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सुबह के समय चिया सीड्स खाने के अद्भुत फायदे

क्या मॉर्निंग में चिया सीड्स खाने चाहिए? हेल्दी डाइट के अंदर चिया सीड्स को शामिल होना चाहिए। इनका सेवन पूरे शरीर के लिए फायदेमंद होता है। इन्हें मॉर्निंग डाइट में खा सकते हैं। ऐसा करने से सुबह-सुबह आपको जरूरी एनर्जी, पोषण और जान मिलेगी। जो पूरे दिन शरीर की जरूरतें पूरी करेंगे। हैदराबाद स्थित Gleneagles Aware Hospital की चीफ डाइटिशियन Dr. Birali Swetha ने चिया सीड्स के फायदे और संभावित नुकसान बताए हैं। चिया सीड्स के अंदर पोषण चिया सीड्स में फाइबर, ओमेगा -3 फैटी एसिड, प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट, कैल्शियम और मैग्नीशियम आदि होते हैं। सुबह के वक्त ये सारे न्यूट्रिएंट्स मिल जाने से शरीर में इनकी कमी नहीं होती। डायजेशन बढ़ता है चिया सीड्स के अंदर हाई फाइबर होता है, जो इंटेस्टाइनल हेल्थ के लिए अच्छा होता है। कब्ज की समस्या में भी यह राहत देता है। पूरे दिन रहेगी एनर्जी चिया सीड्स धीरे पचते हैं, इस वजह से पेट देर तक भरा रहता है। साथ ही आपको लंबे समय तक एनर्जी मिलती रहती है और बेवजह भूख भी नहीं लगती। हार्ट हेल्थ चिया बीज के अंदर ओमेगा -3 फैटी एसिड मौजूद होता है। यह इंफ्लामेशन कम करता है और दिल का कामकाज सुधारता है। इसकी मदद से कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल किया जा सकता है। बोन हेल्थ चिया सीड्स के अंदर कैल्शियम और मैग्नीशियम होता है। यह दोनों मिनरल हड्डियों के लिए आवश्यक होते हैं, इसलिए हड्डियां कमजोर होने का खतरा टल जाता है। चिया सीड्स के संभावित नुकसान चिया सीड्स में फाइबर की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, इसलिए इनका ज्यादा सेवन डायजेस्टिव इश्यू भी कर सकता है। साथ ही यह एलर्जी का कारण बन सकते हैं।

स्मार्टफोन बैक कवर की सुरक्षा के टिप्स: अपनाएं ये आसान उपाय

आजकल स्मार्टफोन हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं, और हम उन्हें सुरक्षित रखने के लिए बैक कवर का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन समय के साथ बैक कवर पर धूल, गंदगी और बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं, जिससे कवर का रंग फीका पड़ने लगता है। बैक कवर को साफ और चमकदार बनाए रखने के लिए कुछ आसान टिप्स अपनाए जा सकते हैं: 1. साबुन और पानी से सफाई: सिलिकॉन या रबर के बैक कवर को साबुन और गुनगुने पानी से आसानी से साफ किया जा सकता है। एक मुलायम कपड़े या स्पॉन्ज का इस्तेमाल करें, जिससे कवर पर जमी गंदगी धीरे-धीरे हट जाए। इसके बाद कवर को सूखने दें। 2. टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें: अगर बैक कवर पर जिद्दी दाग या धब्बे हैं, तो थोड़ी सी मात्रा में सफेद टूथपेस्ट लगाएं और एक मुलायम कपड़े से धीरे-धीरे रगड़ें। टूथपेस्ट से बैक कवर की गंदगी निकल जाएगी और कवर नया जैसा दिखेगा। 3. बेकिंग सोडा और पानी का मिश्रण: प्लास्टिक और सिलिकॉन कवर की सफाई के लिए बेकिंग सोडा और पानी का पेस्ट बनाएं। इस पेस्ट को कवर पर लगाएं और मुलायम कपड़े से हल्के हाथों से रगड़ें। इससे कवर की गहराई में जमी गंदगी भी साफ हो जाएगी। 4. एंटी-बैक्टीरियल वाइप्स: बैक कवर पर बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं, इसलिए समय-समय पर एंटी-बैक्टीरियल वाइप्स का उपयोग करें। यह न केवल सफाई करेगा, बल्कि कवर को कीटाणु-मुक्त भी रखेगा। 5. एल्कोहल का इस्तेमाल: कुछ गंदगी या ऑयली धब्बों को साफ करने के लिए रबिंग एल्कोहल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। एक कॉटन बॉल पर थोड़ी मात्रा में एल्कोहल लेकर कवर को साफ करें, लेकिन ध्यान रहे कि इसे बहुत अधिक न रगड़ें। 6. नियमित सफाई: बैक कवर को साफ रखने के लिए इसे नियमित रूप से साफ करना जरूरी है। महीने में एक बार इन तरीकों का उपयोग करके सफाई करें ताकि कवर लंबे समय तक अच्छा दिखे और गंदगी न जमा हो।

फेंग शुई के ये खास टिप्स आपका जीवन साथी के साथ बनाएंगे रिश्ता मजबूत

माना जाता है कि जीवन में फेंग शुई टिप्स अपनाने से हमारे आसपास की नकारात्मकता दूर हो जाती है। साथ ही जीवन में सकारात्मक ऊर्जा की वृद्धि होती है। अगर आपके वैवाहिक जीवन में लड़ाई-झगड़े या मनमुटाव जैसी स्थिति बनी रहती है, तो इसके लिए भी आप कुछ फेंग शुई टिप्स अपना सकते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे खास फेंग शुई टिप्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको अपनाने से आप अपने शादीशुदा जीवन को खुशहाल बना सकते हैं। साथ ही वैवाहिक जीवन में चल रही समस्याओं से भी छुटकारा पा सकते है। इस तरह करें घर की सजावट अगर आपके और आपके जीवन साथी के बीच न चाहते हुए भी बार-बार लड़ाई-झगड़े होते रहते हैं, तो इसके लिए आप ये खास फेंग शुई टिप्स अपना सकते हैं। फेंग शुई में गुलाबी रंग को प्यार बढ़ाने वाला रंग माना जाता है। इसलिए अगर आप अपने जीवन साथी के साथ प्रेम बढ़ाना चाहते हैं तौ जितना हो सके अपने बेडरूम में गुलाबी रंग का इस्तेमाल करें। दीवारों के लिए आप हल्के गुलाबी रंग का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही आप बेडरूम में गुलाबी रंग के पर्दे, बेडशीट, फूल और कंबल आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं। इन बातों का रखें खास ध्यान पति-पत्नी के बीच संबंध ठीक रहें इसके लिए जरूरी है कि आप कुछ चीजों का खास ख्याल रखें। दरअसल, गंदगी से नकारात्मकता फैलाती है, जो आपके और आपके जीवन साथी के बीच लड़ाई-झगड़े का कारण भी बन सकती है। इसलिए घर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। फेंग शुई के अनुसार, घर में चीजों को व्यवस्थित ढंग से रखें, खासकर आपको बेडरूम का ध्यान जरूर रखना चाहिए। फेंग शुई के मुताबिक, घर का प्रवेश द्वार पर भी साफ-सुथरा रखना चाहिए, क्योंकि यही रास्ता है जहां से सकारात्मक ऊर्जा घर के अंदर प्रवेश करती है। घर में रखें ये पौधे फेंग शुई के अनुसार, घर में लिली का पौधा लगाना शुभ माना जाता है। इसे घर में रखने से सकारात्मकता बनी रहती है और पति-पत्नी के बीच प्यार बढ़ता है। इसके अलावा आप बांस, मनी प्लांट और जेड प्लांट आदि को भी घर में लगा सकते हैं। इससे भी घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।

