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अगर आप भी यूएस से लेना चाहते है डिग्री, तो जाने की कितने तरह की मिलती है डिग्री

वॉशिंगटन विदेश में कॉलेज जाकर डिग्री हासिल करना आपके लिए अवसरों से नए दरवाजे खोल सकता है। डिग्री होने पर ना सिर्फ नौकरी के ऑप्शन बढ़ जाते हैं, बल्कि सैलरी में भी इजाफा होता है। अगर आपके पास अमेरिका से मिली डिग्री है, तो फिर जॉब मार्केट में आपकी वैल्यू और भी ज्यादा बढ़ जाएगी। अमेरिका का एजुकेशन सिस्टम भारत से बिल्कुल अलग है, जिस वजह से यहां पढ़ने जाने वाले छात्र यूएस की डिग्रियों को लेकर कंफ्यूज रहते हैं। आइए जानते हैं कि अमेरिका में कितने तरह की डिग्रियां दी जाती हैं। एसोसिएट डिग्री: अगर आप हायर एजुकेशन की शुरुआत कर रहे हैं या फिर कुछ वर्क एक्सपीरियंस हासिल करना चाहते हैं, तो एसोसिएट डिग्री आपके लिए सही हो सकती है। एसोसिएट डिग्री को 2 साल की डिग्री के रूप में जाना जाता है और ये हाई स्कूल डिप्लोमा या उसके बराबर की एजुकेशन हासिल करने के बाद प्राप्त की जा सकने वाली पहली डिग्री है। इसका मतलब है कि ये डिग्री आपको बेसिक जानकारी देती है और आगे की पढ़ाई के लिए तैयार करती है। बैचलर्स डिग्री: बैचलर डिग्री प्रोग्राम आपको कई तरह के करियर के लिए जरूरी नॉलेज और स्किल सिखाते हैं। बैचलर डिग्री 4 साल की अंडरग्रेजुएट डिग्री है। ये डिग्री आपको किसी खास विषय में गहराई से जानकारी देती है। बैचलर डिग्री शुरू करने के लिए आपको एसोसिएट डिग्री की जरूरत नहीं है। आप सीधे 12वीं के बाद ये डिग्री कर सकते हैं। बैचलर ऑफ साइंस (BS) और बैचलर ऑफ आर्ट्स (BA) जैसी डिग्रियां आपको किसी खास विषय पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देती हैं। मास्टर्स डिग्री: मास्टर डिग्री हासिल करना आपके करियर में आगे बढ़ने का एक शानदार तरीका हो सकता है। मास्टर डिग्री बैचलर डिग्री के बाद ली जाती है। यह आपको किसी खास सब्जेक्ट में विशेष नॉलेज और स्किल प्रदान करती है। इसे पूरा करने में आमतौर पर 12 से 18 महीने लगते हैं। मास्टर डिग्री रिसर्च-आधारित, सिखाए गए कोर्स या दोनों का मिक्स हो सकती है। मास्टर ऑफ साइंस (MS) या मास्टर ऑफ आर्ट्स (MA) जैसी मास्टर डिग्री कई सब्जेक्ट में उपलब्ध हैं। डॉक्टोरल डिग्री: अगर आप कॉलेज में सबसे ऊंची डिग्री हासिल करना चाहते हैं, तो डॉक्टरेट डिग्री आपके लिए सही हो सकती है। इंडस्ट्री और करियर के लक्ष्यों के आधार पर कई प्रकार की डॉक्टरेट डिग्रियां हैं। डॉक्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (DBA), डॉक्टर ऑफ एजुकेशन (EdD) और डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (PhD) इनमें से ही कुछ एक हैं। डॉक्टरेट की डिग्री पूरी करने में 7 साल तक लग सकते हैं।

‘IAS’ का फॉर्म अब आधार के बिना नहीं भर सकेंगे, UPSC चेयरमैन का बड़ा बयान

चेन्नई  राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्षों की स्थायी समिति की बैठक शनिवार 24 मई को चेन्नई के सरकारी गेस्ट हाउस में शुरू हुई. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अजय कुमार ने बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में हरियाणा, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्षों ने भाग लिया. यह बैठक दो दिनों तक चलेगी. पहले दिन सरकारी कर्मचारियों की चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने, आपस में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने, चयन प्रक्रियाओं में आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने तथा चयन संबंधी मामलों के प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई. दूसरे दिन भी परीक्षा से संबंधित आनेवाली परेशानियों पर चर्चा की जाएगी.     मीडिया को संबोधित करते हुए संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा, “यूपीएससी देशभर में परीक्षाएं आयोजित करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. राज्य स्तर की परीक्षाएं भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. हम लगातार सलाह देते रहे हैं कि ऐसी परीक्षाएं पारदर्शी होनी चाहिए. आने वाले समय में हम यूपीएससी परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन करते समय आधार को अनिवार्य बनाने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहे हैं.” संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि दो दिवसीय स्थायी समिति की इस बैठक में सरकारी सेवा परीक्षाओं के महत्वपूर्ण पहलुओं पर विभिन्न चर्चाएं होंगी. तमिलनाडु लोक सेवा आयोग (टीएनपीएससी) के अध्यक्ष एस के प्रभाकर ने कहा, “इस बैठक में हम परीक्षा आयोजित करने के तरीकों, इसमें आने वाली कठिनाइयों, सुधार पद्धति और पारदर्शिता के साथ परीक्षा आयोजित करने की पद्धति सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे.” टीएनपीएससी के अध्यक्ष ने कहा, इसके अलावा परीक्षाओं में ओएमआर शीट को बेहतर बनाने, ओएमआर शीट में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने, सुरक्षा सुविधाएं जोड़ने और उत्तर पुस्तिकाओं को सही करने के लिए कई योजनाएं बनाई हैं. दूसरे राज्यों में परीक्षा देते समय तमिलनाडु के छात्रों को होने वाली कठिनाइयों पर भी चर्चा की जाएगी.

