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राजा विक्रमादित्य को दिए थे दर्शन मां बगलामुखी देवी ने, पढ़ें कहां और कैसे

डोंगरगढ़ (छत्‍तीसगढ़) जिला मुख्यालय से 38 किमी दूर पहाड़ों में विराजित है मां बम्लेश्वरी का मंदिर। यहां मां बम्लेश्वरी के दो मंदिर है। पहला मंदिर ऊंची पहाड़ी पर और दूसरा मंदिर के प्रवेश द्वार से पश्चिम दिशा में स्थित है। पहाड़ वाली मां बम्लेश्र्वरी देवी के गर्भगृह के चारों ओर गुफाएं हैं। अंचल के लोग नीचे मंदिर में स्थापित माता को छोटी बम्लाई और पहाड़ावाली मां को बड़ी बम्लाई कहते है। लगभग 1 हजार से सीढ़ियां चढ़कर पहाड़ों वाली मां के दर्शन होते है। यहां तक पहुंचने के लिए रोप-वे भी बना हुआ है। मां बम्लेश्र्वरी मंदिर की स्थापना की एक रोचक कथा है। आज से ढाई हजार वर्ष पूर्व कामाख्या नगरी जिसे आज डोंगरगढ़ के नाम से जाना जाता है, वहां पहले राजा वीरसेन का शासन था। राजा वीरसेन की कोई संतान नहीं थी। जिसके कारण उन्होंने शिवजी और मां दुर्गा की उपासना की। उपासना के एक वर्ष बाद रानी ने एक पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम मदनसेन रखा गया। मां दुर्गा और भगवान शिव का उपासक होने के कारण वीरसेन ने यहां कामाख्या नगरी में मां बम्लेश्वरी का मंदिर बनवाया। इसके बाद राजा मदनसेन के पुत्र कामसेन ने यहां शासन किया। कामसेन के दरबार में नृत्यकला में प्रवीण कामकंदला व अलौकिक संगीतज्ञ और मधुर गायक माधवनल थे। दोनों के बीच अथाह प्रेम था। परिस्थतिवश माधवनल को कामाख्या नगरी का त्याग करना पड़ा। माधवनल कामख्या नगरी से सीधे उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के पास पहुंचा और उन्हें अपनी करुण कथा सुनाई। कथा सुनकर राजा विक्रमादित्य ने कामाख्या नगरी पर आक्रमण कर दिया। कामसेन और विक्रमादित्य के बीच भयंकर युद्ध हुआ। युद्ध में राजा विक्रमादित्य विजयी हुए। युद्ध में कामख्या नगरी पूरी तरह तबाह हो गई। नगर में सिर्फ डोंगर बचा और माता का मंदिर। युद्ध के बाद विक्रमादित्य ने माधवनल और कामकंदला की प्रेम की परीक्षा लेने के लिए यह अफवाह फैला दी कि युद्ध में माधवनल वीरगति को प्राप्त हो गया है। जैसे ही यह समाचार कामकंदला को मिला उसने एक तालाब में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए। यह तालाब आज भी मंदिर के पास पहाड़ी के नीचे स्थित है। कामकंदला की मृत्यु का समाचार पाकर माधवनल ने भी अपना जीवन समाप्त कर लिया। राजा विक्रमादित्य को जब यह समाचार मिला तो उन्हें गहरा पश्चाताप हुआ। उन्होंने मां बगलामुखी की आराधना शुरू कर दी। लेकिन माता ने दर्शन नहीं दिए। इसके बाद राजा विक्रमादित्य भी अपने प्राण त्यागने के लिए तत्पर हो गए। इसी समय मां बगलामुखी ने राजा को दर्शन दिए। वरदान मांगने पर राजा ने कामकंदला और माधवनल का जीवन और मां बगलामुखी के कामाख्या में ही निवास करने का वर मांगा। तभी मां बगलामुखी साक्षात् रूप में यहां है। ऐसा कहा जाता है बगलामुखी का ही परिवर्तित नाम बम्लेश्वरी है।

