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ChatGPT मेकर की नई तैयारी, टेक मार्केट में उतरेगा खास हार्डवेयर प्रोडक्ट

नई दिल्ली OpenAI का नाम आते ही लोगों के जेहन में एक सॉफ्टवेयर का ख्याल आता है. मगर कंपनी अब हार्डवेयर सेक्टर में एंट्री करना चाहती है. कंपनी ने कुछ वक्त पहले ही ऐलान किया है कि वो इस साल के अंत तक AI इनेबल हार्डवेयर प्रोडक्ट लॉन्च कर सकते हैं. कंपनी इससे पहले एक नया प्रोडक्ट लॉन्च कर सकती है.  2026 के अंत में कंपनी AI इनेबल डिवाइस को लॉन्च करेगी, जो लोगों के लिए 2027 में मिलेगा. अब एक लीक सामने आई है, जिसमें कंपनी के अपकमिंग हार्डवेयर की जरूरी डिटेल्स हैं. ये एक नॉन-AI डिवाइस हो सकता है. आइए जानते हैं इसकी डिटेल्स.  क्या होगा कंपनी का पहला डिवाइस? टिप्स्टर स्मार्ट पिकाचू के मुताबिक, OpenAI का पहला हार्डवेयर ईयरबड्स होंगे. इन ईयरबड्स का नाम Dime हो सकता है. हालांकि, कंपनी इसका बेसिक वर्जन रिलीज करेगी. ये संभवतः कंपनी के अपने ड्रीम डिवाइस के लॉन्च से पहले का वॉर्मअप हो सकता है.  OpenAI से जुड़ी एक पेटेंट फाइलिंग चीन में पब्लिक की गई है. इस फाइलिंग के मुताबिक प्रोडक्ट का नाम Dime होगा. टिप्स्टर का कहना है कि कंपनी पहले सिंपल ईयरबड्स लॉन्च करेगी. इसके अलावा OpenAI के स्मार्टफोन जैसे डिवाइस को लॉन्च होने में वक्त लगेगा.  फोन जैसा डिवाइस भी लाएगी कंपनी इसकी वजह HBM स्टोरेज है जो मैटेरियल की कीमत को बढ़ा सकती है. कंपनी का स्मार्टफोन जैसा डिवाइस कंप्यूटर जैसी पावर के साथ आएगा. इससे पहले OpenAI के चीफ ग्लोबल अफेयर ऑफिसर क्रिस लेहेन ने बताया था कि इस साल के अंत तक वे पहला AI डिवाइस लॉन्च करेंगे. हालांकि, लॉन्च की निश्चित तारीख की जानकारी अभी तक सामने नहीं आई हैं. OpenAI ने हाल में ही नया AI मॉडल एजेंटिक कोडिंग को लॉन्च किया है, जिसका नाम GPT-5.3-Codex है. ये मॉडल सभी पेड यूजर्स के लिए उपलब्ध है. कंपनी का कहना है कि ये डिवाइस पिछले वर्जन के मुकाबले 25 परसेंट फास्ट होगा.

रूस का कड़ा फैसला, WhatsApp, Facebook और YouTube पर प्रतिबंध

रूस टेलीग्राम पर रोक लगाने के बाद रूस की पुत‍िन सरकार ने अमेर‍िकी सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म्‍स पर कार्रवाई शुरू कर दी है। मीड‍िया र‍िपोर्टों के अनुसार, रूस में वॉट्सऐप, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे लोकप्रिय अमेर‍िकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोक लगा दी गई है। कहा जा रहा है क‍ि वहां लोग इन पॉपुलर ऐप्‍स को इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। बुधवार को रूस ने पॉपुलर मैसेजिंग ऐप Telegram पर रोक लगा दी थी। सरकार ऐसा इसलिए कर रही है, ताकि लोग सरकारी प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने लगें। रूस की नियामक संस्था ‘रोसकोमनाडजोर’ ने सुरक्षा का हवाला देते हुए टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था। अब अमेरिका के बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी रोक लग गई है। इन वेबसाइट्स के डोमेन नाम को रूस के राष्ट्रीय डोमेन नेम सिस्टम (DNS) से हटा दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पुतिन सरकार ने सिर्फ अमेरिका के बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों पर भी रोक लगाई है। इससे प्रभावित हुई वेबसाइट्स में बीबीसी, डॉउचा वेले, रेडियो फ्री यूरोप रेडियो लिबर्टी शामिल हैं। इसके अलावा, टॉर ब्राउजर (Tor Browser) को भी ब्लॉक कर दिया गया है, जिसका इस्तेमाल गुमनाम ब्राउजिंग के लिए किया जाता था। राष्ट्रीय DNS सिस्टम इस्तेमाल करना हुआ अनिवार्य बता दें कि रूस में इंटरनेट सेवा देने वालों के लिए देश के राष्ट्रीय DNS सिस्टम का इस्तेमाल करना अनिवार्य हो गया है। यह सिस्टम Roskomnadzor नाम की सरकारी एजेंसी की निगरानी में काम करता है। सिस्टम का काम “सॉवरेन इंटरनेट” कानून के तहत इंटरनेट कंट्रोल को लागू करना है। क्यों उठाया रूस ने ये कदम? कई रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि रूस ने यह कदम देश में विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मीडिया वेबसाइट्स के इस्तेमाल को लगभग खत्म कर देने के लिए उठाया है। हालांकि, इससे रूस में रहने वाले लोग कई ग्लोबल सर्विस और खबरों के सोर्स से दूर हो गए हैं। वॉट्सऐप कॉल‍िंंग फीचर पर पहले से बैन बता दें कि रूस में पहले से ही वॉट्सऐप की कई सर्विस पर बैन लगा हुआ है। पिछले साल WhatsApp और Telegram की कॉलिंग फीचर पर रोक लगा दी गई थी। इसके अलावा, रूस ने दिसंबर में ऐपल के फेसटाइम और स्नैपचैट को भी देश में बैन कर दिया था।