मध्यप्रदेश असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के 2197 पदों पर भर्ती, डॉक्टर्स के 718 पदों के लिए प्रक्रिया पूरी, जल्द होगा परीक्षा की तारीख का ऐलान

भोपाल प्रदेश में उच्च शिक्षा विभाग में प्राध्यापकों के 2197 पदों पर जून और जुलाई माह में भर्ती परीक्षाएं होंगी। इसके साथ ही लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा आयुष विभाग के 718 पदों के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। लोक सेवा आयोग ने साल 2025 के लिए प्री एग्जाम करा लिए हैं। लेकिन जून में होने वाली मुख्य परीक्षा का कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है। ऐसे में लोक सेवा आयोग के माध्यम से भरे जाने वाले पदों के लिए 2025 के अंत तक ही अंतिम परिणाम घोषित होने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिसम्बर 2024 में एक लाख पदों पर भर्ती की घोषणा की थी। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रदेश के सभी विभागों से रिक्त पदों की जानकारी बुलाई। ये ब्योरा पीएससी और कर्मचारी चयन मंडल को भेजकर भर्ती करने के निर्देश दिए हैं। इसमें लोक सेवा आयोग इंदौर ने 30 दिसम्बर 2024 से अब तक 64 विज्ञापन निकाले हैं। 3151 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा प्रक्रिया शुरू की है। दैनिक भास्कर ने पीएससी द्वारा निकाले गए विज्ञापन के आधार पर परीक्षा तिथियों और रिक्त पदों की जानकारी जुटाई तो पता चला कि जिस अनुपात में सरकार ने रिक्त पदों की भर्ती का दावा किया था, उस अनुपात में पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी नहीं हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्री की बैठकें जारी, एग्जाम डेट पर निर्णय बाकी डिप्टी सीएम और लोक स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र कुमार शुक्ल पीएससी के माध्यम से होने वाली चिकित्सकों की भर्ती को लेकर लगातार प्रयासरत हैं। वे इसको लेकर मंत्रालय में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के साथ मीटिंग करने के अलावा पीएससी के अफसरों के साथ भी बैठक कर चुके हैं लेकिन अब तक की जो स्थिति है, उसके अनुसार विभाग के रिक्त पदों को इस साल चिकित्सक स्टाफ मिल पाने की उम्मीद कम ही है।

MP बोर्ड द्वितीय परीक्षा के लिए आवेदन की नई तारीखें, अब 25 और 31 मई तक भर सकेंगे फॉर्म

भोपाल मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने सत्र 2024-25 की 10वीं-12वीं द्वितीय परीक्षा के लिये आवेदन की तारीख बढ़ा दी है।हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी मुख्य परीक्षा 2025 में पास हुए छात्र अंक सुधार और फेल हुए छात्र उत्तीर्ण विषयों के अंक सुधार के लिये अब 25 मई तक आवेदन कर सकते है। वहीं मुख्य परीक्षा में केवल फेल विषयों की द्वितीय परीक्षा के लिए 31 मई 2025 तक ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। 17 जून से 5 जुलाई 2025 तक होगी परीक्षा, यहां करें आवेदन एमपी हाईस्कूल-हायर सेकेंडरी द्वितीय परीक्षा कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। असफल विद्यार्थी 17 जून से 5 जुलाई 2025 तक दूसरी परीक्षा दे सकेंगे। इसके लिए 21 मई तक परीक्षा फॉर्म भरे जा सकते हैं। इसके लिए स्टूडेंट्स को www.mponline.gov.in पोर्टल पर जाना होगा और उसमें परीक्षा फॉर्म सबमिट कर सकेंगे। नई शिक्षा नीति के तहत लिया गया फैसला अगर कोई अपना रिजल्ट का इंप्रूवमेंट करना चाहता है तो वह भी परीक्षा में बैठ सकेगा। देश में मध्य प्रदेश यह प्रयोग करने वाला तीसरा राज्य बन गया है। ये फैसला नई शिक्षा नीति-2020 (NEP2020) के तहत लिया गया है। परीक्षा का कार्यक्रम     हाई स्कूल (कक्षा 10वीं) की द्वितीय परीक्षा – 17 जून से 26 जून 2025 तक आयोजित की जाएगी।     हायर सेकेंडरी (कक्षा 12वीं) की द्वितीय परीक्षा – 17 जून से 5 जुलाई 2025 तक आयोजित होगी। एमपी बोर्ड एग्जाम में इतने प्रतिशत छात्र हुए पास आपको बता दें कि 6 मई को बोर्ड परीक्षा का परिणाम जारी हुआ था। इस साल बोर्ड परीक्षा में 15 सालों का रिकॉर्ड टूटा गया। हर साल की तरह इस साल भी लड़कियों ने बाजी मारी है। 10वीं में सिंगरौली की प्रज्ञा जायसवाल और 12वीं में सतना की रहने वाली प्रियल ने टॉप किया। इस वर्ष 10वीं में 76.42 फीसदी, जबकि 12वीं में 74.48 प्रतिशत स्टूडेंट्स पास हुए।

IIT इंदौर का रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन, 1 करोड़ का हाईएस्ट पैकेज, 85% से ज्यादा छात्रों को नौकरी, टॉप कंपनियों की लगी कतार

