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घर पर डिस्प्ले क्वालिटी को सुधारने के कुछ आसान तरीके

नई दिल्ली आज के डिजिटल युग में, चाहे आप टीवी देख रहे हों, लैपटॉप पर काम कर रहे हों, या स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहे हों, एक बेहतरीन डिस्प्ले क्वालिटी से अनुभव में सुधार होता है। घर पर डिस्प्ले क्वालिटी को सुधारने के लिए कुछ आसान तरीके आज़मा सकते हैं, जिससे आपकी स्क्रीन पर रंग, ब्राइटनेस और शार्पनेस बेहतर दिखेगी। ब्राइटनेस और कंट्रास्ट को समायोजित करें स्क्रीन की ब्राइटनेस और कंट्रास्ट को सही स्तर पर सेट करना जरूरी है। अत्यधिक ब्राइटनेस से आंखों पर असर पड़ सकता है, जबकि बहुत कम ब्राइटनेस से डिस्प्ले फीका लग सकता है। टीवी या कंप्यूटर के सेटिंग्स में जाकर ब्राइटनेस और कंट्रास्ट को संतुलित करें। कलर सेटिंग्स को करें एडजस्ट बेहतर रंग क्वालिटी के लिए ‘कलर टेम्परेचर’ या ‘कलर मोड’ का उपयोग करें। आमतौर पर ‘विविड’ या ‘मूवी’ मोड रंगों को अधिक प्राकृतिक बनाता है। अपने टीवी या कंप्यूटर में ‘कस्टम कलर’ का विकल्प चुनें और अपनी पसंद के अनुसार एडजस्ट करें। रिजॉल्यूशन बढ़ाएं डिस्प्ले का रिजॉल्यूशन जितना अधिक होगा, तस्वीरें और वीडियो उतने ही शार्प और स्पष्ट दिखेंगे। टीवी, लैपटॉप या डेस्कटॉप में उपलब्ध उच्चतम रिजॉल्यूशन सेट करें। आजकल अधिकांश डिवाइसेस में फुल एचडी और 4K रिजॉल्यूशन का विकल्प होता है, जो बेहतर डिस्प्ले के लिए उपयुक्त है। ऑडियो-विज़ुअल केबल्स का उपयोग करें HDMI केबल की गुणवत्ता डिस्प्ले पर असर डालती है। बेहतर क्वालिटी वाले HDMI केबल का उपयोग करें, खासकर अगर आप 4K डिस्प्ले का अनुभव करना चाहते हैं। पुराने VGA या अन्य केबल्स की तुलना में HDMI, डिस्प्ले और साउंड क्वालिटी को अधिक सुधारता है। ब्लू लाइट फिल्टर का उपयोग करें डिजिटल स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट आंखों को प्रभावित कर सकती है। ब्लू लाइट फिल्टर का उपयोग करें, जो स्क्रीन की गुणवत्ता को प्रभावित किए बिना आंखों को सुरक्षा प्रदान करता है। यह सुविधा आमतौर पर स्मार्टफोन और लैपटॉप में उपलब्ध होती है।

लिक्विड लिपस्टिक लगाते समय न करें यह गलतियां

लिक्विड लिपस्टिक यकीनन होंठों पर एक अलग ही लुक देती है और हर लड़की इसे लगाना पसंद करती हैं। लेकिन लिक्विड लिपस्टिक लगाते समय हमेशा एक ही समस्या होती है कि इसे लगाते समय हमेशा कुछ न कुछ गड़बड़ हो जाती है और इसलिए आपको एक परफेक्ट लुक नहीं मिल पाता। तो चलिए आज हम आपको ऐसी कुछ गलतियों के बारे में बता रहे हैं, जिसे अमूमन लड़कियां लिक्विड लिपस्टिक लगाते समय करती हैं… पहले करें एक्सफोलिएट अक्सर लड़कियां सीधे ही लिक्विड लिपस्टिक अप्लाई कर देती हैं, लेकिन अगर आप लिप्स को एक्सफोलिएट किए बिना लिक्विड लिपस्टिक लगाती हैं तो इससे आपके होंठ फ्लेकी और रूखे नजर आते हैं। इसलिए हमेशा पहले लिप्स की डेड स्किन सेल्स को निकालने के लिए एक्सफोलिएट करें। लिप्स को एक्सफोलिएट करने के लिए पहले होंठों पर पेटोलियम जेली लगाएं और फिर बच्चों के टूथब्रश की मदद से होंठों को हल्का सा रगड़ें। अंत में वाइप्स की मदद की होंठों को क्लीन करें।   करें लिप्स को तैयार लिप्स को एक्सफोलिएट करने के बाद जरूरी है कि आप होंठों पर लिप बाम लगाएं। इससे आपकी लिक्विड लिपस्टिक को भी एक स्मूद टेक्सचर मिलता है। चूंकि लिक्विड लिपस्टिक आपके होंठों की नमी को सोख लेती है। इसलिए आप हमेशा हाई क्वालिटी के लिप बाम को लगाएं। लिपलाइनर से मिलेगा परफेक्ट लुक अगर आप चाहती हैं कि आपको लिक्विड लिपस्टिक लगाने पर एक परफेक्ट लुक मिले तो आप हमेशा पहले लिपलाइनर का इस्तेमाल करें। आप अपनी लिपस्टिक से मैच करता हुआ लिपलाइनर से पहले होंठों की आउटलाइन बनाएं। इसके बाद ही लिपस्टिक अप्लाई करें। इतना ही नहीं, जब आप लिपस्टिक लगा रही हैं तो कोशिश करें कि आप लिपस्टिक ब्रश से ही उसे लगाएं। इससे लिपस्टिक होंठों पर एकसमान लगती है और इसका लुक भी काफी अच्छा आता है।   चुनें सही प्रॉडक्ट यह नियम सिर्फ लिक्विड लिपस्टिक के लिए ही नहीं, बल्कि हर तरह के मेकअप प्रॉडक्ट के लिए लागू होता है। कभी भी सस्ते के चक्कर में हल्की क्वालिटी का सामान खरीदने की गलती न करें। अगर आप सस्ते के चक्कर में गलत लिक्विड लिपस्टिक खरीदती हैं तो इससे आपके होंठों को काफी नुकसान होता है। कई बार होंठ काले पड़ जाते हैं। यहां तक कि उनकी नेचुरल ब्यूटी भी खत्म हो जाती है। इसलिए कभी भी अपने स्किन केयर व मेकअप प्रॉडक्ट के साथ किसी तरह का समझौता न करें।  