डायबिटीज अलर्ट देगी स्मार्टवॉच? दुबई में शुरू हुई नई टेक्नोलॉजी की जांच

दुबई में एक ऐसी स्मार्टवॉच की टेस्टिंग चल रही है, जो लोगों को डायबटीज रिस्क के बारे में बताएगी। मंगलवार को दुबई में वर्ल्ड हेल्थ एक्सपो (WHX) 2026 का आयोजन किया गया। इसमें डायबिटीज के खतरे का पता लगाने के लिए स्मार्टवॉच टेक्नोलॉजी के बारे में बताया गया है। इसका मकसद बढ़ते डायबिटीज संकट से निपटना है। दुनिया भर में लाखों लोगों को यह भी नहीं पता चल पाता है कि उन्हें डायबटीज का खतरा है। इस कारण स्मार्टवॉच टेक्नोलॉजी के जरिए लोगों की मदद की जा रही है। इसके लिए नए स्टडी हो रही है, जिसमें स्मार्टवॉच की टेस्टिंग हो रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वॉच डायबटीज रिस्क के बारे में कितनी सटीक जानकारी दे सकती है। Huawei Watch GT 6 Pro की हो रही टेस्टिंग आजकल मार्केट में अलग-अलग तरह के गैजेट्स आते हैं। स्मार्टवॉच के जरिए लोग अपनी कई हेल्थ एक्टिविटीज को ट्रैक कर पाते हैं। दुनिया में डायबटीज के मरीज दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। इससे निपटने के लिए नई स्मार्टवॉच टेक्नोलॉजी पर काम चल रहा है। Gulf News की रिपोर्ट के अमुसार, दुबई हेल्थ के तहत मोहम्मद बिन राशिद यूनिवर्सिटी (MBRU) में असिस्टेंट प्रोफेसर और एंडोक्राइनोलॉजी डायबिटीज स्पेशलिस्ट डॉ. मरियम अल सईद ने बताया कि रिसर्च में 150 मरीजों और वॉलंटियर्स पर Huawei Watch GT 6 Pro को टेस्ट किया जाएगा। यह टेस्टिंग इसलिए है ताकि यह देखा जा सके कि वॉच बढ़े हुए ब्लड ग्लूकोज लेवल को पहचानने में कितनी सही है। टेस्टिंग में शामिल होंगे कई लोग इस ट्रायल में 50 हेल्दी वॉलंटियर्स, 50 जाने-माने डायबिटीज के मरीज के साथ दुबई हेल्थ हॉस्पिटल और शहर भर के प्राइमरी हेल्थकेयर सेंटर से 50 प्री-डायबिटीज वाले मरीज भी शामिल होंगे। डॉ. सईद ने प्री-डायबिटीज ग्रुप में खास दिलचस्पी दिखाई। बता दें कि यह ग्रुप उन लोगों का है, जिनका ब्लड शुगर लेवल कभी ज्यादा और कभी कम हो सकता है और जिन्हें अपनी हालत के बारे में पता हो भी सकता है और नहीं भी। ​ट्रेडिशनल कैपिलरी ग्लूकोज मॉनिटर से होगी तुलना स्टडी में स्मार्टवॉच की रीडिंग की तुलना ट्रेडिशनल कैपिलरी ग्लूकोज मॉनिटर से की जाएगी। यह वह टेस्ट होता है, जिसमें एक्यूरेसी टेस्ट करने के लिए उंगली पर सुई चुभाते हैं और बल्ड की एक बूंद से टेस्ट किया जाता है। बता दें कि Huawei ने WHX में Huawei Health Strategy and Research Platform इवेंट में Huawei Watch GT 6 Pro के लिए डायबिटीज रिस्क के नए फीचर की घोषणा की थी। इसके बाद यह स्टडी की घोषणा हुई। क्या है टेक्नोलॉजी? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Huawei Watch GTX में फोटोप्लेथिस्मोग्राफी (PPG) का इस्तेमाल होता है। यह एक ऑप्टिकल तरीका है, जो लाइट सेंसर के जरिए ब्लड ग्लूकोज का अंदाजा लगा सकता है। कलाई पर पहना जाने वाले एक बाहरी और नॉन-इनवेसिव डिवाइस होने के कारण यह मिनिमली इनवेसिव कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटर से अलग है, जिन्हें स्किन के नीचे लगाना पड़ता है। डॉ. अल सईद ने कहा कि वॉच यह नहीं बताएगी कि आपको डायबिटीज है, लेकिन यह उन्हें बताएगी कि ग्लूकोज बढ़ा हुआ है। इस तरह वॉच आपको सिग्नल देगी कि शायद आपको अपने डॉक्टर के पास जाकर लैब टेस्ट करवाना चाहिए। जल्दी पता लगाना है जरूरी डॉ. सईद ने कहा कि दुनिया भर में 500 मिलियन से भी ज्यादा लोग टाइप 2 या टाइप 1 डायबिटीज के डायग्नोसिस के साथ जी रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिन लोगों को डायग्नोस नहीं हुआ है, उन्हें ये पता ही नहीं है कि उनको डायबिटीज है, क्योंकि उन्होंने कभी चेकअप ही नहीं करवाया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्री-डायबिटीज वाले दो-तिहाई लोगों में कुछ समय बाद यह बीमारी पूरी तरह हो जाती है, इसलिए इसका जल्दी पता लगाना बहुत जरूरी है।

एक्ने से बचना है? पहले जान लें कौन-सा क्लींजर है आपकी स्किन के लिए सही

स्किन केयर रूटीन की शुरुआत हमेशा चेहरे की सफाई यानी क्लींजिंग से होती है। अक्सर हम विज्ञापनों या दोस्तों की सलाह पर कोई भी फेसवॉश खरीद लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत फेसवॉश आपकी त्वचा को समय से पहले बूढ़ा, रूखा या मुंहासों से भर सकता है? चेहरे की चमक बरकरार रखने के लिए सबसे जरूरी है अपनी स्किन टाइप को समझना और उसके अनुसार सही इंग्रिडिएंट्स वाला फेसवॉश चुनना। आइए जानते हैं अपनी स्किन के लिए सही फेसवॉश कैसे चुनें। ऑयली स्किन के लिए अगर आपका चेहरा धोने के कुछ देर बाद ही चिपचिपा और चमकदार दिखने लगता है, तो आपकी स्किन ऑयली है। ऐसी त्वचा के पोर्स अक्सर बंद हो जाते हैं, जिससे ब्लैकहेड्स और मुंहासे होते हैं। इसलिए अगर स्किन ऑयली है, तो आपको फोमिंग या जेल-बेस्ड फेसवॉश चुनना चाहिए। इसमें सैलिसिलिक एसिड, ग्लाइकोलिक एसिड, टी-ट्री ऑयल या नीम होना चाहिए। ये स्किन के ऑयल प्रोडक्शन को कंट्रोल करते हैं और पोर्स की गहराई से सफाई करते हैं। ड्राई स्किन के लिए चेहरा धोने के बाद अगर त्वचा खिंची-खिंची और सफेद दिखने लगे, तो आपकी स्किन ड्राई है। ऐसी त्वचा को ऐसे क्लींजर की जरूरत होती है जो सफाई तो करे, लेकिन नेचुरल ऑयल्स को न छीने। आपको क्रीमी या लोशन-बेस्ड फेसवॉश का चुनाव करना चाहिए, जिसमें हयालूरोनिक एसिड, ग्लिसरीन, एलोवेरा या विटामिन-ई हो। ये सफाई के साथ-साथ त्वचा को हाइड्रेट भी रखते हैं। कॉम्बिनेशन स्किन के लिए यह सबसे आम स्किन टाइप है, जिसमें ‘T-Zone’ (माथा, नाक और ठुड्डी) ऑयली होता है, जबकि गाल सूखे या नॉर्मल होते हैं। इसके लिए आपको एक जेंटल फेसवॉश की जरूरत है जो न तो बहुत ज्यादा ऑयली हो और न ही बहुत ज्यादा ड्राई। ऐसे फेसवॉश चुनें जो बैलेंसिंग हों। लैक्टिक एसिड या विटामिन-सी वाला माइल्ड क्लींजर आपके लिए बेहतरीन काम करेंगे। सेंसिटिव स्किन के लिए ऐसी त्वचा पर कोई भी नया प्रोडक्ट लगाते ही जलन, रेडनेस या खुजली होने लगती है। आपको फ्रेग्रेंस-फ्री और हाइपोएलर्जेनिक फेसवॉश की तलाश करनी चाहिए। इसमें कैमोमाइल, ओट्स या सेरामाइड्स होने चाहिए, जो स्किन बैरियर को मजबूत करते हैं। फेसवॉश खरीदते समय इन 3 बातों का भी रखें खास ध्यान     pH बैलेंस- हमारी त्वचा का प्राकृतिक pH लगभग 5.5 होता है। हमेशा ‘pH Balanced’ फेसवॉश ही चुनें ताकि त्वचा का नेचुरल बैलेंस न बिगड़े।     सल्फेट और पैराबेन से बचें- सल्फेट (जैसे SLS) फेसवॉश में झाग तो बहुत बनाता है, लेकिन यह त्वचा को बहुत ज्यादा रूखा कर देता है। हमेशा सल्फेट-फ्री फेसवॉश चुनें।     मौसम का मिजाज- याद रखें कि मौसम के साथ आपकी स्किन की जरूरतें बदलती हैं। सर्दियों में माइल्ड क्रीमी क्लींजर और गर्मियों में डीप क्लीनिंग फेसवॉश का इस्तेमाल करना समझदारी है।     दिन में दो बार इस्तेमाल करें- सुबह सोकर उठने के बाद और रात को सोने से पहले हरा साफ करना न भूलें।  