 इंदौर  IIT इंदौर ने इस बार अपने प्लेसमेंट सीजन में नया कीर्तिमान रच दिया है। 1 दिसंबर 2024 से शुरू हुए इस प्लेसमेंट सीजन में अब तक करीब 400 जॉब ऑफर मिल चुके हैं। जिनमें 85% से अधिक बी.टेक छात्रों को शानदार नौकरियां मिल चुकी हैं। खास बात यह रही कि इस बार सैलरी पैकेज और कंपनियों की भागीदारी दोनों ही रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे। औसतन वेतन में 13 प्रतिशत वृद्धि संस्थान के अनुसार इस वर्ष औसतन वार्षिक वेतन पैकेज 27.30 लाख रुपये रहा है, जो पिछले वर्ष 25.45 लाख रुपये था। यह 13 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। अब तक 343 बीटेक छात्रों ने विभिन्न कंपनियों से प्राप्त प्रस्तावों को स्वीकार किया है। प्लेसमेंट प्रक्रिया दिसंबर 2024 से प्रारंभ हुई थी और यह जुलाई 2025 तक जारी रहेगी, ताकि अभी तक चयन से वंचित 52 से अधिक छात्रों को भी अवसर मिल सके। एक से अधिक ऑफर पाने वाले छात्र भी शामिल कुल 395 बीटेक छात्रों में से 343 को 800 से अधिक नौकरियों के प्रस्ताव मिले, जिसमें कई छात्रों को एक से अधिक कंपनियों से ऑफर प्राप्त हुए। 130 कंपनियां प्लेसमेंट प्रक्रिया में शामिल हुईं, जिनमें गूगल, डाटाब्रिक्स, क्वाडआई, गोल्डमैन सैक्स, डीई शा, टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स, एनालॉग डिवाइसेज, बीपीसीएल, एचपीसीएल, सी-डॉट, एलएंडटी, डेलॉइट, एक्सेंचर, आइसीआइसीआइ बैंक, बीएनवाई मेलॉन जैसी प्रमुख नाम शामिल हैं। कई क्षेत्रों से आए प्रस्ताव इस वर्ष प्लेसमेंट में आईटी, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा व पर्यावरण, कंसल्टेंसी, फिनटेक, बैंकिंग, सेमीकंडक्टर और कंस्ट्रक्शन जैसे विविध क्षेत्रों की कंपनियों ने भाग लिया और अच्छे पैकेज के प्रस्ताव दिए। अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 50 अधिक कंपनियों ने प्लेसमेंट प्रक्रिया में भाग लिया। प्लेसमेंट सीजन जुलाई तक जारी रहेगा आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रो. सुहास जोशी ने बताया कि प्लेसमेंट जुलाई तक चलेगा और शीर्ष दस कंपनियों ने संस्थान में आने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि एक छात्र को 1 करोड़ रुपये का पैकेज मिला है, जबकि 85 प्रतिशत विद्यार्थियों को जॉब ऑफर मिल चुके हैं। 1 करोड़ का हाईएस्ट पैकेज, 13% की औसत बढ़त इस बार IIT इंदौर में प्लेसमेंट के दौरान ऑफर किया गया सर्वोच्च पैकेज पहली बार 1 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। वहीं औसत सैलरी भी 13% की छलांग लगाते हुए 27 लाख रुपये प्रति वर्ष तक जा पहुंची। यह न केवल संस्थान की बढ़ती प्रतिष्ठा को दर्शाता है, बल्कि इंडस्ट्री द्वारा छात्रों की काबिलियत को दिए जा रहे महत्व को भी रेखांकित करता है। 130+ कंपनियों ने किया कैंपस विज़िट, कोर सेक्टर्स की वापसी प्लेसमेंट प्रक्रिया में इस बार 130 से ज्यादा कंपनियों ने हिस्सा लिया। खास बात यह रही कि टेक कंपनियों के साथ-साथ कोर इंजीनियरिंग फर्मों की भी वापसी देखने को मिली — जिससे छात्रों को विभिन्न सेक्टर्स में अवसर मिले। आईटी, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, फिनटेक, सेमीकंडक्टर, बैंकिंग, कंस्ट्रक्शन और कंसल्टिंग जैसे क्षेत्रों में छात्रों को जॉब ऑफर मिले। गूगल से लेकर बीपीसीएल तक टॉप ब्रांड्स की लंबी लिस्ट गूगल, डाटाब्रिक्स, क्वाडआई, गोल्डमैन सॅक्स, डीई शॉ, टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स, एनालॉग डिवाइसेज, बीपीसीएल, एचपीसीएल, बीईएल, सी-डॉट, एल एंड टी, जिंदल स्टेनलेस, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सेंचर, डेलॉइट, सैमसंग, पेटीएम, ब्लैकरॉक जैसे दिग्गजों ने IIT इंदौर के छात्रों को जॉब ऑफर दिए। इससे साफ है कि इंडस्ट्री में इस संस्थान के टैलेंट की डिमांड लगातार बढ़ रही है। नौकरी ही नहीं, रिसर्च और स्टार्टअप की राह भी चुनी कुछ छात्रों ने शानदार प्लेसमेंट ऑफर के बावजूद उच्च शिक्षा और स्टार्टअप की राह चुनी है। कई छात्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटीज़ में मास्टर्स या पीएचडी के लिए जा रहे हैं, जबकि कुछ ने अपने खुद के उद्यम की शुरुआत की है।

सिविल जज जूनियर डिविजन के पद के लिए उम्मीदवार को तीन साल कम से कम बतौर वकील प्रैक्टिस करना जरूरी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने आज मंगलवार को एक अहम फैसले में कहा कि सिविल जज जूनियर डिविजन के पद के लिए उम्मीदवार को तीन साल कम से कम बतौर वकील प्रैक्टिस करना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रैक्टिस की अवधि प्रोविजनल नामांकन की तारीख से मानी जा सकती है, सर्वोच्च अदालत ने साफ किया कि यह शर्त आज से पहले उच्च न्यायालयों द्वारा शुरू की गई भर्ती प्रक्रिया पर लागू नहीं होगी, यह शर्त केवल भविष्य की भर्तियों पर लागू होगी। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस एजी मसीह और जस्टिस के विनोद चंद्रन की तीन सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में कहा कि देखा गया है कि जो नए लॉ ग्रेजुएट न्यायपालिका में नियुक्त होते हैं, उनके कारण कई समस्याएं हुई हैं। ऐसे में सभी उम्मीदवारों को न्यायपालिका में दाखिल होने के लिए कम से कम तीन साल बतौर वकील प्रैक्टिस करना जरूरी होगा। दिखाना होगा ऐसा सर्टिफिकेट सुप्रीम कोर्ट ने कहा शर्त पूरी करने के लिए उम्मीदवार को 10 साल तक प्रैक्टिस कर चुके वरिष्ठ वकील या तय न्यायिक अधिकारी द्वारा जारी सर्टिफिकेट को दिखाना होगा। कोर्ट ने ये भी कहा कि यदि  कोई वकील सुप्रीम कोर्ट या उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस कर रहा है तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट में 10 साल तक प्रैक्टिस कर चुके वकील या तय न्यायिक अधिकारी द्वारा जारी सर्टिफिकेट दिखाना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रैक्टिस की अवधि नामांकन की तारीख से मानी जा सकती है। अदालत ने साफ किया कि यह आदेश उच्च न्यायालयों में हो चुकी नियुक्तियों पर लागू नहीं होगा यह शर्त केवल भविष्य की भर्तियों पर लागू होगी। और क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने? CJI ने कहा कि सभी राज्य सरकारें यह सुनिश्चित करने के लिए नियमों में संशोधन करेंगी कि सिविल जज जूनियर डिवीजन के लिए उपस्थित होने वाले किसी भी उम्मीदवार के पास न्यूनतम 3 साल का अभ्यास होना चाहिए, इसे बार में 10 वर्ष का अनुभव वाले वकील द्वारा प्रमाणित और समर्थित किया जाना चाहिए, कोर्ट ने एक सुविधा देते हुए कहा कि जजों के विधि लिपिक के रूप में अनुभव को भी इस संबंध में गिना जाएगा।

