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सही पोषण की सात अच्छी आदतें

हम क्या खाते हैं और कितना पानी पीते हैं, यह तय करता है कि हम कितने फिट और स्वस्थ रहेंगे। अच्छी सेहत के लिए खान-पान में पोषण का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। जानते हैं कुछ बातें, जो कर सकती हैं इसमें आपकी मदद… नाश्ता जरूर करें खुद को यह बताएं कि सुबह का नाश्ता अच्छी सेहत के साथ-साथ शरीर को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए जरूरी है। टोंड दूध के साथ ओट्स लें। उच्च फाइबरयुक्त फल और एक चुटकी दालचीनी खाएं। इससे रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। आप चाहें तो मल्टीग्रेन ब्रेड और कुछ अंडे, हल्के तले हुए मशरूम और हरी पत्तेदार सब्जियां भी खा सकते हैं। ज्यादा चाय-कॉफी ठीक नहीं चाय और कॉफी की मात्रा का ध्यान देना बहुत जरूरी है। ग्रीन टी भी अधिक न पिएं। पांच कप से अधिक ग्रीन टी लेना शरीर में पानी की कमी पैदा करेगा। अगर आप सिर्फ दूध और चीनी वाली चाय पीते हैं तो यह तय है कि आप सीमा से अधिक चीनी डाइट में ले रहे हैं। खूब खाएं हरी पत्तेदार सब्जियां यह ध्यान रखें कि हररोज कितनी मात्रा में हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन कर रहे हैं। पालक और मेथी में फोलेट प्रचुरता में होते हैं। इस विटामिन से शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से बनती हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें कैलरी बहुत कम होती है। तीनों समय हरी सब्जियों को भोजन में शामिल करें। पानी है अनमोल हर आधे घंटे में पानी पिएं। पानी शरीर के पोषक तत्वों को भीतरी अंगों और ऊतकों तक ले जाता है। यह ध्यान रखें कि जूस और अन्य ड्रिंक्स पानी की बराबरी नहीं कर सकते। नींद का रखें ध्यान पोषक तत्व नींद पर भी असर डालते हैं। सोने से पहले कैफीन, चॉकलेट, अधिक चिकनाई वाली चीजें न खाएं। ये चीजें आंतों को प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए सोने से पहले अधिक तला हुआ खाना पित्त बनाता है और पाचन प्रक्रिया को धीमा करता है। हर रोज व्यायाम करें अपने वर्कआउट में हृदय के लिए लाभकारी व्यायाम करें। शरीर को मजबूत और लचीला बनाए रखने वाले व्यायामों को शामिल करें। हेल्दी स्नेक्स हल्के-फुल्के नाश्ते के लिए स्वस्थ तरीके आजमाएं। इससे भूख नियंत्रित रहती है। सेब, अनार के दाने और बादाम का सलाद खाएं। शाम के समय गाजर और खीरे का सलाद खाएं।    

बीमारियों का घर बढ़ती तोंद

बढ़ती तोंद शरीर को बेडौल तो बना ही देती है, अब नए अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि इससे उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय संबंधी बीमारियों के शिकार होने का खतरा भी बढ़ रहा है। हमारे देश में ज्यादातर लोग इस बात को स्वीकार नहीं करते कि उनकी तोंद बढ़ रही है। शायद वे इस बात से भी अनजान हैं कि कमर का बढ़ता आकार उनके स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है। देश और दुनिया के स्तर पर हुए कई शोध साफ तौर पर यह कहते हैं कि पेट के उभार का सीधा संबंध उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी बीमारियों और मधुमेह से है। दुनिया भर में हुए शोधों में यह सामने आया है कि पुरुषों में तोंद ज्यादा होती है। वहीं महिलाओं में कूल्हे के आसपास अधिक मांस होता है। भारत में यह आंकड़ा कुछ उल्टा है। यहां छह राज्यों (ग्रामीण व शहरी राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, महाराष्ट्र और कर्नाटक) में 7,000 लोगों पर किए गए शोध से सामने आया है कि भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की तोंद अधिक है। पेट पर उभरा यह मांस 50 वर्ष की आयु के बाद हर चार में से एक महिला के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रहा है। ऑनलाइन जर्नल बीएमजी ओपन में दो सप्ताह पहले इस अध्ययन की रिपोर्ट छापी गई है। इसके अनुसार अध्ययन में शामिल लोगों में से 14 प्रतिशत ओवरवेट यानी तय सीमा से अधिक वजन वाले लोग थे। इनमें हर तीन में से एक की तोंद (35.4 इंच से अधिक कमर पुरुषों में, 31.4 इंच से अधिक कमर महिलाओं में) थी। लगभग दो तिहाई (69 फीसदी) तोंद वाली महिलाएं अमीर परिवारों की थीं, जबकि करीबन आधी यानी 46 प्रतिशत महिलाएं मध्यमवर्गीय व निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों से थीं। बीमारियों से संबंध:- ज्यादा परेशान करने वाले तथ्य उस अध्ययन से पता चलते हैं, जो अब तक प्रकाशित नहीं हुआ है। यह अध्ययन ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी एम्स, दिल्ली ने किया है। यह 20 से 60 साल के आयु वर्ग के 500 से अधिक लोगों पर किया गया। इस अध्ययन में सामने आया कि पेट पर बढ़ता मांस महिलाओं के लिए कई बीमारियों की जद में आने का खतरा बन सकता है। इस अध्ययन में शामिल रहे एम्स में अतिरिक्त प्रोफेसर डॉक्टर नवल विक्रम कहते हैं, हमने इस अध्ययन में पाया कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय संबंधी बीमारियां होने का खतरा बढ़ी तोंद वाले पुरुषों में 12 गुना व महिलाओं में 20 गुना अधिक हो जाता है। पेट पर जो मांस जमा है, उसके स्वरूप से भी बीमारियों के खतरे से आगाह किया जा सकता है। गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में क्लिनिकल एवं प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी के अध्यक्ष डॉक्टर आर आर कासलीवाल कहते हैं, आन्त्र से निकलता फैट, खून में फैटी एसिड्स रिलीज करता है। यह एसिड्स हार्मोंस के साथ मिल कर सूजन, बैड कोलेस्ट्रॉल, क्रिगलीसेरेड्स, रक्त ग्लूकोज और रक्तचाप को बढ़ाते हैं। ये न केवल हृदय संबंधी बीमारियों और हृदयाघात के खतरे को बढ़ाते हैं, बल्कि कुछ एस्ट्रोजन सेंसिटिव कैंसर जैसे रजोनिवृत्ति के बाद ब्रेस्ट और गर्भाश्य के कैंसर के खतरे को बढ़ा देते हैं। कैसे बढ़ी समस्या:– फोर्टिस सी-डॉक के अध्यक्ष डॉक्टर अनूप मिश्रा (जिन्होंने एम्स में अपने कार्यकाल के दौरान अध्ययन करने वाले दल की अध्यक्षता की थी) के अनुसार, भारत में हमने जो अध्ययन किया, उसमें पुरुषों के कमर का साइज 78 सेमी निर्धारित किया था और महिलाओं के लिए 72 सेमी। जो भी इससे अधिक कमर वाले पाए गए, वे अच्छा वजन होने के बावजूद भी कम से कम एक मेटाबॉलिक बीमारी की जद में आने के खतरे में थे। कई अन्य अंतरराष्ट्रीय अध्ययन भी बढ़ती कमर और हृदय संबंधी बीमारियों व मधुमेह के संबंध को स्वीकार करते हैं। अमेरिका में हुए एक अध्ययन में 45,000 महिलाओं का 16 साल के लिए अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि बढ़ी कमर वाली महिलाएं (35 इंच या इससे अधिक कमर) हृदयाघात से मरने के दोगुने खतरे में थीं, बनिस्पत उन महिलाओं के, जिनकी कमर 28 इंच से कम थी। यह शोध नर्सेज हेल्थ स्टडी में छपा था। डॉक्टर विक्रम कहते हैं, जब हमारा शरीर फैट एकत्रित करता है तो उसके कई कारण हो सकते हैं। यह आनुवंशिक हो सकता है या फिर हार्मोन के कारण भी। हालांकि सबसे प्रमुख कारण खान-पान पर नियंत्रण है। अच्छे वजन वाले फिट लोगों की भी तोंद हो सकती है, इसलिए पैकेट वाले भोजन से बचना चाहिए और शारीरिक तौर पर अधिक परिश्रमी होना चाहिए, ताकि शरीर शेप में रहे। तनाव पर नियंत्रण और पूरी नींद भी इसमें अहम रोल अदा करती है। डॉक्टर कासलीवाल कहते हैं, कुल मिला कर सब कुछ स्वस्थ जीवनशैली पर निर्भर करता है। जिस तरह से आप जीते हैं, वह आपके स्वास्थ्य पर भी झलकता है। इसलिए जितना जल्दी आप तनावमुक्त जीवन जीना आरंभ करेंगे, उतनी जल्दी आपका शरीर सही आकार में आ जाएगा। परेशान होने का समय… -अगर आपके शरीर में अतिरिक्त फैट है -अगर आप प्रतिदिन 6 से 7 घंटे की नींद नहीं ले रहे हैं -ट्रांस फैट वाला भोजन, पैकेट वाला खाना, प्रिजरवेटिव वाला भोजन अधिक मात्रा में कर रहे हैं -फल और सब्जियों का पर्याप्त मात्रा में सेवन नहीं कर रहे -दिन में दो गिलास शराब से अधिक पी रहे हैं -अत्यधिक तनाव में हैं और शारीरिक श्रम नहीं कर रहे -फैटी लिवर है तोंद है या पेट के आसपास सूजन है बढ़ता खतरा:– आन्त्र द्वारा निकला फैट शरीर के भीतर ही जमा होता जाता है। पेट के भीतर यह लिवर, किडनी और आंत के आसपास जमा हो जाता है। इसके कारण मेटाबॉलिक बदलाव होते हैं, जो टोटल कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा देते हैं। इसके साथ एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और एचडीएल यानी अच्छा कोलेस्ट्रॉल कम हो जाता है। इससे रक्तचाप बढ़ता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। पांच तरीके फ्लैट पेट के लिए:– पर्सनल ट्रेनर शालिनी भार्गव कहती हैं कि पेट को फ्लैट करने में समय लगता है। इसके लिए आपको वचनबद्ध, एकाग्र और धैर्यवान बनना होगा। इसके लिए ये उपाय अपनाएं… -पेट की चर्बी कम करने में सबसे कारगर है एरोबिक व्यायाम। पेट के व्यायाम करें। -स्टेबिलिटी बॉल और डंबल्स की मदद से क्रंचेज करें। -पेट … Read more

