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LPG के लिए बड़ी खबर, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरेंगे भारतीय झंडे वाले दो गैस टैंकर

 नई दिल्ली दुनिया में जितना भी तेल और गैस समुद्र के रास्ते जाता है, उसका करीब 20 फीसदी सिर्फ एक रास्ते से गुजरता है होर्मुज की खाड़ी. यह एक बहुत ही पतली सी जलधारा है जो ईरान और ओमान के बीच में है. एक तरफ खाड़ी के देश हैं – UAE, कुवैत, सऊदी अरब, इराक. और इन सबका तेल बाहर जाने का एकमात्र समुद्री रास्ता यही है।  अब सोचिए – अगर यह रास्ता बंद हो जाए तो क्या होगा? दुनिया के पांचवें हिस्से का तेल और गैस रुक जाएगा. कीमतें आसमान छू लेंगी. और भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से मंगाते हैं, उन्हें सबसे ज्यादा तकलीफ होगी।  हुआ क्या है अभी? ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जंग छिड़ी हुई है. ईरान ने धमकी दे दी कि जो भी जहाज होर्मुज से निकलने की कोशिश करेगा, उस पर हमला होगा।  बस इतना सुनते ही सैकड़ों जहाज वहीं लंगर डालकर रुक गए. कोई आगे जाने को तैयार नहीं. पिछले 24 घंटों में एक भी तेल का बड़ा जहाज होर्मुज से नहीं गुजरा. यह बहुत बड़ी बात है. मतलब रास्ता व्यावहारिक रूप से बंद पड़ा है।  भारत का क्या हाल है? भारत के 22 जहाज इस वक्त खाड़ी के अंदर फंसे हुए हैं. न आगे जा पा रहे हैं, न वापस आ पा रहे हैं. इनमें दो जहाज खास तौर पर चर्चा में हैं. पाइन गैस जिसे आईओसी यानी इंडियन ऑयल ने किराए पर लिया है. जग वसंत – जिसे बीपीसीएल ने किराए पर लिया है।  ये दोनों LPG टैंकर हैं. मतलब इनमें रसोई गैस जैसा ईंधन भरा है जो भारत के घरों तक पहुंचना है. ये दोनों जहाज UAE के शारजाह के पास लंगर डाले खड़े हैं. शनिवार को निकलने की तैयारी में बताए जा रहे हैं।  मोदी सरकार क्या कर रही है? भारत सरकार हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है. विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि भारत चाहता है कि उसके जहाज सुरक्षित और बिना रोक-टोक के निकल सकें।  और सबसे अहम बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद दूसरे देशों के नेताओं से बात कर रहे हैं ताकि इन जहाजों का सुरक्षित रास्ता निकाला जा सके. यह कूटनीति का खेल है. प्रधानमंत्री की कोशिश है कि ईरान तक यह बात पहुंचे कि भारत के जहाजों को जाने दिया जाए।  खबर के मुताबिक पिछले हफ्ते ईरान ने दो भारतीय LPG जहाजों को होरमुज से गुजरने दिया था. यानी ईरान ने भारत को थोड़ी रियायत दी. यह इसलिए भी समझ में आता है क्योंकि भारत और ईरान के रिश्ते पहले से ही ठीक-ठाक रहे हैं, और भारत ने हमेशा इस जंग में किसी एक तरफ खड़े होने से परहेज किया है।  पाकिस्तान वाला दिलचस्प किस्सा इस पूरी खबर में एक बहुत दिलचस्प बात और है. डेटा से पता चला है कि पाकिस्तान जाने वाला एक तेल का जहाज हाल ही में होर्मुज से गुजर गया. इसका मतलब यह है कि ईरान ने पूरी तरह रास्ता बंद नहीं किया है. वो चुन-चुनकर कुछ देशों को जाने दे रहा है. जिनसे उसके संबंध ठीक हैं, या जो उसके लिए काम के हैं – उन्हें रास्ता मिल रहा है।  यह एक तरह का दबाव का हथियार है. ईरान कह रहा है, “देखो, मैं सबको रोक सकता हूं, लेकिन जिसे चाहूं उसे जाने भी दे सकता हूं।  असली मुद्दा क्या है? यह सिर्फ कुछ जहाजों की कहानी नहीं है. यह उस रास्ते की कहानी है जिससे भारत का रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल आता है. अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहा तो भारत में गैस और तेल की कमी हो सकती है. कीमतें बढ़ सकती हैं और आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। 

लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन ट्रेडिंग 6 साल बाद फिर से शुरू, गलवान झड़प के कारण हुआ था बंद