मैरिट में आएं हैं तो ऐसे करें सेलिब्रेट, फेल हुए हैं तो यूं करें रिकवरी

परीक्षाओं के परीणाम आना शुरू हो गए हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं कि जो स्टूडेंट्स मैरिट में आए हैं तो वे कैसे इसको सेलिब्रेट कर सकते हैं और जो फेल हुए हैं वे फिर से कैसे रिकवर कर सकते हैं। अगर आप मैरिट में आए हैं तो अपने अनुभव और सफलता के सूत्र उन्हें बताएं जो कि अच्छी रैंक नहीं बना पाए हैं। सफलता के सूत्र ओरों को बताकर आप अपनी खुशी को ओर बढ़ा सकते हैं। वहीं जो स्टूडेंट्स फेल हुए हैं या अच्छे न बर नहीं ला पाए उनके लिए यहां जो टिप्स दिए जा रहे हैं उन्हें फोलो कर वे भी आगे तैयारी कर अच्छे नम्बर ला सकते हैं। फेल होने से निराश न हों और इन टिप्स को फोलो करें। 1-जब आप एग्जाम की तैयारी कर रहे हों तब तक सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, ट्विटर, वॉट्सएप या अन्य सभी को भूल जाएं। पढ़ाई के दौरान मोबाइल से जितना दूर रहेंगे उतना ज्यादा फायदा होगा। 2-एग्जाम मुश्किल नहीं होता है। जिस सब्जेक्ट में आपकी कमजोरी है उसमें ईमानदारी के साथ रूचि लेनी होगी। 3-पढ़ाई के दौरान सेल्फ स्टडी सबसे ज्यादा जरूरी है। एग्जाम पास करने के लिए स्कूल और कोचिंग के बाद भी सेल्फ स्टडी करना होगी। 4-पढ़ाई के लिए एक अच्छा टाइमटेबल बनाएं और उसे रेगुलर फॉलो करें। एग्जाम क्लियर करने के लिए डेली सिस्टमैटिक स्टडी बेहद जरूरी है। 5-एग्जाम वाले दिन उस सब्जेक्ट पर ज्यादा फोकस करें जिसमें मुश्किल होती है। हो सके तो एग्जाम वाले दिन सभी सब्जेक्ट के रिविजन का टाइम पहले से ही तय कर लें। 6-एग्जाम पास करने के लिए कितने घंटे पढ़ाई कर रहे हैं, इससे ज्यादा जरूरी ये है कि हमारी तैयारी कितने घंटे में हो रही है। जो भी सब्जेक्ट पढ़ें उसमें एकाग्रता बहुत जरूरी है। 7-पढ़ाई के दौरान ब्रेक जरूर लें। दो से तीन घंटे लगातार पढने के बाद स्टूडेंट्स को अपना पसंदीदा गेम्स खेलना चाहिए। ब्रेक के दौरान टीवी देखने या इनडोर गेम्स की जगह आउटडोर गेम्स खेलें। इससे सेहत और दिमाग अच्छे होते हैं। 8-एग्जाम के नजदीक आते ही अपने दोस्तों से भी दूरियां बढ़ा लें। यदि कोई दोस्त आपके साथ एग्जाम दे रहा है तो उससे तैयारी और सब्जेक्ट पर चर्चा कर सकते हैं। 9-तैयारी के दौरान किसी को अपना मेंटर भी बनाएं, जो आपको लगातार प्रोत्साहित करे। मेंटर आपका दोस्त, रिश्तेदार और परिवार के सदस्य में से भी कोई हो सकता है। हौसला बढने से तैयारी बेहतर तरीके से होती है। 10-एग्जाम के दौरान समय बरबाद करने से बचें और अपने नियमित टाइम टेबल के अनुसार ही तैयारी में लगे रहें।  

लेखा प्रशिक्षण सत्र जुलाई-अक्टूबर के लिए लिपिक वर्गीय कर्मचारियों के आवेदन 31 मई तक आमंत्रित

रायपुर, संचालक कोष, लेखा एवं पेंशन छत्तीसगढ़ द्वारा प्रदत्त अनुमति के अनुसार प्राचार्य शासकीय लेखा प्रशिक्षण शाला रायपुर द्वारा आगामी लेखा प्रशिक्षण सत्र  जुलाई-अक्टूबर 2025 के लिए आवेदन पत्र 31 मई 2025 तक आमंत्रित किए गए हैं। संबंधित कार्यालय प्रमुख द्वारा तीन वर्ष की नियमित सेवा पूरा कर चुके लिपिक वर्गीय कर्मचारियों के निर्धारित प्रपत्र में प्रेषित आवेदन पत्र शासकीय लेखा प्रशिक्षण शाला, नगर घड़ी चौक रायपुर को 31 मई 2025 तक कार्यालयीन समय में प्राप्त हो जाना चाहिए।     इस संबंध में शासकीय लेखा प्रशिक्षण शाला के प्राचार्य द्वारा स्पष्ट किया गया है कि लिपिकीय वर्गीय कर्मचारी से आशय ऐसे कर्मचारी से है, जिनकी पदस्थापना लिपिकीय संवर्ग के पद पर हुई है न कि किसी तकनीकी संवर्गीय पद पर है। इस तिथि के पूर्व एवं पश्चात प्राप्त आवेदन पत्रों पर विचार नहीं किया जाएगा। आवेदन पत्र के साथ नोटराइज्ड शपथ-पत्र संलग्न होना अनिवार्य है। विज्ञप्ति के साथ संलग्न (छायाप्रति स्वीकार्य) मानक आवेदन पत्र पर ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। आवेदन जिस सत्र के प्रशिक्षण हेतु किया गया है, उस सत्र के लिए ही मान्य होगा। पूर्व प्रचलित आवेदन पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

एमपी उच्च शिक्षा विभाग ने प्रवेश मार्गदर्शिका की जारी, प्रवेश निरस्त होने पर 60 दिन में खाते में पहुंचेगी राशि