शेयर बाजार में रोजगार के अवसरों की कमी नहीं

अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के बाद लोगों में निवेश की प्रवृत्ति बढ़ी है। आजकल सामान्य लोग भी शेयर मार्केट में दिलचस्पी लेने लगे हैं। आज पहले के मुकाबले कई गुना ज्यादा निवेश कंपनियां और वित्तीय सलाहकार कंपनियां मैदान में हैं। लिहाजा शेयर मार्केट से संबंधित रोजगार में भी इजाफा हुआ है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में अब एमबीए, सीए, आईसीडब्लूए या स्टॉक एक्सचेंज से मान्यता प्राप्त सर्टिफिकेट होल्डर्स अपना भविष्य संवार रहे हैं। पिछले कुछ सालों में शेयर मार्केट के क्षेत्र में कई बड़े घोटाले सामने आए हैं। उनमें प्रतिभूति घोटाला, यूटीआई जैसे घोटाले ने तो सरकार की जड़ें हिला कर रख दीं। लिहाजा इससे निजात पाने के लिए सरकार ने कई कानून और उच्च तकनीकी प्रक्रिया अपनाई है। जिसके तहत शेयर मार्केट में रोजगार के लिए सरकार ने सर्टिफिकेट कोर्स जैसी शर्ते अनिवार्य कर दी हैं। यही वजह है कि कैपिटल मार्केट डीलर मॉड्यूल, प्रोग्राम ऑन कैपिटल मार्केट, सर्टिफिकेट कोर्स ऑन स्टॉक मार्केट और शेयर ब्रोकिंग जैसे पाठ्यक्रम की शुरुआत की गई है। फिलहाल इस क्षेत्र में बहुत ही कम प्रतियोगिता है। लिहाजा सभी पाठ्यक्रमों में दाखिला आसानी से मिल जाता है। फाइनेंस से एमबीए, इकोनॉमिक्स या कॉमर्स से मास्टर डिग्री धारक और चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट जैसे पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा करने वाले अभ्यर्थी भी इस क्षेत्र में कॅरियर बना सकते हैं। इसके अलावा विभिन्न तरह के फाइनेंस, कॉमर्स और मैनेजमेंट के कोर्स कर रहे युवाओं के लिए भी शेयर मार्केट से जुड़े विभिन्न उपक्रमों और सहायक−क्षेत्रों में प्रबल सभावनाएं हैं। आम लोगों के लिए इंश्योंरेंस फंड, रिटायरमेंट फंड और म्यूचुअल फंड जैसे निवेश का फंडा समझ से बाहर होता है। इसीलिए उन्हें निवेश के लिए एक सलाहकार की जरूरत भी पड़ती है। ऐसे में कंसल्टेंसी का काम भी बेहतर रोजगार होगा। इसके अलावा अभ्यर्थी मार्केट एनालिस्ट, रिसर्च एनालिस्ट या इक्विटी रिसर्चर के तौर पर भी काम कर सकते हैं। ज्यादा जानकारी के लिए इन संस्थाओं से संपर्क कर सकते है− -नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, नई दिल्ली। -बीएसई ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, बाम्बे स्टॉक एक्सचेंज, मुंबई। -आईसीएफएआई, हैदराबाद। -इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कैपिटल मार्केट एंड डेवलपमेंट, करोलबाग, दिल्ली। -जेडीसी बिटको इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज एंड रिसर्च, नासिक।  

LG फोन की वापसी: रोल करने वाले फोन डिज़ाइन के लिए नया पेटेंट

आज के वक्त में एलजी कंपनी स्मार्टफोन के डिस्प्ले से लेकर कैमरा सेंसर बनाने का काम करती है, लेकिन खुद फोन्स बनाने के काम से बाहर है। एक वक्त एलजी के स्मार्टफोन काफी पॉपुलर हुआ करते थे, लेकिन बदलते वक्त के साथ एलजी स्मार्टफोन की डिमांड कम हो गई थी। ऐसे में एलजी फोन डिवीजन से अप्रैल 2021 में बाहर हो गया था। LG ने पेश किया नया रोलेबल स्मार्टफोन पेटेंट दरअसल एलजी की तरफ से नया स्मार्टफोन पेटेंट फाइल किया गया है। यह पेटेंट नए फोल्डेबल और रोलेबल स्मार्टफोन का है। इसी पेटेंट के हवाले से दावा किया जा रहा है कि एलजी के पास स्मार्टफोन सेक्टर में एंट्री ले सकता है। वैसे यह पहली बार नहीं है, जब एलजी की तरफ से ऐसा पेटेंट फाइल किया गया है। इससे पहले भी एलजी रोलेबल स्मार्टफोन लॉन्च कर चुका है। कंपनी ने इसे प्रोटोटाइप चरण तक भी पहुंचा दिया, लेकिन जब एलजी ने स्मार्टफोन बाजार से विदाई ले ली तो इन सभी प्रोजेक्ट को बंद कर दिया गया। एलजी ने अक्टूबर 2023 में पेश किया पेटेंट Techspot डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक एलजी ने साल 2022 में मिनी टैब डिजाइन पेश की, जिसकी डिस्प्ले 6.8-इंच से लेकर 7.4 इंच तक बढ़ सकती थी। इसमें 12GB रैम और 4,500mAh की बैटरी के साथ स्नैपड्रैगन 888 प्रोसेसर दिया गया था। एलजी का लेटेस्ट पेटेंट अक्टूबर 2023 में फाइल किया गया था। इस OLED डिस्प्ले में कुछ सुधार किये गये हैं। इसमें नए मैग्नेटिक टूल का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस डिस्प्ले के पीछे एक चुंबकीय शीट जोड़ी जाती है, जबकि चुंबक डिवाइस के फ्रेम में बनाए जाते हैं। यह चुंबकीय बल स्क्रीन को आगे बढ़ाने या पीछे खींचने पर बनने वाली किसी भी झुर्रियों को दूर करने में मदद करता है, जिससे डिस्प्ले तेजी अपनी पहले की स्थिति में आ जाती है। कंपनी ने नहीं जारी किया कोई ऑफिशियल बयान LG की तरफ से स्मार्टफोन मार्केट में एंट्री को लेकर कोई ऑफिशियल बयान नहीं जारी किया गया है।एलजी के स्मार्टफोन सेगमेंट में उतरा मुश्किल नहीं है। एलजी के पास ड्यूल स्क्रीन एलजी विंग, कर्व्ड LG G Flex और डिटैचेबल सेंकेड्री डिस्प्ले फोन LG 60 ThinQ टेक्नोलॉजी है।