होम्योपैथी इलाज से मिलता है फायदा, पर दवाई को लें सही तरह से

होम्योपैथी का इलाज भले ही थोड़ा लम्बा चलता है, लेकिन यह जड़ से समस्या को दूर करता है। साथ ही इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता, इसलिए अधिकतर लोग होम्योपैथी इलाज को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि इन दवाइयों को लेने व स्टोर करने का एक तरीका होता है। होम्योपैथी दवाइयों को तीन साल या उससे भी अधिक समय के लिए स्टोर किया जा सकता है। इनकी मेडिकल स्टेंथ खत्म नहीं होती, बस जरूरत होती है कि आप इन्हें सही तरह से लें और स्टोर करें। तो चलिए आज हम आपको होम्योपैथी दवाइयों को लेने के सही तरीके के बारे में बता रहे हैं…   ऐसे लें दवाई होम्योपैथी दवाई लेते समय आपको कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। कभी भी दवाई को हाथों में न लें, बल्कि उसे सीधे ही मुंह में लें। होम्योपैथिक गोलियां लेने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप उन्हें जीभ के नीचे रखें या चूसें। कभी भी इन्हें पूरी तरह से न निगलें। जब आप दवाई लें तो उससे बीस मिनट या आधा घंटा पहले तक या बाद में कुछ भी खाने−पीने या ब्रश करने से बचें। इससे आपकी दवाई का असर काफी कम हो जाता है। खासतौर से कॉफी को तो आप दवा लेने के कम से कम 45 मिनट पहले तक न पीएं। जब दें बच्चों को कुछ बच्चे इन दवाइयों का सेवन नहीं करते या फिर मुंह में लेकर थूक देते हैं। ऐसे में आप एक साफ व सूखी चम्मच के उपर दवाई रखकर उसे क्रश करें और फिर बच्चे को दें। कभी भी खाने के साथ दवाई खाने को न दें। यूं करें स्टोर दवाई लेने का तरीका जानने के बाद यह जरूरी है कि आप इसे स्टोर करने के बारे में भी जान लें। इन दवाइयों को आप कभी भी ऐसी जगह पर न रखें, जहां पर सूरज का प्रकाश आता हो। इसके अतिरिक्त ऐसी जगह पर भी रखने से बचें, जहां पर तेज गंध जैसे परफयूम आदि का इस्तेमाल किया जाता हो। वैसे होम्योपैथी दवाइयों को फ्रिजर में रखने की भी जरूरत नहीं होती। कोशिश करें कि आप इसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जैसे माइक्रोवेव ओवन, इलेक्टानिक गैजेट्स या कंप्यूटर आदि से दूर रखें। साथ ही दवा की बोतल को कभी भी खुला न छोड़ें।  

गूगल के अगले अपडेट में एंड्रॉइड 16 का बेसब्री से इंतजार, मिलेंगे शानदार फीचर्स

नई दिल्ली पूरी दुनिया को गूगल के अगले अपडेट में एंड्रॉइड 16 का बेसब्री से इंतजार है और इसमें बहुत कुछ ऐसा देखने को मिल सकता है, जिसके बारे में लोगों को अंदाजा भी नहीं है। गूगल अगले महीने एंड्रॉइड 16 का डेवलपर प्रीव्यू रिलीज कर सकती है। एंड्रॉयड 16 के नए वर्जन में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट किट और API में बदलाव जैसी बातें शामिल हो सकती हैं। यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए फीचर्स में सुधार किया जाएगा। नए अपडेट्स से स्मार्टफोन यूजर्स को लाभ मिलेगा। गूगल ब्लॉग में मिली जानकारी गूगल के एंड्रॉइड 16 लॉन्च को लेकर हाल ही में नया ब्लॉग सामने आया है। इसमें गूगल ने बताया है कि एंड्रॉयड का नया वर्जन लाया जा सकता है। इसमें सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट किट की भी बात कही गई है। इसकी मदद से यूजर एक्सपीरियंस भी बेहतर करने की बात कही गई है। गूगल की तरफ से बहुत सारे प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। अगले साल आएगा Techopedia की रिपोर्ट की मानें तो एंड्रॉइड 16 को 2025 की दूसरी तिमाही में लॉन्च किया जा सकता है और कहा जा रहा है कि अप्रैल, मई या जून में गूगल के अगले अपडेट्स का यूजर लाभ उठा सकेंगे। एंड्रॉइड 16 एओएसपी (एंड्रॉइड ओपन सोर्स प्रोजेक्ट) पर आएगा और 3 जून 2025 को पिक्सल डिवाइसेज पर ओवर-द-एयर (OTA) होगा। डेवलपमेंट ब्लॉग पर बोलते हुए गूगल ने पुष्टि की है कि आगामी एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम तय समय से पहले आ सकता है। नए डेवलपर एपीआई शामिल होंगे साल 2025 की दूसरी तिमाही में एक मेजर एंड्रॉइड वर्जन और चौथी तिमाही में एक छोटे अपडेट्स आ सकते हैं और खास बात यह है कि दोनों में नए डेवलपर एपीआई शामिल होंगे। गूगल की मानें तो इस नए अपडेट से मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) को भी लाभ हो सकता है, जो साल के शुरुआती महीनों में अपने डिवाइस लॉन्च करने की तैयारी में हैं। ज्यादा बदलाव और अपडेट की संभावना आपको बता दें कि एंड्रॉइड 16 में ज्यादा बदलाव और अपडेट की सुविधा मिलने की उम्मीद है। नए फीचर्स में सैमसंग के वन यूआई की तरह ही 2-फिंगर जेस्चर के साथ ही कस्टमाइजेबल, रीसाइजेबल और रीवैंप्ड क्विक सेटिंग पैनल देखने को मिल सकते हैं। कार्यक्षमता और ऐक्सेसिबिलिटी में सुधार के लिए नए विजेट के साथ लॉक स्क्रीन में संभावित अपडेट की भी उम्मीद है।