कैसे बनें स्मार्ट एम्प्लाई?

क्यों कोई छोटी-सी बात बड़ी बन जाती है! ऐसा क्यों होता है कि आप कुछ कहना चाहते हैं, लेकिन आपके सहयोगी उसका दूसरा अर्थ लेते हैं। आखिर यह क्यों नहीं होता कि आप जैसा चाहते हैं, लोग उन बातों को उसी रूप में लें, आदि तमाम सवाल हैं, जिनका हल निकालना एक बेहतर कामकाजी संबंध के लिए बहुत जरूरी होता है। लेकिन सच तो यह है कि आप बेहतर कामकाजी-संबंध बनाने में तभी सफल हो सकते हैं, जब कुछ खास बातों का ध्यान रखें। समय का रखें पूरा ध्यान:- ऑफिस में कई सारे काम ऐसे भी होते हैं, जिन पर आपसी सहमति की जरूरत होती है। इसलिए कामकाज की अत्यधिक व्यस्तता के बीच आपस में विचार-विमर्श करने का पर्याप्त समय जरूर निकालें। हां, कुछ खास समय होते हैं, जब थोड़ा कम वर्क-प्रेशर होता है, जैसे-काम के फस्र्ट ऑवर में, लंच के तुरंत बाद और ऑफिस ऑवर खत्म होने के बाद आप अपनी बात अपेक्षाकृत ज्यादा बेहतर ढंग से रख सकते हैं। दरअसल, ऐसा करने से इसका सकारात्मक आपके प्रोजेक्ट या काम पर भी पड़ेगा। रहें कूल कूल:- यदि आपको लगता है कि आपकी बात को आपके बॉस या कॅलीग ठीक से नहीं समझ पा रहे हैं, तो ऐसे समय में परेशान होने की बजाय कूल रहने का प्रयास करें। यदि आपकी बात में दम है और आपने उसे तार्किक रूप से पेश किया है, तो देर से ही सही, आपकी बात को वे जरूर समझेेंगे। हां, जब आपको कुछ समय बाद यह लगे कि आपको अपेक्षित रिस्पांस नहीं मिल पाया है, तो उस विषय पर आपको दोबारा जरूर मिलना चाहिए। लेकिन इस दौरान भी आपको अपनी बातें शांतिपूर्ण ढंग से ही रखनी चाहिए। ध्यान रहे, कूल रहकर आप अपनी बातों को और ज्यादा प्रभावी ढंग से कह सकते हैं। रखें अपनी बात:- यदि कोई बात आपको पसंद न आए या आपको लगता है कि किसी मसले पर आप अपनी राय देकर उसे और बेहतर बना सकते हैं, तो यह कहने में आपको बिल्कुल गुरेज नहीं करनी चाहिए। हां, इस दौरान यदि आप किसी की बात से आहत होते हैं, तो उस पर त्वरित प्रतिक्रिया देने की बजाय, आपको उस बात से क्या तकलीफ हुई है, यह भी जरूर व्यक्त करें, जैसे-यह सही है कि हर किसी को अपनी बात कहने की स्वतंत्रता होती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी और की भावना को इससे आहत पहुंचे। समय रहते हो जाएं सतर्क:- यदि आपको लगता है कि आपकी बात को अन्यथा लिया जा रहा है, तो समय रहते इस स्थिति को जरूर सुधारने का प्रयास करें। मिलनसार बनें:- यदि आप मिलनसार हैं और सबसे मुस्कुराकर मिलते हैं और उनका अभिवादन करते हैं, तो इसमें कोई दो राय नहीं कि आपके कामकाजी संबंध जरूर अच्छे होंगे। दरअसल, मिलनसार व्यक्ति हमेशा एक सकारात्मक प्रभाव जरूर छोड़ते हैं। सच तो यह है कि ऐसे व्यक्तियों से मिलना हर किसी को अच्छा लगता है। वहीं दूसरी तरफ, जो मिलनसार या खुशमिजाज नहीं होते, उनके प्रति प्रायः एक नकारात्मक छवि बन ही जाती है। इसलिए हर कोई उनसे अत्यधिक जरूरत पडने पर मिलना पसंद करते हैं। जानें स्वभाव:- यदि आप अपने कॅलीग या बॉस का निजी स्वभाव जानते हैं और आपको यह अच्छी तरह पता होता है कि वे किस बात पर नाराज या खुश होते हैं, तो बेहतर संबंध स्थापना की दिशा में यह काफी मददगार हो सकता है।  

