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देश की एक-तिहाई आबादी के सामने तोंद बड़ी समस्या, बढ़ता पेट डायबिटीज, हार्ट डिज़ीज और कई गंभीर बीमारियों की घंटी

नई दिल्ली भारत में ‘पॉट बेली’ यानी  कटोरेनुमा तोंद को लोग बहुत सीरियस नहीं लेते. पुराने जमाने में बढ़ी तोंद को रईसी और खाते-पीते घर की निशानी मान लिया जाता था. लेकिन आज मेट्रो स‍िटीज में रह रहे परिवारों के सामने तोंद एक बड़ी समस्या बन चुका है. लैंसेट की नई स्टडी के मुताब‍िक आज भारत उस मुकाम पर खड़ा है, जहां पेट का मोटापा सिर्फ अच्छा द‍िखने की चिंता तक सीमित नहीं रह गया है. अब ये तोंद डायबिटीज, हार्ट डिज़ीज और कई गंभीर बीमारियों की घंटी है. The Lancet की ताजा स्टडी बताती है कि 2021 में भारत में 180 मिलियन लोग मोटापे से जूझ रहे थे और 2050 तक यह संख्या 450 मिलियन तक पहुंच सकती है. इसको आसान भाषा में कहें तो देश की एक-तिहाई आबादी के सामने तोंद बड़ी समस्या बनने वाली है. कैसे बढ़ रही तोंद की समस्या, देखें आंकड़े नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) के अनुसार भारत में 40% महिलाएं और 12% पुरुष abdominal obesity यानी पेट की चर्बी से प्रभावित हैं. वहीं 30 से 49 साल की महिलाओं में तो हर दो में से एक महिला इस स्थिति में है. भारतीय मानकों के अनुसार पुरुषों में 90cm (35 इंच) से ज्यादा और महिलाओं में 80cm (31 इंच) से ज्यादा कमर होना abdominal obesity की पहचान है. खास बात ये है कि ये समस्या शहरी आबादी में ज़्यादा पाई जा रही है. तोंद क्यों खतरनाक है? बेली फैट दिखने में चाहे जितना हल्का लगे लेकिन इसका असर शरीर के सबसे संवेदनशील सिस्टम्स पर होता है. जानिए- बढ़ी हुई तोंद का असर कैसे शरीर को बीमार कर रहा है. 1. इंसुलिन रेजिस्टेंस: पेट की चर्बी शरीर की इंसुलिन को पहचानने और इस्तेमाल करने की क्षमता को बिगाड़ती है. इससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है. 2. हार्ट डिजीज: चर्बी जब लीवर और पैंक्रियाज जैसे अंगों में जमती है तो मेटाबॉलिज्म गड़बड़ाता है और कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर बढ़ता है. 3. कमज़ोर जोड़ और थकान: हमारा भारी शरीर खासतौर पर पेट, घुटनों और पीठ पर दबाव बढ़ाता है. इससे शरीर में तमाम तरह के दर्द रहते हैं. South Asians के लिए ज्यादा अलार्मिंंग South Asians यानी हम भारतीय और हमारे दूसरे पड़ोसी देशों के लोग वेस्टर्न लोगों के मुकाबले कम BMI पर भी ज़्यादा फैट रखते हैं. यानी वो दिखने में पतले हो सकते हैं लेकिन अंदर से मोटे. इसे TOFI (Thin Outside, Fat Inside) भी कहा जाता है. नई गाइडलाइन में हैं मोटापे की दो स्टेज Indian Obesity Commission ने मोटापे की नई क्लासिफिकेशन दी है. इसमें स्टेज वन में ऐसे लोग आते हैं जिनका हाई BMI लेकिन बेली फैट नहीं है. न कोई बड़ी मेडिकल कंडीशन है. वहीं दूसरी स्टेज में पेट की चर्बी के साथ ही डायबिटीज या दिल की बीमारी जैसे लक्षण नजर आते हैं. ये हाई रिस्क ग्रुप है. वो 4 आदतें जो पेट बढ़ा रहीं – प्रोसेस्ड और इंस्टेंट फूड – दिनभर बैठकर काम करना – नींद की कमी और तनाव – फिजिकल एक्टिविटी में गिरावट क्या है समाधान डाइट कंट्रोल: तला-भुना, चीनी, मैदा कम करें और फाइबर, फल और सब्ज़ी ज़्यादा लें. एक्सरसाइज़: भारतीयों को 250–300 मिनट प्रति हफ्ते की एक्सरसाइज़ की ज़रूरत है (वेस्ट में ये 150 मिनट होती है). नए मेडिकेशन: सेमाग्लूटाइड, टिर्जेपाटाइड जैसे वजन घटाने वाली दवाएं अब मौजूद हैं. डॉक्टर की सलाह से ही इसे ले सकते हैं. Early detection: समय समय पर कमर की माप ज़रूर लें. अपने वजन को मॉनीटर करने से ज्यादा जरूरी ये है. ‘बड़े पेट’ से फैलती बीमारी, क्या कहते हैं एक्सपर्ट छत्रपति शाहू महाराज मेड‍िकल यून‍िवर्स‍िटी लखनऊ के मेड‍िस‍िन डिपार्टमेंट के वर‍िष्ठ प्रोफेसर और डायबिटीज रोग व‍िशेषज्ञ डॉ कौसर उस्मान कहते हैं कि तोंद सिर्फ एक फैट डिपॉजिट नहीं है, ये मेटाबॉलिक डिजीज का पहला लक्षण है. कई लोग नॉर्मल वज़न के बावजूद बीमार हो सकते हैं अगर उनकी कमर का घेरा ज़्यादा है. इसलिए बचपन से ही बच्चों को सही खानपान की आदत डालनी चाहिए. ये स‍िर्फ लुक्स की बात नहीं है, ये जिंदगी और मौत के बीच की डील है. समय रहते तोंद पर काबू नहीं पाया तो देश को डायबिटीज और हार्ट डिजीज की सुनामी झेलनी पड़ेगी.  