जबलपुर कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले छात्र को यदि किसी कारण से प्रवेश निरस्त करना पड़ता है, तो उसका भुगतान किया गया शुल्क वापस होगा। कॉलेज में प्रवेश की प्रक्रिया निरस्त करने के लिए विद्यार्थी को ऑनलाइन ही आवेदन करना होगा। पंजीकृत मोबाइल पर छात्र के मोबाइल पर ओटीपी आएगा, जिसके आधार पर प्रवेश निरस्त होगा। सिर्फ यही नहीं इसकी ऑनलाइन पावती भी आएगी। छात्र का शुल्क प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण होने के 60 दिवस के बाद खाते में पहुंच जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रवेश मार्गदर्शिका में यह साफ किया है। 25 से कम संख्या तो नहीं दें प्रवेश     कॉलेज चलो अभियान के नोडल डॉ. अरुण शुक्ल ने कहा कि प्रवेश और प्रवेश निरस्तीकरण को लेकर मार्गदर्शिका में सारी जानकारी स्पष्ट है। कक्षा 12वीं की परीक्षा में पूरक विद्यार्थियों के लिए सीएलसी राउंड में खाली सीटों में प्रवेश दिया जाएगा। फिलहाल उन्हें इंतजार करना होगा। स्व वित्तीय मद से संचालित होने वाले स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने साफ किया है उन्होंने अकादमिक सत्र 2024-25 में प्रथम वर्ष में यदि विद्यार्थियों की प्रवेश संख्या 25 या इससे अधिक है, तभी नए सत्र 2025-26 के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश दिए है। विभाग ने साफ किया है कि इससे कम संख्या होने पर आगामी सत्र में प्रवेश न दिया जाए। इसी तरह स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए विभाग ने न्यूनतम प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या 10 रखी है। यदि इससे कम छात्र प्रवेश लेते हैं तो नए सत्र में उस विषय में भी विद्यार्थियों को प्रवेश देने पर पाबंदी लगाई गई है। निःशुल्क काउंसलिंग की सुविधा प्रो. अरुण शुक्ल ने बताया कि महाविद्यालय में स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन योजना द्वारा विद्यार्थियों हेतु निःशुल्क काउंसलिंग की सुविधा भी उपलब्ध है, जिसमें विद्यार्थी को विषय चयन एवं करियर से संबंधित मार्गदर्शन विशेषज्ञों द्वारा प्रदान किया जाता है। इस हेतु इच्छुक विद्यार्थी महाविद्यालय के स्वामी विवेकानंद प्रकोष्ठ (हिंदी विभाग) में दोपहर एक बजे से चार बजे तक उपस्थित हो सकता है। कॉलेज तब देंगे शुल्क विद्यार्थी यदि चरणवार प्रवेश प्रक्रिया के माध्यम से शुल्क जमा कर देता है, तो उसका प्रवेश निरस्त होने पर कॉलेज की जवाबदारी होगी कि विद्यार्थी द्वारा जमा की गई शुल्क की राशि काे वापस करे।

सेरामिक इंजीनियरिंग में बनाएं करियर

साधारण-सी मिट्टी से अत्याधुनिक उपयोग की वस्तुएं बनाने की तकनीक ही सेरामिक इंजीनियरिंग के नाम से जानी जाती है। पुरानी दुनिया के कच्ची मिट्टी के बर्तनों की अगली पीढ़ी के रूप में आए थे सेरामिक वेयर। चिकनी मिट्टी के बर्तनों परग्लेजिंग की परत चढ़ाने से शुरू हुई परंपरा सिलिका और जिरकोनिया जैसी अधातुओं के अत्याधुनिक उपयोग तक आ पहुंची है। सुबह की चाय की प्याली के साथ शुरू होता है सेरामिक के साथ हमारा सफर। आज सेरामिक वस्तुएं हमारी चाय-कॉफी की प्याली से आगे बढ़कर ऑटोमोबाइल और स्पेस से लेकर मेडिकल इप्लाइंट तक में छा गई हैं। सेरामिक इंजीनियरिंग के तहत औद्योगिक इस्तेमाल के लिए नए-नए सेरामिक मेटीरियल्स का विकास किया जाता है। किचन वेयर, कंक्रीट तथा टाइल्स जैसे ट्रेडिशनल सेरामिक उपयोग अब पुराने पड़ चुके हैं। सूचना क्रांति के इस दौर में गोल्फ के मैदान से लेकर अंतरिक्ष तक सेरामिक वस्तुओं का उपयोग हो रहा है। फाइबर ऑप्टिस, बायोसेरामिस, तापरोधी टाइल्स और इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रॉनिक्स आज के दौर में सेरामिक इंडस्ट्री का नया चेहरा हैं। वर्तमान में सेरामिक इंजीनियर का काम उन्नत प्रोसेसिंग तकनीक की सहायता से असाधारण मेकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, मैग्नेटिक और ऑप्टिकल क्षमताओं से भरपूर मेटीरियल्स डेवलप करना है। सेरामिक इंजीनियरिंग से संबंधित कोर्स:- साइंस स्ट्रीम से 12वीं पास करने के बाद इस कोर्स को किया जा सकता है। सेरामिक की पढ़ाई में दिलचस्पी रखने वाले स्टूरडेंट 4 वर्षीय बीटेक यी बीई कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। आईआईटी जैसे प्रसिद्ध संस्थानों में भी एंट्रेंस एग्जाम के मदद से इस कोर्स में दाखिला लिया जा सकता है। इस क्षेत्र में एमटेक की भी डिग्री हासिल की जा सकती है। इसमें डिप्लोमा कोर्स भी चलाए जाते हैं। कहां मिलेगी नौकरी:- सेरामिक इंजीनियरिंग में कोर्स करने के बाद इलेक्ट्रिकल, इंजीनियरिंग और सेरामिक पदार्थों का उत्पामदन करने वाली कंपनियों में जॉब मिल सकती है। क्या बनेंगे आप… -प्रोजेक्ट सुपरवाइजर -टेक्निकल कंसल्टेंट -सेल्स और मार्केटिंग इंजीनयर -सेरामिक एक्सपर्ट -सेरामिक शिक्षक कहां से करें पढ़ाई… -इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सेरामिक्स, कोलकाता -नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, राउरकेला -बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी -गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड सेरामिक टेक्नोलॉजी, कोलकाता    

NEET UG के रिजल्ट पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लगाई रोक, NTA को दिए ये निर्देश