पिथौरागढ़  उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित लिपुलेख दर्रे के जरिए भारत और चीन के बीच बॉर्डर ट्रेड छह साल बाद फिर से शुरू होने जा रहा है। यह ट्रेड सेशन आमतौर पर जून से सितंबर तक चलता है। डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट आशीष भटगाई ने बताया कि केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। विदेश मंत्रालय की ओर से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी होने के बाद यह प्रक्रिया आगे बढ़ी है। लिपुलेख दर्रे के जरिए तिब्बत के साथ बॉर्डर ट्रेड लंबे अंतराल के बाद 1992 में फिर शुरू हुआ था। हालांकि 2019 में COVID-19 महामारी और गलवान झड़प के कारण इसे बंद कर दिया गया था। पिछले साल 18-19 अगस्त को चीनी विदेश मंत्री वांग यी की भारत यात्रा के दौरान भारत-चीन ने रुपए और युआन में ट्रेड करने का फैसला किया था। अब तक यह ‘वस्तु विनिमय’ आधारित यानी सामान के बदले सामान का लेन-देने होता था। लिपुलेख दर्रा औपचारिक व्यापारिक मार्ग ब्रिटिश काल में भी लिपुलेख दर्रा व्यापार और तीर्थयात्रा का प्रमुख केंद्र था। तिब्बत से व्यापारी नमक, बोराक्स, पशु उत्पाद, जड़ी-बूटियां और स्थानीय सामान बेचने आते हैं, जबकि भारतीय व्यापारी बकरी, भेड़, अनाज, मसाले, गुड़, मिश्री, गेहूं वहां ले जाते हैं। भारत-चीन के बीच साल 2005 में 12 करोड़ रुपए का आयात और 39 लाख रुपए का निर्यात हुआ था। साल 2018 में 5.59 करोड़ रुपए का आयात और 96.5 लाख रुपए का निर्यात हुआ था। नेपाल ने समझौते पर आपत्ति जताई थी लिपुलेख के साथ शिपकी ला और नाथु ला दर्रों से भी कारोबार बहाल करने का फैसला लिया गया था। हिमालय के तीन दर्रों से शुरू होने जा रहा भारत-चीन व्यापार पहली बार पूरी तरह सड़क के जरिए होगा। यहां मनी एक्सचेंज भी खुलेगा। हालांकि नेपाल ने इस समझौते पर आपत्ति जताई थी। उसका कहना है कि लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी उसके क्षेत्र का हिस्सा हैं। उसने भारत और चीन से इस इलाके में कोई एक्टिविटी न करने की अपील की है। केंद्र ने राज्य सरकार से व्यवस्था करने को कहा विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन को लेटर लिखकर हिमालयी दर्रे के जरिए व्यापार बहाल करने का अनुरोध किया है। लेटर में बताया गया है कि गृह मंत्रालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से भी मंजूरी मिल चुकी है। प्रशासन ने ट्रेड पास जारी करने, करेंसी एक्सचेंज के लिए बैंकों की व्यवस्था, कस्टम विभाग की तैनाती और धारचूला प्रशासन को विस्तृत एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें व्यापारियों के लिए ट्रांजिट कैंप, संचार, बैंकिंग, सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाएं शामिल होंगी। व्यापारियों ने फैसले का स्वागत किया उत्तराखंड के पिथौरागढ़ सीमांत व्यापार संगठन के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंकाली ने इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे व्यापारियों को 2019 से तकलाकोट (तिब्बत) के वेयरहाउस में रखे सामान को वापस लाने का अवसर मिलेगा।

इंडिगो और एअर इंडिया का DGCA आदेश पर विरोध, महंगे टिकटों का खतरा जताया

 नई दिल्ली आपने कभी फ्लाइट बुक की होगी तो देखा होगा कि टिकट का दाम अलग होता है और सीट चुनने का चार्ज अलग. विंडो सीट चाहिए? पैसे दो. आगे की सीट चाहिए? और पैसे दो. परिवार के साथ बैठना है? उसके लिए भी पैसे. यह एक तरह से एयरलाइंस की अलग कमाई है। अब सरकार ने कहा, “नहीं. हर फ्लाइट की 60 फीसदी सीटें यात्रियों को फ्री में दो. सीट चुनने के पैसे मत लो.” और इस पर एयरलाइंस भड़क गई हैं।  किसने क्या कहा? सरकार का यह फैसला MoCA यानी नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने लिया. और 18 मार्च 2026 को इसका ऐलान कर दिया. इसके खिलाफ FIA यानी भारतीय एयरलाइंस महासंघ ने MoCA के सचिव समीर सिन्हा को चिट्ठी लिखी है. FIA में कौन-कौन है? इंडिगो, एअर इंडिया और स्पाइसजेट. यानी देश की तीन सबसे बड़ी एयरलाइंस।  एयरलाइंस का तर्क क्या है? एयरलाइंस का कहना है कि यह फैसला उल्टा पड़ेगा. उनका कहना है कि पैसा तो यात्री ही देगा. एयरलाइंस ने साफ कहा, “अगर हम सीट का चार्ज नहीं लेंगे, तो वो पैसा कहीं से तो आएगा. और वो आएगा टिकट के दाम बढ़ाकर।  इसपर सोचने वाली बात है कि अभी आप 4,000 में टिकट लेते हैं और 300 में मनपसंद सीट. कुल 4,300. कल को हो सकता है टिकट ही 4,500 का हो जाए और सीट भले फ्री हो. आपका फायदा क्या हुआ? FIA का कहना है कि जो लोग सस्ती फ्लाइट लेते हैं. बजट ट्रैवलर, परिवार, बार-बार उड़ने वाले लोग उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान होगा. क्योंकि टिकट महंगे होंगे और उनकी जेब पर सीधा असर पड़ेगा।  एयरलाइंस की अपनी पहचान खत्म होगी अभी हर एयरलाइन अपने तरीके से सेवा देती है. कोई सस्ती सीट देता है, कोई ज्यादा लेगरूम देता है, कोई बेहतर खाना देता है. इससे यात्री अपनी पसंद की एयरलाइन चुन सकते हैं. अगर सब एक जैसे नियमों में बंध जाएंगे तो यह अलगप्पन खत्म हो जाएगा।  एयरलाइंस ने एक और बड़ा सवाल उठाया FIA ने यह भी कहा कि DGCA यानी जो सरकारी संस्था हवाई यातायात देखती है उसे कानूनी तौर पर यह अधिकार ही नहीं है कि वो सीट चार्ज जैसी अलग सेवाओं के दाम तय करे।  पहले की अदालती फैसलों का हवाला देते हुए कहा, “यह आपके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता.” यानी एयरलाइंस सिर्फ विरोध नहीं कर रहीं वो यह भी कह रही हैं कि यह आदेश कानूनी रूप से सही नहीं है।  सबसे बड़ी शिकायत – बिना पूछे फैसला एयरलाइंस की सबसे बड़ी नाराजगी यह है कि यह आदेश बिना किसी से पूछे आ गया. FIA ने चिट्ठी में लिखा, “18 मार्च को प्रेस रिलीज से पहले हमें कुछ नहीं बताया गया. न कोई बैठक हुई, न कोई सलाह ली गई.” यानी एक दिन अखबार में खबर आई और एयरलाइंस को पता चला कि सरकार ने नया नियम बना दिया।  एयरलाइंस की मांग क्या है? FIA ने सरकार से साफ कहा है कि यह आदेश वापस लीजिए. और यह भी चेताया कि अगर यह चलता रहा तो भविष्य में सरकार किसी भी सेवा के दाम में दखल दे सकती है. इससे एयरलाइंस को अपना कारोबार चलाना मुश्किल हो जाएगा। 