इतिहास में है रूचि तो यह फील्ड होगी आपके लिए सबसे बेस्ट

हाल ही में रामजन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया जिसके बाद एक बार फिर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) सुर्खियों में है। इस फैसले में भारतीय पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट का अहम रोल रहा। बता दें, ऐतिहासिक-सांस्कृतिक महत्व के स्थलों की खोज, वहां से उपलब्ध साक्ष्यों के जरिए उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाना पुरातत्वविदों का मुख्य काम होता है। इस फील्डे में भी विशेषज्ञों की जरूरत होती है। अगर आप भी इस फील्ड में करियर बनाना चाहते हैं तो जानिए इससे जुड़ी डीटेल्स्… क्या होता है पुरातत्वविद का काम? पुरातत्वविद (आर्कियोलॉजिस्ट) का काम इतिहास को खोजना और संरक्षित करना होता है। साथ ही ये विशेषज्ञ ऐतिहासिक वस्तुओं और सभ्यताओं की खोज से लेकर संग्रहालयों के संरक्षण का काम भी करते हैं। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की खोज व संरक्षण, म्यूजियम्स, आर्ट गैलरीज को देखते हुए आर्कियोलॉजी के क्षेत्र में भी करियर की बहुत संभावनाएं हैं। कोर्स और एलिजबिलिटी आर्कियोलॉजी में ग्रैजुएट, पोस्ट ग्रैजुएट और पीएचडी लेवल के कोर्स होते हैं। 12वीं में हिस्ट्री  (इतिहास) की पढ़ाई करने वाले ग्रैजुएशन में आर्कियोलॉजी पढ़ सकते हैं और इसी में पोस्ट1 ग्रैजुएशन की डिग्री भी हासिल कर सकते हैं। ग्रैजुएशन लेवल पर कई संस्थानों और कॉलेजों में एक साल का पीजी डिप्लोमा होता है। इसके अलावा म्यूजियोलॉजी के रूप में भी कई कोर्स होते हैं जिसके लिए किसी भी बैकग्राउंड के ग्रैजुएट एलिजबिल होते हैं। कहां मिल सकती है जॉब? आर्कियोलॉजी/हेरिटेज मैनेजमेंट की पढ़ाई के बाद आपके लिए शिक्षण, अनुसंधान, उत्खनन और संग्रहालय के क्षेत्र में करियर के कई ऑप्शपन होते हैं। आर्कियोलॉजी का कोर्स करके आप नई दिल्ली स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) और राज्यों में स्थित इनके क्षेत्रीय केंद्रों में आर्कियोलॉजिस्ट या असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट के रूप में जॉब कर सकते हैं। कितनी मिलती है सैलरी यही नहीं, आपके लिए आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम्स, नैशनल और स्टेट लेवल के म्यूजियम्स, आर्ट गैलरीज, कन्ज र्वेशन लैब्स जैसी जगहों पर भी जॉब के ऑप्शेन होते हैं। असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट या ऑर्ट रेस्टोरर को इस फील्ड में 50 हजार रुपये तक सैलरी मिल सकती है। इन जगहों पर मिलती है प्राथमिकता बता दें, आर्कियोलॉजिकल बैकग्राउंड के प्रफेशनल लोगों को फॉरेन मिनिस्ट्रील के हिस्टॉरिकल डिविजन, एजुकेशन मिनिस्ट्रीह, नैशनल आर्काइव्सल ऑफ इंडिया, इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टॉरिकल रिसर्च और प्लानिंग कमीशन जैसे डिपार्टमेंट्स के अपॉइंटमेंट्स में प्राथमिकता दी जाती है। यूनेस्को और यूनिसेफ जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भी काफी बेहतर संभावनाएं होती हैं।  

सिरदर्द को हल्के में न लें, इन गंभीर बीमारियों का हो सकता है संकेत

इंग्लैंड के गेट्सहेड में 21 साल की जेसिका केन को अचानक सिरदर्द हुआ है, वह पेनकिलर खाकर सोई और उसकी मौत हो गई। दरअसल, जेसिका को मेनिंगोकॉकल मेनिनजाइटिस और सेप्टिकैमिया नाम की बीमारी हो गई थी जिसने उसकी जान ले ली। दरअसल, ये एक ऐसा इंफेक्शन है जिसमें बैक्टीरिया खून में प्रवेश करता है और बड़ी तेजी से फैलने लगता है। यह बैक्टीरिया खून में टॉक्सिन्स रिलीज करने लगता है जो जानलेवा साबित हो सकता है। स्वास्थ्य समस्याओं को हल्के में न लें हम में से बहुत से लोग ऐसे हैं जो अपने सिरदर्द, बहती नाक, छींक आना, हल्का बुखार जैसी दिक्कतों को हल्के में लेते हैं और उसके इलाज के बारे में भी नहीं सोचते। लेकिन ये लक्षण किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की ओर भी इशारा करते हैं जिस पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह आपके लिए बेहद हानिकारक और जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं आखिर क्यों आपको सिरदर्द को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। सिरदर्द भी कुछ गंभीर बीमारियों के संकेत हो सकता है। ब्लड क्लॉट कई बार ब्रेन में अगर किसी तरह का ब्लड क्लॉट बन जाए तो उस वजह से भी हेडएक यानी सिरदर्द होने लगता है। अगर आपको कभी-कभार बहुत गंभीर सिरदर्द होने लगता है और दर्द बर्दाश्त के बाहर हो जाए तो आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अगर समय रहते इलाज न हो तो ये ब्लड क्लॉट स्ट्रोक में परिवर्तित हो सकते हैं जो जानलेवा भी साबित हो सकता है। ऑप्टिक न्यूराइटिस अगर आंखों के पीछे वाले सिर के हिस्से में दर्द हो रहा तो यह ऑप्टिक न्यूराइटिस का लक्षण हो सकता है। इसमें ब्रेन से आंखों तक जानकारी पहुंचाने वाली नसों को नुकसान पहुंचता है जिस वजह से देखने में दिक्कत होती है और कई बार विजिन लॉस भी हो सकता है। माइग्रेन या ट्यूमर लंबे समय तक सिरदर्द की समस्या है तो विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। यह माइग्रेन, ट्यूमर या नर्वस सिस्टम से जुड़ी दूसरी बीमारी भी हो सकती है। कभी-कभी ज्यादा दिनों तक सिरदर्द से संवेदी अंगों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है, जिससे इनकी कार्यक्षमता भी प्रभावित हो जाती है। सिरदर्द को लेकर भ्रम की स्थिति में कतई न रहें।  

