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अगर भूल गए है पैटर्न लाॅक, तो इन उपायों से अनलाॅक करें अपना स्मार्टफोन

कभी-कभी ऐसा भी होता है कि आप अपने स्मार्टफोन का पैटर्न भूल गए और ये सोचकर परेशान हो जाते है कि डिवाइस को अनलॉक कैसे करेंगे। ये स्थिति किसी के भी साथ हो सकती है। इसलिए आज आपको इससे कैसे निपटना है आसान टिप्स में बताते हैः 1.सबसे पहले अपने फोन को स्विच ऑफ कर दें। 2.इसके बाद फोन का अप वॉल्यूम बटन, पावर बटन और होम स्क्रीन बटन तीनों को एक साथ प्रैस करें। 3. अब आपको पांच विकल्प दिखेंगे। 1.रिबूट डाटा 2. वाइप डाटा/फैक्ट्री रीसेट 3. इंस्टॉल अपडेट 4. पावर डाउन 5.एडवांस्ड ऑप्शन 6. इसमें से वाइप डाटा/फैक्ट्री रीसेट के विकल्प का चयन करें और यस कर दें। यहां ध्यान रखें कि अगर आप वाइप डाटा/फैक्ट्री रीसेट के आप्शन को सेलेक्ट करते है तो आपका पूरा डाटा डिलीट हो जाएगा। इसलिए ऐसा करने से पहले फोन का बैकअप लें या फिर सोच-समझ कर ही इस स्टेप को अपनाएं। 7.वाइप/फैक्ट्री रीसेट में कुछ मिनट का समय लगेगा और फिर इसके बाद आप फोन को रीस्टार्ट करें। बस अब आपका फोन आसानी से अनलॉक हो जाएगा।  

इन उपायों को अपनाकर बनाएं रखें चेहरे की सुंदरता

आपके चेहरे की खूबसूरती पर दाग-धब्बों, फटे होंठों या थकी-थकी फूली आंखों का ग्रहण न लगे इसके लिए बस थोड़ी सी सावधानियां बरतने और सदियों से आजमाए गए नुस्खे अपनाने की जरूरत है। यहां हम ऐसी ही समस्याओं और उनके निदान का जिक्र कर रहे हैं…   ब्लैक हैड्स:- यदि आपकी त्वचा तैलीय है तो आपके चेहरे पर कहीं भी ब्लैक हैड्स उभर सकते हैं। बेहतर होगा कि आप इन्हें किसी सौंदर्य विशेषज्ञ से दूर कराएं क्योंकि आपके लिए इन्हें स्वयं दूर करना मुश्किल होगा। छिद्र फैल भी सकते हैं।   यदि एक बार चेहरे पर से ब्लैक हैड्स दूर हो जाएं तो सप्ताह में दो-तीन बार फेस मास्क अवश्य लगाएं ताकि फिर चेहरे पर ब्लैक हैड्स न होने पाएं। इस बीच तेल रहित फाउंडेशन हमेशा उंगलियों के पोरों को गोल-गोल घुमाते हुए लगाएं।   दाग-धब्बे:- अकसर लोगों के चेहरे पर मुंहासों जैसे छोटे-छोटे दाने निकल आते हैं। दाना निकलते ही हम उसे दबाकर कील निकलाने की कोशिश करते हैं पर इन्हें दबाने और कील निकालने में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। बेहतर तो यही होगा कि इन फुंसियों पर आप कोई भी एंटीसेप्टिक लोशन या क्रीम लगाएं और फिर फाउंडेशन लगाएं। इसके अतिरिक्त रात में लोशन लगाकर सोएं।   झुर्रियां:- आंखों के इर्द-गिर्द लकीरों का उभरना चिंताजनक होता है। पर ऐसा उम्र के बढ़ने के साथ होता है। आंखों के इर्द-गिर्द की त्वचा बहुत ही महीन और पतली होती है। इस पर बहुत ही कम तेल ग्रंथियां होती हैं। इसलिए अकसर यहां की त्वचा को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है। इस जगह आईक्रीम लगाना चाहिए। आंखों के इर्द-गिर्द बहुत ही हल्का फाउंडेशन या कम से कम पाउडर लगाना चाहिए क्योंकि कोई भी प्रसाधन गाढा लगाने से उस पर लोगों की नजर पड़ती है और कमियां साफ नजर आती हैं।   फूली हुई आंखें:- यदि आपकी आंखें नींद पूरी न होने के कारण फूली हुई हैं या थकावट से सूज गई हैं तो थोड़ी देर लेट जाइए और बादाम के तेल या गुलाब जल में एक रुई का फाहा भिगोकर अपनी आंखों पर 10 मिनट रखिए। इससे आराम मिलेगा। इसके अलावा खीरे के पतले स्लाइस, आलू के स्लाइस या साधारण टी-बैग आंखों पर रखकर थोड़ी देर लेटी रहें। इससे भी आंखों को आराम मिलेगा।   होठों का फटना:- सर्दियों के दिनों में अकसर होंठ फटने लगते हैं। फटे हुए होठों पर ऑलिव ऑयल या मलाई लगाएं। ये होठों को पोषण भी देंगे और उन्हें चिकना भी बनाएंगे। इसके अतिरिक्त विटामिन ई के तत्व भी जल्दी उपचार करने में सहायक होते हैं।  