जीवन में उन्नति चाहते हैं तो नियमित पढ़ें आदित्य हृदय स्तोत्र

आदित्य ह्रदय स्तोत्र का नियमित पाठ करने से अप्रत्याशित लाभ मिलता है। लंबी उम्र, नौकरी में पदोन्नति, धन प्राप्ति, प्रसन्नता, आत्मविश्वास तथा सभी कार्यों में सफलता मिलती है तथा हर मनोकामना सिद्ध होती है। इतना ही नहीं यह पाठ हर तरह के शत्रु से मुक्ति भी दिलाता है। सरल शब्दों में कहें तो आदित्य ह्रदय स्तोत्र हर क्षेत्र में चमत्कारी सफलता देता है। यहां पढ़ें आदित्य हृदय स्तोत्र संपूर्ण पाठ- आदित्य ह्रदय स्तोत्र ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्‌ । रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्‌ ॥1॥ दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम्‌ । उपगम्याब्रवीद् राममगस्त्यो भगवांस्तदा ॥2॥ राम राम महाबाहो श्रृणु गुह्मं सनातनम्‌ । येन सर्वानरीन्‌ वत्स समरे विजयिष्यसे ॥3॥ आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्‌ । जयावहं जपं नित्यमक्षयं परमं शिवम्‌ ॥4॥ सर्वमंगलमागल्यं सर्वपापप्रणाशनम्‌ । चिन्ताशोकप्रशमनमायुर्वर्धनमुत्तमम्‌ ॥5॥ रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम्‌ । पुजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम्‌ ॥6॥ सर्वदेवात्मको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावन: । एष देवासुरगणांल्लोकान्‌ पाति गभस्तिभि: ॥7॥ एष ब्रह्मा च विष्णुश्च शिव: स्कन्द: प्रजापति: । महेन्द्रो धनद: कालो यम: सोमो ह्यापां पतिः ॥8॥ पितरो वसव: साध्या अश्विनौ मरुतो मनु: । वायुर्वहिन: प्रजा प्राण ऋतुकर्ता प्रभाकर: ॥9॥ आदित्य: सविता सूर्य: खग: पूषा गभस्तिमान्‌ । सुवर्णसदृशो भानुर्हिरण्यरेता दिवाकर: ॥10॥ हरिदश्व: सहस्त्रार्चि: सप्तसप्तिर्मरीचिमान्‌ । तिमिरोन्मथन: शम्भुस्त्वष्टा मार्तण्डकोंऽशुमान्‌ ॥11॥ हिरण्यगर्भ: शिशिरस्तपनोऽहस्करो रवि: । अग्निगर्भोऽदिते: पुत्रः शंखः शिशिरनाशन: ॥12॥ व्योमनाथस्तमोभेदी ऋग्यजु:सामपारग: । घनवृष्टिरपां मित्रो विन्ध्यवीथीप्लवंगमः ॥13॥ आतपी मण्डली मृत्यु: पिगंल: सर्वतापन:। कविर्विश्वो महातेजा: रक्त:सर्वभवोद् भव: ॥14॥ नक्षत्रग्रहताराणामधिपो विश्वभावन: । तेजसामपि तेजस्वी द्वादशात्मन्‌ नमोऽस्तु ते ॥15॥ नम: पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नम: । ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नम: ॥16॥ जयाय जयभद्राय हर्यश्वाय नमो नम: । नमो नम: सहस्त्रांशो आदित्याय नमो नम: ॥17॥ नम उग्राय वीराय सारंगाय नमो नम: । नम: पद्मप्रबोधाय प्रचण्डाय नमोऽस्तु ते ॥18॥ ब्रह्मेशानाच्युतेशाय सुरायादित्यवर्चसे । भास्वते सर्वभक्षाय रौद्राय वपुषे नम: ॥19॥ तमोघ्नाय हिमघ्नाय शत्रुघ्नायामितात्मने । कृतघ्नघ्नाय देवाय ज्योतिषां पतये नम: ॥20॥ तप्तचामीकराभाय हरये विश्वकर्मणे । नमस्तमोऽभिनिघ्नाय रुचये लोकसाक्षिणे ॥21॥ नाशयत्येष वै भूतं तमेष सृजति प्रभु: । पायत्येष तपत्येष वर्षत्येष गभस्तिभि: ॥22॥ एष सुप्तेषु जागर्ति भूतेषु परिनिष्ठित: । एष चैवाग्निहोत्रं च फलं चैवाग्निहोत्रिणाम्‌ ॥23॥ देवाश्च क्रतवश्चैव क्रतुनां फलमेव च । यानि कृत्यानि लोकेषु सर्वेषु परमं प्रभु: ॥24॥ एनमापत्सु कृच्छ्रेषु कान्तारेषु भयेषु च । कीर्तयन्‌ पुरुष: कश्चिन्नावसीदति राघव ॥25॥ पूजयस्वैनमेकाग्रो देवदेवं जगप्ततिम्‌ । एतत्त्रिगुणितं जप्त्वा युद्धेषु विजयिष्यसि ॥26॥ अस्मिन्‌ क्षणे महाबाहो रावणं त्वं जहिष्यसि । एवमुक्ता ततोऽगस्त्यो जगाम स यथागतम्‌ ॥27॥ एतच्छ्रुत्वा महातेजा नष्टशोकोऽभवत्‌ तदा ॥ धारयामास सुप्रीतो राघव प्रयतात्मवान्‌ ॥28॥ आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वेदं परं हर्षमवाप्तवान्‌ । त्रिराचम्य शूचिर्भूत्वा धनुरादाय वीर्यवान्‌ ॥29॥ रावणं प्रेक्ष्य हृष्टात्मा जयार्थं समुपागतम्‌ । सर्वयत्नेन महता वृतस्तस्य वधेऽभवत्‌ ॥30॥ अथ रविरवदन्निरीक्ष्य रामं मुदितमना: परमं प्रहृष्यमाण: । निशिचरपतिसंक्षयं विदित्वा सुरगणमध्यगतो वचस्त्वरेति ॥31॥

Shriram Sharma aachary : पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के 8 प्रेरक विचार

पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का जन्म तिथि के अनुसार आश्विन मास में उत्तरप्रदेश के आगरा जनपद के आंवलखेड़ा गांव में हुआ था। वर्तमान युग में हर व्यक्ति धर्म-कर्म की राह से भटक रहा है। ऐसे व्यक्तियों को सही रास्ता दिखलाने के लिए प्रस्तुत है शांतिकुंज गायत्री परिवार के संस्थापक आचार्य पं. श्रीराम शर्मा के 8 प्रेरक विचार- * जिस भी व्यक्ति ने अपने जीवन में स्नेह और सौजन्य का समुचित समावेश कर लिया है, वह सचमुच ही सबसे बड़ा कलाकार है। * जीवन को प्रसन्न रखने के दो ही उपाय है- एक अपनी आवश्यकताएं कम करें और दूसरा विपरित परिस्थितियों में भी तालमेल बिठाकर कार्य करें। * संयम, सेवा और सहिष्णुता की साधना ही गृहस्थ का तपोवन है। * अपने आचरण से प्रस्तुत किया उपदेश ही सार्थक और प्रभावी होता है, अपने वाणी से किया गया नहीं। * दूसरों के साथ वह व्यवहार न करो, जो तुम्हें अपने लिए पसंद नहीं है। * जिन्हें लंबी जिंदगी जीनी हो, वे बिना तगड़ी (ज्यादा, कड़ी) भूख लगे कुछ भी न खाने की आदत डालें। * किसी भी व्यक्ति के द्वारा किए गए पाप उसके साथ रोग, शोक, पतन और संकट साथ लेकर ही आते है। * हर व्यक्ति को अपना मूल्य समझना चाहिए और अपने आप पर यह विश्वास करना चाहिए कि वे संसार के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति है।