डाउनलोड किए बिना अपने स्मार्टफोन पर चलाएं सोशल मीडिया एप्स

आपने अपने स्मार्टफोन पर ढ़ेरों सोशल मीडिया एप्स डाउनलोड किए होंगे जैसे-फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, स्काइप इत्यादि। प्रत्येक एप के अकाउंट को इस्तेमाल करने के लिए आपको उन एप्स को अलग से प्ले स्टोर से डाउनलोड करना पड़ता है। मान लीजिए किसी कारणवश आपको अपना फोन बदलना पड़ा और आप नया फोन ले आएं हैं, ऐसे में आप अपने सभी एप्स खो देंगे और फिर आपको वापस सारे एप्स डाउनलोड करने के सिर दर्द से गुजरना पड़ेग, साथ ही इस प्रक्रिया में बहुत समय भी बर्बाद होगा, लेकिन फोल्डर लाॅक एडवांस एप की सहायता से आप इस परेशानी से बच सकते हैं। यह सिर्फ एक ही इंटरफेस के द्वारा सारे सोशल मीडिया अकाउंट्स का इस्तेमाल करने देता है और प्रत्येक सोशल मीडिया एप को अलग से डाउनलोड करने की परेशानी से बचाता है। इसका प्रयोग ऐसे करेंः -फोल्डर लाॅक एडवांस को खोलें। -मेन मेन्यु स्क्रीन पर सोशल मीडिया कैटेगिरी के अंदर जाएं। -जिस भी सोशल मीडिया अकाउंट को आप इस्तेमाल करना चाहते हैं,उसे एक्सेस कर सकते हैं। आपके लिए कुल 33 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उपलब्ध है। -एक बार उस विशेष अकाउंट के लिए अपना आइडी और पासवर्ड डालें, क्योंकि सुरक्षा की एक अन्य परत के तहत, एप आपके क्रिडेंसीयल सेव कर लेता है। -बस अब आप सोशल मीडिया एप डाउनलोड किए बिना इंजॉय करें। आप फोल्डर लाॅक एडवांस एप्लीकेशन से अपने निजी फोटोज, वीडियोज, ऑडियोज, डॉक्यूमेंट्स इत्यादि को छिपा सकते हैं और अपने एप्स को एप लॉक से प्रोटेक्ट भी कर सकते हैं।  

सुपर फूड जैसा है अंकुरित भोजन

शरीर में प्रोटीन की कमी होने पर थकान महसूस होती हैं। ऐसे में लोग सप्लीमेंट के तौर पर प्रोटीन लेना शुरू करते हैं। नतीजा हमारे स्वास्थ्य पर उनका बुरा प्रभाव पड़ता है। जबकि प्रोटीन का भी विकल्प मौजूद है। दरअसल, स्प्राउट्स ऐसी चीज है, जिसके खाने से कभी परेशानी नहीं होती। यह प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व व प्रोटीन से भरा है। नट्स, अनाज और फलियों को जब पानी में डाला जाता है तो इनमें मौजूद फाइटेट्स खत्म हो जाते हैं। जिससे इसे पचाने में बेहद आसानी होती है। किसी भी अनाज को जब अंकुरित किया जाता है, तो उसमें मिनरल्स, प्रोटीन, विटामिन और अन्य पोषक तत्व अच्छी तरह अवशोषित हो जाते हैं। जहां तक एंटी-आक्सीडेंट की बात है तो स्पाउट्स में प्रचुर मात्रा में एंटी-आक्सीडेंट पाए जाते हैं। एंटी-आक्सीडेंट शरीर की प्रक्रिया के सही ढंग से चलाने में सहायक होते हैं। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हम मंहगी से महंगी दवाइयां खरीद लेते हैं पर अपना देसी और सस्ता इलाज भूल जाते हैं। जबकि स्प्राउट्स सबसे बढ़िया व सस्ता विकल्प हैं अपने आप को स्वस्थ रखने का चना, मूंग, राजमा और मटर को रात भर पानी में डाल कर रखें और अगले दिन इसे सब्जी के साथ पका कर या फिर अंकुरित कर खा सकते हैं। स्प्राउट्स बनाने की विधि कच्चे अनाज को सुपर फूड बना देती है। उनमें प्रोटीन, फाइबर और विटामिन की मात्रा काफी बढ़ जाती है। लंबे समय तक स्वस्थ रहने का सबसे अचछा तरीका है स्प्राउट्स। यह हमें कई तरह की बीमारियों और लाइफस्टाइल संबंधी परेशानी से बचाती है। स्प्राउट्स को पोषक तत्वों का बंडल भी कहा जाता है। अनाज जैसे गेहूं, मक्का रागी, बार्ली और बाजरे को 12 घंटे पानी में भिगोकर मिट्टी में डाल दिया जाता हैं। इनके नन्हें पौधे 10-12 दिनों में तैयार हो जाते हैं। इनका जूस सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है। तिल, मूली और मेथी के बीज खाने में तो कड़वे होते हैं, पर इन्हें स्प्राउट्स के साथ मिलाकर खाया जा सकता हैं। हरे और काले चने, के स्प्राउट्स के साथ-साथ ओट्स, बकवीट में उच्च मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं। अलफा अलफा को स्प्राउट्स का राजा कहा जाता है। इसमें मैंग्नीज की उच्च मात्रा पाई जाती हैं और साथ में विटामिन ए, बी, सी, ई और के की प्रचुर मात्रा भी होते हैं। इसमें एमिनो एसिड और दूध से काफी ज्यादा कैल्शियम पाया जाता है। स्प्राउट्स में प्रोटीन, कैल्शियम, पोटाशियम, सोडियम, आयरन, फास्फोरस, विटामिन ए, थाइमिन या विटामिन बी-1, बी-2, बी-3, विटामिन सी मौजूद होते हैं, जो हमारे शरीर की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करते हैं। यह क्लोरोफिल का अच्छा स्रोत है और इसमें एंटीबैक्टेरियल व एंटीइनफ्लैमेटरी गुण मौजूद होते हैं। अगर आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो स्प्राउट्स से बेहतर कुछ नहीं। इसे खाने से पेट भरा-भरा सा रहता है और काफी दूर तक भूख नहीं लगती। स्प्राउट्स खाना सबसे सुरक्षित है। इसमें सही मात्रा में मौजूद पोषक तत्व आप को स्वस्थ रखते हैं।  