इंदौर NEET-UG 2025 परीक्षा के दिन मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के करीब 11 परीक्षा केंद्रों पर बिजली गुल हो गई थी। इस समस्या ने न सिर्फ परीक्षार्थियों को प्रभावित किया, बल्कि परीक्षा केंद्रों की गंभीर लापरवाही को भी उजागर कर दिया। नीट अभ्यर्थियों को अंधेरे में परीक्षा देना पड़ा। ऐसे में कई कैंडिडेट्स को दिक्कत हुई। इस मामले को लेकर एमपी हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई जिसकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अगले आदेश तक रिजल्ट न घोषित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अगले आदेश तक लगाई रिजल्ट पर रोक     गुरुवार को एक याचिका पर सुनवाई हुई जिसमें परीक्षा के दौरान अव्यवस्था और उम्मीदवारों के साथ अन्याय का मुद्दा उठाया गया था। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था की जिम्मेदारी है कि वह परीक्षा केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करे। अब हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एक परीक्षा के परिणामों पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक परिणाम घोषित नहीं किए जाएं। यह फैसला उन छात्रों के लिए राहत भरा है जिन्होंने परीक्षा में अव्यवस्था का सामना किया था। NTA को HC का निर्देश हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह माना कि जिन केंद्रों पर परीक्षा के समय बिजली नहीं थी, वहां छात्रों के साथ अनुचित व्यवहार हुआ। इससे परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं। परीक्षा में बिजली गुल हो जाना केवल एक तकनीकी चूक नहीं बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य पर सीधा असर डालने वाला मसला है। कोर्ट ने NTA से यह भी पूछा कि ऐसी स्थिति में उसकी क्या तैयारी थी और कौन जिम्मेदार है? इंदौर खंडपीठ का रुख सख्त MP हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया कि जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, NEET UG 2025 का रिजल्ट जारी नहीं किया जाएगा। इस फैसले से उन अभ्यर्थियों को आशा की किरण मिली है, जिनका परीक्षा अनुभव तकनीकी कारणों से प्रभावित हुआ। NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में इस तरह की अव्यवस्था ने एक बार फिर भारत के परीक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिजली जैसे मूलभूत संसाधन की अनुपलब्धता दर्शाती है कि परीक्षा केंद्रों की तैयारियों में भारी खामी रही। 11 केंद्रों की बिजली चली गई, अंधेरा छा गया इंदौर में 49 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जहां लगभग 27 हजार छात्रों ने परीक्षा दी। इसी दौरान अचानक मौसम बदल गया। तेज बारिश और करीब 120 किमी/घंटा की रफ्तार से चली आंधी ने पूरे शहर की बिजली व्यवस्था ठप कर दी। इसके चलते करीब 11 सेंटरों की बिजली चली गई और परीक्षा केंद्रों में अंधेरा छा गया। पेपर तक नहीं पढ़ पा रहे थे, मोमबत्ती जलाई बिजली गुल होने की वजह से कई छात्रों को मोमबत्ती और मोबाइल टॉर्च की रोशनी में पेपर देना पड़ा। घना अंधेरा होने के कारण बहुत से छात्र प्रश्नपत्र तक ठीक से पढ़ नहीं पाए। परीक्षा के बाद कई छात्र रोते हुए बाहर निकले। प्रभावित अभ्यर्थियों का कहना है कि, उन्होंने पूरी मेहनत से तैयारी की थी, लेकिन खराब व्यवस्था ने उनका भविष्य संकट में डाल दिया। जानकारी के मुताबिक इंदौर के जिन 11 सेंटरों में बिजली गुल हुई, वहां करीब 600 छात्रों की परीक्षा सीधे तौर पर प्रभावित हुई। यह पहला मौका था जब NTA ने शहर के सरकारी स्कूलों में परीक्षा केंद्र बनाए थे। यहां पावर बैकअप का कोई इंतजाम नहीं था। कुछ केंद्रों पर हो चुकी दो बार परीक्षा एक्सपर्ट का कहना है कि ओडिशा में चक्रवात के दौरान 2016 में एनटीए ने प्रभावित बच्चों के लिए दोबारा एग्जाम कराया था। नियमों की गफलत से 2022 में होशंगाबाद सहित कुछ अन्य केंद्रों पर भी ऐसा हो चुका है।