अब 5 स्‍टार रेटिंग के साथ आएंगे स्मार्टफोन और टैबलेट

नई दिल्ली एसी और रेफ्रि‍जरेटर समेत तमाम होम अप्‍लायंसेज में आपने रेटिंग देखी होगी। 3 स्‍टार या 5 स्‍टार रेटिंग सबसे कॉमन होती है। कुछ ऐसा ही कदम स्‍मार्टफोन्‍स और टैबलेट को लेकर भी उठाया जाने वाला है। एक रिपोर्ट के अनुसार, स्मार्टफोन और टैबलेट बनाने वाली कंपनियों को अपने प्रोडक्‍ट्स को रेटिंग देनी होगी। इसका मकसद ग्राहकों को यह बताना है कि प्रोडक्‍ट को रिपेयर करना कितना आसान होगा। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की एक कमिटी ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट दी है। इसमें ऐसा ढांचा बनाने की बात कही गई है, जिससे कंस्‍यूमर्स को सही जानकारी मिल पाए और वो किसी प्रोडक्‍ट को खरीदने से पहले फैसला ले सकें। नया प्रोडक्‍ट खरीदने को मजबूर करती हैं कंपनियां उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय में सचिव निधि खरे ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि कंपन‍ियां हमेशा चलने वाली डिवाइस नहीं बना रहीं। वो ग्राहकों को नया प्रोडक्‍ट खरीदने को मजबूर कर रही हैं। कंपनियां जानबूझकर ऐसे प्रोडक्‍ट बना रही हैं, जो जल्‍दी खराब हो जाएं और कम टाइम तक चलें। उन्‍होंने कहा कि रिपेयरबिल‍िटी इंडेक्‍स को इसीलिए लाने की योजना है। इसका मकसद है कि कंपनियों को उनकी जिम्‍मेदारी का एहसास हो। वह एक सिस्‍टम बनाएं। अपने प्रोडक्‍ट को रेट करें, जिससे कस्‍टमर उसे खरीदते वक्‍त सही फैसला कर पाए। लैपटॉप, डेस्‍कटॉप को भी दायरे में लाने की तैयारी नेशनल कंस्‍यूमर हेल्‍पलाइन पर इस मामले को लेकर 20 हजार शिकायतें मिली हैं। जांच के बाद यह कदम उठाया गया है। शुरुआत में नियमों के दायरे में स्‍मार्टफोन और टैबलेट आएंगे। बाद में इसमें लैपटॉप, डेस्‍कटॉप और अन्‍य प्रोडक्‍ट्स को भी शामिल किया जाएगा। समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिस पर मिनिस्‍ट्री को आगे काम करना है। जल्‍द कुछ गाइडलाइंस जारी हो सकती हैं। प्रोडक्‍ट और वेबसाइट पर दिखानी होगी रेटिंग रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने 5 पॉइंट रेटिंग स्‍केल का सुझाव दिया है। उसे प्रोडक्‍ट पैकेजिंग और वेबसाइट पर दिखाना की सलाह दी गई है। फोन और टैबलेट बनाने वाली कंपनियों को रेटिंग दिखानी होगी। रेटिंग इस बात पर निर्भर करेगी कि डिस्‍प्‍ले, बैटरी, कैमरा, चार्जिंग पोर्ट और स्‍पीकर को रिपयेर करना कितना आसान है। प्रोडक्‍ट ओपन करना कितना ईजी और उसमें किस तरह के स्‍क्रू व टूल्‍स यूज हुए हैं। स्‍पेयर पार्ट्स कितनी आसानी से मिल जाते हैं और सॉफ्टवेयर अपडेट को लेकर क्‍या पॉलिसी है। अगर कोई सर्विस अच्‍छी है तो उसे 5 रेटिंग दी जाएगी, जो ठीकठाक है, उसे तीन रेटिंग मिलेगी। शुरुआत में फीचर फोन्‍स को इस नियम से बाहर रखा जाएगा।

गुर्दे की पथरी से निजात पाने के लिए अपनाये ये घरेलू उपाय

आजकल हर एक व्यक्ति गुर्दे की पथरी से परेशान है। हमारे पित्ताशय में दो तरह की पथरी बनती है। एक कोलेस्ट्रोल निर्मित पथरी और दूसरी पिग्मेन्ट से बनने वाली पथरी। पित्त लिवर में बनता है और इसका भंडारण गॉल ब्लेडर में होता है। यह हमारे खाने को पचाने में मदद करता है। गुर्दे की पथरी ज्यादातक तीस से साठ वर्ष की उम्र के लोगों में पाई जाती है। इसका दर्द बहुत ही भयकर होता है। ऐसे में हमें पेशाब करने में ज्यादा दिक्कत भी आती है। आज हम आपको गुर्दे की पथरी को दूर करने के लिए कुछ घरेलू उपाय बचाएगें। तो आइए जानते हैं पथरी को दूर करने के घरेलू उपाय… -पित्त की पथरी में दर्द को दूर करने के लिए आप हर रोज दिन में दो बार गाजर और ककडी का रस 100उस मिला कर पीएं। -अगर किसी को पित्त की पथरी की दिक्कत है तो, वह शराब, सिगरेट, चाय, कॉफी तथा शकर का सेवन न करें। ऐसे में वह हर रोज खाली पेट 50एमएल नींबू का रस पीएं। -खूब सारी नाशपाती खाएं क्योंकि इसमें रासायनिक तत्व पाए जाते हैं जो इस रोग को दूर करते हैं। -दिन में हर रोज विटामिन सी की 3-4 गोली खाएं। इसे खाने से शरीर का प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनता है। -हरी सब्जियां व फलो का ज्यादा सेवन करें क्योंकि इसमें कोलेस्ट्रोल कम मात्रा में होता है। ऐसे में आप तली और मसालेदार चीजों से दूर रहें। -खट्टे फलों में विटामिन सी होता है। इसलिए गॉलब्लैडर की पथरी दूर करने केलिए जितना हो सके इनका सेवन करें। -हल्दी का सेवन करने से भी पथरी की दिक्कच को दूर किया जा सकता है।  

स्माकर्टफोन की मदद से खोजिए छिपे हुए कैमरों को

  आप कहीं ट्रायल रूम, होटल, रिजॉर्ट, लिफ्ट या फिर किसी कैब में हैं, अगर वहां कोई स्पाई कैमरा छिपा हो तो क्या करेंगें? यह ख्याल ही खुद में कितना डरा देने वाला है कि आपकी हर हरकत या एक्टिविटी पर किसी की नजर है और आप कहीं भी सुरक्षित नहीं, लेकिन परेशान होने की जरूरत नहीं, क्योंकि आपका स्मार्टफोन ही आपको बचा सकता हैं। आप अपने स्मार्टफोन की मदद से कहीं भी छिपे कैमरा को डिटेक्ट करके खुद को सुरक्षित बना सकते हैं, बस इसके लिए आपकी एंड्रॉयड डिवाइस में यह 3 कैमरा डिटेक्टर एप्स होने चाहिए… हिडन कैमरा डिटेक्टर एंड्रॉयड यूजर्स के लिए हिडन कैमरा डिटेक्टर एक बेहतर एप है। यह एप इस्तेमाल में एकदम आसान है क्योंकि यह रेडिएशन डिटेक्शन का प्रयोग करता है, यह एल्गोरिदम अन्य इलेक्ट्रोनिक डिवाइसेज के रेडिएशन के शोर को कम करने के लिए डिजाइन किया गया है जैसे-सेलफोन टॉवर या नॉन कैमरा हार्डवेयर। जब इसका इस्तेमाल होता है तो डिटेक्टर सॉफ्टवेयर कहीं भी कैमरा छिपा होने पर रेड ग्लो को दिखाएगा। वैसे अन्य प्रकार के हार्डवेयर के नजदीक भी यह चमकेगा या ग्लो करेगा। इसलिए जब आपके स्मार्टफोन की स्क्रीन पर 100 से नंबर दिखने लगे तो समझ ले कि छिपे कैमरा को डिटेक्ट कर लिया गया है यानि आपको स्क्रीन के मध्य पर नजर रखनी होगी। गूगल प्ले स्टोर पर यह फ्री में उपलब्ध है। ग्लिंट फाइंडर ग्लिंट फाइंडर कैमरा फ्लैश की रेट्रो-रिफ्लेक्शन को इस्तेमाल करता है और यूजर इसकी हेल्प से कैमरा व्यू के शाइनी ऑब्जेक्ट्स को बेहतर तरीके से पहचान लेता है। छिपे कैमरा लेंस को पहचानने में यह बहुत बढ़िया काम करता है।यह बिल्कुल प्रोफेशनल द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले टूल की तरह काम करता है और छिपे कैमरा के चमकदार लेंस को पहचान लेता है। गूगल प्ले स्टोर पर यह फ्री में उपलब्ध है। वायरलेस कैमरा डिटेक्टर वायरलेस कैमरा डिटेक्टर एक छोटी सी बैटरी से चलने वाली डिवाइस है, जो छिपे हुए वायरलेस कैमराज की फ्रीक्वेंस को सिग्नल्स के द्वारा डिटेक्ट कर सकता है। अगर आप वायरलेस कैमरा डिटेक्टर के बारे में जानना चाहते हैं तो यह एक उपयोगी एप है, जो आपके वायरलेस कैमरा डिटेक्टर के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देगा। एंड्रॉयड के लिए यह एक बेहतर कैमरा डिटेक्टर एप्लीकेशन है।  