Sawan Month 2021 Start Date : इस बार कब शुरू होगा शिव का श्रावण मास

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार श्रावण मास वर्ष का पांचवां माह होता है। अंग्रेजों के कैलेंडर के अनुसार यह जुन-जुलाई के बीच आता है। इस बार इस माह की शुरुआत 25 जुलाई 2021 रविवार से हो रही है। 26 जुलाई को सावन का पहला सोमवार रहेगा। 22 अगस्त रविवार रक्षा बंधन के दिन श्रावण मास समाप्त हो जाएगा और भाद्रपद माह की शुरुआत हो जाएगी। दक्षिण भारत में श्रावण मास का प्रारंभ देर से होता है। अषाड़ माह के शुक्ल पक्ष की समाप्ति के पश्चात श्रावण माह का प्रारंभ होता है। अषाड़ माह से ही वर्षा ऋतु का प्रारंभ हो जाता है और इसी माह की शुक्ल एकादशी के दिन देव सो जाते हैं। देवशयनी एकादशी से ही चतुर्मास का प्रारंभ हो जाता है। श्रावण माह से व्रत और साधना के चार माह अर्थात चातुर्मास प्रारंभ होते हैं। ये 4 माह हैं- श्रावण, भाद्रपद, आश्‍विन और कार्तिक। पौराणिक कथा के अनुसार देवी सती ने अपने दूसरे जन्म में शिव को प्राप्त करने हेतु युवावस्था में श्रावण महीने में निराहार रहकर कठोर व्रत किया और उन्हें प्रसन्न कर विवाह किया था। इसलिए यह माह विशेष है। श्रावण शब्द श्रवण से बना है जिसका अर्थ है सुनना। अर्थात सुनकर धर्म को समझना। इस माह में सत्संग का महत्व है। इस माह में पतझड़ से मुरझाई हुई प्रकृति पुनर्जन्म लेती है। श्रावण माह में सिर्फ सावन सोमवार ही नहीं संपूर्ण माह ही व्रत रखना जाता है। जिस तरह गुड फ्राइडे के पहले ईसाइयों में 40 दिन के उपवास चलते हैं और जिस तरह इस्लाम में रमजान माह में रोजे (उपवास) रखे जाते हैं उसी तरह हिन्दू धर्म में श्रावण मास को पवित्र और व्रत रखने वाला माह माना गया है। पूरे श्रावण माह में निराहारी या फलाहारी रहने की हिदायत दी गई है। इस माह में शास्त्र अनुसार ही व्रतों का पालन करना चाहिए। मन से या मनमानों व्रतों से दूर रहना चाहिए। संपूर्ण माह नहीं रख सकते हैं तो सोमवार सहित कुछ खास दिनों व्रत का पालन अवश्य करें। उत्तर भारतीयों के लिए सावन सोमवार के दिन : 1. रविवार, 25 जुलाई 2021 श्रावण मास का पहला दिन 2. सोमवार, 26 जुलाई 2021 पहला श्रावण सोमवार 3. सोमवार, 02 अगस्त 2021 दूसरा श्रावण सोमवार 4. सोमवार, 09 अगस्त 2021 तीसरा श्रावण सोमवार 5. सोमवार, 16 अगस्त 2021 चौथा श्रावण सोमवार 6. रविवार, 22 अगस्त 2021 श्रावण मास का अंतिम दिन पश्‍चिम और दक्षिण भारत में श्रावण माह : वहां 9 अगस्त 2021 से श्रावण मास प्रारंभ होगा और 7 सितंबर 2021 को श्रावण मास का अंतिम दिन होगा। 9 अगस्त, 19 अगस्त, 23 अगस्त, 30 अगस्त और 6 सितंबर को श्रावण के सोमवार रहेंगे।

सुंदरकाण्ड का पाठ करने के चमत्कारिक 10 फायदे

महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण पर आधारित तुलसीकृत महाकाव्य रामचरित मानस का पंचम सोपान है सुंदरकाण्ड। सुंदरकाण्ड में रामदूत, पवनपुत्र हनुमान का यशोगान किया गया है। आओ जानते हैं सुंदरकाण्ड का पाठ करने के चमत्कारिक लाभ। 1. सुंदरकाण्ड का पाठ सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना गया है। किसी भी प्रकार की परेशानी या संकट हो, सुंदरकाण्ड के पाठ से यह संकट तुरंत ही दूर हो जाता है। 2. सुंदरकांड के पाठ से भूत, पिशाच, यमराज, शनि राहु, केतु, ग्रह-नक्षत्र आदि सभी का भय दूर हो जाता है। 3. हनुमानजी के सुंदर काण्ड का पाठ सप्ताह में एक बार जरूर करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र, ज्योतिष के अनुसार भी विषम परिस्थितियों सुंदरकांड पाठ करने की सलाह दी जाती है। 4. जीवन में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न होती है तो आप संकल्प लेकर लगातार सुंदरकांड का पाठ करें। सुंदरकांड पाठ से एक नहीं बल्कि अनेक सैकड़ों समस्याओं का समाधान तुरंत मिलने लगता है। 5. श्रीराम चरित्र मानस को रचने वाले गोस्वामी तुलसीदास के अनुसार हनुमान जी को जल्द प्रसन्न करने के लिए सुंदरकांड का पाठ 1 रामबाण उपाय है सुंदरकांड पाठ करने वालों के जीवन में खुशियों का संसार होता है और आपका जीवन सुखमय होता है। 6. सुंदरकांड करने वाले व्यक्ति के अंदर सकारात्मक और विचारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। वह व्यक्ति किसी भी कार्य में अपनी रुचि दिखाता है तो उसमें सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। 7. सुंदरकाण्ड का पाठ करने से व्यक्ति के मन से भय जाता रहता है और आत्मविश्वास एवं इच्छाशक्ति प्रबल हो जाती है। 8. साप्ताहिक पाठ करने से गृहकलेश दूर होता है और परिवार में खुशियां बढ़ती हैं। 9. नियमित पाठ करने से कर्ज और रोग से छुटकारा मिलता है। 10. हनुमानजी की भक्ति करने और नियमित सुंदरकाण्ड का पाठ करने से व्यक्ति जीवन के हर क्षेत्र में सफलता से आगे बढ़ता है।