नए गैजेट्स से रिमोट एक्सेस हुई आसान

नई दिल्ली अपने कंप्यूटर को दूर से एक्सेस करने की जरूरत कई बार महसूस होती है- जब आप बहुत ज़रूरी काम से किसी दूसरे शहर में गए हों, कोई इंटरव्यू या इम्तिहान देने के लिए घर से कुछ किलोमीटर दूर चल कर गए हों या फिर कहीं कोई महत्वपू्र्ण प्रेजेन्टेशन दे रहे हों। ऐसी परिस्थितियां दर्जनों बार आ सकती हैं, जब आप सोचते हैं कि काश इस समय मेरा कंप्यूटर मेरे पास होता। अब लैपटॉप तो आपके साथ कहीं भी यात्रा कर सकता है, लेकिन डेस्कटॉप के मामले में ऐसा नहीं है। अगर आप कोई जरूरी फाइल साथ ले जाना भूल गए हैं तो फिर घर या दफ्तर में रखे डेस्कटॉप कंप्यूटर के पास लौटने के सिवा कोई चारा नहीं है। बहरहाल, जो कंप्यूटर रिमोट एक्सेस युक्त नेटवर्क अटैच्ड स्टोरेज (नैस) के साथ जुड़े हुए हैं, उनके साथ ऐसी कोई सीमा या मजबूरी नहीं है। डेन-इलेक माइडिट्टो नाम की नैस डिवाइस इसी श्रेणी में आती है। यूं तो नेटवर्क अटैच्ड स्टोरेज डिवाइसेज का काम है दफ्तर भर के लोगों को अपनी फाइलें स्टोर करने के लिए बाहरी (एक्सटर्नल) स्टोरेज की सुविधा उपलब्ध कराना, लेकिन डेन-इलेक माइडिट्टो की बात कुछ और है। इसमें रिमोट एक्सेस की शानदार सुविधा शामिल है जो इंटरनेट के जरिए इसे दुनिया के किसी भी कोने से एक्सेस करने की सुविधा देती है। इसका अर्थ यह हुआ कि अगर आप अपनी सारी कंप्यूटर फाइलें इस डिवाइस पर स्टोर करते हैं तो फिर कहीं से भी इन फाइलों का इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र हैं। है ना कमाल की चीज! आपके घर या दफ्तर में पड़ी एक डिवाइस, जिसमें 1000 जीबी या उससे अधिक डेटा स्टोर किया जा सकता है, किसी अदृश्य सुविधा की तरह दुनिया भर में मौजूद रहती है। जरूरत है तो एक इंटरनेट कनेक्शन और थोड़ी सी सेटिंग्स की। माइ़डिट्टो नैस डिवाइस को एक्सेस करने के लिए एक फ्लैश ड्राइव साथ आती है, जिसमें एक डेन इलेक का एक खास सॉफ्टवेयर मौजूद रहता है। इस ड्राइव को किसी भी लैपटॉप या डेस्कटॉप कंप्यूटर में डालिए और सॉफ्टवेयर लांच कीजिए। कुछ ही सैकंड में आप अपनी नैस डिवाइस से कनेक्ट हो जाएंगे और उसके बाद वैसे ही काम कर सकेंगे जैसे आप अपने घर या दफ्तर में ही हैं। शर्त यह है कि दोनों तरफ के सिस्टम इंटरनेट से कनेक्टेड होने चाहिए। विंडोज के साथ-साथ एपल मैकिन्टोश या लिनक्स कंप्यूटर पर भी अपनी नैस डिवाइस को एक्सेस करना संभव है। इसका सॉफ्टवेयर तीनों रूपों में उपलब्ध है। इतना ही नहीं, एक एप्लीकेशन की मदद से इसे आइफोन या आइपैड पर भी एक्सेस किया जा सकता है।  

लाइफ को पॉजिटिव रखते हुए सक्सेस का रील नहीं रियल मंत्र जानना चाहते हैं तो फॉलो करें ये टिप्स

जीवन में सफलता का स्वाद हर व्यक्ति चखना चाहता है। लेकिन यह कुंजी उसी व्यक्ति के हाथ लगती है, जिसके पास कुछ खास गुण मौजूद होते हैं। आज का युवा खुद को मोटिवेट करने के लिए घंटों इंस्टाग्राम की रील्स स्क्रॉल करता रहता है। लेकिन क्या वाकई सोशल मीडिया पर वीडियो और रील्स देखने से आपको लाइफ को बदलने वाला सच्चा मोटिवेशन मिल सकता है? तो जवाब है नहीं। जी हां, सफलता उसी व्यक्ति को मिलती है, जो उसे बाहरी मन से नहीं बल्कि भीतरी मन से पाने की इच्छा रखता है। सफल होने के लिए व्यक्ति को हमेशा अपनी सोच को सकारात्मक रखते हुए खुद पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति का कॉन्फिडेंस बढ़ता है और वो अपना लक्ष्य आसानी से हासिल कर पाता है। अगर आप भी लाइफ को पॉजिटिव रखते हुए सक्सेस का रील नहीं रियल मंत्र जानना चाहते हैं तो फॉलो करें ये टिप्स। हमेशा पॉजिटिव सोचें दुख और संकट की स्थिति में व्यक्ति का हताश या निराश होना स्वाभाविक है। लेकिन जो लोग दिल से सफलता का पीछा करते हैं वो बुरी स्थिति आने पर भी नकारात्मक विचारों से खुद को दूर रखते हुए पॉजिटिविटी के साथ अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए मेहनत करते रहते हैं। ताकि उनके आत्मविश्वास में किसी तरह की कोई कमी ना आए। याद रखें, लक्ष्य को हासिल करते समय आपके सामने आने वाली सभी चुनौतियां अस्थायी हैं। खुद पर विश्वास रखें कि आप सफल हो सकते हैं। यदि ऐसा करते समय आपके मन में कोई नकारात्मक विचार आएं तो उन्हें सकारात्मक विचारों से तुरंत बदल दें। गलतियों से सीखें दुनिया में कोई ऐसा बड़ा व्यक्ति नहीं है, जिसने अपने संघर्ष के समय कभी कोई गलती नहीं की होगी। जीवन में वही व्यक्ति सफल होता है जो अपनी गलतियों से सीख लेकर जीवन में आगे बढ़ने का प्रयास हमेशा करता रहता है। लक्ष्य के प्रति रहें प्रतिबद्ध प्रतिबद्धता का अर्थ है सफल बनने के लिए स्वयं को समर्पित करना। आसान शब्दों में समझें तो कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य पर हमेशा फोकस बनाए रखना। इसके लिए अपने छोटे और बड़े दोनों तरह के लक्ष्यों को निर्धारित करके उन पर रोज थोड़ा-थोड़ा काम करें। प्रतिबद्धता दिखाने से आपको इन लक्ष्यों को प्राप्त करते समय प्रेरित रहने में मदद मिल सकती है। खूब मेहनत करें जो व्यक्ति मेहनत करने से पीछे हटता है या घबराकर अपने लक्ष्य को बीच में ही छोड़ देता है, वह जल्दी ही सफलता के मार्ग से दूर हो जाता है। याद रखें, परिश्रम में ही सफलता के रहस्य छिपे होते हैं। सफलता हासिल करने के लिए कभी भी मेहनत करने से घबराएं नहीं बल्कि निरंतर परिश्रम करते रहे। लक्ष्य से ध्यान भटकाने वाली चीजों से रहें दूर अपने लक्ष्य को हासिल करते समय सबसे पहले उन चीजों की लिस्ट बनाएं, जो आपका समय खराब करने के साथ आपका आपके लक्ष्य से ध्यान भी भटकाती हैं। उस लिस्ट में आपका फोन, टीवी या फिर कोई व्यक्ति भी शामिल हो सकता है। यह सुनिश्चित करें कि, आप इन सब चीजों से बचने के लिए उचित कदम उठाएंगे, ताकि आप खुद को तनाव से दूर रखकर अपने लक्ष्य पर अपना पूरा फोकस बनाए रख सकें।

