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MP : 7 माह में 10500 कराेड़ का कर्ज लिया, प्रदेश के हर नागरिक पर 34 हजार का कर्ज

भोपाल। कोरोना महामारी के चलते प्रदेश में आर्थिक संकट लगातार गहराता जा रहा है। शिवराज सरकार 30 दिन में चौथी बार बुधवार को बाजार से 1 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लिया है। इससे पहले 7, 13 और 21 अक्टूबर को सरकार बाजार से 1-1 हजार करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है। शिवराज सरकार अपने 7 माह के कार्यकाल में 9वीं बार कर्ज ले रही है। वित्त विभाग के नोटिफिकेशन के मुताबिक, 4 अक्टूबर को 20 साल के लिए एक हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेने की प्रक्रिया पूरी की गई है। सरकार के इस फैसले पर पूर्व मंत्री जीतू पटवारी से सरकार को आड़े हाथों लिया है। उनका कहना है कि “इससे पता चल रहा है कि हमारा प्रदेश कहां जा रहा है। सरकार ने हर नागरिक पर 34 हजार रुपए का कर्ज लाद दिया है।” पटवारी ने कहा कि चुनाव के दाैरान दाेनाें पार्टियों ने अपनी-अपनी बातें रखीं। अब जनादेश पेटियों के भीतर है। जो निर्णय होगा, हमें मंजूर होगा। आशा है, लोकतंत्र की हत्या के खिलाफ आपका मत रहा होगा। मप्र में आर्थिक स्थिति ऐसी है कि शिवराज सिंह चौहान ने एक हजार करोड़ रुपए का फिर से कर्ज लिया है। मैंने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि पिछले 7 महीने में 9 बार कर्ज लिया, अब तक 10500 कराेड़ रुपए का कर्ज लिया है। पिछले 15 साल के इनके कार्यकाल की बात करें, तो शिवराज सरकार ने 2 लाख 5 हजार 993 करोड़ रुपए कर्ज लिया है। ऐसे में प्रदेश के हर नागरिक पर सरकार ने 34 हजार रुपए का कर्ज लाद दिया है। बजट का 15 फीसदी पैसा ब्याज में जा रहा यदि ऐसे ही आर्थिक हालात बदतर होते रहे, तो आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का क्या होगा। आपको यह पता होना चाहिए कि हम इस कर्ज का करीब 16 हजार करोड़ प्रतिवर्ष ब्याज देते हैं। बजट का 15 फीसदी से ज्यादा हमारा ब्याज पर जाता है। मप्र में 40 साल के नीचे वाले युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। बच्चे को मुश्किलों से पढ़ाने के बाद नौकरी नहीं मिलने पर माता-पिता की मानसिक हालत बदतर हो रही है। मप्र में बेरोजगारी और किसानों की समस्या को लेकर रोज आत्महत्याएं हो रही हैं। प्रदेश में करीब डेढ़ लाख सरकारी नौकरियां खाली पड़ी हैं। छह महीने से स्कूल शिक्षा विभाग, नगरीय निकायों में वेतन नहीं बंटा है। ये लोग पेट्रोल डीजल में टैक्स बढ़ाकर इस भार को कम करने की कोशिश में हैं। विकास कार्यों के लिए कर्ज लिया गया मंत्रालय सूत्रों ने बताया कि सरकार की माली हालत पहले से ही खराब थी। कोरोना के कारण सरकार के राजस्व में भारी कमी आई है। जीएसटी में लगातार कमी के कारण सरकार की आर्थिक संकट की स्थिति में है। सरकार पर जनवरी से अब तक 22 हजार करोड़ का कर्ज बढ़ा है। केंद्र से 4440 करोड़ का अतिरिक्त कर्ज लेने की पात्रता मिली है। नोटिफिकेशन के मुताबिक सरकार विकास कार्यों के लिए यह कर्ज लिया है। ब्याज पर 15 हजार करोड़ रुपए खर्च मध्य प्रदेश सरकार सिर्फ ब्याज पर ही करीब 15 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही हैl 2017 में यह ब्याज 12695 करोड़ों रुपए था, जो 2018 में 14432 करोड रुपए हो गयाl जबकि 2019 में 13751 करोड रुपए तथा 2020 में यह बढ़कर 16460 करोड़ रुपए होने की उम्मीद हैl