फिटकरी का इस्तेमाल कर गर्मियों में स्किन की करे देख भाल

गर्मियों में हमारी स्किन को अलग तरह की देखभाल की जरूरत होती है। धूप, पसीना और प्रदूषण से त्वचा डल और थकी हुई सी लगने लगती है। ऐसे में, अगर आप महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स के बजाय एक सस्ता और नेचुरल उपाय ढूंढ रहे हैं, तो फिटकरी  एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकती है। फिटकरी का इस्तेमाल सिर्फ शरीर की सफाई के लिए नहीं, बल्कि त्वचा की देखभाल के लिए भी किया जा सकता है। आइए जानते हैं गर्मियों में फिटकरी के इस्तेमाल से आपको कौन-कौन से कमाल के फायदे हो सकते हैं। स्किन प्रॉब्लम्स से मिलेगा छुटकारा गर्मियों में पसीने और गंदगी के कारण स्किन पर एक्ने, पिंपल्स और रैशेज हो सकते हैं। फिटकरी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं जो त्वचा को संक्रमण से बचाते हैं और पिंपल्स को कंट्रोल करते हैं। अगर आप फिटकरी को पानी में घोलकर फेस पैक के रूप में लगाते हैं, तो यह आपकी त्वचा को साफ और स्वस्थ रखता है। सनबर्न से मिलेगी राहत गर्मियों में सूरज की तेज किरणों से स्किन जल सकती है, जिससे सनबर्न हो जाता है। फिटकरी का पानी सनबर्न से राहत दिलाने में मदद करता है। फिटकरी में टैनिंग को कम करने की क्षमता होती है, जिससे आपकी त्वचा में निखार आता है। इसे चेहरे पर लगाने से सनबर्न की जलन कम होती है और स्किन की जलन ठीक हो जाती है। स्किन टोन में करे सुधार फिटकरी का इस्तेमाल स्किन टोन को समान बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसमें प्राकृतिक तत्व होते हैं जो त्वचा के रंग को हल्का करने में मदद करते हैं। यदि आप नियमित रूप से फिटकरी के पानी से चेहरे को धोते हैं, तो यह आपकी त्वचा को साफ और हल्का बनाए रखेगा, जिससे आपके चेहरे पर एक नेचुरल ग्लो आएगा। ऑयली स्किन के लिए परफेक्ट अगर आपकी त्वचा ऑयली है, तो फिटकरी एक बेहतरीन उपाय हो सकती है। फिटकरी ऑयल कंट्रोल करने में मदद करती है और त्वचा को ताजगी देती है। यह त्वचा के पोर्स को अच्छे से क्लींज करती है और एक्स्ट्रा ऑयल को बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे त्वचा निखरी और फ्रेश दिखती है। पसीने की बदबू को कम करे गर्मियों में पसीने की बदबू एक आम समस्या है। फिटकरी को पसीने वाले हिस्सों पर लगाना, जैसे कि अंडरआर्म्स, पसीने की बदबू को खत्म करने में मदद करता है। फिटकरी में नेचुरल एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो बैक्टीरिया को खत्म कर पसीने की बदबू को रोकते हैं। इसे पाउडर की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है या फिर इसे पानी में घोलकर लगाया जा सकता है। कैसे करें फिटकरी का इस्तेमाल?     फिटकरी और पानी का पैक: एक छोटे बाउल में पानी और फिटकरी का घोल बनाएं। इस घोल को अपने चेहरे और शरीर पर लगाएं, और थोड़ी देर बाद धो लें।     फिटकरी का पाउडर: फिटकरी को पाउडर की तरह इस्तेमाल करें और इसे अपनी स्किन पर लगाएं। यह खासकर पसीने और बदबू की समस्या के लिए बहुत प्रभावी है।     फिटकरी और गुलाब जल: फिटकरी को गुलाब जल में मिलाकर चेहरे पर लगाएं। यह त्वचा को शांति और ताजगी देता है, साथ ही स्किन के रूखापन को भी कम करता है।  

यूरिक एसिड कम करने के लिए पिएं ये ड्रिंक्स

 यूरिक एसिड , एक वेस्ट प्रोडक्ट है, जिसके बढ़ने से जोड़ों में दर्द, सूजन और गठिया  जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके क्रिस्टल किडनी में जमा होकर किडनी स्टोन की वजह भी बन सकते हैं। इसलिए अगर आप भी यूरिक एसिड की समस्या से परेशान हैं, तो कुछ ड्रिंक्स की मदद से आप यूरिक एसिड कम कर सकते हैं। सुबह उठते ही कुछ नेचुरल ड्रिंक्स पीने से इस समस्या को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। ये ड्रिंक्स शरीर से यूरिक एसिड को पेशाब के जरिए बाहर निकालने में मदद करती हैं। आइए जानें यूरिक एसिड कम करने के लिए सुबह क्या पिएं। नींबू पानी नींबू विटामिन-सी से भरपूर होता है, जो यूरिक एसिड को घोलने में मदद करता है। साथ ही, यह शरीर के पीएच लेवल को बैलेंस करके एसिडिटी को कम करता है। कैसे बनाएं?     एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नींबू निचोड़ें।     इसमें थोड़ा-सा शहद मिला सकते हैं।     सुबह खाली पेट इसे पिएं। फायदे-     किडनी को डिटॉक्स करता है।     यूरिक एसिड क्रिस्टल्स को तोड़ने में मदद करता है।     मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है। सेब का सिरका सेब का सिरका शरीर को अल्कलाइन बनाता है और यूरिक एसिड को नेचुरली बाहर निकालता है। इसमें मौजूद मैलिक एसिड यूरिक एसिड को तोड़ने में मदद करता है। कैसे बनाएं?     एक गिलास पानी में 1-2 चम्मच कच्चा, अनफिल्टर्ड एप्पल साइडर विनेगर मिलाएं।     इसमें शहद मिलाकर सुबह पिएं। फायदे-     शरीर की सूजन कम करता है।     ब्लड प्यूरीफायर का काम करता है।     पाचन को बेहतर बनाता है। चेरी का जूस चेरी में एंथोसायनिन नामक एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व होते हैं, जो यूरिक एसिड को कम करते हैं। चेरी का जूस गठिया के दर्द से राहत दिलाने में मददगार है। कैसे बनाएं?     ताजी या फ्रोजन चेरी को ब्लेंड करके जूस निकालें।     बिना चीनी मिलाए सुबह खाली पेट पिएं। फायदे-     यूरिक एसिड लेवल कम करता है।     जोड़ों के दर्द और सूजन से आराम दिलाता है।     एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। इन बातों का भी ध्यान रखें     ज्यादा पानी पिएं- दिन में 3-4 लीटर पानी पीने से यूरिक एसिड पतला होकर बाहर निकलता है।     प्रोटीन कम लें- रेड मीट, दालें, राजमा जैसी चीजें कम खाएं।     एक्सरसाइज करें- नियमित वॉक या योग करें।  