कारपेट खरीदने जाते समय ध्यान में रखें ये बातें…

साफ-सुथरा घर हर किसी को पसंद होता है। घर को साफ-सुथरा रखने के लिए हम बाजार से बहुत सी चीजें लाते हैं, ताकि हमारा घर देखने के लिए बहुत सुदंर लगे। आज हम आपको घर के सजाने के लिए कारपेट का चुनाव करने के बारे में बताएंगे। बाजार में कारपेट बहुत से रंगों और डिजाइनों में देखने के मिलते हैं। हमें टाइल और वुड फ्लोरिंग की तरह कारपेट को खरीदते समय भी बहुत सावधानी रखनी पड़ती है क्योंकि इन का रंग छूटता है जिसके कारण यह खराब हो जाते हैं। तो आइए जानते हैं कार्पेट खरीदने के टिप्स। -कारपेट खरीदते समय रबर या फोम की भराव सामग्री लें, ताकि फर्श पर बिछाने पर जल्दी न उधड़े। -हमेशा स्टाइल के अनुसार ही कारपेट को चुनें। मखमल की कार्पेट्स कभी न खरीदें क्योंकि इन पर पैरों के निशान, वैक्यूम के निशान आदि रह जाते हैं। हम सभी इनका इस्तेमाल घर में ऐसी जगह पर बिछा कर करते है यहां पर लोग कम आते-जाते हैं, जैसे कि फॉर्मल लिविंग रूम, मास्टर बेडरूम में ज्यादा करते है। -बजट में रह कर ही कारपेट खरीदें और महंगे कारपेट पर अपने पैसे खराब न करें।आप अलग-अलग डीलर्स के पास जाकर इसकी यही कीमत का पता लगा सकते हैं। -कारपेट प्रोवाइडर का चुनाव करते समय पहले ध्यान में रखें कि इसकी वैराइटी अच्छी हो और यह आपके बजट में है या नहीं। आप इसे किसी शोरूम, फ्लोरिंग कंपनी, बड़े डिपार्टमेन्टल स्टोर, या फिर ऑनलाइन भी ले सकते हैं। -अगर आपके घर में बच्चे या डौगी है तो ऐसा कारपेट ही चुनें जिसकी देखभाल करनी आसान हो और मैंटेनेंस पर खर्च भी कम आता हो। -कारपेट खरीदते समय उसकी लंबी वारंटी न देखें। कारपेट वही खरीदें जिसे अच्छे मटेरियल से बनाया जगा हो। अगर कारपेट अच्छी क्वालिटी का बना हो तो उसकी वारंटी भी ज्यादा होती है। -हमेशा ऊन या जैविक सामग्री जैसे प्राकृतिक उत्पादों से बने कार्पेट्स ही खरीदें। जो वाष्पशील पदार्थों से बने होते है उन्हें कभी न खरीदें क्योंकि इन में इन्स्टालेशन के बाद बदबू आती रहती है।    

अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ का ऐपल पर भारी असर, 76 अरब का पड़ेगा बोझ

वॉशिंगटन अमेरिकी सरकार, वहां के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने जिस जोश में दुनियाभर के देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया, वो अब उसी पर भारी पड़ रहा है। ऐपल के सीईओ टिम कुक ने अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ और ऐपल पर इसके असर को लेकर बात की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्‍होंने बताया है कि टैरिफ के कारण कंपनी की कॉस्‍ट में 900 मिलियन डॉलर यानी करीब 76 अरब रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है। इस बोझ से बचने के लिए कंपनी भारत में अपने प्रोडक्‍शन को बढ़ा रही है। टिम कुक ने उम्‍मीद जताई है कि आने वाले वक्‍त में सभी आईफोन, भारत में बनाए जाएंगे। ऐपल अपने बाकी प्रोडक्‍ट्स जैसे-आईपैड, मैक, ऐपल वॉच और एयरपॉड्स को वियतनाम में बनाएगी। मुख्‍यतौर पर वह चीन में अपने प्रोडक्‍शन को कम कर रही है, क्‍योंकि अमेरिका ने चाइना पर 145 फीसदी टैरिफ लगा दिया है। तो क्‍या आईफोन महंगे हो जाएंगे जब भी किसी कंपनी पर बोझ बढ़ता है तो वह अपने प्रोडक्‍ट्स की कीमतों में इजाफा करती है। बिजनेस मॉडल भी यही कहता है। लेकिन ऐपल अभी आईफोन्‍स की कीमतों को बढ़ाने के बारे में नहीं सोच रही। दरअसल, उसने बड़ी संख्‍या में ऐपल प्रोडक्‍ट्स जैसे-आईफोन का स्‍टॉक अमेरिका में जमा कर लिया है। टैरिफ लागू होने से पहले ही ऐपल ने हवाई जहाजों में आईफोन भरकर अमेरिका पहुंचा दिए। इससे फौरी तौर पर उसे कीमतें कंट्रोल करने में मदद मिली है। तो कारोबार पर क्‍या असर होगा टिम कुक ने ऐपल के कारोबार पर भी बात की। रिपोर्ट के अनुसार, उन्‍होंने कहा कि टैरिफ इसी तरह रहे और पॉलिसीज में कोई बदलाव ना हुआ तो कॉस्‍ट में 900 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हो सकती है। उन्‍होंने यह भी कहा कि कंपनी को जून में खत्‍म होने वाली त‍िमाही में फायदा होने की उम्‍मीद है। इसकी वजह है कि जून में अमेरिका में बिकने वाले आईफोन्‍स मेड इन इंडिया होंगे, जो चीन टैरिफ के असर से बचे रहेंगे। चिंता इस बात की है कि ऐपल अभी कई एक्‍सेसरीज चीन में बनवाता है। ऐपल केयर और कुछ एक्‍सेसरीज पर चीन में कुल टैरिफ 145 फीसदी तक पहुंच जाएगा। हालांकि टिम कुक ने इस बारे में कुछ नहीं बताया कि जून के बाद क्‍या होगा। मौजूदा वक्‍त में अमेरिका ने ज्‍यादातर देशों पर 20 फीसदी टैरिफ लगाया है, लेकिन चीन पर 145 फीसदी टैरिफ लागू किया है। बाकी देशों को राहत के आसार भी हैं, लेकिन चीन को राहत देने के मूड में डोनाल्‍ड ट्रंप कतई नहीं हैं। इसीलिए ऐपल समेत तमाम कंपनियों को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ा है।