फायर इंजीनियरिंग में है शानदार करियर

हाल के दिनों में आगजनी की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। चलती कारों में आग लग जाती है, तो बड़े-बड़े मॉल्स, काफी हद तक सुरक्षित मानी जानी वाली ऊंची-ऊंची इमारत भी पूरी तरप सुरक्षित नहीं है। यदि आग अनियंत्रित हो जाए, तो जान-माल का भी काफी नुकसान होता है। ऐसी स्थिति में फायर इंजीनियरिंग से जुड़े लोगों की जरूरत होती है, जो आग पर काबू करना अच्छी तरह जानते हैं। क्या है फायर इंजीनियरिंग:- फायर इंजीनियरिंग में पब्लिक के बीच रहकर ही काम करना होता है। सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, एनवॉयर्नमेंटल इंजीनियरिंग जैसे विषयों से तो इसका सीधा जुडाव होता ही है, आग लगने पर पब्लिक का कैसा व्यवहार हो, पब्लिक के साथ इन लाइफ गार्ड्स का क्या व्यवहार हो, इन सब पर भी जोर दिया जाता है। इसके अलावा ढेर सारी तकनीकी बातें होती हैं, जो इसे बाकी क्षेत्रों से अलग करती हैं, मसलन-आग बुझाने के यंत्रों की तकनीकी जानकारी, स्प्रिंक्लर सिस्टम, अलार्म, पानी की बौछार का सबसे सटीक इस्तेमाल और कम से कम समय और संसाधनों में ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान और माल के बचाव के साइंटिफिक फॉर्मूले। सबसे बडी बात है क्राइसिस मैनेजमेंट। इस करियर में आप इसे भी सीखते हैं। बडे-बडे मॉल्स या मेले तो आग के मामले इतने खतरनाक होते हैं कि एक साथ सैकडों की जान जाती है। जैसा कि कुछ समय पहले मेरठ के मेले में हुआ था। इस वजह से आज फायर इंजीनियरों की मांग काफी बढ गई है। फायर इंजीनियरों की मांग को पूरा करने के लिए आज कई सरकारी व निजी संस्थान खुल गए हैं। साथ ही, देश के कई विश्वविद्यालयों ने इस कोर्स को अपने पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया है। चुनौतियों तमाम:- कार्य के दौरान फायर इंजीनियर का सामना कई तरह की चुनौतियों से भरा होता है। इसके लिए साहस के साथ-साथ समाज के प्रति प्रतिबद्धता होनी भी जरूरी है। फायर इंजीनियर का कार्य इंजीनियरिंग डिजाइन, ऑपरेशन व प्रबंधन से संबंधित होता है। फायर इंजीनियर की प्रमुख जिम्मेदारी दुर्घटना के समय आग के प्रभाव को सीमित करना होता है। इसके लिए वे अग्निसुरक्षा के विभिन्न तरीकों को इस्तेमाल करते हैं। इसके अतिरिक्त अग्निशमन के आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल व उसके रख-रखाव की तकनीक में सुधार करना भी इनकी जिम्मेदारी होती है। कोर्स और पाठ्यक्रम:- कुशल फायर इंजीनियर बनने के लिए बेचलर इन फायर इंजीनियरिंग की डिग्री या उप-फायर-अधिकारी या सर्टिफिकेट कोर्स इन फायर टेक्नोलॉजी एंड सेफ्टी, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन फायर प्रोटेक्शन इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रियल सेफ्टी, डिप्लोमा इन फायर इंजीनियरिंग कोर्स के अलावा फायर इंजीनियरिंग में अन्य छोटे-छोटे कोर्स भी उपलब्ध हैं। योग्यता:- विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए योग्यताएं भी अलग-अलग होती हैं। फायर इंजीनियरिंग में अधिकांश कोर्स ग्रेजुएट स्तर पर उपलब्ध हैं, जिसके लिए साइंस विषयों में बारहवीं पास होना जरूरी है। इसके अलावा इन कोर्सो में प्रवेश के लिए कई संस्थान राष्ट्रीय स्तर पर प्रवेश परीक्षा और साक्षात्कार आदि भी आयोजित करते हैं। बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग के अलावा आप इस क्षेत्र में स्नातकोत्तर स्तर पर मास्टर और डॉक्टरेट की पढ़ाई भी कर सकते हैं। शारीरिक योग्यता:- इन पाठ्यक्रमों में फिजिकल फिटनेस के अंक भी जोड़े जाते हैं। पुरूष के लिए 50 किलो के वजन के साथ 165 सेमी लंबाई और आईसाइट 6/6, सीना सामान्य रूप से 81 सेमी और फुलाने के बाद 5 सेमी फैलाव होना जरूरी है। महिला का वजन 46 किलो और लंबाई 157 सेमी और आईसाइट 6/6 होनी चाहिए। प्रशिक्षण:- इस पाठ्यक्रम के तहत आग बुझाने के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी जाती है। इसमें बिल्डिंग निर्माण के बारे में भी जानकारी दी जाती है। ताकि, आग लगने की स्थिति में उसे बुझाने में ज्यादा परेशानी न हो। उन्हें आग लगने के कारणों और उसे बुझाने के उपायों के बारे में भी विस्तार से बताया जाता है। संभावनाएं:- इस संबंध में दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ फायर इंजीनियरिंग के चेयरमैन वीरेन्द्र गर्ग कहते हैं कि इसमें रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। पहले जहां अवसर केवल सरकारी फायर बिग्रेड में ही होते थे, वहीं बदलते दौर के साथ फायर इंजीनियरिंग कोर्स करने वालों के लिए ढेरों नए विकल्प भी सामने आ गए हैं। इनमें प्रमुख इस प्रकार हैं… कंसल्टेंसी:- जब से हर बडी इमारत के साथ आग से जुडे खतरों के लिए कुछ जरूरी नियमों का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है, इस फील्ड में कंसल्टेंट्स की मांग बढ गई है। कंसल्टेंसी की कंपनियां धीरे-धीरे बिल्डर्स का भरोसा जीत रही हैं और उनकी संख्या बढ रही है। रिसर्च:- फायर प्रोक्टेशन के फील्ड में रिसर्च पहले भारत में नहीं होता था, लेकिन अब यहां भी होने लगा है। हालांकि, ऐसा अभी बहुत कम कंपनियों ने किया है, लेकिन बडे कैंपस वाली कंपनियां अब फायर प्रोटेक्शन इंजीनियरिंग की स्थाई भर्ती करने लगी हैं। इंश्योरेंस:- जैसे-जैसे आग लगने के मामले बढ रहे हैं, वैसे-वैसे आग से जुडी बीमा पॉलिसियों की भी मांग बढ गई है। इसके साथ ही ऐसे लोगों की जरूरत भी बढ गई है, जो आग से होने वाले नुकसान का ठीक-ठीक अनुमान लगा सकें। मैन्युफैक्चरिंग अब हर बडे निर्माण में आग बुझाने के उपकरणों को रखना भी अनिवार्य कर दिया गया है। इससे उपकरणों का उत्पादन भी बढ गया है। उनके उत्पादन से लेकर मार्केटिंग तक के फील्ड में फायर इंजीनियर्स की मांग बढ गई है। अब सारे सिटी प्लानर भी फायर इंजीनियर्स को साथ रखकर ही टाउन प्लानिंग करते हैं। सैलरी पैकेज:- सरकारी अथवा गैर सरकारी संगठनों में फायरकर्मियों के वेतन का आधार अलग-अलग होता है। दोनों में पर्याप्त भिन्नाता देखने को मिलती है। सरकारी संस्थानों में जहां एक फायरमैन की तनख्वाह दस हजार रुपये प्रतिमाह होती है। वहीं, फायर इंजीनियर को बीस हजार रुपये और मुख्य अग्निशमन अधिकारी को इससे अधिक वेतन मिलता है। इसकी तुलना में प्राइवेट संस्थाएं अपने यहां कार्यरत फायरमैन को 12000 से 14000, फायर इंजीनियर को 20000 तथा अग्निशमन अधिकारी को 25000 से 30000 रुपये प्रतिमाह तक का सैलरी पैकेज देती हैं। प्राइवेट संस्थान अपने यहां कुछ वर्ष का अनुभव रखने वाले लोगों को ही वरीयता देते हैं। वैसे निजी संस्थाओं में वेतन का आधार स्वयं की काबिलियत और अनुभव रखता है। अलग-अलग कंपनियां अपनी क्षमता के अनुसार वेतन तय करती हैं। इंस्टीट्यूट वॉच… -दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ फायर इंजीनियरिंग, नई दिल्ली -इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, खड़गपुर -राष्ट्रीय … Read more

