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75 करोड़ सम्पत्ति के मालिक हैं शिवराज सिंह के चाहते सीहोर विधायक सुदेश राय

Shivraj Singh Chouhan’s favourite Sehore MLA Sudesh Rai owns property worth crores भोपाल। Sehore MLA Sudesh Rai साल 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने वाले 230 विधायकों में 205 करोड़पति हैं। विधायकों की संपत्ति साल दर साल बड़ी है। मध्य प्रदेश के सबसे अमीर विधायकों की सीरीज में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिला सीहोर के विधायकों की सम्पत्ति कई गुना बड़ी है। Sehore MLA Sudesh Rai 74.71 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं, जो सीहोर सीट से 3 बार चुनाव जीत चुके हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में सुदेश राय ने अपनी संपत्ति 74 करोड़ 71 लाख 38 हजार 89 रुपये बताई थी, जबकि उनकी देनदारी 2 करोड़ 75 लाख 7 हजार 785 रुपये थी। राय की संपत्ति 5 साल में 7.20 करोड़ रुपये बढ़ गई है। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी संपत्ति 67 करोड़ 51 लाख 29 हजार 525 रुपये बताई थी। चुनावी हलफनामे के अनुसार, सुदेश राय के नाम पर 24.17 करोड़ रुपये की 59.125 एकड़ खेतीहर जमीन है, जबकि उनकी पत्नी के नाम भी 4.04 करोड़ रुपये की कृषि भूमि है। इसके अलावा उनके पास 21.33 करोड़ रुपये और उनकी पत्नी के नाम पर 96.42 लाख की नॉन-एग्रीकल्चर जमीन है। सुदेश राय के नाम पर सीहोर में 1.09 करोड़ रुपये का एक घर है, जो 3472 स्क्वायर फीट में बना है। उनके पास सीहोर में इंदौर-भोपाल रोड पर एक कमर्शियल बिल्डिंग भी है, जिसकी कीमत उन्होंने एफिडेविट में 10.51 करोड़ रुपये बताई थी। सुदेश राय को महंगी कार का भी शौक है। चुनावी हलफनामे में उन्होंने 2 कारों का जिक्र किया था। इसमें 21.74 लाख रुपये की कीमत की फोर्ड एंडेवर और 1.29 करोड़ रुपये की मर्सडीज शामिल है। सुदेश राय के पास 200 ग्राम सोना है, जिसकी कीमत 2023 में उन्होंने 11 लाख रुपये बताई थी। उनकी पत्नी के पास 500 ग्राम सोना है, जिसकी कीमत 27.5 लाख रुपये बताई थी। उनकी पत्नी के पास 2 किलो 70 ग्राम चांदी भी है, जिसकी कीमत साल 2023 में 1.5 लाख रुपये थी। Sehore MLA Sudesh Rai ने 2013 में पहली बार निर्दलीय चुनाव लड़ा था और जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद 2018 और 2023 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं।

एमपी में जल संकट, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण, नल जल योजना पूरी तरह फेल