आषाढ़ मास के 10 बड़े तीज-त्योहार और पर्व

भोपाल। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन माह अंतिम माह होता है इसके बाद चैत्र माह वैशाख, ज्येष्ठ और फिर आषाढ़। इस बार आषाढ़ का प्रारंभ अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 25 जून 2021 शुक्रवार को प्रारंभ होगा और 24 जुलाई शनिवार 2021 गुरु पूर्णिाम तक रहेगा। आओ जानते हैं इस माह के प्रमुख 10 बड़े तीज-त्योहार और पर्व। 1. वट सावित्री पूर्णिमा : 25 जून शुक्रवार को वट सावित्री पूर्णिमा का व्रत रहेगा। 25 जून को गुरु हरगोविन्दजी की जयंती भी है। 2. सीतलाष्टमी : 2 जुलाई 2021 को सीतलाष्टमी का पर्व है जिसे बसोरा या बसोड़ भी कहते हैं। 3. हलहारिणी अमावस्या : 9 जुलाई 2021 को हलहारिणी अमावस्या है। यह श्राद्ध, दान पुण्य की अमावस्या भी है। 4. गुप्त नवरात्रि : 11 जुलाई 2021 को अषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रारंभ होगा और इसी दिन गुप्त नवरात्रि का भी प्रारंभ होगा जो 18-19 जुलाई तक चलेगी। 5. जगन्नाथ रथयात्रा : 12 जुलाई 2021 को भगवान जगन्नाथ रथयात्रा प्रारंभ होगी। हालांकि इस बार भी भक्तों के बगैर यात्रा होगी। 6. ताप्ती जयंती : 16 जुलाई 2021 को मां ताप्ती जयंती रहेगी और इसी दिन कर्क संक्रांति भी होगी। कर्क संक्रांति से सूर्य दक्षिणायन हो जाता है। ताप्ती नदी भारत की पवित्र नदियों में से एक है। 7. हरिशयनी एकादशी : 20 जुलाई 2021 को हरिशयनी एकादशी से चतुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। इसे देवशयनी एकादशी भी कहते हैं। इस दिन से देव सो जाएंगे और सभी तरह के मांगलिक और चार माह के लिए शुभ कार्य बंद हो जाएंगे। 8. वामन द्वादशी : 21 जुलाई 2021 को प्रदोष व्रत के दिन वामन द्वादशी और वासुदेव द्वादशी रहेगी। इसी दिन मुस्लिमों का ईद उल जुहा का पर्व भी रहेगा। 9. विजया पार्वती व्रत : 22 जुलाई को विजया पार्वती व्रत और मंगला तेरस रहेगी। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कब है? जानिए शुभ मुहूर्त, पूजन विधि एवं कथा 10. गुरु पूर्णिमा : 23 जुलाई को व्रत की पूर्णिमा प्रारंभ होगी और 24 जुलाई को गुरु पूर्णिमा रहेगी। 23 जुलाई को चंद्रशेखर आजाद और लोकमान्य तिलक की जयंती भी है। पूर्णिमा के दिन व्यास पूजा होती है अर्थात महाभारत के लेखक वेद व्यासजी की पूजा। इसी दिन से आषाढ़ माह समाप्त हो जाएगा। अन्य : इस माह में 5 जुलाई को योगिनी एकादश, 7 जुलाई को प्रदोष व्रत, 8 जुलाई को शिव चतुर्दशी अर्थात मासिक शिवरात्रि, 13 जुलाई को विनायकी चतर्दशी व्रत, 18 जुलाई को गुप्त नवरात्रि पारण दिवस और भड़ली नवमी और 19 जुलाई को आशा दशमी का व्रत रहेगा। 28 जून से पंचक काल प्रारंभ होगा जो 3 जुलाई तक रहेगा।

Numerology Rashifal 2021: मूलांक से जानें, आपके लिए कैसा रहेगा नया साल

भोपाल.  हर किसी के मन में ये जिज्ञासा रहती है कि नया साल उनके लिए कैसा रहेगा. साल 2021 को लेकर लोगों में बहुत उत्साह है. जन्म तिथि का हमारे जीवन पर काफी प्रभाव पड़ता है. इसे मूलांक भी कहा जाता है. आइए अंक ज्योतिष राशिफल 2021 (Ank Jyotish Rashifal 2021) से जानते हैं कि अगला साल किन लोगों के लिए शुभ रहेगा और किन लोगों को सावधान रहने की जरूरत है. मूलांक 1- 1, 10, 19, 28 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 1 होता है. साल 2021 मूलांक 1 वालों के लिए सामान्य रहने वाला है. वर्ष की शुरुआत से ही आपको अपने अंदर एक नई ऊर्जा का एहसास होगा. कार्य क्षेत्र में आप खूब मेहनत करेंगे और आपकी ये मेहनत जल्द रंग लाएगी. ऑफिस के काम में आपको सफलता मिलेगी. प्रमोशन के पक्के योग बन रहे हैं. छात्रों के लिए भी साल 2021 बहुत अच्छा है. हालांकि प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे लोगों को बहुत मेहनत करनी पड़ेगी. व्यापार से जुड़े लोगों को इस साल सावधानी से काम लेना होगा. 2021 में किसी भी तरह का निवेश ना करें तो ही अच्छा होगा. वर्ष के मध्य में आपका बिजनेस सही दिशा में आगे बढ़ेगा. आर्थिक तौर पर यह साल आपके लिए ठीक-ठाक रहेगा. पारिवारिक जीवन बढ़िया रहेगा. दांपत्य जीवन में कुछ मतभेद आ सकते हैं जिन्हें आप जल्द दूर कर लेंगे. मूलांक 2- 2, 11, 20, 29 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 2 होगा. नया साल मूलांक 2 में जन्मे लोगों के लिए अच्छा रहने वाला है. इस साल आपको आपकी मेहनत का पूरा फल मिलेगा. छात्रों को उच्च शिक्षा हासिल करने में सफलता मिलेगी. इस साल आप ऊर्जा से भरपूर रहेंगे और कार्यक्षेत्र में सफलता हासिल करेंगे. प्रेम संबंधों के लिए ये साल बहुत अच्छा रहने वाला है. आप अपने रिश्ते में आगे बढ़ेंगे और विवाह के बारें में विचार करेंगे. नौकरी वालों के इस साल आपके ट्रांसफर के योग बनेंगे. इस साल लोगों के बीच आपकी लोकप्रियता बढ़ेगी. शादीशुदा लोगों को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. इस साल आप किसी लंबी यात्रा पर जा सकते हैं. आपका पारिवारिक जीवन अच्छा रहेगा और लोगों के साथ आपका स्नेह बढ़ेगा. इस साल अपने लिए भी कुछ समय निकालें. मूलांक 3- 3, 12, 21, 30 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 3 होता है. मूलांक 3 वालों के लिए वर्ष 2021 सामान्य रहने वाला है. इस साल आपके कुछ जरूरी कार्यों में रुकावट आ सकती है. आप आध्यात्मिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे. इससे आपको मानसिक शांति मिलेगी. छात्र इस साल शुरूआत से ही मेहनत करेंगे. प्रतियोगिता परीक्षा में सफल होने की पूरी संभावनाएं बनेंगी. प्रेम संबंधों के लिए यह साल सामान्य रहने वाला है. कुछ लोगों का प्रेम विवाह हो सकता है. सरकारी क्षेत्र में आपको लाभ हो सकता है. नौकरी कर रहे लोगों को इस साल शुभ समाचार मिल सकते हैं. इस साल आपको भाग्य का पूरा साथ मिलेगा. इस साल आपके खर्चे बहुत बढ़ सकते हैं और आर्थिक स्थिति कमजोर रहेगी. आपकी आमदनी इस साल ठीक रहेगी. साल 2021 में आपको मानसिक रूप से मजबूत रहना होगा. मूलांक 4- 4, 13, 22, 31 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 4 होता है. साल 2021 मूलांक 4 वालों के लिए मिश्रित परिणाम लेकर आ रहा है. इस साल आपकी ईमानदारी काम आएगी. आपकी लगनशीलता आपको इस साल सफलता दिलाएगी. आप की बहुत सारी इच्छाएं इस साल पूरी हो जाएंगी और आप खुशी का अनुभव करेंगे. नए साल में आपकी लव लाइफ आगे बढ़ेगी. यह साल प्यार से भरा रहेगा. विद्यार्थियों के लिए साल की शुरुआत अच्छी रहेगी. साल के मध्य में प्रतियोगिता में सफलता के प्रबल योग बनेंगे. मैनेजमेंट, सोशल सर्विस, ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़े लोगों के लिए ये साल उत्तम परिणाम लेकर आएगा. व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी साल 2021 लाभ लेकर आ रहा है. आपका मान-सम्मान बढ़ेगा और आपको धन लाभ होगा. शादीशुदा जीवन के लिए नया साल सामान्य रहेगा. साल के मध्य में कुछ समस्याएं आ सकती हैं. मूलांक 5- 5, 14, 23 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 5 होता है. साल 2021 मूलांक 5 वालों को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगा क्योंकि वर्ष 2021 का कुल योग 5 (2+0+2+1=5) है. मूलांक 5 वाले लोगों को इस साल का पूरा लाभ उठाने की कोशिश करनी चाहिए. इस साल आपकी सेहत अच्छी रहेगी और आप पूरी मेहनत से चुनौतियों का सामना करेंगे. इस साल छात्रों को प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी. इस साल आपको मेहनत का फल मिलेगा. प्रेम संबंधों के लिए भी ये साल बहुत अच्छा रहने वाला है. कुछ लोगों का प्रेम विवाह भी हो सकता है. पारिवारिक जीवन में कुछ उथल-पुथल हो सकती है. नौकरी करने वालों को साल 2021 में खुद पर ध्यान देने की जरूरत होगी. आर्थिक स्थिति से ये साल आपके लिए मिलाजुला रहेगा. व्यापार करने वालों को विदेशी संपर्कों का लाभ मिलेगा. मूलांक 6- 6, 15, 24 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 6 होता है. अंक ज्योतिष के अनुसार यह वर्ष आपके लिए उत्तम परिणाम देने वाला साबित होगा. इस पूरे साल आप अपने प्रियतम को प्रसन्न रखने की कोशिश करेंगे. किसी लंबी यात्रा पर जानेंगे योग बनेंगे. विद्यार्थियों के लिए साल 2021 काफी अच्छा रहने वाला है. इस साल आप पढ़ाई में पूरी तरह मन लगाएंगे. आपको मेहनत के बेहतरीन परिणाम मिलेंगे. साल की शुरूआत पारिवारिक जीवन के लिए अच्छी रहेगी. आपके मन में सबके लिए स्नेह की भावना रहेगी. इस साल आपकी नौकरी बदलने की पूरी संभावना है. इसमें आपको ज्यादा संतुष्टि मिलेगी. बिजनेस से जुड़े लोगों को इस साल जबरदस्त लाभ मिलेंगे. रिश्तो के मामले में आप काफी ईमानदार रहेंगे. इस साल आपको अपनी क्षमताओं का आंकलन करना चाहिए. मूलांक 7- 7, 16, 25 तिथि को जन्‍मे लोगों का मूलांक 7 होता है. मूलांक 7 वाले लोगों के लिए साल उन्नतिशील रहेगा. आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और आपकी आमदनी बढ़ेगी. धन की प्रबलता से आप अपनी कई इच्छाओं को इस साल पूरा करने में सफल रहेंगे. छात्रों को इस साल पढ़ाई पर बहुत ध्यान देने की जरूरत है. मेहनत से हीआपको सफलता का परिणाम मिलेगा, इसलिए खूब मेहनत करें. प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे … Read more