आपके स्लो स्मार्टफोन को सुपरफास्ट बनाएगी ये सीक्रेट ट्रिक

नई दिल्ली स्मार्टफोन यूजर्स को अक्सर फोन के स्लो होने की समस्या का सामना करना पड़ता है। अगर आप भी उन यूजर्स में से हैं जिनके स्मार्टफोन की स्पीड काफी कम हो गई है, तो अब आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। यहां हम आपको कुछ ऐसे आसान स्टेप्स के बारे में बता रहे हैं जिनके जरिए आप अपने स्मार्टफोन को सुपरफास्ट बना सकते हैं। तो आइए जानते हैं फोन की स्पीड बढ़ाने वाली खास ट्रिक के बारे में। इन स्टेप्स को करें फॉलो: -सबसे पहले अपने फोन में दिए गए सेटिंग्स में जाएं। -नीचे स्क्रॉल करने पर आपको ‘बिल्ड नंबर’ का ऑप्शन दिखेगा। -इसपर जल्दी-जल्दी कई बार टैप करें। -ऐसा करने के बाद आपके स्मार्टफोन की सेटिंग्स में ‘डेवलपर आप्शन’ आ जाएगा। -डिवेलपर ऑप्शन में आपको नीचे तब तक स्क्रॉल करना है जब तक आपको टॉगल (ऑन/ऑफ बटन) वाले ऑप्शन न दिख जाएं। -फोन की स्पीड बढ़ाने के लिए आपको यहां दिए गए तीन ऑप्शन्स के डिफॉल्ट सेटिंग को बदलना है। ये तीन ऑप्शन विंडो ऐनिमेशन स्केल, ट्रांजिशन ऐनिमेशन स्केल और ऐनिमेटर ड्यूरेशन स्केल हैं। -यहां आप पाएंगे कि ये पहले से 1 गुना पर सेट हैं। आपको इन्हें बदलकर 0.5 गुना पर सेट करना है। ऐसा करने के बाद आपके स्मार्टफोन की स्पीड नए के तरह हो जाएगी। सेटिंग्स में किए गए इन बदलाव को करने के बाद फोन में मल्टीटास्किंग, गो होम, स्वाइपिंग और सेटिंग्स अजस्टमेंट में आपको फर्क महसूस होगा। इन सेटिंग्स के बाद अगर आपको फोन की स्पीड काफी ज्यादा तेज लग रही है, तो आप फिर से 1 गुना पर कर सकते हैं। इस ट्रिक को सभी ऐंड्रॉयड स्मार्टफोन्स पर ट्राई किया जा सकता है। हालांकि, फोन में दिए बिल्ड नंबर ऑप्शन की लोकेशन मॉडल के हिसाब से अलग हो सकता है।    

बच्चों को हुआ कब्ज, तो ये उपाय देंगे राहत

बच्चों को बहुत जल्दी कब्ज की समस्या हो जाती है। ऐसा उनके सही तरीके से खाना ना खाने के कारण होता है। छोटे बच्चों को ब्रेस्टफीडिंग कराने से उन्हें बहुत कम कब्ज की समस्या होती है। कई बार बच्चे कुछ दिनों तक मल त्याग नहीं करते हैं इससे घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर यह समस्या ज्यादा दिनों तक रह जाएं तो यह कब्ज की समस्या बन जाती है। बच्चे को कब्ज होने का कारण: सोलिड फूड: अगर आपका बच्चा चबाने वाला खाना खा रहा है तो यह कब्ज का कारण हो सकते हैं। यह ज्यादातर चावल के सिरियल के कारण होता है, क्योंकि इसमें फाइबर की मात्रा कम होती है। कभी-कभी जब आपका बच्चा स्तनपान करता है तो शरीर में पानी की कमी के कारण कब्ज की समस्या हो सकती है। बच्चे को बोतल से दिए जाने वाला फूड: जो बच्चे ब्रेस्टफीडिंग करते हैं उन्हें कब्ज की समस्या बहुत ही कम होती है। स्तन के दूध में संतुलित मात्रा में फैट और प्रोटीन होता है। अगर आप बच्चे को बोतल के माध्यम से दूध दे रहे हैं तो उसके कारण बच्चे को कब्ज हो सकता है। शरीर में पानी की कमी होना: अगर आपके बच्चे के शरीर में पानी की कमी हो गई है तो वह कुछ भी खाता है शरीर उससे तरल पदार्थ अवशोषित करने लगता है। जिसकी वजह से बच्चे को मल त्यागने में परेशानी होती है। बीमार होना: बच्चे को कब्ज की परेशानी किसी बीमारी या फूड एलर्जी की वजह से भी हो सकती है। बच्चे को कब्ज जन्म दोष के कारण भी हो सकती है जो पेट को ठीक तरह से काम करने से रोकता है। बच्चे की कब्ज से आराम दिलाने के उपाय: -अपने बच्चे को थोड़ी सी एक्सरसाइज कराएं। अगर आपका बच्चा घुटनों के बल चलता है तो उसे थोड़ी देर घुटनों के बल चलने दें और अगर आपका बच्चा घुटनों के बल नहीं चलता है तो उसके पैरों को पंप करें। जब बच्चा पीठ के बल लेटा हुआ हो तो आराम से उसके पैरों को मूव कराएं। इस तरह से मूव कराएं जैसे साइकिल के पैडल चलाए जाते हैं। -अपने बच्चे के पेट की अच्छी तरह मसाज करें। बेली से थोड़ा सा नीचे नाभि पर अपनी अंगुलियों से आराम से दबाव डाले। तब तक प्रेस करें जब तक आपको दृढ़ महसूस ना हो। इस तरह से 3 मिनट तक करें। -ब्रेस्ट मिल्क में थोड़ा सा बेर का जूस मिलाकर दें। यह तभी करे जब आपका बच्चा कम से कम 4 हफ्तों का हो गया हो। बच्चे को जूस देना जरुरी नहीं है लेकिन इससे कब्ज से राहत मिलती है। अगर आपके बच्चे को सूखे बेर का स्वाद अच्छा नहीं लगता है को आप उसे सेब या नाशपाती का जूस भी दे सकते हैं। -अगर आपका बच्चा इतना बड़ा हो गया है कि वह चबाने वाली चीजे खा सके तो उसे चावल, केला और पके हुए गाजर देना बंद कर दें। आप उसे नाशपाती दे सकती हैं जिससे उसे मल त्यागने में मदद मिले।  