बदलने लगी इकोनॉमी की तस्वीर, अक्टूबर में स्थिति सुधरने के 3 बड़े संकेत

नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर लगातार अब अच्छी खबरें आ रही हैं. लॉकडाउन की वजह से आर्थिक गतिविधियां थम गई थीं. लेकिन अब कई सेक्टर में ग्रोथ की रफ्तार कोरोना संकट से पहले जैसी देखने को मिल रही है. इस बीच कई आंकड़े सामने आए हैं, जो बता रहे हैं कि अक्टूबर में स्थिति बेहतर हुई है. आंकड़े पिछले साल के अक्टूबर के मुकाबले भी बेहतर दिख रहे हैं. GST कलेक्शन 1 लाख करोड़ रुपये के पार अर्थव्यवस्था की गाड़ी तेजी से पटरी पर दौड़ने लगी है, इस का पहला सबूत जीएसटी कलेक्शन से मिल रहा है. अक्टूबर महीने में जीएसटी कलेक्शन आठ महीने के बाद 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार किया है. इससे पहले फरवरी में जीएसटी कलेक्शन एक लाख करोड़ रुपये हुआ था. जीएसटी कलेक्शन में मार्च से गिरावट हावी था. अक्टूबर में जीएसटी कलेक्शन 1.05 लाख करोड़ रुपये रहा वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर में जीएसटी कलेक्शन 1.05 लाख करोड़ रुपये रहा. इससे पहले फरवरी- 2020 में जीएसटी कलेक्शन 1,05,366 करोड़ रुपये रहा था. जबकि सितंबर में जीएसटी कलेक्शन 95480 करोड़, अगस्त में जीएसटी कलेक्शन 86,449 करोड़, जुलाई में कलेक्शन 87,422 करोड़ रुपये रहा था. हालांकि अभी भी सरकार का जीएसटी कलेक्शन उसके निर्धारित लक्ष्य से बहुत पीछे है. बिजली खपत में शानदार इजाफा देश में बिजली की खपत में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर में बिजली की खपत 110.94 अरब यूनिट रही. पिछले साल के अक्टूबर की तुलना में 13.38 फीसदी अधिक है. पिछले साल अक्टूबर में यह आंकड़ा 97.84 अरब यूनिट था. इसकी बड़ी वजह औद्योगिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों की ओर से बिजली की मांग बढ़ना है. पैसेंजर व्हीकल्स की डिमांड में बढ़ोतरी कोरोना संकट के बीच अब लोग खर्च कर रहे हैं, लगातार ऑटो कंपनियां बेहतर नतीजे पेश कर रही हैं. अक्टूबर में वाहनों की बिक्री में भारी इजाफा हुआ है. खासकर पैसेंजर गाड़ियों की मांग में काफी तेजी देखी जा रही है. देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी ने अक्टूबर में कुल 1,82,448 वाहन बेचे, जो पिछले साल के अक्टूबर के मुकाबले 19 फीसदी और पिछले महीने के मुकाबले करीब 20 फीसदी ज्यादा है. टाटा की गाड़ियों की बिक्री अक्टूबर में 79 फीसदी बढ़ी वहीं दूसरी सबसे बड़ी कार कंपनी हुंडई मोटर्स ने अक्टूबर-2020 में कुल 68,835 गाड़ियां बेचीं, जबकि अक्टूबर- 2019 में कंपनी ने कुल 63,610 यूनिट्स की बिक्री की थी. इसके अलावा टाटा की गाड़ियों की बिक्री अक्टूबर में रिकॉर्ड 79 फीसदी बढ़ी है. टाटा मोटर्स ने कुल 23,600 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, जो कि अक्टूबर-2019 में 13169 यूनिट्स रही थी. यही नहीं, कंपनी का उम्मीद है कि फेस्टिव सीजन में और डिमांड बढ़ने वाली है. मांग बढ़ाने पर सरकार का फोकस गौरतलब है कि पिछले महीने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा कि अर्थव्यवस्था में अब सुधार के संकेत दिखने लगे हैं. उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर में गिरावट होगी या फिर शून्य के करीब रहेगी. बता दें, 2020-21 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ में 23.9 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई थी. फिलहाल सरकार का जोर सार्वजनिक खर्च के जरिये आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने पर है.