ब्रह्मलीन हुए बर्फानी बाबा, भक्तों का दावा- 150 साल थी उम्र

जयपुर। बर्फानी बाबा महाराज बुधवार देर रात अहमदाबाद में ब्रह्मलीन हो गए। गुरुवार को उनकी पार्थिव देह मेहंदीपुर बालाजी स्थित आश्रम में लाई गई। यहां शुक्रवार को आश्रम में उनको समाधि दी जाएगी। बर्फानी बाबा के अंतिम दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में भक्त आश्रम पहुंचे हैं। बाबा के कुछ भक्तों का दावा है कि कुछ दिन पहले ही बाबा ने अपना समाधि स्थल मेहंदीपुर बालाजी में बनाने के लिए कहा था। यहां उनका आश्रम भी है। भक्तों का दावा- 150 साल थी उम्र बर्फानी दादा के भक्तों का दावा है कि उनकी उम्र करीब 150 साल थी। उन्होंने कुंडलिनी जागरण में सिद्धी पा रखी थी। 1962 में भारत-चीन युद्ध के समय बर्फानी बाबा मानसरोवर में साधना कर रहे थे। जिसके बाद युद्ध के अशांत माहौल को छोड़कर हरिद्वार आ गए थे। जहां से अमरकंटक पहुंचे और फिर वहां साधना की। अनुयायियों का दावा- पहले भी शरीर छोड़ चुके हैं बाबा अनुयायियों का दावा है कि बाबा पहले भी अपना शरीर छोड़ चुके हैं। इसके बाद वे नए शरीर में फिर से प्रकट होते हैं। कुंडलिनी जागरण के जरिए ही उन्होंने ये सिद्धी प्राप्त की है। इंदौर के मालवीय नगर में भी बर्फानी धाम की स्थापना की गई। जहां हर साल शरद पूर्णिमा पर हजारों अस्थमा रोगियों को औषधियुक्त खीर का वितरण किया जाता है।

घर में लाएं सूर्यदेव की प्रतिमा, हर मुश्किल हो जाएगी आसान

भोपाल। सूर्यदेव को अग्नि का स्वरूप एवं प्रत्यक्ष देवता माना गया है। वास्तु शास्त्र में सूर्य का विशेष महत्व है। ऊर्जा के असीम भंडार सूर्यदेव को लेकर वास्तु में कुछ रोचक उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर हम अपने जीवन को और बेहतर बना सकते हैं। आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में। सूर्योदय से पहले ब्रह्ममुहूर्त का समय अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। विद्यार्थियों को इस समय का सदुपयोग करना चाहिए। ब्रह्ममुहूर्त का समय स्वास्थ्य की दृष्टि से सर्वोत्तम माना जाता है। सूर्योदय के समय घर के सभी दरवाजे और खिड़कियां खोल देनी चाहिए। सूर्योदय के समय की किरणें स्वास्थ्य की दृष्टि से सर्वोत्तम मानी जाती हैं। घर में कृत्रिम रोशनी का प्रयोग कम से कम करना चाहिए। घर का कोई हिस्सा ऐसा है जहां सूर्यदेव का प्रकाश नहीं आ पा रहा तो वहां सूर्यदेव की तांबे की प्रतिमा लगाई जा सकती है। रसोईघर और स्नानघर में भी सूर्य का प्रकाश पहुंचे ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए। घर में सूर्यदेव के साथ सात घोड़ों की तस्वीर पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। घर में जहां कीमती जेवरात रखे हों, वहां तांबे की सूर्य प्रतिमा लगाने से घर में कभी आर्थिक परेशानी नहीं आती है। बच्चों के स्टडी रूम में सूर्यदेव की प्रतिमा लगाने से सकारात्मक परिणाम सामने आने लगते हैं। परिवार में अगर कोई व्यक्ति रोगी है तो उसके कमरे में सूर्यदेव की प्रतिमा अवश्य लगाएं। वास्तु के अनुसार रसोईघर में तांबे की सूर्य प्रतिमा लगाने से कभी अन्न की कमी नहीं होती। कार्यालय या दुकान में सूर्य प्रतिमा लगाने से उन्नति के अवसर मिलते हैं। घर के मंदिर में तांबे की सूर्य प्रतिमा लगाने से घर-परिवार पर सूर्य देव की कृपा बनी रहती है।