ट्रंप का बड़ा बयान, मिशन ईरान खत्म होने के बाद जंग पर लग सकता है ब्रेक

वाशिंगटन अमेरिका-ईरान युद्ध के 21वें दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला ‘एग्जिट प्लान’ साझा किया है.  ‘ट्रुथ सोशल’ पर जारी एक विस्तृत पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को पूरा करने के ‘बेहद करीब’ है और अब वह मध्य पूर्व में जारी अपने बड़े सैन्य अभियानों को धीरे-धीरे कम करने (Winding Down) पर विचार कर रहा है।  ट्रंप ने अपनी पोस्ट में उन उपलब्धियों को गिनाया जिन्हें वे जीत का आधार मान रहे हैं’ उन्होंने कहा, ‘हमने ईरान की मिसाइल क्षमता, रक्षा औद्योगिक आधार, नौसेना और वायुसेना को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है’ ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियारों के करीब न पहुंच सके।  इस दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों-इजरायल, सऊदी अरब, कतर, यूएई, बहरीन और कुवैत की सुरक्षा सुनिश्चित की है और आगे भी उनकी रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।  ट्रंप के इस बयान का सबसे अहम हिस्सा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की सुरक्षा को लेकर था. उन्होंने साफ लहजे में कहा कि जो देश इस समुद्री रास्ते का इस्तेमाल अपने तेल और व्यापार के लिए करते हैं, अब सुरक्षा और पुलिसिंग की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर मदद कर सकता है, लेकिन यह जिम्मेदारी अन्य देशों को निभानी चाहिए।  ट्रंप ने तर्क दिया, ‘अमेरिका इस रास्ते का उपयोग नहीं करता है, इसलिए अन्य देशों को आगे आना चाहिए” उन्होंने इसे उन देशों के लिए एक ‘आसान सैन्य अभियान’ बताया और कहा कि ईरान का खतरा खत्म होने के बाद अमेरिका की मुख्य भूमिका की आवश्यकता नहीं रह जाएगी।  आपको बता दें कि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है. हाल के हफ्तों में यहां हमलों और तनाव के कारण वैश्विक बाजारों पर भी असर पड़ा है. ट्रंप के इस बयान को ऐसे समय में देखा जा रहा है जब युद्ध को लगभग तीन हफ्ते हो चुके हैं और क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई है। 

तेल-गैस होर्मुज से 3-4 दिन में बंदरगाहों तक पहुंचेगा’, अमेरिकी अधिकारी का महत्वपूर्ण खुलासा

नई दिल्‍ली अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग ने पूरी दुनिया के लिए संकट पैदा कर दिया है. इस बीच, अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने शुक्रवार को कहा कि समुद्र में फंसे ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटाने से तीन-चार दिनों के भीतर एशिया तक आपूर्ति पहुंच जाएगी।  यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका ने समुंद्र में फंसे ईरानी तेल से प्रतिबंध हटा दिया है और 30 दिनों के लिए इन प्रतिबंधों से ढील दी है. इससे पहले वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को कहा था कि अमेरिका जल्द ही समुद्र में टैंकरों में फंसे ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटा सकता है. इस कदम का उद्देश्य ईरान द्वारा स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने के कारण बढ़ती कीमतों को कम करना है।  फॉक्स बिजनेस नेटवर्क के साथ एक इंटरव्‍यू में क्रिस राइट ने कहा कि कुछ ही दिनों में, तीन या चार दिनों के भीतर, वह तेल बंदरगाहों पर पहुंचना शुरू हो जाएगा, जिसके बाद तेल की बढ़ती कीमतों को कम किया जा सकेगा. उन्‍होंने कहा कि मौजूदा प्रतिबंधों के कारण ईरान की कच्चे तेल के निर्यात की क्षमता सीमित हो गई है, जिससे तेल का भंडार बाजारों तक पहुंच नहीं पा रहा है।  ईरान से प्रतिबंध हटाया  अमेरिका ने समुद्र में फंसे ईरानी तेल टैंकरों को छूट दी है. अब ये तेल टैंकर एशिया के बंदरगाहों पर आसानी से पहुंच सकते हैं. अमेरिका ने 1 महीने यानी 19 अप्रैल तक इसमें छूट दी है।  गौरलब है कि वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण जलमार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरान की कार्रवाइयों के बाद कीमतों में भारी उछाल आया है. प्रतिबंध हटाने से आपूर्ति की समस्‍या खत्‍म हो सकती है।  गंभीर संकट का समाना कर सकती है दुनिया ऊर्जा अधिकारियों ने बाजार के दबाव को कम करने और इन आपूर्तियों पर निर्भर अन्य क्षेत्रों के लिए ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए तेल की सप्‍लाई बनाए रखने पर जोर दिया है. इस बीच, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख फातिह बिरोल ने कहा है कि खाड़ी देशों से तेल और गैस की आपूर्ति बहाल करने में 6 महीने तक का समय लग सकता है. फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्‍यू में बिरोल ने चेतावनी दी कि दुनिया इतिहास के सबसे गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर सकती है।  इसके अलावा, सऊदी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान से संबंधित आपूर्ति में रुकावटें अप्रैल के अंत तक जारी रहती हैं, तो तेल की कीमत 180 डॉलर प्रति बैरल या उससे भी अधिक हो सकती है. अनुमानों के अनुसार, 180 डॉलर प्रति बैरल की दर पर अमेरिकियों को 7 डॉलर प्रति गैलन से अधिक भुगतान करना होगा। 