निराशा के अंधेरों से खुद को कैसे निकाले बाहर

किसी व्यक्ति के लिए उसके मुश्किल समय में इस बात का निश्चय कर पाना मुश्किल हो जाता है, कि वो निराशा के अंधेरों से खुद को बाहर कैसे निकाले। जीवन में सफलता हासिल करने के लिए क्या करना सही होगा और क्या गलत। अगर आप भी जीवन के किसी मोड़ पर खुद को ऐसी ही किसी असमंजस से घिरा हुआ पा रहे हैं तो आपको राह दिखाएंगे ये सक्सेस मंत्र। धैर्य से काम लें- किसी व्यक्ति के जीवन में जब मुश्किल समय आता है तो वो स्वाभाविक रूप से परेशान होकर झटपटाने लगता है। अपनी तरफ से हर संभव प्रयास करता है कि वो जल्द से जल्द उस समस्या से बाहर निकल जाएं। लेकिन ऐसे समय में व्यक्ति को इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए, कि समय चाहे कितना भी खराब क्यों ना हो परिवार और धैर्य की शक्ति के आगे वो झुक ही जाता है। परिवार के साथ मिलकर धैर्य के गुण को साथ लिए हुए अपने सभी फैसला को लें। सफलता की किरण आपको जरूर नजर आएगी। धन की बचत- व्यक्ति को संकट से निकालने के लिए धन की भी बहुत आवश्यकता होती है। संकट के समय धन ही सच्चा मित्र होता है। जिस व्यक्ति के पास संकट के समय धन का अभाव होता है ,उसके लिए संकट से उभर पाना बड़ा कठिन हो जाता है। नकारात्मक सोच से रहें दूर- व्यक्ति के जीवन में मुश्किलें आते ही सबसे पहले उसके मन को नकारात्मक सोच घेरने लगती है। निगेटिव एनर्जी से घिरा व्यक्ति यह सोचने पर मजबूर हो जाता है कि उसे उसकी समस्या का कोई हल नहीं मिलने वाला है। ऐसे में व्यक्ति को बड़ी से बड़ी मुश्किल में भी मन में नकारात्मक विचार नहीं लाने देने चाहिए। मन को शांत रखते हुए सकारात्मक सोच के साथ अपनी हर मुश्किल का हल निकालने की कोशिश करें, सफलता जरूर मिलेगी। जल्दबाजी में न लें फैसला- कई बार व्यक्ति मुश्किल समय में समस्या से निकलने के लिए जल्दबाजी में कई फैसला ले लेता है। जिसकी वजह से उसकी मुश्किलें कम होने की जगह और ज्यादा बढ़ जाती हैं। अगर आप किसी मुश्किल में फंसे हैं तो समस्या को अच्छे से समझकर ही उसे दूर करने के उपाय के बारे में सोचें, जल्दबाजी में कोई फैसला ना लें। सावधानी- चाणक्य नीति कहती है कि मुश्किल समय में व्यक्ति को हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए। व्यक्ति को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि संकट के समय में व्यक्ति के पास सीमित अवसर और चुनौतियां बड़ी होती हैं। ऐसे में जरा सी चूक आपका बड़ा नुकसान कर सकती है। ऐसे में सावधानी बरतकर ही आप अपने काम में सफलता हासिल कर सकते हैं।

क्या बिकेंगे व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम, मार्क जुकरबर्ग फंसे केस में

  नई दिल्ली सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा को अपने दो प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम बेचने पड़ सकते हैं. इसकी वजह अमेरिका के वाशिंगटन में कंपनी के खिलाफ एंटीट्रस्ट केस की सुनवाई है. यूएस कॉम्पिटिशन एंड कंज्यूमर वॉच डॉग ने कंपनी पर आरोप लगाया है कि उसने बाजार में प्रतिस्पर्धा खत्म करने और अपना एकाधिकार बनाने के लिए 2012 में इंस्टाग्राम (1 बिलियन डॉलर) और 2014 में व्हाट्सएप (22 बिलियन डॉलर) खरीदा था. अगर एफटीसी केस जीत जाता है, तो प्लेटफॉर्म बेचने पड़ सकते हैं फेडरल ट्रेड कमीशन (एफटीसी) ने खुद व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम को खरीदने की अनुमति दी थी. लेकिन नियमों के तहत एफटीसी को डील के नतीजों पर भी नजर रखनी होती है. इसलिए उसे मेटा के खिलाफ केस करना पड़ा. अगर (एफटीसी) केस जीत जाता है, तो वह मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप दोनों को बेचने के लिए मजबूर कर सकता है. जुकरबर्ग और पूर्व सीओओ को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में सुनवाई के दौरान जुकरबर्ग और कंपनी की पूर्व मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) शेरिल सैंडबर्ग दोनों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है. एंटी-ट्रस्ट मामले की सुनवाई 6 सप्ताह से अधिक समय तक चल सकती है. जुकरबर्ग के खिलाफ दलीलें… वैंडरबिल्ट लॉ स्कूल में एंटीट्रस्ट की प्रोफेसर रेबेका हो एलेंसवर्थ ने कहा कि जुकरबर्ग ने फेसबुक से मिल रही प्रतिस्पर्धा को बेअसर करने के लिए इंस्टाग्राम को खरीदा. जुकरबर्ग की बातचीत और उनके ईमेल इस मामले में सबसे ठोस सबूत हो सकते हैं. जुकरबर्ग ने कहा था कि बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के बजाय उस कंपनी को खरीदना बेहतर है. मार्क जुकरबर्ग की दलील… मेटा ने तर्क दिया कि वह केस जीत जाएगी क्योंकि इंस्टाग्राम को खरीदने के बाद उसके यूजर्स का अनुभव बेहतर हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, मेटा यह तर्क दे सकती है कि एंटीट्रस्ट केस में इरादा बहुत प्रासंगिक नहीं होता है.

बांग्‍लादेश और पाकिस्‍तान में Starlink को मिला अप्रूवल, भारत में नहीं मिली अनुमति