मंगल ग्रह करेंगे राशि परिवर्तन, इन राशियों को मिलेगी तरक्की और होगा जबरदस्त लाभ

भोपाल।  मंगल ग्रह का 24 दिसंबर को राशि परिवर्तन होने जा रहा है। मंगल ग्रह, मेष राशि में गोचर करेंगे। इस राशि में मंगल ग्रह 22 फरवरी 2020 तक रहेंगे। मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल कर्क राशि में नीच और मकर राशि में उच्च के माने जाते हैं। मंगल ग्रह का यह राशि परिवर्तन कुछ राशियों के लिए अच्छी खबर लेकर आएगा तो कुछ राशियों के लिए परेशानियां पैदा होंगी। मंगल देव का यह राशि परिवर्तन कुछ जातकों के लिए शुभ समाचार लेकर आएगा। जानिए किन राशियों के जातकों को राशि परिवर्तन का मिलेगा लाभ- 1. मेष- मेष राशि के जातकों को कई क्षेत्रों में प्राप्ति होगी। इस गोचर के दौरान नए कार्य शुरू करना शुभ होगा। जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों का भी निपटारा होगा। उच्च अधिकारियों से मधुर संबंध होंगे। 2. मिथुन- इस राशि के जातकों की परेशानियों का अंत होगा। नौकरी और बिजनेस में तरक्की होगी। कोर्ट-कचहरी के मामलों में फैसले आपके पक्ष में आ सकते हैं। संतान संबंधी चिंता से मुक्ति मिलेगी। 3. कर्क- नौकरी और व्यापार में तरक्की होगी। कार्यक्षेत्र में स्थान परिवर्तन संभव है। उच्च अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। छात्रों के लिए समय अनुकूल है। इस राशि के जातकों को सरकारी नौकरी मिलने का भी योग बन सकता है। 4. सिंह- इस राशि के जातकों की धर्म और अध्यात्म में गहरी रुचि होगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। सफलता की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। किसी बड़े सम्मान को प्राप्त कर सकते हैं। 5. धनु- छात्रों को सफलता मिलेगी। व्यापारियों के लिए समय अनुकूल रहेगा। विदेशी कंपनी में नौकरी का प्रयास कर रहे हैं तो सफल होंगे। संतान संबंधी चिंता से मुक्ति मिलेगी। 6. कुंभ- इस गोचर के दौरान आपके फैसले और कार्यों की प्रशंसा होगी। धर्म और अध्यात्म के प्रति रूचि बढ़ेगी। कार्यक्षेत्र में तरक्की मिलने की संभावना है।

अगर आपको भी नहीं मिल रहा हनुमान चालीसा पाठ का लाभ जानें सही विधि और इसके लाभ

भोपाल। जब कभी भी किसी भक्त की निष्ठा की बात होती है तो हनुमान जी से बढ़कर और कोई नहीं | भगवान श्री राम के प्रति उनकी भक्ति सभी भक्तों के लिए प्रेरणा स्त्रोत है | हनुमान जी के जैसा भक्त न कोई हुआ है और न होगा | इसलिए भगवान श्री राम के आशीर्वाद से हनुमान जी को यह वरदान प्राप्त है कि उनकी आराधना करने वाले भक्त हनुमान जी के साथ-साथ भगवान श्री राम का भी आशीर्वाद स्वतः ही पा लेते है | हमारे शास्त्रों में हर समस्या का समाधान वर्णित है | हनुमान चालीसा के पाठ द्वारा हनुमान जी की आराधना करना भी इन शास्त्रीय उपायों में से एक है | गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित हनुमान चालीसा में वो सभी चमत्कारी शक्तियाँ निहित है जो हमारे सभी संकटों को पल भर में दूर कर सकती है | हनुमान चालीसा पाठ का महत्व : – बचपन में हनुमान जी अपनी क्रीडाओं द्वारा ऋषि-मुनियों को तंग किया करते थे जिससे तंग आकर ऋषि द्वारा उन्हें यह श्राप मिला कि वे अपनी शक्तियों को भूल जाया करेंगे और दूसरों के द्वारा स्मरण कराने पर ही उन्हें अपनी शक्तियों का अहसास होगा | सम्पूर्ण हनुमान चालीसा के पाठ में हनुमान जी की शक्तियों का वर्णन किया गया है | इस पाठ के माध्यम से ही हम हनुमान जी की आराधना करने के साथ-साथ उन्हें उनकी शक्तियों का भी स्मरण कराते है जिससे वे शीघ्र प्रसन्न होकर हमें फलीभूत करते है | हनुमान चालीसा का पाठ प्रतिदिन करना चाहिए | इसलिए जितना शीघ्र हो सके आप इसे याद कर ले | सुबह का एक समय निश्चित कर प्रतिदिन उसी समय पर हनुमान चालीसा का पाठ करे | समय के चुनाव में ध्यान दे सुबह 6.15 am , 7.15 या 8.15 am इस प्रकार का समय चुने, व 6.45 am , 7.45 am ऐसे समय पर कोई भी पाठ-पूजा न करें | हनुमान जी के ऐसे मंदिर जहाँ हनुमान जी को चौला चढ़ाया जाता हो, उस मंदिर में जाकर हनुमान जी के चरणों से थोड़ा सा सिन्दूर एक डिब्बी में घर ले आये अब डिब्बी में और सिन्दूर व थोडा चमेली का तेल मिलाकर रखे ले | रोजाना पूजा पर बैठते समय सबसे पहले हनुमान जी का ध्यान करते हुए इस सिन्दूर से स्वयं को तिलक करे | लाल या पीले वस्त्र धारण कर लाल ऊनी आसन बिछाकर हनुमान जी की प्रतिमा के सामने बैठ जाये साथ में एक लौटे में जल और प्रसाद रूप में कुछ मीठा रखे | अब चमेली के तेल का दीपक प्रज्वल्लित करे | पानी के लौटे को हनुमान जी की प्रतिमा के सम्मुख रखकर आदरपूर्वक उन्हें ग्रहण करने को कहे | अब थोड़े मीठे को भोग स्वरुप उनकी प्रतिमा के आगे रखे |