महंगे ट्रीटमेंट को कहें अलविदा, अपनाएं प्याज का तेल

आजकल के प्रदूषण, खराब लाइफस्टाइल और केमिकल प्रोडक्ट्स के ज्यादा इस्तेमाल के कारण बाल झड़ना एक आम समस्या बन गई है। इसके लिए बाजार में कई तरह के महंगे तेल और ट्रीटमेंट्स उपलब्ध हैं, लेकिन जो बात प्राकृतिक नुस्खों में है, वह कहीं और नहीं। बालों की मजबूती और उन्हें दोबारा उगाने के लिए प्याज का रस सदियों भारतीय घरों में इस्तेमाल होता आया है। प्याज में भरपूर मात्रा में सल्फर पाया जाता है, जो बालों को टूटने से बचाता है और उन्हें जड़ों से पोषण देता है। अगर आप भी हेयर फॉल से परेशान हैं, तो प्याज के रस से हेयर ऑयल बना सकते हैं। आइए जानें कैसे। प्याज के तेल के फायदे     सल्फर से भरपूर- सल्फर को बालों का बिल्डिंग ब्लॉक माना जाता है, जो केराटिन प्रोडक्शन में मदद करता है।     एंटी-बैक्टीरियल गुण- यह स्कैल्प के इन्फेक्शन और डैंड्रफ को दूर रखता है।     ब्लड सर्कुलेशन- यह स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है, जिससे नए बाल उगने में मदद मिलती है।     बाल सफेद होने से बचाव- प्याज में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट बालों को समय से पहले सफेद होने से रोकते हैं। घर पर प्याज का तेल बनाने की विधि सामग्री-     प्याज- 2-3 बड़े आकार के (लाल प्याज सबसे बेहतर होते हैं)     नारियल का तेल- 200 मिली     कढ़ी पत्ता- एक मुट्ठी     मेथी दाना- एक चम्मच बनाने का तरीका     सबसे पहले प्याज को छीलकर टुकड़ों में काट लें और मिक्सी में पीसकर पेस्ट बना लें। आप चाहें तो इसमें बिना पानी डाले प्याज का रस भी छानकर निकाल सकते हैं।     अब एक भारी तले वाली कड़ाही लें और इसमें नारियल का तेल डालें और मध्यम आंच पर गरम करें।     जब तेल गरम हो जाए, तब इसमें प्याज का पेस्ट, कढ़ी पत्ता और मेथी दाना डालें। आंच को बिल्कुल धीमा रखें।     इसे धीरे-धीरे तब तक चलाएं जब तक प्याज का पेस्ट गहरा भूरा न हो जाए। ध्यान रहे कि प्याज जलना नहीं चाहिए, बस उसका अर्क तेल में उतरना चाहिए। इसमें करीब 15-20 मिनट लग सकते हैं।     जब तेल ठंडा हो जाए, तो इसे एक सूती कपड़े से छान लें। अब इस तेल को एक कांच की बोतल में भर कर रख लें। इस्तेमाल का तरीका     उंगलियों के टिप्स से तेल को स्कैल्प पर धीरे-धीरे लगाएं। कम से कम 10-15 मिनट तक सर्कुलर मोशन में मालिश करें।     तेल को कम से कम 1 घंटा बालों में लगा रहने दें।     किसी माइल्ड या सल्फेट-फ्री शैम्पू से बालों को धो लें। प्याज की महक हटाने के लिए आप नींबू के रस वाले पानी से भी बाल धो सकते हैं।  