Indian Army में निकलीं भर्तियां, फटाफट करें अप्लाई, सैलरी 1.2 लाख महीना

नई दिल्ली अगर आप देश सेवा करना चाहते हैं तो आपके पास अच्छा मौका है. इंडियन आर्मी ने कई पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है. भारतीय सेना की तरफ से टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स (TGC 142) – जनवरी 2026 के लिए आवेदन मांगे गए हैं. इस भर्ती के लिए कैंडिडेट्स 30 अप्रैल 2025 से ऑनलाइन आवेदन कर सकते है. आवेदन करने की आखिरी तारीख  29 मई 2025 को दोपहर 3:00 बजे तक हैं. इस भर्ती में अप्लाई करने के लिए उम्मीदवारों को इंडियन आर्मी की वेबसाइट joinindianarmy.nic.in पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा. टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स (TGC-142) 2026 के लिए आवेदन शुरू आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को अविवाहित पुरुष होना चाहिए और उनके पास B.E./B.Tech की डिग्री होनी चाहिए, या वे इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र होने चाहिए. आयु सीमा 20 से 27 वर्ष के बीच रखी गई है (2 जनवरी 1999 से 1 जनवरी 2006 के बीच जन्मे). इस भर्ती में सीधा SSB इंटरव्यू होगा और कोई लिखित परीक्षा नहीं होगी. सफल उम्मीदवारों को भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून में प्रशिक्षण प्राप्त होगा और बाद में उन्हें स्थायी कमीशन मिलेगा. यह अवसर उन इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स के लिए है जो भारतीय सेना का हिस्सा बनकर गर्व से देश की सेवा करना चाहते हैं. देहरादून में होगी ट्रेनिंग टीजीटी-142 के माध्यम से भारतीय सेना में चयन होने पर, उम्मीदवारों को विभिन्न प्रमुख कॉर्प्स में कमीशन मिलेगा. इसमें इंजीनियर्स कॉर्प्स, सिग्नल कॉर्प्स, और इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स जैसी प्रतिष्ठित शाखाएं शामिल हैं. चयनित उम्मीदवारों को भारतीय सेना के एक प्रशिक्षित अधिकारी के रूप में आईएमए देहरादून में 12 महीने का प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा. इसके बाद उन्हें लेफ्टिनेंट के पद पर परमानेंट कमीशन मिलेगा, जिससे उन्हें एक स्थायी अधिकारी के रूप में भारतीय सेना में सेवा करने का अवसर मिलेगा. इतनी मिलेगी सैलरी सैलरी और भत्ते की बात करें तो, आईएमए देहरादून में प्रशिक्षण के दौरान उन्हें 56400 रुपये का मासिक स्टाइपेंड मिलेगा, जो उनके जीवन यापन में सहायक होगा. प्रशिक्षण पूरी होने और कमीशन मिलने के बाद, एक लेफ्टिनेंट के तौर पर उनकी वार्षिक सैलरी लगभग 17-18 लाख रुपये तक हो सकती है. इसके अलावा, उन्हें मुफ्त चिकित्सा कवर, होम टाउन यात्रा पर मुफ्त यात्रा सुविधा, CSD कैंटीन का लाभ, और आवास जैसी कई अन्य आकर्षक सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी. ये सभी भत्ते और सुविधाएं एक सेना अधिकारी को उनके कार्यकाल के दौरान पूरी तरह से सक्षम और संतुष्ट रखने के लिए प्रदान की जाती हैं.

मध्यप्रदेश में कर्मचारी चयन मंडल ने MPESB की पहली शिफ्ट की परीक्षा की कैंसिल, छात्रों में आक्रोश

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से बड़ी खबर सामने आई है। जहां गुरुवार को मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) की पहली शिफ्ट की परीक्षा कैंसिल हो गई है। सुबह 9 बजे से लेकर 12 बजे तक परीक्षा होनी थी। मगर, अचानक से परीक्षा कैंसिल कर दी गई। सुबह 9 बजे लेकर 12 बजे तक होनी थी। जिसमें छात्रों की एंट्री 8 बजे की करा ली गई थी। छात्रों के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर लेकर प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई, लेकिन ढाई घंटे बाद परीक्षर्थियों को जानकारी दी गई कि उनका एग्जाम कैंसिल हो गया है। यह सिर्फ एक सेंटर में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में हुआ है। पत्रिका से बातचीत में परीक्षार्थी अमर राज ने बताया कि 197 पदों पर भर्ती निकाली गई थी और 28 पद बाद में कैंसिल कर दिए गए थे। सुबह की शिफ्ट में 9 बजे से लेकर 12 बजे तक पेपर होना था। गेट क्लोजिंग टाइम 8 बजे था। हम लोगों को 8 बजे से लेकर 11 बजे तक सेंटर के अंदर बैठाया गया। ढाई घंटे बैठने के बावजूद जब आधे घंटे का समय बचा था। तब वहां से हमें कहा गया कि आप लोगों का पेपर रद्द हो चुका है। ये पेपर एमपीईएसबी के द्वारा बाद में कराया जाएगा। साथ ही हमें बताया कि एमपीईएसबी के प्रदेश में सारी पहली शिफ्ट की परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं।

योगी सरकार ने प्रदेश के माध्यमिक स्कूलों में 5000 कंप्यूटर शिक्षकों की भर्ती का लिया फैसला

लखनऊ योगी सरकार ने प्रदेश के माध्यमिक स्कूलों में संविदा पर बड़े पैमाने पर शिक्षकों की भर्ती का फैसला लिया है। प्रदेश के माध्यमिक स्कूलों में 5000 कंप्यूटर शिक्षकों की भर्ती होगी। सरकार का यह कदम प्रदेश के युवाओं को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। पहले चरण में 5000 कंप्यूटर शिक्षकों की भर्ती  की जाएगी। शिक्षा विभाग ने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। जिसकी मंजूरी मिलते ही भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस फैसले के बाद कक्षा 9 से 12 तक कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि तकरीबन 2 साल पहले भी इसी तरह का प्रस्ताव भेजा गया था। जिसमें तीन बिंदुओं को लेकर आपत्ति जताई गई थी और सुधार करने के निर्देश दिए थे। बताया जा रहा है कि विभाग ने इस बार सरकार क मंशा अनुरूप फिर से नया प्रस्ताव भेजा है।

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