नई दिल्ली सैटेलाइट इंटरनेट के लिए एलन मस्‍क की कंपनी स्‍टारलिंक को भारत में अप्रूवल मिलना बाकी है, लेकिन दुनिया के कई देश मंजूरी देते जा रहे हैं। भारत के पड़ोसी पाकिस्‍तान और बांग्‍लोदश स्‍टारलिंक को अपने यहां सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने का अप्रूवल दे चुके हैं। अब कंपनी को सोमालिया में भी काम करने का लाइसेंस मिल गया है। वही सोमालिया जहां बड़ी संख्‍या में समुद्री लुटेरे रहते हैं, जो समुद्र से गुजरने वाले शिप्‍स को निशाना बनाते हैं। सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर एलन मस्‍क ने यह जानकारी शेयर की है। गौरतलब है कि कंपनी अफ्रीकी मार्केट में अपनी पैठ बढ़ाती जा रही है। अफ्रीकी देशों की लिस्‍ट में अब सोमालिया भी स्‍टारलिंक की सेवाएं अफ्रीका के कई देशों में चल रही हैं। अब इस लिस्‍ट में सोमालिया का नाम जुड़ गया है। कहा जा रहा है कि सोमालिया में सैटेलाइट इंटरनेट शुरू होने से वहां के लोगों को बिजनेसमैन को फायदा होगा। हालांकि इसके लिए लोगों को कितनी रकम खर्च करनी होगी, यह जानकारी अभी नहीं है। गौरतलब है कि सोमालिया की गिनती गरीब देशों में होती है और स्‍टारलिंक की सेवाएं काफी खर्चीली मानी जाती हैं। क्‍या कंपनी वहां के लोगों के लिए सस्‍ता प्‍लान लेकर आएगी, यह देखने वाली बात होगी। भारत में जियो-एयरटेल कर चुके हैं पार्टनरशिप भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए जियो और एयरटेल ने स्‍टारलिंक के साथ साझेदारी कर ली है। कहा जाता है कि दोनों बड़ी टेलिकॉम कंपनियां स्‍टारलिंक के प्रोडक्‍ट्स को अपने स्‍टोर्स पर बेचेंगी। लेकिन भारत में अभी यह सर्विस कमर्शल रूप से शुरू नहीं हो पाई है। भारत सरकार सुरक्षा संबंधी पहलुओं को निपटाना चाहती है और आश्‍वस्‍त होना चाहती है कि स्‍टारलिंक अपनी सेवाएं पूरी तरह देश से ही ऑपरेट करे। यही वजह है कि हमारे यहां सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू होने में वक्‍त लग रहा है। बांग्‍लोदश और पाकिस्‍तान भी स्‍टारलिंक को अपने यहां सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए अनुमति दे चुके हैं। हालांकि दिलचस्‍प बात है कि पाकिस्‍तान ने एलन मस्‍क के एक्‍स को अपने यहां बैन किया हुआ है। इस पर वहां का हाई कोर्ट तक सरकार को कटघरे में खड़ा कर चुका है। स्‍टारलिंक की सेवाएं शुरू होने से तमाम देशों में उन इलाकों तक भी हाईस्‍पीड इंटरनेट उपलब्‍ध होगा, जहां अभी तक फाइबर सेवाएं नहीं पहुंच सकी हैं। इस साल सर्विस शुरू होने की उम्‍मीद विभिन्‍न एक्‍सपर्ट ने स्‍टारलिंक की सेवाएं भारत में इस साल शुरू होने की उम्‍मीद जताई है। हालांकि यह सब स्‍पेक्‍ट्रम वितरण पर निर्भर करेगा। अगर इसमें देरी हुई तो सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं में देर हो सकती है।

ChatGPT 4.1 लॉन्च, पहले से ज्यादा समझदार हुआ AI

नई दिल्ली OpenAI ने अपनी लेटेस्ट ChatGPT 4.1 सीरीज को लॉन्च कर दिया है। इसके बाद ChatGPT की कोडिंग करने की क्षमता, लंबे सवालों और कंटेंट को समझने की काबिलियत में काफी सुधार आया है। इस सीरीज में GPT 4.1, GPT 4.1 mini और GPT 4.1 nano को लॉन्च किया गया है। बता दें कि ChatGPT के आने के बाद से ही यह चर्चाओं में है। ऐसे में इसका नया वर्जन आने पर लोगों के बीच उत्सुकता देखी जाती है। बताया जा रहा है कि इस नए वर्जन के बाद ChatGPT की क्षमताओं में काफी सुधार होगा। ChatGPT 4.1 के नए फीचर्स पहले के मुकाबले अब ChatGPT ज्यादा समझदार हो गया है। अब यह सवालों को ज़्यादा अच्छे से समझता है और ज़्यादा सटीक और स्मार्ट जवाब देता है। इसका मतलब है कि अगर आप थोड़ा उलझा हुआ या अधूरा सवाल भी पूछें, तो ये अब ज़्यादा सही जवाब देने में सक्षम है। इससे पहले तक सवाल साफ न होने पर यह उसके बारे में ज्यादा जानकारी मांगता था या फिर जवाब देने से मना कर देता था। लंबा कंटेंट अब बाएं हाथ का खेल अभी तक ChatGPT को लंबा कंटेंट समझने में मुश्किल होती थी। ChatGPT 4.1 के बाद ये समस्या दूर हो जाएगी। अब आप लंबा कंटेंट या बड़ें सवाल ChatGPT से पूछेंगे, तो वह उनके जवाब भी आसानी से दे पाएगा। इससे यह बड़े दस्तावेज़, रिपोर्ट, या स्क्रिप्ट को बेहतर तरीके से समझ सकता है। कंपनी का यहां तक भी कहना है कि अब आप एक पूरी किताब भी ChatGpt को देकर उसे प्रोसेस करने के लिए कह सकते हैं। गलतियों में कमी और ज्यादा सटीक ChatGPT 4.1 में गलतियों की गुंजाइश और कम हो जाएगी। पहले ChatGPT से गलत जानकारी भी मिलती थी लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। पहले देखने में आता कि ChatGPT तथ्यों तक सीमित रहने की जगह मनगढ़ंत बातें भी बताने लगता था। नई सीरीज में इस समस्या को भी दूर किया गया है। मल्टीटास्किंग और लॉजिक में बेहतर अब यह कई काम एक साथ कर पाएगा और लॉजिक का इस्तेमाल करने की इसकी क्षमताओं का विकास किया गया है। कहने का मतलब है कि ये अब मुशकिल मैथ्स, लॉजिकल पज़ल्स, और कोडिंग से जुड़ी समस्याओं को पहले से बेहतर तरीके से हल कर सकता है। इसका मतलब है कि ये अब सिर्फ चैटबॉट नहीं, बल्कि एक सच्चा असिस्टेंट बन गया है।

1000 मिनटों तक UPI के जरिए पैसों का नहीं हो सका लेन-देन, 5 साल में 17 बार हुआ क्रैश