मेष राशि के लिए मंत्र … मेष लग्न या राशी के जातक इस मंत्र का जप करें

भोपाल। मेष राशि, सभी 12 राशियों की संख्या में प्रथम राशि है | मेष राशि का स्वामी मंगल गृह है | मेष राशि के जातक उर्जावान, उर्वर मष्तिष्क के स्वामी और प्रग्रतिशील विचारधारा के होते है | मंगल गृह के शुभ और अशुभ प्रभाव मेष राशि के जातकों को सीधे प्रभावित करते है | शास्त्रों में ग्रहों में अशुभ प्रभावों को कम करने व गृह को बल देने हेतु सभी रशियों के लिए विशेष मन्त्रों का उल्लेख मिलता है | राशी के अनुसार मंत्र जप न केवल आपके राशि गृह को बल देते है अपितु अन्य ग्रहों के भी अशुभ प्रभावों को शांत करते है | ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीनारायण नमः का जाप जिंदगी बदल देगा। मेष राशि के जातक उपरोक्त मंत्र का जप नियमित रूप से करें | प्रातः जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत होकर साफ़ कपड़े धारण कर पूजास्थल पर बैठ जाए | श्री लक्ष्मीनारायण जी की प्रतिमा पूजास्थल पर स्थापित कर ले | धुप-दीप आदि लगाकर पहले गणेश जी के स्तुति मंत्र द्वारा उनका स्मरण करें इसके पश्चात् आप उपरोक्त मंत्र का जप कम से कम 21 बार अवश्य करें | मेष राशि के जातक उपरोक्त मंत्र का जप पूर्ण करने के पश्चात् अपने ईष्ट देव या देवी के मंत्र का जप कर सकते है | इस मंत्र जप के कार्य को नियमित रूप से किया करें | एक से दो महीने में ही आपके जीवन में चमत्कारिक बदलाव होने लग जायेंगे | उपरोक्त मंत्र का जप न केवल मेष राशि वाले जातक को करना चाहिए अपितु जिस जातक के लग्न में मेष हो उसे भी इस मंत्र का जप करना चाहिए | दोनों स्थिति में उपरोक्त मंत्र के जप से समान फल की प्राप्ति होती है |

कर दो कृपा महारानी मोरी शारदा भवानी …मैहर में शारदा मां के दरबार में पहुंचे 50 हजार भक्त

सतना. नवरात्र का 8वां दिन यानी महाअष्टमी है। पहले की तरह न भव्य पंडाल हैं, न देवी मां की बड़ी प्रतिमाएं, न मेले …लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था परवान पर है। खासकर मध्य प्रदेश के मंदिरों में कोरोना पर भक्ति भारी है। मैहर मध्य प्रदेश के सतना जिले में है। यहां त्रिकूट पर्वत पर मां शारदा विराजमान हैं। देवी मां के दरबार में तड़के 4 बजे से ही भक्त आना शुरू हो गए। दोपहर होते-होते एक अनुमान के मुताबिक 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु मां के दर्शन कर चुके हैं। मैहर धाम में पुजारी सुमित महाराज ने बताया कि महाष्टमी पर सुबह 3.30 से 4 बजे तक विशेष पूजन हुआ। इसके बाद देवी मां के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। रात 8.30 बजे शयन आरती के बाद पट बंद कर दिए जाते हैं, लेकिन भक्तों का आना जारी रहेगा तो पट खुले रखेंगे। सलकनपुर की बीजासन माता मध्य प्रदेश में सलकनपुर में बीजासन माता विराजमान हैं। हर साल अष्टमी और नवमी पर यहां दर्शनार्थियों की संख्या 1 लाख तक रही है। इस बार कोरोना की वजह से भक्तों की संख्या कम है, लेकिन सुबह 9 बजे तक 20 हजार से ज्यादा श्रद्धालु माता के दर्शन कर चुके हैं। शाम तक यह संख्या 50 हजार से ज्यादा पहुंचने की संभावना है।