Jio-क्वॉलकॉम ने की 5G की सफल टेस्टिंग, 1Gbps की स्पीड

मुंबई . रिलायंस जियो और US-बेस्ड क्वॉलकॉम, दोनों कंपनियां मिलकर भारत में होमग्रोन टेक्नोलॉजी बेस्ड 5G मोबाइल इंटरनेट को तेजी से उपलब्ध कराएंगी. इससे भारत को उन देशों की एक्सक्लूसिव क्लब में शामिल होने का मौका मिलेगा, जो यूजर्स को सुपरफास्ट 1 Gbps की स्पीड उपलब्ध कराती हैं. जियो ने क्वॉलकॉम के साथ मिलकर अपनी 5G टेक्नोलॉजी की सक्सेसफुल टेस्टिंग की है. ये घोषणा अमेरिका के सैन डियागो में हुए एक वर्चुअल इवेंट में की गई है. क्वॉलकॉम 5G समिट के दौरान रिलायंस जियो के प्रेसिडेंट मैथ्यू ओमेन ने कहा कि क्वॉलकॉम और जियो मिलकर 5G टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं, ताकी इसकी लॉन्चिंग जल्द भारत में की जा सके. ये साझेदारी रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की प्रतिबद्धता पर आधारित है. उन्होंने जुलाई में घोषणा की थी कि जियो मेड-इन-इंडिया 5G टेक्नोलॉजी डेवलप कर रहा है. दोनों कंपनियों ने ये भी जानकारी दी है कि उन्होंने एक क्वॉलकॉम प्लेटफॉर्म की मदद से जियो की 5G सॉल्यूशन पर 1 Gbps की स्पीड भी प्राप्त की है. इसका मतलब ये है कि इससे 1GB फाइल साइज वाली किसी मूवी को महज एक सेकेंड में डाउनलोड किया जा सकेगा. इस साझेदारी में जियो की अमेरिकी सब्सिडियरी कंपनी रेडिसिस कॉर्पोरेशन भी शामिल है. जियो की 5G टेक्नोलॉजी पूरी तरह से स्वदेशी होगी. इसके लिए जियो ने होमग्रोन 5G RAN (रेडियो ऐक्सेस नेटवर्क) तैयार किया है जो अल्ट्रा हाई स्पीड आउटपुट देने के लिए परफेक्ट है. इसकी टेस्टिंग अमेरिका में कर ली गई है. स्वदेशी नेटवर्क होने से भारत को इक्विपमेंट्स के लिए चीनी कंपनियों जैसे Huawei और ZTE पर निर्भर होने की जरूरत नहीं पड़ेगी. ऐसे में नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पर किसी संभावित सुरक्षा संबंधी खतरे को भी टाला जा सकेगा.

कोल्ड स्टोरेज की मांग बढ़ेगी, 2023 तक क्षमता दोगुनी होने की उम्मीद

भोपाल। ऑनलाइन ग्रॉसरी और फ्रेश फूड डिलिवरी बढ़ने के कारण देश में कोल्ड स्टोरेज सुविधा की मांग में बढ़ोतरी होगी। सीबीआरई की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 तक देश में कोल्ड स्टोरेज की क्षमता दोगुनी हो जाएगी। 2019 में ओवरऑल कोल्ड स्टोरेज क्षमता 37 से 39 मिलियन टन थी। दस राज्यों में कुल क्षमता का 91 फीसदी हिस्सा रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में देश की कुल कोल्ड स्टोरेज क्षमता में सिर्फ 10 राज्यों की 91 फीसदी हिस्सेदारी थी। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, पंजाब, आंध्र प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 के कारण ऑनलाइन ग्रॉसरी और फ्रेश फूड की बिक्री बढ़ी है। इससे कोल्ड स्टोरेज सेगमेंट की मांग में मजबूत उछाल की उम्मीद है। फूड डिलिवरी रेवेन्यू बढ़ने की उम्मीद रिपोर्ट में कहा गया है कि 2023 तक देश में ऑनलाइन फूड डिलिवरी (ओएफडी) रेवेन्यू में 60 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में ओएफडी सेवाओं की मांग बढ़ने से ओवरऑल कोल्ड स्टोरेज क्षमता में भारी बढ़ोतरी होगी। सीबीआरई के चेयरमैन इंडिया एंड साउथ ईस्ट एशिया अंशुमन मैगजीन का कहना है कि कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। फ्रेश फूड प्रोडक्शन एंड डिलिवरी, हेल्थकेयर और फूल-कैमिकल जैसे अन्य कारोबार करने वाली इंडस्ट्री के लिए यह काफी अहम है। क्लाउड किचन से भी कोल्ड स्टोरेज की मांग बढ़ेगी अंशुमन का कहना है कि देश में कोल्ड स्टोर सेगमेंट की संभावना को देखते हुए कहा जा सकता है कि कंज्यूमर इंडस्ट्री से जुड़े प्रमुख लोग इस सेक्टर में निवेश के लिए आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश में क्लाउड किचन के उभरते कॉन्सेप्ट के कारण भी कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की मांग में भारी बढ़ोतरी होगी।