नई दिल्ली पिछले दिनों UPI के एक महीने में तीसरी बार ठप होने की वजह से इस पर चर्चा शुरू हो गई है। वहीं अब UPI डाउन होने को लेकर कुछ डेटा निकल कर सामने आया है। NPCI के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2020 से लेकर मार्च 2025 तक कुल 17 बार UPI ठप रहा। इस दौरान लगभग 1000 मिनटों तक UPI के जरिए पैसों का कोई लेन-देन नहीं हो सका। बता दें कि NPCI की वेबसाइट पर फिलहाल अप्रैल 2025 में इसके ठप होने का डेटा अपडेट नहीं किया गया है। इसे लेकर सोशल मीडिया साइट X पर NPCI ने यह बयान दिया था- ‘NPCI को रुक-रुक कर तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे UPI लेनदेन में गिरावट आ रही है।’ NPCI ने इसे लेकर खेद जताया और माफी भी मांगी। जुलाई 2024 में सबसे ज्यादा देर ठप रहा UPI डेटा से पता चला है कि जुलाई 2024 में सबसे ज्यादा देर के लिए UPI ठप रहा था। उस महीने में यह 207 मिनट बंद रहा। वहीं जानकारी यह भी दी गई है कि UPI का अपटाइम हर महीने 99% से ज्यादा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 1 घंटे के लिए UPI ठप होने का मतलब है कि तकरीबन 4 करोड़ UPI लेनदेन का प्रभावित होना। बता दें कि मार्च में UPI के जरिये रोजाना औसतन 59 करोड़ का लेनदेन हुआ। 26 मार्च को UPI पहली बार ठप हुआ था और उस दिन 55 करोड़ का लेनदेन हुआ, जो इससे पिछले दिन किए गए 58.1 करोड़ के लेनदेन से 7% कम है। उठ चुकी है UPI पर चार्ज लगाने की मांग बता दें कि पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया इस तरीके की तकनीकी खामियों से निपटने के लिए PM मोदी से जीरो मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नीति पर पुनर्विचार करने की मांग कर चुका है। इसके लिए पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। दरअसल पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया चाहता है कि UPI और रुपे डेबिट कार्ड के ट्रांजेक्शन पर 0.3% का चार्ज लगाया जाए। बताया यह भी जा रहा है कि छोटे व्यापारियों के लिए किसी भी तरह की फीस को न लगाते हुए बड़े व्यापारियों को इस दायरे में लाने पर बात चल रही है। बताया जा रहा कि इस चार्ज का इस्तेमाल UPI सिस्टम को मेंटेन करने के लिए किया जाएगा। किसकी कितनी हिस्सेदारी हाल के दिनों में UPI पर दो कंपनियों का वर्चस्व देखने को मिला है। NPCI के आंकड़ों के अनुसार मार्च में UPI से होने वाले लेनदेन में 47.25% हिस्सा phonepe का रहा। वहीं दूसरे नंबर पर 36.04% हिस्सेदारी के साथ google pay रहा। वहीं अब paytm की हिस्सेदारी 6.67% रह गई है।

मार्च में यूपीआई के जरिए 18.30 अरब का हुए लेनदेन

नई दिल्ली भारत में यूपीआई लेनदेन लगातार बढ़ रहा है। मार्च में यूपीआई के जरिए लेनदेन में 13.6 फीसदी का इजाफा हुआ है। यूपीआई पेमेंट के लिए लोग बड़ी संख्‍या में फोनपे, गूगलपे और पेटीएम जैसे ऐप्‍स का इस्‍तेमाल करते हैं। यूपीआई पेमेंट इसलिए भी सुर्खियों में है, क्‍योंकि हाल में लोगों को इसकी वजह से परेशान होना पड़ा है। यूपीआई डाउन होने से लोग पेमेंट, फंड ट्रांसफर जैसे जरूरी काम नहीं कर पाए। सोशल मीडिया में यूजर्स ने तीखी प्रतिक्र‍िया के साथ मजेदार कमेंट्स किए कि जेब में वॉलेट और वॉलेट में पैसे हमेशा रखने चाहिए। इन सबके बावजूद यूपीआई पेमेंट की ग्रोथ जारी है। ऐसे में यह जानना भी जरूरी है कि भारत के टॉप 5 यूपीआई ऐप्‍स कौन से हैं। भारत में टॉप 5 यूपीआई ऐप्‍स आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 में भारत के टॉप 5 यूपीआई ऐप्‍स में फोनपे, गूगलपे, पेटीएम, नावी और सुपरमनी ऐप शामिल हैं। सुपरमनी ऐप ने फरवरी में ही क्रेड को पांचवीं पोजिशन से नीचे धकेला था। आंकड़ों से पता चलता है कि 47.25% मार्केट शेयर के साथ फोनपे सबसे आगे है। गूगलपे का मार्केट शेयर 36.04 फीसदी है। यह दोनों पेमेंट ऐप यूपीआई पेमेंट का 83 फीसदी मार्केट शेयर रखते हैं। एक जमाने में बेहद पॉपुलर रहा पेटीएम 6.67 फीसदी मार्केट शेयर रखता है। लिस्‍ट में इसके बाद मौजूद यूपीआई ऐप्‍स छोटे-छोटे मार्केट शेयर के साथ अपनी मजबूती बनाए हुए हैं। भीम ऐप की क्‍या है पोजिशन भीम ऐप की पोजिशन पर बात करने से पहले क्रेड के बारे में बताना जरूरी है। फरवरी में क्रेड को सुपरमनी ऐप ने पांचवीं पोजिशन से हटाया था और मार्च में इस ऐप को एक्सिस बैंक ऐप ने छठी पोजिशन से हटाकर सातवें नंबर पर कर दिया। एक्सिस बैंक अब छठे नंबर पर है। उसके बाद क्रेड और 8वें नंबर पर आता है भीम ऐप। हाल के दिनों में भीम ऐप एडवांस हुआ है और इसका यूजर बेस लगातार बढ़ रहा है। भीम ऐप को एनपीसीआई ने डेवलप किया है। हाल में भीम 3.0 लॉन्‍च किया गया है, जिसका रोलआउट इस महीने से शुरू होने वाला है। भीम ऐप के बाद एमेजॉनपे और मोबिक्विक का नंबर आता है। मार्च में हुआ कितना लेनदेन यूपीआई के जरिए होने वाला लेनदेन लगातार बढ़ रहा है। यह 13.6 फीसदी बढ़ा है। आंकड़ों से पता चलता है कि कुल 18.30 अरब लेनदेन मार्च में हुए। यह दर्शाता है कि लोग पहले से ज्‍यादा यूपीआई ऐप्‍स का इस्‍तेमाल कर रहे हैं। यूपीआई पेमेंट में सबसे आगे रहा फोनपे, जिसके जरिए 864.7 करोड़ लेनदेन किए। यह कुल UPI लेनदेन का 47.25% है। कुल 12.57 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। यह कुल UPI लेनदेन का 50.74 फीसदी है। यूपीआई डाउन होने से न‍िराश यूजर्स हाल के दिनों में कई बार यूपीआई डाउन होने से लोगों को परेशानी हुई है। पीक आवर्स में यूपीआई पेमेंट नहीं हो पाने से लोग दिक्‍कत में आए हैं, क्‍योंकि अब लोगों ने वॉलेट रखना या वॉलेट में पैसे रखना कम कर दिया है। बीते शनिवार को भी यूपीआई पेमेंट डाउन रहा। खास बात है कि एनपीसीआई हर बार तकनीकी गड़बड़ी की बात कहता है। यूपीआई डाउन होने पर सोशल मीडिया में भी लोग मजेदार जोक शेयर करते हैं। हाल ही में एक यूजर ने लिखा था कि आज तो बर्तन धोने ही पड़ेंगे। उसका इशारा रेस्‍टोरेंट में यूपीआई पेमेंट नहीं होने की ओर था। शनिवार से पहले 2 अप्रैल को भी कुछ बैंकों के यूपीआई पेमेंट सर्वर में परेशानी आ गई थी।