tap water scheme fails completely

Water crisis in MP, villagers yearn for every drop of water, tap water scheme fails completely सीहोर ! आष्टा ब्लॉक मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर ग्राम नानजीपुरा ग्राम पंचायत कुरली कला इस ग्राम के लोग आज भी बूंद-बूंद पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं. इस गांव में पीएचई विभाग की नल जल योजना पूरी तरह फेल हो गई है. इस ग्राम में पीएचई विभाग के बोर से पाइपलाइन में पानी नहीं जा रहा है. पाइपलाइन जगह-जगह से फट चुकी है. ग्रामीणों ने बार-बार पीएचई विभाग को अवगत करवाया. साथ ही 181 पर भी शिकायत की, लेकिन आज तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. पीएचई विभाग के अधिकारी भी गांव का दौरा करके आ गए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पाई. पुराने प्रयास, अधूरे वादे लगभग दो वर्ष पूर्व, ग्राम की महिलाएं खाली मटके लेकर आष्टा पहुंची थीं और उस समय के जिला पंचायत अध्यक्ष तथा वर्तमान विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर को आवेदन सौंपा था. विधायक के निर्देश पर गांव में एक बोर खनन भी हुआ, लेकिन उसमें पानी नहीं निकला. उसी दिन ग्रामीणों ने तत्कालीन विधायक रघुनाथ सिंह मालवीय को भी आवेदन दिया था, जिनके निर्देश पर ग्राम में मनरेगा योजना के अंतर्गत एक कुएं का निर्माण शुरू हुआ, पर दुर्भाग्यवश वह कुआं आज भी अधूरा पड़ा हुआ है. महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से कुआं पूर्ण होना था लेकिन आज तक यह कुआं अधूरा पड़ा हुआ है. अगर इस कुआं की पूर्ण गहराई हो जाती तो आज ग्रामीणों को पीने का पानी मिल जाता इन सभी समस्याओं को लेकर 2 साल बाद आज फिर ग्राम नानजीपुरा की महिलाएं क्षेत्रीय विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर के कार्यालय पहुंची वहां पर पीने के पानी की व्यवस्था हेतु अपनी बात रखी. महिलाओं ने अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन इसके साथ ही सभी महिलाएं तहसील कार्यालय पहुंचीं. वहां पर तहसीलदार महोदय को ज्ञापन देकर पीने के पानी की व्यवस्था करवाने की बात कही. परेशान महिला पीएचई विभाग के दफ्तर भी जा पहुंचीं. पीएचई विभाग की मैडम ने कहा कि मैं ठेकेदार से बात करके आपके गांव की नल जल योजना ठीक करवाती हूं. साथ ही पीएचई विभाग के ब्लॉक समन्वयक मंगलेश दुबे ने भी विश्वास दिलाया कि कल हम सभी लोग आपके ग्राम नामजीपुरा में आएंगे और नल जल योजना को देखेंगे और जल्द ही इसका निराकरण करवाएंगे. अब यह देखना होगा कि क्या संबंधित विभागों के अधिकारी और ठेकेदार इन निर्देशों का पालन करते हैं या फिर नानजीपुरा के ग्रामीणों को आने वाले दिनों में भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते रहना पड़ेगा. ग्रामीणों की आशाएं एक बार फिर जागी हैं, लेकिन उनकी उम्मीदों पर अमल कब तक होगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा.

सलकनपुर देवी मंदिर रोप-वे पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा से खिलवाड़

compromised at salkanpur devi mandir ropeway

the safety of devotees is being compromised at salkanpur devi mandir ropeway सीहोर ! नवरात्र के दूसरे दिन सलकनपुर स्थित मा विजयासन देवी मंदिर में करीब 38 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए है। सोमवार को सलकनपुर देवी मंदिर के रोप-वे का एक आपत्तिजनक वीडियो भी सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल – वीडियो में सुरक्षा नियमों को दरकिनार कर दो युवक रोप-वे की बोगी के ऊपर बैठे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने संज्ञान देते हुए रोप-वे संचालक को फटकार लगाई है। रोप-वे संचालक का तर्क है कि यह रोप-वे का मेंटेनेंस करने वाले कर्मचारी थी, रूटीन चैकिंग कर रहे थे। जानकारी के अनुसार नवरात्र मेला के चलते रोपवे पर भीड़ हैं। सुबह 4 से रात 10 बजे तक रोपवे चल रहा है, एक दिन में करीब 900 श्रद्धालु रोपवे के माध्यम से देवी मंदिर परिसर तक आते-जाते हैं। रोप-वे का 120 रुपए प्रति सवारी के हिसाब से किराया फिक्स है, एक बोगी में 6 लोग बैठते हैं। सलकनपुर देवी मंदिर रोपवे प्रभारी राजू श्रीवास्तव का कहना है कि मेला के दौरान सुरक्षा की दृष्टि से हर घंटे रोप-वे की जांच की जाती है। वीडियो रविवार का है, कर्मचारी रूटीन चैकिंग कर रहे थे। श्रीवास्तव का तर्क है कि बोगी के ऊपर बैठे कर्मचारी सेफ्टी बेल्ट लगाए हुए थे। बुदनी एसडीओपी रवि शर्मा ने बताया कि रोप-वे संचालक को हिदायत दी है कि वह बिना सुरक्षा इंतजाम के रूटीन चेकिंग नहीं करें। सामान्य गति से चल रहा ट्रैफिकः मां विजयासन देवी के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए अल सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरु हो जाता है। श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना एवं दर्शन में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हो, इसके लिए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। पर्याप्त पार्किंग होने के चलते ट्रैफिक सुचारु रहा है। सोमवार को दिनभर लोग आवाजाही करते दिखे। ट्रैफिक नियंत्रण के लिए पुलिस की तरफ से पर्याप्त बल तैनात किया गया है। पुलिस की तरफ से लाउ डस्पीकर की मदद से निरंतर निर्देश प्रसारित किए जा रहे हैं जिससे ट्रैफिक जाम नहीं हो। मेडिकल सहायता का लाभ ले रहे श्रद्धालुमंदिर परिसर में स्वास्थ्य परीक्षण के लिए हेल्थ कैंप लगाया है। सोमवार को करीब 80 व्यक्तियों ने परीक्षण कराया। ज्यादातर मरीज धूप के कारण घबराहट होने पर जांच कराने गए थे। प्रशासन की तरफ से मंदिर परिसर में हेल्प डेस्क भी बनाया गया है, जिसकी मदद से लोग मंदिर परिसर में चौतरफा घूम पा रहे हैं। सलकनपुर मंदिर के लिए बाहर से आने वाली बसों की पार्किंग के लिए अस्थाई बस स्टैंड बनाया गया है, जिसमें बसों को खड़ा करया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए समिति द्वारा अधिकृत टैक्सी वाहन चलाए हैं।