ख़ास तरह के 5 और 10 के सिक्कों की डिमांड, हो जायेंगे मालामाल

नई दिल्ली। पैसा कमाने का जरिया इन दिनों ई-कॉमर्स वेबसाइट पर भी ट्रेंड कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर आपके पास माता वैष्णो देवी के 5 और 10 के सिक्के हैं। मतलब कहने का ये हुआ कि आपके 5 और 10 के सिक्के में माता वैष्णो देवी की तस्वीर होनी चाहिए। इन सिक्कों को साल 2002 में जारी किया गया था। माता रानी की तस्वीर होने के कारण लोग इन सिक्कों को काफी लकी मान रहे हैं। हिंदू धर्म में माता वैष्णो देवी की पूजा की जाती है। इसलिए, लोग इस तरह के सिक्कों के लिए लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं। आप इन सिक्कों की ऑनलाइन वेबसाइट पर नीलामी कर सकते हैं। किसान भी अपने पुराने सिक्कों को ऑनलाइन बेचकर अमीर बनने के इस मौके को हथिया सकते हैं। इन वेबसाइट पर कर सकते हैं ऑनलाइन बिक्री https://dir.indiamart.com/impcat/old-coins.html http://www.indiancurrencies.com/

इनकम टैक्स रिटर्न 30 नवंबर तक करें दाखिल, इन लोगों के लिए ITR फाइल करना है जरूरी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन बढ़ाकर 30 नवंबर, 2020 कर दी है। साथ ही सेल्फ असेसमेंट टैक्स के भुगतान की सीमा भी बढ़ाई गई है। जिन लोगों की सेल्फ असेसमेंट देनदारी एक लाख रुपए तक है, वे 30 नवंबर, 2020 तक रिटर्न फाइल कर सकते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि किन लोगों के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना जरूरी है? जॉब कर रहे या रिटायर हो चुके लोगों को अक्सर लगता है कि उनके इनकम से टैक्स काट लिया गया है तो उन्हें ITR फाइल करने की जरूरत नहीं है। अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो आप गलत हैं। दरअसल, ITR भरने और इनकम टैक्स (Income Tax) जमा करने में फर्क है। ITR भरने का मतलब सरकार को अपने आय और खर्च की जानकारी देना है। ITR भरने के बाद अगर टैक्स की देनदारी बनती है तो आपको टैक्स चुकाना पड़ता है। अगर आपको नौकरी, कारोबार या पेशे से टैक्स छूट की सीमा से अधिक आमदनी होती है तो आपके लिए ITR भरना जरूरी है। किन्हें भरना है ITR अगर आप भारत के नागरिक हैं या फिर प्रवासी भारतीय (Overseas Indian) हैं और किसी एक वित्त वर्ष में आपकी कुल सालाना आय 2.5 लाख रुपये से ज्यादा है तो आपको ITR जरूर फाइल करना चाहिए। अगर आपकी सालाना कमाई 2.5 लाख से अधिक है, लेकिन टैक्स डिडक्शन इनवेस्टमेंट जैसे हेल्थ इंश्योरेंस या मेडिकल इंश्योरेंस के बाद यदि आपकी कुल आय 2.5 लाख रुपये से कम हो जाती है तब भी आपको ITR फाइल करना होगा। इसके अलावा यदि आपको टैक्स फ्री कैपिटल गेन्स (Capital gains) या इक्विटी शेयर की बिक्री से आमदनी होती है, तब भी ITR फाइल करना जरूरी है। इस स्थिति में वास्तव में आप सरकार को कोई टैक्स तो नहीं चुकाते हैं, लेकिन अपनी आमदनी का एक ठोस सबूत जमा करते हैं। इन्हें मिलती है छूट अगर आपकी उम्र 60 साल से कम है और आपकी कुल आमदनी 2.5 लाख रुपये से अधिक है तो ITR फाइल करना जरूरी है। वहीं, उम्र 60 से 80 साल के बीच होने पर 3 लाख रुपये तक की आमदनी पर ITR फाइल करने से छूट मिलती है। वहीं, उम्र 80 साल या उससे अधिक होने पर 5 लाख रुपये तक की आमदनी पर छूट मिलती है। यदि किसी एक वित्त वर्ष में आपकी कुल आमदनी सिर्फ कृषि और उससे जुड़े कार्य से होती है तो आपको ITR भरने की जरूरत नहीं है। साथ ही अगर आपकी कुल सालाना आमदनी 2.5 लाख रुपये से कम है तब भी आपके लिए आईटीआर ITR भरना जरूरी नहीं है।