बिना क्लीनर ऐप के खाली करें स्मार्टफोन का स्टोरेज, जानें तरीका

स्मार्टफोन यूजर्स को अक्सर फोन के स्टोरेज फुल होने की समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में वे फोन में मौजूद फालतू फोटोज और विडियोज को डिलीट कर स्पेस बनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में यह समस्या फिर से सामने आ जाती है। वहीं, कुछ यूजर ऐसे भी हैं जो थर्ड पार्टी स्टोरेज क्लीनर ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, कुछ दिन पहले तक इन ऐप्स का इस्तेमाल करने में कोई बुराई नहीं थी, लेकिन हाल में आई एक रिपोर्ट में इन्हें खतरनाक बता दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गूगल प्ले स्टोर पर कई ऐसे क्लीनर ऐप हैं जो यूजर डेटा की चोरी करने के साथ ही डिवाइस को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इसीलिए आज हम आपको कुछ ऐसी ट्रिक्स के बारे में बता रहे हैं जिनसे आप बिना क्लीनर ऐप्स की मदद लिए अपने फोन के स्टोरेज को खाली कर सकते हैं। कैश क्लियर करें ज्यादातर ऐंड्रॉयड ऐप्स यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए कैश डेटा का इस्तेमाल करते हैं। कैश डेटा समय की बचत तो करता है, लेकिन यह फोन के इंटरनल स्टोरेज में काफी जगह ले लेता है। अगर इसे समय-समय पर क्लियर न किया जाए तो यह स्टोरेज कम करने के साथ ही फोन की स्पीड को भी धीमा कर देता है। बता दें कि किसी ऐप के सही ढंग से काम करने के लिए कैश डेटा की जरूरत नहीं पड़ती। यह केवल यूजर की सहूलियत के लिए होता है। ऐसे में बेहतर होगा कि जब भी आपको अपने फोन के स्टोरेज को खाली करने का ख्याल आए तो सबसे पहले आप कैश डेटा को डिलीट करें। यह तुरंत आपके फोन में स्टोरेज को बढ़ा देगा। हर ऐप यूजर को बेस्ट एक्सपीरियंस देने के लिए अपना कैश बनाता है। आप अपने स्मार्टफोन की सेटिंग में दिए गए स्टोरेज ऑप्शन में जाकर हर ऐप के कैश डेटा को क्लियर कर सकते हैं। बैकअप हुए गूगल फोटोज को करें डिलीट फोन में क्लिक की गई सभी फोटोज का गूगल फोटो ऑटोमैटिकली बैकअप ले लेता है। यह अच्छा भी है क्योंकि इससे यह पक्का हो जाता है कि आपके फोटो हमेशा सेफ रहेंगे और फोन खोने या बदलने की स्थिती में भी आप उन्हें ऐक्सेस कर सकेंगे। हालांकि, कई यूजर यह गलती करते हैं कि वे फोटो के बैकअप होने के बाद भी उसे डिवाइस पर सेव रखते हैं। ऐसा करने से फोन के स्टोरेज में कमी आती है। बेहतर होगा कि आप गूगल पर स्टोर हुए फोटोज को सिस्टम मेमरी से डिलीट कर दें। अगर आपको किसी कॉन्टेंट को तुरंत ऐक्सेस नहीं करना है तो आप गूगल फोटोज में दिए गए ‘Free up space’ ऑप्शन का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसा करने से सारे फोटो फोन से तो डिलीट हो जाएंगे लेकिन क्लाउड पर सेव रहेंगे। फालतू ऐप्स को करें डिलीट हम में कई ऐसे यूजर हैं जिन्हें फोन में ढेरों ऐप रखने की आदत होती है। इन ऐप्स की संख्या 100 तक भी हो सकती है। मजेदार बात यह है कि इनमें से आधे ऐप ऐसे होते हैं जिनकी जरूरत केवल इंस्टॉल किए जाने के वक्त होती है। वहीं, कुछ ऐप्स ऐसे भी होते हैं जिन्हें हम महीनों से इस्तेमाल नहीं कर रहे। फोन के स्टोरेज के लिए अच्छा रहेगा कि इन फालतू ऐप्स की पहचान कर उसे डिलीट कर दिया जाए। डाउनलोड फाइल्स को करें डिलीट सभी स्मार्टफोन एक डाउनलोड फोल्डर के साथ आते हैं। इस फोल्डर को आमतौर पर ‘My Files’ में जाकर देखा जा सकता है। समय बीतने के साथ ही इसमें कई सारी डाउनलोड की हुई फाइलें सेव हो जाती है। इनमें से कुछ ही ऐसी होती होंगी जिनकी जरूरत डाउनलोड किए जाने के कुछ दिन बाद होती होगी। फोन के स्टोरेज का खाली करने के लिए बेहतर होगा कि उन फाइल्स को डिलीट कर दिया जाए जिसकी जरूरत न हो। जंक फाइल्स को हटाएं अगर ऊपर बताए गए तरीकों के बाद भी आपके फोन का स्टोरेज पूरा तरह फ्री नहीं हो रहा तो बेहतर होगा कि आप डिवाइस के जंक फाइल्स को डिलीट करें। जंक फाइल्स को डिलीट करने के लिए आप गूगल फाइल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। जंक फाइल्स वे फाइलें होती हैं जो न तो कैश में दिखती हैं और ना हीं डाउनलोड्स में। नजर न आने के बावजूद भी ये स्मार्टफोन के स्टोरेज को कम करने का काम करती हैं। गूगल फाइल्स फोन में मौजूद ड्यूप्लिकेट फाइल्स को डिटेक्ट कर लेता है और यूजर को बताता है कि कौन से ऐप ज्यादा स्टोरेज ले रहे हैं। एसडी कार्ड का करें इस्तेमाल अगर आपके स्मार्टफोन का इंटरनल स्टोरेज आपकी जरूरत के हिसाब से कम है, तो बेहतर होगा कि आप एक एसडी कार्ड का इस्तेमाल करें। आजकल लगभग सभी फोन माइक्रो एसडी कार्ड स्लॉट के साथ आते हैं।  

अपनाए ये टिप्स बच्चे की स्किन हमेशा बनी रहे सॉफ्ट

आपके लिए अपनी स्किन का ध्यान रखना जितना जरूरी है उतना ही या फिर शायद उससे भी ज्यादा जरूरी है बच्चे की स्किन का ध्यान रखना। ऐसा इसलिए क्योंकि बच्चों की स्किन बेहद कोमल और मुलायम होती है और उन्हें अधिक देखभाल की जरूरत होती है। बचपन में ही अगर उनकी स्किन को सही देखभाल मिलेगी तो बड़े होते-होते उनकी स्किन और भी बेहतर हो जाएगी। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप बच्चे की स्किन पर केमिकल वाले प्रॉडक्ट्स लगाना शुरू कर दें। बच्चे के लिए भी बनाएं स्किनकेयर रुटीन बच्चे के लिए भी एक प्रॉपर स्किनकेयर रुटीन बनाएं ताकि आगे चलकर भविष्य में उन्हें स्किन से जुड़ी किसी भी तरह की कोई समस्या न हो। वैसे भी बच्चों को घर के बाहर रहना ज्यादा पसंद होता है इसलिए बच्चों की स्किन सनलाइट, धूल, गंदगी, पलूशन से ज्यादा एक्सपोज होती है। यही वजह है कि बच्चों की स्किन का ध्यान रखना और भी जरूरी हो जाता है। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कुछ बेहद आसान टिप्स जिन्हें फॉलो कर आप भी अपने बच्चे की स्किन को हमेशा सॉफ्ट बनाए रख पाएंगी… हर दिन नहाना है जरूरी बेसिक हाइजीन का ध्यान रखना भी जरूरी है। लिहाजा बच्चे में हर दिन नहाने की आदत जरूर विकसित करें। माइल्ड साबुन या बॉडी क्लेन्जर और माइल्ड शैंपू लगाकर बच्चे का हर दिन नहाना जरूरी है। यह आदत हाइजीन और स्किन दोनों के लिहाज से बेस्ट है। फेस वॉश करना हर तरह का साबुन बच्चे की स्किन के लिए सही नहीं होता। लिहाजा बच्चे के लिए ऐसा फेसवॉश खरीदें जो माइल्ड हो और उनकी स्किन को सूट करे। हर रात सोने से पहले गुनगुने पानी से फेस वॉश करने की आदत बच्चे में डिवेलप करें। इससे बच्चे के चेहरे पर जमा धूल-मिट्टी और गंदगी पूरी तरह से साफ हो जाएगी। मॉइश्चराइजिंग नहाने के बाद स्किन को हाइड्रेट करने यानी स्किन की नमी बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है मॉइश्चराइजेशन। लिहाजा स्किन को ड्राई और पपड़ीदार होने से बचाने के लिए दिनभर में एक बार बच्चे की स्किन पर मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं। खूब पानी पिएं बच्चे दिन भर उछल कूद करते रहते हैं। घर के अंदर भी और बाहर भी इसलिए बच्चों में खूब सारा पानी पीने की आदत विकसित करें ताकि शरीर में पानी की कमी ना हो और स्किन भी ड्राई होने से बच जाए।  