ईरान-इजरायल तनाव के कारण मुंबई में घर खरीदना होगा महंगा

मुंबई मुंबई में प्रॉपर्टी की कीमतें पहले से ही आसमान छू रहीं हैं और अब इनके रेट्स में और तेजी आ सकती है.  Anarock Group की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि मुंबई और उसके आसपास के इलाकों (MMR) में घरों की कीमतें बढ़ सकती हैं. इसका मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में चल रहा तनाव है, जिसकी वजह से निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सामान को लाने-ले जाने का खर्च और कच्चे माल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं।  रिपोर्ट के मुताबिक, ऊंची इमारतों को बनाने का खर्च पहले ही करीब ₹50 प्रति वर्ग फुट तक बढ़ चुका है. जानकारों का मानना है कि बिल्डर्स अब इस बढ़े हुए खर्च की भरपाई घर खरीदारों से करेंगे, जिसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो बजट होम या मध्यम आय वर्ग के घर तलाश रहे हैं।  निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख इनपुट्स की कीमतों में भी तीखी वृद्धि देखी गई है. स्टील की कीमतें लगभग 20 प्रतिशत बढ़कर ₹62 से ₹72 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई हैं, जबकि हॉट रोल्ड कॉइल की कीमतें ₹51 से ₹56 प्रति किलोग्राम के बीच बनी हुई हैं, जिनमें आगे और बढ़ोतरी की आशंका है।  खाड़ी देशों में उत्पादन में कटौती के चलते एल्युमीनियम की कीमतें ₹3.5 लाख प्रति टन तक जा पहुंची हैं, जिसका उपयोग इमारतों के बाहरी हिस्सों और मेट्रो स्टेशनों जैसे बुनियादी ढांचे में प्रमुखता से होता है. साथ ही, सड़क निर्माण के लिए अनिवार्य बिटुमेन की कीमतें भी बढ़कर ₹48 से ₹51 प्रति किलोग्राम हो गई हैं।  लॉजिस्टिक्स में आ रही हैं बाधाएं लागत में इस अप्रत्याशित वृद्धि का सबसे बड़ा कारण लॉजिस्टिक्स में आने वाली बाधाएं हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बाधित होने के कारण शिपमेंट्स को अब ‘केप ऑफ गुड होप’ के लंबे रास्ते से भेजा जा रहा है, जिससे समुद्री मार्ग की दूरी 6,000 से 10,000 समुद्री मील बढ़ गई है और डिलीवरी में 10 से 20 दिनों की देरी हो रही है. इस बदलाव ने प्रति कंटेनर माल ढुलाई की लागत में ₹1.5 से ₹3.5 लाख की बढ़ोतरी कर दी है. इसके अलावा, ₹1 लाख प्रति टन के पार पहुंचे समुद्री ईंधन के ऊंचे दाम, युद्ध अधिभार (War surcharges) और बढ़ते बीमा प्रीमियम ने डेवलपर्स की वित्तीय चुनौतियों को और अधिक गंभीर बना दिया है।  

राशन कार्ड धारकों को अप्रैल में मिलेगा तिगुना अनाज, सरकार का अहम फैसला

नई दिल्ली सरकार गरीबी रेखा के नीचे आने वाले सभी लोगों को मुफ्त में राशन मुहैया कराती है। इस बीच केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने देश के सभी राशन कार्ड धारकों को अप्रैल महीने में तिगुना अनाज देने का ऐलान किया है। केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने इसकी जानकारी दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है, ‘अप्रैल में सभी लाभार्थियों को तीन महीने (अप्रैल, मई और जून 2026) का राशन एक साथ मिलेगा। इसके लिए सभी लाभार्थी अपनी नजदीकी राशन दुकान से निर्धारित समय पर राशन प्राप्त कर सकते हैं।’ आपको बता दें कि सरकार ने फिलहाल इसके पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया है। 41 लाख फर्जी राशन कार्ड खत्म इससे पहले सरकार ने मंगलवार को संसद को बताया कि वर्ष 2025 में 41.41 लाख अपात्र राशन कार्ड खत्म किए गए। राज्यसभा में खाद्य राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभानिया ने बताया कि हरियाणा में सर्वाधिक लगभग 13.43 लाख राशन कार्ड, राजस्थान में 6.05 लाख, उत्तर प्रदेश में 5.97 लाख, पश्चिम बंगाल में 3.74 लाख और मध्य प्रदेश में 2.60 लाख अपात्र राशन कार्ड खत्म किए गए। बंभानिया ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में प्रौद्योगिकी के उपयोग के परिणामस्वरूप सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अपात्र राशन कार्डों को खत्म करने में सफलता हासिल की है। उनके अनुसार, वर्ष 2025 में कुल 41.41 लाख फर्जी राशन कार्ड खत्म किए गए, जबकि 2024 में यह संख्या 48.85 लाख और 2023 में 41.99 लाख थी। बंभानिया ने बताया कि पीडीएस में चल रहे सुधारों के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राशन कार्ड और लाभार्थियों के आंकड़ों का पूरी तरह डिजिटलीकरण किया जा चुका है। देश की लगभग सभी उचित मूल्य की दुकानों (एफपीएस) को खाद्यान्न वितरण के लिए इलेक्ट्रॉनिक ”प्वाइंट ऑफ सेल” (ईपीओएस) उपकरणों की स्थापना के माध्यम से स्वचालित किया गया है। इसके अलावा, 99.2 प्रतिशत लाभार्थियों को आधार से जोड़ा जा चुका है और 98.75 प्रतिशत खाद्यान्न वितरण आधार आधारित बायोमेट्रिक सहित डिजिटल प्रमाणीकरण के माध्यम से किया जा रहा है। मंत्री ने कहा, “पीडीएस का डिजिटलीकरण दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से किया जा रहा है, ताकि वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित हो सके और खाद्यान्न की चोरी आदि का समाधान किया जा सके।”

BSNL के प्राइवेटाइजेशन पर सरकार ने दी बड़ी अपडेट

 नई दिल्‍ली बीएसएनएल को लेकर बुधवार को एक बड़ी जानकारी सामने आई. केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लोकसभा में भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के प्राइवेटाइजेशन की किसी भी संभावना से इनकार करते हुए कहा कि सरकारी दूरसंचार ऑपरेटर पब्लिक सेक्‍टर की ही कंपनी है।  केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बीएसएनएल के प्राइवेटाइजेशन का तो कोई सवाल ही नहीं उठता. BSNL भारत की जनता की है और भारत की जनता के लिए है. सिंधिया ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्‍व में सरकार BSNL को मजबूत करने और उसकी टेलीकॉम क्षमताओं का विस्‍तार करने पर फोकस कर रही है।  बीएसएनल के पास थे दो विकल्‍प  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के लीडरशिप में प्राइवेटाइजेशन का कोई मुद्दा नहीं है, बीएसएनएल देश की जनता की सेवा के लिए है. बीएसएनएल के 4G रोलआउट को लेकर सरकार के नजरिए को समझाते हुए सिंधिया ने कहा कि कंपनी के पास दो विकल्प थे- या तो ग्‍लोबल कंपनियों से टेलीकॉम सेक्‍टर की चीजें खरीदें या स्वदेशी क्षमताएं डेवलप करे।   उन्होंने कहा कि बीएसएनएल ने अन्‍य कंपनियों की तरह, दक्षिण कोरिया, फिनलैंड, स्वीडन या चीन में स्थित अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों से उपकरण खरीदकर 4जी नेटवर्क का निर्माण नहीं किया है, बल्कि खुद के उपकरण बनाए हैं।  ग्‍लोबल लेवल पर भारत का 4G डिजिटल स्टैक  सिंधिया ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने साहसिक फैसला लेते हुए कहा कि हम सिर्फ सेवाएं ही नहीं देंगे, बल्कि उपकरण भी बनाएंगे. विश्व में पहली बार, केवल चार देश दूरसंचार उपकरण बनाते हैं, और प्रधानमंत्री की बदौलत, भारत का 4G डिजिटल स्टैक अब एक उपकरण निर्माता के तौर पर वैश्विक मंच पर पहुंच चुका है।  5G से पहले 4G नेटवर्क पर फोकस बीएसएनएल उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री द्वारा सितंबर 2025 में किया गया था. सिंधिया ने कहा कि पहले बीएसएनएल के 8 करोड़ 55 लाख कस्‍टमर्स थे और अब यह संख्या 9 करोड़ 27 लाख हो गई है. हम 5जी को जल्द से जल्द शुरू करने के लिए 4G तकनीक को भी आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन हमें पहले 4G को स्थिर करना होगा. इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी राज्यसभा में बीएसएनएल के पुनरुद्धार के बारे में बात की थी। 