काहे की मंदी … एस-प्रेसो की बिक्री आंकड़ा पहले साल में ही 75,000 इकाइयों को पार कर

मुंबई। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया की प्रवेश स्तर की छोटी कार एस-प्रेसो की बिक्री आंकड़ा पहले साल में ही 75,000 इकाइयों को पार कर गया है। यह कार पिछले साल सितंबर में पेश की गई थी। कंपनी ने शुक्रवार को बयान में कहा कि इस कार को उतारे जाने के एक महीने के भीतर यह देश की 10 सबसे ज्यादा बिकने वाली कारो में शामिल हो गई थी। कंपनी ने कहा कि एस-प्रेसो देश में ही डिजाइन और विकसित वाहन है। इसे भारत और दुनिया के अन्य देशों के लिए विकसित किया गया है। एमएसआई के कार्यकारी निदेशक (विपणन एवं बिक्री) शशांक श्रीवास्तव ने कहा, ”एक साल के छोटे से समय में एस-प्रेसो ने अपने लिए एक मजबूत जगह बना ली। इस वाहन में कई ऐसे फीचर है, जो इस खंड में पहली बार पेश किए गए हैं। इनमें डायनामिक सेंटर कन्सोल के साथ स्मार्टप्ले इन्फोटेनमेंट प्रणाली शामिल है। श्रीवास्तव ने कहा कि एस-प्रेसो को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह एक मिनी एसयूवी का अनुभव देती है। सोनालिका ट्रैक्टर्स की बिक्री सितंबर में सालाना आधार पर 46 फीसद बढ़कर 17,704 इकाई पर पहुंच गई। कंपनी ने शुक्रवार को बयान में कहा कि घरेलू बाजार में उसकी बिक्री 51.4 फीसद बढ़कर 16,000 इकाई रही। पिछले साल समान महीने में उसने 10,571 ट्रैक्टर बेचे थे। इसी तरह समीक्षाधीन महीने में कंपनी का निर्यात 9.8 फीसद बढ़कर 1,704 इकाई पर पहुंच गया, जो एक साल पहले समान महीने में 1,552 इकाई रहा था।

लॉकडाउन का असर : भारत जीडीपी के मामले में बांग्लादेश भूटान, श्रीलंका, मालदीव से पीछे