सलकनपुर मंदिर के पास भीषण आग, एक दर्जन दुकानें जलकर राख, ढाई घंटे में पाया गया काबू

Massive fire near Salkanpur temple, a dozen shops burnt to ashes, brought under control in two and a half hours जिले के रेहटी के पास स्थित सलकनपुर में प्रसिद्ध मां विजयासन देवी धाम के पास बुधवार सुबह बड़ी आग लग गई। जानकारी लगते ही अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। देखते ही देखते एक दर्जन दुकानें जलकर राख हो गईं। करीब ढाई घंटे के अथक प्रयासों के बाद आग पर काबू पाया जा सका। आगजनी में लाखों रुपये का नुकसान बताया गया है। जानकारी के अनुसार सलकनपुर मंदिर के ऊपर रास्ते पर स्थित बुधवार सुबह 8:30 के करीब दुकानों में आग लग गई। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण दुकानों के बाहर पड़ा कचरा और शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। आग इतनी भीषण थी कि देखते ही देखते एक दर्जन दुकानों में आग फैल गई। विजयासन देवी धाम के पास दुकानों में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने अपने-अपने साधनों से आग पर काबू करने का प्रयास किया, लेकिन उनके प्रयास नाकाफी साबित हो रहे थे। देवलोक के निर्माण कार्य में लगे पानी के टैंकरों से बुझाई आग स्थानीय लोगों ने बताया कि सुबह दुकानों में आग जैसे ही लगी सभी दुकानदार मंदिर पहुंच गए और मंदिर पर चल रहे देवलोक के निर्माण कार्य में लगे पानी के टैंकर और फ्लोरी में पानी भरकर बुलाया और दुकानदारों ने प्लास्टिक के कुप्पों से आग बुझाई। मंदिर की चढ़ाई ज्यादा होने की वजह से फायर ब्रिगेड देर से पहुंची।स्थानीय व्यापारी अरविंद मालवीय एवं पंकज शर्मा ने बताया कि आग तेजी से फैल रही थी। दुकानदारों ने तत्परता दिखाते हुए करीब ढाई घंटे में आग पर काबू पाया। अगर, आग को बुझाया नहीं गया होता तो लगभग सभी दुकानें आग में राख हो जाती। आग इतनी उग्र थी कि रोड क्रॉस करके सामने वाली लाइन के पर्दे, बैनर और मेट भी आग में झुलस गए। मौके पर पहुंचे एसडीएम दिनेश तोमर, एसडीओपी बुदनी रवि शर्मा, तहसीलदार भूपेंद्र कैलाशिया, थाना प्रभारी राजेश कहारे, सलकनपुर चौकी प्रभारी भावना यादव, मंदिर ट्रस्ट सचिव रामकिशोर दुबे सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने घटना का मौका मुआयना किया। वही, पुलिस आग लगने के कारण की जांच कर रही है। फिलहाल कारण अज्ञात है। एक दर्जन दुकानें पूरी तरह राख, आग लगने से लाखों का नुकसानआगजनी में एक दर्जन दुकानों का सामान पूरी तरह से जलकर खाक हो गया। हालांकि नुकसान का सही आंकलन नहीं हो पाया है। इस आगजनी की घटना में सलकनपुर मंदिर पहाड़ी पर जिनकी दुकानों में आग लगी है, उनमें अभिलाषा नाविक, अखिलेश गोयल, राकेश रघुवंशी, मधु मालवीय, मंजू राठौर, विजय यादव, महेश केवट, जितेंद्र चौहान, राकेश गौड़, हेम नारायण वर्मा सहित अन्य नाम शामिल हैं। दुकानदारों के माने तो आगजनी ने उन्हें सड़कों पर ला दिया है। दुकान से ही उनकी रोजी-रोटी चलती थी। दुकानदारों ने सरकार से राहत राशि की मांग की है। अक्सर होती रहती है आगजनी, सलकनपुर धाम पर हो फायर ब्रिगेड की व्यवस्थादेवीधाम सलकनपुर में दुकानों में आग लगने की घटना पहली नहीं है। आगजनी की घटना अक्सर हो जाती है जिसमें दुकानदारों का लाखों का नुकसान हो जाता है। बताया जाता है कि 2008 में सलकनपुर मंदिर के पास भेरू घाटी पर शॉर्टसर्किट से लगभग 40 दुकानें पूरी तरह जलकर ख़ाक हो गई थी। इसी तरह दिवाली वाली रात भी मंदिर पर दुकानों में आगजनी की घटना हुई थी। कारण कभी शॉर्ट सर्किट तो कभी जंगल के सूखे पत्तों या दुकानों के अवशेष कचरे की वजह से आगजनी की वजह सामने आती है। दुकानदारों को कहना है कि आगजनी की घटना पर काबू पाया जाने के लिए सलकनपुर धाम पर फायर ब्रिगेड की व्यवस्था होना चाहिए।