16 अमेरिकी मिलिट्री जेट्स के तबाह होने से ईरान जंग में अमेरिका को हुआ भारी नुकसान, F-35 और F-15 भी शामिल

वाशिंगटन  ईरान जंग में अमेरिका को बहुत गहरी चोट लगी है. यह एक ऐसा जख्म है, जिसे डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका जमाने तक याद रखेंगे. जी हां, ईरान युद्ध की शुरुआत से अब तक अमेरिका के 16 मिलिट्री जेट्स तबाह यानी नष्ट हो चुके हैं. इनमें ड्रोन और लड़ाकू विमान भी शामिल हैं. इसमें एक नया नाम एफ-35 फाइटर जेट का भी जुड़ गया है. इसे ईरान ने हिट किया है. इसके कारण इस विमान की इमरजेंसी लैंडिंग हुई है और इसे नुकसान पहुंचा है. इन नुकसान को देखकर लगता है कि बहुत कुछ खोकर भी ईरान ने युद्ध में अमेरिका को खून के आंसू रुला दिए हैं. ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध 20 दिन से जारी है. 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने एक साथ मिलकर ईरान पर अटैक किया था. उस अटैक में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे. तब से ही यह ईरान जंग जारी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के साथ जंग शुरू होने के बाद से कम से कम 16 अमेरिकी सैन्य विमान नष्ट हो गए हैं. इनमें 10 MQ-9 रीपर ड्रोन शामिल हैं. इन्हें ईरान की गोलीबारी में मार गिराया गया है. अमेरिका के कई ऐसे विमान भी हैं, जिनमें क्रू मौजूद था और वे दुर्घटनाओं या हमलों में नष्ट हो गए. दावा किया गया कि सबसे अधिक नुकसान दुर्घटनाओं की वजह से हुआ. बताया गया कि कुवैत में तीन F-15 लड़ाकू विमान ‘फ्रेंडली फायर’ यानी अपनी ही सेना की गोलीबारी में गिर गए, जबकि एक KC-135 टैंकर विमान ईंधन भरने के ऑपरेशन के दौरान नष्ट हो गया, जिसमें सवार सभी छह क्रू सदस्यों की मौत हो गई. इसके अलावा सऊदी अरब के एक एयरफ़ील्ड पर ईरानी मिसाइल हमले में पांच KC-135 विमान क्षतिग्रस्त हो गए. हालांकि, ईरानी पक्ष का दावा है कि फ्रेंडली फायर नहीं, बल्कि उनके अटैक में अमेरिकी लड़ाकू विमान नष्ट हुए हैं। ईरान जंग में अमेरिका को गहरे जख्म मिले अब तक ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम ने युद्ध के दौरान केवल बिना पायलट वाले ‘रीपर’ ड्रोन को ही सफलतापूर्वक निशाना बनाया है. इनमें से कम से कम नौ ड्रोन को हवा में ही मार गिराया गया, जबकि एक अन्य ड्रोन जॉर्डन के एक एयरफ़ील्ड पर बैलिस्टिक मिसाइल का शिकार हो गया. इसके अलावा दो अन्य ड्रोन अलग-अलग दुर्घटनाओं में नष्ट हो गए. ‘रीपर’ ड्रोन को विशेष रूप से अत्यधिक जोखिम वाले मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है, क्योंकि इनमें कोई पायलट नहीं होता और इन्हें बदलने का खर्च भी अपेक्षाकृत कम होता है। ईरान जंग में अब भी अमेरिका का पूरा कंट्रोल नहीं ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को बेअसर करने के लिए अमेरिका और इजराय के शुरुआती प्रयासों के बावजूद पूरी तरह से हवाई वर्चस्व हासिल करना मुश्किल साबित हुआ है. ईरानी हिट के बाद एक अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान को मध्य-पूर्व में स्थित एक सैन्य अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी. विमान का पायलट सुरक्षित बच गया और बताया जा रहा है कि उसकी हालत स्थिर है। अमेरिका ने कबूला सच अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि ईरानी हवाई क्षेत्र पर उनका नियंत्रण अभी भी सीमित है. जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ के चेयरमैन डैन केन ने कहा कि अमेरिका के पास फिलहाल केवल कुछ ही जगहों पर हवाई बढ़त हासिल है. उसका नियंत्रण पूरे क्षेत्र के बजाय केवल कुछ ही इलाकों तक सीमित है। आखिर अमेरिका को हुए नुकसान की वजह क्या विशेषज्ञों का कहना है कि ऑपरेशन्स का पैमाना और उनकी तीव्रता ही शायद अधिक नुकसान की वजह हो सकती है. रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स के पूर्व अधिकारी पीटर लेटन ने कहा कि इस अंतर की वजह शायद कहीं अधिक जोरदार कोशिशें हो सकती हैं. हर दिन पहले के मुकाबले अधिक उड़ानें भरी जा रही हैं. यह नुकसान अमेरिकी सेना के सामने मौजूद चुनौतियों को उजागर करता है. खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम मार्गों को सुरक्षित करने के प्रयासों में, जहां सक्रिय हवाई सुरक्षा प्रणालियां अभी भी एक बड़ा खतरा बनी हुई हैं ईरान के निशाने पर आया एफ-35 जी हां, एफ-35 को अमेरिका का सबसे एडवांस फाइटर जेट माना जाता है. ईरान जंग में अब यह भी सेफ नहीं रहा. गुरुवार को ईरान की जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी F-35 स्टील्थ फाइटर जेट को निशाना बनाया गया. इसके बाद उसे मजबूरन इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना तब हुई जब यह पांचवीं पीढ़ी का घातक फाइटर जेट ईरान के ऊपर कॉम्बैट मिशन पर उड़ान भर रहा था. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बताया कि ईरानी फायर के बाद विमान को मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी एयरबेस पर आपात लैंडिंग करनी पड़ी. फिलहाल, इस फाइटर जेट के नुकसान की जांच की जा रही है।