अधिक मात्रा में टमाटर खाने पर स्वास्थ्य पर पड़ता है हानिकारक प्रभाव

टमाटर सेहत के लिए कई मायनों में फायदेमंद है। गूदेदार लाल टमाटर का इस्तेमाल दुनिया भर में कई व्यंजनों में किया जाता है। इसके अलावा सौंदर्य बढ़ाने और गर्मियों में टैनिंग को दूर करने के लिए भी टमाटर इस्तेमाल किया जाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो पराबैंगनी किरणों से त्वचा की सुरक्षा करता है। टमाटर न केवल भोजन के स्वाद को बढ़ा देता है, बल्कि त्वचा को भी सॉफ्ट रखता है। लेकिन अधिक मात्रा में टमाटर खाने पर स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। इससे पाचन संबंधी परेशानियों से लेकर डायरिया, किडनी की समस्याओं और यहां तक कि शरीर में दर्द भी हो सकता है। आइए जानते हैं अधिक टमाटर खाने से किन परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। अधिक टमाटर खाने से किडनी में स्टोन बन सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि टमाटर में भरपूर मात्रा में कैल्शियम और ऑक्जलेट होते हैं, जो शरीर में अधिक मात्रा में मौजूद होते हैं। इन्हें आसानी से मेटाबोलाइज नहीं किया जाता है और न ही शरीर से निकाला जा सकता है। ये तत्व शरीर में जमा होने लगते हैं, जिससे किडनी में स्टोन बनने लगता है। टमाटर में साल्मोनेला नामक बैक्टीरिया होता है। जब यह शरीर में प्रवेश करता है तो इसके कारण डायरिया हो सकता है। इस समस्या से बचने के लिए सीमित मात्रा में टमाटर का सेवन करना चाहिए। लाल गूदेदार टमाटर हर किसी को अच्छा लगता है। लेकिन स्वस्थ और फिट रहने के लिए सीमित मात्रा में ही टमाटर खाना चाहिए। ​ यह एक ऐसी समस्या है जिसमें व्यक्ति के रक्त में लाइकोपीन की मात्रा बढ़ जाती है जिससे त्वचा बदरंग सकती है। लाइकोपीन आमतौर पर शरीर के लिए अच्छा होता है लेकिन जब इसका सेवन 75 मिलीग्राम प्रति दिन से अधिक मात्रा में किया जाता है, तो इससे लाइकोपेनोडर्मिया हो सकता है। टमाटर के अधिक सेवन से जोड़ों में सूजन और दर्द हो सकता है। इसमें सोलेनिन नामक क्षार पाया जाता है। यह यौगिक ऊतकों में कैल्शियम का निर्माण करता है, जिसके कारण जोड़ों में दर्द और सूजन होती है। टमाटर में मैलिक एसिड और साइट्रिक एसिड होता है, जो पेट को अत्यधिक अम्लीय बनाता है। बहुत अधिक टमाटर खाने से पेट में अतिरिक्त गैस्ट्रिक एसिड उत्पन्न होता है जिसके कारण सीने में जलन या एसिड रिफ्लक्स हो सकता है। पाचन संबंधी समस्याओं से बचने के लिए सीमित मात्रा में टमाटर का सेवन करना चाहिए। टमाटर में हिस्टामिन नामक एक यौगिक होता है जिससे त्वचा पर चकत्ते या एलर्जी हो सकती है। टमाटर का अधिक सेवन करने से मुंह, जीभ और चेहरे पर सूजन, छींक आना, गले में जलन आदि जैसे गंभीर लक्षण हो सकते हैं। इसके कारण त्वचा से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं।

फेस्टिवल सेल: एप्पल मैकबुक एयर और अन्य लैपटॉप पर पाएं बेहतरीन डील्स

Amazon ग्रेट इंडियन फेस्टिवल सेल 2024 का सिस्टम इन दिनों काफी हाई है। क्योंकि इस सेल में आपको कई शानदार डील्स मिल रही हैं, जिससे आप भारी बचत भी कर सकते हैं। अगर आप इन दिनों कोई शानदार लैपटॉप लेना चाहते हैं, तो सेल के इस बेस्ट लैपटॉप ऑफर को चेक कर सकते हैं। इस ऑफर में आपको विंडोज के कई टॉप लैपटॉप के साथ ही Apple MacBook Air लैपटॉप पर भी काफी बेहतरीन डील मिल रही है। Amazon Big Sale में इन लैपटॉप पर 35% तक के डिस्काउंट के साथ ही कई अन्य सेविंग वाले ऑफर मिल रहे हैं। इस सेल में अगर आप आईसीआईसीआई बैंक, आईडीएफसी बैंक, एयू बैंक या एक्सिस बैंक क्रेडिट/डेबिट कार्ड से खरीदारी करते हैं तो आपको 10% तक अतिरिक्त बचत का लाभ भी मिल सकता है। इन लैपटॉप्स पर शानदार ऑफर हैं Acer Aspire Lite 12th Gen Intel Core i5-12450H Thin and Light Laptop: यह Acer Aspire Lite लैपटॉप 12वीं जनरेशन वाले हाई स्पीड सिस्टम के साथ आता है। यह लैपटॉप का पतला और हल्का डिजाइन काफी असालिटिव बना हुआ है। इस लैपटॉप का वजन सिर्फ 1.7Kg है, जिससे आप इसे आसानी से अपने साथ कैरी भी कर सकते हैं। इसका उपयोग लैपटॉप वर्कशॉप के साथ-साथ अध्ययन और मनोरंजन के लिए भी किया जा सकता है। इस लैपटॉप का डिज़ाइन भी काफी शानदार है। Apple MacBook Air Laptop: Apple M1 चिप: यह Apple Apple M1 चिप के साथ आता है, जो काफी पसंद और हाई स्पीड ऑफर देता है। इस Apple MacBook Air लैपटॉप में 13.3 इंच की स्क्रीन साइज दी जा रही है। यह लैपटॉप वर्कशॉप के लिए बिल्कुल सही और सर्वोत्तम माना जाता है। इसे आप 2908 रुपये की नो कॉस्ट ईएमआई पर ले सकते हैं। इस लैपटॉप पर 35% तक की छूट मिल रही है, जिससे आप बड़ी बचत भी कर सकते हैं। HP 15s Core i5 12th Gen (16GB RAM): यदि आप काम और अध्ययन के लिए शानदार लैपटॉप लेना चाहते हैं, तो HP 15s आपके लिए काफी बेहतरीन विकल्प हो सकता है। इस लैपटॉप में माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस 2021 का सपोर्ट मिल रहा है। यह लैपटॉप बैकलिट कीबोर्ड के साथ है, जिससे वर्कशॉप में आसानी से काम किया जा सकता है। इसकी फुल एचडी स्क्रीन भी काफी शानदार है। यह लैपटॉप सिल्वर कलर में आ रहा है। यह लैपटॉप का लुक भी काफी प्रीमियम है। लेनोवो V15 G2 15.6″ FHD एंटी-ग्लेयर बिजनेस लैपटॉप: बिजनेस प्रोफाइलर्स के लिए इस लेनोवो V15 G2 लैपटॉप को पोर्ट्रेट माना गया है। इस लैपटॉप में एचडी कैमरा और एचडी ऑडियो क्वालिटी है, जिससे आप वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग भी अच्छे से कर सकते हैं। यह लैपटॉप में फुल एचडी एंटी ग्लेयर स्क्रीन दी जा रही है। यह लाइवसेट के साथ ही Dell [Smartchoice] Core i3-1215U, 12th में आ रहा है Gen: इस Dell Smartchoice लैपटॉप के फीचर्स और फीचर्स काफी कमाल के हैं। इसमें लैपटॉप 8GB रैम और 512GB SSD के साथ आ रहा है। इसमें लैपटॉप 3 साइड नैरो बैजल्स भी शामिल है इसके साथ 2 ट्यून्ड स्पीकर भी काफी शानदार साउंड एक्सपीरियंस देते हैं। इस टॉप लैपटॉप की स्क्रीन क्वालिटी भी काफी शानदार है।