फेस स्वैप की तैयारी में इंस्टाग्राम! AI फीचर से फोटो-वीडियो होंगे और भी मजेदार

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के बढ़ते चलन को देखते हुए मेटा के स्वामित्व वाला इंस्टाग्राम एक ऐसा फीचर लाने पर काम कर रहा है, जिसकी मदद से एआई से बनी फोटो और वीडियो में यूजर डिजिटली अपना चहरा जोड़ सकेंगे। कंपनी जल्द ही एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फीचर ला सकती है। इंस्टाग्राम का यह फीचर OpenAI के Sora प्लेटफॉर्म को टक्कर दे सकता है। एक टिप्सटर Alessandro Paluzzi ने अपने एक्स अकाउंट से ट्वीट करके इस अपकमिंग टूल के बारे में बताया है। उनके अनुसार, इंस्टाग्राम में आने वाला यह टूल, सिंपल इमेज फिल्टर के बजाय पर्सनलाइज्ड “लाइकनेस” बनाने पर फोकस करता है। अभी तक इंस्टाग्राम ने इस फीचर के लॉन्चिंग को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है। हालांकि, टिप्सटर द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट से पता चलता है कि इस सुविधा पर काफी पहले से काम चल रहा है। फेस स्वैप टूल लाने की तैयारी Alessandro Paluzzi ने X पर इंस्टाग्राम के अपकमिंग फीचर की डिलेट शेयर की है। उन्होंने दावा किया है कि इंस्टाग्राम AI-पावर्ड फेस स्वैप सिस्टम पर काम कर रहा है। इसे फेस स्वैप टूल भी कहा जाता है। हालांकि, इंस्टाग्राम में इसे “मेरी लाइकनेस बनाएं” नाम से लाया जा सकता है। लीक हुई इमेज के अनुसार, यूजर्स AI विजुअल्स या छोटी क्लिप बना सकते हैं। एआई से बनाई गई इन क्लिप में उनका चहरा भी जोड़ सकते हैं। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हुआ है कि इंस्टाग्राम यह लाइकनेस डेटा कैसे इकट्ठा करेगा। उम्मीद है कि सिस्टम मौजूदा पोस्ट और हाइलाइट्स को एनालाइज करेगा या फिर ऑप्शन को एक्टिवेट करने के लिए यूजर्स को एक डेडिकेटेड सेल्फी अपलोड करने के लिए कहा जा सकता है। सेटअप हो जाने के बाद यूजर अलग-अलग सिनेरियो में खुद को दिखाते हुए कस्टमाइज्ड इमेज या वीडियो बना सकते हैं। इसके लिए उन्हें टेक्स्ट प्रॉम्प्ट डालना होगा। शेयरिंग और क्रिएटिव को मिलेगा बढ़ावा इस फीचर की मदद से एआई कंटेंट को और भी आकर्षक बनाया जा सकेगा। यूजर डायरेक्ट मैसेज के जरिए प्राइवेटली क्रिएशन भेज सकते हैं या उन्हें स्टोरीज और फीड पर पब्लिकली पोस्ट भी कर सकते हैं। हालांकि, ऐसी किसी भी डिटेल के लिए कोई कन्फर्मेशन नहीं है। अगर इसे लागू किया जाता है, तो यह टूल मेटा के अपने ऐप्स में जेनरेटिव AI में बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के साथ अलाइन होगा। इससे यूजर्स को ज्यादा इंटरैक्टिव और पर्सनलाइज्ड कंटेंट क्रिएशन टूल मिलेंगे। लेनी होगी परमिशन रिपोर्ट की मानें तो यूजर्स डायरेक्ट मैसेज से इनवाइट या रिक्वेस्ट भेज पाएंगे। AI से बने मीडिया में उनके अपीयरेंस का इस्तेमाल करने से पहले दूसरे यूजर को मंजूरी देनी होगी। यह परमिशन बेस्ड तरीका गलत इस्तेमाल को रोकने और पर्सनल आइडेंटिटी को प्रोटेक्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। अभी इस अपकमिंग फीचर की इतनी जानकारी ही सामने आई है। आगे आने वाले समय कंपनी इसके बारे में अन्य डिटेल शेयर कर सकती है।

सेहत का काला जादू: Black Coffee के रोज़ाना फायदे

आजकल की भागती हुई स्ट्रेसफुल लाइफ में सुबह की शुरुआत ताजगी और एनर्जी के साथ करना हर किसी की जरूरत है। कई लोग इसके लिए ब्लैक कॉफी का सहारा लेते हैं। ब्लैक कॉफी न सिर्फ आपको नींद और थकान से बाहर निकालती है बल्कि सेहत के लिए भी किसी टॉनिक से कम नहीं है। बिना दूध और चीनी के बनी यह कॉफी कैलोरी में बेहद कम और पोषक तत्वों में भरपूर होती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, कैफीन, विटामिन्स और मिनरल्स शरीर को कई तरह के फायदे पहुंचाते हैं। आइए जानते हैं रोजाना एक कप ब्लैक कॉफी पीने से मिलने वाले कुछ बड़े लाभ के बारे में विस्तार से- एनर्जी लेवल को बढ़ाए ब्लैक कॉफी का सबसे पहला फायदा है एनर्जी बूस्ट। इसमें मौजूद कैफीन तुरंत दिमाग को सक्रिय करता है और थकान को मिटाकर शरीर में चुस्ती-फुर्ती भर देता है। कामकाजी लोगों और स्टूडेंट्स के लिए यह दिन की बेहतरीन शुरुआत है। वेट लॉस करने में मददगार ब्लैक कॉफी मेटाबॉलिज्म को तेज करके फैट बर्निंग में मदद करती है। यह कैलोरी में बहुत कम होती है और भूख को कुछ समय के लिए दबाकर ओवरईटिंग से बचाती है। वजन कम करने वालों के लिए यह नेचुरल सपोर्ट है। दिल की सेहत के लिए फायदेमंद रोजाना ब्लैक कॉफी का संतुलित सेवन ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है और हार्ट डिजीज के खतरे को कम करता है। डायबिटीज के खतरे को कम करे ब्लैक कॉफी इंसुलिन की सेंसटिविटी को सुधारती है और ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखती है। इसके नियमित सेवन से टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा कम होता है। लिवर को स्वस्थ रखे ब्लैक कॉफी लिवर के लिए बेहद लाभकारी है। यह फैटी लिवर, सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव करती है। लिवर की डिटॉक्स प्रक्रिया को भी यह सपोर्ट करती है। दिमाग की क्षमता बढ़ाए ब्लैक कॉफी में मौजूद कैफीन न्यूरॉन्स को उत्तेजित करता है, जिससे मेमोरी, एकाग्रता और अलर्टनेस बढ़ती है। इसके सेवन से अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी कम होता है। एंटीऑक्सीडेंट का पावरहाउस ब्लैक कॉफी एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है,जो शरीर को फ्री-रैडिकल्स से बचाकर इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती है। यह एजिंग प्रोसेस को धीमा करती है और स्किन को हेल्दी ग्लो देती है। स्ट्रेस और डिप्रेशन से राहत ब्लैक कॉफी दिमाग में डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे “हैप्पी हार्मोन” को बढ़ाती है, जिससे मूड अच्छा होता है और स्ट्रेस व डिप्रेशन कम होता है। पाचन क्रिया को बेहतर बनाए ब्लैक कॉफी पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करती है जिससे खाना आसानी से पचता है। यह कब्ज जैसी समस्या को भी कम करती है और पेट को हल्का रखती है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि: हेपेटाइटिस-बी की जांच होगी अब सरल और विश्वसनीय