खर्ग द्वीप बना टारगेट? होर्मुज खुलवाने के लिए ट्रंप की नई चाल, समझें अमेरिका की पूरी रणनीति

वॉशिंगटन ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच युद्ध दिन पर दिन और भीषण रूप ले रहा है। अब दोनों तरफ से ही तेल रिफाइनरियों पर हमले किए जा रहे हैं। ईरान की जवाबी कार्रवाइयों में कतर, सऊदी अरब, यूएई और इजरायल में तेल-गैस केंद्रों पर मिसाइलों और ड्रोन बरसाए गए हैं। वहीं, ईरान दुनियाभर को तेल सप्लाई करने वाले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोलने के लिए सहमत नहीं हो रहा है। इस बीच, अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज खुलवाने के लिए बड़ा प्लान तैयार कर रहे हैं। एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ईरान को होर्मुज खोलने पर मजबूर करने के लिए खर्ग द्वीप पर कब्जा करने की रणनीति तैयार कर रहे। कितना अहम है ईरान का खर्ग द्वीप खर्ग द्वीप वह द्वीप है, जो ईरान का ऑयल हब यानी कि तेल का मुख्य केंद्र माना जाता है। यहीं से ईरान को 90 फीसदी तेल मिलता है। यह द्वीप ईरान के दक्षिणी तट से करीब 25-30 किलोमीटर की दूरी पर है। पर्शियन गल्फ के बीच में होने की वजह से इसकी लोकेशन भी रणनीतिक है। हाल ही में ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी सेना ने इस द्वीप पर हवाई हमले भी किए थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने यहां पर 90 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया था, जिसमें मिसाइल स्टोरेज बंकर, एयर डिफेंस सिस्टम शामिल थे। खर्ग पर कब्जे की रणनीति एक्सियोस ने शुक्रवार को चार ऐसे सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी, जिन्हें इस मामले की जानकारी है, कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का दबाव बनाने के लिए, ईरान के खर्ग द्वीप पर कब्जा करने या उसकी घेराबंदी करने की योजनाओं पर विचार कर रहा है। खर्ग द्वीप पर कब्जा करने का ऑपरेशन, जो तट से 15 मील दूर स्थित है और ईरान के 90 फीसदी कच्चे तेल के निर्यात को प्रोसेस करता है, अमेरिकी सैनिकों को सीधे तौर पर हमला करने की जद में ला सकता है। इसलिए, ऐसा कोई भी ऑपरेशन तभी शुरू किया जाएगा जब अमेरिकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरान की सैन्य क्षमता को और कमजोर कर देगी। व्हाइट हाउस की सोच की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा, “हमें हमलों के जरिए ईरानियों को और कमजोर करने, द्वीप पर कब्जा करने, और फिर उन्हें पूरी तरह से अपने शिकंजे में लेकर बातचीत के लिए इस्तेमाल करने में लगभग एक महीने का समय लगेगा।” और अधिक सैनिक भेज सकता है अमेरिका अगर ऐसे किसी ऑपरेशन को मंजूरी मिलती है, तो उसके लिए और ज्यादा सैनिकों की जरूरत होगी। तीन अलग-अलग मरीन यूनिट इस क्षेत्र की ओर रवाना हो चुकी हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि व्हाइट हाउस और पेंटागन जल्द ही और भी ज्यादा सैनिक भेजने पर विचार कर रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ”वह चाहते हैं कि होर्मुज खुला रहे। अगर ऐसा करने के लिए उन्हें खर्ग द्वीप पर कब्ज़ा करना पड़ा, तो वह होगा। अगर वह तटीय आक्रमण करने का फ़ैसला करते हैं, तो वह भी होगा। लेकिन अभी तक ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है।” उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप समेत हर राष्ट्रपति के कार्यकाल में, संघर्ष वाले इलाकों में हमारे सैनिक हमेशा ज़मीन पर मौजूद रहे हैं। मुझे पता है कि मीडिया में इस बात को लेकर काफी चर्चा होती है, और मैं इसके पीछे की राजनीति भी समझता हूं, लेकिन राष्ट्रपति वही करेंगे जो सही होगा।

ममता का बड़ा ऐलान: मासिक भत्ते से साधेंगी महिलाओं और युवाओं को, ये हैं 10 वचन

कोलकाता पश्चिम बंगाल चुनावों के लिए राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी कर दिया है। ‘दीदी के 10 वचन’ नाम से चुनावी वादों का ऐलान करते हुए मुख्यमंत्री और टीएमसी की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने महिलाओं और बेरोजगारों के लिए मासिक भत्ते का ऐलान किया है। ममता ने कहा है कि ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के तहत, सामान्य वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये मिलेंगे, जबकि SC/ST वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1,700 रुपये मिलेंगे। उन्होंने आगे कहा कि जो युवा बेरोजगार हैं, उन्हें पॉकेट मनी के तौर पर हर महीने 1,500 रुपये मिलेंगे। घोषणा पत्र का ऐलान करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि मैं बंगाल के लोगों से अपील करती हूं कि वे एकजुट हों और बंगाल को बचाने के लिए BJP के खिलाफ लड़ें। इस घोषणापत्र को जनता-केंद्रित रोडमैप बताते हुए बनर्जी ने कहा कि पार्टी के वादों का मकसद उस चीज का मुकाबला करना है जिसे उन्होंने केंद्र सरकार का बढ़ता दखल बताया। उन्होंने लोगों से अपील की कि बंगाल की पहचान की रक्षा करनी है। ममता ने कहा, “पश्चिम बंगाल में ‘अनाधिकारिक रूप से राष्ट्रपति शासन लागू’ किया गया, क्योंकि भाजपा जानती है कि आगामी विधानसभा चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ेगा”  