अब नेताओं की काले रंग की लग्जरी गाड़ियों पर नजर नहीं आएगा हूटर, जानिए क्या है इसका कारण

Now the hooter will not be seen on the black luxury cars of politicians, know the reason behind this सीहोर के जनप्रतिनिधियों की पहली पसंद बनी काले रंग की गाड़ियों पर अब हूटर नजर नहीं आएंगे। शासन के निर्देशों के बाद जनप्रतिनिधियों ने अपनी गाड़ियों से हूटर हटाने की शुरुआत कर दी है। सबसे पहले विधायक सुदेश राय ने अपनी लग्जरी गाड़ी से हूटर हटवाया, इसके बाद पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जसपाल सिंह अरोरा ने गाड़ी से हूटर निकलवा दिया। गौरतलब है कि शहर में करीब आधा दर्जन जनप्रतिनिधियों के पास काले रंग की गाड़ी, जिनमें वे सफर करते हैं। विधायक सुदेश राय, भाजपा जिलाध्यक्ष नरेश मेवाड़ा, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जसपाल सिंह अरोरा, नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर, युवा नेता शशांक सक्सेना सहित कुछ अन्य जनप्रतिनिधि भी काले रंग की गाड़ी में ही चलते हैं। अब इन जनप्रतिनिधियों ने शासन के नियमों का पालन करते हुए अपनी गाड़ियों से हूटर हटाने शुरू कर दिए हैं। उप पुलिस महानिरीक्षक ने दिए थे ये आदेशउप पुलिस महानिरीक्षक तुषारकांत विद्यार्थी ने आदेश जारी किए कि प्रदेश में मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों के विरुद्ध निजी वाहनों में हूटर, फ्लेश लाइट (लाल, पीली, नीली बत्ती), वीआईपी स्टीकर चस्पा करना और गलत नंबर प्लेट के मामले विगत कुछ समय से लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे वाहनों पर कार्रवाई नहीं करने से ऐसा करने वालों को प्रोत्साहन मिल रहा है। इन अनाधिकृत वाहनों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने की आवश्यकता है। कुछ दिन पूर्व एक जिले में वीआईपी भ्रमण के दौरान ऐसा ही एक अनाधिकृत वाहन पकड़ा गया था, जिस पर बीनएएस एवं मोटर व्हीकल एक्ट की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। निजी वाहनों में हूटर, फ्लेश लाइट लाल, पीली, नीली बत्ती, वीआईपी के स्टीकर, गलत नंबर प्लेट का दुरुपयोग करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध 15 मार्च तक विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई की जाए। यातायात पुलिस ने की कार्रवाईयातायात प्रभारी सूबेदार ब्रजमोहन धाकड़ के नेतृत्व में यातायात पुलिस ने एक प्राइवेट स्कॉर्पियो वाहन जिस पर चालक द्वारा अवैध रूप से हूटर और सायरन लगाए हुए था, जिस पर मोटर व्हीकल एक्ट के अंतर्गत चालानी कार्रवाई की गई। पुलिस ने वाहन चालक से समन शुल्क तीन हजार रुपये वसूला गया। यातायात पुलिस द्वारा प्राइवेट वाहनों पर अवैध हूटर एवं सायरन लगाकर वाहन चलाने वाले चालकों के विरुद्ध कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