गर्भवती महिलाओं को भी मोबाइल का यूज कम करना चाहिए, ये है वजह

इसमें कोई शक नहीं कि मोबाइल फोन जो अब स्मार्टफोन बन चुका है हमारी जिंदगी का ऐसा अहम हिस्सा बन चुका है जिसे हम अपनी जिंदगी से अब अलग नहीं कर सकते। मोबाइल के बिना अपनी लाइफ की कल्पना करना भी शायद मुश्किल ही लगे। टॉडलर्स यानी छोटे बच्चों से लेकर टीनएजर्स और बुजुर्गों तक… हर किसी के हाथ में स्मार्टफोन रहता है और बड़ी संख्या में लोगों की इसकी लत भी लग चुकी है। इस लिस्ट में गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। लेकिन मोबाइल के एक्सेस यूज का न सिर्फ आप पर बल्कि गर्भ के अंदर पल रहे बच्चे पर भी बुरा असर पड़ता है। कैसे, यहां जानें… बच्चे में बिहेवियर से जुड़ी दिक्कतें मोबाइल फोन की स्क्रीन और उससे निकल रही ब्राइट ब्लू लाइट को लंबे समय तक देखते रहने से न सिर्फ आपकी आंखों को नुकसान होता है। बल्कि हाल ही में हुई एक स्टडी की मानें तो अगर प्रेग्नेंट महिला लंबे समय तक मोबाइल फोन यूज करे तो होने वाले बच्चे में बिहेवियर से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं। वैज्ञानिकों ने डेनमार्क में इसको लेकर एक स्टडी की जिसमें प्रसव पूर्व और प्रसव के बाद मोबाइल फोन यूज करने का बच्चे के व्यवहार और इससे जुड़ी समस्याओं के बीच क्या लिंक ये जानने की कोशिश की गई। हाइपरऐक्टिविटी और बिहेवियरल इशू का शिकार इस स्टडी में ऐसी महिलाओं को शामिल किया गया जिनके बच्चे 7 साल के थे। स्टडी के दौरान महिलाओं को एक क्वेश्चेनेयर दिया गया था जिसमें उनके बच्चे की हेल्थ और बिहेवियर के साथ-साथ वे खुद फोन का कितना इस्तेमाल करती हैं, इससे जुड़े सवालों के जवाब देने थे। स्टडी के आखिर में यह बात सामने आयी कि जिन महिलाओं के बच्चे प्रसव से पूर्व और प्रसव के बाद स्मार्टफोन के प्रति एक्सपोज थे यानी जिन मांओं ने प्रेग्नेंसी के दौरान और डिलिवरी के बाद भी मोबाइल यूज ज्यादा किया उनके बच्चे हाइपरऐक्टिविटी और बिहेवियरल इशूज का शिकार थे। प्रेग्नेंट महिलाएं इन बातों का रखें ध्यान -मोबाइल फोन पर बहुत ज्यादा बात करने की बजाए टेक्स्ट भेजें या लैंडलाइन का उपयोग करें -प्रेग्नेंसी के दौरान बहुत ज्यादा सोशल मीडिया को स्क्रॉल न करें -जहां तक संभव हो हैंड्स फ्री किट यूज करें ताकरि सिर और शरीर के नजदीक रेडिएशन को कम किया जा सके।  

फेसबुक मार्केटिंग में करियर बनाने में मदद करेंगे ये टूल्स, होगी अच्छी अर्निंग

कॉलेज, मार्केट, ट्रेन या फिर बस-स्टॉप, कहीं भी आप जाइए, वहां दिखाई देने वाला एक आम नजारा यह है कि ज्यादातर लोग लगभग हर कुछ मिनट में अपना मोबाइल फोन जरूर चेक करते हैं। वे खबरें पढ़ रहे हों, वाट्सएप मैसेज देख रहे हों या फेसबुक अथवा इंस्टाग्राम पर अपने दोस्तों का सिर्फ स्टेटस चेक कर रहे हों। रिसर्च के मुताबिक, लोग सप्ताह में लगभग एक पूरा दिन केवल सोशल मीडिया पर लगा देते हैं। अगर इसे दूसरे नजरिए से देखें, तो मोबाइल पर लगाया जाने वाला यह ज्यादा समय विज्ञापनदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर होता है, जिन्हें अपने सामान और सेवाओं को बेचने के लिए इन लोगों को टारगेट करना होता है। माना कि हर किसी को सोशल मीडिया और इसके काम करने के तरीके की जानकारी नहीं है, लेकिन यह भी सही है कि इसकी बारीकियां सीखकर आजकल अच्छा पैसा भी कमाया जा सकता है। इसलिए फेसबुक आप जैसे युवाओं के लिए पैसा कमाने और बिजनेस का निर्माण करने का अवसर भी है। आइए जानें, फेसबुक मार्केटिंग में करियर बनाने के लिए क्या किया जाना चाहिए… टूल्स की समझ: इस फील्ड में आने के लिए ग्रेजुएशन की डिग्री और कारोबार की समझ काफी मददगार साबित होगी। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि फेसबुक मार्केटिंग टूल्स का इस्तेमाल शुरू करने के लिए आपको किसी योग्यता की जरूरत ही नहीं है। हां, यह मीडियम आपको मालूम होना चाहिए। इसके बाद एक फेसबुक बिजनेस एकाउंट खोलिए (जिसमें कोई भी खर्चा नहीं लगता है) और आप कमाई करने या इसे लाभदायक बिजनेस बनाने के लिए फेसबुक मार्केटिंग टूल इस्तेमाल करना शुरू कर सकते हैं। संसाधन की जरूरत: शुरुआत करने के लिए आपको बस एक इंटरनेट कनेक्शन, फेसबुक पर एक वैलिड बिजनेस एकाउंट और एक क्रेडिट कार्ड (क्योंकि फेसबुक क्रेडिट कार्ड के जरिये पैसे चार्ज करता है) की जरूरत है। बहरहाल, जब आपका बिजनेस बढ़ता है तो आप फेसबुक के साथ फॉर्मल कॉन्ट्रैक्ट कर सकते हैं। टारगेटिंग टूल्स की जानकारी: फेसबुक प्रीसाइज मार्केटिंग टूल्स पेश करती है, जिनमें आप किसी क्लाइंट के लिए लगभग हर लोकेशन पर कैंपेन कर सकते हैं-जैसे, अगर आप दिल्ली में हैं और आप सिर्फ पटपड़गंज को टारगेट करना चाहते हैं या आप इलाहाबाद में हैं और केवल सिविल लाइंस के लोगों को टारगेट करना चाहते हैं तो आप फेसबुक के साथ ऐसा कर सकते हैं। इससे आप आयु वर्ग और जेंडर आधारित टारगेटिंग भी सकते हैं। तजुर्बा और क्लाइंट की जरूरतें: यह सही है कि कोई भी व्यक्ति फेसबुक मार्केटिंग टूल्स इस्तेमाल करना शुरू कर सकता है, लेकिन फिर भी मार्केटिंग, सेल्स और प्रोडक्ट डिजाइन की पूर्व जानकारी भी होनी चाहिए। आखिरकार, आप अपने ग्राहकों के लिए कैंपेन करने के लिए इस जानकारी और एप्लीकेशन को इस्तेमाल करेंगे। अगर आपके क्लाइंट्स को नतीजे नहीं मिलते हैं तो आपका बिजनेस आगे नहीं बढ़ेगा। सर्टिफिकेशंस: जैसे गूगल एडवर्ड्स सर्टिफिकेशन पेश करता है, वैसे ही फेसबुक ब्लूप्रिंट सर्टिफिकेशन कराता है, जो फेसबुक मार्केटिंग और एडवर्टाइजिंग फीचर्स में दिलचस्पी रखने वालों के लिए उपलब्ध है। यह सर्टिफिकेशन दो तरह का है। इसमें मीडिया बाइंग और मीडिया प्लानिंग शामिल हैं।  