आस्ट्रेलिया में दुनिया के पहले ट्रायल में पता चला है कि हेपेटाइटिस बी डीएनए के लिए एक सामान्य फिंगरस्टिक टेस्ट  स्टैंडर्ड लैब टेस्टिंग जितना ही सटीक है, जिससे दूरदराज और सीमित संसाधनों वाली जगहों के ज्यादा लोगों तक इसकी पहुंच का रास्ता खुल गया है। यह अध्ययन जर्नल ऑफ क्लिनिकल माइक्रोबायोलाजी में प्रकाशित हुआ। सिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने बताया कि यह प्वॉइंट ऑफ केयर टेस्ट एक घंटे के अंदर नतीजे दे सकता है और इसे विकेंद्रीकृत क्लीनिकों में भी किया जा सकता है। टेस्ट में देरी को करेगा कम आस्ट्रेलिया में न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी के किर्बी इंस्टीट्यूट के एक बयान के अनुसार, फिंगरस्टिक टेस्ट प्रयोगशाला आधारित टेस्टिंग की वजह से होने वाली देरी को दूर करने में मदद कर सकता है। किर्बी इंस्टीट्यूट में अनुसंधान का नेतृत्व करने वाली प्रोफेसर गैल मैथ्यूज ने कहा, परिणामों ने पाया कि फिंगरस्टिक प्वाइंट आफ केयर परीक्षण अत्यधिक सटीक है, जो पारंपरिक परीक्षणों की सटीकता के करीब है। मैथ्यूज ने कहा कि यह खोज वैश्विक स्तर पर परीक्षण और उपचार की पहुंच को बढ़ाने की क्षमता रखती है, विशेष रूप क्लिनिक में फिंगर स्टिक ब्लड सैंपल का से जहां परीक्षण की पहुंच सीमित है । हर साल 10 लाख से ज्यादा मौतें हेपेटाइटिस बी एक वायरल संक्रमण है जो लिवर पर हमला करता है । ग्लोबल डाटा के मुताबिक, दुनिया भर में लगभग 25 करोड़ 40 लाख लोग इससे पीड़ित हैं और हर साल 10 लाख से ज्यादा मौतें होती हैं। हालांकि वैक्सीन से इसे रोका जा सकता है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, क्रानिक हेपेटाइटिस बी से पीड़ित लोगों में से सिर्फ आठ प्रतिशत को ही इलाज मिल पाता है। अभी हेपेटाइटिस बी डीएन टेस्टिंग, निदान और निगरानी दोनों के लिए, एक केंद्रीय प्रयोगशाला में प्रोसेस करने के लिए वीनस ब्लड सैंपल इकट्ठा करने की जरूरत होती है। इसका मतलब है कि टेस्ट के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है और फिर अक्सर रिजल्ट के लिए कई दिनों या हफ्तों तक इंतज़ार करना पड़ सकता है। यह देरी इलाज और देखभाल में रुकावट डाल सकती हैं। 60 मिनट के अंदर रिजल्ट   इसकी तुलना में नया प्वाइंट आफ केयर टेस्ट छोटे हेल्थ इस्तेमाल करके किया जा सकता है, जिसे ज्यादा हेल्थ केयर वर्कर कर सकते हैं और 60 मिनट के अंदर रिजल्ट मिल जाता है। यह कई संक्रामक रोगों जिसमें हेपेटाइटिस सी भी शामिल है, के लिए लैब टेस्ट का एक प्रभावी विकल्प है। नया परीक्षण डब्ल्यूएचओ के 2030 तक हेपेटाइटिस बी को स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए वैश्विक प्रयासों का समर्थन कर सकता है।  

नीम करोली बाबा की 5 बातें: जो पैसा, सफलता और शांति दिला सकती हैं

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम, आध्यात्मिक गुरु, नीम करोली बाबा, का आश्रम है। नीम करोली बाबा आज भले ही भौतिक रूप से लोगों के बीच मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी दी हुई शिक्षाएं आज भी उनके अनुयायियों के माध्यम से लोगों को प्रेरित करके हुए सुखी सफल जीवन जीने का रास्ता बताती रहती हैं। नीम करोली बाबा के ज्ञान को अपनाते हुए अपनी कुछ नकारात्मक आदतों को त्यागकर, कोई भी व्यक्ति अपना जीवन बदलकर पैसा कमा सकता है। आइए जानते हैं पैसा और कामयाबी हासिल करने के लिए नीम करोली बाबा ने कौन सी 5 आदतों से दूरी बनाने के लिए प्रेरित किया है। अहंकार का त्याग नीम करोली बाबा के अनुसार, अहंकार व्यक्ति को हमेशा गलत राह पर ले जाता है। अगर आप अपने रिश्तों को मजबूत बनाए रखते हुए जीवन को सफल बनाना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने अहंकार का त्याग करें। याद रखें, विनम्रता न केवल व्यक्ति को सम्मान अर्जित करवाती है, बल्कि उसके लिए नए अवसरों के दरवाजे भी खोलती है। क्रोध पर नियंत्रण नीम करोली बाबा के अनुसार क्रोध में लिए गए ज्यादातर निर्णय अक्सर बाद में पछतावे का कारण बनते हैं। क्रोध व्यक्ति की आंतरिक शांति को नष्ट करके उसके निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर बना देता है।जो लोग अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं रख पाते, उन्हें अकसर जीवन में सफलता पाने में कठिनाई होती है। लालच से बचें नीम करोली बाबा के अनुसार व्यक्ति का जरूरत से ज्यादा लालच उसे जीवन में कभी भी आगे नहीं बढ़ने देता है। लालच में डूबा व्यक्ति धन संचय करने या उसे बनाए रखने के लिए संघर्ष करता रहता है। ईर्ष्या से करें परहेज नीम करोली बाबा व्यक्ति को कभी भी दूसरों की सफलता से ईर्ष्या न करने की सलाह देते थे। उनका मानना था कि दूसरों की उपलब्धियों से जलन रखने की जगह व्यक्ति को हमेशा अपनी प्रगति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। कड़ी मेहनत और लगन सच्ची सफलता दिलाते हैं, जबकि ईर्ष्या केवल नकारात्मकता और भटकाव की ओर ले जाती है। नकारात्मकता से रहें दूर नीम करोली बाबा की शिक्षाओं के अनुसार आत्म-अनुशासन, आंतरिक शांति और सकारात्मक सोच ही स्थायी सफलता की कुंजी हैं। ऐसे में व्यक्ति को हमेशा अहंकार, क्रोध, लोभ और ईर्ष्या जैसी नकारात्मक आदतों को त्याग करना चाहिए।