केवल स्वाद नहीं सेहत के लिए भी फायदेमंद है पान का पत्ता

पान भारत के इतिहास एवं परंपराओं से गहरे से जुड़ा है। भारतीय संस्कृति में पान को हर तरह से शुभ माना जाता है। इसके अलावा पान का रोगों को दूर भगाने में भी बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जाता है। खाना खाने के बाद और मुँह का जायका बनाए रखने के लिए पान बहुत ही कारगर है। कई बीमारियों के उपचार में पान का इस्तेमाल भी लाभकारी सिद्ध होता है। आइए आपको बताते हैं पान के पत्ते के कुछ औषधीय गुण… -हवन व पूजा-पाठ आदि में इस्तेमाल होने वाले पान के पत्तों में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, टैनिन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयोडीन व पोटेशियम जैसे मिनरल्स प्रचुर मात्रा में होते हैं। -सर्दी-जुकाम में इनका उपयोग आयुर्वेदिक इलाज के रूप में किया जा सकता है। -हल्दी का टुकड़ा सेंककर पान पत्ते में डालकर खाने से लाभ होगा। -रात में तेज खांसी चलती हो तो पान के पत्ते में अजवाइन व मुलैठी का टुकड़ा डालकर खा सकते हैं।सरकारी नौकरी देखने के लिए यहाँ क्लिक करें -बच्चों को सर्दी-जुकाम हो तो एक पत्ते पर हल्का गर्म सरसों का तेल लगाकर बच्चों के सीने पर रखने से आराम मिलता है। -2-3 पत्तों के रस में शहद मिलाकर दिन में दो बार लेने से लाभ होगा। बच्चों को आधा चम्मच रस ही दें। ये न करें उपयोग:- हालांकि चरक संहिता में बतौर माउथ फ्रेशनर इलायची, लौंग, जावित्री के साथ पान पत्ता खाना बताया गया है। लेकिन जिन्हें टीबी, पित्त संबंधी रोग, नकसीर, त्वचा व गले में रूखापन, आंखों से जुड़ी समस्या या बेहोशी जैसी बीमारियां हों तो वे पान के पत्तों का उपयोग न करें।  

OnePlus 13T में होगा Snapdragon 8 Elite चिपसेट

नई दिल्ली OnePlus 13T को लेकर हाइप बनी हई है। इसके कॉम्पैक्ट डिजाइन के साथ Snapdragon 8 Elite चिपसेट का कॉम्बीनेशन OnePlus के चाहने वालों के सर चढ़ कर बोल रहा है। हालांकि अभी फोन को लेकर कोई ऑफीशियल जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन एक लीक हुई वीडियो में इसके डिजाइन की झलक मिली है। इस वीडियो के बाद इस फोन के पिछले रेंडर्स सही साबित होते दिख रहे हैं। बता दें कि हाल ही में स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों ने सिलिकॉन कार्बन बैटरी तकनीक का इस्तेमाल करना शुरू किया है। इससे स्मार्टफोन को कॉम्पैकट रखते हुए बड़ी बैटरी दे पाना संभव हो पाया है। इस तकनीक के साथ कई कंपनियां अपने कॉम्पैक्ट स्मार्टफोन लॉन्च करने की तैयारी में हैं। Oneplus का 13T मॉडल भी इन्हीं में से एक होने वाला है। OnePlus 13T का डिजाइन लीक्ड वीडियो में OnePlus 13T की झलक मिली है। इसे देखकर पता चलता है कि OnePlus 13T का कैमरा मॉड्यूल गोल न होकर चौकोर होगा। जैसा कि पहले बताया जा रहा था यह फोन 3 कैमरों के साथ आ सकता है। वीडियो में दिखे डिजाइन से भी इस बात की पुष्टी होती दिख रही है। रिपोर्ट्स में दावा किया जा चुका है कि इसमें 50 मेगापिक्सल का प्राइमरी और 50 मेगापिक्सल का 2X टेलिफोटो लेंस मिल सकता है। वहीं तीसरा कैमरा एक अल्ट्रावाइड लेंस होने की संभावना है। एक बार फिर बता दें कि ऑफिशियल जानकारी सामने आना अभी बाकी है। ऑनलाइन कुछ लोग इस डिजाइन को पसंद करते हुए लिख रहे हैं कि वह ऐसा ही डिजाइन OnePlus की मुख्य सीरीज में भी देखना चाहते हैं। वहीं जिन्हें यह डिजाइन पसंद नहीं आया उन्होंने इसे iPhone की कॉपी बताया। वीडियो में और क्या दिखा? लीक हुए वीडियो में दिखाया गया है कि OnePlus 13T अच्छे वेट बैलेंस के साथ आने वाला है। वीडियो में एक शख्स इस फोन को उंगली पर घुमाता दिख रहा है। इसी तरह से OnePlus चाइना के प्रेजिडेंट लुइस ली ने एक पेन पर फोन को बैलेंस करती फोटो चीनी सोशल मीडिया पर शेयर की थी। इन तमाम तरीकों से कंपनी दिखाना चाहती है कि एक 6000mah जितनी बड़ी बैटरी के साथ आने वाला स्मार्टफोन बहुत अच्छे से वेट को बैलेंस करता है। बता दें कि अच्छे वेट बैलेंस का मतलब है कि यूजर इसे ज्यादा समय तक हाथ में पकड़ पाएंगे। और क्या नया आ रहा है? Oneplus ने फोन में शॉर्टकट बटन होने की भी हिंट दी है। दरअसल अभी तक Oneplus के फोन्स में अलर्ट स्लाइडर देखने को मिलता था। वहीं अब बताया जा रहा है कि इसे बदलकर कंपनी iPhone जैसा एक्शन बटन फोन में दे सकती है। यूजर्स इस बटन के फंक्शन को अपने हिसाब से कस्टमाइज कर पाएंगे।

मलेरिया, मच्छरों से होने वाली एक खतरनाक बीमारी, प्रेग्नेंसी में मां और बच्चे दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकती

नई दिल्ली प्रेग्नेंसी के दौरान महिला का शरीर बहुत संवेदनशील होता है, और इस दौरान इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो जाता है, जिससे मलेरिया जैसी बीमारियां जल्दी हो सकती हैं। मलेरिया, मच्छरों से होने वाली एक खतरनाक बीमारी है, जो प्रेग्नेंसी में मां और बच्चे दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। प्रेग्नेंसी में मलेरिया के कारण गर्भावस्था में शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है, जिससे मलेरिया का संक्रमण तेजी से फैल सकता है। इसके अलावा, मलेरिया के कारण गर्भवती महिला को कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जैसे समय से पहले प्रसव, गर्भपात, बच्चेदानी में संक्रमण, और खून की कमी (एनीमिया)। अगर इलाज समय पर न किया जाए, तो यह जानलेवा भी हो सकता है। प्रेग्नेंसी में मलेरिया के लक्षण बार-बार बुखार आना ठंड लगना और कंपकंपी होना सिरदर्द उल्टी या जी मिचलाना थकान और कमजोरी महसूस होना शरीर में दर्द कभी-कभी पीली त्वचा (एनीमिया का संकेत) प्रेग्नेंसी में मलेरिया से बचाव के उपाय मच्छरों से बचें मच्छरों से बचने के लिए सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और मच्छर भगाने वाले लिक्विड या क्रीम का प्रयोग करें। फुल बाजू के कपड़े पहनें और शाम के समय बाहर जाने से बचें। अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो मच्छरदानी या कीटनाशक का उपयोग करें। घर में सफाई रखें घर में पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले और पानी की टंकी में पानी की सफाई करें, क्योंकि मच्छर इन स्थानों पर प्रजनन करते हैं। मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए घर की सफाई पर ध्यान दें। डॉक्टर से सलाह लें प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित चेकअप कराएं और मलेरिया की प्रिवेंटिव दवाइयों के बारे में डॉक्टर से सलाह लें। कुछ क्षेत्रों में मलेरिया के प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट की आवश्यकता होती है, इसलिए लापरवाही न बरतें। बुखार आने पर डॉक्टर से जांच कराएं और खुद से दवाइयों का सेवन न करें। मां और बच्चे की सुरक्षा पर ध्यान दें मलेरिया से बचाव पूरी तरह से संभव है, बस इसके लिए सावधानी और ध्यान की जरूरत है। सही समय पर उपचार और रोकथाम से मां और बच्चा दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है। मलेरिया प्रेग्नेंसी के दौरान खतरनाक हो सकता है, लेकिन सही समय पर इलाज और कुछ सामान्य सावधानियां अपनाकर इससे बचा जा सकता है। गर्भवती महिलाओं को अपनी और अपने बच्चे की सुरक्षा के लिए विशेष ध्यान रखना चाहिए और किसी भी लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ढीले-ढाले कपड़े आजकल बहुत चलन में हैं, दशक बीत गए, मगर कम नहीं हुआ ओवरसाइज कपड़े का चलन

नई दिल्ली अब वो वक्त गया जब हम फैशन की बात करते थे और हमारे दिमाग में अक्सर चमकदार, फिटेड और परफेक्ट शेप में सजे आउटफिट्स की तस्वीर उभरती थी। जी हां, आज की फैशन दुनिया एक नया रुख ले चुकी है- अब परफेक्ट बॉडी को दिखाना जरूरी नहीं, बल्कि उसे ढककर भी स्टाइलिश दिखना एक ट्रेंड बन चुका है। यही वजह है कि ओवरसाइज कपड़े (Oversized Clothes), जो कभी आलसी या ‘अनफ्लैटरिंग’ माने जाते थे, आज की यंग जेनरेशन के वॉर्डरोब का सबसे हॉट ट्रेंड बन चुके हैं। चाहे बात बड़े-बड़े ब्लेजर्स की हो या बैगी जींस की, लोग अब उन कपड़ों को पसंद कर रहे हैं जो न सिर्फ उन्हें आराम देते हैं, बल्कि उनकी सोच, उनकी पहचान और आजादी को भी बयां करते हैं। तो सवाल ये है कि जब पूरी दुनिया फिटनेस, बॉडी टोनिंग और वर्कआउट की दीवानी हो चुकी है, तो ऐसे ढीले-ढाले कपड़े (Loose-fitting clothes) कैसे फैशन का चेहरा बन गए? आइए जानें कि आखिर ओवरसाइज फैशन में ऐसा क्या खास है (Why loose fit is popular), जिसने इसे सिर्फ एक स्टाइल नहीं, बल्कि एक सोच बना दिया है। फैशन का नया फॉर्मूला हैं ओवरसाइज कपड़े फैशन वीक में आमतौर पर वही ट्रेंड दिखते हैं जो आने वाले महीनों में सड़कों पर छाए रहेंगे, लेकिन ओवरसाइज फैशन तो बीते कई सालों से लगातार फेमस बना हुआ है। ये ढीले-ढाले, आरामदायक कपड़े हर तरह के बॉडी टाइप के लिए बनाए जाते हैं और लोगों ने इन्हें दिल से अपनाया है। आज के दौर में ओवरसाइज कपड़े स्टाइल का सिंबल बन चुके हैं। ये सिर्फ फैशन स्टेटमेंट नहीं हैं, बल्कि कम्फर्ट और आत्म-स्वीकृति का प्रतीक भी हैं। आरामदायक और सुपर स्टाइलिश चाहे ओवरसाइज ब्लेजर हो, जंपर, स्वेटर या फिर बैगी जींस- इन सभी में एक खास बात है कि ये पहनने में बेहद आरामदायक होते हैं और मौके के हिसाब से इन्हें कैजुअल या फॉर्मल दोनों तरह से स्टाइल किया जा सकता है। पतले लोगों पर ये कपड़े उनके शरीर और कपड़ों के बीच की खाली जगह को दिखाते हैं, जिससे उनकी ‘स्लिमनेस’ और भी ज्यादा हाइलाइट होती है। वहीं, भारी शरीर वाले लोगों के लिए ये कपड़े उनके शरीर के शेप को ढक लेते हैं, जिससे वे बिना किसी सोशल प्रेशर के कॉन्फिडेंस के साथ बाहर निकल सकते हैं। जेंडर के दायरे तोड़ता फैशन ओवरसाइज कपड़ों की लोकप्रियता का एक और बड़ा कारण है- जेंडर रोल्स को तोड़ना। पहले ऑफिस में महिलाएं फिटेड और स्लिम आउटफिट्स में दिखती थीं, लेकिन अब ओवरसाइज सूट्स के जरिए वे एक न्यूट्रल और प्रोफेशनल लुक अपना रही हैं, जो न केवल स्टाइलिश है, बल्कि किसी एक जेंडर तक सीमित नहीं है। इसका मतलब है कि अब कपड़े सिर्फ ‘लड़की है तो पिंक पहने, लड़का है तो ब्लू’ वाली सोच से बाहर निकल चुके हैं। अब फैशन हर किसी के लिए है- जैसे वो हैं, वैसे ही। एक्सप्रेशन का आजाद तरीका ओवरसाइज कपड़े न सिर्फ आराम और स्टाइल का मेल हैं, बल्कि ये एक सोच का हिस्सा भी हैं। ये दर्शाते हैं कि किसी महिला का मूल्य सिर्फ उसकी खूबसूरती या बॉडी शेप से नहीं तय किया जा सकता। ये एंड्रोजिनी (जहां मर्दाना और औरतों वाला फैशन मिलकर एक नया रूप लेते हैं) को बढ़ावा देते हैं और व्यक्ति की असली पहचान को बिना किसी जजमेंट के सामने लाते हैं। ओवरसाइज फैशन सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि एक सोशल स्टेटमेंट है। ये उन सभी लोगों के लिए राहत की तरह है जो जेंडर की पारंपरिक परिभाषाओं से बाहर आना चाहते हैं।