अगर आपका जीमेल अकाउंट हो गया है हैक तो इस तरह कर सकते है रिकवर

गूगल की ईमेल सर्विस जीमेल को दुनियाभर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। जीमेल को दुनिया भर में एक बिलियन से ज्यादा लोग इस्तेमाल करते हैं और शायद यही वजह है कि हमेशा हैकर्स की नज़र इस ईमेल सर्विस पर बना रहती है। अगर आपने भी अपने जीमेल अकाउंट में किसी संदेहास्पद गतिविधि को नोटिस किया है तो हो सकता है कि आपके अकाउंट को किसी ने हैक कर लिया हो। 1. अकाउंट रिकवरी पेज पर जाएं 2. अगर आपको पासवर्ड याद नहीं है तो अलग-अलग सवालों के जवाब दें। 3. अपने रिकवरी ईमेल या फोन नंबर का इस्तेमाल करें। 4. अब जीमेल आपके अकाउंट के मालिकना हक को सुनिश्चित करने के लिए उस फोन नंबर या ईमेल पर एक रिकवरी कोड भेजेगा। 5. इसके अलावा आप उस सिक्यॉरिटी सवाल का जवाब भी दे सकते हैं, जो आपने अकाउंट सेटअप करते समय बनाया होगा। 6. एक बार रिकवरी कोड रिसीव करने के बाद, जीमेल में इसे एंटर करें और फिर गूगल आपसे पासवर्ड बदलने को कहेग। 7. साइनइन करने के बाद जीमेल आपसे एक बार सिक्यॉरिटी चेक के लिए कहेगा। ध्यान रहे कि सिक्यॉरिटी चेक कर लें और फिर अपनी सिक्यॉरिटी इन्फर्मेशन बदल लें। आपके जीमेल अकाउंट में की गई कोई हैकिंग ऐक्टिविटी के चलते अगर कोई आपकी जानकारी के बिना आपका गूगल अकाउंट इस्तेमाल कर रहा है तो, आपके दूसरे गूगल अकाउंट्स असुरक्षित अनऑथराज्ड पेमेंट ऐक्टिविटी, अनफैमिलियर गूगल प्ले ऐक्टिविटी, अनजान यूट्यूब ऐक्टिविटी, अनफैमिलियर ऐप जैसे बड़े खतरे हो सकते हैं। अपने गूगल अकाउंट को सिक्यॉर करने के लिए इन टिप्स को फॉलो करें: 1. सिक्यॉरिटी चेकअप में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करें। यह गूगल की सर्विस है जिससे यूजर्स को कनेक्टेड ऐप्स, डिवाइसेज़, अकाउंट परमिशंस आदि चेक कर यह पता करने में मदद मिलती है कि उनका अकाउंट सेफ है या नहीं। 2. अगर आपने अब तक अपने अकाउंट का पासवर्ड नहीं बदला है तो तुरंत पासवर्ड बदल लें। 3. उन ऐप्स और साइट्स के पासवर्ड बदल दें जहां आपने इसी गूगल अकाउंट वाला पासवर्ड इस्तेमाल किया है। 4. उन सभी ऐप्स और साइट्स के पासवर्ड बदल दें जहां आपने अपने गूगल अकाउंट ईमेल अड्रेस के साथ साइनइन किया है। इसके अलावा, जिन ऐप्स और साइट्स के लिए आपने क्रोम ब्राउज़र पर पासवर्ड सेव किया है, उनके भी पासवर्ड बदल दें। 5. सनुश्चित कर लें कि आपका रिकवरी फोन नंबर और ईमेल सही है, ताकि आपके अकाउंट में कोई संदेहास्पद ऐक्टिविटी होने पर आपको सूचना दी जा सके।  

त्वचा को कोमल बनाने के लिए अपनाएं टिप्स

त्वचा पर दाग-धब्बे, मुंहासे, पिंपल्स और ब्लैकहेड्स होने के कारण त्वचा की खूबसूरती छीन जाती है। इनके कारण त्वचा के रोमछिद्र बड़े होने, झुर्रियां, दानें होनें के कारण त्वचा की कोमलता भी खत्म हो जाती है। ऐसे में त्वचा को छूने पर खुरदुरापन महसूस होता है। हर कोई अपनी त्वचा को निखरी और कोमल बनाना चाहता है। ऐसे में अगर आप अपनी त्वचा की कोमलता को वापस पाना चाहते हैं तो हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ब्यूटी टिप्स। कोमल त्वचा पाने के तरीके- 1.शहद: त्वचा को कोमल और निखरी बनाने के लिए शहद उपयोगी होता है। शहद गाढ़ा होता है जो त्वचा पर मॉइश्चर की एक परत बना देता है, साथ ही इसमें एंटी-बैक्टीरियल प्रॉपर्टीज होती हैं जो पिंपल्स को खत्म कर देती हैं। मुंहासों और दाग-धब्बों को दूर करने के लिए शहद कैसे फायदेमंद होता है जानने के लिए क्लिक करें। कैसे करें इस्तेमाल: शुद्ध शहद को 10 मिनट तक चेहरे पर लगाकर रखें और फिर हल्के गर्म पानी से चेहरा धो लें। शहद और अंडे को मिलाकर फेसमास्क बना लें और 20 मिनट तक चेहरे पर लगाए रखने के बाद हल्के गर्म पानी से धो लें। 2.एलोवेरा जेल: एलोवेरा जेल त्वचा को कोमल बनाने के लिए लाभकारी होता है। इसकी सूदिंग प्रॉपर्टीज मुंहासे मिटाने के साथ त्वचा को हाइड्रेट भी रखती है और कोमल बनाए रखती हैं। कैसे करें इस्तेमाल: एलोवेरा जेल को चेहरे पर रातभर लगाकर रखें। एलोवेरा जेल को 2 चम्मच नींबू के रस और शहद में मिलाकर मिश्रण को चेहरे पर 20 मिनट लगाकर चेहरा धो लें। 3.खीरा: खीरे में एस्ट्रिजेंट प्रॉपर्टी के साथ ही पोषण देने के लिए आवश्यक मिनरल्स होते हैं। खीरे में सबसे ज्यादा पानी होता है। यह त्वचा के pH को बैलेंस रखता है और एसिड लेवल को बैलेंस करके त्वचा को कोमल और खूबसूरत बनाए रखता है। खीरे को त्वचा पर लगाना और खीरा खाना, दोनों ही त्वचा के लिए लाभकारी होता है। कैसे करें इस्तेमाल: खीरे का रस निकालकर इसमें थोड़ा सा दूध मिला लें और इसे 20 मिनट तक चेहरे पर लगाकर रखें। इसके बाद चेहरे को हल्के गर्म पानी से धो लें। 4.योगर्ट: प्रोटीन, लेक्टिक एसिड और एंजाइम्स से भरपूर योगर्ट को चेहरे पर लगाने से यह त्वचा को स्वस्थ और मुलायम बनाए रखता है। कैसे करें इस्तेमाल: योगर्ट में नींबू का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर चेहरे पर लगा लें और 20 मिनट बाद हल्के गर्म पानी से धो लें जिससे त्वचा मुलायम बनती है। 5.खूब पानी पीएं: पसीने और मूत्र के रुप में हमारे शरीर से पानी निकल जाता है। ऐसे में त्वचा को हाइड्रेट और कोमल बनाए रखने के लिए पानी पीना जरुरी होता है। खूबसूरत और कोमल त्वचा पाने के लिए दिनभर में 8-10 गिलास पानी जरुर पीएं।  