पिछले तीन सालों में यूट्यूब ने भारतीय क्रिएटर्स को दिए 21 हजार करोड़ रुपये : सीईओ मोहन

मुंबई जब कोई ये कहता है कि अरे तुझे पता है वो यूट्यूब चैनल से बढ़‍िया कमाई कर रहा है। ज्‍यादातर बार बात सच लगती है, तो कई बार झूठ भी। अब यूट्यूब ने खुद बताया है कि उसने भारतीयों के जेबें भरने में कितना बड़ा रोल प्‍ले किया है। यूट्यूब के सीईओ नील मोहन ने कहा है कि बीते तीन साल में यूट्यूब ने भारत के क्र‍िएटर्स यानी यूट्यूबर्स, एक्‍टर्स और मीडिया कंपनियों को 21 हजार करोड़ रुपये दिए हैं। यह आगे और बढ़ सकता है, क्‍योंकि यूट्यूब इन तमाम क्र‍िएटर्स को बढ़ावा देने के लिए 850 करोड़ रुपये का निवेश करेगा। यह सारी बातें मुंबई में चल रहे मेगा इवेंट वेव्‍स में सामने आईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस इवेंट का उद्घाटन करने पहुंचे थे। ‘लोगों को मिलेंगे कारोबार के नए रास्‍ते’ यूट्यूब सीईओ ने कहा कि उनके न‍िवेश से भारत के कंटेट क्र‍िएटर्स, मीडिया कंपनियों को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। कर‍ियर और कारोबार के नए रास्‍ते खुलेंगे। खास यह है कि पिछले साल भारत में बने कंटेंट को दूसरे देशों में 45 अरब घंटे तक देखा गया, जो दर्शाता है कि भारतीय यूट्यूबर्स इंटरनेट पर छाए हुए हैं। नील मोहन तो भारत को क्र‍िएटर नेशन बताया। दिलचस्‍प हैं यूट्यूब के आंकड़े यूट्यूब सीईओ ने बताया कि पिछले साल भारत के 10 करोड़ से ज्‍यादा यूट्यूब चैनलों ने कंटेंट अपलोड किया। उनमें से 15 हजार से ज्‍यादा चैनल ऐसे है, जिनके पास 10 लाख से अधिक सब्‍सक्र‍ाइबर्स हैं। हाल के समय में 10 लाख से ज्‍यादा सब्‍सक्र‍ाइबर्स वाले यूट्यूब चैनल तेजी से बढ़े हैं। नील मोहन ने यह भी कहा कि पीएम मोदी भारत की संस्‍कृत‍ि, इतिहास को दुनियाभर में पहुंचा रहे हैं। याद रहे कि पीएम के यूट्यूब चैनल पर ढाई करोड़ से ज्‍यादा सब्‍सक्राइबर्स हैं। 20 साल का हुआ यूट्यूब, नए फीचर्स का ऐलान हाल में यूट्यूब 20 साल का हो गया। कंपनी ने कई नए फीचर्स को लाने की बात कही है। आने वाले दिनों में एक ऐसे फीचर को लाया जा सकता है, जिसके बाद कमेंट में बोलकर अपनी बात कही जा सकेगी। इसके साथ ही आस्‍क म्‍यूजिक फीचर को लाया जा रहा है। इसके तहत यूट्यूब प्रीमियम और म्‍यूजिक यूजर्स अपने मूड के बारे में बता सकेंगे, उस बेस पर उन्‍हें म्‍यूजिक सुनाई देगा। शुरुआत में यह सपोर्ट अंग्रेजी में होगा। टीवी में यूट्यूब देखने वाले यूजर्स को जल्‍द मल्‍टीव्‍यू की सुविधा मिलेगी। वह अपनी टीवी स्‍क्रीन पर अलग-अलग कंटेंट एकसाथ देख पाएंगे। कई और फीचर भी आने वाले हैं।