नई दिल्ली। पिछड़े देशों में गिने जाने वाले बांग्लादेश की पर कैपिटा (प्रति व्यक्ति) जीडीपी भारत की पर कैपिटा जीडीपी इस कैलेंडर साल में (जनवरी से दिसंबर) में ज्यादा हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने यह जानकारी दी है। आईएमएफ ने कहा है कि बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति जीडीपी 1,888 डॉलर (करीब 1,38,400 रुपए) हो सकती है, जबकि भारत में यह 1,877 डॉलर (करीब 1,37,594 रुपए) हो सकती है। अगर आईएमएफ का अनुमान सही होता है तो भारत अपने क्षेत्र में जीडीपी के मामले में सिर्फ पाकिस्तान और नेपाल से आगे रह पाएगा। इसका मतलब है कि दक्षिण एशिया में भूटान, श्रीलंका, मालदीव और निश्चित रूप से बांग्लादेश भारत से आगे होंगे। एक तरफ जहां भारत का प्रदर्शन गिर सकता है वहीं नेपाल और भूटान की अर्थव्यवस्था इस साल बढ़ने की उम्मीद है। आईएमएफ ने इसी के साथ यह भी कहा है कि 2021 में भारत इसमें आगे हो जाएगा। 2021 में भारत में प्रति व्यक्ति जीडीपी एक लाख 48 हजार 190 रुपए होगी, जबकि बांग्लादेश के लोगों की जीडीपी एक लाख 45 हजार 270 रुपए होगी। अभी भारत में एक लाख 37 हजार 21 रुपए जबकि बांग्लादेश में एक लाख 37 हजार 824 रुपए प्रति व्यक्ति जीडीपी है। यह आंकड़ा एक डॉलर पर 73 रुपए के आधार पर है। पहली तिमाही के नतीजों ने बुरा असर डाला है आईएमएफ ने कहा है कि पहली तिमाही के नतीजों ने भारत की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर डाला है। ऐसा लगता है कि आने वाले दिनों में अभी इसकी मुश्किलें कम नहीं होने वाली हैं। भारत की अर्थव्यवस्था की राह आगे काफी चुनौतीपूर्ण है। आईएमएफ के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक पर नजर डालें तो कुछ ऐसा ही नजर आता है। आईएमएफ की रिपोर्ट के अनुसार, देश की हालत बांग्लादेश से भी बदतर होने वाली है। इसकी प्रति व्यक्ति जीडीपी बांग्लादेश से भी नीचे हो जाएगी और यह सब लॉकडाउन का असर है। जीडीपी में इस साल 10 पर्सेंट गिरावट आई है इस साल भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी में 10 पर्संट गिरावट आई है। जबकि बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति जीडीपी में 4 प्रतिशत की बढ़त है। प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मामले में, भारत कुछ साल पहले तक बांग्लादेश से काफी ऊपर था। लेकिन देश में तेजी से निर्यात के कारण उसकी बढ़त में काफी अंतर आया है। इसके अलावा बीच की अवधि के दौरान जब भारत की बचत और निवेश काफी सुस्त थी तब बांग्लादेश ने इसमें बाजी मार ली। आरबीआई के अनुमान से ज्यादा है आईएमएफ का अनुमान भारत के लिए आईएमएफ का अनुमान आरबीआई के 9.5% के अनुमान से भी बदतर है। यह विश्व बैंक के पहले के अनुमान की तुलना में भी निराशाजनक है। विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2021 में भारत की जीडीपी में 9.6% की गिरावट की आशंका जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्पेन और इटली के बाद भारत की जीडीपी में 10.3% की कमी दुनिया में तीसरी सबसे ज्यादा गिरावट है। सबसे बड़ी गिरावट आईएमएफ ने रिपोर्ट में कहा है कि विकासशील देशों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच यह सबसे बड़ी गिरावट होगी। आईएमएफ ने रिपोर्ट में कहा है कि चीन के अलावा अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाएं 2020 में 5.7 फीसदी की की कमी देखेंगी। रिपोर्ट ने भारत और इंडोनेशिया जैसे देशों में वायरस के फैलने से होने वाले जोखिम को भी बताया है। इन देशों की अर्थव्यवस्थाएं पर्यटन और कमोडिटीज़ जैसे सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों पर निर्भर हैं। 1990-91 की तुलना में ज्यादा गिरावट रिपोर्ट के साथ मौजूद आंकड़ों में कहा गया है कि 2020 में भारतीय अर्थव्यवस्था 1990-91 के संकट के बाद से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती है। इसमें आगे कहा गया है कि श्रीलंका के बाद भारत के दक्षिण एशिया में सबसे खराब अर्थव्यवस्था होने की संभावना है। हालांकि, आईएमएफ की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2021 में भारत में रिकवरी भी तेज होगी जो प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में एक बार फिर भारत को बांग्लादेश से आगे निकाल देगा।