सीहोर में पंडित प्रदीप मिश्रा कर रहे शिव महापुराण का आरंभ, जारी हुई ट्रैफिक एडवाइजरी

Shiv Mahapuran katha Sehore: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के कुबरेश्वर धाम में पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा आज (24 फरवरी) से शुरू होगी. इसको ध्यान में देखते हुए अगले 7 दिनों तक सिहोर ट्रैफिक पुलिस ने ट्रैफिक को कुछ इलाकों में डायवर्ट करने की एडवाइजरी जारी की है. सिहोर पुलिस की एडवाइजरी 24 फरवरी की सुबह से 4 मार्च की सुबह तक प्रभावी रहेगा. सिहोर पुलिस ने शिव महापुराण कथा में शामिल होने के लिए कुबरेश्वर धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित पार्किंग स्थल पर ही वाहन पार्क करें. साथ ही ट्रैफिक गाइडलाइंस का पालन करें. सीहोर पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार शुक्ला ने बताया कि कुबेरेश्वर धाम में शिव महापुराण कथा के कारण डायवर्जन और नया ट्रैफिक प्लान तैयार किया गया है. यह प्लान आने वाले 7 दिनों तक प्रभावी रहेगा. सिहोर पुलिस की ट्रैफिक प्लान का असर छोटे और बड़े वाहन चालकों पर पड़ेगा. भोपाल, इंदौर, देवास, उज्जैन से कुबरेश्वर धाम सीहोर कथा स्थल पर आने वाले वाहनों के लिए नियमित मार्ग हाईवे से होकर बिना डायवर्जन के सीधे कुंबरेश्वर धाम कथा स्थल तक पहुंचेंगे. सिहोर के इन इलाकों में रूट डायवर्जन ​का दिखेगा असर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गितेश गर्ग के मुताबिक भोपाल तरफ से आने वाले भारी वाहन थाना-परवलिया अंतर्गत मुबारकपुर जोड़ एवं थाना-खजूरी अंतर्गत तुमड़ा जोड़ के साथ श्यामपुर-कुरावर-ब्यावरा-शाजापुर-मक्सी से होकर देवास इंदौर के लिए अपनी यात्रा जारी रख सकते हैं.इसी तरह देवास, इंदौर से आने वाले भारी वाहन देवास से मक्सी-शाजापुर-ब्यावर-कुरावर-श्यामपुर होते हुए भोपाल जा सकते हैं.सीहोर के सिटी एसपी निरंजन सिंह ने पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा को देखते हुए उसमें शामिल होने वाले श्रद्धालुओं से कहा है कि वो ट्रैफिक गाइडलाइंस का पालन जरूर करें. ऐसा न करने पर संभावित परेशानियों के लिए वो खुद जिम्मेवार होंगे. उन्होंने कहा कि सफर के दौरान पुलिस से मिले सुझावों पर भी वाहन चालक अमल करें.