टिम कुक ने किया खुलासा, अमेरिका में बिकने वाले आईफोन होंगे मेड इन इंडिया

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस मेक इन इंडिया इन‍िशिएटिव की बात बरसों से करते आए हैं, उसके परिणाम अब सामने हैं। ये मोदी का मास्‍टरस्‍ट्रोक ही है कि ऐपल अपने सबसे पॉपुलर प्रोडक्‍ट आईफोन की मैन्‍युफैक्‍चरिंग लगातार इंडिया में शिफ्ट कर रहा है। अब ऐपल के सीईओ टिम कुक के हवाले से बड़ी जानकारी सामने आई है। एक इंटरव्‍यू में टिम कुक ने कहा है कि मार्च की तिमाही यानी जनवरी से मार्च के बीच अमेरिका में बिकने वाले आधे से ज्‍यादा आईफोन भारत से आए थे। यही नहीं, कंपनी जून में खत्‍म होने वाली तिमाही यानी अप्रैल, मई और जून में अमेरिका में बिकने वाले ज्‍यादातर आईफोन्‍स को भारत से मंगवाएगी। आईफोन भारत से, बाकी प्रोडक्‍ट्स वियतनाम, चीन का नाम नहीं कंपनी अपनी सप्‍लाई चेन में लगातार बदलाव कर रही है। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, ऐपल के अमेरिका में बिकने वाले आईफोन अब मेड इन इंडिया होंगे, जबकि आईपैड, ऐपल वॉच, मैक और एयरपॉड्स वियतनाम से आएंगे। चीन का तो नाम ही नहीं है। गौरतलब है कि कंपनी चीन से अपनी मैन्‍युफैक्‍चरिंग को कम कर रही है। अमेरिकी टैक्‍स से पिछड़ा चीन, भारत को मौका अमेरिका ने चीन पर जो टैक्‍स लगाए हैं, उससे ऐपल को चीन में बनने वाले प्रोडक्‍ट्स महंगे पड़ रहे हैं। कंपनी के अधिकारियों ने बीते हफ्ते हुए एक मीटिंग में यह जानकारी दी, जो अब सामने आई है। वहीं, ऐपल सीईओ टिम कुक ने उम्‍मीद जताई है कि अमेरिका में बिकने वाले ज्‍यादातर आईफोन्‍स अब भारत में बनेंगे। चीन में बनने वाले प्रोडक्‍ट्स को अमेरिका के बजाए अन्‍य देशों में भेजा जाएगा। नए टैरिफ से ऐपल का बढ़ सकता है खर्च अमेरिका ने चीन पर जो टैक्‍स लगाया है, उसका असर ऐपल पर होगा। कंपनी का कहना है कि मार्च में टैक्‍स का ज्‍यादा असर नहीं हुआ, लेकिन जून की तिमाही में उस पर 900 मिलियन डॉलर का खर्च बढ़ सकता है। दिलचस्‍प आंकड़ा यह भी है कि कंपनी की कमाई इस साल की पहली त‍िमाही में बढ़ी है। इसकी वजह उसके सभी प्रोडक्‍ट्स की अच्‍छी सेल बताई जा रही है। हाल ही में आई काउंटरपॉइंट इंडिया की रिपोर्ट भी कहती है कि प्रीमियम स्‍मार्टफोन कैटिगरी में ऐपल का दबदबा बढ़ रहा है। भारत में भी लोग ऐपल आईफोन्‍स को खूब खरीद रहे हैं। भारत से हवाई जहाज में भरकर भेजे आईफोन पिछले महीने यह खबर आई थी कि ऐपल ने अमेरिका का नया टैरिफ लागू होने से पहले ही कई हवाई जहाजों में आईफोन भरकर उन्‍हें अमेरिका पहुंचा दिया था। अब S&P ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस के अनुसार, कंपनी ने मार्च में भारत से अमेरिका को 98 फीसदी एक्सपोर्ट किया। कुल 31 लाख यूनिट अमेरिका पहुंचाईं गईं। टैक्‍स की बात करें तो अमेरिका भारत से आने वाले सामान पर 26 फीसदी, जबकि चीन से आने वाले सामान पर 145 फीसदी टैक्‍स लगाता है। कंपनी भारत में नए रिटेल स्‍टोर्स भी खोलने जा रही है।

गर्मियों में स्‍कि‍न रेडनेस की समस्‍या आम है, ट्राई करें ये ट‍िप्‍स

गर्मियां शुरू हो चुकी हैं। ये मौसम अपने साथ जहां कई सारी स्वास्थ्य समस्याएं लेकर आता है, वहीं स्किन से जुड़ी परेशानियां भी उभर कर सामने आ जाती हैं। ऐसे में चेहरे की रंगत डल हो जाती है। गर्मी में धूल, प्रदूषण और पसीने के कारण सुंदरता पर गहरा असर पड़ता है। खूबसूरती निखारने के लिए लोग महंगे-महंगे प्रोडक्ट्स खरीदते हैं। हालांकि इससे भी कोई खास फर्क देखने को नहीं मिलता है। वहीं कुछ लोग घरेलू नुस्खे आजमाते हैं। कोई हल्दी दूध बेसन लगाता है, तो कोई एलोवेरा जेल, दही, शहद से अपनी त्‍वचा की देखभाल करता है। इन दिनों चेहरे पर लाल चकत्ते भी पड़ जाते हैं। इसे ही स्किन रेडनेस या त्वचा का लाल होना कहते हैं। यह एक आम समस्या है, लेकिन अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह बढ़ सकती है। आज हम आपको अपने इस लेख में स्किन रेडनेस के कारण के बारे में बताने जा रहे हैं। इससे बचाव के टिप्स भी देंगे। आइए जानते हैं विस्तार से- तेज धूप गर्मी में तेज धूप हमारे स्किन को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। जब हम बिना सनस्क्रीन लगाए बाहर जाते हैं, तो सूरज की UV किरणें त्वचा को जला देती हैं। इससे स्किन रेड हो जाती है। टैनिंग की समस्या भी देखने को मिलती है। इससे त्वचा छिलने लगती है। जलन और हल्की सूजन भी इसके मुख्य लक्षण हैं। पसीना और घमौरी तेज गर्मी में पसीना आना तो आम बात है। कभी कभार जब ज्यादा पसीना आता है तो चेहरे को साफ करते-करते चेहरा छिल जाता है। ऐसे में स्किन रेडनेस हो जाती है। इस दौरान छोटे-छोटे लाल दाने (घमौरी), खुजली और चुभन की समस्या झेलनी पड़ती है। एलर्जी या रिएक्शन अगर आप कोई भी केमिकल युक्त प्रोडक्ट का इस्तेमाल करती हैं तो गर्मी में इससे एलर्जी या रिएक्शन हो सकता है। इससे भी रेडनेस की समस्या देखने को मिलती है। डिहाइड्रेशन गर्मी में पसीने के जरिये हमारे शरीर से पानी बाहर निकल जाता है। ऐसे में डिहाइड्रेशन होना तो आम बात है। पानी की कमी से भी अक्सर चेहरे पर लालिमा आ जाती है। इसके लिए दिनभर में कम से कम चार से पांच लीटर पानी जरूर पिएं। गर्म वातावरण जब गर्मी में लू के थपेड़े चेहरे पर पड़ते हैं तो इससे हमारी स्किन झुलस जाती है। दरअसल इससे त्वचा की नमी सूख जाती है जिससे रेडनेस की समस्या झेलनी पड़ती है। रेडनेस से बचने के लिए क्या करें?     धूप में निकलते समय सनस्क्रीन लगाएं।     हर 2-3 घंटे में पानी पीते रहें।     ढीले और सूती कपड़े पहनें।     दो बार फेसवाश करें।     गर्म पानी से नहाने से बचें।  