हाथ में है ये शंख योग तो जीवन में मिलती है शानो-शौकत

हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार, इंसान के हाथों की रेखाओं, नाखूनों, उंगलियों और हथेली के आकार के आधार पर उसके व्यक्तित्व, स्वास्थ्य, भविष्य और भाग्य यहां तक की करियर के बारे में जाना जा सकता है। हस्तरेखा विज्ञान ज्योतिष का ही एक प्राचीन अंग है। माना जाता है कि हथेली की प्रमुख रेखाएं जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं, जैसे विवाह, करियर और स्वास्थ्य के बारे में अहम जानकारी देती हैं। हथेली की रेखाओं के साथ पर्वत भी व्यक्ति के भविष्य के बारे में जानकारी देते हैं। यहां पर पर्वत का मतलब हथेली के अलग-अलग उभारे हुए हिस्सों से है। हमारी हथेली पर बने पर्वत को सूर्य, शुक्र, शनि, बुध, मंगल और चंद्रमा पर्वत के नाम से जाना जाता है। इनका अध्ययन करके व्यक्ति के भविष्य के बारे पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा हथेली पर कई तरह के निशान भी बने होते हैं, जिससे कई तरह के खास योगों का निर्माण होता है। जिस व्यक्ति की हथेली पर शुभ योग के निशान होते हैं, माना जाता है कि उनका जीवन बेहद सुखमय रहता है। आज हम आपको शंख योग के बारे में बताने जा रहे हैं। जिन लोगों के हाथ पर शंख योग बनता है, उस व्यक्ति के जीवन में खूब और धन भरपूर होता है। हथेली पर शंख योग हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, जिस व्यक्ति की हथेली पर शंख योग बनता है, उसे बहुत ही भाग्यशाली माना जाता है। दरअसल, हथेली में शुक्र पर्वत अच्छा हो और वहां से कोई रेखा निकलते हुए शनि पर्वत की ओर जाए वहीं दूसरी रेखा सूर्य पर्वत पर जाकर मिले तो इसे शंख योग कहा जाता है। शंख योग के लाभ हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, जिन व्यक्तियों की हथेली पर शंख योग बनता है, उन्हें जीवन में सभी तरह के भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। शंख योग से व्यक्ति के जीवन में कभी पैसों की कमी महसूस नहीं होती। ऐसे लोगों को बहुत ही कम प्रयासों में जल्दी सफलता मिल जाती है और समाज में इनको मान-सम्मान भी मिलता है। जीवनसाथी हस्तरेखा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की हथेली पर शंख योग बनता है, उन्हें सुंदर और समझदार जीवनसाथी भी मिलता है। इस तरह के लोग बहुत जल्द दूसरों के साथ घुल मिल जाते हैं और बेहद सरल स्वभाव के होते हैं। ऐसे लोगों को भगवान पर अटूट विश्वास होता है और ये लोग पूरे जीवन में भौतिकता और अध्यात्म का अच्छा तालमेल रख कर चलते हैं।

शश राजयोग से मिलेंगे करियर में अच्छे अवसर, सुख-सुविधाओं में होगी वृद्धि

शनि सभी ग्रहों में सबसे धीमी चाल से चलते हैं। जिस कारण से इनका प्रभाव जातकों के जीवन पर काफी लंबे समय तक रहता है। शनि को क्रूर ग्रह माना जाता है। ये जातकों को काफी मेहनत कराने के बाद ही फल प्रदान करते हैं। शनि एक राशि में करीब ढाई साल तक रहते हैं। इस तरह से पूरे राशिचक्र का एक चक्कर पूरा करने में शनिदेव करीब 30 साल का समय लेते हैं। आपको बता दें कि शनि अभी अपनी ही राशि कुंभ में विराजमान हैं और कुंभ राशि शनिदेव की मूल त्रिकोण राशि है। शनि के अपनी मूल त्रिकोण राशि में रहने के कारण पंच महापुरुष राजयोगों में एक शश राजयोग का निर्माण हुआ है। वैदिक ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कुंडली में शश राजयोग तक बनता है जब शनि लग्न या चंद्रमा से पहले, चौथे, सातवें और फिर दसवें में मकर, तुला और कुंभ राशि में स्थिति होते हैं। शश राजयोग के होने से कुछ राशि के जातकों की किस्मत का अच्छा साथ मिलेगा और कार्यो में सफलताएं हासिल होंगी। आइए जानते हैं इस राजयोग का सबसे ज्यादा लाभ किसे मिलेगा।   कुंभ राशि कुंभ राशि के जातकों के लिए शश राजयोग का बनना काफी लाभकारी है। इस योग के प्रभाव से आपके कार्यो में बाधाएं कम ही आएंगी। थोड़े से प्रयासों में ही आपको सफलता मिलेगी। धन लाभ के अवसरों में वृद्धि होगी। नौकरी के अच्छे अवसर मिलेंगे। जीवन में खुशियां आएंगी। संतान का सुख अच्छा मिलेगा। किसी खास योजना में आपको लाभ मिलेगा। मिथुन राशि इस राशि के जातकों पर शनि की विशेष कृपा रहेगी। कार्यक्षेत्र में अच्छा मुकाम हासिल होगा। धन लाभ के अवसरों में वृद्धि होगी। कार्यलय में आपको कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। व्यापार में अच्छा खासा मुनाफा हासिल हो सकता है। कमाई के कई अवसर मिलेंगे। आर्थिक स्थिति में मजबूती देखने को मिलेगी। आर्थिक परेशानियों से निजात मिलेगी। मकर राशि शनि आपकी राशि के दूसरे भाव में विराजमान हैं। ऐसे में आपकी सभी तरह की इच्छाएं पूरी होंगी। भाग्य का अच्छा साथ मिलने से आपके रूके हुए काम पूरे होंगे। वैवाहिक जीवन अच्छे से बीतेगा। जमीन-जायदाद संबंधी विवाद हल होंगे। वाहन के क्रय का भी योग बन रहा है। तुला राशि आपकी राशि में शनि देव पंचम भाव में मौजूद हैं। ऐसे में आपके मान-सम्मान और यश में बढोतरी होगी। नौकरीपेशा जातकों को करियर में सफलता मिलेगी। जो लोग किसी व्यापार से संबंध रखते हैं उनको अच्छा मुनाफा मिल सकता है। जो लोग अपनी नौकरी बदलने के बारे में सोच-विचार कर रहे हैं वे सफल हो सकते हैं। शिक्षा में सफलता हासिल हो सकती है।    