कुबेरेश्वर धाम में लखनऊ से आए बुजुर्ग की हृदयघात से मौत

Elderly man from Lucknow dies of heart attack in Kubereshwar Dham परिवार के पांच अन्य लोगों के साथ कुबेरेश्वर धाम आया था मृतक। कुबेरेश्वर धाम में आज से शुरू हुआ है रुद्राक्ष महोत्सव। सीहोर ! कुबेरेश्वर धाम में बुधवार सुबह एक बुजुर्ग व्यक्ति की हृदयाघात से मौत हो गई। वह बाथरूम गया था और वहीं उसे अटैक आया। जिसके बाद उसे जिला अस्पताल लाया गया, जहां डाक्टर ने चेक करने के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक का नाम राम गोपाल सिंह बताया जा रहा है, जो लखनऊ निवासी है। मृतक रेलवे विभाग से सेवानिवृत्त था। परिवार के साथ आया था मृतकमृतक की बहन सुशीला देवी ने बताया कि उनके परिवार के छह लोग कुबेरेश्वर धाम में शिव महापुराण कथा सुनने आए हैं। वे लोग कुबेरेश्वर धाम में ही रुके हैं, जहां आज से रुद्राक्ष महोत्सव शुरू हुआ है। सुबह रामगोपाल लघुशंका करने के लिए उठे और बाथरूम गए, जहां उन्हें चक्कर आ गया और वो गिर गए। उन्हें तुरंत अस्पताल लाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। स्वजन निजी एम्बुलेंस से मृतक के शव को लखनऊ ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।

सीएम शिवराज की पांच साल में चल संपत्ति एवं नगदी बढ़े, लेकिन अचल संपत्ति हुई कम.

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In five years Chief Minister Shivraj’s, his assets and cash increased, but his non-liquid assets decreased. सीएम की पत्नी साधना सिंह की चल-अचल संपत्ति के साथ नकदी, गहने भी बढ़े. Udit Narayanभोपाल/सीहोर। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पिछले पांच सालों में चल संपत्ति सहित नगदी तो बढ़े हैं, लेकिन उनकी अचल संपत्ति में गिरावट आई है। इसी तरह उनकी धर्मपत्नी साधना सिंह की चल-अचल संपत्ति, नकदी सहित सोने के जेबरात भी बढ़े हैं। इसका ब्यौरा उन्होंने खुद चुनाव के लिए भरे नामांकन के साथ दिए गए एफिड-डेविड में दिया है। मुख्यमंत्री ने 2018 के चुनाव में अपनी कुल चल संपत्ति 43,20,274 रूपए की बताई थी, जो कि वर्ष 2023 में बढ़कर 1,11,20,282 हो गई है। इसी तरह उनके पास 2018 में कैश राशि कुल 45 हजार रूपए थी, जो कि 2023 में बढ़कर 1,15000 हो गई है। 