डेढ़ माह में सोना में 7300 रुपये और चांदी में 12 हजार की गिरावट

भोपाल। सराफा बाजार में सोना-चांदी के भाव में गिरावट आई है। अगस्त में सोना 58 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम (23 कैरेट) था तो चांदी 70 हजार रुपये प्रतिकिलो थी। अभी सोना 7300 प्रति 10 ग्राम तो चांदी 12 हजार रुपये प्रतिकिलो तक सस्ती हुई है। वैश्विक बाजार में आई गिरावट के कारण कीमतें कम हुई हैं, जिसके बाद स्थानीय सराफा बाजार में ग्राहकी भी बढ़ी है। दीपावली बाद जिन परिवारों में शादी- विवाह होने हैं, उन्होंने खरीद शुरू कर दी है। कारोबारियों के मुताबिक जून से अगस्त तक बाजार में 25 से 30 फीसद ग्राहकी ही थी, लेकिन दाम कम होने से ग्राहकी 40 फीसद तक पहुंच गई है। सराफा व्यापारी एसोसिएशन अध्यक्ष नरेश अग्रवाल का कहना है कि कोरोना काल में बड़े निवेशकों ने बैंकों में जमापूंजी को सोना-चांदी में निवेश कर दिया था। इस कारण मांग बढ़ गई थी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाव में तेजी आ गई थी, लेकिन बाद में भाव में गिरावट होने लगी। वर्तमान में वैश्विक बाजार में सोना 1850 डॉलर प्रति औंस है, जबकि पहले यह दो हजार तक पहुंच गया था। ड्यूटी व जीएसटी को जोड़कर जो भाव रहते हैं, उस पर ग्राहकों को देते हैं। बंद दुकानों में भी चमका था सोना 25 मार्च से 31 मई तक लाकडाउन की वजह से भोपाल का सराफा बाजार बंद था। बंद दुकानों में सोना चमका था। लॉकडाउन अवधि में ही भाव 6000 रुपये तक बढ़ गए थे। जुलाई में 50 हजार के आंकड़े के पार पहुंचा था और अगस्त में रिकॉर्ड 58 हजार के आंकड़े को छू लिया था। ठीक ऐसा ही चांदी को लेकर भी रहा। चांदी पहली बार 70 हजार रुपये तक पहुंची थी।

इन स्टॉक ने किया निवेशकों को मालामाल, 6 महीने में दोगुना से बढ़ी शेयरों की कीमतें

मुंबई . अगर आपने सोच समझ कर निवेश किया होता तो आप की निवेश की गई राशि आज दोगुनी हो जाती। पिछले 5-6 महीनों में शेयर बाजार में ढेर सारे अच्छे और खराब स्टॉक रहे हैं जिन्होंने दोगुना से भी ज्यादा बढ़त हासिल की है। हालांकि यह एक अलग मामला है कि इसका बहुत ज्यादा ताल्लुक कोरोना से रहा है। लेकिन बिना कोरोना के जिन शेयरों ने हमेशा अच्छा रिटर्न दिया है वे क्वालिटी वाले शेयर हैं। विप्रो के शेयर में दोगुना का रिटर्न- यह आईटी सेक्टर की बेहतरीन कंपनी है। इसका ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा है। इसके शेयर ने हमेशा बेहतरीन प्रदर्शन किया है। क्वालिटी स्टॉक्स में यह शेयर शामिल है। इसका शेयर एनएसई पर 19 मार्च को 159 रुपए पर था। आज यह शेयर 316 रुपए पर बंद हुआ है। यानी 6 महीनों में इस शेयर ने निवेशकों की संपत्ति को दोगुना कर दिया है। आपका एक लाख रुपए आज दो लाख रुपए हो गया है। इंफोसिस का शेयर- यह भी आईटी कंपनी है। बेहतरीन ट्रैक रिकॉर्ड और क्वालिटी वाला शेयर है। इंफोसिस का गाइडेंस आईटी इंडस्ट्री के लिए एक दिशा तय करता है। बीच में इसके शेयरों पर थोड़ा दबाव जरूर था, लेकिन हाल में इस शेयर ने दोगुना का मुनाफा दिया है। मार्च में इसका शेयर 511 रुपए पर था। आज यह एनएसई पर एक हजार रुपए पर बंद हुआ है। यानी दोगुना के करीब फायदा मिला है। आपका एक लाख रुपए दो लाख रुपए हो गया है। डॉ. रेड्‌डीज का शेयर- यह फार्मा सेक्टर की कंपनी है। बेहतरीन क्वालिटी वाला शेयर है। चार दिनों से इसका शेयर बढ़ रहा था और आज एक साल के सर्वोच्च स्तर पर है। आज इसने एनएसई पर धमाल मचाया। एनएसई पर 10 प्रतिशत बढ़कर 5,306 रुपए पर बंद हुआ। 4 दिन में 20 प्रतिशत बढ़ा है। 6 महीने में यह 112 प्रतिशत बढ़ा है। यानी आपका एक लाख रुपए 2.12 लाख रुपए हो गया है। 19 मार्च को डॉ रेड्डीज का शेयर 2,495 रुपए पर आ गया था। आज यह 5,326 रुपए के भाव पर पहुंच गया। 6 माह में निवेशकों की दौलत 41,521 करोड़ से बढ़कर 88,109 करोड़ हो गई। लौरा लैब्स का शेयर-लौरा लैब्स फार्मा सेक्टर की कंपनी है। हालांकि यह उतनी फेमस तो नहीं है, पर क्वालिटी स्टॉक है। शुक्रवार को यह 6 प्रतिशत बढ़कर 1,491 रुपए पर बंद हुआ है। जनवरी से लेकर अब तक इसका शेयर तीन गुना बढ़ा है। एक जनवरी को इसके शेयर की कीमत 368 रुपए थी। अब यह 1,491 रुपए है। आईटी और फार्मा बिजनेस अच्छा चल रहा है दरअसल आईटी और फार्मा शेयर इसलिए बढ़े हैं क्योंकि लॉकडाउन में दोनों का बिजनेस अच्छा चला है। एक ओर जहां घर से काम करने की वजह से इंटरनेट के साथ-साथ पीसी, लैपटॉप, मोबाइल जैसे संसाधनों की मांग बढ़ी, वहीं लोगों ने इस पर खर्च भी अच्छा किया। फार्मा कंपनियों की तो चांदी ही रही। कोरोना की दवा भले नहीं आई, पर जो वर्तमान दवाएं हैं, उन्हीं के जरिए फार्मा कंपनियों ने अच्छी कमाई की है। लौरा लैब्स का 2018 में एपीआई बिजनेस 5 करोड़ का था। अब यह 825 करोड़ रुपए का हो गया है। आईसीआईसीआई डायरेक्ट ने इसका लक्ष्य 1,620 रुपए रखा है। यानी अभी भी इसमें तेजी की उम्मीद बनी है।