उत्तम नगर विवाद: ओवैसी बोले- हालात ऐसे कि मुसलमान न घर में सुरक्षित, न त्योहार मना पा रहे

नई दिल्ली दिल्ली के उत्तम नगर में होली पर तरुण की हत्या के बाद उपजे तनाव और ईद से पहले कुछ मुसलमानों के कथित तौर पर इलाके छोड़ने पर सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान अपना आक्रोश जाहिर करते हुए कहा कि ये नौबत आ गई है कि देश में 19-20 करोड़ मुसलमान खुशी से ईद भी नहीं मना सकते हैं और इसके लिए उन्हें कोर्ट का सहारा लेना पड़ रहा है। खबर के मुताबिक ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद में एक सभा को संबोधित करते हुए दिल्ली के उत्तम नगर में कायम तनाव को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा और पूछा कि यह कानून का कैसा शासन है। उन्होंने अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि ईद मनाने के लिए मुसलमानों को कोर्ट जाना पड़ रहा है। हम रोजेदार हैं, ईद मनाने दो: ओवैसी ओवैसी ने कहा, ‘कई मुसलमान अपना घर छोड़कर चले गए उत्तम नगर से। कोर्ट को जाना पड़ा। दिल्ली हाई कोर्ट को जाकर कहना पड़ा ईद तो मनाने तो सुकून से। हम रोजेदार हैं, ईद तो मनाने दो हमको। ये नौबत आ गई भारत में। मोदी विश्व गुरु की बात करते हैं, 19-20 करोड़ मुसलमान ईद नहीं मना सकते खुशी से। हमको धमकियां दी जा रही हैं। हमको ईद मनाने के लिए कोर्ट जाना पड़ा। बताओ बीजेपी, आरएसएस, मोदी, ये कौन सा कानून का शासन है।’ उन्होंने आगे कहा कि अफसोस की बात है कि ईद मनाने के लिए कोर्ट जाना पड़ा और हम कहते हैं कि हम तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे। हाई कोर्ट में क्या हुआ? उत्तम नगर में ईद के अवसर पर सांप्रदायिक हिंसा की आशंका को दूर करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था। अदालत को बताया गया था कि कुछ लोग ईद पर ‘खून की होली’ की धमकियां दे रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने दिल्ली पुलिस को ईद से रामनवमी तक पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था करने को कहा। पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी को भी ऐसी शरारत करने की अनुमति न दी जाए, जिससे कोई ‘अप्रिय स्थिति’ पैदा होने की आशंका हो। उत्तम नगर में क्यों है तनाव दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दौरान दो पड़ोसी परिवारों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद के बाद हुई हिंसा में 26 वर्षीय युवक तरुण की मौत हो गई थी, जिसमें एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया है जबकि कई अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है। तरुण की हत्या के बाद से इलाके में तनाव का माहौल है। भड़काऊ भाषण और पोस्टर लहराते हुए कई वीडियो वायरल हुए थे। भारी जुटान भी हुआ था।

कर्नाटक में गैस संकट अलार्म: उत्पादन पर खतरा, ‘मांग 50 हजार, सप्लाई 1 हजार’ – सिद्धारमैया का बड़ा बयान

बेंगलुरु कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने बेंगलुरु में कमर्शियल एलपीजी की गंभीर कमी को लेकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में उन्होंने बताया कि शहर में होटल, रेस्तरां, कैटरिंग सेवाओं और पीजी आवासों की दैनिक मांग लगभग 50 हजार सिलेंडर की है, लेकिन 1,000 सिलेंडर प्रतिदिन ही मिल पा रहे हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के हालिया निर्देश के कारण घरेलू LPG को प्राथमिकता देने से कमर्शियल सप्लाई में भारी कमी आई है। इससे बेंगलुरु के कई व्यवसाय प्रभावित हुए हैं और कुछ होटल-रेस्तरां पहले ही बंद होने लगे हैं। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की ओर से आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देने के कदम उठाए जाने का जिक्र किया, लेकिन मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर अभी बहुत बड़ा है। यह संकट मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से जुड़ा हुआ है, जहां ईरान और अन्य देशों के बीच तनाव बढ़ने से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित हुआ है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अहम रास्ता है, जिसके बंद होने से भारत में एलपीजी आयात प्रभावित हुआ है। भारतीय ध्वज वाले 2 एलपीजी जहाज एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी ने सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार किया और 92,712 मीट्रिक टन LPG लेकर भारत पहुंचे। फिर भी, स्थानीय स्तर पर कमर्शियल उपयोगकर्ताओं को राहत नहीं मिल पाई है। बेंगलुरु के होटल एसोसिएशन और अन्य संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई तो सैकड़ों दुकानें बंद हो सकती हैं, जिससे लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। LPG संकट कितना गंभीर कर्नाटक सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए हैं, जिसमें कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई के आदेश शामिल हैं। राज्य ने होटलों को बिजली या वैकल्पिक ईंधन पर स्विच करने की सलाह दी है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में केंद्र से कमर्शियल और ऑटो एलपीजी के लिए तत्काल अतिरिक्त आवंटन की मांग की है। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु जैसे महानगर में कमर्शियल LPG पर निर्भरता बहुत अधिक है और इसकी कमी से शहर की खाद्य सेवा व्यवस्था ठप हो सकती है। केंद्र सरकार ने प्रभावित निर्यातकों के लिए 497 करोड़ रुपये की राहत पैकेज की घोषणा की है और वैश्विक साझेदारों से ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास कर रही है। यह संकट न केवल बेंगलुरु बल्कि पूरे कर्नाटक में व्यवसायों, रोजगार और दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि राज्य सरकार आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रही है, लेकिन केंद्र से तत्काल समर्थन जरूरी है। अगर स्थिति सुधरती नहीं तो होटल, रेस्तरां और अन्य सेवाओं में बड़े पैमाने पर बंदी हो सकती है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित होगा। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल से इस समस्या का जल्द समाधान निकालने की जरूरत है।