कर्ली हेयर को स्टाइलिश बनाने के टिप्स

कर्ली बालों को अगर सॉफ्ट रखना है तो उन्हेंम केमिकल वाले रंगों से दूर रखें और उन पर ज्यातदा एक्सीपेरिमेंट न करें. अगर आप अपने कर्ली बालों पर ध्याेन देंगी तो वे मुलायम और चमकदार बन जाएंगे. आइये जानते हैं कर्ली बालों को स्टाइलिश बनाने के कुछ खास टिप्स:- -बालों को प्राकृतिक रूप से ही सूखने दें क्यों कि हेयर ड्रायर से सुखाए हुए बालों से सिर की त्वदचा कठोर हो जाती है और बाल जल जाते हैं. -कर्ली हेयर जल्द ही रूखे दिखते हैं, इसलिए इन्हें नियमित रूप से ट्रिम कराते रहें. अगर आप ऐसा नहीं करेंगी तो बालों के अगले सिरे कमजोर हो सकते हैं. इससे बाल टूटने लगते हैं. -ऐसे शैंपू और कंडीशनर का चुनाव करें जो आपके बालों के टेक्सनचर को सूट करे. ऐसे केमिकल वाले प्रोडक्टश से बचें जो बालों की समस्यााओं को बढ़ा सकते हैं. -एक कप में गरम पानी लें और उसमें 1 चम्मयच एप्पतल साइडर वेनिगर मिलाएं. नहाते वक्त  शैंपू के बाद बालों पर इसे डाल कर बिना धोए इस पर कंडीशनर लगाएं. -बालों में प्राकृतिक नमी को बरकरार रखने के लिए उन्हें  ज्यापदा न धोएं वरना वे रूखे हो जाएंगे. -बालों में तेल लगाइए पर ज्‍यादा तेल लगाने की जरूरत नहीं है. बालों को रूखा न होने दें. -नहाने के बाद बालों से अत्य धिक पानी को निचोड़ कर निकाल दें. फिर बालों में अपनी इच्छाह से स्टानइल बनाएं और फिर बालों के सूखने का इंतजार करें. इससे बालों में अच्छेी से नमी समा जाएगी और वे लंबे समय तक कोमल रहेंगे.  

संतरे का छिलका बर्न करता है फैट

विटामिन सी और कई दूसरे पोषक तत्वों से भरपूर संतरा तो वजन कम करने में मददगार है ही, उसका छिलका भी अपने कई गुणों के कारण फैट को बर्न करता है. संतरे के छिलके में विटामिन बी6, कैल्शियम, फॉलेट के अलावा पॉलिफेनॉल्स भी पाया जाता है जो डायबिटीज के साथ अल्जाइमर और मोटापा जैसी दिक्कतों को भी दूर करने में मदद करता है. संतरे के फल की तुलना में उसके छिलके में 4 गुना अधिक फाइबर होता है. इसलिए इसके सेवन के बाद देर तक भूख नहीं लगती. छिलके में मौजूद विटामिन सी फैट को बर्न करने में मदद करता है. संतरे में कैलरीज की मात्रा बेहद कम होती है. साथ ही संतरे में पानी की मात्रा अधिक होती है. एक संतरे में आमतौर पर करीब 87 प्रतिशत पानी होता है जिससे यह सर्दी के मौसम में आपको हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है. संतरे में मौजूद फाइबर के कारण इसे खाने के बाद पेट भरा हुआ महसूस होता है. पाचन तंत्र भी सही बना रहता है और कब्ज की दिक्कत भी नहीं होती. एक स्टडी के मुताबिक, संतरे में पाया जाने वाला वाटर-साल्यूबल यानि पानी में घुलनशील विटामिन मोटापे से लड़ने और वेट को मैनेज करने में मदद करता है. यह शरीर के फैट बर्निंग प्रोसेस को भी तेज करता है.  

6 आदतों को अपनाकर आप भी लाइफ में बन सकते हैं रिच पर्सन

पैसा कमाने की चाह तो हर किसी के अंदर होती है और हर इंसान रिच बनना चाहता है। लेकिन पैसा कमाने के लिए कुछ खास तरह के गुणों का होना जरूरी है। अगर आप पैसेवाले लोगों को देखेंगे तो सब में कुछ आदतें एक जैसी मिलेंगी। जिससे पता चलता है कि ये आदते पैसा कमाने और रिच बनने में मदद कर सकती है। तो अपने व्यवहार में जल्द से जल्द इन 6 आदतों को शामिल कर लें। गोल्स सेट करें और प्लानिंग करें रिच लोग हमेशा गोल्स सेट करते हैं और उसके मुताबिक प्लान करते हैं। छोटे प्लान को अचीव करने के लिए वो हफ्ते, महीने और साल का समय लेते हैं। फिर खुद को 20 साल बाद कहां देखेंगे इस बारे में सोचते हैं। वहीं कई सारे एक्सपर्ट्स का कहना है कि गरीब लोगों के पास अपनी लाइफ का कोई प्लान नहीं होता। इसलिए लाइफ में प्लान बनाने और उसे पूरा करने के लिए गोल्स सेट करें। पैसे बनाने का सबसे अच्छा तरीका है कि पैसे को बचाकर सही जगह इन्वेस्ट किया जाए। रोजाना के खर्चों को कम कर इन्वेस्टमेंट की तरफ ध्यान देना जरूरी है। जिससे कि गरीबी से बाहर निकला जा सके। आय के होने चाहिए कई स्त्रोत अगर आप सोचते हैं कि केवल एक नौकरी से आप पैसे वाले बन जाएंगे तो ये सोच पूरी तरह से गलत है। 2019 की यू एस सेनसस ब्यूरो स्टडी ने पाया कि अमेरिका में केवल 8.8 प्रतिशत महिलाओं के पास और 8 प्रतिशत पुरुषों के पास दो से ज्यादा जॉब है। जबकि पैसे कमाने के लिए कम से कम दो से तीन आय के स्त्रोत होने चाहिए। खुद को हमेशा अपग्रेड करना जरूरी है खुद को स्किलफुल बनाना जरूरी है। नई टेक्नोलॉजी, अपने फील्ड के नए वर्क और कुछ ना कुछ नया स्किल सीखने पर फोकस करना चाहिए। जब आपके अंदर स्किल होगी तो पैसा कमाना आसान होगा। टॉक्सिक रिलेशनशिप से दूर रहें हेल्थ का वेल्थ पर गहरा असर होता है। खासतौर पर मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। मेंटल हेल्थ को स्ट्रांग रखने के लिए टॉक्सिक लोगों से दूर रहना चाहिए। ऐसे लोग जो आपके मनोबल गिराने की कोशिश करें, उनसे दूर रहें। टॉक्सिक रिलेशनशिप से दूर रहें हेल्थ का वेल्थ पर गहरा असर होता है। खासतौर पर मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। मेंटल हेल्थ को स्ट्रांग रखने के लिए टॉक्सिक लोगों से दूर रहना चाहिए। ऐसे लोग जो आपके मनोबल गिराने की कोशिश करें, उनसे दूर रहें।

