलझाने के लिए भी पहल कर सकते हैं। आज लग्जरी पर अधिक खर्च न करें। वृश्चिक राशि- लंबे समय से बकाया राशि आज वसूल हो सकती है। अपनी पारिवारिक जिम्मेदारी न भूलें। चीजों के घटित होने का इंतजार न करें, बाहर जाएं और नए अवसरों की तलाश करें। धनु राशि- कोई भी नया काम या प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले उन लोगों से बात करें, जिन्होंने उस क्षेत्र में पर्याप्त अनुभव प्राप्त किया हो। घर में उत्सव का माहौल आपके तनाव को कम करेगा। सलाद के साथ भरपूर डाइट लें। मकर राशि– आज पुराने इनवेस्टमेंट से आप अच्छा पैसा कमाएंगे। बच्चों की देखभाल में शेड्यूल बिजी रहेगा। करियर तौर पर अपने क्लाइंट्स से ऐसा कोई वादा न करें, जिसे निभाना आपके लिए मुश्किल हो। आपका कोई पुराना दोस्त आपसे मिलने आ सकता है। कुंभ राशि- आपकी सबसे बड़ी संपत्ति आपका हसमुख नेचर है। प्रेमी जोड़े पारिवारिक भावनाओं का जरूरत से ज्यादा ख्याल रखेंगे। आपको लम्बी बीमारी से छुटकारा मिल सकता है। पैसों को मैनेज करने के लिए अच्छी तरह से योजना बनाएं। मीन राशि- आज का आपका दिन काफी बेहतरीन रहने वाला है। आप पैसे की अहमियत को अच्छी तरह से जानते हैं। ऑफिस में लोगों के साथ व्यवहार करते समय सावधानी बरतें- समझदारी और धैर्य रखें।

साल का पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च को लगेगा, खंडग्रास सूर्य ग्रहण होगा, इस दौरान चंद्रमा सूर्य का कुछ हिस्सा ही ढकेगा

नई दिल्ली साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च को लगेगा। यह खंडग्रास सूर्य ग्रहण होगा जिसका मतलब है कि इस दौरान चंद्रमा सूर्य का कुछ हिस्सा ही ढकेगा। यह ग्रहण ज्योतिषीय दृष्टि से भी खास रहेगा क्योंकि इस दौरान मीन राशि में सूर्य, राहु, शुक्र, बुध और चंद्रमा मौजूद रहेंगे। सूर्य ग्रहण 2025 की तिथि और समय यह ग्रहण 29 मार्च 2025 को लगेगा और दोपहर 2:21 बजे से शुरू होकर शाम 6:14 बजे तक रहेगा। यह घटना चैत्र मास की अमावस्या के दिन घटित होगी। कहां-कहां दिखाई देगा सूर्य ग्रहण? यह ग्रहण पूरी तरह से नहीं बल्कि आंशिक रूप से कुछ देशों में दिखाई देगा। खासतौर पर यूरोप, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इसे देखा जा सकेगा। क्या भारत में दिखेगा सूर्य ग्रहण? बता दें कि भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। चूंकि यह ग्रहण भारतीय समयानुसार नहीं लगेगा इसलिए इसका धार्मिक या ज्योतिषीय प्रभाव भी नहीं माना जाएगा। इसी वजह से भारत में इस ग्रहण के लिए सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें? ➤ भगवान विष्णु और शिवजी का ध्यान करें और मंत्र जाप करें। ➤ ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें और घर की शुद्धि करें। ➤ जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र आदि दान करें। क्या न करें? ➤ ग्रहण के दौरान भोजन पकाने और खाने से बचें। ➤ इस समय पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक कार्य न करें। ➤ कोई भी शुभ कार्य करने से परहेज करें। अंत में बता दें कि यह सूर्य ग्रहण खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है लेकिन भारत में इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसलिए भारतीय लोगों को इस ग्रहण के नियमों का पालन करने की जरूरत नहीं होगी।  

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