लाइफ में कैसी भी हो सिचुएशन खुद को शांत

लाइफ में कई बार आप मुश्किल और अनजानी मुसीबत में फंस जाएंगे। इन सारी सिचुएशन से खुद को निकालने के लिए घबराकर रिएक्ट करने की बजाय खुद के माइंड को शांत कर रिएक्ट करना सिखाएं। जानें कैसे माइंड को कंट्रोल किया जा सकता है। किसी भी परिस्थिति में कंट्रोल करना जरूरी है। पर ये कंट्रोल दूसरों पर ना होकर खुद पर होना जरूरी है। अपने आप को और दिमाग को इस तरह से ट्रेनिंग दे कि मुश्किल, विपरीत और बिल्कुल अलग तरह की सिचुएशन में कैसे खुद को शांत रखें। क्योंकि ज्यादातर गलतियां हम तभी करते हैं जब हमारी सोच, फिजिकल एक्टीविटी और हमारे शब्द जल्दी से रिएक्ट कर देते हैं। जब अपने दिमाग पर हमारा कंट्रोल होगा तो इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना आसान होगा। जानें कैसे विपरीत सिचुएशन में खुद को कूल रखें। खुद पर कंट्रोल खोने से बचाना जब भी सामने वाला आपको प्रोवोक करे, नीचा दिखाए तो खुद से यहीं कहना है कि मेरा रिएक्शन मेरी ताकत है और मैं इसे ऐसे ही नहीं दूंगा। क्योंकि गुस्से में खुद पर कंट्रोल खो देने से पावर भी चली जाती है। धीरे से रिएक्ट करें जब भी बहुत ही गंभीर, डिप्रेशन और स्ट्रेसफुल सिचुएशन आए तो तीन बार गहरी सांस लें और सोचें क्या मेरा इस जगह पर रिस्पांड करना जरूरी है। जो इंसान शांत रहते हैं वो अपनी प्रतिक्रिया देने के मामले में जल्दीबाजी नहीं दिखाते। और, जो लोग जल्दी प्रतिक्रिया देते हैं अक्सर वो कमजोर ही होती है। सिचुएशन नहीं माइंड पर कंट्रोल करें अक्सर लोग सिचुएशन को कंट्रोल करने में लग जाते हैं लेकिन सिचुएशन नहीं खुद के माइंड पर कंट्रोल करने की जरूरत होती है। मेंटली स्ट्रांग लोगों से इन बातों को सीखें। जैसे ही कोई निगेटिव सिचुएशन आए तो सोचें कि हर समस्या का समाधान होता है। इससे पहले भी कई मुश्किल परिस्थितियां संभाली हैं। इसे भी संभाल लेंगे और ज्यादा सोचने से नहीं बल्कि अपने ऐक्शन में क्लियरिटी लाएं। जिससे प्रॉब्लम सॉल्व की जा सके। बॉडी लैंग्वेज पर कंट्रोल जब भी निगेटिव सिचुएशन आती है तो अपने बॉडी लैंग्वेज पर भी कंट्रोल करें। स्पाइन को सीधा करें, चेस्ट को ओपन करें और सांसों को धीरे से लें। ऐसा करने से बॉडी लैंग्वेज कंट्रोल में दिखेगी। निगेटिव विचारों को रोकें मन में जैसे ही निगेटिव विचार आएं तो खुद से बात करें कि क्या जो मैं सोच रहा हूं वो सही है या केवल मन का भ्रम। अपने विचारों को लिखें, ऐसा करने से ज्यादा क्लियर होगा माइंड।

कुछ नेचुरल चीजों से आप घर पर भी तैयार कर सकते हैं फेस टोनर

धूप की तपिश, पसीने की चिपचिपाहट और चेहरे पर चढ़ती धूल- गर्मियां आते ही हमारी स्किन मानो मदद के लिए पुकारने लगती है। महंगे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स की एक लंबी लिस्ट हो सकती है आपके पास, लेकिन असली निखार तो तब आता है जब आप अपनी त्वचा को नेचर के करीब लाते हैं। सोचिए, अगर हर सुबह आप आईने में खुद को एक दमकते चेहरे के साथ देखें- जैसे शीशे पर चमक आ गई हो! तो चलिए इस बार गर्मी को हराते हैं 3 ऐसे नेचुरल फेस टोनर से, जो न सिर्फ आपकी स्किन को ठंडक देंगे बल्कि हर दिन बढ़ाएंगे उसका ग्लो, वो भी बिना किसी साइड इफेक्ट और बिना जेब पर भारी पड़े! सबसे अच्छी बात? ये टोनर आप खुद अपने किचन की कुछ चीजों से घर पर ही बना सकत हैं। आइए जानें। खीरे और एलोवेरा का कूलिंग टोनर खीरा स्किन को ठंडक देता है और ऑयल बैलेंस में मदद करता है। वहीं एलोवेरा त्वचा को हाइड्रेट करता है और चमक लाता है। कैसे बनाएं:     1 खीरा छीलकर छोटे टुकड़ों में काट लें।     उसे ब्लेंड कर लें और रस निकाल लें।     अब उसमें 2 बड़े चम्मच एलोवेरा जेल मिलाएं।     थोड़ा सा गुलाबजल मिलाकर अच्छी तरह मिक्स करें।     इस मिश्रण को स्प्रे बॉटल में भर लें और फ्रिज में रखें। कैसे इस्तेमाल करें: दिन में दो बार चेहरे पर स्प्रे करें या कॉटन से लगाएं। गर्मियों में ये स्किन को ठंडक देने के साथ-साथ उसे फ्रेश भी बनाए रखेगा। ग्रीन टी और नींबू का डीटॉक्स टोनर ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो स्किन से टॉक्सिन्स हटाते हैं। नींबू स्किन को साफ और टाइट बनाता है। कैसे बनाएं:     1 कप पानी में ग्रीन टी बैग डालें और 10 मिनट तक छोड़ दें।     ठंडा होने पर उसमें 1 चम्मच नींबू का रस मिलाएं।     चाहें तो इसमें कुछ बूंदें टी ट्री ऑयल की भी मिला सकते हैं। कैसे इस्तेमाल करें: हर बार चेहरा धोने के बाद इस टोनर को कॉटन से लगाएं। इससे चेहरे के रोमछिद्र (pores) साफ होंगे और स्किन में निखार आएगा। गुलाब जल और चंदन का क्लासिक टोनर गुलाब जल त्वचा को हाइड्रेट करता है और चंदन से स्किन ग्लो करती है। ये टोनर गर्मियों में पसीने और जलन की समस्या से भी बचाता है। कैसे बनाएं:     3 बड़े चम्मच गुलाब जल लें।     उसमें 1 चम्मच चंदन पाउडर मिलाएं।     अच्छी तरह मिलाएं और छान लें ताकि चंदन के कण न रहें।     इसे एक बोतल में भरकर फ्रिज में रखें। कैसे इस्तेमाल करें: रोज सुबह और रात को सोने से पहले इसे चेहरे पर लगाएं। ये स्किन को ठंडक देगा और गहराई से निखार लाएगा। इन जरूरी बातों का भी रखें ध्यान     होममेड टोनर 5-7 दिनों तक ही फ्रिज में स्टोर करें।     किसी भी टोनर का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें।     नियमित इस्तेमाल से ही बेहतर रिजल्ट्स मिलते हैं। गर्मियों में त्वचा की देखभाल थोड़ा-सा समय मांगती है, लेकिन अगर आप हर दिन इन घरेलू टोनर का इस्तेमाल करेंगे तो आपकी स्किन न सिर्फ हेल्दी रहेगी बल्कि उसपर शीशे जैसी चमक भी देखने को मिलेगी।  