देश में कैंसर के मामलों में वृद्धि मुख्य रूप से जीवनशैली में बदलाव, पर्यावरणीय कारकों और बढ़ती उम्र की आबादी के कारण देखी जा रही: रिपोर्ट

मुंबई भारत में ऑन्कोलॉजी टेस्ट मार्केट (कैंसर डायग्नोस्टिक टेस्ट मार्केट) 2033 तक लगभग 2 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ने की उम्मीद है। आई डेटा और एनालिटिक्स कंपनी ग्लोबलडेटा की रिपोर्ट के अनुसार, देश में कैंसर के मामलों में वृद्धि मुख्य रूप से जीवनशैली में बदलाव, पर्यावरणीय कारकों और बढ़ती उम्र की आबादी के कारण देखी जा रही है। देश में कैंसर एक सामाजिक और स्वास्थ्य सेवा से जुड़ा बड़ा बोझ है दरअसल भारत में कैंसर एक सामाजिक और स्वास्थ्य सेवा से जुड़ा बड़ा बोझ है, जिससे एडवांस ऑन्कोलॉजी निदान और उपचार सेवाओं की मांग बढ़ रही है। हर साल 1 मिलियन से अधिक नए मामलों का निदान किया जाता है और हर साल लगभग 9,00,000 मौतें दर्ज की जाती हैं। रिसर्च से पता चलता है कि 2024 में, भारत एशिया-प्रशांत (एपीएसी) ऑन्कोलॉजी टेस्ट मार्केट का 3 प्रतिशत से अधिक हिस्सा होगा। लेकिन, इनोवेटिव समाधान विकसित करने और कटिंग-एज रिसर्च का समर्थन करने के प्रयासों में तेजी लाकर, देश अपनी आबादी और वैश्विक समुदायों दोनों की स्वास्थ्य सेवा आवश्यकताओं को तेजी से संबोधित करने की आकांक्षा रखता है। भारत में ऑन्कोलॉजी टेस्ट में कई चुनौतियां ग्लोबलडाटा में चिकित्सा उपकरण विश्लेषक श्रेया जैन ने कहा, “भारत में ऑन्कोलॉजी टेस्ट को पहुंच, सामर्थ्य और तकनीकी अपनाने से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और विशेषज्ञता के कारण, एआई-असिस्टेड निदान जैसी नई अप्रोच को अपनाना और इंटीग्रेट करना, सटीक चिकित्सा, थैरेपी को लेकर समस्या बनी हुई है।” कैलिब्रेटेड जीनोमिक टेस्ट, जोखिम के स्तर में सुधार कर सकते हैं जैन ने कहा, “भारतीय जनरेशन के अलग-अलग ग्रुप के लिए कैलिब्रेटेड जीनोमिक टेस्ट जैसे अनुकूलित निदान प्रारंभिक पहचान सटीकता को बढ़ा सकते हैं और जोखिम के स्तर में सुधार कर सकते हैं। इसी के साथ यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि ट्रीटमेंट भारतीय मरीजों के यूनिक जेनेटिक प्रोफाइल से जुड़ा हो। यह न केवल भारत में जीवित रहने की दर में सुधार करने में मदद करता है, बल्कि कैंसर बायोलॉजी की वैश्विक समझ में भी योगदान देता है।” राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम और आयुष्मान भारत योजना मार्केट रिसर्च फर्म ‘रिसर्चएंडमार्केट्सडॉटकॉम’ की एक हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि भारत में कैंसर डायग्नोस्टिक टेस्ट मार्केट का भविष्य प्रवेश की इच्छुक कंपनियों के लिए आशाजनक बना हुआ है। यह सकारात्मक दृष्टिकोण राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम और आयुष्मान भारत योजना जैसी सरकारी पहल की वजह से बना हुआ है, जो कैंसर की रोकथाम, प्रारंभिक पहचान और उपचार पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

अपने फोन में ऐसे बढ़ाएं वाई-फाई की स्पीड

एंड्रॉइड फोन इस्तेमाल करने वाले लोगों को एक परेशानी का सामना करना पड़ता है वो है वाई-फाई की स्पीड कम हो जाना। अक्सर एड्रॉइड फोन में वाई-फाई की स्पीड बड़ी परेशानी का कारण बन जाती हैं। लेकिन हम आपको कुछ आसान ट्रिक्स और टिप्स बता रहे है जिसके जरिए आपके फोन में वाई-फाई की स्पीड बढ़ जाएगी। फोन के ऐप्स का इस्तेमाल करेंः फोन में वाई-फाई की स्पीड बढ़ाने के लिए आप वाई-फाई बूस्टर का इस्तेमाल कर सकतें है। इस ऐप के जरिए आपके सामने एक ग्राफ बनकर आ जाएगा जिससे आप उसमें देख सकते है कि किस जगह वाई-फाई की रेंज ज्यादा है। इस ऐप में मैन्युअल का और ऑटोमैटिक का ऑप्शन होता है जिससे आप खुद भी वाई-फाई की स्पीड बढ़ा सकते हैं। रेडियो को अपडेट करेंः फोन में स्थित रेडियो को अपडेट करने पर इसके फीचर और कनेक्टिवीटी भी अच्छी हो जाती है। कुछ एंड्रॉइड फोन ऐसे भी होते है जिनमें कंपनी की ओर से रेडियो अपडेट भेजा जाता है। इसके लिए आप सेटिंग में जाकर अबाउट में जाकर साॅफ्टवेयर अपडेट पर क्लिक करें आपका रेडियो अपडेट हो जाएगा। इस सेटिंग को भी अपनाए: एंड्रॉइड स्मार्टफोन में एक ऐसा भी ऑप्शन है जो आपको खराब कनेक्शन से बचाएगा। इस ऑप्शन को क्लिक करते ही आपका फोन खराब वाई-फाई कनेक्शन को आने से रोकेगा। अपने फोन की सेटिंग में जाएं इसके बाद वाई-फाई को क्लिक करें अब एडवान्स में जाकर अवाईड पूअर कनेक्शन ऑप्शन पर टैप करें। कुछ फोन के केस ऐसे होते है जो वाई-फाई के सिग्नल को ब्रेक करते है। अगर आपके फोन का केस मेटल का है तो इससे आपके फोन के वाई-फाई सिग्नल ब्रेक होंगे। फोन से केस को हटाकर ओकला स्पीड टेस्ट करें। इसके बाद उसी जगह पर फोन पर केस लगाकर ये टेस्ट फिर से दोहराएं। कुछ एंड्रॉइड फोन में फ्रिक्वेंसी बैंड सपोर्ट का ऑप्शन होता है। इस सेटिंग को बदल कर आप अच्छे वाई-फाई सेटिंग पा सकते हैं। अपने फोन की सेटिंग में जाएं। इसके बाद वाई-फाई को क्लिक करें अब एडवान्स में जाकर वाई-फाई फ्रिक्वेंसी बैंड पर टैप करके आॅटो मोड पर सेव कर दें।  