ये 5 हर्बल ड्रिंक्स प्राकृतिक रूप से करेंगे आपके रक्त को शुद्ध

हम जो कुछ भी खाते या पीते हैं। उनके पोषक तत्व शरीर के हर हिस्से में पहुंचाने का काम खून करता है। खून ही शरीर में ऑक्सीजन का संचार और कार्बन डाइऑक्साइड को शरीर से बाहर निकलने का काम करता है। यदि खून में टॉक्सिंस जमा होने लगे तो कई गंभीर बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर खून साफ होता है तो त्वचा पर कील, मुंहासे इत्यादि समस्याएं कम होती हैं। वहीं अगर खून अशुद्ध हो तो यह त्वचा के पोर्स को ब्लॉक कर सकता है। खून को साफ रखने के लिए नेचुरल हर्बल ड्रिंक का सेवन बहुत फायदेमंद हो सकता है। यह हमारे स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं। जीवा आयुर्वेद, निदेशक, डॉ. प्रताप चौहान के मुताबिक, साफ खून हमारे शरीर के इम्यूनिटी सिस्टम को बूस्ट करता है लेकिन अगर यह अशुद्ध हो तो बीमारियों से लड़ने की ताकत कम होने लगती है। खून अगर साफ ना हो तो शरीर से अपशिष्ट पदार्थ को निकालने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। गिलोय का रस कॉविड-19 के दौरान गिलोय की लोकप्रियता काफी बढ़ गई। यह इम्यूनिटी को बढ़ाने में बहुत असरदार है। इसका सेवन करने से हमारा खून साफ होता है और शरीर में जमे हुए टॉक्सिंस बाहर निकलते हैं। यह शरीर को संक्रमण से बचाती है। गिलोय के रस का सेवन करने से शरीर में मौजूद हानिकारक वायरस और बैक्टीरिया समाप्त होते हैं। गिलोय की डंडियों को पीसकर रस निकाल लें और एक गिलास पानी में मिलाकर सुबह खाली पेट पिएं। आंवला और एलोवेरा जूस आंवला और एलोवेरा दोनों में ही ढेर सारे प्राकृतिक गुण मौजूद होते हैं। आंवला में विटामिन सी पाया जाता है, जो शरीर के खून को साफ करता है और इम्यूनिटी मजबूत बनाता है। वही एलोवेरा में डीटॉक्सिफाइंग गुण पाए जाते हैं। यह शरीर के टॉक्सिंस को बाहर निकालता है और खून को साफ करता है। एक कप एलोवेरा जूस और एक कप आंवले का रस मिलाकर इसे सुबह खाली पेट पिएं। नीम का रस नीम में एंटीबैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण पाए जाते हैं। यह खून को साफ रखता है और शरीर में जमा होने वाले विषैला पदार्थ को निकालता है। खून में जमी हुई अशुद्धियों को दूर करने के लिए यह बेहद कारगर है। इसका सेवन करने के लिए नीम की ताजा पत्तियों को धोकर पीस लें और थोड़ा पानी मिलाकर इसे अच्छे से छान लें और इस रस को खाली पेट पिएं। हल्दी और अदरक की चाय अदरक का सेवन करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन में सुधार होता है और यह शरीर में जमा हुए टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद करता है। हल्दी एक एंटीऑक्सीडेंट है। इसमें करक्यूमिन पाया जाता है, जो खून को साफ करता है और शरीर में होने वाले सूजन को भी दूर करता है। हल्दी और अदरक की चाय पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। इसमें थोड़ा शहद मिलाकर भी इसे पी सकते हैं। तुलसी का रस आयुर्वेद में तुलसी को बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।तुलसी की पत्तियों में एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर से टॉक्सिंस को बाहर निकालने का काम करते हैं। इसके सेवन से खून साफ होता है और लिवर के कार्य करने की क्षमता बढ़ती है। 10 से 12 तुलसी की ताजी पत्तियों को पीसकर छान लें। सुबह खाली पेट तुलसी के रस को पीने से आपको कई फायदे होंगे।

बेहद जरूरी है अच्छी कम्युनिकेशन स्किल

सकारात्मक वार्तालाप के लिए अच्छी कम्युनिकेशन स्किल बेहद जरूरी है। आपकी यह क्षमता सामने वाले पर खासा असर छोड़ती है। सकारात्मक संप्रेषण वही होता है, जिसके जवाब में पॉजिटिव जवाब और प्रतिक्रियाएं आएं। सकारात्मक व्यवहार खराब भावनाओं को अच्छी भावनाओं में बदलने और आपको अपने लिए एक पॉजिटिव इमेज बनाने में मदद करता है, इसलिए उम्मीद का दामन थामें रहें। कुछ जरूरी टिप्स जानिए यहां, जो दूसरों से व्यवहार के दौरान आपके काम आएंगे… विकल्प न हों कम किन्हीं कारणों से कुछ कामों को कर पाना मुमकिन नहीं होता, उन कारणों की तलाश करें और विकल्प व निवारण सुझाएं। सीधे तौर पर मना कर देना आसान है, परंतु उससे कोई हल नहीं निकलता। विकल्प और निवारण सुझाने पर आपकी छवि ऐसे व्यक्ति की बनती है, जो अतिरिक्त प्रयास कर सकता है। विनम्रता जब किसी को कोई काम करने के लिए कहें या मना करें तो विनम्रता से कहें। ऐसे मामले में शब्द चयन बहुत ध्यान से करना होता है। तू जैसे शब्द तो बिल्कुल इस्तेमाल नहीं करने चाहिए। कोई भी जोर-जबरदस्ती पसंद नहीं करता, इसलिए आवाज ज्यादा ऊंची न रखते हुए अपनी बात कहें। यह न केवल सकारात्मक रहेगा, बल्कि प्रेरणादायक भी होगा। नकारात्मक शब्दों को न देखा जाए तो यह कहना जितना आसान है, उसे अपनाना उतना ही मुश्किल, लेकिन अभ्यास से इस पर सफलता पाई जा सकती है। नहीं, बिल्कुल नहीं, कभी नहीं जैसे शब्दों को अपने वार्तालाप का हिस्सा न बनाएं। अपने कहे वाक्यों को कुछ ऐसा रूप दें कि नकारात्मक शब्द कहे बिना उनका अर्थ वाक्य में स्पष्ट हो जाए। उदाहरण के लिए, यदि आप यह वस्तु उपलब्ध नहीं कराएंगे तो काम होना नामुमकिन है, के स्थान पर कहें, यदि आप यह वस्तु मंगा देते हैं तो काम रिकॉर्ड समय में पूरा हो जाएगा। सकारात्मक पहलू कुछ परिस्थितियों में नकारात्मक पक्ष हावी रहता है, लेकिन उनमें कुछ सकारात्मक पक्ष भी होते हैं। उन बिंदुओं को तलाशें। सकारात्मक व्यवहार और दृष्टिकोण जरूरी है। उदाहरण के लिए, यदि कोई आपके पास नौकरी मांगने आता है और आपके पास उससे मिलने का समय नहीं है तो मिलने से मना करने की बजाय उससे विनम्रता से अपनी मजबूरी बता दें और भविष्य में शीघ्र ही मिलने का वादा करें। मददगार बनें एक मददगार व्यक्तित्व से अधिक सकारात्मक और कोई नहीं होता। हालात कितने भी नकारात्मक हों, अपने साथियों को कहें कि अच्छे निष्कर्ष के लिए आप जो संभव होगा, करेंगे। ऐसा करना न केवल सहकर्मियों में स्फूर्ति लाएगा, बल्कि वे आपके व्यक्तित्व के इस पक्ष को भी हमेशा ध्यान रखेंगे। हम सब जानते हैं कि करियर में सफलता के लिए सकारात्मक छवि कितनी जरूरी होती है, इसलिए सकारात्मक पक्षों को अपने व्यवहार का हिस्सा बनाएं। फिर आपकी खुद हैरानी होगी कि सकारात्मकता किस तरह आपको तरक्की के मार्ग पर ले जाती है।  