आजमाएं गुस्से को छूमंतर करने के लिए ये लाजबाव उपाय

कहते हैं क्रोध बुद्धि को खा जाता है, यह बात कई लोग जानते हैं फिर भी क्रोध करते हैं और बेवजह अपना और अपने साथी को परेशान करते हैं। वैसे अगर आपको कभी गुस्सा आ भी जाए तो इन उपायों से आप अपने गुस्से को काबू में रख सकते हैं। अमूमन देखा जाता है कि जब कोई व्यक्ति गुस्सा होता है तो उसके आस-पास का माहौल भी प्रभावित होता है। ऐसे में अगर आपको गुस्सा आ रहा हो तो एकांत मे चले जाइए और उस समस्या के बारे में एक बार सोचिए क्या आप जिस बात या जिस पर गुस्सा कर रहे हैं। क्या वह जायज है? अगर हां तो उसका निवारण तलाशिए। आपकी एक पहल गुस्से को छूमंतर कर सकती है। अगर आपको किसी व्यक्ति का बात करने का तरीका पसंद नहीं है लेकिन उसके हाव-भाव अच्छे लगते हैं तो अपने गुस्से को शांत करने के लिए ध्यान लगाएं। इसे एक सरल उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए कि एक तालाब काई से ढका हुआ है। वहां एक प्यासा और थका हुआ आदमी पहुंचता है। वह उस काई को हटाता है, पानी पीता है, उसमें नहाता है और अपनी थकावट दूर करता है। ठीक इसी तरह आप उस व्यक्ति के हाव-भाव पर ध्यान न देकर उसकी बातों पर ध्यान लगाएंगे तो आपको कभी गुस्सा नहीं आएगा और आप हमेशा खुश रहेंगे। ऐसा गुस्सा किस काम का जिसके कारण गुस्सा समाधान की वजह खुद एक समस्या बन जाए। बेहतर है गुस्से को शांत करने के बोलना बंद कर दें। ऐसे में आपको उसका खुले दिल से स्वागत करना चाहिए और उसके प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए। अगर कोई ऐसा व्यक्ति है, जिसकी बातें अच्छी हैं, हाव-भाव अच्छे हैं और वह दयालु भी है लेकिन आपको उस पर फिर भी खीझ आती है तो अपने गुस्से पर काबू करने के लिए ध्यान लगाएं। एक तालाब का पानी बहुत मीठा और साफ है। एक प्यासा और गर्मी से बेहाल आदमी उस तालाब के पास पहुंचता है, जिसका पानी पीकर और उसमें नहा कर उसे परम सुख की अनुभूति होती है और उसकी परेशानियां दूर हो जाती हैं। ठीक ऐसे ही आप भी अपना सारा ध्यान उस आदमी की अच्छाइयों पर लगाएं और अपने गुस्से को खुद पर हावी न होने दें।  

फोन स्लो हो गया है? Google Photos का ये गुप्त फीचर मिनटों में खाली करेगा स्टोरेज

नई दिल्ली  स्मार्टफोन में स्टोरेज भरने की समस्या बहुत आती है। ज्यादा स्टोरेज वाले फोन मंहगे आते हैं। इस कारण लोगों को कम स्टोरेज वाले फोन में ही किसी ऐसी ट्रिक की तलाश होती है, जो हैंडसेट के स्टोरेज को खाली रखे। अगर आप भी ऐसी ही कोई ट्रिक चाहते हैं तो आपके लिए यह आर्टिकल काफी उपयोगी साबित होने वाला है। नई फोटो क्लिक करने या ऐप्स डाउनलोड करने पर ‘Storage Full’ का नोटिफिकेशन किसी को भी परेशान कर देता है। अक्सर हमारे फोन में एक ही फोटो के कई वर्जन होते हैं। उदाहरण के लिए जैसी कई सारी सेल्फी या व्हाट्सऐप से डाउनलोड की गई डुप्लीकेट फाइलें। ये फोन में काफी स्पेस लेते हैं। इन्हें एक साथ डिलीट करके फोन के स्टोरेज को खाली किया जा सकता है। Google Photos का एक छिपा हुआ और बेहद स्मार्ट फीचर स्मार्टफोन यूजर्स को बिना किसी फोटो को सर्च किए तुरंत सैकड़ों MB या GB जगह खाली करने में मदद कर सकता है। यह फीचर आपके स्टोरेज को क्लीन करने का सबसे आसान और सुरक्षित तरीका है, जिससे आपका फोन फिर से सुपरफास्ट हो जाएगा। स्टोरेज खाली होने के फायदा     स्टोरेज खाली होने से आपके स्मार्टफोन की परफॉर्मेंस बेहतर हो जाती है।     डुप्लिकेट, धुंधली और एक जैसी फोटो अपने आप हट जाती हैं।     आपकी फोटो लाइब्रेरी को ऑर्गनाइज करना और नेविगेट करना आसान हो जाता है। डिलीट करने से पहले जरूर कर लें ये काम     फोटोज डिलीट करने से पहले स्मार्टफोन पर Google Photos ऐप खोलें।     स्क्रीन के ऊपर राइट साइड में आ रही अपनी प्रोफाइल फोटो पर क्लिक करें।     इसके बाद फोटो सेटिंग्स पर क्लिक करें और फिर ‘बैक अप एंड सिंक’ पर क्लिक करें।     इससे क्लाउड पर आपकी फोटोज का बैकअप आ जाएगा।     पहले से बैकअप की गई फोटो और वीडियो देखने के लिए ‘स्पेस खाली करें’ पर क्लिक करें।     उन्हें अपने स्मार्टफोन से डिलीट करने के लिए ‘स्पेस खाली करें’ पर क्लिक करें सजेस्ट डिटेक्शन टूल का इस्तेमाल करें     ‘लाइब्रेरी’ टैब पर जाएं और ‘यूटिलिटीज’ एरिया में जाएं।     यहां धुंधली, मिलती-जुलती या पुरानी इमेज को पहचानने और मार्क करने के लिए ‘Suggest Deletion’ को सिलेक्ट करें।     सुझावों को देखें और उन्हें एक-एक करके, एक साथ डिलीट करें, या आर्काइव में ले जाएं। बड़े वीडियो आर्काइव करें     Google Photos ऐप से एक बड़ा वीडियो ढूंढें और सिलेक्ट करें।     वीडियो को दबाकर रखें और ‘मूव टू आर्काइव’ चुनें।     अपने फोन पर काफी जगह खाली करने के लिए इन वीडियो को क्लाउड में सेव करें।