इन घरेलू उपायों से मिनटों में दूर भगाए एसिडिटी…

आजकल हर कोई एसिडिटी की समस्या से परेशान रहता है। यह दिक्कत हमें तली-भुनी चीजें और मसालेदार खाना खाने से होती है। इसलिए हमें इन सब चीजों से परहेज करना चाहिए क्योंकि यह हमारे शरीर को नुकसान पहुंची है। पेट में जब सामान्य से अधिक मात्रा में एसिड निकलता है तो उसे एसिडिटी कहते हैं। इसलिए डॉक्टर हमें रात को सोने से तीन-चार घंटे पहले डिनर करने के लिए कहते हैं। आज हम आपको एसिडिटी से छुटकारा पाने के लिए कुछ घरेलू उपाय बचाएगें। इन्हें अपनाकर आप इस समस्या से जल्द ही छुटकारा पा सकते है। तो आइए जानते हैं… -मुलेठी का चूर्ण का काढ़ा बनाकर पीने से एसिडिटी में ज्यादा फायदा होता है। -रात के समय नीम की छाल का चूर्ण पानी में भीगो के रखें और सुबह उठकर पी लें। ऐसा करने से आपको एसिडिटी से जल्द आरम मिल जाएगा। -एसिडिटी समाप्त करने के लिए दूध में त्रिफला चूर्ण मिला कर पीए। -दूध में मुनक्का डालकर उबालें। जब यह आधा रह जाए तो इसे ठंडा कर लें। बाद में रात को खाना खाने के एक घंटे के बाद दूध को पी लें। एसिडिटी की दिक्कत जल्द ठीक हो जाएगी। -हर रोज सुबह एक गिलास गुनगुने पानी में काली मिर्च और नींबू निचोड़कर पीएं। -रोज सुबह-शाम आधा चम्मच सौंफ और गुलाब के फूलों का चूर्ण लें। -अगर एसिडिटी की दिक्कत है तो खाने के साथ सलाद के रूप में मूली पर काला नमक या काली मिर्च छिडक कर जरूर खाएं। -घर में आप जायफल तथा सोंठ को मिलाकर चूर्ण बना कर रख लें। जब भी आपको एसिडिटी की दिक्कत हो तो इसे खा लें। तुरंत आराम मिल जाएगा। -एसिडिटी होने पर कच्ची सौंफ चबाने और लौंग चूसने से यह दिक्कत जल्द ही ठीक हो जाती है। -हर रोज सुबह-शाम अदरक और परवल का काढ़ा पीने से एसिडिटी की समस्या खत्म हो जाती है। -रोज सुबह खाली पेट गुनगुना पानी और नारियल का पानी पीने से एसिडिटी की दिक्कत नहीं होती। -एसिडिटी से जल्दी आराम पाने कि लिए खाने में गुड़, केला, बादाम और नींबू शामिल कर लें। -पानी में पुदीने की कुछ पत्तियां डालकर उबाल पीने से एसिडिटी में फायदा होता है।  

नए आधार ऐप से मिलेंगे कई फायदे

  नई दिल्ली आधार कार्ड के इस्‍तेमाल को और आसान बनाने के लिए एक नया आधार ऐप लॉन्‍च किया गया है। दावा है कि ऐप से लोगों का वेरिफ‍िकेशन चु‍टकियों में हो जाएगा। यह यूपीआई पेमेंट जितना आसान होगा। जिस तरह आप किसी दुकानदार को पेमेंट करने के लिए अपने फोन से क्‍यूआर कोड स्‍कैन करते हैं, उसी तरह से आने वाले दिनों में अपने फोन से क्‍यूआर कोड स्‍कैन करके आप अपनी आइडेंटिटी प्रूफ कर पाएंगे। भारत के लिए इस ऐप को गेमचेंजर बताया जा रहा है, क्‍योंकि तमाम सेवाओं में आजकल आधार का यूज होता है। नया ऐप वेरिफ‍िकेशन को तेजी से पूरा करने में मददगार साबित होगा। आइए जानते हैं, नए आधार ऐप के क्‍या फायदे मिलने वाले हैं। नए ऐप का नाम क्‍या है नए ऐप का नाम अभी सामने नहीं आया है। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि m-Aadhaar ऐप को ही अपडेट किया गया है। नया ऐप भी UIDAI के साथ बनाया गया है। ऐप की मदद से किसी भी व्‍यक्ति की पहचान को सत्‍यापित किया जा सकेगा। इससे यह जानने में मदद मिलेगी कि सामने वाले व्‍यक्ति की पहचान सही है या नहीं। इससे फर्जीवाड़े को रोकने में मदद मिलने की उम्‍मीद है। कैसे काम करेगा नया आधार ऐप अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार इसका मेथड बहुत सिंपल है। आपको अपने वॉलेट में आधार कार्ड रखने की जरूरत नहीं होगी। जेब में बस मोबाइल होना चाहिए। आप जिस जगह जा रहे हैं जैसे- किसी परीक्षा केंद्र या हॉस्पिटल या बैंक में किसी काम के लिए। वहां पहुंचकर आपको अपने मोबाइल में नया आधार ऐप खोलना होगा। फ‍िर वहां लगे क्‍यूआर कोड को स्‍कैन करना होगा। स्‍कैन होते ही आपकी पहचान वेरिफाई हो जाएगी। नए ऐप से भारत को डिजिटल इंडिया के रूप में दुनिया में पहचान मिलेगी। यह लोगों की जिंदगी को आसान बना सकता है। यह इस दिशा में भी अहम कदम होगा कि भारत अपनी टेक्‍नोलॉजी को किस तरह से इस्‍तेमाल कर रहा है। नए आधार ऐप के 6 अहम फायदे     होटल के रिसेप्‍शन, दुकानों, बैंकों आदि में आधार कार्ड की फोटो कॉपी नहीं दिखानी पड़ेगी।     क्‍यूआर कोड स्‍कैन करके आप वेरिफाई हो जाएंगे, इससे आपकी निजी जानकारी सुरक्षित रहेगी।     आपको आधार वेरिफाई करने के लिए अपना फ‍िंग‍रप्रिंट या आइरिस स्‍कैनर नहीं देना होगा।     कोई भी आपकी आधार कॉपी का गलत इस्‍तेमाल करके फर्जीवाड़ा नहीं कर पाएगा।     आधार कॉपी शेयर करने के बाद लोग चिंतित रहते हैं कि उसका गलत इस्‍तेमाल ना हो जाए, अब यह चिंता नहीं करनी होगी।     स्‍मार्टफोन से वेरिफ‍िकेशन होने से ज्‍यादा से ज्‍यादा लोग सुविधा को इस्‍तेमाल कर पाएंगे।

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