2018 में उनके बैंक खातोें में 20,26,874 रूपए जमा थे, जो कि 2023 में बढ़कर 92,79,104 रूपए हो गए हैं। सोने के गहने 2018 में 96 ग्राम थेे, जो कि 2023 में भी इतने ही हैैं। मुख्यमंत्री की 2018 में अचल संपत्ति जमीन, बिल्डिंग सहित अन्य 2.83 करोड़ की थी, जो कि वर्ष 2023 में घटकर 2.10 करोड़ की रह गई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कुल संपत्ति की बात करें तो वर्ष 2018 के चुनाव के समय उनके पास कुल संपत्ति 3.26 करोड़ थी, जो कि वर्ष 2023 में घटकर 3.21 करोड़ की हो गई है।मुख्यमंत्री नेे एमए फिलासफी तक की पढ़ाई की है। उन पर कोई अपराध कायम नहीं हैं। हालांकि उनके पास रिवाल्वर है। मुख्यमंत्री की वर्ष 2018 में देनदारी कुल 63.18 लाख रूपए की थी, जो कि वर्ष 2023 में घटकर 2,14000 की रह गई है। मुख्यमंत्री के पास अपने पिताजी की पैतृक जमीन कुल 4.67 एकड़ का छटवा हिस्सा है। हालांकि उनकेे नाम विदिशा में भी कृषि भूमि 7 एकड़ 70 डिस्मिल के करीब है।सीएम की धर्मपत्नी साधना सिंह की बढ़ गई संपत्ति-मुख्यमंत्री ने नामांकन पत्र के साथ दिए एफिड-डेविड में बताया है कि उनकी धर्मपत्नी साधना सिंह की चल संपत्ति वर्ष 2023 में 1,09,14,644 है। जबकि 2018 में उनके पास 88,11,866 रूपए की चल संपत्ति थी। इसी प्रकार वर्ष 2018 में साधना सिंह के पास कैश 40 हजार रूपए थे, जबकि 2023 में 1,10,000 रूपए है। वर्ष 2018 में गहने 492 ग्राम थे, जोे कि 2023 में बढ़कर 535 ग्राम हो गए हैं। साधना सिंह के पास बैंकों में जमा राशि वर्ष 2018 में 11,20,766 रूपए थी, जोे कि वर्ष 2023 में 71,87,544 हो गई है। वर्ष 2018 में उनके नाम 18 हजार रूपए का बीमा था, लेकिन वर्ष 2023 में नहीं है। साधना सिंह के पास कुल अचल संपत्ति जमीन-बिल्डिंग सहित अन्य वर्ष 2018 में 3.32 करोड़ की थी, जो कि वर्ष 2023 में बढ़कर 4.32 करोड़ की हो गई है। साधना सिंह के पास कुल संपत्ति वर्ष 2018 में 4.52 करोड़ की थी, जो कि वर्ष 2023 में बढ़कर 5.41 करोड़ की हो गई है। हालांकि उनके उपर देनदारी भी है। वर्ष 2023 में साधना सिंह कोे 66,58,251 रूपए चुकाने हैं, जो कि वर्ष 2018 में 47.55 लाख की थी।सीएम एवं उनकी पत्नी के नाम बैंक खातोें में जमा राशि– मुख्यमंत्री के पास हाथ में नगदी 1,10000 रूपए है।- एसबीआई विदिशा मेें 54,63,757 रूपए जमा हैं।- एसबीआई वल्लभ भवन भोपाल में 33,35,674 रूपए जमा है।- जिला सहकारी बैंक विदिशा मेें 4,79,673 रूपए जमा है।साधना सिंह के नाम बैंकोें में जमा राशि– हाथ में नगदी 1,15000 रूपए है।- एसबीआई विदिशा में 15,84,525 रूपए जमा है।- पीएनबी जुमेराती भोपाल में 4,48,016 रूपए जमा है।- सावधि जमा आईसीआईसीआई बैंक एमपी नगर भोपाल में 50 लाख रूपए है।- आईसीआईसीआई एमपी नगर भोपाल में 1,55,003 रूपए जमा है।यह जानकारी नामांकन फार्म के साथ दिए गए एफिड-डेविड के आधार पर है।.