मिडिल ईस्ट संकट पर भारत की पहल: पीएम मोदी ने 5 देशों से बात कर शांति और सुरक्षा पर दिया जोर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच शांति बहाल करने को लेकर लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने ओमान, मलेशिया, फ्रांस, जॉर्डन और कतर के नेताओं से फोन पर बातचीत की। इन वार्ताओं में पीएम मोदी ने भारत की स्थिति स्पष्ट की, जिसमें बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देकर तनाव कम करने व शांति-स्थिरता बहाल करने पर जोर दिया गया। उन्होंने ऊर्जा ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की, क्योंकि ऐसे हमले क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाते हैं और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करते हैं। प्रधानमंत्री ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित आवागमन के महत्व पर बल दिया। ओमान के सुल्तान से बातचीत में उन्होंने ईद की अग्रिम शुभकामनाएं दीं और ओमान की संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा दोहराई। साथ ही, भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी में ओमान के प्रयासों की सराहना की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दिल्ली में मीडिया ब्रीफिंग में इन बातचीतों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इन 5 विश्व नेताओं से पश्चिम एशिया के संघर्ष पर भारत का रुख रखा, जिसमें डी-एस्केलेशन के लिए संवाद और कूटनीति को सबसे जरूरी बताया। ऊर्जा ढांचे पर हमलों को अस्वीकार्य करार देते हुए कहा गया कि ऐसे कदम एनर्जी सप्लाई को और अस्थिर बनाते हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित नौवहन सभी नेताओं ने समर्थन दिया, क्योंकि यह वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम है। ये प्रयास भारत की सक्रिय भूमिका को दर्शाते हैं, जहां वह संघर्ष को रोकने और शांति बहाल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ तालमेल कर रहा है। सुरक्षित वापसी के प्रयास जारी इस बीच, पश्चिम एशिया में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। संयुक्त सचिव (गल्फ) असीम महाजन ने बताया कि 18 मार्च को रियाद में हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मृत्यु की दुखद सूचना मिली है। मंत्रालय ने शोक व्यक्त किया और परिवार से गहरा संवेदना जताई। भारतीय मिशन रियाद में परिवार के संपर्क में है और शव को भारत लाने के लिए सऊदी अधिकारियों से समन्वय कर रहा है। कुल 6 भारतीय नागरिक विभिन्न घटनाओं में मारे गए हैं, जबकि एक लापता है। सऊदी अरब, ओमान, इराक और यूएई में भारतीय मिशन लापता व्यक्ति की तलाश व मृतकों के शवों को लाने के लिए स्थानीय अधिकारियों से संपर्क में हैं। इसके अलावा, समुद्री हमलों से प्रभावित भारतीय चालक दल के सदस्यों की सुरक्षित वापसी हो रही है। एमटी सफेसी विष्णु के 15 भारतीय क्रू सदस्यों को इराक से बचाया गया, जो कल सऊदी अरब से भारत लौटने वाले हैं। इसी तरह, एमवी एमकेडी व्योम पर 16 और एमटी स्काईलाइट पर 8 भारतीय नाविकों सहित 24 को ओमान से बचाकर पहले ही भारत पहुंचाया जा चुका है। ये घटनाएं क्षेत्र में बढ़ते तनाव को दर्शाती हैं, जहां भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा और वापसी को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। विदेश मंत्रालय लगातार निगरानी और तालमेल में लगा हुआ है।  

अवैध सट्टेबाजी पर शिकंजा: 300 ऐप्स-वेबसाइट्स बंद, सरकार का बड़ा कदम

नई दिल्ली ऑनलाइन जुआ और सट्टा खिलाने वाली वेबसाइट्स पर भारत सरकार ने एक बार फिर डिजिटल स्ट्राइक कर दी है। एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने अवैध ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म पर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है, और अपनी ताजा कार्रवाई में लगभग 300 वेबसाइट्स और मोबाइल ऐप्स को ब्लॉक कर दिया है। सरकार ने उन प्लेटफॉर्म पर शिकंजा कसा है जो ऑनलाइन स्पोर्ट्स बेटिंग, कसीनो-स्टाइल गेमिंग और पीयर-टू-पीयर सट्टेबाजी सिस्टम जैसी कई तरह की गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल थे। इससे पहले जनवरी में, केंद्र सरकार ने 242 अवैध सट्टेबाजी और जुआ खिलाने वाली वेबसाइट्स को ब्लॉक किया था। सरकार के एक बयान के अनुसार, यह कार्रवाई कई तरह के गैर-कानूनी प्लेटफॉर्म्स को निशाना बनाकर की गई, जिनमें ऑनलाइन स्पोर्ट्स बेटिंग वेबसाइट्स, स्लॉट्स, रूलेट और लाइव डीलर टेबल्स जैसे गेम्स देने वाले वर्चुअल कसीनो, और पीयर-टू-पीयर मार्केटप्लेस के तौर पर काम करने वाले बेटिंग एक्सचेंज शामिल हैं। अधिकारियों ने सट्टा और मटका जुआ नेटवर्क्स के साथ-साथ असली पैसों वाले कार्ड और कसीनो गेमिंग एप्लीकेशन्स के खिलाफ भी कार्रवाई की। यह कार्रवाई, अवैध ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियों पर अंकुश लगाने और लोगों को वित्तीय धोखाधड़ी तथा लत के जोखिमों से बचाने के व्यापक प्रयासों का एक हिस्सा है। अब तक 8,400 ऐसी वेबसाइट्स और ऐप हुए ब्लॉक आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने अब तक लगभग 8,400 ऐसी वेबसाइट्स और एप्लिकेशन को ब्लॉक कर दिया है। इनमें से एक बड़ा हिस्सा, लगभग 4,900 प्लेटफॉर्म्स को ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम लागू होने के बाद हटाया गया; इस अधिनियम ने डिजिटल गेमिंग और सट्टेबाजी की गतिविधियों को रेगुलेट करने के लिए कानूनी ढांचे को मजबूत किया। यह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, जिसके तहत अधिकारी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कड़ी नजर रखेंगे और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करेंगे। सरकार ने यूजर्स से यह भी आग्रह किया है कि वे सतर्क रहें और किसी भी अनाधिकृत सट्टेबाजी या जुआ खिलाने वाली सर्विस से दूर रहें।  

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