बदलते मौसम में वायरल रोगों से बचना है तो करें ये योगासन

बदलते मौसम में वायरल इंफेक्शन और वायरल रोगों का खतरा बढ़ जाता है। सर्दी, जुकाम, बुखार, सिरदर्द और बदन दर्द जैसी परेशानियां इस दौरान आम होती हैं। इससे बचाव के लिए आप साफ-सफाई का ध्यान रखते हैं और खाने-पीने का ध्यान रखते हैं। इन बीमारियों का खतरा उन लोगों को ज्यादा होता है, जिनका इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होता है। इसलिए अगर आप ऐसे योगासनों का अभ्यास करते हैं, जिनसे आपका इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, तो आप इन वायरल रोगों और संक्रमण से बच सकते हैं। आइए आपको बताते हैं ऐसे ही योगासन, जो आपकी इम्यूनिटी बेहतर करते हैं। सर्वांगासन: सर्वांगासन की खास बात ये है कि इसे करने से आपके शरीर के सभी अंगों को फायदा मिलता है, इसी लिए इसका नाम सर्वांगासन है। इस आसन का नियमित अभ्यास आपकी इम्यूनिटी बढ़ाता है और आपको रोगों से दूर रखता है। बच्चों और युवाओं के लिए भी ये आसन बहुत फायदेमंद है क्योंकि इससे शरीर का विकास बेहतर होता है और हार्मोन्स का बैलेंस बना रहता है। इसके अलावा इससे आपकी पाचन शक्ति ठीक रहती है और रक्त का शुद्धिकरण होता है। कैसे करें सर्वांगासन: पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को एक साथ मिला लें और हाथों को शरीर की सीध में रखें। अब धीरे से पैरों को बिना मोडे ऊपर की तरफ उठाएं। जैसे-जैसे पैर ऊपर की तरफ उठाएंगे, वैसे-वैसे कमर को भी ऊपर की तरफ उठाएं। कोशिश करें कि पैर और पीठ इतने ऊपर उठ जाएं कि 90 डिग्री का कोण बन जाए। फिर धीरे-धीरे पहले की मुद्रा में आ जाएं। आप पीठ और कमर को उठाने के लिए हाथों का सहारा ले सकते हैं लेकिन कोहनियां जमीन से ही टिकी होनी चाहिए और चेहरा आसमान की ओर रहना चाहिए। मत्स्यासन: मत्यासन का अभ्यास भी आपको वायरल रोगों और इंफेक्शन से दूर रखता है। मत्स्यासन पेट और रीढ़ की हड्डी संबंधित सभी रोगों में बहुत फायदेमंद आसन माना जाता है। इसके नियमित अभ्यास से आपके फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है। इसके साथ ही आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है, जिसके कारण हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस आपको आसानी से बीमार नहीं बना पाते हैं। साथ ही यह आसन मेटाबॉलिज्म के लिए अच्छा माना जाता है। कैसे करें मत्स्यासन: स्वच्छ वातावरण में समतल जमीन पर आसन बिछाकर सुखासन में बैठ जाएं। कुछ देर सांस को सामान्य करने के बाद पद्मासन लगा लें।हाथों का सहारा लेकर पीठ को पीछे की ओर धीरे-धीरे लाते हुए पीठ के बल लेट जाएं। पैरों के अंगूठों को पकड़कर उन्हें थोड़ा अपनी तरफ लाएं और पद्मासन को ठीक करते हुए घुटनों को जमीन पर अच्छी तरह से टिका दें। सांस भरें और पीठ, कंधों को ऊपर उठा गर्दन को पीछे की तरफ ले जाएं। सिर के भाग को जमीन पर टिका दें। पैरों के अंगूठों को पकड़ लें और सांस को सामान्य रखते हुए यथाशक्ति रोकने के बाद पद्मासन खोल लें। कुछ देर शवासन में लेटने के बाद पूर्व स्थिति में आ जाएं। नाड़ी शोधन प्राणायाम: नाड़ी शोधन प्राणायाम पूरे शरीर के लिए फायदेमंद है। जैसा कि इसका नाम है, ये प्राणायां नाड़ी का शोधन करता है। इस आसन के अभ्यास से रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित होती है और वायरल संक्रमण या रोगों के विषाणु आप पर असर नहीं कर पाते हैं। इसके अलावा ये प्राणायाम मन को शांत और केंद्रित करता है। ये प्राणायाम श्वसन प्रणाली व रक्त-प्रवाह तंत्र से सम्बंधित समस्याओं से मुक्ति देता है। कैसे करें नाड़ी शोधन प्राणायाम: सबसे पहले किसी भी सुखासन में बैठकर कमर को सीधा करें और आंखें बंद कर लें। दाएं हाथ के अंगूठे से दायीं नासिका बंद कर पूरी श्वास बाहर निकालें। अब बायीं नासिका से श्वास भरें और तीसरी अंगुली से बायीं नासिका को भी बंद कर लें। जितनी देर स्वाभाविक स्थिति में रोक सकते हैं, रोकें। फिर दायां अंगूठा हटाकर श्वास को धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। फिर दायीं नासिका से गर्दन उठाकर श्वास को रोकें, फिर बायीं से धीरे से निकाल दें।  