वजन कम करना चाहते हैं, तो 7 फूड्स को कर दें लंच से बाहर

वजन कम करने के लिए सही डाइट प्लान फॉलो करना बहुत जरूरी है। अक्सर लोग एक्सरसाइज तो करते हैं, लेकिन डाइट में गलत फूड्स का शामिल करके अपना वेट लॉस गोल पूरा नहीं कर पाते। लंच दिन का सबसे जरूरी मील होता है। इसलिए इसमें अगर हेल्दी और लो-कैलोरी फूड्स न खाएं, तो वजन कम करना मुश्किल हो सकता है। आइए जानते हैं कि वजन घटाने के दौरान लंच में किन फूड्स से परहेज करना चाहिए। रिफाइंड कार्ब्स वाले फूड्स सफेद चावल, मैदा से बनी रोटी, ब्रेड, नूडल्स और पास्ता जैसे रिफाइंड कार्ब्स ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ाते हैं और जल्दी भूख लगने का कारण बनते हैं। इनकी जगह ब्राउन राइस, क्विनोआ, बाजरा या मल्टीग्रेन आटे की रोटी खाना बेहतर विकल्प है। डीप-फ्राइड और प्रोसेस्ड फूड्स समोसे, कचौरी, पकोड़े, फ्रेंच फ्राइज और चिप्स जैसे तले हुए स्नैक्स हाई कैलोरी और अनहेल्दी फैट से भरपूर होते हैं। ये न सिर्फ वजन बढ़ाते हैं बल्कि पाचन को भी धीमा कर देते हैं। अगर तला हुआ खाने का मन करे, तो एयर फ्रायर या कम तेल में शैलो-फ्राई करके खाएं। शुगरी ड्रिंक्स और पैकेज्ड जूस कोल्ड ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स और पैकेट वाले जूस में ज्यादा शुगर और कैलोरीज होती हैं, जो वजन घटाने में मुश्किल खड़ी कर सकती हैं। इनकी जगह नारियल पानी, नींबू पानी या ग्रीन टी पीना फायदेमंद होगा। हाई-फैट डेयरी प्रोडक्ट्स पनीर, चीज, मक्खन और फुल-क्रीम दूध जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स में सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा होती है, जो वजन बढ़ा सकते हैं। इनकी जगह लो-फैट दही, स्किम्ड मिल्क या टोफू का इस्तेमाल करें। रेड मीट और प्रोसेस्ड मीट बर्गर, सॉसेज, बेकन और रेड मीट में संतृप्त वसा और सोडियम की मात्रा ज्यादा होती है, जो मोटापे और दिल की बीमारियों का कारण बन सकते हैं। प्रोटीन के लिए मछली, चिकन या दालें बेहतर ऑप्शन हैं। हाई-कैलोरी सॉस और ड्रेसिंग मेयोनीज, टोमेटो केचप और क्रीम बेस्ड सॉस में कैलोरीज और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं। इनकी जगह घर में बनी हुई हरी चटनी, दही या ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल करें। ज्यादा नमक वाले फूड्स अचार, चिप्स, नमकीन और प्रोसेस्ड फूड्स में सोडियम की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे शरीर में वॉटर रिटेंशन होता है और वजन कम करने में दिक्कत आती है।  

नया स्मार्टफोन खरीदने की कर रहे हैं प्लानिंग, कितनी होनी चाहिए रैम और स्टोरेज?

जब आप प्रीमियम, फ्लैगशिप या कोई हाई एंड स्मार्टफोन खरीदते हैं तो आपको पर्याप्त रैम और स्टोरेज मिलता है। लेकिन, बजट और मिड रेंज फोन में एक समय के बाद स्टोरेज की कमी के चलते फोन की परफार्मेंस में गिरावट आने लगती है। आज 2025 में जब फोन में एआई फीचर्स, ढेर सारे ऐप्स, गेमिंग जैसी जरूरतें बढ़ रही हैं, तो पर्याप्त रैम और स्टोरेज आवश्यक है। हालांकि, अधिकांश एंड्रायड फोन अब 128 जीबी स्टोरेज वैरिएंट में उपलब्ध हैं, लेकिन इसका काफी हिस्सा ऑपरेटिंग सिस्टम और प्री-इंस्टाल्ड ऐप्स में खर्च हो जाता है, शेष थर्ड पार्टी ऐप्स और यूजर डाउनलोड के लिए बचता है। देश में अब भी 16 जीबी या 32 जीबी स्टोरेज स्पेस वाले स्मार्टफोन के उपभोक्ता हैं, ऐसे में क्या इन लोगों को एंड्रायड के नए वर्जन का लाभ मिल पाएगा, तो इसका जवाब है- नहीं। ‘एंड्रायड अथॉरिटी’ की एक रिपोर्ट मानें तो गूगल ने एंड्रायड 15 के लिए न्यूनतम स्टोरेज की सीमा को बढ़ाकर 32 जीबी कर दिया है। नए फोन में पर्याप्त स्टोरेज का ध्यान एंड्रायड 15 के फुल वर्जन आधारित स्मार्टफोन में न्यूनतम 32 जीबी स्टोरेज की अनिवार्यता के साथ न्यूनतम चार जीबी रैम (रैंडम एक्सेस मेमोरी) की भी अनिवार्यता की गई है। खास बात है कि 32 जीबी स्टोरेज स्पेस का 75 प्रतिशत तक हिस्सा डेटा पार्टिशन में प्रयोग होता है। दरअसल, डेटा पार्टिशन ऐसा एरिया होता है, जहां सिस्टम फाइल्स, प्री-इंस्टाल्ड ऐप्स और सिस्टम ऐप डेटा आदि स्टोर होते हैं। साल 2022 में एंड्रायड-13 के लांच के साथ स्टोरेज की यह सीमा 16 जीबी थी। समय के साथ स्टोरेज की बढ़ती जरूरत को देखते हुए इसमें वृद्धि होती रही। हालांकि, गूगल किसी स्मार्टफोन निर्माता कंपनी को आधिकारिक तौर पर न्यूनतम 32 जीबी स्टोरेज स्पेस के लिए बाध्य नहीं कर सकता। लेकिन, गूगल मोबाइल सर्विसेज (जीएमएस) के लिए एंड्रायड डिवाइसेज में यह अनिवार्यता संभव है। जीएमएस गूगल सर्च, गूगल प्ले, गूगल ड्राइव, जीमेल, यूट्यूब और गूगल सपोर्टेड एपीआइ आदि प्रोप्रायरिटी ऐप्स का संग्रह है। बढ़ते रैम के साथ स्मार्ट होता फोन आज के 10 वर्ष पहले तक एंड्रायड डिवाइसेज में 512 एमबी या एक जीबी की मेमोरी होती थी। लेकिन समय के साथ डिवाइसेज में औसत रैम बढ़ता गया। साल 2014 की बात करें तो कई सारे प्रीमियम डिवाइसेज में अमूमन तीन जीबी की रैम होती थी, लेकिन इसके बाद चार जीबी रैम वाले फोन को एक मानक के तौर पर देखा जाने लगा। आज के समय में चार जीबी रैम तो न्यूनतम जरूरत है। अब बजट फोन में भी आठ जीबी रैम वाले फोन आ रहे हैं, तो वहीं प्रीमियम और प्लैगशिप फोन में 12 जीबी और उससे अधिक रैम के फोन उपलब्ध हैं। स्टोरेज को करें मैनेज नियमित क्लीनअप : फोन की परफॉर्मेंस सही रखने के लिए प्रयोग में नहीं आने वाले ऐप्स, फोटो, वीडियो को डिलीट करते रहना चाहिए। एक्सटर्नल स्टोरेज : माइक्रो एसडी सपोर्ट या बाहरी ड्राइव के जरिए स्टोरेज बढ़ाने की सुविधा वाले फोन देख सकते हैं। क्लाउड स्टोरेज : लोकल स्टोरेज को फ्री करने के लिए गूगल ड्राइव या आइक्लाउड जैसी सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है। क्यों जरूरी है रैम और स्टोरेज को मैनेज करना आपके डिवाइस में कितना रैम है, इससे अधिक यह समझने की जरूरत है कि डिवाइस में यह एक सीमित संसाधन है, जिसे हमें मैनेज करना होता है। जब आप किसी ऐप को ओपन करते हैं तो वह मेमोरी का एक हिस्सा कवर कर लेता है। जहां सामान्य ऐप्स और गेम कुछ सौ मेगाबाइट्स का प्रयोग करते हैं, तो वहीं बड़े गेम फोन के रैम का एक गीगाबाइट तक का हिस्सा कवर कर सकते हैं। आप चार जीबी रैम वाले डिवाइस में ओएस के साथ सामान्य ऐप्स या गेम चला सकते हैं, पर कुछ समय बाद स्पेस बिल्कुल कवर हो जाएगा। फिर आपको बार-बार पुराने एप्स को हटाना पड़ेगा, वहीं अधिक रैम वाले डवाइस लंबे समय तक बेहतर ढंग से काम करते रहेंगे।  