बुधवार का दिन होता है मां लक्ष्मी का, पढ़ें श्री लक्ष्मी सूक्त का हिन्दी अनुवाद

भोपाल। काम, क्रोध, लोभ वृत्ति से मुक्ति प्राप्त कर धन, धान्य, सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए उपयोगी स्तोत्र है। यहां इस सूक्त को हिन्दी में अनुवाद सहित दिया जा रहा है। मां लक्ष्मी के पूजन के दिन शुक्रवार और बुधवार माने गए हैं। प्रस्तुत है श्री लक्ष्मी सूक्त का हिन्दी अनुवाद श्री लक्ष्मीसूक्तम्‌ पाठ पद्मानने पद्मिनि पद्मपत्रे पद्मप्रिये पद्मदलायताक्षि। विश्वप्रिये विश्वमनोऽनुकूले त्वत्पादपद्मं मयि सन्निधत्स्व॥ – हे लक्ष्मी देवी! आप कमलमुखी, कमल पुष्प पर विराजमान, कमल-दल के समान नेत्रों वाली, कमल पुष्पों को पसंद करने वाली हैं। सृष्टि के सभी जीव आपकी कृपा की कामना करते हैं। आप सबको मनोनुकूल फल देने वाली हैं। हे देवी! आपके चरण-कमल सदैव मेरे हृदय में स्थित हों। पद्मानने पद्मऊरू पद्माक्षी पद्मसम्भवे। तन्मे भजसिं पद्माक्षि येन सौख्यं लभाम्यहम्‌॥ – हे लक्ष्मी देवी! आपका श्रीमुख, ऊरु भाग, नेत्र आदि कमल के समान हैं। आपकी उत्पत्ति कमल से हुई है। हे कमलनयनी! मैं आपका स्मरण करता हूँ, आप मुझ पर कृपा करें। अश्वदायी गोदायी धनदायी महाधने। धनं मे जुष तां देवि सर्वांकामांश्च देहि मे॥ – हे देवी! अश्व, गौ, धन आदि देने में आप समर्थ हैं। आप मुझे धन प्रदान करें। हे माता! मेरी सभी कामनाओं को आप पूर्ण करें। पुत्र पौत्र धनं धान्यं हस्त्यश्वादिगवेरथम्‌। प्रजानां भवसी माता आयुष्मंतं करोतु मे॥ – हे देवी! आप सृष्टि के समस्त जीवों की माता हैं। आप मुझे पुत्र-पौत्र, धन-धान्य, हाथी-घोड़े, गौ, बैल, रथ आदि प्रदान करें। आप मुझे दीर्घ-आयुष्य बनाएँ। धनमाग्नि धनं वायुर्धनं सूर्यो धनं वसु। धन मिंद्रो बृहस्पतिर्वरुणां धनमस्तु मे॥ – हे लक्ष्मी! आप मुझे अग्नि, धन, वायु, सूर्य, जल, बृहस्पति, वरुण आदि की कृपा द्वारा धन की प्राप्ति कराएँ। वैनतेय सोमं पिव सोमं पिवतु वृत्रहा। सोमं धनस्य सोमिनो मह्यं ददातु सोमिनः॥ – हे वैनतेय पुत्र गरुड़! वृत्रासुर के वधकर्ता, इंद्र, आदि समस्त देव जो अमृत पीने वाले हैं, मुझे अमृतयुक्त धन प्रदान करें। न क्रोधो न च मात्सर्यं न लोभो नाशुभामतिः। भवन्ति कृतपुण्यानां भक्तानां सूक्त जापिनाम्‌॥ – इस सूक्त का पाठ करने वाले की क्रोध, मत्सर, लोभ व अन्य अशुभ कर्मों में वृत्ति नहीं रहती, वे सत्कर्म की ओर प्रेरित होते हैं। सरसिजनिलये सरोजहस्ते धवलतरांशुक गंधमाल्यशोभे। भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरी प्रसीद मह्यम्‌॥ – हे त्रिभुवनेश्वरी! हे कमलनिवासिनी! आप हाथ में कमल धारण किए रहती हैं। श्वेत, स्वच्छ वस्त्र, चंदन व माला से युक्त हे विष्णुप्रिया देवी! आप सबके मन की जानने वाली हैं। आप मुझ दीन पर कृपा करें। विष्णुपत्नीं क्षमां देवीं माधवीं माधवप्रियाम्‌। लक्ष्मीं प्रियसखीं देवीं नमाम्यच्युतवल्लभाम॥ – भगवान विष्णु की प्रिय पत्नी, माधवप्रिया, भगवान अच्युत की प्रेयसी, क्षमा की मूर्ति, लक्ष्मी देवी मैं आपको बारंबार नमन करता हूँ। महादेव्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्‌॥ – हम महादेवी लक्ष्मी का स्मरण करते हैं। विष्णुपत्नी लक्ष्मी हम पर कृपा करें, वे देवी हमें सत्कार्यों की ओर प्रवृत्त करें। चंद्रप्रभां लक्ष्मीमेशानीं सूर्याभांलक्ष्मीमेश्वरीम्‌। चंद्र सूर्याग्निसंकाशां श्रिय देवीमुपास्महे॥ – जो चंद्रमा की आभा के समान शीतल और सूर्य के समान परम तेजोमय हैं उन परमेश्वरी लक्ष्मीजी की हम आराधना करते हैं। श्रीर्वर्चस्वमायुष्यमारोग्यमाभिधाच्छ्रोभमानं महीयते। धान्य धनं पशु बहु पुत्रलाभम्‌ सत्संवत्सरं दीर्घमायुः॥ – इस लक्ष्मी सूक्त का पाठ करने से व्यक्ति श्री, तेज, आयु, स्वास्थ्य से युक्त होकर शोभायमान रहता है। वह धन-धान्य व पशु धन सम्पन्न, पुत्रवान होकर दीर्घायु होता है। ॥ इति श्रीलक्ष्मी सूक्तम्‌ संपूर्णम्‌ ॥

नवरात्रि में जपें दुर्गा सप्तशती 6 सबसे अधिक शक्तिशाली मंत्र

नवरात्रि में श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ मनोरथ सिद्धि के लिए किया जाता है; क्योंकि श्री दुर्गा सप्तशती दैत्यों के संहार की शौर्य गाथा से अधिक कर्म, भक्ति एवं ज्ञान की त्रिवेणी हैं। मार्कण्डेय पुराण में ब्रह्माजी ने मनुष्यों के रक्षार्थ परमगोपनीय साधन, कल्याणकारी देवी कवच एवं परम पवित्र उपाय संपूर्ण प्राणियों को बताया, जो देवी की नौ मूर्तियां-स्वरूप हैं, जिन्हें ‘नव दुर्गा’ कहा जाता है, उनकी आराधना आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से महानवमी तक की जाती है। यह श्री मार्कण्डेय पुराण का अंश है। यह देवी महात्म्य धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष चारों पुरुषार्थों को प्रदान करने में सक्षम है। सप्तशती में कुछ ऐसे भी स्रोत एवं मंत्र हैं, जिनके विधिवत पारायण से इच्छित मनोकामना की पूर्ति होती है। यहां पढ़ें खास 6 मंत्र- * बाधा मुक्ति एवं धन-पुत्रादि प्राप्ति के लिए- सर्वाबाधा वि निर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वितः। मनुष्यों मत्प्रसादेन भवष्यति न संशय॥ * सर्वकल्याणकारी मंत्र- सर्व मंगलं मांगल्ये शिवे सर्वाथ साधिके । शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुऽते॥ * आरोग्य एवं सौभाग्य- देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि में परमं सुखम्‌। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि॥ * विपत्ति नाश के लिए- शरणागतर्दनार्त परित्राण पारायणे। सर्व स्यार्ति हरे देवि नारायणि नमोऽतुते॥ * आरोग्य, ऐश्वर्य, सौभाग्य, संपदा एवं शत्रु भय मुक्ति- ऐश्वर्य यत्प्रसादेन सौभाग्य-आरोग्य सम्पदः। शत्रु हानि परो मोक्षः स्तुयते सान किं जनै॥ * विघ्नहरण मंत्र- सर्वबाधा प्रशमनं त्रेलोक्यसयाखिलेशवरी। एवमेय त्याया कार्य मस्माद्वैरि विनाशनम्‌॥ जाप विधि- नवरात्रि के प्रतिपदा के दिन घटस्थापना के बाद संकल्प लेकर प्रातः स्नान करके दुर्गा की मूर्ति या चित्र की पंचोपचार या दक्षोपचार या षोड्षोपचार से गंध, पुष्प, धूप दीपक नैवेद्य निवेदित कर पूजा करें। मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।

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