सरकारी नौकरी का संकेत देती है आपकी हथेली की ये रेखा, शानों-शौकत से कटता है जीवन

हमारी हथेली पर मौजूद हर आड़ी तिरछी रेखा हमारे जीवन और भविष्य के बारे में कोई न कोई जानकारी देती हैं। इन रेखाओं के आधार पर हस्तरेखा विज्ञान की मदद से हम अपने जीवन के बारे में जान सकते हैं। हस्तरेखा शास्त्र में इन रेखाओं के बारे में गहराई से बताया गया है। हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार, हथेली पर उभरे हुए भागों को पर्वत कहा जाता है, जो ग्रहों से संबंधित होते हैं और हमारे व्यक्तित्व, भाग्य और जीवन की घटनाओं को भी प्रभावित करते हैं। कई बार कुछ लोगों के हाथ में ऐसे राजयोग बनते हैं, जो उनको जीवन में कई तरह के लाभ पहुंचाते हैं। ऐसे राजयोग की वजह से व्यक्ति राजा जैसा जीवन व्यतीत करता है। इन्हीं में से एक सिंहासन राजयोग भी होता है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, सिंहासन राजयोग कई प्रकार के होते हैं। जिन लोगों की कुंडली में सिंहासन राजयोग होता है, उनके लिए सरकारी नौकरी मिलने की संभावना बढ़ जाती है। कैसे बनता है हाथ में सिंहासन राजयोग जिस व्यक्ति की कुंडली में दशम भाव का स्वामी कुंडली में पहले, चौथे, सातवें या दसवें भाव में बैठा हो तो सिंहासन राजयोग बनता है। अगर दसवें भाव का स्वामी दूसरे घर या फिर पंचम और नौवें घर में हो तो भी सिंहासन राजयोग बनने की संभावना रहती है।  इस योग को बेहद शुभ माना जाता है। ऐसे व्यक्ति का जीवन वह राजा की तरह व्यतीत होता है। सिंहासन राजयोग बनने पर व्यक्ति अपनी मेहनत से जिंदगी में नाम कमाता है। माना जाता है कि ऐसे लोग मेहनत करने से कभी पीछे नहीं हटते है। साथ ही ऐसे लोगों को अपनी जिम्मेदारी निभाना भी बखूबी आता है। सिंहासन राजयोग के प्रभाव सिंहासन राजयोग वाले लोग अपना ही नहीं बल्कि अपने परिवार के लोगों का भी नाम उंचा करते हैं। ऐसे लोगों को कभी भी आर्थिक परेशानी नहीं होती है। इन लोगों को ज्यादा परिवर्तन पसंद नहीं है। इसके अलावा इन्हें अच्छा सलाहकार भी माना जाता है।

क्रोध को वश में करने से जीवन सहज और सरल हो जाता है

आमतौर पर, हम क्रोध या घृणा की ज्यादा परवाह नहीं करते। इसलिए यह सहजता से आ जाते हैं।यदि हम इन भावनाओं के विषय में सजग हो जाएं, तो हमारा क्रोध व घृणा के प्रति इस अनिच्छापूर्ण रुख से ही जीवन सहज और सरल हो जाए। घृणा के विनाशकारी प्रभाव स्पष्ट और तुरंत दिखाई दे जाते हैं। उदाहरण के लिए, जब आपके अंदर घृणा का अत्यंत तीव्र भाव उत्पन्न होता है, तो उसी क्षण, वह आपके ऊपर पूरी तरह से हावी हो जाता है और आपकी मानसिक शांति को भंग कर देता है; आपकी बुद्धि काम करना बंद कर देती है। क्रोध और घृणा के तीव्र भाव आपके दिमाग के सबसे बेहतरीन हिस्से, यानी सही व गलत तथा आपके कार्यों के अल्पकालिक व दीर्घकालिक प्रभावों में अंतर करने की क्षमता को बिलकुल मिटा देते हैं। निर्णय लेने की योग्यता पूरी तरह निष्क्रिय हो जाती है। आप लगभग पागल जैसे हो जाते हैं। यह क्रोध और घृणा आपको दुविधा की स्थिति में डाल देते हैं, जिससे आपकी समस्याएं और परेशानियां और बढ़ जाती हैं। शारीरिक स्तर पर भी, घृणा से व्यक्ति में बहुत गंदा, अनाकर्षक शारीरिक बदलाव आ जाता है। क्रोध व घृणा के तीव्र भाव जाग्रत होने पर, व्यक्ति कितना भी अच्छा दिखने की कोशिश करे, उसका चेहरा भद्दा और विरूपित दिखाई देता है। घृणा की तुलना शत्रु से की जाती है। यह भीतरी दुश्मन नुकसान पहुंचाने के अलावा कुछ नहीं करता। यह हमारा पक्का दुश्मन, हमारा सबसे बड़ा शत्रु है। यह हमें तात्कालिक और दूरगामी दोनों तरह से नष्ट करता है। यह सामान्य शत्रु से बहुत अलग है। हालांकि कोई आम शत्रु, जिसे हम अपना शत्रु मानते हैं, हमें हानि पहुंचानेवाले काम करता है, उसके पास कम-से-कम कुछ और भी काम होते हैं; वह व्यक्ति खाता है, सोता है। इसलिए उसके पास अन्य कार्य होते हैं और वह चौबीसों घंटे हमें नुकसान पहुंचाने का काम नहीं कर सकता। परंतु घृणा के पास हमें नष्ट करने के अतिरिक्त कोई और काम, कोई अन्य उद्देश्य नहीं होता। इस बात को समझकर, हमें यह दृढ़ निश्चय करना चाहिए कि हम अपने इस शत्रु को, घृणा को अपने अंदर उत्पन्न होने का अवसर नहीं देंगे। कुछ लोग अतीत में उनके साथ किए गए गलत कार्य के कारण क्रोध एवं घृणा के भाव अपने अंदर पालते हैं और यह भाव उनके अंदर बंद रहते हैं। लेकिन हमें इन्हें अपने अंदर बंद रखने की जगह उन्हें बाहर निकलने देना चाहिए। हालांकि, आमतौर पर क्रोध और घृणा ऐसे भाव हैं, जिन्हें यदि आप यों ही अनियंत्रित रहने दें, तो वे बढ़ते जाते हैं। यदि आप इन भावों को जाग्रत होने पर इन्हें अभिव्यक्त करने की आदत डाल लें तो भी ये कम होने की बजाय बढ़ जाते हैं। आप जितना सावधान रहकर और सक्रिय रूप से इनकी तीव्रता को कम करने की कोशिश करेंगे, उतना ही बेहतर होगा। हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम क्रोध को अपने वश में करें, न कि क्रोध के वश में हों। क्रोध को वश में करते ही जीवन सहज और सरल हो जाता है।