मस्क दौलत में आई कमी

अमेरिकी ऑटो कंपनी टेस्ला के संस्थापक और सीईओ एलन मस्क की दौलत मगंलवार के कारोबारी सत्र के दौरान महज छह घंटे में $16 अरब घट गई. उनकी कंपनी के शेयरों में बड़ी गिरावट के चलते ऐसा हुआ. इसकी जानकारी ब्लूमबर्ग बिलिनेयर इंडेक्स और फोर्ब्स के आंकड़ों से मिली है. मंगलवार को शेयर में आई गिरावट की वजह से मस्क दौलत में आई कमी टाइटन कंपनी, एचडीएफसी लाइफ, अल्ट्राटेक सीमेंट जैसी भारतीय कंपनियों की मार्केटकैप से अधिक है

रिलायंस इंडस्ट्रीज

रिलायंस इंडस्ट्रीज का जुलाई-सितंबर तिमाही में मुनाफा 11.5% बढ़कर 11,262 करोड़ रुपये हुआ| नई दिल्ली. मार्केट कैप के लिहाज से देश की सबसे बड़ी कंपनी आरआईएल RIL यानी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Ltd) का जुलाई-सितंबर तिमाही मुनाफा 11.5 फीसदी बढ़कर 11,262 करोड़ रुपये हो गया है. वहीं, इस दौरान कंपनी की आमदनी  1.48 लाख करोड़ रुपये रही है. आपको बता दें कि शेयर बाजार खुलने के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में आई तेजी के चलते कंपनी की मार्केट कैप 9 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई थी. ऐसा करने वाली रिलायंस देश की पहली कंपनी बन गई है. हालांकि, शेयर बाजार बंद होने पर रिलायंस इंडस्ट्रीज की मार्केट कैप 8.97 लाख करोड़ रुपये रही है. रिलायंस इंडस्ट्रीज के तिमाही नतीजों पर एक नज़र- रिलायंस का जुलाई-सितंबर मुनाफा 10,104 करोड़ रुपये से बढ़कर 11,262 करोड़ रुपये हो गया है. वहीं, इस दौरान कंपनी की आमदनी 1.48 लाख करोड़ रुपये रही है.

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