पीरियड्स के दर्द और ऐंठन से निजात पाने के लिए गर्भासन अपनाएं, जानिए इसके लाभ

 पीरियड्स शुरू होते ही कई महिलाओं को तेज दर्द, ऐंठन और पेट में सूजन की शिकायत होती है, जो बेहद कष्टदायक होता है। ऐसे में हर बार पेन किलर का सहारा लेना जरूरी नहीं। योग के माध्यम से इन समस्याओं से काफी हद तक राहत मिल सकती है। इसी क्रम में गर्भासन एक बहुत प्रभावी योग मुद्रा है। गर्भासन के रोजाना अभ्यास से पीरियड्स के दौरान होने वाली परेशानियां कम होती हैं, गर्भाशय स्वस्थ रहता है और मासिक चक्र भी नियमित बनता है। यह आसन तनाव दूर कर शरीर-मन को संतुलित रखने में भी मदद करता है। मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा ने महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए गर्भासन को बहुत फायदेमंद बताया है। यह योगासन खासतौर पर स्वस्थ गर्भाशय बनाए रखने और पीरियड्स के दर्द में राहत के साथ ही उसे नियमित करने में मदद करता है। रोजाना कुछ मिनट इस आसन का अभ्यास करने से शरीर और मन दोनों को शांति मिलती है। गर्भासन का नाम ‘गर्भ’ यानी भ्रूण और ‘आसन’ यानी मुद्रा से मिलकर बना है। इस आसन में शरीर की स्थिति भ्रूण जैसी हो जाती है, इसलिए इसे गर्भासन कहते हैं। नियमित अभ्यास से तनाव और चिंता काफी कम होती है, मन शांत रहता है और एकाग्रता बढ़ती है। महिलाओं के लिए यह आसन विशेष रूप से उपयोगी है क्योंकि यह प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है और पीरियड्स से जुड़ी कई समस्याओं में राहत देता है। इस आसन को सही तरीके से करने के लिए पहले कुछ तैयारी जरूरी है। एक्सपर्ट के अनुसार, गर्भासन शुरू करने से कुछ दिन पहले कुक्कटासन का अभ्यास करें। कुक्कटासन में शरीर का संतुलन अच्छा होने पर ही गर्भासन को आजमाएं। सबसे पहले पद्मासन में बैठें, हाथों को जांघों-पिंडलियों के बीच फंसाकर कोहनियां बाहर निकालें। कोहनियां मोड़कर दोनों कान पकड़ने की कोशिश करें। भार कूल्हों पर रहे। क्षमता अनुसार 30 सेकंड से 1 मिनट तक रहें, फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में वापस आएं। एक्सपर्ट के अनुसार, नियमित अभ्यास से न सिर्फ शारीरिक ताकत बढ़ती है बल्कि मानसिक शांति भी मिलती है। हालांकि, कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। गर्भासन का अभ्यास सुबह खाली पेट करना सबसे अच्छा होता है। कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो, जैसे गर्दन, कंधे या कमर में दर्द, तो सलाह लेकर ही करें।

सावधान! मौसम में बदलाव बन रहा है वायरल बुखार का कारण

बदलता मौसम अपने साथ कई बीमारियां लेकर आता है। यह सब जानते हुए भी हम असावधान रहते हैं और वायरल बुखार की चपेट में आ जाते हैं। प्रायः बुखार वायरल की शुरुआत खांसी, जुकाम और बुखार से होती है। विशेषकर सर्दियां प्रारंभ होते ही मौसम की शुष्कता वायरल बुखार की जिम्मेदार होती है। इस दौरान नाक, कान, गले की एलर्जी सांस लेते समय छाती में परेशानी, आवाज बैठना, खांसी, जुकाम का होना आम बात है। कौन कौन से होते हैं वायरल इंफेक्शन:- -हैजा भी वायरल इंफेक्शन है। यह किसी भी मौसम में हो सकता है। -डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, पीलिया, हेपेटाइटिस, डायरिया आदि वायरस से फैलते हैं। ये भी साल में कभी भी हो सकते हैं। -जुकाम-खांसी आदि साधारण वायरल इंफेक्शन हैं। जुकाम में नाक बंद रहती है, छींके आती हैं, गला खराब रहता है, खांसी होती है। ये अधिकतर सर्दियों में फैलते हैं। -शरीर में दर्द और बुखार भी वायरल इंफेक्शन से होता है। -बच्चों में डायरिया का मुख्य कारण भी वायरल इंफेक्शन होता है। कैसे फैलता है वायरल -वातावरण में फैला प्रदूषण वायरल इंफेक्शन को फैलाने में मदद करता है। उसी प्रदूषित वातावरण में हम सांस लेते हैं जिसमें हजारों वायरस होते हैं। -भीड़भाड़ वाले स्थान में जाने से वायरल संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। -एयर कंडीशंड रूम में हम ताजी हवा का सुख नहीं ले पाते। अगर कोई खांसता है तो उसका वायरस वहीं रहता है जिससे अन्य कमजोर लोग उसकी चपेट में आ जाते हैं। -आस-पास की गंदगी भी वायरस फैलाने में मददगार होती है। कोई भी काम करने के बाद हाथों का न धोना, नाखूनों का गंदा होना, गंदे बर्तनों में खाना पकाना या खाना, सब्जियों और फलों को बिना धुले खाना आदि से भी संक्रमण हो सकता है। वायरल हो जाए तो क्या करें -नमक वाले गुनगुने पानी से गरारे करें। -ज्यादा खट्टे फलों का सेवन न करें। -पानी अधिक लें। विटामिन सी वाली चीजें लें। -पौष्टिक और संतुलित आहार लें। -गर्म सब्जियों का सूप, खिचड़ी, दलिया और रसदार सब्जियों का भरपूर सेवन करें। -अदरक व शहद वाली चाय लें। -च्यवनप्राश का सेवन करें। -शहद व गुड़ का प्रयोग करें। -तुलसी पत्र को प्रातःखाली पेट पानी के साथ निगल लें। -गर्म दूध में चुटकी भर हल्दी रात्रि में सोने से पहले ले सकते हैं। लाभ मिलेगा। ताकि स्वयं को बचा सकें वायरल की चपेट से -मौसम के अनुसार पूरे वस्त्र पहनें। -खाली पेट बाहर न निकलें। खाली पेट रहने से शरीर में कमजोरी आती है और संक्रमण का प्रभाव जल्दी होता है। -खांसी और जुकाम होने पर रूमाल का प्रयोग करें। अगर आसपास कोई खांस रहा है तो आप रूमाल अपने मुंह पर रख लें। -खाना मौसम के अनुसार लें। अगर बाहर खाएं तो सफाई का पूरा ध्यान रखें। -ठंडे खाद्य पदार्थों से परहेज रखें। -बदलते मौसम में फ्रिज का पानी न पिएं। -डब्ल्यू एच ओ साल में दो बार एंटी-फ्लू वैक्सीन निकालता है, सितंबर और मार्च में। 6 महीने तक के छोटे बच्चों को साल में दो बार टीका लगवाएं। छः माह से बड़े बच्चों और बुजुर्गों को भी यह टीका लगवाया जा सकता है।  

वायरल स्किन फास्टिंग ट्रेंड—फायदा ज्यादा या नुकसान? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