मुंहासों वाली त्वचा के लिए घर पर बनाएं नीम फेस वॉश

महिलाएं हों या पुरुष, एक्ने, फोड़े-फंसियों और चेहरे पर रह जाने वाले उनके दागों से हर कोई परेशानी रहती है। यूं तो ठीक करने के लिए हम कई तरह के फेस वॉश का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन असर के साथ-साथ ये त्वचा खराब भी हो सकती है। जैसे त्वचा में रूखापन आना, रेडनेस या इर्स्ट्रक्शन होना आदि। हम चाहते हैं कि आपको ऐसी कोई परेशानी न झेलनी पड़े। इसलिए आज हम आपको स्किन मस्क को ठीक करने वाले नीम से बनाने वाले फेस वाश की रेसिपी बताने वाले हैं। जिसे बनाना भी आसान है और ये आपकी त्वचा की सभी समस्याओं को खत्म कर देगा, उसे एक बार फ्री और ग्लोइंग बनाएंगा। आइए जानते हैं इसे बनाने का तरीका। चेहरे के लिए नीम के फायदे नीम में एंटी वैज्ञानिक गुण होते हैं जो हमारे चेहरे पर होने वाले एक और इससे जुड़े वीडियो वाले को प्रतिबंधित करने का काम करता है। साथ ही ब्लैकहेड्स, वाइटहेड्स, खुजली और पोर्स को साफ करने में भी मदद मिलती है। नीम के चमड़े के कंकाल के लिए बहुत ज्यादा स्वादिष्ट हैं कि आप इसे पेस्ट करने वालों के चेहरे पर भी लगा सकते हैं और अपने कंकाल के कंकाल से अकेले पा सकते हैं। फेस वॉश बनाने के लिए क्या करना चाहिए? नीम पाउडर- 3 चम्मच पानी- 2 कप सोप बेस- 2 क्यूब ग्लिसरीन- 1 चम्मच तेल- 5 चम्मच नोट- पहले नीम फेस वॉश कम मात्रा में ही निकालें और निशान लगाएं। अगर ये आपकी खाल को सूट करता है तो अगली बार ज्यादा मात्रा में बना लें। ऐसे तैयार करें फेस वॉश एक पैन लें और इसमें पानी और नीम पाउडर शामिल है, महान से सिलिकॉन के लिए रखें। पानी को तब तक लेबलें जब तक कि वो 2 कप से 1 कप ना रह जाए। अब नीम के इस पानी को अच्छा करके अलग कर लें। अब इस गर्म पानी में सोपबेलेस कैथेड्रल महान से मिक्स कर लें। जब ये कूल हो जाए फेस वॉश को एक बोतल में मांग लें। अब आप जब भी इससे जुड़ें तो उसके बाद किसी महान कलाकार का इस्तेमाल करना ना भूलें। इससे आपके चेहरे पर चमक और मुलायमपन बना रहेगा। टी ट्री ऑयल के स्किन बेनिट्स ट्री ऑयल एक ऐसा तेल है जो दाग-धब्बों को कम करने में मदद करता है साथ ही इसमें मौजूद एंटी-फंगल गुण चेहरे पर होने वाले पस वाले फोड़े-फंसियों को बढ़ाने से शुरू होता है और उन्हें ठीक करता है ।। इसके अलावा चेहरे पर जमी गंदगी को साफ करने के लिए भी ये बहुत बड़ा कमाल है। चेहरे पर ग्लिसरीन लगाने के फायदे कई सौंदर्य उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले ग्लिसरीन हमारे चेहरे पर आई वसा को ठीक करने, एजिंग साइनस को कम करने, पोर्स के आकार को अधिक बढ़ने से रोकते हैं और चेहरे पर चमक लाने के लिए हानिकारक होते हैं। लेकिन इस बात का भी ध्यान रखें कि इसका उपयोग सीधे तौर पर नहीं किया जा सकता है, इसलिए आप इसे किसी भी नुस्खे के साथ ही इस्तेमाल कर सकते हैं।