नींद में बड़बड़ाना, जानें कारण और इलाज

नींद में कुछ लोग बड़बड़ाने लगते हैं जिससे ना सिर्फ उनकी नींद टूट जाती है बल्कि कमरे में मौजूद दूसरे लोग भी परेशान हो जाते हैं। नींद में बड़बड़ाना कोई बीमारी नही है लेकिन ये इससे पता चलता है कि आपकी सेहत कुछ गड़बड़ है। आइए हम आपको बताते हैं कि इसके कारण और इलाज। क्यों बड़बड़ाते हैं नींद में लोग? नींद में बोलने को बड़बड़ा कहते हैं क्योंकि जब आप बड़बड़ाते हैं तो आपके वाक्य आधे-अधूरे और अस्पष्ट होते हैं। ये एक प्रकार का पैरासोमनिया है जिसका मतलब होता है सोते समय अस्वाभाविक व्यवहार का करना। लेकिन इसे बीमारी नहीं माना जाता। रात में बड़बड़ाते हुए आप कभी-कभी खुद से ही बात करने लगते हैं जो जाहिर है सुनने वाले को अजीब या भद्दा लग सकता है। नींद में बड़बड़ाने वाले एक समय में 30 सेकेंड से ज्यादा नहीं बोलते है। कौन बड़बड़ाते हैं नींद में? 3 से 10 साल के करीब आधे से ज्यादा बच्चें अपनी नींद में बडबड़ा कर अपनी बात पूरी करते हैं। इसी तरह 5 फीसद बड़े में नींद में बड़बड़ाते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि ऐसे लोग जो बात करते करते सो जाते है, उसी बात को वे नींद में बडबड़ाकर पूरा करते हैं। ऐसा कभी-कभी होता है या कई बार हर रात भी हो सकता है। 2004 के अध्ययन के अनुसार हर 10 में से 1 बच्चा सप्ताह में कई बार नींद में बड़बड़ाता है। ये समस्या लड़कियों और लड़कों में समान होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा अनुवाशिंक भी हो सकता है। नींद में बड़बड़ाने के लक्षण नींद के चार दौर होते हैं। पहले में नींद लगभग आने की स्थिति होती है। इस स्थिति में कोई भी व्यंक्ति 5 से 10 मिनट तक रहता है और इसके बाद वह नींद के अगले दौर में चला जाता है। दूसरे दौर में व्य्क्ति कम से कम 20 मिनट तक रहता है। इस दौर में दिमाग काफी सक्रिय होता है। तीसरे दौर में व्यबक्ति गहरी नींद में चला जाता है। इस दौरान दिमाग ज्यादा काम नहीं करता है और शरीर आराम की स्थिति में रहता है। इस दौर में आसपास होने वाले शोर शराबे आदि का सोने वाले व्येक्ति पर कोई असर नहीं होता। नींद में बड़बड़ाने के कारण बुरे या डरावने सपने भी नींद में बड़बड़ाने का कारण होत हैं। कई बार हम जिस बारें में सोच रहे होते है वहीं चीजे हमारे सपनों में आने लगती है। हालांकि डॉक्टर्स इस बात की पुष्टि नहीं करते है। नींद में बड़बड़ाना से कोई नुकसान तो नही होता लेकिन नींदमें बड़बड़ाना विकार या स्वास्थ्य संबंधी बीमारी के ओर संकेत करता है। आरईएम स्लीप डिसआर्डर सोते हुए चीखने-चिल्लाने या हाथ-पैर चलाने की आदत डिमेंशिया (निद्रारोग) अथवा पार्किंसन जैसी बीमारियों के लक्षण होते हैं। इस बीमारी को आरईएम स्लीप बिहैवियर डिसआर्डर कहा जाता है। आरईएम नींद वो नींद है जिस दौरान इंसान सपने देखता है। इस बात के कई सबूत हैं कि आरईएम नींद की ताजा यादों को प्रोसेस करने में भूमिका होती है। ऐसे लोग नींद में चीखने-चिल्लाने अथवा हाथ-पैर चलाने की जो हरकत करते हैं वह दरअसल उनकी नींद की गतिविधियां होती हैं। आरईएम के अलावा, दवाओं का रिएक्शन, तनाव, मानसिक स्वास्थ्य समस्या से भी लोग नींद में बड़बड़ाने लगते हैं। क्या है बड़बड़ाने का इलाज सामान्य तौर पर कोई इलाज जरूरी है। अगर आपको आरईएम या नींद में बहुत ज्यादा बात करने की समस्या हो तो आप किसी साइकोथैरेपिस्ट से मिल सकते है। नींद में बात करने का कारण नींद विकार, दुर्बल चिंता या तनाव हो सकता है। कुछ उपायों से नींद में बड़बड़ाने की संभावना को कम किया जा सकता है। अगर आप किसी के साथ अपना कमरा शेयर करते है तो उसे बोलें कि वो आपको बड़बड़ाने पर जगा दे इससे आप ठीक ढंग से सो सकेंगे। कैसे कम कर सकते है नींद में बड़बड़ना? इस समस्या से निपटने का वैसे तो कोई खास इलाज नहीं होता है लेकिन तनाव की कमी और योग के द्वारा आप अपना मन शांत कर सकते है। इससे आपको नींद में बोलने की समस्या कम हो जाएगी। इसके अलावा आप स्लीप डायरी बनाए। आप दो सप्ताह का पूरा डिटेल उसमें लिखें, जैसे कितने बजे आप सोने गए, कब सोए, कब उठे, कब बड़बड़ाए, आप कौन सी दवा का सेवन करते है आदि नोट करें। इससे आपको डॉक्टर को समझाने में भी मदद होगी। इसमें आप आपने दोस्त या घर वालों की मदद लें सकते है। साथ सोने जाते समय चाय, कॉफी आदि के सेवन से बचें।  

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