बाजार में बढ़ रही है स्किल्ड ब्रांड मैनेजर्स की मांग

आज भारतीय उपभोक्ताओं के पास हर उत्पाद के लिए कई विकल्प उपलब हैं, क्योंकि हर कंपनी अपने प्रोडक्ट को प्रमोट करने के लिए ग्राहक को आकर्षित करने की कोशिश करती है। इस पूरी प्रक्रिया में ब्रांडिंग की बड़ी भूमिका होती है। उपभोक्ता के मन में एक प्रोडक्ट की स्थायी जगह बनाने में ब्रांडिंग का बड़ा हाथ होता है। हर बड़ी कंपनी अपने प्रोडक्ट और सर्विसेज को बाजार में प्रमोट करने के लिए ब्रांड मैनेजर्स को हायर करती है। ब्रांडिंग प्रक्रिया में नए उत्पाद के लॉन्च होने से लेकर उसे उपभोक्ता की जिंदगी का अहम हिस्सा बनाने तक की रणनीति शामिल होती है। हर कंपनी अपने प्रोडक्ट और सर्विसेज की ब्रांडिंग के लिए ऐसे लोगों को हायर करना चाहती है, जिनके पास प्रमोशन के विभिन्न आइडियाज हों। अगर आप भी इस तरह के करियर ऑप्शन की तलाश में हैं, तो ब्रांड मैनेजमेंट आपके लिए आदर्श करियर बन सकता है। कैसे करें शुरूआत? ब्रांड मैनेजमेंट में करियर बनाने के लिए आप ग्रेजुएशन के बाद ब्रांड मैनेजमेंट से एमबीए करके स्पेशलाइजेशन हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा एमबीए-मार्केटिंग से स्पेशलाइजेशन करके इस करियर को शुरू किया जा सकता है। करियर की संभावनाएं ब्रांड मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद फ्रेशर्स को एंट्री लेवल पर असिस्टेंट ब्रांड मैनेजर की जॉब मिल सकती है। अपने अच्छे आइडियाज, परफॉर्मेंस और इनोवेशन से उम्मीदवार मिड लेवल तक पहुंच सकते हैं यानी ब्रांड मैनेजर बन सकते हैं। किस एरिया में जॉब? प्रतिभाशाली और स्किल्ड ब्रांड मैनेजर्स की मांग फार्मास्यूटिकल, मोबाइल, इंश्योरेंस, हेल्थकेयर कंपनियों, मीडिया हाउसेस, ऑटोमोबाइल कंपनीज वगैरह में काफी है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए हर कंपनी अपने प्रोडक्ट की ब्रांडिंग आकर्षक तरीके से करनी चाहती है। कितना पैकेज? इस इंडस्ट्री में फ्रेशर्स का स्टार्टिंग सैलेरी पैकेज तीन से साढ़े तीन लाख प्रति वर्ष हो सकता है। सैलेरी पैकेज इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप कौन-से संस्थान में और किस शहर में काम कर रहे हैं। ये गुण जरूरी…. ब्रांड मैनेजर बनने के लिए एक व्यक्ति को न मोटिवेटेड और बड़ी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार रहना जरूरी होता है। -अच्छी कम्युनिकेशन स्किल्स होनी चाहिए। -सुपरविजन, प्रॉब्लम सॉल्विंग और प्लानिंग स्किल्स में भी आगे होने चाहिए। -उम्मीदवार किस तरह के आइडियाज के साथ प्रोडक्ट की ब्रांडिंग कितने क्रिएटिव तरीके से करते हैं और उसका कैसा रिस्पांस मिलता है, यह भी बहुत मायने रखता है।    

ICMR ने कहा है भारत में कैंसर के मामले और मौतें 2022 से 2045 के बीच बढ़ने का अनुमान

नई दिल्ली भारत में कैंसर तेजी से फैल रहा है. यह एक ऐसी बीमारी है जिसका सही समय पर पता न चले तो इलाज मुश्किल हो जाता है. 2023 में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में पब्लिश हुई एक स्टडी में कहा गया था कि भारत में ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर जैसे कैंसर के मामले तेजी बढ़ रहे हैं. कुछ दिन पहले भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कहा है कि भारत में कैंसर के मामले और मौतें 2022 से 2045 के बीच बढ़ने का अनुमान है. ब्रिक्स देश यानी ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका में कैंसर के मामले, उनसे होने वाली मौतों और उनका रोजमर्रा की लाइफ पर प्रभाव दिखाने वाली स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि भारत में मुंह और ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ने का जोखिम है. आईसीएमआर-नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इन्फॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च की रिसर्च के मुताबिक, पुरुषों में होंठ और मुंह के कैंसर के मामले सबसे अधिक पाए गए हैं जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले सबसे अधिक पाए गए. क्या कहती है रिसर्च कैंसर एपिडेमियोलॉजी में पब्लिश स्टडी के मुताबिक, दुनिया भर में कैंसर से होने वाली कुल मौतों में से 20 प्रतिशत मौतें ब्रिक्स देशों में होती हैं. स्टडी के राइटर्स का कहना है, ‘हमारा विश्लेषण भारत और दक्षिण अफ्रीका में 2022 और 2045 के बीच कैंसर के मामलों और मौतों में तेजी से वृद्धि होगी. स्टडी के राइटर सतीशकुमार ने बताया कि 2020 की तुलना में 2025 में भारत में कैंसर के मामलों में 12.8 प्रतिशत की वृद्धि होगी और कैंसर की घटनाओं में तेजी लगातार जारी रहेगी.’ निष्कर्ष क्या निकला स्टडी के निष्कर्ष में इस बारे में जानकारी दी गई है कि कैंसर कितना कॉमन है, इससे कितनी मौतें होती हैं और इससे आम इंसान की लाइफ पर कितना प्रभाव होता है. रिसर्च के मुताबिक, रूस में पुरुषों और महिलाओं में नए प्रकार के कैंसर के मामलों की दर सबसे अधिक थी. रूस में पुरुषों में सबसे आम प्रकार का कैंसर प्रोस्टेट, लंग्स और कोलोरेक्टल थे. अधिकांश ब्रिक्स देशों में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर प्रमुख था. हालांकि, भारत में होंठ और मुंह के कैंसर का ट्रीटमेंट पुरुषों में सबसे अधिक बार किया गया. दक्षिण अफ्रीका में पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए कैंसर से होने वाली मृत्यु दर सबसे अधिक थी. अगर रूस में सिर्फ पुरुषों की मौत सबसे अधिक कैंसर से हुई ती और महिलाओं की दक्षिण अफ्रीका में कैंसर से मौत सबसे अधिक हुई थी. स्टडी में यह भी बताया गया है कि भारत को छोड़कर सभी ब्रिक्स देशों में लंग्स कैंसर मौतों का सबसे बढ़ा कारण था. भारत में बढ़ सकता है मौतों का आंकड़ा रिसर्चर्स के अनुसार, आने वाले सालों में दक्षिण अफ्रीका और भारत में कैंसर के नए मामलों और कैंसर से संबंधित मौतों में सबसे अधिक वृद्धि होने की संभावना है. हालांकि ब्रिक्स देशों के पास कैंसर को कंट्रोल करने के तरीके हैं लेकिन फिर भी कैंसर के जोखिम और कैंसर की घटनाओं को प्रभावित करने वाले हेल्थ सिस्टम की जांच करनी काफी जरूरी है.  

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