लेक्चररशिप : एक सदाबहार आकर्षक पेशा, जानें योग्यता और भर्ती प्रक्रिया

लेक्चरर बनने के लिए आपके पास मास्टर्स डिग्री के बाद पीएचडी या नेट जैसे विकल्प हैं। यह एक ऐसा करियर है, जो आपको समाज में सम्मान के साथ बेहतर जीवन और वित्तीय लाभ देता है। आप कैसे लेक्चरर बन सकते हैं, बता रहे हैं करियर कंसल्टेंट अशोक सिंह… आपको जानकर आश्चर्य होगा कि अधिकांश लोगों को यह जानकारी ही नहीं है कि हमारे देश में उच्च शिक्षा का मजबूत और विशाल नेटवर्क है। यही कारण है कि विदेशी छात्र भी भारी संख्या में यहां पर अध्ययन करने आते हैं। हालांकि यह पहचान तो प्राचीन काल से ही बनी हुई है। नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालय प्राचीन भारत के अत्यंत ख्यातिप्राप्त शिक्षण संस्थान थे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्तमान में देश में कुल 867 विश्वविद्यालय मौजूद हैं। इनमें 47 केंद्रीय विश्वविद्यालय, 389 राज्य विश्वविद्यालय, 124 समतुल्य या डीम्ड यूनिवर्सिटीज तथा 307 निजी यूनिवर्सिटीज शामिल हैं। इनके अलावा केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय भी हैं। एक मोटे अनुमान के अनुसार इनके अलावा 40 हजार से अधिक कॉलेज भी देश के विभिन्न प्रांतों में स्थित हैं। इस विशाल शिक्षा तंत्र में लाखों की संख्या में लेक्चरर या असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत हैं, जिनका दायित्व यहां अध्ययनरत छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाना है। प्रति वर्ष हजारों की संख्या में इन पदों की रिक्तियां भरी जाती हैं। अहम हैं लेक्चरर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में अध्यापन का कार्यभार लेक्चरर समुदाय पर होता है। इसलिए अध्ययन-अध्यापन और शोध कार्यों में गहन दिलचस्पी रखने वाले लोगों को ही बतौर लेक्चरर नियुक्त किया जाता है। सरलतम भाषा में कहें तो छात्रों को विषय की बारीकियां समझाने तथा विषयों के प्रति लगाव विकसित करने की जिम्मेदारी इन्हीं लेक्चरर की होती है। यहां यह उल्लेख करना भी प्रासंगिक होगा कि समय के साथ इन पाठ्यक्रमों में नई अवधारणाओं को शामिल किया जाता है। इन नए विषयों को छात्रों को पढ़ाने से पहले लेक्चरर को स्वयं भी तैयारी करने में वक्त लगाना पड़ता है। यही नहीं, नए पाठ्यक्रम तैयार करना, छात्रों को आवश्यक नोट्स देना, ट्यूटोरियल की जांच करना आदि भी अध्यापन के अलावा इनके दैनिक कार्यकलापों का हिस्सा होता है। गुरु मंत्र अपने विषय से संबंधित किताबें पढ़ना और नई जानकारियों को आत्मसात करना, स्वयं को एक कुशल लेक्चरर के तौर पर स्थापित करने के लिए अति आवश्यक है। इस कार्य को एकरस नजरिएसे नहीं देखा जाना चाहिए। अध्यापक का काम छात्रों की समस्याओं को दूर करना और उन्हें अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करना है। यह तभी होगा, जब लेक्चरर विषय संबंधी ताजा जानकारी से भी अपडेट रहें। छात्रों के साथ दोस्ताना रहते हुए धैर्य और संयम को बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। आम गलतियां देखने में आता है कि नेट परीक्षा देने वाले पेपर-1 को हल्के में लेते हैं और सारा समय पेपर-2 की तैयारी में लगा बैठते हैं। यह बिल्कुल गलत सोच है। पेपर-1 के 100 अंक तथा पेपर 2 के 200 अंक होते हैं। इनकी एक साथ तैयारी करनी चाहिए। शैक्षिक योग्यता लेक्चररशिप के लिए काफी कड़ी शर्तों की कसौटी से आवेदकों को गुजरना पड़ता है। इसमें मास्टर्स डिग्री का होना, नेट परीक्षा में पास होना आदि सर्वाधिक महत्वपूर्ण शर्तें हैं। नेट परीक्षा वर्ष में दो बार (जून और दिसंबर) में आयोजित की जाती है। इस परीक्षा में मुख्य तौरपर अभ्यर्थी द्वारा चुने गए विषय तथा टीचिंग व रिसर्च एप्टिट्यूड पर आधारित प्रश्न होते हैं, जिनके माध्यम से प्रत्याशियों की शिक्षण क्षमता एवं उसके द्वारा चुने गएविषय की जानकारी, बुनियादी समझ आदि का मूल्यांकन किया जाता है। नेट परीक्षा केंद्र सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय के अधीन कार्यरत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), नई दिल्ली द्वारा वर्ष में दो बार नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) का आयोजन किया जाता है। अमूमन जून और दिसंबर माह में साल में दो बार इस परीक्षा का संचालन किया जाता है। इसमें शामिल होने के लिए मास्टर्स डिग्री के स्तर पर कम से कम 55 प्रतिशत अंक अवश्य होने चाहिए। परीक्षा का मुख्य उद्देश्य देश की यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में अध्यापन और शिक्षा के स्तर को बनाए रखने के लिए न्यूनतम शैक्षिक मानदंडों को सुनिश्चित करते हुए लेक्चरर पदों के लिए उपयुक्त प्रत्याशियों का आकलन करना है। मानविकी विषयों, सोशल साइंसेज, कंप्यूटर साइंस, एनवायर्नमेंटल साइंस, इलेक्ट्रॉनिक साइंस आदि कईएक विषयों में इस परीक्षा का आयोजन किया जाता है। विज्ञान विषयों के लिए यूजीसी-सीएसआईआर-नेट का आयोजन होता है। जॉब्स देश में स्थित विभिन्न विश्वविद्यालयों/कॉलेजों में लेक्चरर की नियुक्तियां बड़े पैमाने पर की जाती हैं। केंद्र सरकार के फर्स्ट क्लास गैजेटेड ऑफिसर पद के समकक्ष ही शुरुआती वेतनमान और अन्य भत्ते होते हैं। देश में हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज की स्थापना के बाद युवाओं के लिए नेट परीक्षा पास करने के बाद लेक्चरर के रूप में करियर संवारने के अवसरों की संख्या में काफी वृद्धि देखने को मिली है। बाद में अनुभव और पदोन्नति के साथ प्रोफेसर के पद तक भी पहुंचा जा सकता है। लेक्चररशिप के आकर्षण सबसे बड़ी बात तो यही है कि दिन भर में तीन-चार क्लासेज ही पढ़ाने की बाध्यता होती है। इसके बाद के समय का उपयोग लिखने-पढ़ने अथवा शोध में लगाया जा सकता है। यही नहीं, अधिकांश यूनिवर्सिटीज में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह होने के कारण सप्ताहांत में दो दिनों का अवकाश मिल जाता है। इनकी अवकाश प्राप्ति की आयु सामान्य तौर पर 62 वर्ष है, जबकि 3 वर्ष और एक्सटेंशन का भी प्रावधान है। सर्विस के दौरान पीएचडी करने के लिए वेतन सहित स्टडी लीव की भी व्यवस्था होती है। अन्य पेशों की तुलना में तनाव भी कम होता है। कैसे करें नेट की तैयारी -परीक्षा से कम से कम एक साल पहले से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। -नेट परीक्षा के पैटर्न को भली-भांति समझें और सिलेबस की प्रति पहले से हासिल कर लें। -इससे संबंधित बीते वर्षों के पेपर्स देखें और महत्वपूर्ण टॉपिक्स की पहचान करें। -मास्टर्स डिग्री में पढ़े गए सिलेबस पर ही ज्यादा ध्यान दें। -भरसक प्रयास करें कि सिलेबस में दिए गए, सभी टॉपिक्स को तैयारी के दौरान आप कवर करें। -परीक्षा के नए सिलेबस और उसके बदलावों को समझें और तैयारी उसी के अनुसार करें। -नेट एग्जाम की तैयारी पर आधारित एक या दो महत्वपूर्ण पुस्तकों से ही … Read more

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