2 दिन बाद फ्लैट 14999 रुपये में खरीद पाएंगे आईफोन

नई दिल्ली आईफोन लवर्स किसी भी कीमत पर फोन को अपना बनाना चाहते हैं, लेकिन कई बार उनकी जेब जवाब नहीं देती। आड़े आ जाते हैं पैसे। ईएमआई पर हर कोई तो फोन नहीं खरीद सकता, लेकिन एक डील ऐसी आ रही है, जिसमें आप बिना सोचे आईफोन पर दांव लगा सकते हैं। 4 मई को iPhone 11 को सिर्फ 14999 रुपये की फ्लैट कीमत में लिया जा सकता है। फ्लैट कीमत से हमारा मतलब है कि कोई कार्ड ऑफर या बैंक डिस्‍काउंट की जरूरत नहीं पड़ेगी। पेमेंट कीजिए और फोन खरीदिए। Control Z नाम की वेबसाइट पर यह डील मिलने वाली है। Control Z पर प्रीमियम स्‍मार्टफोन्‍स को रिन्‍यू करके बेचा जाता है। इसका मतलब है कि मॉडल फ्रेश नहीं होगा, वह एक रिन्‍यू मॉडल होगा। कंपनी का दावा, 300 से ज्‍यादा क्‍वॉलिटी टेस्‍ट Control Z दावा करती है कि रिन्‍यू किए गए आईफोन्‍स को 300 से ज्‍यादा ऑटोमै‍टेड क्‍वॉलिटी टेस्‍ट से गुजारा जाता है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि वह किसी ब्रैंड-न्‍यू स्‍मार्टफोन की तरह परफॉर्म करें। इसका मतलब है कि 4 मई को बिकने वाला iPhone 11 मॉडल एक नया मॉडल नहीं होगा। उसे रिन्‍यू करके बेचा जाएगा, लेकिन कंपनी दावा कर रही है कि यूजर्स को न्‍यू फोन की फीलिंग आएगी और एक्‍सपीरियंस मिलेगा। iPhone 11 पर मिल रही यह डील iPhone 11 के रिन्‍यू मॉडल को लिमिटेड टाइम के लिए 14999 रुपये में बेचा जाएगा। कंपनी 64 जीबी वेरिएंट को सेल करेगी। यह लिमिटेड टाइम ऑफर है, जोकि प्रोडक्‍ट के येलो और रेड कलर वेरिएंट पर मिलेगा। 500 रुपये का अत‍िरिक्‍त पेमेंट करके ब्‍लैक और वाइट मॉडल को लिया जा सकेगा। जानकारी के अनुसार, 2500 रुपये और ज्‍यादा देने पर 128 जीबी मॉडल लिया जा सकेगा। 4 मई को यह सेल Control Z के ई-स्‍टोर पर होगी। अगर आप एचडीएफसी बैंक कार्ड से पेमेंट करते हैं, तो 5 फीसदी इंस्‍टेंट डिस्‍काउंट ले पाएंगे। कंपनी 18 महीनों की वॉरंटी दे रही है। इसके साथ ही 100 फीसदी बैटरी हेल्‍थ की गारंटी भी दी गई है। iPhone 11 के फीचर्स, स्‍पेसिफि‍केशंस iPhone 11 में 6.1 इंच का डिस्‍प्‍ले दिया गया है। फोन में ऐपल का A13 बायोनिक चिपसेट लगा है। इसमें 4 जीबी रैम दी गई है और 64 से लेकर 256 जीबी स्‍टोरेज मिलता है। iPhone 11 में 12 मेगापिक्‍सल के तीन कैमरा लगे हैं। उनमें से 2 कैमरा बैक साइड में और एक फ्रंट साइड में दिया गया है। फोन 3110 एमएएच की बैटरी है। हालांकि यह फोन 5जी कनेक्टिविटी को सपोर्ट नहीं करता। माना जा रहा है कि इसमें ऐपल का लेटेस्‍ट iOS 18 अपडेट जल्‍द मिलने वाला है।

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