सुबह के क्लींजर से लेकर रात के नाइट जेल तक, हम रोज अपनी स्किन को केमिकल प्रोडक्ट्स की कई परतों में दबा देते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि यह आदत आपकी स्किन की नेचुरल ग्लो को छीन सकता है? ऐसे में इन दिनों सोशल मीडिया पर एक नया ट्रेंड काफी चर्चा में है। लेकिन सवाल आता है कि क्या वाकई यह फायदा होता है, या सिर्फ एक ट्रेंड है? आइए जानते हैं इसके बारे में। क्या है स्किन फास्टिंग? स्किन फास्टिंग का मतलब है कुछ दिनों या हफ्तों के लिए अपनी स्किनकेयर रूटीन को बेहद सिंपल कर देना। इस दौरान त्वचा की देखभाल के लिए सिर्फ क्लींजर, मॉइश्चराइजर और सनस्क्रीन का इस्तेमाल किया जाता है। यह एक तरह का डिटॉक्स है, जिसमें स्किन को एक्टिव इंग्रिडिएंट्स से ब्रेक मिलता है और वह खुद को रिपेयर करती है। क्यों बढ़ रहा है इसका ट्रेंड? आजकल मल्टी-स्टेप रूटीन में ढेर सारे एक्टिव इंग्रेडिएंट्स इस्तेमाल होते हैं, जिससे स्किन का नेचुरल बैरियर कमजोर होने लगता है। ऐसे में स्किन फास्टिंग के दौरान स्किन को रिपेयर होने का मौका मिलता है। साथ ही, कम प्रोडक्ट्स लगाने से स्किन उसे बेहतर अब्जॉर्ब कर पाती है। स्किन फास्टिंग के फायदे     स्किन के नेचुरल बैरियर को रिपेयर करने में मदद करती है।     इससे स्किन का पीएच बैलेंस बरकरार रहता है और त्वचा में नमी बनी रहती है।     स्किन फास्टिंग इरिटेशन और सेंसिटिव को कम करने में मदद करती है। यह रोजेसिया से पीड़ित लोगों के लिए फायदेमंद होती है।     ज्यादा प्रोडक्ट्स लगाने से होने वाले ब्रेकआउट, कंजेशन और रिएक्शन का खतरा भी कम होता है।     रेटिनॉल और एक्सफोलिएशन जैसे प्रोडक्ट्स से ब्रेक लेने पर स्किन खुद को रिपेयर कर पाती है। क्या हर किसी के लिए सही है? स्किन फास्टिंग पर रिसर्च सीमित है। इसलिए हर व्यक्ति पर इसका अलग असर देखने को मिल सकता है, जैसे-     अगर आपकी स्किन ज्यादा ड्राई है, तो आपको रूखापन या स्किन डिहाइड्रेशन हो सकता है। इसके कारण स्किन बैरियर डैमेज होने का रिस्क रहता है।     स्किन फास्टिंग का असर रातों-रात नहीं दिखता। इसलिए अच्छे नतीजों के लिए आपको इंतजार करना पड़ सकता है।     एक्ने या हाइपरपिग्मेंटेशन जैसी परेशानियों के लिए सही ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। ऐसे में स्किन फास्टिंग ज्यादा फायदेमंद साबित नहीं होगी।     स्किन फास्टिंग के बाद दोबारा एक्टिव इंग्रिडिएंट्स को स्किनकेयर में शामिल करने पर इरिटेशन हो सकती है।     इसी तरह अचानक कुछ एक्टिव इंग्रिडिएंट्स का इस्तेमाल बंद करने पर भी रिएक्शन होने का खतरा रहता है। कुल मिलाकर बात यह है कि स्किन फास्टिंग कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है, तो कुछ के लिए नुकसानदेह। इसलिए अपनी स्किन की समस्याओं और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही फैसला लें।  

पीली हल्दी के बाद अब ‘नीली हल्दी’ की बारी: सेहत के लिए क्यों मानी जाती है खास?

हल्दी का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में गहरा पीला रंग आता है। हम सभी जानते हैं कि पीली हल्दी हमारी रसोई की शान है, क्योंकि यह सेहत और स्किन दोनों के लिए काफी फायदेमंद होती है, लेकिन क्या आपको पता है कि भारत की मिट्टी में एक ऐसी दुर्लभ हल्दी भी उगती है जो पीली नहीं, बल्कि अंदर से नीले रंग की होती है? जी हां, इसे ‘नीला सोना’ भी कहा जा सकता है क्योंकि यह सामान्य मसाले से कहीं बढ़कर, एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक औषधि है। आइए, शारदा हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट, डॉ. श्रेय श्रीवास्तव से जानते हैं इसके बारे में। क्या है नीली हल्दी? यह एक बहुत ही दुर्लभ पौधा है जिसे विज्ञान की भाषा में करकुमा कैसिया (Curcuma Caesia) कहा जाता है। आम बोलचाल में लोग इसे ‘काली हल्दी’ के नाम से भी जानते हैं। यह सामान्य हल्दी से बिल्कुल अलग दिखती है। जब आप इसकी जड़ को तोड़ते हैं, तो यह अंदर से चमकदार पीली नहीं, बल्कि गहरे नीले या नीले-काले रंग की निकलती है। यह मुख्य रूप से भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ चुनिंदा इलाकों में ही पाई जाती है। क्यों है यह इतनी खास? हम जो पीली हल्दी खाते हैं, उसमें ‘करक्यूमिन’ होता है, जो उसे पीला रंग और स्वाद देता है, लेकिन नीली हल्दी का मामला थोड़ा अलग है। इसमें करक्यूमिन बहुत कम होता है, लेकिन इसमें कपूर और कई तरह के ‘एशेंशियल ऑयल्स’ भरपूर मात्रा में होते हैं। इसका स्वाद कड़वा होता है और इसमें कपूर जैसी तेज महक आती है। यही कारण है कि इसका इस्तेमाल खाना पकाने में नहीं, बल्कि आयुर्वेद और घरेलू नुस्खों में दवा के तौर पर किया जाता है। नीली हल्दी के अद्भुत फायदे नीली हल्दी को इसके औषधीय गुणों के कारण ‘सुपरचार्ज्ड’ माना जाता है। सही मात्रा में इस्तेमाल करने पर इसके कई फायदे हैं:     जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की अकड़न या किसी चोट के दर्द में यह बहुत राहत देती है। यह सूजन को कम करने में भी कारगर मानी जाती है।     इसमें रोगाणुओं से लड़ने की ताकत होती है, जो इन्फेक्शन को दूर रखने और घावों को भरने में मदद करती है।     पारंपरिक चिकित्सा में इसका इस्तेमाल खांसी, अस्थमा और छाती में जकड़न जैसी समस्याओं के लिए किया जाता है। इसके अलावा, यह पाचन को भी सुधारती है और पेट की गैस को कम करती है। साथ ही, त्वचा की खुजली, रशेज और छोटे-मोटे घावों पर इसका लेप बहुत फायदेमंद होता है। सावधानी भी है जरूरी चूंकि, नीली हल्दी में बहुत शक्तिशाली तत्व होते हैं, इसलिए इसका इस्तेमाल बहुत संभलकर करना चाहिए। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि इसे हमेशा कम मात्रा में ही यूज करें। गर्भवती महिलाओं और किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को बिना डॉक्टरी सलाह के इसका उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा मात्रा में लेने पर इसके साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं।  

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