वन विभाग में मलिक-मकबूजा मद में करोड़ों की वित्तीय अनियमितताएं उजागर

अकेले सीहोर वन मंडल के हिसाब-किताब में 12 करोड़ से अधिक राशि का अंतर। एक वन संरक्षक से मांगा स्पष्टीकरण, जांच की जद में आए कई आईएफएसबाद अन्य IFS पर भी होगी कार्यवाही। उदित नारायण भोपाल। वन विभाग मध्य प्रदेश के वन मंडलों में पदस्थ डीएफओ की घोर लापरवाहीपूर्ण कार्यशैली के कारण बैतूल, हरदा और सीहोर वन मंडल के मालिक-मकबूजा में करोड़ों रुपए की वित्तीय हेर-फेर होने की जानकारी सामने आ रही है। अकेले सीहोर वन मंडल में ही विभागीय राजस्व लेखों के मिलान पर वित्तीय वर्ष 2022-23 में 12 करोड़ 27 लाख 99 हजार 81 रुपए की हेर-फेर हुई है। सीहोर वन मंडल में इस गड़बड़ी का सिलसिला अक्टूबर 2017 से शुरू हुई थी। गौरतलब है कि सीहोर वन मंडल में डीएफओ के पद पर पदस्थ रह चुके कई आईएफएस अफसर जांच की जद में आ रहे हैं। पीसीसीएफ मुख्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों से जानकारी निकल कर सामने आई है कि सीहोर के अलावा बैतूल और हरदा वन मंडल में भी मलिक मकबूजा लेखों में वित्तीय अनियमितता हुई है। सीहोर वन मंडल में हुई वित्तीय हेर-फेर की जांच के लिए मुख्य वन संरक्षक राजेश खरे ने डीएफओ एमएस डाबर की अध्यक्षता में तीन सदस्य जांच कमेटी गठित कर दी है। जांच कमेटी के अध्यक्ष डाबर ने बताया कि 1 महीने के भीतर समिति अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।विभागीय सूत्रों के मुताबिक मलिक-मकबूजा मद वित्तीय हेर-फेर का सिलसिला अक्टूबर 2017 से शुरू हुआ था, तब सीहोर डीएफओ के पद पर मनोज अर्गल पदस्थ थे और तब से लेकर अब तक यह सिलसिला चला आ रहा था। इस बीच कई डीएफओ पदस्थ हुए और पदोन्नति होकर मलाईदार पदों पर कार्य करते रहे हैं, ये सिलसिला अभी तक जारी है। विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सीहोर डीएफओ के पद पर सबसे लंबा कार्यकाल वर्तमान खंडवा सीएफ रमेश गनावा का रहा है। वर्तमान पीसीएफ उत्पादन ने इस गड़बड़ी को उजागर किया। पीसीसीएफ मुख्यालय को सभी सीसीएफ को पत्र लिखकर अपने-अपने वन मंडलों में जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे हुई है वित्तीय हेर-फेर 1. सीहोर वन मंडल में 0406 के विभागीय मद के स्थान पर 0408 अन्य विभाग के मद में कराई जा रही थी। 2. लेखा शीर्ष 0406 मद में जमा की जाने वाली राशि पूरे वित्तीय वर्ष 2022-23 में मात्र एक बार बिना किसी गणना के जमा की गई है. यह स्थिति प्रक्रिया अनुसार एवं नियमानुकूल नहीं है। 3. कोषालय से प्राप्त किए गए सब्सिडी डायरी रजिस्टर और साइबर रिसिप्ट रिपोर्ट से विभागीय राजस्व लेखों के मिलान पर वित्तीय वर्ष 2022-23 में रुपए 12 करोड़ 27 लाख 99 हजार 81 रुपए का अंतर परिलक्षित हुआ। 4. सीहोर वन मंडल में मालिक-मकबूजा की राशि जो कि राजस्व प्राप्ति नहीं है, इसको निरंतर राजस्व प्राप्ति के रूप में जमा कर अनियमितता की गई। 5. जितने भी डीएफओ पदस्थ रहे किसी ने भी वन विभाग के स्थान पर राजस्व प्राप्ति किसी अन्य विभाग के मद में जमा कराई जा रही राशि की मॉनिटरिंग नहीं की। अकेले सहाय को नोटिस, अन्य पर कार्रवाई क्यों नहीं सीहोर वन मंडल में यह अनियमितता अक्टूबर 2017 से शुरू हुई। इस वन मंडल में सबसे अधिक कार्यकाल रमेश गनावा का रहा है, किन्तु विभाग ने अकेले अनुपम सहाय को ही कारण बताओं नोटिस जारी किया है। जबकि वहां पर पदस्थ रहे अन्य अफसर से भी स्पष्टीकरण लिया जाना चाहिए लेकिन फिलहाल इस गड़बड़ झाले में अधिकारियों को बचाने के लिए एक बाबू को बलि का बकरा बनाया गया है। गनावा के पास आधा दर्जन से अधिक पदों का प्रभार वन विभाग में रमेश गनावा ऐसे अकेले आईएफएस अधिकारी हैं, जिनके पास आधा दर्जन से अधिक प्रभार दिए गए हैं। वर्तमान में उनकी पदस्थापना खंडवा सर्किल में है। इसके बाद पिछले दिनों बैतूल सीएफ फूलजले के तबादले के बाद वहां का प्रभार भी गनावा को ही दिया गया है। जबकि इसके पूर्व में बैतूल सर्कल में सीएफ का पद रिक्त होने पर प्रभार होशंगाबाद सर्कल में पदस्थ अफसर को दिया जाता रहा है। इसके अलावा उनके पास वर्किंग प्लान ऑफिसर शिवपुरी, वर्किंग प्लान ऑफिसर भोपाल, वन संरक्षक सामाजिक वानिकी बैतूल, और सामाजिक वानिकी खंडवा की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई है।

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